शनिवार, 30 जनवरी 2016

भारत में 21 प्रतिशत मुस्लिम अपराधी

अपने 60  साल   के शासन  ने  कांग्रेस ने  भारतीयों   को सेकुलरज्म   का ऐसा रोग  लगा दिया कि  उनकी  बुद्धि   में लकवा मार गया  , वह  मान बैठे हैं कि अपराधियों   का  कोई  धर्म  नहीं होता , और  मुसलमान  कभी  अपराधी या  आतंकी  नहीं   हो  सकते , फिर भी जब  मुस्लिम अपराधी  पकड़े  जाते हैं   तो भी  अखबार  और टी  वि  वाले उनको मुस्लिम   की  जगह एक  समुदाय   कहते हैं  , ऐसे बहुत कम   लोग हैं जो  निडर होकर आतंकियों   को  मुसलमान    कह देते हैं  ,

भारत सरकार,गृह मंत्रालय के संलग्‍नक कार्यालय नई दिल्‍ली स्थित राष्‍ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो(National Crime Records Bureau )द्वारा    भारत की पुलिस के आधुनिकीकरण हेतु भारतीय पुलिस को सूचना प्रौद्योगिकी में सशक्‍त करने का अधिदेश राष्‍ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो को दिया गया है ।

रा.अ.रि.ब्‍यू.(N.C.R.B.)देश भर में "अपराध अपराधी सूचना प्रणाली (अ.अ.सू.प्र.)के अंतर्गत प्रत्‍येक राज्‍य अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो एवं जिला अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो में 762सर्वर-आधारित कम्‍प्‍यूटर सिस्‍टम स्‍थापित कर चुका है,ताकि अपराध,अपराधियों से संबंधित राष्‍ट्रीय स्‍तर डाटा बेस को व्‍यवस्थित किया जा सके .

ब्यूरो के अनुसार देश की जेलों में सजा काट रहे कुल कैदियों (3.85 लाख) में से केवल मुस्लिम अपराधियों की संख्या 53 हजार 836 (21 प्रतिशत) हैं | इसमें भी उत्तर प्रदेश के जेलों में ही मुस्लिम कैदियों की संख्या देश में सबसे ज्यादा है, उसके बाद बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल का स्थान है।

सिख अपराधियों की संख्या (सजायाफ्ता और विचाराधीन) 4 प्रतिशत है।
और देश की जनसंख्या में दो प्रतिशत की भागीदारी करने वाले क्रिश्चियन का (सजायाफ्ता और विचाराधीन) कैदियों आंकड़ा भी   4 प्रतिशत है।
जबकि भारत की कुल जनसंख्या का 84 प्रतिशत हिन्दू हैं ,फिर भी अपराधों में संलिप्तता का औसत प्रतिशत 7% के आसपास हैं ,क्योंकि भारत के जेलों में बंद (सजायाफ्ता और विचाराधीन) कैदियों में से 7.4 फीसदी हिन्दू हैं .

यानी कहने का मतलब यह कि देश का हरेक 16वां व्यक्ति मुस्लिम है, लेकिन देश में होने वाले 100 अपराधों में 21 अपराध मुस्लिमों द्वारा  ही   किये  जाते हैं   .
अपराधों   के  इन आंकड़ों   को देख कर  देशभक्त  हिन्दुओं   को  सचेत  होने की  जरुरत है  , क्योंकि  जिस  देश की कुल आबादी  का  लगभग  पांचवां   भाग अपराधी ( मुसलमान ) हो ,उसकी  सुरक्षा और अखंडता हमेशा ही  खतरे में  बनी  रहेगी  , और यह खतरा और भी  गंभीर   हो  जायेगा  जब इस बात को मान  लिया जाये  कि अपराधियों और आतंकियों   का  कोई  धर्म  नहीं   होता। जबकि यह एक अकाट्य  सत्य है कि अपराध और मुसलमान पर्यायवाची  शब्द हैं  . ब्यूरो   में  दिए  गए  मुसलमानों  द्वारा  किये गए अपराधों   का वर्गीकृत  विश्लेषण  करने से पता  चलता है कि मुसलमान  , चोरी  , डकैती   ,लूट ,हत्या  , बलात्कार जैसे सामाजिक  अपराधों   के  आलावा  पाकिस्तान   के लिए  जासूसी  , देश में तोड़फोड़  ,सम्प्रदायवादी  दंगे , बम विस्फोट  जैसे  अपराधों  में संलग्न  पाये  गए  हैं  ,जो   स्पष्ट  रूप   में देश   द्रोह   है , लेकिन  जीतनी  भी राजनीतिक  पार्टियां हैं   वह मुस्लिम  वोटों  के लिए  सेकुलरिज्म  की आड़  में इस सत्य  को  स्वीकार   नहीं  करती  , क्योंकि  जो भी  यह बात  कहता , या लिखता है ,उस पर सम्प्रदायवादी , होने का लेबल  लगा दिया जाता है  .
ऊपर से  मुस्लिम  विद्वान  और  नेता सेकुलरिज्म का  ऐसा  पाखण्ड   करते  है  ,कि  जैसे यही लोग  सेकुलरज्म के ठेकेदार है. जबकि  वास्तव में  मुसलमान  सेकुलरिज्म   के दुश्मन  है  , इस  बात की  सत्यता   की  जाँच  करने के लिए किसी भी  मुस्लिम  से पूछिये  कि वह किसी भी  ऐसे मुस्लिम  देश का  नाम  बताये  जहां सेकुलर  सरकार हो , और   गैर  मुस्लिमों  को  वही  अधिकार  प्राप्त हों  , जो वहां के मुस्लिमों    को  हों ,
क्या सेकुलरिज्म का ठेका सिर्फ  हिन्दुओं   ने  ले  रखा है? यह  अनादि काल हमारा  देश  है  , हम  सेकुलरिज्म के बहाने मुस्लिम  तुष्टिकरण और उनकी  राष्ट्र विरोधी चालों   को  सफल  नहीं  देंगे

 जय हिन्दू  राष्ट्र !

 नोट - यह  महत्वपूर्ण  जानकारी   हमारे   जागरूक पाठक  और मित्र  श्री जितेंद्र  प्रताप  सिंह  जी  ने  भेजी    थी , इसके लिए उनका  आभार  . (212)

http://ncrb.gov.in/

शनिवार, 23 जनवरी 2016

इस्लाम की असहिष्णुता

वेद  में बड़ी  ही शिक्षाप्रद   बात  कही  है  , जो उन  लोगों  पर  लागू  होती  है  , जो  किसी न किसी  कारण से मुसलमान बन  गए हैं , वेद  मन्त्र  है ,
"अन्धं  तमः प्रविशन्ति ये अविद्यामुपासते "यजुर्वेद -40:9 अर्थात  ,जो लोग अविद्या (अज्ञान )  की उपासना  करते  हैं  , वह अज्ञान के  ऐसे अँधेरे  कुएं  में   गिर  जाते  हैं  ,जिस  से निकलना  कठिन है .
यह  बात  इस्लाम  की धर्म परिवर्तन   की  नीति  और  तरीके  पर बिलकुल  लागु  होती  है  , जिसे   जानने  के  बाद  हमें स्वीकार  करना पड़ेगा कि सचमुच  इस्लाम  धर्म  नहीं  बल्कि अज्ञान  का एक ऐसा  अँधेरा  कुंआ  है   , जिस में  गिर  जाने  पर  बाहर निकलने के लिए  निडरता  और इस्लाम  की  असलियत को समझना  बहुत  जरुरी  है .क्योंकि  आज  भारत  में  जितने  भी मुसलमान हैं  , उनके पूर्वज इस्लाम के गुणों से प्रभावित  होकर  नहीं बल्कि  मजबूरी  में  मुसलमान   बने   थे  . या  आजकल वह  भोली भाली हिन्दू  लड़कियां  मुस्लमान   बन  जाती  हैं  , मक्कार  मुस्लिम  लड़कों   के फरेबी  प्रेम जाल  में फस  जाती  है  .
यही  नहीं  यह  भी  पता  चला है  कि सेकुलरिज्म  और  भाईचारा   की आड़  में  कुछ  ब्लॉगर  , लेखक ,और धूर्त  इस्लाम के प्रचारक हिंदुओं  गुमराह  करने में  लगे  हुए  हैं  , और वह धर्म परिवर्तन  के  लिए ऐसे   लोग  चुनते  हैं  जिन्हें  न तो  हिदू गर्न्थों  का ज्ञान  है  और  न इस्लाम  की दोगली निति   का  पता है , ऐसे ही लोगों  की  आँखें खोलने के  लिए  ही यह  लेख   दिया   जा रहा  है
2-कुरान का पाखण्ड 
जिस तरह  से ढोंगी , पाखंडी  , धोखेबाज  और  मक्कार  लोगों  के अज्ञान  का  फायदा उठाकर अपनी लुभावनी  बातों  के  जाल में फसा  कर ठग  लेते  हैं  , उसी तरह कुरान में  कुछ  ऎसी आयतें  भी  देदी  गयीं  हैं  ,  जिन से इस्लाम  का असली खूंखार रूप ढक  जाये और  अज्ञानी  लोग  इस्लाम  के प्रति   आकर्षित  हो जाएँ  , जिस से उन लोगों  का  धर्म परिवर्तन  करने  में आसानी  हो  जाये  , अक्सर चालाक  मुल्ले  इस्लाम की तारीफ  करने के लिए  इन्ही  आयतों  का सहारा  लेते   हैं  ,

"तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म  और हमारे  लिए  हमारा  धर्म " सूरा -काफिरून 109 :6

" कह दो यह ( इस्लाम ) अल्लाह  की तरफ  से एक सत्य  है , अब  जो चाहे  इसे कबूल  कर  ले , और  जो चाहे इस  से इंकार  कर दे "
 सूरा - अल कहफ़ 18 :29

 "धर्म  के  बारे  में   किसी  पर  जबरदस्ती   नहीं  है " सूरा - बकरा  2 :256

कुरान  ऎसी  आयतें  पढ़  कर  जो  लोग  इस्लाम को भी धर्म समझ  लेते  हैं  , वह नहीं जानते  कि हाथी  की तरह इस्लाम के खाने  के और दिखने के दांत  अलग   है  ,और  कोई  इस्लाम के अंध कूप में  में गिर  जाये  तो  बाहर  निकलना  सरल  नहीं  है ,क्योंकि इस्लाम ने  धर्म परिवर्तन  के बारे में  दोगली  नीति   अपना  रखी  है  ,

3-इस्लाम परित्याग या  इरतिदाद 

शरीयत के कानून  में  इस्लाम  का परित्याग  करने  के  लिए अरबी  का पारिभाषिक " इरतिदाद - ارتداد "   इस्तेमाल  किया  जाता  है. जिसका अर्थ अंगरेजी में "Apostasy "  होता  है  . यह शब्द अरबी की  मूल शब्द  "रिद्दाह - ردة‎  "  से बना  है  , जिनके अर्थ " पलट  जाना (relapse )  और  वापसी  (regress)   भी  होते हैं  . और  जो  भी  मुसलमान  इस्लाम  छोड़ता  है ,और  वापस अपने  पुराने धर्म  में या किसी और धर्म  में  जाता  है , उसे " मुरतिद -مرتد   "  कहा  जाता है। और  जिस  देश में इस्लामी  हुकूमत  होती  है  वहाँ  मूरतिद  को  मौत की सजा  दी  जाती  है  ,  और जहाँ इस्लामी  कानून  नहीं   चलता   है  वहाँ  के मुल्ले उस मूर्तिद  की  हत्या करावा  देते  है  .क्योंकि मुहम्मद  ने  हदीसों  में  मुरतिद  की  हत्या  करने  का आदेश  दिया  गया  है  , जिसका पालन  करना  हर मुस्लिम   का  फर्ज  माना   गया  है  .

http://www.thereligionofpeace.com/Quran/012-apostasy.htm

4-इरतिदाद के चार प्रकार 

इस्लाम  को त्यागने यानी 'इर्तिदाद'  के चार प्रकार बताये  गए  हैं , जिनके  लिए शरीयत में  मौत  की सजा  का  विधान  है ,

1.ईमान  में इरतिदाद -"रिदाह फिल अक़ायद -الردة في الاعتقاد  "( Apostasy in beliefs)
 जैसे किसी  को अल्लाह का  पुत्र या अवतार मानना  और अल्लाह  के समान  उसकी इबादत  करना  ,

.2.शब्दों  में इरतिदाद "रिदाह फ़िल कलिमात -  الردة في الكلمات  " (Apostasy in words )
अल्लाह  के  रसूल   की बुराई करना या मजाक उड़ाना  .

3.कामों से इरतिदाद "रिदाह फिल अमल - الردة في العمل  " (Apostasy in action )

जैसे  कुरान  को नीचे पटक देना , जलाना  या  फाड़ना ,रसूल  की तस्वीर  बनाना   मूर्ति पूजा करना ,किसी देवी देवता  को प्रणाम  करना इत्यादि

4.विधि में चूक से इर्तिदाद "रिदाह अन तरीक अल सहू -  الردة عن طريق السهو   " (Apostasy by omission)

इसमे चूक से स्वधर्म त्याग करना  भी शामिल  है  , जैसे  नमाज छोड़  देना इस्लाम  में  बताये गए कानून और  नियमों  का पूरी तरह से पालन  नहीं करना  . इन सभी बातों  के आधार पर मुल्ले मौलवी  तय  करते  हैं  कि किसी  मुस्लिम  ने  इर्तिदाद  किया  है अथवा नहीं ,और उसे " मुर्तिद " घोषित   करके मौत की  सजा  देना  चाहिए  या  नहीं  . मुस्लिम  देशों  में वहाँ  की अदालतें खुद मूर्तिद  को मौत   की सजा  दे  देती  हैं  .  लेकिन  भारत में  यहाँ  के मुफ़्ती और मुल्ले  " मूर्तिद "  की  हत्या  करने    वाले   को इनाम देने  की  घोषणा कर  देते  हैं ,जिस से इस्लाम  के विरुद्ध  लिखने और  बोलने   वाले  विदेशों में  जाकर  बस  गए है  . जैसे "सलमान रश्दी "और " तस्लीमा नसरीन "आदि  .

5-इस्लाम  की असहिष्णुता 

" जो लोग चाहते  है कि  जैसे  वह काफिर  हैं  , तुम भी  काफिर  हो जाओ , तो तुम ऐसे  लोगों  को अपना मित्र नहीं  बनाना  ,  बल्कि उनको  जहाँ  पाओ  पकड़ो  और उनको  क़त्ल  कर  दो " सूरा -निसा 4 :89

"और  जो लोग तुम्हारे  धर्म में  बुराई  निकालें  तो उन से  लड़ाई  करते  रहो ,इस  से  वह ऐसा  करने  से बाज  आयेंगे "सूरा -तौबा 9 :12
"और  तुम में से  जो  भी अपना  धर्म (इस्लाम )  छोड़  कर फिर  से काफिर  हो  जाये तो समझो  उसका  किया  गया  सब   कुछ  बेकार   हो  गया  , और  वह  सदा  के  लिए  जहन्नम   में रहेगा  "सूरा -बकरा 2 :217
"जिन लोगों  ने इस्लाम  के  बाद फिर  से  कुफ्र  अपनाया  तो  उनको  कुछ नहीं  मिलेगा  , और अगर वह तौबा कर  लें  तो  उनके लिए अच्छा  होगा  , फिर भी यदि  वह तौबा  से  मोड़ लें  ,तो उनकी  कोई  मदद  नहीं होना  चाहिए " सूरा-तौबा  9 :74

" तुम इस्लाम के विरोधी  इन गुटों से पूछो ,कि क्या तुम अल्लाह की आयतों और उसके रसूल  का  मजाक उड़ा रहे हो ? यानि तुमने  इस्लाम अपनाने  के बाद कुफ्र  किया  है  . इसलिए  हैम  एक  गिरोह  को  माफ़ भी  कर देंगे ,तो दूसरे  को यातना  देकर ही   रहेंगे  . क्योंकि ऐसा  करना  अपराध   है " सूरा -तौबा 9 :66

6- इस्लाम  का अंधा कानून 

इस्लामी  देशों  में  इस्लाम  छोड़ कर  कोई  अन्य  धर्म   स्वीकार  करने  पर  हमेशा  मौत    की सजा  दी  जाती  है  , या  हत्या  कर  दी  जाती है , क्योंकि ,
शरीयत  के  कानून  के अनुसार  यदि  कोई  स्वस्थ चित्त  वाला  वयस्क   पुरुष या स्त्री  अपनी  इच्छा  से  इस्लाम  छोड़  कर  कोई अन्य धर्म  अपना   लेता  है  , तो  इस अपराध  के लिए उसका  खून  बहा  देना  चाहिए, और  यदि वहाँ  इस्लामी   हुकूमत  हो तो जज  या काजी ,और  काबिले  का  मुखिया  उसकी  सजा  को  पूरा  करे  . क्योंकि  रसूल  का  हुक्म  है इस्लाम  त्यागने  और  मुसलमानों  की  जमात  छोड़ने वालों  को मौत  की  सजा    देना  चाहिए  , जैसा  इन हादिसों  में   कहा  गया  है ,

(See al-Mawsooâah al-Fiqhiyyah, 22/180. )

1."अनस  ने  कहा कि इब्ने अब्बास  ने  बताया ,रसूल  ने  कहा  है जो  भी  व्यक्ति अपना  धर्म ( इस्लाम )  बदलेगा  उसे  मार  डालो "
‏ "‏ مَنْ بَدَّلَ دِينَهُ فَاقْتُلُوهُ ‏"

'Whoever changes his religion, kill him.'"

 सुन्नन नसाई - जिल्द 5 किताब 37 हदीस 4069 

2.अब्दुल्लाह  बिन  मसूद  ने  कहा  कि रसूल  का आदेश  है  ,जो  भी  इस्लाम  और  जमात   को छोड़  दे  तो उसको  क़त्ल  कर  दो "

 وَالتَّارِكُ لِدِينِهِ الْمُفَارِقُ لِلْجَمَاعَةِ ‏"‏ ‏.‏  "

"one who leaves his religion and splits from the Jama`ah.should be killed”

इब्ने  माजा -  जिल्द 3  किताब  20  हदीस 2534 

7-इस्लाम छोङने  की सजा 

सही  बुखारी  को हदीस   की सबसे प्रमाणिक  हदीस   की  किताब  माना  जाता  है  , क्योंकि इस्लामी  देशों  में  उसी  के आधार  पर शरीयत  के  कानून   बनाये  गए  हैं  , इसी  किताब  में  इस्लाम  छोड़ कर  अन्य धर्म अपनाने     वाले  को क़त्ल  करने  का   आदेश   दिया  गया  है , नमूने  के लिए  चार  हदीसें  दी  जा रही  हैं   ,

1-इकिरिमा ने   बताया  कि रसूल का  हुक्म  है ,यदि  कोई मुस्लिम  इस्लाम  छोड़  देता  है  ,तो बिना  किसी  शक  के   उसको  क़त्ल  कर  दो  , और  यदिकोई इस्लाम  अपनाता   है  तो उस से  कोई सवाल  नहीं  करो "
 सही बुखारी - जिल्द 4  किताब 52 हदीस 260 

2-इकिरिमा  ने  कहा  कि रसूल  ने कहा  है  ,जोभी इस्लाम   का त्याग  करता है  ,  उसे  क़त्ल  कर  दिया  करो "

 सही बुखारी - जिल्द 9 किताब 84 हदीस 57

3-अबू  मूसा  ने मुआज   को  बताया  कि एक  मुस्लिम  ने   यहूदी  धर्म अपना  लिया  है  . यह सुनते  ही  मुआज बोला  , मैं तब तक  शांत   नहीं  बैठूँगा  जब तक उसको  क़त्ल   नहीं  कर देता  , क्योंकि रसूल  का यही  आदेश  है  "

सही बुखारी - जिल्द 9 किताब 89 हदीस 271

4-रसूल  ने  कहा  कि कुछ ऐसे  मुर्ख  है  , कि इस्लाम  उनके  गले  नीचे  नहीं  उतरता , और ऐसे  ही  लोग इस्लाम   छोड़  देते है  , इसलिए तुम्हें  जहाँ  भी ऐसे लोग  मिलें  उनको  खोज खोज  कर  क़त्ल  कर  दिया  करो  , क़ियामत   के दिन तुम्हे  इसका उत्तम इनाम  मिलेगा  "

सही बुखारी - जिल्द 9 किताब 84 हदीस 64

8-इस्लाम त्यागने पर फतवा 

इस्लाम की पक्षपाती नीति और दादागीरी इस  बात  से  पता  चलती  है  ,कि यदि  कोई अपना  धर्म त्याग कर इस्लाम  काबुल  करता  है  तो कोई आपत्ति   नहीं  करता  ,लेकिन अगर  कोई मुस्लिम इस्लाम  को त्याग कर अन्य धर्म अपना  लेता  है  ,तो मुल्ले उसे " मुरतिद " घोषित   करके क़त्ल  के योग्य ठहरा  देते  है  . इसके  प्रमाण  के  लिए मिस्र  के  काहिरा  की इस्लामी यूनिवर्सिटी "जामअ तुल अज़हर शरीफ - جامعة الأزهر (الشريف) "के  मुफ्ती "अब्दुल्लाह  मिशदाद - عبد الله المشد‎ "  ने 23  नवम्बर सन  1978  में  उस  समय  जारी किया था ,जब एक  मुस्लिम  ने इस्लाम  को छोड़  कर ईसाई धर्म अपना  लिया  था  .  और  कुछ  लोगों  ने  मुफ़्ती  से इस्लाम  त्यागने की सजा  के  बारेमे  प्रश्न  किया  था , उसी  फतवे  के मुख्य अंशों   का  हिन्दी अनुवाद  दिया   जा  रहा  है  ,

सवाल  - इस व्यक्ति  के  बारे  में  शरीयत  का  कानून  क्या  कहता  है ? और क्या उसके बच्चे  मुसलमान  माने  जायेगे ? या  ईसाई ?

जवाब -शरीयत  के अनुसार  इस व्यक्ति  ने "इरतिदाद " किया  है  . और अगर  वह  तौबा ( repent )  नहीं करता  तो शरई  कानून  के मुताबिक उसको क़त्ल  कर देना  चाहिए  .  जहां  तक बच्चों  का सवाल  है ,तो  अभी वह  नाबालिग  हैं   . और यदि  बालिग  हो जाने  पर  वह  भी तौबा नहीं  करते  और  मुसलमान  नहीं  बनते  तो उनको  भी  क़त्ल  कर  देना चाहिए  . यही कानून  है  .
प्रमाण  के  लिए  उस फतवा  की लिंक और  इमेज   दी  जा रही  है    .

http://www.councilofexmuslims.com/index.php?topic=24511.0

http://en.wikipedia.org/wiki/File:Rechtsgutachten_betr_Apostasie_im_Islam.jpg

9-इस्लाम छोङने   वाले 

चूँकि इस्लाम  तर्कहीन  , निराधार और कपोल  कल्पित  मान्यताओं  पर  ही टिका  हुआ  है  ,  जिसे  ईमान  के  नाम  पर  मुस्लिम  बच्चों   पर थोप  दिया   जाता  है  , जिस से  उनकी सोचने समझने की  बुद्धि  कुंद  हो  जाती  है और  बड़े  होकर  वह  कट्टर जिहादी  बन  जाते  हैं  , लेकिन जब  भी  किसी बुद्धिमान  को इस्लाम   के भयानक और  मानव  विरोधी  असली रूप  का  पता  चल  जाता  है  ,वह  तुरंत इस्लाम  के अंधे  कुएं  से  बाहर  निकल   जाता  है  . आयुसे ही  कुछ सौभाग्य शाली  प्रसिद्ध  लेखकों  ,मानवता  वादी   का  संक्षिप्त  परिचय   दिया   जा  रहा  है  ,
1-इब्ने वर्राक (ابن وراق‎  )-इनका  जन्म  पाकिस्तान  में  हुआ  था  . यह  उनका  असली  नाम  नहीं   है  , इनके  नाम  का अर्थ  है " कागज  बनाने  वाले  का बेटा "  क्योंकि उनके पिता  कागज  बनाते  थे  . इन्होने  इस्लाम  की पोल  खोलने  के  लिए  कई किताबें और  लेख  प्रकाशित  किये हैं  ,इनको  दूसरा  सलमान रश्दी   भी  कहा  जाता  है  .  इनकी साईट  है SecularIslam.org

2-तस्लीमा नसरीन(  তসলিমা নাসরিন  ) -इनका जन्म बंगला देश  में 25 अगस्त सन 1962  में  हुआ  था  . यह इस्लाम  छोड़कर  नास्तिक ( Atheist)  बन  गयी , इनकी  किताब "लज्जा "पर मुल्लों  ने   इनकी हत्या   करवाने  का  फतवा  दिया  था ,इनकी  साईट  का  पता  है ,

TaslimaNasrin.com

3-अली सीना ( علي سينا )-इनका  जन्म  ईरान  में हुआ था  , यह  भी इस्लाम से आजाद  होकर  नास्तिक (Atheist) बन  गए और इस्लाम  के महान आलोचक  और  लेखक  हैं ,इनकी  किताबों और लेखों  के  कारन  इनको  कई  बार  गिरफ्तार  भी  किया  गया  था  . लेकिन इनके तर्कों और  प्रमाणों के सामने  मुल्ले   निरुत्तर  हो  गए  ,इन की  साईट  का नाम  है , FaithFreedom.org

4-डॉ ,परवीन दारबी (پروین دارابی  )-इनका  जन्म  ईरान  की राजधानी तेहरान  में सन 1941  में  हुआ था  , यह  भी इस्लाम  को ठुकरा  कर   नास्तिक  बन  गई  और  अमेरिका  में बस  वहाँगयी महिलाओं  के अधिकारों की रक्षा  के  लिए  प्रयास  रत  हैं   . इन्होने  भी  कई किताबें  और  लेख  प्रकाशित  किये जिन में  इस्लाम  को बेनकाब  किया   गया  है   इनकी  साईट  है .Homa.org

I5-नौनी दरवेश ( نوني درويش‎  )-इनका   जन्म  सन  1949  में मध्य एशिया  में  हुआ  था  . इन्होने  मिस्र में अमेरिका  और  मिस्र की तरफ से एक  मानव अधिकार रक्षक  की तरह  काम  किया  था  , इन्होने  भी  इस्लाम  छोड़  कर ईसाई धर्म  अपना  लिया   है  . इनकी प्रसिद्ध  किताब  "  Now They Call Me Infidel  " पर भी फतवा   जारी   हुआ है ,)-NonieDarwish.com

6-अनवर शेख -इनका  जन्म एक  कश्मीरी  पंडित  के घर  हुआ था  , जिसे  बल पूर्वक  मुसलमान  बना  दिया   था इन्होने अरबी  फ़ारसी  के साथ इस्लाम  का  अध्यन  किया था  . लेकिन  इस्लाम    की  हकीकत   पता  होजाने  पर  यह  हिन्दू  बन  गए  और अपना नाम अनिरुद्ध ज्ञान शिखा रख  लिया  . इनकी  साईट  का  नाम   है
www.islam-watch.org

इसके आलावा   इनके  लेख  इस  साईट http://islamreview.org/anwarshaikh/author.html   में  और यू ट्यूब  में  भी   हैं  जिनका  शीर्षक  है ,Islam can't co-exist with other religions" Anwar Shaikh. Part 1/3 ..

 www.youtube.com/watch?v=_HNNgKiGyWE

10-इस्लाम सवालों से डरता  है 
जिस तरह  से  हरेक  बड़े से बड़ा अपराधी और भ्रष्ट   नेता  भी  खुद  को निर्दोष  और साफ सुथरे चरित्र   वाला   व्यक्ति  होने  का दावा   किया  करता है , लेकिन जब   निष्पक्ष  जाँच   की  जाती  है तो पूछे  गए सवालों   से घबरा  जाता  है  , क्योंकि सवालों  से  उसके  निर्दोष  होने  के दावे  का भंडा  फुट   जाने  का  डर   लगता  है  , इसी  तरह  इस्लाम  भी  लोगों  से  सिर्फ  ईमान  लाने   पर जोर  देता  है  , क्योंकि  इस्लाम में अल्लाह ,रसूल  और  कुरान  की सत्यता  के बारे में  सवाल करना  और वाद विवाद करने  को  गुनाह  माना  जाता  है  . इसी   लिए  मुल्ले  मुस्लिम  बच्चों   को  कुरान  का व्याकरण सम्मत अर्थ  सिखाने  की जगह कुरान  को तोते  की  तरह रटने पर बल  देते  हैं ,क्योंकि मुल्लों  को डर  लगता है कि कुरान के सही अर्थ जानकर  लोग  सवाल  करेंगे ,और इस्लाम की  असलियत पता  होने  पर  इस्लाम  छोड़  देंगे  ,  जैसा  कि खुद  कुरान  में  लिखा  है

"तुम से पहले भी एक गिरोह ने ऐसे ही सवाल किये थे ,और जब तुम उनके सवालों का जवाब न दे पाए ,तो वह इस्लाम से इंकार वाले हो गए "

सूरा -मायदा 5 :102 

और यही  कारण  है  कि जब  भी कोई  इस्लाम   की बेतुकी ,तर्कहीन , अमानवीय ,और अवैज्ञानिक बातों  के  बारे  में  सवाल  करता है ,या  उंगली उठाता  है  ,तो  मुसलमान  उत्तर देने या खंडन  करने की  बजाय लड़ने और दंगे करने  पर उतारू  हो   जाते हैं  ,इसलिए सवाल करने  वालों  से निपटने  के लिए  कुरान में पहले  से ही  यह आदेश  दे  दिया गया  है  ,कि ,
"और जब भी तुम्हारा कुफ्र वालों से किसी तरह का सामना हो जाये ,तो तुम उनकी गर्दनें मारना शुरू कर देना ,और इस तरह उनको कुचल देना "
सूरा -मुहम्मद 47 :4 

इसीलिए दुनिया भर  के सभी मुस्लिम नेता  , गुंडे , दादा ,स्मगलर ,डॉन  और आतंकवादी कुरान की  इसी नीति का  पालन  करते  हैं,जिसे  रसूल की सुन्नत माना  जाता  है  . जो देश और  हिन्दू धर्म  के लिए खतरा  है  ,हम सिर्फ तर्क  से ही  इनका  मुकाबला  करें  तो बहुत होगा  .जैसे महर्षि दयानंद  ने  अपनी विश्व  प्रसिद्द  पुस्तक  " सत्यार्थ प्रकाश " में  इस्लाम  का  तर्क पूर्ण  खंडन  करके  मुल्ले  मौलवियों   को निरुत्तर  करके  सिद्ध  कर दिया  है  कि दुनिया  को डराने वाला  इस्लाम खुद सबसे  बड़ा  डरपोक  है ,  जिसमे सत्य  का सामना  करने   की  हिम्मत  नहीं  है  . इसलिए यदि  सभी  हिन्दू  सेकुलरिज्म  का  चक्कर  छोड़  कर  निडरता  से  इसलाम  की विस्तारवादी और अमानवीय  नीतियों  का भंडाफोड़  करते रहें  तो कोई शंका नहीं कि इस देश  से  इस्लामी  आतंक   का  सफाया   नहीं  हो  जाये  ,  केवल  साहस  की  जरुरत  है ,लोगों  को इस्लाम की असलियत   के बारेमें  सप्रमाण   जानकारी  देते  रहिये यही समय की  मांग  है  ,सिर्फ  पाकिस्तान  को कोसने से  कुछ नहीं  होगा  , जैसे रात  दिन  शक्कर -शक्कर  जपने  से  मुंह  मीठा  नहीं  हो सकता  .

(200/166)

मंगलवार, 22 दिसंबर 2015

इस्लामी वयस्क परीक्षण !

जिस समय टी .वी . के सभी चैनलों पर बजट सम्बन्धी चर्चा खबरें आ रही थीं , उसी समय बीच में 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में चलती बस में एक 23 साल की लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार के मामले में छठवें आरोपी के खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड ने गुरुवार आरोप तय करने का आदेश दे दिया .चूँकि यह घटना इतनी ह्रदय विदारक थी कि सारा भारत उन सभी नरराक्षसों को मौत की सजा देने की मांग कर रहा था .यद्यपि इस अपराध के लिए सभी अभियुक्त सामान रूप से दोषी हैं , लेकिन सरकार ने उनके नाम छुपा रखे थे , इन सभी पापियों ने जो दुष्कृत्य किया था , उसे देख कर हमने पहले ही लिख दिया था कि इतना नीच काम कोई मुसलमान ही कर सकता है , और बाद में यह बात सही निकली .क्योंकि अदालत ने छटवें आरोपी पर जितने भी अभियोग लगाये हैं , सभी काम मुहम्मद की सुन्नत है ,जिसे मुसलमान अपराध नहीं मानते ,
अब मुसलमान उस उस दुष्ट को नाबालिग साबित करने के लिए तरकीबें निकाल रहे हैं , ताकि उसे मौत की सजा से बचाया जा सके .यद्यपि इस बात में कोई शंका नहीं है कि सभी अपराधों की प्रेरणा इस्लामी तालीम से मिलती है , लेकिन आप किसी भी मुल्ले मौलवी से यह बात कहेंगे तो वह यही उत्तर देगा कि इस्लाम तो सदाचार , संयम , और परहेजगारी की तालीम देता है . इस्लाम में बलात्कार को गुनाह माना जाता है , इत्यादी ,
चूंकि मुख्य मुद्दा बलात्कार और छठवें मुस्लिम आरोपी के नाबालिग होने का है ,इसलिए इस्लामी सदाचार का पाखंड और असलियत के साथ इस्लाम के अनुसार बालिग (Adult )होने की जाँच कैसे होती है , इसका तरीका इस लेख में दिया जा रहा है ,
1-इस्लाम का ढोंगी सदाचार 
इस्लाम से पहले अरब के कुछ भाग में ईसाई धर्म का प्रभाव था . और कई ईसाई साधू ऐसे भी होते थे ,जो संयम का पालन करते हुए जीवन व्यतीत करते थे . मुहम्मद का गुरु और खदीजा का चचेरा भाई वरका बिन नौफल भी एक ब्रह्मचारी था . शायद उसी से प्रेरित कर मुहम्मद ने यह आयत कुरान में जोड़ी होगी , जिसमे मुसलमानों को यह उपदेश दिया गया है ,
"और जिन्हें विवाह करने का अवसर प्राप्त न हो ,उन्हें चाहिए कि वे तब तक संयम का पालन करें ,जब तक अल्लाह उन्हें अनुग्रह से संपन्न कर दे " सूरा -अन नूर 24:33

(let those who cannot find a match keep chaste till Allah give them independence by His grace. 24:33)

( इस आयत में संयमी के लिए अरबी में "अफीफ عفيف    " शब्द दिया गया है ,जिसका अंगरेजी में अर्थ "Chaste " होता है .दुसरे शब्दों को ऐसे लोगों को ब्रह्मचारी , अरबी में " ताहिरطاهر  "और अंगरेजी में पवित्र और संतpure-saintly"भी कह सकते हैं )लेकिन इस आयात को पढ़कर यह नहीं समझना चाहिए कि कुरान कुंवारे लोगों को संयम और कामवासना से बचने की शिक्षा देता है .बल्कि कुरान मुस्लिम युवकों को लडाकियों को पकड़ कर उन से बलात्कार करने की प्रेरणा देता है , जैसा कि इन आयतों के कहा गया है ,
 2-औरतें पकड़ो बलात्कार करो 
औरतें और अय्याशी इस्लाम के असली आधार है , इतिहास साक्षी है . कि मुहम्मद के साथी जिहादी सबसे पहले औरतें ही लूटते थे . यही नहीं हर मुसलमान मरने के बाद जन्नत में औरतें ही चाहता है .चूँकि भारत में जिहाद नहीं हो सकती ,इसलिए मुसलमान किसी अकेली लड़की को पकड़ लेते हैं . और बलात्कार कर देते हैं ,क्योंकि कुरान पकड़ी गयी औरत से सहवास करने की आज्ञा देता है , कुरान में कहा है ,
"अपनी पत्नियों के उन लौंडियों के साथ सम्भोग करना कुछ भी निंदनीय नहीं है ,जो तुम्हारे हाथों पकड़ी जाएँ "सूरा -अल -मआरिज 70:30
(Captives    your right hand  posess)
"अपनी पत्नियों के अलावा उन लौंडियों के साथ ,जो उनके कब्जे में हों ,सहवास करना निंदनीय नहीं है "सूरा -अल मोमिनून 23:6
"हमने तुम्हारी लौंडियाँ हलाल कर दी हैं ,जो अल्लाह ने तुम्हें माले गनीमत में दी हैं " सूरा -अहजाब 33:50
"पत्नियों के सिवाय तुम्हारे लिए तुम्हारी लौंडियाँ भी हलाल हैं ,अल्लाह सब चीज की खबर रखने वाला है " सूरा -अह्जाब 33:52
इस्लामी परिभाषा में हर प्रकार से हथियाई गयी , पकड़ी गयी , अगवा की गयी हो या खरीदी हुई सभी के लिए अरबी में एक ही शब्द "السرية " है .और ऐसी औरत की इच्छा के विरुद्ध सम्भोग करना इस्लाम में अपराध नहीं माना जाता है .(Islam allows a man to have intercourse with  capt  woman, whether he has a wife or wives or he is not married. A Captiive woman with whom a man has intercourse is known as a sariyyah )

लेकिन मुहम्मद ने ऐसे सहवास को बलात्कार नहीं कहते हुए अरबी में "मलिकत ईमानुकुम ملكت ايمانكم" और " मलिकत यमीनुकुम ملكت يمينكم" शब्द का प्रयोग किया है .और पकड़ी गयी औरत को रखैली माना है .जिनके साथ बलपूर्वक सहवास करना मुसलमानों का अधिकार है .देखिये विडिओ

Sex allowed with Slave Women in Islam_ Dr Zakir Naik.flv


http://www.youtube.com/watch?v=Bj74kfA5UQY

यही बात हदीस में भी कही है , सही मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3432
3-वयस्क की परिभाषा 
इस्लाम के अनुसार 15 साल की आयु होने पर लडके और लड़की को वयस्क माना जाता है .इस आयु को " बुलूग بُلوغ‎)" और ,आयु पूरा करने वाले को " बालिग  بالغ " कहा जाता है .इतनी आयु के लोग वयस्क ( Adult ) इसलिए माने जाते हैं , क्योंकि वह जिहाद के लिए उपयोगी होते हैं .
लड़का बालिग तब माना जाता है जब उसके श्रोणी के बाल निकलने लगें(grows pubic hair) , या शिश्न से वीर्य निकलने लगे .(has a nocturnal emission) और लड़की तब बालिग मानी जाती है जब उसका मासिक स्राव निकलने लगे .(when she  menstruates)यही बात फतवे में दी गयी है ,
Once you get semen you are baaaligh

"تحصل مرة واحدة السائل المنوي كنت الكبار  "

http://en.allexperts.com/q/Islam-947/2010/4/Adult-age.htm

4-वयस्कता का परीक्षण 
आज अदालत दिल्ली बलात्कार काण्ड छठवें (मुस्लिम)आरोपी के वयस्क होने का पता करने के लिए हाथ पैर मार रही है , कभी उसका जन्म प्रमाणपत्र खोज रही है कभी किशोर न्यालालय के आदेशानुसार धारा 3 के अधीन अभियुक्त की bone-ossification testकरवा रही है , लेकिन मार्च सन 627 में ही मुहम्मद ने एक ऐसी विधि खोज ली थी , जिस से मूर्ख व्यक्ति भी पता कर लेगा कि अभियुक्त बालिग है , अथवा नहीं .यह विधि हदीस में आज भी मौजूद है .इस हदीस के पीछे एक ऐतिहासिक घटना है .घटना इस प्रकार है , कि मदीना के पास "बनी कुरैजा " नामका एक यहूदी कबीला रहता था .मार्च सन 627 को मुहम्मद ने अपने जिहादियों के साथ उस कबीले पर अचानक धावा बोल दिया था जिसमे करीब 900 लोगों के सर काट कर हत्या कर दी गयी थी .मुहम्मद का आदेश था कि सभी बालिग पुरुषों को मार दिया जाये . और औरतों से बलात्कार करके उनको लौंडी बना लिया जाये .हदीस कहती है ,
1."कसीर इब्न अस्सायब ने कहा कि रसूल ने हम लोगों से कहा जाओ सभी बालिग़ मर्दों को मार डालो .पता करो जिन के नीचे के बाल दिखायी दें वह बालिग़ हैं , उन्हें क़त्ल कर दो . और जिनके नीचे के बाल नहीं निकले वह नाबालिग है , उनको जिन्दा छोड़ दो "

أَخْبَرَنَا الرَّبِيعُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَسَدُ بْنُ مُوسَى، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي جَعْفَرٍ الْخَطْمِيِّ، عَنْ عُمَارَةَ بْنِ خُزَيْمَةَ، عَنْ كَثِيرِ بْنِ السَّائِبِ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبْنَاءُ، قُرَيْظَةَ أَنَّهُمْ عُرِضُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ قُرَيْظَةَ فَمَنْ كَانَ مُحْتَلِمًا أَوْ نَبَتَتْ عَانَتُهُ قُتِلَ وَمَنْ لَمْ يَكُنْ مُحْتَلِمًا أَوْ لَمْ تَنْبُتْ عَانَتُهُ تُرِكَ ‏.‏

Sunan an-Nasa'i-Vol. 4, Book 27, Hadith 3459

2-"अतिय्या ने कहा कि बनू कुरैजा के जनसंहार के समय मैं मौजूद थे . लेकिन उस समय मेरे नीचे के बाल नहीं निकले थे . इसलिए मुझे नाबालिग मान कर जिन्दा छोड़ दिया गया था "

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ عَطِيَّةَ الْقُرَظِيِّ، قَالَ كُنْتُ يَوْمَ حُكْمِ سَعْدٍ فِي بَنِي قُرَيْظَةَ غُلاَمًا فَشَكُّوا فِيَّ فَلَمْ يَجِدُونِي أَنْبَتُّ فَاسْتُبْقِيتُ فَهَا أَنَا ذَا بَيْنَ أَظْهُرِكُمْ ‏.‏  "

Sunan an-Nasa'i-Vol. 4, Book 27, Hadith 3460

5-छठवें अभियुक्त के अपराध 

भले सेकुलर और मुसलमान उस छठवें अपराधी मुसलमान को बालिग नहीं मानें . लेकिन उसने जो जघन्य काम किये हैं उसके आगे मुहम्मद भी नाबालिग लगेगा .क्योंकि .. प्रमुख मजिस्ट्रेट गीतांजलि गोयल ने उस पर , गैंग रेप ,हत्या ,अपहरण , आप्रक्रतिक यौनाचार ,हत्या का प्रयास ,डकैती , सबूतों को नष्ट करने का प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगाये हैं .यही नहीं एक सब्जी विक्रेता को लूटने के मामले में उस पर लूटपाट का मामला भी चल रहा है .
हमें पूरा विश्वास है , यदि अदालत मुहम्मद की हदीस का पालन कर के छठवे आरोपी को बालिग़ मान लेती है , तो मुल्लों की हालत सांप छछूंदर जैसी हो जाएगी .

http://www.thereligionofpeace.com/muhammad/myths-mu-rape.htm

(200/92)

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2015

इस्लाम में नफ़रत की राक्षसी शिक्षा !

इस्लाम  की  बुनियाद नफ़रत पर टिकी   है ,और  ऐसा कहना   गलत  बिलकुल  नहीं   लगता   .  क्योंकि यदि  हम  इस्लाम  का इतिहास   देखें  तो यह बात शतप्रतिशत   सही  सिद्ध  होती  है  ,  यही नहीं    कुरान   में  ऐसी कई  आयतें  मौजूद हैं  जिनमे   मुस्लिमों  के  प्रति नफ़रत  की  शिक्षा   दी  गयी  है  . सब  जानते हैं कि  भारत   का विभाजन  नफरत   के कारण  हुआ  था  , और  कश्मीर  की  समस्या के पीछे    भी  मुसलमानों   की  हिन्दुओं   से नफ़रत ही  है  .
वास्तव  में  इस्लाम  ने  जन्म  लेते ही पूरे  विश्व को दो भागों  में  बाँट   दिया  है  . एक तरफ मुसलमान   और  दूसरी  तरफ  काफ़िर .
  . चूँकि   कुरान   में सभी  गैर  मुस्लिमों   को  इस्लाम  का  दुश्मन माना   गया है  ,इसलिए मुसलमान सभी  गैर  मुस्लिमों  से  नफ़रत  करने  लगे  . और जब  मुसलमानों  में भी  अनेकों  फिरके बन  गए  , और  हरेक  फिरका खुद  को सही  और दूसरे को गलत साबित   करने लगा तो सभी  फिरके के लोग  एक दूसरे से नफ़रत   करने लगे  , और  धीमे  धीमे   इस्लाम की  इस राक्षसी नफ़रत   की आग  ने सारे  इस्लामी  जगत   को अपनी  लपेट में ले लिया है  .
 फिरभी मक्कार  मुस्लिम  नेता बेशर्मी  से यही  कहते  रहते  हैं  , कि अल्लाह और इस्लाम  की नजर में  सभी  मनुष्य   समान   हैं  . और  इस्लाम  आपसी   भाईचारे  की  शिक्षा  देता  है .दुनिया  में इस से बड़ा झूठ  और कोई  नहीं   हो  सकता  , और मुसलमानों से बड़ा राक्षस और कोई नहीं  हो सकता  ,यही बात इस लेख  में प्रमाण सहित   दी  जा रही  है  ,


1-मस्जिदों  में नफ़रत  की शिक्षा 
चूँकि  मुसलमानों   के  लिए मस्जिदों   में जाकर  नमाज  पढ़ना  अनिवार्य   है  , और  नमाज के बाद  मुल्ले जो खुतबे  ( प्रवचन )   देते हैं ,उनमें  नफ़रत की  तालीम   दी  जाती   है , और हरेक फिरके  की  अलग अलग  मस्जिद  होती  है  , और  वहीँ  से नफ़रत के बीज  बोये   जाते है  ,अक्सर  मुल्ले  कहते  रहते हैं  कि  इस्लाम में भेदभाव नही होता है .लेकिन    यूपी के बरेलवी जमात के मस्जिदों में ये नोटिस दिखना अब आम बात हो गयी है ,इसका  एक   नमूना  देखिये  कि  इस  मस्जिद   में  क्या लिखा  है  ?
" मस्जिद  कमिटी  का खास  जरूरी  ऐलान ,
 वे मस्जिद सुन्नी  हनफ़ी  सहीहुल अक़ीदा लोगों  की  है  ,हुजूर  के फरमान  सहाबा  के तरीके ,गोसो  ख्वाजा मखदूम  पाक  ख़ुसूसन  मसले आला  हजरत  इमाम अहमद राजा  खान बरेलवी  के  पैरोकार  हैं  , यहाँ  पर  देवबंदी  , बहाबी  , तबलीगी  व्  दीगर अक़ीदा  के लोग इस मस्जिद  में  नहीं  आएं  , और अगर आते हैं  तो नतीजे के खुद  जिम्मेदार   होंगे  "
नोट- इसके ऊपर या  मस्जिद  की  किसी  दीवार   पर  इस्तेहार  लगाना या  स्टिकर लगाना  मना  है  
गौरतलब है की इस बरेलवी जमात के धर्मगुरु मौलाना तौकीर रजा है जिनके कदमो में अरविन्द केजरीवाल कदमबोशी करते है
नोट - इसकी  तस्वीर  देखिये

https://fbcdn-sphotos-e-a.akamaihd.net/hphotos-ak-prn2/1459209_513879902042340_1728005059_n.jpg

 . अब पाठक  गण  बताये  की  लोगों  में नफ़रत  कौन  फैलाता है  ? और  जो  मुस्लिम  नेता  भाईचारे  की  वकालत  करते  रहते हैं   वह  झूठे हैं  कि  नहीं  ? और जब   खुद  मुसलमानों   के फिरकों   में नफरत बढ़ जाती  है  तो  सीरिया जैसा  हाल  हो   जाता   है  .
http://realityofsecularism.blogspot.in/2013/11/blog-post_11.html


2-शियाओं   का  मांस  खाने  वाले  सुन्नी 
सीरिया  में  होने वाले  जन  संहार   के  पीछे  कोई  राजनीतिक    कारण  या  सीमा विवाद   नहीं  है  ,  बल्कि सुन्नियों   द्वारा गैर  सुन्नियों    से  नफ़रत   है  .सुन्नी  शियाओं   को गैर  मुस्लिम  और इस्लाम  और  रसूल  का  दुश्मन   मानते हैं   , जिनके बारे में  कुरान  में  लिखा है   " जो लोग अल्लाह के  रसूल  से लड़ते   हैं  , उनकी  सजा यही  है कि बुरी  तरह  क़त्ल   किये जाएँ  , या उनके  हाथ  पैर  विपरीत दिशाओं   में काट  दिए  जाएँ  " सूरा -अल  माइदा  5 :33 

इन   दिनों  सीरिया में सुन्नी मुसलमान  यज्दियों  और  शियाओं   का क़त्ल   करके उनका  सफाया   करने में लगे हुए है  , जिसके लिए सुन्नियों   के  अनेकों   आतंकी गिरोह   बन   गए हैं  ,  उन्हीं   से एक  का नाम  "अल कतायब  अल फारूक -  كتائب الفاروق‎ " है .जिसका  अर्थ  "The Farouq Brigades  "  होता   है  . इस  दल  के स्थापक  का  नाम  "अबू  सक्कार -  ابو سكٌار " है  , इस  दल   का उद्देश्य  पूरे  मध्य  एशिया  में  सुन्नी  इस्लामी  खिलाफत   करना  और  सभी  गैर सुन्नियों   का  सफाया   करना  है   , यह शियाओं  से इतनी  नफ़रत  करते हैं  क़ि मारे गए   शिया व्यक्ति  की  लाश  से  दिल  और कलेजा  निकाल  कर  खा जाते  है  , और इसकी  विडिओ   बना कर सब जगह मिडिया में अपलोड कर देते हैं    , कुछ  दिनों   पहले ही  यह  खबर   लोगों  को   पता  चली   है . कुछ   समय  पहले अबू सक्कार   ने शियाओं से   कहा  था  " कुत्तो   मैं  कसम  खाता  हूँ  कि मैं  तुम्हारे  दिल  और   कलेजे  को  खा  जाऊँगा  "

Sakkar rants: 'I swear we'll eat from your hearts and livers, you dogs'He then raises one of the organs to his mouth and takes a bite


"يا كلاب، أقسم أنني سوف يأكل قلوب وأكباد الخاصة بك  "

 यह कह कर अबू  सक्कार  ने  एक  मरे हुए  शिया    के  शरीर  के हिस्से  ऊपर  उठा कर  दिखाए और  उस   लाश  के  दिल और  कलेजे  चबा   लिए

लो देखो इन नरपिशाचों को । सीरिया में शियाओं का माँस खाते मुस्लिम ब्रदरहुड के कार्यकर्ता :-Photo-

https://fbcdn-sphotos-a-a.akamaihd.net/hphotos-ak-prn1/558946_578514115531314_477650372_n.jpg

यही  घटना विडिओ   में  भी दी   गयी  है (  कृपया दिल मजबूत  करके  इस विडिओ  के  देखें  )Video
(WARNING GRAPHIC Syria Rebel Cuts out Soldier's Heart and Eats It)

https://www.youtube.com/watch?v=xEQFmZrQAx8

3-नर मांस खाना इस्लामी  परंपरा 
अरब के लोग  इतने  क्रूर    निर्दयी  और राक्षसी  स्वभाव  के  थे  ,कि उनमे  युद्ध  में  मारे गए  शत्रुओं   के  शरीरों  को फाड़  कर  उनके  दिल   और  कलेजा   खा  जाने  की  परंपरा    थी  , ऐसा वह   दुश्मनों  से  बदला  लेने के लिए  करते  थे  . और ऐसा  करने  में अपनी  शान   समझते   थे  . उनकी  यह  पिशाची  परंपरा   मुहम्मद  साहब   के समय  भी  थी  . ऐसी  ही  एक घटना  का विवरण  इस्लामी  इतिहासकार " इब्ने  इशाक "   ने अपनी  किताब  " सीरते  रसूलल्लाह -  سيرة رسول الله‎ "  में    दिया  है  . यह  घटना  शनिवार 19  मार्च सन 625 ( इस्लामी कैलेंडर  के अनुसार  3 शव्वाल 3  हिजरी "उहुद के युद्ध  की है  , जिसे " गजवए उहुद - غزوة أحد‎  "  भी  कहा  जाता है , मुसलमानों   की  तरफ  से इस  युद्ध   का नेतृत्व मुहम्मद साहब   के चचेरे  भाई " हमजा  बिन अब्दुल मुत्तलब - حمزة بن عبد المطلب  " कर रहे थे  ,और  दूसरी  तरफ  मुहम्मद  के  विरोधी  थे  . लेकिन इस  युद्ध   में  मुसलमान  पराजित   हो  गए , और "  हमजा  "  मारे  गए , और हमजा की लाश  युद्ध भूमि  में छोड़ कर  मुसलमान   भाग  गए.तभी  अबू  सुफ़यान की पत्नी    'हिन्दा , (मुआविया  की  माता और यजीद की दादी )  युद्ध भूमि    पर  उस  जगह गयी  जहाँ  हमजा की  लाश  पड़ी   थी  . हिन्दा  ने  हमजा   की  लाश    का  सीना फाड़ा  और सीने से दिल  और  कलेजा   बाहर निकाल  कर  चबा  लिया  ,  लेकिन  जब  वह उनको  नहीं  निगल  पायी  तो हमजा  के  दिल और कलेजे   को  थूक  दिया .
"According to Ibn Ishaq, after the battle, Hind cut open the body of Muhammad's uncle Hamza, whom she believed responsible for the death of her relatives, cut out his heart, and gnawed on it. According to Ibn Ishaq, she couldn't swallow it and spat it out.

लेकिन  प्रसिद्ध सुन्नी   इतिहासकार " अब्दुल बर्र -ابن عبدالبر‎   "( मृत्यु 2  दिसंबर  सन 1071 में हुई )    ने अपनी किताब  "इस्तियाब  फी  मअरकतुल  असहाब -الاستعياب في معرفة الاصحاب    "  में लिखा   है  कि हिन्दा  हमजा   का  दिल  और  कलेजा पका  कर  खा  गयी  . और  लोगों  से बोली  कि मैंने  मुसलमानों   से  अपने लोगों   की हत्या का   बदला   ले लिया

"Ibn ‘Abdu l-Barr states in his book "al-Istî‘âb" that she cooked Hamza's heart before eating it."

शायद इसी   लिए  कुरान  की  इस  आयत  में  मुसलमानों  से  पूछा   गया है   कि  क्या वह  अपने ही  भाई    (  मुसलमान )   का   मांस  खाना  पसंद  करेंगे  ," क्या  कोई इस  बात  को पसंद   करेगा  कि अपने ही किसी  मरे हुए  भाई  का  मांस   खाए  " 
 सूरा  - अल हुजुरात  49:12 

 याद रखिये  इस  आयत में मनुष्य   का  मांस   खाने   के बारे में   सवाल  किया गया   है , मनुष्य   का  मांस  खाने  की  मनाही  नहीं   की गयी है
 यही   कारण  है  कि  मुसलमान   यहाँ भी गुप्त  रूप  से अपने दुश्मनों   का  मांस  खाते  हैं   , सीरिया    में  तो यह राक्षसी  कर्म  खुले  आम  हो  रहे हैं  ,

देखिये  विडिओ -डरावना  इस्लाम

ttps://www.youtube.com/watch?v=fZGGaDfeLTw


http://realityofsecularism.blogspot.in/2013/11/blog-post_7.html

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सोमवार, 7 दिसंबर 2015

मुसलमान किसके वफादार ?

इस समत विश्व में लगभग 200 देश हैं ,जिनमे अपना अपना संविधान और अपने नियम कानून लागू है .और अलग शासन प्रणाली है .और कुछ इस्लामी देश हैं ,लेकिन कुछ ऐसे गैर मुस्लिम देश भी हैं जहाँ मुसलमानों की अच्छी खासी जनसंख्या मौजूद है .हरेक देश चाहता है कि उस देश के निवासी संविधान और देश के कानून के प्रति निष्ठावान وفي  (Loyal )और  वफादार बनें ,ताकि सबको न्याय मिल सके .और देश में शांति व्यवस्था बनी रहे .
लेकिन देखा गया है कि ,मुसलमान जिस भी गैर मुस्लिम देश में रहते हैं ,उसके संविधान और कानून कि अनदेखी करते रहते है .और किसी न किसी बहाने उस देश की सरकारों ने लिए समस्याएं पैदा करते रहते है .चाहे उनको कितनी भी सुविधाएँ क्यों न दी जाएँ .
इसका कारण यह है कि मुसलमान मानव निर्मित किसी भी कानून या नियम को अपूर्ण और अनुपयुक्त मानते है .मुसलमानों के अनुसार केवल इस्लाम ही एकमात्र पूर्ण कानून या दीन الدِّين  (Law )है .जो अल्लाह ने बनाया है .देखिये कुरान क्या कहता है -
1 -इस्लाम सम्पूर्ण कानून है 
"आज के दिन हमने उम्हारे लिए दीन ( Law ) को परिपूर्ण कर दिया है और केवल इस्लाम को ही तुम्हारे लिए धर्म नियुक्त कर दिया है "
सूरा -मायादा -5 :3
2 -किसी को अपना हितैषी नहीं मानों 
"हे लोगो अल्लाह के अलावा किसी को अपना मित्र या संरक्षक नहीं मानों "सूरा-अल कहफ़ 18 :26
"जो अल्लाह के अलावा किसी को भी अपना मित्र या संरक्षक बनाएगा उसे कोई सहायता नहीं करो "सूरा -अन निसा 4 :123
3 -दुनिया के स्वामी मुसलमान है 
"हे मुहम्मद तुम्हारे आगे और पीछे और उसके बीच में जितनी भी भूमि है ,वह तुम्हारी है .केवल तुम्हीं उसके एकमात्र स्वामी हो "
सूरा -मरियम 19 :64
4 -सिर्फ शरियत का कानून मानों 
"हे ईमान वालो ,तुम केवल रसूल के बताये आदेशों (शरियत ) को मानों ,और यदि किसी भी प्रकार का विवाद हो तो ,रसूल के बताये गए आदेशों के अनुसार ही फैसला करो "सूरा -अन निसा 4 :59
"तुम्हारे बीच में किसी बात का फैसला केवल अल्लाह के नियमों के अनुसार ही हो सकता है .याद रखो इस तरह से इमान वालों के मुकाबले में काफिरों को कोई रास्ता नहीं मिल सकेगा "सूरा -अन निसा 4 :141
5 -ताकत के बल पर दूसरों को निकालो 
"और जो सबसे अधिक बलशाली हो ,वह अपने से कमजोरों को अपने क्षेत्र से निकाल दे ,क्योंकि आसमानों और जमीन के सभी संसाधन और उन पर प्रभुत्व अल्लाह ने अपने रसूल और मुसलमानों के लिए दिए है "सूरा -मुनाफिकून 63 :7 और 8
6 -जनमत की परवाह नहीं करो 
"चाहे लोगों का कुछ भी मत (इच्छा ) हो उम उसका पालन नहीं करो .जो उसका पालन करे तो जानलो कि इस गुनाह (इच्छा पालन )के अल्लाह उसको किसी संकट में डालना चाहता है ."सूरा मायदा 5 :49
7 -भाईचारा नहीं रखो 
" ईमान वालो ,को चाहिए कि ,वह किसी गैर ईमान वाले को अपना मित्र नहीं बनायें ,और उनसे दूरी बना कर बचते रहें .जैसा कि तुमको उन से बचने का हक़ दिया गया है ,फिर भी जो उनसे भाईचारा बनाएगा तो ,समझ लो उसे अल्लाह से कोई नाता नहीं है "सूरा -आले इमरान 3 :28
8 -झगडा करो .अशांति फैलाओ 
"जो लोग सच्चे धर्म (इस्लाम ) को अपना दीन (धर्म )नहीं मानते है ,और अपने ही धर्म को मानते है ,तुम उन से लड़ते रहो .और इतना लड़ो कि वह अप्रतिष्ठित हो कर जजिया देने पर विवश हो जाएँ "सूरा अत तौबा 9 :29
9 -मुहमद की हड़प नीति 
"अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,जब तुम किसी काफ़िर ,मुशरिक या ईसाई से व्यवहार करो तो उन से इन तीन प्रकार से बर्ताव करो ,यदि वह ख़ुशी से कुछ दे दें तो स्वीकार कर लो ,फिर उनको इस्लाम काबुल करने की शर्त रखो ,यदि वह यह शर्त नहीं मानें तो उनसे जजिया की मांग करो .फिर यदि वह जजिया नहीं देते ,तो उनकी लोगों को बंधक बना लो ,और फिरौती ले लो .यदि फिर भी इस्लाम नहीं करते तो उनसे युद्ध करो "सही मुस्लिम -किताब 19 हदीस 4294
10 -सम्पूर्ण पृथ्वी मुसलमानों की बपौती है 
"अबू हुरैरा ने कहा कि एक बार हम रसूल के साथ मस्जिद में बैठे थे ,तभी रसूल न कहा चलो हम यहूदियों के गाँव "बैतूल मिदरास"चलें ,वहां जाकर रसूल ने यहूदियों से कहा कि यदि तुम लोग इसी वक्त इस्लाम कबूल कर लोगे तो तो तुम सुरक्षित बच जाओगे .क्या तुम्हें यह पता नहीं है कि ,पृथ्वी पर जितनी भी भूमि है ,वह रसूल और मुसलमानों की है .इसलिए तुम्हारे पास जितनी भी सम्पति और जमीं है सब रसूल के हवाले कर दो .और हम तुम्हें केवल इतनी अनुमति है कि हैं कि तुम अपनी सम्पति बेचकर जा सकते हो "बुखारी -जिल्द 4 किताब 53 हदीस 392 .
यह बात तो साबित हो चुकी है कि मुसलमान किसी भी देश के कानून और संविधान पर निष्ठां नहीं रखते .और भी गैर मुस्लिम देश में रहते हैं उस देश को खोखला करते रहते है .और नयी नयी मांगे करते रहते है .फिर भी उनकी मांगें सपाप्त नहीं होंगी .जैसे अगर पूरा कश्मीर भी मुसलमानों को मिल जाये तब भी वह भारत का और हिस्सा मांगेंगे .
असल में मुसलमान देशों की भौगोलिक ,और राजनीतिक सीमाओं को नहीं मानते है इस्लामी कूटनीतिज्ञों और चालाक मुल्लों ने विश्व को कुरान और हदीसों के अधार इन भागों में बाँट रखा है .जिन्हेंدار  दार या House कहा जाता है .इन्हीं  6 वर्गों ध्यान में रख कर ही मुस्लिम देश अन्य देशो के साथ कोई सम्बन्ध या समझौता
 (Treaty )करते हैं .इस्लाम के अनुसार विश्व को इन वर्गों में विभाजित किया गया है -
1 -दारुल इस्लाम : دارالاسلام  House of Peace इसको दारुल तौहीद دارُالتوحيد  भी कहा जाता है .यस उस भूभाग को कहा जाता है ,जहाँपर इस्लामी हुकूमत होती हो .और जहाँपर मुसलमान निडर होकर अपनी गतिविधियाँ चला सकें .दारुल इस्लाम मुसलमानों गढ़ होता है .अबू हनीफा ने यह नाम कुरान की इन आयतों से लिया था ."अल्लाह तुम्हें सलामती के घर (दारुल इस्लाम ) की ओर बुलाता रहता है ,ताकि तुम सीधे रास्ते पर चलो "
सूरा -यूसुफ 10 :25
(इसी आयत की तफ़सीर में लिखा है "जहाँ पर मुसलमानों की हर प्रकार की सुरक्षा हो ,और जहाँ से वह जिहाद करें तो उनपर कोई आपत्ति नहीं आये "इसी तरह लिखा है "और अल्लाह मुसलमानों के लिए ऐसा सलामती का घर (दारुल इस्लाम ) चाहता है जहाँ पर उनके मित्र और संरक्षक मौजूद हों "सूरा-अल अनआम 6 :128 .इसी दारुल इस्लाम का सपना दिखा कर जिन्ना ने मुसलमानों को पाकिस्तान बनवाने के लिए प्रेरित किया था .
क्योंकि जिन्ना की नजर में भारत ناپاك  नापाक (अपवित्र ) देश था ,और जिन्ना पाक پاك  (पवित्र )देश پاكِستان   बनाना चाहता था .
2 -दारुल हरब : دارالحرب House of War .युद्ध का घर ,यह उस भूभाग को कहा जाता है जहाँ गैर मुस्लिमों की संख्या अधित हो .या गैर मुस्लिम सरकारे हों ,या जहाँ पर प्रजातंत्र (Democracy ) चलती हो .या जिनका मुस्लिम देशों से विवाद हो .और यदि दारुल हरब के लोग दारुल इस्लाम में जाएँ तो उनको निम्न दर्जे का व्यक्ति या जिम्मी Zimmi मानकार जजिया लिया जाये .या कोई अधिकार नहीं दिया जाये
3 -दारुल अमन : دارالامن House of Safty .बचाव का घर यह उस भूभाग को कहा जाता है ,जहाँ अधिकांश गैर मुस्लिम रहते हों ,लेकिन मुसलमानों को भी कोई न कोई अधिकार दिया गया हो .या जहाँपर इस्लाम को खतरा होने का भय नहीं लगे .इस्लाम इस वर्गीकरण के अनुसार भारत भी एक "दारुल अमन "है .क्योंकि यहाँ मुसलमानों को हिन्दुओं से अधिक अधिकार प्राप्त हैं .
4 -दारुल हुंदा :دارالهنُنده  House of Calm .विराम का घर ,यह उस क्षेत्र को या उस देश को कहा जाता है ,जिसका किसी मुस्लिम देश से युद्ध या झगडा होता रहता हो .लेकिन किसी कारण से लड़ाई बंद हो गयी हो .और भविष्य में या तो समझौते की गुंजायश हो ,या फिर युद्ध की संभावना हो .और यह एक प्रकार की waite and watch की स्तिथि होती है
5 -दारुल अहद :دارُالعهد  House of Truce .युद्ध विराम का घर ,इसे दारुल सुलहدارالسُلح   या House of Treaty भी कहा जाता है ,यह उन देशो को कहा जाता है ,जिन्होंने मुस्लिम देशो से किसी प्रकार की कोई संधि या समझौता कर लिया हो .औए जिसे दोनो देशों के आलावा दुसरे मुस्लिम देशो ने स्वीकार कर लिया हो .
6 -दारुल दावा : دارُالدعوة House of Invitation .आह्वान का घर ,यह उन देशों या उन क्षेत्रों या उन इलाकों को कहा जाता है जहाँ गई मुस्लिम हों और जिनको मुसलमान बनाने के लिए कोशिश करना जरुरी हो .यहाँ के लोग इस्लाम के बारे में अधिक नहीं जानते हो .(ऐसे भूभाग को दारुल जहलियाدارالجاهلِية  या House of ingorant खा जाता है )और फिर किसी भी उपाय से उस भूभाग को दारुल इस्लाम में लेन की योजनायें बने जाती है या फिर उस क्षेत्र को कहा जाता है जहाँ के मुसलमान कट्टर नहीं होते हैं और उनको कट्टर बनाने की जरूरत हो ,ताकि उनको जिहादी कामों में लगाया जा सके .और इस काम के लिए उस क्षेत्रों में जमातें भेजी जाती है

इस लेख से हमें यह समझ लेना चाहिए कि मुसलमानों ने विश्व के देशो या किसी देश के भूभाग या किसी क्षेत्र को जो अलग अलग दार या Houses में बाँट कर विभाजित किया है .वह राजनीतिक ,या भौगोलिक सीमाओं के आधार पर नहीं है .इस्लामी परिभाषा में "दार "कोई देश ,प्रान्त ,जिला या उसका कोई हिस्सा भी हो सकता है .और इन्हीं दार के house के हालात देख कर मुसलमान अपनी रणनीतियाँ तय करते है जैसे कहीं शांत हो जाते हैं और कही आतंकवाद को तेज कर देते हैं .मुसलमानों का एकमात्र उद्देश्य और लक्ष्य इन सब "दार "को दारुल इस्लाम के दायरे में लाने का है .ताकि दुनिया में " विश्व में इस्लाम राज्य Pan Islamic State "की स्थापना हो सके .
मुसलमानों की तरह Catholic Church ने भी देशों को बाँट रखा है .
आज इस बात की अत्यंत जरुरत है कि हम मुसलमानों कि कुटिल नीतियों और नापाक मंसूबों विफल करने का यत्न करते रहें ,और देश को
दारुल इस्लाम बनाने से रकने के लिए पूरी ताकत लगा दें .और इस पवित्र कार्य में लोगों को उत्साहित करें और हरेक साधनों का उपयोग करें .तभी देश और धर्म बच सकेगा .
(87/27)

www.TheReligionofPeace - Islam Loyalty to Non-Muslim Governments.htm

गुरुवार, 26 नवंबर 2015

बलात्कार :जिहाद का हथियार

जिहाद दुनिया का सबसे घृणित कार्य और सबसे निंदनीय विचार है .लेकिन इस्लाम में इसे परम पुण्य का काम बताया गया है .जिहाद इस्लाम का अनिवार्य अंग है .मुहम्मद जिहाद से दुनिया को इस्लाम के झंडे के नीचे लाना चाहता था .मुहलामानों ने जिहाद के नाम पर देश के देश बर्बाद कर दिए .हमेशा जिहादियों के निशाने पर औरतें ही रही हैं .क्योंकि औरतें अल्लाह नी नजर में भोग की वस्तु हैं .और बलात्कार जिहाद का प्रमुख हथियार है .मुसलमानों ने औरतों से बलात्कार करके ही अपनी संख्या बढाई थी .मुहम्मद भी बलात्कारी था .मुसलमान यही परम्परा आज भी निभा रहे है .यह रसूल की सुन्नत है ,कुरान के अनुसार मुसलमानों को वही काम करना चाहिए जो मुहम्मद ने किये थे .कुरान में लिख है-

"जो रसूल की रीति चली आ रही है और तुम उस रीति(सुन्नत )में कोई परवर्तन नहीं पाओगे "सूरा -अल फतह 48 :23 

"यह अल्लाह की रीति है यह तुम्हारे गुजर जाने के बाद भी चलती रहेगी .तुम इसमे कोई बदलाव नहीं पाओगे .सूरा -अहजाब 33 :62 
"तुम यह नहीं पाओगे कि कभी अल्लाह की रीति को बदल दिया हो ,या टाल दिया गया हो .सूरा -फातिर 33 :62 

यही कारण है कि मुसलमान अपनी दुष्टता नही छोड़ना चाहते .जिसे लोग पाप और अपराध मानते हैं ,मुसलमान उसे रसूल की सुन्नत औ अपना धर्म मानते है .और उनको हर तरह के कुकर्म करने पर शर्म की जगह गर्व होता है .बलात्कार भी एक ऐसा काम है .जो जिहादी करते है -

1 -बलात्कार जिहादी का अधिकार है 

"उकावा ने कहा की रसूल ने कहा कि जिहाद में पकड़ी गई औरतों से बलात्कार करना जिहादिओं का अधिकार है .

बुखारी -जिल्द 1 किताब 5 हदीस 282 

"रसूल ने कहा कि अगर मुसलमान किसी गैर मुस्लिम औरत के साथ बलात्कार करते हैं ,तो इसमे उनका कोई गुनाह नहीं है .यह तो अल्लाह ने उनको अधिकार दिया है ,औ बलात्कार के समय औरत को मार मी सकते हैं"

बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 132 

बुखारी -जिल्द 1 किताब 52 हदीस 220 


2 -जिहाद में बलात्कार जरूरी है 

सईदुल खुदरी ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि सामूहिक बलात्कार करने से लोगों में इस्लाम की धाक बैठ जाती है .इसलिए जिहाद में बलात्कार करना बहुत जरूरी है .

बुखारी जिल्द 6 किताब 60 हदीस 139 

3 -बलात्कार से इस्लाम मजबूत होता है 

"इब्ने औंन ने कहा कि,रसूल ने कहा कि किसी मुसलमान को परेशां करना गुनाह है ,और गैर मुस्लिमों को क़त्ल करना और उनकी औरतों के साथ बलात्कार करना इस्लाम को आगे बढ़ाना है.बुखारी -जिल्द 8 किताब 73 हदीस 70 

"रसूल ने कहा कि मैंने दहशत और बलात्कार से लोगों को डराया ,और इस्लाम को मजबूत किया .बुखारी -जिल्द 4 किताब 85 हदीस 220 

"रसूल ने कहा कि ,अगर काफ़िर इस्लाम कबूल नहीं करते ,तो उनको क़त्ल करो ,लूटो ,और उनकी औरतों से बलात्कार करो .और इस तरह इस्लाम को आगे बढ़ाओ और इस्लाम को मजबूत करो.बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 464 

4 -माल के बदले बलात्कार 

"रसूल ने कहा कि जो भी माले गनीमत मिले ,उस पर तुम्हारा अधिकार होगा .चाहे वह खाने का सामान हो या कुछ और .अगर कुछ नहीं मिले तो दुश्मनों कीऔरतों से बलात्कार करो ,औए दुश्मन को परास्त करो .बुखारी -जिल्द 7 किताब 65 हदीस 286 . 

(नोट -इसी हदीस के अनुसार बंगलादेश के युद्ध में पाकिस्तानी सेना ने बलात्कार किया था )

5 -बलात्कार का आदेश ' 

"सैदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने अपने लोगों (जिहादियों )से कहा ,जाओ मुशरिकों पर हमला करो .और उनकी जितनी औरतें मिलें पकड़ लो ,और उनसे बलात्कार करो .इस से मुशरिकों के हौसले पस्त हो जायेंगे .बुखारी -जिल्द 3 किताब 34 हदीस 432 

6 -माँ बेटी से एक साथ बलात्कार 

"आयशा ने कहा कि .रसूल अपने लोगों के साथ मिलकर पकड़ी गई औरतों से सामूहिक बलात्कार करते थे .और उन औरतीं के साथ क्रूरता का व्यवहार करते थे .बुहारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 67 

"सैदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने 61 औरतों से बलात्कार किया था .जिसमे सभी शामिल थे .औरतों में कई ऎसी थीं जो माँ और बेटी थीं हमने माँ के सामने बेटी से औए बेटी के सामने माँ से बलात्कार किया .मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3371 और बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 288 

7 -बलात्कार में जल्दी नहीं करो 

"अ ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,पकड़ी गयी औरतो से बलात्कार में जल्दी नहीं करो .और बलात्कार ने जितना लगे पूरा समय लगाओ "

बुखारी -जिल्द 2 किताब 23 हदीस 446 . 

अब जो लोग मुसलमानों और मुहम्मद को चरित्रवान और सज्जन बताने का दवा करते हैं ,वे एक बार फिर से विचार करे, इस्लाम में अच्छाई खोजना मल-मूत्र में सुगंध खोजने कि तरह है .आप एक बार मुस्लिम ब्लोगरो द्वारा इस्लाम और मुहम्मद के बारे में लिखी हुई झूठी बातों को पढ़िए फिर दिए तथ्यों पर विचार करके फैसला कीजिये

.अधिक जानकारी के लिए यह अंगेजी ब्लॉग देखें

http://nakedmuhammad.blogspot.com/

(181/161)

शनिवार, 21 नवंबर 2015

जेहाद की आय का साधन

इस्लाम के कई देश इस समय आतंकवाद से प्रभावित हैं। यह भी सच है कि इनमें अधिकांशत: इस्लामी जेहाद के नाम पर फैलाया जाने वाला आतंकवाद है। यदि हम एक सच्चे मुसलमान की परिभाषा को समझना चाहें तो हम देखेंगे कि इस्लाम में जहां हत्या, बलात्कार, चोरी, झूठ, निंदा-चुगली आदि को इस्लाम में प्रतिबंधित या इन्हें ग़ैर इस्लामी बताया गया है वहीं शराब नोशी से लेकर शराब के उत्पादन अथवा कारोबार में शामिल होने तथा ऐसी किसी भी नशीली वस्तु के प्रयोग अथवा उसके उत्पादन या कारोबार में संलिप्त होने को भी गैर इस्लामी कृत्य करार दिया गया है। इस्लाम में इस प्रकार की वस्तुओं के सेवन तथा इस धंधे में शामिल होने को गुनाह भी करार दिया गया है। प्रश्न यह है कि क्या जेहाद के नाम पर दुनिया में आतंकवाद फैलाने वाले मुस्लिम परिवारों के आतंकी सदस्य इस वास्तविकता से परिचित हैं या नहीं?और यदि हैं तो वे उसपर कितना अमल करते हैं। वास्तव में इन स्वयंभू इस्लामी लड़ाकों के जेहन में किस कद्र सच्चा इस्लाम बसता है और यह आतंकी इस्लामी शिक्षाओं पर कितना अमल करते हैं तथा कितना समर्पण रखते हैं।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पिछले दिनों एक प्रतिष्ठित मीडिया ग्रुप के एक खोजी पत्रकार द्वारा जेहाद के नाम पर अपना सब कुछ कुर्बान कर देने का जबा रखने वाले एक आतंकवादी से गुप्त रूप से मुलांकात कर उसका साक्षात्कार किया गया। अमजद बट्ट नामक इस तीस वर्षीय पंजाबी युवक के कंधे पर जहां ए के 47 लटकी हुई थी वहीं उसकी कमर में एक रिवाल्वर भी लगी नार आ रही थी। उसने अपना परिचय देते हुए यह बताया कि पहले तो वह स्वयं अफीम, स्मैक, हेरोइन जैसे तमाम नशे का आदी था और बाद में इसी कारोबार में शामिल हो गया। उसने बताया कि नशीले कारोबार में शामिल होने के बाद आम लोग उसे गुंडा कहने लगे। बट्ट ने यह भी स्वीकार किया उसे न तो नमाज अदा करनी आती है न ही कुरान शरींफ पढ़ना। और इसके अतिरिक्त भी किसी अन्य इस्लामी शिक्षा का उसे कोई ज्ञान नहीं है। परंतु इसके बावजूद अमजद बट्ट का हौसला इतना बुलंद है कि वह इस्लाम के नाम पर किसी की जान लेने या अपनी जान देने में कोई परेशानी महसूस नहीं करता। पाकिस्तान का पंजाब प्रांत, पाक अधिकृत कश्मीर तथा पाक-अंफंगान सीमांत क्षेत्र एवं फाटा का इलाक़ा ऐसे लड़ाकुओं से भरा पड़ा है जो इस्लामी शिक्षाओं को जानें या न जानें, और उनपर अमल करें या न क रें परंतु इस्लाम के नाम पर मरना और मारना उन्हें बख़ूबी आता है। आतंकी अमजद बट्ट के अनुसार जब उसने नशीले कारोबार के रास्ते पर चलते हुए अपने आप को जुर्म की काली दुनिया में धकेल दिया उसके बाद उसके संबंध जेहाद के नाम पर आतंक फैलाने वाले आतंकी संगठनों से भी बन गए।
यहां एक बार फिर यह काबिले जिक्र है कि जेहादी आतंकवाद की जड़ें वहीं हैं जिनका जिक्र बार-बार होता आ रहा है और इतिहास में यह घटना एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो चुकी है। अर्थात् सोवियत संघ की घुसपैठ के विरुध्द जब अफगानी लड़ाकुओं ने स्वयं को तैयार किया उस समय इन लड़ाकुओं ने जिन्हें तालिबानी लड़ाकों के नाम से जाना गया,सोवियत संघ के विरुद्ध खुदा की राह मे जेहाद घोषित किया। इस कथित जेहादी युद्ध में जहां अशिक्षित अंफंगानी मुसलमान सोवियत संघ के विरुद्ध एकजुट हुए वहीं इसी दौरान अमेरिका ने भी सोवियत संघ के विरुद्ध तालिबानों को न केवल सशस्त्र सहायता दी तथा अफगानिस्तान में इन लड़ाकुओं के प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने में भी उनकी पूरी मदद की बल्कि उन्हें नैतिक समर्थन देकर उनकी हौसला अफजाई भी की। इनमें से कई ट्रेनिंग कैंप ध्वस्त तो ारूर हो चुके हैं परंतु इनमें प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके तमाम आतंकी अभी भी मानवता के लिए सिरदर्द बने घूम रहे हैं। अमजद बट्ट ने भी एक ऐसे ही प्रशिक्षण केंद्र से जेहादी पाठ पढ़ा तथा हथियार चलाने की ट्रेनिंगा ली। उसके अनुसार जब वह प्रशिक्षण प्राप्त कर हथियार लेकर अपने गांव लौटा तो कल तक अपराधी व गुंडा नजर आने वाला व्यक्ति अब उसके परिवार, ख़ानदान तथा गांव वालों को ख़ुदा की राह में मर मिटने का हौसला रखने वाला एक समर्पित जेहादी मुसलमान नार आने लगा। उसे देखकर तथा उससे प्रेरित होकर उसी के अपने ख़ानदान के 50 से अधिक युवक एक ही बार में जेहादी मिशन में इसलिए शरीक हो गए कि कहीं अमजद बट्ट अल्लाह की राह में जेहाद करने वालों में आगे न निकल जाए।
आगे चलकर यही लड़ाके किसी न किसी आतंकी संगठन जैसे लश्करे तैयबा,जैशे मोहम्मद, हरकत-उल-अंसार अथवा लश्करे झांगवी जैसे आतंकी संगठनों से रिश्ता स्थापित कर उनके द्वारा निर्धारित लक्ष्यों पर काम करने लग जाते हैं। इन सभी संगठनों का गठन भले ही अलग-अलग उद्देश्यों को लेकर किया गया रहा हो। परंतु यह सभी सामूहिक रूप से मानवता को नुंकसान पहुंचाने वाले ग़ैर इस्लामी काम अंजाम देने में लगे रहते हैं। उदाहरण के तौर पर लश्करे झांगवी का गठन पाकिस्तान में सर्वप्रथम शिया विरोधी आतंकवादी कार्रवाईयां अंजाम देने हेतु किया गया था। इस संगठन पर शिया समुदाय को निशाना बनाकर सैकड़ों आतंकी हमले किए गए। उसमें दर्जनों हमले ऐसे भी शामिल हैं जो इन के द्वारा मस्जिद में नमाज पढ़ते हुए मुसलमानों पर या इमामबाड़ों व मोहर्रम के जुलूस आदि का निशाना बनाकर किए गए। अब यही संगठन अपने आपको इतना सुदृढ़ आतंकी संगठन समझने लगा है कि इसने पाकिस्तान में अपने हितों को नुंकसान पहुंचाने वालों को भी निशाना बनाना शुरु कर दिया है। इसके सदस्य पाकिस्तान में सेना विरोधी आतंकी कार्रवाईयों में भी पकड़े जा चुके हैं।
इसी प्रकार लश्करे तैयबा जिसका गठन कश्मीर को स्वतंत्रता दिलाने के उद्देश्य से किया गया था इसने भी अपने निर्धारित लक्ष्य से अलग काम करने शुरु कर दिए। इस संगठन पर भी जहां भारत में तमाम निहत्थे बेगुनाहों की हत्याएं करवाने का आरोप है वहीं इस संगठन पर पाकिस्तानी सेना के एक सेवानिवृत जनरल की हत्या का भी आरोप है। मानवता के विरुध्द संगठित रूप से अपराधों को अंजाम देने वाले ऐसे संगठन यादातर अपने साथ गरीब व निचले तबंके के अशिक्षित युवाओं को यह कहकर जोड़ पाने में सफल हो जाते हैं कि यहां उन्हें दुनिया की सारी चीजें तो मिलेंगी ही साथ ही उनके लिए अल्लाह जन्नत के रास्ते भी खोल देगा। और इसी लालच में एक अनपढ़, बेराजगार और मोटी अक्ल रखने वाला मुसलमान नवयुवक अपने आपको जेहादी आतंक फैलाने वाले संगठनों से जोड़ देता है। इस समय पाकिस्तान में अधिकांश आतंकी संगठन जो भले ही अलग-अलग उद्देश्यों को लेकर गठित किए गए थे परंतु अब लगभग यह सभी आतंकी ग्रुप अमेरिका, भारत तथा इनके हितों को निशाना बनाने के लिए अपनी कमर कस चुके हैं।
पाकिस्तान की ही तरह अंफंगानिस्तान में भी इस्लामी जेहाद का परचम जिन तथाकथित इस्लामी जेहादियों के हाथों में है उन की भी वास्तविक इस्लामी हंकींकत इस्लामी शिक्षाओं से कोसों दूर है। तालिबानी मुहिम के नाम से प्रसिद्ध इस विचारधारा में संलिप्त लड़ाकुओं की आय का साधन अंफगानिस्तान में होने वाली अंफीम की खेती है। यह भी दुनिया का सबसे ख़तरनाक नशीला व्यापार है। एक अनुमान के अनुसार विश्व के कुल अंफीम उत्पादन का 93 प्रतिशत अफीम उत्पादन केवल अंफंगानिस्तान में होता है। यहां लगभग डेढ़ हाार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में इसकी घनी पैदावार होती है। सन्2007 के आंकड़े बताते हैं कि उस वर्ष वहां 64 बिलियन डॉलर की आय अफीम के धंधे से हुई थी। इस बड़ी रक़म को जहां लगभग 2 लाख अंफीम उत्पादक परिवारों में बांटा गया वहीं इसे तालिबानों के जिला प्रमुखों, घुसपैठिए लड़ाकों, जेहादी युद्ध सेनापतियों तथा नशाले धंधे के कारोबार में जुटे सरगनाओं के बीच भी बांटा गया। उस समय अंफीम का उत्पादन लगभग 8200 मीट्रिक टन हुआ था। यह उत्पादन पूरे विश्व की अफीम की अनुमानित खपत का 2 गुणा था।
ड्रग कारोबार का यह उद्योग केवल अफ़ीम तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसी अफ़ीम से विशेष प्रक्रिया के पश्चात 12 प्रतिशत मारंफिन प्राप्त होती है तथा हेरोइन जैसे नशीले पदार्थ का भी स्त्रोत यही अफ़ीम है। तालिबानी लड़ाकों की रोजी-रोटी, हथियारों की ख़रीद-फरोख्त तथा उनके परिवारों के पालन पोषण का मुख्य साधन ही अफ़ीम उत्पादन है। एक ओर जहां ईरान जैसे देश में ऐसे कारोबार से जुड़े लोगों को मौत की साज तक दे दी जाती है वहीं अपने को मुसलमान, इस्लामी, जेहादी आदि कहने वाले यह तालिबानी लडाके इसी गैर इस्लामी धंधे की कमाई को ही अपनी आय का मुख्य साधन समझते हैं। यही तालिबानी हैं जोकि औरतों को सार्वजनिक रूप से मारने पीटने तथा अपमानित करने जैसा गैर इस्लामी काम प्राय:अंजाम देते रहते हैं। स्कूल तथा शिक्षा के भी यह प्रबल विरोधी हैं। निहत्थों की जान लेना तो गोया इनकी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल हो चुका है। ऐसे में क्या यह सवाल उठाना जाया नहीं है कि उपरोक्त सभी गैर इस्लामी कामों को अंजाम देने वालों को यह अधिकार किसने और कैसे दिया कि वे धर्म, इस्लाम और जेहाद जैसे शब्दों को अपने जैसे अधार्मिक प्रवृति वालों के साथ जोड़ सकें। क्या यह इस बात का पुख्ता सुबूत नहीं है कि इस्लाम आज गैर मुस्लिमों के द्वारा नहीं बल्कि स्वयं को जेहादी व तालिबानी कहने वाले ऐसे ही आतंकी मुसलमानों के हाथों बदनाम हो रहा है जिन्हें वास्तव में स्वयं को मुसलमान कहलाने का हंक ही नहीं है परंतु इस्लाम धर्म के दुर्भाग्यवश यही स्वयंभू रूप से इस्लामी जेहादी लड़ाके बन बैठे हैं।

यही है जेहाद की असली हकीकत.

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