मंगलवार, 10 जनवरी 2017

जिहादियों का मुकाबला इस्राएल से सीखो !

हमें  यह  लेख  तब  लिखना  पड़ा   जब   12 अगस्त  2014  को  प्रधानमंत्री  नरेंद्र  मोदी ने लद्दाख   के लेह में  लोगों   के सामने यह   बात कहीं  कि " पाकिस्तान  में  सीधी  लड़ाई  लड़ने की  हिम्मत   नहीं  है  ,इसलिये  वह  आतंकवादियों   के  सहारे  परोक्ष युद्ध  छेड़े   हुए   है  "  मोदी   के भक्त  उनके इस  बयान   से भले खुद  को  निडर  और  पाकिस्तान   को डरपोक समझने का  सपना  देखने लगें  ,लेकिन वास्तव में वह  सभी लोग  डरपोक   हैं  .  जो भारत की सीमा में घुस कर  आतंक  फ़ैलाने  वालों  को  मुस्लिम  आतकवादी  या   मुस्लिम  जिहादी   न  कह  कर सिर्फ   आतंकवादी   कहते  हैं  . इसी  तरह वह सभी लोग  डरपोक   हैं  जो  इस  सत्य   को  नहीं  कहते कि  पाकिस्तानी   द्वारा  चलाया   जा  रहा क्षद्म   युद्ध  आतंकवाद  नहीं   मुसलमानों  द्वारा हिन्दुओं  के विरुद्ध   जिहाद  है  , जिसका  कारण सीमा  विवाद  नहीं  काफिरों (  हिन्दू )   का  नाश   और और  पूरे  भारत  खंड  पर  इस्लामी  झंडा  फहराना है  .
और  जब  तक भारत  के  हिन्दू ऐसे  आतंकवादियों   को  मुस्लिम  जिहादी  नहीं    मानते   और  उनके   साथ  वैसा ही  व्यवहार  नहीं  करते  जैसा  इजराइल करता है  , तब  तक  देश की  सीमा पर  और अंदर   आतंकवाद  बंद नहीं   हो  सकता   , यह  हमारा दावा  है  ,
इस  बात   को  ठीक  से हमें  इजराइल फिलस्तीन  क्षद्म   युद्ध का कारण और भारत  इजराइल  सम्बन्ध के  बारे में  जानना  जरुरी   है  , क्योंकि  दोनो  ही  इस्लामी  आतंक   से त्रस्त  हैं  ,

1-बाइबिल  में  भारत   का  विवरण
भारत और  इजराइल का सम्बन्ध   हजारों  साल  पुराना है   . भारत की तरह इस्राएल   का इतिहास भी गौरवशाली है  ज़िस समय अरब के लोग  काफिले  लूटा  करते थे  , इजराइल  में  सोलोमन(solomon)   जैसा प्रतापी  राजा राज करता  था  ,  उसके समय (970-931BC  )  में   भारतीय   सामान  समुद्री  मार्ग इस्राएल  भेजा जाता था  . भारत का  उल्लेख  बाइबिल  में  अनेकों  जगह   मिलता  है  , कुछ  उदाहरण देखिये ,"फिर हाराम के जहाज जो  "ओफीर Ophir  " ( भारत  का एक  बंदरगाह  सोपारा  जो  मुंबई के पास है )  से  सोना लाते थे वह राजा के लिए चन्दन की लकड़ी  और रत्न    ले  आये  .  राजा   ने  सोना  यहोवा  ( ईश्वर )  के  मंदिर में  लगवाया  और चन्दन  की  लकड़ी से  भजन गाने  वालों  के लिए वीणा और  सारंगियां  बनवा दी "
1  राजा 10 :11 -12

"समुद्री    मार्ग  से  तर्शीश  के लोग जहाज भर कर सोना ,चांदी  , हाथीदांत , बन्दर  , और  मोर   ले  आते थे  , इस  से राजा  सोलोमन  सभी  राजाओं  में बड़ा राजा  बन  गया  " 1 राजा 10 :22 -24
नोट - इस आयत में हिब्रू  में  बन्दर  के लिए " कॉप "   शब्द  आया है ,जो  संस्कृत  शब्द "कपि "  से लिया गया है   . उल्लेखनीय  बात यह है  कि  उस समय इस आयत में वर्णित  सभी  चीजें  सिर्फ  भारत में ही  मिलती  थी  .

इसके अतिरिक्त  बाइबिल में दो बार स्पष्ट  रूप  से भारत  का  नाम  दिया गया   है  , हिब्रू  भाषा में भारत को "होदुव -הֹדּוּ  "कहा  गया है  , जो  सिंधव( होंदुव )     शब्द  का  अपभृंश  है  , और  इसी से  हिन्दू  शब्द बना  है  बाइबिल  के अंगरेजी अनुवाद में इसे  "india" कहा  गया है  , जो  सिंधव  शब्द  का  अपभृंश  है  , और  इसी से  हिन्दू  शब्द बना  है  बाइबिल  के अंगरेजी अनुवाद में इसे "हिंदुस्तान   "लिखा  गया  है  . यह दो आयतें  इस प्रकार हैं ,

"दादानी लोग व्यापारी  थे वे कई  द्वीपों   हाट  लगाते थे  , और  इस्राएल के लिए हाथी  दांत  और  आबनूस की  लकड़ी   लाते थे " यहेजकेल 27:15 -17

 यह क्षयर्ष  नामके राजा के  समय की  बात है  ,जो 127  प्रांतों  और हिंदुस्तान से  कूश  देश तक राज  करत था " एस्तेर 1:1

फिर राजा  ने  लेखक  बुलवाये  और उनसे यहूदी  और   हिंदुस्तान  से कुश  देश तक सभी  राजाओं  को    पत्र लिख कर भेजने को कहा " एस्तेर 8:9 -10

2-अरब  जंगली  गधे की  तरह  हैं
इस्लाम  से पहले अरब   में धार्मिक ग्रन्थ  के  नाम पर  तौरेत  ( Bible ) पढ़ी  जाती   थी  , उसने  अरबों  को इस्माइल  का वंशज    माना  गया है  , मुहम्मद के पूर्वज भी उसी के वंशज  थे  , लेकिन  तौरेत में  इस्माइल  के  बारे में  जो लिखा  है  उसे  जानकर  मुहम्मद साहब  यहूदियिं से जलते थे ,तौरेत में लिखा  है  ,
 ईश्वर ने  इब्राहिम  की रखैल सारा  से  कहा  ,  तू  एक  पुत्र  जनेगी  उसका नाम  इस्माइल  रखना  , उसका  स्वभाव  एक  जंगली  गधे की  तरह होगा    और  उसका हाथ   सभी  निर्दोष  लोगों  पर  उठेगा , वह  अपने ही  लोगों   से लड़ता  रहेगा   "

 बाइबिल उत्पत्ति-अध्याय  16 आयत 11 -12

चूँकि अरब   के लोग  हमेशा  लड़ते रहते थे  , इसलिए   यहूदी  उनको इब्राहिम  के  नाजायज  बेटे की  संताने  कहते थे   .
और  इसीलिए   मुहम्मद   साहब  और  उनके  साथी  यहूदियों   से जलते थे  और  नफ़रत  करते थे   .
( नोट- हराम   की  औलादों   के  बारे में  गीता   में  यही  लिखा है   "   गीता  1 :40 -41 )

3-अरब  इजराइल युद्ध  का कारण

मुसलमान  यहूदियों  को  क्यों  मारते रहते हैं  , इसका  कारण कोई  राजनीतिक  या  किसी प्रकार का सीमा विवाद   नहीं  है ,बल्कि असली  कारण यहूदी विरोधी  हदीसें   हैं  , उदहारण  के लिए  यह  हदीसें  देखिये ,

1."अबू  हुरैरा  ने कहा कि रसूल  ने  बताया  है  कि अंतिम  न्याय  का  दिन तब  तक  नहीं  आएगा  जब तक  मुसलमान  युद्ध  में सभी यहूदियों  को क़त्ल नहीं  देते  . और  यदि  कोई यहूदी  किसी चट्टान  या  पेड़  के पीछे  भी  छुप   जाएगा  , तो वह  चट्टान  और पेड़  यहूदी   का  पता  बता देंगे  . लेकिन ग़रक़द  का पेड़ चुप  रहेगा   ,क्योंकि  वह  एक  यहूदी  पेड़  है .
 .
 सही मुस्लिम -किताब 41 हदीस 6985

2 .रसूल  ने कहा कि अन्तिंम  दिन  अल्लाह  का  न्याय  तब तक  पूरा  नहीं  होगा  , जब तक मुसलमान  यहूदियों   से युद्ध  करके  उनको  कत्ल   नहीं  कर देते  . और  यदि  कोई यहूदी  जान  बचने  के लिए  किसी चट्टान  के पीछे भी छुप  जायेगा  ,तो  वह चट्टान  बोलेगी  मुसलमानों  देखो  मेरे पीछे  एक यहूदी छुपा है  , उसे  मार  डालो "

सही बुखारी - जिल्द 4 किताब 52 हदीस 177

4-अरब   में  यहूदी  विरोधी   शिक्षा

वैसे  तो  सभी  मुस्लिम  माता पिता  बचपन से ही  अपने  बच्चों  को   गैर मुस्लिमों   के प्रति   नफरॅत की  घुट्टी   पिला देते हैं   ,लेकिन  सऊदी  अरब   की सरकार ने तो  बारहवीं क्लास के  विद्यार्थियों  के  पाठ्यक्रम  बाकायदा     यहूदियों    से नफ़रत  की  तालीम  शामिल  कर रखी  है   "जिसके  एक  अध्याय का   नाम   है   "दरसाते मिनल आलम अल इस्लामी -   دراسات من العالم الاسلامي "इसका  अर्थ  है "इस्लामी दुनिया का अध्ययन"(studies from muslim world   ).इसके  एक  अध्याय में   इजराइल  ,  फिलस्तीन  युद्ध   के एक  जिहाद  बता कर   कहा गया है कियह युद्ध   मुहम्मद साहब के  समय से ही चल रहा है  .इस किताब  के तीसरे   पाठ   में लिखा  है कि  इजराइल  और  फिलस्तीन   के बीच   जो जिहाद   है  ,उसका उद्देश्य   इस  पूरे  भूभाग में फिर से वैसी ही  व्यवस्था   लागु   करना है   ,जो  रसूल   के  समय में थी  , इसलिए   यहूदियों  और  मुसलमानों के बीच  कभी  शांति   नहीं   हो सकती।   क्योंकि यहूदी  झूठे ,  धोखेबाज  और  अल्लाह का  हुक्म  तोड़ने   वाले  हैं   , उनके इन्हीं  दुर्गुणों   के बारे में   कुरान   में  लिखा   है  . इसके बाद किताब  में कुरान की कुछ  आयतें   भी  दी  गयी   हैं   .

http://www.memri.org/image/9455.jpg

5-इस्राएल और  उसके शत्रुओं  की  तुलना

विश्व में इजराइल  एक  ऐसा देश  है जो  कई तरफ  से  मुस्लिम  देशों  से घिरा हुआ  है  , जो  सभी इजराइल को  बर्बाद  करने पर तुले हुए   हैं
इस्राएल  की  राष्ट्रभाषा   और   धर्मभाषा में   इजराइल  का  हिब्रू  में नाम  " मदीनथ  इस्रायेल - מְדִינַת יִשְׂרָאֵל  "   है   . इस्राएल  के अधिकांश   लोग  यहूदी   है  , आकर और जनसंख्या   के अनुसार  इजराइल  काफी  छोटा  देश   है  , इसकी लम्बाई 470  कि  मी (290  मील ) और  चौड़ाई 135कि  मी (85 मील  है  , और कुल  क्षेत्रफल  10840 वर्ग  कि  मी है  . और   जनसँख्या  सिर्फ 81  लाख (8,134,10 )   है  , जनसंख्या के हिसाब से  विश्व में इजराइल  का  नंबर  97  वां  है  .दूसरी  तरफ  पांच  बड़े मुस्लिम  देश   हैं  जिनकी आबादी  इस   प्रकार   है   ,
1.मिस्र (Egypt)-82,196,587
2.सीरिया -21,960,358
3.जॉर्डन -7,329,643
4.ईरान -77352373
 5.तुर्की -75,087,121

यदि   इजराइल के इन  सभी  मुस्लिम  शत्रु  देशों की  कुल  जनसंख्या जोड़ ली  जाये  तो 263926082 (छब्बीस  करोड़ ,उनचालीस  लाख ,छब्बीस  हजार  और ब्यासी  )   है   .  इनके सामने इजराइल  की  जनसंख्या  केवल 2. 4  प्रतिशत   है  .

6-जिहाद पर  इस्राएल  की  नीति

यदि   हम  इजराइल  का  नक्शा देखें   तो  पता चललता है कि यह छोटा सा देश  चारों तरफ से शत्रु  मुस्लिम  देशों  से घिरा   हुआ  है  ,और यदि  मुसलिम देशों  का  बस  चलता तो  वे  इजराइल  को कच्चा   चबा  जाते  , लेकिन यदि  आज  इजराइल इन  मुस्लिम  देशों   से टक्कर  ले रहा है तो  उसके पीछे  दो कारण  हैं  , एक  तो  इजराइल  में  सेकुलर  जैसे गद्दार   नहीं  हैं जो जिहादियों   की  मदद  करते  ,  दूसरा  कारण यह है कि इजराइल की नीति हरेक आतंकी  घटना  के बदले  वैसी  ही  और  उसी  अनुपात    में कार्यवाही  करने की  है  , इस  नीति    के बारे में  दिनांक  7 अगस्त  2014  को  इस्राएल  के रक्षा  मंत्रालय   (  Israel Ministry of Foreign Affairs )   द्वारा जो  अधिसूचना  जारी  की  है  , उसका  शीर्षक  "  Fighting Hamas terrorism within the law  "   है  ." सभी  रक्षात्मक  उपाय  करने  के बाद इस्राएल   ने स्वीकार  कर लिया  है कि अब  सैनिक  कार्यवाही  करना  अनिवार्य हो  गया है  ,क्योंकि  पिछले महीने  हमास और  जिहादियों  द्वारा  छोड़े  गए रॉकेटों   की जद  में इजराइल  के  बड़ेशहर  जैसे तेलअबीब  ,हैफा  और  राजधानी  यरूशलेम   भी  आ गए हैं  . इसलिए हम कानूनी  तौर  पर  लोगों  जान  माल  की रक्षा   के लिए  सैन्य  अभियान  चलने पर बाध्य है  . हमारा उदेश्य  हमास के जिहादियों  को समाप्त  करना  है   , जिसके लिए  हमरी  नीति हमास और जिहादियों  के साथ  वैसा  और  उसी   अनुपात में  जवाब  देने  की  है  , जैसा वह   करते हैं  "जिहादियों  के प्रति  इजराइल  की इस  नीति   का  नाम "Operation Protective Edge " है  .

"Israel acknowledges that despite the precautions taken, military operations inevitably lead to a loss of civilian life and property.
During the past month, Hamas' and other Jihadi groups' rockets have reached Israel's largest cities including Tel-Aviv, Haifa and Israel's capital, Jerusalem,Israel is bound by these laws and, thus, committed to limiting itself to a lawful response. This means that, while Hamas uses .International humanitarian law also requires that any military attack be "proportionate" ,
its military attacks against Hamas and other Jihadi groups, Israel is doing everything in its power to adhere to these principles and thus minimize harm to the civilian population: Israeli troop"

8-इस्राएल अरब पर  भारी   क्यों

यदि  ईश्वर  की  कृपा  हो  , धर्म  पर  निष्ठां  हो  और  देश  पर  अटूट प्रेम हो तो  थोड़े से लॉग भी   बहुत से लोगों  का मुकाबला  करने  में  सक्षम  हो सकते हैं  , इजराइल के बारे में  बाइबिल   में  लिखा है

"यहोवा ने पृथ्वी  के  सभी देशों  के लोगों  में से तुझे चुन लिया  ,कि तू  उसकी प्रिय  और निज प्रजा ठहरे  , यहोवा ने तुझे   स्नेह कर  के चुन  लिया इसका कारन यह नही कि तुम  गिनती  में अधिक  हो  , परन्तु तुम  तो सभी देशों  के लोगों  से गिनती में  कम   हो "
व्यवस्था विवरण 7 :7 -8

इन्हीं    विशेष  गुणों  के कारण  छोटा होने पर भी  इजराइल बड़े  मुस्लिम  देशों  का निडर होकर  मुकाबला  करता रहता है  , सबसे बडी बात   यह है कि इजराइल में सेकुल्लर  नामके  गद्दार  नहीं  हैं जो जिहादियों   का सफाया  करने में  रूकावट  पैदा कर सकें और कहें की  मुसलमान  आतंकी नहीं  होते।  चूँकि   मुसलिम  जिहादी  आतंकवादी  इजराइल  की तरह  भारत  को भी अपना  शत्रु  मानते हैं  , और भारत  के अंदर और  बाहर आतंकी वारदातें  करके  भारत  को बर्बाद   करने का  मंसूबा  रखते  हैं  ,इसलिए  आज हमें  इस्लामी  आतंक को निर्मूल  करने के लिए  इजराइल  की  नीति अपनाने की जरुरत है  . केवल  बड़ी जनसंख्या होने से   कुछ  नहीं  होगा  , जब  तक  देश में मौजूद  सेकुल्लर  गद्दारों का सफाया नहीं  होगा  भारत सुरक्षित  नहीं  रहेगा  .
पाठकों  से अनुरोध है  कि फेसबुक  के माध्यम   से इजराइल  के युवा  लोगों  से  मित्रता स्थापित  करें   ,और एक  ग्रुप बनायें

 (201)

शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016

करोड़ों मुसलमानों के निकाह अवैध हैं !

पाठकों   से  निवेदन  है   कि  इस  लेख  को  ध्यान   से  पढ़ें   , क्योंकि   यह  लेख सभी पाठकों  खासकर कानून   जानने  वालों   के  लिए अत्यंत उपयोगी   है  ,और  इस  लेख  का  विषय मुस्लिमों   में  प्रचलित अपनी  रिश्ते   की  बहिनों   के साथ  निकाह  करना ,  और इसके      बारे  कुरान आदेश    है  , यह   लेख  इसलिए   प्रासंगिक    है क्योंकि  इसी  सप्ताह  गुजरात   है हाई  कोर्ट   ने फैसला   दिया   है  कि   मुस्लिमों द्वारा  कुरान  की  गलत  व्याख्या   की   जाती  है .वास्तव    में  कुरान   में ऎसी  कई   आयतें मौजूद  है  ,जिनका  जाकिर   नायक   जैसे धूर्त  ऐसी व्याख्या  कर  देते  हैं ,जो  उस  आयत   के आशय   के विपरीत और भ्रामक   होती   है  ,जिस  से अरबी  से  अनभिज्ञ मुसलमान ऐसे   काम  कर  बैठते  हैं   , जो कुरान  के आदेश  के उलट  और रसूल  के  अधिकारों में  अतिक्रम  होता है .

अधिकांश मुस्लिम नहीं    जानते  हैं   कि कुरान   में एक  ऐसी  आयात  मौजूद   है   , मुल्ले   मौलवी  लोगों  को  उसका   जानबूझ  कर   सही  अर्थ   नहीं  बताते   , क्योंकि   सही   अर्थ  प्रकट  करने  से  लाखों  मुसलामानों  के  निकाह अवैध  हो    जायेंगे    , और  ऐसी   शादियों    से  पैदा  हुए बच्चे  नाजायज   संतान  माने   जायेंगे.

मुख्य   विषय पर  आने से  पहले  हमें अन्य   लोगों   में  रसूल  का  स्थान ( Status)   है   , यह   जानना     जरुरी      है ,    इसके  बारे   में यह  हदीस  बताती है।

1-रसूल का स्थान सर्वोपरि है !

"जाबिर बिन  अब्दुल्लाह   ने   कहा  कि रसूल  ने   कहा है   मैं   नबियों  का  " कायद  (  leader )यह शेखी   की   बात    नहीं   ,  मैं सभी  नबियों  पर  मुहर (seal ) यह शेखी  की   बात   नहीं    ,मैं   पहला  ऐसा सिफारिश  करने  वाला  हूँ   , जिसकी  सिफारिश  मंजूर   हो  जाएगी ,यह भी  शेखी  की   बात   नहीं  है ,"


رواه جابر بن عبد الله قال النبي (ص):أنا  قائد  من المرسلين، وهذا ليس التباهي، وأنا خاتم النبيين، وهذا ليس التباهي، وسأكون أول من يشفع ويتم قبول الشفاعة الأولى التي، وهذا ليس التباهي ".

 Narrated by Jabir ibn Abdullah
The Prophet (saws) said, "I am the leader (Qa'id) of the Messengers, and this is no boast; I am the Seal of the Prophets, and this is no boast; and I shall be the first to make intercession and the first whose intercession is accepted, and this is no boast.
."

Al-Tirmidhi Hadith 5764


2-औरतों के बारे में विशेषाधिकार 


"हे  नबी  हमने  तुम्हारे  लिए ( वह ) पत्नियां  हलाल  कर  दी  हैं   ,जिनके  मह्र  तुमने  दे  दिए  हैं  , और   वह  दासियाँ  जो  अल्लाह   ने " फ़ाय " के  रूपमे    नियानुसार  दी  हैं  , और   चाचा  की  बेटियां  , तुम्हारी  फुफियों  की  बेटियां  ,तुम्हारे  मामूँ  की  बेटियां   ,और  तुम्हारी   खालाओं  की  बेटियां  ,  जिन्होंने   तुम्हारे  साथ  हिजरत  की  है  , और  वह ईमान  वाली  स्त्री जो  अपने  आपको  नबी  के लिए " हिबा "   कर  दे  . और यदि  नबी  उस  से  विवाह  करना  चाहे, हेनबी  यह अधिकार  केवल  तुम्हारे  लिए   है   ,  दूसरे  ईमान  वालों    के  लिए  नहीं  है "  सूरा -अहजाब 33:50 



يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ إِنَّا أَحْلَلْنَا لَكَ أَزْوَاجَكَ اللَّاتِي آتَيْتَ أُجُورَهُنَّ وَمَا مَلَكَتْ يَمِينُكَ مِمَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَيْكَ وَبَنَاتِ عَمِّكَ وَبَنَاتِ عَمَّاتِكَ وَبَنَاتِ خَالِكَ وَبَنَاتِ خَالَاتِكَ اللَّاتِي هَاجَرْنَ مَعَكَ وَامْرَأَةً مُؤْمِنَةً إِنْ وَهَبَتْ نَفْسَهَا لِلنَّبِيِّ إِنْ أَرَادَ النَّبِيُّ أَنْ يَسْتَنْكِحَهَا خَالِصَةً لَكَ مِنْ دُونِ الْمُؤْمِنِينَ 


O PROPHET! Behold, We have made lawful to thee thy wives unto whom thou hast paid their wages, as well as those whom thy right hand has come to possess from among the captives of war whom God has bestowed upon thee. And [We have made lawful to thee] the daughters of thy paternal uncles and aunts, and the daughters of thy maternal uncles and aunts, who have migrated with thee [to Yathrib]; and any believing woman who offers herself freely to the Prophet and whom the Prophet might be willing to wed: this  is  a privilege for thee, and not for other believers -  sura-ahzab 33:50

(this verse has   43 words)

3-आयत  का  विश्लेषण 

इस  आयात में अरबी  के कुल 43  शब्दों  का  प्रयोग  किया  गया  है   , सुविधा  के  लिए  उनके  नंबर  दिए   जा  रहे  हैं , ताकि   सही अर्थ समझने  में  आसानी  हो  ,
1.इस  आयात  के  शब्द  संख्या  3 ,4  और 5  में अरबी  में कहा  है "इन्ना अहललना  लक (أَحْلَلْنَا لَكَ ) अर्थात  हमने  तुझ पर वैध किया (We have made lawful to thee ) . इस  से स्पष्ट  होता  है  ,कि कुरान  का यह  आदेश  केवल  नबी   के  लिए है  , मुसलमानों  के लिए नहीं ,

2.इसके  बाद  शब्द  संख्या 6 ,7 ,8  और  9  में  अरबी  कहा   है  , "अजवाजक  अल्लती अतयत उजूरहुन्न (أَزْوَاجَكَ اللَّاتِي آتَيْتَ أُجُورَهُنَّ)  अर्थात  वह पत्नियां  जिनका  मूल्य ( मेहर )  चूका  दिया  हो  ( whom thou hast paid their  wage ).अरबी   में "उजूर -  أُجُورَ  " का  अर्थ   मजदूरी का  वेतन(wage ) होता  है 'दूसरे  शब्दों   में  पत्नियों  को  शादी  के समय  दिए  जाने  वाला  मेहर उनकी योनि  की  कीमत  मानी   जाती  है   , और यदि पत्नी  को  मेहर  नहीं  दिया  गया  हो तो शादी अवैध  हो  जाती  है. इस लिए इस आयत में  नबी  की उन्हीं  पत्नियों  को  हलाल   माना  है   मुहम्मद  ने   जिनकी   मजदूरी  यानि  मेहर  चूका दिया   हो.
इसके  बाद  वैध  पत्नियों  के अतिरिक्त    नबी  को  जिन  स्त्रियों  से शादी  करने को हलाल यानि  वैध किया  गया  वह बताया गया है ,


3.इसके  बाद नबी   को  अपनी   वैध पत्नियों  के आलावा  जिन  स्त्रियों से शादी  को  हलाल किया  गया उन्हें शब्द संख्या 11 और 12  में  अरबी में "मलकत यमीनुक ( مَلَكَتْ يَمِينُكَ  ) कहा गया  है  ,चालाक  मुल्ले  अंगरेजी  में  इसका  अर्थ  (possess from among the captives of war)  यानी  युद्ध  में  पकड़ी गयी रखैलें   जिन्हे  कुरान  के  हिंदी  अनुवाद  में "लौंडियाँ "   कहा   गया है , ज़ाकिर  नायक  इसका  अर्थ "right hand posesed "  करता है  और ऐसी  औरतों  को  माले " गनीमत  - غنيمة"यानी   युद्ध  में लूटा  हुआ माल  बताता   है  , यही   कारण  है  कि  मुस्लिम शासक  युद्ध  में धन  के  साथ  औरतें  भी  लूट  लेते  थे , लेकिन ऐसे  मुल्ले  इस  आयत  के 14  वें  शब्द "अफाअ ( أَفَاءَ)     को दबा  देते  है   , यह शब्द  अरबी  के " फाअ (فاء )  से  बना  है  , फाअ   युद्ध  किये बिना ही  अल्लाह की कृपा  से  मिलने  वाली वास्तु   को  कहा  जाता  है  , यह शब्द गनीमत  के  बिल्कुल  विपरीत  है  ,

  4.  इसके बाद  शब्द  संख्या 17  से  लेकर 38  तक  नबी   को  रिश्ते  की  बहिनों  और हिजरत  करने  वाली  स्त्रिओं   से शादी हलाल  कर  दी , इनका हिंदी  अनुवाद  सरल  शब्दों  में  दिया गया  है  ,

5.इसके  बाद आयत   के  शब्द  संख्या  39 से  43  तक अत्यंत  महत्वपूर्ण   बात  कही  गयी  है  , जिसे  मुसलमान  जानबूझ   कर  अनदेखी   कर देते  हैं  ,इस आयत अंतिम  शब्दों में अरबी   में  " कहा  गया है  "खालिसतन  लक मिन दूनिल  मोमिनीन (خَالِصَةً لَكَ مِنْ دُونِ الْمُؤْمِنِينَ )अर्थात खासकर  तेरे  लिए , ईमान  वालों  को छोड़  कर .(Purely for thee  excluding  other  believers)

इस आयत  से साफ़ साफ़ चलता   है कि अल्लाह  ने  केवल   नबी को ही रक्तसंबधी  बहिनों  से  विवाह करने  का विशेष अधिकार  दिया   था , मुसलमानों को नहीं   , इसी  लिए  कुरान  की सूरा -निसा 4:23  में रक्तसंबधी  बहिनों  से  निकाह  करने   की  साफ  मनाही  की  गयी   है  ,


4-मुसलमानों में बहिनों  से विवाह 
निकट  सम्बन्ध  की  बहिनों  से  शादी   को अंग्रजी   में "consanguinity" कहा  जाता   है   ,

कुरान   की  इस आयत  दिए   गए  स्पष्ट  आदेश  होने पर भी  दुनिया  के  सभी  देशों   के  मुस्लिम  रसूल   के  विशेषाधिकार  को  छीन   कर धड़ल्ले  से अपनी रिश्ते  की  बहिनों   को  ही  अपनी पत्नी बना  लेते   हैं   ,  ऐसे लोगों  की   बहुत  बड़ी  संख्या   है  ,  विकी  इस्लाम   के अनुसार यह  जानकारी  ली  गयी   है   .

1--Pakistan, 70 percent 2-Turkey  25-30 percent3- Arabic countries  34 percent 4- Algiers 46 percent 5--Bahrain, 33 percent 6-- Egypt, 80 percent 7--Nubia (southern area in Egypt), 60 percent 8- Iraq, 64 percent 9-Jordan, 64 percent 10-- Kuwait, 42 percent 11-- Lebanon, 48 percent 12--Libya, 47 percent 13-Mauritania, 54 percent  14-Qatar, 67 percent 15-Saudi Arabia, 63 percent 16- Sudan, 40 percent 17-Syria, 39 percent  18-Tunisia, 54 percent 19-United Arabic Emirates and 45 percent20-Yeman 47percent 


5-मुसलमान ही  कुरान के विरोधी है 

मुसलमानों    का  स्वभाव   है  कि जब  कोई   गैर मुस्लिम  , रसूल  , या  कुरान  के  बारे  में  कोई प्रश्न  उठाता  है   , या  टिप्पणी  कर  देता  है  ,तो  मुस्लमान  जमीन  आसमान एक  कर  दते  हैं   , और लडने  पर  आमादा   हो  जाते हैं   ,  लेकिन  जब  निजी स्वार्थ  का  मामला  होता है   , उसी  कुरान के  आदेशों  की  धज्जियाँ  उड़ा  देने  में कोई  कसर  नहीं  छोड़ते   . यह कुरान   का गलत  अर्थ , या व्याख्या  करने  का  मामला नहीं  है  , जैसे  गुजरात हाईकोर्ट  ने अपने  फैसले  में  कहा  है  ,  यह तो  खुले  आम कुरान ( अल्लाह ) के आदेशों का उललंघन और रसूल   के अधिकारों में अतिक्रमण  है  . जो गुनाहे  अजीम  है  ,

6-हम  क्या  करें ?

इसलिए  इस  लेख के  माध्यम  से  हमारी  मांग  है  कि अदालत  मुसलमानों  के  ऐसे रक्तसंबधी   सभी  निकाहों  को अवैध घोषित  करके अमान्य  कर दे  , और ऐसे  अवैध निकाहों से पैदा हुए बच्चो  को  हरामी होने  से पिता  की संपत्ति का  वारिस  नहीं  माना   जाये   , और बच्चों  के  माँ  बाप   की जायदाद सरकार के  खजाने  में  जमा  करा  दी  जाये  , कानून   के  जानकर  इस  मुद्दे पर   जनहित  याचिका  जरूर  लगाएं    , हमने  तो सन्दर्भ सहित पुरे  सबूत  उपलब्ध  कर  दिए   , इनका कोई  भी  खंडन   नहीं  कर  सकेगा  , चाहे  जाकिर  नायक   की पूरी गैंग  क्यों न आ  जाए

(302)

मंगलवार, 13 दिसंबर 2016

रसूल के मुस्लिम गधे की कथा

यह  एक  ऐसे गधे  की  कथा   है जो   मुहम्मद  साहब    के संपर्क  में  आते  ही  मुस्लिम    बन   गया  था  , और मनुष्यों  की  तरह अरबी  में बातें  करने  लगा  था , भले  ही लोग  इस  बात  पर  विश्वास  नहीं    करें   लेकिन मुसलमान  इस  बात  पर  ईमान  रखते  है  , और इस  कथा को एक  ऐतिहासिक  घटना  बताते   है , क्योंकि इस गधे  का  सम्बन्ध "खैबर "   की लड़ाई   से   है  ,

1-खैबर  की   लड़ाई 
मुहम्मद साहब इस्लाम  का  विस्तार  करने  के  लिये और विधर्मियों  का  माल  लूटने  के  लिए  युद्ध किया करते  थे  , अपने  पूरे  जीवन   में  उन्होंने  सौ (100 ) लड़ाइयां  या  युद्ध   किये थे  , मुहम्मद  साहब और उनके  साथी  छोटी छोटी  चीजें   भी लूटने के  लिए युद्ध  किया  करते  थे , मुहम्मद  साहब  की  53  वीं लड़ाई सन 628 के  माह मई  और जून  के   बीच  हुई  थी  , इस लड़ाई  को "गज्वये खैबर - غزوة خيبر  " कहा   जाता  है ,इस  लड़ाई   में मुसलमानों   ने  मदीना    से 150 कि मी  उत्तर  पश्चिम स्थित खैबर  नामकी  जगह   यहूदियों   की  बस्ती  पर   अचानक  हमला  कर  दिया  था ,इस हमले   में निहत्थे  93  यहूदी   और  सिर्फ  16  मुसलमान  मारे  गए  थे .इस  लूट   में   मुहम्मद  साहब  को "सोने , चांदी के  सिक्कों   से  भरे दस पात्र  ,चार भेड़ें  ,चार  बकरियां  , और  एक काला  जंगली  गधा ( black, haggard donkey)  मिला  था।


2-गधे  की  हदीस 

मुसलमान  एक  गधे  की   बात  को  भी  हदीस  मान  लेते   हैं ,   क्योंकि प्रसिद्ध इस्लामी  इतिहासकार "इस्माइल बिन उमर इब्न  कसीर -إسماعيل بن عمر بن كثير" (  1301–1375  ) ने अपनी  किताब "अल  बिदायः वल  निहायाः - البداية والنهاية      "(  The Beginning and the End ) के छठवें बाब (chapter "में इस घटना   का   वर्णन   किया  है  , इसका  शीर्षक   है "हदीसुल  हिमार -  حديث الحمار
 " रखा  है  . इसका  अर्थ   है गधे  की  हदीस ( The Conversation of the Donkey) यह  पूरी हदीस  अरबी  भाषा   में   है , जिसका  हिंदी सरलार्थ    दिया    जा  रहा   है ,

3-गधा - मुहम्मद  वार्तालाप
रसूल  ने  गधे  से  पूछा ,"तेरा  नाम  क्या  है ?("ما اسمك؟" )-अरबी  में "मा इस्मुका "

 गधे  ने  कहा -यजीद   इब्न  शिहाब ,( يزيد بن شهاب )

तब गधा   रसूल से बोला बोला अल्लाह    मुझे साठ गधों   का  पुरखा  बनाया  लेकिन  मेरे  किसी  दादा  परदादा पर  कोई  नबी   नहीं  बैठा ,सभी  गुजर  गए , सिवा  आपके ,मुझे  उम्मीद  है  की  आप  मेरे  ऊपर   जरूर  सवारी  करेंगे ,गधे   ने  बताया  कि  मैं  पहले  एक यहूदी   के   पास  था , जो  मेरी बेकदरी  करता  था ,और  मेरे  पेट और पीठ  पर लातें  मारता  था
,तब रसूल ने  गधे  से कहा ,

" मैं  तुम्हें याफूर  पुकारूँगा "(قد سميتك يعفورا )-अरबी  में " कद समैय तुका  याफूर "

गधा  बोला " मैं  मानूँगा "( لبيك)-अरबी  में "लब्बैका "
तब  रसूल  ने  गधे  से  पूछा " क्या  तुम्हें औरतें चाहिए ?(أتشتهي الإناث؟ ).-अरबी  में "अ तशतही अल अनास "

गधे  ने  उत्तर  दिया  " अभी  नहीं " ( لا فكان  )-अरबी  में "ला  फकान "
इसके बाद  गधा   मुसलमान   हो  गया और  रसूल उस पर  सवारी  करने  लगे ,और  जब   काम  पूरा  हो जाता था  तो  रसूल गधे को घर  रख  लेते थे , और जब कोई  रसूल  से मिलने  आता था  तो  गधा दरवाजे  पर सिर  ठोक  कर रसूल   को  सूचना   दे देता था ,और  जब रसूल  बहार जाने  लगते थे तो गधा  लोगों  को  संकेत   दे  देता  था ,

गधा  रसूल   का  इतना  भक्त  बन   गया  था कि जब  रसूल गुजर  गए  तो उनके  गम  में दुखी  होकर  गधे ने "अबी अल  हैसम बिन अल  तहयान لأبي الهيثم بن التيهان -   " के  कुंएं  में कूद  कर  अपनी  जान  दे  दी.


لما فتح الله على نبيه صلى الله عليه وسلم خيبر أصابه من سهمه أربعة أزواج نعال وأربعة أزواج خفاف وعشر أواق ذهب وفضة وحمار أسود، ومكتل قال: فكلم النبي صلى الله عليه وسلم الحمار، فكلمه الحمار، فقال له: "ما اسمك؟" قال: يزيد بن شهاب، أخرج الله من نسل جدي ستين حمارا، كلهم لم يركبهم إلا نبي لم يبق من نسل جدي غيري ولا من الأنبياء غيرك، وقد كنت أتوقعك أن تركبني قد كنت قبلك لرجل يهودي، وكنت أعثر به عمدا وكان يجيع بطني ويضرب ظهري، فقال له النبي صلى الله عليه وسلم: "قد سميتك يعفورا، يا يعفور" قال: لبيك. قال "أتشتهي الإناث؟" قال: لا فكان النبي صلى الله عليه وسلم يركبه لحاجته فإذا نزل عنه بعث به إلى باب الرجل، فيأتي الباب فيقرعه برأسه، فإذا خرج إليه صاحب الدار أومأ إليه أن أجب رسول الله صلى الله عليه وسلم، فلما قبض النبي صلى الله عليه وسلم جاء إلى بئر كان لأبي الهيثم بن التيهان فتردى فيها فصارت قبره، جزعا منه على رسول الله صلى الله عليه وسلم

راجع البداية و النهاية لإبن كثير .. باب حديث الحمار

इस्लामी  परिभाषा  में मुहम्मद  साहब  के  कथन और आदेशों  को  हदीस  कहा  जाता  है  , और  कुरान  के  बाद  हदीसों  को ही   प्रामाणिक माना जाता  है ,
  लेकिन  इस कहानी  में   मुहम्मद  साहब   ने  सिर्फ  तीन   ही  वाक्य   कहे  हैं , फिर भी   मुसलमान इस कथा को  हदीस   कहते  हैं , उनका असली उद्देश्य  मुहम्मद  साहब  को चमत्कारी  दैवी  शक्ति  संपन्न    और अल्लाह का  सबसे  महान   नबी  और  रसूल  साबित  करना  है , मुस्लिम  इस कपोल कल्पित गप्प  को भले ही  हदीस  मानें  , परन्तु अरबी  के  जानकर  ईसाई विद्वानों  ने इस हदीस  का मजाक  उड़ाते हुए  कहा  कि "ऐसी गप्प पर  कोई  गधा ही  विश्वास   करेगा " . फिर  भी इस  हदीस  रूपी कल्पित झूठी कहानी  को पढ़  कर सामान्य  व्यक्ति  भी यही सवाल  करेगा ,
1.जब  दुनिया  का  सबसे  बड़ा  मुर्ख कहाने  वाला  प्राणी  गधा मनुष्य( मुहम्मद ) के साथ रहकर अरबी  बोलना  सीख  गया  , तो  मुहम्मद  साहब जीवन भर में  अपनी  ही  मातृभाषा  अरबी  लिखना  और  पढ़ना  क्यों  नहीं  सीख  पाये ? बताइये  गधा कौन   है ?
2.मुहम्मद साहब  ने  जैसे गधे  को  औरतों  का  लालच   दिया ,लेकिन गधे   ने  मना  कर  दिया   ,क्योंकि वह  जानता  था कि जन्नत  की बातें  झूठी  हैं
 उसी  तरह मुल्ले  मौलवी  मुसलमानों  को  जन्नत  की  हूरों  का  लालच  देकर  जिहाद  करवाया  करते  हैं  , और  मुसलमान   मान  लेते  हैं  . बताइये   गधा  कौन है ?
3-जैसे  गधा  बिना  सोचे  समझे  मुसलमान   बन  गया  था  , और  आखिर  उसे आत्महत्या  करनी  पड़ी थी  , उसी  तरह  जो लोग  इस्लाम के झूठे प्रचार  से  भ्रमित  होकर  इस्लाम   अपना  लेते  हैं  ,वह गधे  नहीं  तो  और कौन  हैं ?

क्योंकि  उन  लोगों   का अंजाम  भी  उसी   गधे  जैसा  ही होगा , और  जो लोग  इस  लेख को  ध्यान  से नहीं  पढ़ें   वह  खुद समझ लें   कि  वह  कौन   कहलाये  जायेंगे ?


(272)


http://www.answering-islam.org/Shamoun/yafoor.htm

शनिवार, 3 दिसंबर 2016

भारत में जिहादी हमले क्यों ?

जिस देश के लोग अपने देश में होने वाली ऐतिहासिक घटनाओं से सबक नहीं लेते वह इतिहास के पन्नों खो जाते है . और जिस देश के लोग अपने देश के शत्रुओं की कपट नीति जाने बिना उन से दोस्ती की अपेक्षा रखते है .वह लोग उन्ही शत्रुओं के हाथों से नष्ट हो जाते हैं .इतिहास साक्षी है कि लगभग सातवीं शताब्दी से लेकर आजतक मुस्लिम हमलावर , आतंकवादी भारत पर लगातार हमले करते आये हैं .पहले जो हमलावर आये थे वह तलवार लेकर इस्लाम का शांति सन्देश फ़ैलाने और यहाँ के हिन्दुओं को मुसलमान बनाने के लिए आये थे .लूटमार करना तो मुसलमानों का स्वभाव है , जब उन लोगों ने अपने देश बर्बाद कर दिए तो भारत को क्यों छोड़ देते .उनका असली उद्देश्य तो भारत को इस्लामी देश बनाना था . और जब दुर्भाग्य से भारत के जिस भाग में भी इस्लामी हुकूमत बन गयी थी तो मुस्लिम बादशाहों ने बड़े प्रेम से क्रूरता पूर्वक लोगों को मुसलमान बना लिया . और जिसने भी इस्लाम से इंकार किया उनकी शांति पूर्वक सामूहिक हत्याएं करा दी . और प्रेम पूर्वक उनकी औरतों पर बलात्कार किया .यहाँ तक बच्चों को भी दीवाल में जिन्दा चुनाव दिया .क्योंकि इस्लाम प्रेम और शांति का धर्म है , औरअल्लाह ने मुहम्मद को दुनिया के लिए रहमत और दयालुता बनाकर भेजा था .हम भारत पर सभी हमलावर , लुटेरों ,आतंकवादियों को अपराधी नहीं बल्कि जिहादी मानते हैं .और जिहाद इस्लाम में अनिवार्य और पवित्र कार्य माना गया है .हमें स्वीकार करना होगा कि मुसलमान जहाँ भी रहेंगे जिहाद करते रहेंगे .अंतर केवल इतना है कि पहले जिहादी फौजें लेकर जिहाद करते थे आजकल गुप्त रूप से बम विस्फोट करते हैं .फिर भी जो सेकुलर लोग हिन्दू मुस्लिम एकता की वकालत करते हैं ,हम उन से यह सवाल पूछना चाहते हैं
1-क्या सेकुलर बताएँगे 
1-क्या भारत का विभाजन करके पाकिस्तान धर्म ( इस्लाम ) के कारण नहीं हुआ था ?
2-पाकिस्तान की मिसाइलों के नाम " गजनी , गौरी , अब्दाली "क्यों रखे गए है ,क्या इन से पाकिस्तान के इरादों का पता नहीं चलता ?
3-भारत और पाकिस्तान का झगडा क्या सिर्फ जमीन के लिए ही है ,क्या पूरा कश्मीर देने पर भी पाकिस्तान शांति से बैठ जायेगा ?
4-सारे जिहादी आतंकवादी अपनी आतंकी कार्यवाहियों से समय कुरान की आयतें क्यों इस्तेमाल करते हैं ?
5-पाकिस्तान और भारतके मुल्ले जिहादी आतंकवादियों को काफ़िर घोषित क्यों नहीं करते ?क्या इस से यह साबित नहीं होता कि आतंकवाद इस्लाम में जायज है .?
6-सेकुलर होने का ढोंग कराने वाले बताएं कि किसी मुल्ले मौलवी ने कसाब और अबू जिंदल के खिलाफ फतवा क्यों नहीं दिया ?
7-बताइए कि जब भी कोई आतंकवादी मुठभेड़ में मारा जाता है तो ,सेकुलर उसे फर्जी एन काउंटर साबित करमे में क्यों लग जाते है ?
2-भारत का विभाजन 
मुसलमानों ने भारत पर करीब तेरह सौ साल राज किया ,उनको लगा कि उन्होंने ईरान , अफगानिस्तान , और इंडोनेसिया को इस्लामी देश बना दिया वैसे ही वह भारत को भी एक इस्लामी देश बना देंगे .इतने बरसों तक भारत का अन्न खाकर भी मुसलमानों के दिलों में हिन्दुओं और हिंदुस्तान के प्रति नफ़रत उबलती रहती है .जैसा कि जिन्ना ने कहा था , कि "हिन्दू और मुसलमान दो मुख्तलिफ कौमें हैं .जो कभी और किसी भी हालत में एक जमीन पर नहीं रह सकते ,हमारी , जुबान अलग है , तहजीब अलग है , खुराक अलग है , मजहब अलग है , यहांतक हमारा खुदा भी अलग है .इसलिए हमें अलग हिस्सा चाहिए जहाँ हम इस्लाम का पालन कर सकें .इस बात को " two nation theory " या द्वि राष्ट्रिय सिद्धांत कहते हैं .बाद में सन 1931 में लीग के इलाहबाद सम्मलेन में इकबाल ने भी इस सिद्धांत का समर्थन कर दिया था .
आखिर अपनी कुर्सी बचाने के लिए नेहरू के कहने पर गाँधी ने जिन्ना कि मांग को स्वीकार कर लिया और भारत के तीन तुकडे हो गए .धर्म के आधार पर भारत के टुकडे करके पकिस्तान क्यों बनाया गया था .और पाकिस्तान के इतिहास और भविष्य के बारे में इस्लाम के प्रसिद्द विद्वान् डा . इसरार अहमद और बी जे पी के नेता जसवंत सिंह जो चर्चा हुई थी , उसके बारे में लिखने की जरूरत नहीं है क्योंकि वह इस विडियो में मौजूद है .
Dr.Israr Ahmed and Jaswant Singh About Pakistan,s History

http://www.youtube.com/watch?v=MmH5MA4cW5c&feature=fvwrel

3-भारत में आतंकवाद का कारण
जब पाकितान बना तो गाँधी ने कहा कि यह दो भाइयों का बटवारा है , इसलिए गाँधी नेहरू ने पाकितान को करोड़ों रुपये भी दे दिए . यहाँ तक तोपें , टैंक , रेल के इंजन और डिब्बे भी दे दिए थे .मुर्ख लोग यह समझ रहे थे कि अब पाकिस्तान शांति से अपने नए देश के विकास पर ध्यान लगाएगा और भारत भी शांति से रह सकेगा .लेकिन ऐसा न कभी हुआ है और न होगा .आइये आपको इन सभी सवालों के उत्तर प्रमाणिक हदीसों के आधार पर दिए जा रहे है .ताकि सब लोगों का भ्रम दूर हो जाये .
आज हमें इस सत्य को स्वीकार करना ही पड़ेगा कि भारत और पाकिस्तान के जितने भी युद्ध हुए है .उनके पीछे न तो सीमा का विवाद था , और न कश्मीर का मामला था .और न ही भारत ने पाकिस्तान का माल लूट लिया हो .वास्तव में यह एक वैचारिक युद्ध का प्रयोगात्मक ( Practicle ) रूप है .जिनका मूल मुहम्मद साहब की वह हदीसें हैं मुसलमान जिनको " गजवाए हिंद "यानि हिंदुस्तान पर हमला कहते हैं .चूँकि हरेक मुसलमान चाहे वह पाकिस्तानी हो या भारतीय हदीसों को मानना और उसका पालन करना अपना धार्मिक कार्य मानता है .इसलिए हरेक मुसलमान यही चाहता है जो इस हदीस में लिखा है , देखिये
"आगे चल कर भारत के साथ जो युद्ध होगा उसमे सभी हिन्दू समर्थक (सेकुलर भी )की पराजय हो जाएगी . और उनके स्थान पर इस्लामी हुकूमत कायम हो जाएगी .इंशा अल्लाह आप देखेंगे कि उस युद्ध ( गजवा) में सारी इस्लामी शक्तियां जैसे अफगानी तालिबान , और जमातुत दावा के साथ पाकिस्तान की फ़ौज भी हिंदुस्तान पर हमला करके अपना कब्ज़ा कर लेगी .तुम इस गजवाये हिंद ( भारत पर कब्ज़ा ) को नहीं रोक सकोगे ,क्योंकि यह एक पवित्र जिहाद है , जिसमे अल्लाह ने विजयी होने का वादा किया है .इसलिए कोई भी मुसलमान तब तक चैन से नहीं बैठेगा , जब तक इन हदीसों में दी गयी भविष्यवानियाँ पूरी नहीं हो जाती .

Next War with India, you will see collapse of government of  Pro-Indians replace it with Islamic emirates.
Inshallah you will see the whole Islamic emirates, Afghan taleban, jamaat ud dawa, along with Pak Armed forces coming to capture India  you.
You cannot stop Ghazwa e hind - It divine war and God promised victory
True Muslims will not surrender till their fulfil the prophecy.

An Ideological Front / Ghazwa-e-Hind

http://www.youtube.com/watch?v=IX3ja7nKAHI&feature=related

4-गजवतुल हिंद क्या है 
अरबी में " गजवा " का अर्थ आक्रमण ( invasion ) होता है , और "गजवतुल हिंद "भारत पर आक्रमण (invasion of India)हैमुहम्मद साहब के समय अरब में भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था .और भारत की समृद्धि और सम्पदा के चर्चे रोम , इरान , और इस्राएल तक होते थे .और सब जानते थे कि भारत सबसे बड़ा हिन्दू देश है
बहुत कम लोगों को और अधिकांश मुसलमानों को भी यह पता नहीं है कि , मुहम्मद साहब की लालची नजर भारत की दौलत पर थी .और वह सोचते थे की अगर हिंदुस्तान की दौलत लूट कर हिन्दुओं को कंगाल कर दिया जाये तो वह इस्लाम कबूल कर लेंगे .मुहमद को पता चल गया था कि हिन्दू अपनी दौलत बुतखानों ( मंदिरों ) में रखते है .लेकिन जब मुहम्मद साहब अपनी इस इच्छा को पूरी किये बिना ही दुनिया से कूच कर गए .तो उनकी आत्मा शांति के लिए और उनकी इच्छा को पूरा करने के लिए मुसलमान आजतक जिहादी आतंक फैलाते रहते हैं .
सेकुलर लोग और हिन्दू मुस्लिम एकता के वकील पाकिस्तान के साथ आपसी मित्रता और सहयोग के चाहे लाखों अनुबंध कर लें , लेकिन .जब तक भारत और पाकितान के मुसलमान मुहम्मद साहब उस अंतिम इच्छा को पूरा नहीं कर लेगें जो इन हदीसों दी गयी है .किसी न किसी रूप में आतंकवाद यानि जिहाद होता रहेगा .
5-हदीसों में मुहम्मद की इच्छा 
सुन्नी मुसलमानों की हदीसों की छः किताबें है . लेकिन मुल्ले इतने चालाक हैं कि जो हदीसें लोगों को दिखने के लिए होती हैं उनका अंगरेजी या दूसरी भाषामे अनुवाद प्रकाशित कर देते है .और जो हदीसें सिर्फ जिहादियों के लिए होती हैं उनको सिर्फ अरबी में रहने देते हैं .यही नहीं एकही हदीस का अरबी में अलग और दूसरी भाषामे अलग नंबर देते हैं , ताकि मूल हदीस का पता नहीं चल सके .ऐसी एक हदीस की किताब का नाम " सुन्नन अन नसाई  سنن النسائي" है जिसके " किताब अल जिहाद كتاب الجهاد"के अध्याय में " गजवतुल हिंद غزوة الهند"के सम्बन्ध में जो हदीसें दी गयी हैं , उन मेसे कुछ यहाँ दी जा रही हैं
1.अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने हमसे वादा किया कि हम हिंदुस्तान पर चढ़ाई करेंगे . और उसे पायमाल कर देंगे .ऐसा अल्लाह ने मुझे निर्देश दिया है .और अगर अल्लाह मुझे वह दिन देखने का समय देगा .तो हम हिंदुस्तान पर हमला जरुर करेंगे .और इस काम के लिए हम अपनी जिंदगी भी कुर्बान कर देंगे .और अगर हम मर जायेंगे तो हमें शहीदों में सबसे ऊँचा दर्जा मिलेगा .और अगर कामयाब हो जायेंगे हिंद की सारी दौलत लेकर वापिस आएंगे . फिर रसूल ने कहा तुम लोग इस बात के गवाह हो .
 الأحاديث عن غزو الهند   سنن النسائي


أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ عُثْمَانَ بْنِ حَكِيمٍ، قَالَ: حَدَّثَنَا زَكَرِيَّا بْنُ عَدِيٍّ، قَالَ: حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَمْرٍو، عَنْ زَيْدِ بْنِ أَبِي أُنَيْسَةَ، عَنْ سَيَّارٍ، ح قَالَ: وَأَنْبَأَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ سَيَّارٍ، عَنْ جَبْرِ بْنِ عَبِيدَةَ، وَقَالَ عُبَيْدُ اللَّهِ: عَنْ جُبَيْرٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: «وَعَدَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ غَزْوَةَ الْهِنْدِ، فَإِنْ أَدْرَكْتُهَا أُنْفِقْ فِيهَا نَفْسِي وَمَالِي، فَإِنْ أُقْتَلْ كُنْتُ مِنْ أَفْضَلِ الشُّهَدَاءِ، وَإِنْ أَرْجِعْ فَأَنَا أَبُو هُرَيْرَةَ الْمُحَرَّرُ

Sunan An-Nasa'i Book #25 - The Book of Jihad.Chapter 41. Invading India  -3175. 
2-रसूल के आजाद किये गए गुलाम . सुबान ने कहा कि रसूल ने कहा एक समय मेरी उम्मत के लोग ( मुसलमान )दो गिरोहों में बंट जायेंगे और हिंदुस्तान पर दौनों तरफ से हमला करेंगे .अल्लाह उनको जहन्नम की आग से बचा लेगा .फिर एग गिरोह हिंदुस्तान को लूटेगा और दूसरा गिरोह दौलत यहाँ पहुंचा देगा "
यह हदीस जिन इमामों की किताबों में है उनके नाम इसप्रकार हैं इमाम हम्बल की मुसनद ,इमाम नसाई की सुंनं अल मुजतबा ,इब्ने अबी असीम की किताब अल जिहाद ,इमाम तिबरानी की अल मोजम अल ऑस्त्त.इत्यादि
3-अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा है हमारा दल बेशक हिंदुस्तान पर हमला करेगा , और अल्लाह उसे फतह हासिल करेगा . फिर वह दल हिंदुस्तान के हुक्मरानों के गले में जंजीर डाल घसीटेंगे . इस से अल्लाह खुश होगा "
यह हदीस नुईम बिन हम्माद ने अपनी हदीस किताब अल फितन ,में और इशक बिन रहूया ने अपनी मुसनद में दर्ज की है
यहाँ पर दी गयी हदीसें और ऐसी ही दूसरी हदीसें पाकिस्तान में खुले आम और भारत के मदरसों में छुप कर पढाई जाती है .और मुसलमानों को जिहाद के लिए तय्यार किया जाता है .जिस से भारत के प्रति नफ़रत का माहौल पैदा होता है .जैसा कि इस विडियो में दिया है .
(Annual IJTIMA 2011 Karachi Pakistan on 8th October 2011)

Pakistan K Baare Mai BASHARAT.wmv

http://www.youtube.com/watch?v=FrEEn9Aoi9s&feature=related

भारत में होनेवाली सभी आतंकवादी घटनाओं के पीछे इस्लाम की वह नफ़रत सिखाने वाली हदीसें है , जिनका सभी मुसलमान पालन कर रहे है .हमें यह भी स्वीकार करना होगा कि बिना यहाँ के स्थानीय गद्दारों की मदद के बाहर के आतंकवादी कभी सफल नहीं हो सकते .
(200/57)


http://www.paklinks.com/gs/religion-and-scripture/308359-ghazwa-e-hind-when-pakistan-will-conquer-india.html

सोमवार, 6 जून 2016

मक्का में शैतान की मूर्ति !!

कुछ समय  पहले एक    मुस्लिम  युवा   ने सवाल   किया  था  ,कि आप  लोग धातु  , मिटटी  और पत्थरों  की  मूर्तियों   की  पूजा  क्यों  करते हो ? क्या  आपके  भगवान  इनके  भीतर  घुसे हुए हैं ? भला   यह  बेजान    मूर्तियां  भी कुछ  महसूस  कर  सकती   हैं  ?    जो  आपकी  दुआएं  सुन  लेंगी ?

हम इस  लेख   के  माध्यम   से  उन हजरत   से  पूछना  चाहते  हैं   कि  मुसलमान  हज  के  दौरान शैतान  को मारने  के  लिए "जमरात " नामक खम्भे  पर  पत्थर  क्यों  मारते हैं ? क्या  शैतान  उनमे  घुसा हुआ  है  , ?और  अगर शैतान  उनमे  हैं  ,तो  इतने  बरसों  तक  पत्थर  मारने  पर  भी  शैतान  अब तक  क्यों   नहीं  मरा ? जबकि पत्थर   मरने   वाले  हजारों  हाजी  मर  गए , क्या अल्लाह   की  तरह  शैतान   भी अमर है ?

1- शैतान  का  परिचय 

इस्लाम से  काफी  समय  पहले  से ही अरब  के  लोग शैतान   को  अल्लाह  का प्रतिद्वंदी  शक्तिशाली   मानते   थे  , इस्लामी   मान्यता  के  अनुसार  शैतान    भी  अल्लाह   की   तरह  अमर  है   , लेकिन शैतान   का  जन्म  लगभग   साठ  हजार   पहले   हुआ   था   , शैतान    को  कुरान   में "इबलीस -  ابليس "  भी   कहा  गया   है  , परन्तु   उसका  असली   नाम  "अजाजील -   عزازيل  "   है   , जो तौरेत यानि  बाइबिल के शब्द "अजाज एल - עֲזָאזֵל "से  लिया  गया   है . हिन्दी    में  इसका  अर्थ   ईश्वर  की  फटकार   है (Damnation of God )

वास्तव    में   इब्लीस  एक  जिन्न  है  ,जिसे अल्लाह   ने "मुअल्लिमुल मलकूत - معلم الملكوت "   यानी फ़रिश्तों का  सरदार  बना  दिया  था .इब्लीस  के  पिता  का नाम खबीस है ,जिसका  चेहरा सिंह  की  तरह   है  , और  वैसा   ही  स्वभाव   है .इब्लीस  की   माँ  का  नाम " निलबीस  " है  , जिसका  चेहरा शेरनी  की  तरह   है   , यह  उग्र     स्वभाव  की  है .  इब्लीस  की  पत्नी   का   नाम "तरतबा "  है,इब्लीस  के  पांच   लडके  हैं    ,  उनके   नाम  और  काम   इस  प्रकार   हैं  ,                  

1.ताबर-लोगों के मन में विकार, भ्रम, जटिलता और मन की व्याकुलता उत्पन्न  करता   है

2.आवर- दुष्कर्मों  की  प्रेरणा   देता   है

3.मसौत-झूठ    बोलने  और  धोखा  देने   की  प्रेरणा   देता   है

4.वासिम -परिवार  और  रिश्तेदारों  में झगडे  और  समाज   में  दंगे करवाता   है

5. जकनबार -बाजारों   में  विवाद और अफवाहें  फैला   कर लोगों  में लड़ाई   करवाता  है

2-शैतान  का सिंहासन  समुद्र  में  है 

जो   मुर्ख   लोग  शैतान   को  पत्थर   मारने के  लिए  मक्का   जाते  हैं   ,  उन्हें  पता  होना  चाहिए  कि शैतान समुद्र में  रहता  है   , जैसा  कि इस हदीस  में  कहा  गया   है  ,

"जबीर  बिन  अब्दुल्लाह  ने  कहा   कि रसूल   ने बताया   है कि "शैतान   का  सिंहासन समुद्र  में  है ( The throne of Iblis is upon the ocean  ). अरबी   में "इन्न अर्शुल इबलीस अला बहर- إِنَّ عَرْشَ إِبْلِيسَ عَلَى الْبَحْرِ  "


सही  मुस्लिम - किताब 39  हदीस 6754

3-शैतान  को पत्थर मारने का रिवाज 
नौवीं  शताब्दी   में पैदा हुए   इतिहासकार     "अल   अजरकी   -  الأزرقي "ने  अपनी  किताब    "अखबार मक्का -  اخبار مكة "   में  मक्का  का  इतिहास लिखा  है .   इसमे  मक्का में  इस्लाम  से  पहले  के रिवाज , दन्तकथाएं   और   मान्यताओं   का   विस्तृत विवरण  दिया गया  है ,    इसके  साथ  मुहम्मद  साहब   की  मृत्यु  तक  यानी  सन 603  ई ० तक  मक्का  में  होने वाली  घटनाओं   का  विवरण  भी दिया  है .  अजरकी  ने  मक्का में  हाजियों  द्वारा ईंट  पत्थर   से निर्मित स्तम्भ(Pillar)  को  पत्थर  मारने की  परम्परा  का  भी  उल्लेख   किया  है  , लोग उसे  शैतान  मानते  हैं , यह  रिवाज   हजारों  साल  पुराना  है  , पीढ़ी  दर पीढ़ी   लोग इसी रिवाज  को मानते आये  हैं , यद्यपि  कुरान   में  शैतान   को  पत्थर  मारने  का  आदेश  कहीं  नहीं     दिया  है  , कारण पूछने  पर  लोग  कहते  हैं  ,
"और जब  यह  कोई  अनैतिक   काम  करते  हैं   ,तो  कहते   हैं की हमने  यह अपने  पूर्वजों  को  ऐसा  करते  हुए पाया  है  , हमें तो  अल्लाह  ने  यही  हुक्म   दिया  है "
सूरा -अल  आराफ 7:28 

   शैतान   को  पत्थर मारने  की  परंपरा  के  पीछे   मक्का  के  लोगों  में  एक  कहानी   प्रचलित   है  ,जिसे अजरकी  ने  लिखा है   , इसके अनुसार
 जब  इब्राहिम  मीना  नामकी  जगह  छोड़  कर अकबा गए  तो  उनको गंदे  पत्थरों  के ढेर के पीछे  छुपा   हुआ  शैतान   दिखा  , तभी  जिब्राइल  ने  उन से कहा  इस शैतान  को  पत्थर   मार  कर  भगा  दो  .इस  से शैतान  भाग   गया  लेकिन  फिर  वहीँ  छुप   गया  , इब्राहिम   ने  फिर  पत्थर  मारे  , ऐसा दो   बार  हुआ  . तब  जिब्राईल   ने  इब्राहिम  से कहा  शैतान   को  सात  पत्थर   मारो  , तभी  यह  भागेगा  , इब्राहिम   ने ऐसा  ही  किया  , और शैतान   दूर  कहीं चला  गया . तभी   से  यह   रिवाज    शुरू   हो गया

4-शैतान   का  कद  बढ़  गया 
यदि   हम  कहें कि जैसे  जैसे  मुसलमानों   में  शैतानी प्रवृत्ति    बढ़ने  लगी   वैसे ही   शैतान  के   स्तम्भ    का  कद  भी   बढ़   गया   है ,तो  इस  बात  में कोई  झूठ   नहीं    है   , क्योंकि   सऊदी  सरकार  ने  सन 2004  में शैतान   के  छोटे  स्तम्भ    को  तोड़   कर  नया  और  बड़ा  स्तम्भ  बनवा  दिया  है .यह  26  मीटर  यानी  85  फुट   लंबा  है   ,  इसके  आगे  एक  पुल  भी    बनवा  दिया  गया  है  ,  ताकि   लोग  इस  पर  चढ़   कर  शैतान  के  स्तम्भ   पर  पत्थर   मार  सकें , इस  स्तम्भ  को  अरबी  में "अल   जमरात  الجمرات‎ - "  कहा  जाता   है 

1.पुराने  स्तम्भ   की  फोटो 

http://www.cuttingthroughthematrix.com/images/StoningofSatan.jpe

2.नये स्तम्भ   की  फोटो 

http://www.islamicinvitationturkey.com/wp-content/uploads/2012/10/esmaeeli20121026173802210.jpg

5-शैतान  को  पत्थर   मारने  की विधि 

शैतान  को  पत्थर   मारने   को  अरबी   में "रमी  अल  जमरात  -  رمي الجمرات‎   " कहा  जाता   है   , इसके  लिए  नियम इस  प्रकार   हैं ,1.जिल  हज  की  10 तारीख को  हाजी  मुजदलीफा    से  निकलें  और  मीना  के  रास्ते  से  पत्थर  जमा  करें  ,2 .पत्थर   न  तो  बहुत  बड़े  हों  और न छोटे  हों .3.सुन्नत  के अनुसार  सात (7 ) पत्थर   जमा   कर के  रख  लें .4.मीना  आने  पर सूर्योदय   से  पहले पत्थर  नहीं  मारें .5.हाजी जमरात   पर  सात  पत्थर  मारें  ,  लोग  शैतान  पर धिक्कार  करने के लिये अपने  जूते  , सैंडिल   और अन्य  गंदी  चीजें     भी    फेक   कर  मार  देते  हैं

6-शैतान  को  पत्थर कब  मारें ?

इसके बारे   में  यह  हदीस बताती   है   ,

वाबरा  ने  इब्न  उमर से पूछ  कि  हम शैतान  पर  पत्थर   कब  मार  सकते  हैं ? उमर  ने   कहा जब  तुम्हारे  दल  का   मुखिया (इमाम )  आदेश  करे यानी  पत्थर  मारे  तभी   शैतान  पर  पत्थर  मारना .

Narrated Wabrah,I asked Ibn 'Umar: When should I throw pebbles at the jamrah? He replied: When your imam (leader at Hajj) throws pebbles

"، عَنْ وَبَرَةَ، قَالَ سَأَلْتُ ابْنَ عُمَرَ مَتَى أَرْمِي الْجِمَارَ قَالَ إِذَا رَمَى إِمَامُكَ فَارْمِ ‏.‏ فَأَعَدْتُ عَلَيْهِ الْمَسْأَلَةَ فَقَالَ كُنَّا نَتَحَيَّنُ زَوَالَ الشَّمْسِ فَإِذَا زَالَتِ الشَّمْسُ رَمَيْنَا ‏.‏ "

Sunan Abi Dawud - Book 10, Hadith 1967

7-पत्थर  मारने वालों  की  मौत 
शैतान  के स्तम्भ   पर  पत्थर   मारने  के लिए   हाजियों   में  धक्कामुक्की   और   भगदड़    हो   जाती  है   ,  और शैतान   पर   पत्थर  मारने   वाले  खुद   मर   जाते   है  ,  जैसा   इसी  साल   में  हुआ  है   ,  मुहम्मद  साहब  के  सामने   भी  ऐसा  हुआ  था  ,  जिसका  विवरण   इस  हदीस   में   है  ,

अब्दुल्लाह   इब्न  बुरैदा   ने  अपने  पिता  से  सुना  कि  एक  औरत  शैतान   को पत्थर   मारते   समय  दूसरी   औरत  से गुथ  गयी   ,  जिस   से  उसके  पेट  का  गर्भ  गिर  गया.  तब रसूल   ने  उस  बच्चे   के लिए  दिय्या (   ) मुआवजे  के  रूप में  पचास  भेड़ें   उस  औरत   को  दीं ,और   लोगों  को  पत्थर  मारना   बंद  करने  को   कहा

a woman threw some pebbles and stuck another woman, and she miscarried. The Messenger of Allah stipulated (a Diyah of ) fifty sheep for her child. And on that day, he forbade throwing pebbles.

، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ امْرَأَةً، خَذَفَتِ امْرَأَةً فَأَسْقَطَتْ فَجَعَلَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي وَلَدِهَا خَمْسِينَ شَاةً وَنَهَى يَوْمَئِذٍ عَنِ الْخَذْفِ ‏.‏ أَرْسَلَهُ أَبُو نُعَيْمٍ ‏.‏ "
"

 Sunan an-Nasa'i - Vol. 5, Book 45, Hadith 4817

8-कोसने  से शैतान शक्तिशाली  हो जाता है 
 
इस्लाम  से  पहले  से भी अरब   लोगों  में रिवाज  था  कि जब  कोई  काम  बिगड़ जाता  था , या  किसी  तरह   की  अड़चन  पैदा हो   जाती  थी  , तो  वह शैतान  को  कोसने  लगते   थे  , और कह  देते  थे  कि शैतान    मर  जाये , या शैतान  पर   लानत   हो  . अरबों   की  यह  परंपरा  मुहम्मद साहब  के  समय  से भी  थी ,  और आज   भी  जारी   है   , लोग ज़रा सी  बात  पर  भी  शैतान  को  जिम्मेदार   बता   कर  उसकी  मौत की  बद दुआ  देने  लगते  थे  ,  जैसा  इस  हदीस  में  कहा  गया  है   ,

अबु  तमीमा  अल  हुज़ैमा  ने  कहा  की  एक   बार  मैं रसूल के पीछे उनके  गधे   पर  बैठ   कर जा रहा   था  , तभी   वह  गधा  रास्ते   में  अड़  गया  , यह देख  कर  मैं  बोल  पड़ा  कि "शैतान  का नाश  हो  ( Let Satan perish) ,अरबी  में "युहलिक अश्शैतान -  يهلك الشيطان"यह  सुन कर  रसूल   ने  कहा ऐसा  नहीं  कहो   इस  से शैतान  और बड़ा   हो   जायेगा  ,  बल्कि   कहो   बिस्मिल्लाह   इस  से  शैतान  एक   मच्छर  से भी  छोटा    हो  जायेगा

मुसनद  इमाम  अहमद ( مسند أحمد )  Vol. 5 p. 59 
 

यही   बात  इस  हदीस  में  इस प्रकार   कही   गयी   है  , तुम  यह  नहीं  कहो  कि शैतान  का नाश  हो,और   न  यह  कहो  लि इन्नल इबलीस लईन -  لأنَّ إبْليسَ اللّعِينَ " यानी   शैतान  के  लिए  लानत  हो  , ऐसा  कहने  से शैतान  की  शक्ति  बढ़  जाती  है .  इसलिए  तुम  कहो   अल्लाह  के  नाम  से  ‘( In the name of Allah ) .    इस  से   वह  अपमानित  महसूस करेगा  
 
सुन्नन   अबी  दाऊद  - किताब  अल  अदब  42  हदीस 4982

 इन हदीसों  से  सिद्ध   होता  है कि मुसलमान  शैतान लानत   भेज  भेज  कर  उसकी  शक्तियों  में वृद्धि कर रहे   है  ,यही  कारण  है  कि  इस्लामी देशों  में शैतान   का  राज  है  , कहीं  शान्ति  नहीं  है .इन  सभी  प्रमाणों  से  सिद्ध   होता   है कि इस्लाम  की   मान्यताएं   , रिवाज   और  परंपरा     तर्कहीन   और  अंधविश्वास   पर  आधारित    हैं   . जब   मुसलमान  एक  स्तम्भ   में  शैतान  का निवास  मानते   हैं   . जो  एक  प्रकार   की   मूर्ति  पूजा  ही  है   , तो  उनको  हिन्दुओं   की  मूर्ति  पूजा   पर कटाक्ष  करने    का  कोई  अधिकार  नहीं  . मुस्लमान   ऐसा  इसलिए करते हैं   , क्योंकि उनके  सभी   नबी  और  रसूल  शैतान   के प्रभाव   से  ग्रस्त   थे   ,जैसा  कि खुद   कुरान   में  लिखा  है ,

"हे  मुहम्मद  तुम से  पहले जो   भी   नबी  और  रसूल   हमने  भेजे शैतान    ने उनकी   कामना   में असत्य  मिला  दिया  था  , "सूरा  अल हज 22:52 


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रविवार, 5 जून 2016

मेराज का असली राज़ !

मेराज अरबी भाषा का शब्द है , वैसे तो इसका अर्थ "Ascension " या आरोहण होता है .लेकिन इस्लामी विद्वान् इसका तात्पर्य "स्वर्गारोहण "करते हैं .इनकी मान्यता है कि मुहम्मद एकही रात में मक्का से यरूशलेम तक की यात्रा कर आये थे और वहां स्थित अक्सा नाम की मस्जिद में नमाज नमाज भी पढ़ कर आये थे,जो एक महान,चमत्कार था .लेकिन सब जानते हैं कि केवल मान्यता के आधार पर ऐतिहासिक सत्य को झुठलाया नहीं जा सकता है .मुहम्मद की इस तथाकथित "मेराज " का असली राज (रहस्य ) क्या है ,यह आपके सामने प्रस्तुत किया जा रहा है .
यह कहावत प्रसिद्ध है कि"झूठ के पैर नहीं होते "इसका तात्पर्य है कि यदि कोई व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए या दूसरों को प्रभावी करने के लिए झूठ बोलता है ,अथवा गप्प मरता है ,तो उसका ऐसा झूठ अधिक समय तक नहीं चलता है .और एक न एक दिन उसके झूठ का भंडा फूट ही जाता है .
मुहम्मद एक गरीब बद्दू परिवार में पैदा हुआ था ,और उसके समय के यहूदी और ईसाई काफी धनवान थे .और मुहम्मद उनकी संपत्ति हथियाना चाहता था .इसलिए सन 610 में मुहम्मद ने खुद को अल्लाह का रसूल घोषित कर दिया ,ताकि वह यहूदी और ईसाई नबियों के बराबरी करके लोगों को अपना अनुयायी बना सके .लेकिन जब लोगों को मुहम्मद की बे सर पैर की बातों पर विश्वास नहीं हुआ तो ,ने एक चल चली .तब तक मुहम्मद की नुबुवत को 12 साल हो चुके थे .मक्का के लोग मुहम्मद को पागल और जादूगर समझते थे ,इसलिए मुहम्मद ने लोगों का मुंह बंद करने के 27 तारीख रजब (इस्लाम का सातवाँ महीना ) सन 621 ई० को एक बात फैला दी ,कि उसने एक दिन में मक्का से यरूशलेम तक की यात्रा कर डाली है .जिसकी दूरी आज के हिसाब से लगभग 755 मील या 1251 कि.मी होती है .मुहम्मद की इस यात्रा को "मेराज معراج" कहा जाता है .मुहम्मद ने लोगों से कहा कि उसने यरूशलेम स्थित यहूदियों और ईसाइयों के पवित्र मंदिर में नमाज भी पढ़ी ,जिसका नाम यह है .

Temple in Jerusalem or Holy Temple (Hebrew:" בֵּית־הַמִּקְדָּשׁ, Beit HaMikdash ;बैत हमिकदश "
Al-Aqsa Mosque (Arabic:المسجد الاقصى al-Masjid al-Aqsa, मस्जिदुल अक्सा

फिर मुहम्मद ने लोगों का विश्वास जीतने के लिए यरूशलेम की तथाकथित मस्जिद और यात्रा का पूरा विवरण लोगों के सामने प्रस्तुत कर दिया .मुहम्मद के इस झूठ को बेनकाब करने के लिए पहले हम इस यात्रा के बारे में कुरान और हदीस से सबूत देखेंगे फिर इतिहास से प्रमाण लेकर सत्यता की परख करते हैं .और निर्णय पाठक स्वयं करेंगे .
1 -मुहम्मद की यरूशलेम यात्रा 

मुहम्मद की मक्का के काबा से यरूशलेम स्थित अक्सा की मस्जिद तक की यात्रा के बारे में कुरान यह कहता है ,
"महिमावान है वह अल्लाह जो अपने रसूल मुहम्मद को "मस्जिदे हराम (काबाكعبه )से(मस्जिदे अक्सा "(यरूशलेम )की मस्जिद तक ले गया .जिस को वहां के वातावरण को बरकत मिली .ताकि हम यहाँ के लोगों को वहां की निशानियाँ दिखाएँ " सूरा -बनी इस्रायेल 17 :1 
2 -मुहम्मद की सवारी क्या थी 

इतनी लम्बी यात्रा को एक दिन रात पूरा करने के लिए मुहम्मद ने जिस वहां का प्रयोग किया था ,उसका नाम "बुर्राकبُرّاق "था .इसके बारे में हदीस में इस प्रकार लिखा है .
"अनस बिन मलिक ने कहा कि रसूल ने कहा था मुझे बैतुल मुक़द्दस की यात्रा के बुर्राक नाम का जानवर दिया गया था ,जो खच्चर (Mule) से छोटी और गधी से कुछ बड़ी थी .और जब मैं बुर्राक पर बैठा तो वह मस्जिद की सीढियां चढ़ गया ,फिर मैंने "masjidمسجد " के अन्दर दो रकात नमाज पढ़ी .और जब मैं मस्जिद से बाहर जाने लगा तो जिब्राइल ने मेरे सामने दो कटोरे रख दिए ,एक में शराब थी और दुसरे में दूध था ,मैंने दूध ले लिया .फिर जिब्रील मुझे बुर्राक पर बिठाकर मक्का छोड़ गया ,फिर दौनों जन्नत लौट गए "सही मुस्लिम -किताब 1 हदीस 309 

3-लोगों की शंका और संदेह 

लोगों को मुहम्मद की इस असंभव बात पर विश्वास नहीं हुआ ,और वह मुहम्मद को घेर कर सवाल करने लगे ,तब मुहम्मद ने कहा ,
"जबीर बिन अब्दुल्लाह ने कहा ,कि रसूल ने कहा जब कुरैश के लोगों ने मेरी यरूशलेम कि यात्रा के बारे में संदेह जाहिर किया ,तो मैं काबा के पास एक पत्थर पर खड़ा हो गया .और वहां से कुरैश के लोगों को बैतुल मुक़द्दस का आँखों देखा विवरण सुनाने लगा ,जो मैंने वहां देखा था "
बुखारी -जिल्द 4 किताब 6 हदीस 233 
"इब्ने अब्बास ने कहा जब रसूल से कुरैश के लोगों ने सवाल किया तो रसूल उन सारी जगहों का वर्णन सुनाने लगे जो उन्होंने यरूशलेम स्थित बैतुल मुक़द्दस की यात्रा के समय रास्ते में देखी थीं .फिर रसूल ने सबूत के किये कुरान की सूरा इस्रायेल 17 :60 सुनादी .जिसमे अल्लाह ने उस जक्कूम के पेड़ पर लानत की थी ,जो रसूल को यरूशलेम के रास्ते में मिला था "
बुखारी -जिल्द 5 किताब 58 हदीस 228 

इस हदीस में कुरान की जिस आयत को सबूत के तौर पर पेश किया गया है ,वह यह है
"हे मुहम्मद जब लोगों ने तुम्हें घेर रखा हो ,तो तुम सबूके लिए उन दृश्यों को याद करो ,जो हमने तुम्हें बताये हैं ,और जिनको हमने लोगों की आजमाइश के लिए बना दिया था .तुम तो उस पेड़ को याद करो जिस पर कुरान में लानत की गयी है .हम इसी निशानी से लोगों को डराते है"
सूरा -बनी इस्रायेल 17 :60 
 (इस पेड़ को अरबी में "जक्कूम زقّوم" कहा जाता और हिदी मे"थूहर ,या थूबड़ Cactus कहते हैं अंगरेजी Botany  में इसका नाम "Euphrobia abyssinica " है .यह पेड़ अरब , इस्रायेल और अफरीका में सब जगह मिलता है .मुहम्मद ने कुरान में इसी पेड़ को सबूत के रूप में पेश किया है सूरा -17 :60 )
( नोट -इसी को कहते हैं कि"कुएं का गवाह मेंढक" )

4 -मुहम्मद का सामान्यज्ञान 
लगता है कि मुहम्मद में बुद्धि(GK) नाम की कोई चीज नहीं थी ,क्योंकि जब उस से बैतुल मुक़द्दस के बारे में जानकारी पूछी गयी तो वह बोला ,
"अबू जर ने कहा कि मैंने रसूल से पूछा कि पृथ्वी पर सबसे पहले अल्लाह की कौन सी मस्जिद बनी थी ,रसूल ने कहा "मस्जिदे हराम "यानि मक्का का "काबा "फिर हमने पूछा की दूसरी मस्जिद कौन सी है ,तो रसूल ने कहा "मस्जिदुल अक्सा "यानि यरूशलेम की मस्जिद ,फिर हमने पूछा की इन दौनों मस्जिदों के निर्माण के बीच में कितने सालों का अंतर है ,तो रसूल ने कहा इनके बीच में चालीस सालों का अंतर है "
बुखारी - जिल्द 4 किताब 55 हदीस 585 

अब तक मुहम्मद की यरूशलेम की यात्रा (मेराज Night Journey ) के बारे में कुरान और हदीसों से लिए गए सबूतों का हवाला दिया गया है .अब दुसरे भाग में इतिहास के प्रमाणों के आधार पर मुहम्मद और अल्लाह के दावों की कसौटी करते हैं ,कि इस दावे में कितनी सच्चाई और कितना झूठ
 है .जिसको भी शंका हो वह विकी पीडिया या दूसरी साईट से जाँच कर सकता है .पाठक कृपया इस लेख को गौर से पढ़ें फिर निष्पक्ष होकर फैसला करें
5 -बैतुल मुक़द्दस का संक्षिप्त इतिहास 

अबतक दी गयी कुरान की आयतों और हदीसों में मुहम्मद द्वारा यरूशलेम की यात्रा में जिस मस्जिद में नमाज पढ़ने का वर्णन किया गया है ,वह वास्तव में यहूदियों का मंदिर ( Temple ) था .जिसे हिब्रू भाषा में " मिकदिशמקדשׁ "कहा जाता है .इसका अर्थ "परम पवित्र स्थान यानी "Sancto Santorum" कहते हैं .इसका उल्लेख बाइबिल में मिलता है ( बाइबिल मत्ती -24 :1 -2 ) इस मंदिर को इस्लाम से पूर्व दो बार तोडा गया था ,और इस्लाम के बाद तीसरी बार बनाया गया था .इतिहास में इसे पहला ,दूसरा ,और तीसरा मंदिर के नाम से पुकारते हैं .इसका विवरण इस प्रकार है -
1 - पहले मंदिर का निर्माण और विध्वंस 

पहले मंदिर का निर्माण इस्रायेल के राजा दाऊद(David-דוד- ) के पुत्र राजा सुलेमान (Solomon-שלמן ) ने सन 975 ई ० पू में करवाया था .सुलेमान का जन्म सन 1011 ई पू और म्रत्यु सन 931 ई .पू में हुई थी सुलेमान ने अपने राज की चौथी साल में यह भव्य मंदिर बनवाया था ,और इसके निर्माण के लिए सोना ,चन्दन ,और हाथीदांत भारत से मंगवाए थे ( बाइबिल 1 राजा अध्याय 5 से 7 तक I-kings10:22 )
सुलेमान के इस मंदिर को सन 587 BCE में बेबीलोन के राजा "नबूकदनजर (Nebuchadnezzar ) ने ध्वस्त कर दिया था .और यहूदियों को गुलाम बना कर बेबीलोन ले गया था .जाते जाते नबूकदनजर मंदिर के स्थान पर अपने एक देवता की मूर्ति लगवा गया था .और सारा यरूशलेम बर्बाद कर गया था .
(बाइबिल -यिर्मयाह 2 :24 से 20 )
इसके बाद जब सन 538 ई .पू में जब ईरान के सम्राट खुसरू ( cyrus ) ने बेबीलोन को पराजित कर दिया तो उसने यहूदियों को आजाद कर दिया और अपने देश में जाने की अनुमति दे दी थी .लेकिन करीब 419 साल तक यरूशलेम में कोई मंदिर नहीं बन सका .
2 दूसरे मदिर का निर्माण और विध्वंस 
वर्षों के बाद जब सन 19 ई .पू में जब इस्रायेल में हेरोद (Herod ) नामका राजा हुआ तो उसने फिर से मंदिर का निर्माण करवाया ,जो हेरोद के मंदिर के नामसे विख्यात था ,यही मंदिर ईसा मसीह के ज़माने भी मौजूद था .लेकिन जब यहूदियों ने ईसा मसीह को सताया ,तो उन्होंने इस मंदिर के नष्ट होने की भविष्यवाणी कर दी थी ,जो बाइबिल में इस तरह मिलती है, -
."फिर जब यीशु मंदिर से निकलते हुए रास्ते में जा रहे थे तो उनके शिष्यों ने उनको मंदिर की ईमारत की भव्यता दिखाया ,तब यीशु ने कहा कि,मैं तुमसे सच कहता हूँ ,कि एक दिन इस मंदिर के पत्थर पर पत्थर नहीं बचेगा ,और सारा मंदिर ढहाया जायेगा "
बाइबिल नया नियम -मत्ती -24 :1 -2 ,मरकुस -13 :1 -2 ,और लूका -19 :41 से 45 ,और लूका -21 :20 -45 
ईसा मसीह के समय यरूशलेम पर रोमन लोगों का राज्य था ,और यहूदी उसे पसंद नहीं करते थे .इसलिए सन 66 ईसवी में यहूदियों ने विद्रोह कर दिया .और विद्रोह को कुचलने के लिए रोम के सम्राट " (Titus Flavius Caeser Vespasianus Augustus- तीतुस फ्लेविअस ,कैसर ,वेस्पनुअस अगस्तुस ) ने सन 70 में यरूशलेम पर हमला कर दिया .और लाखों लोग को क़त्ल कर दिया .फिर तीतुस ने हेरोद के मंदिर में आग लगवा कर मंदिर की जगह को समतल करावा दिया .और मंदिर कोई भी निशानी बाकि नहीं रहने दी .इस तरह ईसा मसीह की भविष्यवाणी सच हो गयी .


कुरान में भी इस घटना के बारे में उल्लेख मिलता है ,जो इस प्रकार है ,


"फिर हमने तुम्हारे विरुद्ध शत्रुओं को खड़ा कर दिया ,ताकि वह तुम्हारा चेहरा बिगाड़ दें ,और बैतुल मुक़द्दस के अन्दर घुस जाएँ ,जैसे वह पहली बार घुसे थे ,और उनको जोभी चीज हाथ में आई थी उस पर कब्ज़ा किया था .और मस्जिद को तबाह करके रख दिया था
सूरा -बनी इस्रायेल 17 :17 
इस प्रकार इतिहास ,बाइबिल और कुरान से साबित होता है कि सन 70 से मुसलमानों के राज्य तक यरूशलेम में कोई मंदिर या मस्जिद नहीं थे ,बल्कि उस जगह समतल मैदान था .मस्जिद का फिर से निर्माण खलीफाओं ने करवाया था ,जिसका विवरण इस तरह है ,
6 -मंदिर की जगह मस्जिद का निर्माण 

जब सन 638 उमर बिन खत्ताब खलीफा था ,तो उसने यरूशलेम की जियारत की थी .और वहां नमाज पढ़ने के लिए मदिर के मलबे को साफ करवाया था .और उसके सनिकों ने खलीफा के साथ मैदान में नमाज पढ़ी थी .बाद में जब उमैया खानदान में "अमीर अब्दुल मालिक बिन मरवानعبد الملك بن مروان"सन 646 ईस्वी में सुन्नियों का पांचवां खलीफा यरूशलेम आया तो उसने पुराने मंदिर की जगह एक मस्जिद बनवा दी ,जो एक ऊंची सी जगह पर है ,इसी को आज" मस्जिदुल अक्सा " Dom of Rock भी कहा जाता है .क्योंकि इसके ऊपर एक गुम्बद है .अब्दुल मालिक ने इस मस्जिद के निर्माण के किये "बैतुल माल" से पैसा लिया था ,और गुम्बद के ऊपर सोना लगवाने के लिए सोने के सिक्के गलवा दिए थे .आज भी यह मस्जिद इस्रायेल अरब के विवाद का कारण बनी हुई है .और दौनों इस पर अपना दावा कर रहे हैं
7 -खलीफा ने मस्जिद क्यों बनवाई 
अब्दुल मलिक का विचार था कि अगर वह यरूशलेम में उस जगह पर मस्जिद बनवा देगा ,तो वह यहूदियों और ईसाइयों हमेशा दबा कर रख सकेगा .क्योंकि दौनों ही इस जगह को पवित्र मानते है .लेकिन जब कुछ मुसलमानों ने इसे बेकार का खर्चा बता कर आपत्ति प्रकट की ,तो मलिक ने विरोधियों को शांत करने के लिए यह हदीस सुना दी ,
"अनस बिन मलिक ने कहा कि ,रसूल ने कहा ,यदि कोई घर में ही नमाज पढ़ेगा ,तो उसे एक नमाज का पुण्य मिलेगा ,और अगर वह अपने कबीले के लोगों के साथ नमाज पढ़ेगा तो ,उसे 20 नमाजों का पुण्य मिलेगा .और जुमे में जमात के साथ नमाज पढ़ने से 50 नमाजों का पुण्य मिलेगा .लेकिन यदि जोभी व्यक्ति यरूशलेम की "बैतुल मुक़द्दस " में नमाज पढ़ेगा तो उसे 50 हजार नमाजों का पुण्य मिलेगा "
इब्ने माजा-तिरमिजी -हदीस 247 ,और मलिक मुवत्ता-जिल्द 5 हदीस 17 
इस तरह से अब्दुल मलिक यरूशलेम में मुसलमानों की जनसंख्या बढ़वाना चाहता था ,की मुसलमान पुण्य प्राप्ति के लिए यरूशलेम में रहने लगें .
लेकिन सन 1862 मुसलमान यरूशलेम की मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ सके थे .क्योंकि उसपर ईसाइयों का कब्ज़ा हो गया था .बाद में तुर्की के खलीफा "अब्दुल हमीदعبد الحميد "( 1878 -1909 )ने इंगलैंड के "प्रिंस ऑफ़ वेल्स Prince of Wels ) जो बाद में King Edward V II बना ,उस से अनुमति लेकर मस्जिद की मरम्मत करवाई और मुसलमानों को एक मेहराब के नीचे नमाज पढ़ने की आज्ञा प्राप्त कर ली थी .जो अभी तक चल रही है .
8-विचारणीय प्रश्न 
अब इन सभी तथ्यों और सबूतों को देखने का बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक हैं ,क़ि जब सन 70 से कर यानि हेरोद के मंदिर के ध्वस्त होने से .सन 691 तक यानी अब्दुल मालिक द्वारा मस्जिद बन जाने तक ,यरूशलेम में कोई मंदिर या मस्जिद का कोई नामोनिशान ही नहीं था ,केवल समतल मैदान था ,तो मुहम्मद ने सन 621 में यरूशलेम की अपनी तथाकथित यात्रा में किस मस्जिद में नमाज पढ़ी थी ?और लोगों को कौन सी मस्जिद का आँखों देखा वर्णन किया था ?क्या कुरान की वह आयतें 691 बाद लिखी गयी हैं ,जिन में मुहम्मद की यरूशलेम की मस्जिद में नमाज पढ़ने का जिक्र है .हम कैसे माने कि कुरान में हेराफेरी नहीं हुई ?क्या कोई अपनी मान्यता के आधार पर ऐतिहासिक सत्य को झुठला सकता है ?
आप लोग कृपया लेख दुबारा पढ़िए और फिर फैसला करिए .और बताइए कि ,यदि हम कुरान और हदीसों की पहले वाली बातों को सत्य मान लें ,तो हमें दूसरी हदीसों और इस्लामी इतिहास को झूठा साबित करना होगा .!
बताइये आप कौनसी बात पर विश्वास करेंगे ?


(200/3)


http://www.abrahamic-faith.com/night-journey.html

शनिवार, 28 मई 2016

अल्लाह ईश्वर नहीं मक्का का देवता है



कुछ   दिन  पहले एक  मुस्लिम  पाठक   ने  मुझ  से कहा  था  कि आप   लोग  तो   कई   देवताओं   की  पूजा   करते हो   ,  जिनका  जन्म भी  होता  है  और  बच्चे  भी  होते हैं   , लेकिन   हम  मुस्लिम  केवल  एक  ही  अल्लाह  की  इबादत   करते  हैं   , जो हमेशा  से मौजूद  है  , न  उसका जन्म  है  और  न  उसने किसी   को   जन्म  दिया   है   ,


लेकिन  उन  पाठक  महोदय   का  कथन  तथ्यों  और  प्रमाणों  के विपरीत   है , क्योंक   वास्तव  में  अल्लाह  मुहम्मद  के  कबीले   का देवता   ही  है   , इसके  सबूत  इस  प्रकार   हैं  

1 -तौरेत  में  अल्लाह  शब्द नहीं  है 
मुसलमानों   की  मान्यता  है  कि  मुहम्मद  अल्लाह  के अंतिम  रसूल और कुरान  अल्लाह  की  अंतिम  किताब   है   ,  इस से पहले अल्लाह  ने  कई  रसूल  भेजे  थे  और  कई  किताबें   नाजिल  की  थीं   ,  उनमे  पहली  किताब   तौरेत     है  ,  जिसे    बाइबिल   का  पुराना  नियम  (Old Testament) कहा  जाता   है   ,  जो  कुरान  से  करीब    तीन  हजार  साल  पहले  का  है  , और यदि   तौरेत    और   कुरान  का  अल्लाह  एक  ही  है  तो तौरेत  में अल्लाह  शब्द  क्यों  नहीं मिलता ?  और   जहां    6  जगह  अल्लाह  शब्द   मिलता   है  ,  उनका  अर्थ    ईश्वर  ( God)    नहीं   है     , जैसे  ,

1.Judges 17:2-"अलाह - אָלָה " अभिशाप  ( Curse 

 2. Hosea 10:4 --"अलाह - אָלָה " झूठा   (false )

3.1 Kings 8:31 

4.2 Chronicles 6:22 

इसी  तरह  तौरेत में  जहाँ  भी अल्लाह या उसी   जैसा  शब्द आया  है  ,वह ईश्वर के लिए नहीं  बल्कि  बुरे अर्थों को प्रकट करने वाला  है  ,

2-तौरेत  में  ईश्वर का असली   नाम 
विश्व   में  जितने  ही  धर्म   है  ,  सभी धर्मों  के लोग  अपनी अपनी  भाषा में ईश्वर को  पुकारते हैं  , लेकिन   तौरेत  एकमात्र ऐसा  ग्रन्थ   है   ,जिसमे ईश्वर   ने अपने  ही  मुंह  से अपना  असली  नाम बता  दिया  है  ,  जिसे अधिकांश  ईसाई और यहूदी  भी  नहीं  जानते  ,
बाइबिल  के अनुसार  जब  मूसा  ने ईश्वर  से उसका नाम  पूछा  तो   '

ईश्वर ने  मूसा से कहा  " मैं  जो  हूँ   सो हूँ "  निर्गमन 3:14 


, אֶהְיֶה אֲשֶׁר אֶהְיֶה

हिब्रू  में  - अहीह  ऐशेर अहीह
यही   बात उपनिषद  में  दी  गयी  है
'सो  अहस्मि "

3-अरब में बहुदेववाद 

मुहम्मद  साहब   की  जवानी  तक   अरब  के लोग  कई  देवताओं   की  पूजा करते   थे  ,  हर  जाती  का अपना अपना देवता   था  ,  हरेक कौम अपने देवता को बड़ा  बताता   था  ,  उस समय  मक्का में  कुछ   यहूदी  और  इसे  भी  थे  ,  अरब के  लोग अक्सर  इनसे  लड़ते रहते थे  , और  जब   मुहमद ने  खुद को  अल्लाह  का  रसूल घोषित  कर  दिया  तो  पूरे अरब  पर राज  करने के लिए  पहले तो वही  नीति  अपनाई  जो आज  के मुस्लिम  अपनाते हैं  , वह  कपट   निति  है

4-मुहम्मदी  सेकुलरिज्म 

जिस  तरह  आज  के मुस्लमान  दिखावे के लिए  सभी  धर्मों  की  समानता  की   बातें करते हैं   , और दिलों में दूसरे  धर्म के प्रति  नफरत  रखते   वाही   काम  मुहम्मद  ने  किया   था ,अरबी  में  देवता  (god) के लिए " इलाह -  إله    " शब्द है  ,कुरान  में " इलाह -   إله  " शब्द     269   बार     आया   है  , और  हर जगह   इसका  अर्थ   " देवता  -god "       ही   है ,मुहम्मद ने  पहले  तो मक्का   के मूर्ति पूजकों  से  कहा


"قَالُوا نَعْبُدُ إِلَـٰهَكَ وَإِلَـٰهَ آبَائِكَ  "2:133

कालू  नअबुदू इलाहक  व् इलाह आबाअक


"कह  दो कि  हम तुम्हारे  देवता  और अपने  बाप  दादाओं  के देवता  की पूजा  करते  हैं  "सूरा  - बकरा  2:133 

  फिर  मक्का  के  यहूदी  , ईसाइयों   से  कहा .

" कह दो हम ईमान  लाये  उस  चीज  पर जो  हम  पर उतारी  गयी  ,और  जो तुम  पर  भी  उतारी  गयी   और  हमारा  इलाह  ( देवता  ) और   तुम्हारा इलाह ( देवता ) एक  ही  है  ,और   हम  उसी  के आज्ञाकारी  हैं "

وَقُولُوا آمَنَّا بِالَّذِي أُنْزِلَ إِلَيْنَا وَأُنْزِلَ إِلَيْكُمْ وَإِلَٰهُنَا وَإِلَٰهُكُمْ وَاحِدٌ وَنَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ

सूरा  अनकबूत 29:46 

नोट -इस  आयत   में  अरबी में कहा  है" इलाहुना  व् इलाहुक़ुम   वाहिद -  وَإِلَٰهُنَا وَإِلَٰهُكُمْ وَاحِدٌ    " अर्थात  मेरा देवता और तुम्हारा  देवता  एक   हैं  (.my  god andyour  god is one  )

मुहम्मद   ने ऐसी सेकुलर बातें  लोगों  को  अपने  जाल   में  फ़साने  के  लिए कही थी   ,  लेकिन जब लोग  मुहम्मद के  खतरनाक इरादे भांप   गए  तो अपने अपने   धर्म  पर और  मजबूती   से डट   गए ,

5-मुहम्मद  का  जिहादी स्वरूप 

इस  से  रुष्ट  होकर  मुहम्मद  ने  अपना  जिहादी  रूप  प्रकट कर  दिया  और  लोगों से  कहा

  "न  सूर्य  को  सिजदा  करो   और  न चन्द्रमा  को  , सिर्फ  अल्लाह  को  सिजदा  करो "सूरा  हा  मीम सजदा 41:37

Do not bow down (prostrate) to the sun nor to the moon, but only bow down (prostrate) to "Allah"Noble Quran 41:37]


इसके  बाद   से  मुहम्मद  और उनके  जिहादी  साथी  लोगों  को जबरन  मुसलमान बनाने   लगे  ,  और जो  भी व्यक्ति उनके  चंगुल  में   फस जाता   था  उस  से यह  कलमा  जरूर  पढ़वा लेते  थे ,और  यह  काम आज  भी  जारी  है

6-कलमा  का  सही  अर्थ 

कलमा  इस्लामी  आतंकवादियों  का मूल  मन्त्र और आदर्श  वाक्य   है  ,   जो   आई  एस  आई एस  के  काले झंडे  पर  लिखा  है   ,  कलमा  दो  वाक्यों  से मिल  कर  बनाया  गया  है   ,

" ला इलाह  इल्लल्लाह - मुहम्मदर्रसूलुल्लाह "
धूर्त   मुल्ले  इसका  अर्थ  करते हैं " अल्लाह  के सिवा  कोई  उपास्य   नहीं  है    और  मुहम्मद  अल्लाह  के  रसूल   है  

कलमा  के प्रथम   भाग   का  सही  अर्थ  ,  इसमें  अरबी  के कुल पांच   शब्द  हैं   . ला = नहीं  , इलाह = देवता ,  इल्ला = सिवाय  , अल्लाह = अल्लाह
अर्थात - अल्लाह  के अलावा  कोई  देवता  नहीं है   ,  इसका  तात्पर्य  है  की   सिर्फ  अल्लाह  ही  देवता  है  ,  या  इसे  इस  प्रकार  भी कह  सकते  हैं  क़ि  दवताओं  में  सिर्फ  अल्लाह  ही   देवता  है   ,   बाकी  देवता  बेकार  हैं    ,  कलमा  से यह कहीं  सिद्ध  नहीं  होता  कि  अल्लाह ईश्वर  है   ,
अल्लाह  पहले  तो  अरब  लुटेरों  का  देवता  बना  रहा , और  अब  जिहादी  आतंकियों का  देवता  बन  गया है  ,  इस  कल्पित  चरित्र   की  रचना मुहम्मद  ने  की  थी   ,  इस   कल्पित  चरित्र  के  कारन रोज़  हजारों  असली  निर्दोष  लोग  मारे   जा  रहे   हैं   ,
इस  से   सिद्ध   होता  है  की मुहम्मद  ने  अपने कबीले  के  देवता " इलाह " नाम  में  अल  जोड़  कर  बड़ी  मक्कारी  से अल्लाह   नामके कल्पित ईश्वर लोगों   को  डराया   और जबरन   मुस्लमान  बनाया  ,  अगर मुहम्मद का  अल्लाह सचमुच  में सबका  ईश्वर  ( God )  होता   , तो   कुरान  में लिखा   होता  
"अल्लाहुना   व् अल्लाहुकुम वाहिद    " हमारा  ईश्वर  और  तुम्हारा  ईश्वर   एक  ही  है  ( my God and your God is one ) 


वास्तव   में अल्लाह   जैसी  कोई शक्ति या  वास्तु   नहीं   है   और  न  कभी  थी  

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