शुक्रवार, 29 अगस्त 2014

हिन्दुओं को मिटाने की जिहादी योजना !

जिहाद  इस्लाम का अनिवार्य  कर्तव्य   है  ,जिसका उद्देश्य  पूरे  विश्व  से गैर मुस्लिमों का  सफाया  करके   इस्लामी खिलाफत कायम   करना  है   , चूँकि मुसलमानों  की   नजर में इस समय  काफिरों  की  सरकार  है  , इसलिए मुसलमान     उसे  गिराने की  योजना   बना रहे हैं   , इसके लिए वह  हर तरह के  हथकंडे   अपना   रहे  हैं   , इसके बारे में  दिनांक 31  जुलाई  2014  को " जिहादियों के नए हथकंडे  "  शीर्षक   से एक  लेख भी  प्रकाशित  किया   गया  था  , यद्यपि जिहादी  भारत के विरुद्ध  आतंकी  योजना अफगानिस्तान  और  पाकिस्तान   में  बना रहे हैं   ,  लेकिन  इस बात  तय है  कि जब भी  भारत के खिलाफ  जिहाद   होगा तो  यहाँ के मुसलमान  उनके  साथ  हो  जायेंगे  . अभी  तो   यहाँ   के मुसलमान  विभिन्न   अपराध  करके  देश में अस्थिरता   का  माहौल   बना रहे   हैं  और  जब  पूरे देश में अफरा  तफरी   फ़ैल जाएगी  तो बाहरी जिहादी  देश में  घुस  जायेंगे  , मुसलमानों   की  इस  जिहादी  योजना  का पर्दाफाश  " अनिमेष  राउल " ने किया  है    जो  " Executive Director of Research at the New Delhi-based Society for the Study of Peace and Conflict (SSPC  " हैं .जिसका पूरा  विवरण 13  जून  2014  को  ही  प्रकाश  में  आगया था  , लेकिन सरकार  मोदी  के 15 अगस्त के  भाषण  तक  बैठी  रही ,
बाद में जो जानकारी  मिली  वह काफी चिंता का विषय  है .
 क्योंकि  इसमे बताया है   कि ,

1-कंधार  से  भारत  की  तरफ 

जानकारी के मुताबिक   इन  दिनों  सभी  इस्लामी  जिहादी  गिरोह  विश्व   में  इस्लामी  हुकूमत  यानि  खिलाफत   कायम  करने में  लगे हुए हैं   , और  आज उनका मुख्य   निशाना   भारत   ही   है  , अल  कायदा के  सरगना  अयमान   जवाहरी  और और मौलाना असीम  उम्र  ने   अल इसबाह नामकी  मिडिया के माध्यम से  विडिओ  और  सन्देश  भारत   भर में   मुसलमानों    तक   भेज  दिए   है   ,  ताकि  भारत के  युवा  मुस्लिम    तोड़फोड़  और  बलात्कार जैसे  अपराधों  से  देश  की  सरकार  को अस्थिर    कर  दें   , और   जब  सरकार  कमजोर  होगी  तो  बाहरी   जिहादियों   को  देश में  घुसने  में  आसानी   हो  जाएगी  , अपने इस  उद्देश्य  को  पूरा   करने के लिए अल  कायदा के मौलाना "अबु  मुसायब अब्दुल  वदूद -أبو مصعب عبد الودود " ने  अफगानिस्तान में  एक आतंकी  गिरोह बना   लिया है।  जिसका  नाम  "तंजीम  अंसार फिल बिलाद अल हिन्द -  تنظیم انصار التوحید فی بلاد الھند " है .इस संगठन    ने  अब   तक  कई वीडियो  जारी  किये  हैं   ,जिनमे  भारत के  मुसलमानों  को " अल शबाब  الشباب‎-" यानी  युवा (youth  )  सम्बोधित करके  भारत में  हर प्रकार  से ऐसे अपराध  करने के  लिए उकसाया  गया है  ,जिस से जिस से देश में दंगे भड़क  जाये  . इसके आलावा एक चालीस मिनट के विडिओ में  विश्व  के  सभी आतंकी  गुटों  को  भारत की  तरफ  हिजरत  करने   का   आदेश   दिया  गया है   , विडिओ में उर्दू में लिखा है  '
""ادارہ العصابة کی جانب سے پیش خدمت ہے مسئول امورشرعیہ انصارالتوحید 
مولاناعبدالرحمن الہندی حفظہ الله کا بیان بعنوان " قندھار سے دہلی کی طرف  "
नोट- इसका हिंदी लिप्यांतरण है  " इरादये अल असाबाह की जानिब  से , पेश खिदमत है  , मसऊल उमूरे शरियाः ,अंसार उत तौहीद , मौलाना अब्दुर रहमान  अल हिन्दी , हिफ्जुल्लाह ,का बयान , बि उन्वान "कंधार से देहली की तरफ "

इसके अलावा मौलाना अब्दरहमान  हिंदी ने एक दस मिनट के विडिओ   में  भारत के  मुसलमानों   से कहा है  कि  वह बाबरी  मस्जिद  और  गुजरात   के दंगों   का बदला  लेने  के  लिए भारत  के सभी औद्योगिक और आर्थिक   केन्द्रों  को  नष्ट  करने का  प्रयास  करें  .

2-जिहादी दुष्प्रचार 

जिहादी  प्रचार  मिडिया  " अल इस्बाह  العصابۃ-"  ने  एक  विडिओ    जारी   किया  है  ,जिसमे  बताया है  कि अफगानिस्तान  स्थित  हेरात  में भारत के  वाणिज्य दूतावास में 23 मई को जिहादियों   ने  हिन्दू  सरकार के सामने   अपनी ताकत  दिखाने  के लिए  विस्फोट  किये  थे  , यह बाबरी  मस्जिद  गिराने  और गुजरात में  मुसलमानों   की  हत्या का बदला है  , इस  विडिओ  में चेतावनी   दी गयी  है कि जल्द ही  भारत पर जिहादी  हमला होगा , जिसकी  मदद भारत के " उसूदुल हिन्द  - الاسود الهند" यानी हिन्द के शेर ( lions of India) मुसलमान  करेंगे  . इस विडिओ में   कहा है  कि भारतके  मुसलमान  संप्रदायवादी  दंगो  और राजनीतिक मतभेद  का  भरपूर   फायदा  उठायें  , इस से  भारत में  जिहाद  जल्दी  कामयाब  होगी  . मौलाना अब्दुल रहमान हिंदी  ने  एक 18  मिनट के विडिओ  में  भारत के  मुसलमानों  से कहा है कि "मुसलमानों अगर तुम आज  इसबात को  नहीं  समझोगे तो तुम  नष्ट  हो  जाओगे  "Oh Indian Muslims, if you can’t understand, you will perish "इस विडिओ   में  मुसलमानों जिहाद के लिए उकसाने  के लिए सात  बन्दुकधारी  पुलिस  वाले  बताये गए हैं   जो  मुसलमानों  पर  गोली  चला  रहे   हैं .इस विडिओ   में आगे बताया है कि सन 1947 से आजादी के बाद से ही मुसलमान  भयभीत  होकर जिंदगी गुजार  रहे हैं  , यहाँ तक वह  जिस गाय  को  खाकर  अपना  पेट  भरते  हैं   ,   होकर  उसी  गाय  की  पूजा  करने पर  मजबूर   हैं  , अल असबाह  ने अरबी ,उर्दू  और  बंगला भाषामे ऐसे कई विडिओ   भारत के  बड़े बड़े  शहरों  में भेज  दिए  हैं  ,जिस  से भारत के मुसलमान   देश भर में  दंगे  फसाद और जघन्य  अपराध   करके  खुद को  जिहादी  मानने  लगें ,और  आत्मघाती  बम  बन  कर  मरने वाले  जिहादियों   के  लिए  कुरान की  यह आयात भी   दी गयी   है  
“जो लोग अल्लाह की राह में क़त्ल हुए हैं इन्हें मुर्दा न समझो वो ज़िन्दः हैं अपने रब के पास से रिज्क़ पा रहे हैं,"

अल अस्बाह ने भारत के युवा  मुस्लीमों    को  जिहाद के  लिये सभी  बड़े शहरों  में हर प्रकार  के अपराध  करने  का आदेश दिया है जिस से  बाहरी जिहादियो    का रास्ता साफ हो जाए  . इसमे बहार  के जिहदियों  को  भारत के जिहादियों   का  साथ  देने  को  कहा है  , और  कुरान  की  यह  आयत दी गयी  है  ,

" मुस्लिम देशों के जिहादी ,गैर मुस्लिम देशों में रहने वाले जिहादियों की सहायता करें , ऐसा करना मुसलमानों के लिए अनिवार्य है " 
सूरा -अनफाल 8:72 


3-खुरासान  देश  की  स्थापना 

जिहादी संगठन "अंसार उत तौहीद ( AUT)  ने विडिओ  और उर्दू  प्रकाशनों   में भारतीय  मुसलमानों   से कहा है कि  वह  भारत की हिंदूवादी  सरकार को  उखड फेकने में    हर   तरीकों    का  प्रयोग  करें   ,  तभी  इस  मध्य्   एशिया  में एक ऐसी  इस्लामी  खिलाफत  कायम  हो  सकती  है  , और उस पूरेदेश का नाम  "खुरासान  " होगा  . इस देशमे तुर्कमेनिस्तान  , उजबेकिस्तान  , ताजिकिस्तान   भी शामिल   होंगे  , और इन  सबके जिहादियों  के भारत के मुसलमान   दिल्ली   के  लाल  किले  पर  खुरासानी  झंडा  फहरा   देंगे   .

Black Flag of Khurasan

http://www.crwflags.com/fotw/images/a/af%7Dqaeda.gif


4-भारत  में  जिहादियों का जाल 

दिल्ली से  प्रकाशित अंगरेजी  अख़बार  मेल टू डे ( Mail today)  के दिनांक 23 मई  2014 के  अनुसार पाकिस्तान के कई  आतंकी गिरोह  इस समय पूरे भारत में  सक्रीय हैं  . और  भारत के मुस्लिम युवक अंसार उत तौहीद ( AUT)  में  शामिल  हो  रहे हैं   ,इन में से कई  युवक गुप्त रूप से  पाकिस्तान  के वजीरिस्तान   में जाकर  आतंकवाद   की ट्रेनिग   भी   लेकर  आये हैं  . अंगरेजी  अखबार दि हिन्दू (the Hindu  ) दिनाक  22 मई  2014 के अनुसार  अधिकांश   मुस्लिम  युवक  उत्तर प्रदेश  के  आजम गढ़  और  कर्णाटक  के भटकल  जिले के  हैं  . जिनको पूरे भारत में आतंक फ़ैलाने  , तोड़फोड़  करने  और विस्फोट  करने की  जिम्मेदारी  दी गयी  है  , और  स्थानीय  मुसलमानों को  उनकी आर्थिक और कानूनी   मदद    देने के  निर्देश   दिए  गए हैं .
इस बात   का खुलासा तब  हुआ जब  ख़ुफ़िया एजेंसियों   ने  दिनांक  30 मई 2014  को चेन्नई से  इंडियन मुजाहिद  के एक  सदास्य  "हैदर अली "  को गिरफ्तार   कर लिया   . और जब  पूछताछ  पर  हैदर अली ने बताया  कि 26 अक्टूबर  2013 को  पटना  में बी जे पी  की  रैली  में  कई विस्फोट  इंडियन  मुजाहिद ने किये थे   ,  जिसका नेतृत्व   सफदर  नागौरी   ने   किया  था  . हैदर अली ने  बताया कि इन  विस्फोटों   का उद्देश्य  पूरे भारत में   अफरातफरी  का  माहौल पैदा  करना था  ,  और भारत  को  हिन्दुओं  से मुक्त   कराना   है  , जिसकी शुरुआत  कश्मीर  से होगी  .
हैदर अली ने यह भी बताया कि कश्मीर की सीमा पर हमारे  जिहादी  तैयार  बैठे हैं  , कि जैसे ही  सीमा पर  तनाव  बढ़ने  पर युद्ध की  नौबत  आ  जाएगी तो पाक सेना की  मदद  से जिहादी कश्मीर  से भारत के अंदर  घुस   जायेंगे  ,  और उसी  समय भारत के अंदर के सभी जिहादी गुट  सक्रीय   हो जायेंगे  . और यह गुट तब तक शांत  नहीं  होंगे जब  तक  उनका  मकसद पूरा  नहीं   होगा  , इसलिए भारत के मुस्लिम  युवकों  को   हिंडन के खिलाफ जिहाद के लिए  मानसिक   रूप  से तैयार   किया  जारहा है  ,


5-भड़काऊ  भाषण का नमूना 

विदेशी धन से बिके  हुए भारत के मुल्ले मस्जिदों   में मुसलमानों  पर होने वाले अन्याय की  ऐसी झूठी खबरें फैलाते  रहते हैं   जिस से दंगे  चालू  रहते हैं   ऐसा ही    भाषण का एक  नमूना  देखिये ,

रमजानुल मुबारक के बाबरकत महीने भी मुसलमानों को सुकून ना मिल सका यू.पी.के एक गॉंव में जब सभी मुसलमान तरावीह के लिए जा चुके थे बुज़दिल हिंदुओ ने मुसलमानों के घरों पर यकबारगी हमला कर दिया और लूट मार की लेकिन मुसलमानों की सबसे बड़ी दुशमन पुलिस ने बड़ी में नुकसान उठाए हुए मुसलमानों को गिरफतार करके उनके ज़खमों पर नमक छिड़कने मे कोई कसर ना छोड़ी जबकि हिंदुओं पहले ने मुसलसल तीन दिनों तक पूरे गॉंव का मुहासरा किए रखा लेकिन पुलिस की तरफ से ना कोई एकशन ना गिरफतारी मेरे भाइयो इन नसली बुज़दिलों का इलाज सिरफ तलवार है .जिसको अपने से ताक़तवर देखते हैं उसे अपना देवता बना लेते जबकि इनके यहॉं कमजोरों को जीने का कोई हक़ नही"

अब जिहादियों  और  मुसलमानों  के ऐसे  इरादों   के बारे में  जानकारी होने पर भी  हिन्दू  सिर्फ  उत्सव  मनाने  ,  जयंतियाँ  मनाने  , मंदिरों   में क्विंटलों  सोना चांदी   चढाने  को  ही  धर्म  मान लेते  हैं  , और सामने  शत्रु साफ  दिखाई देने पर उसी तरह  आँखें   बंद  कर लेते हैं  ,जैसे  कबूतर  बिल्ली को देख कर  आँखें  बंद करके  मान लेता है  कि सामने  बिल्ली  नहीं  है  . हिन्दू यदि  यही  कबूतरी  नीति  पर चलेंगे  तो  न तो  देश  बचेगा  और न  हिन्दू धर्म ही रहेगा   . हिन्दुओं   को इतिहास  से सबक  लेने की  जरुरत  है  ,  याद रखिये जब  मेहमूद गजनवी  सोमनाथ पर हमले की तैयारी  कर रहता तो हिन्दू राजा यज्ञ  अनुष्ठान  कर रहे थे ,और सोच रहे थे कि  भगवान शिव अपने तीसरे  नेत्र से म्लेच्छों  को भस्म  कर देंगे  , हिन्दुओं   को समझना होगा  कि कोई  देवी  देवता उनको नहीं  बचा सकेगाजबतक वह  खुद देश के और हिन्दुओं  के दुश्मन  जिहादियों  को ईंट का जवाब पत्थर  से नहीं  देते  .

 श्री  गुरु गोविन्द सिंह  जी  ने  कहा   है  ,

" यही  देहि आज्ञा  तुरक  को खपाऊँ  , गऊ घातियों   को जगत  से मिटाऊँ "

http://bab-ul-islam.net/showthread.php?p=58877#post58877

 http://www.sspconline.org/sspcinmedia/AnsarTawhid_TransnationalJihadistThreat_India

सोमवार, 4 अगस्त 2014

भगवद्गीता को राष्ट्रिय ग्रन्थ घोषित करो !


बड़े दुःख   के साथ   कहना  पड़ता है कि हिन्दुओं    को  सेकुलरिज्म   के रोग   ने इस तरह   से   ग्रस्त   कर लिया है कि  भगवद्गीता   को   एक   हिन्दू  धर्मग्रन्थ  मानने की  भूल  करने   लगे  हैं  और  उसकी  तुलना  अन्य  धर्म ग्रंथों  से करने लगे   हैं  , जबकि वास्तविकता तो  यह है कि प्रतिपादित सभी  सिद्धांत ,  नियम   और उपदेश   किसी विशेष  देश  , जाति य समूह  के लिए  नहीं   मानव  मात्र के लिए  हैं   . गीता  मनुष्यों  में  नहीं  बल्कि  सभी    प्राणियों  में  ईश्वर   का  अंश  है   , ऐसी  शिक्षा  देती   है  , गीता  के उपदेशो   का   ठीक  से पालन  करने वाला  कभी  हिंसक   और  अपराधी   नहीं   बन सकता    है   . और  सपने में भी किसी  का अहित  नहीं  सोच  सकता  , चूँकि   सभी हिन्दू  गीता पर  श्रद्धा  रखते हैं  ,इस   लिए हिन्दुओं   ने  न तो  किसी  देश  पर आक्रमण  करके  उस  पर कब्ज़ा   करने का प्रयत्न  किया  ,  और न  ही किसी प्रकार की जिहाद करके  लोगों  को जबरन हिन्दू   बनाया  है  , जैसा  कुरान  पढ़   कर  मुसलमान  कर   रहे हैं   . गीता में  बताया गया  धर्म  पूर्णतः   वैज्ञानिक  ,  तर्क  सम्मत  और  सार्वभौमिक  है   . ऐसे धर्म   का  पालन   कराने  के गीता  किसी  कल्पित  जन्नत का  प्रलोभन   और   किसी  जहनम   का  भय नहीं   दिखाती  . और इसी  बात को स्पष्ट  करने  के   लिए  सुप्रीम  कोर्ट  के  फर्स्ट  क्लास   जज   माननीय    श्री  ए आर     दवे   ने  सार्वजनिक रूप  से जो कहा है   , उसका  एक एक  अक्षर हीरों  से  जड़ने   के  योग्य    है   , पूरी  खबर टाइम्स  ऑफ़  इण्डिया  में दिनांक  2  अगस्त  2014   शनिवार    को  प्रकाशित    हुई   है   जो इस  प्रकार  है   .
"सुप्रीम कोर्ट के जज ए आर दवे का कहना है की अगर मैं तानाशाह होता तो क्‍लास वन से बच्चों को गीता और महाभारत पढ़वाता, दवे ने यह भी कहा कि भारतीय लोगों को अपनी पुरानी परंपराओं की ओर लौटना चाहिए और बच्‍चों को शुरुआती उम्र में ही महाभारत और भगवद्गीता पढ़ाई जानी चाहिए, वह 'भूमंडलीकरण के दौर में समसामायिक मुद्दे और मानवाधिकारों के समक्ष चुनौतियां' विषय पर लोगों को संबोधित कर रहे थे। दवे ने कहा, 'जो लोग बहुत सेक्‍युलर हैं या तथाकथित तौर पर सेक्‍युलर हैं, वह इस बात से सहमत नहीं होंगे, लेकिन अगर मैं भारत का तानाशाह होता तो तो मैं गीता और महाभारत क्‍लास वन की पढ़ाई में शामिल करवाता। 
सुप्रीम कोर्ट जज ए आर दवे का मानना है कि यह वह उपाय है, जिससे आप सीख सकते हैं कि जिंदगी कैसे जी जाए, मुझे नहीं पता कि लोग मुझे सेक्‍युलर कहते हैं या नहीं, लेकिन अगर कोई चीज कहीं अच्‍छी है तो हमें उसे लेने से गुरेज नहीं करना चाहिए, दवे ने कहा, गुरु-शिष्‍य परंपरा खत्‍म हो चली है, अगर यह परंपरा बनी रहती तो हमें हिंसा या आतंकवाद जैसी समस्‍याओं का सामना नहीं करना पड़ता। हम दुनिया भर में आतंकवाद के मामले देख रहे हैं। इनमें से अधिकतर देश लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था वाले हैं। अगर लोकतंत्र में सभी लोग अच्‍छे हों, तो वे जाहिर तौर पर किसी अच्‍छे को ही चुनेंगे। फिर वो शख्‍स किसी को नुकसान पहुंचाने के बारे में नहीं सोचेगा।   "

न्यायाधीश  दवे  का  पूरा  वक्तव्य  इस  विडिओ   में सूना   जा सकता   है ,

Justice A.R Dave Statement

https://www.youtube.com/watch?v=WShBq_9w77Y

http://www.hinduismtoday.com/modules/smartsection/item.php?itemid=5047

1-भगवद्गीता उपनिषदों का सार है
  वास्तव में  धर्म   का  मूल  तो  वेद  ही हैं   , और  उपनिषदों  में वेदों  विभिन्न   विषयों  को  सरल भाषा में  समझाया  गया है  , सब   जानते हैं कि  भगवान  कृष्ण  ने  उज्जैन   जाकर  सांदीपनि आचार्य से  वेदों  और  उपनिषदों   का  अध्यन  किया  था  , और  उन्होंने  जो कुछ भी  सीख था   उसे  अर्जुन  को  सनाया था  . जिसे  महर्षि  व्यास  ने  महाभारत  जैसे  महान  ग्रन्थ   में सम्मिलित   कर दिया  , इसके  बारे में  गीता  माहात्म्य  में  कहा  गया  है   ,
""सर्वोपनिषदो  गावः  दोग्धा   गोपाल  नन्दनः  , पार्थो  वत्स  सुधीरभोक्ताः  , गीता दुग्धामृतम  महत  "
अर्थात  -सभी  उपनिषद्   गायें  हैं  , और  उनका  दूध   दोहने  वाले  (  ग्वाला  )  कृष्ण  है  , और  उस  गाय  का दूध  पीने  वाला  बछड़ा   अर्जुन   है   , और उपनिषद्  रूपी    गायों   अमृत   के  सामान  दूध   " गीता "   है    .
यही   कारण  है ,कि भगवद्गीता  को  उपनिषदों   के  सामान  प्रामाणिक  और  पवित्र  धर्म  ग्रन्थ   माना  गया   है   ,

2-भगवद्गीता  के भाष्य 

यद्यपि  गीता में प्रयुक्त  संस्कृत   बहुत क्लिष्ट  नहीं  है  , और न उसके विषय दुर्बोध   है  .  हरेक  व्यक्ति  थोड़े से प्रयास   से अर्थ  समझ  सकता   है  , फिर भी अनेकों  आचार्यों  और  विद्वानों  ने   गीता  के  भाष्य ( Commentaries )   लिखे  हैं  , ऐसे प्रमुख  आचार्यों   और उनके  द्वारा  किये गए गीता  के  भाष्यों  के नाम  इस  प्रकार हैं  ,
1-आदि शंकराचार्य -अद्वैत  भाष्य
2-रामानुजाचार्य -विशिष्ट  अद्वैत  भाष्य
3-मध्वाचार्य  -द्वैत  भाष्य
4-वल्लभाचार्य -तत्व दीपिका
5-यामुनाचार्य  - अर्थ संग्रह देशिका
6-नीलकंठ -  भावदीपिका
7-पुरुषोत्तमाचार्य -अमृत  तरंगिणी
8-जय तीर्थ -प्रमेय  दीपिका
9-वेंकट नाथ  - बृक मंदागिरी
10-लोकमान्य तिलक - गीता रहस्य
11-मो. क.गांधी  - अनासक्ति योग

3-गीता का  उर्दू काव्यानुवाद 

वैसे तो  विश्व  की लगभग  सभी भाषाओं   में  गीता  के अनुवाद हो  गए  हैं  , तभी  मेरे मन में  गीता   का  उर्दू  में  कविता के रूप  में  अनुवाद  करने का  विचार  आया  ,  लेकिन  उसमे उर्दू  लिपि   की  जगह  देवनागिरी     लिपि    ही  रखी  ताकि हिन्दू  और मुस्लिम   गीता   के बारे में   जान सकें  .दो  वर्ष  की  मेहनत  के  बाद  मैंने  गीता   का उर्दू पद्यानुवाद  27  मई  2001  को  पूरा  कर दिया   ,  इसमे कुल 700 श्लोक   हैं ,और  कुल पंक्तियाँ  2800  हैं  . और कुल पृष्ठ 233  हैं  , जिसमे  प्रत्येक  पृष्ठ  में 12  पंक्तियाँ   है  .  मैंने  गीता के इस  उर्दू  काव्यानुवाद  का नाम  "गीता  सरल  "रखा   है .गीता  सरल  पढने के लिए इस  लिंक  को  खोलिए ,

निवेदक --पं. बृज  नंदन  शर्मा  -Ph-0755-4078540   Mob - 09893731808

http://geeta-urdu.blogspot.in/

4-गीता  कानून  से  हिन्दू धर्मग्रन्थ  है 

गीता की  पवित्रता  और महानता  अंगरेज  अदालतें   भी  मानती  थीं  , इसलिये  उन्होंने अदालत में  शपथ पूर्वक बयान देते समय  हरेक  हिन्दू  वादी -प्रतिवादी को  गीता  पर  हाथ  रख  कर कसम  खाने   का  कानून  बना  दिया  था  ,जो  आज भी  चल  रहा  है  , यही नहीं  वर्तमान  सुप्रीम  कोर्ट  ने  भी 2 जुलाई 1995 को   एक  फैसला  दिया   था

"court think that it is Vedanta, and Vedanta alone that can become the universal religion of man, and no other is fitted for the role
.
N. VENKATACHALA and S. SAGHIR AHMAD   .  the Supreme Court of India.New Delhi.July 2, 1995

इसलिए  सभी  हिन्दुओं  को चाहिए कि धर्म  के नाम पर  फैले हुए पाखण्ड  को त्याग  दें   , किसी भी  औलिआ बाबाओं  के चक्कर में न फसें  , और अपने घरों में  भगवद्गीता   लेकर  खुद  पढ़ें  और  अपने  बच्चों  को अर्थ  सहित  समझाएं   , इस से आपका पूरा परिवार संस्कारी  बनेगा  , और समाज भी  अपराध  मुक्त होगा   .  और  जितने भी  हिन्दू  संगठन   है वह  भगवद्गीता   को  राष्ट्रीयग्रन्थ   घोषित  करने   का प्रयास  करें  ,   सिर्फ एक  गीता ही  देश   की हालत सुधार  सकती   है   ,  क्योंकि  यह भगवान कृष्ण  का उपदेश  है  , जैसा की कहा है  ,


'गीता सुगीता कर्तव्या किमन्यै शास्त्र विस्तरैः, या स्वयं पद्मनाभस्य  मुखपद्मविनिः सृतम्  "

अर्थ - गीता  को सुगीता  करिये  ,यानी उसका  पालन  करिये  ,  अन्य  शास्त्रों   के विस्तार  को नहीं  देखिये  ,  गीत तो स्वयंही    भगवन  के मुख की वाणी है !

(200)

शनिवार, 2 अगस्त 2014

बेनामी मुस्लिम को करारा जवाब

मुझे विभिन्न  विषयों  पर लेख देते हुए  लगभग  पांच  साल  हो गए , इस दौरान  मैंने  अनुभव   किया है कि जब  लोग मेरे  अकाट्य प्रमाणों   का खंडन   नहीं  कर  पाते  और  सत्य को स्वीकार  करने में  आनाकानी  करते  हैं  , यातो  वह  लोग मूल विषयसे हट  कर दूसरी बात करने लगते हैं   . या बेनामी  बन कर  टिप्पणी  में अशिष्ट  और गालीगलौच   की भाषा   का प्रयोग  करने लगते  हैं  , खासबात यह है कि  ऐसा तभी होता है जब  इस्लाम के बारे में कोई  लेख  दिया जाता  है .मेरा  उद्देश्य  किसी  की भवन को ठेस  पंहुचाना  कदापि नहीं  रहा  , परन्तु   मैं लोगों  के सामने  प्रमाण सहित असत्य  का भंडाफोड़ करना  अपना कर्तव्य मानता हूँ  . साथ ही  अशिष्ट  और असभ्य भाषा का प्रयोग  करना मेरी दृष्टि में  महापाप   है   , यह   लेख  इसलिए  दिया  जा रहा  है  ,ताकि प्रबुद्ध  पाठक  जान  सकें  कि ,भंडाफोडू  हिंदी   का एकमात्र  ऐसा ब्लॉग  है , जिसमे  बिना किसी द्वेष और दुर्भावना   के प्रमाण  सहित सभी विषयों  पर लेख  प्रकाशित किये   जातेहैं  , यह सिलसिला  सन 2009  से  चलता आरहाहै  . इसका उद्देश्य झूठी  मान्यताओं   का भंडाफोड़ करना  है  , इसी  क्रम   में दिनाक 29 जून 2014 को ब्लॉग  में एक लेख  प्रकाशित   हुआ  था  , जिसका  शीर्षक " भंडाफोडू की  बात सच  निकली " था  . यद्यपि  इसलेख   में ऎसी  कोई   बात नहीं  थी  ,जो प्रमाण  रहित या कल्पित  हो  ,लेकिन किसी  मुस्लिम  ने  बेनामी  बन  कर कॉमेंट में जिस  भाषा  का प्रयोग  कियाहै  वह अशिष्ट  और अज्ञान    से  भरा हुआ  है ,जिस  से उन बेनामी महाशय के दिल में  हिन्दुओं  के प्रति  नफ़रत साफ़  झलकती  है  , उन  बेनामी   महोदय  ने जिस भाषा में कॉमेंट  दिया  है  , वह ज्यों  का त्यों  दिया  जारहा   है  ,
1-बेनामी ( मुस्लिम ) का  कॉमेंट 
बेनामी3 जुलाई 2014 को 11:23 pm
"sharma ji mujhe hansi aati ki appki baat ko sabit krne ke liye kis had tak ja sakte hai aur apne muh miy mitthu bante hai duniya ke har dharm ke log apne dharm ke sansthapak ko apna pita mante hai aap log to nazayaz aulad hai aap ke to teen teen baap hai bhramma vishnu mahesh jo khud ek shaitan the sri lanka is baat ka proof hai aur ab to chautha baap bhi aagya hai sai ya phir sankracharya .
btaiyye sharma ji
"शर्मा  जी  मुझे हँसी  आती  है  ,कि आपकी  बात को साबित करने के लिए किस  हद तक  जा सकते हैं ,और  अपने मुंह  मियाँ  मिट्ठू  बनते हैं   (1),दुनिया केहर धर्म के लोग अपने  धर्म  स्थापक  को अपन पिता   मानते हैं , (2)आप  लोग  नाजायज  औलाद हो  , (3)आपके तो तीन  बाप हैं   . ब्रह्मा म विष्णु  और  महेश  .(4) जो  खुद  शैतान  है  ,श्री  लंका  इसका  प्रूफ है  .(5) और अब जो  चौथा  आगया   साईँ  या शंकराचार्य ,  बताइये  शर्मा जी
2-बेनामी के कमेंट का उत्तर 
 इस कॉमेंट  की  भाषा और शैली  से  साफ  पता चलता है  कि बेनामी  जरूर  कोई ऐसे मुस्लिम  हैं  , जो बौखलाकर  बेतुकी और अशिष्ट भाषा  का प्रयोग  कररहे हैं  . यद्यपि  मैंने फेसबुक  में लोगों  से आवाहन  किया था कि है कोई  ऐसा  जो तर्क  सहित इन बेनामी  को ऐसा  करारा   जवाब  दे  जिसे पढ़ कर बेनामी चारों खाने चित हो जाएँ  . लेकिन जब  कोई आगे नहीं  आया तो मैंने ही उनको उत्तर देने का निश्चय  कर लिया  . यदि  आप  उन  बेनामी के कॉमेंट को ध्यान  से पढ़ें तो  पता  चलेगा  कि उन्होंने हिन्दू धर्म  और हिन्दुओं  पर कुल पांच आरोप लगाये  हैं  , यहाँ  पर  एक एक कर  उन पांचों  आरोपों  का कुरान और  हदीस  के प्रमाणों  से उत्तर दिया जा  रहा  , पाठक गण कृपया  पूरा लेख  जरूर  पढने का कष्ट करें।
1 . पहला  आरोप -आपने  कहा है कि हरेक धर्म  के लोग अपने धर्मस्थापक  को अपना पिता  मानते हैं
जवाब -दूसरे  धर्म  के लोग अपने धर्मस्थापक को  क्या मानते हैं ,हमें इस से कोई आपत्ति नहीं  है  हम तो हरेक बुजुर्ग  पुरुष  को पिता  और बुजुर्ग महिला को माता की तरह  सम्मान  देते  हैं  . शायद  आप  मुहम्मद साहब को पिता  मान बैठे  होगे  ,लेकिन  आपने ठीक  से कुरान नहीं पढ़ी ,क्योंकि  उसमे कहा है  .
  "हे ईमानवालो  मुहम्मद  तुम  में से  किसी  व्यक्ति के बाप  नहीं   हैं "
सूरा अहजाब 33:40 
"مَّا كَانَ مُحَمَّدٌ أَبَا أَحَدٍ مِّن رِّجَالِكُمْ "
("O believers, know that) Muhammad is not the father of any man among you"33.40.
फिर भी अगर आप मुहम्मद  साहब को बाप   मानते हो  तो कुरान के खिलाफ  काम  करने  के कारण  काफ़िर माने जाओगे  . इसलिए मुहमद्साहब को बाप मानना   छोड़  दो  .
2-दूसरा  आरोप -आपने  कहा कि तुम  लोग यानी हिन्दू  नाजायज  औलाद  हो
जवाब -नाजायज  औलाद उस  पुरुष  और स्त्री  के बच्चों  को  कहा  जाता है  जिनकी  शरीयत  के मुताबिक शादी  नहीं हुई  हो  . इस्लामी परिभाषा के मुताबिक  गैर मनकूहा    की  औलाद  अवैध (Illegitimate )   और  हरामी  कही  जाती  है , जिसे दोगले  कहा जाता   है  , शायद आपने बुखारी  की यह हदीस नहीं पढ़ी जिसमे  इब्राहिम  की दासी हाजरा  की जानकारी  दी गयी  है  , हदीस में  कहा है  ,मुसलमानों के  प्रसिद्ध  नबी इब्राहिम  को यहूदी  ,ईसाई  और मुसलमानों का मूल पिता  माना जाता है  , इनके बारे में बुखारी में यह हदीस  मौजूद है " इब्राहिम ने अपनी पत्नी  साराह  की सेवा  करने के लिए हाजरा  नामकी  एक दासी  रखी थी , एक दिन जब इब्राहिम इबादत कर रहे थे तभी हाजरा ने उनको हाथों   से इशारा  करके एकांत में बुलाया  . और कहा कि अल्लाह ने  मुझे आपके  पास  आने को कहा है ,  ताकि हम काफिरों के षडयंत्र को  विफल  कर दें  . अबु हुरैरा ने कहा कि इस घटना को सुना कर् रसूल ने मौजूद लोगों  से कहा  कि  हे बनी इस्मा  के लोगो वही  हाजरा  तुम  लोगों  की  माता  है  ,क्योंकि  उसी के पुत्र  इस्माइल  से सारी  अरब जाती  पैदा  हुई  है  "
".‏ فَأَخْدَمَهَا هَاجَرَ فَأَتَتْهُ، وَهُوَ قَائِمٌ يُصَلِّي، فَأَوْمَأَ بِيَدِهِ مَهْيَا قَالَتْ رَدَّ اللَّهُ كَيْدَ الْكَافِرِ ـ أَوِ الْفَاجِرِ ـ فِي نَحْرِهِ، وَأَخْدَمَ هَاجَرَ‏.‏ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ تِلْكَ أُمُّكُمْ يَا بَنِي مَاءِ السَّمَاءِ‏.‏  "
" Hajar as a girl-servant to Sarah. Sarah came back (to Abraham) while he was praying. Abraham, gesturing with his hand, asked, "What has happened?" She replied, "Allah has spoiled the evil plot of the infidel (or immoral person) and gave me Hajar for service." (Abu Huraira then addressed his listeners saying, "That (Hajar) was your mother, O Bani Ma-is-Sama (i.e. the Arabs, the descendants of Ishmael, Hajar's son).
 सही बुखारी - जिल्द 4 किताब 55 हदीस 578
इस हदीस  से साबित होता  है कि इब्राहिम और उसकी लौंडी  में निकाह  नहीं हुआ था. और इब्राहिम ने इबादत छोड़ कर वासना में अंधे होकर  हाजरा से सहवास  किया था  , जिस से    एक नाजायज बेटा  इस्माइल पैदा हुआ  था  , जिस से मुहम्मद के बाप दादा  और  अरब के लोग  पैदा हुए ,इसलिए "सभी मुसलमान  नाजायज   औलाद   हैं "
3-तीसरा  आरोप -आपने  कहा  कि  हिन्दुओं  के तीन  बाप  हैं  , ब्रह्मा  , विष्णु  . और महेश
जवाब -लगता है कि आपने टी वी सीरियलों  से तीन  देवों  के बारे में  जानकारी  ली  है  , और उनको तीन अलग  देवता  मान  लिया  है  .  वास्तवमे ईश्वर तो एक ही है  ,लेकिन जब वह सृष्टि  करता है  तो उसे ब्रह्मा  कहते हैं  , जब  जगत  का पालन करता है तो विष्णु  कहते हैं  और जब  सृष्टि  का विलय  करता है तौ उसी  ईश्वर को महेश  कहते  हैं  , जैसे  जब  कोई नागरिक  वोट देता है तो उसे वोटर  कहतेहै  , चुनाव  लड़ता है तो उसे प्रत्याशी (उम्मीदवार )   और जीत  जाने पर  विधायक  , या  सांसद  पुकारते  हैं  .
इसलिए  आप  पहले  इस्लाम  की  पूरी  जानकारी  हासिल  करिये   कि मुसलमानोंके कितने  बाप  हैं  ?
आपका अल्लाह  सर्वशक्तिमान  नहीं  बल्कि इतना  असहाय है कि खुदही  अपनी कुर्सी पर नहीं चढ़  सकता  , औरउसे कुर्सी  पर बिठाने के लिए  आठ आठ  फरिश्तों  की  मदद   लेनी  पड़ती  है  , यह खुद कुरान  में कहा है ,

"وَالْمَلَكُ عَلَىٰ أَرْجَائِهَا وَيَحْمِلُ عَرْشَ رَبِّكَ  "


"और आठ  फ़रिश्ते  मिल कर अल्लाह को सिंहासन पर चढ़ाते  हैं  "सूरा  हाक्का 69:17

"eight will help  Allah  to climb  the throne  "Al-Haqqah69:17

यही नहीं  आपका अल्लाह छोटेछोटे कामों के लिए  दूसरों  का मोहताज   है , उसने हर काम के लिए  असंख्य नौकर ( फ़रिश्ते )  लगा रहे हैं , जिन में कुछ खास फरिश्तों के नाम और काम  इस प्रकार  हैं  .
1.जिब्राईल -अल्लाह की चिट्ठी  पत्री  लाना  और भेजना
2.इस्राफील - तुरही (Trumpet  )  बजा कर लोगों  को क़यामत की सूचना  देना
3.मीकाईल - वर्षा  यानि  पानी  की व्यवस्था  करना
4-मुनकिर और  नकीर -अपराधियों  से सवाल पूछना  ,जांच करना
5.मलिकुल मौत - लोगों  के प्राण  निकालना
6.मलिक - नरक  की चौकीदारी   करना
7.रिजवान - स्वर्ग  की  देख रेख  करना कहीं  कोई भाग  न  जाए ,या नर्कवासी  अंदर नहीं घुस  जाये

बेनामी  जी   अल्लाह के फ़रिश्ते जो  काम 14 सौ   साल से करने  लगे हैं , वाही काम हिन्दू  देवता धर्मराज , चित्रगुप्त  , वरुण  , इंद्र और शंकर लाखों साल सेकरते आये हैं।

शायद इसी लिए सभी मुसलमान"  ईमान  मुफस्सिल- ايمان مفصل"  में कहते हैं कि "आमन्तु बिल्लाहि व् मलयाकतिहि - آمنتُ با الله و مليكتهِ    "र्थात  मैं अल्लाह के साथ फरिश्तों  पर भी  ईमान  रखता हूँ। 
बताइये यदि  एक  ही ईश्वर  तीन  नामों से तीन  काम  करता है तो आप उसे हिन्दुओं  के तीन  बाप बता देते तो  , तो जब आपका अल्लाह फरिश्तों  से वही  काम  करवाता  है  ,जो हिन्दुओं  के देवता  करते हैं  . तो  मुसलमानों के असंख्य  बाप  हैं , यह  क्यों  नहीं  मना जाए ?
4-चौथा  आरोप -आपने कहा है  कि महेश यानी शंकर  खुद एक शैतान  है
जवाब -बेनामी जी  आपकी यह  बात  महज एक झूठ  के अलावा कुछ  नहीं  है , अगर  दुनिया भर के आप जैसे मुसलमान  क़यामत तक  भी कोशिश  कर लें  तो भी  वह या साबित नहीं कर  सकेंगे कि  महेश   ही शैतान  है बिना साबुत  के कुछ  भी  कहना  बेवकूफों  की आदत होती है   . क्योंकि आपको  न तो अपने   अल्लाह  के  बारे में  जानकारी  है  , और  न  शैतान के  बारे में  . हकीकत तो  यह  है  कि  आपका  अल्लाह ही  शैतान (दज्जाल )  है  . और शैतान की सबसे बड़ी  निशानी  यह है  कि  वह  काना है , यानि उसकी एक ही  आँख  है  , चाहो  तो  कुरआन   में  देख  लेना  . आपकी  जानकारी के लिए मैं अपने लेख " अल्लाह दज्जाल यानी शैतान है !!" की लिंक  दे रहा हूँ  . तसल्ली  से पढ़ लेना   और दोस्तों को पढवा देना  . शक  दूर हो  जायेगा .http://bhandaafodu.wordpress.com/2014/07/19/
https://www.facebook.com/groups/268438006618252/
5-पांचवां  आरोप -आपने  कहा कि  हिन्दुओं  का  पांचवा  देवता  साईँ  बाबा  , और शंकराचार्य  है
जवाब - जहाँ  तक  साईँ  बाबा  उर्फ़ चाँद  मियां उर्फ़  कमरुद्दीन    की  बात है तो उस  शख्श  का किरदार और ईमान  मशकूक  है   . हमारी नजर में वह  फ़ासिक़  है  , यानि  न  हिन्दू  और न  मुस्लिम  .  उसे हिन्दू धर्म  भ्रष्टक  मानते हैं  . हम  एक लाश  की इबादत को  गुनाह मानतेहैं  ,  और शकराचार्य  केवल  एक धार्मिक  गुरु हैं  . हम  उनका  सम्मान  कर  सकते हैं  , पूजा  नहीं  कर सकते .कबरपरस्ती ( Grave Worship )  -इस्लाम की परंपरा है , हम  ऐसे  लोगों को "मुलहिद "   कहते  हैं। अकेले  भारत में करीब  350  से ज्यादा  दरगाहें हैं  ,जहाँ मुस्लिम  कबरों  में दफन  लाशों   पर  सर झुकाते   हैं  . बेनामी  जी   आपसे   यही गुजारिश  है  कि पहले  अपने  घर की  गन्दगी  साफ  करो  . फिर  दूसरों  पर कीचड़ फेकने की हिमाकत  करो  . और अगर आप  सच्चे  मुसलमान  होते  तो गलियां  नहीं  देते  , आपके लिए हम  कुरान  की  यह  आयत  देते हैं  . अर्थ  आप  खुद किसी मुल्ले से पूछ  लेना ,25:63

"وَعِبَادُ الرَّحْمَٰنِ الَّذِينَ يَمْشُونَ عَلَى الْأَرْضِ هَوْنًا وَإِذَا خَاطَبَهُمُ الْجَاهِلُونَ قَالُوا سَلَامًا   "
"इज़ा ख़ातब  हुमुल  जाहिलूना  कालू  सलामा "
समझदार  के लिए इशारा ही  काफी  होता  है 

 http://www.alim.org/library/biography/stories/content/SOP/18/6/Ibrahim%20(Abraham)/Hadith%20About%20Abraham%20,%20Sarah,%20and%20Hajar
 

सोमवार, 28 जुलाई 2014

सुन लो कि अल्लाह अनेक हैं !

ईश्वर एक  है ,सभी  हिन्दू  इस  बातको  मानते  आये  हैं  ,इसका प्रमाण  यह है  कि इस अटल  सत्य को  लोगों मनवाने के लिए  हिन्दुओं  ने न तो किसी पर  कोई  दवाब डाला  और न किसी   तरह  की जिहाद का  सहारा  लिया  है  , लेकिन आज तक किसी ने इस  बात पर गौर नहीं  किया ,कि मुसलमानों ने सिर्फ इसबात को  मनवाने के लिए  जिहाद  करके  लाखों लोगों  को मार दिया कि "अल्लाह एक है  " और अगर वाकई  एक है  ,तो दुनिया भर में आतंक फ़ैलाने की जरुरत क्यों  पड़  गयी  . ?
क्योंकि  वास्तव  में  अल्लाह  एक  नहीं बल्कि कई लोगों  का  गिरोह  है  , इसका  प्रमाण   कुरान  की उन  आयतों  से मिलता है  , जिन में मुसलमानों  का अल्लाह   खुद के लिए बहुवचन ( plural )   का  प्रयोग  करता  है  , और  मैं  की  जगह हम ( We-Us  )   कहता  है   .
इसलिए अधिकांश  मुस्लिम  विद्वान  जब  जब कृषि भाषा  में कुरान  का अनुवाद  अनुवाद  करते हैं  ,तो इस बात  को  छुपा कर गलत अनुवाद करते हैं , इसको  समझने के लिए  हैं   हमें थोड़ी  सी अरबी  व्याकरण   जानना   जरुरी  है  .
1 -अरबी  में सर्वनाम  और क्रिया  के  वचन 
अरबी की  व्याकरण  कुछ  कुछ  संस्कृत  की  तरह  है  , इसमे " सर्वनाम ( Pronoun )को  "जमीर - الضمير    "  कहा  जाता  है   . जिसके  बहुवचन  को " सीगह  अल  जमा  -  صيغة الجمع "  कहते  हैं     . और  एक  वचन  को " वाहिद -  سيغة الواحد  "  कहते  हैं  .जैसे एक वचन  हिंदी शब्द  " मैं ( I ) को अरबी  में " अना - انا "  कहते  हैं  . जिसका बहुवचन  हिंदी  में  "हम (We )   है  . और  अरबी में इसे " नहनु - نحنُ "  कहा जाता  है  . इसी  प्रकार " क्रिया ( verb )  को अरबी  में  " फअल -   فعل " कहते  हैं  . इसके भी  एक वचन ( singular )  द्विवचन (dual )  और  बहुवचन ( Plural )  होते  हैं  . और  जब  भी  क्रिया ( Verb ) Plurl Imperfact Tense में  पायी  जाती  है  , तो अरबी  में क्रिया  के आगे " ना - نا " लगा  दिया  जाता  है  .  यही  क्रिया  के  बहुवचन  होने की निशानी  है  . उदाहरण   के  लिए  अरबी  क्रिया " क  त  ब  ك +ت+ب  "का  प्रथम पुरुष  बहुवचन "  हमने  लिखा  ( We wrote )     का अरबी में  होगा  "  कतबना - كتبنا "
अब   हम  नमूने  के लिए  कुरान   की  कुछ  ऐसी  आयतें  दे रहे हैं   जिनमे   अल्लाह    ने एक वचन  सर्वनाम   " मैं  और मैंने  "  की  जगह  बहुवचन  " हम  और  हमने    " शब्द   का  प्रयोग  किया  है   . जो  व्याकरण  के  अनुसार  बहुवचन  है  , और अनेक लोगों  के लिए  प्रयुक्त  होता  है  .

1-सर्वनाम  में  बहुवचन 

बेशक  यह कुरान हम ने ही उतारी है  , और हम ही इसके रक्षक  हैं " सूरा अल हिज्र 15:9

إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ  "


“Lo!  We, reveal the Quran, and lo! We verily are its Guardian.” (Al-Hijr15: 9)

(1st person plural personal pronoun)

फिर हमें  उन  से हिसाब  लेना   है  "सूरा -अल गाशिया 88:26
"ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا حِسَابَهُم

Then indeed, upon Us is their account. [88:26]

(1st  person plural  object pronoun)


2-क्रिया  में  बहुवचन 

"हमने  तुम्हें सारे संसार के लिए दयालुता  बना कर  भेजा है " सूरा अम्बिया 21:107

"وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا رَحْمَةً لِلْعَالَمِينَ  "

"We sent thee not save as a mercy for the peoples"21:107

(1st person plural (form IV) perfect verb)

"हम अपने रसूलों और  मुसलमानों की सहायता  करते  हैं "सूरा -मोमिन 40 :51

"إِنَّا لَنَنْصُرُ رُسُلَنَا وَالَّذِينَ آمَنُوا  "


“We verily do help Our Messengers, and those who believe" Al momin 40: 51)


, (1st person plural imperfect verb)


"हमने  तुमसे पहले भी रसूल भेजे,और यही  कहा  कि मेरे सिवा  कोई पूज्य  नहीं  है , तो तुम  हमारी  ही इबादत करो "

सूरा अल अम्बिया 21:25

"وَمَا أَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ مِنْ رَسُولٍ إِلَّا نُوحِي إِلَيْهِ أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاعْبُدُونِ  "21:25


“And We sent not before you any messenger except that We revealed to him that, “There is no deity except Me, so worship Me.”
(Qur’an, 21:25)

(1st person plural (form IV) perfect )

3-सर्वनाम और क्रिया में  बहुवचन 

हमने मनुष्य  को बनाया  और  हम  जानते हैं कि  उसके  मन में क्या  है और हम  उसकी  धमनी  के पास हैं  " सूरा -काफ 50:16

وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ وَنَعْلَمُ مَا تُوَسْوِسُ بِهِ نَفْسُهُ ۖ وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنْ حَبْلِ الْوَرِيدِ

And We have already created man and know what his soul whispers to him," Surat Qāf 50:16)

(1st person plural perfect verb ) And(1st person plural personal pronoun)

अब  सवाल यह उठता  है  कि  जब खुद  अल्लाह की  किताब  कुरान  ही अनेक  अल्लाह  होने की पुष्टि  कर  रही   है  , तो  मुहम्मद  साहब  लोगों  पर एक ही  अल्लाह होने  या मानने पर  दवाब  क्यों  डालते थे  ? इसका  जवाब  कुरान  और  हदीस  से मिलता  है इसके कई   कारण  हैं ,
1-पहला  कारण -लोग   मुहम्मद  साहब  को पागल  कवि  मानते थे  ,  जैसा कि  कुरान  में  कहा  है  .
"लोग कहते हैं   कि क्या  हम एक उन्मादी कवि  के  लिए अपने देवताओं  को को छोड़  दें ?  सूरा -अस साफ्फात 37:36
"लोग  कहते हैं  कि यह (कुरान )  स्वप्न  है  , इसने इसे खुद  बना लिया  है  . यह एक कवि  है   . इसे चाहिए की यह हमारे सामने कोई  सबूत दिखाए  "
सूरा -अल अम्बिया  21 :5
4-मुहम्मद  साहब  की  चालाकी 
जब  मक्का  के लोग   मुहम्मद  साहब  को पागल  कवि   होने  का आरोप  लगा कर कहने लगे कि कुरान  अलाह की किताब  नहीं  ,खुद मुहम्मद की  रचना है  , तब कुरान को अल्लाह की किताब  साबित करने के लिए  मुहमद  साहब ने  अनपढ़  होने का नाटक   रचाया   ,  , कुरान में कहा  कि ,
"जो लोग उस उम्मी नबी  के पीछे चलते हैं जो न  लिख  सकता है  ,और न  पढ़  सकता  है  इसलिए  अल्लाह और  उसकी  किताब पर ईमान  रखो  "सूरा  -अल आराफ 7:157

"हे  नबी  इस से पहले तुम कोई  किताब  नहीं  पढ़ते थे  और  न  हाथ  से लिखते थे  , नहीं  तो शंका  करने वाले तुम्हें  झूठ पकड़ लेते "
सूरा  -अनकबूत 29:48

5-मुहम्मद के  झूठ  का  भंडाफोड़ 
मुहमद  साहब के अनपढ़  होने के झूठ  की पोल हदीस  ने खोल  दी  है  , वास्तव  में  मुहम्मद  और उनके साथी मिल कर  कुरान  की आयतें   लिखते थे ,हदीस  में कहा है  ,
सईदुल खुदरी  ने कहा कि रसूल ने कहा ,कि तुम मुझ  से कुरान के अलावा  कुछ  भी लिखवा लो ,और यदि लिख भी लो तो उसे मिटा  ( delete) देना "

"The prophet said: "Do not write down anything from me except the Quran. Whoever wrote other than that should delete it."

  "‏ لاَ تَكْتُبُوا عَنِّي وَمَنْ كَتَبَ عَنِّي غَيْرَ الْقُرْآنِ فَلْيَمْحُهُ وَحَدِّثُوا    "


सही मुस्लिम -किताब 42 हदीस 7147

2-दूसरा  कारण -  मुहम्मद साहब  द्वारा  लोगों  एक  ही अल्लाह को  मानने पर  जोर  देने के पीछे खुद को अल्लाह  का इकलौता   रसूल  साबित करना था , यहाँ तक  वह  खुद  को अल्लाह  के बराबर  बताने  लगे  ,  कुरान  में कहा है  ,
जो लोग अल्लाह और उसके रसूल  को दुःख  देते हैं  ,उनपर दुनिया और आख़िरत में लानत और यातना तैयार  रखी है  "सूरा - अहजाब 33:57

"إِنَّ الَّذِينَ يُؤْذُونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ لَعَنَهُمُ اللَّهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ  "


.   "those who malign Allah and His messenger, Allah hath cursed them in this world and  hearafter"'Qur)an (33:57

इसका  साफ  मतलब   है कि  मुहम्मद को  दुःख  देना  अल्लाह को दुःख  देने  के समान   है
6-अल्लाह  एक  शरीरधारी  व्यक्ति 

कुरान  में कहा  है  ,यदि अल्लाह  के पुत्र  होता ,  इसका साफ  मतलब  है कि अल्लाह  कोई व्यक्ति  रहा होगा   , यह  आयत देखिये  ,
हे नबी  कह दो  अगर अल्लाह  का बेटा होता तो  मैं उसकी  सबसे पहले  इबादत  करने वाला होता " सूरा जुखुरुफ़ 43:81

"قُلْ إِنْ كَانَ لِلرَّحْمَٰنِ وَلَدٌ فَأَنَا أَوَّلُ الْعَابِدِينَ  "

"If the Most Gracious had a son, I would be the first to worship him!"43:81

3-तीसरा कारण-मुसलमान  जब भी  अल्लाह  के एक  होने  की  बात  करते हैं  तो   कुरान  की इस  आयत का हवाला   देते हैं  ,
" कह  दो कि  वह  अल्लाह  एक है   "कुल हुव अल्लाह  अहद -  قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ "सूरा इख़लास  112 :1
ध्यान  करने की  बात है कि  इस  आयत  में  तथाकथित  अल्लाह  मुहम्मद  साहब   को निर्देश  दे रहा कि  तुम  लोगों  से कह दो  कि  अल्लाह  एक  है .इसलिए मुहम्मद  साहब से  कहलवाने  की  जगह खुद  अल्लाह  को यह कह  देना  चाहिए  था  कि "  मैं एक अल्लाह  हूँ " ( I am  one Allah )अरबी  में "अना वाहिद अल्लाह - أنا واحد الله "हमें  इस बात पर  गौर  करना  चाहिए   अल्लाह  की  गवाही क्यों  चाहिए  ?

7-एक अल्लाहवाद   की  असलियत

इस्लामी  परिभाषा  में  अल्लाह  के  एकत्व ( monotheism )  को  "तौहीद - توحيد "  कहा   जाता   है  ,  इसका उद्देश्य  लोगों  को  एक ही  अल्लाह  की इबादत करना है  , जबकि   मुसलमानों  के अल्लाह में  ,मुहम्मद  , उनका  भाई अली,पत्नी  आयशा  , मुहम्मद  साहब के ससुर  और  साथी   सभी शामिल  हैं    , वास्तव में  मुसलमान  एक अल्लाह  के  बहाने  दुनियां   पर  एक  ही हुकूमत  स्थापित  करना     चाहते  हैं  , जिस   एक ही  शरीयत का कानून  चले. लेकिन  जैसे   मुहम्मद  साहब  के समय  भी कई  लोग लोग  अल्लाह  बने  हुए थे  , आज  भी मुस्लिम  देशों  कई  शासक  और  मुल्ले  खुद  को  अल्लाह  समझ  कर लोगों की जिंदगियां  छीन रहे  हैं   , और दुनियां  के मालिक  बने  हुए  हैं  , शायद  इसी  लिए  साईं  बाबा  उर्फ़  चाँद  मिया  कहता था " सबका  मालिक    एक  है  " अर्थात  दुनियां   की  पूरी धरती और   सम्पति संपत्ति अकेले अल्लाह यानि मुसलमानों  की है  . 

http://www.islam101.com/tauheed/AllahWE.htm

शनिवार, 28 जून 2014

भंडाफोडू की बात सच निकली !

सभी लोग  इस  बात को स्वीकार  करेंगे कि  सत्य   ही  धर्म  है  ,इसलिए  बिना  किसी विद्वेष  और दुराग्रह  के लोगों   के सामने  सत्य का प्रचार  करना  हरेक  व्यक्ति   का कर्तव्य  होना  चाहिए ,  वास्तवमे  यह भी  धर्म  का एक रूप  है , क्योंकि देखा  दया है कि सत्य  को त्यागने पर देश  और समाज  के लिए  घातक दुष्परिणाम     भोगना   पड़ते  है  , लेकिन उस  से बड़े  घातक परिणाम  असत्य  को सत्य  और अधर्म को धर्म  समझ   लेने  से होते हैं  . इसका पता हमें  इस्लामी  देशों और  खासकर  ईराक  में  होने  वाली  घटनाओं    से लगता  है  ,
आजकल दुनिया  के  मुसलमान   इस्लाम  के  बहाने आतंक  की  जो  आग  जला  रहे  हैं  ,उसकी  लपटें कभी   भी भारत  तक  पहुँच  सकती  हैं  . और  इस  आग को  और  भड़काने वाले  बाहर नहीं अंदर  के  ही  लोग  होंगे ,जो अपना  जिहादी चेहरा  छुपा  कर सेकुलर बन गए  हैं , और  विभिन्न दलों  में घुस कर भारत  में अव्यवस्था ,फ़ैलाने की योजना  बना  चुके हैं , सिर्फ उपयुक्त  मौके  की तलाश की राह  देख  रहे  हैं  . भंडाफोडू   ब्लॉग  सन  2009  से प्रमाण  सहित इस्लाम  की  इसी  नीति  और धर्म  और शांति  की आड़  में चलाये   जा रहे इस्लाम  के दुष्प्रचार का  भंडा  फोड़ता  आया  है  .और   अपने  तर्कपूर्ण  लेखों  से  देशभक्त  हिन्दुओं  को सचेत  करता  आया  है   .और इस  ब्लॉग ने अपनी  प्रथम  पोस्ट से  लेकर  केवल  दो  साल   में  ही  इस्लाम सम्बंधित विभिन्न विषयों  पर जो  लेख  प्रकाशित  किये   थे  उनमे  दी  गयी  सभी  बातें सही  साबित  हो  रही  हैं ,ऐसे कुछ   विषयों   के शीर्षक  और  लेखों   के प्रकाशन  की तारीख यहाँ  दी   जारही   है , और  साथ में  अखबार  की  वह  खबर भी  दी  जा  रही  है  ,जो ब्लॉग  के लेख  को सत्यापित और प्रमाणित  करती  है ,जैसे

1-अल्लाह  ईश्वर  नहीं   है 
हम  सदा से कहते  रहते  थे  कि अल्लाह  ईश्वर  नहीं  है , ईश्वर  तो मनुष्य  मात्र   का होता  , लेकिन अलाह  अरब  का  एक  देवता  था ,  यही  नही  मुसलमान  कुरान  को  जिस अल्लाह  की रचना  बताते  हैं  ईश्वर ( God )   नहीं   , एक व्यक्ति  था  जो  मर  चूका   है यद्यपि  मुसलमान  इस  सत्य  को  नहीं   मानते  लेकिन आज  इस   बात  को सार्वजनिक  रूप  से कहनेलगे कि  गैर  मुस्लिम अल्लाह का  नाम  नहीं  ले सकते  , अर्थात अल्लाह   सिर्फ अरबों  या मुसलमानों   का उपास्य   है.
अल्लाह कौन था -8/12/2010,अल्लाह की असलियत -20/7/2011,अल्लाह को पहचान लो -21/7/2011,अल्लाह दज्जाल यानि शैतान है -23/8/2011,अल्लाह ईश्वर नहीं है -1/11/2010,अल्लाह मर चुका है -13/6/2012
सभी  अख़बारों ने  इस खबरको  प्रमुखता से  छापा है कि मालशिया  की सुप्रीम  कोर्ट  ने आदेश  दिया  है कि अल्लाह सिर्फ  मुसलमानों का है , और यदि  कोई  गैर मुस्लिम   अल्लाह  का नाम लेगा  तो उसे कठोर सजा दी   जाएगी  .
"On Monday (June 23), Malaysia’s Supreme Court upheld a lower court ruling that found the term “Allah” belonged to Muslims.

इसलिए  यहाँ  के सभी  गैर  मुस्लिमो  खासकर हिन्दुओं   को  चाहिए के  वे अल्लाह  को उसके  असली  नाम " माकिर " कहा   करें , जिसका अर्थ  मक्कार    होता  है  . इस  पर  कोई  केस  नहीं  कर  सकेगा ,  हमारा  लेख  देखिये ,अल्लाह का असली नाम माकिर है -28/3/2012



2-इस्लाम सेकुलरिज्म   का  शत्रु  है 

मुसलमान  गिरगिट  की  तरह  अपना  रंग  बदलने  में माहिर  है  , जब  वह  संख्या  में  कम  होते  हैं  तो सेकुलरिज्म , सर्वधर्म  समभाव  ,  भाईचारे  और  मानवता   की  वकालत  करके अपना  उल्लू  सीधा करने  में लगे रहते ही , लेकिन  जैसे  ही  वह बहुसंख्यक  होजाते हैं  तो इस्लाम  के दूसरे  समुदायों  के  जानी  दुश्मन  बन  जाते  हैं  , पाकिस्तान  में शिया  और अहमदियों  का  हाल  रोज अखबारों  में  आता  है  हमने इस पर कई  लेख  दिए  हैं ,इस्लाम में सभी मुसलमान समान -29/9/2011,इस्लामी पाखंड दोहरी नीति -18/9/2011,इस्लाम शांति या आतंक -4/5/2012
हमारी  यह  बात  मलेसिया  के संविधान  से सबित होती है  , जिसमे शिया   होने पर जेल  और कठोर दंड  देने  का  प्रावधान   है  ,

"Malaysia is no different. Its constitution declares Islam to be the official state religion and allows other religions to practice peacefully. Yet it is illegal and a jailable offense to be a Shiite Muslim in Malaysia.


3-बलात्कार   इस्लाम  में  धार्मिक  कार्य  है 

आज  सम्पूर्ण  भारत में   रोज बलात्कार  की एक से एक जघन्य  घटनाओं  की  भरमार   सी  हो रही   है ,वास्तव  में यह घटनाएँ हो  नहीं रही  हैं , बल्कि योजनाबद्ध  तरीके से गुप्त रूप से करवाई   जा रही  है  , बल्कि जिहादी   लोग   छुप कर मुर्ख  हिन्दुओं  से   करवा रहे  हैं  . क्योंकि बलात्कर   भी  जिहाद  है और  रसूल  की  सुन्नत  है  , यानि  जैसे  रसूल  करते  थे , वैसा ही मुस्लमान   कर  रहे  हैं  या  करवा  रहे  हैं , हमने  इसके बारे में कई  लेख  दिए  थे  जैसे "  बलात्कार जिहाद का हथियार -26/12/2010,हिन्दू लड़की भगाना जायज है -2/5/2010,रसूल की बलात्कार विधि -9/11/2010.

हमारे  लेखों   की  सत्यता इराक  के आतंकी  संगठन ( SIS - Islamic State in Iraq and Syria) जिसका  पूरा नाम  " al-Dawlah al-Islāmīyah fī al-ʻIrāq wa-al-Shām  "   है  .जिसका  पूरा  नाम" अल  दौलतुल  इस्लामिया फिल इराक वश्शाम   -  الدولة الاسلامية في العراق والشام‎  "  इसके  एक  फतवे   से  सिद्ध  हो जाती  है .यह  फ़तवा आतंकी दल   के  मुखिया " अबू  बकर अल बगदादी - أبو بكر البغدادي "  ने 23 जून  2014  को  जारी  किया  था .इस  फ़तवा  में  कहा  है "मुजाहिदों  द्वारा  नीनवे  प्रान्त  को मुक्त  करा  लिया  गया  है  ,  और रूढ़िवादी   सरकार की  सेना  पराजित  हो गयी  है  . हर जगह लोग  मुजाहिदों  का  गर्मजोशी से  स्वागत कर  रहे  है  , जल्द  ही  बाकी  प्रांतों  पर  भी मुजाहिदों   का  कब्ज़ा  हो  जायेगा  , इसलिए सभी निवासियों   का  दायित्व  है कि  वे मुजाहिदों  को खुश  करने के लिए अपनी  कुंवारी  लडकिया  मुजाहिदों  को पेश  करदें , और  जो इस  फतवे के आदेश में चूक  करेगा तो शरीयत  के  मुताबिक  उनको  नतीजा भुगतना  पड़ेगा "

"Now that the liberation of the Nineveh province by the mujahideen is a fact, the mujahideen feel the warm welcoming by their brothers and sisters in the province of Nineveh. Following the defeat of the sectarian army, god willing, we vow that this province will remain safe and protected by the mujahideen.

Therefor, we ask all the people of this province to bring forward unmarried women so they fulfill their duty of pleasing their brothers, the mujahideen. Who ever fails to comply, shall face consequences imposed by the sharia law.

June 13th
Nineveh province"

अरबी  में  पूरा  फ़तवा इस  लिंक  में  दिया गया  है  ,
http://4-ps.googleusercontent.com/h/www.thegatewaypundit.com/wp-content/uploads/2014/06/404x576xISISRapeFatwa.jpg.pagespeed.ic.zsqL1osseb.jpg

बलात्कार के  इस  फतवे में सबसे पहले " बिस्मिलाहिररहमानिर्रहीम "     भी  लिखा  है  ,  यह  बात इस्लाम  को नंगा  करने के लिए  काफी  है  ,

4-मुसलमान  क्या  चाहते  हैं ?

मुसलमानों  की  आदत  बन  गई  है  कि  वे  कर्तव्य  की  जगह हमेशा अधिकारों  की बात  करते रहते ,और  देश  की जगह  इस्लाम  को वरीयता  देतेहैं  , क्यों  इस्लाम  में देशभक्ति गुनाह  है  . उनसे देश  भक्ति  की आशा  करना बेकार  है  ,इस  विषय  पर भी हमने  कई  लेख  दिए  हैं  , की शायद  हिन्दू  अभी  भी सचेत  हो  जाएँ  , लेख  इसप्रकार  हैं  ,आतंकवाद समस्या नहीं जेहादी रणनीति है -26/2/09,इस्लाम में देशभक्ति महापाप है-4/3/09,-इस्लामी जिहाद की हकीकत-22/4/2010,मुसलमान आतंकवाद से इस्लामी हुकूमत चाहते हैं -30/4/2010,
5-धर्मनिरपेक्षता   मूर्खता  है  .
आज  तक  किसी  भी नेता या  व्यक्ति ने  इस  विषय  पर  चर्चा करने की  हिम्मत  नहीं  दिखाई  कि  मुसलमान  सिर्फ  भारत में ही  धर्म निरपेक्षता   की वकालत  क्यों  करते  है  , दुनिया  में  इतने मुस्लिम  देश  हैं  वहां  के  लोगों  को धर्म निरपेक्षता  क्यों  नहीं   सिखाते ?  यह  इनकी    एक चाल है , इनका  जो असली  उद्देश्य   है  , उसका भंडा  इन  लेखों   में फोड़  दिया  गया ,
'घातक है अल्पसंख्यकवाद -17/4/2010,क्या हम अब भी धर्मनिरपेक्ष बने रहेंगे -2/5/2010,

http://bhaandafodu.blogspot.in/


6-हमारा धर्म  और उद्देश्य  क्या होना   चाहिए 

दुर्भाग्य  की  बात  है कि  आजकल   हिन्दू  समाज  केवल  त्यौहार  मनाने , भंडारे  करवाने , जगह  जगह कीर्तन   का आयोजन  करवाने  और  मंदिरों  पर क्विंटलों सोना  चांदी चढाने  को  ही धर्म  समझ  बैठा  है ,और  ऐसा  मानता कि  इस  से  धर्म  की रक्षा   हो  जाएगी , यानि  देश  में धर्म  की स्थापना  हो  जाएगी  .  लेकिन  ऐसा नहीं   है  . धर्म  की  रक्षा  के लिए दुष्टों  , देशद्रोहियों , और आतंकियों  का  नाश  करना  अत्यंत आवश्यक  है  . जैसा कि  स्वयं  भगवान कृष्ण   ने  गीता  में  कहा  है ,
"परित्राणाय  साधूनाम विनाशयायच दुष्कृताम" -गीता अध्याय 4  श्लोक 8


इसलिए हमारा  पहला धर्म आसुरी  शक्तियों  , नाश  करना  होना  चाहिए ,और  यदि किसी  कारण  से  हम शश्त्रों  से  उनका  नाश  नहीं कर  पाएं  तो तर्कों   से  आसुरी  विचारों   का  मुहतोड़  जवाब  अवश्य   देते  रहें , और उनके मंसूबों  को  सफल  नहीं  होने  दें  .  क्योंकि  समाज  जितना  जागरूक  होगौटाना ही सशक्त   होगा  .
चूँकि  धर्म  देश  के बिना  नहीं  रह  सकता  , और देश धर्म  के बिना अपना  प्राचीन  गौरव , और  पहिचान   खो  देगा  , इसलिए देशभक्ति   भी हमारा  धर्म होना  चाहये  . हिन्दुओं   को  इंडोनेशिया   के इतिहास  से सबक  लेना  चाहिए   कि एक  समय  जो  देश हिन्दू  देश  था  , वह मुस्लिम  आबादी बढ़  जाने से इस्लामी  देश  कैसे बन  गया  .
हमारा  दुर्भाग्य है कि आजादी  के बाद  जिस  भारत को  हिन्दू  राष्ट्र घोषित  करना  चहिये था ,उसे कुछ  धूर्त हिंदू  विरोधी  नेताओं  ने सेकुलर  बना  कर इस्लामी   देश  बनने   का रास्ता  खोल  दिया  है.
इस  विषय  पर   हमने 5  साल  पहले ही  एक  लेख  प्रकाशित  किया  था  ,जिसका  शीर्षक  था।

"हिन्दू राज्य की स्थापना कैसे होगी -3/3/09"

7-पाठकों   से विनम्र   निवेदन 

इस लेख  के  माध्यम  से  हम  उन सभी  पाठको से  निवेदन करते  है  ,  जो  भंडाफोडू  ब्लॉग काफी पहले से पढ़ते  आये  है  ,और  जो फेसबुक  में  भी इसके  लेख  पढ़ते   हैं ,कि अपरिहार्य   कारणों  से    इस  ब्लॉग   को  चलाना  मुश्किल    हो  गया है  . अभी  तक  हम  एक पुराने  कम्प्यूटर का प्रयोग करके और इसके बारे में  अल्प  ज्ञान  होने के  बावजूद अकेले ही    अपना  कर्तव्य  निभाने   का प्रयास  करते  रहे  . परन्तु  अचानक आर्थिक  स्थिति  ख़राब हो  जानेसे   ऐसा संभव  नहीं  हो   पा  रहा  है  ,हमें पूरा  विश्वास   है कि  कुछ उदार महानुभाव  या  कोई  हिन्दू  संस्था  हमें सहायता के लिए  आगे  जरूर  आएगी  . हम   उन सब का  हार्दिक  आभार  मानेंगे  . यदि 5 -10  व्यक्ति  मिल  कर  भी कुछ सहायता  कर देंगे  तो भी  मेरा  काम  चल जायेगा .मेरे एकाउंट  का   विवरण  इस प्रकार  है ,


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आपकी  सहायता  मेरे कार्य  के  लिए उपयोगी और मेरा उत्साहवर्धन करने  वाली  होगी , मैं  सभी का हार्दिक  आभार  मानूंगा ,

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शनिवार, 14 जून 2014

भारत मुसलमानों के लिए स्वर्ग क्यों है ?

विश्व की कुल जनसंख्या में प्रत्येक चार में से एक मुसलमान है। मुसलमानों की 60 प्रतिशत जनसंख्या एशिया में रहती है तथा विश्व की कुल मुस्लिम जनसंख्या का एक तिहाई भाग अविभाजित भारत यानी भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश
में रहता है। विश्व में 75 देशों ने स्वयं को इस्लामी देश घोषित कर रखा है। पर, विश्व में  जितने भी बड़े-बड़े मुस्लिम देश माने जाते हैं, मुस्लिमों को कहीं भी इतनी सुख-सुविधाएं या मजहबी स्वतंत्रता नहीं है जितनी कि भारत में। इसीलिए किसी ने सच ही कहा है कि 'मुसलमानों के लिए भारत बहिश्त (स्वर्ग) है।' परन्तु यह भी सत्य है कि विश्व के एकमात्र हिन्दू देश भारत में इतना भारत तथा हिन्दू विरोध कहीं भी नहीं है, जितना 'इंडिया दैट इज भारत' में है। इस विरोध में सर्वाधिक सहयोगी हैं-सेकुलर राजनीतिक स्वयंभू बुद्धिजीवी तथा कुछ चाटुकार नौकरशाह। उनकी भावना के अनुरूप तो इस देश का सही नाम 'इंडिया दैट इज मुस्लिम' होना चाहिए .क्योंकि  विश्व  में भारत  एकमात्र  ऐसा  देश  है  जहाँ केवल   जनसंख्या   के  आधार  पर   मुसलमानों  की  जायज  नाजायज  मांगें  पूरी  कर दी जाती  हैं  , भले वह  देश   को  बर्बाद  करने में  कोई  कसर  नहीं  छोड़ें  ,
1-कम्युनिस्ट देश तथा मुस्लिम
आज   जो  कम्यूनिस्ट  सेकुलरिज्म  के  बहाने  मुसलमानों     के अधिकारों  की  वकालत  करते  हैं  , उन्हें  पता होना  चाहिए  कि कम्युनिस्ट  देशों  में  मुसलमानों   की  क्या  हालत  है।
विश्व के दो प्रसिद्ध कम्युनिस्ट देशों-सोवियत संघ (वर्तमान रूस) तथा चीन में मुसलमानों की जो दुर्गति हुई वह सर्व विदित है तथा अत्यन्त भयावह है। कम्युनिस्ट देश रूस में भयंकर मुस्लिम नरसंहार तथा क्रूर अत्याचार हुए। नारा दिया गया 'मीनार नहीं, मार्क्स चाहिए।' हजारों मस्जिदों को नष्ट कर हमाम (स्नान घर) बना दिए गए। हज की यात्रा को अरब पूंजीपतियों तथा सामन्तों का धन बटोरने का तरीका बताया गया। चीन में हमेशा से उसका उत्तर-पश्चिमी भाग शिनचियांग-मुसलमानों की वधशाला बना रहा। इस वर्ष भी मुस्लिम अधिकारियों तथा विद्यार्थियों को रमजान के महीने में रोजे रखने तथा सामूहिक नमाज बढ़ने पर प्रतिबन्ध लगाया गया।

2-यूरोपीय देश तथा मुस्लिम

सामान्यत: यूरोप के सभी प्रमुख देशों-ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, आदि में मुसलमानों के अनेक सामाजिक रीति-रिवाजों पर प्रतिबंध है। प्राय: सभी यूरोपीय देशों में मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने तथा मीनारों के निर्माण तथा उस पर लाउडस्पीकर लगाने पर प्रतिबंध है। बिट्रेन में इंडियन मुजहीद्दीन सहित 47 मुस्लिम आतंकवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगा हुआ है। ब्रिटेन का कथन है कि ये संगठन इस्लामी राज्य स्थापित करने और शरीयत कानून को लागू करने का अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए हिंसा का प्रयोग करते हैं। जर्मनी में भी बुर्के पर पाबन्दी है। जर्मनी के एक न्यायालय ने मुस्लिम बच्चों के खतना (सुन्नत) को 'मजहबी अत्याचार' कहकर प्रतिबंध लगा दिया है तथा जो डाक्टर उसमें सहायक होगा, उसे अपराधी माना जाएगा। जर्मनी के कोलोन शहर की अदालत ने बुधवार को सुनाए गए एक फैसले में कहा कि धार्मिक आधार पर शिशुओं का खतना करना उनके शरीर को कष्टकारी नुकसान पहुंचाने के बराबर है.और प्राकृतिक नियमों में हस्तक्षेप है
जर्मनी में मुस्लिम समुदाय इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं और वे इस बारे में कानूनविदों से मशविरा कर रहे हैं.
आशा है विश्व के सारे देश जल्द ही जर्मनी का अनुसरण करने लगेंगे.इसी  तरह फ्रांस विश्व का पहला यूरोपीय देश था जिसने पर्दे (बुर्के) पर प्रतिबंध लगाया।

3-मुस्लिम देशों में मुसलमानों की   हालत 
विश्व के बड़े मुस्लिम देशों में भी मुसलमानों के मजहबी तथा सामाजिक कृत्यों पर अनेक प्रकार के प्रतिबंध है। तुर्की में खिलाफत आन्दोलन के बाद से ही रूढ़िवादी तथा अरबपरस्त मुल्ला- मौलवियों की दुर्गति होती रही है। तुर्की में कुरान को अरबी भाषा में पढ़ने पर प्रतिबंध है। कुरान का सार्वजनिक वाचन तुर्की भाषा में होता है। शिक्षा में मुल्ला-मौलवियों का कोई दखल नहीं है। न्यायालयों में तुर्की शासन के नियम सर्वोपरि हैं। रूढ़िवादियों की सोच तथा अनेक पुरानी मस्जिदों पर ताले डाल दिए गए हैं। (पेरेवीज, 'द मिडिल ईस्ट टुडे' पृ. 161-190; तथा ऐ एम चिरगीव -इस्लाम इन फरमेन्ट, कन्टम्परेरी रिव्यू, (1927)। ईरान व इराक में शिया-सुन्नी के खूनी झगड़े-जग जाहिर हैं। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने भी यह स्वीकार किया है कि यहां मुसलमान भी सुरक्षित नहीं हैं। यहां मुसलमान परस्पर एक-दूसरे से लड़ते रहते हैं। उदाहरण के लिए जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान ने अहमदिया सम्प्रदाय के हजारों लोगों को मार दिया। इसके साथ हिन्दुओं के प्रति उनका क्रूर व्यवहार, जबरन मतान्तरण, पवित्र स्थलों को अपवित्र करना, हिन्दू को कोई उच्च स्थान न देना आदि भी जारी है। उनकी क्रूरता के कारण पाकिस्तानी हिन्दू वहां से जान बचाकर भारत आ रहे हैं। वहां हिन्दुओं की जनसंख्या घटकर केवल एक प्रतिशत के लगभग रह गई है। हिन्दुओं की यही हालत 1971 में बने बंगलादेश में भी है। वहां भी उनकी जनसंख्या 14 प्रतिशत से घटकर केवल 1 प्रतिशत रह गई है। साथ ही बंगलादेशी मुसलमान भी लाखों की संख्या में घुसपैठियों के रूप में जबरदस्ती असम में घुस रहे हैं।
अफगानिस्तान की अनेक घटनाओं से ज्ञात होता है जहां उन्होंने हिन्दुओं तथा बौद्धों के अनेक स्थानों को नष्ट किया, वहीं जुनूनी मुस्लिम कानूनों के अन्तर्गत मुस्लिम महिलाओं को भी नहीं बख्शा, नादिरशाही फतवे जारी किए। मंगोलिया में यह प्रश्न विवादास्पद बना रहा कि यदि अल्लाह सभी स्थानों पर है तो हज जाने की क्या आवश्यकता है? सऊदी अरब में मुस्लिम महिलाओं के लिए कार चलाना अथवा बिना पुरुष साथी के बाहर निकलना मना है। पर यह भी सत्य है कि किसी व्यवधान अथवा सड़क के सीध में न होने की स्थिति में मस्जिद को हटाना उनके लिए कोई मुश्किल नहीं है।
4-भारत में मुस्लिम तुष्टीकरण
अंग्रेजों ने भारत विभाजन कर, राजसत्ता का हस्तांतरण कर उसे कांग्रेस को सौंपा। साथ ही इन अलगाव विशेषज्ञों ने, अपनी मनोवृत्ति भी कांग्रेस का विरासत के रूप में सौंप दी। अंग्रेजों ने जो हिन्दू-मुस्लिम अलगाव कर तुष्टीकरण की नीति अपनाई थी, वैसे ही कांग्रेस ने वोट बैंक की चुनावी राजनीति में इस अलगाव को अपना हथियार बनाया। उसने मुस्लिम तुष्टीकरण में निर्लज्जता की सभी हदें पार कर दीं। यद्यपि संविधान में 'अल्पसंख्यक' की कोई निश्चित परिभाषा नहीं दी गई हैं, परन्तु व्यावहारिक रूप से चुनावी राजनीति को ध्यान में रखते हुए मुसलमानों को अल्पसंख्यक मान लिया गया तथा उन्हें खुश करने के लिए उनकी झोली में अनेक सुविधाएं डाल दीं। उनके लिए एक अलग मंत्रालय, 15 सूत्री कार्यक्रम व बजट में विशेष सुविधाएं, आरक्षण, हज यात्रा पर आयकर में छूट तथा सब्सिडी आदि। सच्चर कमेटी तथा रंगनाथ आयोग की सिफारिशों ने इन्हें प्रोत्साहन दिया।  भारतीय संविधान की चिन्ता न कर, न्यायालय के प्रतिरोध के बाद भी, मजहबी आधार पर आरक्षण के सन्दर्भ में कांग्रेस के नेता वक्तव्य देते रहते हैं।
5-हज  सब्सिडी  में  घोटाले 
विश्व में मुस्लिम देशों में हज यात्रा के लिए कोई विशेष सुविधा नहीं है। बल्कि मुस्लिम विद्वानों ने हज यात्रा के लिए दूसरे से धन या सरकारी चंदा लेना गुनाह बतलाया है। पर कांग्रेस शासन में 1959 में बनी पहली हज कमेटी के साथ ही सिलसिला शुरू हुआ हज में सुविधाओं का। सरकारी पूंजी का खूब दुरुपयोग हुआ। हज घोटालों के लिए कई जांच आयोग भी बैठे। हज सद्भावना शिष्ट मण्डल, हज में भी 'वी.आई.पी. कोटा' आदि की सूची बनने लगी। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के बाद जम्मू-कश्मीर के अब्दुल रसीद ने सरकार द्वारा सदभावना शिष्टमण्डल के सदस्यों के चयन पर प्रश्न खड़ा किया। क्योंकि उसमें 170 हज यात्रियों के नाम बदले हुए पाए गए। आखिर सर्वोच्च न्यायालय ने दखल दिया तथा 'अति विशिष्टों की' संख्या घटाकर 2500 से केवल 300 कर दी।
सामान्यत: प्रत्येक हज यात्री पर सरकार का लगभग एक लाख रु. खर्च होता है, परन्तु सरकारी प्रतिनिधियों पर आठ से अट्ठारह लाख रु. खर्च कर दिए जाते हैं। गत वर्ष राष्ट्रीय हज कमेटी ने यात्रियों को कुछ कुछ अन्य सुविधाएं प्रदान की, जिसमें 70 वर्ष के आयु से अधिक के आवेदक व्यक्तियों के लिए निश्चित यात्रा, चुने गए आवेदकों को आठ महीने रहने का परमिट तथा हज यात्रा पर जाने वाले यात्री के लिए पुलिस द्वारा सत्यापन में रियायत दी गई। इसके विपरीत श्रीनगर से 135 किलोमीटर की कठिन अमरनाथ यात्रा के लिए, जिसमें इस वर्ष 6 लाख 20 हजार यात्री गए, और आने-जाने के 31 दिन में 130 श्रद्धालु मारे गए, जिनके शोक में एक भी आंसू नहीं बहाया गया।
6-भारत   का  इस्लामीकरण 
असम में बंगलादेश के लाखों मुस्लिम घुसपैठियों के प्रति सरकार की उदार नीति, कश्मीर में तीन वार्ताकारों की रपट पर लीपा-पोती, मुम्बई में 50,000 मुस्लिम दंगाइयों द्वारा अमर जवान ज्योति या कहें कि राष्ट्र के अपमान पर कांग्रेस राज्य सरकार और केन्द्र की सोनिया सरकार की चुप्पी तथा दिल्ली के सुभाष पार्क में अचानक उग आयी अकबराबादी मस्जिद के निर्माण को न्यायालय द्वारा गिराने के आदेश पर भी सरकारी निष्क्रियता, क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है कि गत अप्रैल में भारत के तथाकथित सेकुलरवादियों ने हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में गोमांस भक्षण उत्सव मनाया तथा उसकी पुनरावृत्ति का प्रयास दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में किया गया? मांग की गई थी कि छात्रावासों में गोमांस भक्षण की सुविधा होनी चाहिए। पर सरकार न केवल उदासीन बनी रही बल्कि जिन्होंने इसका विरोध किया, उनके ही विरुद्ध डंडा चलाया गया। इस विश्लेषण के बाद गंभीर प्रश्न यह है कि कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टीकरण अथवा वोट बैंक को खुश करने की इस नीति से मुस्लिम समाज का अरबीकरण हो रहा है या भारतीयकरण? क्या इससे वे भारत की मुख्य धारा से जुड़ रहे हैं या अलगावादी मांगों के पोषण से राष्ट्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन रहे हैं? क्या चुनावी वोट बैंक की राजनीति, राष्ट्रहित से भी ऊपर है? देश के युवा विशेषकर पढ़े-लिखे  युवकों को इस पर गंभीरत से विचार करना होगा, ताकि  समाज की उन्नति के साथ राष्ट्र निर्माण में उनका सक्रिय सहयोग हो सके।

रविवार, 8 जून 2014

धारा 370 नेहरू का षडयंत्र है !

हिन्दू  मान्यता और पुराणों  के  अनुसार    कैलाश (कश्मीर )  और काशी ( बनारस )को  भगवान  शंकर  का  निवास  माना जाता है  . और इनको  इतना  पवित्र माना  गया है  कि  कुछ फारसी  के  मुस्लिम  शायरों  ने भी कश्मीर  और  बनारस को   धरती  का स्वर्ग  भी  कह  दिया  है  , यहाँ तक   कि  बनारस को भारत का  दूसरा  काबा  भी  बता  दिया  है  , जैसा कि इन पंक्तियों  में   कहा गया  है ,

"अगर फ़िरदौस  बर  रूए ज़मीनस्त - हमींनस्तो ,हमींनस्तो हमींनस्त "
अर्थ -यदि पृथ्वी  पर कहीं स्वर्ग  है , तो  वह यहीं  है  यहीं  है  और  यहीं  पर  है  . 

"ता अल्लाह बनारस  चश्मे  बद्दूर ,इबादत खानये नाकूसियानस्त ,
बर  रूए  ज़मीं फ़िरदौस मामूर , हमाना  काबाये  हिन्दोस्तानस्त "
अर्थ -अल्लाह  बनारस   को  बुरी  नजर  से बचाये  , जो शंख  बजाने  वाले (हिन्दुओं )  का पवित्र  नगर  है  , और  पृथ्वी  पर  स्वर्ग  की तरह प्रकाशमान   है  , यहाँ तक कि  हिंदुस्तान   का  काबा  है   .
इन  पंक्तियों   से  हम समझ  सकते हैं  कि  भारतीय लोगों  के दिलों  में कश्मीर  और काशी  के प्रति  कितना  लगाव  है  , लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि हमारी  उदासीनता  के कारण  बनारस और   नेहरू   के  कारण  कश्मीर  प्रदूषित    हो  गया  है , प्रधान  मंत्री  नरेंद्र मोदी ने  इन  दोनो  की  सफाई  का  बीड़ा  उठा   लिया  है  .  यह हमारे लिए सौभाग्य  और  हर्ष  का  विषय  है
आज एक बार फिर से राजनीति गलियारे में धारा 370 को लेकर बहस छिड़ गयी है। कोई इसके पक्ष में है तो किसी के पास इसका विरोध करने के पर्याप्त आधार है। किसी को लगता है कि संविधान की इस धारा में संशोधन होना चाहिए तो किसी को यह बहस का मुद्दा लगता है। लेकिन हम से काफी लोगों को पता ही नहीं कि धारा 370 है क्या जो समय-समय पर लोगों की बहस और विरोध का कारण बन जाती है जिसके चलते धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर को लेकर लोगों के बीच झगड़े होने लगते हैं। आईये आपको बताते हैं कि धारा 370 है क्या? जो देश के विशेष राज्य कश्मीर में लागू है।
 1-कश्मीर  का  मतलब   क्या  है  ?
 जहाँ  तक  हम  कश्मीर  की  बात  करते  हैं  ,तो उसका  तात्पर्य  सम्पूर्ण  कश्मीर    होता  है  ,जिसमे कश्मीर घाटी , जम्मू , पाक अधिकृत  कश्मीर  का भाग (   ) चीन  अधिकृत   सियाचिन  का  हिस्सा और लद्दाख  भी  शामिल  है  . भले ही  हम  ऐसे  कश्मीर  को भारत का अटूट  अंग  कहते  रहें  लेकिन नेहरू  के दवाब  में  बनायीं  गई  संविधान  की  धारा 370  के प्रावधान के अनुसार कोई भी समझदार  व्यक्ति  कश्मीर  को भारत का अंग नहीं  मान  सकता  , इसलिए  जब  जब  धारा 370  को  हटाने  की  बात  की  जाती  है तो कांग्रेसी  और  सेकुलर  इसके खिलाफ  खड़े  हो  जाते  हैं ,उदहारण  के  लिए जब 27 मई 2014 मंगलवार को मोदी  सरकार के राज्य मंत्री  जितेंद्र सिंह  ने   धारा 370  को  देश  की एकता  और अखंडता के लिए हानिकरक  बताया  तो  तुरंत ही  शेख  अब्दुल्लाह  के  नाती  उमर अब्दुलाह  इतने  भड़क  गए कि यहाँ  तक  कह  दिया  " यातो धारा 370 रहेगी  या  कश्मीर  रहेगा " उमर के  इस  कथन  का रहस्य  समझने  के  लिए  हमें नेहरू और शेख अब्दुलाह  के रिश्तों  के  बारे में  जानकारी  लेना  जरुरी  है  .
वास्तव  में  नेहरू  न  तो कश्मीरी  पंडित  था  और न  हिन्दू  था  , इसके प्रमाण  इस  बातसे  मिलते  हैं  की  कश्मीरी  पंडितों  ने  नेहरू  गोत्र  नहीं  मिलता  .  और नेहरू  ने  जीवन  भर  कभी कश्मीरी भाषा  या  संस्कृत  का एक  वाक्य  नहीं  बोला , नेहरू सिर्फ  उर्दू और अंगरेजी  बोलता  था  . और  और उसके हिन्दू विरोधी होनेका कारण  यह है   कि नेहरू एक  मुसलमान गाजीउद्दीन  का  वंशज  था  . और  शेख अब्दुलाह  मोतीलाल  की  एक मुस्लिम रखैल  की  औलाद  था  . अर्थात  जवाहर लाल  नेहरू  और शेख अब्दुलाह  सौतेले  भाई  थे  . इसी लिए  जब  संविधान  में  कश्मीर  के  बारे में लिखा जा रहा था  तो  नेहरू ने शेख अब्दुलाह को तत्कालीन  कानून  मंत्री  बाबा  साहब  अम्बेडकर  के  पास  भेजा  था   ,
2-धारा 370 क्या  है ?

धारा 370  भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद (धारा) है जिसे अंग्रेजी में आर्टिकल 370 कहा जाता है। इस धारा के कारण ही जम्मू एवं कश्मीर राज्य को सम्पूर्ण भारत में अन्य राज्यों के मुकाबले विशेष अधिकार अथवा (विशेष दर्ज़ा) प्राप्त है। देश को आज़ादी मिलने के बाद से लेकर अब तक यह धारा भारतीय राजनीति में बहुत विवादित रही है। भारतीय जनता पार्टी एवं कई राष्ट्रवादी दल इसे जम्मू एवं कश्मीर में व्याप्त अलगाववाद के लिये जिम्मेदार मानते हैं तथा इसे समाप्त करने की माँग करते रहे हैं। भारतीय संविधान में अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध सम्बन्धी भाग 21 का अनुच्छेद 370 जवाहरलाल नेहरू के विशेष हस्तक्षेप से तैयार किया गया था। स्वतन्त्र भारत के लिये कश्मीर का मुद्दा आज तक समस्या बना हुआ है

3-कश्मीर के  मामले में संविधान भी  लाचार  

जो  लोग संविधान  को सर्वोपरि बताते  हैं ,  और  बात बात  पर संविधान  की दुहाई  देते  रहते  हैं  , उन्हें पता  होना चाहिए की उसी  संविधान  की धारा  370  ने कश्मीर  के  मामले में संविधान  को लचार  और बेसहाय  बना  दिया  है , उदाहरण   के  लिए  ,

धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित क़ानून को लागू करवाने के लिये केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिये।
इसी विशेष दर्ज़े के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती
इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्ख़ास्त करने का अधिकार नहीं है।
1976 का शहरी भूमि क़ानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता।
इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि ख़रीदने का अधिकार है। यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते।
भारतीय संविधान की धारा 360 जिसमें देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती।
जम्मू और कश्मीर का भारत में विलय करना ज़्यादा बड़ी ज़रूरत थी और इस काम को अंजाम देने के लिये धारा 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार कश्मीर की जनता को उस समय दिये गये थे।
4-धारा  370  में राष्ट्रविरोधी  प्रावधान 

1. जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है । 2. जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग होता है । 3. जम्मू - कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है जबकी भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है । 4. जम्मू-कश्मीर के अन्दर भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं होता है । 5. भारत के उच्चतम न्यायलय के आदेश जम्मू - कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं । 6. भारत की संसद को जम्मू - कश्मीर के सम्बन्ध में अत्यंत सीमित क्षेत्र में कानून बना सकती है । 7. जम्मू कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जायेगी । इसके विपरीत यदि वह पकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू - कश्मीर की नागरिकता मिल जायेगी । 8. धारा 370 की वजह से कश्मीर में RTI लागु नहीं है । RTE लागू नहीं है । CAG लागू नहीं होता  ।कश्मीर  पर    भारत का कोई भी कानून लागु नहीं होता । 9. कश्मीर में महिलाओं  पर शरियत कानून लागु है । 10. कश्मीर में पंचायत के अधिकार नहीं । 11. कश्मीर में चपरासी को 2500 ही मिलते है । 12. कश्मीर में अल्पसंख्यको [ हिन्दू- सिख ] को 16 % आरक्षण नहीं मिलता । 13. धारा 370 की वजह से कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते है । 14. धारा 370 की वजह से ही पाकिस्तानियो को भी भारतीय नागरीकता मिल जाता है

5-अम्बेडकर  धारा  370  के  खिलाफ  थे 

बड़े  दःख की  बातहै कि  आज भी अधिकांश  लोग  यही  मानते  हैं  कि डाक्टर अम्बेडकर ने  ही  संविधान  की  धारा 370  का  मसौदा  तैयार किया  था  . अम्बेडकर ने खुद अपने  संसमरण   में इसका खंडन  किया  है  ,  वह  लिखते हैं   कि  जब सन 1949  में  संविधान   की धाराओं  का ड्राफ्ट  तैयार   हो रहा था  , तब  शेख अब्दुल्लाह  मेरे  पास आये  और बोले  कि  नेहरू  ने मुझे आपके  पास  यह  कह  कर भेजा  हैं   कि  आप  अम्बेडकर  से  कश्मीर  के बारे में अपनी  इच्छा  के अनुसार ऐसा ड्राफ्ट  बनवा  लीजिये  , जिसे  संविधान  में  जोड़ा  जा  सके  . अम्बेडकर  कहते  हैं  कि  मैंने  शेख  की बातें  ध्यान  से सुनी   और  उन से कहा  कि एक तरफ  तो आप चाहते  हो कि  भारत  कश्मीर  की रक्षा  करे  , कश्मीरियों  को खिलाये पिलाये , उनके विकास  और उन्नति के लिए प्रयास करे ,और  कश्मीरियों  को  भारत  के सभी प्रांतों  में  सुविधाये  और अधिकार  दिए  जाएँ  , लेकिन भारत के अन्य प्रांतों  के लोगों  को  कश्मीर में वैसी ही सुविधाओं  और अधिकारों  से वंचित  रखा  जाये  .  आपकी  बातों  से ऐसा प्रतीत  होता  है  कि आप भारत के  अन्य  प्रांतों  के लोगों को  कश्मीर  में समान  अधिकार  देने के  खिलाफ  हो  , यह  कह  कर  अम्बेडकर  ने  शेख   से कहा  मैं  कानून  मंत्री  हूँ  , मैं  देश  के  साथ  गद्दारी नहीं  कर  सकता  ( "I am (the) Law Minister of India, I cannot betray my country.” )  अम्बेडकर के यह शब्द  स्वर्णिम  अक्षरों   में  लिखने के  योग्य  हैं   .  यह  कह कर  अम्बेडकर  ने शेख अब्दुलाह  को  नेहरू  के  पास  वापिस लौटा  दिया , अर्थात  शेख अब्दुलाह   के ड्राफ्ट  को संविधान  में जोड़ने से  साफ  मन कर दिया  था  ,

6- नेहरू   का  देश  के साथ विश्वासघात 
  
जब  अम्बेडकर ने शेख अब्दुल्लाह  से संविधान  में  उसके अनुसार ड्राफ्ट जोड़ने  से  यह  कह कर  साफ  मना  कर दिया  कि  मैं  देश  के साथ  विश्वासघात  नहीं  कर  सकता  . तो  शेख नेहरू  के  पास गया , तब  नेहरू  ने गोपाल स्वामी अय्यंगार को  बुलवाया   जो संविधान  समिति  का  सदस्य  और   कश्मीर के  राजा  हरीसिंह    का   दीवान  रह  चूका   था  . नेहरू  ने उसे  आदेश  दिया  कि शेख  साहब  कश्मीर  के बारे में जोभी  चाहते  हैं  ,संविधान   की धारा  370  में  वैसा ही ड्राफ्ट  बना  दो  , आज  संविधान  की  धारा 370  में  कश्मीर के मुसलमानों   को जो अधिकार  दिए  गए  हैं वह  नेहरू  ने लिखवाये  थे  .
 इस घटना  से सिद्ध  होता  है कि नेहरू   ने  देश  के साथ  विश्वासघात   किया  था  , जिसका  दुष्परिणाम  देश  वासी  आज भी  भोग  रहे  हैं  .

चूँकि धारा 370 में कश्मीर  में शरीयत  का कानून लागू  है  ,इसलिये  जब  भी धारा  370  के  बारे में  बहस  होती  है तो उसके साथ ही जब  अम्बेडकर ने शेख अब्दुल्लाह  से संविधान  में  उसके अनुसार ड्राफ्ट जोड़ने  से  यह  कह कर  साफ  मना  कर दिया  कि  मैं  देश  के साथ  विश्वासघात  नहीं  कर  सकता  . तो  शेख नेहरू  के  पास गया , तब  नेहरू  ने गोपाल स्वामी अय्यंगार को  बुलवाया   जो संविधान  समिति  का  सदस्य  और   कश्मीर के  राजा  हरीसिंह    का   दीवान  रह  चूका   था  . नेहरू  ने उसे  आदेश  दिया  कि शेख  साहब  कश्मीर  के बारे में जोभी  चाहते  हैं  ,संविधान   की धारा  370  में  वैसा ही ड्राफ्ट  बना  दो  , आज  संविधान  की  धारा 370  में  कश्मीर के मुसलमानों   को जो अधिकार  दिए  गए  हैं वह  नेहरू  ने लिखवाये  थे  .
 इस घटना  से सिद्ध  होता  है कि नेहरू   ने  देश  के साथ  विश्वासघात   किया  था  , जिसका  दुष्परिणाम  देश  वासी  आज भी  भोग  रहे  हैं  .

चूँकि धारा 370 में कश्मीर  में शरीयत  का कानून लागू  है  ,इसलिये  जब  भी धारा  370  के  बारे में  बहस  होती  है तो उसके साथ ही समान  नागरिक  संहिता की  बात  जरूर  उठती  है  . की  बात  जरूर  उठती  है  .
इसलिए हमारा प्रधान मंत्री  महोदय  से  करबद्ध  निवेदन  है  कि  वह  काशी  को प्रदुषण मुक्त  बनाने का  अभियान चला  रहे हैं  उसी तरह  कश्मीर  से धारा 370 रूपी  प्रदुषण   हटाने  की कृपा  करें  , तभी  कश्मीर  वास्तव   में भारत  का अटूट  अंग  माना   जा  सकेगा  , साथ  में यह भी  अनुरोध  है कि  कश्मीरी  भाषा को  उर्दू  लिपि  की  जगह  शारदा लिपि  में लेखे  जाने  का आदेश  देने  की कृपा   करें  ,  इस से  कश्मीर की  प्राचीन  संस्कृति  बची  रहेगी  , उर्दू लिपी  से  कश्मीर  का  पाकिस्तान  का  छोटा  भाई  लगता  है  .

इसके  अतिरिक्त  मुगलों  ने  भारत  के जितने  भी  प्राचीन  नगरों  के  नाम  बदल  दिए थे , उनके  फिर से  नाम  रखवाने  का आदेश  निकलवाने की अनुकम्पा  करें ,  जैसे  इलाहबाद  का प्रयाग  , फैजाबाद  का अयोध्या  ,  अकबराबाद   का  आगरा  ,  अहमदाबाद  का  कर्णावती  , इत्यादि

: http://indiatoday.intoday.in/story/article-370-issue-omar-abdullah-jammu-and-kashmir-jawaharlal-nehru/1/364053.html

http://hindi.oneindia.in/news/india/know-about-370-act-jammu-kashmir-275770.html