शुक्रवार, 31 जनवरी 2014

सेकुलर मुस्लिमों की अल्लाह से गुजारिश ?


"بِسم الله خيرٌ الماكرين "

"बिस्मिल्लाह  ख़ैरुम्माकिरीन "

उस अल्लाह  के  नाम  से  जो सबसे  बड़ा -धोखेबाज -ठग, प्रवंचकऔर झूठा  है "(bestDeceitful, and liar)

हमें यकीन  है  कि आप इस  बात  को  बुरा   नहीं  मानेंगे  ,   आपको याद  ही  होगा  कि खुद आपने  ही  कुरान  सूरा  आले इमरान 3 :54  में  बड़े  ही फख्र  से  खुद  को  सबसे  बड़ा  मक्कार बताया  है  وَاللَّهُ خَيْرُ الْمَاكِرِينَ  "  3:54 -Allah is best deciever .) इसी   लिए  आपके  रसूल  भी आपके इस  नाम  को सार्थक  करने के   जीवन भर  अनपढ़  और  लालची  अरब  के  बद्दुओं   को  इस्लाम  के  बहाने  धोखा  देते  रहे  .इसलिए  बाद की पीढ़ियों   से आज तक   हम   दुनिया  भर  के लोगों  को धोखा  देते  रहते  हैं  , और अपना  उल्लू सीधा  करने  कि  जुगत  में  लगे  रहते  है  . आपको  यह   जान कर ख़ुशी  होगी  कि हमने यह अफवाह फैला  रखी  है  ,कि इस्लाम  के  मायने  शांति ( Peace)   है  . इस सफ़ेद झूठ कई  काफिर  और गैर  मुस्लिम  हमारे झांसे में  फस  जाते  है ,  लेकिन  वह बेवकूफ  यह  नहीं  जानते  कि हम दुनिया  में कबरिस्तान   जैसी  शांति   फैलाना  चाहते  और  ,और ऐसा तब तक   मुमकिन नहीं   हो सकता    है  जब तक   सभी  गैर  मुस्लिम कबरिस्तान   नहीं भेज   दिए  जाते  . इसलिए  हम अपनी असली  मंशा   को छुपाने  के  लिए  गिरगिट  की तरह  रंग  बदल लेते  है  . हमें पक्का यक़ीन  है  कि मक्का  के एक  छोटे  से अँधेरे  कमरे  में रहने  के  बावजूद   दुनिया  भर में  फैले  हुए  आपके  आतंकवादी  मुजाहिदों  ने आपको  यह  खबर  जरूर पंहुचा    दी  होगी  कि  हिंदुस्तान  में  इसी  साल  लोकसभा  के  चुनाव   होने  वाले  हैं   .

इसलिए  हम  खुफिया तौर से यह राज की  बात  बताये देते हैं  कि  इस गुजारिश के उन्वान में  हमने  मुस्लिम लफ्ज  के पहले सेकुलर लफ्ज क्यों  लगा  दिया है  , जबकि आप अच्छी तरह से  जानते  हैं  मुसलमान   सिर्फ  मुसलमान   ही होता  है  , और उसकी नजर   में सभी गैर मुस्लिम   काफिर और  वाजिबुल क़त्ल     होते  हैं   चाहे  वह सेकुलर  ही  क्यों  न  हों  . इसलिए अगर हमें मौका   मिलेगा  तो  हम  उनका भी वैसा  हाल  कर देंगे  जैसा  हमारे  बाप दादाओं  ने  हिंदुओं  का  किया  था  , लेकिन  जब  हमें  पता  चला  कि अगर बड़े से  बड़ा गुनहगार , भ्रष्टाचारी   और वतन फरोश  भी  खुद  को सेकुलर   कहने  लगता  है ,तो यहाँ  की इक्तेदार ( सत्ता  )की  भूखी  सरकार उनके  सभी गुनाह  माफ़  कर  देती  है  . गोया  सेकुलर होना  बेगुनाह  होने   की  सनद  है   .  यही  वजह है कि  हमारे  सैकड़ों  मुजाहिद  , हत्यारे , हिंदुस्तान  में  बेखोफ  होकर  खून  खराबा  करते  रहते  हैं  .

इसके आलावा  खुद को  सेकुलर बताने  के  कई और  फायदे  भी  हैं  आप तो  सब   जानते हैं  कि इस  वक्त हिंदुस्तान के मरकज (केंद्र )  में  एक ऐसी  सरकार  है    , जिसकी  बागडोर  एक  विदेशी    औरत  के  हाथों  में  है  ,  जो अपने    लौंडे  को वजीरे आजम   बनाने  के  लिए  कुछ  भी  कर  सकती  है ,क्योंकि उसकी वजारत ( मंत्री मंडल )  में ऐसे ऐसे  लोग  है  जिनके  नाम  तो हिन्दू  जैसे  हैं  , लेकिन उनकी रगों  में हमारे ही  पुरखों  का  खून  दौड़ रहा है  ,  हमें  अभी तक यह पता  नहीं चल पाया  कि  ऐसे  नेताओं  की माताओं ने    हमारे बाप दादाओं  के साथ  कब  मुंह  काला  किया  था , जिस के नतीजे में  सरकार में हमारे इतने  जादा  मददगार भर  गए , जिस  से  हमारी  हरेक  जायज  नाजायज मांग  फ़ौरन  मंजूर  हो  जाती   है ,
आपको  बताने  के  लिए  हम  कुछ  मिसालें  पेश  कर रहे  हैं  , जैसे ,

अगर हम  कहते हैं  कि  मुसलमान  गरीब  हैं  , तो यह  नामाकूल  सरकार  मुसलमानों  के लिए  खजाने  खोल  देती  है  , जबकि करीब डेढ़  हजार  साल  से  हमारे  पुरखे और  हम  इस  मुल्क  को  लूटते आये  है  , और लूट  के माल  मुसलमानों की  माली हालत ( आर्थिक स्थिति )  सुधारने  की  जगह   मजार , मकबरे  , दरगाह  , और  मस्जिदें   ही  बनाते  रहे ,बताइये  मुसलमान  गरीब  नहीं  तो क्या करोड़पति   हो  जाते ,  फिर भी  हमारा  दीनी  फर्ज है कि हम  कुछ न कुछ   मंगाते  रहें  , और इस काफ़िर सरकार चैन  से नहीं रहने  दें  ,
अगर हम  कहते हैं  कि  मुसलमान  गरीब  हैं  , तो यह  नामाकूल  सरकार  मुसलमानों  के लिए  खजाने  खोल  देती  है  , जबकि करीब डेढ़  हजार  साल  से  हमारे  पुरखे और  हम  इस  मुल्क  को  लूटते आये  है  , और लूट  के माल  मुसलमानों की  माली हालत ( आर्थिक स्थिति )  सुधारने  की  जगह   मजार , मकबरे  , दरगाह  , और  मस्जिदें   ही  बनाते  रहे ,बताइये  मुसलमान  गरीब  नहीं  तो क्या करोड़पति   हो  जाते ,  फिर भी  हमारा  दीनी  फर्ज है कि हम  कुछ न कुछ   मंगाते  रहें  , और इस काफ़िर सरकार चैन  से नहीं रहने  दें  ,
इसी तरह  हम  अगर यह  कहते  हैं  कि मुसलमान  अनपढ़  हैं  , उनकी तालीम  के  लिए सरकार  कुछ  नहीं  करती  ,तो यह सेकुलर सरकार तुरंत हरकत में आ  जाती  है , और रुपयों  के ढेर  लगा  देती  है  , जबकि अनपढ़  होना  शर्म  की  नहीं  बल्कि फख्र  की  बात  है , हमारे  रसूल  तो  भी उम्मी ( अनपढ़ ) थे  .   तालीम  और  इस्लाम  एक दूसरे  के दुश्मन   हैं  . हम  तो  बिना पढ़े  ही दूसरों के ऐसे  फार्मूले  चुराने  में  माहिर  हैं   ,जिन  से  बम  , और विस्फोटक  चीजें  बनाने  में  मदद    मिलती  हो  . पढाई  में दिमाग   ख़राब  करने  से  क्या  फायदा  , हमारे लिए कुरान  ही  काफी  है  , यही  बात  खलीफा  उमर  सिद्दीक   ने  कहा  था   . हम  तो  उसी  पर ईमान  रखते   हैं  . पढना  लिखना  इन  काफिर हिंदुओं  को  मुबारक ,  हम  तो  बिनापढ़े   ही  दुनिया  तो तबाह   और  बर्बाद  करने की कुव्वत  रखते   हैं  .
फिर भी  हम  आपसे  इस नेक  काम  के  लिए  मदद  की गुजारिश   कर रहे  हैं ,क्योंकि  हमें अपना भंडा  फूट  जाने  का  डर  बना   रहता  है , क्योंकि  जैसे  हम   सेकुलर   बन  कर  लोगों  को धोखा  दे रहे  है  ,  और  चुपचाप सरहद  पार  के अपने  जैसे  मुजाहिदों  की मदद  से यहाँ दहशत  फैलते  रहते  हैं  , आप  भी अल्लाह   बन  कर लोगों  को गुमराह  करते रहते  है ,और षडयंत्र  रचते  रहते   है  , शायद आपने  बिना  सोचे समझे  ही  कुरान  में यह  आयत   भेज  दी  होगी   कि ,
"अल्लाह उत्तम षडयंत्र  रचने  वाला  है " सूरा -अनफाल 8 :30 

" وَاللَّهُ خَيْرُ الْمَاكِرِينَ  " 8:30

"God is above all  conspirators"

बताइये अगर  इस आयात   को पढ़  कर लोग हमारी  असलियत और इरादों  के  बारेमे   जान  लेते  तो  क्या  होता  ,
 अल्लाह  जिसको  चाहे भटका  देता  है "सूरा -इब्राहिम 14 :4 


"   فَيُضِلُّ اللَّهُ مَنْ يَشَاءُ    "Sura-Ibrahim 14:4

 God lets go astray him that wills [to go astray],


फिर  भी  हमें  कोई फ़िक्र  नहीं  है  क्योंकि  मोदी  जैसे  हिंदुओं  को इतनी  फुरसत  ही  नहीं  कि  वह  कुरान की इस आयत  का  सही  मतलब  समझने  के लिए अरबी सीखें   .
लेकिन  हमें  तो डर  इटली  की औरत से  है , जो कट्टर  रोमन  कैथोलिक  ईसाई  है  . और  हरेक  काम पोप  की सलाह  से  करती  है   . अगर  उसने   आपकी  ही  किताब इंजील  यानि  बाइबिल  की  यह  आयत    पढ़  ली  तो आप पर  सारी  दुनिया  लानत  भेजने   लगेगी  . इसलिए इंजील  की  यह  आयात हिंदी , अंगरेजी  और  लैटिन   जुबान  के   तर्जुमे  के साथ  दे रहे  हैं  ,

"और सारे संसार  को भरमाने  वाला  वही  पुराना अजगर  सांप  है , जो इब्लीस और शैतान  कहलाता  है "
 बाइबिल-नया  नियम , प्रकाशित वाक्य 12:9

"-that ancient serpent called the devil, or Satan, who leads the whole world astray"

Bible-Revelation -12:9

"serpens antiquus qui vocatur Diabolus et Satanas qui seducit universum "

इस लिए   हमें  आपकी  हरकतों  से  और कुरान और इंजील  की इन  आयतों  को पढ़  कर शक  हो रहा  है  कहीं  आप  सचमुच शैतान  तो  नहीं  हो  .  और अल्लाह  का   रूप धर  कर  लोगों   को  भटका  रहे  हो  ,  जैसे  हम  सेकुलर  बन कर  लोगों   की आँखों  में  धूल झोंक  रहे  हैं  . और  वाकई  आप  शैतान  ही हो तो भी  हमें  आपकी  इबादत  करने  से  कोई  गुरेज  नहीं  ,  क्योंकि  जब  हम  1500  साल  तक  अल्लाह की  इबादत  करने  पर  भी  इंसान  नहीं  बन  सके   शैतान  की  इबादत  से हमारा क्या  बिगड़  जायेगा  . 
फिर भी  आप  जो भी  हो आपसे  यही    गुजारिश  है  कि  लोगों  के दिमाग  में  ऊंटों  की   ऐसी  लीद  भर  जाये  कि  वह  हमारी  असलियत  नहीं  समझ  सकें  ,

हम   हैं   आपके  बन्दे  

"सेकुलर मुस्लिमुल  हिन्द -   السيكولر مسلمالهند    "

बुधवार, 8 जनवरी 2014

गधा और लकड़बग्घा खाने वाले रसूल !

जानवर चाहे शाकाहारी हों   या  मांसाहारी   सबका  स्वभाव  और आदतें    अलग    होती   हैं    जो  अनोखी  होती  हैं  ,अगर  किसी  व्यक्ति  में  ऐसे जानवर  के  गुण   या  वैसा   स्वभाव   पाया  जाता   है   तो  लोग  उसकी  तुलना उसी   जानवर   से  करने   लगते   हैं , जैसे गधा  एक निरापद  , अहिंसक  और भोला   जानवर    होता   है  . इसलिए   हरेक   भाषा  में   मुर्ख  को  गधा   कहा    जाता    है  , गधे  बारे    में   कई   कहावतें   और  मुहावरे  प्रचलित  है  . जैसे  "अपने  मतलब   के  लिए   गधे   को  बाप बना  लेना  , " लकिन  मुहम्मद  साहब  अपने   स्वार्थ  के   लिए   गधे   को   खा   लेते   थे   .
ऐसा    ही एक  जानवर  लकड़बग्घा   है   .  मुहम्मद   साहब  और  उनके  साथी  उसे   भी  हड़प  कर  लेते   थे  .  यही  नहीं   मुहम्मद  साहब  गिरगिट   की  तरह  रंग   भी  बदलते   रहते  थे   , पहले  तो  वह जिस    जानवर  को खाना   हराम  बताते     रहते थे     फिर   कुछ  समय    बाद  उसी   को  खाने  के  बाद    हलाल  घोषित   कर देते    थे  . इस  लेख   में  इसी  बात   का सप्रमाण खुलासा   किया  जा  रहा   है  ,
लेख   का  पहला   भाग गधे (donkey )  जिसे अरबी  में " हिमार - حمار " कहते   हैं , उसका  गोश्त  खाने   के   बारे में है ,इस भाग की सभी  हदीसें  खैबर की   लड़ाई  से  सम्बंधित   है  ,

1-खैबर  की  लड़ाई
खैबर  की  लड़ाई को  अरबी  में " गजवये खैबर - غزوة خيبر " यानी Battle of Khaybar     कहा  जाता   है ,  यह  लड़ाई  सन 629  में  मुसलमानों और   यहूदियों   के  बीच  मदीना  से 150  कि  .  मी  .  दूर   खैबर  नामके एक नखलिस्तान  ( Oasis )   में  हुई थी  . इसीदौरान  मुहम्मद   साहब  ने  गधे   का  गोश्त  खाया  था  ,  और  उसे सदा  के लिए  जायज   ठहरा  दिया  था , यह  सभी   हदीसें   उसी  प्रष्ठभूमि  में    कही  गयी हैं  ,

लेख  का दूसरा भाग लकड़बग्घा के   बारे में   है जिसका  विवरण  इस  प्रकार  है ,

2-लकड़बग्घा-यह  एक लोमड़ी ,  भेड़िया , और  कुत्ते  की  प्रजाति   का   जानवर    है  , जोसर्वभक्षी    है  . यहाँ  तक  मरे  हुए   जानवरो   की   हड्डिया    भी   हजम  कर  जाता   है  . इसलिए  इसके  शरीर  से अजीब  सी  दुर्गन्ध    निकलती  रहती   है  .  अरबी  में  " जबअ --ضبع- "  कहते   हैं  , जिसका  बहुवचन "अल जबयात - الضبعيات "  है  . अंगेरजी   में इसे Hyena  और  फ़ारसी  में " कफ्तार - کفتار "
  कहते   है  . बदबू   के  कारण  लोग  इसे   नही  खाते  ,  लकिन मुहम्मद  साहब  और  उनके  साथी   इसका शिकार   करके शौक  से  खाया  करते  थे  ,  यही  नहीं मुहम्मद   साहब  की पत्नी इसके   खाने   को   जायज  मान  कर  खुद   खाती   थी  ,  जो  इन  हदीसों   और इस्लाम   की   किताबों   से  सिद्ध    होता   है ,


1-गधा नही घोड़ा  खाओ 
"जबीर  बिन  अब्दुल्लाह  ने  कहा  कि  खैबर  की लड़ाई   के समय रसूल  ने कहा    था  किई गधे   का  गोश्त खाना  हराम  है  , तुम घोड़े   का  गोश्त    खा सकते हो  "
The Prophet  prohibited the eating of donkey's meat on the day of the battle of Khaibar, and allowed the eating of horse flesh.

، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ نَهَى النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ خَيْبَرَ عَنْ لُحُومِ الْحُمُرِ، وَرَخَّصَ فِي لُحُومِ الْخَيْلِ‏.‏

सही बुखारी - जिल्द 7 किताब 67 हदीस 433

2-गधा नही घोड़ा  खाओ 

"जबीर  बिन  अब्दुल्लाह  ने  कहा  कि  खैबर  की लड़ाई   के समय रसूल  ने कहा    था  किई गधे   का  गोश्त खाना  गैर कानूनी   है इसलिए  तुम घोड़े का  गोश्त  खाया  करो "
"Allah's Messenger  made donkey's meat unlawful and allowed the eating of horse flesh "

 ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنهم ـ قَالَ نَهَى النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ خَيْبَرَ عَنْ لُحُومِ الْحُمُرِ، وَرَخَّصَ فِي لُحُومِ الْخَيْلِ‏.‏

सही बुखारी - जिल्द 7 किताब 67 हदीस 429

3-गधा मार कर खाया 

"अब्दुल्लाह  बिन अबू   कतदा ने  कहा  कि खैबर    के  समय  हम  लोग  इहराम   की  हालत  में ,  और  दुश्मन  छुपे  हुए थे   तभी हमारी   नजर एक   गधे  पर  पड़ी  हमने उसे  भाले  से   मार   दिया  और काट कर  उसका गोश्त  पका  कर रसूल  के साथ  मिल  कर   खा  लिया "
" we saw a  ass. and  attacked It with a spear and we ate its meat."

 حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي قَتَادَةَ، قَالَ انْطَلَقَ أَبِي مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَامَ الْحُدَيْبِيَةِ فَأَحْرَمَ أَصْحَابُهُ وَلَمْ يُحْرِمْ وَحُدِّثَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنَّ عَدُوًّا بِغَيْقَةَ فَانْطَلَقَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم - قَالَ - فَبَيْنَمَا أَنَا مَعَ أَصْحَابِهِ يَضْحَكُ بَعْضُهُمْ إِلَى بَعْضٍ إِذْ نَظَرْتُ فَإِذَا أَنَا بِحِمَارِ وَحْشٍ فَحَمَلْتُ عَلَيْهِ فَطَعَنْتُهُ فَأَثْبَتُّهُ فَاسْتَعَنْتُهُمْ فَأَبَوْ

सही मुस्लिम - किताब 7 हदीस 2710

4-गधे  के साथ  घोड़ा  भी   खाया 

"अबू  जुबैर   और  जबीर  बिन अब्दुल्लाह  ने   बताया  कि  खैबर  में  हमने  गधे  के  साथ  घोड़े  का  गोश्त  भी   खाया   था  "

“At the time of Khaibar we ate horses and  donkeys.”

، حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، أَخْبَرَنِي أَبُو الزُّبَيْرِ، أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، يَقُولُ أَكَلْنَا زَمَنَ خَيْبَرَ الْخَيْلَ وَحُمُرَ الْوَحْشِ ‏.‏

 सुन्नन  इब्ने  माजा - किताब 27   हदीस 3312

5-गधे  के  गोश्त  पर अस्थायी  पाबंदी 

"इब्ने अब्बास   ने  कहा कि रसूल  ने अस्थायी ( temporarily)  रूप  से गधे   का  गोश्त  खाने   से   मना   किया था  . क्योंकि  उस  समय  लोग गधों  पर सामान  ले   जाने   का   काम  लेते    थे "
" Prophet forbade the eating of donkey-meat temporarily  because they were means of transportation "

، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ لاَ أَدْرِي أَنَهَى عَنْهُ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مِنْ أَجْلِ أَنَّهُ كَانَ حَمُولَةَ النَّاسِ، فَكَرِهَ أَنْ تَذْهَبَ حَمُولَتُهُمْ، أَوْ حَرَّمَهُ فِي يَوْمِ خَيْبَرَ، لَحْمَ الْحُمُرِ الأَهْلِيَّةِ‏.‏

सुन्नन  इब्ने  माजा -जिल्द  5 किताब  59  हदीस 536

6-रसूल  ने  सबको गधा  खिलाया 

और जब  पाबंदी    हट  गयी   तो  रसूल   खुद गधा खाने लगे  और  साथियों    को भी  खिलाने   लगे   ,  यह  इस हदीस   से  पता  चलता  है  ,
"तल्हा बिन अब्दुल्लाह   ने बताया कि रसूल  ने  गधे  का  गोश्त  पकाया  , और  हम  लोगों में  वितरित   करके  सब  के  साथ  खाया "
"Prophet  gave  us some  donkey meat, and told him to distribute it among his Companions "

، عَنْ عِيسَى بْنِ طَلْحَةَ، عَنْ طَلْحَةَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ أَعْطَاهُ حِمَارَ وَحْشٍ وَأَمَرَهُ أَنْ يُفَرِّقَهُ فِي الرِّفَاقِ وَهُمْ مُحْرِمُونَ ‏.‏

सुन्नन  इब्ने  माजा - किताब  25  हदीस 3211

7-घी और पनीर  के  साथ  गधा 

"सलमान  फ़ारसी  ने  बताया  कि रसूल  ने  घी  और पनीर के  साथ   गधा   खाया  , और  कहा  इसका  खाना  हलाल   है ,क्योंकि केवल   वही  जानवर हराम  हैं  ,  जिनके  नाम  अल्लाह  की  किताब   में   दिए  गए   हैं  ,  और  गधे  के  बारे में अल्लाह की   किताब में  कुछ   नहीं      कहा   है , इसलिए इसका   खाना   माफ़   है "
"Messenger of Allah   was asked about ghee, cheese and  donkeys. He said: ‘What is lawful is that which Allah has permitted, in His Book and what is unlawful is that which Allah has forbidden in His Book. What He remained silent about is what is pardoned.’”

، عَنْ سَلْمَانَ الْفَارِسِيِّ، قَالَ سُئِلَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ عَنِ السَّمْنِ وَالْجُبْنِ وَالْفِرَاءِ قَالَ ‏ "‏ الْحَلاَلُ مَا أَحَلَّ اللَّهُ فِي كِتَابِهِ وَالْحَرَامُ مَا حَرَّمَ اللَّهُ فِي كِتَابِهِ وَمَا سَكَتَ عَنْهُ فَهُوَ مِمَّا عَفَا عَنْهُ ‏"‏ ‏.‏

सुन्नन  इब्ने  माजा - किताब  29  हदीस  3492

जब  गधा   खाने के  बाद भी   रसूल  और  उनके  साथियों का  दिल  भर  गया  तो  , वह  लकड़बग्घा   भी    खाने   लगे  , और रसूल  ने  जिस  कुतर्क   के  सहारे   गधा   खाने  को  हलाल    बता  दिया  था  ,उसी   कुतर्क    के  सहारे लकड़बग्घा  खाने  को   जायज सिद्ध   कर  दिया  ,  इसके बारे में  दो  हदीसें   मौजूद   है  ,

8-लकड़बग्घा भी खाया 

"इब्ने अबी अम्मार  ने  कहा  कि जब  जाबिर  बिन अब्दुल्लाह  ने  मुझ  से  लकड़बग्घा   खाने को  कहा  ,तो मैंने उस से  पूछ कि क्या  यह  हलाल  है ? उसने  कहा हाँ ,फिर  मैंने पूछा  कि  क्या तुमने यह  बात रसूल   से सुनी  है  ?  तो  वह  बोला  हाँ  .

"I asked Jabir bin Abdulla about hyenas, and he told me to eat them. I said: "Is it lawfull ? He said: 'Yes' I said: 'Did you hear that from the Messenger of Allah?' He said: 'Yes.'" (Sahih)

، عَنِ ابْنِ أَبِي عَمَّارٍ، قَالَ سَأَلْتُ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ عَنِ الضَّبُعِ، فَأَمَرَنِي بِأَكْلِهَا ‏.‏ قُلْتُ أَصَيْدٌ هِيَ قَالَ نَعَمْ ‏.‏ قُلْتُ أَسَمِعْتَهُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ نَعَمْ ‏.‏

सुन्नन  अन नसाई - जिल्द 3 किताब 24  हदीस2839 

9-लकड़ बग्घा  का  शिकार 

"इब्ने अबी अम्मार  ने  कहा  कि जब  जाबिर  बिन अब्दुल्लाह  ने  मुझ  से  लकड़बग्घा   खाने को  कहा  ,तो मैंने उस से  पूछ कि क्या   यह  शिकार करने    योग्य   जानवर   है ? उसने  कहा हाँ ,फिर  मैंने पूछा  कि  क्या तुमने यह  बात रसूल   से सुनी  है  ?  तो  वह  बोला  हाँ  .  "I asked Jabir bin 'Abdullah about hyenas and he told me to eat them. I said: 'Are they game that can be hunted)? He said: 'Yes,' I said: 'Did you hear that form the Messenger of Allah He said: 'Yes," (Sahih)

، عَنِ ابْنِ أَبِي عَمَّارٍ، قَالَ سَأَلْتُ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ عَنِ الضَّبُعِ، فَأَمَرَنِي بِأَكْلِهَا فَقُلْتُ أَصَيْدٌ هِيَ قَالَ نَعَمْ ‏.‏ قُلْتُ أَسَمِعْتَهُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ نَعَمْ ‏.‏

सुन्नन  अन नसाई - जिल्द 5 किताब  42 हदीस 4328

10-आयशा ने लकड़बग्घा खाया 

अभी  तक  तो  हदीसों   से   साबित   हो गया  कि रसूल  और  उनके  साथी  लकड़बग्घा    खाया   करते  थे  ,  लेकिन मलिकी  फिरके  के  सुन्नी  इमाम  "अबू अल वलीद मुहम्मद  बिन अहमद बिन रशद -  أبو الوليد محمد بن احمد بن رشد‎" ने  अपनी  इतिहासिक किताब( textbook of Maliki doctrine in a comparative framework)  "बिदायतुल मुजतहिद वल निहायतुल  मुक्तहिद - بداية المجتهد و نهاية المقتصد"   में  इस  रहस्य   का भंडा  फोड़   दिया   कि  ,  मुहम्मद  साहब  की पत्नी  आयशा   न  केवल  लकड़बग्घा    खाने   को हलाल  बताती  थी  , बल्कि  खुद   भी   खाया   करती  थी   ,इमाम   बताते   हैं    कि ,भले   आजकल  के अधिकाँश  विद्वान   गधे  और  लकड़बग्घे    को  खाना  हराम     कहते   हैं   ,सिवाय इब्ने  अब्बास और  आयशा   के   ,   क्योंकि  यह दौनों   इन्हें      खाने    को   हराम   नही   मानते   थे  ,
"The majority of scholars deem the meat of  donkey  and  hyena to be Haram ,except ibn Abbas and Ayesha as it has narrated that both of them deemed it Halal "

فإن جمهور العلماء على تحريم لحوم الحمر الإنسية الا ما روي عن ابن عباس وعائشة انهما كانا يبيحانهما وعن مالك انه كان يكرهها

""इब्ने  अब्बास  और   आयशा  ने  कहा   वह (  गधा और लकड़बग्घा )   हराम  बिलकुल   नही   हैं  "

Ibn Abbas and aisha said that it’s not Haram "

"  قال ابن عباس وعائشة أنه ليس من الحرم.   "
  
 Bidayat al-Mujtahid by Ibn Rushd, Volume 1 page 387:  

सब    जानत हैं  कि  जैसे    गधा   अपनी  मूर्खता  और  अड़ियल   स्वभाव  के लिए  बदनाम   है  , उसी  तरह  लकड़ बग्घा  अपनी मक्कारी  और  धोखे  से  हमला   करने  के  लिए  कुख्यात   है  ,  तो  बताइए  जो  रसूल , उसके   सहाबा    और  पत्नी  इन   जानवरों   को   खाया  करते  हों  उनका  स्वभाव  कैसा   रहा   होगा ?और  जो  लोग इनको  अपना  आदर्श     मानते   हों    उनको  क्या    कहना  चाहिए  ?


http://www.shiapen.com/concise/is-eating-flesh-of-domestic-donkey-allowed-or-prohibited.html

रविवार, 5 जनवरी 2014

यौन अपराध इस्लाम की सौगात हैं !

इस बात  से  कोई  भी  व्यक्ति  इंकार   नही  कर सकता   कि मनुष्य   के  ऊपर  संगती   का  प्रभाव     जरूर  पड़ता   है  .  चूँकि   भारत   को एक   सेकुलर  देश   बना   दिया   गया   है  , इसलिए   हिंदुओं   पर इस्लामी  रंग  पड़ना  स्वाभाविक   है  . यह   बात  भारत   में महिलाओ  के  साथ  होने  वाले यौन  अपराधो   के  बार में   है  ,जो  कठोर   कानून   बनाये   जाने   के  बावजूद  कम  होने   की  जगह  और  बढ़  रहे  हैं  . यह बात  इसलिए  और  गम्भीर    हो  जाती  है  कि जब प्रतष्ठित  व्यक्ति   भी  महिला उत्पीड़न    जैसे निंदनीय   अपराधो  में  आरोपित   किये जाते हैं  .  कुछ  लोग  इसका   कारण नैतिक शिक्षा  की  कमी बताते हैं , लेकिन  उनको  इस  कटु सत्य   को स्वीकार  करना  पड़ेगा   कि सभी यौन अपराध जैसे  बलात्कार ,लडकियो  को  बेचना ( WomenTraffiking ) वेश्यावृत्ति ,अपहरण इत्यादि  इस्लाम     की   सौगात   हैं  ,क्योंकि   इस्लामी  किताबो   में  इसे  उचित  और   जायज  बताया  गया   है  .  सामान्य  लोग  कुरान और हदीसों   को  इस्लाम   की   प्रमाणिक   किताबें   समझते   हैं  , लेकिन उनको पता  होना  चाहिए  कि इस्लाम   की   ऎसी और  किताबे   हैं  ,जो हदीसों की  तरह   ही  प्रमाणिक    हैं   .  इस  लेख में  कुछ  ऎसी  ही  किताबो  के  आधार  पर    यही  सिद्ध   किया  जा रहा है कि सभी  यौन अपराधों   की  प्रेरणा   इस्लाम  की नारी  विरोधी   शिक्षा   ही   है ,चूँकि  हरेक  दुराचार  और  कुकर्मो  की  बुनियाद    अक्सर  घर में ही पड़  जाती   है , इसे  साबित  करने  के  लिए फतवाए आलम गीरी   का एक फतवा  ज्यों   का त्यों दिया  जा  रहा   है  ,
1-माँ और बहिन से निकाह जायज है  

Ager 5 aurto say ik aqad main nikah kia ya 4 kay nikah main panchavee ka nikah kia ya apni joro ki behan ya maa say nikah kia pas iss say jamaa kia aur kaha ka main janta tha kay yeh muj per Haram hai ya aurat say batoor e muttah tazooj kia tu in say surtoo main wati kunenda per had wajib na ho ge agerche us nay kaha kay main janta tha kay wo muj per haram hain

"If someone marries five women at a time or marries a fifth woman while already having four wives or marries his sister in law or mother in law and then performs intercourse with her and then says that I knew that it is haram for me or performs nikah al mutah with a woman then there will be no plenty of adultery on him in all of these situations though he confessed that he knew it was haram on him"

Fatwa Alamgiri, Volume 3 page 264

http://www.ahnafexpose.com/biwi_ke_behen_ya_maa_se_nikaah_aur_jamaa.html

2-रसूल  के घर  सामूहिक  दुष्कर्म 

हिजरी  सन  1111  में  पैदा  हुए शिया  विद्वान  " मुहम्मद  बाकर अल  मजलिसी -    محمد باقر المجلسي "  ने  अपनी  किताब "बहारुल अनवार  -بحار الأنوار‎, "   में  अली  , आयशा  और उम्र के बारे में  ऎसी ऐसी  गुप्त   बातें   लिखी   हैं  ,जिन को  पढ़  कर  सुन्नी   शर्म   के  मारे  डूब   कर   मर   जायेंगे   , यहाँ  केवल दो  नमूने    दिए    जा  रहे   हैं ,

1.इमाम  जाफर  बिन  मुहम्मद   ने  बताया कि रसूल अपना  चेहरा  अपनी  पुत्री  फातिमा  के स्तनों   के  बीच  में  रख  कर  सोया  कर

"It was narrated that [Imam] Ja`far Ibn Muhamad said : The prophet Muhammad p.b.u.h used to put his face between the breasts of [his daughter] Fatima before going to sleep” (

وقال جعفر بن محمد: النبي محمد عليه الصلاة والسلام يستخدم لوضع وجهه بين الثديين من [ابنته] فاطمة قبل النوم "(

(Bihaar al-Anwar( بحار الأنوار‎, ) vol. 43, p. 78

2.अली  इब्न अबी तालिब  ने  बताया  कि एक  बार  मैं  रसूल  के  साथ  सोया   और एक   ही  चादर   में  आयशा   भी  थी  . और  जब  रसूल सवेरे  नमाज  के लिए उठ  कर चले  गए  तब   भी  मैं और आयशा उसी तरह एक  ही  चादर    में  सोते  रहे "

Ali Ibn Abi Talib said that he once slept with the prophet Muhammad p.b.u.h and his wife Ayesha in one bed, and under one cover, then the prophet woke up to pray, and left them together [Ali and Ayesha] in the same bed, under the same cover” 

وقال علي بن أبي طالب أن ينام مرة واحدة مع النبي محمد عليه الصلاة والسلام وزوجته عائشة في سرير واحد، وتحت غطاء واحد، ثم استيقظ النبي إلى الصلاة، وترك لهم معا [علي وعائشة] في نفس السرير، تحت نفس غطاء "

(Bihaar al-Anwar( بحار الأنوار‎, ) vol. 40, p. 2

अब  कोई  मुल्ला मौलवी  बताये कि अली    किस रिश्ते   के अनुसार  आयशा  के साथ एक  ही  चादर   में  सोया   था  .  एक तरफ  वह   रसूल   का  चचेरा  भाई था  तो  आयशा  उसकी  भाभी   हुई ,  फिर  मुहम्मद ने अपनी बेटी  फातिमा उसे   व्याह    दी यानि  वह  मुहम्मद  का  ससुर  और आयशा  उसकी  सास    हुई  , यानी अली अपनी  भाभी और सास  के साथ  सोया  था  . 

जिहाद   हमेशा   औरतो   को निशाना   बनाया   जाता   है  ,   जो जिहाद  में अनिवार्य    है  ,इसलिए

3-जिहाद में  बलात्कार गुनाह  नहीं  

 फतवा आलमगीरी   में कहा   है  कि अगर खलीफा  या  शहर   का  मुखिया जिहाद   का  हुक्म   कर दे  तो  सेना  या उसके साथी व्यभिचार  करें  या  बलात्कार   करें  ,तो  उन  पर  कोई सजा  नहीं   दी  जा  सकती   है "

“If the Caliph or the head of the city ordains legal penalties on people using his authority, personally goes on Jihad with the army and commits adultery, or he associates with the people at war and indulges in adultery,and rape  no legal penalty will be enforced on him.”

"إذا كان الخليفة أو رئيس المدينة يأمر العقوبات القانونية على الأشخاص الذين يستخدمون سلطته، ويذهب شخصيا على الجهاد مع الجيش ويرتكب الزنا، أو أنه يقترن مع الشعب في حالة حرب ويتمادى في الزنا، وسيتم فرض أي عقوبة قانونية على له "

Fatawa-e-Alamgiri,( فتاویٰ عالمگیری ) volume 3, page 266, Kitab al-Hudood,( published by Daar ul-Isha’at, Karachi.)

अश्लीलता  और  बेशर्मी   भी  इस्लाम   की  सौगात   है   , जो  इस हदीस  से    साबित   होती   है  ,

4-नमाज  में योनि प्रदर्शन 
 सुन्नी  इमाम अबू हनीफा ने   कहा   है कि  गुलाम औरतें    नग्न   हो  कर  नमाज  पढें  ताकि  ऐसा  करने  से  लोग  उनके स्तन  देख  लें  , और  नमाज  पढते  समय  औरत   की  योनि  भी  दिख   जाये लेकिन आजाद  औरत  नमाज   में  जानबूझ  कर अपनी  योनि  सबको दिखा  सकती   है , "

A slave woman can perform the prayers naked, and others can abandon their work in order to stare at her body:

لا يستحي من أن يطلق أن للمملوكة أن تصلي عريانة يرى الناس ثدييها وخاصرتها وان للحرة أن تتعمد أن تكشف من شفتي فرجها مقدار الدرهم البغلي تصلي كذلك ويراها الصادر والوارد بين الجماعة في المسجد

“He (Abu Hanifa) say that a slave woman can pray naked and the people can observe her breasts and waist. A free woman can purposely show the parts of her vagina during prayers and can be observed by whosoever enters and leaves the mosque.”

Al-Muhala,( المحلى ) Kitab al-Rizaa, Volume 10 page 23

5-अल्लाह औरतें   सप्लाई  करता  है
एक  बार रसूल  की  सारी  पत्नियां   इकट्ठी  होकर रसूल   का   मजाक  उड़ाने   लगी  ,  जिस से  वह   चिढ    गए  और   औरतों   को  धमका  कर   बोले  मुझे  औरतो   की   कमी   नहीं  , फिर  रसूल   ने   कुरान   की   यह  आयत  सुना  दी  "यदि वह  तुम्हें  तलाक  दे देगा   तो अल्लाह  को  कोई देर  नही  लगेगा  कि वह  तुम्हारी  जगह उस से भी अच्छी  नयी  औरतें उपलब्ध   करा दे ' सूरा  -तहरीम  66 :5 

सही बुखारी -जिल्द 1 किताब 8  हदीस 395

जो लोग  सामूहिक  दुराचार (Group sex  )  और पत्निया  बदल  कर के   व्यभिचार (Wife swaping)  को आधुनिक काल उपज  बताते   है ,उन्हें पता  होना   चाहिए कि  यह  भी इस्लाम   की  सौगात है ,

6-पत्नी  की दसियों  से  सम्भोग 

इसी   किताब   में  आगे   कहा गया  है   ,कि यदि   पकड़ी  गयी  दासी   से  बच्ची   पैदा   हो  जाये   तो  बच्ची  उस  व्यक्ति   की दासी  मानी  जायेगी ,और  ऐसा करना   हलाल   है ,और ऐसा करने  वाले को  कोई सजा  नहीं  होगी ,यही  नहीं ऎसी  औरतें आपस में   बाँट  लेने  (  sharing )  करने  पर भी   बिलकुल   कोई  सजा नहीं   होगी   .

                 لا حد في ذلك أصلا   حلال فإن ولدت فولدها حر , والأمة لامرأته , ولا يغرم الزوج شيئا


It is Halal, if she (the slave girl) gives birth to a child, then the child is free and the slave woman belongs to his wife and there will be no penalty on the husband’.There is no punishment (hadd) in that at all .for sharing a slave-girl  "

http://www.islamweb.net/ver2/library/BooksCategory.php?idfrom=2315&idto=2315&bk_no=17&ID=2258

इस्लामी  देशो   में   औरतों  का   व्यापार  करना   जायज   है  ,जो  इन  हदीसों   से  साबित   होता   है ,

7-औरतों  की  सौदेबाजी 

अबू बकर "इब्न अबी शैबा-  أبي شيبة    "  (195 -235 हि  . ) एक सुन्नी  मुहद्दिस  यानी हदीसों   के  जमा  करने  वाले थे  . इनका पूरा नाम अब्दुल्लाह इब्न  मुहम्मद इब्न इब्राहीम था   . इन्हों  "अल  मुसहफ -المصنف"    नाम  से  हद्दीसों   का  संकलन   किया   है  . इस किताब  में  खलीफा  उमर और उसके  लडके  के बारे  में   जो   बातें    दी   गयी    हैं  ,उन्हें पढ़  कर  मुसलमानों   को शर्म  आना  चाहिए   ,यहाँ पर  उमर  और उसके  बेटे  के बारे  में तीन  हदीसें   दी   जा रही   हैं  .

1.अनस   ने  कहा  कि एक बार उमर गुलामों   के बाजार में गया  तो देखा  कि एक गुलाम औरत सर पर दुपट्टा डाले  हुए  है ,उमर उसे तमाचा   मारा  और दुपट्टा   खींच   कर  कहा  , तू  गुलाम  हो  कर भी  आजाद  औरत की  तरह   दुपट्टा क्यों    डाले हुए  है  .

anas reported: ‘Umar once saw a slave-girl that belonged to us (to Anas) wearing a scarf, so Umar hit her and told her: ‘Don’t assume the manners of a free woman.”

وعن أنس: عمر رأى مرة واحدة في العبيد الفتاة التي ينتمي لنا (لانس) وهو يرتدي وشاح، لذلك ضرب عمر لها وقال لها: "لا تفترض آداب امرأة حرة".

Musnaf Ibn Abi Shaybah,(المصنف لاْبن أبي شيبة   ) -  Volume 2 page 41 Tradition 6236

2.नाफ़अ   ने  कहा   जब   भी उमर  किसी  गुलाम   लड़की  को खरीदना   चाहता था  , तो पहले उस लड़की   की  टांगें उघाड़  देता  था, फिर उसके नितम्बों  और जांघो   के बीच  हाथ  घुसा  कर  जाँच  करता  था  .

نا علي بن مسهر عن عبيدالله عن نافع عن ابن عمر أنه إذا أراد أن يشتري الجارية وضع يده على أليتيها وبين فخذيها وربما كشف عن ساقها

‘Naf’e reported that when Ibn Umar wanted to buy a slave-girl he would place his hand on her buttocks, between her thighs, and may uncover her legs

Musnaf Ibn Abi Shaybah,(المصنف لاْبن أبي شيبة  ) -  Volume 4 page 289 Tradition 20241

3.एक मुजाहिद  ने कहा  कि  मैं  इब्ने उमर  के  साथ   गुलामों   की  मंडी  में  गया तो देखा  वहाँ  व्यापारी  एक गुलाम लड़की   को घेर  कर  उसका सौदा  कर  रहे   थे  , तभी  इब्ने उमर  उनके  पास  गया  और उस लड़की  के   गुप्त  अंग  में हाथ  घुसा  कर   जाँच  करने  के बाद पूछने  लगा कि इस लड़की  का   मालिक  कौन   है  ,यह  तो  बढ़िया   माल  है   .

حدثنا جرير عن منصور عن مجاهد قال كنت مع بن عمر امشي في السوق فإذا نحن بناس من النخاسين قد اجتمعوا على جارية يقلبونها فلما راوا بن عمر تنحوا وقالوا بن عمر قد جاء فدنا منها بن عمر فلمس شيئا من جسدها وقال أين أصحاب هذه الجارية إنما هي سلعة

Mujahid said: ‘I was walking with ibn Umar in a slave market, then we saw some slave dealers gathered around one slave-girl and they were checking her, when they saw Ibn Umar, they stopped and said: ‘Ibn Umar has arrived’. Then ibn Umar came closer to the slave-girl, he touched some private  parts of her body and then said: ‘Who is the master of this slave-girl, she is just a good commodity!’

Musnaf Ibn Abi Shaybah,(المصنف لاْبن أبي شيبة  ) -  Volume 4 page 289 Tradition 20242


8-दासियों की जाच  करने  का तरीका  

इब्न साद  सुन्नी  विद्वान    थे  इनका  काल 784  से 845  ईस्वी   है  , इनका पूरा नाम "मुहम्मद बिन साद  बिन  मनीअ  -محمد بن سعد بن مَنِيع" है  . इन्होने "तबकाते अल कबीर -الطبقات الكبير "  के  नाम  से  हदीसों     का संकलन    किया   है   ,  इसी  से ख़लीफ़ा  उमर  के लडके के  बारे  में यह  हदीस   दी  जा रही  है ,

"मुसैब बिन दारूम  ने कहा  कि  मैंने देखा  उमर  एक  छड़ी  से  पकड़ी  गई गुलाम  लड़की  के सर से  दुपट्टा निकालते  हुए  बोले सिर्फ  आजाद  औरतें  ऐसा   कर  सकती   हैं   ?.

Al-Musaiab bin Darum said: ‘I saw Umar holding a stick in his hand and striking a slave-girl’s head until her scarf same off, he the said: ‘Why does the slave assume the manners of free woman?’

 Tabaqat ibn Saad,( الطبقات الكبرى ) Volume 7 page 127

9-छातियाँ  हिलाना   कर देखना 
ऐसे   ही एक सुन्नी  विद्वान् "अब्दुर रज्जाक अल सनआनी - عبد الرزاق الصنعاني "   हैं  ,जिनका काल 126 -211  हिजरी   है , इनकी   हदीस   की  किताब  का  नाम  " मसनफ -مصنف "   इसमे भी खलीफा  उमर  के बारे में  यह  हदीस   दी   जा  रही   है   .

"मुजाहिद ने  कहा कि  ऊमर गुलाम   लड़कियां   खरीदते  समय  अंदर   हाथ  घुसा  कर  उस लड़की   स्तन  हिला हिला   कर  जांच  करते  थे  . "

Mujahid reported that ibn Umar placed his hand between (a slave-girl’s) breasts and shook them’

'عن مجاهد أن بن عمر وضع يده بين الثديين (عبدا، الفتاة) وزلزلهم "

Musnaf Abdur Razak,( مصنف عبد الرزاق  ) Volume 7 page 286 Tradition 13204

10-दासियों की छातियाँ दबा कर जांच 

सुन्नी  इमाम " अल बेयहकी -البيهقي'' अपनी  हदीस   की  किताब "सुन्नन अल  कुबरा -السنن الكبرى"   में उमर  के बारे में बताते हैं   ,कि अनस  बिन मलिक  ने बताया   खलीफा  उमर  के  यहाँ जो  दासियाँ    काम  करती  थी  ,उमर उनके  कपडे  उतार  कर  बाल  खोल  देते  थे  , फिर अपने हाथों  से   उनके  स्तन हिलाया   करते  थे "Anas bin Malik said: ‘The slave-girls of Umar were serving us with uncovered hair and their breasts shaking”


عن جده أنس بن مالك قال كن إماء عمر رضي الله عنه يخدمننا كاشفات عن شعورهن تضطرب ثديهن
قال الشيخ والآثار عن عمر بن الخطاب رضي الله عنه في ذلك صحيحة


Al-Sunnan al-Kubra(السنن الكبرى ) -Volume 2 page 227

  नाफय ने यह भी   बताया  कि जब  भी  औरतें  पकड़ी   जाती थी  , तो उनको  बेचने से पहले उमर  लड़का औरतों   की  जाच करने के लिए उनके  नितम्ब और  छातियाँ  दबा कर  और गुप्तांग  में  हाथ  डाल कर परीक्षा    करता  था  "

Nafe’e narrated that whenever Ibn Umar wanted to buy a slave-girl, he would inspect her by analysing her legs and placing his hands between her breasts and on her buttocks”
عن نافع ، عن ابن عمر ” أنه كان إذا اشترى جارية كشف عن ساقها ووضع يده بين ثدييها و على عجزها

Al-Sunnan al-Kubra(السنن الكبرى ) -Volume 5  page 329
    
11-पकड़ी गयी औरतों से  बलात्कार 
इस्लामी   कानून  के अनुसार  अगवा  की  गयी ,या  अपहरण     करके  उठायी   गई    लड़कियों  से  भी  सम्भोग  करना   जायज   है  ,   जैसा   कि इस  हदीस   में   कहा   है  ,सलमा  बिन मुहब्बक  ने  कहा  कि रसूल   ने  कहा  जो भी  व्यक्ति  अपनी   पत्नी  की  दासी से  सम्भोग  करना  चाहे  तो वह  पहले अपनी  पत्नी   से  सहमति    प्राप्त   कर   ले   .

، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَضَى فِي رَجُلٍ وَقَعَ عَلَى جَارِيَةِ امْرَأَتِهِ إِنْ كَانَ اسْتَكْرَهَهَا فَهِيَ حُرَّةٌ وَعَلَيْهِ لِسَيِّدَتِهَا مِثْلُهَا فَإِنْ كَانَتْ طَاوَعَتْهُ فَهِيَ لَهُ وَعَلَيْهِ لِسَيِّدَتِهَا مِثْلُهَا 

 a man who  like  intercourse with his wife’s slave-girl ,ask her  if she ask if  she have intercourse voluntarily

सुन्नन अबी दाउद - किताब 39 हदीस 444

12-योनि उधार पर देना 
हनफी फिरके  के इमाम  शेख "अल तूसी "  ने अपनी  किताब  " अल मसबूत -  كـتـاب الـمـبسـوط" में दासियों   या युद्ध   में पकड़ी  गयी  औरतों   की  योनि  को  किराये पर  देने    का तरीका   भी  बता  दिया   है  ,अरबी  में इसे "इआरतुल फ़ुर्ज -  الفرج   إعارة" "    यानी  "Loaning  of Vagina "  कहा  जाता   है  ,शिआ फिक्का  की  किताब   में  इस  विषय  में एक  अलग  से  अध्याय   दिया   गया   है   , इमाम कहते   हैं,

  "ऐसी  औरत   जो   मासिक   से  हो  उसको  बेचने वाले  और खरीदने  वाले   के  लिए जायज   नही   है  ,  और ऎसी  दशा में  उसकी  योनि  को  छोड़  दूसरी  जगह   सम्भोग   कर  सकते  हैं  , या उसे  चूम  सकते   हैं   , या  उसकी योनि  किराये  पर  दे  सकते   हैं "
الاستبراء في الجارية واجب على البايع والمشتري معا ، والإستبراء يكون بقرء واحد وهو الطهر ، ولا يجوز للمشتري وطئها قبل الاستبراء في الفرج ولا في غيره ولا لمسها بشهوة ولا قبلتها "

in  the monthly period. It is not allowed for the buyer to have sexual relation with her through her vagina or other part,exept to touch her with lust or to kiss her ,or loan her vagina”

Al-Mabsut( كـتـاب الـمـبسـوط في الـفـقـه الـحـنـفـي ) volume 2 page 140

13-दासियो  की योनि उपहार में  
सुन्नी इमाम "इब्न  हज्म - ابن حزم  "  ने अपनी  किताब " अल  महला-المحلى "  में  इसी विषय   में और  विस्तार  से  बताया   है  , किसी ने  उन  से   सवाल- 2222 किया था ,
समस्या  -गुलाम औरतो की योनि दूसरों को देने  के बारे   में ,इमाम   ने  जवाब दिया  कि  जब  तक  वह दासी   उस  व्यक्ति   के   कब्जे   में  रहे    वह  व्यक्ति  जल्दी  जल्दी  उस  दासी   की  जांघों   के  बीच   से  सम्भोग   कर  सकता   है  ,

مسألة : من أحل فرج أمته لغيره ؟
نا حمام نا ابن مفرج نا ابن الأعرابي نا الدبري نا عبد الرزاق عن ابن جريج قال : أخبرني عمرو بن دينار أنه سمع طاوسا يقول : قال ابن عباس : إذا أحلت امرأة الرجل , أو ابنته , أو أخته له جاريتها فليصبها وهي لها , فليجعل به بين وركيها ؟
2222: Problem: Who allowed the vagina of his slave woman to the others?

 let him perform quick intercourse between her thighs”

Al-Mahala( :ابن حزم - المحلى ) Volume 12 pages 207-209

14-सार्वजनिक बलात्कार 

जिहाद  में  गैर  मुस्लिमों  की  संपत्ति  लूटने   के साथ  औरतें     भी  पकड़ी   जाती    हैं ,जिन्हे  जिहादी  यातो  खुद रख लेते हैं  या  बेच देते   हैं  , यह हदीस इमाम  बुखारी   ने  ऐतिहासिक  किताब" तारीखे  कबीर - التاريخ الكبير"   में  संकलित    की   है ,सन  627  ई ० यानि  19  हिजरी   के मुहर्रम  महीने  में  ख़लीफ़ा  उमर  ने  दमिश्क  (Conquest of Damascus  )के" जलूला - جلولاء "कस्बे  पर   हमला   किया  , उमर  साथ  उसका  बेटा   भी   था ,इस  घटना   से अंदाजा   हो   जायेगा  कि इन   बाप  बेटा  का  चरित्र  कैसा  था  ,  हदीस में   कहा  है  ,
अय्यूब  बिन अबुल्लाह   ने  कहा   कि इब्ने उमर  ने  बताया  कि  जलूला   के  हमले  में  मैंने एक लड़की  पकड़ी  ,  जिसकी  गर्दन   चांदी  की  जैसी  थी ,उसे देख  कर  मैं अपनी  कामेच्छा   को  नहीं  रोक सका   , और फ़ौरन उस  पर   चढ़     गया   , और चूमने   लगा  ,  वहाँ   मौजूद    सभी   लोग   मजे  से  देख  रहे  थे ,किसी  ने कुछ  नहीं   कहा   .

“Narrated Ayoub bin Abdullah   that ibn Umar said: ‘On the day of the  Jalula  battle I won a slave-girl, her neck was like a silver ewe.’ Then ibn Umar added: ‘I couldn’t control myself, I immediately jumped on her and began kissing her, while the people were looking at me”

"رواه أيوب بن عبد الله بن عمر أن قال:" في يوم من معركة جلولاء فزت الرقيق فتاة، كان عنقها مثل النعجة الفضة. "ثم أضاف بن عمر:" لم أتمكن من السيطرة على نفسي، وعلى الفور قفز على بلدها وبدأت تقبيلها، في حين أن الناس كانوا يبحثون في وجهي "
(The battle of Jalula,of Muharram, 19 A.H. (642 A.C.) جلولاء)

Al-Tarikh al-Kabir(التاريخ الكبير  (of Imam Bukhari, Volume 1 page 419, No. 1339

15-दहेज  में  दासी  की योनि 
बशरह  ने  कहा  कि एक अनसार  रसूल  के पास  गया और  बोला मैंने एक कुंवारी   दासी  से  शादी  की  थी ,  लेकिन   बाद  में  पता चला  कि वह  गर्भवती  हैं ,रसूल   ने   कहा  कि  वह  दहेज़  के  रूप में  अपनी  योनि ( फुर्ज )  तो  दे  रही   है , फिर  उसका   जो बच्चा  होगा  वह  भी  तुम्हारा  गुलाम  होगा ,
" She will get the dower, for you made her VAGINA (farj) lawful for you. The child will be your slave"


، عَنْ رَجُلٍ، مِنَ الأَنْصَارِ - قَالَ ابْنُ أَبِي السَّرِيِّ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَلَمْ يَقُلْ مِنَ الأَنْصَارِ ثُمَّ اتَّفَقُوا - يُقَالُ لَهُ بَصْرَةُ قَالَ تَزَوَّجْتُ امْرَأَةً بِكْرًا فِي سِتْرِهَا فَدَخَلْتُ عَلَيْهَا فَإِذَا هِيَ حُبْلَى فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ لَهَا الصَّدَاقُ بِمَا اسْتَحْلَلْتَ مِنْ فَرْجِهَا وَالْوَلَدُ عَبْدٌ لَكَ فَإِذَا وَلَدَتْ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ الْحَسَنُ ‏"‏ فَاجْلِدْهَا ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ ابْنُ أَبِي السَّرِيِّ ‏"‏ فَاجْلِدُوهَا ‏"‏ ‏

सुन्नन अबी  दाउद - किताब 11  हदीस 2126

16-दासी के साथ बच्चा भी बेच दो 

अबू दाऊद    ने बताया कि  हिजरी सन 63  में  हर्रा  की लड़ाई  में  जब अली  ने एक  औरत  को बच्चे   के  साथ  पकड़ा   और  औरत  को बेचने   लगे  तो यह  बात अबी  शैब  ने   रसूल   को बता दी  , रसूल  बोले   तुम  औरत  के  साथ  बच्चे   को  भी बेच दो , इस से  अधिक   कीमत  मिलेगी  "
، عَنْ عَلِيٍّ، أَنَّهُ فَرَّقَ بَيْنَ جَارِيَةٍ وَوَلَدِهَا فَنَهَاهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم عَنْ ذَلِكَ وَرَدَّ الْبَيْعَ ‏.

सुन्नन अबी दाऊद  - किताब 14 हदीस 2690

17-टेक्स के बदले बलात्कार 

इस्लामी  कानून  के अनुसार हरेक  गैर  मुस्लिम   से  हर साल गैर   मुस्लिम   से  हर साल उसकी सम्पत्ति   का पांचवा  भाग  यानि 20  प्रतिशत   टेक्स   लिया   जाता   है  , इसे अरबी  में " ख़ुम्स -  الْخُمُسَ "   कहा  जाता   है  ,इसी  के बारे में  यह  हदीस  है  , जिसमे  बताया है कि ख़ुम्स   नही  चुका   पाने  पर उस  व्यक्ति   की  औरत   से  बलात्कार  किया   जा  सकता   है ,
"बुरैदा   ने कहा कि रसूल   ने  अली   को ख़ुम्स  के  बदले   औरत  पकड़ने   के   भेजा   था  ,  लेकिन  जब अली  उस औरत  के  साथ  बलात्कार  करके  वापस आ रहा था  तो लोगों  ने  देख   लिया  , और  रसूल   को  बता  दिया   . रसूल  बोले  तुंम अली   से क्यों   नाराज   हो  , इस  से अच्छा  ख़ुम्स   कौन  सा  हो सकता है  ?
O Buraida! Do you hate `Ali?" I said, "Yes." He said, "Do you hate him, for he deserves more than that from the Khumlus."


، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ بَعَثَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم عَلِيًّا إِلَى خَالِدٍ لِيَقْبِضَ الْخُمُسَ وَكُنْتُ أُبْغِضُ عَلِيًّا، وَقَدِ اغْتَسَلَ، فَقُلْتُ لِخَالِدٍ أَلاَ تَرَى إِلَى هَذَا فَلَمَّا قَدِمْنَا عَلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ذَكَرْتُ ذَلِكَ لَهُ فَقَالَ ‏"‏ يَا بُرَيْدَةُ أَتُبْغِضُ عَلِيًّا ‏"‏‏.‏ فَقُلْتُ نَعَمْ‏.‏ قَالَ ‏"‏ لاَ تُبْغِضْهُ فَإِنَّ لَهُ فِي الْخُمُسِ أَكْثَرَ مِنْ ذَلِكَ ‏"‏‏

सही बुखारी  - जिल्द 5 किताब 59  हदीस 637

जितने भी  मुस्लिम   बादशाह   हुए  हैं ,सभी  अय्याश   थे  , जैसा कि  उमर  का  बेटा  था   ,

18-उमर के  लडके  की अदम्य  वासना 
सुन्नी इमाम मुहम्मद  बिन हम्बल   ने अपनी   किताब ' मसाइल अहमद -مـسـائـل الإمـام أحـمـد  "  में  लिखा  है  कि उमर का  लड़का  इतना  कामांध  था  कि पकड़ी  गयी  हरेक  औरत के शारीरिक  रूप  से  आसक्त   हो  कर उसे प्राप्त  करना चाहता  था
:وذكر أبويوسف في الأمالي أن أباحنيفة كان يقول بالقياس ثم رجع إلى الاستحسان فقال ليس عليه أن يستبرئها وهو قول أبي يوسف ومحمد رحمهما الله

  . Ibn Umar was extremely passionate when it came to the physical beauty of slave-girls,and want to touch  her .

 Masail al-Imam Ahmad ( -مـسـائـل الإمـام أحـمـد بن حـنـبـل )-page 281


अब  इतने  पुख्ता  सबूत  दने  पर  भी  यदि   कोई  इस  सत्य  को  नहीं   मानता  कि  हरेक  यौन  अपरध  की  प्रेरणा  इस्लामी  तालीम से   मिलती  है  ,  जो  मुस्लिम   बच्चो   को  बचपन  में  ही  मिल  जाती   है  , फिर जब  वह जवान   हो  जाते  हैं तो ऐसे   ही जघन्य  अपराध  करते   हैं  , और उनकी संगती   से  कुछ  हिन्दू  युवक   भी  फस  जाते   हैं  , यदि  इन  अपराधों    को रोकना    हो  तो  इस्लाम  की ऎसी तालीम   पर  रोक  लगाना  जरूरी     है  ,

 यह  ईस्वी  संवत  का  पहला  और  नए ब्लॉग  का 160  वां   लेख   है  ,



http://muslimonline.org/forum/lofiversion/index.php?t3749.html

http://devilsdeceptionofshiism.wordpress.com/category/shiism-shiite-filthy-fiqh/

http://www.ahnafexpose.com/

मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

झूठे रसूल के बेवफा साथी !

विश्व  में ऐसे कई  लोग हो चुके हैं  ,जिन्होंने अपने स्वार्थ  के लिए  खुद  को अवतार , सिद्ध ,संत और चमत्कारी व्यक्ति घोषित   कर   दिया था  . और  लोगों  को अपने बारे में ऎसी   बाते  फैलायी जिस से लोग   उनके अनुयायी हो  जाएँ ,लेकिन देखा गया है  कि  भोले भले लोग पहले तो   ऐसे  पाखंडियों    के   जाल  में फस   जाते  हैं   और उनकी संख्या   भी   बड़ी   हो   जाती  है  ,लेकिन   जब  उस  पाखंडी का  भंडा फूट   जाता है तो उसके  सारे  साथी ,यहाँ तक पत्नी  भी  मुंह  मोड़  लेती   है  . शायद ऐसा ही मुहम्मद साहब  के साथ  हुआ था  . मुहम्मद साहब ने भी खुद को अल्लाह  का रसूल  बता  कर  और  लोगों  को  जिहाद में मिलने  वाले  लूट  का माल  और औरतों   का  लालच  दिखा  कर  मूसलमान   बना   लिया  था  ,उस समय  हरेक ऐरागैरा   उनका  सहाबा  यानी  companion बन  गया  था ,लेकिन  जब  मुहम्मद   मरे तो उनके जनाजे में एक   भी  सहाबा  नही  गया , यहाँ तक  उनके ससुर  यानी  आयशा  के बाप  को  यह  भी  पता नहीं  चला   कि  रसूल  कब मरे ? किसने उनको दफ़न   किया  और उनकी  कबर कहाँ  थी ,जो  मुसलमान  सहाबा को रसूल सच्चा  अनुयायी   बताते हैं  , वह  यह  भी नही जानते थे कि रसूल  की  कब्र   खुली   पड़ी  रही   . वास्तव में  मुहम्मद साहब  सामान्य  मौत  से  नहीं ,बल्कि  खुद को  रसूल साबित   करने   की शर्त   के  कारण  मरे  थे  , जिस में वह  झूठे  साबित  निकले  और  लोग उनका साथ  छोड़ कर भाग  गए  . इस लेख में शिया  और सुन्नी किताबों  से  प्रमाण  लेकर  जो तथ्य  दिए गए हैं उन से इस्लाम और रसूलियत का असली  रूप  प्रकट  हो  जायेगा  

1-रसूलियत की परीक्षा 
अबू हुरैरा ने कहा कि खैबर विजय  के बाद   कुछ  यहूदी  रसूल से  बहस   कर रहे थे ,उन्होंने एक  भेड़  पकायी जिसमे  जहर मिला  हुआ था ,   रसूल  ने पूछ   क्या तुम्हें  जहम्मम की आग से  डर  नहीं लगता  , यहूदी   बोले नही , क्योंकि  हम केवल थोड़े   दिन  ही  वहाँ  रखे   जायेंगे ,रसूल ने पूछा    हम कैसे माने कि तुम  सच्चे   हो  , यहूदी   बोले  हम जानना   चाहते कि तुम  सच्चे  हो या झूठे  हो , इस गोश्त में जहर  है  यदि  तुम सच्चे   नबी होगे  तो  तुम  पर जहर  का असर  नही होगा  , और अगर तुम झूठ होगे   तो  मर जाओगे  .
We wanted to know if you were a liar in which case we would get rid of you, and if you are a prophet then the poison would not harm you."

"‏ اخْسَئُوا فِيهَا، وَاللَّهِ لاَ نَخْلُفُكُمْ فِيهَا أَبَدًا ـ ثُمَّ قَالَ ـ هَلْ أَنْتُمْ صَادِقِيَّ عَنْ شَىْءٍ إِنْ سَأَلْتُكُمْ عَنْهُ ‏‏‏.‏ فَقَالُوا نَعَمْ يَا أَبَا الْقَاسِمِ‏.‏ قَالَ ‏"‏ هَلْ جَعَلْتُمْ فِي هَذِهِ الشَّاةِ سُمًّا ‏"‏‏.‏ قَالُوا نَعَمْ‏.‏ قَالَ ‏"‏ مَا حَمَلَكُمْ عَلَى ذَلِكَ ‏"‏‏.‏ قَالُوا أَرَدْنَا إِنْ كُنْتَ كَاذِبًا نَسْتَرِيحُ، وَإِنْ كُنْتَ نَبِيًّا لَمْ يَضُرَّكَ‏.‏
सही बुखारी  -जिल्द 4 किताब 53 हदीस 394

2-रसूल  की मौत का संकेत  

इब्ने  अब्बास  ने कहा कि  जब रसूल  सूरा नस्र 110 :1  पढ़ रहे थे , तो उनकी  जीभ लड़खड़ा रही  थी ,उमर  ने  कहा कि  यह रसूल  की मौत का संकेत  है ,अब्दुर रहमान ऑफ ने  कहा  मुझे  भी ऐसा प्रतीत  होता   है  कि यह रसूल कि  मौत  का संकेत   है ( That indicated the death of Allah's Messenger ) 

، قَالَ كَانَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ ـ رضى الله عنه ـ يُدْنِي ابْنَ عَبَّاسٍ فَقَالَ لَهُ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ إِنَّ لَنَا أَبْنَاءً مِثْلَهُ‏.‏ فَقَالَ إِنَّهُ مِنْ حَيْثُ تَعْلَمُ‏.‏ فَسَأَلَ عُمَرُ ابْنَ عَبَّاسٍ عَنْ هَذِهِ الآيَةِ ‏{‏إِذَا جَاءَ نَصْرُ اللَّهِ وَالْفَتْحُ‏}‏ فَقَالَ أَجَلُ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَعْلَمَهُ إِيَّاهُ، فَقَالَ مَا أَعْلَمُ مِنْهَا إِلاَّ مَا تَعْلَمُ‏.‏

सही बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 713 
3-कष्टदायी  मौत 
आयशा ने   कहा कि  जब  रसूल  की  हालत   काफी  ख़राब   हो  गयी थी  ,तो मरने से  पहले  उन्होंने   कहा  था  ,कि  मैने  खैबर  में   जो  खाना  खाया था  ,उसमे   जहर  मिला था   , जिस से  काफी  कष्ट   हो रहा  है  ,ऐसा  लगता  है  कि मेरे  गले की  धमनी   कट  गयी   हो "I feel as if my aorta is being cut from that poison."

 ـ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ فِي مَرَضِهِ الَّذِي مَاتَ فِيهِ ‏ "‏ يَا عَائِشَةُ مَا أَزَالُ أَجِدُ أَلَمَ الطَّعَامِ الَّذِي أَكَلْتُ بِخَيْبَرَ، فَهَذَا أَوَانُ وَجَدْتُ انْقِطَاعَ أَبْهَرِي مِنْ ذَلِكَ السَّمِّ ‏"‏‏

सही बुखारी  -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 713

4-रसूल के साथियों   की  संख्या 
मुहम्मद साहब  के साथियों  को "सहाबा -الصحابة‎ " यानी Companions  कहा  जाता है , सुन्नी  मान्यता  के अनुसार  यदि  जो भी व्यक्ति  जीवन भर में एक बार रसूल   को  देख  लेता  था  ,उसे  भी सहाबा  मान  लिया  जाता  था , मुहम्मद  साहब   की मृत्यु   के  समय मदीना  में ऐसे कई सहाबा  मौजूद थे ,इस्लामी  विद्वान्  "इब्ने हजर अस्कलानी - ابن حجر العسقلاني‎" ने  अपनी  किताब "अल इसाबा  फी तमीजे असहाबा - الإصابة في تمييز الصحابة" में  सहाबा  की   संख्या 12466  बतायी  है ,यानी  मुहम्मद  साहब    जब मरे तो  मदीना  में इतने  सहाबा  मौजूद  थे .जो सभी  मुसलमान  थे
5-रसूल के सहाबी स्वार्थी थे 

मुहम्मद  साहब अपने जिन   सहाबियों   पर भरोसा  करते थे वह  स्वार्थी  थे  और  लूट  के लालच  में मुसलमान  बने थे , उन्हें  इस्लाम में  कोई रूचि  नहीं  थी ,वह सोचते  थे  कि  कब रसूल  मरें  और  हम  फिर से   पुराने धर्म   को अपना  ले ,यह बात  कई  हदीसों   में   दी  गयी   है , जैसे ,
 इब्ने    मुसैब  ने कहा  अधिकाँश  सहाबा   आपके बाद  काफिर  हो  जायेंगे ,और इस्लाम छोड़  देंगे "
they turned APOSTATE as renegades (reverted from Islam"
يردُ عليَّ الحوض رجال من أصْحابي فيحلون عنه. فأقول يا ربِّ أصحابي، فيقول إنَّكَ لا علم لك بما أحدثوا بعدك. إنَّهم ارْتَدَّوا على أدبارهم القهقري.

सही बुखारी - जिल्द 8  किताब 76 हदीस 586

 अबू हुरैरा  ने  कहा कि रसूल   ने  बताया   मेरे  बाद यह सहाबा इस्लाम  से विमुख  हो  जायेंगे और बिना चरवाहे  के ऊंट  की तरह  हो  जायंगे
"They turned apostate as renegades after I  left, who were like camels without a shepherd."

.‏ قُلْتُ مَا شَأْنُهُمْ قَالَ إِنَّهُمُ ارْتَدُّوا بَعْدَكَ عَلَى أَدْبَارِهِمُ الْقَهْقَرَى‏.‏ فَلاَ أُرَاهُ يَخْلُصُ مِنْهُمْ إِلاَّ مِثْلُ هَمَلِ النَّعَمِ ‏

सही बुखारी - जिल्द 8  किताब76  हदीस 587

 असमा बिन्त अबू  बकर  ने रसूल  को  बताया  कि अल्लाह  की कसम  है , आपके बाद  यह सहाबा सरपट  दौड़  कर इस्लाम  से  निकल  जायंगे "
" ‘Did you notice what they did after you? By Allah, they kept on turning on their heels (turned away from  Islam"

، عَنْ أَسْمَاءَ بِنْتِ أَبِي بَكْرٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَتْ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ إِنِّي عَلَى الْحَوْضِ حَتَّى أَنْظُرُ مَنْ يَرِدُ عَلَىَّ مِنْكُمْ، وَسَيُؤْخَذُ نَاسٌ دُونِي فَأَقُولُ يَا رَبِّ مِنِّي وَمِنْ أُمَّتِي‏.‏ فَيُقَالُ هَلْ شَعَرْتَ مَا عَمِلُوا بَعْدَكَ وَاللَّهِ مَا بَرِحُوا يَرْجِعُونَ عَلَى أَعْقَابِهِمْ ‏"‏‏
सही बुखारी - जिल्द 8  किताब 76  हदीस 592

 उक़बा बिन अमीर  ने  कहा  कि रसूल  ने  कहा  मुझे इस  बात   की चिंता  नहीं  कि मेरे  बाद  यह  लोग  मुश्रिक   हो जायेंगे ,मुझे तो इस  बात  का डर  है  कि यह  लोग दुनिया   की संपत्ति  की  लालच   में   पड़  जायंगे "
" By Allah! I am not afraid that you become polytheist after me, but I am afraid that they will start competing for, the pleasures and treasures of this world"
إنِّي و الله ما أخافُ عليكم أن تشركوا بعدي و لكني أخافُ عليكم أن تنافسوا فيها.

सही बुखारी - जिल्द  4 किताब 56 हदीस 79

6-सभी सहाबी काफिर  हो  गए 

सहाबा   केवल जिहाद   में मिलने  वाले लूट  के  माल  के  लालच  में  मुसलमान  बने  थे ,जब  मुहम्मद  मर गए तो उनको लगा कि अब  लूट का  माल  नहीं मिलगा  , इसलिए वह इस्लाम  का चक्कर छोड़   कर  फिर  से पुराने  धर्म   में लौट  गए ,यह बात शिया  हदीस  रज्जल कशी ( رجال ‏الكشي   )  में   इस तरह    बयान  की  गयी  है  " रसूल  की  मौत  के बाद  सहाबा   सहित सभी   लोग  काफिर  हो  गए  थे ,सिवाय सलमान फ़ारसी ,मिक़दाद और  अबू जर   के ,  लोगों  ने  कहा   कि  हमने सोच  रखा था  अगर  रसूल  मर गए  या उनकी  हत्या   हो  गयी  तो  हम इस्लाम  से   फिर  जायेंगे
"All people (including the Sahaba) became apostates after the Prophet's death except for three." Al-Miqdad ibn Aswad, Abu Dharr (Zarr), and Salman (Al-Farsi,When asked  they   replied, ". 'If he (Muhammad) dies or is killed, we will  turn from Islam '

- أبو الحسن و أبو إسحاق حمدويه و إبراهيم ابنا نصير، قالا حدثنا محمد بن عثمان، عن حنان بن سدير، عن أبيه، عن أبي جعفر (عليه السلام) قال : كان الناس أهل الردة بعد النبي (صلى الله عليه وآله وسلم) إلا ثلاثة.

 منهم سلمان الفارسي و المقداد و أبو ذر

(Rijal Al-Kashshi - رجال ‏الكشي  -      p.12-13

7-मौत  के बाद राजनीति 
इतिहाकारों  के  अनुसार मुहम्मद साहब  की मौत 8  जून  सन 632  को  हुई  थी, खबर  मिलते  ही  मदीना  के अन्सार  एक  छत(Shed) के  नीचे  जमा  हो  गए , जिसे "सकीफ़ा -سقيفة  "   कहा  जाता   है ,उसी  समय  अबू बकर  ने मदीना  के   जिन कबीले  के सरदारों   को बुला   लिया  था ,उनके  नाम  यह  हैं , 1 . बनू औस -بنو أوس‎" 2 . बनू खजरज - بنو الخزرج‎"3 .  अन्सार -الأنصار‎ "4 .  मुहाजिर -: المهاجرون‎ " और 5 . बनू सायदा --  بني ساعدة‎   ". और अबू बकर खुद को  खलीफा   बनाने  के लिए    इन लोगों से समर्थन    प्राप्त  करने   में   व्यस्त   हो  गए ,लेकिन   जो लोग अली  के समर्थक थे   वह उनका  विरोध  करने  लगे  , इस से अबू बकर को   मुहम्मद  साहब   को दफ़न  करवाने   का    ध्यान    नहीं  रहा    .  और अंसारों   ने  खुद उनको  दफ़न  कर  दिया  . उसी  दिन  से शिआ  सुन्नी    अलग   हो  गए

8-अबू बकर मौत से अनजान 

अबू बकर  अपनी   खिलाफत  की गद्दी  बचाने में इतने व्यस्त थे कि उनको इतना भी  होश  नहीं था  ,कि रसूल  कब मरे थे , और उनको कब दफ़न    किया  गया था  . यह  बात इस हदीस  से  पता  चलती  है , हिशाम  के  पिता ने  कहा  कि आयशा  ने  बताया जब  अबूबकर घर  आये तो , पूछा   , रसूल  कब मरे  और उन  ने  कौन से  कपडे  पहने हुए थे , आयशा ने  कहा  सोमवार   को , और सिर्फ  सफ़ेद सुहेलिया  पहने  हुए थे ,  ऊपर  कोई कमीज   और पगड़ी भी  नहीं थी , अबू बकर ने पूछा आज  कौन सा दिन   है  . आयशा बोली  मंगल  ,आयशा  ने पूछा   क्या  उनको  नए  कपडे  पहिना  दें  . ? अबू बकर बोले  नए कपड़े  ज़िंदा    लोग पहिनते  हैं  , यह  तो  मर  चुके  हैं  , और इनको  मरे  एक  दिन  हो  गया  . अब यह एक बेजान  लाश   है

ائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ دَخَلْتُ عَلَى أَبِي بَكْرٍ ـ رضى الله عنه ـ فَقَالَ فِي كَمْ كَفَّنْتُمُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَتْ فِي ثَلاَثَةِ أَثْوَابٍ بِيضٍ سَحُولِيَّةٍ، لَيْسَ فِيهَا قَمِيصٌ وَلاَ عِمَامَةٌ‏.‏ وَقَالَ لَهَا فِي أَىِّ يَوْمٍ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَتْ يَوْمَ الاِثْنَيْنِ‏.‏ قَالَ فَأَىُّ يَوْمٍ هَذَا قَالَتْ يَوْمُ الاِثْنَيْنِ‏.‏ قَالَ أَرْجُو فِيمَا بَيْنِي وَبَيْنَ اللَّيْلِ‏.‏ فَنَظَرَ إِلَى ثَوْبٍ عَلَيْهِ كَانَ يُمَرَّضُ فِيهِ، بِهِ رَدْعٌ مِنْ زَعْفَرَانٍ فَقَالَ اغْسِلُوا ثَوْبِي هَذَا، وَزِيدُوا عَلَيْهِ ثَوْبَيْنِ فَكَفِّنُونِي فِيهَا‏.‏ قُلْتُ إِنَّ هَذَا خَلَقٌ‏.‏ قَالَ إِنَّ الْحَىَّ أَحَقُّ بِالْجَدِيدِ مِنَ الْمَيِّتِ، إِنَّمَا هُوَ لِلْمُهْلَةِ‏.‏ فَلَمْ يُتَوَفَّ حَتَّى أَمْسَى مِنْ لَيْلَةِ الثُّلاَثَاءِ وَدُفِنَ قَبْلَ أَنْ يُصْبِحَ‏.‏

सही बुखारी -जिल्द 2 किताब 23 हदीस 469

विचार करने की  बात  है  कि अगर अबू बकर रसूल  के दफ़न  के समय मौजूद   थे ,तो उनको रसूल के कपड़ों  और  दफन करने वालों    के बारे में  सवाल  करने की    क्या  जरूरत    थी ? वास्तव   में अबू बकर  जानबूझ   कर  दफ़न    में नहीं   गए ,   यह  बात  कई सुन्नी  हदीसों   में   मौजूद   हैं
9-अबूबकर और उमर  अनुपस्थित 

ऎसी   ही एक हदीस है  ", इब्ने नुमैर  ने   कहा  मेरे पिता उरवा ने बताया कि अबू बकर और उमर  रसूल के जनाजे में  नही  गए ,रसूल  को अंसारों  ने दफ़न    किया  था   . और जब अबू  बकर और उमर उस  जगह  गए  थे तब तक अन्सार  रसूल  को दफ़न  कर के  जा चुके थे इन्होने रसूल  का जनाजा नहीं  देखा   . ,"

  حدثنا ابن نمير عن هشام بن عروة عن أبيه أن أبا بكر وعمر لم يشهدا دفن النبي (ص) ، كانا في الانصار فدفن قبل أن يرجعا.

Ibn Numair narrated form Hisham bin Urwah who narrated from his father (Urwa) that Abu Bakr and Umar were not present at the time of burial of the Prophet (s), they were with Ansar and He was buried before they had returned.

، فَقَالُوا‏:‏ انْطَلِقْ بِنَا إِلَى إِخْوانِنَا مِنَ الأَنْصَارِ نُدْخِلُهُمْ مَعَنَا فِي هَذَا الأَمْرِ، فَقَالَتِ الأَنْصَارُ‏:‏ مِنَّا أَمِيرٌ وَمِنْكُمْ أَمِيرٌ، فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ‏:‏ مَنْ لَهُ مِثْلُ هَذِهِ الثَّلاثِ ثَانِيَ اثْنَيْنِ إِذْ هُمَا فِي الْغَارِ إِذْ يَقُولُ لِصَاحِبِهِ لا تَحْزَنْ إِنَّ اللَّهَ مَعَنَا مَنْ هُمَا‏؟‏ قَالَ‏:‏ ثُمَّ بَسَطَ يَدَهُ فَبَايَعَهُ وَبَايَعَهُ النَّاسُ بَيْعَةً حَسَنَةً جَمِيلَةً

Shama'il Muhammadiyah-الشمائل المحمدية
English referenceBook 53, Hadith 379
Arabic referencBook 54, Hadith 396

इमाम इब्ने हजर  ने  असली  कारण बताते हुए  दर्ज  किया  कि अबू बकर  उस समय " बैय -بَيْعَة,  "   यानी सौदेबाजी   कर रहा  था  , इसलिए रसूल  के जनाजे में नहीं  गया  .
He (Abu Bakar) didn’t attend (the funeral) because he was busy with Baya’

لأنه لم يحضر ذلك لاشتغاله بأمر البيعة

Bay'ah (Arabic: بَيْعَة, literally a "sale" or a "commercial transaction")

Al-Musnaf Ibn Abi Shaybah Volume 8 page 58

Kanz ul Umal, Volume 5 page 45 Hadith 14139

 Mull Ali Qari in Sharra Fiqa Akbar, page 175 (publishers Muhammad Saeed and son, Qur'an Muhall, Karachi)

10-आयशा दफ़न से अनजान  थी 

मुसलमानों के लिए इस से   बड़ी शर्म  की  बात  और कौन सी  होगी कि   रसूल  कि प्यारी पत्नी आयशा  को  भी रसूल  के दफ़न  की  जानकारी  नही थी   , इमाम अब्दुल बर्र  ने अपनी  किताब  इस्तियाब  में  लिखा है "आयशा  ने  कहा मुझे पता  नहीं कि रसूल  को कब और कहाँ दफ़न  किया गया , मुझे तो बुधवार  के सवेरे उस  वक्त  पता  चला  ,जब रात को कुदालों   की आवाजे  हो रही थी.

Ayesha said: ‘We didn’t know about Allah's Messenger’s burial except when we heard the voice of shovels at Wednesday night, Ali, Abbas may Allah be pleased with them and Bani Hashim prayed over him.’

ذكر إبن إسحاق قال حدثتني فاطمة بنت محمد عن عمرة عن عائشة قالت ما علمنا بدفن رسول الله صلى الله عليه وسلم حتى سمعنا صوت المساحي من جوف الليل ليلة الأربعاء وصلى عليه علي والعباس رضى الله عنهما وبنو هاشم

Ibn Abdul Barr records in al-Istiab:

http://www.shiapen.com/comprehensive/saqifa/burial-of-the-prophet.html

11-रसूल  के दफ़न  में लापरवाही 
अनस बिन  मलिक  ने कहा  कि  जब रसूल  की बेटी फातिमा   को रसूल  की कब्र  बतायी  गयी  तो उसने  देखा  कि कब्र  खुली  हुई  है ,तब फातिमा ने  अनस  से   कहा  तुम मेहरबानी  कर  के  कब्र  पर  मिट्टी   डाल  दो  .
"Fatima said, "O Anas! Do you feel pleased to throw earth over Allah's Messenger"

".‏ فَلَمَّا دُفِنَ قَالَتْ فَاطِمَةُ ـ عَلَيْهَا السَّلاَمُ ـ يَا أَنَسُ، أَطَابَتْ أَنْفُسُكُمْ أَنْ تَحْثُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم 

सही  बुखारी -जिल्द 5 किताब 59  हदीस 739

इन सभी तथ्यों  से  यही निष्कर्ष  निकलते  हैं  कि ,खुद को अवतार ,सिद्ध  बताने वाले और झूठे  दावे करने वाले खुद ही अपने  जाल  में फस कर मुहम्मद  साहब    की  तरह कष्टदायी  मौत  मरते   हैं ,और जब ऐसे फर्जी   नबियों  और रसूलों   की  पोल खुल  जाती  है  ,तो उनके  मतलबी  साथी ,रिश्तेदार  ,यहाँ  तक  पत्नी   भी साथ  नहीं    देती   . यही  नहीं   किसी   भी धर्म  के  अनुयाइयो    की अधिक  संख्या   हो  जाने  पर  वह  धर्म  सच्चा  नहीं    माना  जा  सकता   है ,झूठ और पाखण्ड   का   एक न एक दिन  ईसी  तरह  भंडा  फूट   जाता   है  . केवल हमें सावधान  रहने   की  जरूरत   है।


http://www.nairaland.com/296050/death-prophet-muhammad-p.b.u.h-question


http://www.shiapen.com/comprehensive/saqifa/burial-of-the-prophet.html

मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

वेदों से प्रभावित ईसा मसीह की शिक्षा !

इस्लामी मान्यता   के अनुसार्   अल्लाह   लोगों   का  मार्गदर्शन   करने  के  लिए  समय  समय   पर  अपने  नबी  ( Prophets )  या  रसूल    भेजता   रहता   है  ,और अल्लाह  ने   फरिश्तों   के  द्वारा द्वारा  कुछ  रसूलों   को   किताब   भी   दी   है  , इसी  तरह्   से  इस्लाम  में  मुहम्मद   को   भी  ईसा  मसीह    की  तरह  एक   रसूल  माना   गया   है  . और अल्लाह    ने ईसा  मसीह   को   जो  किताब   दी  थी , मुसलमान  उसे इंजील  और  ईसाई   उसे नया  नियम    (New Testament )  कहते   हैं , चूँकि  मुसलमान  मुहम्मद   को  भी  अल्लाह   का  रसूल    मानते   हैं  , लेकिन  मुहम्मद  और ईसामसीह    की शिक्षा   में   जमीन   आसमान    का  अंतर   है  ,  जबकि  इन  दौनों   को  एक   ही  अल्लाह   ने   अपना  रसूल   बना  कर  भेजा   था, इसका असली   कारण  हमें  बाइबिल   के  के नए  नियम   से  और   ईसा  मसीह  की  जीवनी    से   नहीं  बल्कि कुछ  ऎसी  किताबों  से  मिलता  है , जिनकी   खोज  सन  1857 ईस्वी    में   हुई  थी।

1-ईसा के जीवन  के अज्ञात वर्ष 

ईसा  मसीह  के अज्ञात  वर्षों   को  दो  भागों  में  बांटा  जा  सकता  है ,जिनके बारे में अभी  तक  पूरी  जानकारी   नहीं  थी, पहला भाग 14  साल  से 30  साल  तक  है  , यह 18  साल   ईसा  के  क्रूस  पर  चढाने  तक   का   है  .  दूसरा   काल  क्रूस   पर  चढाने   से  ईसा   की  म्रत्यु   तक   है ,

ईसाई  विद्वानों   के अनुसार  ईसा  मसीह  का  जन्म 25 दिसंबर सन  1  को   इस्राएल  के  शहर  नाजरथ   में हुआ  था , उनके  पिता  का  नाम  यूसुफ  और  माता   का  नाम  मरियम  था ,ईसा    बचपन  से  ही कुशाग्र  बुद्धि  थे  ,   इसका  प्रमाण   बाइबिल   में   इस प्रकार  दिया  गया   है ,
"जब  ईसा  12  साल  के  हुए तो माता  पिता  के साथ  त्यौहार  मानाने  यरूशलेम  गए. और वहीं  रुक  गए , यह  बात उनके   माँ  बाप  को पता   नहीं  थी  ,  वह  समझे   कि  ईसा   किसी  काफिले  के  साथ   बाहर  गए   होंगे  ,लेकिन  खोजने  के  बाद ईसा  मंदिर   में विद्वानों  के साथ चर्चा  करते  हुए  मिले , ईसा   ने   माता  पिता से  कहा आप  मुझे  यहाँ  देखकर  चकित  हो  रहे  हो  ,लेकिन  आप   अवश्य  एक  दिन   मुझे अपने   पिता के  घर  पाएंगे
बाइबिल - लूका 2 :42  से  50  तक  ,
इसके  बाद   30  साल   की  आयु तक यानि   18  साल  ईसा   मसीह  कहाँ  रहे   और  क्या  करते  रहे इसके  बारे  में कोई  प्रमाणिक   जानकारी   न  तो  बाइबिल   में  मिलती  और  न  ईसाई   इतिहास      की   किताबों   में   मौजूद  है ,ईसा  मसीह    के  इन 18 साल  के अज्ञातवास को  इतिहासकार "ईसा  के  शांत  वर्ष (Silent years) ,खोये  हुए  वर्ष ( Lost years  ) और और " लापता  वर्ष  (Missing years ) के  नाम  से  पुकारते   हैं  . 

2-ईसा  की पहली   भारत यात्रा  

इस्राएल  के राजा  सुलेमान   के  समय से ही    भारत  और  इजराइल   के  बीच  व्यापार   होता  था  .  और काफिलों    के  द्वारा   भारत के  ज्ञान  की  प्रसिद्धि  चारों तरफ   फैली   हुई  थी  . और  ज्ञान प्राप्त  करने  के लिए ईसा  बिना  किसी   को  बताये  किसी   काफिले  के साथ  भारत चले  गए  थे.इस बात    की खोज सन 1887  में  एक  रूसी शोधकर्ता "निकोलस  अलेकसैंड्रोविच  नोतोविच  ( Nikolaj Aleksandrovič Notovič )   ने   की  थी .इसने   यह   जानकारी  एक  पुस्तक  के  रूप  में प्रकाशित  करवायी   थी  ,  जिसमे 244 अनुच्छेद   और  14  अध्यायों   में  ईसा की  भारत  यात्रा का  पूरा विवरण  दिया  गया  है पुस्तक  का नाम "  संत  ईसा  की  जीवनी  (The Life of Saint Issa )  है .पुस्तक में  लिखा  है ईसा   अपना शहर  गलील  छोड़कर  एक  काफिले  के साथ  सिंध   होते  हुए  स्वर्ग  यानी  कश्मीर गए , वह उन्होंने " हेमिस -Hemis"   नामके बौद्ध  मठ  में  कुछ  महीने  रह  कर  जैन और  बौद्ध  धर्म  का ज्ञान  प्राप्त  किया और संस्कृत  और  पाली  भाषा भी  सीखी  . यही  नही ईसा मसीह  ने संस्कृत  में अपना  नाम " ईशा " रख  लिया था  ,जो यजुर्वेद  के  मंत्र 40:1  से   लिया  गया  है  जबकि  कुरान   उनक नाम  "  ईसा - (عيسى  "   बताया  गया   है  .नोतोविच ने अपनी  किताब  में ईसा  के बारे में  जो महत्त्वपूर्ण   जानकारी  दी  है  उसके कुछ अंश  दिए  जा रहे  हैं  ,

तब ईसा  चुपचाप अपने पैतृक    नगर यरूशलेम  को छोड़कर एक  व्यापारी  दल के साथ सिंध   की  तरफ  रवाना  हो  गए "4:12 
उनका उद्देश्य धर्म  के  वास्तविक  रूप के बारे  में  जिज्ञासा  शांत  करना  , और खुद को परिपक्व   बनाना   था "4:13 
फिर  ईसा  सिंध और  पांच  नदियों  को  पार  करके राजपूताना    गए ,वहाँ  उनको जैन  लोग  मिले , जिनके साथ  ईसा ने  प्रार्थना   में  भी  भाग  लिया "5:2 
लेकिन  वहाँ   इसा को समाधान   नही  मिला, इसलिए  जैनों   का साथ  छोड़कर  ईसा उड़ीसा  के  जगन्नाथ  मंदिर  गए , वहाँ उन्होंने  भव्य  मूर्ती  के दर्शन   किये  , और काफी  प्रसन्न  हुए "5:3 

फिर  वहाँ   के पंडितों   ने उनका आदर  से  स्वागत   किया  , वेदों   की  शिक्षा   देने   के साथ  संस्कृत   भी  सिखायी "5:4 
पंडितों   ने  बताया   कि   वैदिक  ज्ञान  से सभी  दुर्गुणों   को   दूर  करके  आत्मशुद्धि    कैसे    हो सकती   है "5:5 

फिर  ईसा राजगृह    होते  हुए  बनारस  चले गए  और वहीँ  पर  छह  साल  रह  कर  ज्ञान  प्राप्त  करते  रहे  " 5:6 
और जब   ईसा  मसीह    वैदिक  धर्म   का  ज्ञान  प्राप्त   कर  चुके  थे  तो उनकी  आयु  29  साल   हो  गयी  थी  ,  इसलिए   वह  यह  ज्ञान  अपने  लोगों  तक   देने के  लिए   वापिस  यरूशलेम    लौट    गए  ., जहाँ   कुछ   ही  महीनों  के  बाद  यहूदियों   ने     उनपर  झूठे  आरोप     लगा लगा  कर  क्रूस पर  चढ़वा    दिया  था , क्योंकि  ईसा     मनुष्य   को  ईश्वर   का  पुत्र      कहते थ  .

http://reluctant-messenger.com/issa1.htm

3-ईसा मसीह  को  क्रूस  पर चढ़ाना 
जब ईसा   मसीह   अज्ञातवास  से  लौट  कर  वापिस  यरूशलेम   आये  तो  उनकी  आयु  लगभग  30  साल    हो  चुकी  थी  .  और बाइबिल  में  ईसा मसीह   के बारे में उसी काल  की  घटनाओं   का  विवरण  मिलता   है  ,  चूँकि  ईसा  मसीह यहूदियों   के  पाखंड     का  विरोध   किया  करते  थे ,   जो  येहूदी पसंद   नही  करते  थे  .  इसलिए  उन्होंने   ईसा  मसीह   को  क्रूस पर  चढ़ा   कर  मौत  की  सजा  दिलवाने की  योजना   बनाई  थी ,ईसा  मसीह   को शुक्रवार 3 अप्रेल  सन  30  को  दोपहर   के समय  चढ़ाया   गया  था  , और  सूरज  ढलने  से  पहले क्रूस  से उनके  शरीर  को उतार  दिया  गया था  ,
  बाइबिल   के अनुसार ईसा    के  क्रूस  पर   जो आरोपपत्र   लगाया   गया   था   वह  तीन  भाषाओं   "  लैटिन  ,ग्रीक  और हिब्रू  "  भाषा  में  था  , जिसमे  लिखा  था  .

(Latin: Iēsus Nazarēnus, Rēx Iūdaeōrum

एसुस नाजारेनुस  रेक्स यूदाओरुम 

Greek-  Basileus ton Ioudaion .

Hebrew-ईशु  मिन  नजारेत  मलेक ह यहूदियीम 

 "ישו מנצרת, מלך היהודים"

अर्थात -नाजरथ  का  ईसा यहूदियों   का  राजा -बाइबिल -यूहन्ना 19 :19 

4-ईसा क्रूस   की  मौत  से  नहीं  मरे 

बाइबिल  के अनुसार ईसा  को  केवल  6  घंटे  तक  ही  क्रूस  पर  लटका  कर  रखा  गया  था , और  वह जीवित  बच गए  थे  ,  उनके एक शिष्य  थॉमस   ने  तो  उनके  हाथों  में कीलों   के छेदों  में उंगली  डाल  कर  देख  लिया  था   कि वह  कोई  भूत नहीं  बल्कि  सचमुच  ईसा   मसीह  ही  हैं.यह पूरी घटना  बाइबिल की  किताब यूहन्ना  20: 26   से 30  तक  विस्तार  से  दी  गयी   है. बाइबिल   में  यह  भी  बताया  गया   है  कि ईसा बेथनिया  नाम   की   जगह  तक अपने  शिष्यों  के  साथ  गए थे , और उनको आशीर्वाद  देकर स्वर्ग    की  तरफ  चले  गए ,(  बाइबिल - लूका 24:50 ) 
यद्यपि  बाइबिल  में  ईसा   के  बारे में  इसके  आगे  कुछ  नहीं   लिखा   गया   है  ,  लेकिन   इस्लामी  हदीस " कन्जुल उम्माल- كنج العمّال "  के  भाग  6 पेज 120 में   लिखा है  कि  मरियम    के  पुत्र  ईसा  इस   पृथ्वी  पर   120  साल  तक    जीवित  रहे ,
عيسى ابن مريم عاش لمدة 120 سنة،  "Kanz al Ummal, part 6, p.120
"

5--कुरान  की  साक्षी 

और यह लोग  कहते  हैं  कि हमने  मरियम  में बेटे ईसा  मसीह   को  मार डाला ,हालाँकि न तो  इन्होने उसे क़त्ल  किया और  न  सूली  पर  चढ़ाया   ,बल्कि यह  लोग  एक ऐसे  घपले  में  पड़  गए कि  भ्रम  में  पड  गए " सूरा -निसा -4 :157 

नोट -इस आयत   की  तफ़सीर में  दिया  है  कि यहूदियों   ने  जिस व्यक्ति  को  क्रूस  पर  चढ़ाया  था वह  कोई  और  ही  व्यक्ति  था  जिसे  लोगों   ने ईसा  मसीह  समझ   लिया  था।

6- ईसा  की अंतिम  भारत यात्रा  

इस्लाम  के  कादियानी  संप्रदाय   के स्थापक  मिर्जा  गुलाम  कादियानी (1835 -1909 )    ने  ईसा मसीह  की  दूसरी  और अंतिम  भारत यात्रा   के बारे में  उर्दू में  एक शोधपूर्ण    किताब  लिखी   है , जिसका नाम " मसीह  हिंदुस्तान   में "  है  . अंगरेजी  में  इसका  नाम  " Jesus in India "  है। इस  किताबों  में अनेकों ठोस  सबूतों   से प्रमाणित  किया  गया  है  कि , ईसा  मसीह क्रूस  की  पीड़ा सहने  के बाद  भी   जिन्दा  बच  गए  थे   . और जब  कुछ दिनों   बाद उनके   हाथों , पैरों  और   बगल    के घाव  ठीक  हो  गए थे  तो  फिर से यरूशलेम  छोड़  कर ईरान  के  नसीबस   शहर   से होते  हुए  अफगानिस्तान    जाकर  रहने   लगे , और   वहाँ  रहने वाले इजराइल   के  बिखरे हुए 12   कबीले  के  लोगों  को उपदेश    देने   का   काम   करते  रहे  . लेकिन अपने जीवन  के अंतिम  सालो   में  ईसा   भारत   के स्वर्ग  यानि  कश्मीर  में  आकर  रहने   लगे  थे  , और 120  साल  की आयु  में उनका  देहांत  कश्मीर  में  ही हुआ , आज  भी  उनका  मजार  श्रीनगर   की  खानयार स्ट्रीट    में  मौजूद   है ,

http://www.alislam.org/library/books/jesus-in-india/intro.html

7-ईसा मसीह कश्मीर में दफ़न है ,
ईसा  मसीह   के समय कश्मीर  ज्ञान  का  केंद्र था,वहाँ  अनेकों  वैदिक   विद्वान्  रहते  थे  . इसीलिये  जीवन  के अंतिम समय   ईसा  कश्मीर  में बस   गए  थे  उनकी  इच्छा   थी  कि  मरने  के बाद  उनको  इसी  पवित्र  में  दफ़न  कर  दिया  जाये  . और ऐसा   ही  हुआ  था  , यह  खबर टाइम्स ऑफ़ इण्डिया में  दिनांक  8  मई 2010 में  प्रकाशित   हुई  थी  . 

"That Jesus survived crucifixion, travelled to Kashmir, eventually died there and is buried in Srinagar ,. Every season hundreds of tourists visit the Rozabal shrine of Sufi saint Yuz Asaf in downtown Srinagar, believed by many to be the final resting place of Christ. 

http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2010-05-08/india/28322287_1_srinagar-shrine-jesus

http://www.tombofjesus.com/index.php/en/the-rozabal-tomb/photos

8-वेदों और ईसा  की शिक्षा  में समानता 

ईसा मसीह  भारतीय  अध्यात्म  और ज्ञान  से  इतने अधिक प्रभावित थे  कि  छोटी  सी आयु  में  ही   यरूशलेम   छोड़ कर   हजारों   मील  दूर   भारत  आये थे ,  और  यहाँ   ज्ञान   प्राप्त   किया  था.तुलसी दास   जी  ने  कहा  है " एक घड़ी  , आधी घडी  , आधी  में  पुनि आधि , तुलसी संगत  साधु  की  कोटक  मिटे उपाधि " और  ईसा मसीह  तो  भारत   में  छह साल  रहे थे  . इसलिए उनके स्वभाव  और  विचारों   में  मुहम्मद  जैसी  कूरता   और  दूसरे   धर्म   के  लोगों   के  प्रति  इतनी   नफ़रत   नही     थी    , यह   बात   मुहम्मद  , ईसा   मसीह    की   शिक्षा      की  तुलना   करने  से  स्पष्ट    हो  जाता  है     जिसके  संक्षिप्त  में  कुछ  उदाहरण  दिए   जा  रहे   हैं  ,पहले  मुहम्मद   की  शिक्षा   फिर ईसा  मसीह    के वह  वचन   दिए  हैं  ,जो  वेदों   में  दिए   गए   हैं ,

मुहम्म्द -"जान  लो  कि अल्लाह कफिरों  से  प्रेम  नही  करता " सूरा- आले इमरान  3 :32 

(Allah hates those who don’t accept Islam. (Qur’an  3:32,)

ईसा  मसीह - ईश्वर  संसार  के  हरेक  व्यक्ति  से  प्रेम रखता   है " बाइबिल -नया  नियम  यूहन्ना 3 :16 

(God loves everyone. (John 3:16)

वेद -ईश्वर  हमें  पिता ,माता  और  मित्र  की  तरह  प्रेम  करता  है .ऋगवेद -4 /17 /17 

मुहम्म्द -"रसूल  ने कहा   कि मुझे  लोगों से तब तक  लड़ते रहने  का   हुक्म  दिया  गया  है   जब  तक  यह  लोग स्वीकार  नहीं  करते  कि अल्लाह   के आलावा  कोई  भी  इबादत  के योग्य  नहीं  , और  मुहम्मद  उसका रसूल   है  "

(“I have been commanded to fight against people till they testify that there is no god but Allah, and that Muhammad is the messenger ofAllah.”


"‏ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَشْهَدُوا أَنْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ

 सही मुस्लिम -किताब  1  हदीस 33

ईसा  मसीह -"यीशु  ने  कहा  तुम  अपनी  तलवार  मियान  में  ही  रखो। क्योंकि  जो लोग दूसरों  पर तलवार उठाएंगे  वह तलवार   से  ही  मरेंगे "बाइबिल . नया  नियम- मत्ती- अध्याय 26 :52 

( “He who lives by the sword will die by the sword” (Matthew 26:52)

वेद -जिस प्रकार द्युलोक  और पृथ्वी  न  तो  किसी  को डराते  हैं ,और न  किसी  से हिंसा  करते  हैं  वैसे  ही मानव  तू  भी  किसी  को  नहीं  डरा  और  न   किसी  पर  हथियार उठा -अथर्ववेद -2/11

http://shariaunveiled.wordpress.com/2013/07/28/the-teachings-of-muhammad-v-jesus-christ/


यह लेख उन  लोगों की ऑंखें   खोलने  के लिए  बानाया   है  ,जो जिहाद यानी   निर्दोषों   की  हत्या     को  ही  असली   धर्म    मान  बैठे   हैं  .  जबकि  उसी  अल्लाह  के रसूल   ईसा   ने हजारों  मील दूर   भारत   से  सच्चे  धर्म  यानी  वैदिक धर्म   का  ज्ञान   बिना   जिहाद  कट्टर  यहूदियों    तक  पहुँचाने का  प्रयास    किया  था  . हम  ईसा   मसीह  के  भारत  प्रेम और   वेदों     पर  निष्ठा   को  नमन  करते  हैं.
लेकिन बड़े दुःख   की  बात  है  कि  इतने  पुख्ता  प्रमाण  होने  पर  भी ईसाई इस सत्य  को स्वीकार   करने   से हिचकिचाते  हैं

http://lifeofsaintissa.blogspot.in/