सोमवार, 28 जुलाई 2014

सुन लो कि अल्लाह अनेक हैं !

ईश्वर एक  है ,सभी  हिन्दू  इस  बातको  मानते  आये  हैं  ,इसका प्रमाण  यह है  कि इस अटल  सत्य को  लोगों मनवाने के लिए  हिन्दुओं  ने न तो किसी पर  कोई  दवाब डाला  और न किसी   तरह  की जिहाद का  सहारा  लिया  है  , लेकिन आज तक किसी ने इस  बात पर गौर नहीं  किया ,कि मुसलमानों ने सिर्फ इसबात को  मनवाने के लिए  जिहाद  करके  लाखों लोगों  को मार दिया कि "अल्लाह एक है  " और अगर वाकई  एक है  ,तो दुनिया भर में आतंक फ़ैलाने की जरुरत क्यों  पड़  गयी  . ?
क्योंकि  वास्तव  में  अल्लाह  एक  नहीं बल्कि कई लोगों  का  गिरोह  है  , इसका  प्रमाण   कुरान  की उन  आयतों  से मिलता है  , जिन में मुसलमानों  का अल्लाह   खुद के लिए बहुवचन ( plural )   का  प्रयोग  करता  है  , और  मैं  की  जगह हम ( We-Us  )   कहता  है   .
इसलिए अधिकांश  मुस्लिम  विद्वान  जब  जब कृषि भाषा  में कुरान  का अनुवाद  अनुवाद  करते हैं  ,तो इस बात  को  छुपा कर गलत अनुवाद करते हैं , इसको  समझने के लिए  हैं   हमें थोड़ी  सी अरबी  व्याकरण   जानना   जरुरी  है  .
1 -अरबी  में सर्वनाम  और क्रिया  के  वचन 
अरबी की  व्याकरण  कुछ  कुछ  संस्कृत  की  तरह  है  , इसमे " सर्वनाम ( Pronoun )को  "जमीर - الضمير    "  कहा  जाता  है   . जिसके  बहुवचन  को " सीगह  अल  जमा  -  صيغة الجمع "  कहते  हैं     . और  एक  वचन  को " वाहिद -  سيغة الواحد  "  कहते  हैं  .जैसे एक वचन  हिंदी शब्द  " मैं ( I ) को अरबी  में " अना - انا "  कहते  हैं  . जिसका बहुवचन  हिंदी  में  "हम (We )   है  . और  अरबी में इसे " नहनु - نحنُ "  कहा जाता  है  . इसी  प्रकार " क्रिया ( verb )  को अरबी  में  " फअल -   فعل " कहते  हैं  . इसके भी  एक वचन ( singular )  द्विवचन (dual )  और  बहुवचन ( Plural )  होते  हैं  . और  जब  भी  क्रिया ( Verb ) Plurl Imperfact Tense में  पायी  जाती  है  , तो अरबी  में क्रिया  के आगे " ना - نا " लगा  दिया  जाता  है  .  यही  क्रिया  के  बहुवचन  होने की निशानी  है  . उदाहरण   के  लिए  अरबी  क्रिया " क  त  ब  ك +ت+ب  "का  प्रथम पुरुष  बहुवचन "  हमने  लिखा  ( We wrote )     का अरबी में  होगा  "  कतबना - كتبنا "
अब   हम  नमूने  के लिए  कुरान   की  कुछ  ऐसी  आयतें  दे रहे हैं   जिनमे   अल्लाह    ने एक वचन  सर्वनाम   " मैं  और मैंने  "  की  जगह  बहुवचन  " हम  और  हमने    " शब्द   का  प्रयोग  किया  है   . जो  व्याकरण  के  अनुसार  बहुवचन  है  , और अनेक लोगों  के लिए  प्रयुक्त  होता  है  .

1-सर्वनाम  में  बहुवचन 

बेशक  यह कुरान हम ने ही उतारी है  , और हम ही इसके रक्षक  हैं " सूरा अल हिज्र 15:9

إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ  "


“Lo!  We, reveal the Quran, and lo! We verily are its Guardian.” (Al-Hijr15: 9)

(1st person plural personal pronoun)

फिर हमें  उन  से हिसाब  लेना   है  "सूरा -अल गाशिया 88:26
"ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا حِسَابَهُم

Then indeed, upon Us is their account. [88:26]

(1st  person plural  object pronoun)


2-क्रिया  में  बहुवचन 

"हमने  तुम्हें सारे संसार के लिए दयालुता  बना कर  भेजा है " सूरा अम्बिया 21:107

"وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا رَحْمَةً لِلْعَالَمِينَ  "

"We sent thee not save as a mercy for the peoples"21:107

(1st person plural (form IV) perfect verb)

"हम अपने रसूलों और  मुसलमानों की सहायता  करते  हैं "सूरा -मोमिन 40 :51

"إِنَّا لَنَنْصُرُ رُسُلَنَا وَالَّذِينَ آمَنُوا  "


“We verily do help Our Messengers, and those who believe" Al momin 40: 51)


, (1st person plural imperfect verb)


"हमने  तुमसे पहले भी रसूल भेजे,और यही  कहा  कि मेरे सिवा  कोई पूज्य  नहीं  है , तो तुम  हमारी  ही इबादत करो "

सूरा अल अम्बिया 21:25

"وَمَا أَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ مِنْ رَسُولٍ إِلَّا نُوحِي إِلَيْهِ أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاعْبُدُونِ  "21:25


“And We sent not before you any messenger except that We revealed to him that, “There is no deity except Me, so worship Me.”
(Qur’an, 21:25)

(1st person plural (form IV) perfect )

3-सर्वनाम और क्रिया में  बहुवचन 

हमने मनुष्य  को बनाया  और  हम  जानते हैं कि  उसके  मन में क्या  है और हम  उसकी  धमनी  के पास हैं  " सूरा -काफ 50:16

وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ وَنَعْلَمُ مَا تُوَسْوِسُ بِهِ نَفْسُهُ ۖ وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنْ حَبْلِ الْوَرِيدِ

And We have already created man and know what his soul whispers to him," Surat Qāf 50:16)

(1st person plural perfect verb ) And(1st person plural personal pronoun)

अब  सवाल यह उठता  है  कि  जब खुद  अल्लाह की  किताब  कुरान  ही अनेक  अल्लाह  होने की पुष्टि  कर  रही   है  , तो  मुहम्मद  साहब  लोगों  पर एक ही  अल्लाह होने  या मानने पर  दवाब  क्यों  डालते थे  ? इसका  जवाब  कुरान  और  हदीस  से मिलता  है इसके कई   कारण  हैं ,
1-पहला  कारण -लोग   मुहम्मद  साहब  को पागल  कवि  मानते थे  ,  जैसा कि  कुरान  में  कहा  है  .
"लोग कहते हैं   कि क्या  हम एक उन्मादी कवि  के  लिए अपने देवताओं  को को छोड़  दें ?  सूरा -अस साफ्फात 37:36
"लोग  कहते हैं  कि यह (कुरान )  स्वप्न  है  , इसने इसे खुद  बना लिया  है  . यह एक कवि  है   . इसे चाहिए की यह हमारे सामने कोई  सबूत दिखाए  "
सूरा -अल अम्बिया  21 :5
4-मुहम्मद  साहब  की  चालाकी 
जब  मक्का  के लोग   मुहम्मद  साहब  को पागल  कवि   होने  का आरोप  लगा कर कहने लगे कि कुरान  अलाह की किताब  नहीं  ,खुद मुहम्मद की  रचना है  , तब कुरान को अल्लाह की किताब  साबित करने के लिए  मुहमद  साहब ने  अनपढ़  होने का नाटक   रचाया   ,  , कुरान में कहा  कि ,
"जो लोग उस उम्मी नबी  के पीछे चलते हैं जो न  लिख  सकता है  ,और न  पढ़  सकता  है  इसलिए  अल्लाह और  उसकी  किताब पर ईमान  रखो  "सूरा  -अल आराफ 7:157

"हे  नबी  इस से पहले तुम कोई  किताब  नहीं  पढ़ते थे  और  न  हाथ  से लिखते थे  , नहीं  तो शंका  करने वाले तुम्हें  झूठ पकड़ लेते "
सूरा  -अनकबूत 29:48

5-मुहम्मद के  झूठ  का  भंडाफोड़ 
मुहमद  साहब के अनपढ़  होने के झूठ  की पोल हदीस  ने खोल  दी  है  , वास्तव  में  मुहम्मद  और उनके साथी मिल कर  कुरान  की आयतें   लिखते थे ,हदीस  में कहा है  ,
सईदुल खुदरी  ने कहा कि रसूल ने कहा ,कि तुम मुझ  से कुरान के अलावा  कुछ  भी लिखवा लो ,और यदि लिख भी लो तो उसे मिटा  ( delete) देना "

"The prophet said: "Do not write down anything from me except the Quran. Whoever wrote other than that should delete it."

  "‏ لاَ تَكْتُبُوا عَنِّي وَمَنْ كَتَبَ عَنِّي غَيْرَ الْقُرْآنِ فَلْيَمْحُهُ وَحَدِّثُوا    "


सही मुस्लिम -किताब 42 हदीस 7147

2-दूसरा  कारण -  मुहम्मद साहब  द्वारा  लोगों  एक  ही अल्लाह को  मानने पर  जोर  देने के पीछे खुद को अल्लाह  का इकलौता   रसूल  साबित करना था , यहाँ तक  वह  खुद  को अल्लाह  के बराबर  बताने  लगे  ,  कुरान  में कहा है  ,
जो लोग अल्लाह और उसके रसूल  को दुःख  देते हैं  ,उनपर दुनिया और आख़िरत में लानत और यातना तैयार  रखी है  "सूरा - अहजाब 33:57

"إِنَّ الَّذِينَ يُؤْذُونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ لَعَنَهُمُ اللَّهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ  "


.   "those who malign Allah and His messenger, Allah hath cursed them in this world and  hearafter"'Qur)an (33:57

इसका  साफ  मतलब   है कि  मुहम्मद को  दुःख  देना  अल्लाह को दुःख  देने  के समान   है
6-अल्लाह  एक  शरीरधारी  व्यक्ति 

कुरान  में कहा  है  ,यदि अल्लाह  के पुत्र  होता ,  इसका साफ  मतलब  है कि अल्लाह  कोई व्यक्ति  रहा होगा   , यह  आयत देखिये  ,
हे नबी  कह दो  अगर अल्लाह  का बेटा होता तो  मैं उसकी  सबसे पहले  इबादत  करने वाला होता " सूरा जुखुरुफ़ 43:81

"قُلْ إِنْ كَانَ لِلرَّحْمَٰنِ وَلَدٌ فَأَنَا أَوَّلُ الْعَابِدِينَ  "

"If the Most Gracious had a son, I would be the first to worship him!"43:81

3-तीसरा कारण-मुसलमान  जब भी  अल्लाह  के एक  होने  की  बात  करते हैं  तो   कुरान  की इस  आयत का हवाला   देते हैं  ,
" कह  दो कि  वह  अल्लाह  एक है   "कुल हुव अल्लाह  अहद -  قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ "सूरा इख़लास  112 :1
ध्यान  करने की  बात है कि  इस  आयत  में  तथाकथित  अल्लाह  मुहम्मद  साहब   को निर्देश  दे रहा कि  तुम  लोगों  से कह दो  कि  अल्लाह  एक  है .इसलिए मुहम्मद  साहब से  कहलवाने  की  जगह खुद  अल्लाह  को यह कह  देना  चाहिए  था  कि "  मैं एक अल्लाह  हूँ " ( I am  one Allah )अरबी  में "अना वाहिद अल्लाह - أنا واحد الله "हमें  इस बात पर  गौर  करना  चाहिए   अल्लाह  की  गवाही क्यों  चाहिए  ?

7-एक अल्लाहवाद   की  असलियत

इस्लामी  परिभाषा  में  अल्लाह  के  एकत्व ( monotheism )  को  "तौहीद - توحيد "  कहा   जाता   है  ,  इसका उद्देश्य  लोगों  को  एक ही  अल्लाह  की इबादत करना है  , जबकि   मुसलमानों  के अल्लाह में  ,मुहम्मद  , उनका  भाई अली,पत्नी  आयशा  , मुहम्मद  साहब के ससुर  और  साथी   सभी शामिल  हैं    , वास्तव में  मुसलमान  एक अल्लाह  के  बहाने  दुनियां   पर  एक  ही हुकूमत  स्थापित  करना     चाहते  हैं  , जिस   एक ही  शरीयत का कानून  चले. लेकिन  जैसे   मुहम्मद  साहब  के समय  भी कई  लोग लोग  अल्लाह  बने  हुए थे  , आज  भी मुस्लिम  देशों  कई  शासक  और  मुल्ले  खुद  को  अल्लाह  समझ  कर लोगों की जिंदगियां  छीन रहे  हैं   , और दुनियां  के मालिक  बने  हुए  हैं  , शायद  इसी  लिए  साईं  बाबा  उर्फ़  चाँद  मिया  कहता था " सबका  मालिक    एक  है  " अर्थात  दुनियां   की  पूरी धरती और   सम्पति संपत्ति अकेले अल्लाह यानि मुसलमानों  की है  . 

http://www.islam101.com/tauheed/AllahWE.htm

शनिवार, 28 जून 2014

भंडाफोडू की बात सच निकली !

सभी लोग  इस  बात को स्वीकार  करेंगे कि  सत्य   ही  धर्म  है  ,इसलिए  बिना  किसी विद्वेष  और दुराग्रह  के लोगों   के सामने  सत्य का प्रचार  करना  हरेक  व्यक्ति   का कर्तव्य  होना  चाहिए ,  वास्तवमे  यह भी  धर्म  का एक रूप  है , क्योंकि देखा  दया है कि सत्य  को त्यागने पर देश  और समाज  के लिए  घातक दुष्परिणाम     भोगना   पड़ते  है  , लेकिन उस  से बड़े  घातक परिणाम  असत्य  को सत्य  और अधर्म को धर्म  समझ   लेने  से होते हैं  . इसका पता हमें  इस्लामी  देशों और  खासकर  ईराक  में  होने  वाली  घटनाओं    से लगता  है  ,
आजकल दुनिया  के  मुसलमान   इस्लाम  के  बहाने आतंक  की  जो  आग  जला  रहे  हैं  ,उसकी  लपटें कभी   भी भारत  तक  पहुँच  सकती  हैं  . और  इस  आग को  और  भड़काने वाले  बाहर नहीं अंदर  के  ही  लोग  होंगे ,जो अपना  जिहादी चेहरा  छुपा  कर सेकुलर बन गए  हैं , और  विभिन्न दलों  में घुस कर भारत  में अव्यवस्था ,फ़ैलाने की योजना  बना  चुके हैं , सिर्फ उपयुक्त  मौके  की तलाश की राह  देख  रहे  हैं  . भंडाफोडू   ब्लॉग  सन  2009  से प्रमाण  सहित इस्लाम  की  इसी  नीति  और धर्म  और शांति  की आड़  में चलाये   जा रहे इस्लाम  के दुष्प्रचार का  भंडा  फोड़ता  आया  है  .और   अपने  तर्कपूर्ण  लेखों  से  देशभक्त  हिन्दुओं  को सचेत  करता  आया  है   .और इस  ब्लॉग ने अपनी  प्रथम  पोस्ट से  लेकर  केवल  दो  साल   में  ही  इस्लाम सम्बंधित विभिन्न विषयों  पर जो  लेख  प्रकाशित  किये   थे  उनमे  दी  गयी  सभी  बातें सही  साबित  हो  रही  हैं ,ऐसे कुछ   विषयों   के शीर्षक  और  लेखों   के प्रकाशन  की तारीख यहाँ  दी   जारही   है , और  साथ में  अखबार  की  वह  खबर भी  दी  जा  रही  है  ,जो ब्लॉग  के लेख  को सत्यापित और प्रमाणित  करती  है ,जैसे

1-अल्लाह  ईश्वर  नहीं   है 
हम  सदा से कहते  रहते  थे  कि अल्लाह  ईश्वर  नहीं  है , ईश्वर  तो मनुष्य  मात्र   का होता  , लेकिन अलाह  अरब  का  एक  देवता  था ,  यही  नही  मुसलमान  कुरान  को  जिस अल्लाह  की रचना  बताते  हैं  ईश्वर ( God )   नहीं   , एक व्यक्ति  था  जो  मर  चूका   है यद्यपि  मुसलमान  इस  सत्य  को  नहीं   मानते  लेकिन आज  इस   बात  को सार्वजनिक  रूप  से कहनेलगे कि  गैर  मुस्लिम अल्लाह का  नाम  नहीं  ले सकते  , अर्थात अल्लाह   सिर्फ अरबों  या मुसलमानों   का उपास्य   है.
अल्लाह कौन था -8/12/2010,अल्लाह की असलियत -20/7/2011,अल्लाह को पहचान लो -21/7/2011,अल्लाह दज्जाल यानि शैतान है -23/8/2011,अल्लाह ईश्वर नहीं है -1/11/2010,अल्लाह मर चुका है -13/6/2012
सभी  अख़बारों ने  इस खबरको  प्रमुखता से  छापा है कि मालशिया  की सुप्रीम  कोर्ट  ने आदेश  दिया  है कि अल्लाह सिर्फ  मुसलमानों का है , और यदि  कोई  गैर मुस्लिम   अल्लाह  का नाम लेगा  तो उसे कठोर सजा दी   जाएगी  .
"On Monday (June 23), Malaysia’s Supreme Court upheld a lower court ruling that found the term “Allah” belonged to Muslims.

इसलिए  यहाँ  के सभी  गैर  मुस्लिमो  खासकर हिन्दुओं   को  चाहिए के  वे अल्लाह  को उसके  असली  नाम " माकिर " कहा   करें , जिसका अर्थ  मक्कार    होता  है  . इस  पर  कोई  केस  नहीं  कर  सकेगा ,  हमारा  लेख  देखिये ,अल्लाह का असली नाम माकिर है -28/3/2012



2-इस्लाम सेकुलरिज्म   का  शत्रु  है 

मुसलमान  गिरगिट  की  तरह  अपना  रंग  बदलने  में माहिर  है  , जब  वह  संख्या  में  कम  होते  हैं  तो सेकुलरिज्म , सर्वधर्म  समभाव  ,  भाईचारे  और  मानवता   की  वकालत  करके अपना  उल्लू  सीधा करने  में लगे रहते ही , लेकिन  जैसे  ही  वह बहुसंख्यक  होजाते हैं  तो इस्लाम  के दूसरे  समुदायों  के  जानी  दुश्मन  बन  जाते  हैं  , पाकिस्तान  में शिया  और अहमदियों  का  हाल  रोज अखबारों  में  आता  है  हमने इस पर कई  लेख  दिए  हैं ,इस्लाम में सभी मुसलमान समान -29/9/2011,इस्लामी पाखंड दोहरी नीति -18/9/2011,इस्लाम शांति या आतंक -4/5/2012
हमारी  यह  बात  मलेसिया  के संविधान  से सबित होती है  , जिसमे शिया   होने पर जेल  और कठोर दंड  देने  का  प्रावधान   है  ,

"Malaysia is no different. Its constitution declares Islam to be the official state religion and allows other religions to practice peacefully. Yet it is illegal and a jailable offense to be a Shiite Muslim in Malaysia.


3-बलात्कार   इस्लाम  में  धार्मिक  कार्य  है 

आज  सम्पूर्ण  भारत में   रोज बलात्कार  की एक से एक जघन्य  घटनाओं  की  भरमार   सी  हो रही   है ,वास्तव  में यह घटनाएँ हो  नहीं रही  हैं , बल्कि योजनाबद्ध  तरीके से गुप्त रूप से करवाई   जा रही  है  , बल्कि जिहादी   लोग   छुप कर मुर्ख  हिन्दुओं  से   करवा रहे  हैं  . क्योंकि बलात्कर   भी  जिहाद  है और  रसूल  की  सुन्नत  है  , यानि  जैसे  रसूल  करते  थे , वैसा ही मुस्लमान   कर  रहे  हैं  या  करवा  रहे  हैं , हमने  इसके बारे में कई  लेख  दिए  थे  जैसे "  बलात्कार जिहाद का हथियार -26/12/2010,हिन्दू लड़की भगाना जायज है -2/5/2010,रसूल की बलात्कार विधि -9/11/2010.

हमारे  लेखों   की  सत्यता इराक  के आतंकी  संगठन ( SIS - Islamic State in Iraq and Syria) जिसका  पूरा नाम  " al-Dawlah al-Islāmīyah fī al-ʻIrāq wa-al-Shām  "   है  .जिसका  पूरा  नाम" अल  दौलतुल  इस्लामिया फिल इराक वश्शाम   -  الدولة الاسلامية في العراق والشام‎  "  इसके  एक  फतवे   से  सिद्ध  हो जाती  है .यह  फ़तवा आतंकी दल   के  मुखिया " अबू  बकर अल बगदादी - أبو بكر البغدادي "  ने 23 जून  2014  को  जारी  किया  था .इस  फ़तवा  में  कहा  है "मुजाहिदों  द्वारा  नीनवे  प्रान्त  को मुक्त  करा  लिया  गया  है  ,  और रूढ़िवादी   सरकार की  सेना  पराजित  हो गयी  है  . हर जगह लोग  मुजाहिदों  का  गर्मजोशी से  स्वागत कर  रहे  है  , जल्द  ही  बाकी  प्रांतों  पर  भी मुजाहिदों   का  कब्ज़ा  हो  जायेगा  , इसलिए सभी निवासियों   का  दायित्व  है कि  वे मुजाहिदों  को खुश  करने के लिए अपनी  कुंवारी  लडकिया  मुजाहिदों  को पेश  करदें , और  जो इस  फतवे के आदेश में चूक  करेगा तो शरीयत  के  मुताबिक  उनको  नतीजा भुगतना  पड़ेगा "

"Now that the liberation of the Nineveh province by the mujahideen is a fact, the mujahideen feel the warm welcoming by their brothers and sisters in the province of Nineveh. Following the defeat of the sectarian army, god willing, we vow that this province will remain safe and protected by the mujahideen.

Therefor, we ask all the people of this province to bring forward unmarried women so they fulfill their duty of pleasing their brothers, the mujahideen. Who ever fails to comply, shall face consequences imposed by the sharia law.

June 13th
Nineveh province"

अरबी  में  पूरा  फ़तवा इस  लिंक  में  दिया गया  है  ,
http://4-ps.googleusercontent.com/h/www.thegatewaypundit.com/wp-content/uploads/2014/06/404x576xISISRapeFatwa.jpg.pagespeed.ic.zsqL1osseb.jpg

बलात्कार के  इस  फतवे में सबसे पहले " बिस्मिलाहिररहमानिर्रहीम "     भी  लिखा  है  ,  यह  बात इस्लाम  को नंगा  करने के लिए  काफी  है  ,

4-मुसलमान  क्या  चाहते  हैं ?

मुसलमानों  की  आदत  बन  गई  है  कि  वे  कर्तव्य  की  जगह हमेशा अधिकारों  की बात  करते रहते ,और  देश  की जगह  इस्लाम  को वरीयता  देतेहैं  , क्यों  इस्लाम  में देशभक्ति गुनाह  है  . उनसे देश  भक्ति  की आशा  करना बेकार  है  ,इस  विषय  पर भी हमने  कई  लेख  दिए  हैं  , की शायद  हिन्दू  अभी  भी सचेत  हो  जाएँ  , लेख  इसप्रकार  हैं  ,आतंकवाद समस्या नहीं जेहादी रणनीति है -26/2/09,इस्लाम में देशभक्ति महापाप है-4/3/09,-इस्लामी जिहाद की हकीकत-22/4/2010,मुसलमान आतंकवाद से इस्लामी हुकूमत चाहते हैं -30/4/2010,
5-धर्मनिरपेक्षता   मूर्खता  है  .
आज  तक  किसी  भी नेता या  व्यक्ति ने  इस  विषय  पर  चर्चा करने की  हिम्मत  नहीं  दिखाई  कि  मुसलमान  सिर्फ  भारत में ही  धर्म निरपेक्षता   की वकालत  क्यों  करते  है  , दुनिया  में  इतने मुस्लिम  देश  हैं  वहां  के  लोगों  को धर्म निरपेक्षता  क्यों  नहीं   सिखाते ?  यह  इनकी    एक चाल है , इनका  जो असली  उद्देश्य   है  , उसका भंडा  इन  लेखों   में फोड़  दिया  गया ,
'घातक है अल्पसंख्यकवाद -17/4/2010,क्या हम अब भी धर्मनिरपेक्ष बने रहेंगे -2/5/2010,

http://bhaandafodu.blogspot.in/


6-हमारा धर्म  और उद्देश्य  क्या होना   चाहिए 

दुर्भाग्य  की  बात  है कि  आजकल   हिन्दू  समाज  केवल  त्यौहार  मनाने , भंडारे  करवाने , जगह  जगह कीर्तन   का आयोजन  करवाने  और  मंदिरों  पर क्विंटलों सोना  चांदी चढाने  को  ही धर्म  समझ  बैठा  है ,और  ऐसा  मानता कि  इस  से  धर्म  की रक्षा   हो  जाएगी , यानि  देश  में धर्म  की स्थापना  हो  जाएगी  .  लेकिन  ऐसा नहीं   है  . धर्म  की  रक्षा  के लिए दुष्टों  , देशद्रोहियों , और आतंकियों  का  नाश  करना  अत्यंत आवश्यक  है  . जैसा कि  स्वयं  भगवान कृष्ण   ने  गीता  में  कहा  है ,
"परित्राणाय  साधूनाम विनाशयायच दुष्कृताम" -गीता अध्याय 4  श्लोक 8


इसलिए हमारा  पहला धर्म आसुरी  शक्तियों  , नाश  करना  होना  चाहिए ,और  यदि किसी  कारण  से  हम शश्त्रों  से  उनका  नाश  नहीं कर  पाएं  तो तर्कों   से  आसुरी  विचारों   का  मुहतोड़  जवाब  अवश्य   देते  रहें , और उनके मंसूबों  को  सफल  नहीं  होने  दें  .  क्योंकि  समाज  जितना  जागरूक  होगौटाना ही सशक्त   होगा  .
चूँकि  धर्म  देश  के बिना  नहीं  रह  सकता  , और देश धर्म  के बिना अपना  प्राचीन  गौरव , और  पहिचान   खो  देगा  , इसलिए देशभक्ति   भी हमारा  धर्म होना  चाहये  . हिन्दुओं   को  इंडोनेशिया   के इतिहास  से सबक  लेना  चाहिए   कि एक  समय  जो  देश हिन्दू  देश  था  , वह मुस्लिम  आबादी बढ़  जाने से इस्लामी  देश  कैसे बन  गया  .
हमारा  दुर्भाग्य है कि आजादी  के बाद  जिस  भारत को  हिन्दू  राष्ट्र घोषित  करना  चहिये था ,उसे कुछ  धूर्त हिंदू  विरोधी  नेताओं  ने सेकुलर  बना  कर इस्लामी   देश  बनने   का रास्ता  खोल  दिया  है.
इस  विषय  पर   हमने 5  साल  पहले ही  एक  लेख  प्रकाशित  किया  था  ,जिसका  शीर्षक  था।

"हिन्दू राज्य की स्थापना कैसे होगी -3/3/09"

7-पाठकों   से विनम्र   निवेदन 

इस लेख  के  माध्यम  से  हम  उन सभी  पाठको से  निवेदन करते  है  ,  जो  भंडाफोडू  ब्लॉग काफी पहले से पढ़ते  आये  है  ,और  जो फेसबुक  में  भी इसके  लेख  पढ़ते   हैं ,कि अपरिहार्य   कारणों  से    इस  ब्लॉग   को  चलाना  मुश्किल    हो  गया है  . अभी  तक  हम  एक पुराने  कम्प्यूटर का प्रयोग करके और इसके बारे में  अल्प  ज्ञान  होने के  बावजूद अकेले ही    अपना  कर्तव्य  निभाने   का प्रयास  करते  रहे  . परन्तु  अचानक आर्थिक  स्थिति  ख़राब हो  जानेसे   ऐसा संभव  नहीं  हो   पा  रहा  है  ,हमें पूरा  विश्वास   है कि  कुछ उदार महानुभाव  या  कोई  हिन्दू  संस्था  हमें सहायता के लिए  आगे  जरूर  आएगी  . हम   उन सब का  हार्दिक  आभार  मानेंगे  . यदि 5 -10  व्यक्ति  मिल  कर  भी कुछ सहायता  कर देंगे  तो भी  मेरा  काम  चल जायेगा .मेरे एकाउंट  का   विवरण  इस प्रकार  है ,


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शनिवार, 14 जून 2014

भारत मुसलमानों के लिए स्वर्ग क्यों है ?

विश्व की कुल जनसंख्या में प्रत्येक चार में से एक मुसलमान है। मुसलमानों की 60 प्रतिशत जनसंख्या एशिया में रहती है तथा विश्व की कुल मुस्लिम जनसंख्या का एक तिहाई भाग अविभाजित भारत यानी भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश
में रहता है। विश्व में 75 देशों ने स्वयं को इस्लामी देश घोषित कर रखा है। पर, विश्व में  जितने भी बड़े-बड़े मुस्लिम देश माने जाते हैं, मुस्लिमों को कहीं भी इतनी सुख-सुविधाएं या मजहबी स्वतंत्रता नहीं है जितनी कि भारत में। इसीलिए किसी ने सच ही कहा है कि 'मुसलमानों के लिए भारत बहिश्त (स्वर्ग) है।' परन्तु यह भी सत्य है कि विश्व के एकमात्र हिन्दू देश भारत में इतना भारत तथा हिन्दू विरोध कहीं भी नहीं है, जितना 'इंडिया दैट इज भारत' में है। इस विरोध में सर्वाधिक सहयोगी हैं-सेकुलर राजनीतिक स्वयंभू बुद्धिजीवी तथा कुछ चाटुकार नौकरशाह। उनकी भावना के अनुरूप तो इस देश का सही नाम 'इंडिया दैट इज मुस्लिम' होना चाहिए .क्योंकि  विश्व  में भारत  एकमात्र  ऐसा  देश  है  जहाँ केवल   जनसंख्या   के  आधार  पर   मुसलमानों  की  जायज  नाजायज  मांगें  पूरी  कर दी जाती  हैं  , भले वह  देश   को  बर्बाद  करने में  कोई  कसर  नहीं  छोड़ें  ,
1-कम्युनिस्ट देश तथा मुस्लिम
आज   जो  कम्यूनिस्ट  सेकुलरिज्म  के  बहाने  मुसलमानों     के अधिकारों  की  वकालत  करते  हैं  , उन्हें  पता होना  चाहिए  कि कम्युनिस्ट  देशों  में  मुसलमानों   की  क्या  हालत  है।
विश्व के दो प्रसिद्ध कम्युनिस्ट देशों-सोवियत संघ (वर्तमान रूस) तथा चीन में मुसलमानों की जो दुर्गति हुई वह सर्व विदित है तथा अत्यन्त भयावह है। कम्युनिस्ट देश रूस में भयंकर मुस्लिम नरसंहार तथा क्रूर अत्याचार हुए। नारा दिया गया 'मीनार नहीं, मार्क्स चाहिए।' हजारों मस्जिदों को नष्ट कर हमाम (स्नान घर) बना दिए गए। हज की यात्रा को अरब पूंजीपतियों तथा सामन्तों का धन बटोरने का तरीका बताया गया। चीन में हमेशा से उसका उत्तर-पश्चिमी भाग शिनचियांग-मुसलमानों की वधशाला बना रहा। इस वर्ष भी मुस्लिम अधिकारियों तथा विद्यार्थियों को रमजान के महीने में रोजे रखने तथा सामूहिक नमाज बढ़ने पर प्रतिबन्ध लगाया गया।

2-यूरोपीय देश तथा मुस्लिम

सामान्यत: यूरोप के सभी प्रमुख देशों-ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, आदि में मुसलमानों के अनेक सामाजिक रीति-रिवाजों पर प्रतिबंध है। प्राय: सभी यूरोपीय देशों में मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने तथा मीनारों के निर्माण तथा उस पर लाउडस्पीकर लगाने पर प्रतिबंध है। बिट्रेन में इंडियन मुजहीद्दीन सहित 47 मुस्लिम आतंकवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगा हुआ है। ब्रिटेन का कथन है कि ये संगठन इस्लामी राज्य स्थापित करने और शरीयत कानून को लागू करने का अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए हिंसा का प्रयोग करते हैं। जर्मनी में भी बुर्के पर पाबन्दी है। जर्मनी के एक न्यायालय ने मुस्लिम बच्चों के खतना (सुन्नत) को 'मजहबी अत्याचार' कहकर प्रतिबंध लगा दिया है तथा जो डाक्टर उसमें सहायक होगा, उसे अपराधी माना जाएगा। जर्मनी के कोलोन शहर की अदालत ने बुधवार को सुनाए गए एक फैसले में कहा कि धार्मिक आधार पर शिशुओं का खतना करना उनके शरीर को कष्टकारी नुकसान पहुंचाने के बराबर है.और प्राकृतिक नियमों में हस्तक्षेप है
जर्मनी में मुस्लिम समुदाय इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं और वे इस बारे में कानूनविदों से मशविरा कर रहे हैं.
आशा है विश्व के सारे देश जल्द ही जर्मनी का अनुसरण करने लगेंगे.इसी  तरह फ्रांस विश्व का पहला यूरोपीय देश था जिसने पर्दे (बुर्के) पर प्रतिबंध लगाया।

3-मुस्लिम देशों में मुसलमानों की   हालत 
विश्व के बड़े मुस्लिम देशों में भी मुसलमानों के मजहबी तथा सामाजिक कृत्यों पर अनेक प्रकार के प्रतिबंध है। तुर्की में खिलाफत आन्दोलन के बाद से ही रूढ़िवादी तथा अरबपरस्त मुल्ला- मौलवियों की दुर्गति होती रही है। तुर्की में कुरान को अरबी भाषा में पढ़ने पर प्रतिबंध है। कुरान का सार्वजनिक वाचन तुर्की भाषा में होता है। शिक्षा में मुल्ला-मौलवियों का कोई दखल नहीं है। न्यायालयों में तुर्की शासन के नियम सर्वोपरि हैं। रूढ़िवादियों की सोच तथा अनेक पुरानी मस्जिदों पर ताले डाल दिए गए हैं। (पेरेवीज, 'द मिडिल ईस्ट टुडे' पृ. 161-190; तथा ऐ एम चिरगीव -इस्लाम इन फरमेन्ट, कन्टम्परेरी रिव्यू, (1927)। ईरान व इराक में शिया-सुन्नी के खूनी झगड़े-जग जाहिर हैं। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने भी यह स्वीकार किया है कि यहां मुसलमान भी सुरक्षित नहीं हैं। यहां मुसलमान परस्पर एक-दूसरे से लड़ते रहते हैं। उदाहरण के लिए जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान ने अहमदिया सम्प्रदाय के हजारों लोगों को मार दिया। इसके साथ हिन्दुओं के प्रति उनका क्रूर व्यवहार, जबरन मतान्तरण, पवित्र स्थलों को अपवित्र करना, हिन्दू को कोई उच्च स्थान न देना आदि भी जारी है। उनकी क्रूरता के कारण पाकिस्तानी हिन्दू वहां से जान बचाकर भारत आ रहे हैं। वहां हिन्दुओं की जनसंख्या घटकर केवल एक प्रतिशत के लगभग रह गई है। हिन्दुओं की यही हालत 1971 में बने बंगलादेश में भी है। वहां भी उनकी जनसंख्या 14 प्रतिशत से घटकर केवल 1 प्रतिशत रह गई है। साथ ही बंगलादेशी मुसलमान भी लाखों की संख्या में घुसपैठियों के रूप में जबरदस्ती असम में घुस रहे हैं।
अफगानिस्तान की अनेक घटनाओं से ज्ञात होता है जहां उन्होंने हिन्दुओं तथा बौद्धों के अनेक स्थानों को नष्ट किया, वहीं जुनूनी मुस्लिम कानूनों के अन्तर्गत मुस्लिम महिलाओं को भी नहीं बख्शा, नादिरशाही फतवे जारी किए। मंगोलिया में यह प्रश्न विवादास्पद बना रहा कि यदि अल्लाह सभी स्थानों पर है तो हज जाने की क्या आवश्यकता है? सऊदी अरब में मुस्लिम महिलाओं के लिए कार चलाना अथवा बिना पुरुष साथी के बाहर निकलना मना है। पर यह भी सत्य है कि किसी व्यवधान अथवा सड़क के सीध में न होने की स्थिति में मस्जिद को हटाना उनके लिए कोई मुश्किल नहीं है।
4-भारत में मुस्लिम तुष्टीकरण
अंग्रेजों ने भारत विभाजन कर, राजसत्ता का हस्तांतरण कर उसे कांग्रेस को सौंपा। साथ ही इन अलगाव विशेषज्ञों ने, अपनी मनोवृत्ति भी कांग्रेस का विरासत के रूप में सौंप दी। अंग्रेजों ने जो हिन्दू-मुस्लिम अलगाव कर तुष्टीकरण की नीति अपनाई थी, वैसे ही कांग्रेस ने वोट बैंक की चुनावी राजनीति में इस अलगाव को अपना हथियार बनाया। उसने मुस्लिम तुष्टीकरण में निर्लज्जता की सभी हदें पार कर दीं। यद्यपि संविधान में 'अल्पसंख्यक' की कोई निश्चित परिभाषा नहीं दी गई हैं, परन्तु व्यावहारिक रूप से चुनावी राजनीति को ध्यान में रखते हुए मुसलमानों को अल्पसंख्यक मान लिया गया तथा उन्हें खुश करने के लिए उनकी झोली में अनेक सुविधाएं डाल दीं। उनके लिए एक अलग मंत्रालय, 15 सूत्री कार्यक्रम व बजट में विशेष सुविधाएं, आरक्षण, हज यात्रा पर आयकर में छूट तथा सब्सिडी आदि। सच्चर कमेटी तथा रंगनाथ आयोग की सिफारिशों ने इन्हें प्रोत्साहन दिया।  भारतीय संविधान की चिन्ता न कर, न्यायालय के प्रतिरोध के बाद भी, मजहबी आधार पर आरक्षण के सन्दर्भ में कांग्रेस के नेता वक्तव्य देते रहते हैं।
5-हज  सब्सिडी  में  घोटाले 
विश्व में मुस्लिम देशों में हज यात्रा के लिए कोई विशेष सुविधा नहीं है। बल्कि मुस्लिम विद्वानों ने हज यात्रा के लिए दूसरे से धन या सरकारी चंदा लेना गुनाह बतलाया है। पर कांग्रेस शासन में 1959 में बनी पहली हज कमेटी के साथ ही सिलसिला शुरू हुआ हज में सुविधाओं का। सरकारी पूंजी का खूब दुरुपयोग हुआ। हज घोटालों के लिए कई जांच आयोग भी बैठे। हज सद्भावना शिष्ट मण्डल, हज में भी 'वी.आई.पी. कोटा' आदि की सूची बनने लगी। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के बाद जम्मू-कश्मीर के अब्दुल रसीद ने सरकार द्वारा सदभावना शिष्टमण्डल के सदस्यों के चयन पर प्रश्न खड़ा किया। क्योंकि उसमें 170 हज यात्रियों के नाम बदले हुए पाए गए। आखिर सर्वोच्च न्यायालय ने दखल दिया तथा 'अति विशिष्टों की' संख्या घटाकर 2500 से केवल 300 कर दी।
सामान्यत: प्रत्येक हज यात्री पर सरकार का लगभग एक लाख रु. खर्च होता है, परन्तु सरकारी प्रतिनिधियों पर आठ से अट्ठारह लाख रु. खर्च कर दिए जाते हैं। गत वर्ष राष्ट्रीय हज कमेटी ने यात्रियों को कुछ कुछ अन्य सुविधाएं प्रदान की, जिसमें 70 वर्ष के आयु से अधिक के आवेदक व्यक्तियों के लिए निश्चित यात्रा, चुने गए आवेदकों को आठ महीने रहने का परमिट तथा हज यात्रा पर जाने वाले यात्री के लिए पुलिस द्वारा सत्यापन में रियायत दी गई। इसके विपरीत श्रीनगर से 135 किलोमीटर की कठिन अमरनाथ यात्रा के लिए, जिसमें इस वर्ष 6 लाख 20 हजार यात्री गए, और आने-जाने के 31 दिन में 130 श्रद्धालु मारे गए, जिनके शोक में एक भी आंसू नहीं बहाया गया।
6-भारत   का  इस्लामीकरण 
असम में बंगलादेश के लाखों मुस्लिम घुसपैठियों के प्रति सरकार की उदार नीति, कश्मीर में तीन वार्ताकारों की रपट पर लीपा-पोती, मुम्बई में 50,000 मुस्लिम दंगाइयों द्वारा अमर जवान ज्योति या कहें कि राष्ट्र के अपमान पर कांग्रेस राज्य सरकार और केन्द्र की सोनिया सरकार की चुप्पी तथा दिल्ली के सुभाष पार्क में अचानक उग आयी अकबराबादी मस्जिद के निर्माण को न्यायालय द्वारा गिराने के आदेश पर भी सरकारी निष्क्रियता, क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है कि गत अप्रैल में भारत के तथाकथित सेकुलरवादियों ने हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में गोमांस भक्षण उत्सव मनाया तथा उसकी पुनरावृत्ति का प्रयास दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में किया गया? मांग की गई थी कि छात्रावासों में गोमांस भक्षण की सुविधा होनी चाहिए। पर सरकार न केवल उदासीन बनी रही बल्कि जिन्होंने इसका विरोध किया, उनके ही विरुद्ध डंडा चलाया गया। इस विश्लेषण के बाद गंभीर प्रश्न यह है कि कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टीकरण अथवा वोट बैंक को खुश करने की इस नीति से मुस्लिम समाज का अरबीकरण हो रहा है या भारतीयकरण? क्या इससे वे भारत की मुख्य धारा से जुड़ रहे हैं या अलगावादी मांगों के पोषण से राष्ट्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन रहे हैं? क्या चुनावी वोट बैंक की राजनीति, राष्ट्रहित से भी ऊपर है? देश के युवा विशेषकर पढ़े-लिखे  युवकों को इस पर गंभीरत से विचार करना होगा, ताकि  समाज की उन्नति के साथ राष्ट्र निर्माण में उनका सक्रिय सहयोग हो सके।

रविवार, 8 जून 2014

धारा 370 नेहरू का षडयंत्र है !

हिन्दू  मान्यता और पुराणों  के  अनुसार    कैलाश (कश्मीर )  और काशी ( बनारस )को  भगवान  शंकर  का  निवास  माना जाता है  . और इनको  इतना  पवित्र माना  गया है  कि  कुछ फारसी  के  मुस्लिम  शायरों  ने भी कश्मीर  और  बनारस को   धरती  का स्वर्ग  भी  कह  दिया  है  , यहाँ तक   कि  बनारस को भारत का  दूसरा  काबा  भी  बता  दिया  है  , जैसा कि इन पंक्तियों  में   कहा गया  है ,

"अगर फ़िरदौस  बर  रूए ज़मीनस्त - हमींनस्तो ,हमींनस्तो हमींनस्त "
अर्थ -यदि पृथ्वी  पर कहीं स्वर्ग  है , तो  वह यहीं  है  यहीं  है  और  यहीं  पर  है  . 

"ता अल्लाह बनारस  चश्मे  बद्दूर ,इबादत खानये नाकूसियानस्त ,
बर  रूए  ज़मीं फ़िरदौस मामूर , हमाना  काबाये  हिन्दोस्तानस्त "
अर्थ -अल्लाह  बनारस   को  बुरी  नजर  से बचाये  , जो शंख  बजाने  वाले (हिन्दुओं )  का पवित्र  नगर  है  , और  पृथ्वी  पर  स्वर्ग  की तरह प्रकाशमान   है  , यहाँ तक कि  हिंदुस्तान   का  काबा  है   .
इन  पंक्तियों   से  हम समझ  सकते हैं  कि  भारतीय लोगों  के दिलों  में कश्मीर  और काशी  के प्रति  कितना  लगाव  है  , लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि हमारी  उदासीनता  के कारण  बनारस और   नेहरू   के  कारण  कश्मीर  प्रदूषित    हो  गया  है , प्रधान  मंत्री  नरेंद्र मोदी ने  इन  दोनो  की  सफाई  का  बीड़ा  उठा   लिया  है  .  यह हमारे लिए सौभाग्य  और  हर्ष  का  विषय  है
आज एक बार फिर से राजनीति गलियारे में धारा 370 को लेकर बहस छिड़ गयी है। कोई इसके पक्ष में है तो किसी के पास इसका विरोध करने के पर्याप्त आधार है। किसी को लगता है कि संविधान की इस धारा में संशोधन होना चाहिए तो किसी को यह बहस का मुद्दा लगता है। लेकिन हम से काफी लोगों को पता ही नहीं कि धारा 370 है क्या जो समय-समय पर लोगों की बहस और विरोध का कारण बन जाती है जिसके चलते धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर को लेकर लोगों के बीच झगड़े होने लगते हैं। आईये आपको बताते हैं कि धारा 370 है क्या? जो देश के विशेष राज्य कश्मीर में लागू है।
 1-कश्मीर  का  मतलब   क्या  है  ?
 जहाँ  तक  हम  कश्मीर  की  बात  करते  हैं  ,तो उसका  तात्पर्य  सम्पूर्ण  कश्मीर    होता  है  ,जिसमे कश्मीर घाटी , जम्मू , पाक अधिकृत  कश्मीर  का भाग (   ) चीन  अधिकृत   सियाचिन  का  हिस्सा और लद्दाख  भी  शामिल  है  . भले ही  हम  ऐसे  कश्मीर  को भारत का अटूट  अंग  कहते  रहें  लेकिन नेहरू  के दवाब  में  बनायीं  गई  संविधान  की  धारा 370  के प्रावधान के अनुसार कोई भी समझदार  व्यक्ति  कश्मीर  को भारत का अंग नहीं  मान  सकता  , इसलिए  जब  जब  धारा 370  को  हटाने  की  बात  की  जाती  है तो कांग्रेसी  और  सेकुलर  इसके खिलाफ  खड़े  हो  जाते  हैं ,उदहारण  के  लिए जब 27 मई 2014 मंगलवार को मोदी  सरकार के राज्य मंत्री  जितेंद्र सिंह  ने   धारा 370  को  देश  की एकता  और अखंडता के लिए हानिकरक  बताया  तो  तुरंत ही  शेख  अब्दुल्लाह  के  नाती  उमर अब्दुलाह  इतने  भड़क  गए कि यहाँ  तक  कह  दिया  " यातो धारा 370 रहेगी  या  कश्मीर  रहेगा " उमर के  इस  कथन  का रहस्य  समझने  के  लिए  हमें नेहरू और शेख अब्दुलाह  के रिश्तों  के  बारे में  जानकारी  लेना  जरुरी  है  .
वास्तव  में  नेहरू  न  तो कश्मीरी  पंडित  था  और न  हिन्दू  था  , इसके प्रमाण  इस  बातसे  मिलते  हैं  की  कश्मीरी  पंडितों  ने  नेहरू  गोत्र  नहीं  मिलता  .  और नेहरू  ने  जीवन  भर  कभी कश्मीरी भाषा  या  संस्कृत  का एक  वाक्य  नहीं  बोला , नेहरू सिर्फ  उर्दू और अंगरेजी  बोलता  था  . और  और उसके हिन्दू विरोधी होनेका कारण  यह है   कि नेहरू एक  मुसलमान गाजीउद्दीन  का  वंशज  था  . और  शेख अब्दुलाह  मोतीलाल  की  एक मुस्लिम रखैल  की  औलाद  था  . अर्थात  जवाहर लाल  नेहरू  और शेख अब्दुलाह  सौतेले  भाई  थे  . इसी लिए  जब  संविधान  में  कश्मीर  के  बारे में लिखा जा रहा था  तो  नेहरू ने शेख अब्दुलाह को तत्कालीन  कानून  मंत्री  बाबा  साहब  अम्बेडकर  के  पास  भेजा  था   ,
2-धारा 370 क्या  है ?

धारा 370  भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद (धारा) है जिसे अंग्रेजी में आर्टिकल 370 कहा जाता है। इस धारा के कारण ही जम्मू एवं कश्मीर राज्य को सम्पूर्ण भारत में अन्य राज्यों के मुकाबले विशेष अधिकार अथवा (विशेष दर्ज़ा) प्राप्त है। देश को आज़ादी मिलने के बाद से लेकर अब तक यह धारा भारतीय राजनीति में बहुत विवादित रही है। भारतीय जनता पार्टी एवं कई राष्ट्रवादी दल इसे जम्मू एवं कश्मीर में व्याप्त अलगाववाद के लिये जिम्मेदार मानते हैं तथा इसे समाप्त करने की माँग करते रहे हैं। भारतीय संविधान में अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध सम्बन्धी भाग 21 का अनुच्छेद 370 जवाहरलाल नेहरू के विशेष हस्तक्षेप से तैयार किया गया था। स्वतन्त्र भारत के लिये कश्मीर का मुद्दा आज तक समस्या बना हुआ है

3-कश्मीर के  मामले में संविधान भी  लाचार  

जो  लोग संविधान  को सर्वोपरि बताते  हैं ,  और  बात बात  पर संविधान  की दुहाई  देते  रहते  हैं  , उन्हें पता  होना चाहिए की उसी  संविधान  की धारा  370  ने कश्मीर  के  मामले में संविधान  को लचार  और बेसहाय  बना  दिया  है , उदाहरण   के  लिए  ,

धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित क़ानून को लागू करवाने के लिये केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिये।
इसी विशेष दर्ज़े के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती
इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्ख़ास्त करने का अधिकार नहीं है।
1976 का शहरी भूमि क़ानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता।
इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि ख़रीदने का अधिकार है। यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते।
भारतीय संविधान की धारा 360 जिसमें देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती।
जम्मू और कश्मीर का भारत में विलय करना ज़्यादा बड़ी ज़रूरत थी और इस काम को अंजाम देने के लिये धारा 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार कश्मीर की जनता को उस समय दिये गये थे।
4-धारा  370  में राष्ट्रविरोधी  प्रावधान 

1. जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है । 2. जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग होता है । 3. जम्मू - कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है जबकी भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है । 4. जम्मू-कश्मीर के अन्दर भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं होता है । 5. भारत के उच्चतम न्यायलय के आदेश जम्मू - कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं । 6. भारत की संसद को जम्मू - कश्मीर के सम्बन्ध में अत्यंत सीमित क्षेत्र में कानून बना सकती है । 7. जम्मू कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जायेगी । इसके विपरीत यदि वह पकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू - कश्मीर की नागरिकता मिल जायेगी । 8. धारा 370 की वजह से कश्मीर में RTI लागु नहीं है । RTE लागू नहीं है । CAG लागू नहीं होता  ।कश्मीर  पर    भारत का कोई भी कानून लागु नहीं होता । 9. कश्मीर में महिलाओं  पर शरियत कानून लागु है । 10. कश्मीर में पंचायत के अधिकार नहीं । 11. कश्मीर में चपरासी को 2500 ही मिलते है । 12. कश्मीर में अल्पसंख्यको [ हिन्दू- सिख ] को 16 % आरक्षण नहीं मिलता । 13. धारा 370 की वजह से कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते है । 14. धारा 370 की वजह से ही पाकिस्तानियो को भी भारतीय नागरीकता मिल जाता है

5-अम्बेडकर  धारा  370  के  खिलाफ  थे 

बड़े  दःख की  बातहै कि  आज भी अधिकांश  लोग  यही  मानते  हैं  कि डाक्टर अम्बेडकर ने  ही  संविधान  की  धारा 370  का  मसौदा  तैयार किया  था  . अम्बेडकर ने खुद अपने  संसमरण   में इसका खंडन  किया  है  ,  वह  लिखते हैं   कि  जब सन 1949  में  संविधान   की धाराओं  का ड्राफ्ट  तैयार   हो रहा था  , तब  शेख अब्दुल्लाह  मेरे  पास आये  और बोले  कि  नेहरू  ने मुझे आपके  पास  यह  कह  कर भेजा  हैं   कि  आप  अम्बेडकर  से  कश्मीर  के बारे में अपनी  इच्छा  के अनुसार ऐसा ड्राफ्ट  बनवा  लीजिये  , जिसे  संविधान  में  जोड़ा  जा  सके  . अम्बेडकर  कहते  हैं  कि  मैंने  शेख  की बातें  ध्यान  से सुनी   और  उन से कहा  कि एक तरफ  तो आप चाहते  हो कि  भारत  कश्मीर  की रक्षा  करे  , कश्मीरियों  को खिलाये पिलाये , उनके विकास  और उन्नति के लिए प्रयास करे ,और  कश्मीरियों  को  भारत  के सभी प्रांतों  में  सुविधाये  और अधिकार  दिए  जाएँ  , लेकिन भारत के अन्य प्रांतों  के लोगों  को  कश्मीर में वैसी ही सुविधाओं  और अधिकारों  से वंचित  रखा  जाये  .  आपकी  बातों  से ऐसा प्रतीत  होता  है  कि आप भारत के  अन्य  प्रांतों  के लोगों को  कश्मीर  में समान  अधिकार  देने के  खिलाफ  हो  , यह  कह  कर  अम्बेडकर  ने  शेख   से कहा  मैं  कानून  मंत्री  हूँ  , मैं  देश  के  साथ  गद्दारी नहीं  कर  सकता  ( "I am (the) Law Minister of India, I cannot betray my country.” )  अम्बेडकर के यह शब्द  स्वर्णिम  अक्षरों   में  लिखने के  योग्य  हैं   .  यह  कह कर  अम्बेडकर  ने शेख अब्दुलाह  को  नेहरू  के  पास  वापिस लौटा  दिया , अर्थात  शेख अब्दुलाह   के ड्राफ्ट  को संविधान  में जोड़ने से  साफ  मन कर दिया  था  ,

6- नेहरू   का  देश  के साथ विश्वासघात 
  
जब  अम्बेडकर ने शेख अब्दुल्लाह  से संविधान  में  उसके अनुसार ड्राफ्ट जोड़ने  से  यह  कह कर  साफ  मना  कर दिया  कि  मैं  देश  के साथ  विश्वासघात  नहीं  कर  सकता  . तो  शेख नेहरू  के  पास गया , तब  नेहरू  ने गोपाल स्वामी अय्यंगार को  बुलवाया   जो संविधान  समिति  का  सदस्य  और   कश्मीर के  राजा  हरीसिंह    का   दीवान  रह  चूका   था  . नेहरू  ने उसे  आदेश  दिया  कि शेख  साहब  कश्मीर  के बारे में जोभी  चाहते  हैं  ,संविधान   की धारा  370  में  वैसा ही ड्राफ्ट  बना  दो  , आज  संविधान  की  धारा 370  में  कश्मीर के मुसलमानों   को जो अधिकार  दिए  गए  हैं वह  नेहरू  ने लिखवाये  थे  .
 इस घटना  से सिद्ध  होता  है कि नेहरू   ने  देश  के साथ  विश्वासघात   किया  था  , जिसका  दुष्परिणाम  देश  वासी  आज भी  भोग  रहे  हैं  .

चूँकि धारा 370 में कश्मीर  में शरीयत  का कानून लागू  है  ,इसलिये  जब  भी धारा  370  के  बारे में  बहस  होती  है तो उसके साथ ही जब  अम्बेडकर ने शेख अब्दुल्लाह  से संविधान  में  उसके अनुसार ड्राफ्ट जोड़ने  से  यह  कह कर  साफ  मना  कर दिया  कि  मैं  देश  के साथ  विश्वासघात  नहीं  कर  सकता  . तो  शेख नेहरू  के  पास गया , तब  नेहरू  ने गोपाल स्वामी अय्यंगार को  बुलवाया   जो संविधान  समिति  का  सदस्य  और   कश्मीर के  राजा  हरीसिंह    का   दीवान  रह  चूका   था  . नेहरू  ने उसे  आदेश  दिया  कि शेख  साहब  कश्मीर  के बारे में जोभी  चाहते  हैं  ,संविधान   की धारा  370  में  वैसा ही ड्राफ्ट  बना  दो  , आज  संविधान  की  धारा 370  में  कश्मीर के मुसलमानों   को जो अधिकार  दिए  गए  हैं वह  नेहरू  ने लिखवाये  थे  .
 इस घटना  से सिद्ध  होता  है कि नेहरू   ने  देश  के साथ  विश्वासघात   किया  था  , जिसका  दुष्परिणाम  देश  वासी  आज भी  भोग  रहे  हैं  .

चूँकि धारा 370 में कश्मीर  में शरीयत  का कानून लागू  है  ,इसलिये  जब  भी धारा  370  के  बारे में  बहस  होती  है तो उसके साथ ही समान  नागरिक  संहिता की  बात  जरूर  उठती  है  . की  बात  जरूर  उठती  है  .
इसलिए हमारा प्रधान मंत्री  महोदय  से  करबद्ध  निवेदन  है  कि  वह  काशी  को प्रदुषण मुक्त  बनाने का  अभियान चला  रहे हैं  उसी तरह  कश्मीर  से धारा 370 रूपी  प्रदुषण   हटाने  की कृपा  करें  , तभी  कश्मीर  वास्तव   में भारत  का अटूट  अंग  माना   जा  सकेगा  , साथ  में यह भी  अनुरोध  है कि  कश्मीरी  भाषा को  उर्दू  लिपि  की  जगह  शारदा लिपि  में लेखे  जाने  का आदेश  देने  की कृपा   करें  ,  इस से  कश्मीर की  प्राचीन  संस्कृति  बची  रहेगी  , उर्दू लिपी  से  कश्मीर  का  पाकिस्तान  का  छोटा  भाई  लगता  है  .

इसके  अतिरिक्त  मुगलों  ने  भारत  के जितने  भी  प्राचीन  नगरों  के  नाम  बदल  दिए थे , उनके  फिर से  नाम  रखवाने  का आदेश  निकलवाने की अनुकम्पा  करें ,  जैसे  इलाहबाद  का प्रयाग  , फैजाबाद  का अयोध्या  ,  अकबराबाद   का  आगरा  ,  अहमदाबाद  का  कर्णावती  , इत्यादि

: http://indiatoday.intoday.in/story/article-370-issue-omar-abdullah-jammu-and-kashmir-jawaharlal-nehru/1/364053.html

http://hindi.oneindia.in/news/india/know-about-370-act-jammu-kashmir-275770.html

सोमवार, 12 मई 2014

असली मौत का सौदागर और कसाई कौन ?

कांग्रेस  एक  सत्तालोभी   पार्टी  है   . इसने  करीब  60 साल  देश  पर राज  किया  . इसके  निकम्मेपन  के  कारण ही  देशवासी  .  मंहगाई  , बेरोजगारी जैसी अनेकों   समस्याओं   से ग्रस्त  है  .  और  लोगों  में   कांग्रेस   के  विरुद्ध  घोर नफ़रत  और  आक्रोश   व्याप्त   है  . इसलिए  कांग्रेस    लोगों   का इन  समस्याओं  से ध्यान  हटाने  के लिए  नरेंद्र  मोदी  को  अपना निशाना  बनाकर  उन पर  तरह तरह  के  आरोप  लगा  रही  है  , उदहारण के लिए  सन 2002  में  गोधरा  में  हुए   संप्रदायवादी   दंगे के लिए  मोदी   को  जिम्मेदार  बनाकर  उनको "मौत  का  सौदागर , गुजरात  का  कसाई ,हत्यारा  , हिटलर "जैसे   शब्दों     का  प्रयोग   करके मुसलमानों   को  खुश  करके  उनके वोट  हथियाने   की चाल  चल  रही   है  , कांग्रेस  गोधरा के  दंगों को इस तरह  पेश कर रही है   ,जैसे  खुद  मोदी   ने  यह  दंगे   करवाये  थे  , जबकि  यह  दंगे अचानक उस  समय  भड़के  थे   साबरमती   गाड़ी   में  जलाये  गए  कारसेवकों   की  लाशें  अहमदाबाद   स्टेशन    पर   लोगों   ने  देखि  थीं  . जिस  से  लोगों  ने    जो  प्रतिक्रिया   की  थी  वही    दंगे   का  कारण था  . कांग्रेस के  दोगले पन  का  इस  से  बड़ा  और  क्या   सबूत  हो  सकता है  कि   जिस  पार्टी  के  लोगों  ने  अकेली  इंदिरा   की  हत्या  का   बदल लेने के लिए  दिल्ली  के  तीन  हजार( 3000   )सिखों  की  हत्या  करा  दी   हो  ,उसे   मोदी  को  मौत  का  सौदाकार  कहने का    कोई अधिकार  नहीं    .
जबकि    आजादी  के  समय  से आज  तक   कांग्रेस  के  राज   में अनेकों  बड़े बड़े  सम्प्रदायवादी   दंगे    हो  चुके  है  , जिनमे 15503   लोग  मारे  गए  .  मोदी  को  कसाई   बताने  वाले  कांग्रेसी  , कम्युनिस्ट  और  सेकुलर   दी  जाने   वाली  दंगों  इस   सूची   को ध्यान  से  पढ़ें   ,


1- कांग्रेस  राज  में  दंगों  का विवरण 

भारत   के  आजाद  होने के  बाद     कांग्रेस  के  राज  में  कब  कब   सम्प्रदायवादी  दंगे  हुए  ,  और  उनमे  कितने लोग  मारे  गए थे , यह  प्रामाणिक  जानकारी   इस   प्रकार   है  ,

1 -सन 1947 पश्चिम  बंगाल - मृतक -5000 
2-सन 1964 -राउर केला  - मृतक -2000 
3-सन 1967 -रांची  -मृतक 200 
4-सन 1969 -अहमदाबाद - मृतक -512 
5-सन 1970 - महा  .  भिवंडी  -मृतक -80 
6-सन 1980 -मुरादाबाद - मृतक -2000 
7-सन 1983 - नल्ली असम -मृतक -2000 
8-सन 1984 -भिवंडी  - मृतक -611 
9-सन 1984 - दिल्ली  - मृतक -3000  सिख 
10-सन 1985 -अहमदाबाद  -  मृतक -300 
11-सन 1986 -अहमदाबाद  - मृतक -59 
12-सन 1987-मेरठ  -मृतक 81 

इसके  अतिरिक्त  जो   वामपंथी    मोदी  को कसाई ( Bucher )  कह  रहे  हैं  , उन्ही   के  शासन  में  सन 1979  में  जमशेदपर  में भी  सम्प्रदायवादी   दंगा  हुआ था जिसमे 115  लोग   मारे  गए  थे

यदि  मोदी  गुजरात  के  दंगों   के लिए  जिम्मेदार  हैं  ,तो   इन  दंगों  के लिए  कांग्रेस  और  कम्यूनिस्ट  जिम्मेदार  क्यों  नहीं  माने जाये  ?. क्या  यह लोग  मौत  के सौदागर  और  कसाई कहने  के  योग्य  नहीं  हैं  ?जो  लोग  नरेंद्र मोदी को  गुजरात का  हत्यारा कह  रहे हैं ,  वह  कांग्रेस  के शासन  के दौरान इतने अधिक  दंगों  की  संख्या  पर  गौर करें ,और  इस सत्य को  स्वीकार   करें  कि सन 2002 के  गोधरा  दंगे  के बाद  से  आजतक  गुजरात   में  कोई सांप्रदायिक  दंगा   नहीं  हुआ   , और  न कभी  कर्फ्यू  लगाने  की  नौबत  आई  . जबकि दंगों  के  मामले में  कांग्रेस  को " दंगा  रत्न "  या  " दंगा भूषण " का  सम्मान    देना चाहिए  .  


2-दंगों  का  तुलनात्मक  विश्लेषण 

कांगरस के  राज में   जितने  भी सांप्रदायिक  दंगे  हुए  हैं   उनका   वैज्ञानिक   विश्लेषण   करके " पब्लिक पॉलिसी  रिसर्च  सेंटर (  Public Policy Research Centre (PPRC )  के  डाईरेक्टर " विनय  सहस्र बुद्धे "  ने  21 अक्टूबर 2013   को   9  पन्नों   की  एक   रिपोर्ट   भी  जारी  की   थी  . जिसमे दंगों  में  मरने  वाले  हिन्दुओं  और   मुसलमानों   की  संख्या   का तुलनात्मक   अध्यन   करके   को  निष्कर्ष   मिले  उसकी  निष्पक्ष   जानकारी   दी  गयी  है ,उसी के  कुछ  अंश  यहाँ  दिए   जा रहे हैं   ,
 आज कांग्रेस  मुस्लिम  वोटों  के  लिए  गुजरात  दंगों  में   मारे  गए  मुसलमानों   के  लिए  घड़ियाली  आंसू   बहा  रही  है  ,  लेकिन इतिहास  के अनुसार   कांग्रेस    के  राज में  सबसे  बड़ा  साम्प्रदायिक   दंगा सन  1983  में  असम  के  नेल्ली  शहर  में  हुआ  था  .  बंगला  देशी और  असम  के   लोगों   में हुआ था  . इस  दंगे  में 8119  मुसलमान  मारे  गए  थे  . इसके  बाद  दूसरा  दंगा सन  1984  में  दिल्ली   में  हुआ  था  जब  इंदिरा  की  हत्या   हुई   थी  , और  कांग्रेसियों   ने 2733  निर्दोष  सिक्खों   की   हत्या  कर  दी  थी  . संख्या के  अनुसार   तीसरा  दंगा  सन 1969  में   अहमदाबाद  में   हुआ  था  ,जिसमे  कुल 512 लोग   मारे  गए  थे  और  उनमे  430  मुसलमान   थे  .
 आज कांग्रेस  मुस्लिम  वोटों  के  लिए  गुजरात  दंगों  में   मारे  गए  मुसलमानों   के  लिए  घड़ियाली  आंसू   बहा  रही  है  ,  लेकिन इतिहास  के अनुसार   कांग्रेस    के  राज में  सबसे  बड़ा  साम्प्रदायिक   दंगा सन  1983  में  असम  के  नेल्ली  शहर  में  हुआ  था  .  बंगला  देशी और  असम  के   लोगों   में हुआ था  . इस  दंगे  में 8119  मुसलमान  मारे  गए  थे  . इसके  बाद  दूसरा  दंगा सन  1984  में  दिल्ली   में  हुआ  था  जब  इंदिरा  की  हत्या   हुई   थी  , और  कांग्रेसियों   ने 2733  निर्दोष  सिक्खों   की   हत्या  कर  दी  थी  . संख्या के  अनुसार   तीसरा  दंगा  सन 1969  में   अहमदाबाद  में   हुआ  था  ,जिसमे  कुल 512 लोग   मारे  गए  थे  और  उनमे  430  मुसलमान   थे  . कांग्रेस  का दोगलापन   इस  बात  से  सिद्ध  होता  है  कि इतने साल होने के बाद  भी  सिखों   की  हत्या  करने  वाले दोषियों  कोई  सजा नहीं दी  जा सकी  . दूसरी तरफ गुजरात  दंगों   के  जिन लोगों  पर  मुकदमे  चल  रहे हैं  उनकी  कुल  संख्या 294   है  . जिनमे  184  हिन्दू   हैं   .  और  बाकि   मुसलमान  हैं  . यदि मोदी  पक्षपाती  होता  तो मुसलमानों   की  संख्या  अधिक   और  हिन्दुओं  की  संख्या   कम   होती    .पाठकों   की  सुविधा  के लिए    विडिओ   भी  दिया  जा रहा  है   ,
Video-
http://www.youtube.com/watch?v=Bnoz9xYfuW4
 कांग्रेस  राज  में हुए  दंगों  के  बारे में  अधिक  जानकारी  प्राप्त  करने  या  देने  के लिए  इस  पते  पर  संपर्क करें  या  मेल  करें
Public Policy Research Centre
PP66, Mookerjee Smruti Nyas,
Subramania Bharti Marg
New Delhi 110003
E-mail: contact@pprc.in


3-झूठे कांग्रेसिओं  के   मुंह  पर  जूता 

आजकल    जिन  कांग्रेसदियों के  साथ  मिलकर  तथाकथित  सेकुलरों   ने  मिलकर गुजरात   में मोदी   की  लोकप्रियता को केवल  झूठा  प्रचार , और मोदी द्वारा  गुजरात  के  विकास  के मॉडल   का  मजाक उड़ने की  फैशन    अपना  रखी  है  . लेकिन   सन 2012 के  गुजरात विधान  सभा के चुनाव  नतीजों   से हजरत के लोगों  ने   कांग्रेसियों    के  मुंह  पर  जूता  मार  दिया  .  क्योंकि  गुजरात  के  19  मुस्लिम  बहुल निर्वाचन क्षेत्रों   में  मोदी  के कुशल  नेतृत्व  में  बी  जे  पी 12  निर्वाचन  क्षेत्रों  में  सबसे  अधिक  मतों  से  विजयी  हुई  थी  . लेकिन   जिस  कांग्रेस  ने मुस्लिम  वोटों  की  खातिर   मोदी  का विरोध   करने  की  कसम   खा  रखी  हो  . उनके  मुंह  पर  सबसे पहली  जूता  खुद  कांग्रेस  सरकार  द्वारा  गठित सच्चर  कमिटी   ने   ही  मार  दिया  था  .
गुजरात  के  विधान  सभा  चुनाव  से  पहले   सन 2006  में " भारत  सरकार  के अल्प संख्यक मंत्रालय (Ministry of Minority Affairs, Govt of India

 ) ने  दिल्ली  हाई  कोर्ट  के पूर्व न्यायाधीश "राजिंदर  सच्चर "की  अध्यक्षता  में एक  कमिटी  नियुक्त  की  थी  , जिसके  कुल   6  सदस्य   थे  . इस  कमिटी    का उद्देश्य आजकल  के मुसलमानों   की  सामाजिक  , आर्थिक  ,  और    शैक्षणिक  हालत   का  पता  करना  और विस्तृत  रिपोर्ट   प्रधान  मंत्री   मन  मोहन  सिघ   को  पेश  करना  था  .  बाद में  यह  403  पेज  की रिपोर्ट 30  नवम्बर  2006  को  प्रधान  मंत्री    ने  लोकसभा   में  पेश   कर  दी  थी  .  लेकिन  इस  रिपोर्ट में  गुजरात  के मुसलमानों   की  स्थिति   के  बारे में  जो  जानकारियां   दी  गयीं  हैं  ,उसे  पढ़   कर कांग्रसियों   को  समुद्र  में  डूब  कर  मर  जाना  चाहिए  , यदि  उनमे  रत्ती   भर भी  शर्म  बाकी  रही  हो    .  क्योंकि  सच्चर   कमिटी  ने  बताया  कि
1-गुजरात में  शिक्षित  मुसलमानों   की  संख्या 73 . 5  प्रतिशत   है  ,जबकि  राष्ट्रीय स्तर  पर  मुसलमानों   की  संख्या 59 . 1 प्रतिशत   है  . 

2-इसी तरह गुजरात   के  शहरी  मुस्लिम  की  आय 875  रूपया  है  ,  जबकि  राष्ट्रिय  औसत केवल  804  रूपया  ही  है  . और  गुजरात के ग्रामीण  मुस्लिम  की  आय 668  रुपया  है ,  जो  राष्ट्रिय  औसत  से  कम   है  .  जो  केवल 553  रुपया  ही  है  . 

कांग्रेस   चाहे मोदी   को  मुस्लिम  विरोधी  साबित  करने की  कोशिश  करती  रहे    , और  कहती  रहे की  मोदी  के राज  में  मुसलमनों को सरकारी  नौकरी नहीं  मिलती  , लेकिन यह  झूठ  है , क्योंकि गुजरात  में  सरकारी  नौकरी  में  मुसलमानों  की  संख्या 5 . 4 प्रतिशत   है  . जबकि  बंगाल में  केवल  3 . 2 प्रतिशत  और  दिल्ली  में 4 . 7  प्रतिशत   है  . 

पाठक  महोदय विचार  करें  कि यह  सच्चर   रिपोर्ट कांग्रेस   सरकार   ने  बनवाई  थी  . यदि  कोई  कांग्रेसी  इसे  झूठी   बताता है    तो  समझ   लीजये  सभी कांग्रेसी  और मनमोहन  सिंह   भी   महा   झूठा   है  . हम   तो  जानते हैं   , लोगों   को  समझने की  जरुरत   है  .

आज   जो कांग्रेसी मोदी   के  नाम  से लोगों   को  डरा रहे हैं   ,  और  जो बेकार   डर  रहे हैं   , वह  समझ   लें   कि  समाज   की  सुरक्षा के लिए  डरना   भी जरुरी है  ,  जैसे    बच्चे को   माता  पिता से ,  विद्यार्थी को    शिक्षक  से  ,  अपररधि  को  पुलिस  से  और भ्रष्टाचारी  को  कानून    से  डरना  जरुरी   है   ,उसी तरह   कांग्रेसियों , सेकुलरों  , देशद्रोहियों  , और  जिहादी  आतंकियों  को  मोदी   से   डरना     जरुरी  है  .

 क्योंकि  भय  के बिना  प्रीति   नहीं   होती  , नीच भय  से ही  सीधे  हो  सकते  हैं   

हे  भारत   के  शत्रुओ   मोदी  से   डरो !!!
. http://www.haindavakeralam.com/HKPage.aspx?PageID=17173

रविवार, 27 अप्रैल 2014

मुसलमानों के अधिकारों का औचित्य ?

मुसलमान  भारत के किसी भी   भाग में  रहते हों  , किसी  भी  राजनीतिक दल  के  सदस्य  हों  , इस्लाम  के  किसी  भी  धार्मिक  संगठन  या किसी  भी  फिरके  की अनुयायी  हों  ,  हर चुनाव के  समय  यही मुद्दा  उठाते  हैं  कि  आजतक  जितनी  पार्टियों   ने  राज  किया  है   सभी  ने  मुसलमानों  के साथ   बेइंसाफी  की  है  .   और  मुसलमानों    को उनके  अधिकारों  से  वंचित   रखा  है  . इसलिए  जब तक  मुसलमानों  को उनके  अधिकार  नहीं    दिए जायेंगे  देश  में  सही   मायने में   सेकुलरिज्म   , एकता  और  भाईचारा   नहीं  हो  सकता  .
चूँकि  यह  एक  सार्वभौमिक   नियम  है  कि  अधिकारों   के  लिए   पहले कर्तव्य    करना अनिवार्य  होता  है  , इसलिए  मुस्लिम  नेताओं  ने  यह  कहना भी  शुरू कर दिया कि  देश  की  आजादी  के   हजारों  मुसलमानों   ने   अपनी जानें  क़ुरबानी   की  हैं  . और  हरेक मुसलमान   स्वभाव  से  सेकुलर   , और हिन्दू   फिरका परस्त   होते  हैं   .  जिनके  कारण  ही  मुसलमान  पिछड़े , गरीब  , अशिक्षित  और  बेरोजगार  हैं  . हो  सकता है कि  नयी  पीढ़ी  के  हिन्दू  मुसलमानों  के  इन  दावों  को   सच  और  न्यायसंगत  मान लें , लेकिन  ऐतिहासिक  प्रमाणों  और  तथ्यों   से सिद्ध  होता  है  ,कि  मुसलमानों   के यह  सभी  दावे  झूठे  , निराधार     और  कल्पित  हैं  ,  वास्तव  में  मुसलमानों  की  बर्बादी   का  कारण  हिन्दू  नहीं  ,  बल्कि  हिन्दुओं   की   बर्बादी     मुसलमान   कर  रहे  हैं  , क्योंकि  जैसे  किसी  के अधिकारों   को  छीनना   अपराध  है  , उसी  तरह  किसी  के अधिकार  छीन  कर  किसी  दूसरे को देना   भी     उस से भी बड़ा  अपराध  है  ,  इस  लेख  में  इसी    बात  को स्पष्ट    करते  हुए मुसलमानों   की  भावी  योजना    का  भंडा फोड़   किया  जा  रहा  है  .
1-इस्लाम प्रजातंत्र  का  विरोधी   है  .

यदि हम  विश्व  के सभी  मुस्लिम  देशों   की  शासन  प्रणाली  देखें  तो  पता  चलता  है  कि अधिकांश  मुस्लिम  देशों  में  तानाशाही  या शरीयत  का कानून   प्रचलित  है  ,  जिसमे   मानव अधिकारों    के लिए  कोई  जगह  नहीं  है  , वास्तव  में मुसलमान सम्पूर्ण विश्व  में  इस्लामी   हुकूमत (Pan-Islamism)चाहते   हैं .इसे  अरबी  में  " अल  वहदतुल  इस्लामिया -  الوحدة الإسلامية‎  "    कहा  जाता  है  . इसके  अनुसार   सभी  देशों  को इस्लाम  के झंडे के नीचे लाना  है  . वास्तव  में  यह   अरबी  साम्राज्य  का  एक दूसरा   नाम  है , जिसे  अरबी  में  " अल वहदतुल  अरबिया -   وحدة عربية  "   कहा  जाये तो  गलत  नहीं  होगा  . हर मुसलमान छल  ,बल  और  पाखंड  का  सहारा लेकर  इसी उद्देश्य  की  पूर्ति  में  लगा  रहता  है  ,चाहे  उसे  सेकुलर  होने का   ढोंग  क्यों  न  करना  पड़े  . इसलिए मुसलमान  जिस  देश  में  अपने पैर  फैलाना  चाहते  हैं  उसी  देश  के लोगों   की  मदद   से ऐसी  हालत  पैदा  कर  देते  हैं  की  वहां  के  गैर मुस्लिम   भागने  पर  विवश  हो  जाएँ  .  जैसा   मुसलमान  कश्मीर   में  कर रहे  हैं  . और ईरान  में  किया  था  . मुसलमान  जहाँ  भी   अधिक  हो जाते हैं  तो वहां  के  गैर  मुस्लिमों  के  सामने  दो  ही  विकल्प  रखते  हैं  ,  या  तो इस्लाम  कबूल  करो  , या फिर  या  यह  स्थान  ( देश )  छोड़   दो
2-. मुस्लिम  सेकुलरिज्म  एक  चाल  है 


  मुसलमान  भले  ही सेकुलरिज्म  और  आपसी  भाईचारे   का  कितना ही  ढोंग  करें  उनके  दिलों  में  हिन्दुओं  के  प्रति नफ़रत  भरी  रहती  है  , इनके  पाखंड का बुरका  दूसरी  बार 22 अप्रेल  2014  को उस  समय उत्तर  गया  जब आप  आम पार्टी की प्रत्याशी  " शाजिया  इल्मी "  ने खुले  आम  मुसलमानों   को कट्टर सम्रदायवादी  बनने  और  सेकुलरिज्म  छोड़ने  की नसीहत दे  डाली  .  देखिये  वीडियो It's time to be communal, 
says Shazia Ilmi
Published on 22 Apr 2014
Aam Aadmi Party's core member Shazia Ilmi wants Muslims to become communal and Arvind Kejriwal gives long speeches on secularism. Double standard of AAP

http://www.youtube.com/watch?v=RVVpkp0I7xE

3-मुस्लिम राष्ट्रवादी  और  शहीदों  की  संख्या 

हमेशा  देखा  गया  कि  जब  भी  मुस्लिम  नेता    मुसलमानों  के अधिकारों  की  माग  करते हैं  ,  तो  लोगों हिन्दुओं  पर  मुसलमानों का  अहसान  जताने के लिए   कहते हैं  कि  भारत   की आजादी  के  आंदोलन  में अनेकों  मुसलमानों  ने  भाग  लिया  , और सैकड़ों  मुसलमानों  ने   अपने   प्राण   कुर्बान     कर दिए  थे  ,  लेकिन  मुस्लिम  नेताओं  के  इन दावों   की  पोल  इस  किताब " हू इज  हू ऑफ़ इंडियन मार्टिर ( WHO IS WHO OF INDIAN MARTYRS  ) से  खुल  जाती  है  , जिस के  लेखक  डाक्टर पी एन  चौपड़ा  (Dr P.N. Chopra  )  है  ,  यह  किताब  सन  1972 में   भारत सरकार  ने " Ministry of Education and Social Welfare, Government of India   "    ने  प्रकाशित  की  थी  . इस  किताब  के  अनुसार  भारत की  आजादी  के आंदोलन  में केवल  गिनेचुने   मुसलमानों  ने  सक्रीय  भाग  लिया  था  , इनकी संख्या इतनी नगण्य है कि  उँगलियों  पर  गिनी  जा  सकती  है  ,  ऐसे  लोगों  के  नाम  इस प्रकार  हैं  ,

1 .  अली  बन्धु ( जौहर अली  और शौकत अली ) 2 . खान अब्दुल  गफ्फार  खान  3 . मौलाना  अबुल  कलाम आजाद  4 . डाक्टर  जाकिर हुसैन  5 . अब्बास  तय्यब जी  6 . रफ़ी  अहमद  किदवई  7 . मौलाना  हुसैन  अहमद  मदनी  8 . और  मौलाना  हिफ्जुर्रहमान  .
लेकिन  इन में  कुछ  लोग  खिलाफत   मूवमेंट   से  भी  जुड़े  हुए थे और कुछ को  कांग्रेस ने  विभिन्न  पदों  पर  नियुक्त   कर रखा  था  .

 पुस्तक  में यह  भी  एक  चौंकाने  वाला    प्रमाण  दिया  गया  है   कि  आजादी  के इतने  बड़े आंदोलन  में  केवल  तीन  मुसलमान   मरे  थे  ,  जिनको  किसी  तरह  से  शहीद   माना  जा  सकता  है  , उनके  नाम और संक्षिप्त  परिचय  इस प्रकार  हैं  ,

1 -अहमद उल्लाह   -  पुत्र इलाही बख्श ,इसका  जन्म  पटना  में सन  1808 में  हुआ  था  . यह पटना में  डेपुटी  टेक्स  कलेक्टर  था  . लेकिन      सरकार विरोधी   वहाबी  आंदोलन    का  सक्रीय   कार्यकर्ता  था  . इसलिए  अंगरेज  सरकार   ने  इसे  सरकार   विरोधी  षडयंत्र   रचाने  का   अपराधी   घोषित  करके  सन 1857  में तीन  के लिए  जेल  भेज  दिया  .  रिहा  होने  पर इसने   वही वही  काम  किया  . इस पर  सरकार  ने  इसे 27  फरवरी 1865  को  मौत  की  सजा  सुनाई   , जो  बाद में   आजन्म   कैद  में  बदल  दी  गयी  . और इसको  अंडमान  जेल  भेज  दिया  गया ,  वहीँ    21 नवम्बर  सन 1881  में  इसकी  मौत  हो गयी  .
इसी  नाम  का    और    व्यक्ति  था  ,

2-अहमद उल्लाह -इसके  पिता  का  नाम  करीम  बक्श  था  .  इसका  जन्म   अमृतसर  में सन  1864  में  हुआ  था  . जिस  दिन  13 अप्रेल 1919  को  जलियां  वाला   बाग़ में    अंग्रेजो  भारत  छोडो ( Quit India ) आंदोलन   चल  रहा  था  , यह  यह  लोगों  को अंगरेजों  के  विरुद्ध  भड़का  रहा  था  . यह  देख  कर  एक अंग्रेज  पुलिस  वाले  ने  इस  पर  गोली  चला  दी  .  जिस  से यह  गंभीर  रूप  से  घायल  हो  गया  था  . और   जख्मो  के  कारण 25  मई 1919  में  इसकी  मौत   हो  गयी  .
3-अला उद्दीन शेख -इसका  जन्म  सन 1912 में  बंगाल  के मिदना पर  कसबे  में  हुआ  था  .  और   जब सन  1942  में नंदीग्राम थाने  के  पास  से  क्विट इंडिया  आंदोलन  का  जुलुस   गुजर  रहा  था , जिसका  नेतृत्व  यह  कर  रहा  था  , तभी  एक पुलिस  वाले  ने  इस  पर  गोली  चला  दी  . जिस  से  थाने  के  सामने ही  इसकी   तत्काल  मौत  हो  गयी   .
इस  प्रकार  से  भारत  की  आजादी  के   मुस्लिम स्वतंत्रता   सेनानियों  की  कुल  संख्या    सिर्फ ग्यारह  (11 ) ही    होती  है  ,जिनमे  केवल  तीन (3 )   लोगों ने  अपनी जानें   कुर्बान  की  हैं  .     याद रखिये  कि  यह  किताब  कांग्रेस  सरकार  ने  प्रकाशित  की  है  ,  जो  गलत  नहीं  हो  सकती  .  फिर  मुसलमान किस  आधार  पर  खुद  देशभक्त  साबित  करके   अपने  लिए  अधिकारों  की  मांग  करते  रहते  हैं  , जबकि  उसी  दौरान  मुसलमानों  ने  लाखों  हिन्दुओं  का  क़त्ल   किया  था  . आज  मुसलमान  सिर्फ अपने    फायदे के  लिए  देशभक्ति   का   ढोंग   कर  रहे  हैं   . 

4-दो-क़ौमी नज़रिया

आजकल के  जिन  हिन्दुओं  को  सेकुलर  कहलाने  का  शौक  है ,  वह  इस्लाम  के  बारे में  सही  जानकारी  के  बिना  मुस्लिम  नेताओं    की इस  बात पर  विश्वास    कर  लेते    हैं कि  इस्लाम  सभी   धर्मों   का  आदर करने और  सभी  धर्मों   को बराबर   मानने की शिक्षा   देता  है  .  और  बिना किसी   धार्मिक  भेदभाव  के  आपसी  भाई चारे   की  तालीम  देता  है  ,  आज  ऐसे  सेकुलरों  को  पता  होना चाहिए  कि  कुरआन  की  सूरा  काफिरूंन  के  अनुसार  इस्लाम  इसके  बिलकुल   विपरीत  तालीम  देता है  ,  यही  नहीं  इस्लाम की  नजर में  सभी  हिन्दू  काफिर  हैं  . फिर  भी  मुस्लिम  नेता  सेकुलरिज्म  और  भाईचारे  की  आड़ में  इस  सच्चाई   पर बुर्का  डाले  रखते  हैं  , और उचित  मौका  पाकर  अपना  बुरका उतार  देते  हैं  ,
उदहारण  के  लिए  मुसलमानों  ने  सबसे  पहले   यह  बुरका  उस  समय  उतारा  था   जब सन  1942  में सारे  देश  में अंग्रेजो  भारत  छोडो  (Quit India )  आंदोलन    जोर  पकड़  रहा  था , जिसमे  कुछ  मुस्लिम  भी  शामिल  हो  गए  थे   . ऐसे  मुस्लिम  नेता   सोच  रहे थे  कि  जैसे  ही अंगरेज  भारत  छोड़  देंगे  तो अपनी  सारी  सत्ता  और अधिकार भारत के  अंतिम  मुग़ल  बादशाह  बहादुर  शाह    को  सौंप  देंगे  ,  और फिर  से  इस्लामी  हुकूमत  कायम   हो  जाएगी  .     लेकिन   जब  इन मुस्लिम  नेताओं   का इरादा  पूरा नहीं  हुआ   तो  इन्होने  भाईचारे  का  बुरका   फेक  दिया  , और  अपने लिए अलग देश  की  मांग  करने  लगे  ,  इतिहास  में इस मांग  को " द्विराष्ट्रवाद  ( Two nation theory)  और  उर्दू  में " दो-क़ौमी नज़रिया -  دو-قومی نظریہ‎ "  कहा   जाता  है  . मुहम्मद  अली  जिन्नाह  ने  22  मार्च 1940  को  लाहौर  में आल इंडिया  मुस्लीम  लीग के  अधिवेशन  में अपनी  अध्यक्ष  के  रूप  में   इस  सिद्धांत  का  इस तरह  से खुलासा  किया  था  ,  जो आज  भी  यहाँ   के मुस्लिम  मानते  है  , जिन्नाह  ने  कहा  था  ,

"मुझे  इस बात  को समझने  में बड़ी कठिनाई  हो रही है कि हिन्दू  इस सत्य को स्वीकार  क्यों  नहीं  करते  कि  इस्लाम और हिन्दूइज्म  केवल नाम के आधार  पर  अलग  नहीं  हैं  , बल्कि यह ऎसी  दो  कौमें   हैं  जो हमेशा   आपस में  टकराती  आयी  हैं , क्योंकि इनकी  तहजीब एक दूसरे के विपरीत  है  . इनमे आपस में शादी  नहीं  होती  , और न यह एक साथ एक ही टेबल पर  खाना नहीं  खाते  , इनके  धर्म ,फिलोसोफी , रीतिरिवाज , भाषा इतिहास एक दूसरे के विपरीत  हैं  , जैसे  जिस व्यक्ति  को मुसलमान अपना हीरो-Hero ( आदर्श )   बताते  हैं  ,हिन्दू उसे अत्याचारी  और  अपना शत्रु मानते  है  . यहाँ तक  मुसलमानों  और हिन्दुओं  का  खुदा (God  )  भी   अलग   है  . इसलिए हिन्दू  और  मुसलमान  कभी  एक   साथ एक  ही देश में  नहीं   रह  सकते  . और  यदि  ऐसा  प्रयत्न  किया  जायेगा  तो वह अल्प  संख्यक  मुसलमानों  पर बहु संख्यक  हिन्दुओं   की तानाशाही   मानी  जाएगी  . जिस  से  आगे चल  कर हिंदुस्तान  के  कई  टुकड़े  हो  जायेंगे  . बेहतर  तो यह  होगा  कि  मुसलमानों   के  लिए  अलग     देश  दे  दिया  जाये  "

5-पाकिस्तान  समर्थक  मोतीलाल नेहरू 
भारत  के  जिन  भागों  में अलग  देश  की  माग  अधिक  जोर  से उठायी  जा  रही  थी  ,उनमे संयुक्त प्रान्त(  )   बिहार  , केरल और  बंगाल  मुख्य  थे  .  और कुछ  मुस्लिम  रियासतें जैसे  निजाम , भोपाल  , जूनागढ़ भी  थे  .  जो  आज  भी  भारत  में  है  .  लेकिन सिंध  ,
और  पख्तूनिस्तान  के  लोग अलग  देश  का  विरोध   कर  रहे  थे  , इसी  दौरान   मोतीलाल   नेहरू  ने  सन  1929  में  एक सर्व दलीय  सम्मलेन (all-party conference  ) में   जिन्नाह  के  अलग  देश  की  मांग  को  जायज  ठहरा    दिया

इस  से उत्साहित  होकर मुस्लिम  लीग  के नेता "चौधरी  रहमत  अली "  ने घोषणा  की , अभी  नहीं  तो  कभी  नहीं  (  Now or Never  ) अर्थात मुसलमानों  को  अलग  देश  अभी  चाहिए , चूँकि  उस समय  पाकिस्तान का नाम  नहीं रखा गया था   . जो सन 1930  में उस  समय बनाया  गया  जब इलाहाबाद  में मुस्लिम  लीग  का  सम्मेलन हुआ  था  .  जिसमे  अध्यक्ष  के  रूप  में  मुहम्मद इकबाल  ने  कहा  था  " हम  हिंदुस्तान  की  इस   नापाक  जमीन पर   नमाज   पढ़ना पसंद  नहीं  करेंगे  . इसी  " नापाक "शब्द शब्द  से  पाकिस्तान शब्द  का निर्माण हुआ  था  . बाद में  लन्दन में रहने  वाले  एक  मुस्लिम विद्यार्थी  ने 1933 में   पाकिस्तान  शब्द  के अक्षरों   का  टेली ग्राम  से यह अर्थ भेजा था ,letters taken from the names of our homelands: that is Punjab, Afghani, [N.W.F.P.], Kashmir, Sindh, Tukharistan, Afghanistan, and Bloachistan. 

It means the land of the Paks, the spiritually pure and clean."

6-गांधी  द्वारा  खिलाफत  का  समर्थन 

गांधी  न तो  वास्तव  में  कोई  संत था  और  न  ही उसे  राजनीति  का  ज्ञान  था  . वह  तो अपने चेले  नेहरू   को  प्रधान  मंत्री   बनाना  चाहता  था  ,  चूँकि  उस  समय  सभी  मुसलमान  अंगरेजों  के  खिलाफ  हो गए  थे  , इसलिए  गांधी  ने सोचा   कि  यदि  खिलाफत   के  लोगों  का  साथ  लिया  जाये तो  देश  जल्दी  आजाद  हो जायेगा  .  यद्यपि सावरकर  ने  कहा था  कि यह  खिलाफत  मूवमेंट  नहीं  खुराफात  मूवमेंट  है  . लेकिन  नेहरू प्रेम  में अंधे होकर  गांधी ने खिलाफत  वालों   को अपना  समर्थन   दे  दिया  .

खिलाफत आन्दोलन (1919-1924) भारत में मुख्यत: मुसलमानों द्वारा चलाया गया राजनीतिक-धार्मिक आन्दोलन था। इस आन्दोलन का उद्देश्य तुर्की में खलीफा के पद की पुन:स्थापना कराने के लिये अंग्रेजों पर दबाव बनाना था।खिलाफत आन्दोलन दूर देश तुर्की के खलीफा को गद्दी से हटाने के विरोध में भारतीय मुसलमानों द्वारा चलाया गया आन्दोलन था। भारत में मोहम्मद अली जोहर व शौकत अली जोहर दो भाई खिलाफत का नेतृत्व कर रहे थे। गाँधी ने खिलाफत के सहयोग के लिए सहयोग करने की घोषणा कर दी। ऐसी मान्यता है कि इसका राष्ट्रीय आंदोलन के साथ कोई प्राथमिक सरोकार नहीं था। फिर भी इसने साम्राज्यवाद के विरुद्ध राष्ट्रीय विद्रोह के ध्रुवीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि अतातुर्क द्वारा स्वयं ख़लीफा पद समाप्त कर देने से इस आंदोलन का मूल चरित्र ही अप्रासंगिक हो गया. तुर्क सम्राट अब्दुल हामिद द्वितीय (1876-1909) पश्चिमी हमले और बहिष्कार से ओटोमन साम्राज्य की रक्षा करने के लिए, और करने के लिए घर पर  पश्चिमीकरण ( Westernizing) लोकतांत्रिक विपक्ष को कुचलने के लिए एक बोली में अपने पैन इस्लामी कार्यक्रम का शुभारंभ किया.

खलीफा होने के नाते, तुर्क सम्राट नाममात्र दुनिया भर में सभी मुसलमानों की सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता थे.
मुस्लिम धार्मिक नेताओं की एक बड़ी संख्या के लिए जागरूकता फैलाने और खलीफा की ओर से मुस्लिम भागीदारी विकसित करने के लिए काम करना शुरू कर दिया. मुस्लिम धार्मिक नेता मौलाना महमूद  हसन तुर्क साम्राज्य से समर्थन के साथ अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता की एक राष्ट्रीय युद्ध को व्यवस्थित करने का प्रयास किया.सावरकर  ने  गांधी  को  सचेत  किया  था  यदि  आप  मुसलमानों  की  मदद  से  आजादी   प्राप्त   भी  कर लोगे तो  मुसलमान तुम से  इसके  बदले  कुछ न कुछ  जरूर  मांगेंगे   .  और  बाद  में ऐसा  ही  हुआ  .  मुसलमानों   ने  पाकिस्तान  मांग  लिया  .
7-गांधी  हिन्दुओं  का  शत्रु 

जिस  समय अखंड  भारत पर  अंगरेजों   का  राज  था  , उसी  समय  तुर्की  में  इस्लामी   हुकूमत  थी  ज़िसे ( Ottoman Empire )    और  अरबी  में " वहदतुल   उस्मानिया  - الدولة العثمانية  "  भी  कहा  जाता   है  . और उस  समय  उस्मानी  खिलाफत के  34  वें   खलीफा  "  अब्दुल  हमीद    द्वितीय  - عبد المجید الثانی  "   का राज  था  ,   इसकी  खिलाफत  करीब 600 साल  से  चल    रही  थी  .

चूँकि  तुर्की   को  यूरोप   का  द्वार  और ( Sick man of Europe )   भी  कहा  जाता  है  ,  और  तुर्की  साम्राज्य    हंगरी  ,सर्बिया , रोमानिया  ,ग्रीस  ,यूक्रेन  , सीरिया  ,मिस्र  के  आलावा  अफरीका  के  कुछ  भागों  तक  फैला  हुआ  था  .  जिस  से अंगरेजों  को  व्यापर  करने में  दिक्कत  हो रही  थी  . इसलिए  अंगरेज और  जर्मन  सेना  ने  मिल  कर  खलीफा  अब्दुल  हामिद  को  गद्दी  से  उतार  दिया  . जिसे  दुनिया  के  सभी  मुस्लिम  अपना  धार्मिक  नेता   मानते थे  . जैसे  ईसाई  पॉप  को  अपना  धार्मिक  नेता  मानते   हैं  . लेकिन जैसे ही अंगरेजों  ने  खलीफा  को  हटाया   सन 1921 में  केरल  के  मालाबार  में   मोपला  मुसलमानों  ने  हिन्दुओं  का  कत्ले  आम  शूरू कर  दिया  . यही नहीं  हजारों  हिन्दू  औरतों  से बलात्कार  करके  उनको  जबरन  मुसलमान  बना    दिया  . और  जब  मालाबार के  जिला  कांग्रेस  कमिटी   के अध्यक्ष के   वी   गोपाल  मेनन   (K.V. Gopal Menon   )  ने  यह खबर  गांधी    के पास भेजी    तो  गांधी  ने   यह  जवाब    भेजा "THE MOPLAH MUSLIMS ARE GOD-FEARING AND THEY ARE FIGHTING FOR WHAT THEY CONSIDER AS RELIGION AND IN A MANNER THEY CONSIDER AS RELIGIOUS” . 

अर्थात ,  मोपला लोग  अल्लाह  से  डरने वाले सच्चे  मुसलमान  हैं  , और  वह  जो कुछ  कर रहे हैं  वह सब उनकी  दृष्टि में एक  धार्मिक  कार्य  है  . और  वह जिस  काम को धर्म  समझते  हैं   वही   काम  करते   हैं  .
इस  तरह   से  गांधी ने  मुसलमानों  द्वारा हिन्दुओं  पर किये  गए  सभी अत्याचारों  और  अपराधों   को  धार्मिक  कार्य  साबित कर दिया  . जबकि    उस  घटना  के  कुछ  दिनों  बाद  एनी  बेसन्ट(Annie Besant)   घटना  वाली  जगहों  पर गयी  ,तो  पता  चला  कि  मोपला  मुसलमानों  ने   हजारों   नम्बूदिरी  हिन्दुओं को जबरन   मुस्लिम  बनाया  और   हजारों  हिन्दू  औरतों  के  साथ  बलात्कार किया  था  .  इस  दंगे में 100000  ( एक  लाख)    हिन्दू  मार डाले  गए  थे  . फिर  भी   मूर्ख  हिन्दू  गांधी   को  राष्ट्र  पिता  मानते  हैं  . जबकि वह  वास्तव   में  हिन्दूशत्रु था  . 

8-पाकिस्तान  के  भरण  पोषण  का खर्च 
आज तक अधिकांश लोग यही   मानते  आये  हैं  कि  1947  में  बटवारे  के  बाद गांधी  ने   नेहरू  से पाकिस्तान  को अपना भरण पोषण (  Alimony ) के लिए 50  करोड़   रुपये दिलवाए थे  . लेकिन  यह बात  अर्ध सत्य   है  . प्रसिद्ध   किताब  " फ्रीडम एट मिड  नाइट (  Freedom at midnight   ) लेखक "लेरी  कोलिन्स डोमिनिक   ला  पियरे (Larry Collins and Dominique LaPierre  ) के  अनुसार देश   की  चल अचल  संपत्ति  का  बटवारा 20 - 80  के  अनुपात   से  किया  गया  था   .जिसमे रेलवे  के इंजन   ,डिब्बे  , सरकारी  गाड़ियां,टेबल  कुर्सियां ,स्टेशनरी,  फर्नीचर  यहाँ  तक  झाड़ू  भी  शामिल  थे   . साथ में  50  करोड़  नकद  राशि भी थी  .लेकिन  जब  इतना  लेने के  बाद भी  पाक  सेना ने  कश्मीर  पर  हमला  कर  दिया  तो पाकिस्तान  को  खुश  करने के लिए   नेहरू  ने  पाकिस्तान को  25  करोड़ रुपये  और  दे  दिए  . जिसके  कारन  बटवारे    का  अनुपात  बदल  गया  था  .   अर्थात  17.5%  पाकिस्तान  को   और  82.5 %  भारत  को  .  इसका  यही  मतलब  निकलता है कि  गांधी  और  नेहरू  ने 1947  में  पाकिस्तान  को  मजबूत और  पुष्ट  करने के लिए   50  करोड़  रुपये नहीं  बल्कि  75  करोड़ रूपये  दिए  थे  . ताकि वह  भारत पर  हमले   करता  रहे  .

9-लियाकत  - नेहरू  पेक्ट 

 इस  बात  में  कोई  शंका  नहीं  की  भारत  का  बटवारा  धर्म  के आधार  पर  हुआ   था  , क्योंकि  मुसलमान  हिन्दुओं  से  नफ़रत  करते  थे  और उनकेसाथ नहीं  रहना  चाहते  थे  .  बटवारे  के अनुसार  सभी  मुसलमानों  को  पाकिस्तान  और  हिन्दुओं  को   भारत  चले  जाना  चाहिए  था  . लेकिन  जब  ऐसा  हो रहा  था  तभी पाकिस्तानी  मुसलमानों  ने  हिन्दुओं  और सिखों  पर  हमले शुरू  कर  दिए  , यही नहीं  उनकी  औरतों  पर  बलात्कार भी  करने  लगे  . जब  ऐसी  ख़बरें  नेहरू  को मिलीं   तो उसे अपनी  कुर्सी खतरे में   दिखाई  देने  लगी  , क्योंकि  लोग नेहरू को इसका जिम्मेदार   मानं  रहे  थे  . तब  नेहरू ने  लोगों  का  ध्यान  हटाने  के लिए एक  चाल  चली  , और  2 अप्रेल 1950  को पाकिस्तान  के प्रधानमंत्री  लियाकत  खान  को दिल्ली  बुलाकर उपाय  पूछा   यह  बातचीत  8 अप्रेल 1950 तक  यानि  6  दिनों  तक  चली  . 
लियाकत  खान  ने नेहरू  को समझाया  कि  भविष्य  में  जब  भी  भारत  में दंगे  हो  , भारत पाकिस्तान को जिम्मेदार  बताएगा  . और  यदि  पाकिस्तान  में दंगे  हों  तो  वह उसमे  भारत का हाथ  बताएगा  . इस तरह  से  मामला  ठंडा  पड़ जायेगा  . और  लोग  भूल  जायेंगे  .

 इतिहास  में इस  गुप्त  समझौते  को " Liaquat-Nehru Pact.  "     कहा  जाता  है  .  और  आज भी  कांग्रेस  इसी नीति  का  पालन  कर  रही  . और  इसी  समझौते  के कारण हमेशा मुस्लिम  आतंक वादियों  पर  नरमी  का व्यवहार  करती  है  . 

10-हिन्दू  सेकुलर विचार  करें  

  हमारा  इस लेख के सभी  पाठकों , ख़ास कर  उन  लोगों  से  अनुरोध   है जो  हिन्दू  होने  की  जगह  खुद को  सेकुलर कहलाने पर गर्व  महसूस  करते हैं  , वह  लेख  में दिए  गए  प्रमाणों  और  तथ्यों  पर  विचार  करके  इन बातों   को  जरूर   समझ  लें  , कि
1.मुसलमान  प्रजातंत्र  नहीं  इस्लामी  हुकूमत   चाहते  हैं  .2. इनका  सेकुलरिज्म  और  भाई चारा   केवल  पाखण्ड  है  ,  इनके दिलों  में  हिन्दुओं  के प्रति  नफ़रत  भरी  हुई  है ,जो अक्सर  प्रकट  होती  रहती  है  .3. देश की  आजादी  में  मुसलमानों  का योगदान  नगण्य  है  , देश के लिए  केवल  तीन  मुसलमान  शहीद  हुए थे  . जबकि  मुसलमानों  ने  लाखों  हिन्दुओं  को  क़त्ल  किया  था   . इसलिए  मुसलमानों  के लिए  अधिकारों   का  कोई  औचित्य  नहीं   है  . 4. देश के  बटवारे  का जिम्मेदार  जिन्नाह  से अधिक  नेहरू  और  उसका  बाप  मोतीलाल  था  5.भारत में  होने  वाले  दंगे और  आतंकवाद के पीछे  नेहरू - लियाकत  पेक्ट  है  , कांग्रेस  आज भी  उसी  का  पालन   कर  रही   है 6.गांधी को  महात्मा  कहना  गलत  है  , वह  हिन्दुओं  का  कट्टर  शत्रु  था  , जैसे  सभी कंग्रेसी  और  नेहरू - गांधी  परिवार  के लोग  हैं  . 7.मुसलमानों  ने  पाकिस्तान  के  रूप   में  सन 1947  में ही   अपना  अधिकार  ले  लिया  था  .  अब  केवल  अल्प संख्या  होने के आधार पर कोई  अधिकार देने का   कोई    औचित्य    नही    है  . याद रखिये  मुसलमान   अल्पसंख्या   के  आधार   पर  तब तक  अधिकार    मांगते  रहेंगे   जब तक  उनकी  संख्या   हिन्दुओं  से आधी  बनी  रहेगी  , और   जिस दिन  मुसलमानों  की  संख्या   हिन्दुओं  की संख्या से  आधी  से अधिक  हो  जाएगी   यह  भारत को इस्लामी  देश  बना  देंगे   . और  हिन्दुओं से अधिकार  मांगने की  जगह   हिन्दुओं  के अधिकार छीन  लेंगे  . 

http://en.wikipedia.org/wiki/Category:Pakistan_Movement