शनिवार, 22 अगस्त 2015

थाईलैंड में आज भी राम का राज्य है !

थाईलैंड में आज भी राम का राज्य  है !


दुनिया   का शायद  ही  कोई ऐसा व्यक्ति  होगा  जो  भगवान  राम  के  बारे में  नहीं   जनता हो  ,  सभी  भारतीय  धर्मग्रंथों   में  राम  का  नाम आदर से  लया गया  है   , राम  के  बिना  हिन्दू  धर्म  और संस्कृति अधूरी   है   , जैसे  हिन्दू  अभिवादन  के लिए  "राम राम  "   शब्द का प्रयोग  करते  है   मृत्यु  बाद भी  राम  नाम  सत्य   है   कहते   हैं   , यहां  तक  कि   मरते समय  गांधी  में  मुह  से भी  " हे राम  "  निकल  पड़ा  था   ,और जो  गांधी    भारत  में  राम राज्य की इच्छा  चाहते थे  लेकिन  जब भी हिन्दू  जय श्री  राम  का  उद्घोष  करते हैं  तो , उसी  गांधी के  अनुयायी   हिन्दुओं  को सम्प्रदायवादी  बताकर अपमानित  करते  हैं  ,  जब सेकुलर नीति  के  कारण बरसों   से राम  मंदिर   का मामला अटका हुआ  है   ,  तो   भारत   में  राम राज्य कब  आयेगा   , यह बात श्री  राम  ही  बता  सकते हैं  .इसके  मुख्य  कारण  हिन्दू  समाज  की निष्क्रियता , धर्म के नाम पर आडम्बर  ,और   महापुरषों  के इतिहास  का अधूरा  ज्ञान   है  , जैसे  हिन्दू  समझते हैं  कि भगवान राम  का  इतिहास   उनके  बाद  पूरा  हो  गया  , या जो  टी वी  सीरियल  में दिखाया   जाता   है  , वही  राम    का  इतिहास   है  , लेकिन  ऐसे  लोगों  को  यह   जान   कर  प्रसन्नता  होगी कि  भारत  के  बाहर  भी  थाईलेंड   में  आज  भी संवैधानिक  रूप   में  राम राज्य   है  , और वहां भगवान  राम  के छोटे  पुत्र  कुश  के  वंशज सम्राट  " भूमिबल  अतुल्य तेज " राज्य  कर  रहे  हैं  , जिन्हें  नौवां  राम  ( Rama 9 th ) कहा   जाता  है ,

1-भगवान राम का संक्षिप्त इतिहास 
वाल्मीकि रामायण एक धार्मिक ग्रन्थ  होने के साथ एक ऐतिहासिक  ग्रन्थ  भी  है  , क्योंकि  महर्षि  वाल्मीकि  राम के समकालीन  थे  , रामायण  के बालकाण्ड  के  सर्ग  ,70 . 71 और 73 में  राम और उनके तीनों  भाइयों  के विवाह  का  वर्णन    है  , जिसका सारांश   है  कि ,
मिथिला  के राजा  सीरध्वज थे ,  जिन्हें  लोग  विदेह  भी  कहते थे उनकी पत्नी  का  नाम  सुनेत्रा ( सुनयना ) था , जिनकी  पुत्री  सीता जी थीं , जिनका विवाह  राम  से  हुआ  था  , राजा  जनक  के  कुशध्वज  नामके  भाई  थे  , इनकी राजधानी सांकाश्य  नगर थी   ,जो  इक्षुमती  नदी   के किनारे थी   , इन्होंने  अपनी बेटी उर्मिला  लक्षमणसे  , मांडवी भरत  से और श्रुतिकीति  का  विवाह  शत्रुघ्न  से  करा  दी  थी  ,
केशव दास   रचित  " रामचन्द्रिका "-पृष्ठ   354 ( प्रकाशन -संवत 1715 ) .के अनुसार ,राम  और सीता  के  पुत्र  लव  और   कुश  ,लक्ष्मण   और उर्मिला के पुत्र   अंगद  और चन्द्रकेतु  , भरत और  मांडवी    के पुत्र  पुष्कर  और  तक्ष , शत्रुघ्न  और श्रुतिकीर्ति  के  पुत्र ,सुबाहु  और  शत्रुघात ,हुए  थे , भगवान  राम  के  समय  ही राज्यों बटवारा  इस प्रकार  हुआ था  ,पश्चिम  में  लव  को  लवपुर (लाहौर ) पूर्व   में कुश   को कुशावती , तक्ष  को  तक्षशिला , अंगद   को अंगद नगर  , चन्द्रकेतु  को चंद्रावती ,कुश  ने  अपना राज्य  पूर्व   की  तरफ   फैलाया   और एक  नाग वंशी  कन्या  से  विवाह किया  था  थाईलेंड  के  राजा उसी कुश  के  वंशज   हैं   , इस  वंश  को "चक्री  वंश ( Chakri   Dynasty )      कहा  जाता   है  , चूँकि राम  को  विष्णु   का अवतार माना  जाता है , और विष्णु का  आयुध  चक्र   है इसी  लिए  थाईलेंड  के  लॉग  चक्री   वंश   के  हर  राजा   को "राम " की उपाधि  देकर नाम  के साथ संख्या  दे देते   हैं  ,जैसे  अभी  राम (9 th )   राजा  हैं   .जिनका  नाम "भूमिबल अतुल्यतेज " है


2-थाईलैंड की अयोध्या 
लोग  थाईलैंड  की  राजधानी  को अंगरेजी  में  बैंगकॉक ( Bangkok  )  कहते हैं  , क्योंकि  इसका सरकारी  नाम  इतना  बड़ा  है   , की इसे  विश्व  का  सबसे  बडा  नाम   माना जाता है  , इसका   नाम  संस्कृत  शब्दों   से मिल  कर  बना   है   , देवनागरी  लिपि   में  पूरा   नाम  इस प्रकार   है  ,

"क्रुंग देवमहानगर अमररत्नकोसिन्द्र महिन्द्रायुध्या महातिलकभव नवरत्नरजधानी पुरीरम्य उत्तमराजनिवेशन महास्थान अमरविमान अवतारस्थित शक्रदत्तिय विष्णुकर्मप्रसिद्धि "

थाई भाषा  में  इस पूरे  नाम  में  कुल  163  अक्षरों   का  प्रयोग   किया  गया  है  , इस   नाम  की एक  और विशेषता  है  , इसे  बोला नहीं  बल्कि गाकर  कहा  जाता  है . कुछ  लोग आसानी  के   लिए  इसे "महेंद्र  अयोध्या "  भी  कहते   है   , अर्थात  इंद्र द्वारा निर्मित  महान  अयोध्या  ,  थाई लैंड  के  जितने भी  राम ( राजा ) हुए हैं  सभी इसी  अयोध्या में रहते  आयेहैं ,
.
3-असली  राम राज्य  थाई  लैंड  में  है 

बौद्ध  होने  के बावजूद  थाईलैंड के  लोग  अपने  राजा को  राम  का  वंशज  होने  से  विष्णु  का अवतार    मानते  हैं  ,इसलिए ,थाईलैंड में एक तरह से राम राज्य है वहां के राजा को भगवान श्रीराम का वंशज माना जाता है ,थाईलैंड में संवैधानिक लोकतंत्र की स्थापना 1932 में हुई। भगवान राम के वंशजों की यह स्थिति है कि उन्हें निजी अथवा सार्वजनिक तौर पर कभी भी विवाद या आलोचना के घेरे में नहीं लाया जा सकता है वे पूजनीय हैं।
थाई शाही परिवार के सदस्यों के सम्मुख थाई जनता उनके सम्मानार्थ सीधे खड़ी नहीं हो सकती है बल्कि उन्हें झुक कर खडे़ होना पड़ता है. उनकी तीन पुत्रियों में से एक हिन्दू धर्म की मर्मज्ञ मानी जाती हैं।

राजा राम  9  और  पत्नी

http://i.telegraph.co.uk/multimedia/archive/01216/thai-king-460_1216645c.jpg


4-थाईलैंड का राष्ट्रीय ग्रन्थ रामायण है 

 यद्यपि  थाईलैंड   में थेरावाद  बौद्ध  के  लोग   बहुसंख्यक हैं ,   फिर   भी  वहां   का  राष्ट्रीय   ग्रन्थ   रामायण   है  ,जिसे  थाई  भाषा में  " राम कियेन "    कहते   हैं   ,  जिसका  अर्थ    राम  कीर्ति   होता  है  , जो  वाल्मीकि  रामायण  पर आधारित    है  , इस  ग्रन्थ   की  मूल प्रति सन 1767  में  नष्ट  हो  गयी   थी   , जिससे  चक्री  राजा  प्रथम  राम  (1736–1809),   ने  अपनी  स्मरण शक्ति से  फिर  से  लिख  लिया  था  , थाईलैंड  में रामायण  को  राष्ट्रिय  ग्रन्थ घोषित  करना  इसलिए संभव   हुआ ,क्योंकि  वहां  भारत  की  तरह    दोगले हिन्दू नहीं   है  ,जो नाम  के  हिन्दू  हैं   , लेकिन  उनके  असली  बाप  का  नाम  उनकी  माँ  भी  नहीं   बता  सकती  , हिन्दुओं   के  दुश्मन यही  लोग  है   ,
थाई  लैंड  में राम कियेन  पर  आधारित नाटक  और कठपुतलियों  का  प्रदर्शन   देखना  धार्मिक  कार्य   माना  जाता  है , राम कियेन  के मुख्य   पात्रों  के नाम  इस  प्रकार  हैं ,
फ्र  राम  (राम ),2  फ्र लक (लक्ष्मण 3,पाली ( बाली ) 4,सुक्रीप ( सुग्रीव ) ,5 ओन्कोट ( अंगद ) , 6खोम्पून ( जाम्बवन्त ) ,7बिपेक ( विभीषण )  8,तोतस कन ( दशकण्ठ ) रावण    9,सदायु ( जटायु  )10,सुपन  मच्छा ( शूर्पणखा ) 11मारित ( मारीच  ) 12,इन्द्रचित ( इंद्रजीत  )   मेघनाद   ,13 फ्र  पाई ( वायु  देव ) ,इत्यादि ,थाई  राम  कियेन  में  हनुमान  की  पुत्री  और  विभीषण  की पत्नी   का   नाम भी  है  , जो  यहाँ  के लोग नहीं   जानते    ,रामकियेन  इस  लिंक में  है

http://www.seasite.niu.edu/thai/literature/ramakian/ramakian.htm


5-थाईलैंड  में  -हिन्दू देवी देवता 
थाई   लैंड  में बौद्ध  बहुसंख्यक  और  हिन्दू  अल्पसंख्यक   हैं   , वहां   कभी  सम्प्रदायवादी  दंगे  नहीं   हुए ,  इस  से  सिद्ध  होता  है   दंगे  और आतंकवाद   केवल  मुसलमान    ही  करते   हैं   ,  कुछ  दिन  ब्रह्मा के  मंदिर  में  विस्फोट  करने वाले  मुस्लिम   ही  थे   , थाई लैंड  में   बौद्ध   भी  जिन हिन्दू  देवताओं  की पूजा  करते   है   , उनके  नाम  इस  प्रकार   हैं  ,
1 . फ्र ईसुअन ( ईश्वन )   ईश्वर  ,शिव   ,2 ,फ्र नाराइ ( नारायण  )   विष्णु ,  3 , फ्र फ्रॉम (  ब्रह्म  )  ब्रह्मा  ,4 . फ्र इन ( इंद्र ) , 5 . फ्र आथित ( आदित्य  ) सूर्य   , 6 . फ्र  पाय ( पवन   )  वायु   ,

6-थाईलैंड  का राष्ट्रीय चिन्ह  गरुड़ 

गरुड़ एक  बड़े  आकार  का  पक्षी   है   , जो  लगभग  लुप्त   हो गया  है  ,अंगरेजी  में  इसे   ब्राह्मणी  पक्षी  (The brahminy kite )    कहा  जाता   है   , इसका वैज्ञानिक   नाम  "Haliastur indus "  है   . फ्रैंच पक्षी  विशेषज्ञ  Mathurin Jacques Brisson  ने  इसे    सन  1760  में पहली  बार  देखा  था    , और इसका  नाम  Falco indus  रख दिया  था   , इसने  दक्षिण   भारत के पाण्डीचेरी   शहर के  पहाड़ों   में  गरुड़  देखा  था .  इस  से सिद्ध  होता  है कि  गरुड़   काल्पनिक   पक्षी   नहीं   है   ,   इसीलिए भारतीय  पौराणिक  ग्रंथों  में  गरुड़   को  विष्णु   का  वाहन  माना  गया है  ,  चूँकि  राम  विष्णु  के  अवतार   हैं   , और  थाईलैंड  के  राजा  राम  के  वंशज   है    और  बौद्ध  होने  पर भी  हिन्दू  धर्म  पर  अटूट  आस्था   रखते   हैं   , इसलिए  उन्होंने " गरुड़ " को राष्ट्रीय चिन्ह (  )   घोषित   किया   है  , यहां तक  कि थाई  संसद  के  सामने   गरुड़  बना  हुआ  है ,


http://www.thaizer.com/wp-content/uploads/2013/10/garuda.jpg


 7-सुवर्णभूमि हवाई  अड्डा 

हम  इसे    हिन्दुओं  की  कमजोरी  समझें  या  दुर्भाग्य   ,   क्योंकि  हिन्दू   बहुल  देश  होने  पर  भी  देश  के  कई शहरों   के  नाम  मुस्लिम हमलावरों या बादशाहों  के नामों  पर   हैं  ,यहाँ  ताकि  राजधानी  दिल्ली   के  मुख्य  मार्गों    के   नाम   तक  मुग़ल शाशकों  के  नाम  पार हैं   , जैसे  हुमायूँ  रोड  ,  अकबर रोड  ,  औरंगजेब  रोड  इत्यादि  ,  इसके  विपरीत   थाईलैंड  की राजधानी के  हवाई  अड्डे  (AirPort )   का   नाम  सुवर्ण भूमि  है  , यह  आकार  के  मुताबिक  दुनियां का  दूसरे  नंबर   का एयर पोर्ट   है  ,इसका  क्षेत्र   फल (563,000 square metres or 6,060,000 square feet). है . इसके   स्वागत हाल  के अंदर   समुद्र मंथन   का  दृश्य  बना  हुआ   है  ,  पौराणिक   कथा  के अनुसार  देवोँ और  ससुरों  ने अमृत   निकालने  के लिए समुद्र  का  मंथन  किया था  , इसके  लिए  रस्सी  के लिए  वासुकि  नाग  ,  मथानी  के लिए  मेरु  पर्वत  का  प्रयोग   किया   था   , नाग  के फन  की तरफ  असुर  और पुंछ   की  तरफ   देवता  थे ,  मथानी  को स्थिर  रखने के  लिए  कच्छप  केरूप  में  विष्णु   थे ,  और  जो भी  व्यक्ति   इस  ऐयर पोर्ट   के  हॉल जाता है  वह  यह  दृश्य  देख  कर  मन्त्र मुग्ध     हो   जाता  है     ,देखिये स्वर्णभूमि

http://www.tour-bangkok-legacies.com/images/suvarnabhumi-airport-display.jpg


इस लेख   का उदेश्य  लोगों   को  यह  बताना   है  कि असली सेकुलरज्म  क्या होता  है   , यह  थाईलैंड  से सीखो , अपने धर्म   की उपेक्षा करके और  दुश्मनों की चाटुकारी  करके  सेकुलर  बनने  से   तो मर  जाना  ही  श्रेष्ठ  है   , और जिन  लोगों  को  खुद  के रामभक्त  होने पर  गर्व  है   वह विचार  करें  की  थाईलैंड  में भी आपके धर्म   भाई  हैं  , जो  आपके  प्रेम  के   भूखे   हैं   ,सोचिये  उन  को  कैसा  लगता  होगा  जब हमारे  प्रधान   मंत्री उनको  छोड़  कर मुस्लिम  देशों  से सम्बन्ध  बनाने  को  जाते  हैं , और  उनके  पास थाईलैंड  आने के लिए  समय  नहीं है   ,  क्या  भगवान  राम   हिन्दुओं  द्वारा  राम  के  वंशज  की  ऐसे उपेक्षा  को  क्षमा   करेंगे  ?



http://www.hinduwisdom.info/Glimpses_XVI2.htm

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गुरुवार, 13 अगस्त 2015

अल्लाह के हाथों और लुंगी का रहस्य !

अल्लाह महान  है , सर्वशक्तिमान  है  , अजन्मा  है  , सर्वज्ञ  है, और  निराकार  अर्थात अशरीरी  है  ,लगभग  यही   और ऎसी  ही  बातें  कुरान और हदीसों के माध्यम  से मुसलमानों  के  दिमागों   इस  तरह  से भर  दी  जाती  हैं  , कि  वह  अलाह के बारे में  सवाल  करने को   भी  कुफ्र  मान  लेते  है ,  लेकिन  चालाक मुल्ले   लोगों  को  अल्लाह   के     ख़ुफ़िया रहस्य सिर्फ अपने  लोगों ही  बताते   हैं  , क्योंकि  उनको  भय   लगा  रहता है  कि अगर  सामान्य मुसलमान इन  बातों  को जान  लेगा  तो इस्लाम यानि मुल्लाशाही   ज्यादा समय   नहीं   रहेंगे ,
इस्लाम  के प्रचारक  अल्लाह के बारे कुछ  भी  कहें  ,लेकिन  इन  हदीसों  से  सिद्ध  होता है कि  मुसलमानों  का  अल्लाह  अशरीरी नहीं  बल्कि एक अरब व्यक्ति रहा होगा  ,जो अरबों  की तरह  चोगा  पहिनता  था , और कमर के नीचे  लम्बी  लुंगी  या  तहमद  बांधता था , यही  नहीं अल्लाह शरीर भी  असामान्य   था ,क्योंकि उसके दौनों  हाथ दायें  कंधे से लगे  थे ,अर्थात उसका बायां  कन्धा ठूँठा था .

1-अल्लाह  का  बड़ा चोगा और लम्बी लुंगी

इस बात को साबित  करने के लिए तीन  हदीसें  दी   जा रही  हैं  , अरबी के साथ हिंदी और अंगरेजी अनुवाद  भी है ,

पहली हदीस -"अबू हुरैरा  की रिवायत है  ,कि रसूल  ने  बताया  है कि अल्लाह ने कहा  कि  मुझे अपने  भव्य चोगे  और लुंगी पर गर्व  है , और          जो भी उनके बारे पार टिप्पणी  करेगा  उसे  मैं  जहनम  में  झोंक  दूँगा "
       
"Narrated AbuHurayrah:
The Prophet , said: Allah Most High says: my Pride is my cloak and  my majesty is my lower garment, and I shall throw him who view with me regarding one of them into Hell.

"‏ قَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ الْكِبْرِيَاءُ رِدَائِي وَالْعَظَمَةُ إِزَارِي فَمَنْ نَازَعَنِي وَاحِدًا مِنْهُمَا قَذَفْتُهُ فِي النَّارِ ‏"‏.‏"

सुन्नन अबी दौउद -किताब 33 हदीस 4079

दूसरी  हदीस -"इब्ने अब्बास ने कहा  कि रसूल  ने कहा  , अल्लाह  कहता  है कि मेरे चोगे  और  लुंगी सम्मान  योग्य हैं  ,और  जोभी  उनके साथ  स्पर्धा करेगा  मैं उसे  जहन्नम भेज  दूंगा  "

 Ibn ‘Abbas that the Messenger of Allah   said:
“Allah the Glorified, says:  my ‘Pride is My cloak and great My robe, and whoever competes with Me with regard to either of them, I shall throw him into Hell.

""‏ يَقُولُ اللَّهُ سُبْحَانَهُ الْكِبْرِيَاءُ رِدَائِي وَالْعَظَمَةُ إِزَارِي فَمَنْ نَازَعَنِي وَاحِدًا مِنْهُمَا أَلْقَيْتُهُ فِي النَّارِ"

इब्ने माजह - किताब 37 हदीस  4315

तीसरी हदीस -"रसूल ने कहा कि अल्लाह कहता है   ,मेरी  लुंगी  का  सम्मान  करो  ,मुझे  अपने चोगे पर गर्व  है  , और जो उन  पर नजर डालेगा  वह संतप्त  होगा  "

"Messenger of Allah . said, "Allah, the Exalted, says: 'Honour  My Izar and Pride is My Cloak. Whoever vies with Me regarding one of them, shall be tormented."

"“قال الله عز وجل‏:‏ العز إزاري والكبرياء ردائي، فمن ينازعني في  "

 Riyad as-Salihin -Book 1, Hadith 618


नोट - इन तीनों  हदीसों   में अरबी  के  चार  ऐसे  शब्द   हैं  ,मुल्ले  जिनका  गलत  अर्थ  बता कर अरबी  से  अनभिज्ञ  मुसलमानों को गुमराह  कर देते हैं   , यहाँ   इन  के सही अर्थ  दिए जा  रहे  हैं  ,
1 - अल इजार -   " Izaar-إِزَارِي  "An izaar is a lower garment -तहबंद -'लुंगी ..इजारी  का अर्थ  है  मेरी  लुंगी

2-रिदाई "Ridaayi-"رِدَائِي -जामा- चोगा -लबादा -gown- cloak ,कुर्ते की तरह लम्बा  परिधान

3-अल  किब्रिया "الْكِبْرِيَاءُ "पहली हदीस  में अल्लाह  ने अपनी  लुंगी  और चोगे  को ' किब्रिया " बताया है  , मुल्ले इसका अर्थ महान (greate  ) बता देते हैं , जबकि  इसका अरबी में असली  अर्थ " तवील -طويل "   है  , जिसका  मतलब  Long-लंबा.है  ,इन बातों  से सिद्ध  होता है  की  मुसलामानों   का अल्लाह  लम्बा  चोगा  और  लम्बी  लुंगी  पहिनता  होगा


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2-अल्लाह के दौनों  हाथ  दायीं तरफ हैं

 इस गम्भीर विषय  को समझने  के  लिये  पहले  हमें अरबी व्याकरण  की  बुनियादी  जानकारी होना  जरूरी  है , संस्कृत  ,हिब्रू ऑर लैटिन  भाषा  की तरह अरबी में भी संज्ञा (Noun )  सर्वनाम (Pronoun)  और  क्रिया (Verb )   के एकवचन (Singular  ) द्विवचन (Dual )   और  वहुवचन (Plurel)  होते हैं , जिन्हें अरबी  में  वाहिद , तस्निया और   जमा   कहते  हैं  , अरबी में  दो चीजों  केलिए  द्विवचन  का प्रयोग  किया  जाता  है ,जो शब्द  द्विवचन  मे होता है  उसके आगे " ऐन -  ين   " प्रत्यय  " लगा  दिया जाता   है  , यही प्रत्यय किसी शब्द के  द्विवचन  होने की  निशानी  है .उदाहरण के लिए " मुअल्लिम - مُعَلِّم " एक शिक्षक ," मुअल्लिमैन -  مُعَلِّمَيْنِ   " दो  शिक्षक और " मुअल्लिमून - معلمون  " कई शिक्षक .इसी  तरह  अरबी  में   हाथ  को "यद - اليد "और  दायें ( Right ) को "अल यमनी -  اليمنى " कहा  जाता  है , जिसका द्विवचन " यमैन -  يَمِينٌ    "  होता  है , जिसका  अर्थ  है दौनों दायें (Both right ) .इतना   जानने  के बाद आपको  यहाँ  दी  जाने  वाली  हदीसों को समझने   में  परेशानी   नहीं   होगी .

पहली  हदीस -"अब्दुल्लाह  बिन  उमर  ने कहा  कि  रसूल ने कहा  कि  रहमान (अल्लाह ) के  दो  दायें  हाथ  हैं "

Abdullah b. 'Umar that the Messenger of Allah (ﷺ) said,Either side of the Being is the right handsof rahman

"عَنْ يَمِينِ الرَّحْمَنِ عَزَّ وَجَلَّ وَكِلْتَا يَدَيْهِ يَمِينٌ  "
"अन यमीनुर्रहमान   इज्जो जल  कुन्ना  यदहू यमैन "(यहाँ पर  दायें  का  द्विवचन   है )

Sahi Muslim-Book 20, Hadith 4493

दूसरी  हदीस -"अब्दुल्लाह  बिन अम्र  बिन अल आस   की  रिवायत  है  कि रसूल  ने कहा  ,जो  लोग सही होंगे वह परिवार  सहित जन्नत में  रहेंगे ,और इस हदीस  को कहने वाले मुहम्मद  ने  कहा  ,की  अल्लाह  के  दौनों     हाथ  दाहिने   हैं "

" narrated from 'Abdullah bin 'Amr bin Al-'As that:
The Prophet [SAW] said: "Those who are just and fair will be with Allah,with their families .Muhammad (one of the narrators) said in his Hadith: "And both of His hands are right hands."


‏‏.‏ قَالَ مُحَمَّدٌ فِي حَدِيثِهِ ‏"‏ وَكِلْتَا يَدَيْهِ يَمِينٌ

  " काल  मुहम्मद  फी हदिसीही व्  कुन्ना यदहु यमैन  "(यहां  भी  दायें  के  लिए द्विबचन  है  , अर्थात  दो  दायें  हाथ )


 Sunan an-Nasa'i -Vol. 6, Book 49, Hadith 5381


तीसरी  हदीस  -इस  हदीस  की  किताब  के  बारे में अधिकांश  मुस्लिम   नहीं  जानते  ,लेकिन  यह भी  प्रामाणिक  है  ,इस हदीस  के  संकलन  करने वाले का नाम "अबू बकर मुहम्मद  बिन इसहाक बिन  खुज़ैमा  -  أبو بكر محمد بن إسحاق بن خزيمة‎  " है। इसका  समय ( 837 CE/223 AH[1] – 923 CE/311 AH).है , इसकी हदीस  की किताब  का  नाम "सहीह इब्ने खुज़ैमा - صحيح ابن خزيمة   "  है '   खुज़ैमा  ने अल्लाह के  हाथों  के बारे में स्पष्टीकरण  दते हुए  कहा  है  ,

"कि हमारे  रब के  दोनो  हाथ दाहिनी  ओऱ  हैं  , उनके  बायीं  तरफ  कुछ  नहीं हैं "

"شمال وكلتا يدي ربنا يمين لا "


"

Both Hands of our Master are Right and there is no 'Left-ness' "

सही खुज़ैमा - बाब 1 तौहीद हदीस 47

और जानकारी  के लिए  देखिये .Video

Both Allah's hands are right?

https://www.youtube.com/watch?v=sK_DbumSPX0
,

इस्लाम के प्रचारक  अपने  अल्लाह को ईश्वर  साबित  करने के लिए जो भी कुतर्क  करें  ,लेकिन   खुद इस्लामी  किताबों  से यही सिद्ध  होता है कि अल्लाह एक   असामान्य  शरीर  वाला अरब  का व्यक्ति  होगा  , जिसके  विद्रूप हाथों  को देख  कर लोगों  ने उसे  अपना  उपास्य ( माबूद )   मान लिया होगा , और ऐसे अल्लाह  के नाम पर  जिहाद करके आतंक फैलाना मूर्खता   नहीं  तो और  क्या  है ?

और  जो लोग  अल्लाह पर ईमान  लाने  वकालत  करते हैं  ,वह इन सबूतों  को गलत साबित  करके दिखाएँ !


http://www.ahlalhdeeth.com/vbe/archive/index.php/t-3652.html

http://muslimvilla.smfforfree.com/index.php?topic=3475.0;wap2

सोमवार, 20 जुलाई 2015

सात्विक आहार अपनाओ मांसाहार त्यागो !!

बड़े ही  दुःख  की  बात है  कि धार्मिक   ज्ञान   के  अभाव  , और पाश्चात्य संस्कृति  के  प्रभाव   में  आकर  आजकल  के   हिन्दू    युवा वर्ग  में माँसाहारी  भोजन  करने    का  फैशन   हो  गया   है   ,  कुछ  लोग  तो  अण्डों   को  वेजिटेरियन  मानने  लगे   हैं  ,  कुछ  लोग  तो  केवल शौक   के लिए  चिकन , मछली  और  मीट  खाने   लगे   हैं   ,  इसका  दुष्परिणाम  यह  हुआ   कि ऐसे लोग   किसी न किसी   रोग  से ग्रस्त   पाये गए   हैं  ,  आज  ऐसे लोगों  को उचित  मार्गदर्शन   की  जरुरत    है ,

हिन्दू धर्मशास्त्रों मे एकमत से सभी जीवों को ईश्वर का अंश माना है व अहिंसा, दया, प्रेम, क्षमा आदि गुणों को अत्यंत महत्व दिया , मांसाहार को बिल्कुल त्याज्य, दोषपूर्ण, आयु क्षीण करने वाला व पाप योनियों में ले जाने वाला कहा है । महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह ने मांस खाने वाले, मांस का व्यापार करने वाले व मांस के लिये जीव हत्या करने वाले तीनों को दोषी बताया है । उन्होने कहा हैं कि जो दूसरे के मांस से अपना मांस बढ़ाना चाहता है वह जहा कहीं भी जन्म लेता है चैन से नहीं रह पाता । जो अन्य प्राणियों का मांस खाते है वे दूसरे जन्म में उन्हीं प्राणियों द्वारा भक्षण किये जाते है । जिस प्राणी का वध किया जाता है वह यही कहता है
"मांस भक्षयते यस्माद भक्षयिष्ये तमप्यहमू "अर्थात् आज वह मुझे खाता है तो कभी मैं उसे खाऊँगा ।

श्रीमद् भगवत गीता में भोजन की तीन श्रेणियाँ बताई गई है ।
 (1) सात्त्विक भोजन -जैसे फल, सब्जी, अनाज, दालें, मेवे, दूध, मक्सन इत्यादि जो अग्यु, बुद्धि बल बढ़ाते है व सुख, शांति, दयाभाव, अहिंसा भाव व एकरसता प्रदान करते है व हर प्रकार की अशुद्धियों से शरीर, दिल व मस्तिष्क को बचाते हैं
(2) राजसिक भोजन - अति गर्म, तीखे, कड़वे, खट्टे, मिर्च मसाले आदि जलन उत्पन्न करने वाले, रूखे पदार्थ शामिल है । इस प्रकार का भोजन उत्तेजक होता है व दु :ख, रोग व चिन्ता देने वाला है ।
(3) तामसिक भोजन -जैसे बासी, रसहीन, अर्ध पके,दुर्गन्ध  वाले, सड़े अपवित्र नशीले पदार्थ मांस इत्यादि जो इन्सान को कुसंस्कारों की ओर ले जाने वाले बुद्धि भ्रष्ट करने वाले, रोगों व आलस्य इत्यादि दुर्गुण देने वाले होते हैं ।


वैदिक मत प्रारम्भ से ही अहिंसक और शाकाहारी रहा है, यह देखिए-

य आमं मांसमदन्ति पौरूषेयं च ये क्रवि: !
गर्भान खादन्ति केशवास्तानितो नाशयामसि !! (अथर्ववेद- 8:6:23)

-जो कच्चा माँस खाते हैं, जो मनुष्यों द्वारा पकाया हुआ माँस खाते हैं, जो गर्भ रूप अंडों का सेवन करते हैं, उन के इस दुष्ट व्यसन का नाश करो !

अघ्न्या यजमानस्य पशून्पाहि (यजुर्वेद-1:1)

-हे मनुष्यों ! पशु अघ्न्य हैं – कभी न मारने योग्य, पशुओं की रक्षा करो |

अहिंसा परमो धर्मः सर्वप्राणभृतां वरः। (आदिपर्व- 11:13)

-किसी भी प्राणी को न मारना ही परमधर्म है ।

सुरां मत्स्यान्मधु मांसमासवकृसरौदनम् ।
धूर्तैः प्रवर्तितं ह्येतन्नैतद् वेदेषु कल्पितम् ॥ (शान्तिपर्व- 265:9)

-सुरा, मछली, मद्य, मांस, आसव, कृसरा आदि भोजन, धूर्त प्रवर्तित है जिन्होनें ऐसे अखाद्य को वेदों में कल्पित कर दिया है।

अनुमंता विशसिता निहन्ता क्रयविक्रयी ।
संस्कर्त्ता चोपहर्त्ता च खादकश्चेति घातका: ॥ (मनुस्मृति- 5:51)

प्राणी के   मांस    के  लिए वध की  अनुमति  देने  वाला , सहमति  देनेवाला  , मारने  वाला   ,  मांस  का  क्रय  विक्रय  करने  वाला ,पकाने   वाला ,परोसने  वाला   और  खाने  वाला   सभी  घातकी     अर्थात  हत्यारे  हैं

2-सिख  धर्म  में  मांसाहार  का निषेध 

"कबीर  भांग  मछली  सूरा पान  जो जो  प्राणी   खाहिं 

तीरथ  नेम  ब्रत  सब जे  कीते  सभी  रसातल   जाहिं "-– श्री  गुरुग्रन्थ  साहब Ang  137


"जीव    वधहु को  धरम  कर थापहु अधरम कहहु  कत  भाई 
आपन  को मुनिवर  कह थापहु  काको  कहहु  कसाई "-  श्री  गुरुग्रन्थ  साहब  Ang 1103)


वेद  कतेब  कहो   मत झूठे   ,झूठा  जो  न  विचारे - जो   सब  में एक   खुदा   कहु  तो  क्यों  मुरगी  मारे " -श्री  गुरुग्रन्थ  साहब Ang 1350)


शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने गहरी खोज के बाद जो गुरु साहब के निशान तथा हुकम नामें पुस्तक के रूप में छपवाये है उनमें से एक हुक्मनामा यह है ।

पृष्ठ 103-हुक्म नामा  न. 113
हुक्मनामा बाबा बन्दा बहादुर जी,मोहर फारसी

देगो तेगो फतहि नुसरत बेदरिंग
याफत अज नाम गुरु गोविन्द सिंह
 १ ओंकार    फते दरसनु

सिरी सचे साहिब जी दा हुक्म है सरबत खालसा जउनपुर का गुरु रखेगा.. .खालसे दी रहत रहणा भंग तमाकू हफीम पोस्त दारु कोई नाहि खाणा मांस मछली पिआज ना ही खाणा चोरी जारी नारही करणी ।

अर्थात्( मांस, मछली, पिआज, नशीले पदार्थ, शराब इत्यादि क़ीमनाही की गई है । सभी सिख गुरुद्वारों में लंगर में अनिवार्यत : शाकाहार ही बनता है ।


3-ईसाई धर्म  में  मांस  मदिरा  का  निषेध 
ईसाई धर्म    के  धर्मग्रन्थ   बाइबिल   के नए  नियम ( New testament)  में साफ़  शब्दों   में   मांस   खाने  और   शराब  पीने  की  मनाई    की गयी है , क्योंकि  इनके  सेवन करने  वाला  खुद  तो ठोकर  खाता   है    .  और  दूसरों   को भी   सही  धर्म  से  भटका  देता है
It is better not to eat meat or drink wine or to do anything else that will cause your brother or sister to fall.Romans14:21

भला तो यह है, कि तू न मांस खाए, और न दाख रस पीए, न और कुछ ऐसा करे, जिस से तेरा भाई ठोकर खाए

4-बौद्धधर्म में जीवहत्या का निषेध 

किसी   भी  प्राणी   को  मारे  बिना मांस   की  प्राप्ति  नहीं   हो  सकती   , इसलिए   भगवान  बुद्ध    ने हर प्रकार के  जीवों  की  हत्या करने को   पाप  बताया    है    ,  और  कहा   है  ऐसा   करने वाले   कभी     सुख  शांति  प्राप्त   नहीं   करेंगे ,

धम्मपद धम्मपद की गाथा दण्ड्वग्गो’ मे भगवान बुद्ध कहते है :

सब्बे तसन्ति दण्डस्स, सब्बेसं जीवितं पियं।
अत्तानं उपमं कत्वा, न हनेय्य न घातये॥-130
सभी दंड से डरते हैं । सभी को मृत्यु से डर लगता है । अत: सभी को अपने जैसा समझ कर न तो किसी की हत्या करे या हत्या करने के लिये प्रेरित करे ।

सुखकामानि भूतानि, यो दण्डेन विहिंसति।
अत्तनो सुखमेसानो, पेच्‍च सो न लभते सुखं॥-131
जो सुख चाहने वाले प्राणियों को अपने सुख की चाह से , दंड से विहिंसित करता है ( कष्ट पहुँचाता है ) वह मर कर सुख नही पाता है ।

बौद्ध   धर्म   के  " पंचशील ( यानी   पांच  प्रतिज्ञा  )    में   पहली  प्रतिज्ञा   है    ,

" पाणाति  पाता वेरमणी सिक्खा  पदम  समादियामि  "

अर्थात    मैं   किसी  भी  प्राणी  को  नहीं  मारने  की  प्रतिज्ञा   करता  हूँ

5-जैन धर्म   में   प्राणी   हत्या   का   निषेध

जैन   धर्म    में तो    छोटे   बड़े   सभी  प्रकार के   जीवों   को   मारने  की  घोर  वर्जना  की गई    है  
भगवान  महावीर   ने   कहा   है    ,

"सव्वे  जीवा  इच्छन्ति  जीवियुं न मररिस्सयुं -तम्हा   पाणि बहम   घोरं  निग्गन्ठा पब्बजन्ति  च "समण  सुत्त   गाथा   -3 

 अर्थात  -सभी  जीव  जीना  चाहते   है   ,  मारना   कोई     नहीं   चाहता   ,  इसलिए  निर्ग्रन्थ ( जैन )  प्राणी  वध   की   घोर  वर्जना  करते   हैं

6-सूफी  मत   में  अहिंसा  का  आदेश 

यद्यपि अधिकांश   मुस्लिम  मांसाहारी   होते   हैं   , परन्तु इस्लाम  के  सूफी  संत  मौलाना  रूमी   ने  अपनी   मसनवी   में मुसलमानों को  अहिंसा  का  उपदेश   दिया   है  ,    वह  कहते हैं  ,
"मी  आजार मूरी  कि  दाना  कुशस्त  ,  कि  जां  दारद   औ  जां  शीरीं  खुशस्त "
अर्थात  - तुम  चींटी   को  भी  नहीं   मारो ,जो दाना   खाती   है   , क्योंकि  उसमे  भी  जान   है  ,  और  हरेक को  अपनी  जान  प्यारी   होती   है .

इन  सभी   धर्मों  के  ग्रंथों  के वचनों   से  निर्विवाद  रूप   से  यही    बात  सिद्ध   होती   है कि  सदा  स्वस्थ   , निरोगी  और  दीर्घायु   बने   रहने के लिए  हमें    सात्विक   भोजन  अपनाने  की   और  मांसाहार  को  त्यागने  की जरुरत   है   ,  क्योंकि    मांसाहार  के लिए  मूक   निर्दोष  जीवों    की  हत्या  होती   है  ,जो   महापाप   है   ,  दूसरे   मांसाहार   से अनेकों   प्रकार के   रोग   हो   जाते   हैं   , जैसा कि  आजकल   हो रहे   हैं ,

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http://shrut-sugya.blogspot.in/p/jivdaya-vegetarianism.html


Why is there a controversy in the Panth over eating meat?


http://www.sikhanswers.com/rehat-maryada-code-of-conduct/meat-controversy-in-the-panth/



बुधवार, 15 जुलाई 2015

धर्मपरिवर्तन नहीं धर्मपरावर्तन !

इस  ऐतिहासिक  सत्य   से  कोई  भी  इंकार   नहीं   कर  सकता   कि  आज   भारत  खंड में  जितने भी   मुसलमान   हैं ,  उनके  पूर्वज   हिन्दू ही थे।  जिनको   मुस्लिम  बादशाहों   ने जबरन , डरा  धमका  कर   मुसलमान  बना लिया  था  , मुस्लिम  शासकों   ने हिन्दुओं  के सामने सिर्फ दो ही  विलाल्प रक्खे  थे  , मौत   या  इस्लाम  .  इसलिए  अपनी  और  अपने  परिवार  के प्राण  बचाने के लोग  मुसलमान   बन  गए  थे  , वार्ना    जिस  व्यक्ति में  थोड़ी   सी   भी विवेक  बुद्धि     और समझ  होगी   वह  कदापि इस्लाम  कबूल नहीं  करेगा ,क्योंकि   इस्लाम   कुरान  पर  आधारित  है   , जिसकी सभी बाते  परस्पर विरोधी  ,  अवैज्ञानिक  , अमानवीय ,और  मानव मात्र के लिए घातक   हैं  , जिस  तरह   किसी   का  ऑपरेशन  करने के लिए उसे  क्लोरोफार्म  सुंघा कर    बेहोश  कर  दिया   जाता  है  , और  उस  व्यक्ति   की बुद्धि काम  करना  बंद कर देती   है   , इसीतरह केवल वाही लोग  इस्लाम  क़बूल  करते हैं  जिनकी बुद्धि   सुन्न  या   नष्ट    हो  जाती   है  , स्वेच्छा  से  मुसलमान बनने   वाले केवल 1 -5 प्रतिशत  है  . यही   कारण है कि  मुल्ले   मुस्लिम   बच्चों   को   प्राइवेट स्कूलों   की  जगह  मदरसों  में  पढाने  पर  जोर  देते   हैं  . जहाँ  सिर्फ  कुरान  और  हदीसें  ही  पढाई  जाती  हैं   , मुसलमानों  को   डर  लगा रहता  है  कि अगर  उनके  लडके  सरकारी  या  निजी  स्कूलों  में  पढ़ेंगे तो समझदार  हो  जायेंगे   , और तुरंत ही इस्लाम   छोड़ देंगे  , मुहम्मद को भी  यही  डर  लगा  रहता था  कि कहीं   उनकी  कुरान  ,  अल्लाह  और  रसूलियत   की  पोल  न  खुल   जाये  ,  और  लोग   इस्लाम    छोड़ कर  ईसाई   या  यहूदी  न  बन  जाएँ  . इसलिए  मुहम्मद  साहब  ने  एक   तरकीब  निकाली  ,
1-लिंग  का खतना करवाना 
मुहम्मद  साहब    बहुत  ही  चालाक   व्यक्ति   थे  , उन्होंने  मुसलमानों  को  हुक्म   दिया कि  वह  अपने  लड़कों   का  बचपन   में ही  खतना करा   दिया  करें ,.  जब   वह  बिलकुल  नादान   और  अबोध    हों  . खतना    एक  शल्य  क्रिया   होती   है  ,जिसमे   शिश्न (  के ऊपर  की चमड़ी  ( prepuce )  पूरी   तरह     से  काट कर  अलग   कर   दी   जाती   है  . यद्यपि  कुरान   में  खतना    का   कोई आदेश   नहीं  है  , फिर   भी  मुहम्मद    ने  अपनी  मर्जी  से  इसे  अनिवार्य    बना  दिया   . इसके   पीछे   दो  कारण  हैं पहिला,  जब  बच्चे  की   खतना     की    जाती  है वह  उसका   विरोध   नहीं  कर  पाता , मुहम्मद  को  डर  था  कि  यदि   वयस्क   की  खतना   कराएंगगे तो  वह अपना   लिंग   कभी    नहीं  कटायेगा  .  दूसरा   कारण  है कि मुहम्मद  ने  पता  किया था  कि  लिंग की  चमड़ी  काट देने से उसे   प्लास्टिक  सर्जरी ( Plastic surgery)     से  फिर   से   नहीं  जोड़ा    जा   सकता   है   ,(  चित्र  देखिये  )

http://ehealthwall.com/wp-content/uploads/2012/03/Balanoposthitis-images.jpg

 जैसे   नाक  , कान   जैसे  अंग  प्लास्टिक  सर्जरी  से  जोड़े   जा  सकते   हैं   . मुहम्मद  यही   चाहते थे कि जो भी  इस्लाम  के  अंधे  कुएं   में  गिर   जाये   वह  बाहर  नहीं   निकल   पाये   ,  मुहम्मद  की   इस  चालाकी    के फलस्वरूप   कटा  हुआ  लिंग ही  मुसलमान  होने   की    पहचान     हो   गयी  , इसीलिए   लोग   मुसलमानों   को " कटुए "  कहते   हैं   , और  बाला साहब ठाकरे " लांड़िए  "     कहते थे  . मुसलमानों   के  अनुसार    लिंग  कटाने  से  अल्लाह  खुश  होता   है   , यह   मूर्खता  की   बात   है  , श्री  गुरु  गोविन्द   जी ने   लिखा  है   ,

" साँच  कहूँ  सुन   ले  चित   दै , ईश   न   भीजत   लांड  कटाये   "

इसलिए   यदि जिन   को  डरा   धमका  कर   या  उनकी  अबोधता   का    फायदा  उठा   कर  मुसलमान  बना  दिया गया हो  .  उनको  इस्लाम   के  अंधकार   से  निकाल  कर  वापस    हिन्दू  धर्म  के  प्रकाश   में  लाना  " धर्मपरिवर्तन  " नहीं   बल्कि " धर्मपरावर्तन  "  कहना   चाहिए।  . और जो  लोग   आरोप  लगा  रहे   हैं   कि ऐसे   मुसलमानों   को  प्रलोभन   देकर  हिन्दू  बनाया    गया    है  , तो  उन  लोगों   को  पता  होना  चाहिए कि पथभ्रष्ट  लोगों  को प्रलोभन  देकर  समाज   की  मुख्य  धारा  में  शामिल   करा   लेना  कोई   अपराध    नाहीं   है  . उदाहरण    के लिए खुद  सरकार ने नक्सलीओं  और  डाकुओं  को  प्रलोभन   दे कर  ही  समाज  की  मुख्य धारा में   शामिल   करा   लिया   था   .  जैसे ,
2-नक्सलियों   को   प्रलोभन  
भारत  सरकार  की प्रेस  सूचना  ब्यूरो   के  अनुसार सन 2009   से  2010 तक जिन  244  नक्सली  आतंकियों  ने आतंकवाद  छोड़ कर  सामान्य   व्यक्ति  की तरह  समाज   की   मुख्य  धारा   में   शामिल  होने  की  इच्छा  प्रकट   की  थी  , सरकार   ने ऐसे  प्रत्येक   नक्सली  को   1. 5 लाख    रूपया  देने   और हर  महीने  तीन साल  तक  2000   रुपैया  देने  का   प्रलोभन   दिया   था  . इसके  बाद ही  नक्सलियों  ने  अपने  हथियार   डाले थे। इसमे   सरकार ने  कुल 233. 12  करोड़   रुपये   खर्च   किये  थे  

2-डाकुओं   को  प्रलोभन 
इसी   तरह  सरकार   ने दुर्दांत डाकुओं   के  पुनर्वास  के  लिए उनको  प्रलोभन   दिया  था  . टाइम्स ऑफ़  इंडिया  दिनांक  3  दिसंबर 2001  के  अनुसार जब   दक्षिण   के  24 परगना   भांगर  नामकी    जगह   के  करीब  20  डाकुओं    ने  सरकार   के  समक्ष  समर्पण  करना  चाहा    तो  सरकार  ने उनको   पांच  लाख   रूपया  देने   का   लालच   दिया   था  . इनमे   मुख्य  डकैतों   के   नाम   ' शौकत अली  मुल्ला  ,जाकिर  हुसैन  ,और   नजरुल   इस्लाम  हैं  , जो  आदतन   हत्यारे   और  डाकू  थे   .


जैसे  माता  पिता बच्चों   को  प्रलोभन देकर   ध्यान   से  पढने    को  कहते हैं   , और  सरकार  भी  प्रलोभन  देकर  नक्सलियों  और डाकुओं   को  बुरे काम  और  गलत  रास्ता    छूटा   कर   सही  रास्ता  पर  लेजाती  है  . उसी  तरह  जो  लोग  किसी  कारण  से इस्लाम   के गलत  रस्ते  पर  चले  गए  थे ,उन्हें  यदि  प्रलोभन   दे कर भी मुसलमान  से  इंसान  बना  लेने में  कौन  सी  बुराई   है  . क्योंकि  यदि  वह  हिन्दू  नहीं  बनते  तो  जिहादी बन  जाते  .

No.228

http://timesofindia.indiatimes.com/city/kolkata/Shadow-of-doubt-over-dacoit-rehabilitation/articleshow/75576894

मंगलवार, 7 जुलाई 2015

मुस्लिम पर्सनल बोर्ड जवाब दे ?

दुर्भाग्य की   बात  है  कि  सैकड़ों   साल  तक  मुसलमानों    की  गुलामी   में  रह  कर  ,,  आजादी के  बाद  कांग्रेसी   अन्न  खाकर और  सेकुलर  शिक्षा  के कारण  हिन्दू  और   हिन्दू  संगठन   इस  बात   को  स्वीकार   करने    से   डरते  हैं  ,कि   हर  मुसलमान    में   हिन्दू  धर्म   ,   संस्कृति   , और  हिन्दुओं  की  आस्था   के प्रति   नफ़रत   कूट  कूट   कर  भरी   है  .,यद्यपि  मुसलमान    हिन्दुओं   को  धोखा  देने के लिए   सेकुलररिज्म  की वकालत  करते   रहते  हैं .  लेकिन   जब   भी  उनको  मौका   मिलता   है   किसी   न  किसी   बहाने हिन्दू  आस्था  और    धर्म  के खिलाफ  खड़े   हो   जाते   है   . सामान्य  नागरिक  संहिता  ,  वन्दे  मातरम  .   गौहत्या प्रतिबन्ध     जैसे  विषय   इसके  उदहारण    है   ,  ताजा  उदहारण  "   योग  " है   .  ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने राजग सरकार पर धर्मनिरपेक्ष भारत के संविधान का उल्लंघन करने और योग तथा सूर्य नमस्कार जैसी चीजें शुरू करके आरएसएस के एजेंडा को लागू करने का आरोप कि योग और सूर्य नमस्कार हिंदू धर्म की धार्मिक गतिविधियां हैं और यह ‘‘मुसलमानों की विचारधारा के खिलाफ लगाते हुए करारा हमला किया और मुस्लिम समुदाय के सदस्यों से ‘चौकन्ना’ रहने को कहा।बोर्ड के कार्यकारी महासचिव मौलाना वली रहमानी ने लिखा है। रहमानी ने कहा कि इसके खिलाफ आंदोलन चलाने की जरूरत है और इस मसले पर तमाम मस्जिदों में जुमे की नमाज से पहले चर्चा होनी चाहिए।बोर्ड   ने  एक  प्रेस  नोट   जारी  किया   जिसमे  कहा  है  ,कि मुसलमानों को चौकन्ना रहना चाहिए क्योंकि ऐसे संगठन हैं जो इस्लामी मान्यताओं पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने मौलवियों से कहा कि वह शुक्रवार की नमाज के वक्त इन मुद्दों पर बात करें और मुस्लिम समुदाय को आंदोलन के लिए तैयार करें।यह  पत्र  उर्दू   में   है   ,  जिसका शीर्षक   है
,बिरहमानि  धर्म वैदिक कल्चर से  अकीदेये तौहीद का   बराह  रास्त टकराव   है

यह  पत्र  दिनांक  16/06/2015 को  जारी  हुआ  था .पत्र में कहा गया है,मुसलमानों को यह याद रखना चाहिए कि देश में ऐसे लोग हैं जो उनके हुकूक छीन लेना चाहते हैं।

http://aimplboard.in/press-release.php

मुस्लिम  पर्सनल  लॉ बोर्ड  ( AIMPLB )    के इस  पत्र  से   साफ  पता  चलता  है  कि  मुसलमान  योग    के  बहाने   हिन्दुओं   से  टकराने   की  योजना  बना  रहे  हैं  , क्योंकि   योग  वैदिक  संस्कृति   की  देन  है , किसका विरोध  करना मुसलमान अपना  फर्ज   मानते हैं। हम  उन  सभी   मुसलमानों  और  खासतौर  से  मुस्लिम  बोर्ड  के  उन लोगों से  पूछना  चाहते   हैं   ,जो  वैदिक   संस्कृति   से   सम्बंधित  हरेक  बात का विरोध   करते   हैं   ,  बताएं  क्या  उनमे इन 6  विषयों  का  विरोध   करने  की  हिम्मत   है  ?याद रखिये  कि पहली  पांच  चीजों   का  अविष्कार  भारतके  विद्वानों   ने  किया  जिनका  उपयोग   सभी    कर  रहे  हैं   , योग की  तरह इनका  धर्म  से कोई सम्बन्ध   नहीं   है   ,


1-स्थानीय  मानप्रणाली और शून्य 


आर्यभट (476-550) प्राचीन भारत के एक महान ज्योतिषविद् और गणितज्ञ थे। इन्होंने आर्यभटीय ग्रंथ की रचना की जिसमें ज्योतिषशास्त्र के अनेक सिद्धांतों का प्रतिपादन है,इसमे इसमे स्थानीय  मानप्रणाली और शून्य (Place value system and zero)का   वर्णन    है   ,  इसे  अरबी  में "निजामुल  कीमत अल   मकानियः वल सिफर  - نظام القيمة المكانية وصفر   " कहते   हैं ,सन 786  में  खलीफा "अबू  जफ़र  अब्दुल्लाह  मामुन -   ابوجعفر عبدالله مامون‎ "के समय ईरानी गणतिज्ञ ख्वारज़मी  ने संस्कृत   ग्रंथों  का अरबी  अनुवाद  किया  ,  और  अरब    के लोगों  को   शून्य  और  गिनती  का  सही तरीका  सिखाया ,  यह  भी  वैदिक     संस्कृति  की   देन  है  , आज  भी  मुसलमान  कुरान  की  सूरा  और  आयतों का  नंबर  इसी  प्रणाली   से    देते  हैं


2-यूनानी   चिकत्सा  विधि   

 भारत  ,पाकिस्तान  और   अन्य   मुस्लिम   देशों   में इलाज  करने   के लिए   यूनानी    विधि   प्रचलित   है   ,जिसे "तिब्बे  यूनानी - طب یونانی "  कहा जाता  है   , इस  विधि की  खोज सन 980  में  अबी  सीना   नामके  अरब चिकित्सक  ने  की  थी   . इसका  पूरा   नाम "अबू  अली  हुसैन इब्न अब्दुल्लाह  इब्न  सीना - أبو علي الحسين ابن عبد الله ابن سينا"  है  , इसने     महर्षि  सुश्रुत  और चरक   की   लिखी  पुस्तकों  का   आधार    लेकर यूनानी     चकित्सा  की  बुनियाद  रखी , आयर्वेद  को  वेद  का  अंग   माना  जाता   है  ,


3- उर्दू में देवनागरी   अक्षर 

संस्कृत  और  हिन्दी   की  लिपि   देवनागरी  है   . इसमे  हरेक  ध्वनि  के लिए पृथक  अक्षर    है   ,  इस्लाम  की  धार्मिक  भाषा  अरबी  है    जिसमे  ऐसा नहीं  है    जब   मुसलमान  भारत   आये  तो उन्होंने   यहाँ   उर्दू  को   अपनी  भाषा  बना  लिया  और  यहां प्रचलित    शब्दों   को  लिखनेके लिए   अरबी  भाषा में  कुछ  अतिरिक्त   अक्षर जोड़   दिए    जैसे ,ट , ड ,ड़ ( ٹ ,ڈ ,ڑ )मुसलमानों   ने  यह  ध्वनि   या  अक्षर  भारत   से  लिए   है   ,  इनका  अल्लाह  भी  यह  अक्षर  नहीं   बोल   सकता


4-खगोल   विज्ञानं 

खगोल   विज्ञानं ( Astronomy"  )  को  अरबी   में "इल्मुल फलक  -   علم الفلك "और " ईल्मुल नजम -علم النجوم  "  कहा  जाता  है  , यह   भी  वैदिक  संस्कृति  की पैदाइश   है ,सैकड़ों   साल  पहले  भारत  के  खगोल   शास्त्री   ने " सिद्धांत  "  नामक  ग्रन्थ  की  रचना  की  थी   , जिसका सन 770  में  खलीफा  मंसूर   के   एक  दरबारी   ने   संस्कृत   से  अरबी  में  अनुवाद  किया  ,  और   इसका  नाम " जीज महलुल फिल  सिंद हिन्द दरजह दरजह  -  زيج محلول في السندهند لدرجة درجة "इस ग्रन्थ  में दी  गयी विभिन्न  टेबुलों  की  मदद   से  ग्रहों  की सही  स्थिति  ,  उनका  अंश   और  कोण  का सही   पता  चल  जाता  है    ,  मुसलमान  इस्लामी  जंतरी ( पंचाग  "  बनाने  में   इसका  सहारा लेते  हैं   ,

5-वैदिक गणना  पद्धति 

इस विधि  को(Hindu–Arabic numeral system)भी   कहा  जाता   है   क्योंकि   यह विधि   अरब  लोगों  ने   भारत  से सीखी  थी   , फिर  अरब  से यूरोप  के लोगों  ने सीखी  थी

इस्लाम से  पहले  और  इस्लाम के जन्म  तक  अरब लोगों   को गिनती  नहीं  आती  थी   ,  वह  अरबी   के    एक एक अक्षर के लिए एक  संख्या   मानते  थे  ,  जैसे अलिफ  को  1  और  बे को  दो  ,  लेकिन   इस्लाम  के  हजारों  साल   पहले   भारतीय विद्वानों   के  इकाई  से लेकर  महा शंख   तक  की  गणना  कर ली थी   . गिनती  की  इस  विधि  को  सन  825  में अरब   गणितज्ञ "अब्दुल्लाह मुहम्मद  बिन मूसा अल  ख्वारज़मी - عبد الله محمد بن موسى الخوارزمی‎ "ने  अरब  में  प्रचलित  किया  ,  बाद में  सन  830  में  " अबू  यूसुफ  याकूब बिन  इसहाक अल  सबाह अल  किन्दी - أبو يوسف يعقوب بن إسحاق الصبّاح الكندي‎ "ने  भारत   की  इस  गणना  विधि   को  इस्लामी  देशों  में  फैला  दिया   ,  जिसे  सभी   ने  अपना   लिया  . यह  भी   वैदिक  संस्कृति  की  देन है   , इस विधि  को " निज़ाम अल अदद अल  हिंदी अल  अरबी  -   نظام العد الهندي العربي  " कहा   जाता     है

6-Iजन्नत में  भारतीय  मसाले 
वैदिक  संस्कृति  काफी  प्राचीन   और  व्यापक   है  ,इसमे  धर्म   ,  भाषा  , शिष्टाचार  ,  परम्परा  के अतिरिक्त  भोजन  भी  सम्मिलित   है   ,    भारत के लोग  भोजन   के अनेकों  प्रकार  के  मसालों और  औषधीय पदार्थों    का  प्रयोग   करते   हैं    ,  लेकिन   बहुत  काम लोग  जानते  होंगे  कुछ  ऐसे   भारतीय  मसाले हैं   , जिनका   प्रयोग   मुसलमानों   का  अल्लाह   जन्नत में  शराब   बनाने  में   इस्तेमाल  करेगा  ,  और जन्नत में  वही  शराब   पिलायी  जायेगी .ऐसी   तीन  चीजों   का  उल्लेख   कुरान  में    है


1-जिन्जिबील -अदरक 
संस्कृत   में  अदरक  को  'श्रंगवेर ' भी  कहा  गया  है . और  यही शब्द ग्रीक भाषा में ' जिन्जीबरिस zingيberis (ζιγγίβερις).हो गया .फिर अंगरेजी  में "जिंजर Ginger "    होगया .और  इसी  को  अरबी में  "  जिन्जिबील  زنجبيل  "    कहा  गया  है ,वनस्पति  शाश्त्र  में  इसका नाम  " Zingiber officinale,  " है .मूलतः  यह शब्द  तमिल भाषा  के शब्द  "  इंजी இஞ்சி    " और " वेर வேர் "   से  मिल  कर बना  है .जिसका  अर्थ  सींग  वाली  जड़  होता है .और  अदरक  को सुखाकर  ही  "सौंठ "   बनायीं  जाती  है .जिसका  प्रयोग अल्लाह  जन्नत  में  शराब  में  मिलाने  के लिए  करता  है .   इसलिए  कुरान  में  कहा  है ,

"और वहां   उनको ऐसे  मद्य  का  पान  कराया  जायेगा   जो जंजबील  मिला  कर तय्यार  किया गया  हो " सूरा -अद दहर 76:17

"وَيُسْقَوْنَ فِيهَا كَأْسًا كَانَ مِزَاجُهَا زَنْجَبِيلًا"76:17

And in that [paradise] they will be given to drink of a cup flavoured with ginger, (76:17)

नोट -कुरान  के  हिंदी अनुवाद  में  इस आयत का  खुलासा    करते हुए  बताया है ,जन्नत में  शीतलता  होगी . और जन्जिबील   का तासीर  और गुण गर्म  होता है और वह  स्वादिष्ट  भी होता है ,और उसके  मिलाने से  मद्य   आनंद  दायक   हो जाता है '
 (हिंदी  कुरान .मकताबा   अल हसनात ,पेज 1110 टिप्पणी 11)

2-काफूर - कपूर 

संस्कृत  में   इसे  " कर्पूर "कहा  जाता  है . और  भारत की सभी भाषाओँ  के साथ  फारसी , उर्दू  में यही नाम   है .  अंगरेजी   में "Camphor '   है .और वनस्पति शाश्त्र में  इसका नाम " सिनामोमस कैफ़ोरा (Cinnamomum camphora, हैयह एक वृक्ष से प्राप्त किया जाता है .भारत में यह देहरादून, सहारनपुर, नीलगिरि तथा मैसूर आदि में पैदा किया जाता है.लगभग 50 वर्ष पुराने वृक्षों के काष्ठ आसवन (distillation) से कपूर प्राप्त किया जाता है.भारत में   कपूर  का उपयोग  दवाइयों  , सुगंधी  और  धार्मिक  कामों   के  लिए  किया  जाता है . लेकिन अल्लाह   जन्नत में  कपूर का प्रयोग   शराब  में   मिलाने के लिए  करता  है ,  कुरान में  कहा है ,

"और  वह  ऐसे  मद्य  का  पान  करेंगे जो कपूर  मिला कर  तय्यार किया  होगा "सूरा -अद दहर 76:5

"إِنَّ الْأَبْرَارَ يَشْرَبُونَ مِنْ كَأْسٍ كَانَ مِزَاجُهَا كَافُورًا "76:5

(they shall drink  of   cup whereof mixture    of   Kafur )

नोट -इस आयत   की व्याख्या में  कहा है ,वह  कपूर अत्यंत  आनंदप्रद ,  स्वादिष्ट ,शीतल , और सुगन्धित  होगा और जोजन्नत का आनंद लेने वाले   होंगे  उन्हीं  को मिलेगा
(कुरान  हिंदी  पेज  1109 टिप्पणी  3)
3-मुस्क - कस्तूरी 

यद्यपि  कुरान  में  कस्तूरी  शब्द  नहीं  आया  है ,कस्तूरी  मृगों  से  जो सुगन्धित  पदार्थ  मिलता  है ,यूनान तक  निर्यात होता था .और ग्रीक  भाषा  कस्तूरी  को " Musk " कहा जाता है ,कस्तूरी  मृग  को  "Musk Deer "  कहते हैं  , और अरबी  में "  المسك الغزلان    " कहते है  . वैज्ञानिक भाषा  में     इसका नाम   " Moschus  Moschidae  "है . ग्रीक  भाषामे  कस्तूरी मृग  के लिए प्रयुक्त  इसी मुस्क   शब्द  को  कुरान   में  लिया  गया है ,
कस्तूरी  मृग    लुप्तप्राय  प्राणी है  ,जो  हिमालय क्षेत्र  में मिलता  है .उसकी  ग्रंथियों से  जो  स्राव  निकालता है  उसी को कस्तूरी   कहते हैं  .जो दवाई , और  सुगंधी  में काम  आती  है . लेकिन अल्लाह   इसे भी  शराब   उद्योग में   इस्तेमाल  कर लिया  ,  कुरान  में लिखा है ,
"उन्हें खालिस शराब पिलायी जायेगी ,जो मुहरबंद होगी .और मुहर उसकी मुश्क की होगी " सूरा -अल ततफ़ीफ़ 83:25-26
"يُسْقَوْنَ مِنْ رَحِيقٍ مَخْتُومٍ "83:25

"خِتَامُهُ مِسْكٌ وَفِي ذَٰلِكَ فَلْيَتَنَافَسِ الْمُتَنَافِسُونَ " 83:26

They will be given a drink of pure wine whereon the seal , (25)pouring forth with a fragrance of musk.  (26)

नोट - इन आयतों में हिंदी कुरान में कहा है कि मनुष्य को उसी शराब की इच्छा करना चाहिए जो अल्लाह ने बनायी गयी है (.पेज 1139 टिप्पणी 11)

निष्कर्ष -कुरान से प्रमाणित इस सभी पुख्ता सबूतों से सिद्ध होता है कि अगर मुसलमान जन्नत भी चले गए तो वहां भी अल्लाह को भारत के इन तीनों मसालों की जरुरत पड़ेगी .जो उसे भारत से ही मंगवाना पड़ेंगी . क्योंकि यह वस्तुएं अरब में पैदा नहीं होती .और यदि अल्लाह ऐसा नहीं करेगा तो कुरान दिया गया उसका वादा झूठ साबित हो जायेगा .
इसलिए हमारा उन सभी भारत विरोधी जिहादियों से इतना ही कहना ही कि जब जन्नत में भी अल्लाह को भारतीय मसालों की जरुरत पड़ेगी तो स्वर्ग जैसे इस भारत को बर्बाद क्यों करना चाहते हो ?क्योंकि हमारे लिए तो हमारी जन्मभूमि ही जन्नत से भी महान है !
नोट-लेख  संख्या   -200 /87 दिनांक  29 /1 /2013   फे  बुक  31 /03 /2013


अब  मुस्लिम पर्सनल बोर्ड  के मुल्ले बताएं  की वह  वैदिक  कल्चर  की  पैदायश  इन   चीजों  को   छोड़ने  की  हिम्मत  करेंगे   ,  और  अल्लाह से दुआ करेंगे  कि  हमें  जन्नत  नहीं   चाहिए क्योंकि  वहां  भारतीय  चीजों  से बनी  शराब     मिलेगी   . 




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रविवार, 7 जून 2015

भगवान राम की बहिन की उपेक्षा क्यों ?

यह  हिन्दू  समाज   की  अज्ञानता     नहीं   तो  और  क्या  है ,कि  जिस राम  के नाम  से   हिन्दू धर्म   टिका   हुआ है   ,  लगभग  90  प्रतिशत   हिन्दू  भगवान  राम  की   बड़ी  सगी  बहिन   शांता  और  उनके  पति श्रृंगीऋषि  के बारे में   नहीं   जानते  ,   और   यह   उन  हिन्दू  आचार्यों   का   शांता  के प्रति उपेक्षा  भाव  नहीं    है   जो  ऐरे गैरे      देवी   देवताओं   की  जगह  जगह   मूर्तियां  और   मंदिर   बनवा   देते हैं   ,  लेकिन  राम की बहिन  शांता   का  भारत में    मात्र   एक   ही  मंदिर   बनवा  पाये   , हिन्दुओं  में  राम  की  बहिन  शांता    के बारे में अनभिज्ञता  का  असली  कारण  मुग़ल  बादशाह   अकबर  के  समय  तुलसी  दास  द्वारा  रामचरित   मानस   है  , जिसे  कथावाचक गा  गा  कर  लोगों   को  सुनाते रहते हैं    , और  लोग  उसी को   राम का इतिहास   समझ लेते हैं  ,  लोग   महर्षि  वाल्मीकि  द्वारा  लिखित "रामायण "  इसलिए नहीं  पढ़ते  क्योंकि   वह  संस्कृत में   है  , और  उसको  सुनाने    में   पंडितों  को  कमाई  नहीं  होती  .  जबकि   वाल्मीकि  रामायण   प्रामाणिक   इतिहास  है

1 - वाल्मीकि  रामायण   प्रामाणिक  क्यों है 
वाल्मीकि   रामायण  को   प्रामाणिक  . विश्वनीय  और  राम सम्बंधित  ऐतिहासिक  धार्मिक ग्रन्थ  इसलिए  माना   जाता   है  , क्योंकि  वाल्मीकि  राम  के  समकालीन  थे  , और  उन्हीं के  आश्रम  में  ही  राम  के पुत्र लव  और कुश   का  जन्म   हुआ था  ,और  राम  के बारे में जो भी  जानकारी  उनको मिलती  थी  यह  रामायण  में  लिख  लेते  थे  ,  रामायण  इसलिए  भी  प्रामाणिक   है   की   वाल्मीकि  रामायण  के  उत्तर काण्ड  के  सर्ग 94  श्लोक  1  से 32  के  अनुसार  राम के  दौनों  पुत्र  लव  और कुश  ने   राम  के  दरबार  में  जाकर  सबके  सामने  रामायण   सुनाई  थी  ,  जिसे राम  के  सहित  सभी  ने  सुना था 


2-राम  की  बहिन  होने  का  प्रमाण  

जो  लोग  राम  की बहिन  होने  पर  शंका   करते  हैं   , वह  वाल्मीकि  रामायण   के   बालकांड  इन   श्लोकों   को   ध्यान  से पढ़ें  , इनका हिंदी  और  अंगरेजी  अर्थ    दिया गया  है


इक्ष्वाकूणाम् कुले जातो भविष्यति सुधार्मिकः |
नाम्ना दशरथो राजा श्रीमान् सत्य प्रतिश्रवः || काण्ड 1 सर्ग 11 श्लोक 2

अर्थ - ऋषि   सनत  कुमार    कहते  हैं  कि  इक्ष्वाकु   कुल   में  उत्पन्न दशरथ   नाम  के   धार्मिक  और  वचन  के पक्के  राजा  थे  ,

"A king named Dasharatha will be born into Ikshwaku dynasty who will be very virtuous, resplendent and truthful one to his vow." [Said Sanat Kumara, the Sage.] [1-11-2]

अङ्ग राजेन सख्यम् च तस्य राज्ञो भविष्यति |
कन्या च अस्य महाभागा शांता नाम भविष्यति || काण्ड 1 सर्ग 11 श्लोक 3

अर्थ - उनकी  शांता   नामकी  पुत्री     पैदा हुई   जिसे  उन्होंने अपने मित्र   अंग  देश   के  राजा  रोमपाद  को   गोद   दे दिया  , और  अपने  मंत्री  सुमंत  के कहने पर उसकी शादी श्रृंगी ऋषि   से  तय   कर दी  थी   ,


Shanta is  the daughter of Dasharatha and given to Romapada in adoption, and Rishyasringa marries her alone. This is what Sumantra says to Dasharatha at 1-9-19.

अनपत्योऽस्मि धर्मात्मन् शांता भर्ता मम क्रतुम् |
आहरेत त्वया आज्ञप्तः संतानार्थम् कुलस्य च || काण्ड 1 सर्ग 11 श्लोक 5


Then king Dasharatha says to king of Anga "oh, righteous one, I am childless and hence I intend to perform a Vedic ritual. Let the husband of your daughter Shanta, Sage Rishyasringa, preside over that Vedic ritual at you behest, for the sake of progeny in my dynasty. [1-11-5]

अर्थ -तब   राजा   ने   अंग  के  राजा  से  कहा कि मैं   पुत्रहीन  हूँ  , आप शांता और उसके  पति  श्रंगी ऋषि   को  बुलवाइए मैं  उनसे पुत्र  प्राप्ति  के लिए  वैदिक  अनुष्ठान    कराना  चाहता  हूँ  ,

श्रुत्वा राज्ञोऽथ तत् वाक्यम् मनसा स विचिंत्य च |
प्रदास्यते पुत्रवन्तम् शांता भर्तारम् आत्मवान् || काण्ड 1 सर्ग 11 श्लोक 6

"On hearing those words of king Dasharatha that benevolent soul Romapada, the king of Anga, considers heartily and agrees to send the one who endows progeny by rituals, namely Sage Rishyasringa his son-in-law. [1-11-6]

अर्थ -दशरथ की  यह   बात  सुन   कर अंग  के राजा  रोमपाद  ने  हृदय  से   इसबात को   स्वीकार   किया ,और  किसी   दूत  से  श्रृंगीऋषि को  पुत्रेष्टि  यज्ञ  करने  के लिए  बुलाया

आनाय्य च महीपाल ऋश्यशृङ्गं सुसत्कृतम्।
प्रयच्छ कन्यां शान्तां वै विधिना सुसमाहित: काण्ड 1सर्ग 9 श्लोक 12
अर्थ -श्रंगी ऋषि  के  आने  पर  राजा   ने उनका  यथायोग्य   सत्कार  किया और   पुत्री शांता  से  कुशलक्षेम  पूछ  कर   रीति  के अनुसार  सम्मान किया

अन्त:पुरं प्रविश्यास्मै कन्यां दत्त्वा यथाविधि।
शान्तां शान्तेन मनसा राजा हर्षमवाप स:।।काण्ड 1 सर्ग10  श्लोक 31

अर्थ -( यज्ञ   समाप्ति  के  बाद ) राजा  ने शांता   को     अंतः पर  में  बुलाया  और और   रीति  के  अनुसार  उपहार     दिए  ,   जिस से  शांता  का मन    हर्षित  हो   गया .

 वाल्मीकि रामायण  के  यह  प्रमाण   उन  लोगों   की  शंका   मिटाने  के लिए  पर्याप्त  हैं  ,  जो  लोग मान  बैठे  है  ,कि  राम  की  कोई   भी बहिन   नहीं  है , वाल्मीकि  रामायण  के  अतिरिक्त   अन्य धार्मिक   और  ऐतिहासिक   ग्रंथों   में  राम  की बहिन   शांता  के बारे में  जो  भी  लिखा  है उसे  एकत्र  करके  एक  लेख   के  रूप   में  "Devlok, Sunday Midday, April 07, 2013  "ने  प्रकाशित   किया  था  ,  उसका  सारांश   यह   है  ,

3- कथा  भगवान राम की बहन "शांता" की

श्रीराम के माता-पिता, भाइयों के बारे में तो प्रायः सभी जानते हैं लेकिन बहुत कम लोगों को यह मालूम है कि राम की एक बहन भी थीं जिनका नाम शांता था। वे आयु में चारों भाइयों से काफी बड़ी थीं। उनकी माता कौशल्या थीं। राजा दशरथ और कौशल्या की पुत्री थी शांता . एक बार अंगदेश के राजा रोमपद और उनकी रानी वर्षिणी अयोध्या आए। उनके कोई संतान नहीं थी। बातचीत के दौरान राजा दशरथ को जब यह बात मालूम हुई तो उन्होंने कहा, मैं मेरी बेटी शांता आपको संतान के रूप में दूंगा।रोमपद और वर्षिणी बहुत खुश हुए। उन्हें शांता के रूप में संतान मिल गई। उन्होंने बहुत स्नेह से उसका पालन-पोषण किया और माता-पिता के सभी कर्तव्य निभाए।उनका विवाह कालांतर में शृंग ऋषि से हुआ था। कश्यप ऋषि  पौत्र थे शृंग ऋषि .
4-शृंग ऋषि का आश्रम
बाद में ऋष्यशृंग ने ही दशरथ की पुत्र कामना के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया था। जिस स्थान पर उन्होंने यह यज्ञ करवाये थे वह अयोध्या से लगभग 39 कि.मी. पूर्व में था और वहाँ आज भी उनका आश्रम है और उनकी तथा उनकी पत्नी की समाधियाँ हैं।
हिमाचल प्रदेश में है शृंग ऋषि और देवी शांता का मंदिर ,हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में शृंग ऋषि का मंदिर भी है। कुल्लू शहर से इसकी दूरी करीब 50 किमी है। इस मंदिर में शृंग ऋषि के साथ देवी शांता की प्रतिमा विराजमान है। यहां दोनों की पूजा होती है और दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
शृंग ऋषि का मंदिर 

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5- अयोध्या  में राममंदिर  तभी बन पायेगा 

भारत   के  सभी   हिन्दू  संगठन  अयोध्या   में  राम  जन्म  भूमि  पर  एक  भव्य  मंदिर  बनवाने  के लिए   बरसों   से  प्रयास  करते  आये  हैं  ,लेकिन  किसी न किसी   कारण   से  पूरी   सफलता  नहीं   मिल   सकी  ,  मेरा   निजी   मत  है  कि  अयोध्या  में  जिस   जगह  राम  मंदिर  बनवाने की  योजना  है   यदि , वहीँ    राम  की   बहिन  शांता   की  मूर्ति   भी  स्थापित   कर  दी  जाये  तो   राम मंदिर   की सभी   अड़चनें      एक हफ्ते  में  दूर  हो जाएंगी  ,  क्योंकि   जो   राम   का  जन्म  स्थान  है  , वाही   राम  की  बड़ी  बहिन   शांता   का भी   है   ,  जिसके  आशीर्वाद  से राम का जन्म  हुआ  था  ,  और
हिन्दू जब  तक राम की  बहिन की उपेक्षा  करते  रहेंगे  अयोध्या  में  राम  मंदिर   नहीं  बन  सकेगा   




बुधवार, 27 मई 2015

अब जन्नत के लालचियो अपना सिर पीटो !!

मुसलमानों   की  जन्नत  कहाँ  है  ?  यहाँ   से कितनी  दूर   है  ? कितनी   बड़ी   है  ? इन  सवालों  का  जवाब   कुरान    और  हदीसों   में नहीं  मिलता  .  और  न  कोई मुल्ला   इनका  सही  जवाब  दे सकता   है   . मुसलामानों   ने  इसी  कल्पित   जन्नत  में  वर्णित  अय्याशी  के  लालच    में  जिहाद   करके    करोड़ों    निर्दोष  लोगों  को मौत   के घाट   उतार दिया  .  फिर भी  जिहादी   आतंक     नए नए  रूपों    में  फैलता    जा   रहा   है   . क्योंकि   हरेक  मुसलमान  जन्नत में जाने की  इच्छा   रखता   है  .
इस समय   पूरे   विश्व   में  मुसलमानों    की संख्या  लगभग  160  करोड़ ( 1.6 billion  )   है  . जो   सभी    जन्नत के  सपने     देख   रहे  हैं   .  लेकिन   इस   हदीस को  पढ़   कर   उनके  सपने  चकनाचूर   हो   जायेंगे   , और   वह  और    वह    निराश  होकर  अपना    सिर पीटने  लगेंगे   . क्योंकि   इन  हदीसों   के  अनुसार  केवल सत्तरहजार (70000  )   मुसलमान   ही  जन्नत में   जाएंगे , यह  दौनों   प्रामाणिक  हदीसें    इस  प्रकार  हैं   ,

पहली   हदीस   सही  बुखारी  से 
"इब्ने अब्बास   ने  कहा   कि  रसूल   ने  कहा  है कि  अल्लाह  ने  मेरे सामने से  एक एक कर के सभी  उम्मतों   को   पेश   किया    . तो  मैंने देखा  कि ऐसे   कई नबी  थे   जिनके   केवल   एक  या  दो   ही  अनुयायी  थे   . और  एक नबी  तो  ऐसे थे   कि  जिनका  एकभी  अनुयायी   नहीं  था .तभी  क्षितिज   से  एक  बहुत   बड़ी  भीड़  आती  हुई  दिखाई  दी  , मैंने पूछा कि  क्या  यह  मेरी  उम्मत है  ? तो जवाब  आया  नहीं  ,  यह  तो  मूसा की  उम्मत है  .और   कहा   गया कि  देखो  इस  भीड़  से सारा    क्षितिज भर गया   है  .
. फिर कहा गया  कि   देखो  यह  तुम्हारी  उम्मत   है ,जिनमे  से केवल  सत्तर  हजार  (70000 )    लोग   ही   जन्नत   में दाखिल   होंगे 

"، ثُمَّ قِيلَ لِي انْظُرْ هَا هُنَا وَهَا هُنَا فِي آفَاقِ السَّمَاءِ فَإِذَا سَوَادٌ قَدْ مَلأَ الأُفُقَ قِيلَ هَذِهِ أُمَّتُكَ وَيَدْخُلُ الْجَنَّةَ مِنْ هَؤُلاَءِ سَبْعُونَ أَلْفًا بِغَيْرِ حِسَابٍ، "

Narrated Ibn `Abbas:
Allah's Messenger  said, 'Nations were displayed before me; one or two prophets would pass by along with a few followers. A prophet would pass by accompanied by nobody. Then a big crowd of people passed in front of me and I asked, Who are they ?Are they my followers?" It was said, 'No. It is Moses and his followers It was said to me, 'Look at the horizon.'' Behold! There was a multitude of people filling the horizon. Then it was said to me, 'Look there and there about the stretching sky! Behold! There was a multitude filling the horizon,' It was said to me, 'This is your nation out of whom seventy thousand shall enter Paradise .

Bukhari-Vol. 7, Book 71, Hadith 606

दूसरी  हदीस  जामए  तिरमिजी   से 

"इब्ने बुरैदा   ने   कहा कि  मेरे पिता   ने  बताया   है  ,कि  रसूल   ने कहा है  " जन्नत  में  जाने वालों   की   एक सौ बीस   ( 120 )  पंक्तियाँ   होंगी  . जिनमे  अस्सी  ( 80) पंक्तियाँ   मेरी  उम्मत  की  होंगी   .  और  बाकी  चालीस  (40 )    पंक्तियाँ  दूसरे  नबियों   की उम्मत  की   होंगीं  "


"أَهْلُ الْجَنَّةِ عِشْرُونَ وَمِائَةُ صَفٍّ ثَمَانُونَ مِنْهَا مِنْ هَذِهِ الأُمَّةِ وَأَرْبَعُونَ مِنْ سَائِرِ الأُمَمِ ‏"


"The people of Paradise are a hundred and twenty rows, eighty of them are from this nation, and forty are from the rest of the nations."


 Jami` at-Tirmidhi-Vol. 4, Book 12, Hadith 2546
Arabic reference : Book 38, Hadith 2743

तीसरी   हदीस  इब्ने  माजा  से 

"रसूल   ने  कहा है  कि   अल्लाह    ने  मुझ   से  वादा   किया  है  ,  कि मेरी   उम्मत के  सत्तर   हजार  लोग (मुसलमान  )   जन्नत में  जाएंगे  ,  और उन  से (उनके  कर्मों का ) कोई  हिसाब   नहीं  लिया   जाएगा   "


"وَعَدَنِي رَبِّي عَزَّ وَجَلَّ أَنْ يُدْخِلَ الْجَنَّةَ مِنْ أُمَّتِي سَبْعِينَ أَلْفًا بِغَيْرِ حِسَابٍ "

"my Lord has promised me that seventy thousand of my nation will enter Paradise without being brought to account. "


 Sunan Ibn Majah-Book 37, Hadith 4426

जन्नत के   लालची  हत्यारे   आतंकी   जिहादियों    को इन   हदीसों  कहे गए  रसूल    के  कथन  को   ध्यान  से    पढ़  लेना चाहिए   कि  इन  हदीसों  में जन्नत   में जाने वाले  लोगों   की  संख्या    साफ़  साफ    सत्तर  हजार   बतायी   गयी   है   ,  इसका   मतलब  है कि  इस्लाम   के जन्म से  लेकर क़ियामत तक   जितने भी   मुसलमान   मर  चुके  और  भविष्य   में  मरेंगे  उन सभी  में से  केवल  सत्तर   हजार ही  जन्नत    में  जाएंगे   . बाकि   सब  जहन्नम  में जायेंगे  .

 इसलिए   आजकल  के  मुसलमान   हिसाब   लगा   कर  देखें   कि  इस  समय   विश्व   में  मुसलमानों    की  संख्या  लगभग  एक  सौ साठ  करोड़    है   .  और   किसी   कारण   से   सभी  मर  जाएँ   तो  उन  में से  केवल   सत्तर हजार  ही  जन्नत में जा सकेंगे  . यानी  मुसलमानों की  वर्त्तमान  संख्या  का केवल 0.00437%  ही  जन्नत      देख   सकेगा   , चाहे वह   कितनी भी   नमाजें  पढ़े ,  कितने  भी  जानवर   मार कर  खा जाये   ,  कितने भी  निर्दोष लोगों  की   जिहाद के बहाने     हत्या  कर  डाले , सत्तर  हजार   से   अधिक एक भी  आदमी  जन्नत में  नहीं  घुस   पायेगा    . खुद रसूल   उनको  धक्का  मार कर  बाहर  फेंक   देंगे  .

इसलिए  इस झूठी   जन्नत    का  चक्कर   छोड़   कर  मानवता    के काम     करके  इसी  पृथ्वी    को  जन्नत   बनाना    ही  धर्म   समझें   
   


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