गुरुवार, 10 जनवरी 2019

बाँसुरी बजाने वाले रसूल !

संगीत को भी ईश्वर को प्रसन्न करने और आत्मिक शांति का साधन माना जाता है .विश्व के लगभग सभी धर्मों में सगीत के वाद्यों के साथ ईश्वर की स्तुति गाने की परंपरा है .दुनिया में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसे संगीत या गाने बजाने से नफ़रत होगी .लेकिन मुहम्मद साहब एक इसके अपवाद थे . जिनको संगीत से इतनी चिढ हो गयी थी कि उसे हराम कर दिया था .जिसका कोई तर्कपूर्ण कारण नहीं मिलता.
चूंकि मुसलमान ऐसे मुहम्मद साहब का अनुसरण करते है ,जिनकी कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर है .क्योंकि वह जो कहते थे उसके विपरीत काम करना उनकी आदत थी .
मुहम्मद साहब ने गाना इसलिए हराम कर दिया था , क्योंकि उनकी आवाज . भर्राती हुई और फटी हुई थी .लेकिन उन्होंने जब किसी संगीत के वाद्य को हराम किया तो , वह खुद ही खूठे साबित हो गए .प्रमाण देखिये .
1-संगीतकार नबी राजा दाउद 
मुसलमान अल्लाह की चार किताबें , तौरैत , जबूर, इंजील और कुरान मानते हैं . और अल्लाह ने जबूर नामकी किताब इस्राएल के राजा दाउद को प्रदान की थी . जो इब्रानी भाषा में थी .जबूरزبور‎  को अंगरेजी में Pslam यानि स्तुति "praises" और हिब्रू में ( Tehillim, תְהִלִּים )कहते हैं .यह किताब बाइबिल के पुराने नियम में आज भी मौजूद है . इसमें 150 भजन हैं . जो हिब्रू के " कीना" नाम के छंद में हैं .इसे संगीत वाद्यों के साथ गाया जाता था .दाउद को अंगरेजी में David और हिब्रू में दविद (  דָּוִיד) कहा जाता है .इनका समय ई ० पू .1040–970 BC,है उस समय अल्लाह को संगीत से नफ़रत नहीं थी , क्योंकि अल्लाह के नबी " दाउद "एक श्रेष्ठ संगीतकार थे . और उन्होंने कई संगीत के वाद्यों का अविष्कार भी किया था. हार्प Harp . तुरही Trumpet ,ढपली आदि प्रमुख हैं .इसके अलावा राजा दाउद बांसुरी ( Flute ) भी अच्छी तरह से बजाया करते थे . और उसमे कई राग भी निकल सकते थे
और जब वह यरूशलेम के मंदिर में होने वाले भजनों में अन्य वाद्यों के साथ अपनी बांसुरी भी बजाते थे तो उपस्थित लोग मंत्रमुग्ध हो जाते थे .
इसके बारे में बाइबिल में यह लिखा है ,
सभी पुजारी राजा दाउद द्वारा बनाये गए वाद्यों लेकर राजा के साथ खड़े हो गए .और यहोवा की स्तुति गाकर उसका धन्यवाद करने लगे "
2 इतिहास 7 :6 
तब यहोवा का स्तुतिगान प्रारंभ हो गया . और इस्राएल के राजा दाउद के बनाये वाद्य बजने लगे .और उनके साथ दाउद भी अपनी बांसुरी (Flute ) बजाता रहा .और फूंकने वाले भी अपनी तुरहियाँ फूँकते रहे "
2 इतिहास 29 :26 -27 
तुम भी राजा दाउद की तरह बांसुरी के साथ सारंगी से अपनी बुद्धि से तरह तरह के राग निकालो " आमोस -6 :5 
2-दाउद का ईश्वरीय संगीत .
कहा जाता है कि नबी दाउद ईश्वर कि स्तुति में जो सगीत वाद्य बजाते थे यसका प्रभाव केवल मनुष्यों पर ही नहीं जड़ चेतन सभी पर होता था.यहाँ तक पक्षी भी संगीत सुनने के किये दाउद के पास जमा हो जाते थे . यह खुद कुरान बताती है ,
हमने दाउद को महानता प्रदान की , और पर्वतों से कहा उसके साथ भजन गायें, फिर चिड़ियों ने भी उसका साथ दिया "सूरा -सबा 34 :10 
जब दाऊद बजाते थे , तो चिड़ियाँ इकट्ठी हो जाती थीं , और गाने लगती थीं " सूरा -साद 38 :19 
3-दाउद की बांसुरी  मिल गयी 
चूँकि मुहम्मद साहब जगह जगह जिहाद करते रहते थे , और खुद को अल्लाह का अंतिम रसूल मानने के कारण जोभी कीमती चीज लूट में मिल जाती थी उस में जो भी महत्वपूर्ण होती थी अपने पास रख लेते थे . उनको दाउद    की बांसुरी कैसे और कहाँ से मिली . इसके बारे में हदीस में विस्तार से नहीं लिखा है .लेकिन इस एक प्रमाणिक हदीस से पता चलता है कि मुहम्मद साहब के हाथों दाउद की बांसुरी लग गयी थी .यह बिलकुल सही हदीस है , जिसे इमाम बुखारी ने नक़ल किया है , इसलिए हिंदी के साथ अरबी और अंगरेजी भी दी जा रही है ,

"Narrated Abu Musa: That the Prophet said to him' "O Abu Musa! we have been given one of the musical wind-instruments of the family of David .'

अबू मूसा ने कहा , कि एक दिन रसूल ने बताया हे अबू मूसा मुझे दाउद के घर से एक  मुंह से फूंक कर बजाने वाला वाद्य ( बांसुरी ) मिला है "


"وروى أبو موسى: أن النبي قال له: "يا أبا موسى لقد أعطيت أنت واحدة من الأدوات الموسيقية الرياح من عائلة داود   "

    बुखारी - जिल्द 6 किताब 61 हदीस 568 

4-रसूल बांसुरी बजाते थे .
क्योंकि हमें पता है कि कुतर्क करना , अर्थ का अनर्थ करना , सत्य से इंकार करना मुसलमानों का स्वभाव है . और वह इस हदीस को भी गलत साबित करने का प्रयास करेंगे .लेकिन इस हदीस की व्याख्या से उनका भ्रम दूर हो जायेगा .इसमे साफ लिखा है , कि मुहम्मद साहब में दौड़ कि बांसुरी धरोहर की तरह छुपा कर नहीं रख लिया था . बल्कि उसे बजाकर कुरान का संगीत भी निकलते थे ,
इसलिए इसी हदीस की तफ़सीर देखिये .Explaning-

"He is saying Abu Musa has a beautiful voice for reciting Qur'an. and Prophet liked  to beautiful Qur'anic recitation on  the Flutes of David others as "musical wind-instruments of David" Notice the hadith below it speaking of  playing Qur'anic recitation  on flute .
इस हदीस की व्याख्या में दिया है कि अबू मूसा की आवाज बहुत ही मधुर थी . लोग उसकी  तुलना दाऊद की बांसुरी की ध्वनि से करते थे . इसलिए जब भी रसूल उस बांसुरी को फूंकते थे ,तो उस में से भी कुरान के पाठ जैसी आवाज निकलती थी .रसूल कहते थे मूसा , यह दाउद की बांसुरी कुरान का पाठ करती है.


"، فهو يقول أبو موسى لديه صوت جميل لتلاوة القرآن الكريم. بعض الناس الرجوع إلى تلاوة قرآنية جميلة كما في المزامير الآخرين ديفيد بأنها "آلات موسيقية الرياح داود" لاحظ الحديث تحته الحديث عن تلاوة القرآن الكريم. "


(Explanation -of Sahih Bukhari, Virtues of the Qur'an, Volume 6,

 ( البخاري، فضائل القرآن، المجلد 6 )

इस हदीस से सिद्ध हो जाता है कि इस्लाम में धर्म के नाम पर परस्पर विरोधी बातों का संग्रह कर दिया गया है . ताकि विरोधियों को जब चाहे जीसी न किसी नियम के अधीन फसा जा सके . और अपमे लोगों को बचा जा सके .जैसे जब मुहम्मद साहब ने संगीत , और संगीत के वाद्यों को हराम कर दिया है , तो दरगाहों में और मजारों पर कव्वालियाँ क्यों होती हैं ? और जब उसी अल्लाह ने अपने नबी दाउद को संगीत के वाद्यों से स्तुति करने की अनुमति दे राखी थी, तो महम्मद साहब ने सगीत को हराम क्यों कर दिया .? और जब हराम ही कर दिया तो खुद दाउद कि बांसुरी क्यों बजाने लगे .
अब तो रसूल का नाम " वंशी बजैया " रख देना चाहिए .

(200/46)

शनिवार, 8 दिसंबर 2018

मुसलमान भी हिन्दू नामों पर गर्व करते हैं ?

अरब   देश  इस्लाम   की  जन्मभूमि   है  ,  और  वहीँ  से इस्लाम पहले अरबी  भाषी  देशों  से  सारे देश  में  फ़ैल  गया  , इसलाम  की  दृष्टि  में  अन्य  सभी  धर्म निकृष्ट  और  अमान्य   हैं   ,  सिर्फ इस्लाम  ही  सच्चा  धर्म  है  ,  इस्लाम  गैर मुस्लिमों  को  काफिर   मानता है  ,  इस्लाम  का उद्देश्य गैर   मुस्लिमों  को  मुसलमान   बनाना  है  ,  और  जहाँ  भी  मुसलमानों  की हुकूमत  होती   है  , मुसलमान  उस जगह  से गैर मुस्लिमों  की हरेक  निशानी  नष्ट  कर  देते  हैं  , यहाँ  तक जब   वह  किसी   को  मुसलमान  बनते  हैं  ,  तो  सबसे  पहले  उसका  इसलामी   नाम  रख  देते   हैं   , आज भारत में  जितने   भी मुसलमान  है  , उनके  पूर्वज  कभी  हिन्दू  ही  थे  ,लेकिन  इन  मुसलमानों  के  नामों   में हिन्दू  बोधक  कोई  शब्द   नहीं  है    , 
 परन्तु   बहुत  कम  लोग जानते  होंगे  की   इस्लाम  से  काफी  पहले  अरब  लोगों  में बच्चों  के ऐसे   नाम  रखना  इज्जत  की  बात  मानी   जाती  थी   जो भारत "  अल  हिन्द -  " हिन्दू  जाति " अल  हिन्दू  -  "  के  द्योतक  हों  , सुखद  आश्चर्य  तो  यह   है  कि   अरबी  मुसलमानों  में  तब से  लेकर  आजतक  हिन्दू   बोधक  नामों  की  परंपरा  अक्षुण्ण   है .


1-अरबी  इतिहास में  हिन्दू   नाम 

अरबी  इतिहास में  सबसे   मुख्य  हिन्दू  नाम  " शैव्यः - شيبة  "  यह  मुहम्मद   साहब  के  दादा (Grand Father)  के  पिता  थे   , और  काबा  के पुजारी  थे  ,

दूसरा  नाम "हिन्द - هند "  है  , इसका  अर्थ  भारती  होता   है  ,  इसे "हिन्दुल   हिनूद -  هند الهنود  " भी   कहा   जाता   है  ,  यह  उतबा  की बेटी  और रिस्ते में  मुहम्मद  साहब  की  सास (mother in llaw )   थी  , क्योंकि  इसी  की  बेटी  " रमला -رملة  "  रसूल   की  पत्नी   थी   ,  " हिन्द  "  कवि  होने के साथ    योद्धा भी   थी   , और  जब  सन  636 ई ०  में  ईसाइयों  और  अरबों  में "यरमूक -اليرموك  " नामकी  जगह  युद्ध  हुआ  था   ,  तो  हिन्द ने अपने  लोगों  का  हौसला   बढ़ने  के  लिए जो  कविता  सुनाई   थी   ,  उसके  वह  अंश  दिए   जा  रहे   हैं   जिनमे  स्पष्ट  रूप  में  हिन्दू  शब्द   आया है  , कविता   यह  है   , 

"أتاك سهيل وابن حرب وفيهما رضاً لك يا هند الهنود ومقنع
وما منهما إلا يعاش بفضله وما منهما إلا يضر وينفع

"हे  भारत   के  बेटे  हिन्दुओ आगे आकर हमला   करो  , तुमने नाक में  दम  करने वाले  जिन  दो विरोधियों को ठिकाने  लगा  दिया   उस  से  मुझे   संतोष   हुआ  , "
2-वर्त्तमान   में  हिन्दू बोधक  नाम 

आज   भी अरब  और अरबी  भाषी  क्षेत्रों  के  लोग  लड़कों  के  नाम मोहन्नद (مهند, Mohannad) या मुहन्नद या मोहनद रख   कर   गर्व  महसूस  करते   हैं ,'मोहन्नद' नाम वास्तव में 'अल-हेन्द' यानि भारत (हिन्द) के नाम पर पड़ा है,इसे  अरबी   में "مهند‎) "लिखा जाता है   ,  परन्तु  अरबी  में  मात्राएँ  नहीं  होने  से इसे "Mhannad, Mohand, Mohanad, Mohanned, Mohaned, Muhannad, or Muhanned" भी  बोला जा  सकता  है  . याद  रखिये  इस शब्द  का  " मुहम्मद -محمّد   " शब्द  से कोई   सम्बन्ध  नहीं   , इसका सम्बन्ध  केवल   हिन्द ( भारत ) और  हिन्दुओं   से  है उदहारण  के लिए  कुछ  प्रसिद्द  वयक्तियों   के  नाम  और परिचय दिए   जा  रहे हैं 

अ- मुहिन्निद

 
1-मुहिन्निद महदी अल नदवी- Mohannad Mahdi Al-Nadawi  -(  مهند مهدی الندوی  )      (born 1975), Iraqi footballer

2- मुहिन्निद  नासिर- Mohannad Nassir- (   مهند ناصر   ) (born 1983), Iraqi footballer

3- मुहिन्निद इब्राहीम - Mohannad Ibrahim-   (   مهند إبراهيم علي إبراهيم‎  )born 1986), Syrian footballer

4-मुहिन्निद  महारमा -Mohannad Maharmeh ( مهند المحارمة  ) born 1986), Jordanian footballer

5-मुहिन्निद अब्दुल रहीम -   Mohannad Abdul-Raheem- ( مهند عبد الرحيم كرار  )     (born 1993), Iraqi footballer

इसी  से   मिलता  जुलता  नाम "मुहिन्नद"(Muhinnad) है , जो अरबी में एक जैसे  लिखें जाते हैं  ,लेकिन उच्चारण में  थोड़ा अंतर है ,जैसे ,

 ब -  मुहिन्नद     

 1-मुहिन्नद सैफुद्दीन -   Muhannad Saif El-Din-(مهند سيف الدين  )       (born 1980), Egyptian fencer
   
2-  मुहिन्नद   अल  ताहिर -  Muhannad El Tahir-  (مهند الطاهر   )  (born 1984), Sudanese footballer 

3-मुहिन्नद   नईम   - Muhannad Naim - ( مهند نعيم  )    (born 1993), Qatari footballer


 इसके अतिरिक्त  चौंकाने वाली   बात  यह   है कि अरबी भाषी  देशों में मुसलमानों  के हिंदू    द्योतक  उपनाम ( Surname) भी  पाये  जाते  हैं  ,जैसे,

स-उपनाम 
   
1-मुस्तफा अब्दुस्सलाम मुहिन्निद-Mustafل Abdelsalem Mohand -( مُصطفي عبدالسلام مُهِنَّد )    (born 1975), Spanish footballer

यह  सभी   नाम और  उपनाम जिन  से  हिन्दू  , जाति , हिन्दू धर्म  और   भारत का स्पष्ट  बोध  होता   है  , अरबी भाषी विभिन्न  देश इराक , मिस्र ,सीरिया  , लेबनान , जॉर्डन  और ,क़तर   से  लिए  गए   हैं . और यह  सभी  अपने इन  हिन्दू   बोधक  नामों   पर   गर्व  करते   हैं   , जबकि  भारत के मुसलमान   हिंदुत्व  बोधक   नाम  रखने को गुनाह  मानते  हैं   ,

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शुक्रवार, 19 अक्तूबर 2018

रसूल की भारतविरोधी भूतवाणी !

भविष्य में आगे होने वाली घटनाओं के बारे में पहले से ही जानकारी देने को "पूर्वकथन prediction " कहा जाता है .और इसी को "भविष्यवाणी Prophecy " भी कहा जाता है .विश्व में अनेकों ऐसे व्यक्ति हुए हैं ,जिन्होंने किसी न किसी आधार पर आगे होने वाली घटनाओं के बारे में सटीक वर्णन किया है . ऐसे लोगों को "भविष्यवक्ता " कहा जाता हैं .लेकिन किसी व्यक्ति की मौत के काफी बाद भी कोई दूसरा व्यक्ति उस मृतक के नाम से निराधार भविष्यवाणी करता है . और लोगों को गुमराह करता है ,तो हम उसकी बातों को भविष्यवाणी नहीं " भूतवाणी " कहेंगे .इस लेख में हम मुहम्मद की भूतवाणी का भंडाफोड़ कर रहे हैं . क्योंकि कुछ दिन पूर्व हमारे मित्रों ने बताया था कि पाकिस्तान का एक भारतविरोधी मुसलमान " जैद हामिद "मुहम्मद की कुछ हदीसों का हवाला देकर मुसलमानों को भारत के विरुद्ध जिहाद करने , आतंक फ़ैलाने और युद्ध के लिए उकसा रहा है .इसलिए यह लेख अत्यंत महत्त्वपूर्ण है .
1-मुहम्मद भविष्यवक्ता नहीं थे
पहले तो हमें यह बात समझना होगी कि जब खुद मुहम्मद को ही भविष्य में होने वाली घटनाओं का ज्ञान नहीं था , तो वह कोई भविष्यवाणी कैसे कर सकते थे . क्योंकि कुरान में कहा है ,
" हे नबी तुम लोगों से कह दो कि न तो मैं परोक्ष ( गैब -Unseen Future ) की बातें जानता हूँ , और न मैं कोई फ़रिश्ता हूँ 'सूरा अन आम 6:50
" हे नबी तुम कह दो कि यदि मैं परोक्ष की बातें(Knoledge of  unseen  जानता होता ,तो बहुत से फायदे बटोर लेता "सूरा -अल आराफ 7:188
" हे नबी जो लोग तुम से क़यामत के आने का समय पूछते हैं ,तो कह दो इसका ज्ञान सिर्फ अल्लाह को है , मुझे नहीं " सूरा -अहजाब 33:63
2-भारत पर जिहादी हमले क्यों 
भारत सरकार सेकुलरिज्म के नाम पर मुस्लिम देशों से चाहे जितनी मित्रता दिखाए , और पाकिस्तान से चाहे जितने शांति समझौते कर डाले , और चाहे देश के सभी हिन्दुओं को आतंकी घोषित करके जेल में बंद कर दे . लेकिन इस्लामी आतंक तब तक बंद नहीं होगा , जब तक भारत में इस्लामी शरीयत लागू नहीं होती .यानि भारत इस्लामी देश नहीं बन जाता .क्योंकि कुछ मक्कार मुल्लों ने पाकिस्तान सहित भारत में यह बात फैला रखी है ,कि मुहम्मद साहब ने भविष्यवाणी की थी ,एक दिन भारत पर मुसलमान जिहादी हमला करेंगे , और भारत से युद्ध करके इस्लामी हुकूमत कायम कर देंगे .इसलिए हरेक मुसलमान का फर्ज है कि वह रसूल की इस भविष्यवाणी को पूरा करें ,
यही कारण कि भारत पर होनेवाले हरेक हमले को मुसलमान आतंकवाद नहीं बल्कि "गज़वतुल हिन्द  غزوة الهند "कहते हैं , जिसका अर्थ भारत से लड़ाई( Battle of India ) होता है .उर्दू में इस लड़ाई को " गजवा ए हिन्द  غزوه هند" भी कहा जाता है .और पाकिस्तान के सुरक्षा विश्लेषक security analyst" जैद हामिद ' ने कुछ हदीसों के हवाले देकर यह दुष्प्रचार शुरू कर दिया है कि जल्द ही भारत पर जिहादियों हमला होगा , और भारत को इस्लामी देश बनाने के लिए हर मुसलामन जिहादियों की सहायता करे ,
इस लेख के द्वारा हम क्रमशः जैद हामिद के जिहादी विचारो( ideology  ) उन सभी हदीसों , उनकी सत्यता को नंगा कर देंगे .इस से पाठकों को पता चलेगा कि मुसलमान कितने झूठे होते हैं .
3-गजवतुल हिन्द की हदीसें
पाकिस्तान के जैद हामिद और उसके जैसे जिहादी विचार रखने वाले भारत के दुश्मन मुसलमान जिन हदीसों के आधार पर भारत पर आतंक फैलाते रहते हैं , उनकी संख्या केवल पांच है .जो कई किताबों से इकट्ठी की गयी हैं .और जिन किताबों से यह हदीसें जमा की गयी है , हदीस के बाद उनके सन्दर्भ दिए गए हैं
हदीस .1
"अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा है , मेरी यह उम्मत दल बना कर हिन्द और सिंध पर चढ़ाई करेगी "
"في هذه الأمة، سيرأس القوات نحو السند والهند"
“In this Ummah, the troops would be headed towards Sindh & Hind”
सन्दर्भ -इमाम हम्बल की मसनद , इब्न कसीर की अल बदया व् नहया . और नुईम बिन हम्माद की किताब अल फितन
हदीस .2
"हजरत सुबान ने कहा कि रसूल ने कहा है , मेरी उम्मत के दो दल होंगे ,एक को अल्लाह जहन्नम की आग से बचा लेगा और एक दल भारत पर आक्रमण करेगा .फिर लौट कर ईसा मसीह से मिलेगा "
"واضاف "بين مجموعتين أمتي أن يكون من هذا القبيل، لعنهم الله وتحررت من النار؛ مجموعة واحدة ستهاجم الهند والثاني سيكون أن الذي سيرافق عيسى ابن مريم-"
“Two groups amongst My Ummah would be such, to whom Allah has freed from fire; One group would attack India & the Second would be that who would accompany Isa Ibn-e-Maryam .”
सन्दर्भ-मसनद ,इमाम निसाई की सुन्नन अल मुजतबा ,इब्न असीम की किताब अल जिहाद ,नुईम बिन हम्माद की किताब अल फितन
हदीस .3
"अबू हुरैरा ने कहा ,रसूल ने हम लोगों से कहा , निश्चय ही तुम लोगों से एक दल हिंदुस्तान पर हमला करेगा . और युद्ध में विजयी होगा . फिर वहां के राजाओं को हथकड़ियों और बेड़ियों में जकड कर घसीटते हुए सीरिया तक लायेगा . अल्लाह उन सभी मुसलमानों के गुनाह माफ़ कर देगा . अबू हुरैरा ने यह भी कहा कि यदि मुझे इस लड़ाई में जाने का मौका मिलेगा तो मैं अपना सब बेच कर इस लड़ाई में शामिल हो जाऊंगा ."
"بالتأكيد، واحدة من القوات الخاصة بك ستفعل حرب مع هندوستان، والله يوفق هؤلاء المحاربين، بقدر ما سيجلب ملوكهم عن طريق سحبها في سلاسل / الأغلال. وسوف يغفر الله هؤلاء المحاربين (من بركة هذه الحرب كبيرة). وعندما سيعود هؤلاء المسلمين، فإنها تجد حضرة عيسى بن مريم. في سوريا ".
  أبو هريرة. وقال ان 'إذا كنت قد وجدت أن غزوة، ثم ستبيع كل ما عندي من منتجات جديدة وقديمة وستشارك فيها ".
सन्दर्भ-नुईम बिन हम्माद की किताब अल फितन
हदीस .4
"हजरत कअब ने कहा कि रसूल ने कहा , यरूशलेम के बैतूल मुक़द्दस के एक राजा के मुजाहिद भारत पर हमला करेंगे और वहां की सारी संपत्ति लूट लेंगे .और भारत के सभी राजाओं को कैद करके यरूशलेम के राजा के सामने प्रस्तुत कर देंगे . और उस राजा के मुजाहिद पूरब से पश्चिम तक सम्पूर्ण भारत पर कब्ज़ा कर लेंगे,और पूरे भारत को बर्बाद कर देंगे "
 "وأضاف "كان ملك القدس (بيت المقدس المجاهدين) جعل القوات المضي قدما نحو هندوستان. ووريورز تدمير أرض هند، وسوف تمتلك كنوزها، ثم الملك سوف تستخدم تلك الكنوز للديكور القدس. التي من شأنها أن تجلب القوات الهندية ملوك أمام الملك (القدس). ومحاربيه بأمر الملك قهر كل المنطقة الواقعة بين الشرق والغرب. وهل البقاء في هندوستان ".
“A King of Jerusalem (Bait-ul-Muqaddas) would make a troop move forward towards Hindustan. The Warriors destroy the land of Hind; would possess its treasures, then King would use those treasures for the décor of Jerusalem. That troop would bring the Indian kings in front of King (of Jerusalem). His Warriors by King’s order would conquer all the area between East & West. And would stay in Hindustan ”.
सन्दर्भ-नुईम बिन हम्माद की किताब अल फितन
हदीस .5
"सफ़वान बिन उमरू ने कहा ,रसूल ने कहा मेरी उम्मत के कुछ लोग हिंदुस्तान पर हमला करेंगे और अल्लाह उनको इस में सफलता प्रदान करेगा . यही नहीं हमारे लोग भारत के सभी राजाओं को हथकड़ी और बेड़ियों में जकड कर कैद कर सीरिया ले जायेंगे ,वहां ही मरियम पुत्र ईसा भी मिल जायेंगे "
"بعض الناس من أمتي قتال مع هندوستان، الله يمنح لهم النجاح، حتى لو وجدوا ملوك الهندي الوقوع في الأغلال. والله يغفر لهؤلاء ووريورز. عندما ستتحرك تجاه سوريا، سوف تجد بعد ذلك عيسى ابن مريم هناك. "
“Some people of My Ummah will fight with Hindustan, Allah would grant them with success, even they would find the Indian kings being trapped in fetters. Allah would forgive those Warriors. When they would move towards Syria, then would find Isa  Ibn Mariyam over there.”
सन्दर्भ-नुईम बिन हम्माद की किताब अल फितन
यदि हम भारत पर हमले "गजवतुल हिन्द " के बारे में इन पाँचों हदीसों को गौर से पढ़ें तो,पता चलता है कि यह सभी हदीसें " नुईम बिन हम्माद "के द्वारा संकलित की गयी हैं ,और इनकी सत्यता को परखने के लिए पहले "नुईम बिन हम्माद "का परिचय देना जरूरी है .
4-नुईम बिन हम्माद का परिचय 
जैद हामिद भारत पर हमले के बारे में जिन पांच हदीसों के हवाले देता है .उनको जमा करने वाला एक ही व्यक्ति था . जिसका पूरा नाम "अबू अब्दुल्लाह नुईम बिन हम्माद इब्न मुआविया अल खुजैयी अल मरवाजी था .लेकिन लोग सिर्फ " नुईम बिन हम्मादنعيم بن حماد " ही कहते हैं.नुईम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इराक के हिजाज शहर में प्राप्त की थी . फिर वह मिस्र में चला गया और वहां कई उलेमाओं से हदीसों का ज्ञान हासिल किया .जिनमे मुख्य "अबू हमजा सुक्करी ,अबू बकर इब्न अयास .हफ्स इब्न गियास भी शामिल हैं .लेकिन इब्न मूसा ,अबू दाऊद ,और अबुल फतह अज्दी ने कहा है कि नुईम फर्जी हदीसें बनाता था(he used to fabricate narrations  ) .यही नहीं इसने इमाम अबू हनीफा पर भी फर्जी हदीसें गढ़ने का आरोप लगाया था . जो झूठा साबित हुआ था .इसी तरह नुइम ने एक बार कह दिया था कि कुरान किसी की रचना है , या किसी ने बना कर दी है(  Noble Qurān being created   ) .इस अपराध के लिए नुइम को 223 हिजरी सन 845 में जेल की सजा भी दी गयी थी .और जेल में ही 229 हिजरी सन 851 में नुइम की मौत हो गयी थी .इस्लाम की इतिहास की किताब के मुताबिक नुइम की बड़ी दर्दनाक मौत हुई थी (he had a very bad death)जिसका सबूत यहाँ दिया जा रहा है .जिसको शंका हो वह इस साईट को खोल कर देख ले
  قال أحمد بن محمد بن سهل الخالدي: سمعت أبا بكر الطرسوسي يقول: أخذ نعيم بن حماد في أيام المحنة سنة ثلاث أو أربع وعشرين ومئتين، وألقوه في السجن، ومات في سنة تسع وعشرين ومئتين، وأوصى أن يدفن في قيوده
سير أعلام النبلاء - (10 / 610)
http://wup-forum.com/viewtopic.php?f=12&t=14
5-किताब अल फ़ित्न 
हमने नुईम बिन हम्माद का परिचय देते हुए प्रमाणित कर दिया है कि वह एक जालसाज , धोखेबाज व्यक्ति था , और वह फर्जी हदीसें बनाने का अपराधी था .और उसने भारत पर हमले " गजवतुल हिन्द " के बारे में जो हदीसें प्रस्तुत की हैं , वह अपनी किताब " किताब अल फित्न- كتاب الفتن"से नकल की हैं .यह किताब मूल अरबी में है , और इसमे दस अध्याय हैं .जिनमे अलग अलग देशों के बारे में भविष्य में होने वाली घटनाओं का वर्णन दिया गया है .यह किताब अरबी में है और इस साईट में दी गयी है ,
http://www.discoveringislam.org/nuaim_bin_hammad_1.htm
.परन्तु इस्लाम के अनेकों विद्वान् और उलेमा नुइम बिन हम्माद की हदीसों की किताब को अप्रमाणित ,झूठी ,और बनावटी मानकर अमान्य ठहरा चुके हैं .उलेमाओं ने इसके यह कारण बताये हैं
6-झूठी होने का प्रमाण 
पाकिस्तानी मुल्ले और जिहादी भले ही "गजवतुल हिन्द "की हदीसें दिखा कर लोगों को धोखा देते रहें ,लेकिन कई साल पहले ही कई मुस्लिम उलेमाओं द्वारा इन हदीसों को झूठा और अविश्वनीय सिद्ध कर दिया था .सबूत के लिए इस लिंक को पाकिस्तानी लोग ऑंखें खोल कर देख लें ,फिर भारत पर हमले का सपना देखें .इसके लिए यह तीन सबूत ही काफी हैं
1.इमाम अल बानी ने इन हदीसों की जाँच करके इन्हें "मौजूअ موضوع-" यानि फर्जी (abricated ) हदीसों में वर्गीकृत किया है . और इसका पहला कारण यह बताया है कि यह हदीसें विश्वास करने के योग्य नहीं हैं
وهذا متن موضوع، وإسناده واهٍ مسلسل بالعلل:
الاولى / المؤلف نفسه؛ نعيم بن حماد، فإنه مع كونه من أئمة السنة والمدافعين عنها، فليس بحجة فيما يرويه، فقال النسائي:
“ليس بثقة “.
واتهمه بعضهم بالوضع. والحافظ الذهبي مع صراحته المعهودة، لم يستطع أن يقول فيه – بعد أن ذكر الخلاف حوله – إلا: “قلت: ما أظنه يضع “!
2.शेख अबू उमर अस सफार ने इन् हदीसों देखा और कहा की यह वास्तव में अपुष्ट हैं ,और इनके कथन जाँच करने योग्य नहीं हैं , और यही बात अल बुखारी ने भी कही है .
لثانية: شيخه أبو عمر – وهو: الصفار: كما وقع له في غير هذا الحديث -، واسمه: حماد بن واقد، وهو ضعيف، بل قال البخاري: “منكر الحديث “
3.इमाम इब्न लुहैया ने जब इन हदीसों को पढ़ा तो उन्हें इतना अपुष्ट और फर्जी पाया कि इन हदीसों की किताब को आग में झोंक दिया . और जला कर राख कर दिया .
لثالثة: ابن لهيعة، وهومعروف بالضعف بعد احتراق كتبه
http://ummuabdulazeez.wordpress.com/2012/07/29/fabricated-hadeeth/
7-जैद हामिद कौन है ?
मुसलमानों को फर्जी हदीसें दिखा कर उनको भारत पर हमला करने और भारत में आतंक की योजनाओं का सूत्रधार पाकिस्तानी भड़काऊ भाषण देने के लिए कुख्यात मुस्लमान का पूरा नाम " सय्यद जैदुज्जमा हामिद- زید الزمان حامد" है . लोग इस नीच को "जैद हामिद " के नाम से जानते हैं. .इसका जन्म कराची में 14 मार्च सन 1964 में हुआ था . और इसका बाप कर्नल "जमान हामिद " सेना से रिटायर्ड हो चूका है .आजकल यह पाकिस्तानी सरकार में सुरक्षा सलाहकर और राजनीतिक टिप्पणीकार है .और भारत के खिलाफ जहर उगलता रहता है .कहा जाता है कि इसका भारत के कई मुस्लिम नेताओं से और कट्टर मुल्लों से भी सम्बन्ध है ,यह अक्सर अखबारों में भी भारत के खिलाफ लिखता रहता है , और इसके लिए अपनी एक साईट भी बना रखी है , जिसका नाम यह है ,
http://www.brasstacks.pk/
Contact numbers: Office: +92 51 5598046
Moblile: 0321 500 1370
Email : admin@brasstacks.ca
जैद हामिद अपने भाषणों में भारत और हिन्दुओं के विरुद्ध क्या भौंकता है , इसके सबूत के लिए यह दो विडिओ दिए जा रहे हैं ,
Zaid Hamid " we will kill all brahamins"

http://www.youtube.com/watch?v=ISUFo-cbmnw


Zaid Hamid: Final call to hindus towards Islam before ghazwa e Hind ! Hujjat

http://www.youtube.com/watch?v=dCE1TK_c79Q
8-जिहादी मुल्ले सावधान 
हम इस लेख के माध्यम से उन सभी जिहादी विचार के लोगों को सचेत कर रहे हैं जो फर्जी हदीसों पर विश्वास करके भारत पर जिहाद या लड़ाई का सपने देख रहे है , उन्हें पता होना चाहिए कि अल्लाह ने रसूल को भी अल्लाह के नाम से बातें गढ़ने की यह सजा बताई है ,जैसा कुरान में कहा है ,
"और अगर यह नबी हमारी तरफ से कोई फर्जी बातें गढ़ता ,तो हम उसका हाथ जकड लेते ,फिर उसकी गर्दन की रग काट देते "
सूरा -हाक्का 69: 44 से 46 तक 
तो मुसलमान खुद सोचें अगर कोई रसूल के नाम से फर्जी हदीसें गढ़ता है ,तो वह उस व्यक्ति को क्या सजा देंगे . वैसे हमें इन हदीसों से कोई अंतर नहीं पड़ता , भारत में इतनी शक्ति है .पाकिस्तान को खाकिस्तान बना सकता है .
(200/88)



शनिवार, 11 अगस्त 2018

इस्लाम का आधार झूठी गवाही !!

यह एक प्रसिद्ध  कहावत  है कि  प्रत्यक्ष  को किसी प्रमाण  की जरुरत  नहीं  होती है .यानि सर्वमान्य सत्य  को साबित करने के लिए किसी गवाही  और साक्षी  की आवश्यकता  नहीं  होती . किसी भी अदालत  में गवाही की जरुरत तभी होती है ,जब तथ्य  यातो अपुष्ट होते  हैं ,या उनके सत्य होने में कोई शंका होती . लेकिन   किसी भी व्यक्ति  की गवाही उसी दशा में सही मानी जाती है ,जब गवाह मानसिक  रूप से स्वस्थ  हो और उसे की तरह  का भय  अथवा  लालच  नही दिया गया  हो .वर्ना  अदालत ऐसे  व्यक्ति की गवाही झूठी   और फर्जी   मान  लेती  है.
यह  बात  इस्लामी  मान्यता  अर्थात मुसलमानों  के ईमान  पर पूरी तरह  से लागु  होती  है .क्योंकि  मुहम्मद साहब  के समय  से आज तक  दुनिया भर की  मस्जिदों  में रोज  पांच  बार  अजान  देते समय  एक गवाही  दी  जाती  है .और चिल्ला चिल्ला कर कहा   जाता है "कि  मैं  गवाही देता हूँ , मुहम्मद  अल्लाह के रसूल हैं "इस   से सवाल उठता है कि मुसलमानों   को ऐसी  गवाही देने की  जरुरत  क्यों पड़ी ? यहूदी और ईसाई  ऐसी गवाही  क्यों  नहीं देते ?जबकि  यह  आदम  से ईसा तक  सभी नबियों  को अल्लाह के नबी  मानते  है .मुसलमानों  को मुहम्मद  साहेब  के अल्लाह  के रसूल   साबित  करने के लिए  रोज  गवाही देने  की क्या  आवश्यकता  है .
इस प्रश्न  का उत्तर  हमे खुद कुरान  और हदीसों  से  मिल  जाता  है ,जो यहाँ  दिया जा रहा  है

1-पुराने नबियों  के कलमें 

मुसलमान   हजज  , और उमरा  करते  समय एक    दुआ  की किताब  भी पढ़ते  है ,जिसे "दुआए गंजुल अर्श -دعاےء گنج العرش " कहा  जाता  है .इसमे आदम  से  मुहम्मद  साहब  तक सभी  नबियों  के कलमे  दिए  गए  हैं .ऐसा  माना  जाता है कि मुहम्मद साहब को यह कलमें  जिब्रील  फ़रिश्ते  ने बताये थे .इन में से मुख्य  6 कलमे दिए  जा रहे हैं .ध्यान  देने की बात यह  है कि इन  सभी नबियों  के कलमों के लिए  गवाही  देना अनिवार्य  नहीं बताया  गया  है .क्योंकि यहूदी ,ईसाई और  मुहम्मद साहब  के समय के अरब  भी  इन नबियों  के बारे में अच्छी  तरह  से  जानते थे . और उन पर विश्वास  करते  थे . उनको   इन नबियों  के अल्लाह के नबी होने पर कोई शक नहीं था . और इस सत्य को  साबित करने के लिए किसी तरह की गवाही देने की जरुरत नही पड़ी  .


1.ला इलाहा  इल्लल्लाहु -आदम सफी उल्लाह

2-.ला इलाहा  इल्लल्लाहु -नूह नजी उल्लाह

3-.ला इलाहा  इल्लल्लाहु -इब्राहीम खलीलुल्लाह -इब्राहीम अल्लाह के मित्र हैं

4."   ला  इलाहा  इल्लल्लाहु   इस्माइल जबीहुल्लाह -इस्माइल अल्लाह की बलि  हैं

5."  ला  इलाहा  इल्लल्लाहु   -  मूसा  कलीमुल्लाह-मूसा  अल्लाह  का वचन  है

6."  ला  इलाहा  इल्लल्लाहु -  दाउद खलीफतुल्लाह - दाउद अल्लाह  के खलीफा  हैं

7." ला  इलाहा  इल्लल्लाहु      - ईसा  रूहुल्लाह-ईसा  अल्लाह की आत्मा है

http://www.amazonintl.in/forum/index.php?topic=25926.0

2-अजान का  मजाक  
लेकिन  जब  मुहम्मद  साहब  ने खुद  को अल्लाह  का रसूल घोषित  कर दिया और लोगों  को नमाज  के लिए बुलाने लगे  तो लोग उनके बुलावे  का मजाक  उड़ाने  लगे .जैसा कि खुद  कुरान  में कहा गया  है ,
"जब तुम  लोगों  को नमाज  के लिए पुकारते हो ,तो लोग उसे हंसी  खेल की बात  बताते  हैं "सूरा -मायदा 5:58

3-गवाही  के शब्द जोड़े गए
जब  मुहम्मद  साहब को पता चला  कि  लोग  उनको अल्लाह का रसूल  या नबी  कभी नहीं  मानेंगे , क्योंकि उनके पास इसका कोई पुख्ता  सबुत नहीं था ,तो उन्होंने  बाद  में  अजान  में यह शब्द  भी जोड़ दिए .

"أشهد أن لا اله إلا الله  "

"अश्हदु  अन  ला  इलाहा  इल्लल्लाहु "

I bear witness that there is none worthy of worship but Allah

"أشهد أن محمدا رسول الله

"अश्हदु  अन  मुहम्मदन रसूलुल्लाह "

I bear witness that Muhammad is the Messenger of Allah.

बाद में यही शब्द कुछ  बदल कर  "कल्माये शहादत " में भी  जोड़ दिए .  और इसे ईमान   का हिस्सा बना कर   इसका पढ़ना  अनिवार्य बना  दिया .और इसे नहीं पढ़ने  वाले को काफ़िर  कह  दिया .

4-अर्थात  गवाही 
अरबी शब्द" अजान -  أَذَان‎        "  का अर्थ  बुलावा  या आह्वान  होता है , जो अरबी के मूल शब्द "उज्न - أَذَن " से निकला  है .जिसका अर्थ "कान -"Ear   होता है . अजान  में मुअज्जिन  यानि अजान  देने वाला  मस्जिद  की मीनार पर चढ़  कर जोर से या लाऊडस्पीकर  से " कल्माये  शहादत -  كلمة الشهادة" के शब्द  भी बोलता  है .अजान  के इन शब्दों  में यह गवाही  ( to witness -to)testify  देना अनिवार्य  है ,कि मुहम्मद  अल्लाह  के रसूल हैं .ऐसी गवाही देना  ईमान  का (Creed - )माना  जाता  है .अजान  में  यह गवाही के शब्द खुद मुहम्मद साहब  ने जुड़वा  दिए  थे .तब से आज तक  मुसलमान  रोज  पांच   बार  यही गवाही  दे रहे  हैं .

5-गवाही देने  का आदेश
अब्दुल   रहमान  ने कहा  कि  रसूल ने कहा    है ,मुअज्जिन    अपनी आवाज  ऊंची करके  गवाही  के  शब्द बोले , ताकि   आसपास के  मनुष्य और जिन्न तुम्हारी  गवाही  सुन सकें ,बुखारी जिल्द 1 किताब 11 हदीस583 

अब्दुल रहमान  ने कहा कि  अजान  देते समय तुम  गवाही  के यह शब्द  भी  जोर से बोलो कि मुहम्मद   अल्लाह  के रसूल  है "
बुखारी -जिल्द4  किताब 54 हदीस 517

6-गवाही  के किये हथकंडे 
जिस तरह  आज  भी अपने पक्ष  में गवाही देने  के लिए गवाहों  को धमकी और लालच  दिया  जाता  है ,मुहम्मद साहब  ने वही हथकंडे  अपनाये  थे ,  जैसा  कुरान  की इन आयातों  में कहा गया है ,

"जो लोग रसूल पर ईमान  नहीं  लाते ,तो  जान लो ऐसे काफिरों के लिए दहकती  हुई आग तय्यार रखी  है "सूरा -फतह 48:13
"हे लोगो  जो रसूल रब की ओर  से तुम्हारे पास आया  है ,तो तुम्हारी इसी में भलाई है कि  तुम उस पर ईमान  लाओ "सूरा -निसा 4:170
"जो रसूल का विरोध करके किसी दूसरे का रास्ता अपनाएगा ,और ईमान  नहीं  लायेगा तो उसे जहन्नम  की आग में झोंक दिया जायेगा ,जो बुरा ठिकाना है "
सूरा -निसा 4:115
"हे लोगो तुम ईमान क्यों नहीं लाते ,जब रसूल तुम  से गवाही देने और वचन  देने  के लिए बुलाता  है "सूरा -अल हदीद 57:8
"जो लोग रसूल पर ईमान  लाकर गवाही देंगे ,तो रसूल अपनी कृपा से दोगुना लाभ देगा "सूरा -अल हदीद 57:28
7-अजान   से क्या होता है ?
मुहम्मद  साहब  के पक्ष  में लोग गवाही क्यों नहीं देते थे ,और उनको रसूल मानने  से इंकार करके उन पर  ईमान  क्यों  नहीं  लाते   थे यह  मुहम्मद साहब  के ज्ञान  से पता चलता  है ,जो इस हदीस   में  दिया गया है ,
अबू  हुरैरा  ने  कहा कि  रसूल  ने बताया ,जैसे ही  अजान  के शब्द  जोर से बोले जाते हैं ,तो उनको सुनते ही शैतान जोर से पादता  हुआ  उलटे पैर सरपट भागने  लगता  है "  बुखारी  -जिल्द 4  किताब 11 हदीस 582
8-सूफी संत सरमद का इंकार
सूफी संत का पूरा नाम "मुहम्मद  सईद "सरमद काशानी -سرمد کاشانی‎  " था .जो अजर बैजान  में सन 1590 में पैदा  हुए थे .वहां  से भारत  में दिल्ली  में बस  गए .सरमद  शाहजहाँ  के  बड़े पुत्र "दारा शिकोह  " के मित्र थे .दारा शिकोह  ने  हिन्दू धर्म ग्रंथों  का अध्यन  किया था ,और उपनिषदों  का फारसी  में अनुवाद  किया  था .दारा  की संगत से सरमद  भी  हिन्दू धर्म  से प्रभावित  थे .दारा शिकोह  के इसी  हिन्दू धर्म  प्रति लगाव  से चिढ  कर   औरंगजेब  ने 30 अगस्त 1659 को   दारा  की हत्या  करवा   दी थी .
सूफी  सरमद नंगे  रहते थे  और   दिल्ली  की  जामा   मस्जिद के  रस्ते में बैठे  रहते  थे .कहा   जाता  है  ,कि एक  बार औरंगजेब  नमाज   पढ़ने  मस्जिद  जा रहा  था , तो उसने नंगे सरमद   से  कहा  जब  तेरे पास कपडे  रखे हैं ,तो  तू अपना बदन  क्यों  नहीं  ढांक  लेता ?सरमद ने औरंगजेब  से  कहा ,बता मैं  पहले  तेरे गुनाहों  को छुपाऊँ   ,या अपना  जिस्म  ढान्कूँ ?
फिर औरन्जेब  ने  पूंछा  कि अजान  हो  रही  है ,तू नमाज  के लिए मस्जिद क्यों  नहीं  जाता , तब  सरमद  ने  फारसी  में यह  जवाब  दिया

"सूए  मस्जिद  की रवम ,इम्मा  मुसल्मा  नीस्तम 
बुत परस्तम  कफिरम अज  अहले ईमाँ  नीस्तम .

अर्थात -मैं  मस्जिद  की तरफ क्यों  जाऊं  ,अब  मैं मुसलमान   नहीं रहा .मैं तो एक मूर्तिपूजक .और काफ़िर  बन  गया हूँ ,और   ईमान  वाला  नहीं  हूँ .

कफिरम इश्कत  मुसलमानी  मिरा  दरकार  नीस्त ,
हर रगे  मन  तार गश्ते  हाजते   जुन्नार  नीस्त .

मैं  तो  ईश्वर  के प्रेम  में काफ़िर ( हिन्दू ) बन गया .मुझे मुसलमानी  की जरुरत नहीं है . मेरे  शरीर   की एक एक रग  धागे  की तरह  है , मुझे  जनेऊ  की  जरुरत  भी नहीं  है .

फिर जब  औरंगजेब  ने सरमद  कल्माये शहादत  बोलने  को कहा ,तो सरमद  ने कलमा  का पहला  भाग तो बोल  दिया ,लेकिन  दूसरे  भाग ( मुहम्मद  रसूलल्लाह )  बोलने  से इंकार  कर दिया .और  कहा  कि  मैं  झूठी गवाही नहीं  दे सकता .नाराज  होकर औरगाजेब  ने सरमद   को क़त्ल करा  दिया . आज भी दिल्ली  की जामा  मस्जिद  के सामने सूफी सरमद   का मजार  है .

*5) [172] The first part of the Kalima, which is in Arabic, can be translated thus : "There is no God but God" (La Ala Allalah) and the second part, "And Mohaaunad is his prophet" (Mohammad rasool Allah). It was quite natural that Sarmad refused to utter the second part of the Kalima,

यही  कारण  था कि  सूफी संत सरमद  ने कलमा का दूसरा भाग  बोलने से इंकार किया था . जिसमे कहा है " मैं गवाही देता हूँ कि  मुहम्मद अल्लाह  के रसूल हैं .इसके  लिए सरमद  ने  औरंगजेब  को कुरान  की यह आयत  भी  सुना  दी थी .

"और अल्लाह के वास्तविक बन्दे तो वही हैं ,जो झूठी गवाही नहीं देते "
सूरा -फुरकान 25:72

अब इस लेख को पढ़कर  पाठक स्वयं फैसला  करें  कि इस्लाम  का आधार   झूठी गवाही  है ,कि  नहीं .?और रोज दिन में पांच  बार चिल्ला कर  झूठी  गवाही देने से मुहम्मद  साहब  को रसूल  कैसे  माना  जा सकता  है ?और झूठी गवाही देने वालों पर विश्वास  कैसे किया  जा सकता  है ?

(200/111)





गुरुवार, 26 जुलाई 2018

गौ वंश की रक्षा का असान उपाय !

देखा गया है कि  जब जब भी    सरकार  गौ   हत्या  पर  प्रतिबन्ध  लगाती   है या  लगाने  का  प्रयास  करती  है   ,  तो सबसे  पहले  मुसलमान  इसका विरोध  करने के लिए देशव्यापी आंदोलन  करने  लगते   हैं    , जिस  से  जगह  दंगे  फसाद    भी  होजाते    हैं   , चालाक  मुल्ले   लोगों के समक्ष  अक्सर  यही  तर्क  देते   हैं  ,कि यदि   गौ  हत्या  पर  प्रतिबन्ध   लग जाएगा  तो  हजारों  कुरैश  यानी  कसाई   बेरोजगार  हो  जायेंगे  , इस कुतर्क  से  प्रभावित होकर  वोटों  के  लालची सेकुलर    भी मुसलमानों  सुर में सुर  मिलाने   लगते  है   ,  लोग   नहीं  जानते कि  यह  आर्थिक  समस्या  नहीं  बल्कि इसका उद्देश्य हिन्दुओं  की आस्था को  आहत  करना  है  , चूँकि  हिन्दू  गाय  को पशु  नहीं  बल्कि  पवित्र  समझ कर  माता   की तरह  पूज्यनीय   मानते  हैं ,

जबकि  मुसलमान गाय  को  हलाल   यानी  खाने योग्य पशु  मानते   हैं , इसलिये मेरा विश्वास   है  कि सरकारें  या  हिन्दू  संगठन  मिल  कर  के भी  गौ ह्त्या    को  पूरी  तरह  से  प्रतिबंधित  करने  में  सफल   नहीं  हो  सकेंगे ,मुस्लमान  छुप  कर  गायें  मार  कर   खाते   रहेंगे  , और इस बात से  सभी सहमत  होंगे  कि अधिकांश  मुसलमान ही  गायों  को  जबह  करके  उनका मांस  खाते   है  , और  चूँकि  मुसलमान  गौ मांस  खाने पक्ष में  कुरान  के  हवाले  देते हैं ,और  गायों  को मुसलामानों  की  खुराक होने से बचने   के लिए हमें  यह  जानना  अति आवश्यक लगा  कि कुरान के अनुसार  मुसलमान  क्या  खा सकते हैं  ,और कौन सी  चीज  उनके   लिए  वर्जित  यानी हराम  है ,

1- मुसलमान क्या नहीं खा  सकते ?

कुरान   की  यह  आयत अत्यंत   महत्वपूर्ण  और ध्यान आकर्षित करने   वाली   है  ,  इसलिए पाठकों  की आसानी  के लिए   मूल अरबी , अर्थ ,अंगरेजी  लिप्यंतरण ( Transliteration)    और  देवनागरी  लिप्यंतरण    भी  दिया  गया है ,

1 - मूल  अरबी 

"حَرَّمَ عَلَيْكُمُ الْمَيْتَةَ وَالدَّمَ وَلَحْمَ الْخِنْزِيرِ وَمَا أُهِلَّ لِغَيْرِ اللَّهِ "


अर्थ - तुम्हारे  लिए हराम  किये  गए मृतक ,खून   ,और  सूअर  का मांस  और  जो अल्लाह  के अलावा किसी और को समर्पित  किये हों "

2-Eng Translation


"He has forbidden,to you,the dead animal,nd the blood,,and the flesh,(of) the swine,and what,has been dedicated,to other (than)Allah." Sura- nahl- 16:115  


3-Transliteration in Roman

harrama,alaykumu,l-maytata,wal-dama,walah ma,l-khinzīri,wamā,uhilla,lighayri,l-lahi-16:115


4-देवनागरी लिप्यांतरण 

"हर्रम अलैकुम अल मैय्यता  वल दम व् लहमल  खिंजीर व् मा उहिल्ल  बि गैरल्लाह "
सरा-अन नह्ल -16:115  

 नोट -इस  आयत  का विश्लेषण   करने से  स्पष्ट  होता है कि दो ऎसी  चीजें   है  , जिन्हें   मुसलमान    नहीं   खा सकते   हैं   , एक , जिस   जानवर  पर  अल्लाह   के  अलावा  किसी  और  नाम  लिया  गया    हो  ,  दूसरा  सूअर  ,
 इसीलिए  इस आयत  अनुसार  अगर    गाय  या   किसी   भी    पशु   पर   अल्लाह   के  शत्रु   शैतान  का   नाम पढ़   कर  विधिवत   शैतान   को  अर्पित  कर  दिया  जाए  ,तो   वह  पशु  मुसलमानों   के  लिए  हराम   यानी खाने  के  अयोग्य       हो  जायेंगे  , इस  अनुष्ठान   के  लिए  हमने  यह  कलमा यानी  मन्त्र  तैयार   किये   हैं  ,

यह मन्त्र या  कलमा  अरबी   भाषा  में  इसलिए  बनाया  गया  है   , क्योंकि   मुसलमान  ही  गायों  को  मार  कर उनका  मांस  खाते  हैं   , और  मुसलमानों  का अल्लाह  ,  रसूल  फ़रिश्ते और  शैतान सब   अरबी   के आलावा  दूसरी  कोई  भाषा  नहीं  समझते  , इसलिए उन  पर  संस्कृत  या  हिंदी   का  कोई  असर  नहीं   होगा , सामान्य  हिन्दुओं  के  लिए   यह  मन्त्र अरबी  के साथ  देवनागरी  लिपि   में  अर्थ सहित   दिया  जा रहा  है

1-गौ रक्षा मन्त्र

1 -अरबी में मन्त्र  का नाम

"كلمةُ التحفيظُ الابقار و الانعام  "

"कलमतुल तहफीजतुल अबकार  वल  अनआम "

2-अरबी में पूरा मन्त्र 


بِسمِ الشيطان الاِليس العظيم انّهُ مُنكِرُ الله وعدوكُلِ مُسلمين،اشهدونا بِهاذاليوم ،   "

اهِللُناهاذه الابقار والانام لِخالصتِك  الي الابدً

من الذين يضحون هذه الأبقار ولحم كما أكل اللحم من جميع الأنبياء مع محمد رسول

3-देवनागरी लिपि में 

बिस्मिश्शैतान  अल  इब्लीसुल अजीम  इन्नहु मुंकिरुल्लाह व्  उदू  कुल्लि  मुस्लिमीन -1
,अश्हदूना  बि  बिहाजिल  यौम , उहल्लिना हाजिहिल  अबकार वल  अनआम  खालिसितिल्लक इला  अबदन ,-2
मन  अल्लज़ीन युजहून हाजिहिल अबकार व्  लहम कमा अकुल  लहम मन  जमीअ अल  अम्बियाअ मअ मुहम्मद  रसूल .-3

अर्थ -शैतान , इब्लीस  महान   के   नाम  से  ,जो अल्लाह  को नकारने  वाला और  मुसलमानों  का शत्रु   है -1
  ,आज  के  दिन  हम सभी  गवाही  देते  हैं  कि ,हमने   यह  सभी  गायें  और  चौपाये हमेशा   के  लिए केवल  तुझ   ही  को  समर्पित  कर   दिए   है -2
 , और जो भी  इनको  मार कर इनका   मांस  खायेंगे गोया  वह  सभी नबियों  मय  मुहम्मद  रसूल का  मांस  खाएंगे "-3

 विधि -   सभी  गायों , बैलों  ,  बछड़ों   और  भैंसों   को  इकट्ठा   करके समारोह   पूर्वक  यह   मन्त्र  पढ़ें   और  अपने  पशु शैतान   को  अर्पित   कर  दें  , और इस  आयोजन  की  सूचना    अखबारों  और  टी  वि    पर   भेजें  , मुसलमान  आपकी  गायों  को मार  कर    नहीं   खा  सकेंगे

 इसी   तरह   मुसलमानों    के अल्लाह   ने  सूअर   को   नापाक  ,अपवित्र  और  हराम    बता   कर   मुसलमानों  के  खाने  के  अयोग्य  बताया    है   , और अगर   गायों  और  अन्य  पशुओं   को   नापाक  बना  दिया   जाए  तो  मुसलमान  उनको   मार  कर   नहीं   खा  सकेंगे   ,  इसलिए   गायों    को    मुसलमानों   से सुरक्षित रखने  हेतु    गौ संजीवनी का  अविष्कार  किया  गया  है

2-गौ संजीवनी 
 यह एक   ऐसी  चमत्कारी  औषधि   है   जो  बिना   खर्चे  के  भारत  के  किसी   भी स्थान  पर  आसानी   से  जीतनी चाहे   बनायी   जा  सकती   है   , हमने  अरबी  में इसका   नाम " अर्रहीक अल  अबकार -الرّحيق الابقار"    रखा  है   , इसे  गाय  बैल  ,  बछड़े    यहाँ   तक   भैसों  को सात  दिनों  तक  पिलाने  पर उन  पर   कोई  दुष्प्रभाव   नहीं  होगा , बल्कि मुसलमानों  पर  ऐसा असर    होगा  की   वह   गाय  का   मांस  खाना  बंद  कर   देंगे  ,   इस  औषधि  का  जितना अधिक   और  जहाँ   भी  प्रचार  किया  जायेगा  वहां   के  उतने   ही  मुस्लमान  गाय  का  मांस  खाना  छोड़  देंगे  ,
सीधी  सी  बात है  जब  मुसलमान  गाय  मांस  खाना  छोड़  देंगे  तो  गौ  हत्या  खुद  बंद  हो    जाएगी

संजीवनी  बनाने   की   विधि   - सौ  लीटर  पानी   में   सौ  ग्राम  वराह  मूत्र ( सूअर  का  मूत्र )   मिला  कर   सात  दिन तक अपनी  गायों  , बैल  . बछड़ों और पशुओं  को  पिलाये , जिस से यह   औषधि   पानी  के  माध्यम  उनके   शरीरों   में  प्रविष्ट   हो  जाए   , या  इंजेक्शन  से  भी  दे सकते  हैं  ,  इस   से गायें  और  अन्य पशु   मुसलमानों  के  खाने  केलिए हराम     हो  जायेंगे  . विधि   पूरी  होने   के   बाद  यह  घोषणा  सार्वजनिक    कर  दीजिये 
1-अरबी    में 

"فانظرو وتشاهون يا ايٌُهالمسلِمون اختطنا البول الخنازيربِالّحم مع الابقار والانعام بِهاذاليوم تحرٌموعليكُم عبداً  "

2-देवनागरी में -

  " फन्जुरू  व्  तुशाहीदू  या अय्युहल  मुस्लिमून ,-1

 अखततनल बूलूल  खनाजीर मअल लहम अल  अबकार वल अनआम  बि हाजिल यौम ,-2

तुहर्रिमू  अलैकुम  अबदन -3

अर्थ - देखलो   और  गवाह रहो  हे  मुसलमानों -1

हमने  मिला दी  है सूअर   की  पेशाब गायों  और मवेशियों  के मांस (शरीर ) में  आज  के  दिन-2 

और  हराम  कर  दिया  तुम्हारे   पर  हमेशा  के लिए "-3

हमने  काफी   परिश्रम   से  मुसलमानों  से   गायों   की   रक्षा हेतु   यह  तरकीबें  खोजी   है  ,   हमारा   दावा  है  कि अगर   सामूहिक  रूप से  आयोजन    करा के   इन  दौनों   विधियों    का   पालन    किया   जायेगा   तो  मुसलमान  ऐसी  सभी  अभिमंत्रित    गायों   और     पशुओं    को  नहीं     खाएंगे   , और ऐसे   आयोजनों   और   कार्यक्रमों    का  जितना भी  प्रचार   होगा  उतनी अधिक   गायें    बचती  जायेगीं ,
  हो सकता है  कुछ   लोगों   को   वराह   मूत्र   से  आपत्ति   हो   ,  उनको   पता   होना   चाहिए  की  धर्म   की  रक्षा  के   लिए   भगवान  विष्णु   ने भी वराह  का अवतार  लिया  था ,  गौ   रक्षा   के  लिए  ऐसा  करने में  पाप   नहीं    बल्कि   गायों   का आशीर्वाद  मिलेगा  . इतनी  सरल  विधि   होने   पर   भी  यदि  हिन्दू   गौ   माता   की  रखा के लिए  सक्रीय   नहीं  हुए   तो  माना  जाएगा   की   उनमें गौ  भक्ति   नहीं है   !     
 अधिक जानकारी  के लिए   मेल करिये  -

sharma.b304@gmail.com

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रविवार, 10 जून 2018

मुहम्मदी अल्लाह के एकत्व और निराकारता भंड़ाफोड़ !

आप सभी ने देखा होगा कि जब भी मुसलमानों  से  भारत माता की जय  कहने या वन्दे मातरम  बोलने को कहा जाता है  तो वह साफ़ मना कर देते हैं  ,  यही नहीं  अगर उनको किसी हिन्दू आयोजन  में बुलाया जाता है तो भी  वह नहीं  जाते  ,  और न किसी हिन्दू महापुरुष का सम्मान करते  है , मुस्लिम  हमेशा यही उत्तर  देते हों  कि हम  अल्लाह  के सिवा न तो किसी को प्रणाम  करते है  और न अल्लाह के सिवा किसी  के आगे झुकते  हैं  ,  मुसलमानों  के इस अड़ियल  और अहहिष्णु  विचार को 'तौहीद -  " कहा  जाता  है  ,इसे हिंदी  में एकेश्वरवाद (Monotheism )  कहा जाता  है , मुस्लिम इस विचार को इस तरह निरूपित करते हैं  ,कि जैसे एकेश्वरवाद  की  खोज इस्लाम   की खोज  है  , जबकि इस्लाम से हजारों  साल पहले  ही वेद  में एक ईश्वर   की बात कह दी थी  ,
एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति "यह देख कर अधिकांश नादान हिन्दू यह समझ लेते हैं  कि  वेदों  की तरह इस्लाम भी एकेश्वरवाद  का हिमायती  है   ,पहले हमें  यह जानना जरूरी है  कि वैदिक  धर्म कर्म  के सिद्धांत पर आधारित  है  ,यानी व्यक्ति जैसे कर्म करेगा वैसा ही फल पायेगा ,  इस से कोई अंतर नहीं  होता कि कोई एक ईश्वर को माने या  दो को (जैसे पारसी  ) या ईश्वर को बिलकुल नहीं माने जैसे बौद्ध और जैन  ,  या वैज्ञानिक जो नेचर को मानते है  ,  लेकिन लोग नहीं जानते कि जब मुस्लमान  एक ही अल्लाह की इबादत करने पर जोर देते हैं  तो उसके पीछे बड़ा भरी  षडयंत्र   है ,वास्तव में मुहम्मद के समय में कई लोग ऐसे थे जो  अल्लाह बने हुए थे , लेकिन मुसलमानों  ने इस बात को छुपा रखा  था  , और  कहते रहे कि हमारा निराकार  है. लेकिन कुरान में  खुद अल्लाह ने स्वीकार किया है कि वह एक सत्ता नहीं एक समूह है ,
 यह आयत देखिये ,
"وَأُخْرَىٰ لَمْ تَقْدِرُوا عَلَيْهَا  "48:21
(व उखरा लम  तकदिरू अलैहा )
" हमारे अलावा और भी हैं जिन पर तुम कुदरत नहीं पा सके " सूरा -अल फतह 48 :21
"and there  are others you had not  power over them "
( 2nd person masculine plural imperfect verb, jussive mood )

भावार्थ -यह है कि अल्लाह कहता है कि मेरे अतिरिक्त ऐसे और भी हैं  , जिन पर तुम्हारा बस नहीं नहीं सका ,अर्थात मुहमद के समय मुसलमानों के अल्लाह जैसे और भी अल्लाह  मौजूद  थे , और यह बात भी तय है कि वह अल्लाह निराकार नहीं  साकार ही रहे होंगे   , पूरी दुनिया अच्छी तरह से जान चुकी है कि लड़ना झगड़ना मुसलमानों का स्वभाव  है  , और कुदरती बात है कि जब अनेकों अल्लाह  होंगे तो उनमे झगड़ा होना स्वाभाविक   है  ,  और जब हरेक अल्लाह खुद को असली और दूसरे को नकली बताने लगा तो  , मुहम्मद ने असली यानी  अपने अल्लाह की निशानी लोगों  के सामने पेश  कर दी

1--अल्लाह की पहिचान जाँघों से 
अल्लाह की सही पहिचान इबादत से नहीं बल्कि उसकी जांघों से होती है , इसलिए मुल्लों , और सभी मुसलमानों को चाहिए कि पहले अल्लाह के नीचे के कपडे निकल कर जांघें देख लें . फिर उसे सिजदा करें , यही रसूल ने कहा है , देख लो .
"सईदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने बताया ,कि अल्लाह कई प्रकार के हैं और कब कोई कहेगा कि मैं ही तुम्हारा अल्लाह हूँ , तो तुम कहोगे तू मेरा अल्लाह नहीं हो सकता और तुम उस से बात नहीं करोगे .तब लोगों ने पूछा कि हम उसे कैसे पहिचानें ,रसूल ने बताया जाँघों से .और जब अल्लाह नेअपनी जांघ उघाड़ कर दिखाई तो लोग पहिचान गए और सिजदे में गिर गए ."
Sahih Al-Bukhari, Volume 9, Book 93, Number 532s


" فَيَأْتِيهِمُ الْجَبَّارُ‏.‏ فَيَقُولُ أَنَا رَبُّكُمْ‏.‏ فَيَقُولُونَ أَنْتَ رَبُّنَا‏.‏ فَلاَ يُكَلِّمُهُ إِلاَّ الأَنْبِيَاءُ فَيَقُولُ هَلْ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُ آيَةٌ تَعْرِفُونَهُ فَيَقُولُونَ السَّاقُ‏.‏ فَيَكْشِفُ عَنْ سَاقِهِ فَيَسْجُدُ لَهُ كُلُّ مُؤْمِنٍ، وَيَبْقَى مَنْ كَانَ يَسْجُدُ لِلَّهِ  "
Narrated Abu Sa’id Al-Khudri:
Then the Almighty will come to them in a shape other than the one which they saw the first time, and He will say, ‘I am your Lord,’ and they will say, ‘You are not our Lord.’ And none will speak: to Him then but the Prophets, and then it will be said to them, ‘Do you know any sign by which you can recognize Him?’ They will say. ‘The Shin,’ and so Allah will then uncover His Shin whereupon every believer will prostrate before Him

Sahih Al-Bukhari, Volume 9, Book 93, Number 532s


Reference : Sahih al-Bukhari 7439
In-book reference : Book 97, Hadith 65
USC-MSA web (English) reference : Vol. 9, Book 93, Hadith 532

पाठक खुद ही समझ लें कि अल्लाह ने अपनी जांघें उघाड़ कर लोगों को  ऐसी कौन  से चीज दिखाई  होगी जिसे  देख कर लोग फ़ौरन जान गए कि यही   हमारा  असली अल्लाह  है  ,  और तुरंत उसको सिजदा कर दिया 

विमम्र  निवेदन  - पाठकों  से अनुरोध  है कि इस लेख को सेव कर लें और सबको भेज दें  क्योंकि मुस्लिम कहेंगे की यह हदीस गलत  है  , इसलिए हमने हिंदी अंगरेजी और अरबी भी दे दी  है  , लोगों  को पता नहीं होगा की मुस्लिम  मुल्ले  हदीसों की दो तरह से नम्बरिंग करते  है   ,  पहला अरबी सिस्टम दूसरा अंगरेजी सिस्टम   इसलिए हमने दोनो  नंबर  दे दिए ,ताकि कोई शंका  न  रहे

देखा गया है की जब  भी मुल्लों  से अल्लाह के होने का साबुत माँगा जाता है तो वह कुरान पेश कर देते हैं  कि कुरान अल्लाह की वाणी  है इन  प्रमाणों  से सिद्ध हो जाता है कि अल्लाह अनेकों रहे होंगे  , जैसे  शिया अली को ही अल्लाह  मानते हैं  क्योंकि उनके अनुसार कुरान अली की रचना   है  ,  और अगर हम कुरान को अल्लाह के होने का सबूत मान लें तो कुरान में शैतान की आयतें  भी हैं  जहाँ तक अल्लाह के साकार होने की बात है तो हम बता चुके है ,की अल्लाह काना है ,उसके दौनों  हाथ दाहिने कंधे में लगे हैं  ,  अल्लाह मोटा और भारी  है , उस समय उसकी आयु 60  साल के लगभग  रही होगी  , 

यह बात अगले लेख में विस्तार  से दी  जाएगी  (सन्दर्भ लेख (200 /50 )



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रविवार, 7 जनवरी 2018

मुस्लिम औरतें जहन्नम के लायक !

मुसलमान अक्सर यह दावा करते हैं कि अल्लाह की नजर में स्त्री और पुरुष दोनों समान हैं .और क़यामत के दिन दोनों को उनके कर्मों के अनुसार फल दिया जाएगा .और यह तय किया जाएगा कि कौन जन्नत में जाएगा और कौन जहन्नम में जाएगा .अल्लाह किसी भी तरह का पक्षपात नहीं करेगा .लेकिन यह बात सरासर झूठ है .मुस्लिम औरतों को पता होना चाहिए कि मरने के बाद उनको हमेशा के लिए जहन्नम में डाल दिया जाएगा .चाहे वे कितनी भी नमाजें पढ़ें ,या रोजे रखें .उनका प्यारा रसूल खुद उनको जहन्नम में ठूंस देगा .और वे जहानम से कभी नहीं निकल पाएंगी .यह बात सभी हदीसों में लिखी है .

1 -मुहम्मद का औरतों से नफ़रत का कारण .
सब जानते हैं कि मुहम्मद को अरतों का बहुत शौक था .वह दुनिया की सारी औरतों को अपनी सम्पत्ती मनाता था.और चाहता था कि अरबी ,यहूदी ,रोमन ,इरानी सभी तरह की औरतें उसके पास हों .लेकिन उसके भाग्य में जादातर विधवा औरतें ही आयी थीं ..इतिहासकारों के अनुसार मुहम्मद कुरूप ,मोटा ,स्थूल और भद्दा था ,देखिये -सुंनं अबू दाऊद-किताब 40 हदीस 4731 
.फिर लड़ाई में मुहम्मद के आगे के दांत टूट जाने से वह और बदशक्ल हो गया था .मुहम्मद के दुष्ट स्वभाव और भयानक सूरत के कारण औरतें उस से दूर रहती थीं .इसीलिए मुहम्मद बलात्कार करता था .और मुहमद ने औरतों को भोग्या और दुनिया का सबसे निकृष्ट जीव बता कर औरतोंको जहन्नम के योग्य बताकर अपनी खीज निकाली है ,जो दी गयी हदीसों से प्रकट होती हैं .देखिये -

2 -औरतें निकृष्ट जीव है .
"इब्ने उम्र ने कहा कि रसूल ने कहा कि औरतें दुनिया की सबसे घटिया मखलूक हैं .और्हर तरह से जहन्नम में जाने के योग्य हैं "

बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 31 
बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 6 

3 -औरतें जहन्नम के योग्य है .

सईदुल खुदरी ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि सारी औरतें एक बार नहीं तीन तीन बार जहन्नम में भेजने के योग्य हैं ."
सही मुस्लिम -किताब 3 हदीस 826 .और सुंनं मसाई -जिल्द 2 हदीस 1578 पेज 342 

4 -औरतें जहन्नम का ईंधन हैं .

"इब्ने अब्बास ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि औरतें तो जहन्नम का ईंधन हैं ,जिन से जहन्नम की आग को तेज किया जाएगा ."
बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 124 और मुस्लिम -किताब 36 हदीस 6596 

5 -99 प्रतिशत औरतें जहन्नम जायेंगी 
"इमरान बिन हुसैन ने कहाकि रसूल ने कहा कि ,जहन्नम को औरतों से भर दिया जाएगा .यहांतक कि दूसरों के लिए कोई जगह नहीं रहेगी "
बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 464 
"अब्दुला इब्ने अब्बास ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि ,अल्लाह बिना किसी भेदभाव के सारी औरतों को जहन्नम में दाखिल कर देगा .जाहे वे कितनी ही नमाजी और परहेजदार क्यों न हों "
बुखारी -जिल्द 1 किताब 2 हदीस 28 और बुखारी -जिल्द 2 किताब 2 हदीस 161 

6 -जहन्नम औरतों से ठसाठस भर जायेगी .

"इब्ने अब्बास ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि मैं जहन्नम को औरतों से ठसाठस भरवा दूंगा .और देखूंगा कि कोई खाली जगह न रहे "

बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 125 और बुखारी -जिल्द 6 किताब 1 हदीस 301 और मिश्कात -जिल्द 4 किताब 42 हदीस 24 

7 -अल्लाह ने यह तय कर लिया है 
"सईदुल खुदरी ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि ,अल्लाह ने यह पाहिले से ही तय कर लिया है कि ,वह जितनी भी औरतें है उन सबको जहन्नम की आग में झोंक देगा .ओर इस में किसी भी तरह कि शंका नहीं है ."
बुखारी - जिल्द 7 किताब 62 हदीस 124 .
तिरमिजी -हदीस 5681 और मिश्कात -जिल्द 4 किताब 42 हदीस 24 

8 -औरतों को यह सजाये मिलेंगी 
"सैदुल्खुदारी ने कहाकि ,रसूल ने कहा कि ,जहन्नम में अधिकाँश औरतें ही होंगी .और उनको दर्दनाक सजाएं दी जायेंगी .सबसे पाहिले छोटे छोटे पत्थरों को गर्म किया जाएगा .फिर उन पत्थरों को औरतों की छातियों पर रख दिया जाएगा .जिस से उनकी छातियाँ जल जायेगी .फिर उन गर्म पत्थरों को औरतों के आगे और पीछे के छेदों (vagina और anus )में घुसा दिया जाएगा ,जिस से उनको दर्द होगा ,और यह सब मेरे सामने होगा
बुखारी -जिल्द 1 किताब 22 हदीस 28 
9 -जहन्नम के चौकीदार भी 

"रसूल ने कहा कि जहन्नम के चौकीदार होंगे ,और अगर कोई और बाहर निकलनेकी कोशिश करेगी तो उसे वापिस जहन्नम में डाल दिया जाएगा "इब्ने माजा -किताब१हदीस 113 पेज 96 

10 -जहन्नम कैसी है 

जहन्नम में खून का पानी (मवाद )पिलाया जाएगा .सूरा इब्राहीम -14 :15 -17 
लोहे की बेड़िया होंगी ,और खाने को कांटे होंगे .सूरा मुज्जम्मिल -73 :12
आग से बने हुए कपडे होंगे ,सर पर गर्म पानी डाला जाएगा ,लोहे कि गुर्ज (hooked rods )से धुनाई होगी .
सूरा हज्ज -22 :19 -21
जहन्नम में सदा के लिए रहना होगा ".सूरा अत तौबा -9 :63 

इन सभी विवरणों से साबित होता है कि ,इस्लाम में औरतों के लिए कोई जगह नहीं है .और अल्लाह के साथ रसूल भी औरतों का शत्रु है .जब अलाह ने अभी से यही तय कर लिया है कि वह हरेक औरत को जहन्नम में भेज देगा तो .मुस्लिम औरतें भी जहन्नम में जायेंगी उनका अल्लाह कि इबादत करना बेकार जाएगा .जीवित रहते तो मुस्लिम औरते अलाह के जंगली कानून शरियत के कारण जहन्नम भोग रही हैं ,और मरने पर भी उनको जहन्नम ही मिलेगी ..
इस से बचने का एक ही रास्ता है कि,कुंवारी मुस्लिम लड़कियां फ़ौरन किसी हिन्दू या गैर मुस्लिम लडके से शादी कर लें .ताकी उनकी जन्नत या स्वर्ग में जाकर आराम से रह सकें और इस जीवन में भी अल्लाह के अत्याचारों से बच सकें .

(87/5)