मंगलवार, 3 मई 2016

रसूल की मस्जिद में पेशाब !

इस लेख का शीर्षक देख कर सामान्य लोग अवश्य चौंक जायेगे . और जो लोग इस्लाम के बारें में थोड़ी भी जानकारी रखते होंगे वह इस बात पर विश्वास नहीं करेंगे . क्योंकि आज भी यदि कोई व्यक्ति किसी भी मस्जिद में पेशाब करेगा , तो मुसलमान हंगामा जरुर कर देंगे . फिर रसूल के सामने ही उनकी बनाई गयी मस्जिद में किसी के द्वारा पेशाब करने का सवाल ही नहीं उठता .लेकिन जो लोग ऐसा सवाल उठा रहे हैं उन लोगों को पता होना चाहिए कि जब आज भी मुसलमान इस्लाम को फैलाने के लिए आतंकवाद जैसे हथकंडे अपना सकते हैं ,तो रसूल इस्लाम फैलाने के लिए अपनी ही मस्जिद में किसी के द्वारा पेशाब करने पर चुप रहे ,तो इस्लाम के शरीयती कानून पर सवाल जरुर उठ सकता है .क्योंकि इस लेख में दिए गए सभी तथ्य प्रामाणिक और सत्य हैं .
लेकिन इस विषय को और स्पष्ट करने से पहले हमें इस्लामी शरियत के पाक ( पवित्र ) और नापाक ( अपवित्र ) सम्बन्धी बेतुके और परस्पर विरोधी नियमों को समझने की आवश्यकता है .फिर रसूल की मस्जिद और उसमे पेशाब करने की बात का कारण बताया जायेगा ,
1-काफ़िर और मुशरिक बड़े नापाक 
इस्लाम की बुनियाद नफ़रत और भेदभाव पर रखी गयी है .जो लोग कहते हैं कि इस्लाम मनुष्यों में समानता की शिक्षा देता है , वह इस आयत को ध्यान से पढ़ें ,
"हे ईमान वालो , मुशरिक तो नापाक हैं ,तो इस साल के बाद वह काबा के पास न फटकने पायें " सूरा -तौबा 9:28
(इस आयत की तफसीर में कहा है , सभी गैर मुस्लिम , मुशरिक , नास्तिक ,बहुदेववादी ,विचारों और शारीरिक रूप से नापाक होते हैं .अर्थात अशुद्ध होते हैं )
वैसे तो इस्लाम की नजर में सभी गैर मुस्लिम नापाक हैं
2-शरियत के मुताबिक पाक और नापाक 
अधिकांश मुस्लिम दशों में शरियत का कानून लागू है , जो कुरान और हदीसों पर आधारित है . शरियत में काफिरों और मुशरिकों के आलावा इन चीजों को अपवित्र ( नापाक ) बताया गया है .
इस्लामी शरियत के अनुसार पवित्र वस्तुओं को पाक अरबी " ताहिरा -: طهارة‎, " मेंकहा जाता है सभी वस्तुओं और प्राणियों में कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिन्हें अपवित्र ,नापाक और अरबी में "नजस -نجس " कहा जाता है .शरियत ने नापाक चीजों के नाम इस प्रकार दिए हैं
1. urine;मूत्र - بول    ,2. stool;मल-   براز   -3. semen;वीर्य -  المني   -4. blood;खून-  دم   -5. corpses-मृतदेह - الجثث   -6. dogs;कुत्ते - الكلاب -7. pigs;सुअर -الخنازير   -8. kafir;काफिर -  الكفار  -
इस सूची के अनुसार अपवित्र वस्तुओं में मूत्र का नाम सबसे पहले है . अर्थात मूत्र यानि पेशाब सबसे नापाक चीज है .और नापाक चीजों में वीर्य का नंबर तीसरा है लेकिन शरियत के इस नियम में सब से बड़ा दुर्गुण यह है ,कि जहाँ एक जगह किसी चीज को नापाक बताया गया है वहीं दूसरी जगह पर उसी चीज को पवित्र मान लिया गया है .इसके प्रमाण देखिये ,
.3-वीर्य नापाक है 
इस हदीस में वीर्य (semen ) को नजिस यानी नापाक बताया गया है ,
"अल्कामा और अस्वद ने कहा कि सवेरे के समय एक व्यक्ति आयशा के घर के सामने से गुजर रहा था .उसने देखा कि आयशा रसूल के कपड़ों से वीर्य के धब्बे धो रही थी .जब उस व्यक्ति ने आयशा से कारण पूछा तो ,आयशा ने बताया कि वीर्य नापाक ( नजिस ) होता है . और यदि उसके धब्बे धोने के लिए पानी नहीं हो ,तो नाखूनों से खुरच कर दाग मिटा देना चाहिए " 
"وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا خَالِدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ خَالِدٍ، عَنْ أَبِي مَعْشَرٍ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَلْقَمَةَ، وَالأَسْوَدِ، أَنَّ رَجُلاً، نَزَلَ بِعَائِشَةَ فَأَصْبَحَ يَغْسِلُ ثَوْبَهُ فَقَالَتْ عَائِشَةُ إِنَّمَا كَانَ يُجْزِئُكَ إِنْ رَأَيْتَهُ أَنْ تَغْسِلَ مَكَانَهُ فَإِنْ لَمْ تَرَ نَضَحْتَ حَوْلَهُ وَلَقَدْ رَأَيْتُنِي أَفْرُكُهُ مِنْ ثَوْبِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَرْكًا فَيُصَلِّي فِيهِ ‏
सही मुस्लिम किताब 2 हदीस 566
4-योनि का रस पवित्र है 
Vaginal Fluid is pure!
सुन्नी मुस्लिम और शाफ़ई विद्वान् "इमाम इब्ने हंजर अल हैतमी अल मक्की- ابن حجر الهيتمي المكي - " जिनका जन्म हिजरी 909 यानी सन 1503 ईसवी में हुआ था .इन्होने अपनी प्रसिद्ध किताब "तुहफ़तुल मुहताज बिशरहे मिन्हाज -تـحـفـة الـمـحـتـاج بـشـرح الـمـنـهـاج   " की जिल्द 1 में पेज 300 और 301 पर सम्भोग के बाद औरत की योनि से टपकने वाले स्राव (Vaginal Fluid ) के बारे में जो फतवा दिया है , वह इस प्रकार है .
सम्भोग के बाद औरत की योनि से रिसने , या टपकने वाले रस को अरबी में ".रतूबतुल फुर्ज  -رطوبة الفرج " कहा जाता है .
इमाम कहते हैं ,जब पुरुष के अंग औरत की योनि में पहुँच जाये और औरत की योनि से जो स्राव निकलता है , वह शुद्ध होता है .और योनि से  किसी और कारण से निकलने वाला रस शुद्ध होता है .

"it is pure. When it comes from where the male part reaches during intercourse"
"هو محض. عندما يتعلق الأمر من حيث يصل الجزء ذكر أثناء الجماع، هو محض. عندما يأتي من وراء حيث يصل الجزء ذكر أثناء الجماع، فإنه نجس.  "

"यदि महिला को योनि से निकलने वाले स्राव के बारे में शंका हो कि वह कहाँ से टपक रहा है , तो योनि से निकलने वाला स्राव शुद्ध माना जायेगा ."

 If she doubts regarding where it came from, then it is assumed to be pure.

"إذا كانت الشكوك حول من أين جاء، ثم يفترض أن تكون نقية."
Tuhfat al-Muhtaj v. 1, p. 300-01

5-पेशाब नापाक है 
"इब्न अल हाकम ने कहा कि पेशाब करते समय यदि रसूल के शरीर के किसी हिस्से पर पेशाब के छींटे पड़ जाते थे ,तो रसूल फ़ौरन उस अंग को पानी से धो देते थे .क्योंकि पेशाब नजिस यानी नापाक होती है .
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ الْمُهَاجِرِ، حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ عَمْرٍو، حَدَّثَنَا زَائِدَةُ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنِ الْحَكَمِ، أَوِ ابْنِ الْحَكَمِ عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بَالَ ثُمَّ تَوَضَّأَ وَنَضَحَ فَرْجَهُ ‏.‏
सुन्नन अबी दाऊद - किताब 1 हदीस 168
6-रसूल की मस्जिद 
जब अरब  के बद्दू भी मुसलमान बनने लगे , और ऐसे नए मुसलमानों की संख्या बढ़ गयी , तो मुहम्मद साहब ने सन622 अपने इन्हीं साथियों के साथ मिल कर अपने घर के पास ही एक मस्जिद बनवा दी . जो चारों तरफ से खुली हुई थी . और उस पर खजूर के पत्तों की छत थी .यही दुनिया की पहली मस्जिद थी .आज उसी स्थान पर जो पक्की मस्जिद बनी हुई है , उसे " मस्जिदे नबवी - اَلْمَسْجِد اَلنَّبَوِي‎" कहा जाता है .इस्लाम में मक्का के काबा के बाद मदीना की इसी मस्जिद को आदर दिया जाता है . और पवित्र माना जाता है .लेख में इसी मस्जिद के बारे में चर्चा की जा रही है ,मुहमद साहब ने इस्लाम को फैलाने के इरादे से इसी मस्जिद में अपने लोगों को पेशाब करने दिया था . जो इन हदीसों में दिया गया है 
7-मस्जिद में पेशाब 
मुहम्मद साहब ने अपनी बनवाई गयी मस्जिद में लोगों को पेशाब करने दिया , और कोई विरोध नहीं किया , यह इन हदीसों में स्पष्ट लिखा है .
हदीस-1.
"अनस बिन मलिक ने कहा कि रसूल ने देखा कि उनके कुछ बद्दू साथी उनकी मस्जिद में खड़े होकर पेशाब कर रहे हैं ,तो रसूल ने लोगों से कहा तुम उनको नहीं रोको . जब तक वह अपना काम पूरा न कर लें . फिर रसूल ने उस जगह पर पानी के कुछ छींटें डाल दिए . और कहा अब यह जगह शुद्ध हो गयी "

حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، قَالَ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم رَأَى أَعْرَابِيًّا يَبُولُ فِي الْمَسْجِدِ فَقَالَ ‏ "‏ دَعُوهُ ‏"‏‏.‏ حَتَّى إِذَا فَرَغَ دَعَا بِمَاءٍ فَصَبَّهُ عَلَيْهِ‏.‏ "
 सही बुखारी -जिल्द 1 किताब 4 हदीस 218 
हदीस-2
"अबू हुरैरा ने कहा कि जब कुछ बद्दुओं ने इस्लाम स्वीकार कर लिया , और रसूल ने अपनी मस्जिद भी बनवा ली . तो कुछ बद्दू आकर रसूल की मस्जिद में खड़े होकर पेशाब करने लगे. जब लोगों ने यह बात रसूल को बतायी तो उन्होंने लोगों से कहा , इनको ऐसा करने से नहीं रोको .और जब यह बद्दू पेशाब कर चुकें ,तो इनको जाने दो .हो सकता है कि यह बाद में और लोगों को अपने साथ बुलाएं , और इस से इस्लाम के प्रचार में आसानी हो जाए "

حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ، قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، قَالَ أَخْبَرَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ، أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ، قَالَ قَامَ أَعْرَابِيٌّ فَبَالَ فِي الْمَسْجِدِ فَتَنَاوَلَهُ النَّاسُ، فَقَالَ لَهُمُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ دَعُوهُ وَهَرِيقُوا عَلَى بَوْلِهِ سَجْلاً مِنْ مَاءٍ، أَوْ ذَنُوبًا مِنْ مَاءٍ، فَإِنَّمَا بُعِثْتُمْ مُيَسِّرِينَ، وَلَمْ تُبْعَثُوا مُعَسِّرِينَ ‏"‏‏.‏
 सही बुखारी -जिल्द 1 किताब 4 हदीस 219
आज मुसलमान इस्लाम को फ़ैलाने के लिए जितने भी अनैतिक काम कर रहे हैं , वह सभी मुहम्मद साहब से प्रेरित होकर और उनका अनुसरण कर के ही कर रहे हैं . लेकिन इस बात में किसी को भी शंका नहीं होना चाहिए कि शरियत के कानून दोगले होते हैं . और उनके मानने वालों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए .
(200/104)
http://sunnah.com/search/making-water-inthe-mosque

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2016

कश्मीर स्वर्ग से नर्क कैसे बना ?

कश्मीर को   भारत  का स्वर्ग   कहा जाता है . लेकिन इसको  नर्क  बनाने  में  नेहरू  की  मुस्लिम परस्ती   जिम्मेदार है . जो आज  तक चली  आ रही है . चूँकि देश  का विभाजन धर्म  के आधार  पर हुआ था .और जिन्ना जैसे  कट्टर नेताओं का तर्क था कि  मुस्लिम  बहुल  कश्मीर  के बिना  पाकिस्तान  अपूर्ण  है . इसलिए पाकिस्तान  प्रेरित उग्रवादी  और पाक सेना मिल   कर कश्मीर  में ऐसी  हालत  पैदा  करना चाहते हैं ,जिस से  कश्मीर के हिन्दू  भाग   कर किसी  अन्य  प्रान्त में  चले  जाएँ .कांगरेस  की अलगाववादी  नीति  के  कारण  हालत इतनी गंभीर हो गयी कि   हिन्दू श्रीनगर के  लाल चौक   में खुले आम  तिरंगा  भी नहीं  फहरा  सकते हैं .जबकि हिन्दू  हजारों  साल से कश्मीर में  रहते  आये हैं ,और  महाभारत  के समय  से ही कश्मीर पर हिन्दू  राजा राज्य  करते  आये हैं .  इसके लिए हमें  इतिहास के पन्नों  में   झांकना होगा  ,कि  कश्मीर  को विशेष  दर्जा  देने का  क्या औचित्य  है ,?
1-कश्मीर का प्राचीन  इतिहास 
कश्मीर  के प्राचीन इतिहास    का   प्रमाणिक  इतिहास   महाकवि  " कल्हण "  ने  सन  1148 -49  में  अपनी  प्रसिद्ध  पुस्तक " राजतरंगिणी "  में  लिखा  था . इस पुस्तक में   8 तरंग   यानि  अध्याय   और संस्कृत  में कुल    7826  श्लोक  हैं . इस   पुस्तक के  अनुसार  कश्मीर  का  नाम  " कश्यपमेरु  "   था  .  जो  ब्रह्मा  के  पुत्र  ऋषि  मरीचि  के पुत्र  थे .चूँकि  उस समय में  कश्मीर  में  दुर्गम  और ऊंचे पर्वत थे ,  इसलिए ऋषि कश्यप ने लोगों   को आने जाने के लिए   रास्ते  बनाये थे .  इसीलिए  भारत के इस   भाग  का नाम " कश्यपमेरू " रख  दिया गया  , जो बिगड़  कर  कश्मीर    हो गया  .राजतरंगिणी  के  प्रथम  तरंग में  बताया गया है  कि सबसे पहले  कश्मीर  विधिवत     पांडवों   के  सबसे  छोटे  भाई  सहदेव   ने राज्य    की  स्थापना  की थी , और  उस समय   कश्मीर में   केवल  वैदिक   धर्म   ही  प्रचलित  था .फिर  सन  273  ईसा  पूर्व   कश्मीर में  बौद्ध  धर्म   का  आगमन  हुआ  . फिर भी कश्मीर में  सहदेव  के वंशज  पीढ़ी  दर पीढ़ी   कश्मीर  पर 23  पीढ़ी  तक  राज्य  करते  रहे ,यद्यपि  पांचवीं सदी में " मिहिरकुल "   नामके  " हूण " ने  कश्मीर  पर  कब्ज़ा  कर लिया  था . लेकिन  उसने शैव  धर्म  अपना  लिया  था .
2-कश्मीर  में इस्लाम 
इस्लाम  के  नापाक  कदम  कश्मीर में सन 1015  में   उस समय  पड़े  जब  महमूद  गजनवी ने  कश्मीर  पर हमला  किया था  .लेकिन  उसका उद्देश्य  कश्मीर में इस्लाम   का प्रचार करना नहीं   लूटना था , और लूट मार कर वह वापिस गजनी  चला गया . उसके बाद ही कश्मीर पर दुलोचा  मंगोल  ने  भी हमला  किया . लेकिन  उसे तत्कालीन  कश्मीर के राजा  सहदेव   के मंत्री ने  पराजित करके  भगा  दिया . और सन  1320  में  कश्मीर में  "रनचिन " नामका  तिब्बती  शरणार्थी सेनिक  राज के पास   नौकरी के लिए  आया  . उसकी वीरता  को देख कर राजा ने  उसे सेनापति  बना  दिया . रनचिन  ने  राज से  अनुरोध  किया कि  मैं  हिन्दू  धर्म  अपनाना  चाहता  हूँ .लेकिन  पंडितों  ने  उसके अनुरोध का  विरोध  किया  और कहा कि दूसरी जाती का होने के कारण  तुम्हें  हिन्दू  नहीं  बनाया   जा सकता  .कुछ  समय के  बाद  राजा  सहदेव   का  देहांत  हो  गया  और उसकी पत्नी " कोटा  रानी  "  राज्य  चलाने लगी   और  उसने  " रामचन्द्र " को अपना  मंत्री  बना   दिया .   उस समय  कश्मीर में कुछ  मुसलमान   मुल्ले सूफी बन कर कश्मीर में   घुस  चुके  थे . ऐसा एक  सूफी  " बुलबुल  शाह  " था .उसने  रनचिन   से कहा  यदि  हिन्दू पंडित तुम्हें  हिन्दू नहीं   बनाते  तो  तुम  इस्लाम  कबुल   कर लो .इसा तरह  बुलबुल शाह ने  रनचिन  कलमाँ   पढ़ा कर  मुसलमान   बना दिया . जिस जगह  रनचिन  मुसलमान  बना था उसे  बुलबुल  शाह का  लंगर  कहा  जाता है  .जो  श्रीनगर के पांचवें  पुल के पास है . रन चिन   ने  अपना  नाम   " सदरुद्दीन  "   रखवा   लिया  था .बुलबुल शाह   की संगत  में  रनचिन  हिन्दुओं   का घोर शत्रु  बन गया . और 6 अक्टूबर  1320  को   रन चिन   ने धोखे से  मंत्री   रामचन्द्र   की  हत्या  कर दी .मंत्री   को  मरने के बाद   रनचिन   अपना  नाम " सुलतान  सदरुद्दीन  ' रख  लिया .फिर   अफगानिस्तान  से   मुसलमानों को   कश्मीर में  बुला कर बसाने लगा . और  करीब  सत्तर  हजार  मुसलमान की  सेना  बना ली  .  और कुछ  समय बाद  सन  1339 में  कोटा रानी   को  को कैद  कर लिया और  उस से  बलपूर्वक  शादी   कर  ली .सदरुद्दीन   के सैनिक  प्रति दिन  सैकड़ों  हिन्दुओं   का  क़त्ल  करते थे .इसलिए कुछ लोग  यातो  दर के कारण  मुसलमान  बन गए या भाग कर   जम्मू  चले   गए  . और  कश्मीर  घाटी  हिन्दुओं  से खाली  हो  गयी .

लेकिन   वर्त्तमान  कांगरेस   की  सरकार    जम्मू को भी  हिन्दू विहीन   बनाने में   लगी  हुई है .  काश  उस समय  महर्षि  दयानंद होते   जो  रनचिन  को  मुसलमान   नहीं    होने देते  .
 इसलिए    हिन्दुओं   को चाहिए कि सभी   हिन्दुओं   को अपना  भाई  समझे  , और जो भी  हिन्दू धर्म  स्वीकार करना चाहे उसे   हिन्दू बना कर अपने  समाज में शामिल  कर लें  .  और  हिन्दू विरोधी  कांगरेस का  हर प्रकार   से विरोध   करें  .

(200/130)

मंगलवार, 5 अप्रैल 2016

अल्लाह की गवाही - धरती भी माता होती है

हजारों  साल  से  भारत   के  हिन्दू  भारत भूमि  को  अपनी  माता  मान  कर  ,  उस पर सम्मान प्रकट  करने के  लिए " भारत माता  की जय "  का  नारा  लगाते  आए  हैं   ,  लेकिन  मुसलमानों  की  आदत है  ,कि वह  किसी  न  किसी  कुतर्क   का  सहारा  लेकर  हिन्दुओं  की  मान्यताओं  और  आस्थाओं   का  विरोध  जरूर   करते  है  ,  सब  जानते  हैं  कि  कुछ  ही  समय  पहले  जे एन  यू  के  मुस्लिम  लडके  के   इशारे से   हिन्दू लड़कों   ने भी   देश  विरोधी   नारे  लगाए  थे  ,  और  उनका  परोक्ष  समर्थन  राहुल  गन्दी  ने  कर  दिया  ,  इस  से पूरे  देश में  भारत  विरोधी  माहौल  पैदा  होने लगा  ,  इसलिए   सर  संघ  चालक  श्री  मोहन  भागवत  ने कहा  था कि  भारत  के सभी    लोगों  के  लिए  " भारत  माता  की  जय " बोलना  अनिवार्य  कर  दिया जाना  चाहिए  ,लेकिन  जिस  दिन  भागवत  जी  ने  यह  बात   कही  ,उसके  कुछ   समय बाद ही   , दिनांक  1  अप्रेल   2016  को   दारुल उलूम   देवबंद    के  मुल्लों   के    एक  फतवा   जारी  कर  दिया  जिसमे  मुसलामानों    को  निर्देश  दिया  गया  है   ,कि  वह  न तो " वन्दे  मातरम  "गायें  और  न  " भारत  माता  की जय ' बोलें  ,.और मुल्लों ने यह तर्क देकर फतवा जारी करते हुए दारुल उलूम ने कहा- 'इंसान ही इंसान को जन्म दे सकता है। धरती मां कैसे हो सकती है? 

दुर्भाग्य  से  भारत   में  आर्यसमाज   , विश्व  हिन्दू  परिषद   , हिन्दू  महा  सभा   जैसे   संगठन  मौजूद  हैं   , जिनमे हजारों     विद्वान्  हैं  ,  लेकिन  किसी   ने  भी   मुल्लों   के  इस कुतर्क  का  मुंह तोड़  जवाब   नहीं  दिया  ,   यहाँ  तक  महेंद्र  पाल आर्य   जैसे    पूर्व   इमाम   ने भी   मुल्लों    का खंडन  नहीं    कर  सके   , उलटे  कई  हिन्दू नेताओं   ने  यहाँ  तक कह दिया  कि हम  लोगों  पर  भारत  माता  की  जय  बोलने दवाब   नहीं   डालेंगे  ,  ऐसा कहने के पीछे  इन  धर्म  के ठेकेदारों  की घोर  अज्ञानता   है  ,  जैसे  मुल्लों  ने मुसलमानों  को  कट्टर  और लकीर  का  फ़क़ीर  बना दिया  ,  इन  हिन्दू  नेताओं  ने हिन्दुओं की  तर्क बुद्धि  पर  ताला   मार  दिया  , हिन्दुओं  के  दिमागों   में यह  बात  ठूंस ठूंस  कर  भर दी  गयी कि हिन्दू  धर्म  सर्वश्रेष्ठ सबसे  बड़ा   है  ,  इस गलत  फहमी   से  हिन्दू    न  तो  अन्य  धर्म की  जानकारी  प्राप्त  करते  है  और  न    उनका  तुलनात्मक   अध्यन   ही करते  हैं  , मुल्लों  को  जवाब देने की  बात  तो   दूर  है, और  जब  मुल्लों   के  फतवा   का जवाब देने के लिए  कोई आगे  नहीं  निकला  तो  , हमने  मुल्लों    को    जवाब देने  का  निश्चय   किया  ,  क्योंकि  कल  रात  को  9 बजे  अमेरिका के  सेंट  लुइस  निवासी  मेरी  बहिन रेणु  शर्मा  से मैंने वादा   कर दिया था .अतः  हम  अपना  वादा पूरा करने के लिए फ़तवा  के झूठ  का  भंडा  फोड़  रहे   हैं ,  
 1-मुल्लों   का  कुतर्क 

 मुल्लों    ने  फतवा में   यह  कुतर्क  दिया "इंसान ही इंसान को जन्म दे सकता है। धरती मां कैसे हो सकती है? 

देखिये उर्दू   फतवा की फोटो 
http://images.jansatta.com/2016/04/bharat-mata-ki-jai-620x400.jpg?w=850

इस फ़तवा को  पढ़  कर   हम  दावा  करते   हैं   कि  या  देवबद  में  मुल्लों   को  कुरान का  इल्म   नहीं   , या  वह   जानबूझ   कर  लोगों   को  गुमराह   कर   रहे   हैं   , और   कुरान   उस आयत  को  झूठा  साबित  करने की   हिमाकत  कर  रहे  हैं  जिसमे अल्लाह  ने  एक  शहर   ( जमीन )   को  शहरों  की   माता  कहा  है   ,    और  जब खुद अल्लाह  पूरी  जमीन   के  एक  हिस्से  एक   शहर   को शहरों  की   माता ( Mother of Cities )   कहता  है   , तो  हमें स्वीकार   करना  होगा  कि  निर्जीव  जमीन   के  बच्चे  भी  हो सकते है   , 

2-शहरों  की माता  मक्का  है 
मुसलमान   जिस मक्का  शहर को  परम  पवित्र   मानते  हैं   ,  उस  शहर  " मक्का -   مكة‎  "   नाम  पुरी  कुरान   में नहीं  मिलता  ,  बल्कि  इसकी  जगह  "बक्कह -   بكة‎    " शब्द  मिलता  है  , जो कुरान की  सूरा  -आले  इमरान   3 :96     में   है   ,  अरबी   व्याकरण  के  अनुसार  बक्कह - بكة‎ "  शब्द    स्त्रीलिंग ( feminine Gender )    अर्थात   बक्कह   वर्त्तमान  मक्का     एक   स्त्री   है   ,इसीलिये  स्त्री  होने के  कारण  अल्लाह ने बक़्का ( मक्का )  को शहरों  की  माता    कह   दिया  , "  Umm al-Qurā (أم القرى, "Mother of All Cities  " यह  अति  महत्त्व  पूर्ण  बात  अल्लाह  ने  सिर्फ  एक  बार  कुरान    की सूरा  -आले इमरान  6:92  में  दी   है   ,  पूरी  आयत   अरबी में  , हिंदी  लिपि   में  और  हिंदी  अंगरेजी   अर्थ   दिए  जा  रहे   हैं  

1. मूल  अरबी  आयत 

 وَهَـٰذَا كِتَابٌ أَنزَلْنَاهُ مُبَارَكٌ مُّصَدِّقُ الَّذِي بَيْنَ يَدَيْهِ وَلِتُنذِرَ أُمَّ الْقُرَىٰ وَمَنْ حَوْلَهَا ۚ وَالَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ يُؤْمِنُونَ بِهِ ۖ وَهُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ  

2 -हिंदी लिप्यांतरण 

"व् हाजा   किताबुं  अंजलनाहु ,मुबारकुन  मुसद्दिकु  अल्लजी  बैन यदीहि  व् लि तुंजिर  उम्मुल कुरा  व्  मन  हौलहा  वल्लजीना  यूमिनून बिल  अखिरती यूमिनूंन  बिही व् हुम् अला  सलातिहिम युहाफिजून  "

3-हिंदी  अनुवाद 

"यह किताब  जिसे हमने उतारा   है  ,बरकत वाली  है  , और उसकी  पुष्टि  करने  वाली  हैं  ,जो  इस से पहले उतारी  गयी   , ताकि  तुम  नगरों  की  माता  (मक्का ) और आसपास वालों को सचेत  करो  ,और जो लोग आखिरत  पर ईमान  लाते  हैं  वे  अपनी  नमाज  की  रक्षा  करते  हैं  "

4-Eng  Translation


"this  book We have revealed it,blessed,confirming which (came) before its hands,so that you may warn (the) mother(of) the cities
   and who(are) around it.And those who   believe  in the Hereafter,they believe  in it,and they, over  their prayers  (are) guarding.  "

,
नॉट  - इस आयत  में  अरबी  के कुल 22  शब्द  हैं  ,10  वां  शब्द  " उम्म -  أُمَّ "  है  , इसका अर्थ  माता(Mother)है  , और  11 वां शब्द  " कुरा -  الْقُرَىٰ   "  है जो  बहुवचन   (Plural )     इसका अर्थ  नगरों  ( Cities )   , और " उम्मुल  कुरा -أم القرى "का अर्थ नगरों  की  माता  है  ,  \

(سورة الأنعام, Al-An'aam, Chapter #6, Verse #92


दारूल उलूम देवबंद ने 'भारत माता की जय' के खिलाफ फतवा देते हुए कहा कि इंसान ही इंसान को जन्म दे सकता है, तो धरती मां कैसे हो सकती है।अब  देवबंद  के  मुल्ले बताएं   कि जब  तुम्हारा  अल्ल्लाह  बेजान  भूमि   यानि   मक्का  को  शेरोन  की  माता  कह  रहा  है  ,  यानि मक्का  को  ऐसी माता   मान  रहा  है  कई  शहर  रूपी   बच्चे  हों   ,  क्योंकि  बिना   बच्चे की   स्त्री  को  माता   नहीं   कहा   जा  सकता  ,  
  और  जब  एक शहर  मक्का  कई  शहरों  की  माता   हो  सकती    है  ,  तो  कई  प्रांतो   , सैकड़ों    शहरों  पैदा करने  वाली   भारत  माता   ,   सबकी  माता  क्यों    नहीं       मानी   जा  सकती   ? 

मेरी  सभी  मुल्ले मौलवियों   ,  मुफ्तियों    ,  और   मुसलमानों  को  खुली  चुनौती   है  ,कि  वह  कुरान की  इस  आयत   को  गलत  साबित  कर के  दिखाए   ,   फिर   कहें की जमीन   कभी  माता  नहीं     हो  सकती  ,

मेरा उन  सभी    हिन्दू   नेताओं    और हिन्दू  संगठनों   के प्रमुखों    से  अनुरोध  है  , जो  खुद को  भारत  माता  के भक्त होने  का  दावा   करते   हैं   , इस  लेख   को  अखबारों  और  टी  वालों   को  भेज   दें  ,    ताकि   देवबंदियों  का फतवा  फट  जाये  ,

भारत  माता  की   जय  , भारत  माता  की   जय  , भारत  माता  की   जय  , 

حيّا اُمٌُ الهِند

(317)

बुधवार, 2 मार्च 2016

बलात्कार :जिहाद का हथियार

जिहाद दुनिया का सबसे घृणित कार्य और सबसे निंदनीय विचार है .लेकिन इस्लाम में इसे परम पुण्य का काम बताया गया है .जिहाद इस्लाम का अनिवार्य अंग है .मुहम्मद जिहाद से दुनिया को इस्लाम के झंडे के नीचे लाना चाहता था .मुहलामानों ने जिहाद के नाम पर देश के देश बर्बाद कर दिए .हमेशा जिहादियों के निशाने पर औरतें ही रही हैं .क्योंकि औरतें अल्लाह नी नजर में भोग की वस्तु हैं .और बलात्कार जिहाद का प्रमुख हथियार है .मुसलमानों ने औरतों से बलात्कार करके ही अपनी संख्या बढाई थी .मुहम्मद भी बलात्कारी था .मुसलमान यही परम्परा आज भी निभा रहे है .यह रसूल की सुन्नत है ,कुरान के अनुसार मुसलमानों को वही काम करना चाहिए जो मुहम्मद ने किये थे .कुरान में लिख है-

"जो रसूल की रीति चली आ रही है और तुम उस रीति(सुन्नत )में कोई परवर्तन नहीं पाओगे "सूरा -अल फतह 48 :23 

"यह अल्लाह की रीति है यह तुम्हारे गुजर जाने के बाद भी चलती रहेगी .तुम इसमे कोई बदलाव नहीं पाओगे .सूरा -अहजाब 33 :62 
"तुम यह नहीं पाओगे कि कभी अल्लाह की रीति को बदल दिया हो ,या टाल दिया गया हो .सूरा -फातिर 33 :62 

यही कारण है कि मुसलमान अपनी दुष्टता नही छोड़ना चाहते .जिसे लोग पाप और अपराध मानते हैं ,मुसलमान उसे रसूल की सुन्नत औ अपना धर्म मानते है .और उनको हर तरह के कुकर्म करने पर शर्म की जगह गर्व होता है .बलात्कार भी एक ऐसा काम है .जो जिहादी करते है -

1 -बलात्कार जिहादी का अधिकार है 

"उकावा ने कहा की रसूल ने कहा कि जिहाद में पकड़ी गई औरतों से बलात्कार करना जिहादिओं का अधिकार है .

बुखारी -जिल्द 1 किताब 5 हदीस 282 

"रसूल ने कहा कि अगर मुसलमान किसी गैर मुस्लिम औरत के साथ बलात्कार करते हैं ,तो इसमे उनका कोई गुनाह नहीं है .यह तो अल्लाह ने उनको अधिकार दिया है ,औ बलात्कार के समय औरत को मार मी सकते हैं"

बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 132 

बुखारी -जिल्द 1 किताब 52 हदीस 220 


2 -जिहाद में बलात्कार जरूरी है 

सईदुल खुदरी ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि सामूहिक बलात्कार करने से लोगों में इस्लाम की धाक बैठ जाती है .इसलिए जिहाद में बलात्कार करना बहुत जरूरी है .बुखारी जिल्द 6 किताब 60 हदीस 139 

3 -बलात्कार से इस्लाम मजबूत होता है 

"इब्ने औंन ने कहा कि,रसूल ने कहा कि किसी मुसलमान को परेशां करना गुनाह है ,और गैर मुस्लिमों को क़त्ल करना और उनकी औरतों के साथ बलात्कार करना इस्लाम को आगे बढ़ाना है.बुखारी -जिल्द 8 किताब 73 हदीस 70 

"रसूल ने कहा कि मैंने दहशत और बलात्कार से लोगों को डराया ,और इस्लाम को मजबूत किया .बुखारी -जिल्द 4 किताब 85 हदीस 220 

"रसूल ने कहा कि ,अगर काफ़िर इस्लाम कबूल नहीं करते ,तो उनको क़त्ल करो ,लूटो ,और उनकी औरतों से बलात्कार करो .और इस तरह इस्लाम को आगे बढ़ाओ और इस्लाम को मजबूत करो.बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 464 

4 -माल के बदले बलात्कार 

"रसूल ने कहा कि जो भी माले गनीमत मिले ,उस पर तुम्हारा अधिकार होगा .चाहे वह खाने का सामान हो या कुछ और .अगर कुछ नहीं मिले तो दुश्मनों कीऔरतों से बलात्कार करो ,औए दुश्मन को परास्त करो .बुखारी -जिल्द 7 किताब 65 हदीस 286 .

(नोट -इसी हदीस के अनुसार बंगलादेश के युद्ध में पाकिस्तानी सेना ने बलात्कार किया था ) 

5 -बलात्कार का आदेश ' 

"सैदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने अपने लोगों (जिहादियों )से कहा ,जाओ मुशरिकों पर हमला करो .और उनकी जितनी औरतें मिलें पकड़ लो ,और उनसे बलात्कार करो .इस से मुशरिकों के हौसले पस्त हो जायेंगे .बुखारी -जिल्द 3 किताब 34 हदीस 432 

6 -माँ बेटी से एक साथ बलात्कार 

"आयशा ने कहा कि .रसूल अपने लोगों के साथ मिलकर पकड़ी गई औरतों से सामूहिक बलात्कार करते थे .और उन औरतीं के साथ क्रूरता का व्यवहार करते थे .बुहारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 67 

"सैदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने 61 औरतों से बलात्कार किया था .जिसमे सभी शामिल थे .औरतों में कई ऎसी थीं जो माँ और बेटी थीं हमने माँ के सामने बेटी से औए बेटी के सामने माँ से बलात्कार किया .मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3371 और बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 288 

7 -बलात्कार में जल्दी नहीं करो 

"अ ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,पकड़ी गयी औरतो से बलात्कार में जल्दी नहीं करो .और बलात्कार ने जितना लगे पूरा समय लगाओ "

बुखारी -जिल्द 2 किताब 23 हदीस 446 .

अब जो लोग मुसलमानों और मुहम्मद को चरित्रवान और सज्जन बताने का दवा करते हैं ,वे एक बार फिर से विचार करे, इस्लाम में अच्छाई खोजना मल-मूत्र में सुगंध खोजने कि तरह है .आप एक बार मुस्लिम ब्लोगरो द्वारा इस्लाम और मुहम्मद के बारे में लिखी हुई झूठी बातों को पढ़िए फिर दिए तथ्यों पर विचार करके फैसला कीजिये
अधिक जानकारी के लिए यह अंगेजी ब्लॉग देखें

http://nakedmuhammad.blogspot.com/

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शनिवार, 30 जनवरी 2016

भारत में 21 प्रतिशत मुस्लिम अपराधी

अपने 60  साल   के शासन  ने  कांग्रेस ने  भारतीयों   को सेकुलरज्म   का ऐसा रोग  लगा दिया कि  उनकी  बुद्धि   में लकवा मार गया  , वह  मान बैठे हैं कि अपराधियों   का  कोई  धर्म  नहीं होता , और  मुसलमान  कभी  अपराधी या  आतंकी  नहीं   हो  सकते , फिर भी जब  मुस्लिम अपराधी  पकड़े  जाते हैं   तो भी  अखबार  और टी  वि  वाले उनको मुस्लिम   की  जगह एक  समुदाय   कहते हैं  , ऐसे बहुत कम   लोग हैं जो  निडर होकर आतंकियों   को  मुसलमान    कह देते हैं  ,

भारत सरकार,गृह मंत्रालय के संलग्‍नक कार्यालय नई दिल्‍ली स्थित राष्‍ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो(National Crime Records Bureau )द्वारा    भारत की पुलिस के आधुनिकीकरण हेतु भारतीय पुलिस को सूचना प्रौद्योगिकी में सशक्‍त करने का अधिदेश राष्‍ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो को दिया गया है ।

रा.अ.रि.ब्‍यू.(N.C.R.B.)देश भर में "अपराध अपराधी सूचना प्रणाली (अ.अ.सू.प्र.)के अंतर्गत प्रत्‍येक राज्‍य अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो एवं जिला अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो में 762सर्वर-आधारित कम्‍प्‍यूटर सिस्‍टम स्‍थापित कर चुका है,ताकि अपराध,अपराधियों से संबंधित राष्‍ट्रीय स्‍तर डाटा बेस को व्‍यवस्थित किया जा सके .

ब्यूरो के अनुसार देश की जेलों में सजा काट रहे कुल कैदियों (3.85 लाख) में से केवल मुस्लिम अपराधियों की संख्या 53 हजार 836 (21 प्रतिशत) हैं | इसमें भी उत्तर प्रदेश के जेलों में ही मुस्लिम कैदियों की संख्या देश में सबसे ज्यादा है, उसके बाद बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल का स्थान है।

सिख अपराधियों की संख्या (सजायाफ्ता और विचाराधीन) 4 प्रतिशत है।
और देश की जनसंख्या में दो प्रतिशत की भागीदारी करने वाले क्रिश्चियन का (सजायाफ्ता और विचाराधीन) कैदियों आंकड़ा भी   4 प्रतिशत है।
जबकि भारत की कुल जनसंख्या का 84 प्रतिशत हिन्दू हैं ,फिर भी अपराधों में संलिप्तता का औसत प्रतिशत 7% के आसपास हैं ,क्योंकि भारत के जेलों में बंद (सजायाफ्ता और विचाराधीन) कैदियों में से 7.4 फीसदी हिन्दू हैं .

यानी कहने का मतलब यह कि देश का हरेक 16वां व्यक्ति मुस्लिम है, लेकिन देश में होने वाले 100 अपराधों में 21 अपराध मुस्लिमों द्वारा  ही   किये  जाते हैं   .
अपराधों   के  इन आंकड़ों   को देख कर  देशभक्त  हिन्दुओं   को  सचेत  होने की  जरुरत है  , क्योंकि  जिस  देश की कुल आबादी  का  लगभग  पांचवां   भाग अपराधी ( मुसलमान ) हो ,उसकी  सुरक्षा और अखंडता हमेशा ही  खतरे में  बनी  रहेगी  , और यह खतरा और भी  गंभीर   हो  जायेगा  जब इस बात को मान  लिया जाये  कि अपराधियों और आतंकियों   का  कोई  धर्म  नहीं   होता। जबकि यह एक अकाट्य  सत्य है कि अपराध और मुसलमान पर्यायवाची  शब्द हैं  . ब्यूरो   में  दिए  गए  मुसलमानों  द्वारा  किये गए अपराधों   का वर्गीकृत  विश्लेषण  करने से पता  चलता है कि मुसलमान  , चोरी  , डकैती   ,लूट ,हत्या  , बलात्कार जैसे सामाजिक  अपराधों   के  आलावा  पाकिस्तान   के लिए  जासूसी  , देश में तोड़फोड़  ,सम्प्रदायवादी  दंगे , बम विस्फोट  जैसे  अपराधों  में संलग्न  पाये  गए  हैं  ,जो   स्पष्ट  रूप   में देश   द्रोह   है , लेकिन  जीतनी  भी राजनीतिक  पार्टियां हैं   वह मुस्लिम  वोटों  के लिए  सेकुलरिज्म  की आड़  में इस सत्य  को  स्वीकार   नहीं  करती  , क्योंकि  जो भी  यह बात  कहता , या लिखता है ,उस पर सम्प्रदायवादी , होने का लेबल  लगा दिया जाता है  .
ऊपर से  मुस्लिम  विद्वान  और  नेता सेकुलरिज्म का  ऐसा  पाखण्ड   करते  है  ,कि  जैसे यही लोग  सेकुलरज्म के ठेकेदार है. जबकि  वास्तव में  मुसलमान  सेकुलरिज्म   के दुश्मन  है  , इस  बात की  सत्यता   की  जाँच  करने के लिए किसी भी  मुस्लिम  से पूछिये  कि वह किसी भी  ऐसे मुस्लिम  देश का  नाम  बताये  जहां सेकुलर  सरकार हो , और   गैर  मुस्लिमों  को  वही  अधिकार  प्राप्त हों  , जो वहां के मुस्लिमों    को  हों ,
क्या सेकुलरिज्म का ठेका सिर्फ  हिन्दुओं   ने  ले  रखा है? यह  अनादि काल हमारा  देश  है  , हम  सेकुलरिज्म के बहाने मुस्लिम  तुष्टिकरण और उनकी  राष्ट्र विरोधी चालों   को  सफल  नहीं  देंगे

 जय हिन्दू  राष्ट्र !

 नोट - यह  महत्वपूर्ण  जानकारी   हमारे   जागरूक पाठक  और मित्र  श्री जितेंद्र  प्रताप  सिंह  जी  ने  भेजी    थी , इसके लिए उनका  आभार  . (212)

http://ncrb.gov.in/

शनिवार, 23 जनवरी 2016

इस्लाम की असहिष्णुता

वेद  में बड़ी  ही शिक्षाप्रद   बात  कही  है  , जो उन  लोगों  पर  लागू  होती  है  , जो  किसी न किसी  कारण से मुसलमान बन  गए हैं , वेद  मन्त्र  है ,
"अन्धं  तमः प्रविशन्ति ये अविद्यामुपासते "यजुर्वेद -40:9 अर्थात  ,जो लोग अविद्या (अज्ञान )  की उपासना  करते  हैं  , वह अज्ञान के  ऐसे अँधेरे  कुएं  में   गिर  जाते  हैं  ,जिस  से निकलना  कठिन है .
यह  बात  इस्लाम  की धर्म परिवर्तन   की  नीति  और  तरीके  पर बिलकुल  लागु  होती  है  , जिसे   जानने  के  बाद  हमें स्वीकार  करना पड़ेगा कि सचमुच  इस्लाम  धर्म  नहीं  बल्कि अज्ञान  का एक ऐसा  अँधेरा  कुंआ  है   , जिस में  गिर  जाने  पर  बाहर निकलने के लिए  निडरता  और इस्लाम  की  असलियत को समझना  बहुत  जरुरी  है .क्योंकि  आज  भारत  में  जितने  भी मुसलमान हैं  , उनके पूर्वज इस्लाम के गुणों से प्रभावित  होकर  नहीं बल्कि  मजबूरी  में  मुसलमान   बने   थे  . या  आजकल वह  भोली भाली हिन्दू  लड़कियां  मुस्लमान   बन  जाती  हैं  , मक्कार  मुस्लिम  लड़कों   के फरेबी  प्रेम जाल  में फस  जाती  है  .
यही  नहीं  यह  भी  पता  चला है  कि सेकुलरिज्म  और  भाईचारा   की आड़  में  कुछ  ब्लॉगर  , लेखक ,और धूर्त  इस्लाम के प्रचारक हिंदुओं  गुमराह  करने में  लगे  हुए  हैं  , और वह धर्म परिवर्तन  के  लिए ऐसे   लोग  चुनते  हैं  जिन्हें  न तो  हिदू गर्न्थों  का ज्ञान  है  और  न इस्लाम  की दोगली निति   का  पता है , ऐसे ही लोगों  की  आँखें खोलने के  लिए  ही यह  लेख   दिया   जा रहा  है
2-कुरान का पाखण्ड 
जिस तरह  से ढोंगी , पाखंडी  , धोखेबाज  और  मक्कार  लोगों  के अज्ञान  का  फायदा उठाकर अपनी लुभावनी  बातों  के  जाल में फसा  कर ठग  लेते  हैं  , उसी तरह कुरान में  कुछ  ऎसी आयतें  भी  देदी  गयीं  हैं  ,  जिन से इस्लाम  का असली खूंखार रूप ढक  जाये और  अज्ञानी  लोग  इस्लाम  के प्रति   आकर्षित  हो जाएँ  , जिस से उन लोगों  का  धर्म परिवर्तन  करने  में आसानी  हो  जाये  , अक्सर चालाक  मुल्ले  इस्लाम की तारीफ  करने के लिए  इन्ही  आयतों  का सहारा  लेते   हैं  ,

"तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म  और हमारे  लिए  हमारा  धर्म " सूरा -काफिरून 109 :6

" कह दो यह ( इस्लाम ) अल्लाह  की तरफ  से एक सत्य  है , अब  जो चाहे  इसे कबूल  कर  ले , और  जो चाहे इस  से इंकार  कर दे "
 सूरा - अल कहफ़ 18 :29

 "धर्म  के  बारे  में   किसी  पर  जबरदस्ती   नहीं  है " सूरा - बकरा  2 :256

कुरान  ऎसी  आयतें  पढ़  कर  जो  लोग  इस्लाम को भी धर्म समझ  लेते  हैं  , वह नहीं जानते  कि हाथी  की तरह इस्लाम के खाने  के और दिखने के दांत  अलग   है  ,और  कोई  इस्लाम के अंध कूप में  में गिर  जाये  तो  बाहर  निकलना  सरल  नहीं  है ,क्योंकि इस्लाम ने  धर्म परिवर्तन  के बारे में  दोगली  नीति   अपना  रखी  है  ,

3-इस्लाम परित्याग या  इरतिदाद 

शरीयत के कानून  में  इस्लाम  का परित्याग  करने  के  लिए अरबी  का पारिभाषिक " इरतिदाद - ارتداد "   इस्तेमाल  किया  जाता  है. जिसका अर्थ अंगरेजी में "Apostasy "  होता  है  . यह शब्द अरबी की  मूल शब्द  "रिद्दाह - ردة‎  "  से बना  है  , जिनके अर्थ " पलट  जाना (relapse )  और  वापसी  (regress)   भी  होते हैं  . और  जो  भी  मुसलमान  इस्लाम  छोड़ता  है ,और  वापस अपने  पुराने धर्म  में या किसी और धर्म  में  जाता  है , उसे " मुरतिद -مرتد   "  कहा  जाता है। और  जिस  देश में इस्लामी  हुकूमत  होती  है  वहाँ  मूरतिद  को  मौत की सजा  दी  जाती  है  ,  और जहाँ इस्लामी  कानून  नहीं   चलता   है  वहाँ  के मुल्ले उस मूर्तिद  की  हत्या करावा  देते  है  .क्योंकि मुहम्मद  ने  हदीसों  में  मुरतिद  की  हत्या  करने  का आदेश  दिया  गया  है  , जिसका पालन  करना  हर मुस्लिम   का  फर्ज  माना   गया  है  .

http://www.thereligionofpeace.com/Quran/012-apostasy.htm

4-इरतिदाद के चार प्रकार 

इस्लाम  को त्यागने यानी 'इर्तिदाद'  के चार प्रकार बताये  गए  हैं , जिनके  लिए शरीयत में  मौत  की सजा  का  विधान  है ,

1.ईमान  में इरतिदाद -"रिदाह फिल अक़ायद -الردة في الاعتقاد  "( Apostasy in beliefs)
 जैसे किसी  को अल्लाह का  पुत्र या अवतार मानना  और अल्लाह  के समान  उसकी इबादत  करना  ,

.2.शब्दों  में इरतिदाद "रिदाह फ़िल कलिमात -  الردة في الكلمات  " (Apostasy in words )
अल्लाह  के  रसूल   की बुराई करना या मजाक उड़ाना  .

3.कामों से इरतिदाद "रिदाह फिल अमल - الردة في العمل  " (Apostasy in action )

जैसे  कुरान  को नीचे पटक देना , जलाना  या  फाड़ना ,रसूल  की तस्वीर  बनाना   मूर्ति पूजा करना ,किसी देवी देवता  को प्रणाम  करना इत्यादि

4.विधि में चूक से इर्तिदाद "रिदाह अन तरीक अल सहू -  الردة عن طريق السهو   " (Apostasy by omission)

इसमे चूक से स्वधर्म त्याग करना  भी शामिल  है  , जैसे  नमाज छोड़  देना इस्लाम  में  बताये गए कानून और  नियमों  का पूरी तरह से पालन  नहीं करना  . इन सभी बातों  के आधार पर मुल्ले मौलवी  तय  करते  हैं  कि किसी  मुस्लिम  ने  इर्तिदाद  किया  है अथवा नहीं ,और उसे " मुर्तिद " घोषित   करके मौत की  सजा  देना  चाहिए  या  नहीं  . मुस्लिम  देशों  में वहाँ  की अदालतें खुद मूर्तिद  को मौत   की सजा  दे  देती  हैं  .  लेकिन  भारत में  यहाँ  के मुफ़्ती और मुल्ले  " मूर्तिद "  की  हत्या  करने    वाले   को इनाम देने  की  घोषणा कर  देते  हैं ,जिस से इस्लाम  के विरुद्ध  लिखने और  बोलने   वाले  विदेशों में  जाकर  बस  गए है  . जैसे "सलमान रश्दी "और " तस्लीमा नसरीन "आदि  .

5-इस्लाम  की असहिष्णुता 

" जो लोग चाहते  है कि  जैसे  वह काफिर  हैं  , तुम भी  काफिर  हो जाओ , तो तुम ऐसे  लोगों  को अपना मित्र नहीं  बनाना  ,  बल्कि उनको  जहाँ  पाओ  पकड़ो  और उनको  क़त्ल  कर  दो " सूरा -निसा 4 :89

"और  जो लोग तुम्हारे  धर्म में  बुराई  निकालें  तो उन से  लड़ाई  करते  रहो ,इस  से  वह ऐसा  करने  से बाज  आयेंगे "सूरा -तौबा 9 :12
"और  तुम में से  जो  भी अपना  धर्म (इस्लाम )  छोड़  कर फिर  से काफिर  हो  जाये तो समझो  उसका  किया  गया  सब   कुछ  बेकार   हो  गया  , और  वह  सदा  के  लिए  जहन्नम   में रहेगा  "सूरा -बकरा 2 :217
"जिन लोगों  ने इस्लाम  के  बाद फिर  से  कुफ्र  अपनाया  तो  उनको  कुछ नहीं  मिलेगा  , और अगर वह तौबा कर  लें  तो  उनके लिए अच्छा  होगा  , फिर भी यदि  वह तौबा  से  मोड़ लें  ,तो उनकी  कोई  मदद  नहीं होना  चाहिए " सूरा-तौबा  9 :74

" तुम इस्लाम के विरोधी  इन गुटों से पूछो ,कि क्या तुम अल्लाह की आयतों और उसके रसूल  का  मजाक उड़ा रहे हो ? यानि तुमने  इस्लाम अपनाने  के बाद कुफ्र  किया  है  . इसलिए  हैम  एक  गिरोह  को  माफ़ भी  कर देंगे ,तो दूसरे  को यातना  देकर ही   रहेंगे  . क्योंकि ऐसा  करना  अपराध   है " सूरा -तौबा 9 :66

6- इस्लाम  का अंधा कानून 

इस्लामी  देशों  में  इस्लाम  छोड़ कर  कोई  अन्य  धर्म   स्वीकार  करने  पर  हमेशा  मौत    की सजा  दी  जाती  है  , या  हत्या  कर  दी  जाती है , क्योंकि ,
शरीयत  के  कानून  के अनुसार  यदि  कोई  स्वस्थ चित्त  वाला  वयस्क   पुरुष या स्त्री  अपनी  इच्छा  से  इस्लाम  छोड़  कर  कोई अन्य धर्म  अपना   लेता  है  , तो  इस अपराध  के लिए उसका  खून  बहा  देना  चाहिए, और  यदि वहाँ  इस्लामी   हुकूमत  हो तो जज  या काजी ,और  काबिले  का  मुखिया  उसकी  सजा  को  पूरा  करे  . क्योंकि  रसूल  का  हुक्म  है इस्लाम  त्यागने  और  मुसलमानों  की  जमात  छोड़ने वालों  को मौत  की  सजा    देना  चाहिए  , जैसा  इन हादिसों  में   कहा  गया  है ,

(See al-Mawsooâah al-Fiqhiyyah, 22/180. )

1."अनस  ने  कहा कि इब्ने अब्बास  ने  बताया ,रसूल  ने  कहा  है जो  भी  व्यक्ति अपना  धर्म ( इस्लाम )  बदलेगा  उसे  मार  डालो "
‏ "‏ مَنْ بَدَّلَ دِينَهُ فَاقْتُلُوهُ ‏"

'Whoever changes his religion, kill him.'"

 सुन्नन नसाई - जिल्द 5 किताब 37 हदीस 4069 

2.अब्दुल्लाह  बिन  मसूद  ने  कहा  कि रसूल  का आदेश  है  ,जो  भी  इस्लाम  और  जमात   को छोड़  दे  तो उसको  क़त्ल  कर  दो "

 وَالتَّارِكُ لِدِينِهِ الْمُفَارِقُ لِلْجَمَاعَةِ ‏"‏ ‏.‏  "

"one who leaves his religion and splits from the Jama`ah.should be killed”

इब्ने  माजा -  जिल्द 3  किताब  20  हदीस 2534 

7-इस्लाम छोङने  की सजा 

सही  बुखारी  को हदीस   की सबसे प्रमाणिक  हदीस   की  किताब  माना  जाता  है  , क्योंकि इस्लामी  देशों  में  उसी  के आधार  पर शरीयत  के  कानून   बनाये  गए  हैं  , इसी  किताब  में  इस्लाम  छोड़ कर  अन्य धर्म अपनाने     वाले  को क़त्ल  करने  का   आदेश   दिया  गया  है , नमूने  के लिए  चार  हदीसें  दी  जा रही  हैं   ,

1-इकिरिमा ने   बताया  कि रसूल का  हुक्म  है ,यदि  कोई मुस्लिम  इस्लाम  छोड़  देता  है  ,तो बिना  किसी  शक  के   उसको  क़त्ल  कर  दो  , और  यदिकोई इस्लाम  अपनाता   है  तो उस से  कोई सवाल  नहीं  करो "
 सही बुखारी - जिल्द 4  किताब 52 हदीस 260 

2-इकिरिमा  ने  कहा  कि रसूल  ने कहा  है  ,जोभी इस्लाम   का त्याग  करता है  ,  उसे  क़त्ल  कर  दिया  करो "

 सही बुखारी - जिल्द 9 किताब 84 हदीस 57

3-अबू  मूसा  ने मुआज   को  बताया  कि एक  मुस्लिम  ने   यहूदी  धर्म अपना  लिया  है  . यह सुनते  ही  मुआज बोला  , मैं तब तक  शांत   नहीं  बैठूँगा  जब तक उसको  क़त्ल   नहीं  कर देता  , क्योंकि रसूल  का यही  आदेश  है  "

सही बुखारी - जिल्द 9 किताब 89 हदीस 271

4-रसूल  ने  कहा  कि कुछ ऐसे  मुर्ख  है  , कि इस्लाम  उनके  गले  नीचे  नहीं  उतरता , और ऐसे  ही  लोग इस्लाम   छोड़  देते है  , इसलिए तुम्हें  जहाँ  भी ऐसे लोग  मिलें  उनको  खोज खोज  कर  क़त्ल  कर  दिया  करो  , क़ियामत   के दिन तुम्हे  इसका उत्तम इनाम  मिलेगा  "

सही बुखारी - जिल्द 9 किताब 84 हदीस 64

8-इस्लाम त्यागने पर फतवा 

इस्लाम की पक्षपाती नीति और दादागीरी इस  बात  से  पता  चलती  है  ,कि यदि  कोई अपना  धर्म त्याग कर इस्लाम  काबुल  करता  है  तो कोई आपत्ति   नहीं  करता  ,लेकिन अगर  कोई मुस्लिम इस्लाम  को त्याग कर अन्य धर्म अपना  लेता  है  ,तो मुल्ले उसे " मुरतिद " घोषित   करके क़त्ल  के योग्य ठहरा  देते  है  . इसके  प्रमाण  के  लिए मिस्र  के  काहिरा  की इस्लामी यूनिवर्सिटी "जामअ तुल अज़हर शरीफ - جامعة الأزهر (الشريف) "के  मुफ्ती "अब्दुल्लाह  मिशदाद - عبد الله المشد‎ "  ने 23  नवम्बर सन  1978  में  उस  समय  जारी किया था ,जब एक  मुस्लिम  ने इस्लाम  को छोड़  कर ईसाई धर्म अपना  लिया  था  .  और  कुछ  लोगों  ने  मुफ़्ती  से इस्लाम  त्यागने की सजा  के  बारेमे  प्रश्न  किया  था , उसी  फतवे  के मुख्य अंशों   का  हिन्दी अनुवाद  दिया   जा  रहा  है  ,

सवाल  - इस व्यक्ति  के  बारे  में  शरीयत  का  कानून  क्या  कहता  है ? और क्या उसके बच्चे  मुसलमान  माने  जायेगे ? या  ईसाई ?

जवाब -शरीयत  के अनुसार  इस व्यक्ति  ने "इरतिदाद " किया  है  . और अगर  वह  तौबा ( repent )  नहीं करता  तो शरई  कानून  के मुताबिक उसको क़त्ल  कर देना  चाहिए  .  जहां  तक बच्चों  का सवाल  है ,तो  अभी वह  नाबालिग  हैं   . और यदि  बालिग  हो जाने  पर  वह  भी तौबा नहीं  करते  और  मुसलमान  नहीं  बनते  तो उनको  भी  क़त्ल  कर  देना चाहिए  . यही कानून  है  .
प्रमाण  के  लिए  उस फतवा  की लिंक और  इमेज   दी  जा रही  है    .

http://www.councilofexmuslims.com/index.php?topic=24511.0

http://en.wikipedia.org/wiki/File:Rechtsgutachten_betr_Apostasie_im_Islam.jpg

9-इस्लाम छोङने   वाले 

चूँकि इस्लाम  तर्कहीन  , निराधार और कपोल  कल्पित  मान्यताओं  पर  ही टिका  हुआ  है  ,  जिसे  ईमान  के  नाम  पर  मुस्लिम  बच्चों   पर थोप  दिया   जाता  है  , जिस से  उनकी सोचने समझने की  बुद्धि  कुंद  हो  जाती  है और  बड़े  होकर  वह  कट्टर जिहादी  बन  जाते  हैं  , लेकिन जब  भी  किसी बुद्धिमान  को इस्लाम   के भयानक और  मानव  विरोधी  असली रूप  का  पता  चल  जाता  है  ,वह  तुरंत इस्लाम  के अंधे  कुएं  से  बाहर  निकल   जाता  है  . आयुसे ही  कुछ सौभाग्य शाली  प्रसिद्ध  लेखकों  ,मानवता  वादी   का  संक्षिप्त  परिचय   दिया   जा  रहा  है  ,
1-इब्ने वर्राक (ابن وراق‎  )-इनका  जन्म  पाकिस्तान  में  हुआ  था  . यह  उनका  असली  नाम  नहीं   है  , इनके  नाम  का अर्थ  है " कागज  बनाने  वाले  का बेटा "  क्योंकि उनके पिता  कागज  बनाते  थे  . इन्होने  इस्लाम  की पोल  खोलने  के  लिए  कई किताबें और  लेख  प्रकाशित  किये हैं  ,इनको  दूसरा  सलमान रश्दी   भी  कहा  जाता  है  .  इनकी साईट  है SecularIslam.org

2-तस्लीमा नसरीन(  তসলিমা নাসরিন  ) -इनका जन्म बंगला देश  में 25 अगस्त सन 1962  में  हुआ  था  . यह इस्लाम  छोड़कर  नास्तिक ( Atheist)  बन  गयी , इनकी  किताब "लज्जा "पर मुल्लों  ने   इनकी हत्या   करवाने  का  फतवा  दिया  था ,इनकी  साईट  का  पता  है ,

TaslimaNasrin.com

3-अली सीना ( علي سينا )-इनका  जन्म  ईरान  में हुआ था  , यह  भी इस्लाम से आजाद  होकर  नास्तिक (Atheist) बन  गए और इस्लाम  के महान आलोचक  और  लेखक  हैं ,इनकी  किताबों और लेखों  के  कारन  इनको  कई  बार  गिरफ्तार  भी  किया  गया  था  . लेकिन इनके तर्कों और  प्रमाणों के सामने  मुल्ले   निरुत्तर  हो  गए  ,इन की  साईट  का नाम  है , FaithFreedom.org

4-डॉ ,परवीन दारबी (پروین دارابی  )-इनका  जन्म  ईरान  की राजधानी तेहरान  में सन 1941  में  हुआ था  , यह  भी इस्लाम  को ठुकरा  कर   नास्तिक  बन  गई  और  अमेरिका  में बस  वहाँगयी महिलाओं  के अधिकारों की रक्षा  के  लिए  प्रयास  रत  हैं   . इन्होने  भी  कई किताबें  और  लेख  प्रकाशित  किये जिन में  इस्लाम  को बेनकाब  किया   गया  है   इनकी  साईट  है .Homa.org

I5-नौनी दरवेश ( نوني درويش‎  )-इनका   जन्म  सन  1949  में मध्य एशिया  में  हुआ  था  . इन्होने  मिस्र में अमेरिका  और  मिस्र की तरफ से एक  मानव अधिकार रक्षक  की तरह  काम  किया  था  , इन्होने  भी  इस्लाम  छोड़  कर ईसाई धर्म  अपना  लिया   है  . इनकी प्रसिद्ध  किताब  "  Now They Call Me Infidel  " पर भी फतवा   जारी   हुआ है ,)-NonieDarwish.com

6-अनवर शेख -इनका  जन्म एक  कश्मीरी  पंडित  के घर  हुआ था  , जिसे  बल पूर्वक  मुसलमान  बना  दिया   था इन्होने अरबी  फ़ारसी  के साथ इस्लाम  का  अध्यन  किया था  . लेकिन  इस्लाम    की  हकीकत   पता  होजाने  पर  यह  हिन्दू  बन  गए  और अपना नाम अनिरुद्ध ज्ञान शिखा रख  लिया  . इनकी  साईट  का  नाम   है
www.islam-watch.org

इसके आलावा   इनके  लेख  इस  साईट http://islamreview.org/anwarshaikh/author.html   में  और यू ट्यूब  में  भी   हैं  जिनका  शीर्षक  है ,Islam can't co-exist with other religions" Anwar Shaikh. Part 1/3 ..

 www.youtube.com/watch?v=_HNNgKiGyWE

10-इस्लाम सवालों से डरता  है 
जिस तरह  से  हरेक  बड़े से बड़ा अपराधी और भ्रष्ट   नेता  भी  खुद  को निर्दोष  और साफ सुथरे चरित्र   वाला   व्यक्ति  होने  का दावा   किया  करता है , लेकिन जब   निष्पक्ष  जाँच   की  जाती  है तो पूछे  गए सवालों   से घबरा  जाता  है  , क्योंकि सवालों  से  उसके  निर्दोष  होने  के दावे  का भंडा  फुट   जाने  का  डर   लगता  है  , इसी  तरह  इस्लाम  भी  लोगों  से  सिर्फ  ईमान  लाने   पर जोर  देता  है  , क्योंकि  इस्लाम में अल्लाह ,रसूल  और  कुरान  की सत्यता  के बारे में  सवाल करना  और वाद विवाद करने  को  गुनाह  माना  जाता  है  . इसी   लिए  मुल्ले  मुस्लिम  बच्चों   को  कुरान  का व्याकरण सम्मत अर्थ  सिखाने  की जगह कुरान  को तोते  की  तरह रटने पर बल  देते  हैं ,क्योंकि मुल्लों  को डर  लगता है कि कुरान के सही अर्थ जानकर  लोग  सवाल  करेंगे ,और इस्लाम की  असलियत पता  होने  पर  इस्लाम  छोड़  देंगे  ,  जैसा  कि खुद  कुरान  में  लिखा  है

"तुम से पहले भी एक गिरोह ने ऐसे ही सवाल किये थे ,और जब तुम उनके सवालों का जवाब न दे पाए ,तो वह इस्लाम से इंकार वाले हो गए "

सूरा -मायदा 5 :102 

और यही  कारण  है  कि जब  भी कोई  इस्लाम   की बेतुकी ,तर्कहीन , अमानवीय ,और अवैज्ञानिक बातों  के  बारे  में  सवाल  करता है ,या  उंगली उठाता  है  ,तो  मुसलमान  उत्तर देने या खंडन  करने की  बजाय लड़ने और दंगे करने  पर उतारू  हो   जाते हैं  ,इसलिए सवाल करने  वालों  से निपटने  के लिए  कुरान में पहले  से ही  यह आदेश  दे  दिया गया  है  ,कि ,
"और जब भी तुम्हारा कुफ्र वालों से किसी तरह का सामना हो जाये ,तो तुम उनकी गर्दनें मारना शुरू कर देना ,और इस तरह उनको कुचल देना "
सूरा -मुहम्मद 47 :4 

इसीलिए दुनिया भर  के सभी मुस्लिम नेता  , गुंडे , दादा ,स्मगलर ,डॉन  और आतंकवादी कुरान की  इसी नीति का  पालन  करते  हैं,जिसे  रसूल की सुन्नत माना  जाता  है  . जो देश और  हिन्दू धर्म  के लिए खतरा  है  ,हम सिर्फ तर्क  से ही  इनका  मुकाबला  करें  तो बहुत होगा  .जैसे महर्षि दयानंद  ने  अपनी विश्व  प्रसिद्द  पुस्तक  " सत्यार्थ प्रकाश " में  इस्लाम  का  तर्क पूर्ण  खंडन  करके  मुल्ले  मौलवियों   को निरुत्तर  करके  सिद्ध  कर दिया  है  कि दुनिया  को डराने वाला  इस्लाम खुद सबसे  बड़ा  डरपोक  है ,  जिसमे सत्य  का सामना  करने   की  हिम्मत  नहीं  है  . इसलिए यदि  सभी  हिन्दू  सेकुलरिज्म  का  चक्कर  छोड़  कर  निडरता  से  इसलाम  की विस्तारवादी और अमानवीय  नीतियों  का भंडाफोड़  करते रहें  तो कोई शंका नहीं कि इस देश  से  इस्लामी  आतंक   का  सफाया   नहीं  हो  जाये  ,  केवल  साहस  की  जरुरत  है ,लोगों  को इस्लाम की असलियत   के बारेमें  सप्रमाण   जानकारी  देते  रहिये यही समय की  मांग  है  ,सिर्फ  पाकिस्तान  को कोसने से  कुछ नहीं  होगा  , जैसे रात  दिन  शक्कर -शक्कर  जपने  से  मुंह  मीठा  नहीं  हो सकता  .

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मंगलवार, 22 दिसंबर 2015

इस्लामी वयस्क परीक्षण !

जिस समय टी .वी . के सभी चैनलों पर बजट सम्बन्धी चर्चा खबरें आ रही थीं , उसी समय बीच में 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में चलती बस में एक 23 साल की लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार के मामले में छठवें आरोपी के खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड ने गुरुवार आरोप तय करने का आदेश दे दिया .चूँकि यह घटना इतनी ह्रदय विदारक थी कि सारा भारत उन सभी नरराक्षसों को मौत की सजा देने की मांग कर रहा था .यद्यपि इस अपराध के लिए सभी अभियुक्त सामान रूप से दोषी हैं , लेकिन सरकार ने उनके नाम छुपा रखे थे , इन सभी पापियों ने जो दुष्कृत्य किया था , उसे देख कर हमने पहले ही लिख दिया था कि इतना नीच काम कोई मुसलमान ही कर सकता है , और बाद में यह बात सही निकली .क्योंकि अदालत ने छटवें आरोपी पर जितने भी अभियोग लगाये हैं , सभी काम मुहम्मद की सुन्नत है ,जिसे मुसलमान अपराध नहीं मानते ,
अब मुसलमान उस उस दुष्ट को नाबालिग साबित करने के लिए तरकीबें निकाल रहे हैं , ताकि उसे मौत की सजा से बचाया जा सके .यद्यपि इस बात में कोई शंका नहीं है कि सभी अपराधों की प्रेरणा इस्लामी तालीम से मिलती है , लेकिन आप किसी भी मुल्ले मौलवी से यह बात कहेंगे तो वह यही उत्तर देगा कि इस्लाम तो सदाचार , संयम , और परहेजगारी की तालीम देता है . इस्लाम में बलात्कार को गुनाह माना जाता है , इत्यादी ,
चूंकि मुख्य मुद्दा बलात्कार और छठवें मुस्लिम आरोपी के नाबालिग होने का है ,इसलिए इस्लामी सदाचार का पाखंड और असलियत के साथ इस्लाम के अनुसार बालिग (Adult )होने की जाँच कैसे होती है , इसका तरीका इस लेख में दिया जा रहा है ,
1-इस्लाम का ढोंगी सदाचार 
इस्लाम से पहले अरब के कुछ भाग में ईसाई धर्म का प्रभाव था . और कई ईसाई साधू ऐसे भी होते थे ,जो संयम का पालन करते हुए जीवन व्यतीत करते थे . मुहम्मद का गुरु और खदीजा का चचेरा भाई वरका बिन नौफल भी एक ब्रह्मचारी था . शायद उसी से प्रेरित कर मुहम्मद ने यह आयत कुरान में जोड़ी होगी , जिसमे मुसलमानों को यह उपदेश दिया गया है ,
"और जिन्हें विवाह करने का अवसर प्राप्त न हो ,उन्हें चाहिए कि वे तब तक संयम का पालन करें ,जब तक अल्लाह उन्हें अनुग्रह से संपन्न कर दे " सूरा -अन नूर 24:33

(let those who cannot find a match keep chaste till Allah give them independence by His grace. 24:33)

( इस आयत में संयमी के लिए अरबी में "अफीफ عفيف    " शब्द दिया गया है ,जिसका अंगरेजी में अर्थ "Chaste " होता है .दुसरे शब्दों को ऐसे लोगों को ब्रह्मचारी , अरबी में " ताहिरطاهر  "और अंगरेजी में पवित्र और संतpure-saintly"भी कह सकते हैं )लेकिन इस आयात को पढ़कर यह नहीं समझना चाहिए कि कुरान कुंवारे लोगों को संयम और कामवासना से बचने की शिक्षा देता है .बल्कि कुरान मुस्लिम युवकों को लडाकियों को पकड़ कर उन से बलात्कार करने की प्रेरणा देता है , जैसा कि इन आयतों के कहा गया है ,
 2-औरतें पकड़ो बलात्कार करो 
औरतें और अय्याशी इस्लाम के असली आधार है , इतिहास साक्षी है . कि मुहम्मद के साथी जिहादी सबसे पहले औरतें ही लूटते थे . यही नहीं हर मुसलमान मरने के बाद जन्नत में औरतें ही चाहता है .चूँकि भारत में जिहाद नहीं हो सकती ,इसलिए मुसलमान किसी अकेली लड़की को पकड़ लेते हैं . और बलात्कार कर देते हैं ,क्योंकि कुरान पकड़ी गयी औरत से सहवास करने की आज्ञा देता है , कुरान में कहा है ,
"अपनी पत्नियों के उन लौंडियों के साथ सम्भोग करना कुछ भी निंदनीय नहीं है ,जो तुम्हारे हाथों पकड़ी जाएँ "सूरा -अल -मआरिज 70:30
(Captives    your right hand  posess)
"अपनी पत्नियों के अलावा उन लौंडियों के साथ ,जो उनके कब्जे में हों ,सहवास करना निंदनीय नहीं है "सूरा -अल मोमिनून 23:6
"हमने तुम्हारी लौंडियाँ हलाल कर दी हैं ,जो अल्लाह ने तुम्हें माले गनीमत में दी हैं " सूरा -अहजाब 33:50
"पत्नियों के सिवाय तुम्हारे लिए तुम्हारी लौंडियाँ भी हलाल हैं ,अल्लाह सब चीज की खबर रखने वाला है " सूरा -अह्जाब 33:52
इस्लामी परिभाषा में हर प्रकार से हथियाई गयी , पकड़ी गयी , अगवा की गयी हो या खरीदी हुई सभी के लिए अरबी में एक ही शब्द "السرية " है .और ऐसी औरत की इच्छा के विरुद्ध सम्भोग करना इस्लाम में अपराध नहीं माना जाता है .(Islam allows a man to have intercourse with  capt  woman, whether he has a wife or wives or he is not married. A Captiive woman with whom a man has intercourse is known as a sariyyah )

लेकिन मुहम्मद ने ऐसे सहवास को बलात्कार नहीं कहते हुए अरबी में "मलिकत ईमानुकुम ملكت ايمانكم" और " मलिकत यमीनुकुम ملكت يمينكم" शब्द का प्रयोग किया है .और पकड़ी गयी औरत को रखैली माना है .जिनके साथ बलपूर्वक सहवास करना मुसलमानों का अधिकार है .देखिये विडिओ

Sex allowed with Slave Women in Islam_ Dr Zakir Naik.flv


http://www.youtube.com/watch?v=Bj74kfA5UQY

यही बात हदीस में भी कही है , सही मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3432
3-वयस्क की परिभाषा 
इस्लाम के अनुसार 15 साल की आयु होने पर लडके और लड़की को वयस्क माना जाता है .इस आयु को " बुलूग بُلوغ‎)" और ,आयु पूरा करने वाले को " बालिग  بالغ " कहा जाता है .इतनी आयु के लोग वयस्क ( Adult ) इसलिए माने जाते हैं , क्योंकि वह जिहाद के लिए उपयोगी होते हैं .
लड़का बालिग तब माना जाता है जब उसके श्रोणी के बाल निकलने लगें(grows pubic hair) , या शिश्न से वीर्य निकलने लगे .(has a nocturnal emission) और लड़की तब बालिग मानी जाती है जब उसका मासिक स्राव निकलने लगे .(when she  menstruates)यही बात फतवे में दी गयी है ,
Once you get semen you are baaaligh

"تحصل مرة واحدة السائل المنوي كنت الكبار  "

http://en.allexperts.com/q/Islam-947/2010/4/Adult-age.htm

4-वयस्कता का परीक्षण 
आज अदालत दिल्ली बलात्कार काण्ड छठवें (मुस्लिम)आरोपी के वयस्क होने का पता करने के लिए हाथ पैर मार रही है , कभी उसका जन्म प्रमाणपत्र खोज रही है कभी किशोर न्यालालय के आदेशानुसार धारा 3 के अधीन अभियुक्त की bone-ossification testकरवा रही है , लेकिन मार्च सन 627 में ही मुहम्मद ने एक ऐसी विधि खोज ली थी , जिस से मूर्ख व्यक्ति भी पता कर लेगा कि अभियुक्त बालिग है , अथवा नहीं .यह विधि हदीस में आज भी मौजूद है .इस हदीस के पीछे एक ऐतिहासिक घटना है .घटना इस प्रकार है , कि मदीना के पास "बनी कुरैजा " नामका एक यहूदी कबीला रहता था .मार्च सन 627 को मुहम्मद ने अपने जिहादियों के साथ उस कबीले पर अचानक धावा बोल दिया था जिसमे करीब 900 लोगों के सर काट कर हत्या कर दी गयी थी .मुहम्मद का आदेश था कि सभी बालिग पुरुषों को मार दिया जाये . और औरतों से बलात्कार करके उनको लौंडी बना लिया जाये .हदीस कहती है ,
1."कसीर इब्न अस्सायब ने कहा कि रसूल ने हम लोगों से कहा जाओ सभी बालिग़ मर्दों को मार डालो .पता करो जिन के नीचे के बाल दिखायी दें वह बालिग़ हैं , उन्हें क़त्ल कर दो . और जिनके नीचे के बाल नहीं निकले वह नाबालिग है , उनको जिन्दा छोड़ दो "

أَخْبَرَنَا الرَّبِيعُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَسَدُ بْنُ مُوسَى، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي جَعْفَرٍ الْخَطْمِيِّ، عَنْ عُمَارَةَ بْنِ خُزَيْمَةَ، عَنْ كَثِيرِ بْنِ السَّائِبِ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبْنَاءُ، قُرَيْظَةَ أَنَّهُمْ عُرِضُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ قُرَيْظَةَ فَمَنْ كَانَ مُحْتَلِمًا أَوْ نَبَتَتْ عَانَتُهُ قُتِلَ وَمَنْ لَمْ يَكُنْ مُحْتَلِمًا أَوْ لَمْ تَنْبُتْ عَانَتُهُ تُرِكَ ‏.‏

Sunan an-Nasa'i-Vol. 4, Book 27, Hadith 3459

2-"अतिय्या ने कहा कि बनू कुरैजा के जनसंहार के समय मैं मौजूद थे . लेकिन उस समय मेरे नीचे के बाल नहीं निकले थे . इसलिए मुझे नाबालिग मान कर जिन्दा छोड़ दिया गया था "

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ عَطِيَّةَ الْقُرَظِيِّ، قَالَ كُنْتُ يَوْمَ حُكْمِ سَعْدٍ فِي بَنِي قُرَيْظَةَ غُلاَمًا فَشَكُّوا فِيَّ فَلَمْ يَجِدُونِي أَنْبَتُّ فَاسْتُبْقِيتُ فَهَا أَنَا ذَا بَيْنَ أَظْهُرِكُمْ ‏.‏  "

Sunan an-Nasa'i-Vol. 4, Book 27, Hadith 3460

5-छठवें अभियुक्त के अपराध 

भले सेकुलर और मुसलमान उस छठवें अपराधी मुसलमान को बालिग नहीं मानें . लेकिन उसने जो जघन्य काम किये हैं उसके आगे मुहम्मद भी नाबालिग लगेगा .क्योंकि .. प्रमुख मजिस्ट्रेट गीतांजलि गोयल ने उस पर , गैंग रेप ,हत्या ,अपहरण , आप्रक्रतिक यौनाचार ,हत्या का प्रयास ,डकैती , सबूतों को नष्ट करने का प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगाये हैं .यही नहीं एक सब्जी विक्रेता को लूटने के मामले में उस पर लूटपाट का मामला भी चल रहा है .
हमें पूरा विश्वास है , यदि अदालत मुहम्मद की हदीस का पालन कर के छठवे आरोपी को बालिग़ मान लेती है , तो मुल्लों की हालत सांप छछूंदर जैसी हो जाएगी .

http://www.thereligionofpeace.com/muhammad/myths-mu-rape.htm

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