गुरुवार, 25 सितंबर 2014

महामद ( मुहम्मद ) एक पैशाच धर्म स्थापक !

इस्लाम  के प्रचारक हिन्दुओं   का  धर्म  परिवर्तन  कराने के लिए तरह तरह  के  हथकण्डे अपनाते रहते हैं  ,  कभी  सेकुलर बन  कर  गंगा जमुनी  तहजीब  की  वकालत  करने  लगते हैं  , कभी  इस्लाम और हिन्दू  धर्म  में समानता  साबित  करने  लगते हैं  , लेकिन इनका असली उद्देश्य  हिन्दुओं को  गुमराह करके    इस्लाम  के  चंगुल   में  फँसाना  ही होता   है  , क्योंकि अधिकांश  हिन्दू  इस्लाम  से अनभिज्ञ और  हिन्दू  धर्म   से उदासीन   होते  हैं  , इस समय इस्लाम   के प्रचारकों  में  जाकिर  नायक  का नाम   सबसे  ऊपर   है  . जो एक "सलफ़ी  जिहादी  -السلفية الجهادية)  "गिरोह   से  सम्बंधित    है  , यह गिरोह  जिहाद  में आतंकवाद  को  उचित  मानता   है    , जाकिर  नायक   का  पूरा नाम  "जाकिर अब्दुल  करीम नायक " है ,इसका जन्म 18 अक्टूबर  सन 1965  में हुआ था  ,  इसने  मेडिकल डाक्टर   की ट्रेनिंग  छोड़ कर  इस्लाम  का  प्रचार   करना शुरू कर दिया  , और दुबई (UAE  ) में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (Islamic Research Foundation   )  नामकी एक संस्था   बना  राखी  है  , यही   नहीं  जाकिर "पीस टीवी  (Peace TV )  नामका   निजी  चैनल  भी चलाता है  , जिसका मुख्यालय  भी दुबई  में है  , जाकिर  अक्सर  अपने चैनल  पर  चर्चा के लिए दूसरे  धर्म   के लोगों  को आमंत्रित  करता है  , फिर उन्हीं  के धर्म ग्रन्थ  से कुछ ऐसे अंश पेश करता है , जिनसे  साबित हो सके कि उनके धर्मग्रन्थ  में भी  मुहम्मद  , अल्लाह और रसूल  का उल्लेख है , और  भोले भले लोग  मुसलमान   बन  जाएँ।
जाकिर नायक ने ऐसी  ही एक  चाल 20  फरवरी  2014  को  चली  , जिसमे हिंदुओं  को भ्रमित  करने के लिए  दावा  कर दिया  कि हिन्दुओं के धर्मग्रन्थ  " भविष्य पुराण  " में  मुहम्मद  का  वर्णन   है  , और  उनको  अवतार  बताया  गया  है  , यह पूरा ब्यौरा इस विडिओ में मौजूद  है .
FAQ261 to Zakir Naik: Muhammad (pbuh) Prophesised in Bhavishya Purana!

https://www.youtube.com/watch?v=-iKiyg46Iy4


इस प्रकार से जाकिर नायक ने  बड़ी मक्कारी से  हिन्दुओं  को धोखा  देने के लिए  यह  साबित  करने का  प्रयास किया है कि  भविष्य पुराण में  मुहम्मद का  वर्णन  एक  अवतार  के रूप   में  किया  गया  है  , इसलिए हिन्दू  मुहम्मद को  एक अवतार  मान कर सम्मान  दें  , और उसके धर्म  इस्लाम  को  स्वीकार कर लें  ,  हो सकता है  कि कुछ  मूर्ख जाकिर जाल में फंस कर  जाकिर की बात को सही  मान  बैठे  हों  , लेकिन  भविष्य  पुराण में   मुहम्मद को " महामद " त्रिपुरासुर  का अवतार  , धर्म दूषक (Polluter of righteousness)और  पिशाच  धर्म (  demoniac religion)  का  प्रवर्तक  बताया  गया   है   . यही नहीं भविष्य  पुराण   में  इस्लाम  को पिशाच  धर्म   और  मुसलमानों  को " लिंगोच्छेदी "यानि  लिंग  कटवाने वाले  कहा गया है  ,जिसे हिन्दी में  कटुए  और मराठी  में लांडीये  कहा  जाता   है  , भविष्य  पुराण   के जिस    भाग में  मुहम्मदके वर्णन   है  ,वह  मूल  संस्कृत   और उसके हिंदी  अनुवाद केसाथ  दिया जा रहा है  . ताकि  लोगों  का  यह  भ्रम  दूर  हो  जाए की  भविष्य पुराण  में मुहम्मद को  एक अवतार के रूप में  प्रस्तुतकिया गया है    .

भविष्य  पुराण   में  महामद  ( मुहम्मद ) एक पैशाच धर्म स्थापक -भविष्य पुराण, प्रतिसर्ग पर्व, खण्ड 3, अध्याय 3 श्लोक  . 1 -31


श्री सूत उवाच-
1. शालिवाहन वंशे च राजानो दश चाभवन्। राज्यं पञ्चशताब्दं च कृत्वा लोकान्तरं ययुः
१. श्री सूत जी ने कहा - राजा शालिवाहन के वंश में दस राज हुए थे। उन सबने पञ्च सौ वर्ष पर्यन्त राज्य शासन किया था और अंत में दुसरे लोक में चले गए थे।

2. मर्य्यादा क्रमतो लीना जाता भूमण्डले तदा। भूपतिर्दशमो यो वै भोजराज इति स्मृतः।
२. उस समय में इस भूमण्डल में क्रम से मर्यादा लीन हो गयी थी। जो इनमे दशम राजा हुआ है वह भोजराज नाम से प्रसिद्द हुआ। .

3. दृष्ट्वा प्रक्षीणमर्य्यादां बली दिग्विजयं ययौ। सेनया दशसाहस्र्या कालिदासेन संयुतः।
३. उसने मर्यादा क्षीण होते देखकर परम बलवान उसने(राजा ने) दिग्विजय करने को गमन किया था। सेना में दस सहस्त्र सैनिक के साथ कविश्रेष्ठ कालिदास थे।

4. तथान्यैर्ब्राह्मणैः सार्द्धं सिन्धुपारमुपाययौ जित्वा गान्धारजान् म्लेच्छान् काश्मीरान् आरवान् शठान्।
४. तथा अन्य ब्राह्मणों के सहित वह सिन्धु नदी के पार प्राप्त हुआ(अर्थात पार किया) था। और उसने गान्धारराज, मलेच्छ, काश्मीर, नारव और शठों को दिग्विजय में जीता।

5. तेषां प्राप्य महाकोषं दण्डयोग्यानकारयत् एतस्मिन्नन्तरे म्लेच्छ आचार्येण समन्वितः।
५. उनका बहुत सा कोष प्राप्त करके उन सबको योग्य दण्ड दिया था। इसी समय काल में मल्लेछों का एक आचार्य हुआ।

6. महामद इति ख्यातः शिष्यशाखा समन्वितः नृपश्चैव महादेवं मरुस्थलनिवासिनम्।
६ महामद शिष्यों की अपने शाखाओं में बहुत प्रसिद्द था। नृप(राजा) ने मरुस्थल में निवास करने वाले महादेव को नमन किया।

7. गंगाजलैश्च सस्नाप्य पञ्चगव्य समन्वितैः। चन्दनादिभिरभ्यर्च्य तुष्टाव मनसा हरम् ।
७. पञ्चजगव्य से युक्त गंगा के जल से स्नान कराके तथा चन्दन आदि से अभ्याचना(भक्तिपूर्वकभाव से याचना) करके हर(महादेव) को स्तुति किया।

भोजराज उवाच-
 8. नमस्ते गिरिजानाथ मरुस्थलनिवासिने। त्रिपुरासुरनाशाय बहुमायाप्रवर्त्तिने।
८. भोजराज ने कहा - हे गिरिजा नाथ ! मरुस्थल में निवास करने वाले, बहुत सी माया में प्रवत होने त्रिपुरासुर नाशक वाले हैं।

9. म्लेच्छैर्गुप्ताय शुद्धाय सच्चिदानन्दरूपिणे। त्वं मां हि किंकरं विद्धि शरणार्थमुपागतम् ।
.९ मलेच्छों से गुप्त, शुद्ध और सच्चिदानन्द रूपी, मैं आपकी विधिपूर्वक शरण में आकर प्रार्थना करता हूँ।

सूत उवाच-


10. इति श्रुत्वा स्तवं देवः शब्दमाह नृपाय तम्। गन्तव्यं भोजराजेन महाकालेश्वरस्थले ।
 १०. सूत जी ने कहा - महादेव ने प्रकार स्तुति सुन राजा से ये शब्द कहे "हे भोजराज आपको महाकालेश्वर तीर्थ जाना चाहिए।"

11. म्लेच्छैस्सुदूषिता भूमिर्वाहीका नाम विश्रुता। आर्य्यधर्मो हि नैवात्र वाहीके देशदारुणे ।
११. यह वाह्हीक भूमि मलेच्छों द्वारा दूषित हो चुकी है। इस दारुण(हिंसक) प्रदेश में आर्य(श्रेष्ठ)-धर्म नहीं है।


12. बभूवात्र महामायी योऽसौ दग्धो मया पुरा। त्रिपुरो बलिदैत्येन प्रेषितः पुनरागतः ।
१२. जिस महामायावी राक्षस को मैंने पहले माया नगरी में भेज दिया था(अर्थात नष्ट किया था) वह त्रिपुर दैत्य कलि के आदेश पर फिर से यहाँ आ गया है।

13. अयोनिः स वरो मत्तः प्राप्तवान् दैत्यवर्द्धनः। महामद इति ख्यातः पैशाच कृति तत्परः ।
१३. वह मुझसे वरदान प्राप्त अयोनिज(pestle, मूसल, मूलहीन) हैं। एवं दैत्य समाज की वृद्धि कर रहा है। महामद के नाम से प्रसिद्द और पैशाचिक कार्यों के लिए तत्पर है।

14. नागन्तव्यं त्वया भूप पैशाचे देशधूर्तके। मत् प्रसादेन भूपाल तव शुद्धिः प्रजायते ।
१४. हे भूप(भोजराज) ! आपको मानवता रहित धूर्त देश में नहीं जाना चाहिए। मेरी प्रसाद(कृपा) से तुम विशुद्ध राजा हो।

15. इति श्रुत्वा नृपश्चैव स्वदेशान् पुनरागमत्। महामदश्च तैः सार्द्धं सिन्धुतीरमुपाययौ ।
१५. यह सुनने पर राजा ने स्वदेश को वापस प्रस्थान किया। और महामद उनके पीछे सिन्धु नदी के तीर(तट) पर आ गया।

16. उवाच भूपतिं प्रेम्णा मायामदविशारदः। तव देवो महाराज मम दासत्वमागतः ।
१६. मायामद माया के ज्ञाता(महामद) ने  राजा से झूठ     कहा - हे महाराज ! आपके देव ने मेरा दासत्व स्वीकार किया है अतः वे मेरे दास हो गए हैं।

17. ममोच्छिष्टं संभुजीयाद्याथात त्पश्य भो नृप। इति श्रुत्वा तथा परं विस्मयमागतः ।
१७. हे नृप(भोजराज) ! इसलिए आज सेआप   मुझे ईश्वर के संभुज(बराबर) उच्छिष्ट(पूज्य) मानिए, ये सुन कर राजा विस्मय को प्राप्त भ्रमित हुआ।

 18. म्लेच्छधर्मे मतिश्चासीत्तस्य भूपस्य दारुणे, तच्छृत्वा कालिदासस्तु रुषा प्राह महामदम्।
१८. राजा की दारुण(अहिंसा) मलेच्छ धर्म में रूचि में वृद्धि हुई। यह राजा के श्रवण करते देख, कालिदास ने क्रोध में भरकर महामद से कहा।

19. माया ते निर्मिता धूर्त नृपम्हन हेतवे हनिष्यामि दुराचारं वाहीकं पुरुषाधमम्।
१९. हे धूर्त ! तूने नृप(राजधर्म) से मोह न करने हेतु माया रची है। दुष्ट आचार वाले पुरुषों में अधम वाहीक को मैं तेरा नाश कर दूंगा।

20. इत्युक्त्वा स द्विजः श्रीमान् नवार्ण जप तत्परः जप्त्वा दशसहस्रं च तद्दशांशं जुहाव सः।
२०. यह कह श्रीमान ब्राह्मण(कालिदास) ने नर्वाण मंत्र में तत्परता की। नर्वाण मंत्र का दश सहस्त्र जाप किया और उसके दशाश जप किया।

21. भस्म भूत्वा स मायावी म्लेच्छदेवत्वमागतः, भयभीतस्तु तच्छिष्या देशं वाहीकमाययुः।
२१. वह मायावी भस्म होकर मलेच्छ देवत्व अर्थात मृत्यु को प्राप्त हुआ। भयभीत होकर उसके शिष्य वाहीक देश में आ गए।

22. गृहीत्वा स्वगुरोर्भस्म मदहीनत्वमागतम्, स्थापितं तैश्च भूमध्ये तत्रोषुर्मदतत्पराः।
२२. उन्होंने अपने गुरु(महामद) की भस्म को ग्रहण कर लिया और और वे मदहीन को गए। भूमध्य में उस भस्म को स्थापित कर दिया। और वे वहां पर ही बस गए।

23. मदहीनं पुरं जातं तेषां तीर्थं समं स्मृतम्, रात्रौ स देवरूपश्च बहुमायाविशारदः।
२३. वह मदहीन पुर हो गया और उनके तीर्थ के सामान माना जाने लगा। उस बहुमाया के विद्वान(महामद) ने रात्रि में देवरूप धारण किया।

24. पैशाचं देहमास्थाय भोजराजं हि सोऽब्रवीत् आर्य्यधर्म्मो हि ते राजन् सर्ब धर्मोतमः स्मृतः ।
२४. आत्मा रूप में पैशाच देह को धारण कर भोजराज आकर से कहा। हे राजन(भोजराज) !मेरा   यह आर्य समस्त धर्मों में अतिउत्तम है।

25. ईशाज्ञया करिष्यामि पैशाचं धर्मदारुणम् लिंगच्छेदी शिखाहीनः श्मश्रुधारी स दूषकः।
२५. अपने ईश की आज्ञा से पैशाच दारुण धर्म मैं करूँगा। मेरे लोग लिंगछेदी(खतना किये हुए), शिखा(चोटी) रहित, दाढ़ी रखने वाले दूषक होंगे।

26. उच्चालापी सर्वभक्षी भविष्यति जनो मम विना कौलं च पशवस्तेषां भक्ष्या मता मम।
२६. ऊंचे स्वर में अलापने वाले और सर्वभक्षी होंगे। हलाल(ईश्वर का नाम लेकर) किये बिना सभी पशु उनके खाने योग्य न होगा।


27. मुसलेनैव संस्कारः कुशैरिव भविष्यति तस्मात् मुसलवन्तो हि आतयो धर्मदूषकाः।
२७. मूसल से उनका संस्कार किया जायेगा। और मूसलवान हो इन धर्म दूषकों की कई जातियां होंगी।

28. इति पैशाच धर्म श्च भविष्यति मयाकृतः इत्युक्त्वा प्रययौ देवः स राजा गेहमाययौ।
२८. इस प्रकार भविष्य में मेरे(मायावी महामद) द्वारा किया हुआ यह पैशाच धर्म होगा। यह कहकर वह वह (महामद) चला गया और राजा अपने स्थान पर वापस आ गया।

29. त्रिवर्णे स्थापिता वाणी सांस्कृती स्वर्गदायिनी,शूद्रेषु प्राकृती भाषा स्थापिता तेन धीमता।
२९. उसने तीनों वर्णों में स्वर्ग प्रदान करने वाली सांस्कृतिक भाषा को स्थापित किया और विस्तार किया। शुद्र वर्ण हेतु वहां प्राकृत भाषा के का ज्ञान स्थापित/विस्तार किया(ताकि शिक्षा और कौशल का आदान प्रदान आसान हो)।

30. पञ्चाशब्दकालं तु राज्यं कृत्वा दिवं गतः, स्थापिता तेन मर्यादा सर्वदेवोपमानिनी।
३०. राजा ने पचास वर्ष काल पर्यंत राज(शासन) करते हुए दिव्य गति(परलोक) को प्राप्त हुआ। तब सभी देवों की मानी जाने वाली मर्यादा स्थापित हुई।

 31. आर्य्यावर्तः पुण्यभूमिर्मध्यंविन्ध्यहिमालयोः आर्य्य वर्णाः स्थितास्तत्र विन्ध्यान्ते वर्णसंकराः।
३१. विन्ध्य और हिमाचल के मध्य में आर्यावर्त परम पुण्य भूमि है अर्थात सबसे उत्तम(पवित्र) भूमि है, आर्य(श्रेष्ठ) वर्ण यहाँ स्थित हुए। और विन्ध्य के अंत में अन्य कई वर्ण मिश्रित हुए।

भविष्य पुराण, प्रतिसर्ग पर्व, खण्ड 3, अध्याय 3 श्लोक  . 1 -31
अब जाकिर  नायक  बताये   कि  मुहम्मद  साहब  वास्तव   में  कौन  थे  ,


http://bhavishyapuran.blogspot.in/




सोमवार, 15 सितंबर 2014

भंडाफोडू लेखों का संकलन

मैं    भंडाफोडू   ब्लॉग  और फेसबुक   में इसी नामके  ग्रुप   के   सभी  प्रबुद्ध   पाठकों  आभार    प्रकट  करता हूँ  , जो फरवरी  2009  से आज तक मेरे लेख  पढ़ते आये  हैं  ,  और  समय  समय  पर मुझे अमूल्य  सुझाव  और  नए नए   टॉपिक   देकर   लिखने के लिए  उत्साहित   करते  आये  हैं  , ऐसे सभी  महानुभावों  को  यह  जानकर  प्रसन्नता  होगी  कि कल रात दिनांक 12 सितंबर   2014  को  मेरे 500 लेख  पूरे     गए   हैं  , जिनमे अधिकांश  अखिल  भारतीय हिन्दू  महासभा और प्रमुख  हिन्दू ब्लॉगों  और  आर्यसमाज   की  साइटों   में भी  देखे  जा सकते हैं   . मेरे लेखों   का  उद्देश्य   किसी  की भावना   को आहत करना  नहीं  , बल्कि प्रमाण  सहित  सत्य  लोगों  तक पहुंचाना   रहा है  , ताकि नयी  पीढ़ी के युवा  विधर्मियों   के दुष्प्रचार    से  गुमराह  होने से बचें  , और अपने  धर्म , संस्कृति और देश के प्रति  निष्ठावान  बने रहें   ,
इसी उद्देश्य  की पूर्ति  के लिए पिछले  दो महीने  से  मेरे कई  समर्थक   और हिन्दू  संगठनों   के पदाधिकारी  मेरे  मुख्य  महत्त्व  पूर्ण  लेखों    के  संकलन  को  एक   पुस्तक   के  रूप   में  प्रकाशित करवाने   का  आग्रह   कर  रहे  हैं  ,
ताकि   उन  लोगों   को  भी  जागरूक   किया जा सके  जिनके   पास  नेट  की  सुविधा  नहीं  है , इसका एक और  कारण  है कि  मेरे  लेख विषयानुसार  वर्गीकृत  नहीं  थे  , पुस्तक   में  सभी लेख    व्यवस्थित     होंगे  ,
 काफी  तलाश   के बाद  दो  ऐसे  प्रकाशक    तैयार  हो गए  हैं  , अभी   कुल 150  लेखों  का संकलन  बनाने की योजना है  , सभी  पाठक  भली भांति   जानते हैं  कि  आज  तक  कोई  मेरे किसी  लेख  का  खंडन  नहीं  कर    पाया  है . मेरा दावा  है  कि  यह  पुस्तक सभी  लोगों   के लिए उपयोगी  होगी  ,जो विधर्मियों  से शास्त्रार्थ  करते  हैं  , खासकर वह युवा जो सेकुलरिज्म  के कारण गुमराह   हो  रहे हैं   , यही नहीं  यह  पुस्तक हिन्दू  लड़कियों   को  लव जिहाद  का शिकार  बनने से बचाएगी  .
इस  लिए  सभी हिन्दू  संगठन के पदाधिकारियों  , हिन्दू  धर्म  प्रेमी  दानी  महोदय  , और  पाठकों   से  निवेदन   है  , कि  कार्य के लिए   उदारता  पूर्वक यथा संभव   अपना  योगदान   करने का की  कृपा करें  ,  भवदीय  . बृज  नंदन  शर्मा  ( भंडाफोडू )Mob-9893731808
नोट - आप  सहयोग  राशि  चेक  ,  कैश  , या  नेट बैंकिंग     से इस  खाते  में भेज  सकते  हैं  .
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शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

इस्लामी जिहाद के दो नए रूप

जो लोग अज्ञानवश   इस्लाम  को  भी   धर्म  समझ   लेते  हैं  ,और  खुद को सबसे बड़ा सेकुलर    साबित  करने के लिए इस्लाम  और हिन्दू धर्म  की  समानता  की  वकालत   करते रहते हैं   ,उन्हें  पता  होना  चाहिए कि  इस्लाम  में  जिहाद के  नाम  पर ऐसे   कुकर्म   भी   जायज हैं   , जिन्हें  करने पर  शैतान   भी  मना   कर  देगा  ,जिस समय   भंडाफोडू   ब्लॉग  में  लव्  जिहाद   के  बारे में  लेख प्रकाशित   हुआ था  , तो  उसकी  टिप्पणी  पर   हमारे एक  जागरूक  पाठक "smmalusare     "  ने  दिनांक    8  फरवरी  2010  को इस्लाम   के  जिहाद  का  ऐसा  घिनावना   और  निंदनीय  रूप  प्रस्तुत  करते हुए  जो  जानकारी  दी  थी   ,  वह  उन्हीं  शब्दों   में  ज्यों  की  त्यों   दी   जा रही  है  , ताकि  लोगों  के दिमाग से इस्लाम   का रोग निकल जाये  , ध्यान  से पढ़िए  ,

इस्लामी जिहाद दो नयें रुपों में सामने आया है. पहला लव जिहाद ( अथवा लिंग जिहाद) और दुसरा गुदा जिहाद , (अश्लील शब्दों के लिए माफी चाहुंगा).
इनमें से पहला लिंग जिहाद है, जिसमें मुस्लिम युवक हिंदू युवती से येनकेन प्रकारेण दोस्ती बनाकर उससे शादी कर लेता है. शादी के बाद बच्चे पैदा करके उसे सेक्स स्लेव्ह बनाकर अपने दोस्तो, रिश्तेदारों को नज़राने के रुप में पेश करता है. हिंदू लडकी झाँसे में आ भी जाए, किंतु अगर उसके पालक अगर समय रहते जागरुक हुए तो लिंग जिहादी को पुलिस के फटके पड़ने की संभावना तो शत प्रतिशत. उपर से कानूनी सजा मिलना अलग और 5-6 साल जेल की चक्की पिसना नसीब में.

लेकिन सबसे खतरनाक है गुदाजिहाद. जी हाँ. यह इसलिए बहुत खतरनाक है की, गुदा जिहादी जबतक आपके करीब ना आए और स्वयं को बम से ना उडा़ दे, आप समझ ही नही सकेंगे की वह एक गुदा जिहादी था (अगर आप की मौत ना हुई हो और बच गए या धमाके में अपाहिज हुए, तो.) होता क्या है कि, मुस्लिम कट्टरवादी किसी गरीब मुस्लिम परिवार के 12-15 साल के बच्चे को बहला फुसलाकर, उसका दिमाग ब्रेनवाश करके तथा उसके माँ-बाप को खासी रकम देकर अपने साथ कर लेते हैं. बाद में उसके दिमाग में दीने इस्लाम और जिहाद की बातें इतनी ठूँस-ठूँस कर भरी जाती हैं कि, वह पुर्णरुपेण (सर से पाँव तक) जिहादी बन जाता है. और ऐसा बने भी क्यों ना? क्योंकि कुरान में तन, मन और धन से जिहाद करना जो सिखाया है, जी हाँ जिहाद अपने तन (शरीर), मन (दिमाग) तथा धन (पैसे) से करो. अब 12-15 साल के लड़के के पास ना तो मन (दिमाग) होता है और ना ही धन (पैसा). तो उसके पास जिहाद के लिए बचा क्या? केवल अपना तन (शरीर). और कुरान में यह भी लिखा है की अपने अंगप्रत्यंग (शरीर के सारे भागों से) जिहाद करना फर्ज है. तो इस जिहादी बच्चे के पास बचा क्या? सिर्फ गुदा. और शातीर कट्टरपंथी इसी का फायदा उठाते हैं. पहले उस बच्चे से गुदामैथुन करके अपनी हवस को शांत करते है और साथ ही तबतक उसकी गुदामैथुन करते है जबतक की उसकी गुदा इतनी चौड़ी ना हो जाए कि उसमें आर.डी.एक्स. तथा डिटोनेटर घुस जाएँ. एक बार गुदा के अंदर आर.डी.एक्स., डिटोनेटर वैगराह विस्फोटक सामाग्री फिट कर दी जाये, बाद में उसे रिमोट कंट्रोल से जोडकर उसका रिसिव्हर गुदा जिहादीके पिठ पर बाँध देते हैं. (पिठ पर बाँधने से गुदा जिहादी उसे छु नहीं सकता. और ऐसा इसलिए करते हैं की शायद आगे जाकर गुदा जिहादी बगावत करें तो भी उसके हाथ पिठ में बँधे रिसिवर तक नां पहुँचे और कट्टरपंथियों का उसे विस्फोट करने का अंजाम पूरा हो जाए) आगे गुदा जिहादी किसी भी भिड़भाडवाली जगह पर पहुँच गया तो उसे कट्टरपंथी अपने रिमोट कंट्रोल से उडा देते हैं.
इसलिए प्रिय भारतीय नागरिकों, अपने आप को सँभालो. मुसलमानों की बस्तियाँ अपने पास ना बनने दें. मुस्लिम युवकों से सदैव सावधान (दोस्ती बनाने का केवल बहाना करें, ना की सचमुचके दोस्त बन जाएँ). अपने नजदिक किसी 12-15 साल के मुसलमान बच्चे को ना आने दें. (हो सकता है वह शायद गुदाजिहादी हो. क्या भरोसा?) अपनें बच्चों को मुसलमान बच्चों के साथ मेलमिलाप नां करने दें और उन्हें हमेशा दूर रखें. सदैव हिंदू सभ्यता का सम्मान, आदर करें. हिंदूराष्ट्र का अभिमान रखें.फिर भी मुसलमान  कहते हैं  कि  जिहाद   का   मतलब जुल्म  का  विरोध   करना  है , लानत  है  ऐसे जिहाद  पर और थू है ऐसे इस्लामी विचार  पर  .  

जय हिंदूराष्ट्र 

Is Sodomy The New Jihadi Training Method?

https://www.youtube.com/watch?v=jaheeT4rTR4

शुक्रवार, 29 अगस्त 2014

हिन्दुओं को मिटाने की जिहादी योजना !

जिहाद  इस्लाम का अनिवार्य  कर्तव्य   है  ,जिसका उद्देश्य  पूरे  विश्व  से गैर मुस्लिमों का  सफाया  करके   इस्लामी खिलाफत कायम   करना  है   , चूँकि मुसलमानों  की   नजर में इस समय  काफिरों  की  सरकार  है  , इसलिए मुसलमान     उसे  गिराने की  योजना   बना रहे हैं   , इसके लिए वह  हर तरह के  हथकंडे   अपना   रहे  हैं   , इसके बारे में  दिनांक 31  जुलाई  2014  को " जिहादियों के नए हथकंडे  "  शीर्षक   से एक  लेख भी  प्रकाशित  किया   गया  था  , यद्यपि जिहादी  भारत के विरुद्ध  आतंकी  योजना अफगानिस्तान  और  पाकिस्तान   में  बना रहे हैं   ,  लेकिन  इस बात  तय है  कि जब भी  भारत के खिलाफ  जिहाद   होगा तो  यहाँ के मुसलमान  उनके  साथ  हो  जायेंगे  . अभी  तो   यहाँ   के मुसलमान  विभिन्न   अपराध  करके  देश में अस्थिरता   का  माहौल   बना रहे   हैं  और  जब  पूरे देश में अफरा  तफरी   फ़ैल जाएगी  तो बाहरी जिहादी  देश में  घुस  जायेंगे  , मुसलमानों   की  इस  जिहादी  योजना  का पर्दाफाश  " अनिमेष  राउल " ने किया  है    जो  " Executive Director of Research at the New Delhi-based Society for the Study of Peace and Conflict (SSPC  " हैं .जिसका पूरा  विवरण 13  जून  2014  को  ही  प्रकाश  में  आगया था  , लेकिन सरकार  मोदी  के 15 अगस्त के  भाषण  तक  बैठी  रही ,
बाद में जो जानकारी  मिली  वह काफी चिंता का विषय  है .
 क्योंकि  इसमे बताया है   कि ,

1-कंधार  से  भारत  की  तरफ 

जानकारी के मुताबिक   इन  दिनों  सभी  इस्लामी  जिहादी  गिरोह  विश्व   में  इस्लामी  हुकूमत  यानि  खिलाफत   कायम  करने में  लगे हुए हैं   , और  आज उनका मुख्य   निशाना   भारत   ही   है  , अल  कायदा के  सरगना  अयमान   जवाहरी  और और मौलाना असीम  उम्र  ने   अल इसबाह नामकी  मिडिया के माध्यम से  विडिओ  और  सन्देश  भारत   भर में   मुसलमानों    तक   भेज  दिए   है   ,  ताकि  भारत के  युवा  मुस्लिम    तोड़फोड़  और  बलात्कार जैसे  अपराधों  से  देश  की  सरकार  को अस्थिर    कर  दें   , और   जब  सरकार  कमजोर  होगी  तो  बाहरी   जिहादियों   को  देश में  घुसने  में  आसानी   हो  जाएगी  , अपने इस  उद्देश्य  को  पूरा   करने के लिए अल  कायदा के मौलाना "अबु  मुसायब अब्दुल  वदूद -أبو مصعب عبد الودود " ने  अफगानिस्तान में  एक आतंकी  गिरोह बना   लिया है।  जिसका  नाम  "तंजीम  अंसार फिल बिलाद अल हिन्द -  تنظیم انصار التوحید فی بلاد الھند " है .इस संगठन    ने  अब   तक  कई वीडियो  जारी  किये  हैं   ,जिनमे  भारत के  मुसलमानों  को " अल शबाब  الشباب‎-" यानी  युवा (youth  )  सम्बोधित करके  भारत में  हर प्रकार  से ऐसे अपराध  करने के  लिए उकसाया  गया है  ,जिस से जिस से देश में दंगे भड़क  जाये  . इसके आलावा एक चालीस मिनट के विडिओ में  विश्व  के  सभी आतंकी  गुटों  को  भारत की  तरफ  हिजरत  करने   का   आदेश   दिया  गया है   , विडिओ में उर्दू में लिखा है  '
""ادارہ العصابة کی جانب سے پیش خدمت ہے مسئول امورشرعیہ انصارالتوحید 
مولاناعبدالرحمن الہندی حفظہ الله کا بیان بعنوان " قندھار سے دہلی کی طرف  "
नोट- इसका हिंदी लिप्यांतरण है  " इरादये अल असाबाह की जानिब  से , पेश खिदमत है  , मसऊल उमूरे शरियाः ,अंसार उत तौहीद , मौलाना अब्दुर रहमान  अल हिन्दी , हिफ्जुल्लाह ,का बयान , बि उन्वान "कंधार से देहली की तरफ "

इसके अलावा मौलाना अब्दरहमान  हिंदी ने एक दस मिनट के विडिओ   में  भारत के  मुसलमानों   से कहा है  कि  वह बाबरी  मस्जिद  और  गुजरात   के दंगों   का बदला  लेने  के  लिए भारत  के सभी औद्योगिक और आर्थिक   केन्द्रों  को  नष्ट  करने का  प्रयास  करें  .

2-जिहादी दुष्प्रचार 

जिहादी  प्रचार  मिडिया  " अल इस्बाह  العصابۃ-"  ने  एक  विडिओ    जारी   किया  है  ,जिसमे  बताया है  कि अफगानिस्तान  स्थित  हेरात  में भारत के  वाणिज्य दूतावास में 23 मई को जिहादियों   ने  हिन्दू  सरकार के सामने   अपनी ताकत  दिखाने  के लिए  विस्फोट  किये  थे  , यह बाबरी  मस्जिद  गिराने  और गुजरात में  मुसलमानों   की  हत्या का बदला है  , इस  विडिओ  में चेतावनी   दी गयी  है कि जल्द ही  भारत पर जिहादी  हमला होगा , जिसकी  मदद भारत के " उसूदुल हिन्द  - الاسود الهند" यानी हिन्द के शेर ( lions of India) मुसलमान  करेंगे  . इस विडिओ में   कहा है  कि भारतके  मुसलमान  संप्रदायवादी  दंगो  और राजनीतिक मतभेद  का  भरपूर   फायदा  उठायें  , इस से  भारत में  जिहाद  जल्दी  कामयाब  होगी  . मौलाना अब्दुल रहमान हिंदी  ने  एक 18  मिनट के विडिओ  में  भारत के  मुसलमानों  से कहा है कि "मुसलमानों अगर तुम आज  इसबात को  नहीं  समझोगे तो तुम  नष्ट  हो  जाओगे  "Oh Indian Muslims, if you can’t understand, you will perish "इस विडिओ   में  मुसलमानों जिहाद के लिए उकसाने  के लिए सात  बन्दुकधारी  पुलिस  वाले  बताये गए हैं   जो  मुसलमानों  पर  गोली  चला  रहे   हैं .इस विडिओ   में आगे बताया है कि सन 1947 से आजादी के बाद से ही मुसलमान  भयभीत  होकर जिंदगी गुजार  रहे हैं  , यहाँ तक वह  जिस गाय  को  खाकर  अपना  पेट  भरते  हैं   ,   होकर  उसी  गाय  की  पूजा  करने पर  मजबूर   हैं  , अल असबाह  ने अरबी ,उर्दू  और  बंगला भाषामे ऐसे कई विडिओ   भारत के  बड़े बड़े  शहरों  में भेज  दिए  हैं  ,जिस  से भारत के मुसलमान   देश भर में  दंगे  फसाद और जघन्य  अपराध   करके  खुद को  जिहादी  मानने  लगें ,और  आत्मघाती  बम  बन  कर  मरने वाले  जिहादियों   के  लिए  कुरान की  यह आयात भी   दी गयी   है  
“जो लोग अल्लाह की राह में क़त्ल हुए हैं इन्हें मुर्दा न समझो वो ज़िन्दः हैं अपने रब के पास से रिज्क़ पा रहे हैं,"

अल अस्बाह ने भारत के युवा  मुस्लीमों    को  जिहाद के  लिये सभी  बड़े शहरों  में हर प्रकार  के अपराध  करने  का आदेश दिया है जिस से  बाहरी जिहादियो    का रास्ता साफ हो जाए  . इसमे बहार  के जिहदियों  को  भारत के जिहादियों   का  साथ  देने  को  कहा है  , और  कुरान  की  यह  आयत दी गयी  है  ,

" मुस्लिम देशों के जिहादी ,गैर मुस्लिम देशों में रहने वाले जिहादियों की सहायता करें , ऐसा करना मुसलमानों के लिए अनिवार्य है " 
सूरा -अनफाल 8:72 


3-खुरासान  देश  की  स्थापना 

जिहादी संगठन "अंसार उत तौहीद ( AUT)  ने विडिओ  और उर्दू  प्रकाशनों   में भारतीय  मुसलमानों   से कहा है कि  वह  भारत की हिंदूवादी  सरकार को  उखड फेकने में    हर   तरीकों    का  प्रयोग  करें   ,  तभी  इस  मध्य्   एशिया  में एक ऐसी  इस्लामी  खिलाफत  कायम  हो  सकती  है  , और उस पूरेदेश का नाम  "खुरासान  " होगा  . इस देशमे तुर्कमेनिस्तान  , उजबेकिस्तान  , ताजिकिस्तान   भी शामिल   होंगे  , और इन  सबके जिहादियों  के भारत के मुसलमान   दिल्ली   के  लाल  किले  पर  खुरासानी  झंडा  फहरा   देंगे   .

Black Flag of Khurasan

http://www.crwflags.com/fotw/images/a/af%7Dqaeda.gif


4-भारत  में  जिहादियों का जाल 

दिल्ली से  प्रकाशित अंगरेजी  अख़बार  मेल टू डे ( Mail today)  के दिनांक 23 मई  2014 के  अनुसार पाकिस्तान के कई  आतंकी गिरोह  इस समय पूरे भारत में  सक्रीय हैं  . और  भारत के मुस्लिम युवक अंसार उत तौहीद ( AUT)  में  शामिल  हो  रहे हैं   ,इन में से कई  युवक गुप्त रूप से  पाकिस्तान  के वजीरिस्तान   में जाकर  आतंकवाद   की ट्रेनिग   भी   लेकर  आये हैं  . अंगरेजी  अखबार दि हिन्दू (the Hindu  ) दिनाक  22 मई  2014 के अनुसार  अधिकांश   मुस्लिम  युवक  उत्तर प्रदेश  के  आजम गढ़  और  कर्णाटक  के भटकल  जिले के  हैं  . जिनको पूरे भारत में आतंक फ़ैलाने  , तोड़फोड़  करने  और विस्फोट  करने की  जिम्मेदारी  दी गयी  है  , और  स्थानीय  मुसलमानों को  उनकी आर्थिक और कानूनी   मदद    देने के  निर्देश   दिए  गए हैं .
इस बात   का खुलासा तब  हुआ जब  ख़ुफ़िया एजेंसियों   ने  दिनांक  30 मई 2014  को चेन्नई से  इंडियन मुजाहिद  के एक  सदास्य  "हैदर अली "  को गिरफ्तार   कर लिया   . और जब  पूछताछ  पर  हैदर अली ने बताया  कि 26 अक्टूबर  2013 को  पटना  में बी जे पी  की  रैली  में  कई विस्फोट  इंडियन  मुजाहिद ने किये थे   ,  जिसका नेतृत्व   सफदर  नागौरी   ने   किया  था  . हैदर अली ने  बताया कि इन  विस्फोटों   का उद्देश्य  पूरे भारत में   अफरातफरी  का  माहौल पैदा  करना था  ,  और भारत  को  हिन्दुओं  से मुक्त   कराना   है  , जिसकी शुरुआत  कश्मीर  से होगी  .
हैदर अली ने यह भी बताया कि कश्मीर की सीमा पर हमारे  जिहादी  तैयार  बैठे हैं  , कि जैसे ही  सीमा पर  तनाव  बढ़ने  पर युद्ध की  नौबत  आ  जाएगी तो पाक सेना की  मदद  से जिहादी कश्मीर  से भारत के अंदर  घुस   जायेंगे  ,  और उसी  समय भारत के अंदर के सभी जिहादी गुट  सक्रीय   हो जायेंगे  . और यह गुट तब तक शांत  नहीं  होंगे जब  तक  उनका  मकसद पूरा  नहीं   होगा  , इसलिए भारत के मुस्लिम  युवकों  को   हिंडन के खिलाफ जिहाद के लिए  मानसिक   रूप  से तैयार   किया  जारहा है  ,


5-भड़काऊ  भाषण का नमूना 

विदेशी धन से बिके  हुए भारत के मुल्ले मस्जिदों   में मुसलमानों  पर होने वाले अन्याय की  ऐसी झूठी खबरें फैलाते  रहते हैं   जिस से दंगे  चालू  रहते हैं   ऐसा ही    भाषण का एक  नमूना  देखिये ,

रमजानुल मुबारक के बाबरकत महीने भी मुसलमानों को सुकून ना मिल सका यू.पी.के एक गॉंव में जब सभी मुसलमान तरावीह के लिए जा चुके थे बुज़दिल हिंदुओ ने मुसलमानों के घरों पर यकबारगी हमला कर दिया और लूट मार की लेकिन मुसलमानों की सबसे बड़ी दुशमन पुलिस ने बड़ी में नुकसान उठाए हुए मुसलमानों को गिरफतार करके उनके ज़खमों पर नमक छिड़कने मे कोई कसर ना छोड़ी जबकि हिंदुओं पहले ने मुसलसल तीन दिनों तक पूरे गॉंव का मुहासरा किए रखा लेकिन पुलिस की तरफ से ना कोई एकशन ना गिरफतारी मेरे भाइयो इन नसली बुज़दिलों का इलाज सिरफ तलवार है .जिसको अपने से ताक़तवर देखते हैं उसे अपना देवता बना लेते जबकि इनके यहॉं कमजोरों को जीने का कोई हक़ नही"

अब जिहादियों  और  मुसलमानों  के ऐसे  इरादों   के बारे में  जानकारी होने पर भी  हिन्दू  सिर्फ  उत्सव  मनाने  ,  जयंतियाँ  मनाने  , मंदिरों   में क्विंटलों  सोना चांदी   चढाने  को  ही  धर्म  मान लेते  हैं  , और सामने  शत्रु साफ  दिखाई देने पर उसी तरह  आँखें   बंद  कर लेते हैं  ,जैसे  कबूतर  बिल्ली को देख कर  आँखें  बंद करके  मान लेता है  कि सामने  बिल्ली  नहीं  है  . हिन्दू यदि  यही  कबूतरी  नीति  पर चलेंगे  तो  न तो  देश  बचेगा  और न  हिन्दू धर्म ही रहेगा   . हिन्दुओं   को इतिहास  से सबक  लेने की  जरुरत  है  ,  याद रखिये जब  मेहमूद गजनवी  सोमनाथ पर हमले की तैयारी  कर रहता तो हिन्दू राजा यज्ञ  अनुष्ठान  कर रहे थे ,और सोच रहे थे कि  भगवान शिव अपने तीसरे  नेत्र से म्लेच्छों  को भस्म  कर देंगे  , हिन्दुओं   को समझना होगा  कि कोई  देवी  देवता उनको नहीं  बचा सकेगाजबतक वह  खुद देश के और हिन्दुओं  के दुश्मन  जिहादियों  को ईंट का जवाब पत्थर  से नहीं  देते  .

 श्री  गुरु गोविन्द सिंह  जी  ने  कहा   है  ,

" यही  देहि आज्ञा  तुरक  को खपाऊँ  , गऊ घातियों   को जगत  से मिटाऊँ "

http://bab-ul-islam.net/showthread.php?p=58877#post58877

 http://www.sspconline.org/sspcinmedia/AnsarTawhid_TransnationalJihadistThreat_India

सोमवार, 4 अगस्त 2014

भगवद्गीता को राष्ट्रिय ग्रन्थ घोषित करो !


बड़े दुःख   के साथ   कहना  पड़ता है कि हिन्दुओं    को  सेकुलरिज्म   के रोग   ने इस तरह   से   ग्रस्त   कर लिया है कि  भगवद्गीता   को   एक   हिन्दू  धर्मग्रन्थ  मानने की  भूल  करने   लगे  हैं  और  उसकी  तुलना  अन्य  धर्म ग्रंथों  से करने लगे   हैं  , जबकि वास्तविकता तो  यह है कि प्रतिपादित सभी  सिद्धांत ,  नियम   और उपदेश   किसी विशेष  देश  , जाति य समूह  के लिए  नहीं   मानव  मात्र के लिए  हैं   . गीता  मनुष्यों  में  नहीं  बल्कि  सभी    प्राणियों  में  ईश्वर   का  अंश  है   , ऐसी  शिक्षा  देती   है  , गीता  के उपदेशो   का   ठीक  से पालन  करने वाला  कभी  हिंसक   और  अपराधी   नहीं   बन सकता    है   . और  सपने में भी किसी  का अहित  नहीं  सोच  सकता  , चूँकि   सभी हिन्दू  गीता पर  श्रद्धा  रखते हैं  ,इस   लिए हिन्दुओं   ने  न तो  किसी  देश  पर आक्रमण  करके  उस  पर कब्ज़ा   करने का प्रयत्न  किया  ,  और न  ही किसी प्रकार की जिहाद करके  लोगों  को जबरन हिन्दू   बनाया  है  , जैसा  कुरान  पढ़   कर  मुसलमान  कर   रहे हैं   . गीता में  बताया गया  धर्म  पूर्णतः   वैज्ञानिक  ,  तर्क  सम्मत  और  सार्वभौमिक  है   . ऐसे धर्म   का  पालन   कराने  के गीता  किसी  कल्पित  जन्नत का  प्रलोभन   और   किसी  जहनम   का  भय नहीं   दिखाती  . और इसी  बात को स्पष्ट  करने  के   लिए  सुप्रीम  कोर्ट  के  फर्स्ट  क्लास   जज   माननीय    श्री  ए आर     दवे   ने  सार्वजनिक रूप  से जो कहा है   , उसका  एक एक  अक्षर हीरों  से  जड़ने   के  योग्य    है   , पूरी  खबर टाइम्स  ऑफ़  इण्डिया  में दिनांक  2  अगस्त  2014   शनिवार    को  प्रकाशित    हुई   है   जो इस  प्रकार  है   .
"सुप्रीम कोर्ट के जज ए आर दवे का कहना है की अगर मैं तानाशाह होता तो क्‍लास वन से बच्चों को गीता और महाभारत पढ़वाता, दवे ने यह भी कहा कि भारतीय लोगों को अपनी पुरानी परंपराओं की ओर लौटना चाहिए और बच्‍चों को शुरुआती उम्र में ही महाभारत और भगवद्गीता पढ़ाई जानी चाहिए, वह 'भूमंडलीकरण के दौर में समसामायिक मुद्दे और मानवाधिकारों के समक्ष चुनौतियां' विषय पर लोगों को संबोधित कर रहे थे। दवे ने कहा, 'जो लोग बहुत सेक्‍युलर हैं या तथाकथित तौर पर सेक्‍युलर हैं, वह इस बात से सहमत नहीं होंगे, लेकिन अगर मैं भारत का तानाशाह होता तो तो मैं गीता और महाभारत क्‍लास वन की पढ़ाई में शामिल करवाता। 
सुप्रीम कोर्ट जज ए आर दवे का मानना है कि यह वह उपाय है, जिससे आप सीख सकते हैं कि जिंदगी कैसे जी जाए, मुझे नहीं पता कि लोग मुझे सेक्‍युलर कहते हैं या नहीं, लेकिन अगर कोई चीज कहीं अच्‍छी है तो हमें उसे लेने से गुरेज नहीं करना चाहिए, दवे ने कहा, गुरु-शिष्‍य परंपरा खत्‍म हो चली है, अगर यह परंपरा बनी रहती तो हमें हिंसा या आतंकवाद जैसी समस्‍याओं का सामना नहीं करना पड़ता। हम दुनिया भर में आतंकवाद के मामले देख रहे हैं। इनमें से अधिकतर देश लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था वाले हैं। अगर लोकतंत्र में सभी लोग अच्‍छे हों, तो वे जाहिर तौर पर किसी अच्‍छे को ही चुनेंगे। फिर वो शख्‍स किसी को नुकसान पहुंचाने के बारे में नहीं सोचेगा।   "

न्यायाधीश  दवे  का  पूरा  वक्तव्य  इस  विडिओ   में सूना   जा सकता   है ,

Justice A.R Dave Statement

https://www.youtube.com/watch?v=WShBq_9w77Y

http://www.hinduismtoday.com/modules/smartsection/item.php?itemid=5047

1-भगवद्गीता उपनिषदों का सार है
  वास्तव में  धर्म   का  मूल  तो  वेद  ही हैं   , और  उपनिषदों  में वेदों  विभिन्न   विषयों  को  सरल भाषा में  समझाया  गया है  , सब   जानते हैं कि  भगवान  कृष्ण  ने  उज्जैन   जाकर  सांदीपनि आचार्य से  वेदों  और  उपनिषदों   का  अध्यन  किया  था  , और  उन्होंने  जो कुछ भी  सीख था   उसे  अर्जुन  को  सनाया था  . जिसे  महर्षि  व्यास  ने  महाभारत  जैसे  महान  ग्रन्थ   में सम्मिलित   कर दिया  , इसके  बारे में  गीता  माहात्म्य  में  कहा  गया  है   ,
""सर्वोपनिषदो  गावः  दोग्धा   गोपाल  नन्दनः  , पार्थो  वत्स  सुधीरभोक्ताः  , गीता दुग्धामृतम  महत  "
अर्थात  -सभी  उपनिषद्   गायें  हैं  , और  उनका  दूध   दोहने  वाले  (  ग्वाला  )  कृष्ण  है  , और  उस  गाय  का दूध  पीने  वाला  बछड़ा   अर्जुन   है   , और उपनिषद्  रूपी    गायों   अमृत   के  सामान  दूध   " गीता "   है    .
यही   कारण  है ,कि भगवद्गीता  को  उपनिषदों   के  सामान  प्रामाणिक  और  पवित्र  धर्म  ग्रन्थ   माना  गया   है   ,

2-भगवद्गीता  के भाष्य 

यद्यपि  गीता में प्रयुक्त  संस्कृत   बहुत क्लिष्ट  नहीं  है  , और न उसके विषय दुर्बोध   है  .  हरेक  व्यक्ति  थोड़े से प्रयास   से अर्थ  समझ  सकता   है  , फिर भी अनेकों  आचार्यों  और  विद्वानों  ने   गीता  के  भाष्य ( Commentaries )   लिखे  हैं  , ऐसे प्रमुख  आचार्यों   और उनके  द्वारा  किये गए गीता  के  भाष्यों  के नाम  इस  प्रकार हैं  ,
1-आदि शंकराचार्य -अद्वैत  भाष्य
2-रामानुजाचार्य -विशिष्ट  अद्वैत  भाष्य
3-मध्वाचार्य  -द्वैत  भाष्य
4-वल्लभाचार्य -तत्व दीपिका
5-यामुनाचार्य  - अर्थ संग्रह देशिका
6-नीलकंठ -  भावदीपिका
7-पुरुषोत्तमाचार्य -अमृत  तरंगिणी
8-जय तीर्थ -प्रमेय  दीपिका
9-वेंकट नाथ  - बृक मंदागिरी
10-लोकमान्य तिलक - गीता रहस्य
11-मो. क.गांधी  - अनासक्ति योग

3-गीता का  उर्दू काव्यानुवाद 

वैसे तो  विश्व  की लगभग  सभी भाषाओं   में  गीता  के अनुवाद हो  गए  हैं  , तभी  मेरे मन में  गीता   का  उर्दू  में  कविता के रूप  में  अनुवाद  करने का  विचार  आया  ,  लेकिन  उसमे उर्दू  लिपि   की  जगह  देवनागिरी     लिपि    ही  रखी  ताकि हिन्दू  और मुस्लिम   गीता   के बारे में   जान सकें  .दो  वर्ष  की  मेहनत  के  बाद  मैंने  गीता   का उर्दू पद्यानुवाद  27  मई  2001  को  पूरा  कर दिया   ,  इसमे कुल 700 श्लोक   हैं ,और  कुल पंक्तियाँ  2800  हैं  . और कुल पृष्ठ 233  हैं  , जिसमे  प्रत्येक  पृष्ठ  में 12  पंक्तियाँ   है  .  मैंने  गीता के इस  उर्दू  काव्यानुवाद  का नाम  "गीता  सरल  "रखा   है .गीता  सरल  पढने के लिए इस  लिंक  को  खोलिए ,

निवेदक --पं. बृज  नंदन  शर्मा  -Ph-0755-4078540   Mob - 09893731808

http://geeta-urdu.blogspot.in/

4-गीता  कानून  से  हिन्दू धर्मग्रन्थ  है 

गीता की  पवित्रता  और महानता  अंगरेज  अदालतें   भी  मानती  थीं  , इसलिये  उन्होंने अदालत में  शपथ पूर्वक बयान देते समय  हरेक  हिन्दू  वादी -प्रतिवादी को  गीता  पर  हाथ  रख  कर कसम  खाने   का  कानून  बना  दिया  था  ,जो  आज भी  चल  रहा  है  , यही नहीं  वर्तमान  सुप्रीम  कोर्ट  ने  भी 2 जुलाई 1995 को   एक  फैसला  दिया   था

"court think that it is Vedanta, and Vedanta alone that can become the universal religion of man, and no other is fitted for the role
.
N. VENKATACHALA and S. SAGHIR AHMAD   .  the Supreme Court of India.New Delhi.July 2, 1995

इसलिए  सभी  हिन्दुओं  को चाहिए कि धर्म  के नाम पर  फैले हुए पाखण्ड  को त्याग  दें   , किसी भी  औलिआ बाबाओं  के चक्कर में न फसें  , और अपने घरों में  भगवद्गीता   लेकर  खुद  पढ़ें  और  अपने  बच्चों  को अर्थ  सहित  समझाएं   , इस से आपका पूरा परिवार संस्कारी  बनेगा  , और समाज भी  अपराध  मुक्त होगा   .  और  जितने भी  हिन्दू  संगठन   है वह  भगवद्गीता   को  राष्ट्रीयग्रन्थ   घोषित  करने   का प्रयास  करें  ,   सिर्फ एक  गीता ही  देश   की हालत सुधार  सकती   है   ,  क्योंकि  यह भगवान कृष्ण  का उपदेश  है  , जैसा की कहा है  ,


'गीता सुगीता कर्तव्या किमन्यै शास्त्र विस्तरैः, या स्वयं पद्मनाभस्य  मुखपद्मविनिः सृतम्  "

अर्थ - गीता  को सुगीता  करिये  ,यानी उसका  पालन  करिये  ,  अन्य  शास्त्रों   के विस्तार  को नहीं  देखिये  ,  गीत तो स्वयंही    भगवन  के मुख की वाणी है !

(200)

शनिवार, 2 अगस्त 2014

बेनामी मुस्लिम को करारा जवाब

मुझे विभिन्न  विषयों  पर लेख देते हुए  लगभग  पांच  साल  हो गए , इस दौरान  मैंने  अनुभव   किया है कि जब  लोग मेरे  अकाट्य प्रमाणों   का खंडन   नहीं  कर  पाते  और  सत्य को स्वीकार  करने में  आनाकानी  करते  हैं  , यातो  वह  लोग मूल विषयसे हट  कर दूसरी बात करने लगते हैं   . या बेनामी  बन कर  टिप्पणी  में अशिष्ट  और गालीगलौच   की भाषा   का प्रयोग  करने लगते  हैं  , खासबात यह है कि  ऐसा तभी होता है जब  इस्लाम के बारे में कोई  लेख  दिया जाता  है .मेरा  उद्देश्य  किसी  की भवन को ठेस  पंहुचाना  कदापि नहीं  रहा  , परन्तु   मैं लोगों  के सामने  प्रमाण सहित असत्य  का भंडाफोड़ करना  अपना कर्तव्य मानता हूँ  . साथ ही  अशिष्ट  और असभ्य भाषा का प्रयोग  करना मेरी दृष्टि में  महापाप   है   , यह   लेख  इसलिए  दिया  जा रहा  है  ,ताकि प्रबुद्ध  पाठक  जान  सकें  कि ,भंडाफोडू  हिंदी   का एकमात्र  ऐसा ब्लॉग  है , जिसमे  बिना किसी द्वेष और दुर्भावना   के प्रमाण  सहित सभी विषयों  पर लेख  प्रकाशित किये   जातेहैं  , यह सिलसिला  सन 2009  से  चलता आरहाहै  . इसका उद्देश्य झूठी  मान्यताओं   का भंडाफोड़ करना  है  , इसी  क्रम   में दिनाक 29 जून 2014 को ब्लॉग  में एक लेख  प्रकाशित   हुआ  था  , जिसका  शीर्षक " भंडाफोडू की  बात सच  निकली " था  . यद्यपि  इसलेख   में ऎसी  कोई   बात नहीं  थी  ,जो प्रमाण  रहित या कल्पित  हो  ,लेकिन किसी  मुस्लिम  ने  बेनामी  बन  कर कॉमेंट में जिस  भाषा  का प्रयोग  कियाहै  वह अशिष्ट  और अज्ञान    से  भरा हुआ  है ,जिस  से उन बेनामी महाशय के दिल में  हिन्दुओं  के प्रति  नफ़रत साफ़  झलकती  है  , उन  बेनामी   महोदय  ने जिस भाषा में कॉमेंट  दिया  है  , वह ज्यों  का त्यों  दिया  जारहा   है  ,
1-बेनामी ( मुस्लिम ) का  कॉमेंट 
बेनामी3 जुलाई 2014 को 11:23 pm
"sharma ji mujhe hansi aati ki appki baat ko sabit krne ke liye kis had tak ja sakte hai aur apne muh miy mitthu bante hai duniya ke har dharm ke log apne dharm ke sansthapak ko apna pita mante hai aap log to nazayaz aulad hai aap ke to teen teen baap hai bhramma vishnu mahesh jo khud ek shaitan the sri lanka is baat ka proof hai aur ab to chautha baap bhi aagya hai sai ya phir sankracharya .
btaiyye sharma ji
"शर्मा  जी  मुझे हँसी  आती  है  ,कि आपकी  बात को साबित करने के लिए किस  हद तक  जा सकते हैं ,और  अपने मुंह  मियाँ  मिट्ठू  बनते हैं   (1),दुनिया केहर धर्म के लोग अपने  धर्म  स्थापक  को अपन पिता   मानते हैं , (2)आप  लोग  नाजायज  औलाद हो  , (3)आपके तो तीन  बाप हैं   . ब्रह्मा म विष्णु  और  महेश  .(4) जो  खुद  शैतान  है  ,श्री  लंका  इसका  प्रूफ है  .(5) और अब जो  चौथा  आगया   साईँ  या शंकराचार्य ,  बताइये  शर्मा जी
2-बेनामी के कमेंट का उत्तर 
 इस कॉमेंट  की  भाषा और शैली  से  साफ  पता चलता है  कि बेनामी  जरूर  कोई ऐसे मुस्लिम  हैं  , जो बौखलाकर  बेतुकी और अशिष्ट भाषा  का प्रयोग  कररहे हैं  . यद्यपि  मैंने फेसबुक  में लोगों  से आवाहन  किया था कि है कोई  ऐसा  जो तर्क  सहित इन बेनामी  को ऐसा  करारा   जवाब  दे  जिसे पढ़ कर बेनामी चारों खाने चित हो जाएँ  . लेकिन जब  कोई आगे नहीं  आया तो मैंने ही उनको उत्तर देने का निश्चय  कर लिया  . यदि  आप  उन  बेनामी के कॉमेंट को ध्यान  से पढ़ें तो  पता  चलेगा  कि उन्होंने हिन्दू धर्म  और हिन्दुओं  पर कुल पांच आरोप लगाये  हैं  , यहाँ  पर  एक एक कर  उन पांचों  आरोपों  का कुरान और  हदीस  के प्रमाणों  से उत्तर दिया जा  रहा  , पाठक गण कृपया  पूरा लेख  जरूर  पढने का कष्ट करें।
1 . पहला  आरोप -आपने  कहा है कि हरेक धर्म  के लोग अपने धर्मस्थापक  को अपना पिता  मानते हैं
जवाब -दूसरे  धर्म  के लोग अपने धर्मस्थापक को  क्या मानते हैं ,हमें इस से कोई आपत्ति नहीं  है  हम तो हरेक बुजुर्ग  पुरुष  को पिता  और बुजुर्ग महिला को माता की तरह  सम्मान  देते  हैं  . शायद  आप  मुहम्मद साहब को पिता  मान बैठे  होगे  ,लेकिन  आपने ठीक  से कुरान नहीं पढ़ी ,क्योंकि  उसमे कहा है  .
  "हे ईमानवालो  मुहम्मद  तुम  में से  किसी  व्यक्ति के बाप  नहीं   हैं "
सूरा अहजाब 33:40 
"مَّا كَانَ مُحَمَّدٌ أَبَا أَحَدٍ مِّن رِّجَالِكُمْ "
("O believers, know that) Muhammad is not the father of any man among you"33.40.
फिर भी अगर आप मुहम्मद  साहब को बाप   मानते हो  तो कुरान के खिलाफ  काम  करने  के कारण  काफ़िर माने जाओगे  . इसलिए मुहमद्साहब को बाप मानना   छोड़  दो  .
2-दूसरा  आरोप -आपने  कहा कि तुम  लोग यानी हिन्दू  नाजायज  औलाद  हो
जवाब -नाजायज  औलाद उस  पुरुष  और स्त्री  के बच्चों  को  कहा  जाता है  जिनकी  शरीयत  के मुताबिक शादी  नहीं हुई  हो  . इस्लामी परिभाषा के मुताबिक  गैर मनकूहा    की  औलाद  अवैध (Illegitimate )   और  हरामी  कही  जाती  है , जिसे दोगले  कहा जाता   है  , शायद आपने बुखारी  की यह हदीस नहीं पढ़ी जिसमे  इब्राहिम  की दासी हाजरा  की जानकारी  दी गयी  है  , हदीस में  कहा है  ,मुसलमानों के  प्रसिद्ध  नबी इब्राहिम  को यहूदी  ,ईसाई  और मुसलमानों का मूल पिता  माना जाता है  , इनके बारे में बुखारी में यह हदीस  मौजूद है " इब्राहिम ने अपनी पत्नी  साराह  की सेवा  करने के लिए हाजरा  नामकी  एक दासी  रखी थी , एक दिन जब इब्राहिम इबादत कर रहे थे तभी हाजरा ने उनको हाथों   से इशारा  करके एकांत में बुलाया  . और कहा कि अल्लाह ने  मुझे आपके  पास  आने को कहा है ,  ताकि हम काफिरों के षडयंत्र को  विफल  कर दें  . अबु हुरैरा ने कहा कि इस घटना को सुना कर् रसूल ने मौजूद लोगों  से कहा  कि  हे बनी इस्मा  के लोगो वही  हाजरा  तुम  लोगों  की  माता  है  ,क्योंकि  उसी के पुत्र  इस्माइल  से सारी  अरब जाती  पैदा  हुई  है  "
".‏ فَأَخْدَمَهَا هَاجَرَ فَأَتَتْهُ، وَهُوَ قَائِمٌ يُصَلِّي، فَأَوْمَأَ بِيَدِهِ مَهْيَا قَالَتْ رَدَّ اللَّهُ كَيْدَ الْكَافِرِ ـ أَوِ الْفَاجِرِ ـ فِي نَحْرِهِ، وَأَخْدَمَ هَاجَرَ‏.‏ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ تِلْكَ أُمُّكُمْ يَا بَنِي مَاءِ السَّمَاءِ‏.‏  "
" Hajar as a girl-servant to Sarah. Sarah came back (to Abraham) while he was praying. Abraham, gesturing with his hand, asked, "What has happened?" She replied, "Allah has spoiled the evil plot of the infidel (or immoral person) and gave me Hajar for service." (Abu Huraira then addressed his listeners saying, "That (Hajar) was your mother, O Bani Ma-is-Sama (i.e. the Arabs, the descendants of Ishmael, Hajar's son).
 सही बुखारी - जिल्द 4 किताब 55 हदीस 578
इस हदीस  से साबित होता  है कि इब्राहिम और उसकी लौंडी  में निकाह  नहीं हुआ था. और इब्राहिम ने इबादत छोड़ कर वासना में अंधे होकर  हाजरा से सहवास  किया था  , जिस से    एक नाजायज बेटा  इस्माइल पैदा हुआ  था  , जिस से मुहम्मद के बाप दादा  और  अरब के लोग  पैदा हुए ,इसलिए "सभी मुसलमान  नाजायज   औलाद   हैं "
3-तीसरा  आरोप -आपने  कहा  कि  हिन्दुओं  के तीन  बाप  हैं  , ब्रह्मा  , विष्णु  . और महेश
जवाब -लगता है कि आपने टी वी सीरियलों  से तीन  देवों  के बारे में  जानकारी  ली  है  , और उनको तीन अलग  देवता  मान  लिया  है  .  वास्तवमे ईश्वर तो एक ही है  ,लेकिन जब वह सृष्टि  करता है  तो उसे ब्रह्मा  कहते हैं  , जब  जगत  का पालन करता है तो विष्णु  कहते हैं  और जब  सृष्टि  का विलय  करता है तौ उसी  ईश्वर को महेश  कहते  हैं  , जैसे  जब  कोई नागरिक  वोट देता है तो उसे वोटर  कहतेहै  , चुनाव  लड़ता है तो उसे प्रत्याशी (उम्मीदवार )   और जीत  जाने पर  विधायक  , या  सांसद  पुकारते  हैं  .
इसलिए  आप  पहले  इस्लाम  की  पूरी  जानकारी  हासिल  करिये   कि मुसलमानोंके कितने  बाप  हैं  ?
आपका अल्लाह  सर्वशक्तिमान  नहीं  बल्कि इतना  असहाय है कि खुदही  अपनी कुर्सी पर नहीं चढ़  सकता  , औरउसे कुर्सी  पर बिठाने के लिए  आठ आठ  फरिश्तों  की  मदद   लेनी  पड़ती  है  , यह खुद कुरान  में कहा है ,

"وَالْمَلَكُ عَلَىٰ أَرْجَائِهَا وَيَحْمِلُ عَرْشَ رَبِّكَ  "


"और आठ  फ़रिश्ते  मिल कर अल्लाह को सिंहासन पर चढ़ाते  हैं  "सूरा  हाक्का 69:17

"eight will help  Allah  to climb  the throne  "Al-Haqqah69:17

यही नहीं  आपका अल्लाह छोटेछोटे कामों के लिए  दूसरों  का मोहताज   है , उसने हर काम के लिए  असंख्य नौकर ( फ़रिश्ते )  लगा रहे हैं , जिन में कुछ खास फरिश्तों के नाम और काम  इस प्रकार  हैं  .
1.जिब्राईल -अल्लाह की चिट्ठी  पत्री  लाना  और भेजना
2.इस्राफील - तुरही (Trumpet  )  बजा कर लोगों  को क़यामत की सूचना  देना
3.मीकाईल - वर्षा  यानि  पानी  की व्यवस्था  करना
4-मुनकिर और  नकीर -अपराधियों  से सवाल पूछना  ,जांच करना
5.मलिकुल मौत - लोगों  के प्राण  निकालना
6.मलिक - नरक  की चौकीदारी   करना
7.रिजवान - स्वर्ग  की  देख रेख  करना कहीं  कोई भाग  न  जाए ,या नर्कवासी  अंदर नहीं घुस  जाये

बेनामी  जी   अल्लाह के फ़रिश्ते जो  काम 14 सौ   साल से करने  लगे हैं , वाही काम हिन्दू  देवता धर्मराज , चित्रगुप्त  , वरुण  , इंद्र और शंकर लाखों साल सेकरते आये हैं।

शायद इसी लिए सभी मुसलमान"  ईमान  मुफस्सिल- ايمان مفصل"  में कहते हैं कि "आमन्तु बिल्लाहि व् मलयाकतिहि - آمنتُ با الله و مليكتهِ    "र्थात  मैं अल्लाह के साथ फरिश्तों  पर भी  ईमान  रखता हूँ। 
बताइये यदि  एक  ही ईश्वर  तीन  नामों से तीन  काम  करता है तो आप उसे हिन्दुओं  के तीन  बाप बता देते तो  , तो जब आपका अल्लाह फरिश्तों  से वही  काम  करवाता  है  ,जो हिन्दुओं  के देवता  करते हैं  . तो  मुसलमानों के असंख्य  बाप  हैं , यह  क्यों  नहीं  मना जाए ?
4-चौथा  आरोप -आपने कहा है  कि महेश यानी शंकर  खुद एक शैतान  है
जवाब -बेनामी जी  आपकी यह  बात  महज एक झूठ  के अलावा कुछ  नहीं  है , अगर  दुनिया भर के आप जैसे मुसलमान  क़यामत तक  भी कोशिश  कर लें  तो भी  वह या साबित नहीं कर  सकेंगे कि  महेश   ही शैतान  है बिना साबुत  के कुछ  भी  कहना  बेवकूफों  की आदत होती है   . क्योंकि आपको  न तो अपने   अल्लाह  के  बारे में  जानकारी  है  , और  न  शैतान के  बारे में  . हकीकत तो  यह  है  कि  आपका  अल्लाह ही  शैतान (दज्जाल )  है  . और शैतान की सबसे बड़ी  निशानी  यह है  कि  वह  काना है , यानि उसकी एक ही  आँख  है  , चाहो  तो  कुरआन   में  देख  लेना  . आपकी  जानकारी के लिए मैं अपने लेख " अल्लाह दज्जाल यानी शैतान है !!" की लिंक  दे रहा हूँ  . तसल्ली  से पढ़ लेना   और दोस्तों को पढवा देना  . शक  दूर हो  जायेगा .http://bhandaafodu.wordpress.com/2014/07/19/
https://www.facebook.com/groups/268438006618252/
5-पांचवां  आरोप -आपने  कहा कि  हिन्दुओं  का  पांचवा  देवता  साईँ  बाबा  , और शंकराचार्य  है
जवाब - जहाँ  तक  साईँ  बाबा  उर्फ़ चाँद  मियां उर्फ़  कमरुद्दीन    की  बात है तो उस  शख्श  का किरदार और ईमान  मशकूक  है   . हमारी नजर में वह  फ़ासिक़  है  , यानि  न  हिन्दू  और न  मुस्लिम  .  उसे हिन्दू धर्म  भ्रष्टक  मानते हैं  . हम  एक लाश  की इबादत को  गुनाह मानतेहैं  ,  और शकराचार्य  केवल  एक धार्मिक  गुरु हैं  . हम  उनका  सम्मान  कर  सकते हैं  , पूजा  नहीं  कर सकते .कबरपरस्ती ( Grave Worship )  -इस्लाम की परंपरा है , हम  ऐसे  लोगों को "मुलहिद "   कहते  हैं। अकेले  भारत में करीब  350  से ज्यादा  दरगाहें हैं  ,जहाँ मुस्लिम  कबरों  में दफन  लाशों   पर  सर झुकाते   हैं  . बेनामी  जी   आपसे   यही गुजारिश  है  कि पहले  अपने  घर की  गन्दगी  साफ  करो  . फिर  दूसरों  पर कीचड़ फेकने की हिमाकत  करो  . और अगर आप  सच्चे  मुसलमान  होते  तो गलियां  नहीं  देते  , आपके लिए हम  कुरान  की  यह  आयत  देते हैं  . अर्थ  आप  खुद किसी मुल्ले से पूछ  लेना ,25:63

"وَعِبَادُ الرَّحْمَٰنِ الَّذِينَ يَمْشُونَ عَلَى الْأَرْضِ هَوْنًا وَإِذَا خَاطَبَهُمُ الْجَاهِلُونَ قَالُوا سَلَامًا   "
"इज़ा ख़ातब  हुमुल  जाहिलूना  कालू  सलामा "
समझदार  के लिए इशारा ही  काफी  होता  है 

 http://www.alim.org/library/biography/stories/content/SOP/18/6/Ibrahim%20(Abraham)/Hadith%20About%20Abraham%20,%20Sarah,%20and%20Hajar
 

सोमवार, 28 जुलाई 2014

सुन लो कि अल्लाह अनेक हैं !

ईश्वर एक  है ,सभी  हिन्दू  इस  बातको  मानते  आये  हैं  ,इसका प्रमाण  यह है  कि इस अटल  सत्य को  लोगों मनवाने के लिए  हिन्दुओं  ने न तो किसी पर  कोई  दवाब डाला  और न किसी   तरह  की जिहाद का  सहारा  लिया  है  , लेकिन आज तक किसी ने इस  बात पर गौर नहीं  किया ,कि मुसलमानों ने सिर्फ इसबात को  मनवाने के लिए  जिहाद  करके  लाखों लोगों  को मार दिया कि "अल्लाह एक है  " और अगर वाकई  एक है  ,तो दुनिया भर में आतंक फ़ैलाने की जरुरत क्यों  पड़  गयी  . ?
क्योंकि  वास्तव  में  अल्लाह  एक  नहीं बल्कि कई लोगों  का  गिरोह  है  , इसका  प्रमाण   कुरान  की उन  आयतों  से मिलता है  , जिन में मुसलमानों  का अल्लाह   खुद के लिए बहुवचन ( plural )   का  प्रयोग  करता  है  , और  मैं  की  जगह हम ( We-Us  )   कहता  है   .
इसलिए अधिकांश  मुस्लिम  विद्वान  जब  जब कृषि भाषा  में कुरान  का अनुवाद  अनुवाद  करते हैं  ,तो इस बात  को  छुपा कर गलत अनुवाद करते हैं , इसको  समझने के लिए  हैं   हमें थोड़ी  सी अरबी  व्याकरण   जानना   जरुरी  है  .
1 -अरबी  में सर्वनाम  और क्रिया  के  वचन 
अरबी की  व्याकरण  कुछ  कुछ  संस्कृत  की  तरह  है  , इसमे " सर्वनाम ( Pronoun )को  "जमीर - الضمير    "  कहा  जाता  है   . जिसके  बहुवचन  को " सीगह  अल  जमा  -  صيغة الجمع "  कहते  हैं     . और  एक  वचन  को " वाहिद -  سيغة الواحد  "  कहते  हैं  .जैसे एक वचन  हिंदी शब्द  " मैं ( I ) को अरबी  में " अना - انا "  कहते  हैं  . जिसका बहुवचन  हिंदी  में  "हम (We )   है  . और  अरबी में इसे " नहनु - نحنُ "  कहा जाता  है  . इसी  प्रकार " क्रिया ( verb )  को अरबी  में  " फअल -   فعل " कहते  हैं  . इसके भी  एक वचन ( singular )  द्विवचन (dual )  और  बहुवचन ( Plural )  होते  हैं  . और  जब  भी  क्रिया ( Verb ) Plurl Imperfact Tense में  पायी  जाती  है  , तो अरबी  में क्रिया  के आगे " ना - نا " लगा  दिया  जाता  है  .  यही  क्रिया  के  बहुवचन  होने की निशानी  है  . उदाहरण   के  लिए  अरबी  क्रिया " क  त  ब  ك +ت+ب  "का  प्रथम पुरुष  बहुवचन "  हमने  लिखा  ( We wrote )     का अरबी में  होगा  "  कतबना - كتبنا "
अब   हम  नमूने  के लिए  कुरान   की  कुछ  ऐसी  आयतें  दे रहे हैं   जिनमे   अल्लाह    ने एक वचन  सर्वनाम   " मैं  और मैंने  "  की  जगह  बहुवचन  " हम  और  हमने    " शब्द   का  प्रयोग  किया  है   . जो  व्याकरण  के  अनुसार  बहुवचन  है  , और अनेक लोगों  के लिए  प्रयुक्त  होता  है  .

1-सर्वनाम  में  बहुवचन 

बेशक  यह कुरान हम ने ही उतारी है  , और हम ही इसके रक्षक  हैं " सूरा अल हिज्र 15:9

إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ  "


“Lo!  We, reveal the Quran, and lo! We verily are its Guardian.” (Al-Hijr15: 9)

(1st person plural personal pronoun)

फिर हमें  उन  से हिसाब  लेना   है  "सूरा -अल गाशिया 88:26
"ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا حِسَابَهُم

Then indeed, upon Us is their account. [88:26]

(1st  person plural  object pronoun)


2-क्रिया  में  बहुवचन 

"हमने  तुम्हें सारे संसार के लिए दयालुता  बना कर  भेजा है " सूरा अम्बिया 21:107

"وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا رَحْمَةً لِلْعَالَمِينَ  "

"We sent thee not save as a mercy for the peoples"21:107

(1st person plural (form IV) perfect verb)

"हम अपने रसूलों और  मुसलमानों की सहायता  करते  हैं "सूरा -मोमिन 40 :51

"إِنَّا لَنَنْصُرُ رُسُلَنَا وَالَّذِينَ آمَنُوا  "


“We verily do help Our Messengers, and those who believe" Al momin 40: 51)


, (1st person plural imperfect verb)


"हमने  तुमसे पहले भी रसूल भेजे,और यही  कहा  कि मेरे सिवा  कोई पूज्य  नहीं  है , तो तुम  हमारी  ही इबादत करो "

सूरा अल अम्बिया 21:25

"وَمَا أَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ مِنْ رَسُولٍ إِلَّا نُوحِي إِلَيْهِ أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاعْبُدُونِ  "21:25


“And We sent not before you any messenger except that We revealed to him that, “There is no deity except Me, so worship Me.”
(Qur’an, 21:25)

(1st person plural (form IV) perfect )

3-सर्वनाम और क्रिया में  बहुवचन 

हमने मनुष्य  को बनाया  और  हम  जानते हैं कि  उसके  मन में क्या  है और हम  उसकी  धमनी  के पास हैं  " सूरा -काफ 50:16

وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ وَنَعْلَمُ مَا تُوَسْوِسُ بِهِ نَفْسُهُ ۖ وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنْ حَبْلِ الْوَرِيدِ

And We have already created man and know what his soul whispers to him," Surat Qāf 50:16)

(1st person plural perfect verb ) And(1st person plural personal pronoun)

अब  सवाल यह उठता  है  कि  जब खुद  अल्लाह की  किताब  कुरान  ही अनेक  अल्लाह  होने की पुष्टि  कर  रही   है  , तो  मुहम्मद  साहब  लोगों  पर एक ही  अल्लाह होने  या मानने पर  दवाब  क्यों  डालते थे  ? इसका  जवाब  कुरान  और  हदीस  से मिलता  है इसके कई   कारण  हैं ,
1-पहला  कारण -लोग   मुहम्मद  साहब  को पागल  कवि  मानते थे  ,  जैसा कि  कुरान  में  कहा  है  .
"लोग कहते हैं   कि क्या  हम एक उन्मादी कवि  के  लिए अपने देवताओं  को को छोड़  दें ?  सूरा -अस साफ्फात 37:36
"लोग  कहते हैं  कि यह (कुरान )  स्वप्न  है  , इसने इसे खुद  बना लिया  है  . यह एक कवि  है   . इसे चाहिए की यह हमारे सामने कोई  सबूत दिखाए  "
सूरा -अल अम्बिया  21 :5
4-मुहम्मद  साहब  की  चालाकी 
जब  मक्का  के लोग   मुहम्मद  साहब  को पागल  कवि   होने  का आरोप  लगा कर कहने लगे कि कुरान  अलाह की किताब  नहीं  ,खुद मुहम्मद की  रचना है  , तब कुरान को अल्लाह की किताब  साबित करने के लिए  मुहमद  साहब ने  अनपढ़  होने का नाटक   रचाया   ,  , कुरान में कहा  कि ,
"जो लोग उस उम्मी नबी  के पीछे चलते हैं जो न  लिख  सकता है  ,और न  पढ़  सकता  है  इसलिए  अल्लाह और  उसकी  किताब पर ईमान  रखो  "सूरा  -अल आराफ 7:157

"हे  नबी  इस से पहले तुम कोई  किताब  नहीं  पढ़ते थे  और  न  हाथ  से लिखते थे  , नहीं  तो शंका  करने वाले तुम्हें  झूठ पकड़ लेते "
सूरा  -अनकबूत 29:48

5-मुहम्मद के  झूठ  का  भंडाफोड़ 
मुहमद  साहब के अनपढ़  होने के झूठ  की पोल हदीस  ने खोल  दी  है  , वास्तव  में  मुहम्मद  और उनके साथी मिल कर  कुरान  की आयतें   लिखते थे ,हदीस  में कहा है  ,
सईदुल खुदरी  ने कहा कि रसूल ने कहा ,कि तुम मुझ  से कुरान के अलावा  कुछ  भी लिखवा लो ,और यदि लिख भी लो तो उसे मिटा  ( delete) देना "

"The prophet said: "Do not write down anything from me except the Quran. Whoever wrote other than that should delete it."

  "‏ لاَ تَكْتُبُوا عَنِّي وَمَنْ كَتَبَ عَنِّي غَيْرَ الْقُرْآنِ فَلْيَمْحُهُ وَحَدِّثُوا    "


सही मुस्लिम -किताब 42 हदीस 7147

2-दूसरा  कारण -  मुहम्मद साहब  द्वारा  लोगों  एक  ही अल्लाह को  मानने पर  जोर  देने के पीछे खुद को अल्लाह  का इकलौता   रसूल  साबित करना था , यहाँ तक  वह  खुद  को अल्लाह  के बराबर  बताने  लगे  ,  कुरान  में कहा है  ,
जो लोग अल्लाह और उसके रसूल  को दुःख  देते हैं  ,उनपर दुनिया और आख़िरत में लानत और यातना तैयार  रखी है  "सूरा - अहजाब 33:57

"إِنَّ الَّذِينَ يُؤْذُونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ لَعَنَهُمُ اللَّهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ  "


.   "those who malign Allah and His messenger, Allah hath cursed them in this world and  hearafter"'Qur)an (33:57

इसका  साफ  मतलब   है कि  मुहम्मद को  दुःख  देना  अल्लाह को दुःख  देने  के समान   है
6-अल्लाह  एक  शरीरधारी  व्यक्ति 

कुरान  में कहा  है  ,यदि अल्लाह  के पुत्र  होता ,  इसका साफ  मतलब  है कि अल्लाह  कोई व्यक्ति  रहा होगा   , यह  आयत देखिये  ,
हे नबी  कह दो  अगर अल्लाह  का बेटा होता तो  मैं उसकी  सबसे पहले  इबादत  करने वाला होता " सूरा जुखुरुफ़ 43:81

"قُلْ إِنْ كَانَ لِلرَّحْمَٰنِ وَلَدٌ فَأَنَا أَوَّلُ الْعَابِدِينَ  "

"If the Most Gracious had a son, I would be the first to worship him!"43:81

3-तीसरा कारण-मुसलमान  जब भी  अल्लाह  के एक  होने  की  बात  करते हैं  तो   कुरान  की इस  आयत का हवाला   देते हैं  ,
" कह  दो कि  वह  अल्लाह  एक है   "कुल हुव अल्लाह  अहद -  قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ "सूरा इख़लास  112 :1
ध्यान  करने की  बात है कि  इस  आयत  में  तथाकथित  अल्लाह  मुहम्मद  साहब   को निर्देश  दे रहा कि  तुम  लोगों  से कह दो  कि  अल्लाह  एक  है .इसलिए मुहम्मद  साहब से  कहलवाने  की  जगह खुद  अल्लाह  को यह कह  देना  चाहिए  था  कि "  मैं एक अल्लाह  हूँ " ( I am  one Allah )अरबी  में "अना वाहिद अल्लाह - أنا واحد الله "हमें  इस बात पर  गौर  करना  चाहिए   अल्लाह  की  गवाही क्यों  चाहिए  ?

7-एक अल्लाहवाद   की  असलियत

इस्लामी  परिभाषा  में  अल्लाह  के  एकत्व ( monotheism )  को  "तौहीद - توحيد "  कहा   जाता   है  ,  इसका उद्देश्य  लोगों  को  एक ही  अल्लाह  की इबादत करना है  , जबकि   मुसलमानों  के अल्लाह में  ,मुहम्मद  , उनका  भाई अली,पत्नी  आयशा  , मुहम्मद  साहब के ससुर  और  साथी   सभी शामिल  हैं    , वास्तव में  मुसलमान  एक अल्लाह  के  बहाने  दुनियां   पर  एक  ही हुकूमत  स्थापित  करना     चाहते  हैं  , जिस   एक ही  शरीयत का कानून  चले. लेकिन  जैसे   मुहम्मद  साहब  के समय  भी कई  लोग लोग  अल्लाह  बने  हुए थे  , आज  भी मुस्लिम  देशों  कई  शासक  और  मुल्ले  खुद  को  अल्लाह  समझ  कर लोगों की जिंदगियां  छीन रहे  हैं   , और दुनियां  के मालिक  बने  हुए  हैं  , शायद  इसी  लिए  साईं  बाबा  उर्फ़  चाँद  मिया  कहता था " सबका  मालिक    एक  है  " अर्थात  दुनियां   की  पूरी धरती और   सम्पति संपत्ति अकेले अल्लाह यानि मुसलमानों  की है  . 

http://www.islam101.com/tauheed/AllahWE.htm