सोमवार, 26 दिसंबर 2011

आरक्षण जिहाद !


लगता है आजकल राजनेताओं का उद्देश्य देशवासियों की सेवा करना नहीं,बल्कि सत्ता हासिल करना है .जिसके लिए वह हर तरह के हथकंडे अपनाते रहते हैं .इसका एक ताजा उदहारण यह है कि पांच विधान सभाओं के चुनाव से पहले ही केंद्र सरकार ने मुसलमानों के लिए 4 .5 प्रतिशत का आरक्षण कर दिया .जो पिछड़े हिन्दुओं के 27 प्रतिशत से काटा जायेगा .जानकारों के अनुसार इस गैर संवैधानिक कदम से देश में आगे गृहयुद्ध की नौबत आ सकती है .क्योंकि मुलायम ,लालू ,और मा.क .प जैसी पार्टियाँ इसे कम मानती हैमुसलमान किसी न किसी बहाने से अपने जिन अधिकारों के लिए संघर्ष करते आये है .इसी को जिहाद कहा जाता है .धर्म के आधार पर देश को बांटना भविष्य में घातक हो सकता है .इस बात को ठीक से समझाने के लिए हमें जिहाद के बारे में पूरी जानकारी होना जरुरी है .जो यहाँ पर दी जा रही है -
1-जिहाद का लक्ष्य 
कुरान, हदीसों एवं मुस्लिम विद्वानों के अनुसार जिहाद के उद्‌देश्य है-
(1) गैर-मुसलमानों को किसी भी प्रकार से मुसलमान बनाना; (2) मुसलमानों के एक मात्र अल्लाह और पैगम्बर मुहम्मद में अटूट विश्वास करके तथा नमाज, रोजा, हज्ज और जकात द्वारा उन्हें कट्‌टर मुसलमान बनाना; (3) विश्व भर के गैर-मुस्लिम राज्यों, जहाँ की राज व्यवस्था सेक्लयूरवाद, प्रजातन्त्र, साम्यवाद, राजतंत्र या मोनार्की आदि से नियंत्रित होती है, उसे नष्ट करके उन राज्यों में शरियत के अनुसार राज्य व्यवस्था स्थापित करना और (4) यदि किसी इस्लामी राज्य में गैर-मुसलमान बसते हों तो उनको इस्लाम में धर्मान्तरित कर के अथवा उन्हें देश निकाला देकर उस राज्य को शत प्रतिशत मुस्लिम राज्य बनाना।
इसीलिए मै कहता हूँ कि इस्लाम एक धर्म-प्रेरित मुहम्मदीय राजनैतिक आन्दोलन है, कुरान जिसका दर्शन, पैगम्बर मुहम्मद जिसका आदर्श, हदीसें जिसका व्यवहार शास्त्र, जिहाद जिसकी कार्य प्रणाली, मुसलमान जिसके सैनिक, मदरसे जिसके प्रशिक्षण केन्द्र, गैर-मुस्लिम राज्य जिसकी युद्ध भूमि और विश्व इस्लामी साम्राज्य जिसका अन्तिम उद्‌देश्य है।
निःसंदेह यह अत्यन्त उच्च महत्वाकांक्षी लक्ष्य है जिसके आगे विश्व भर के धर्म आसानी से घुटने नहीं टेकेगें, और कट्‌टर मुसलमान इस संघर्ष पूर्ण जिहाद को स्वेच्छा से बन्द ही करेंग। अतः मुसलमानों और गैर-मुसलमानों के बीच अल्लाह के नाम पर 'जिहाद' तब तक चलता ही रहेगा जब तक कि मुसलमान अपने सार्वभौमिक राज्य के समने को नहीं त्यागते। 
2-जिहाद की विधियाँ
मुसलमान विश्व भर में अल्लाह का साम्राज्य स्थापित करने के लिए जिहाद की जो विधियाँ अपनाते हैं उन्हें व्यापक रूप में चार भागों में बाँटा जा सकता है जैसेः
(1) सहअस्तित्ववादी जिहाद; (2) शान्तिपूर्ण जिहाद; (3) आक्रामक जिहाद और (4) शरियाही जिहाद। जिन देशों में मुसलमानों की संखया 5 प्रतिशत से कम, और वे कमजोर होते हैं, वहाँ वे शान्ति, प्रेम भाई-चारा व आपसी सहयोग द्वारा सह-अस्तित्ववादी जिहाद अपनाते हैं; तथा अपने धार्मिक आचरण से प्रभावित करके गैर-मुसलमानों को धर्मान्तरित करने की कोशिश करते हैं। जिन देशों में मुसलमान 10-15 प्रतिशत से अधिक होते हैं, वहाँ वे शान्तिपूर्ण जिहाद अपनाते हैं। साथ ही ''इस्लाम खतरे में'', मुस्लिम उपेक्षित' आदि का नारा लगाते हैं। साथ ही मुस्लिम वोट बैंक एक-जुट करके देश के प्रभावी राजनैतिक गुट से मिल जाते हैं तथा मुस्लिम वाटों के बदले सत्ता दल को अधकाधिक धार्मक, आर्थिक एवं राजनैतिक अधिकार देने को विवश करते हैं। साथ ही गैर-मुसलमानों को धर्मान्तरित, व उनकी युवा लड़कियों का अपहरण, एवं प्रेमजाल में फंसाकर, चार शादियाँ करके तथा तेजी से जनसंखया दर बढ़ाने का प्रयास करते हैं। आज कल भी 'लव जिहाद राजनैतिक जिहाद का एक मुखय अंग है। भारत के विभिन्न प्रान्तों में लव जिहाद की अनेक घटनाएँ हुई हैं अकेले केरल में पिछले चार वर्षों में ही गैर-मुसलमानों की 2800 लड़कियाँ 'लव जिहाद Love Jihad' के जाल में फंसकर इस्लाम में धर्मान्तरित हो गई हैं। (Pioneer- 11.12.2009
इस मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति के फलस्वरूप मुस्लिम अल्पमत में होते हुए भी बड़ी प्रभावी स्थिति में हो जाते हैं। फिर भी वे वहाँ की मूल राष्ट्र धारा से नहीं जुड़ते हैं। अलगाववाद इस्लाम की मौलिक विशेषता है क्योंकि यह राष्ट्रवाद, प्रजातंत्र, सेक्यूलरवाद और मुसलमानों को स्वतंत्र चिन्तन की आज्ञा नहीं देता है। इतिहास साक्षी है कि पड़ोसी मुस्लिम देशों से अवैध घुसपैठ, आव्रजन (इम्मीग्रेशन) और मुस्लिम जनसंखया विस्फोट के फलस्वरूप विश्व के अनेक गैर-मुस्लिम देश इस्लामी राज्य हो गए हैं। यूरोप व भारत में यह प्रक्रिया आज भी तेजी से चली रही है। जनसंखया विशेषज्ञों के अनुसार 2060 तक भारत में हिन्दू अल्पमत में हो जायेंगे (जोशी आदि-रिलीजस डेमोग्राफी ऑफ इंडिया Religious Demography of India)
सार की बात यह है कि किसी देश में जिहाद की कार्यविधि वहाँ इस्लाम की शक्ति और उद्‌देश्य के अनुसार बदलती रहती है। जैसे-जैसे मुसलमानों की शक्ति बढ़ती जाती है, सह अस्तित्ववादी शान्तिपूर्ण जिहाद सशस्त्र आक्रामक जिहाद में बदल जाती है। यह नीति पूर्णतया कुरान पर आधारित है जिसे कि मक्का और मदीना में अवतरित आयतों के स्वभाव में अन्तर साफ साफ देखा जा सकता है।
3-भारत का इस्लामीकरण 
पाकिस्तान मिलने के बाद मुसलमानों ने नारा दिया : ''हँस के लिया है पाकिस्तान, लड़ लेंगे हिन्दुस्तान''। इसीलिए 1947से ही भारत में इस्लामी जिहाद जारी है जिसमें प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तानी एवं भारतीय मुसलमान सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। 
कांग्रेस नेता एवं भूतपूर्व शिक्षा मंत्री अबुल कलाम आजाद ने पूरे भारत के इस्लामीकरण की वकालत करते हुए कहा- ''भारत जैसे देश को जो एक बार मुसलमानों के शासन में रह चुका है, कभी भी त्यागा नहीं जा सकता और प्रत्येक मुसलमान का कर्तव्य है कि उस खोई हुई मुस्लिम सत्ता को फिर प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करें'' बी.आर. नन्दा, गाँधी पेन इस्लामिज्म, इम्पीरियलज्म एण्ड नेशनलिज्म पृ. 117)एफ. ए. दुर्रानी ने कहा- ''भारत-सम्पूर्ण भारत हमारी पैतृक सम्पत्ति है उसका फिर से इस्लाम के लिए विजय करना नितांत आवश्यक है तथा पाकिस्तान का निर्माण इसलिए महत्वपूर्ण था कि उसका शिविर यानी पड़ाव बनाकर शेष भारत का इस्लामीकरण किया जा सके।'' (पुरुषोत्तम, मुस्लिम राजनीतिक चिन्तन और आकांक्षाएँ, पृ. 51,53)जैसे मुहम्मद के अध्यक्ष मौलाना मसूद अजहर, जिन्हें 2000में कंधार में हवाई जहाज में बन्धक बनाए 160यात्रियों के बदले छोड़ा गया था, ने हाजरों लोगों की उपस्थिति में कहाः ''भारतीयों और उनको बतलाओ, जिन्होंने मुसलमानों को सताया हुआ है, कि मुजाहिद्‌दीन अल्लाह की सेना है और वे जल्दी ही इस दुनिया पर इस्लाम का झंडा महराएंगे। मैं यहाँ केवल इसलिए आया हूँ कि मुझे और साथी चाहिए। मुझे मुजाहिद्‌दीनों की जरूरत है जो कि कश्मीर की मुक्ति के लिए लड़ सकें। मैं तब तक शान्ति से नहीं बैठूंगा जब तक कि मुसलमान मुक्त नहीं हो जाते। इसलिए (ओ युवकों) जिहाद के लिए शादी करो, जिहाद के लिए बच्चे पैदा करो और केवल जिहाद के लिए धन कमाओ जब तक कि अमरीका और भारत की क्रूरता समाप्त नहीं हो जाती। लेकिन पहले भारत।'' (न्यूज 8.1.2000)
तहरीका-ए-तालिबान के सदर हकीमुल्लाह ने कहाः ''हम इस्लामी मुल्क चाहते हैं। ऐसा होते ही हम मुल्की सीमाओं पर जाकर भारतीयों के खिलाफ जंग में मदद करेंगे।' (दै. जागरण, 16.10.2009)
भारतीय व पाकिस्तानी मुसलमान पिछले 62वर्षों से एक तरफ कश्मीर में हिंसा पूर्ण जिहाद कर रहे हैं जिसके कारण पांच लाख हिन्दू अपने ही देश में शरणार्थी हो गए तथा हजारों सैनिक व निरपराध नागरिक मारे जा चुके हैं; तथा दूसरी तरफ वे शान्तिपूर्ण जिहाद द्वारा भारत सरकार के सामने नित नई आर्थिक, धार्मिक व राजनैतिक मांगे रख रहे हैं। इनके कुछ नमूने देखिए-
4-मुसलमानों की विभिन्न मागें 
नौकरियों में आरक्षण- (1) मुसलमान युवकों को रोजगार-परक शिक्षा के लिए मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में सरकारी स्कूल खुलवाना, (2) उर्दू के विकास के लिए संघर्ष करना, (3) सामान्य व प्रोफेशनल कॉलेजों में दाखिले के लिए आरक्षण मांगना, (4) स्पर्धा वाली सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष वजीफा व सुविधा आदि मांगना, (5) सरकारी व गैर-सरकारी संस्थाओं में नौकरियों में आरक्षण मांगना, (6) निजी व्यवसाय खोलने के लिए कम ब्याज दर पर पर्याप्त ऋण पाने की मांग करना आदि।आर्थिक सहायता- (1) बढ़ती मुस्लिम जनसंखया के लिए अधिकाधिक हज्ज के लिए सब्सिडी की मांग करना, (2) मुस्लिम बहुल राज्यों में हज्ज, हाउसों की स्थापना की मांग करना, (3) मस्जिद, मदरसा, व धार्मिक साहित्य के लिए प्राप्त विदेशी सहायता पर सरकारी हस्तक्षेप का विरोध करना, (4 )उर्दू के अखबारों के लिए सरकारी विज्ञापन एवं धार्मिक साहित्य छापने के लिए सस्ते दामों पर कागज का कोटा माँगना, (5) मस्जिदों के इमामों के लिए वेतन माँगना, (6) वक्फ बोर्ड के नाम पर राष्ट्रीय सम्पत्ति पर कब्जा करना एवं सरकारी सहायता मांगना आदि।मुस्लिम जनसंखया- मुस्लिम जनसंखया वृद्धि दर को बढ़ाना ताकि अगले 15-20वर्षों में वे बहुमत में आकर भारत की सत्ता के स्वतः वैधानिक अधिकारी हो जावें। इसके लिए (1) बहु-विवाह करना, (2) परिवार नियोजन न अपनाना, (3) हिन्दू लड़कियों का अपहरण करना, (4) धनी, व शिक्षित हिन्दू लड़कियों को स्कूल व कॉलेजों में तथा कार्यालयों में प्रेमजाल में फंसाकर एवं धर्मांतरण कर विवाह करना, (5) बंगला देश के मुसलमान युवकों को योजनापूर्ण ढंग से भारत में बसाना, उनकी यहाँ की लड़कियों से शादी कराना व बेरोजगार दिलाना, (6) हिन्दुओं का धर्मान्तरण करना आदि।
आश्चर्य तो यह है कि एक तरफ सरकार भारत को सेक्यूलर राज्य कहती है और दूसरी तरफ धर्म के आधार पर मुसलमानों व ईसाइयों को विशेष सुविधाएँ देती है जो पूर्णतया असंवैधितिक है।
5-मुसलमानों को दी गयी सुविधाएँ 
धार्मिक सुविधाऐं- विश्व के 57 इस्लामी देशों में से कही भी मुसलमानों को हज्ज यात्रा के लिए आर्थिक सहायता नहीं दी जाती है क्योंकि हज्ज के लिए आर्थिक सहायकता लेना गैर-इस्लामी है। परन्तु भारत सरकार प्रत्येक हज्ज यात्री को हवाई यात्रा के लिए 28000/- की आर्थिक सहायता देती है। हजियों के लिए राज्यों में हज हाउस बनाए गये हैं। इतना ही नहीं जिद्‌दा में हाजियों की सुविधाएँ देखने के लिए एक विशेष दल जाता है, मानो वहाँ की एम्बेसी काफी नहीं है।वक्फ बोर्ड- मुस्लिमों वक्फ बोर्डों के पास बारह लाख करोड़ी की सम्पत्ति है जिसकी वार्षिक आय 12000/- करोड़ है। फिर भी सरकार वक्फ बोर्डों को आर्थिक सहायता देती है। मदरसा- सरकार ने धार्मिक कट्‌टरवाद एवं अलगावदवाद को बढावा देने वाली मदरसा शिक्षा को न केवल दोष मुक्त बताया बल्कि उसके आधुनिकीकरण के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए आर्थिक सहायता देती है। फिर भी मुसलमान इन मदरसों को केन्द्रीय मदरसा बोर्ड से जु ड़ने देना नहीं चाहते। यहाँ तक कि पाठ्‌यक्रम में सुझाव व अन्य किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं मानतेराजनैतिक- (1) अल्पसंखयकों के नाम पर, विशेषकर मुसलमानों के लिए अलग मंत्रालय बनाया गया और उनके लिए 11वीं पंचवर्षीया योजना में 15प्रतिशत बजट रखा गया। (2) 2004में सत्ता में आते ही कांग्रेस ने आतंकवाद में फंसे मुसलमानों को बचाने के लिए पोटा कानून निरस्त कर दिया जिसके फलस्वरूप देश में आतंकवाद बढ़ रहा है। (3) मुस्लिम पर्सनल कानूनों और शरियत कोर्टों का समर्थन किया; (4) 13दिसम्बर 2001में संसद पर हमले के दोषी अफजलखां को फांसी की सजा आज तक लटकी हुई है। (5) 17 दिसम्बर 2006को नेशनल डवलपमेंट काउंसिल की मीटिंग में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने यहाँ तक कह दिया कि ''भारतीय संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है।'' आर्थिक- (1) सच्चर कमेटी द्वारा मुस्लिमों के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए 5460/- करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया; (2) उनके लिए सस्ती ब्याज दर पर ऋण देने के लिए एक कारपोरेशन बनाया गया, (3) सार्वजनिक क्षेत्र में उदारता बरतें। इस अभियान की निगरानी के लिए एक मोनीटरिंग कमेटी' काम करेगी।'' (दैनिक नव ज्योति,( 4.1.2006)। 13अगस्त 2006 को सरकार ने लोक सभा में बतलाया कि मुस्लिम प्रभाव वाले 90 जिलों और 338शहरों में मुसलमानों के लिए विशेष विकास फण्ड का प्रावधान किया गया है। 


स्वार्थवश कुछ दिन राज करने के लिए भारत के इस्लामीकरण में निर्लज्जता के साथ सहयोग दे रहे हैं। वे उन करोड़ों देशभक्तों के साथ विश्वासघात कर हरे हैं जिन्होंने देश के लिए बलिदान किए। कांग्रेस एवं अन्य सेक्यूलर पार्टियों का मुस्लिमों के सामने आत्म समर्पण एवं वोट बैंक की राजनीति करना देश की भावी स्वाधीनता के लिए चिन्ता का विषय है। सरकार की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के कारण सारा देश इस्लामी जिहाद और आतंकवाद से पीड़ित है। क्या देश की सेक्यूलर पार्टियों को दिखाई नहीं देता कि पाकिस्तान एवं भारत के मुसलमान शेष भारत में इस्लामी राज्य स्थापित करना चाहते हैं? 
मुस्लिम तुष्टीकरण करना उन लाखों करोड़ों देशभक्तों की शहादत का अपमान है जिन्होंने भारत को इस्लामी राज्य बनने से बचाया।

http://www.hinduwritersforum.org/hamare-prakasan/jihada-kya-aura-kyom


बुधवार, 14 दिसंबर 2011

इस्लाम में फतवाशाही !


इस्लाम का शाब्दिक अर्थ शान्ति ,विनम्रता और इश्वर के प्रति समर्पण होता है .और लगभग सभी लोग यह बात जानते हैं .लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस्लाम का उद्देश्य लोगों का बोझ हलका करना और उन पर पड़े हुए अनावश्यक फंदों से आजाद करना भी है .जो कुरान की इन आयतों से साबित होता है .
1-इस्लाम का उद्देश्य 
"मुसलमान तो सिर्फ उस रसूल के पीछे चलते हैं ,जो उत्तम चीजों को वैध और निकृष्ट चीजों को अवैध ठहरता है .और दूर करता है उनसे उनका बोझ और गैर जरुरी फंदे जो उन पर पड़े हुए हैं " सूरा -अल आराफ 7 :157 
कुरान के इस स्पष्ट निर्देश के बावजूद अनेकों बार कुछ ऐसे ऐसे लोग पैदा हो जाते हैं जो ,इस्लाम के नाम पर अपनी मर्जी लोगों पर थोपते रहते है .जैसे कि यजीद ने अपनी निरंकुश हुकूमत को ही इस्लाम का असली रूप साबित करना चाहा था .और जिसका विरोध इमाम हुसैन ने अपनी शहादत से किया था .इसी तरह कुछ मुल्ले मौलवियों ने इस्लाम के नाम पर ऐसे ऐसे फतवे दिए हैं ,जिनका नैतिकता ,सदाचार और खुद इस्लाम की मूल भावना से दूर दूर का कोई सम्बन्ध नहीं है .दुर्भाग्य से आज भी ऐसी मानसिकता के लोग मौजूद हैं ,जो इस्लाम के ठेकदार बने हुए हैं .और अपनी गन्दी मानसिकता के चलते बेतुके फतवे देते रहते हैं .यह सिलसिला काफी पुराना है .यहाँ पर नए और पुराने फतवे दिए जा रहे हैं .
2-अजीब और बेतुका फतवा 


केले ,ककड़ी जैसे फलों से दूर रहें मुस्लिम महिलाएं !
यूरोप के एक मौलवी ने फतवा जारी कर मुस्लिम महिलाओं को ऐसे फलों और सब्जियों को छूने से मना किया है जो पुरुषों के जननांग का आभास देते हैं. मौलवी ने महिलाओं को यौन विचारों से दूर रहने के तहत यह फतवा जारी किया है .इजिप्ट की एक न्यूज वेव साईट ने बुधवार को उक्त मौलवी के फतवे का हवाला देते हुए यह जानकारी दी है . मौलवी ने किसी धार्मिक प्रकाशन में लिखे ल्र्ख में ऐसी बातें कही हैं ..उक्त मौलवी का नाम नहीं बताया गया है .उसके अनुसार महिलाओं को केले और ककड़ी के पास भी नहीं जाना चाहिए .यदि महिलायें इन खाद्य पदार्थों को खाना चाहें तो ,कोई तीसरा व्यक्ति ,जो उनका सम्बन्धी पुरुष जैसे उसका पति ,या पिता हो ,इन वस्तुओं को छोटे छोटे टुकड़ों में काट कर उन्हें दे .ऐसा फतवे में कहा है .उक्त मौलवी के अनुसार केला और ककड़ी पुरुष जननांग की तरह दिखते हैं .और इसलिए महिलायें उत्तेजित हो सकती हैं ..या उनके मन में सेक्स का विचार आ सकता है ..उक्त मौलवी ने यह भी कहा है कि,महिलाओं को गाजर ,तुरई जैसी सब्जियों से भी बचना चाहिए . 
( दैनिक जागरण -8 दिसंबर 2011 पेज 9 )
यह फतवा दिनांक 30 नवम्बर 2011 को जिस मौलवी ने जारी था ,उसका नाम "शेख यहरम अली " है .और यह फतवा मिस्र के जिस अखबार में छपा है .उसका अरबी में पूरा पेज दिया जा रहा है .ताकि मौलवियों की मानसिकता का अंदाजा लग सके .
3-अरबी में मूल फतवा 


شيخ يحرم على المرأة اكل الموز والخيار منعا للاستثارة الجنسية 
في فتوى شرعية غير مسبوقة، حرم شيخ دين يقيم في أوروبا على النساء ان يتناولن الخيار او الموز حتى لا تستثير المرأة جنسيا. 
وقال الشيخ ان المرأة إذا أرادت ان تأكل موزه فيجب ان يتم تقطيعها من قبل محرم كي لا تمسكها المرأة بحجمها الطبيعي. 
وتأتي فتوي الشيخ لأن الموز والخيار يشبهن العضو الذكري للرجل، وحرم أيضا الجزر والكوسا، واعتبرها ان هذه الخضراوات تقود المرأة إلى إطلاق العنان لمخيلتها وهي تأكل الموز، وترغب بممارسة الجنس مع رجل، معتبراً ان المرأة في هذه الحالة قد تسترسل في تخيلاتها وتشعر بالنشوة.
تاريخ اخر تحديث : 20:27 30/11/2011="


http://www.assawsana.com/portal/newsshow.aspx?id=58893


अभी आपने एक ऐसे मौलवी का बेतुका फतवा पढ़ा है ,जो अधिक विख्यात नहीं है .अब एक विश्वविख्यात मुस्लिम इमाम का फतवा देखिये जो बिलकुल ही विपरीत बात कहता है .फिर बताइए कौनसा फतवा सही है .यहाँ पर इसी विषय के बारे में सुन्नी इमाम इब्न कय्यीम के दो प्रमाणिक फतवे अंगरेजी में दिए जा रहे हैं .और हिंदी में उनका अनुवाद दिया गया है .असली अरबी फतवा भी अलग दिया है जो जे पी जी (J p g ) में है .


4- आदर्श चरित्र का नमूना 
रसूल से साथी जिहाद के दौरान कृत्रिम संभोग करते थे फतवे में कहा है "यदि कोई व्यक्ति लगातार वासनासे ग्रस्त हो ,और उसे अपनी पत्नी या कोई गुलाम औरत न मिले .या किसी कारण से शादी न कर सके और वासना से भर जाये ,या उसे कोई डर हो ,जैसे कैद हो जाना ,या वह यात्रा में हो या वह इतना कंगाल हो कि शादी न कर सके तो ,ऐसी दशा में उसे हस्त मैथुन की इजाजत है .इमाम ने कहा है कि जिहाद और यात्रा के समय रसूल के सहाबी यही करते थे "
Examples of morality
Companions of Muhammad masturbated during Jihad
"If a man is torn between continued desire or releasing it, and if this man does not have a wife or he has a slave-girl but he does not marry, then if a man is overwhelmed by desire, and he fears that he will suffer because of this (someone like a prisoner, or a traveller, or a pauper), then it is permissible for him to masturbate, and Ahmad (ibn Hanbal) on this. Furthermore, it is narrated that the Companions of the Prophet (s) used to masturbate while they were on military expeditions or travelling".
Bada'i al-Fuwa'id of Ibn Qayyim (Islamic scholar), page 129


a-तरबूज और ककड़ी 
Watermelons and Cucumbers
"यदि कोई पुरुष तरबूज में छेद करके ,या गुंधे हुए आटे में ,या चमड़े की खाल या किसी पुतले के साथ सम्भोग करता है तो ,वह भी उसी तरह हलाल है .और उसे भी हस्त मैथुन माना जायेगा ,जैसे जिहाद के समय हस्त मैथुन जायज और हलाल है ."
a-"If a man makes a hole in a watermelon, or a piece of dough, or a leather skin, or a statue, and has sex with it, then this is the same as what we have said about other types of masturbation [i.e., that it is halaal in the same circumstances given before, such as being on a journey]. In fact, it is easier than masturbating with one's hand".
"इसी तरह अगर किसी औरत के पास पति नहीं हो .और उसमे वासना की प्रबलता हो जाये .तो विद्वानों ने उसे अनुमति दी है ,कि वह औरत एक नर्म चमड़े के तुकडे को इस तरह से लपेटे जिसका आकार एक लिंग की तरह हो जाये .फिर उसे अन्दर घुसवा ले .वह औरत चाहे तो ककड़ी का भी प्रयोग कर सकती है .और वासना शांत कर सकती है "
b-"If a woman does not have a husband, and her lust becomes strong, then some of our scholars say: It is permissible for the woman to take an akranbij, which is a piece of leather worked until it becomes shaped like a penis, and insert it in herself. She may also use a cucumber".
Bada'i al-Fuwa'id of Ibn Qayyim (Islamic scholar), page 129
प्रमाण के लिए "बिदा अल फवाईद بداءع الفواءد" की मूल हदीस देखिये .
http://www.answering-ansar.org/answers/mutah/bida_alfawaid_p129.jpg


Sunni Imam Abu Bakar al-Kashani (d. 587 H) records in his authority work 'Badaye al-Sanae' Volume 2 page 216:


5-इमाम इब्न कय्यीम का परिचय 


इनका पूरा नाम "इमाम शमशुद्दीन अबू अब्दुल्लाह मुहम्मद इब्न अबी बकर इब्न साद अल दमिश्की था شمس الدين محمد بن أبي بكر بن أيوب ،ابن القيم الجوزية ابن القيم‎"यह हम्बली फिरके से सम्बंधित थे.इनका जन्म इस्लामी महीने सफ़र की 7 वीं तारीख को सन 691 हिजरी तदानुसार 4 फरवरी सन 1292 को दमिश्क के गाँव इजारा में हुआ था .और मृत्यु सन 1350 में हुई थी .इब्न कय्यीम एक प्रसिद्ध सुन्नी विद्वान् ,फकीह ,फिलोसफ़र ,और धर्म शाश्त्री भी थे . इसलिए इनके फतवों पर शक करने का कोई सवाल ही नहीं उठता .सभी प्रमाणिक और विश्वसनीय हैं .
6-कुतर्कियों से सावधान 


आज भी चालाक मुल्ले मौलवी अपने कुतर्कों और बेतुकी दलीलों के सहारे मुसलमानों को गुमराह करते रहते हैं .और लोग उन्हीं की बातों सही मान लेते हैं .कुरान में ऐसे लोगों से बचने को कहा है .कुरान में कहा है ,
"तुम ऐसे लोगों को छोडो यह अपनी दलीलबाजियों और कुतर्कों के खेल में लगे रहें ,यहांतक इनकी उस दिन से भेंट हो जाये ,जिसका इनसे वादा किया गया है ." 
सूरा- अज जुखुरुफ़ 43 :83 
जो लोग लोग द्वेषभावना से ग्रस्त होकर हमारे ऊपर इस्लाम को बदनाम करने का आरोप लगाते हैं . उनको चाहिए कि वह इन दोनों परस्पर विरोधी फतवों को ध्यान से पढ़ें .और बताएं कि इस्लाम को कौन बदनाम और बर्बाद कर रहा है ? क्या फतवे सिर्फ औरतों के लिए ही दिए जाते हैं .क्या मुस्लिम औरतें ककड़ी ,खीरा,गाजर .मुली .या केला नहीं खाएं और खरीदें ?क्या इन मौलवियों को मुस्लिम औरतों के चरित्र पर कोई शक है ?


किसी ने सही कहा है " नीम काजी खतरये ईमान "


http: //ajareresalat.forum5.info/t150-dirty-sunni-fatwas-explicit-content

मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

धर्मपरिवर्तन और इस्लाम की नीति !


जकारिया नायक जैसे लोग हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन कराने के लिए इस्लाम का सिर्फ एक ही पक्ष पेश करते है .और दूसरे पक्ष को छुपा लेते हैं .और भोलेभाले लोग इस्लाम को ठीक से जाने बिना अपना धर्म छोड़कर मुसलमान बन जाते हैं ,और पछताते हैं ,क्योंकि इन लोगों को इस्लाम की दोहरी नीति के बारे में पता नहीं होता है .यह लोग कहते हैं कि इस्लाम में जबरदस्ती नहीं है ,और हरेक को अपनी पसंद का धर्म बदलने का अधिकार है .यह बातें सिर्फ हिन्दुओं और गैर मुस्लिमों को रिझाने के लिए कही जाती हैं ,ताकि वह इस्लाम के जाल में फंस जाएँ .
हम भाग्यशाली है कि हमारा जन्म भारत में हुआ है ,जहां इस्लामी हुकूमत नहीं है .और वह लोग सौभाग्यशाली है ,जो अभी तक सेकुलरवाद और इस्लाम के प्रभाव से बचे हुए हैं .और वह लोग तारीफ़ करने के योग्य हैं ,जो निडर होकर इस्लामी विचारों विरोध करते हैं .और जिनकी किस्मत फूट जाती है वह जाने अनजाने इस्लाम की खाई में गिर जाते है .जहाँ से निकलना संभव नहीं है .क्योकि इस्लाम में गिर तो सकते हैं ,लेकिन बहार नहीं निकल सकते .इस्लाम दुसरे धर्म के लोगों को अपना धर्म छोड़ने की अनुमति तो देता है ,लेकिन फिर से अपने धर्म में आने ,या अपनी पसंद के किसी और धर्म में जाने की .इजाजत नहीं देता है.
इस्लाम छोड़कर वापस अपने धर्म में आने को इस्लाम में "इरतदादارتداد" Apostasy या धर्म भ्रष्टता कहा जाता है .और ऐसा करने वाले को "मुरतदمُرتد" कहा जाता है .कुरान में ऐसे व्यक्ति के लिए कठोर सजा का प्रावधान है .जैसे -
"अगर तुमने ईमान लाने के बाद इरतदाद किया तो हम तुम्हें कठोर यातनाएं देंगे "सूरा -तौबा 9 :66 
"लोग चाहते हैं कि तुम फिर से उन्ही की तरह वैसे ही काफ़िर हो जाओ जैसे वह खुद है ,तो ऐसे लोग जहाँ मिलें उन्हें पकड़ो और उनका वध कर दो .और कोई उनकी सहायता नहीं करे "सूरा -निसा 4 :89 
"क्योंकि जिसने रसूल का आदेश माना .समझ लो उसने अल्लाह का आदेश मान लिया "सूरा -निसा 4 :80 


वैसे तो मुसलमानों के कई फिरके हैं लेकिन सबके विचार एक जैसे ही है ,.सभी जहरीले और घातक है .ऊनके बारे में फिर कभी दिया जायेगा .इस लेख में शिया लोगों के विचार दिए जा रहे है .शिया लोगों की मुख्य हदीस "अल काफी الكافي"है जिसका संकलन "अबू जाफर मुहम्मद बिन याकूब कुल्यानी अल राजी "ने किया था .इसकी मौत सन 939 में हुई थी .इसकी हदीस के संकलन की किताब का नाम "मिरातुल उकूल"مراة اكعقول कहा जाता है .
इसी किताब में इस्लाम छोड़कर वापस अपने धर्म में आने ,जैसे अपराधों के लिए जो सजाएँ बताई है उनका कुछ नमूना दिया जा रहा है .इस से आपको इस्लाम की उदारता का पता चल जायेगा .


1-मर्दों के लिए इस्लाम त्यागने की सजा 
"मुहम्मद बिन मुस्लिम ने कहा की मैंने अबू जाफर से "मुर्तद" ( इस्लाम त्यागने वाला ) के बारे में पूछा तो ,उन्होंने कहा जो भी इस्लाम से हट जाये ,और उस बात पर अविश्वास करे जो अल्लाह ने रसूल पर नाजिल की है ,तो ऐसे व्यक्ति के लिए पश्चाताप के लिए कोई रास्ता नहीं है .उसे क़त्ल करना अनिवार्य है .और उसकी पत्नी की किसी मुसलमान से शादी करा देना चाहिए .और उसकी विरासत की संपत्ति और बच्चे मुसलमानों में बाँट देना चाहिए "
Punishment for a Male Apostate 
عَلِيُّ بْنُ إِبْرَاهِيمَ عَنْ أَبِيهِ وَ عِدَّةٌ مِنْ أَصْحَابِنَا عَنْ سَهْلِ بْنِ زِيَادٍ جَمِيعاً عَنِ ابْنِ مَحْبُوبٍ عَنِ الْعَلَاءِ بْنِ رَزِينٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ مُسْلِمٍ قَالَ سَأَلْتُ أَبَا جَعْفَرٍ ع عَنِ الْمُرْتَدِّ فَقَالَ مَنْ رَغِبَ عَنِ الْإِسْلَامِ وَ كَفَرَ بِمَا أَنْزَلَ اللَّهُ عَلَى مُحَمَّدٍ ص بَعْدَ إِسْلَامِهِ فَلَا تَوْبَةَ لَهُ وَ قَدْ وَجَبَ قَتْلُهُ وَ بَانَتْ مِنْهُ امْرَأَتُهُ وَ يُقْسَمُ مَا تَرَكَ عَلَى وُلْدِهِ "




From Muhammad bin Muslim said: That I said Abu  Ja`far  about the apostate (murtad). So he  said: “Whoever turns away from Islaam, and disbelieves in what Allaah has revealed to the Prophet  after being a Muslim, there is no repentance for him, and it is waajib (obligatory) to kill him, and his wife becomes a wife of  a believer  muslim  and his legacy and children should be sold and  divided among the muslims  "
Al-Kulayni, Al-Kaafi, vol. 7, pg. 256, hadeeth # 1
Mir’aat Al-`Uqool, vol. 23, pg. 396 


2-ईसाई धर्म अपनाने की सजा 
"अली बिन जाफर से उसके भाई अबी अल हसन कहा कि एक मुसलमान ईसाई बन गया है .तो हसन ने कहा उसे क़त्ल कर देना चाहिए .फिर अली ने पूछा कि अगर कोई इसाई मुसलमान हो जाये और फिर से ईसाई हो जाये तो काया करना चाहिए .हसन ने कहा पहले तो उस से तौबा करने को कहो ,अगर नहीं माने तो उसे क़त्ल कर दो .और उसकी पत्नी और संपत्ति मुसलमानों में बाँट दो "
Mir’aat Al-`Uqool, vol. 23, pg. 396 
مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى عَنِ الْعَمْرَكِيِّ بْنِ عَلِيٍّ النَّيْسَابُورِيِّ عَنْ عَلِيِّ بْنِ جَعْفَرٍ عَنْ أَخِيهِ أَبِي الْحَسَنِ ع قَالَ سَأَلْتُهُ عَنْ مُسْلِمٍ تَنَصَّرَ قَالَ يُقْتَلُ وَ لَا يُسْتَتَابُ قُلْتُ فَنَصْرَانِيٌّ أَسْلَمَ ثُمَّ ارْتَدَّ عَنِ الْإِسْلَامِ قَالَ يُسْتَتَابُ فَإِنْ رَجَعَ وَ إِلَّا قُتِلَ




From `Alee bin Ja`far from his brother Abee Al-Hasan  said: I asked him  about a Muslim who becomes a Christian. He  said: “He (should be) killed, and no repentance from him” I said: “What about a Christian who becomes Muslim then Apostates from Islaam?” He said: “He is asked to repent. And if he returns (to Islaam that is okay), or otherwise he is killed and his wife and property should be given to muslims ”
Mir’aat Al-`Uqool, vol. 23, pg. 400 


3-औरतों के लिए इस्लाम त्यागने की सजा 
"गियास बिन इब्राहीम कहा कि जाफर बिन मुहम्मद ने अपने पिता अली से पूछा कि अगर कोई औरत इस्लाम त्याग दे तो , उसका क्या करना चाहिए .अली ने कहा उसे क़त्ल नहीं करो .बल्कि कैद करो फिर मुसलमानों के हाथ बेच डालो ."
Punishment for a Female Apostate: 


وَ فِي رِوَايَةِ غِيَاثِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِيهِ ع أَنَّ عَلِيّاً ع قَالَ إِذَا ارْتَدَّتِ الْمَرْأَةُ عَنِ الْإِسْلَامِ لَمْ تُقْتَلْ وَ لَكِنْ تُحْبَسُ أَبَداً "




From Ghiyaath bin Ibraaheem from Ja`far bin Muhammad  from his father  That `Alee  said: “When a woman apostates from Islaam, she is not killed, but she is imprisoned and sold  to muslims"
Al-Sadooq, Man Laa YaHDuruh Al-Faqeeh, vol. 3, Baab Al-Irtidaad, pg. 150, hadeeth # 3549 




4 -रसूल के विरुद्ध बोलने की सजा 
" अम्मार बिन अल शबाती ने कहा कि मैंने अबा अब्दुल्लाह से सुना है कि तुम में से जो भी मुस्लिम इस्लाम का त्याग करे और मुहम्मद कि नबूवत से इंकार करेऔर झूठ बताये , तो उसका खून बहाना और क़त्ल करना जायज है .और जिस दिन तुम यह बात सुनो उस दिन से उसकी पत्नी उस से अलग कर दो .और तुम्हारे नेता को चाहिए कि अगर वह औरत तौबा नहीं करे तो उसे गुलाम बनाकर अपने लिए रख ले .और बाकी सम्पति बाँट दे "
Punishment for Talking Against the Prophet (صلى الله عليه وآله وسلم)


عِدَّةٌ مِنْ أَصْحَابِنَا عَنْ سَهْلِ بْنِ زِيَادٍ وَ عَلِيُّ بْنُ إِبْرَاهِيمَ عَنْ أَبِيهِ وَ مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى عَنْ أَحْمَدَ بْنِ مُحَمَّدٍ جَمِيعاً عَنِ ابْنِ مَحْبُوبٍ عَنْ هِشَامِ بْنِ سَالِمٍ عَنْ عَمَّارٍ السَّابَاطِيِّ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا عَبْدِ اللَّهِ ع يَقُولُ كُلُّ مُسْلِمٍ بَيْنَ مُسْلِمَيْنِ ارْتَدَّ عَنِ الْإِسْلَامِ وَ جَحَدَ مُحَمَّداً ص نُبُوَّتَهُ وَ كَذَّبَهُ فَإِنَّ دَمَهُ مُبَاحٌ لِكُلِّ مَنْ سَمِعَ ذَلِكَ مِنْهُ وَ امْرَأَتَهُ بَائِنَةٌ مِنْهُ يَوْمَ ارْتَدَّ فَلَا تَقْرَبْهُ وَ يُقْسَمُ مَالُهُ عَلَى وَرَثَتِهِ وَ تَعْتَدُّ امْرَأَتُهُ [بَعْدُ] عِدَّةَ الْمُتَوَفَّى عَنْهَا زَوْجُهَا وَ عَلَى الْإِمَامِ أَنْ يَقْتُلَهُ وَ لَا يَسْتَتِيبَهُ




From `Ammaar Al-SaabaaTee said: I hear Abaa `Abd Allaah  he  said: “Every Muslim amongst the Muslimeen who apostates from Islaam, and denies Muhammad  prophecy and (call) him  a liar. His blood is allowed (to kill) whoever hears that from him. And his wife baa’inah (?) from the day of apostasy, and she should not go near him. And his wealth is divided amongst his muslims and his wife invokes upon herself `iddah of the death of her husband. And it is upon Imaam (leader) that he kills him, and if she does not ask for repentance then  enslave her  for   himself ”
Al-Kulayni, Al-Kaafi, vol. 7, pg. 257-258, hadeeth # 11


عَلِيُّ بْنُ إِبْرَاهِيمَ عَنْ أَبِيهِ عَنِ ابْنِ أَبِي عُمَيْرٍ عَنْ هِشَامِ بْنِ سَالِمٍ عَنْ أَبِي عَبْدِ اللَّهِ ع أَنَّهُ سَأَلَ عَمَّنْ شَتَمَ رَسُولَ اللَّهِ ص فَقَالَ يَقْتُلُهُ الْأَدْنَى فَالْأَدْنَى قَبْلَ أَنْ يَرْفَعَهُ إِلَى الْإِمَامِ "




From Hishaam bin Saalim from Abee `Abd Allaah  That he was asked about one who abuses the Messenger of Allaah,So he  said: “He is to be killed, for the lowest of the low (rebuke) before he is taken to the Imaam(leader)” 
हिश्शाम बिन सालिम ने अबी अब्दुल्लाह से रसूल का अनादर करने की सजा के बारे में पूछा ,तो वह बोले ऐसा करने वाले को अपने सरदार के सामने पेश करके फटकारो और फिर उसे क़त्ल कर दो .यही उसकी न्यूनतम सजा है.


Mir’aat Al-`Uqool, vol. 23, pg. 400 


5 -इमाम की दिव्यता से इंकार की सजा 
"हिशाम बिन सलीम ने कहा कि मैंने अबा अब्दुलाह से सुना कि उन्होंने अपने साथियों से कहा कि जोभी अमीरुल मोमनीन अली बिन अबी तालिब की खिलाफत और उनकी दिव्यता से इंकार करे तो उसे पहले तौबा करने को कहो .और अगर वह तौबा नहीं करे तो उसे जिन्दा जला दिया जाये "
Punishment for  Refusing Divinity of the Imaams (عليهم السلام) 
Here is a SaHeeH hadeeth taken from Rijaal Al-Kashee, about the infamous `Abd Allaah bin Saba’.


حدثني محمد بن قولويه، قال حدثني سعد بن عبد الله، قال حدثنا يعقوب بن يزيد و محمد بن عيسى، عن ابن أبي عمير، عن هشام بن سالم، قال : سمعت أبا عبد الله (عليه السلام) يقول و هو يحدث أصحابه بحديث عبد الله بن سبإ و ما ادعى من الربوبية في أمير المؤمنين علي بن أبي طالب، فقال إنه لما ادعى ذلك فيه استتابه أمير المؤمنين (عليه السلام) فأبى أن يتوب فأحرقه بالنار. "
From Hishaam bin Saalim said: I heard from Abaa `Abd Allaah  and he said: “And he narrated from his companions the narration of `Abd Allaah bin Sabaa’ and he called (to people) the lordship/divinity of Ameer Al-Mumineen `Alee bin Abee Taalib . So he  said: That Ameer Al-Mu’mineen ordered him to repent, but he refused. Then Ali let him burn in fire."
Al-Kashee, Rijaal Al-Kashee, pg. 107, hadeeth # 17
6-दूसरे नबियों का आदर करने की सजा 




"इब्न अबी याफूर ने कहा मैंने अबी अब्दुलाह को बताया कि" बजी " नामक व्यक्ति दावा करता है कि सभी नबी बराबर हैं .अब्दुल्लाह ने कहा अग्गर तुम यह बात खुद उस से सुनो तो उसे क़त्ल कर देना .यह हदीस कहने वाला कहता है कि मैंने ऐसी ही किया .और उस व्यक्ति के घर में आग लगा दी .जिस से वह मकान सहित जल कर मर गया "
Punishment for Respecting  other  Prophets


مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى عَنْ أَحْمَدَ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنِ ابْنِ فَضَّالٍ عَنْ حَمَّادِ بْنِ عُثْمَانَ عَنِ ابْنِ أَبِي يَعْفُورٍ قَالَ قُلْتُ لِأَبِي عَبْدِ اللَّهِ ع إِنَّ بَزِيعاً يَزْعُمُ أَنَّهُ نَبِيٌّ فَقَالَ إِنْ سَمِعْتَهُ يَقُولُ ذَلِكَ فَاقْتُلْهُ قَالَ فَجَلَسْتُ لَهُ غَيْرَ مَرَّةٍ فَلَمْ يُمْكِنِّي ذَلِكَ  "




From Ibn Abee Ya`foor said: I said to Abee `Abd Allaah  that Bazee` calims that all  Prophets  are  equal .. So he  said: “If you hear him saying that you (must) kill him”. He (the narrator) said: “I sat fire on his house and butnt him  alive " 
Al-Kulayni, Al-Kaafi, vol. 7, pg. 259, hadeeth # 22


मेरा उन इस्लाम के वकीलों ,हिमायतियों , ब्लोगरों और दलालों से सवाल है ,जो दावा करते हैं कि इस्लाम में कोई जबरदस्ती नहीं है .और इस्लाम एक उदार और शांतिप्रिय धर्म है .लेकिन वह इसका जवाब दें कि इस्लाम में वन वे ट्रेफिक क्यों है .लोग इस्लाम में आ तो सकते है लेकिन अपने धर्म में वापस क्यों नहीं जा सकते ?
हिन्दू लड़कियों मुस्लिम लड़कों से कभी मित्रता नहीं करना चाहिए .वर्ना वाही हालत होगी जो रीना राय और उमर अब्दुल्लाह की पत्नी पायल की हुई है .मुसलमानों की दोस्ती हमेशा घातक होती है . मेरा विशेषकर उन लड़कियों से अनुरोध है ,जो किसी झूठे प्रेम में फंस कर अपना धर्म छोड़ने का इरादा रखती हैं ,और इस्लाम कबूल करना चाहती हैं ,वह ऐसा करने पहले एक करोड़ बार सोच लें कि उनको सिवाय पछताने के कुछ नहीं मिलेगा .लोगों को पता होना चाहिए कि धर्म परिवर्तन के बारे में मुसलंमान दोहरी नीति अपनाते हैं .अगर कोई मुसलमान इस्लाम के अलावा कोई धर्म अपनाता है ,तो उसे क़त्ल कर देते हैं .यही कश्मीर ,में हुआ है .


इस विषय पर एक मुल्ले का भाषण सुनिए !


http://www.youtube.com/watch?v=DuRNk9eBNa0


धर्मपरिवर्तन अर्थात सर्वनाश .




http://www.revivingalislam.com/2011/01/punishment-for-apostate-in-islam.html

शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011

सेकुलरिज्म का पोस्टमार्टम


सेकुलरिज्म एक भ्रामक और कुपरिभाषित शब्द है.अधिकाँश लोग इस शब्द का सही अर्थ भी नहीं जानते .इस शब्द की न तो कोई सटीक परिभाषा है,और न ही कोई व्याख्या है। लेकिन कुछ धूर्तों और सत्ता लोलुप लोगों ने सेकुलर शब्द का अर्थ "धर्मनिरपेक्ष "कर दिया,जिसका मूल अंग्रेजी शब्द से दूर का भी सम्बन्ध नहीं है.यही नहीं इन मक्कार लोगों ने सेकुलर शब्द का एक विलोम शब्द भी गढ़ लिया "साम्प्रदायवाद "।आज यह सत्तालोभी ,हिंदुद्रोही नेता अपने सभी अपराधों पर परदा डालने और हिन्दुओं को कुचलने व् उन्हें फ़साने के लिए इन शब्दों का ही उपयोग करते हैं। इन कपटी लोगों की मान्यता है की कोई व्यक्ति चाहे वह कितना ही बड़ा अपराधी हो, भ्रष्टाचारी हो ,या देशद्रोही ही क्यों न हो,यदि वह ख़ुद को सेकुलर बताता है ,तो उसे दूध का धुला ,चरित्रवान ,देशभक्त,और निर्दोष मानना चाहए.इस तरह से यह लोग अपने सारे अपराधों को सेकुलरिज्म की चादर में छुपा लेते हैं ।लेकिन यही सेकुलर लोग जब किसी हिन्दू संत,महात्मा ,या संगठन को कानूनी शिकंजे में फ़साना चाहते हैं ,तो उन पर सम्प्रदायवादी होने का आरोप लगा कर उन्हें प्रताडित करते हैं।सेकुलर का वास्तविक अर्थ और इतिहास बहुत कम लोगों को पता है.इस सेकुलरिज्म रूपी राक्षस को इंदिरा गांधी ने जन्म दिया था। इमरजेंसी के दौरान (1975-1977) इंदिरा ने अपनी सत्ता को बचाने ओर लोगों का मुंह बंद कराने के लिए पहिली बार सेकुलरिज्म का प्रयोग किया था।इसके लिए इंदिरा ने दिनांक 2 नवम्बर 1976को संविधान में 42 वां संशोधन करके उसमे सेकुलर शब्द जोड़ दिया था .जो की एक विदेश से आयातित शब्द है, हिन्दी में इसके लिए धर्मनिरपेक्ष शब्द बनाया गया.यह एक बनावटी शब्द है.भारतीय इतिहास में इस शब्द का कोई उल्लेख नहीं मिलता है।
वास्तव में इस शब्द का सीधा सम्बन्ध ईसाई धर्म और उनके पंथों के आपसी विवाद से है।
सेकुलर शब्द लैटिन भाषा के सेकुलो (Seculo)शब्द से निकला है। जिसका अंग्रेजी में अर्थ है 'इन दी वर्ल्ड (in the world) 'कैथोलिक ईसाइयों में संन्यास लेने की परम्परा प्रचलित है। इसके अनुसार संन्यासी पुरुषों को मौंक(Monk) और महिलाओं को नान(Nun) कहा जाता है। लेकिन जो व्यक्ति संन्यास लिए बिना ,समाज में रहते हुए संयासिओं के धार्मिक कामों में मदद करते थे उन्हें ही सेकुलर(Secular) कहा जाता था। साधारण भाषा में हम ऐसे लोगों को दुनियादार कह सकते हैं।
सेकुलरिज्म की उत्पत्ति-
सभी कैथोलिक ईसाई पॉप को अपना सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक गुरु मानते हैं। 15 वीं सदी में असीमित अधिकार थे। उसे यूरोप के किसी भी राजा को हटाने ,नए राजा को नियुक्त करने,और किसी को भी धर्म से बहिष्कृत करने के अधिकार थे। यहाँ तक की पॉप की अनुमति के बिना कोई राजा शादी भी नहीं कर सकता था।
जब इंग्लैंड के राजा हेनरी 8 वें (1491-1547(ने 1533में अपनी रानी कैथरीन(Catherine) को तलाक देने,और एन्ने बोलेन्न (Anne Bollen)नामकी विधवा से शादी करने के लिए पॉप क्लीमेंट 7th से अनुमति मांगी तो पॉप ने साफ़ मना कर दिया। और हेनरी को धर्म से बहिष्कृत कर दिया। इस पर नाराज़ होकर हेनरी ने पॉप से विद्रोह कर दिया,और अपने राज्य इंग्लैंड को पॉप की सता से अलग करके ,'चर्च ऑफ़ इंग्लैंड "की स्थापना कर दी.इसके लिए उसने 1534 में इंग्लैंड की संसद में 'एक्ट ऑफ़ सुप्रीमैसी Act of suprimacy "नामका कानून पारित किया .जिसका शीर्षक था "सेपरेशन ऑफ़ चर्च एंड स्टेट ( separation of church and state) "इसके मुताबिक चर्च न तो राज्य के कामों में हस्तक्षेप कर सकता था ,और न ही राज्य चर्च के कामों में दखल दे सकता था। इस चर्च और राज्य के विलगाव के सिध्धांत का नाम उसने सेकुलरिज्म(Secularism) रखा।
आज अमेरिका में सेकुलरिज्म का यही अर्थ माना जाता है.परन्तु यूरोप के कैथोलिक देशों में सेकुलर शब्द का अर्थ "स्टेट अगेंस्ट चर्च - state against church"किया जाता है। हेनरी और इंदिरा के उदाहरणों से यह स्पष्ट है की इन लोगों ने सेकुलर शब्द का उपयोग अपने निजी स्वार्थों के लिए ही किया था।
आज सेकुलरिज्म के नाम पर स्वार्थी लोगों ने कई शब्द बना रखे हैं जो भ्रामक और परस्पर विरोधी हैं। कुछ प्रचलित शब्द इस प्रकार हैं -
शब्दकोश में इसके अर्थ धर्म से संबंध न रखनेवाला,संसारी,غیر روحانی हैं 
1-धर्म निरपेक्षता -
अर्थात धर्म की अपेक्षा न रखना ,धर्म हीनता,या नास्तिकता.इस परिभाषा के अनुसार धर्म निरपेक्ष व्यक्ती उसको कहा जा सकता है ,जिसको अपने बाप का पता न हो ,और जो हर आदमी को अपना बाप मानता हो.या ऎसी औरत जो हर व्यक्ति को अपना पति मानती हो । आजकल के अधिकाँश वर्ण संकर नेता इसी श्रेणी में आते हैं।ऐसे लोगों को हम ,निधर्मी ,धर्मभ्रष्ट ,धर्महीन ,धर्मपतित या धर्मविमुख कह सकते हैं .
2-सर्व धर्म समभाव-
 अर्थात सभी धर्मों को एक समान मानना। अक्सर ईसाई और मुसलमान सेकुलर का यही मतलब बताते हैं। यदि ऐसा ही है तो यह लोग धर्म परिवर्तन क्यों कराते हैं? धर्म परिवर्तन को अपराध घोषित क्यों नहीं कराते,और धर्म परिवर्तन कराने वालों को सज़ा देने की मांग क्यों नहीं करते?ईसाई मिशनरियां हिन्दुओं के धर्म परिवर्तन के लिए क्यों लगी रहती हैं ?या तो यह लोग स्वीकार करें की सभी धर्म समान नहीं है।
मुसलमान तो साफ़ कहते हैं की अल्लाह के नजदीक सिर्फ़ इस्लाम धर्म ही है "इन्नाद्दीन इन्दाल्लाहे इस्लामانّ الدين عند الله الاسلام  "(Sura3:19)
सभी धर्मों के समान होने की बात मात्र छलावा है और कुछ नहीं।
3-पंथ निरपेक्षता -
अर्थात सभी पंथों,सप्रदायों,और मतों को एक समान मानना-वास्तव में यह परिभाषा केवल भारतीय पंथों ,जैसे बौध्ध ,जैन,और सिख,जैसे अन्य पंथों पर लागू होती है। क्योंकि यह सभी पंथ एक दूसरे को समान रूप से आदर देते हैं .लेकिन इस परिभाषा में इस्लामी फिरके नहीं आते.शिया और सुन्निओं की अलग अलग शरियतें हैं वे एक दूसरे को कभी बराबर नहीं मानते ,यही कारण है की यह लोग हमेशा आपस में लड़ते रहते हैं.उक्त परिभाषा के अनुसार केवल हिन्दू ही स्वाभाविक रूप से सेकुलर हैं.उन्हें सेकुलरिज्म का पाठ पढाने की कोई जरूरत नहीं है।
4-ला मज़हबियत (لا مذهبيت)
मुसलमान सेकुलरिज्म का अर्थ यही करते है। इसका मतलब है कोई धर्म नहीं होना,निधर्मी पना .मुसलमान सिर्फ़ दिखावे के लिए ही सेकुलरिज्म की वकालत करते हैं.और इसकी आड़ में अपनी कट्टरता ,देश द्रोह, अपना आतंकी चेहरा छुपा लेते हैं.इस्लाम में सभी धर्मो को समान मानना -शिर्क- यानी महा पाप है.ऐसे लोगों को मुशरिक कहा जाता है,और शरियत में मुशरिकों के लिए मौत की सज़ा का विधान है। इसीलिए मुसलमान भारत को दारुल हरब यानी धर्म विहीन देश कहते हैं। और सभी मुस्लिम देशों में सेकुलर का यही मतलब है।इस्लाम धार्मिक शासन का पक्षधर है ,और सेकुलर हुकूमत की तुलना चंगेजखान की निरंकुश हुकूमत से करता है .इकबाल ने कहा है , 
"जलाले बादशाही हो ,या जम्हूरी तमाशा हो .अगर मज़हब से खाली हो ,तो रह जाती है खाकानी ."


5-सूडो सेकुलर(Psuedo secular)
अर्थात छद्म धर्म निरपेक्ष.या कपताचारी .यह ऐसे लोग हैं जो धर्म का ढोंग करते हैं.हालांकि इन लोगों को धर्म से कोई लेना देना नही होता .इनका ख़ुद का कोई धर्म नहीं होता,लेकिन यह लोग सभी धर्म स्थानों पर जाकर लोगों को मूर्ख बनाते हैं। यह सभी लोग वर्ण संकर ,अर्थात हिन्दू,मुसलमान,ईसाई,और देशी विदेशी नस्लों की मिश्रित संतान हैं। देश में ऐसे लोगों की एक बड़ी संख्या मौजूद है।यही लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए सेकुलरिज्म की आड़ में लोगों को जातियों और धर्मों के आधार बाँट कर आपस में पर फूट डालते रहते हैं .ऐसे लोगों को निधर्मी कहना अनुचित नहीं होगा .
 6-सम्प्रदायवाद-
यह एक कृत्रिम शब्द है जो सेकुलरिज्म के विपरीतार्थ में प्रयुक्त किया जाता है.इसका शाब्दिक अर्थ है की अपने सम्प्रदाय को मानना .इस शब्द का प्रयोग सेकुलर लोग हिदुओं को गाली देने,और अपराधी बताने में करते हैं। इन सेकुलरों की दृष्टी में सभी हिन्दू सम्प्रदायवादी अर्थात अपराधी होते हैं .मुसलमान और ईसाई कभी सम्प्रदायवादी नहीं हो सकते.नीचे दी गयी सूची से यह स्पष्ट हो जायेगा।
सेकुलर--- सम्प्रदायवादी
इमाम बुखारी--- प्रवीन तोगडिया
मदरसा----- सरस्वती मन्दिर
मुस्लिम--- लीग बी जे पी
अलाहो अकबर---- जय श्रीराम
मुल्ले मौलवी ---साधू संत
सिम्मी- --बजरंग दलRSS
मस्जिद दरगाह ---मन्दिर मठ
उर्दू ---संस्कृत
इन सभी विवरणों से स्पष्ट हो जाता है की सेकुलरिज्म एक ऐसा हथियार है जिसका प्रयोग हिन्दुओं को कुचलने के लिए किया जाता है.ताकि इस देश से हिंदू धर्म और संस्कृती को मिटा कर यहाँ विदेशी वर्ण संकर राज कर सकें।
हिंदू सदा से सेकुलर रहे हैं.इतिहास गवाह है हिन्दुओं ने न तो कभी दूसरे धर्मों के लोगो पर आक्रमण किया न उन का धर्म परिवर्तन किया। न हिन्दुओं ने किसी के धर्म स्थल ही तोडे। फ़िर हिदुओं को यह कांग्रेसी सेकुलरिज्म पढाने की क्या जरूरत पड़ गयी थी। मतलब साफ़ है की यह हिन्दुओं के विरूद्ध एक साजिश है।
अगर सेकुलरिज्म का पाठ पढाना है तो,उन लोगों को पढ़ाया जाना जो अपने धर्म को सर्वश्रेष्ठ बता कर दूसरों के धर्म को हीन बताते हैं . और लोगों का धर्म परिवर्तन कराते रहते है .ताकि इस देश पर राज कर सकें !

बुधवार, 23 नवंबर 2011

आतंकवाद की सुनामी !


सुमानी लहरों की तरह इस्लाम भी जहाँ जाता है ,वहां सिवाय बर्बादी के कुछ भी नहीं बचताहै .लोगों को जापान की सुनामी को देखकर उसकी भयानकता का अंदाजा कर लिया होगा .जापान की सुनामी एक प्राकृतिक आपदा थी ,किसका जापान के लोगों ने हिम्मत से सामना किया और उसपर काबू कर लिया है .लेकिन लोगों को यह पता नहीं है कि जल्द ही भारत में इस्लामी आतंक की सुनामी आनेवाली है .और यह सुनामी प्राकृतिक नहीं ,बल्कि यहाँ के मुसलमानों ,और हमारी अदूररदर्शी सरकार द्वारा बुलवाई जाएगी .लेकिन हम खतरे की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं .और अपनी आँखें बंद करके बैठे हैं .हम आये दिन सुनते रहाहे हैं कि,भारत में जिहादियों का दल प्रवेश कर चूका है ,जो कभी भी और कहीं भी वारदात कर सकता है .सरकार यह भी जानती है कि ,इन जिहादियों को बाहर से आर्थिक मदद और देश के मुसलमानों का समर्थन प्राप्त है .क्योंकि बिना उनकी मदद से बड़े पैमाने पर आतंकी वारदातें संभव नहीं हो सकती हैं , 
1 -इस्लामी सुनामी का दायरा 
भारत का आज कोई स्थान बाकी नहीं रह गया है जो ,इस्लाम की सुनामी के दायरे में नहीं हो .हमारी संसद ,दिल्ली के बाजार ,मुंबई की लोकल ट्रेन ,लालकिला ,अक्षरधाम ,बनारस के घाट ,शिवाजी टर्मिनस ,ताजमहल होटल ,सेना के कैम्प ,हमारे सैनिक और निर्दोष नागरिक सब इस्लामी सुनामी के निशाने पर हैं .लेकिन हमारी सेकुलर सरकार इतनी अंधी है कि,किसी बड़ी वारदात का इन्तेजार कर रही है .हमारी न्याय व्यवस्था इतनी सुस्त है कि जब कोई वारदात होती है तब तक अपराधी भाग चुके होते हैं .फिर जब बड़ी मुश्किल से पकडे जाते हैं तो ,उनको सजा दिलवाने में बरसों लग जाते हैं .और सजा देने की बजाये उनको सरकार के मेहमान की तरह रखा जाता है .और उनपर करोड़ों रूपया खर्च कर दिया जाता है .और उनको सजा दिलाने की जगह बचने की कोशिश की जाती है. अपराधियों को इतना लम्बा अवसर दिया जाता है ,कि उनका हौसला और बढ़ जाता है .कि वह किसी को बंधक रखकर सरकार पर दवाव डाल कर अपनी रिहाई का सौदा कर सकें .फिर उस से बड़ी वारदात कर सकें .लेकिन ऐसा इसलिए नहीं हो सकता है ,क्योंकि सरकार मुसलमानों के वोट नहीं खोना चाहती है .और जादातर नेता दोगले और सत्ता के लोभी हैं . 
2 -सरकार की आतंकियों से हमदर्दी ?
सरकार बरसों तक आतंकियों को जेलों में रखकर उनको मेहमान की तरह पालती रहती है ,और उनका परोक्ष समर्थन कराती है .यही कारण था जिस से कंधार अपहरण कर्ताओं को छोड़ना पड़ा था .और महबूबा मुफ्ती के बदले आतंवादियों को रिहा कर दिया गया था .सब को पता है कि जब भी ऐसे आतंकियों को रिहा किया गया ,वह और मजबूती से और दोगुनी ताकत से और संगीन वारदातों को अंजाम देते रहे हैं .अज भी अफजल गुरु का मामला लटक रहा है .हमें सरकार कि मंशा पर शक हो रहा है कि ,वह अफजल को सजा देना चाहती है ,या उसे भाग जाने का मौका देना चाहती है ,यही बात अजमल कसाब के बारे में है .यदि सरकार की मंशा में खोट नहीं होती तो .वह अदालत से सरे काम छोड़कर मामले को जल्दी निपटा देती .लेकिन गृह मंत्रालय अपराधियों को बचाने के रास्ते खोज रही है .
3 -कांगरेस आतंकियों को क्यों बचाना चाहती है ?
विकी लीक्स ने गुप्त दस्तावेजों से खुलासा किया है कि,केन्द्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद के अफजल गुरु की फांसी की दया की याचिका के लिए सरकार पर दवाब डाला था ,और कहा की यदि सरकार अफजल को फंसी की सजा होने देती है तो ,कांगरेस का पारंपरिक मुस्लिम वोट हाथों से निकल जायेगा .जबकि तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुलकलाम फाँसी के पक्ष में थे .लेकिन सोनिया ने फांसी की सजा को रुकवा दिया था .
4 -आतंकी फिर क्यों सर उठा रहे हैं ?
जैसे ही गोधरा काण्ड का फैसला आया ,मुल्ले मौलवी अपराधियों को बचाने की तरकीबे सोचने लगे हैं .और छाहते हैं देश में फिर से दंगा कराकर लोगों का ध्यान बटाया जाये .और दंगा कर के अपराधियों को छुड़ा लिया जाये .
दैनिक जागरण 16 मार्च 2011 के अनुसार सहारण पुर में जमीअत उलमा ए हिंद के सदर मौलाना अरशद मदनी ने कहा की महात्मा गाँधी की हत्या सरदार पटेल ने करवायी थी .क्योंकि वह भारत में मुसलमानों को नहीं रहना चाहते थे .मदनी ने यह बयान 15 /3 /2011 मंगलवार को इस्लामिया इंटर कालेज में दियाथा .मदनी ने दावा किया की सरदार ने गाँधी पर दो बार बमों से हमला करवाया था .और आखिर में गाँधी को शहीद करावा दिया .
मुलाना ने यह भी कहा की .मुसलमानों ने अपनी कुर्बानियों से देश को आजाद कराया था ,लेकिन हिन्दू उनका नाजायज लाभ उठा रहे हैं .यदि मुसलमान अपने बुजुर्गों की कुर्बानियों को याद रखेंगे तो देश पर फिर से उनका अधिकार हो जायेगा .
बड़े शर्म की बात है की ,यह सब जानकर भी कांगरेसियों का कोई मई का लाल एक भी शब्द कहने की हिम्मत नहीं कर सका .सबको सांप सूँघ गया .यदि यही बात किसी हिन्दू ने कही होती तो कांगरेसी नंगे नाचने लगते 
.दिनांक 23 नवम्बर 2011 को आज तक टी वी में पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचारों के बारे में जो रिपोर्ट और विडिओ दिया है ,उस से हरेक का दिल दहल जायेगा .फिर भी भारत के सेकुलर लोग नादान हिन्दू ,पाकिस्तान से जान और धर्म बचाकर 239 उन हिन्दू लोगों की दुर्दशा देख कर भी सबक नहीं लेते .याद रखिये जब तक मुसलमान अल्पसंख्यक रहते हैं ,तब तक भाईचारे का ढोंग करते है .लेकिन जैसे ही उनकी संख्या बढ़ जाएगी यहाँ के हिन्दुओं की वैसी ही दशा हो जाएगी ,जैसी पाकिस्तान के हिन्दुओं की हो गयी है .समझदारों को इशारा ही बहुत होता है , आज तक के इस शीर्षक को पढ़िए और दिए गए विडिओ को ध्यान से देखिये .-
5-पाकिस्‍तान में जुल्‍म-ओ-सितम झेलते हिन्‍दू !


http://aajtak.intoday.in/videoplay.php/videos/view/68723/2/206/Pakistan-Hindus-urge-govt-to-take-steps-to-end-communal-violence.html




हिन्दुओ तुम्हें बर्बाद करने के लिए क्षद्म सेकुलरिज्म और जिहादी आतंकवाद की सुनामी कभी भी आ सकती है !


जापान तो सुनामी से बच गया ,लेकिन इस्लामी सुनामी से देश को कौन बचाएगा ?

शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

बाइबिल कुरआन एक सामान !


ईश्वर और अल्लाह एक सामान हैं , इसका कोई प्रमाण नहीं है .लेकिन बाइबिल और कुरान की शिक्षा की तुलना करने पर यह बात पूरी तरह से सिद्ध हो जाती है कि बाइबिल का खुदा (God ) और कुरान का अल्लाह एक ही है .
मुस्लिम विद्वान् कहते हैं कि कुरान अल्लाह की किताब है ,जो अल्लाह ने अपने रसूल मुहम्मद के ऊपर नाजिल कि थी .लेकिन यदि हम कुरान और बाइबिल की शिक्षा और कहानियों को ध्यान से पढ़ें तो उनमे काफी समानता मिलती है .इस बात को सभी मानते हैं कि बाइबिल कुरान से काफी पुरानी है .बाइबिल के दो भाग हैं , पुराना नियम और नया नियम .पुराने नियम को यहूदी "तनख תנך" कहते हैं ,इसमे 39 किताबें शामिल हैं .पुराना नियम करीब 535 ई .पू में सकलित हो चूका था .और नए नियम में 27 किताबें शामिल हैं ,जो सन 66 संकलित हो चुकी थी .और यूरोप के अलावा अरब में भी प्रचलित थीं .इस्लाम के अनुसार पुराने नियम में तौरेत और जबूर आती हैं ,और नए नियम को इंजील कहा जाता है .अरब के लोग इन किताबों से अच्छी तरह परिचित थे .कुरान की पहली आयत सन 610 में उतरी थी ,और मुहम्मद की मौत सन 632 तक कुरान की आयतें उतरती ( बनती )रहीं .जिनका सन 644 में खलीफा उस्मान बिन अफ्फान ने संकलन किया था .
आज की कुरान में कोई मौलिकता (Originality ) नहीं दिखाई देती है ,सब बाइबिल से ली गयी हैं .यद्यपि किसी भाषा के टेक्स्ट को दूसरी भाषा में ज्यों का त्यों अनुवाद करना असंभव होता है ,लेकिन उनके भावार्थ में समानता दिखाई मिल जाती है . यही बात कुरान और बाइबिल के बारे में लागु होती है .दौनों के विचारों में असाधारण समानता से सिद्ध होता है ,कि मुहम्मद ने कुरान की रचना बाइबिल से प्रेरणा लेकर की थी .सिफ कुछ थोड़ी सी बातें ऐसी थी ,जो मुहम्मद ,और अरब लोगों से सम्बंधित है .यहाँ पर कुछ उदहारण दिए जा रहे हैं ,जिन से पता चलता है कुरान ऊपर से नहीं उतरी ,बल्कि नीचे ही बैठकर बाइबिल से मसाला लेकर बनायी होगी .और हमें कहना ही पड़ेगा "God और अल्लाह एक ही काम " क्यों ,आप ही  .देखिये 
 1-औरतों का हिस्सा पुरुषों से आधा होगा 
कुरान -"एक पुरुष का हिस्सा दो औरतों के हिस्से के बराबर होगा "सूरा -निसा 4 :11 
बाइबिल -यदि उनकी आयु 20 साल से अधि हो तो ,पुरुषों के लिए 20 शेकेल और औरतों के लिए 10 शेकेल ठहराए जाएँ " लैव्य व्यवस्था .27 :5 
2-माहवारी के समय औरतों से दूर रहो 
कुरान -"वह औरतों की माहवारी के बारे में पूछते हैं ,तो कह दो यह तो नापाकी है ,तो औरतों की माहवारी के समय उनसे अलग रहो "
सूरा -बकरा 2 :222 
बाइबिल -"जब कोई स्त्री ऋतुमती हो ,तो वह सात दिनों तक अशुद्ध मानी जाये .और जो कोई भी उसे छुए वह भी अशुद्ध माना जाये "
लैव्य व्यवस्था -15 :19 
3-औरतें खुद को छुपा कर रखें 
कुरान -"हे नबी ईमान वाली औरतों से कहदो कि जब वह घर से बहार निकलें तो ,अपने ऊपर चादर के पल्लू लटका लिया करें "
सूरा -अहजाब 33 :59 
बाइबिल -स्त्री के लिए उचित है कि वह आधीनता का चिन्ह ओढ़नी अपने सर पर रख कर बाहर निकलें " 1 कुरिन्थियों 11 :11 
4-अल्लाह गुमराह करता है 
कुरान -शैतान ने कहा ,हे रब जैसा तूने मुझे बहकाया है ,उसी तरह में छल करके लोगों को बहकाऊँगा " सूरा -अल हिज्र 15 :39 
"उन लोगों के दिलों में बीमारी थी ,अल्लाह ने उनकी बीमारी और बढा दी "सूरा -बकरा 2 :10 
बाइबिल -फिर खुदा ने उनकी आँखें अंधी और दिल कठोर बना दिए ,जिस से वह न तो आँखों से देख सकें और न मन से कुछ समझ सकें "
यूहन्ना -12 :40 
"यदि हमारी बुद्धि पर परदा पड़ा हुआ है ,तो यह खुदा के कारण ही है .और संसार के ईश्वर ने लोगों की बुद्धि को अँधा कर दिया है "
2 कुरिन्थियों 4 : 3 -4 
5 -विधर्मियों को क़त्ल कर दो 
कुरान -"और उनको जहाँ पाओ क़त्ल कर दो और घरों से निकाल दो "सूरा -बकरा 2 :191 
"काफिरों को जहाँ पाओ ,पकड़ो और उनका वध कर दो "सूरा -निसा 4 :89 
"मुशरिकों को जहाँ पाओ क़त्ल कर दो ,उन्हें पकड़ो ,उन्हें घेरो ,उनकी जगह में घात लगा कर बैठे रहो "सूरा -तौबा 9 :5 
बाइबिल -"अगर पृथ्वी के एक छोर से दूरारे छोर तक दूसरे देवताओं के मानने वाले हो ,तो भी उनकी बात नहीं मानो,और न उनपर तरस खाना .न उन पर दया दिखाना .औं न उनको शरण देना .बल्कि उनकी खोज करके उनकी घात अवश्य करना .और उनका पता करके उनका तलवार से वध कर देना "व्यवस्था विवरण -13 :6 से 13 
"जोभी यहोवा की शरण को स्वीकार नहीं करें ,उनको क़त्ल कर दो ,चाहे उनकी संख्या कम हो ,या अधिक .और चाहे वह पुरुष हों अथवा स्त्रियाँ हों " 2 इतिहास 15 :13 
6-विधर्मी नरक में जलेंगे 
कुरान -मुनाफिकों का ठिकाना जहन्नम है ,और वह बुरा ठिकाना है "सूरा -तौबा 9 :73 
"काफिरों और मुनाफिकों ठिकाना जहन्नम है ,जहाँ वह पहुँच जायेंगे " सूरा -अत तहरीम 66 :9 
बाइबिल -जो पुत्र को नहीं मानता,उस पर परमेश्वर का क्रोध बना रहेगा " यूहन्ना 3 :37 
"फिर उन लोगों से कहा जायेगा ,हे श्रापित लोगो हमारे सामने से निकलो ,और इस अनंत आग में प्रवेश करो ,जो शैतान और उसके साथियों के लिए तय्यार की गयी है " मत्ती -25 :41 
7-विधर्मियों से दोस्ती नहीं करो 
कुरान -ईमान वालों को चाहिए कि वे काफिरों को अपना संरक्षक और मित्र न बनायें ,और जो ऐसा करता है उसका अल्लाह से कोई नाता नहीं रहेगा "
 सूरा -आले इमरान 3 :28 
बाइबिल -अविश्वासियों के साथ बराबर का व्यवहार नहीं करो ,इसलिए यातो तुम उनके बीच से निकलो ,या उनको अपने बीच से निकाल डालो .अन्धकार और ज्योति का क्या सम्बन्ध है ." 2 कुरिन्थियों 6 :14 से 17 
8-कलमा की प्रेरणा भी बाइबिल से 
मुसलमानों का मूलमंत्र या कलमा दो भागों से बना हुआ है जो इस प्रकार है" لَآ اِلٰهَ اِلَّا اللّٰهُ مُحَمَّدٌ رَّسُوْلُ اللّٰهِؕ "
 "ला इलाह इल्लल्लाह -मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह "अर्थात नहीं हैं कोई इलाह मगर अल्लाह ,और मुहम्मद अल्लाह का रसूल है .कलामे दूसरा भाग मुहम्मद ने खुद जोड़ लिया था .जबकि पहला भाग बाइबिल में काफी पहले से मौजूद था .यहाँ पर मूल हिब्रू के साथ अरबी और अंगरेजी भी दिए जा रहे हैं .
Hear, O Israel,  the LORD our God— the LORD is ONE  -Deuteronium 6:4
"اسمع يا إسرائيل ، الرب إلهنا، رب واحد "
""शेमा इस्रायेल यहोवा इलोहेनु अदोनाय इहद "
"שְׁמַע, יִשְׂרָאֵל: יְהוָה אֱלֹהֵינוּ, יְהוָה אֶחָד "


He is the God , and there is no other god beside him.
"" हू एलोहीम व् लो इलोही लिदो "
"انه هو الله ، وليس هناك إله غيره بجانبه."
הוא האלוהים של כל בשר, ואין אלוהים לידו 
http://www.nabion.org/html/the_shema
इन सभी प्रमाणों से साफ सिद्ध हो जाता है कि मुहम्मद को कुरान बनाने कि प्रेरणा बाइबिल से मिली थी .बाकि बातें उसने अपनी तरफ से जोड़ दी थीं .क्योंकि दौनों में एक जैसी बातें दी गयी हैं .केवल इतना अंतर है कि यहूदी ऐसी अमानवीय बातों पर न तो अमल करते हैं और न दूसरों को मानने पर मजबूर करते हैं .इन थोड़े से यहूदियों ने हजारों अविष्कार किये है ,जिन से विश्व के सभी लोगों को लाभ हो रहा है .लेकिन दूसरी तरफ इतने मुसलमान हैं ,जो कुरान की इसी शिक्षा का पालन करते हुए विश्व का नाश करने पर तुले हुए है .इसी तरह मुट्ठी बार पारसियों ने देश की उन्नति के लिए जो किया है उसे सब जानते हैं .
अगर  बाइबिल की बुरी बातें छोड़ कर अच्छी बातें कुरान में लिख देता तो विश्व में सचमुच .शान्ति हो गयी होती 
नक़ल के साथ अकल होना भी जरुरी  है 


http://dwindlinginunbelief.blogspot.com/2008/07/things-on-which-bible-and-quran-agree.html




सोमवार, 14 नवंबर 2011

मेराज का असली राज़ !


मेराज अरबी भाषा का शब्द है , वैसे तो इसका अर्थ "Ascension " या आरोहण होता है .लेकिन इस्लामी विद्वान् इसका तात्पर्य "स्वर्गारोहण "करते हैं .इनकी मान्यता है कि मुहम्मद एकही रात में मक्का से यरूशलेम तक की यात्रा कर आये थे और वहां स्थित अक्सा नाम की मस्जिद में नमाज नमाज भी पढ़ कर आये थे,जो एक महान,चमत्कार था .लेकिन सब जानते हैं कि केवल मान्यता के आधार पर ऐतिहासिक सत्य को झुठलाया नहीं जा सकता है .मुहम्मद की इस तथाकथित "मेराज " का असली राज (रहस्य ) क्या है ,यह आपके सामने प्रस्तुत किया जा रहा है .
यह कहावत प्रसिद्ध है कि"झूठ के पैर नहीं होते "इसका तात्पर्य है कि यदि कोई व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए या दूसरों को प्रभावी करने के लिए झूठ बोलता है ,अथवा गप्प मरता है ,तो उसका ऐसा झूठ अधिक समय तक नहीं चलता है .और एक न एक दिन उसके झूठ का भंडा फूट ही जाता है .
मुहम्मद एक गरीब बद्दू परिवार में पैदा हुआ था ,और उसके समय के यहूदी और ईसाई काफी धनवान थे .और मुहम्मद उनकी संपत्ति हथियाना चाहता था .इसलिए सन 610 में मुहम्मद ने खुद को अल्लाह का रसूल घोषित कर दिया ,ताकि वह यहूदी और ईसाई नबियों के बराबरी करके लोगों को अपना अनुयायी बना सके .लेकिन जब लोगों को मुहम्मद की बे सर पैर की बातों पर विश्वास नहीं हुआ तो ,ने एक चल चली .तब तक मुहम्मद की नुबुवत को 12 साल हो चुके थे .मक्का के लोग मुहम्मद को पागल और जादूगर समझते थे ,इसलिए मुहम्मद ने लोगों का मुंह बंद करने के 27 तारीख रजब (इस्लाम का सातवाँ महीना ) सन 621 ई० को एक बात फैला दी ,कि उसने एक दिन में मक्का से यरूशलेम तक की यात्रा कर डाली है .जिसकी दूरी आज के हिसाब से लगभग 755 मील या 1251 कि.मी होती है .मुहम्मद की इस यात्रा को "मेराज معراج" कहा जाता है .मुहम्मद ने लोगों से कहा कि उसने यरूशलेम स्थित यहूदियों और ईसाइयों के पवित्र मंदिर में नमाज भी पढ़ी ,जिसका नाम यह है .
Temple in Jerusalem or Holy Temple (Hebrew: בֵּית־הַמִּקְדָּשׁ, Beit HaMikdash ;बैत हमिकदश 
Al-Aqsa Mosque (Arabic:المسجد الاقصى al-Masjid al-Aqsa, मस्जिदुल अक्सा 
फिर मुहम्मद ने लोगों का विश्वास जीतने के लिए यरूशलेम की तथाकथित मस्जिद और यात्रा का पूरा विवरण लोगों के सामने प्रस्तुत कर दिया .मुहम्मद के इस झूठ को बेनकाब करने के लिए पहले हम इस यात्रा के बारे में कुरान और हदीस से सबूत देखेंगे फिर इतिहास से प्रमाण लेकर सत्यता की परख करते हैं .और निर्णय पाठक स्वयं करेंगे .
1 -मुहम्मद की यरूशलेम यात्रा 
मुहम्मद की मक्का के काबा से यरूशलेम स्थित अक्सा की मस्जिद तक की यात्रा के बारे में कुरान यह कहता है ,
"महिमावान है वह अल्लाह जो अपने रसूल मुहम्मद को "मस्जिदे हराम (काबाكعبه )से(मस्जिदे अक्सा "(यरूशलेम )की मस्जिद तक ले गया .जिस को वहां के वातावरण को बरकत मिली .ताकि हम यहाँ के लोगों को वहां की निशानियाँ दिखाएँ " सूरा -बनी इस्रायेल 17 :1 
2 -मुहम्मद की सवारी क्या थी 
इतनी लम्बी यात्रा को एक दिन रात पूरा करने के लिए मुहम्मद ने जिस वहां का प्रयोग किया था ,उसका नाम "बुर्राकبُرّاق "था .इसके बारे में हदीस में इस प्रकार लिखा है .
"अनस बिन मलिक ने कहा कि रसूल ने कहा था मुझे बैतुल मुक़द्दस की यात्रा के बुर्राक नाम का जानवर दिया गया था ,जो खच्चर (Mule) से छोटी और गधी से कुछ बड़ी थी .और जब मैं बुर्राक पर बैठा तो वह मस्जिद की सीढियां चढ़ गया ,फिर मैंने masjidمسجد  के अन्दर दो रकात नमाज पढ़ी .और जब मैं मस्जिद से बाहर जाने लगा तो जिब्राइल ने मेरे सामने दो कटोरे रख दिए ,एक में शराब थी और दुसरे में दूध था ,मैंने दूध ले लिया .फिर जिब्रील मुझे बुर्राक पर बिठाकर मक्का छोड़ गया ,फिर दौनों जन्नत लौट गए "सही मुस्लिम -किताब 1 हदीस 309 
3-लोगों की शंका और संदेह 
लोगों को मुहम्मद की इस असंभव बात पर विश्वास नहीं हुआ ,और वह मुहम्मद को घेर कर सवाल करने लगे ,तब मुहम्मद ने कहा ,
"जबीर बिन अब्दुल्लाह ने कहा ,कि रसूल ने कहा जब कुरैश के लोगों ने मेरी यरूशलेम कि यात्रा के बारे में संदेह जाहिर किया ,तो मैं काबा के पास एक पत्थर पर खड़ा हो गया .और वहां से कुरैश के लोगों को बैतुल मुक़द्दस का आँखों देखा विवरण सुनाने लगा ,जो मैंने वहां देखा था "
बुखारी -जिल्द 4 किताब 6 हदीस 233 
"इब्ने अब्बास ने कहा जब रसूल से कुरैश के लोगों ने सवाल किया तो रसूल उन सारी जगहों का वर्णन सुनाने लगे जो उन्होंने यरूशलेम स्थित बैतुल मुक़द्दस की यात्रा के समय रास्ते में देखी थीं .फिर रसूल ने सबूत के किये कुरान की सूरा इस्रायेल 17 :60 सुनादी .जिसमे अल्लाह ने उस जक्कूम के पेड़ पर लानत की थी ,जो रसूल को यरूशलेम के रास्ते में मिला था "बुखारी -जिल्द 5 किताब 58 हदीस 228 
इस हदीस में कुरान की जिस आयत को सबूत के तौर पर पेश किया गया है ,वह यह है 
"हे मुहम्मद जब लोगों ने तुम्हें घेर रखा हो ,तो तुम सबूके लिए उन दृश्यों को याद करो ,जो हमने तुम्हें बताये हैं ,और जिनको हमने लोगों की आजमाइश के लिए बना दिया था .तुम तो उस पेड़ को याद करो जिस पर कुरान में लानत की गयी है .हम इसी निशानी से लोगों को डराते है"
सूरा -बनी इस्रायेल 17 :60 
 (इस पेड़ को अरबी में "जक्कूम زقّوم" कहा जाता और हिदी मे"थूहर ,या थूबड़ Cactus कहते हैं अंगरेजी Botany  में इसका नाम "Euphrobia abyssinica " है .यह पेड़ अरब , इस्रायेल और अफरीका में सब जगह मिलता है .मुहम्मद ने कुरान में इसी पेड़ को सबूत के रूप में पेश किया है सूरा -17 :60 )
( नोट -इसी को कहते हैं कि"कुएं का गवाह मेंढक" )
4 -मुहम्मद का सामान्यज्ञान 
लगता है कि मुहम्मद में बुद्धि(GK) नाम की कोई चीज नहीं थी ,क्योंकि जब उस से बैतुल मुक़द्दस के बारे में जानकारी पूछी गयी तो वह बोला ,
"अबू जर ने कहा कि मैंने रसूल से पूछा कि पृथ्वी पर सबसे पहले अल्लाह की कौन सी मस्जिद बनी थी ,रसूल ने कहा "मस्जिदे हराम "यानि मक्का का "काबा "फिर हमने पूछा की दूसरी मस्जिद कौन सी है ,तो रसूल ने कहा "मस्जिदुल अक्सा "यानि यरूशलेम की मस्जिद ,फिर हमने पूछा की इन दौनों मस्जिदों के निर्माण के बीच में कितने सालों का अंतर है ,तो रसूल ने कहा इनके बीच में चालीस सालों का अंतर है "
बुखारी - जिल्द 4 किताब 55 हदीस 585 
अब तक मुहम्मद की यरूशलेम की यात्रा (मेराज Night Journey ) के बारे में कुरान और हदीसों से लिए गए सबूतों का हवाला दिया गया है .अब दुसरे भाग में इतिहास के प्रमाणों के आधार पर मुहम्मद और अल्लाह के दावों की कसौटी करते हैं ,कि इस दावे में कितनी सच्चाई और कितना झूठ 
 है .जिसको भी शंका हो वह विकी पीडिया या दूसरी साईट से जाँच कर सकता है .पाठक कृपया इस लेख को गौर से पढ़ें फिर निष्पक्ष होकर फैसला करें 
5 -बैतुल मुक़द्दस का संक्षिप्त इतिहास 
अबतक दी गयी कुरान की आयतों और हदीसों में मुहम्मद द्वारा यरूशलेम की यात्रा में जिस मस्जिद में नमाज पढ़ने का वर्णन किया गया है ,वह वास्तव में यहूदियों का मंदिर ( Temple ) था .जिसे हिब्रू भाषा में " मिकदिशמקדשׁ "कहा जाता है .इसका अर्थ "परम पवित्र स्थान यानी Sancto Santorum कहते हैं .इसका उल्लेख बाइबिल में मिलता है ( बाइबिल मत्ती -24 :1 -2 ) इस मंदिर को इस्लाम से पूर्व दो बार तोडा गया था ,और इस्लाम के बाद तीसरी बार बनाया गया था .इतिहास में इसे पहला ,दूसरा ,और तीसरा मंदिर के नाम से पुकारते हैं .इसका विवरण इस प्रकार है -
1 - पहले मंदिर का निर्माण और विध्वंस 
पहले मंदिर का निर्माण इस्रायेल के राजा दाऊद(Davidדוד ) के पुत्र राजा सुलेमान (Solomonשלמן ) ने सन 975 ई ० पू में करवाया था .सुलेमान का जन्म सन 1011 ई पू और म्रत्यु सन 931 ई .पू में हुई थी सुलेमान ने अपने राज की चौथी साल में यह भव्य मंदिर बनवाया था ,और इसके निर्माण के लिए सोना ,चन्दन ,और हाथीदांत भारत से मंगवाए थे ( बाइबिल 1 राजा अध्याय 5 से 7 तक I-kings10:22 )
सुलेमान के इस मंदिर को सन 587 BCE में बेबीलोन के राजा "नबूकदनजर (Nebuchadnezzar ) ने ध्वस्त कर दिया था .और यहूदियों को गुलाम बना कर बेबीलोन ले गया था .जाते जाते नबूकदनजर मंदिर के स्थान पर अपने एक देवता की मूर्ति लगवा गया था .और सारा यरूशलेम बर्बाद कर गया था .
(बाइबिल -यिर्मयाह 2 :24 से 20 )
इसके बाद जब सन 538 ई .पू में जब ईरान के सम्राट खुसरू ( cyrus ) ने बेबीलोन को पराजित कर दिया तो उसने यहूदियों को आजाद कर दिया और अपने देश में जाने की अनुमति दे दी थी .लेकिन करीब 419 साल तक यरूशलेम में कोई मंदिर नहीं बन सका .
2 दूसरे मदिर का निर्माण और विध्वंस 
वर्षों के बाद जब सन 19 ई .पू में जब इस्रायेल में हेरोद (Herod ) नामका राजा हुआ तो उसने फिर से मंदिर का निर्माण करवाया ,जो हेरोद के मंदिर के नामसे विख्यात था ,यही मंदिर ईसा मसीह के ज़माने भी मौजूद था .लेकिन जब यहूदियों ने ईसा मसीह को सताया ,तो उन्होंने इस मंदिर के नष्ट होने की भविष्यवाणी कर दी थी ,जो बाइबिल में इस तरह मिलती है, -
."फिर जब यीशु मंदिर से निकलते हुए रास्ते में जा रहे थे तो उनके शिष्यों ने उनको मंदिर की ईमारत की भव्यता दिखाया ,तब यीशु ने कहा कि,मैं तुमसे सच कहता हूँ ,कि एक दिन इस मंदिर के पत्थर पर पत्थर नहीं बचेगा ,और सारा मंदिर ढहाया जायेगा "
बाइबिल नया नियम -मत्ती -24 :1 -2 ,मरकुस -13 :1 -2 ,और लूका -19 :41 से 45 ,और लूका -21 :20 -45 
ईसा मसीह के समय यरूशलेम पर रोमन लोगों का राज्य था ,और यहूदी उसे पसंद नहीं करते थे .इसलिए सन 66 ईसवी में यहूदियों ने विद्रोह कर दिया .और विद्रोह को कुचलने के लिए रोम के सम्राट " (Titus Flavius Caeser Vespasianus Augustus तीतुस फ्लेविअस ,कैसर ,वेस्पनुअस अगस्तुस ) ने सन 70 में यरूशलेम पर हमला कर दिया .और लाखों लोग को क़त्ल कर दिया .फिर तीतुस ने हेरोद के मंदिर में आग लगवा कर मंदिर की जगह को समतल करावा दिया .और मंदिर कोई भी निशानी बाकि नहीं रहने दी .इस तरह ईसा मसीह की भविष्यवाणी सच हो गयी .


कुरान में भी इस घटना के बारे में उल्लेख मिलता है ,जो इस प्रकार है ,


"फिर हमने तुम्हारे विरुद्ध शत्रुओं को खड़ा कर दिया ,ताकि वह तुम्हारा चेहरा बिगाड़ दें ,और बैतुल मुक़द्दस के अन्दर घुस जाएँ ,जैसे वह पहली बार घुसे थे ,और उनको जोभी चीज हाथ में आई थी उस पर कब्ज़ा किया था .और मस्जिद को तबाह करके रख दिया था .
सूरा -बनी इस्रायेल 17 :17 
इस प्रकार इतिहास ,बाइबिल और कुरान से साबित होता है कि सन 70 से मुसलमानों के राज्य तक यरूशलेम में कोई मंदिर या मस्जिद नहीं थे ,बल्कि उस जगह समतल मैदान था .मस्जिद का फिर से निर्माण खलीफाओं ने करवाया था ,जिसका विवरण इस तरह है ,
6 -मंदिर की जगह मस्जिद का निर्माण 
जब सन 638 उमर बिन खत्ताब खलीफा था ,तो उसने यरूशलेम की जियारत की थी .और वहां नमाज पढ़ने के लिए मदिर के मलबे को साफ करवाया था .और उसके सनिकों ने खलीफा के साथ मैदान में नमाज पढ़ी थी .बाद में जब उमैया खानदान में "अमीर अब्दुल मालिक बिन मरवानعبد الملك بن مروان"सन 646 ईस्वी में सुन्नियों का पांचवां खलीफा यरूशलेम आया तो उसने पुराने मंदिर की जगह एक मस्जिद बनवा दी ,जो एक ऊंची सी जगह पर है ,इसी को आज" मस्जिदुल अक्सा " Dom of Rock भी कहा जाता है .क्योंकि इसके ऊपर एक गुम्बद है .अब्दुल मालिक ने इस मस्जिद के निर्माण के किये "बैतुल माल" से पैसा लिया था ,और गुम्बद के ऊपर सोना लगवाने के लिए सोने के सिक्के गलवा दिए थे .आज भी यह मस्जिद इस्रायेल अरब के विवाद का कारण बनी हुई है .और दौनों इस पर अपना दावा कर रहे हैं 
7 -खलीफा ने मस्जिद क्यों बनवाई 
अब्दुल मलिक का विचार था कि अगर वह यरूशलेम में उस जगह पर मस्जिद बनवा देगा ,तो वह यहूदियों और ईसाइयों हमेशा दबा कर रख सकेगा .क्योंकि दौनों ही इस जगह को पवित्र मानते है .लेकिन जब कुछ मुसलमानों ने इसे बेकार का खर्चा बता कर आपत्ति प्रकट की ,तो मलिक ने विरोधियों को शांत करने के लिए यह हदीस सुना दी ,
"अनस बिन मलिक ने कहा कि ,रसूल ने कहा ,यदि कोई घर में ही नमाज पढ़ेगा ,तो उसे एक नमाज का पुण्य मिलेगा ,और अगर वह अपने कबीले के लोगों के साथ नमाज पढ़ेगा तो ,उसे 20 नमाजों का पुण्य मिलेगा .और जुमे में जमात के साथ नमाज पढ़ने से 50 नमाजों का पुण्य मिलेगा .लेकिन यदि जोभी व्यक्ति यरूशलेम की "बैतुल मुक़द्दस " में नमाज पढ़ेगा तो उसे 50 हजार नमाजों का पुण्य मिलेगा "
इब्ने माजा-तिरमिजी -हदीस 247 ,और मलिक मुवत्ता-जिल्द 5 हदीस 17 
इस तरह से अब्दुल मलिक यरूशलेम में मुसलमानों की जनसंख्या बढ़वाना चाहता था ,की मुसलमान पुण्य प्राप्ति के लिए यरूशलेम में रहने लगें .
लेकिन सन 1862 मुसलमान यरूशलेम की मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ सके थे .क्योंकि उसपर ईसाइयों का कब्ज़ा हो गया था .बाद में तुर्की के खलीफा "अब्दुल हमीदعبد الحميد "( 1878 -1909 )ने इंगलैंड के "प्रिंस ऑफ़ वेल्स Prince of Wels ) जो बाद में King Edward V II बना ,उस से अनुमति लेकर मस्जिद की मरम्मत करवाई और मुसलमानों को एक मेहराब के नीचे नमाज पढ़ने की आज्ञा प्राप्त कर ली थी .जो अभी तक चल रही है .
8-विचारणीय प्रश्न 
अब इन सभी तथ्यों और सबूतों को देखने का बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक हैं ,क़ि जब सन 70 से कर यानि हेरोद के मंदिर के ध्वस्त होने से .सन 691 तक यानी अब्दुल मालिक द्वारा मस्जिद बन जाने तक ,यरूशलेम में कोई मंदिर या मस्जिद का कोई नामोनिशान ही नहीं था ,केवल समतल मैदान था ,तो मुहम्मद ने सन 621 में यरूशलेम की अपनी तथाकथित यात्रा में किस मस्जिद में नमाज पढ़ी थी ?और लोगों को कौन सी मस्जिद का आँखों देखा वर्णन किया था ?क्या कुरान की वह आयतें 691 बाद लिखी गयी हैं ,जिन में मुहम्मद की यरूशलेम की मस्जिद में नमाज पढ़ने का जिक्र है .हम कैसे माने कि कुरान में हेराफेरी नहीं हुई ?क्या कोई अपनी मान्यता के आधार पर ऐतिहासिक सत्य को झुठला सकता है ?
आप लोग कृपया लेख दुबारा पढ़िए और फिर फैसला करिए .और बताइए कि ,यदि हम कुरान और हदीसों की पहले वाली बातों को सत्य मान लें ,तो हमें दूसरी हदीसों और इस्लामी इतिहास को झूठा साबित करना होगा .!
बताइये आप कौनसी बात पर विश्वास करेंगे ?


http://www.abrahamic-faith.com/night-journey.html

गुरुवार, 10 नवंबर 2011

सेकुलर आतंकवाद !

सेकुलरिज्म ,सम्प्रदायवाद और आतंकवाद यह सब शब्द लोगों की विचारधारा और उनके सोचने के ढंग से सम्बंधित है .अभी तक सेकुलरिज्म को सम्प्रदायवाद का विपरीत शब्द (opposit ) माना जाता है .लेकिन समय के साथ सेकुलरिज्म शब्द आतंकवाद का पर्यायवाची बनता जा रहा है ..इस बात को और स्पष्ट करने के लिए हमें शब्दों के अर्थ और अभिप्राय को ठीक से समझना जरुरी है ,क्योंकि इनका हमारे अस्तित्व और देश की अखंडता से बड़ा गहरा सम्बन्ध है .यहाँ हम एक एक शब्द के बारे में समझते है -
1 -आतंकवाद
इस विचार के लोग दूसरों पर अपनी बात बलपूर्वक मनवाने में विश्वास रखते है ,चाहे वह धार्मिक विषय हो या राजनीतिक विश्हय हो .यह लोग हमेशा खुद को सही और दूसरों को गल़त मानते हैं ,इनका एकमात्र उद्देश्य देश में अस्थिरता ,और भय का वातावरण बनाये रखना है .ताकि देश की एकता खंडित हो जाये .इस समय देश में नक्सली जैसे और कई आतंकी संगठन कार्यरत है .जो निर्दोष लोगों की हत्या को अपना धर्म समझते. लेकिन कुछ ऐसे आतंकी गिरोह है जिनके आका देश के बाहर हैं ,और उनके गुर्गे यहाँ आतंकी कार्य करते रहते हैं लेकिन सब की कार्यविधि और लक्ष्य एक ही है ,भारत को नुकसान पहुचना ,और दहशत फैलाना .ऐसे लोग अपने कुत्सित इरादों की पूर्ति के लिए निर्दोषों को बम से उड़ने में नहीं झिझकते है ,
हमारा कर्तव्य है ऐसे लोगों पर नजर रखे और इनकी जानकारी सम्बंधित अधिकारीयों को जरुर दे दें
2-सम्प्रदायवाद
भारत में अनेकों धर्म ,संप्रदाय और मत पैदा हुए हैं जो मिलजुल कर रहते आये हैं सविधान के अनुसार सबको अपने धर्म का पालन करने और उसका प्रचार करने का अधिकार है .लेकिन किसी को छल से या जबरन अपना विचार थोपने कोई अधिकार नहीं है .चाहे वह धार्मिक विचार क्यों न हो .ऐसा करने से ही सम्प्रदायवाद का जन्म होता है .चाहे कितनी भी अच्छी बात हो वह किसी को बलपूर्वक मनवाना उचित नहीं है
कुछ लोग सिर्फ इस्लाम को सम्प्रदायवाद से जोड़कर देखते है ,तो उन्हें समझना चाहिए ईसाई और दुसरे लोग भी उन से कम नहीं हैं .खुसी की बात यह है कि कुछ इस्लामी देशों में भी ऐसे अनेकों प्रगतिशील सुधारवादी संगठन बन गए हैं जो रुढ़िवादी ,आतंकी विचारों का विरोध करते है ,निश्चय ही यह शुभ संकेत है .
3-सेकुलरिज्म या धर्मसमभाव
सेकुलरिज्म विदेश से आयातित शब्द है . कानूनी तौर से इसका अर्थ "धर्मनिरपेक्षता " रख दिया है ,जो पूरी तरह से भ्रामक आशयविहीन लगता है . भारत की किसी भी भाषा के साहित्य को खोज कर देखिये यह शब्द कहीं नहीं मिलेगा .आपको प्राचीन पुस्तकों में केवल धार्मिक और अधर्मी शब्द ही मिलेंगे .फिर भी कुछ लोगों ने " सेकुलरिज्म ' के यह अर्थ किये है ,जैसे "सर्वधर्मसमभाव " पंथ निरपेक्षता " आदि ,
यदि सेकुलरिज्म का आशय सभी धर्मों ,पंथों ,और मतों का सामान रूप से सम्मान और आदर करना है ,तो भारत का हरेक हिन्दू , सिख ,जैन ,और बौद्ध स्वाभाविक रूप से सेकुलर है . आज भी हिन्दू दरगाहों ,मजारों , पर जाते हैं और गुरद्वारों ,बुद्ध ,जैन मंदिर में जाते ,सबी एक दूसरों के त्योहारों में शामिल होते है ,फिर कानून बना कर लोगों को सेकुलर बनाने की जरुरत क्यों पड़ गई .
बताइये क्या तोते (PArrot ) पर हरा रंग पोतने की जरुरत होती है ?
निश्चय ही यह एक राजनीतिक षडयंत्र है .यदि जरुरत होती तो संविधान के निर्माता डा ० बाबा साहेब अम्बेडकर संविधान में सेकुलर शब्द पहले ही लिख देते . इसके लिए हमें कांगरेसी सेकुलरिज्म को समझना होगा .
4 -कांग्रेसी सेकुलरिज्म
वास्तव में सरकारी सेकुलरिज्म का तात्पर्य " तुष्टिकरण " है in fact, official secularism means "appeasement"
यह बात किसी से भी छुपी नहीं है कि कान्ग्रेसिओं दिल में हिन्दू विरोधी मानसिकता कूट कूट कर भरी हुई है ,जिसे यह यदाकदा प्रकट भी कर देते है , दिग्विजय सिंह इसका एक उदहारण है . इसी सेकुलरिज्म का सिद्धांत है ,एक समुदाय को खुश करने के लिए हिन्दुओं को जितना बदनाम ,प्रताड़ित करोगे उस समुदाय के उतने ही वोट अधिक मिलेंगे .क्योंकि यह घाघ नेता जानते हैं कि अल्प संख्यक लोग थोक में वोट देते है .यह सरकारी सेकुलर जानते हैं कि अगर सत्ता पर कोई खतरा है ,तो वह हिन्दुओं की एकता से है ,इसलिए किसी न किसी तरह से हिन्दू एकता को भंग किया जाये ,जब भी हिन्दू एक होने लगें उनको कोई न कोई आरोप लगा कर अन्दर कर दिया जाये .आज इन सेकुलरों में हिन्दुओं को गलियां देने की होड़ सी लग रही है .और जो हिन्दू संस्थाओं ,संतों को जितनी अधिक गलियाँ वह उतना बड़ा सेकुलर माना जायेगा
5-सेकुलर आतंकवाद
आप देख चुके हैं ,कि जैसे हर प्रकार का आतंकवाद ,और सम्प्रदायवाद का मुख्य उद्देश्य देश में अस्थिरता और अव्यवस्था फैलाना है .आज यही काम सोनिया जी की सरकार करने वाली है.अपनी इसी इच्छा को पूरी करने के लिए सोनिया ने अपनी सलाहकार मंडली में चुन चुन कर ऐसे सेकुलरों को शामिल किया है ,को हिन्दू विरोध के लिए कुख्यात हैं ,इनने हर्ष मंदर ,तीस्ता सीतलवाड ,सय्यद शहाबुद्दीन ,शबनम हाशिमी जी लोग शामिल है .फिर इन्ही जैसे लोगो की सलाह से सेकुलर देवी सोनिया जी ने 2011में एक " सांप्रदायिक लक्षित हिंसा विरोधी अधिनियम ' सरकार की बिना सहमति के पेश कर दिया .सब जानते हैं कि सोनिया कट्टर कैथोलिक ईसाई है ,और पोप की पक्की अनुयायी है .इन्ही पोपों ने protastant ईसाइयों सिर्फ इस बात पर जिन्दा जलवा दिया था क्योंकि वह बाइबिल की उस व्याख्या से सहमत नहीं थे ,जो तत्कालीन पोप करते थे ,पोपों का यह दमन चक्र सदियों चलता रहा था .अब सोनिया अपने पापं की यही निति भारत में लागु करना चाहती है .
यदि यह अधिनियम पारित हो गया तो हिन्दुओं के लिए सिर्फ यही विकल्प होंगे ,ईसाई या मुसलमान बन जाएँ ,देश से पलायन कर जाएँ या फिर जेलों में चक्की पीसें ,केवल पांच साल में हिन्दू विलुप्त प्रजाति बन जायेंगे ,क्योकि इस अधिनियम यही प्रावधान दिए गए हैं .इस विधेयक में कुल 9 अध्याय और 138 धाराएँ हैं ,जिनमे कुछ IPCC और CRPC से ली गयी हैं .यह भारत का पहला अधिनियम है जो नागरिकों को जाती के आधार पर सजा देने की वकालत करता है .और्यः मन कर चलता है कि हिन्दू स्वभाव से आक्रामक और हिंसक होते हैं और हिन्दू ही सबसे पहले दंगे करवाते हैं , साफ है कि सोनिया इस विधेयक के सहारे अपने (कु ) सुपुत्र और फिर उसकी संतानों को हमेशा के लिए भारत पर राज करने का रास्ता बना रही है .
.दिग्विजय सिंह कई बार यह बात उगल चुके है ,इसी लिए उनके निशाने पर हिन्दू संत और संगठन बने रहते हैं .बहुत से लोगों को इस अधिनियम का पूरा ज्ञान नहीं होगा ,इसलिए इसके कुछ चुने हुए बिंदु प्रस्तुत किये जा रहे है ,ताकि अभी से सावधान हो जाएँ और अपना भविष्य इस सेकुलर आतंकवाद से बचा सकें .इस अधिनियम के प्रावधान देखिये .-
1.दंगे के समय बिना किसी जांच पड़ताल के किसी भी हिन्दू को गिरफ्तार किया जा सकता .
2 -हिन्दू तब तक अपराधी माना जाएगा ,जब तक वह खुद को निर्दोष सिद्ध नहीं कर देता .
3 -यदि किसी हिन्दू संगठन के किसी कार्यकर्ता के विरुद्ध कोई अल्पसंख्यक शिकायत करता है ,तो वह पूरा संगठन दोषी माना जाएगा
4-.यदि किसी प्रांत की विरोधी दल की सरकारकी पुलस संप्रदायी दंगे रोकने के हिन्दुओं को गिरफ्तार करने में असफल होती है ,तो उस सरकार को बरखास्त किया जा सकता है .
5 -भारत के बंगलादेशी घुसपैठियों को निकालने की मांग करना ,और जबरन धर्म परिवर्तन करने का विरोध करना भी अपराध होगा .
6 -यदि किसी हिन्दू का मकान या दुकान किराये के लिए उपलब्ध हो ,और वह किसी अल्पसंख्यक को किराये पर देने से इंकार करे ,तो वह हिन्दू स्वामी अपराधी माना जाएगा .
7-यदि कोई अल्पसंख्यक किसी हिन्दू की खाली जमीन पर कब्र ,दरगाह या मस्जिद बना दे तो उस भूमि को खाली नहीं कराया जा सकता ,और विरोध करने पर हिन्दू भूमिस्वामी को सजा दी जा सकती है .
8 -दंगे के दौरान मारे गए हिन्दू के आश्रितों को मुआवजा नहीं दिया जायेगा .
9 -यदि कोई अल्पसंखक किसी हिन्दू लड़की को प्रेमजाल में फंसा ले ,और लड़की के माँ बाप से शादी करने को कहे ,और लड़की के माता पिता ऐसी शादी से मना करें ,तो वह दण्डित होंगे ,चाहे लड़की अवयस्क क्यों न हो.
10-जिन संस्थाओं और संगठनों के नाम में हिन्दू शब्द होगा उनकी मान्यता निरस्त हो जाएगी .
11 -आतंकवादिओं के विरुद्ध आवाज उठाना ,और उनको सजा देने की मांग करना ,एक समुदाय को पीड़ा देने वाला कृत्य मना जायेगा .और ऐसा करने वालों को सजा दी जाएगी .
बताइए यह सेकुलर आतंकवाद नही है तो और क्या है ?.एक तरफ हमारे प्रधान मंत्री पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को "शांति पुरुष " कहके उसका सम्मान करते है ,और परोक्ष रूप से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर चुप रहते हैं ,इसे हम क्या कहेंगे ? क्या यही सेकुलरिज्म है ? आप विचार करिये कि एक तरफ वह आतंकवादी हैं जो बिना किसी धर्म और जाति का भेद करके सौ पचास लोगों को अपना निशाना बनाते हैं ,और दूसरी तरफ यह सेकुलर हैं जो चुन कर सिर्फ सभी हिन्दुओं पूरे समूह को समाप्त करने की तय्यारी कर रहे हैं .बताइए ,
हम इन सेकुलरों को सबसे बड़ा आतंकवादी क्यों नहीं मानें ?
(नोट -यह लेख प्रसिद्ध लेखक और आलोचक श्री वीरेन्द्र सिंह परिहार के लेख से प्रेरित है ,जो 8 नव 2011 को दैनिक जागरण पेपर में प्रकाशित हुआ था )


बुधवार, 9 नवंबर 2011

इस्लाम का भविष्य क्या होगा ?

मुसलमान अक्सर अपनी बढ़ती जनसंख्या की डींगें मारते रहते है .और घमंड से कहते हैं कि आज तो हमारे 53 देश हैं .आगे चलकर इनकी संख्या और बढ़ेगी .इस्लाम दुनिया भर में फ़ैल जायेगा .विश्व ने जितने भी धर्म स्थापक हुए हैं ,सभी ने अपने मत के बढ़ने की कामना की है .लेकिन मुहम्मद एकमात्र व्यक्ति था जिसने इस्लाम के विभाजन ,तुकडे हो जाने और सिमट जाने की पहिले से ही भविष्यवाणी कर दी थी .यह बात सभी प्रमाणिक हदीसों में मौजूद है .

यदि कोई इन हदीसों को झूठ कहता है ,तो उसे मुहम्मद को झूठ साबित करना पड़ेगा .क्योंकि यह इस्लाम के भविष्य के बारे में है .सभी जानते हैं कि किसी आदर्श ,या नैतिकता के आधार पर नहीं बल्कि तलवार के जोर पर और आतंक से फैला है .इस्लाम कि बुनियाद खून से भरी है .और कमजोर है .मुहम्मद यह जानता था .कुरान में साफ लिखा है -

1-इस्लाम की बुनियाद कमजोर है
"कुछ ऐसे मुसलमान हैं ,जिन्होंने मस्जिदें इस लिए बनायीं है ,कि लोगों को नुकसान पहुंचाएं ,और मस्जिदों को कुफ्र करने वालों के लिए घात लगाने और छुपाने का स्थान बनाएं .यह ऐसे लोग हैं ,जिन्होंने अपनी ईमारत (इस्लाम )की बुनियाद किसी खाई के खोखले कगार पर बनायीं है ,जो जल्द ही गिरने के करीब है .फिर जल्द ही यह लोग जहन्नम की आग में गिर जायेंगे "सूरा -अत तौबा 9 :108 और 109

2 -इस्लाम से पहिले विश्व में शांति थी .यद्यपि इस्लाम से पूर्व भी अरब आपस में मारकाट किया करते थे ,लेकिन जब वह मुसलमान बन गए तो और भी हिंसक और उग्र बन गए .जैसे जैसे उनकी संख्या बढ़ती गयी उनका आपसी मनमुटाव और विवाद भी बढ़ाते गए .वे सिर्फ जिहाद में मिलने वाले माल के लिए एकजुट हो जाते थे .फिर किसी न किसी बात पर फिर लड़ने लगते थे ,शिया सुनी विवाद इसका प्रमाण है .
इसके बारे में मुहमद के दामाद हजरत अली ने अपने एक पत्र में मुआविया को जो लिखा है उसका अरबी के साथ हिंदी और अंगरेजी अनुवाद दिया जा रहा है -

3 -हजरत अली का मुआविया को पत्र
हजरत अली का यह पत्र संख्या 64 है उनकी किताब" नहजुल बलाग "में मौजूद है .
http://www.imamalinet.net/EN/nahj/nahj.htm

"यह बात बिलकुल सत्य है कि,इस्लाम से पहिले हम सब एक थे .और अरब में सबके साथ मिल कर शांति से रह रहे थे .तुमने (मुआविया )महसूस किया होगा कि ,जैसे ही इस्लाम का उदय हुआ ,लोगों में फूट और मनमुटाव बढ़ाते गए .इसका कारण यह है ,कि एक तरफ हम लोगों को शांति का सन्देश देते रहे ,और दूसरी तरफ तुम मुनाफिक(Hypocryt )ही बने रहे ,और इस्लाम के नाम पर पाखंड और मनमर्जी चलाते रहे.तुमने अपने पत्र में मुझे तल्हा और जुबैर की हत्या का आरोपी कहा है .मुझे उस पर कोई सफ़ाई देने की जरुरत नहीं है .लेकिन तुमने आयशा के साथ मिलकर मुझे मदीना से कूफा और बसरा जाने पर विवश कर दिया ,तुमने जो भी आरोप लगाये हैं ,निराधार है ,और मैं किसी से भी माफ़ी नहीं मांगूंगा "
मुआविया के पत्र का हजरत अली का मुआविया को जवाब -नहजुल बलाग -पत्र संख्या 64

ومن كتاب له عليه السلام
كتبه إلى معاوية، جواباً عن كتاب منه
أَمَّا بَعْدُ، فَإِنَّا كُنَّا نَحْنُ وَأَنْتُمْ عَلَى مَا ذَكَرْتَ مِنَ الاَُْلْفَةِ وَالْجَمَاعَةِ، فَفَرَّقَ بيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ أَمْسِ أَنَّا آمَنَّا وَكَفَرْتُمْ، وَالْيَوْمَ أَنَّا اسْتَقَمْنَا وَفُتِنْتُمْ، وَمَا أَسْلَمَ مُسْلِمُكُمْ إِلاَّ كَرْهاً وَبَعْدَ أَنْ كَانَ أَنْفُ الاِِْسْلاَمِكُلُّهُ لِرَسُولِ اللهِ صلى الله عليه وآله حرباً
وَذَكَرْتَ أَنِّي قَتَلْتُ طَلْحَةَ وَالزُّبَيْرَ، وَشَرَّدْتُ بِعَائِشَةَ وَنَزَلْتُ بَيْنَ الْمِصْرَيْنِ وَذلِكَ أَمْرٌ غِبْتَ عَنْهُ، فَلاَ عَلَيْكَ، وَلاَ الْعُذْرُ فِيهِ إِلَيْكَ

[ A reply to Mu'awiya's letter. ]
It is correct as you say that in pre-Islamic days we were united and at peace with each other. But have you realized that dissensions and disunity between us started with the dawn of Islam. The reason was that we accepted and preached Islam and you remained heathen. The condition now is that we are faithful and staunch followers of Islam and you have revolted against it. Even your original acceptance was not sincere, it was simple hypocrisy. When you saw that all the big people of Arabia had embraced Islam and had gathered under the banner of the Holy Prophet (s) you also walked in (after the Fall of Makkah.)
In your letter you have falsely accused me of killing Talha and Zubayr, driving Ummul Mu'minin Aisha from her home at Madina and choosing Kufa and Basra as my residence. Even if all that you say against me is correct you have nothing to do with them, you are not harmed by these incidents and I have not to apologize to you for any of them.
4 -इस्लाम का विभाजन

इस्लाम के पूर्व से ही अरब के लोग दूसरों को लूटने और आपसी शत्रुता के कारण लड़ते रहते थे .लेकिन मुसलमान बन जाने पर उनको लड़ने और हत्याएं करने के लिए धार्मिक आधार मिल गया .वह अक्सर अपने विरोधियों को मुशरिक ,मुनाफिक और काफ़िर तक कहने लगे और खुद को सच्चा मुसलमान बताने लगे .और अपने हरेक कुकर्मों को कुरान की किसी भी आयत या किसी भी हदीस का हवाला देकर जायज बताने लगे .धीमे धीमे सत्ता का विवाद धार्मिक रूप धारण करता गया .मुहम्मद की मौत के बाद ही यह विवाद इतना उग्र हो गया की मुसलमानों ने ही मुहम्मद के दामाद अली ,और उनके पुत्र हसन हुसैन को परिवार सहित क़त्ल कर दिया .उसके बाद ही इस्लाम के टुकडे होना शुरू हो गए .जिसके बारे में खुद मुहम्मद ने भविष्यवाणी की थी .-
"अबू हुरैरा ने कहा कि,रसूल ने कहा था कि यहूदी और ईसाई तो 72 फिरकों में बँट जायेंगे ,लेकिन मेरी उम्मत 73 फिरकों में बँट जाएगी ,और सब आपस में युद्ध करेंगे "अबू दाऊद-जिल्द 3 किताब 40 हदीस 4579
"अबू अमीर हौजानी ने कहा कि ,रसूल ने मुआविया बिन अबू सुफ़यान के सामने कहा कि ,अहले किताब (यहूदी ,ईसाई ) के 72 फिरके हो जायेंगे ,और मेरी उम्मत के 73 फिरके हो जायेंगे ..और उन में से 72 फिरके बर्बाद हो जायेंगे और जहन्नम में चले जायेंगे .सिर्फ एक ही फिरका बाकी रहेगा ,जो जन्नत में जायेगा "अबू दाऊद -जिल्द 3 किताब 40 हदीस 4580 .
"अबू हुरैरा ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि ,ईमान के 72 से अधिक टुकडे हो जायेंगे ,और मुसलमानों में ऐसी फूट पड़ जाएगी कि वे एक दुसरे कीहत्याएं करेंगे ."
अबू दाऊद -जिल्द 3 किताब 40 हदीस 4744 .
"अरफजः ने कहा कि मैं ने रसूल से सुना है ,कि इस्लाम में इतना बिगाड़ हो जायेगा कि ,मुसलमान एक दुसरे के दुश्मन बन जायेंगे ,और तलवार लेकर एक दुसरे को क़त्ल करेंगे "अबू दाऊद -जिल्द 3 किताब 40 हदीस 4153 .
"सईदुल खुदरी और अनस बिन मालिक ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि ,पाहिले तो मुसलमान इकट्ठे हो जायेंगे ,लेकिन जल्द ही उनमें फूट पड़ जाएगी .जो इतनी उग्र हो जाएगी कि वे जानवरों से बदतर बन जायेगे .फिर केवल वही कौम सुख से जिन्दा रह सकेगी जो इनको इन को ( नकली मुसलमानों )को क़त्ल कर देगी .फिर अनस ने रसूल से उस कौम की निशानी पूछी जो कामयाब होगी .तो रसुलने बताया कि,उस कौम के लोगों के सर मुंडे हुए होंगे .और वे पूरब से आयेंगे "अबू दाऊद-जिल्द 3 किताब 40 हदीस 4747 .
5 -इस्लाम के प्रमुख फिरके

आमतौर पर लोग मुसलमानों के दो ही फिरकों शिया और सुन्नी के बारे में ही सुनते रहते है ,लेकिन इनमे भी कई फिरके है .इसके आलावा कुछ ऐसे भी फिरके है ,जो इन दौनों से अलग है .इन सभी के विचारों और मान्यताओं में इतना विरोध है की यह एक दूसरे को काफ़िर तक कह देते हैं .और इनकी मस्जिदें जला देते है .और लोगों को क़त्ल कर देते है .शिया लोग तो मुहर्रम के समय सुन्नियों के खलीफाओं ,सहबियों ,और मुहम्मद की पत्नियों आयशा और हफ्शा को खुले आम गलियां देते है .इसे तबर्रा कहा जाता है .इसके बारे में अलग से बताया जायेगा .
सुन्नियों के फिरके -हनफी ,शाफई,मलिकी ,हम्बली ,सूफी ,वहाबी ,देवबंदी ,बरेलवी ,सलफी,अहले हदीस .आदि -
शियाओं के फिरके -इशना अशरी ,जाफरी ,जैदी ,इस्माइली ,बोहरा ,दाऊदी ,खोजा ,द्रुज आदि
अन्य फिरके -अहमदिया ,कादियानी ,खारजी ,कुर्द ,और बहाई अदि
इन सब में इतना अंतर है की ,यह एक दुसरे की मस्जिदों में नमाज नहीं पढ़ते .और एक दुसरे की हदीसों को मानते है .सबके नमाज पढ़ने का तरीका ,अजान ,सब अलग है .इनमे एकता असंभव है .संख्या कम होने के से यह शांत रहते हैं ,लेकिन इन्हें जब भी मौका मिलाता है यह उत्पात जरुर करते हैं .
6 -इस्लाम अपने बिल में घुस जायेगा

मुहम्मद ने खुद ही इस्लाम की तुलना एक विषैले नाग से की है .इसमे कोई दो राय नहीं है .सब जानते हैं कि यह इस्लामी जहरीला नाग कितने देशों को डस चुका है .और भारत कि तरफ भी अपना फन फैलाकर फुसकार रहा है .लेकिन हम हिन्दू इतने मुर्ख हैं कि सेकुलरिज्म ,के नामपर ,और झूठे भाईचारे के बहाने इस इस्लामी नाग को दूध पिला रहे हैं .और तुष्टिकरण की नीतियों को अपना कर आराम से सो रहे है .आज इस बात की जरुरत है की ,हम सब मिल कर मुहम्मद की इस भविष्यवाणी को सच्चा साबित करदें ,जो उसने इन हदीसों में की थीं .-
"अबू हुरैरा ने कहा की ,रसूल ने कहा कि,निश्चय ही एक दिन इस्लाम सारे विश्व से निकल कर कर मदीना में में सिमट जायेगा .जैसे एक सांप घूमफिर कर वापिस अपने बिल में घुस जाता है 'बुखारी -जिल्द 3 किताब 30 हदीस 100 .
"अब्दुल्ला बिन अम्र बिन यासर ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि ,जल्द ही एक ऐसा समत आयेगा कि जब लोग कुरान तो पढेंगे ,लेकिन कुरान उनके गले से आगे कंधे से निचे नहीं उतरेगी.और इस्लाम का कहीं कोई निशान नहीं दिखाई देगा "
बुखारी -जिल्द 9 किताब 84 हदीस 65
"अबू हुरैरा ने कहा कि ,रसूल ने कहा है कि ,इस्लाम सिर्फ दो मस्जिदों (मक्का और मदीना )के बीच इस तरह से रेंगता रहेगा जैसे कोई सांप इधर उधर दो बिलों के बीच में रेंगता है "
सही मुस्लिम -किताब 1 हदीस 270 .
"इब्ने उमर ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि ऐसा निकट भविष्य में होना निश्चय है ,कि इस्लाम और ईमान दुनिया से निकलकर वापस मदीने में इस तरह से घुस जायेगा ,जैसे कोई विषैला सांप मुड़कर अपने ही बिल में घुस जाता है "
सही मुस्लिम -किताब 1 हदीस 271 और 272 .
अब हम देखते हैं कि मुसलमान इन हदीसों को झूठ कैसे साबित करते है . आज लीबिया ,यमन और दूसरे इस्लामी देशों में जो कुछ हो रहा है ,उसे देखते हुए यही प्रतीत होता है कि मुहम्मद साहिब की यह हदीसें एक दिन सच हो जायेगीं ,जिनमे इस्लाम के पतन और विखंडन की भविष्यवाणी की गयी है .!


http://www.faithfreedom.org/oped/AbulKasen50920.htm