सोमवार, 14 नवंबर 2011

मेराज का असली राज़ !


मेराज अरबी भाषा का शब्द है , वैसे तो इसका अर्थ "Ascension " या आरोहण होता है .लेकिन इस्लामी विद्वान् इसका तात्पर्य "स्वर्गारोहण "करते हैं .इनकी मान्यता है कि मुहम्मद एकही रात में मक्का से यरूशलेम तक की यात्रा कर आये थे और वहां स्थित अक्सा नाम की मस्जिद में नमाज नमाज भी पढ़ कर आये थे,जो एक महान,चमत्कार था .लेकिन सब जानते हैं कि केवल मान्यता के आधार पर ऐतिहासिक सत्य को झुठलाया नहीं जा सकता है .मुहम्मद की इस तथाकथित "मेराज " का असली राज (रहस्य ) क्या है ,यह आपके सामने प्रस्तुत किया जा रहा है .
यह कहावत प्रसिद्ध है कि"झूठ के पैर नहीं होते "इसका तात्पर्य है कि यदि कोई व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए या दूसरों को प्रभावी करने के लिए झूठ बोलता है ,अथवा गप्प मरता है ,तो उसका ऐसा झूठ अधिक समय तक नहीं चलता है .और एक न एक दिन उसके झूठ का भंडा फूट ही जाता है .
मुहम्मद एक गरीब बद्दू परिवार में पैदा हुआ था ,और उसके समय के यहूदी और ईसाई काफी धनवान थे .और मुहम्मद उनकी संपत्ति हथियाना चाहता था .इसलिए सन 610 में मुहम्मद ने खुद को अल्लाह का रसूल घोषित कर दिया ,ताकि वह यहूदी और ईसाई नबियों के बराबरी करके लोगों को अपना अनुयायी बना सके .लेकिन जब लोगों को मुहम्मद की बे सर पैर की बातों पर विश्वास नहीं हुआ तो ,ने एक चल चली .तब तक मुहम्मद की नुबुवत को 12 साल हो चुके थे .मक्का के लोग मुहम्मद को पागल और जादूगर समझते थे ,इसलिए मुहम्मद ने लोगों का मुंह बंद करने के 27 तारीख रजब (इस्लाम का सातवाँ महीना ) सन 621 ई० को एक बात फैला दी ,कि उसने एक दिन में मक्का से यरूशलेम तक की यात्रा कर डाली है .जिसकी दूरी आज के हिसाब से लगभग 755 मील या 1251 कि.मी होती है .मुहम्मद की इस यात्रा को "मेराज معراج" कहा जाता है .मुहम्मद ने लोगों से कहा कि उसने यरूशलेम स्थित यहूदियों और ईसाइयों के पवित्र मंदिर में नमाज भी पढ़ी ,जिसका नाम यह है .
Temple in Jerusalem or Holy Temple (Hebrew: בֵּית־הַמִּקְדָּשׁ, Beit HaMikdash ;बैत हमिकदश 
Al-Aqsa Mosque (Arabic:المسجد الاقصى al-Masjid al-Aqsa, मस्जिदुल अक्सा 
फिर मुहम्मद ने लोगों का विश्वास जीतने के लिए यरूशलेम की तथाकथित मस्जिद और यात्रा का पूरा विवरण लोगों के सामने प्रस्तुत कर दिया .मुहम्मद के इस झूठ को बेनकाब करने के लिए पहले हम इस यात्रा के बारे में कुरान और हदीस से सबूत देखेंगे फिर इतिहास से प्रमाण लेकर सत्यता की परख करते हैं .और निर्णय पाठक स्वयं करेंगे .
1 -मुहम्मद की यरूशलेम यात्रा 
मुहम्मद की मक्का के काबा से यरूशलेम स्थित अक्सा की मस्जिद तक की यात्रा के बारे में कुरान यह कहता है ,
"महिमावान है वह अल्लाह जो अपने रसूल मुहम्मद को "मस्जिदे हराम (काबाكعبه )से(मस्जिदे अक्सा "(यरूशलेम )की मस्जिद तक ले गया .जिस को वहां के वातावरण को बरकत मिली .ताकि हम यहाँ के लोगों को वहां की निशानियाँ दिखाएँ " सूरा -बनी इस्रायेल 17 :1 
2 -मुहम्मद की सवारी क्या थी 
इतनी लम्बी यात्रा को एक दिन रात पूरा करने के लिए मुहम्मद ने जिस वहां का प्रयोग किया था ,उसका नाम "बुर्राकبُرّاق "था .इसके बारे में हदीस में इस प्रकार लिखा है .
"अनस बिन मलिक ने कहा कि रसूल ने कहा था मुझे बैतुल मुक़द्दस की यात्रा के बुर्राक नाम का जानवर दिया गया था ,जो खच्चर (Mule) से छोटी और गधी से कुछ बड़ी थी .और जब मैं बुर्राक पर बैठा तो वह मस्जिद की सीढियां चढ़ गया ,फिर मैंने masjidمسجد  के अन्दर दो रकात नमाज पढ़ी .और जब मैं मस्जिद से बाहर जाने लगा तो जिब्राइल ने मेरे सामने दो कटोरे रख दिए ,एक में शराब थी और दुसरे में दूध था ,मैंने दूध ले लिया .फिर जिब्रील मुझे बुर्राक पर बिठाकर मक्का छोड़ गया ,फिर दौनों जन्नत लौट गए "सही मुस्लिम -किताब 1 हदीस 309 
3-लोगों की शंका और संदेह 
लोगों को मुहम्मद की इस असंभव बात पर विश्वास नहीं हुआ ,और वह मुहम्मद को घेर कर सवाल करने लगे ,तब मुहम्मद ने कहा ,
"जबीर बिन अब्दुल्लाह ने कहा ,कि रसूल ने कहा जब कुरैश के लोगों ने मेरी यरूशलेम कि यात्रा के बारे में संदेह जाहिर किया ,तो मैं काबा के पास एक पत्थर पर खड़ा हो गया .और वहां से कुरैश के लोगों को बैतुल मुक़द्दस का आँखों देखा विवरण सुनाने लगा ,जो मैंने वहां देखा था "
बुखारी -जिल्द 4 किताब 6 हदीस 233 
"इब्ने अब्बास ने कहा जब रसूल से कुरैश के लोगों ने सवाल किया तो रसूल उन सारी जगहों का वर्णन सुनाने लगे जो उन्होंने यरूशलेम स्थित बैतुल मुक़द्दस की यात्रा के समय रास्ते में देखी थीं .फिर रसूल ने सबूत के किये कुरान की सूरा इस्रायेल 17 :60 सुनादी .जिसमे अल्लाह ने उस जक्कूम के पेड़ पर लानत की थी ,जो रसूल को यरूशलेम के रास्ते में मिला था "बुखारी -जिल्द 5 किताब 58 हदीस 228 
इस हदीस में कुरान की जिस आयत को सबूत के तौर पर पेश किया गया है ,वह यह है 
"हे मुहम्मद जब लोगों ने तुम्हें घेर रखा हो ,तो तुम सबूके लिए उन दृश्यों को याद करो ,जो हमने तुम्हें बताये हैं ,और जिनको हमने लोगों की आजमाइश के लिए बना दिया था .तुम तो उस पेड़ को याद करो जिस पर कुरान में लानत की गयी है .हम इसी निशानी से लोगों को डराते है"
सूरा -बनी इस्रायेल 17 :60 
 (इस पेड़ को अरबी में "जक्कूम زقّوم" कहा जाता और हिदी मे"थूहर ,या थूबड़ Cactus कहते हैं अंगरेजी Botany  में इसका नाम "Euphrobia abyssinica " है .यह पेड़ अरब , इस्रायेल और अफरीका में सब जगह मिलता है .मुहम्मद ने कुरान में इसी पेड़ को सबूत के रूप में पेश किया है सूरा -17 :60 )
( नोट -इसी को कहते हैं कि"कुएं का गवाह मेंढक" )
4 -मुहम्मद का सामान्यज्ञान 
लगता है कि मुहम्मद में बुद्धि(GK) नाम की कोई चीज नहीं थी ,क्योंकि जब उस से बैतुल मुक़द्दस के बारे में जानकारी पूछी गयी तो वह बोला ,
"अबू जर ने कहा कि मैंने रसूल से पूछा कि पृथ्वी पर सबसे पहले अल्लाह की कौन सी मस्जिद बनी थी ,रसूल ने कहा "मस्जिदे हराम "यानि मक्का का "काबा "फिर हमने पूछा की दूसरी मस्जिद कौन सी है ,तो रसूल ने कहा "मस्जिदुल अक्सा "यानि यरूशलेम की मस्जिद ,फिर हमने पूछा की इन दौनों मस्जिदों के निर्माण के बीच में कितने सालों का अंतर है ,तो रसूल ने कहा इनके बीच में चालीस सालों का अंतर है "
बुखारी - जिल्द 4 किताब 55 हदीस 585 
अब तक मुहम्मद की यरूशलेम की यात्रा (मेराज Night Journey ) के बारे में कुरान और हदीसों से लिए गए सबूतों का हवाला दिया गया है .अब दुसरे भाग में इतिहास के प्रमाणों के आधार पर मुहम्मद और अल्लाह के दावों की कसौटी करते हैं ,कि इस दावे में कितनी सच्चाई और कितना झूठ 
 है .जिसको भी शंका हो वह विकी पीडिया या दूसरी साईट से जाँच कर सकता है .पाठक कृपया इस लेख को गौर से पढ़ें फिर निष्पक्ष होकर फैसला करें 
5 -बैतुल मुक़द्दस का संक्षिप्त इतिहास 
अबतक दी गयी कुरान की आयतों और हदीसों में मुहम्मद द्वारा यरूशलेम की यात्रा में जिस मस्जिद में नमाज पढ़ने का वर्णन किया गया है ,वह वास्तव में यहूदियों का मंदिर ( Temple ) था .जिसे हिब्रू भाषा में " मिकदिशמקדשׁ "कहा जाता है .इसका अर्थ "परम पवित्र स्थान यानी Sancto Santorum कहते हैं .इसका उल्लेख बाइबिल में मिलता है ( बाइबिल मत्ती -24 :1 -2 ) इस मंदिर को इस्लाम से पूर्व दो बार तोडा गया था ,और इस्लाम के बाद तीसरी बार बनाया गया था .इतिहास में इसे पहला ,दूसरा ,और तीसरा मंदिर के नाम से पुकारते हैं .इसका विवरण इस प्रकार है -
1 - पहले मंदिर का निर्माण और विध्वंस 
पहले मंदिर का निर्माण इस्रायेल के राजा दाऊद(Davidדוד ) के पुत्र राजा सुलेमान (Solomonשלמן ) ने सन 975 ई ० पू में करवाया था .सुलेमान का जन्म सन 1011 ई पू और म्रत्यु सन 931 ई .पू में हुई थी सुलेमान ने अपने राज की चौथी साल में यह भव्य मंदिर बनवाया था ,और इसके निर्माण के लिए सोना ,चन्दन ,और हाथीदांत भारत से मंगवाए थे ( बाइबिल 1 राजा अध्याय 5 से 7 तक I-kings10:22 )
सुलेमान के इस मंदिर को सन 587 BCE में बेबीलोन के राजा "नबूकदनजर (Nebuchadnezzar ) ने ध्वस्त कर दिया था .और यहूदियों को गुलाम बना कर बेबीलोन ले गया था .जाते जाते नबूकदनजर मंदिर के स्थान पर अपने एक देवता की मूर्ति लगवा गया था .और सारा यरूशलेम बर्बाद कर गया था .
(बाइबिल -यिर्मयाह 2 :24 से 20 )
इसके बाद जब सन 538 ई .पू में जब ईरान के सम्राट खुसरू ( cyrus ) ने बेबीलोन को पराजित कर दिया तो उसने यहूदियों को आजाद कर दिया और अपने देश में जाने की अनुमति दे दी थी .लेकिन करीब 419 साल तक यरूशलेम में कोई मंदिर नहीं बन सका .
2 दूसरे मदिर का निर्माण और विध्वंस 
वर्षों के बाद जब सन 19 ई .पू में जब इस्रायेल में हेरोद (Herod ) नामका राजा हुआ तो उसने फिर से मंदिर का निर्माण करवाया ,जो हेरोद के मंदिर के नामसे विख्यात था ,यही मंदिर ईसा मसीह के ज़माने भी मौजूद था .लेकिन जब यहूदियों ने ईसा मसीह को सताया ,तो उन्होंने इस मंदिर के नष्ट होने की भविष्यवाणी कर दी थी ,जो बाइबिल में इस तरह मिलती है, -
."फिर जब यीशु मंदिर से निकलते हुए रास्ते में जा रहे थे तो उनके शिष्यों ने उनको मंदिर की ईमारत की भव्यता दिखाया ,तब यीशु ने कहा कि,मैं तुमसे सच कहता हूँ ,कि एक दिन इस मंदिर के पत्थर पर पत्थर नहीं बचेगा ,और सारा मंदिर ढहाया जायेगा "
बाइबिल नया नियम -मत्ती -24 :1 -2 ,मरकुस -13 :1 -2 ,और लूका -19 :41 से 45 ,और लूका -21 :20 -45 
ईसा मसीह के समय यरूशलेम पर रोमन लोगों का राज्य था ,और यहूदी उसे पसंद नहीं करते थे .इसलिए सन 66 ईसवी में यहूदियों ने विद्रोह कर दिया .और विद्रोह को कुचलने के लिए रोम के सम्राट " (Titus Flavius Caeser Vespasianus Augustus तीतुस फ्लेविअस ,कैसर ,वेस्पनुअस अगस्तुस ) ने सन 70 में यरूशलेम पर हमला कर दिया .और लाखों लोग को क़त्ल कर दिया .फिर तीतुस ने हेरोद के मंदिर में आग लगवा कर मंदिर की जगह को समतल करावा दिया .और मंदिर कोई भी निशानी बाकि नहीं रहने दी .इस तरह ईसा मसीह की भविष्यवाणी सच हो गयी .


कुरान में भी इस घटना के बारे में उल्लेख मिलता है ,जो इस प्रकार है ,


"फिर हमने तुम्हारे विरुद्ध शत्रुओं को खड़ा कर दिया ,ताकि वह तुम्हारा चेहरा बिगाड़ दें ,और बैतुल मुक़द्दस के अन्दर घुस जाएँ ,जैसे वह पहली बार घुसे थे ,और उनको जोभी चीज हाथ में आई थी उस पर कब्ज़ा किया था .और मस्जिद को तबाह करके रख दिया था .
सूरा -बनी इस्रायेल 17 :17 
इस प्रकार इतिहास ,बाइबिल और कुरान से साबित होता है कि सन 70 से मुसलमानों के राज्य तक यरूशलेम में कोई मंदिर या मस्जिद नहीं थे ,बल्कि उस जगह समतल मैदान था .मस्जिद का फिर से निर्माण खलीफाओं ने करवाया था ,जिसका विवरण इस तरह है ,
6 -मंदिर की जगह मस्जिद का निर्माण 
जब सन 638 उमर बिन खत्ताब खलीफा था ,तो उसने यरूशलेम की जियारत की थी .और वहां नमाज पढ़ने के लिए मदिर के मलबे को साफ करवाया था .और उसके सनिकों ने खलीफा के साथ मैदान में नमाज पढ़ी थी .बाद में जब उमैया खानदान में "अमीर अब्दुल मालिक बिन मरवानعبد الملك بن مروان"सन 646 ईस्वी में सुन्नियों का पांचवां खलीफा यरूशलेम आया तो उसने पुराने मंदिर की जगह एक मस्जिद बनवा दी ,जो एक ऊंची सी जगह पर है ,इसी को आज" मस्जिदुल अक्सा " Dom of Rock भी कहा जाता है .क्योंकि इसके ऊपर एक गुम्बद है .अब्दुल मालिक ने इस मस्जिद के निर्माण के किये "बैतुल माल" से पैसा लिया था ,और गुम्बद के ऊपर सोना लगवाने के लिए सोने के सिक्के गलवा दिए थे .आज भी यह मस्जिद इस्रायेल अरब के विवाद का कारण बनी हुई है .और दौनों इस पर अपना दावा कर रहे हैं 
7 -खलीफा ने मस्जिद क्यों बनवाई 
अब्दुल मलिक का विचार था कि अगर वह यरूशलेम में उस जगह पर मस्जिद बनवा देगा ,तो वह यहूदियों और ईसाइयों हमेशा दबा कर रख सकेगा .क्योंकि दौनों ही इस जगह को पवित्र मानते है .लेकिन जब कुछ मुसलमानों ने इसे बेकार का खर्चा बता कर आपत्ति प्रकट की ,तो मलिक ने विरोधियों को शांत करने के लिए यह हदीस सुना दी ,
"अनस बिन मलिक ने कहा कि ,रसूल ने कहा ,यदि कोई घर में ही नमाज पढ़ेगा ,तो उसे एक नमाज का पुण्य मिलेगा ,और अगर वह अपने कबीले के लोगों के साथ नमाज पढ़ेगा तो ,उसे 20 नमाजों का पुण्य मिलेगा .और जुमे में जमात के साथ नमाज पढ़ने से 50 नमाजों का पुण्य मिलेगा .लेकिन यदि जोभी व्यक्ति यरूशलेम की "बैतुल मुक़द्दस " में नमाज पढ़ेगा तो उसे 50 हजार नमाजों का पुण्य मिलेगा "
इब्ने माजा-तिरमिजी -हदीस 247 ,और मलिक मुवत्ता-जिल्द 5 हदीस 17 
इस तरह से अब्दुल मलिक यरूशलेम में मुसलमानों की जनसंख्या बढ़वाना चाहता था ,की मुसलमान पुण्य प्राप्ति के लिए यरूशलेम में रहने लगें .
लेकिन सन 1862 मुसलमान यरूशलेम की मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ सके थे .क्योंकि उसपर ईसाइयों का कब्ज़ा हो गया था .बाद में तुर्की के खलीफा "अब्दुल हमीदعبد الحميد "( 1878 -1909 )ने इंगलैंड के "प्रिंस ऑफ़ वेल्स Prince of Wels ) जो बाद में King Edward V II बना ,उस से अनुमति लेकर मस्जिद की मरम्मत करवाई और मुसलमानों को एक मेहराब के नीचे नमाज पढ़ने की आज्ञा प्राप्त कर ली थी .जो अभी तक चल रही है .
8-विचारणीय प्रश्न 
अब इन सभी तथ्यों और सबूतों को देखने का बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक हैं ,क़ि जब सन 70 से कर यानि हेरोद के मंदिर के ध्वस्त होने से .सन 691 तक यानी अब्दुल मालिक द्वारा मस्जिद बन जाने तक ,यरूशलेम में कोई मंदिर या मस्जिद का कोई नामोनिशान ही नहीं था ,केवल समतल मैदान था ,तो मुहम्मद ने सन 621 में यरूशलेम की अपनी तथाकथित यात्रा में किस मस्जिद में नमाज पढ़ी थी ?और लोगों को कौन सी मस्जिद का आँखों देखा वर्णन किया था ?क्या कुरान की वह आयतें 691 बाद लिखी गयी हैं ,जिन में मुहम्मद की यरूशलेम की मस्जिद में नमाज पढ़ने का जिक्र है .हम कैसे माने कि कुरान में हेराफेरी नहीं हुई ?क्या कोई अपनी मान्यता के आधार पर ऐतिहासिक सत्य को झुठला सकता है ?
आप लोग कृपया लेख दुबारा पढ़िए और फिर फैसला करिए .और बताइए कि ,यदि हम कुरान और हदीसों की पहले वाली बातों को सत्य मान लें ,तो हमें दूसरी हदीसों और इस्लामी इतिहास को झूठा साबित करना होगा .!
बताइये आप कौनसी बात पर विश्वास करेंगे ?


http://www.abrahamic-faith.com/night-journey.html

30 टिप्‍पणियां:

  1. शोधपरक एवं सत्यपरक जानकारी के लिए कोटिशः हार्दिक आभार.

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  2. Salamun(Peace)! - a word from a Lord Most Merciful!" [Qur'an 36:58]
    http://www.quransearch.com/ac20.htm
    Quran 2:256 ...There is no compulsion in religion...
    www.awaitedmahdi.com
    Christian Scientists are Declaring the Quraan is from God
    http://www.usislam.org/video/converts_to_islam.htm
    Prophet Muhammad's
    Last Sermon

    Hafiz Ibn Hibban reported in al-Sahih (11/203/#4862)
    The Messenger of Allah said during Hajjat al-Wada` (the farewell pilgrimage): "Shouldn't I tell you who is the Mu'min (the believer): it is he whom the people trust with their moneys and souls.And the Muslim is he who the people are safe from his tongue and hand.
    www.muslimchannels.tv/index.php?id=32
    A good action and a bad action are not the same. Repel the bad with something better and, if there is enmity between you and someone else, he will be like a bosom friend. ( al-Fussilat: 34)

    Quran 37:157 THEN BRING YOUR BOOK (in original form) IF YOU ARE TRUTHFUL.
    http://scienceislam.com/scientists_quran.php
    www.speed-light.info/angels_speed_of_light.htm#energy
    www.simetrikkitap.com/?lang=en
    www.quranmiracles.com
    www.cyberistan.org/islamic/sciencehistory.htm
    QURAN REVEALED TO MANKIND Quran 2:185

    www.irfi.org

    ...Whosoever killeth a human being for other than manslaughter or corruption in the earth, it shall be as if he had killed all mankind, and whoso saveth the life of one, it shall be as if he had saved the life of all mankind. Our messengers came unto them of old with clear proofs, but afterwards lo! many of them became prodigals in the earth."(QURAN 5:32)

    www.cyberistan.org/islamic/quote1.html

    And cover not Truth with falsehood, nor conceal the Truth when ye know (what it is).[Quran 2:42]

    Invite all[mankind] to the way of your Lord with Wisdom and beautiful Preaching; And argue with them in ways that are Best and Most Gracious.(Surah Nahal,16:125).

    [Quran 5:69] "Verily those who believed, and those of the Jews and the Sabians and the Christians, whoever believed in God and the Last Day, and worked righteousness - no fear shall be upon them, nor shall they grieve."

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  3. Kuran= Jhut kaa pulinda, Islam = khunion kaa giroh

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  4. एक सच्चा काफिर10 दिसंबर 2011 को 6:59 am

    मै हर प्रबुद्ध और विवेकशील मुस्लिम बंधुओं से विनम्र निवेदन करता हूँ कृपया वे गहराई से इन web links को खोलकर पढ़ें और अपने विवेक और बुद्धि के द्वारा निर्णय करें कि क्या केवल एक मुस्लिम माता - पिता के घर पैदा होने मात्र से वे मजबूर हैं एक ऐसे विचार धारा को आजीवन ढोने के लिए जिस विचारधारा ने पूरी दुनिया में असंख्य बेकसूर इंसानों और जानवरों का विगत 1400 वर्षों से निर्ममता से क़त्ल करता आया है और आज तक कर रहा है ? क्या परम पिता परमात्मा के दिए हुए इस मानव मस्तिष्क का उपयोग हम सत्य को खोजने और समझने के लिए कभी न करें ? मुझे केवल आशा ही नहीं,वरण पूर्ण विश्वास है कि मेरे प्रबुद्ध,बुद्धिमान मुस्लिम बंधुओं की आत्मा इन links को अच्छी तरह पढने के बाद एक पल भी 'इस्लाम ' नाम के भयंकर खुनी विचारधारा को मानने से इनकार कर देगी,और आज वो वक्त आ गया है, हर प्रबुद्ध मुस्लिम को इस नफरत के अँधेरे कुएं से खुद बाहर निकलकर ज्यादा से ज्यादा मुस्लिमों को जागृत करके जल्द से जल्द इस खतरनाक विचारधारा को त्यागने के लिए प्रेरित करें,इसीमे सारी मानवता की भलाई निहित है : http://www.faithfreedom.org/testimonials.htm इन links को खोलने के लिए इसे सेलेक्ट करके copy कर लें और Google Search खोलकर पेस्ट कर दें I

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  5. jisne bhi ye lekh likha he us par lanat ho..........
    is tarah ki posto se islam ko badnam na karein ye wo majhab he jiske aane se pehle sari duniya me zulmat ka andhera tha islam ke aane ke bad duniya me amno sukoon fela he .................
    aap islam ko nahin mante na mane lekin aapko koi haq nahin kisi majhab ke logo ki bhawnao ke sath khelne ka unhe thes pahunchane ka ...........................sudhar jao or is site ko band kar do 1433 saal ho gaye tum jese na jane kitne kutte bhonke or bhonkte reh gaye lekin islam ka kuch na bigad sake din pe din ye majhab felta hi raha he tum jese log hi logo ke dil menafrat ke beej bote ho duiya me dharm ke naam par jo bhi ashanti feli huyi he uske asli zimmedar tum jese log hein agar ek baap ki olad ho to ab bhi sudhar jao or is site ko band kar do

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  6. JO BAATE AAJ SCIENCE MAAN RHA H UN BAATO KO QURAAN 1400 SAAL PEHLE BTA CHUKA H
    MERAAJ KO BHI LOG JHOOT MAANTA H. LEKIN MUJHHE YKEEN H EK DIN IS BAAT KO BHI LOG MANENG

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  7. "इस प्रकार इतिहास ,बाइबिल और कुरान से साबित होता है कि सन 70 से मुसलमानों के राज्य तक यरूशलेम में कोई मंदिर या मस्जिद नहीं थे ,बल्कि उस जगह समतल मैदान था ." यानी तू कुरआन पें यकीन रखता है कुरआन कि हि दलील देकर खुद को सच्चा साबीत करने कि कोशीश करता है.. ये तेरी कोशिश हस्यास्पद है.. मेराज का इल्म तुझे नहीं है खुदा के नाफरमान.. एक बात तू अपने दिमाग में उतार ले इस्लाम को अपना और मुसलमान बन जा.. आखिरत में तुझे हमेशा हमेशा कि जन्नत मिलेगी.. वरना जलता रहेगा जहन्नम हमेशा हमेशा के लिए... इमान ला उस एक ईश्वर पर उसके प्रेषित पर..
    और तुझे एक नसीहत बेटा.. बांतो को तोड मरोड कर पेश करना बंद कर दे.. एक ईश्वर देख रहा है...

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  8. शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा ही मेहरबान और रहम करने वाला है !
    जिस मुकाम पर मस्जिदे अक्सा की बात चल रही है दरअसल वहां पे हजरत इब्राहिम ने सबसे पहले मस्जिद बनाई थी ! हजरत इब्राहिम ने दो शादी की थी ! दोनों बीवी से एक -एक बेटा था यानी आपके दो बेटे थे ! बड़े बेटे का नाम इस्माइल था जो सर जमीने अरब में काबा शरीफ के पास अपनी माँ हजरत हाज़रा के साथ रहते थे ! काबा शरीफ का निर्माण हजरत इब्राहिम ने उस बुनियाद पे किया जो तुफाने नुह में एक टीले के रूप में बाकी रह गया था ! इसके बाद हजरत इब्राहिम ने लोगों को हज के लिए दावत दी ! यानी दुनिया की सबसे पहली मस्जिद काबा शरीफ का हरम है !
    अब आगे .....
    हजरत इब्राहिम की पहली बीवी का नाम सारा है जिनसे हजरत इशाक पैदा हुए थे !
    नि संतान हजरत सारा ने ही अपनी सेविका हाजरा की शादी इब्राहिम से इसलिए करवा दी थी कि उन्हें कोई औलाद हो जाये ! अल्लाह की मेहरबानी से दोनों को औलाद हो गई लेकिन सारा ने हसद के मारे हाज़रा से अलग होने का इरादा कर लिया इस तरह हजरत इब्राहिम ने एक पहली बीवी सारा और उनकी औलाद इशाक को यरूशलम में बसा दिया और वहां मस्जिदे अक्सा का निर्माण किया !
    काबा शरीफ की तामीर हजरत इब्राहिम और इस्माइल ने मिलकर की थी !
    इसी तरह मस्जिदे अक्सा की तामीर भी इब्राहिम ने की ! इन दोनों मस्जिद के निर्माण में 40 साल का फासला इस तरह आया !
    रही बात हजरत सुलेमान की तो आपने जिस मस्जिद की तामीर का इरादा किया था बेशक उसे हजरत दाउद बनाना चाहते थे लेकिन बाप के सपने को बेटे ने साकार किया और जिन्नों से बैतूल मुक़द्दस मस्जिद का निर्माण करवाया !
    बाद में लोगों ने उसे मंदिर का नाम दे दिया और जब इरानी हुकूमत हुई तो उन लोगों ने यहाँ के लोगों को गुलाम बनाकर इरान ले गए और ईरानियों की आग पूजा की विधि यहूदियों में आ गई ! इसलिए यहूदी आग की पूजा करने लगे !
    हिन्दू मजहब में भी नुह के सैलाब का जिक्र है जिसे हिन्दू लोग मनु का तूफ़ान कहते है ! अगर इसको ये इनकार करते है तो ये खुद के धर्म का भी मजाक उड़ा रहे है ! और इब्राहिम अलैहिस्सलाम जैसा वाकिया भारत के हिरन्कश्यप का भी मिलता है जो अपने बेटे प्रहलाद को होलिका की गोद में बिठाकर आग के हवाले कर देता है ! लेकिन आग प्रहलाद का कुछ भी नही बिगाड़ पाती उल्टा होलिका जिसे वरदान मिला था की आग उसका कुछ नही बिगाड़ पाएगी जलकर राख हो जाती है !
    ऐसा ही वाकिया हमारे कुरआन शरीफ और पुरानी मुक़द्दस बाइबिल और तोरेत में भी है ! आगा हजरत इब्राहिम का कुछ भी नही बिगाड़ पाती और नमरूद की बादशाही ख़ाक में मिल जाती है !
    ए मेरे हिन्दू भाई मैंने समझा दिया आगे आपकी मर्जी की अल्लाह आपको ईमान से नवाजता है या आप भी जिंदगी भर गुमराही में भटकते फिरोगे !
    अल्लाह आपको नेक तोफिक दे ___ जावेद शाह खजराना 98933-69264

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  9. भाईयो इस कौमे कफफॉर को अललाह ने जहनँनूम का पेट भरने के िलये पैदा िकया है इस जैसे लोग ही दौजख की आग मे जलेगँे यह कभी अपने धरृम की सती पृथा के बारे मै नही बौलेगँे कृष्णा के छुप कर नंगी लड़कियों को देखने के बारे मे नहीँ बोलेंगे यह कभी 5पांडवों की पत्नी पंचाली केबारे नही बोलेंगे यह कभी राजा दशरथ के पुत्र प्राप्ती य्घ के बारे नहीँ बताएँगे यह कभी भी पुराणों मे लीखे गौमेघ य्घ के बारे नहीँ बताएँगै यह कभी भी कर्ण की कुआँरी माँ कुंती के बारे नहीँ बताएँगे पुराणों मे िलखा है की पुराणों के मंत्र अग्र गलती सेभी शूद्रौ के कान मे पढ़ जाय तो इनके कानो मे िपघला हुवा िससा (राँघ )डाल देना चािहऐ इस बारे मे यह कभी नही बताएँगे

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  10. यह चुहे पर हाथी की सवारी बंदर के हिमालय पहाड़ उठाने. सूअर के पीर्थ्वी (arth )को दाँतों पर उठाने पर यकीन करने वाले हमे बताएँगे इस्लाम के बारे मे (पहलेअपने धृम की जानकारी करलो )

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  11. यह चुहे पर हाथी की सवारी बंदर के हिमालय पहाड़ उठाने. सूअर के पीर्थ्वी (arth )को दाँतों पर उठाने पर यकीन करने वाले हमे बताएँगे इस्लाम के बारे मे (पहलेअपने धृम की जानकारी करलो )

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  12. भाईयो इस कौमे कफफॉर को अललाह ने जहनँनूम का पेट भरने के िलये पैदा िकया है इस जैसे लोग ही दौजख की आग मे जलेगँे यह कभी अपने धरृम की सती पृथा के बारे मै नही बौलेगँे कृष्णा के छुप कर नंगी लड़कियों को देखने के बारे मे नहीँ बोलेंगे यह कभी 5पांडवों की पत्नी पंचाली केबारे नही बोलेंगे यह कभी राजा दशरथ के पुत्र प्राप्ती य्घ के बारे नहीँ बताएँगे यह कभी भी पुराणों मे लीखे गौमेघ य्घ के बारे नहीँ बताएँगै यह कभी भी कर्ण की कुआँरी माँ कुंती के बारे नहीँ बताएँगे पुराणों मे िलखा है की पुराणों के मंत्र अग्र गलती सेभी शूद्रौ के कान मे पढ़ जाय तो इनके कानो मे िपघला हुवा िससा (राँघ )डाल देना चािहऐ इस बारे मे यह कभी नही बताएँगे

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  13. are mohmmad k to ek bhi ladka nahi hua ..kyo nahi bole ge bol rahe hain tu kya quran ko itihas manta hain .....mahabharat itihas hain ..quran itihas hain kya bata ....abe jab mohmmad jaise log gadhe per baith kar 7 we aasman per ja sakta hain to sab kuch ho sakta hain .......

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  14. javed shah khajrana..ibrahim ne apni bhen he chod di ..aur ek rakhail rakh li . ..khawabo me bhi masjid bandti hain ab kyo nahi banti ..... kah to pramad du ...................

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    1. राज मिश्रा ,,,,
      तेरे हिसाब से ब्रह्मा ने जब दुनिया बसाई तो बता सबसे पहला मानव कौन था दुनिया का उसकी शादी तेरे ब्रह्मा ने किसके करवाई ? तू अगर हजरत इब्राहिम के बारे में बोल रहा है की वो उनकी बहन थी तो गधे तुझे इतना भी नहीं मालूम की वो उनकी सग्गी बहन नहीं बल्कि चाचा हारान की बेटी थी | ऐसा तो आज भी सभी मुसलमानों में होता है वो अपनी सग्गी बहन से शादी नही करते और चाचा - मामा की बेटी से करते है |
      जैसे तेरे ब्रह्मा ने खुद उसकी बेटी को गलत वासना की निगाह से देखा तो उसके चार मुख हो गए और तेरे ब्रह्मा चूतिये की पूजा इस दुनिया में पुष्कर को छौड़कर कही नहीं होती |
      पुष्कर में भी इसलिए होती है क्यूंकि तुम काफिरों के हिसाब से तेरे इस वासना से भरे बाप ब्रह्मा ने दुनिया की रचना यही पुष्कर से की थी | अबे नालायक पहले अपने सबसे बड़े भगवान् ब्रह्मा को देख फिर शिव को जिस गधे को यही नही मालूम था की गणेश उसका छोरा है वो अनजान बना उसकी गर्दन काट देता है और सारे भगवान् उससे युद्ध करते है यानी तुम्हारे भगवानों को सामने का सच नही मालूम वो क्या जाने की आगे क्या होने वाला है और पीछे क्या हो गया तू है तो उन्हीं का भक्त .. जैसे भगवान् वैसा भक्त है तू नालायक ,,,,,

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    2. masjid aur mandir me farak hota hia tum Kafir bina Stone aur Statue ke pooja nhi kar sakte ,, Hum Musalmano ko Ibadat aur namaj padhne k liye Koi Khas makan ya masjid jise tu maidan bol raha hai sach hai masjid wahi to hai jaha maidan ho gaya tha bad me Hajrat Umar k baad masjid bani,,, jab hamla hua to masjid Tod di gai aur bad me bani jab nabi ne isra aur meraj kiya to waha masjid ka bana hona jaruri nhi balki jameen ka hona jaruri hai jo jamin to thi,,,,

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    3. masjid aur mandir me farak hota hia tum Kafir bina Stone aur Statue ke pooja nhi kar sakte ,, Hum Musalmano ko Ibadat aur namaj padhne k liye Koi Khas makan ya masjid jise tu maidan bol raha hai sach hai masjid wahi to hai jaha maidan ho gaya tha bad me Hajrat Umar k baad masjid bani,,, jab hamla hua to masjid Tod di gai aur bad me bani jab nabi ne isra aur meraj kiya to waha masjid ka bana hona jaruri nhi balki jameen ka hona jaruri hai jo jamin to thi,,,,

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    4. राज मिश्रा ,,,,
      तेरे हिसाब से ब्रह्मा ने जब दुनिया बसाई तो बता सबसे पहला मानव कौन था दुनिया का उसकी शादी तेरे ब्रह्मा ने किसके करवाई ? तू अगर हजरत इब्राहिम के बारे में बोल रहा है की वो उनकी बहन थी तो गधे तुझे इतना भी नहीं मालूम की वो उनकी सग्गी बहन नहीं बल्कि चाचा हारान की बेटी थी | ऐसा तो आज भी सभी मुसलमानों में होता है वो अपनी सग्गी बहन से शादी नही करते और चाचा - मामा की बेटी से करते है |
      जैसे तेरे ब्रह्मा ने खुद उसकी बेटी को गलत वासना की निगाह से देखा तो उसके चार मुख हो गए और तेरे ब्रह्मा चूतिये की पूजा इस दुनिया में पुष्कर को छौड़कर कही नहीं होती |
      पुष्कर में भी इसलिए होती है क्यूंकि तुम काफिरों के हिसाब से तेरे इस वासना से भरे बाप ब्रह्मा ने दुनिया की रचना यही पुष्कर से की थी | अबे नालायक पहले अपने सबसे बड़े भगवान् ब्रह्मा को देख फिर शिव को जिस गधे को यही नही मालूम था की गणेश उसका छोरा है वो अनजान बना उसकी गर्दन काट देता है और सारे भगवान् उससे युद्ध करते है यानी तुम्हारे भगवानों को सामने का सच नही मालूम वो क्या जाने की आगे क्या होने वाला है और पीछे क्या हो गया तू है तो उन्हीं का भक्त .. जैसे भगवान् वैसा भक्त है तू नालायक ,,,,,

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  15. kon sa science kahta hain 6 din me sab kuch bana hain ....allah pahel tha ya smoke dhua pahle tha ja kar quran thik se padho

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  16. allah khud jahnum me hain .. allah ek farzi khuda ahin hain ....agar bible ka khuda he allah hain to bible k khuda ki wife ka naam asera tha ... tab injil kisne utari ........... islam me bhudhi use karna mana hain ..

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  17. Muslim Female Circumcision in Malaysia - YouTube
    Video for khatna of woman in islam in hindi▶ 5:11
    https://www.youtube.com/watch?v=v-cwaJJBmNs

    Islam - Female Genital Mutilation - YouTube

    Female Genital Mutilation In Islam - YouTube

    bharat k mulle apni maa bhen ka khatna nahi karate karan do tane de de kar mar denge jab ki islam me aurto ka bhi khatna jayaz hain .....doglo pahle apni girewan me jankho ..... khatne ki vedio dekho momino

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  18. allah kis ka naam le kar kah raha hain ki allah rahmane rahim hain batao momino

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  19. Jin ko apne hindu majhab ke barare me malum nahi jo apne majhab ko kalpaniq kehete he wo apne fiqar kare or tumari govt me tekikat karwae fir zaban dras kare . BEWAQUF LOG .

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  20. Jin ko apne hindu majhab ke barare me malum nahi jo apne majhab ko kalpaniq kehete he wo apne fiqar kare or tumari govt me tekikat karwae fir zaban dras kare . BEWAQUF LOG .

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  21. Quraan me ek zer zabar bhi. Glat. Nhi. H aur n. Kisi. Ki. Taqat h krne ki kyonki isko khud Allah NE. Surakshit kiye. Hue h. Bandhiya se itihaas abhi padhna baaki. H aap logo. Ko. Islaam me 1240000 prophets aaye h usme. Daud aur Suleman bhi. H Jo ki masjid al aksa se sambandhit h. Duniya ki tamam dharmik pustake badal gyi kyonki uski suraksha ki jimmebari Allah NE nhi li thi, lekin quraan ki li h. isliye Jo quraan kehta h wahi satya h.

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  22. Aap log quraan ko padhiye lekin. Kisi guru ke sahare se nhi to samjh nhi payeiga

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  23. बॉलीगांड विक्रम तू बता सरे भगवन तुम्हारे भारत में ही क्यों पैदा हुए क्यों कोई बहार जेसे अमेरिका इंग्लैंड आदि में पैदा नहीं हुआ ऐसा क्यों। क्यों की तुम बॉलीगांड हो इस लिए श्री राम की भविष्यवाणी 1400 साल पहले एक कवी कर देता है कुछ भी । कृष्ण चोरी करता है ।शिव रंडीबाज़ है सरे तो न लायक है भगवन नंगे साले लंड की पूजा कर लेते हो चुतियो मेरे लण्ड की कर लो पूजा तुम्हारी माँ की चूत

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