गुरुवार, 12 जनवरी 2012

इस्लाम समर्थक हिन्दू आचार्य ?


आजकल प्रचार का जमाना है .और लोग अपना प्रचार करने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाते रहते हैं .इसीलिए कुछ मुस्लिम ब्लोगरों ने इस्लाम का प्रचार करने के लिए यही तरकीब अपना रखी है .सब जानते हैं कि अधिकांश हिन्दू संगठन और संस्थाए भी दोगली विचारधारा रखती हैं .और कुछ तथाकथित स्यंभू आचार्य ,और पंडित अपना धर्म बेच चुके है ,और इस्लाम का प्रचार कर रहे है .कुछ दिनों पूर्व " सनातन धर्म इस्लाम " (http://sanatan-dharm-islam.blogspot.com/)के नाम से एक ब्लॉग नजर में आया ,जिसमे किसी अहमद पंडित और किसी लक्ष्मी शंकर आचार्य के साथ कुछ अन्य हिन्दू लेखकों ने मिलकरयह सिद्ध करने का प्रयास किया है ,कि इस्लाम एक उदार धर्म है ,इसमें जबरदस्ती नहीं है .यह हरेक व्यक्ति को अपना धर्म पालन करने की अनुमति देता है .इस्लाम की नजर में सभी मनुष्य समान हैं .इस्लाम लोगों में सद्भावना फैलाना चाहता है .आदि ,इन्हीं बातों प्रमाणित करने के लिए इस ब्लॉग में कुरान शरीफ की कुछ आयतें और विडिओ भी दिए गए है .यहाँ पर ब्लॉग में किये गए दावों की दुर्भावना रहित समीक्षा दी जा रही है ,ताकि उन हिन्दू विद्वानों को सटीक उत्तर दिया जा सके .और सत्यासत्य का निर्णय हो सके .देखिये -
1 - इस्लाम का अर्थ शांति नहीं है .
अभी तक लोग इसी भ्रम में पड़े हुए हैं ,कि इस्लाम का अर्थ शांति है .और इसलिए इस्लाम शांति का धर्म है .लेकिन इस्लाम का वास्तविक अर्थ शांति नहीं बल्कि समर्पण है ."Islam" does not mean "peace" but "submission"जैसा कि कहा जाता है ("السلام" ولكن "تقديم"استسلاما  )इस्लाम शब्द अरबी के तीन अक्षरों (root sīn-lām-mīm (SLM [ س ل م ) से बना है .और कुरान में कई जगह इस्लाम का अर्थ समर्पण ही किया गया है ,सूरा तौबा 9 :29 में इसका अर्थ-
To surrender -اسلام=Submission  बताया है .इसी तरह सूरा आले इमरान 3 :83 में इसका अर्थ अल्लाह का धर्म और सूरा आले इमरान 3 :19 में भी वही अर्थ"islam is surrender  to  allah 's will استسلاما=To surrender "   दिया है .इस्लाम का अर्थ शांति फैलाना कदापि नहीं है .इस शब्द का प्रयोग लोगों को धमकी देकर आत्मसमर्पण (surrender ) करने के लिए किया जाता रहा है ,जो इन हदीसों से सिद्ध होता है .


"रसूल ने यहूदियों से कहा कि यह सारी जमीन मुसलमानों की है .इसलिए तुम इसे खाली कर दो .और इस्लाम कबूल करो .और खुद को अल्लाह के रसूल के सामने समर्पित कर दो " बुखारी -जिल्द 9 किताब 92 हदीस 447 
"एक औरत ने रसूल से पूछा कि इस्लाम क्या है ,तो रसूल ने कहा ,सिर्फ अल्लाह की इबादत करना , रोजा रखना ,जकात देना और खुद को अल्लाह की मर्जी के हवाले कर देना "बुखारी -जिल्द 1 किताब 1 हदीस 47 
"रसूल ने Byzantine ईसाई शाशक "हरकल Harcaleius को सन्देश भेजा ,जिसमे कहा कि मैं अल्लाह का रसूल मुहम्मद तुम्हें चेतावनी देता हूँ ,कि अगर तुम अपनी जान बचाना चाहते हो ,तो समर्पण कर दो .और इस्लाम स्वीकार कर लो "बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 191 
वह इस्लाम भक्त हिन्दू आचार्य बताएं कि क्या इस्लाम का अर्थ समर्पण करना नहीं है ? और इस्लाम के जन्म से लेकर मुसलमान इसी तरह से विश्व में शांति (अशांति ) नहीं फैला रहे हैं ?
2 -इस्लाम में जबरदस्ती नहीं है 
इन इस्लाम परस्त पंडितों ने जकारिया नायक के सामने मुस्लिमों को खुश करने के लिए यह कह दिया कि इस्लाम में किसी प्रकार की जबरदस्ती नहीं है ,और सबको अपना धर्म पालने की आजादी है .इसके लिए इन लोगों ने कुरान की इन आयतों का हवाला दिया है -
अ -"दीन (इस्लाम ( में कोई जबरदस्ती नहीं है " सूरा -बकरा 2 :256 
ब-"तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन और हमारे लिए हमारा दीन "सूरा -काफिरून 109 :6 
बहुत कम लोग यह जानते हैं कि कुरान की सूरतें और आयते घटनाक्रम के अनुसार ( according revelation ) नहीं है .इसलिए इनका सही तात्पर्य और अर्थ समझने के लिए हदीसों का सहारा लेना जरुरी है .पहली आयत 2 :256 यहूदियों से सम्बंधित है .हदीस में कहा है ,
"अब्दुल्ला इब्न अब्बास ने कहा कि इस्लाम से पहले जिन औरतों के बच्चे नहीं होते थे ,या बार बार मर जाते थे ,वह यहूदियों के मंदिर में जाकर रब्बी के सामने यह मन्नत मांगती थीं ,कि अगर मुझे बच्चा होगा ,या मेरी संतान जीवित रहेगी तो उसे मैं यहूदी बनाकर तुम्हारे हवाले कर दूंगी . मक्का में ऐसे बहुत से बच्चे यहूदियों के पास थे . जब इस्लाम आया तो रसूल ने उन सभी बच्चों को यहूदियों से मुक्त कराया और कहा कि " दीन ( मान्यता ) में कोई जबरदस्ती नहीं है " 
अबू दाउद-किताब 14 हदीस 2676 
इसी तरह दूसरी आयत 109 :6 का जवाब उसी सूरा में मिल जाता है ,जिसमे कहा है कि "हे काफिरों मैं उसकी इबादत नहीं करूँगा ,तुम जिसकी इबादत करते हो 
" सूरा -काफिरून 109 :4 .इसी बात को और स्पष्ट करने के लिए कुरान की इस आयत को पढ़िए जो कहती है कि,
"और जो लोग इस सच्चे दीन (इस्लाम )को अपना दीन नहीं मानते ,तुम उनसे लड़ो ,यहाँ तक वह अपमानित और विवश होकर जजिया न देने लगें "
सूरा- तौबा 9 :29 
अब कोई कैसे मान सकता है ,कि इस्लाम बलपूर्वक नहीं फैलाया गया ,और सबको अपने धर्मों के पालन करने की अनुमति देता है ?
3 -इस्लाम वैश्विक भाईचारा चाहता है 


वास्तव में इस्लाम " वैश्विकबंधुत्व "الأخوة العالمية"  universal fraternity" नहीं बल्कि " मुस्लिम भाईचारे "" الاخوان المسلمين"   muslim brotherhood की वकालत करता है . जो इन आयतों से स्पष्ट हो जाती है ,जो कहती हैं .
" ईमान वाले (मुस्लिम ) तो भाई भाई हैं "सूरा -अल हुजुरात 49 :10 
यही बात इन हदीसों में में साफ तौर से कही गयी है ,कि मुसलमान दुसरे धर्म वालों के भाई या मित्र नहीं हो सकते .हदीस में है ,
"रसूल ने कहा कि इमान वालों को सिर्फ इमान वालों से ही दोस्ती करना चाहिए "अबू दाउद -किताब 41 हदीस 4815 और 4832 
"रसूल ने कहा हे ईमान वालो तुम मेरे शत्रुओं ( गैर मुस्लिम ) को अपना भाई या दोस्त नहीं समझो " बुखारी -किताब 59 हदीस 572 
कुरान में गैर मुस्लिमों से दोस्ती न करने का कारण भी दे दिया है और रसूल के स्वभाव के बारे में कहा है कि ,
"मुहम्मद अल्लाह के ऐसे रसूल हैं ,जो काफिरों के प्रति कठोर और अपने लोगों ( मुसलमानों ) के प्रति अत्यंत दयालु हैं "सूरा -अल फतह 48 :29 
सब जानते हैं कि मुसलमान रसूल का अनुकरण करते हैं ,और जब रसूल ही गैर मुस्लिमों से दोस्ती और भाईचारे को बुरा बताते हों ,तो मुसलमानों क्या मजाल जो हिन्दुओं से दोस्ती कर सकें .यही कारण था कि जब केजरीवाल मौलाना अरशद मदनी के पास दोस्ती के लिए गए तो उनको भगा दिया गया .और अन्ना का आन्दोलन फेल हो गया .( जागरण 28 दिसंबर 2011 )याद रखिये गाँधी ने भी यही किया था .
4-विधर्मी भटके लोग और जानवर हैं 
आप सोच रहे होंगे कि इस्लाम गैर मुस्लिमों से मित्रता करने का विरोधी क्यों है .क्योंकि इस्लाम कि नजर में सभी गैर मुस्लिम ,जैसे यहूदी ,ईसाई और हिन्दू भटके हुए लोग और कुत्ते ,बन्दर ,सूअर और चूहे की तरह निकृष्ट प्राणी है .यह कुरान की इन आयातों और हदीसों से सिद्ध होता है .जो कहती हैं कि-
"क्या कभी कोई अँधा और आँखों वाला व्यक्ति बराबर हो सकता है "सूरा -रअद 13 :16 
" निश्चय ही जमीन पर चलने वाले सभी जीवों में अल्लाह कि नजर सबसे निकृष्ट जीव वह लोग हैं जो इस्लाम नहीं लाते"सूरा-अनफ़ाल 8 :55 
"जो इस्लाम को छोड़कर अपनी ही इच्छा पर चलते हैं ,उनकी मिसाल कुते की तरह है .जो अपनी इच्छा पर चलता है "सूरा-आराफ 7 :176 
"जब वह हमारी बात ( इस्लाम लाओ ) छोड़कर ढिढाई से वही पुराना काम करने लगे ,तो हमने (अल्लाह ) कहा जाओ तुम धिक्कारे हुए बन्दर बन जाओ "
सूरा -आराफ़ 7 :166 
"और जब उन लोगों (यहूदी ) हमारे आदेश को नहीं माना तो हमने कहा तुम बन्दर बन जाओ "सूरा -बकरा 2 :65 
"जिन्होंने अल्लाह के आलावा किसी और की इबादत की ,तो उन पर अल्लाह का प्रकोप हुआ .जिस से उन में से बन्दर और सूअर बना दिए गए .
सूरा -अल मायदा 5 :60 .यही बातें इन हदीसों में दी गयी है -
" अबू सईद ने कहा कि रसूल ने कहा "सभी यहूदी और ईसाई भटके हुए लोग है और जानवरों से बदतर है .यह एक दिन गर्त में जा गिरेंगे "
बुखारी -जिल्द 4 किताब 56 हदीस 662 
" अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा यहूदी चूहों की तरह है ,जब इनको बकरी का दूध दिया जाता है ,तो पी लेते है .लेकिन जब ऊंटनी का दूध दिया जाता है तो इनको कोई स्वाद नहीं आता.यानि तौरेत पढ़ लेते हैं लेकिन कुरान से इकार करते है "सही मुस्लिम किताब 42 हदीस 7135 यही कारन है कि मुसलमान हिन्दू ,ईसाई और यहूदी जैसे जानवरों से दोस्ती नहीं करते हैं .
5-अल्लाह भटकाता रहे ,और 
लगता है अल्लाह ने जिस दिन कुरान उतारी थी ,उसी दिन से पृथ्वी से काफिरों ( गैर मुस्लिम ) के सफाया की योजना बना रखी थी .कि वह उनको गुमराह करके उनसे गुनाह ,अपराध कराता रहे .फिर जहाँ भी इस्लामी हुकूमत हो जाये वहां जिहादी किसी न किसी बहाने उनको क़त्ल करते रहें .यह बात कुरान कि इन आयतों से स्पष्ट हो जाता है -
" यदि अल्लाह चाहता तो सबको एक गिरोह बना देता ( ताकि वह सत्कर्म करते ) लेकिन वह जिसको चाहे गुमराही में डाल देता है " 
सूरा-अन नह्ल 16 :93 
" वह लोग बिच में ही डावांडोल रहते हैं ,न इधर के और न उधर के . जिसको चाहे गुमराही में डाल देता है,और जिसे खुद अल्लाह भटका दे उनके लिए कोई रास्ता नहीं रहता "सूरा -अन निसा 4 :143 
"अल्लाह जिसको चाहे उसको भटका देता है ,और जिसको चाहे सन्मार्ग दिखा देता है "सूरा-अल मुदस्सिर 74 :31 
"अल्लाह ने जानबूझ कर उनको सन्मार्ग से भटका दिया है ,और उनके कानों और दिलों पर ठप्पा लगा दिया है "सूरा -अल जसिया 45 :23 
अल्लाह के इस काम में शैतान भी मदद करते रहते हैं .जो इस आयत से पता चलता है .
"क्या तुम नहीं जानते कि हमने इन काफिरों पर अपने शैतानों को छोड़ रक्खा है ,जो इनको गुमराह करते रहते हैं "सूरा -मरियम 19 :83 
काश वह हिन्दू पंडित जकारिया नायक से पूछते कि ,जब खुद अल्लाह ही शैतान के साथ मिलकर लोगों को गुमराह कराता रहता है ,तो असली अपराधी अल्लाह क्यों नहीं है .फिर गैर मुस्लिमों पर हमले क्यों किये जाते हैं ?जैसा कि आगे बताया गया है -
6-जिहादी मारते रहें 
क्या इसी को इस्लामी कानून कहते हैं कि ,करे अल्लाह और भरें हिन्दू या गैर मुस्लिम .फिर भी जिहादी अल्लाह की जगह गैर मुस्लिमों पर जिहाद करते रहते हैं .जैसा कि कुरान की इन आयतों में लिखा है ,
"हे ईमान वालो तुम उन सभी काफिरों से लड़ते रहो जो तुम्हारे आस पास रहते हों "सूरा -तौबा 9 :123 
"जो इमान वाले हैं ,वह हमेशा अल्लाह के लिए लड़ते रहते है "सूरा -निसा 4 :76 
"जहाँ तक हो सके तुम हमेशा सेना और शक्ति तैयार रखो ,और काफिरों को भयभीत करते रहो "सूरा -अनफाल 8 :60 
" हे नबी तुम काफिरों और मुनाफिकों के साथ सदा जिहाद करो और उन पर सख्ती करते रहो "सूरा -अत तहरिम 66 :9 .और सूरा तौबा 9 :73 
"तुम उनसे इतना लड़ो की वह बाकि न रहें ,और सभी धर्म इस्लाम हो जाएँ "सूरा -अन्फाल 8 :39 और सूरा -बकरा 2 :193 
"हे नबी तुम ईमान वालों को हमेशा लड़ाई करने पर उकसाते रहो "सूरा -अन्फाल 8 :63 


अब पाठकों से विनम्र नवेदन है कि वह पहले ऊपर दिए गए "सनातन धर्म इस्लाम "में दिए गए हिन्दू पंडितों के तर्कों को पढ़े ,फिर निष्पक्ष होकर कुरान की दी गयी आयतों को पढ़ें . फिर अपना निर्णय टिपण्णी के रूप में देने की कृपा करें .अथवा ,प्रथम अनुच्छेद में जिस ब्लॉग का हवाला दिया गया है ,उसमे उन पंडितों और आचार्यों के पते दिए गए हैं ,जो इस्लाम के भक्त है .आप उन से सवाल कर सकते हैं .




http://www.thereligionofpeace.com/Pages/Quran-Hate.htm



35 टिप्‍पणियां:

  1. ये तो ऐसे ही किसी ने बना रखी है. किसी सनातनी की तो बिलकुल नहीं लगती.

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    1. KAFI ACHCHHA SODH KIYA HAI PANE MAGAR IMANDARI KI BAT YEH HOTI KI JIS TARAH APNE LAKUM DEENAKUM WALI AYAT KA BACKGROND JANNE KI KOSHISH KI HAI QURAAN KI JIN AYATON KA APNE AGE HAWALA DIYA HAI UNKA BHEE BACKGROUND JAANNE KI KOSHISH KARTE.KASH KI HAMEN DHARM KO SAHI GALAT SABIT KARNE K ALAWA DHARM KO TALASH KARNA ATA HOTA.DHARM PAR TIPPANI ASAN HAI MAGAR DHARM KA PALAN KARKE 2 SHABD LIKHNA KATHIN HAI.KASH KI AP HINDU HI HOTE?

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  2. ओं मुर्ख है जो इस्लाम को प्यार मुहब्बत का धर्म मानते है, सेकुलर बनाने के लिए ही ये इस प्रकार का प्रलाप करते है ये तो आतंकबादी गिरोह के अतिरिक्त कुछ नहीं है.

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    1. KYA TUM SABIT KAR SAKTE HO K ISLAM AATANKWADI GEROH HAI????
      NAHI HARGIZ NAHI KAR SAKTE BROTHER....
      MAI TUMHE CHALLENGE KARTA HUN

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    2. bilkul sabit kar sakte hai , Osama bin laden , usmaan al javahiri, mulla fajalullah, hafeez saeed , ajmal kasab , afzal ye sab log tumhare nabi ka mission poora kar rahe the , gazwa - e - hind hi tumhara sapna hai na jo kabhi poora nahi hoga....

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    3. Abe Beshrm Muhammed Aslam.. Tujhe kya lagta hai.. Ye Besharmi lekar tu kitna din chalega???

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  3. DUNIYA MAY HAR BACHCHE KO PATA HAI ISLAM KI ASALIYAT .TO KYA YE HINDU ACHAYA KO MALUM NAHI

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  4. AJ BHI BHARAT MAY TODE HUAI HINDU MANDIR ISLAMI ATYACHAR KI SAKSH DETE HAI JO KOHI ISLAM KO SHANTI KA DARME MANATE HAI VE SABHI ANJANE MAY ANTAKAVAD KO SAMARTHAN AUR BADHAVA DETE HAI *****GABRIEL CHEULKAR ASHDOD ISRAEL

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  5. सत्यवादी जी को इस शोधपूर्ण और तथ्यपरक लेख के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. काश कि इस सच्चाई को पाखंडी शर्मनिरपेक्ष समझ पाते. आज तो हर और मुसलमान-मुसलमान की माला जपी जा रही है. ऐसा लगता ही नहीं कि हम भारत में हैं, ऐसा लगता है कि सऊदी अरब या पाकिस्तान में रह रहे हो. ये $%$%^$%^%$^ शर्मनिरपेक्ष हिंदुओं के कलंकी नेता ही इस सबके लिए जिम्मेदार है.

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  6. "मुहम्मद अल्लाह के ऐसे रसूल हैं ,जो काफिरों के प्रति कठोर और अपने लोगों ( मुसलमानों ) के प्रति अत्यंत दयालु हैं "सूरा -अल फतह 48 :29
    सब जानते हैं कि मुसलमान रसूल का अनुकरण करते हैं ,और जब रसूल ही गैर मुस्लिमों से दोस्ती और भाईचारे को बुरा बताते हों ,तो मुसलमानों क्या मजाल जो हिन्दुओं से दोस्ती कर सकें .यही कारण था कि जब केजरीवाल मौलाना अरशद मदनी के पास दोस्ती के लिए गए तो उनको भगा दिया गया .और अन्ना का आन्दोलन फेल हो गया .( जागरण 28 दिसंबर 2011 )याद रखिये गाँधी ने भी यही किया था .



    very true.

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    1. bilkul galat kaha hindustan ki azadi me gandhi ji ka sabse pahle maulvio ne sath diya tha aur bhut sare maulvio ne kurbani di thi is desh ke khatir

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  7. सत्यवादी जी
    प्रणाम ..
    एक शंका है जैसा की (http://sanatan-dharm-islam.blogspot.com/)का लेख पढ़ने के बाद मेरा मत बना है ,कि क़ुरआन मजीद कि आयतें भिन्न -भिन्न तत्कालीन परिस्तिथियों में उतरीं ..और उन परिस्थितियों के अनुसार ही वो आयतें उस समय और परिस्थिति के लिए ही मान्य हैं ...
    इससे तो यही प्रतीत होता है कि वर्तमान समय मे उन आयतों कि व्याख्या मौलवी और इस्लामी धर्मावलंबी अपने फायदे के लिए कर रहें हैं ..
    परन्तु आपके लेख मे भी हदीस से उदहारण दिए गए हैं ,क्या एक ही आयत कि व्याख्या अलग अलग है हदीस के अनुसार ..?

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  8. kya bakwas krta hai ye blog me.tum jaise logo ke karan aaj hindustan itna piche hai.

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  9. धर्म का उद्देश्य - मानव समाज में सत्य, न्याय एवं नैतिकता (सदाचरण) की स्थापना करना ।
    व्यक्तिगत (निजी) धर्म- सत्य, न्याय एवं नैतिक दृष्टि से उत्तम कर्म करना, व्यक्तिगत धर्म है ।
    सामाजिक धर्म- मानव समाज में सत्य, न्याय एवं नैतिकता की स्थापना के लिए कर्म करना,
    सामाजिक धर्म है । ईश्वर या स्थिर बुद्धि मनुष्य सामाजिक धर्म को पूर्ण रूप से निभाते है ।
    धर्म संकट - जब सत्य और न्याय में विरोधाभास होता है, उस स्थिति को धर्मसंकट कहा
    जाता है । उस स्थिति में मानव कल्याण व मानवीय मूल्यों की दृष्टि से सत्य और
    न्याय में से जो उत्तम हो, उसे चुना जाता है ।
    धर्म को अपनाया नहीं जाता, धर्म का पालन किया जाता है ।
    व्यक्ति के कत्र्तव्य पालन की दृष्टि से धर्म -
    राजधर्म, राष्ट्रधर्म, प्रजाधर्म, पितृधर्म, पुत्रधर्म ।
    धर्म सनातन है भगवान शिव (त्रिमूर्ति) से लेकर इस क्षण तक ।
    राजतंत्र होने पर धर्म का पालन राजतांत्रिक मूल्यों से, लोकतंत्र होने पर धर्म का पालन
    लोकतांत्रिक मूल्यों के हिसाब से किया जाता है ।

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  10. aapki koi bhi baat jhoot to nahi lagti, kyonki kafi kareeb se is kaum ko dekha hai meine

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  11. abe randi ki aulad hindu dharma ka braham sutra to dhek that is ekam brahama dutuye netsnam nest kinchan nest hai .means yek hi brahama hai dusara kadapi nahi hai.arabi me la ilaha illalaha.

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    1. Aur Bhadwee Wo Allah Kis Cheez se ye Kayanat banayi ya kya kya RAW MATERIALS lage the iss ka bhi khulasa kar de???
      Tu kya baatayega ..
      tera Allah ko bhi pata nahi hoga...

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    2. KISI DHARM SAMPRADAY KE KUCHH ADHARMI LOGON KE NAAM LIKH DENA ASAN HAI.KIS DHARM MEN APKO ATANKWADI NAHIN MILJAYENGE JO US DHARM KO BADNAAM NA KARRAHE HON.APKO KYA LAGTA HAI IS TARAH KI ASABHYA BHASHA KA PRAYOG KARKE AAP HINDU DHARM KA NAAM ROSHAN KARRAHE HAI.KASH KI AP SACHCHE HINDU HOTE.HINDU DHARM KO AP JAISE LOGON SE KHATRA HAI.

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  12. mera spashat abhimat hai ki kuaran dharm aur adharm ke antar aur parinam ki vyakhya karta hai.kuaran ke anusar ram allah ke nek bande aur ravan kafir hai.keval allah ko poojo matlab keval dharm ko poojo.

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  13. कितनी मूर्खता की बात है ।।
    मित्रो आप इस चित्र मे देख सकते है कि एक मासुम बच्ची की एक कुत्ते से शादी करायी जा रही है ।।
    इस बच्ची के पिता को एक पाखण्डी ज्योतीषी ने सलाह दि की इस बच्ची ने पिछले जन्म मे बहुत पाप किये थे अतः उन पापो से मुक्ती हेतु इसकी शादी एक कुत्ते से कराई जाये तभी इसका यह जिवन सुखी हो सकेगा ।।
    और बडे ही दुर्भाग्य की बात हि की उस मुर्ख पिता ने यह बात मान भी ली ।।।
    कितने शर्म की बात है कि जो बच्ची अपने वर्तमान जिवन से भी अन्भीग्य है उसे पुनर्जन्म की बकवास बातो मे डाल कर ये मुर्खतापूर्ण कार्य किया जा रहा है।
    वैसे तो पुनर्जन्म वाली बात एक कोरी बकवास है,
    लेकीन पुनर्जन्म के संदर्भ मे यह भी कहा जाता है कि बहुत किस्मत वालो को मनुस्य यौनी से जन्म लेने को मिलता है, और जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है उसे ही दुबारा मनुष्य जीवन मिलता है ।।
    लेकीन अब सवाल यह उठता है कि अगर इस बच्ची ने पिछले जन्म मे इतने पाप किये थे तो उसे इस जन्म मे दुबारा मनुष्य जिवन क्यो मिला ??
    एक और अहम बात कि हुन्दु धर्म मे यह भी माना जाता है कि एक बार शादी होने के बाद वो अगले सात जन्मो तक पती पत्नी रहते है, तो इस बच्ची की शादी एक कुत्ते से कराई जा रही है तो क्या अगले सात जन्मो यह कुत्ता तक उसका पती रहेगा या फिर वो पिछले जन्म मे भी उसका पती हिथा लेकिन बहुत ज्यादा पाप करने की वजह से उसे इस जन्म मे कुत्ते का जन्म लिया ???

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  14. असत्यमेव जयते ।
    असत्य की विजय को सत्य की विजय किस तरह दिखाया जाता है देखिये-
    अर्जुन पुरस्कार उस व्यक्ति के नाम पर दिया जाता है ।
    1. जिसको सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बनाने के लिए एकलव्य का अंगूठा काट लिया जाता है ।
    2. जिसको सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बनाने के लिए कर्ण को रंगशाला में आयोजित प्रतियोगिता में सिर्फ इसलिए भाग नहीं लेने दिया जाता क्योंकि वो क्षत्रिय नहीं था । दुर्योधन द्वारा अंग प्रदेश का राजा बनाये जाने पर भी उसको प्रतियोगिता में प्रतिभाग नहीं करने दिया जाता है ।
    3. जिसको सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर साबित करने के लिए द्रोपदी के स्वयंवर में द्रोपदी कर्ण को शूद्र बताकर मछली की आँख भेदन से रोक देती है ।
    4. जो भीष्म और कर्ण जैसे योद्धाओं का वध सामने से नहीं कर सका बल्कि सभी का वध धोखे और छल कपट से ही किया ।
    सर्वश्रेष्ठ गदादारी, महाबली उस भीम को कहा जाता है-
    5. जो कभी भी दुर्योधन को गदायुद्ध में परास्त नहीं कर सका ।
    6. जिसने दुर्योधन का वध युद्ध के नियमों के विरुद्ध जाकर जंघा पर प्रहार करके किया ।
    द्रोणाचार्य पुरस्कार उस गुरु के नाम पर दिया जाता है-
    7. जो अपने शिष्य को सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए उस एकलव्य का अंगूठा गुरु दक्षिणा में माँग लेता है जिसको उसने कभी शिक्षा ही नहीं दी ।
    8. जो एक सौ पाँच शिष्यों को दीक्षा देता है लेकिन उनमे से सिर्फ पास एक ही होता है ।
    धर्मराज उस युद्धिष्ठर को कहा जाता है -
    9. जो अपनी पत्नी और भाइयों को जुएँ में दाँव पर लगा देता है और हार भी जाता है ।
    10. जो सिर्फ इसलिए जुआ खेलता है कि उसके ज्येष्ठ पिता ने उसको ऐसा करने की आज्ञा दी है ।
    11. जो सिर्फ इसलिए झूठ बोलता है कि उसके गुरु का वध किया जा सके और वो युद्ध जीत सके ।
    फिर भी सत्यमेव जयते

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    उत्तर
    1. कर्ण ने गलत का साथ दिया वो जनता था की उसका हाल क्या होना है
      फिर भी दोस्ती की खातिर किया
      2-दुर्योधन ने छल से उसके पुत्रो को मरवाया था
      और उसको वरदान था की उसकी जांघ ही कमजोर है वरना पूरा शरीर वज्र का है
      3-अश्वत्थामा उस युद्ध में एक कुंजर अर्थात हाथी
      था जो भीम के द्वारा मारा गया
      4-युधिस्ठिर को धर्मराज इस लिए कहा जाता था की वो कभी झूठ नहीं बोलते थे
      5-भीष्म युद्ध में खुद को मर जाना पसंद किया
      था
      6 कर्ण ने खुद अपने गुरु को धोखा दिया था
      जिसकी वजह से उसको मरणा पड़ा
      6-गुरु द्रोणा ने अर्जुन को इसलिए पसंद किया वो उन सबमे सबसे ज्यादा एकाग्र था
      7-अगर गुरु द्रोणा उसका अंगूठा ना काटते तो उसका आज कोई भी नाम नहीं होता
      आज भी धनुष चलाने वाले अगुठे का प्रयोग नहीं करते
      8-कर्ण को एक सूत पुत्र था जिसको सूत ने पाला था
      उसको आमंत्रण भी नहीं मिला।था वो दुर्योधन के साथ आया था मेहमान बन कर
      इसलिए वो भी भाग नहीं ले सकता था
      और वो कोई राजा भी नहीं था।

      हटाएं
  15. आ बैल मुझे मार !!

    दोस्तो यह कहावत सबसे ज्यादा भगवानो पर लागु होती है !!
    भगवान वरदान हमेशा राक्षसो के हि दिया करते थे और जब भी किसी राक्षस को वरदान मिलता तो वोदेवी देवताओ और भगवान की नाक मे दम कर देता !!
    महेसासुर को ब्रम्हा ने वरदान दिया उसने देवताको की बैड बजाई !!

    रावण को संकर ने वरदान दीये उसने स्वर्ग का मर्ग बनाने का काम लगाकर भगवानो को परेशान कर डाला !!

    हिरण्य कश्यप को ब्रम्हा ने वरदान दिये उसने विष्णु की नाक मे दम कर दिया ।।

    दैत्यराजा दानवीर राजा बली को संकर ने वरदान दिये उसने तीनो लोको मे हाहाकार मचा दिया !!

    दैत्यगुरु शुक्राचार्य को संकर भगवान ने राक्षदो को जिनंदा करने का वरदान दिया तो उन्होनेभी युध्द मे मरे हुए राक्षसो के जिंदा कर कर के देवताओ की नाक मे दम कर दिया !!

    और भसमासुर ने तो हद कर दि थी संकर भगवान ने उसे वरदान दिया था कि वो जिसके भी सिर पर हाथ रख देगा वो भस्म हो जायेग तो उसने न जाने कितने देवताओ को उसने भस्म कर दिया था, 36 करोड़ मे से कै देवता को भस्मासुर ने कम कर दिया था और तो और वो स्वय़ं संकर भगवान को हि भस्म करने चला था तो फिर जैसे तैसे विष्णू ने उन्हे बचाया !!

    अगर राक्षसो के हाथो सबसे ज्यादा पिटाई किसी देवता कि हुइ है तो वो इन्द्र की जब भी भगवान किसी देवता को वरदान देते तो वो सबसे पहले इन्दर पर हमला कर स्वर्ग पर कब्जा करनेकी सोचता !!
    सोचने वाली बात यह है कि आज कल इंसान भी अगर किसी को हथीयार जैसे बंदुक वगैरह बेचता है तो लाईसेंस वगैरह बनवाकर निश्चीत कर लिया जाता है कि कही वो इसका विनाशकारी उपयोग ना करे, तोभी भगवानो से वरदान देते समय एसा कभी क्यो नही सोचा की वो खुद के स्वार्थ के लिये उसका विनाशकारी उपयोग करेगा !!!

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  16. इस्लाम और पर्यावरण: एक झलक


    जल और थल में बिगाड़ फैल गया खुद लोगों की ही हाथों की कमाई के कारण, ताकि वह उन्हें उनकी कुछ करतूतों का मजा चखाए, कदाचित वे बाज आ जाएं। (कुरआन-30:41)
    पैगम्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम)ने फरमाया अगर कयामत आ रही हो और तुम में से किसी के हाथ में कोई पौधा हो तो उसे ही लगा ही दो और परिणाम की चिंता मत करो।

    पैगम्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम)ने फरमाया-जिसने अपनी जरूरत से ज्यादा पानी को रोका और दूसरे लोगों को पानी से वंचित रखा तो अल्लाह फैसले वाले दिन (बदला दिया जाने वाले दिन) उस शख्स से अपना फज्लो करम रोक लेगा।
    पैगम्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम)ने फरमाया-जो बंदा कोई पौधा लगाता है या खेतीबाड़ी करता है। फिर उसमें से कोई परिंदा, इंसान या अन्य कोई प्राणी खाता है तो यह सब पौधा लगाने वाले की नेकी (पुण्य) में गिना जाएगा।
    पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. ने फरमाया-जो भी खजूर का पेड़ लगाएगा, उस खजूर से जितने फल निकलेंगे, अल्लाह उसे उतनी ही नेकी देगा।

    पैगम्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम)ने फरमाया- जिस घर में खजूर का पेड़ हो, वह भुखमरी से परेशान नहीं हो सकता।

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  17. पंडित वेद प्रकाश उपाध्याय का निर्णय:
    पंडित वेद प्रकाश उपाध्याय ने लिखा है कि जो व्यक्ति इस्लाम स्वीकार न करे और मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) और उनके दीन को न माने, वह हिन्दू भी नहीं है, इसलिए कि हिन्दुओं के धार्मिक ग्रन्थ वेदों में कलकी अवतार और नराशंस के इस धरती पर आ जाने के बाद उनको और उनके दीन को मानने पर बल दिया गया है।

    ईमान की ज़रूरत
    मरने के बाद के जीवन के अलावा इस संसार में भी ईमान और इस्लाम हमारी ज़रूरत है और मनुष्य का कर्तव्य है कि एक स्वामी की उपासना और आज्ञापालन करे।
    वह कैसा मनुष्य है, जो अपने सच्चे मालिक को भूल कर दर दर झुकता फिरे।


    मेरे प्रिय पाठको! मौत का समय न जाने कब आ जाए। जो सांस अन्दर है, उसके बाहर आने का भरोसा नहीं और जो सांस बाहर है उसके अन्दर आने का भरोसा नहीं। मौत से पहले समय है। इस समय में अपनी सबसे पहली और सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी का आभास कर लें। ईमान के बिना न यह जीवन सफ़ल है और न मरने के बाद आने वाला जीवन।
    कल सबको अपने स्वामी के पास जाना है। वहाँ सबसे पहले ईमान की पूछताछ होगी। हाँ, इसमें मेरा व्यक्तिगत स्वार्थ भी हैं कि कल हिसाब के दिन आप यह न कह दें कि हम तक पालनहार की बात पहँचाई ही नहीं गयी थी।

    अगर ये सच्ची बातें आपके दिल में घर कर गयी। तो आइए! सच्चे दिल और सच्ची आत्मा वाले मेरे प्रिय मित्र उस मालिक को गवाह बनाकर और ऐसे सच्चे दिल से जिसे दिलों का हाल जानने वाला मान ले, इक़रार करें और प्रण करें:
    ‘‘अशहदु अल्लाइलाह इल्लल्लाहु व अशहदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू’’
    ‘‘मैं गवाही देता हूँ इस बात की कि अल्लाह के सिवा कोई उपासना योग्य नहीं (वह अकेला है उसका कोई साझी नहीं) और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद अल्लाह के बन्दे और उसके रसूल (दूत) हैं’’।
    दयावान और करीम मालिक मुझे और आपको इस रास्ते पर मरते दम तक जमाए रखे। आमीन!
    इस इस्लाम और ईमान के कारण आपकी आज़माइश भी हो सकती है मगर जीत सदैव सच की होती है। यहां भी सत्य की जीत होगी और यदि जीवन भर परीक्षा से जूझना पड़े तो यह सोचकर सहन कर लेना कि इस संसार का जीवन तो कुछ दिनों तक सीमित है, अपने मालिक को प्रसन्न करने के लिए और उसको आँखों से देखने के लिए ये परीक्षाएँ कुछ भी नहीं हैं।
    SUNNIKING TEAM INDIA

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  18. Allah ne jab insan ko banaya to katana karane ki jururat kyo aai. Kya aallh bhi insano ki tarah galatiya karata hai.to insan aur allah me farkh kya rah gaya.

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  19. Jab kuran me likha hai ki allah ne apane hatose mitti lekar insan ko hai banaya to allah ko sirf hat the akhe nahi thi sar nahi tha to fhir allah nirakar kaise hua kitana jhut bollogge allah walo?

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  20. मुसलमानों ने स्पेन पर लगभग 800 वर्ष शासन किया और वहाँ उन्होंने कभी किसी को इस्लाम स्वीकार करने के लिए मज़बूर नहीं किया।
    मुसलमानों ने भारत पर लगभग 1000 वर्ष शासन किया। यदि वे चाहते तो भारत के एक-एक ग़ैर-मुस्लिम को इस्लाम स्वीकार करने पर मज़बूर कर देते क्योंकि इसके लिए उनके पास शक्ति थी। आज 80 प्रतिशत ग़ैर-मुस्लिम भारत में हैं जो इस तथ्य के गवाह हैं कि इस्लाम तलवार से नहीं फैलाया गया।

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