शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

मुशरिक कौन हैं ?


अक्सर देखा गया है कि भारत में जब भी "वन्दे मातरम "या "भारत माता कि जय "कहने कि बात हो .और जब भी हिन्दुओं के महापुरुषों के जन्म स्थानों पर इमारत (मंदिर ) बनाने की बात होती है ,तो मुल्ले मौलवी मुसलमानों को ऐसा करने से रोक देते हैं .और यह कहकर मुसलमानों को भड़का देते हैं कि ऐसा करना " शिर्क Polytheism " है और एक प्रकार से महापाप है .जिसे अल्लाह कभी माफ़ नहीं करेगा .शिर्क के बारे में कुरान के हिंदी अनुवाद के आखिर में " पारिभाषिक शब्दावली " में यह बताया गया है ,
शिर्क =अल्लाह के आलावा किसी पर आदर भाव प्रकट करना ,अल्लाह के साथ किसी को शामिल करना ,प्रशंसा करना ,स्तुति ,वंदन करना .विनय भाव प्रकट करना ,अल्लाह के अतिरिक्त किसी को मदद के लिए पुकारना ,या उसे सिजदा करना भी शिर्क है ( कुरान का हिंदी अनुवाद ,फारुख खान . मकतबा अल हसनात पेज 1245 )
इस विषय को और अच्छी तरह से समझने के लिए हमें भारतीय और इस्लामी मान्यताओं में अंतर जानना होगा ,भारतीय किसी महापुरुष के जन्मस्थान को पवित्र और तीर्थ मानते हैं ,यहांतक सम्पूर्ण भारत कि भूमि को पवित्र मानकर वंदना(तारीफ़ ) करते हैं लेकिन मुसलमान अपने रसूल ,औलिया ,और सूफियों के दफ़न स्थान ( कब्र )को मुक़द्दस मानकर वहां जियारत करके मन्नत मंगाते हैं .इसी दोहरी नीति का कुरान और हदीसों के आधार पर खुलासा किया जा रहा है .ताकि एक गिरोह दुसरे पर अपने विचार जबरदस्ती नहीं थोपे ,देखिये -
1-कुरान में कबर की पूजा 
कुरान की सूरा कहफ़ 18 :18 और 22 में कुछ ऐसे पवित्र व्यक्तियों का वर्णन है ,जो इसा मसीह को मानते थे ,और अपनी जन बचाने के लिए एक गुफा में बरसों तक अल्लाह की कृपा से बिना खाए पिए सोते रहे थे , और उनके साथ एक कुत्ता भी था .बाद में जब वह मर गए तो जब लोग उनके उनके ऊपर कोई ईमारत बनाना चाहते तो बहस होने लगी , इस पर कुरान में यह लिखा है ,
وَكَذَلِكَ أَعْثَرْنَا عَلَيْهِمْ لِيَعْلَمُوا أَنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ وَأَنَّ السَّاعَةَ لاَ رَيْبَ فِيهَا إِذْ يَتَنَازَعُونَ بَيْنَهُمْ أَمْرَهُمْ فَقَالُوا ابْنُوا عَلَيْهِم بُنْيَانًا رَّبُّهُمْ أَعْلَمُ بِهِمْ قَالَ الَّذِينَ غَلَبُوا عَلَى أَمْرِهِمْ لَنَتَّخِذَنَّ عَلَيْهِم مَّسْجِدًا
"जब वह आपस में विवाद कर रहे थे की यहाँ कितने लोग थे जिनके साथ एक कुत्ता था तो,एक ने कहा कि सही संख्या सिर्फ अल्लाह ही जानता है ,और उसकी बात सब से भारी पड़ी ,तब लोगों ने यह तय किया कि उनके ऊपर एक उपासना स्थल बना दिया जाये " सूरा - कहफ़ 18 :21 
इमाम इब्न जरीर ने अपनी तफ़सीर "अत तबरी " इस आयत के बारे में लिखा है कि पहले मुशरिक उस जगह पर एक ईमारत बनाना चाहते थे , ताकि वहां इबादत कर सके . लेकिन बाद में मुसलमानों ने कहा कि वहां मस्जिद बनाना मुनासिब होगा ,ताकि मुस्लमान नमाज पढ़ सकें (उस समय वहां इसाई अधिक थे जो चर्च बनाना चाहते थे ).
"فقال الـمشركون: نبنـي علـيهم بنـياناً، فإنهم أبناء آبـائنا، ونعبد الله فـيها، وقال الـمسلـمون: بل نـحن أحقّ بهم، هم منا، نبنـي علـيهم مسجداً نصلـي فـيه، ونعبد الله فـيه
Tafsir at-Tabri (15/149)
2-काबा के पास भी 70 कबरें हैं 
" अली कारी ने कुरान की सूरा कहफ़ 18 :21 की तफ़सीर में "मिरकात शरह अल मिश्कात " में इस आयात का खुलासा करते हुए लिखा है कि मस्जिदे हराम "काबा " के पास जो हातीम ( semicircular wall ) है और जो हजरुल अस्वद ( black stone ) और मीजाब के पास है ,उसमे हजरत इस्माइल की कब्र भी है .और उस जगह की जियारत करने और वहां पर दुआ मांगने में कोई बुराई नहीं है .
Mirqat, Sharh al Mishqaat, Volume No. 2, Page No. 202]


"इब्ने उमर ने कहा है कि रसूल ने कहा है ,सचमुच ही मस्जिदे खैफ में सत्तर 70नबियों की सामूहिक कबरें मौजूद है ,और इमाम हैसमी ने इसकी तस्दीक करते हुआ कहा कि यह हदीस सही है .
وعن ابن عمر أن النبي صلى الله عليه وسلم قال‏:‏
‏"‏في مسجد الخيف قبر سبعون نبياً‏"‏‏.‏
رواه البزار ورجاله ثقات‏
Imam al-Haythami in Majma az Zawaid, Volume No. 3 Bab fi Masjid al Khayf, Hadith #5769"


3-कब्रों की जियारत जायज है 
" इसी तरह प्रसिद्ध हनफी इमाम मुल्ला अली कारी ने "मिरकात शरह अल मिश्कात में " यह भी लिखा है कि कब्रों के ऊपर पक्का निर्माण करने कि अनुमति है ( मुबाह है ) ताकि लोग आसानी से प्रसिद्ध मशायख ( शेखों का बहु वचन ) और उलेमाओं की कब्रों की जियारत कर सकें .
وقد أباح السلف البناء على قبر المشايخ والعلماء المشهورين ليزورهم الناس ويستريحوا بالجلوس فيه
Mirqaat Sharh al Misshqaat, Volume No. 4, Page No. 69]
महान शाफ़ई विद्वान् सूफी इमाम अब्दुल वहाब अल शरनी ने कहा की मेरे उस्ताद अली और उसके भाई अफजलुद्दीन कहते थे "नबियों और महान औलियाओं की कब्रों पर गुम्बद और साया बनाना चाहिए ."
"كانوا يقولون أن الأنبياء والأولياء فقط عظيمة تستحق عن القباب والأوراق
Al-Anwar al Qudsiya, Page No. 593
4-रसूल की कब्र का दर्शन करो 
"अब्दुल्लाह इब्न उमर ने कहा की रसूल ने कहा कि मेरी मौत के बाद मेरी कब्र का दर्शन करना मुझे जिन्दा देखने के समान है .
عَنِ ابْنِ عُمَرَ رضي اﷲ عنهما قَالَ : قَالَ رَسُوْلُ اﷲِ صلي الله عليه وآله وسلم : مَنْ زَارَ قَبْرِي بَعْدً مَوْتِي کَانَ کَمَنْ زَارَنِي فِي حَيَاتِي


Tibrani Volume 012: Hadith Number 406

Bayhaqi Shab ul Iman Volume 003: Hadith Number 489
"इमाम इब्न कदम ने कहा कि रसूल ने कहा है कि मेरी मौत के बाद जो भी व्यक्ति हज्ज करे ,वह मेरी कब्र कि जियारत जरुर करे क्योंकि मेरी जियारत मुझे जीवित देखने के बराबर है ,और बाजिब है.
ويستحب زيارة قبر النبي لما روى الدارقطني بإسناده عن ابن عمر قال: قال رسول الله : «من حج فزار قبري بعد وفاتي فكأنما زارني في حياتي» وفي رواية، «من زار قبري وجبت له شفاعتي


Imam Ibn Quduma in al-Mughni, Volume No. 5, Page No. 381
5-रसूल की आत्मा 
"अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा है कि मौत के बाद अल्लाह मेरी आत्मा वापिस लौटा देगा ,और मेरी मौत के बाद जो भी मुझे सलाम करेगा ,मैं उसके सलाम का जवाब दूंगा .


عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه أَنَّ رَسُوْلَ اﷲِ صلي الله عليه وآله وسلم قَالَ : مَا مِنْ أَحَدٍ يُسَلِّمُ عَلَيَّ إِلَّا رَدَّ اﷲُ عَلَيَّ رُوْحِي، حَتَّي أَرُدَّ عَلَيْهِ السَّلَامَ
Abu Dawood- Book 4, Number 2036
6-रसूल की लाश नहीं सडेगी
"अब्दुल दरदा ने कहा कि रसूल ने कहा है ,अल्लाह ने जमीन को मेरे मृतक शरीर को सड़ाने से रोक दिया है .और अल्लाह ने यह विशेष सुविधा अपने नबियों को प्रदान की है .
Sunan Ibn Maja Volume 001: Hadith Number 1626


Abu Dawud Book 002, Hadith Number 1526
7--रसूल को सलाम वाजिब है 
काजी इलयाद ने अश शिफा में लिखा है कि रसूल कि कब्र की जियारत करना और उन पर सलाम करना बाजिब और सवाब की बात है .
في حكم زيارة قبره صلى الله عليه وسلم، وفضيلة من زاره وسلم عليه
و زيارة قبره صلى الله عليه وسلم سنة من سنن المسلمين مجمع عليها، وفضيلة مرغب فيها: روى عن ابن عمر


Qadhi Iyaad in Ash-Shifa, Volume No.2, Page No. 53]

8-कुरान कथन 
अभीतक आपके सामने शिर्क मृतक लोगों की कब्रों की जियारत करने और उनसे दुआ मागने के बारे में हदीसों के विचार दिए गए हैं ,अब देखिये कि इसके बारे में कुरान क्या कहता है ,
"यह लोग अल्लाह के अलावा जिस को भी पुकारते हैं, वह उनकी किसी भी तरह जवाब नहीं दे सकते " सूरा -रअद 13 :16 
"जो लोग अल्लाह के अलावा जिस को भी पुकारते हैं ,वे केवल गुमान के पीछे चलते हैं ,और अटकल से काम लेते हैं "सूरा -युनुस 10 :66 
यद्यपि हिन्दू धर्म में भी मृतकों ( भूतों )की उपासना करने को तामसी ( निकृष्ट ) बताया है और केवल इश्वर की शरण में जाने को कहा है ,देखिये
भूतान्प्रेत गणान्श्चादि यजन्ति तामसा जनाः-गीता17:4
"भूत प्रेतों की उपासना तामसी लोग करते हैं "
तमेव शरणं गच्छ सर्व भावेन भारतः-गीता18:62
"हे भारत तुम हरेक प्रकार से ईश्वर की शरण में जाओ 
फिर भी मुल्ले हिन्दुओं पर मुशरिक होने का लांछन लगा देते है मुल्ले मौलवियों की कथनी और करनी में काफी अंतर होता है ,यह मुसलमानों से कुछ और कहते हैं और कुछ और ही करवाते हैं इसे साबित करने की लिए एक विडियो लिंक दिया जा रहा है , जिसमे मुसलमान एक पीर को सिजदा कर रहे हैं 
Sajdah to Mullah Tahir-ul-Qadri! Mullah Shirk مشرک ملا اور شرک
http://www.youtube.com/watch?v=tpnC68_OUxs&feature=related
इस विडिओ में नज्म की में सिर्फ दो लाईने दी हैं ,हम चारों दे रहे हैं ,
" जिस जा नजर आते हो ,सिजदा वहीँ करता हूँ ,इस से नहीं कुछ मतलब ,काबा हो या बुतखाना ,
एक हाथ में है तस्बीह ,एक हाथ में पैमाना , कुछ होश नहीं मुझको ,मस्जिद है या मैखाना "


अब सभी पाठकों से अनुरोध है कि पूरा लेख पढ़ने के बाद निर्णय करें कि मुशरिक कौन है .?


http://www.ahlus-sunna.com/index.php?option=com_content&view=article&id=61&Itemid=120

बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

इमाम हुसैन का भारतप्रेम !!


यह एक सर्वमान्य सत्य है कि इतिहास को दोहराया नहीं जा सकता है और न बदलाया जा सकता है ,क्योंकि इतिहास कि घटनाएँ सदा के लिए अमिट हो जाती है .लेकिन यह भी सत्य है कि विज्ञान कि तरह इतिहास भी एक शोध का विषय होता है .क्योंकि इतिहास के पन्नों में कई ऐसे तथ्य दबे रह जाते हैं ,जिनके बारे में काफी समय के बाद पता चलता है .ऐसी ही एक ऐतिहासिक घटना हजरत इमाम हुसैन के बारे में है वैसे तो सब जानते हैं कि इमाम हुसैन मुहम्मद साहिब के छोटे नवासे ,हहरत अली और फातिमा के पुत्र थे .और किसी परिचय के मुहताज नहीं हैं ,उनकी शहादत के बारे में हजारों किताबें मिल जाएँगी .काफी समय से मेरे एक प्रिय मुस्लिम मित्र हजरत इमाम के बारे में कुछ लिखने का आग्रह कर रहे थे ,तभी मुझे अपने निजी पुस्तक संग्रह में एक उर्दू पुस्तक "हमारे हैं हुसैन " की याद आगई ,जो सन 1960 यानि मुहर्रम 1381 हि० को इमामिया मिशन लखनौउसे प्रकाशित हुई थी .इसकी प्रकाशन संख्या 351 और लेखक "सय्यद इब्न हुसैन नकवी " है .इसी पुस्तक के पेज 11 से 13 तक से कुछ अंश लेकर ,उर्दू से नकवी जी के शब्दों को ज्यों का त्यों दिया जा रहा , जिस से पता चलता है कि इमाम हुसैन ने भारत आने क़ी इच्छा प्रकट क़ी थी (.फिर इसके कारण संक्षिप्त में और सबूत के लिए उपलब्ध साइटों के लिंक भी दिए जा रहे हैं .)
 1-इमाम क़ी भारत आने क़ी इच्छा 
नकवी जी ने लिखा है "हजरत इमाम हुसैन दुनियाए इंसानियत में मुहसिने आजम हैं,उन्होंने तेरह सौ साल पहले अपनी खुश्क जुबान से ,जो तिन रोज से बगैर पानी में तड़प रही थी ,अपने पुर नूर दहन से से इब्ने साद से कहा था "अगर तू मेरे दीगर शरायत को तस्लीम न करे तो , कम अज कम मुझे इस बात की इजाजत दे दे ,कि मैं ईराक छोड़कर हिंदुस्तान चला जाऊं"
नकवी आगे लिखते हैं ,"अब यह बात कहने कि जरुरत नहीं है कि ,जिस वक्त इमाम हुसैन ने हिंदुस्तान तशरीफ लाने की तमन्ना का इजहार किया था ,उस वक्त न तो हिंदुस्तान में कोई मस्जिद थी ,और न हिंदुस्तान में मुसलमान आबाद थे .गौर करने की बात यह है कि,इमाम हुसैन को हिंदुस्तान की हवाओं में मुहब्बत की कौन सी खुशबु महसूस हुई थी ,कि उन्होंने यह नहीं कहा कि मुझे चीन जाने दो ,या मुझे ईरान कि तरफ कूच करने दो ..उन्होंने खुसूसियत से सिर्फ हिंदुस्तान कोही याद किया था 
गालिबन यह माना जाता है कि हजरत इमाम हुसैन के बारे में हिन्दुस्तान में खबर देने वाला शाह तैमुर था .लेकिन तारीख से इंकार करना नामुमकिन है .इसलिए कहना ही पड़ता है कि इस से बहुत पहले ही " हुसैनी ब्राह्मण "इमाम हुसैन के मसायब बयाँ करके रोया करते थे .और आज भी हिंदुस्तान में उनकी कोई कमी नहीं है .यही नहीं जयपुर के कुतुबखाने में वह ख़त भी मौजूद है जो ,जैनुल अबिदीन कि तरफ से हिन्दुतान रवाना किया गया था .
इमाम हुसैन ने जैसा कहा था कि ,मुझे हिंदुस्तान जाने दो ,अगर वह भारत की जमीन पर तशरीफ ले आते तो ,हम कह नहीं सकते कि उस वक्त कि हिन्दू कौम उनकी क्या खिदमत करती"
2-इमाम हुसैन की भारत में रिश्तेदारी 
इस्लाम से काफी पहले से ही भारत ,इरान ,और अरब में व्यापार होता रहता था .इस्लाम के आने से ठीक पहले इरान में सासानी खानदान के 29 वें और अंतिम आर्य सम्राट "यज्देगर्द (590 ई ) की हुकूमत थी .उस समय ईरान के लोग भारत की तरह अग्नि में यज्ञ करते थे .इसी लिए "यज्देगर्द" को संस्कृत में यज्ञ कर्ता भी कहते थे .
प्रसिद्ध इतिहासकार राज कुमार अस्थाना ने अपने शोधग्रंथ "Ancient India " में लिखा है कि सम्राट यज्देगर्द की तीन पुत्रियाँ थी ,जिनके नाम मेहर बानो , शेहर बानो , और किश्वर बानो थे .यज्देगर्द ने अपनी बड़ी पुत्री की शादी भारत के राजा चन्द्रगुप्त द्वितीय से करावा दी थी .जिसकी राजधानी उज्जैन थी ..और राजा के सेनापति का नाम भूरिया दत्त था .जिसका एक भाई रिखब दत्त व्यापर करता था . .यह लोग कृपा चार्य के वंशज कहाए जाते हैं .चन्द्रगुप्त ने मेहर बानो का नाम चंद्रलेखा रख दिया था .क्योंकि मेहर का अर्थ चन्द्रमा होता है ..राजाके मेहर बानो से एक पुत्र समुद्रगुप्त पैदा हुआ .यह सारी घटनाएँ छटवीं शताब्दी की हैं
. यज्देगर्द ने दूसरी पुत्री शेहर बानो की शादी इमाम हुसैन से करवाई थी . और उस से जो पुत्र हुआ था उसका नाम "जैनुल आबिदीन " रखा गया .इस तरह समुद्रगुप्त और जैनुल अबिदीन मौसेरे भाई थे .इस बात की पुष्टि "अब्दुल लतीफ़ बगदादी (1162 -1231 ) ने अपनी किताब "तुहफतुल अलबाब " में भी की है .और जिसका हवाला शिशिर कुमार मित्र ने अपनी किताब "Vision of India " में भी किया है .
3-अत्याचारी यजीद का राज 
इमाम हुसैन के पिता हजरत अली चौथे खलीफा थे . और उस समय वह इराक के शहर कूफा में रहते थे . हजरत prm अली सभी प्रकार के लोगों से प्रेमपूर्वक वर्ताव करते थे . उन के कल में कुछ हिन्दू भी वहां रहते थे .लेकिन किसी पर भी इस्लाम कबूल करने पर दबाव नहीं डाला जाता था .ऐसा एक परिवार रिखब दत्त का था जो इराक के एक छोटे से गाँव में रहता था ,जिसे अल हिंदिया कहा जाता है . जब सन 681 में हजरत अली का निधन हो गया तो , मुआविया बिन अबू सुफ़यान खलीफा बना . वह बहुत कम समय तक रहा .फउसके बाद उसका लड़का यजीद सन 682 में खलीफा बन गया . यजीद एक अय्याश , अत्याचारी . व्यक्ति था .वह सारी सत्ता अपने हाथों में रखना चाहता था .इसलिए उसने सूबों के सभी अधिकारीयों को पत्र भेजा और उनसे अपने समर्थन में बैयत ( oth of allegience ) देने पर दबाव दिया .कुछ लोगों ने डर या लालच के कारण यजीद का समर्थन कर दिया . लेकिन इमाम हुसैन ने बैयत करने से साफ मना कर दिया .यजीद को आशंका थी कि यदि इमाम हुसैन भी बैयत नहीं करेंगे तो उसके लोग भी इमाम के पक्ष में हो जायेंगे .यजीद तो युद्ध कि तय्यारी करके बैठा था .लेकिन इमाम हुसैन युद्ध को टालना चाहते थे ,यह हालत देखकर शहर बानो ने अपने पुत्र जैनुल अबिदीन के नाम से एक पत्र उज्जैन के राजा चन्द्रगुप्त को भिजवा दिया था .जो आज भी जयपुर महाराजा के संग्राहलय में मौजूद है .बरसों तक यह पत्र ऐसे ही दबा रहा ,फिर एक अंगरेज अफसर Sir Thomas Durebrught ने 26 फरवरी 1809 को इसे खोज लिया और पढ़वाया ,और राजा को दिया , जब यह पत्र सन 1813 में प्रकाशित हुआ तो सबको पता चल गया . 
उस समय उज्जैन के राजा ने करीब 5000 सैनिकों के साथ अपने सेनापति भूरिया दत्त को मदीना कि तरफ रवाना कर दिया था .लेकिन इमाम हसन तब तक अपने परिवार के 72 लोगों के साथ कूफा कि तरफ निकल चुके थे ,जैनुल अबिदीन उस समय काफी बीमार था ,इसलिए उसे एक गुलाम के पास देखरेख के लिए छोड़ दिया था .भूरिया दत्त ने सपने भी नहीं सोचा होगा कि इमाम हुसैन अपने साथ ऐसे लोगों को लेकर कुफा जायेंगे जिन में औरतें , बूढ़े और दुधापीते बच्चे भी होंगे .उसने यह भी नहीं सोचा होगा कि मुसलमान जिस रसूल के नाम का कलमा पढ़ते हैं उसी के नवासे को परिवार सहित निर्दयता से क़त्ल कर देंगे .और यजीद इतना नीच काम करेगा . वह तो युद्ध की योजना बनाकर आया था . तभी रस्ते में ही खबर मिली कि इमाम हुसैन का क़त्ल हो गया . यह घटना 10 अक्टूबर 680 यानि 10 मुहर्रम 61 हिजरी की है .यह हृदय विदारक खबर पता चलते ही वहां के सभी हिन्दू( जिनको आजकल हुसैनी ब्राहमण कहते है ) मुख़्तार सकफी के साथ इमाम हुसैन के क़त्ल का बदला लेने को युद्ध में शामिल हो गए थे .इस घटना के बारे में "हकीम महमूद गिलानी" ने अपनी पुस्तक "आलिया " में विस्तार से लिखा है 
4-रिखब दत्त का महान बलिदान 
कर्बला की घटना को युद्ध कहना ठीक नहीं होगा ,एक तरफ तिन दिनों के प्यासे इमाम हुसैन के साथी और दूसरी तरफ हजारों की फ़ौज थी ,जिसने क्रूरता और अत्याचार की सभी सीमाएं पर कर दी थीं ,यहाँ तक इमाम हुसैन का छोटा बच्चा जो प्यास के मारे तड़प रहा था , जब उसको पानी पिलाने इमाम नदी के पास गए तो हुरामुला नामके सैनिक ने उस बच्चे अली असगर के गले पर ऐसा तीर मारा जो गले के पार हो गया . इसी तरह एक एक करके इमाम के साथी शहीद होते गए .
और अंत में शिम्र नामके व्यक्ति ने इमाम हुसैन का सी काट कर उनको शहीद कर दिया , शिम्र बनू उमैय्या का कमांडर था . उसका पूरा नाम "Shimr Ibn Thil-Jawshan Ibn Rabiah Al Kalbi (also called Al Kilabi (Arabic: شمر بن ذي الجوشن بن ربيعة الكلبي) था. यजीद के सैनिक इमाम हुसैन के शरीर को मैदान में छोड़कर चले गए थे .तब रिखब दत्त ने इमाम के शीश को अपने पास छुपा लिया था .यूरोपी इतिहासकार रिखब दत्त के पुत्रों के नाम इसप्रकार बताते हैं ,1सहस राय ,2हर जस राय 3,शेर राय ,4राम सिंह ,5राय पुन ,6गभरा और7 पुन्ना .बाद में जब यजीद को पता चला तो उसके लोग इमाम हुसैन का सर खोजने लगे कि यजीद को दिखा कर इनाम हासिल कर सकें . जब रिखब दत्त ने शीश का पता नहीं दिया तो यजीद के सैनिक एक एक करके रिखब दत्त के पुत्रों से सर काटने लगे ,फिर भी रिखब दत्त ने पता नहीं दिया .सिर्फ एक लड़का बच पाया था . जब बाद में मुख़्तार ने इमाम के क़त्ल का बदला ले लिया था तब विधि पूर्वक इमाम के सर को दफनाया गया था .यह पूरी घटना पहली बार कानपुर में छपी थी .story had first appeared in a journal (Annual Hussein Report, 1989) printed from Kanpur (UP) .The article ''Grandson of Prophet Mohammed (PBUH

रिखब दत्त के इस बलिदान के कारण उसे सुल्तान की उपाधि दी गयी थी .और उसके बारे में "जंग नामा इमाम हुसैन " के पेज 122 में यह लिखा हुआ है ,"वाह दत्त सुल्तान ,हिन्दू का धर्म मुसलमान का इमान,आज भी रिखब दत्त के वंशज भारत के अलावा इराक और कुवैत में भी रहते हैं ,और इराक में जिस जगह यह लोग रहते है उस जगह को आज भी हिंदिया कहते हैं यह विकी पीडिया से साबित है 
Al-Hindiya or Hindiya (Arabic: الهندية‎) is a city in Iraq on the Euphrates River. Nouri al Maliki went to school there in his younger days. Al-Hindiya is located in the Kerbala Governorate. The city used to be known as Tuwairij (Arabic: طويريج‎), which gives name to the "Tuwairij run" (Arabic: ركضة طويريج‎) that takes place here every year as part of the Mourning of Muharram on the Day of Ashura.
http://en.wikipedia.org/wiki/Hindiya

तबसे आजतक यह हुसैनी ब्राह्मण इमाम हुसैन के दुखों को याद करके मातम मनाते हैं .लोग कहते हैं कि इनके गलों में कटने का कुदरती निशान होता है .यही उनकी निशानी है .
5-सारांश और अभिप्राय 
यद्यपि मैं इतिहास का विद्वान् नहीं हूँ ,और इमाम हुसैन और उनकी शहादत के बारे में हजारों किताबे लिखी जा सकती हैं ,चूँकि मुझे इस विषय पर लिखने का आग्रह मेरे एक दोस्त ने किया था ,इसलिए उपलब्ध सामग्री से संक्षिप्त में एक लेख बना दिया था , मेरा उदेश्य उन कट्टर लोगों को समझाने का है ,कि जब इमाम हुसैन कि नजर में भारत एक शांतिप्रिय देश है ,तो यहाँ आतंक फैलाकर इमाम की आत्मा को कष्ट क्यों दे रहे हैं .भारत के लोग सदा से ही अन्याय और हिंसा के विरोधी और सत्य के समर्थक रहे हैं .इसी लिए अजमेर की दरगाह के दरवाजे पार लिखा है ,
"शाहास्त हुसैन बदशाहस्त हुसैन ,दीनस्त हुसैन दीं पनाहस्त हुसैन 
सर दाद नादाद दस्त दर दस्ते यजीद ,हक्का कि बिनाये ला इलाहस्त हुसैन "
इतिहास गवाह है कि अत्याचार से सत्य का मुंह बंद नहीं हो सकता है ,वह दोगुनी ताकत से प्रकट हो जाता है ,जैसे कि ,
" कत्ले हुसैन असल में मर्गे यजीद है "
6-संदर्भित किताबें और साइटें
अपने लेख को प्रमाणित करने के लिए यह सूचि दी जा रही है , ताकि लोग भी विस्तार से जान सकें और सच्चाई को स्वीकार करें
1-Brahmis followers of Imaam  Hussain
http://www.milligazette.com/Archives/2004/16-31May04-Print-Edition/1605200441.htm

2-Brahmins Fought for Imam Hussain in the Battle of Karbala

http://smma59.wordpress.com/2007/09/19/brahmins-fought-for-imam-hussain-in-the-battle-of-karbala/


3-The Hindu Devotees of Imam Hussain (A.S.)
http://smma59.wordpress.com/2006/09/05/the-hindu-devotees-of-imam-hussain-as-2/
4-Relation of Imam Hussain with Indiaહજરત ઇમામ હુસેનના ભારત સાથેના સંબંધો
http://hi.shvoong.com/humanities/religion-studies/1909198-relation-imam-hussain-india/
5-The Story of Imam Hussein
http://hammorabi.blogspot.com/Imam%20Hussein/Imam%20Hussein.html
6-Relationship  of Imam Husain  with India 
http://www.balawaristan.net/Documents/relationship-of-different-religions.html
7-Azadaar e Husain

http://alqaim.info/?p=1417


8-Hindus in Iraq

http://www.qatarliving.com/node/12239
9-Mohyal history
http://www.mohyal.com/index.php/general-mohyal-sabha/mohyal-history
10-Hussaini Brahmin 
http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2008-01-21/patna/27750686_1_muharram-procession-hazrat-imam-hussain-month-of-islamic-calendar
11-JANG NAMA IMAM HUSSAIN
جنگ نامہ امام حسین
Auther Name : Dr.Qureshi Ahmed Hussain Ailadri
First Edition : 2001-Rs.150.00
http://www.punjabiadbiboard.com/index.php?main_page=product_info&cPath=5&products_id=26

मुझे पूरा विश्वास है कि इतने सबूतों के देखने के बाद लोग हिंसा का रास्ता छोडके मानवता और इमाम हुसैन के प्रिय भारत देश की सेवा जरुर करेंगे 

http://www.shiaforums.com/vb/f25/hindu-followers-muslim-imam-imam-hussain-s-9251/

शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

तकफीर मुल्लों का हथियार !


मुसलमान मौलवी जब किसी दुसरे गिरोह के लोग पर काफ़िर ,या मुशरिक होने का झूठा आरोप लगाते हैं ,तो इसे तकफीर(تكفير  ) कहा जाता है . मेरे एक मुस्लिम दोस्त ने इस विषय पर कुछ प्रकाश डालने को कहा था ,क्योंकि अक्सर देखा गया है कि जोभी व्यक्ति इन मुल्लों के विचारों से रत्ती भर भी असहमति प्रकट करता है ,यह मुल्ले उसे काफ़िर(كافر     ) ,मुशरिक( مُشرك) ,और बिदअती( بِدعتي) घोषित करके उसके खिलाफ फ़तवा दे देते हैं .इस लिए बिना किसी द्वेषभाव के यह लेख दिया जा रहा है .
यद्यपि मुस्लिम विद्वान दावा करते हैं कि इस्लाम में बादशाही , और तानाशाही के लिए कोई स्थान नहीं है .औरमुस्लिमों को सिर्फ अल्लाह के द्वारा बताये गए मार्ग पर चलना चाहिए ..लेकिन इतिहास गवाह है कि , जैसे जैसे इस्लाम का विस्तार होता गया उसमे मुल्लों, मुफ्तियों का वर्चस्व होने लगा .पहले जब यजीद नामके अत्याचारी शासक ने इस्लाम के नाम पर अपनी मर्जी लोगों पर थोपना चाही थी ,जिसका परिणाम कर्बला के युद्ध के रूप में सामने आया था .और मुहम्मद साहिब के नवासे इमाम हुसैन ने खुद अपने और अपने परिवार के 72 लोगों की क़ुरबानी देकर इस्लाम को सही रस्ते पर लाना चाहा था .लेकिन कुछ समय के बाद फिर से इस्लाम में कई फिरके हो गए , और हरेक गिरोह मुसलमानों की नकेल अपने हाथों में रखना चाहता है .सब जानते हैं कि कुरान की 114 सूरतें करीब 23 साल में जमा की गयीं थी . और कालक्रम के अनुसार संकलित नहीं की गयी हैं .इसलिए ही उसका सही अर्थ और भाव , तात्पर्य समझने में कठिनता होती है .कुरान की किसी सूरा या आयत का सही भाव समझने के लिए उसका समय (Time), स्थान (Place),परिस्थिति (Circumstances)और जिसको संबोधित कर के कहा गया है , उसके बारे जानना जरुरी है ,और ऐसा न करने से वैचारिक मतभेद होजाने से फिरके बन जाते हैं .जो एक दूसरे के शत्रु बन जाते हैं .शिया और सुन्नियों में अक्सर खून खराबा होता रहता है , लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सुन्नियों में भी कई मज़हब (Sects ) है जो एक दुसरे को काफ़िर ,या मुशरिक कहते रहते हैं .इनमे ,हनफी , मलिकी ,शाफयी,और हम्बली ,मुख्य है , भारत में देवबंदी और बरेलवी अक्सर लड़ते रहते हैं .यहाँ पर कुरान और प्रमाणिक हदीसों के आधार इसका खुलासा दिया जा रहा है -
1-तकफीर के कुछ नमूने 
एक दूसरे के इमामों के अनुयायिओं को काफर या मुशरिक बताना कोई नयी बात नहीं है ,पहले भी ऐसा होता था ,देखिये
A.शाफयी कहते हैं कि इस्लाम में अबू हनीफा जैसा बुरा आदमी नहीं हुआ .
"ولدت لا أحد في الإسلام أكثر شرا من "أبو حنيفة"
Imam Dhahabi records in Syar alam al-Nubala, Volume 10 page 95:
B.इमाम अब्दुल हयी काजी बिन मूसा अल हनफी ( मृत्यु 506 हि) ने शाफियों के बारे में कहा ,अगर मेरे पास हुकूमत होती तो ,मैं शाफियों पर जजिया लगवा देता .
لو كان لى أمر لاخذت الجزية من الشافعية


Meezan al Etidal, Volume 4 page 52

C.शाफयी विद्वान् मुहम्मद बिन मुहम्मद अबू मंसूर ने कहा ,अगर मेरे हाथोंमे सत्ता होती तो ,मैं हम्बलियों पर जजिया लगाने का आदेश जारी कर देता .
وقيل أن البروي قال لو كان لي أمر لوضعت على الحنابلة الجزية
Shazarat al-Dahab, Volume 4 page 271:
D.शेख अबू हातिम हम्बली ने अपने फिरके के बारे में कहा है 
जो भी हम्बली नहीं है ,वह मुस्लिम नहीं है 
فكل من لم يكن حنبليا فليس بمسلم
जो भी व्यक्ति इमाम हम्बल के निर्णय नहीं मानता उस पर इतनी लानत है ,जितनी जमीन पर धूल के कण है .
فلعنة ربنا أعداد رمل على من رد قول أبي حفيفة 
Al-Dur al-Mukhtar Sharah Tanveer al-Absar, page 14

E..इमाम याफी ने अपनी किताब"अल जनान " में लिखा है ,कि जब में दमिश्क में था तो उसके आसपास के शहरों में घोषणा कि गयी थी ,कि जोभी इब्ने तय्यमा कि किताब " मिन्हाज अस सुन्नाह " पर विश्वास करेगा तो उसे क़त्ल किया जाये और उसकी संपत्ति जब्त की जाएगी 
ثم نودي بدمشق وغيرها من كان على عقيدة ابن تيمية حل ماله ودمه 
Mirat al-Janan, Volume 2 page 248:

2-तकफीर का कारण
देखा गया है कि ,जब कोई खुद को बहुत बड़ा विद्वान समझने लगता है ,तो उसमे घमंड आ जाता है ,और वह दूसरों का मजाक उड़ाने लगता है ,यही बात कुरान ने इन आयतों में बताई है,मुसलमानों को इसे जरुर समझना चाहिए .
"क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जो , खुद को बड़ा पवित्र होने का दम भरते हैं ,लेकिन अल्लाह जिसे चाहे पवित्रता प्रदान करता है " 
सूरा -निसा 4 :49 
 यह लोग समझते हैं कि यही बुनियाद पर हैं ,सुन लो यह बिलकुल झूठे है इनपर शैतान छा गया है "सूरा- मुजादिला 58 :18 -19 
"हे ईमान वालो कोई गिरोह दूसरे गिरोह का मजाक नहीं उडाये ,हो सकता है वह उन से भी अच्छे हों "सूरा -हुजुरात 49 :11 
3-मौलवियों कि चालाकी 
जादातर मुसलमान अरबी भाषा में निष्णात नहीं होते हैं . और मौलवी कुरान कि आयतों का जो भी अर्थ करदेते हैं मुसलमां उसी पर यकीं कर लेते हैं . इसी तरकीब से मौलवी मुसलमानों को जहाँ चाहे भिड़ा देते हैं .,जैसा इस हदीस में है
अब्दुल्लाह इब्न उमर ने कहा कि हजरत उमर खारजियों को दुनिया कि सबसे ख़राब मखलूक कहते थे , और कहते थे यह लोग पहले जो आयतें काफिरों के लिए कही गयी थीं ,उनको ईमान वालों के लिए लागु कर देते हैं ."
باب ‏ ‏قتل ‏ ‏الخوارج ‏ ‏والملحدين ‏ ‏بعد إقامة الحجة عليهم ‏ ‏وقول الله تعالى ‏
وما كان الله ليضل قوما بعد إذ هداهم حتى يبين لهم ما يتقون ‏‏وكان ‏ ‏ابن عمر ‏ ‏يراهم شرار خلق الله ‏ ‏وقال إنهم انطلقوا إلى آيات نزلت في الكفار فجعلوها على المؤمنين
Sahih Bukhari, Chapter of Killing the Khawarjites and Mulhideen, Volume No. 6, Page No. 2539]

और इसीलिए यह आयत नाजिल हुई थी .
ऐसा नहीं हो सकता कि अल्लाह लोगों को मार्ग दिखाने के बाद फिर से पथभ्रष्ट कर दे ,जबकि उनको पता हो कि उनको किस से बचना चाहिए .सूरा -तौबा 9 :115 
4-रसूल की भविष्यवाणी 


रसूल को मुसलमानों के इस स्वभाव का पता था ,कि यह लोग आगे चल कर फालतू बातों पर एक दुसरे का खून बहायेंगे .इसी लिए हदीस के कहा है
उकबा बिन आमिर ने कहा ,एक बार जब रसूल उहद के शहीदों के जनाजे की नमाज पढ़ चुके तो बोले मैंने तुम्हें कौसर का झरना और दुनिया के खजानों की चाभियाँ अता कर दी हैं .मुझे इस बात का डर नहीं है की तुम मेरे बाद अल्लाह के साथ किसी को शरीक करोगे ,लेकिन मुझे यह डर है की तुम नाहक की बात पर एक दुसरे का खून बहाओगे "


أن النبي ‏ ‏صلى الله عليه وسلم ‏ ‏خرج يوما فصلى على أهل ‏ ‏أحد ‏ ‏صلاته على الميت ثم انصرف إلى المنبر فقال ‏ ‏إني ‏ ‏فرط ‏ ‏لكم وأنا شهيد عليكم وإني والله لأنظر إلى حوضي الآن وإني أعطيت مفاتيح خزائن الأرض ‏ ‏أو مفاتيح الأرض ‏ ‏وإني والله ما أخاف عليكم أن تشركوا بعدي ولكن أخاف عليكم أن تنافسوا فيها 
Sahih Bukhari-Volume 2, Book 23, Number 428: 
5-रसूल की नसीहत 


जो मौलवी किसी को काफ़िर या मुशरिक कहकर झूठा आरोप लगाते हैं उनके बारे में यह हदीस में यह कहा है
"अनस बिन मलिक ने कहा कि रसूल ने इन तीन बातों से बचने को कहा है ,किसी ऐसे व्यक्ति का क़त्ल करना जो कलमा पढ़ता हो ,चाहे वह कैसा भी गुनाहगार हो ,किसी को काफ़िर कहना और किसी को इस्लाम से खारिज बताना .रसूल ने कहा कि यही इमान की बुनियाद है .


‏ ‏عن ‏ ‏أنس بن مالك ‏ ‏قال ‏
قال رسول الله ‏ ‏صلى الله عليه وسلم ‏ ‏ثلاث من ‏ ‏أصل ‏ ‏الإيمان ‏ ‏الكف ‏ ‏عمن قال لا إله إلا الله ولا نكفره بذنب ولا نخرجه من الإسلام بعمل والجهاد ماض منذ بعثني الله إلى أن يقاتل آخر أمتي ‏ ‏الدجال ‏ ‏لا يبطله ‏ ‏جور ‏ ‏جائر ‏ ‏ولا عدل عادل والإيمان بالأقدار 
Sunnan Abu Dawud, Volume No. 2, Hadith # 2170]
कुरान में भी कहा गया है ,
हे ईमान वालो जब तुम बाहर निकलो तो ध्यान से देख लो , और जो कोई तुम्हें सलाम करे तो ,उस से यह नहीं कहो ,कि तू मोमिन नहीं है " 
सूरा - निसा 4 :94 
6-झूठा आरोप लगाने का नतीजा 
यदि कोई किसी पर काफ़िर या मुशरिक होने का मिथ्या आरोप लगता है तो उसकी सारी इबादत का फल छिन जाता है ,
अबू हुजैफा इब्न यमामा ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति कुरान कि इतनी तिलावत करे कि उसका चेहरा ऐसा नूरानी हो जाये कि वह दूर से ही पहचान लिया जाये ,लेकिन उसकी यह सारी विशेषता उसी समय छिन जाएगी जब वह पडौसी के पीठ पीछे उसकी निंदा करेगा ,या उसपर हथियार उठाएगा , या मोमिन को मुशरिक बताएगा "


أن حذيفة يعني ابن اليمان رضي الله عنه حدثه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلّم «إن مما أتخوف عليكم رجل قرأ القرآن حتى إذا رؤيت بهجته عليه وكان رداؤه الإسلام اعتراه إلى ما شاء الله انسلخ منه ونبذه وراء ظهره وسعى على جاره بالسيف ورماه بالشرك» قال قلت يانبي الله أيهما أولى بالشرك المرمي أو الرامي ؟ قال «بل الرامي»
إسناد جيد


Sahih, Tahqiq Nasir Albani, Volume 001, Page No. 200, Hadith Number 81
Silsilat al-ahadith al-sahihah - Albani Volume 007-A, Page No. 605, Hadith Number 3201
7-शांतिपूर्ण समाधान 
यदि कोई मुल्ला मौलवी किसी पर काफ़िर और मुशरिक होने का आरोप लगाता है ,और आपस में विवाद पैदा करता है ,तो इस हदीस में एकही शांति पूर्ण उपाय बताया गया है , के वह किसी के बहकाने में न आयें .
उबैदुल्लाह इब्न उमर ने कहा कि मेरा एक पडौसी कहता है कि मैं शिर्क करता हूँ , उमर ने कहा तुम कलमा पढो ,पडौस का शक दूर हो जायेगा .
عن عبيد الله بن عمر عن نافع أن رجلا قال لإبن عمر أن لي جارا يشهد علي بالشرك فقال قل لا إله إلا الله تكذبه
Imam Ibn Asakir in Tibyan al Kadhib al Muftari, Page No. 373] 
जकारिया नायक किस तरह के कुतर्कों से लोगों में विवाद करता है उसका प्रमाण देने के लिए यह विडियो देखिये
http://www.youtube.com/watch?v=CS2lB07Ve9s
बड़े दुर्भाग्य की बात है कि आज भी इमाम बुखारी जैसे लोग मुसलमानों के ठेकेदार बने हुए हैं , और अपने निजी स्वार्थों के लिए मुसलमानों को किसी न किसी पार्टी को वोट देने का फतवा देते रहते हैं .इसी तरह सलमान खुर्शीद मुसलमानों का हमदर्द होने का ढोंग करके ,उनके वोटों से राहुल विंची उर्फ़ "गंदी " को जीवन भर के किये प्रधानमंत्री बनाना चाहता है .और मुसलमानों को हमेशा के लिए उसका मुहताज बनाना चाहता है .
मेरा सभी मुस्लिम युवा पीढ़ी के लोगों को सलाह है कि , वह ऐसे स्वार्थी मुल्लों और नेताओं के चक्कर में न फसें और खुले दिमाग से देश की मुख्यधारा में शामिल हों .और किसी की कठपुतली नहीं बनें .

http://www.ahlus-sunna.com/index.php?option=com_content&view=article&id=82&Itemid=14.

बुधवार, 15 फ़रवरी 2012

भगवान बुद्ध और औरतें भी अल्लाह के नबी !! भगवान बुद्ध और औरतें भी अल्लाह के नबी !!


भारत के लगभग सभी धर्मों की यह मान्यता है ,कि जब जब धरती के किसी भी हिस्से में लोग अमानवीय और अनैतिक कामों में लिप्त होकर पाप या अधर्म के काम करने लगते हैं ,तो उनको सही रास्ता दिखाने और अधर्म को समाप्त करने के लिए समय समय पर अनेकों महापुरुष आते रहते हैं . जिनको अवतार कहा जाता है ,लेकिन यहूदी , इसाई और इस्लाम धर्म इसके विपरीत मानते हैं ,वह अल्लाह द्वारा भेजे गए यानि नियुक्त किये गए ऐसे महापुरुषों को "नबी " कहते हैं .नबी भी लोगों को अल्लाह द्वारा दिखाए रस्ते पर चलने को कहते हैं .
इस विषय को और स्पष्ट करने के लिए पहले हमें यह स्वीकार करना होगा कि , यहूदी ,ईसाई और मुसलमानों का अल्लाह एक ही है .मुझे विश्ववास है कि इस बात से किसी को कोई आपात्ति नहीं होना चाहिए .दूसरी बात यह है कि यह तीनों धर्म मानते हैं कि मनुष्यों को सही रस्ते से भटकाने और पाप कर्म करने प्रेरणा शैतान ही देता है .
इसीलिए अपने बन्दों को शैतान के फंदे से बचाने और सीधे मार्ग पर लेजाने के लिए अल्लाह अपने नबियों को उठाता है , देखिये .
1-अल्लाह और शैतान का झगडा 
कुरान के अनुसार आदम के बनने बाद से ही अल्लाह को चुनौती दी थी कि वह उसके बन्दों को गुमराह करेगा ,यही बात बाइबिल में भी है ,यहाँ कुरान में इस प्रकार कहा गया है -
"शैतान ने अल्लाह से कहा ,जैसा तूने मुझे गुमराह किया है मैं तेरे लोगों के रस्ते में घात लगा कर बैठूँगा ,और उनके आगे और पीछे से आक्रमण करूँगा ,और तू अधिकांश को कृतज्ञ नहीं पायेगा "सूरा-अल आराफ 7 :14 -17 
"अल्लाह ने कहा निस्संदेह मेरे बन्दों पर तेरा कोई बस नहीं चलेगा ,सिवाय को बहके हुए लोग है "सूरा-अल हिज्र 15 :42
2-नबियों की संख्या 
अल्लाह ने आदम से लेकर कई भेजे भेजेइस्लामी मान्यता के अनुसार हैं जो अल्लाह का सन्देश लोगों को देते थे , यह कुरान और हदीस में है ,
"कितने रसूल हैं ,जिनका विवरण हम बयान कर चुके हैं और कितने ऐसे हैं जिनका वृतांत हमने नहीं दिया है "सूरा -अन निसा 4 :164 
( नोट - कुरान में सिर्फ 27 नबियों का विवरण मिलता है )
 "और हरेक जाति के लिए एक मार्ग दिखाने वाला ( हादी ) हुआ है "सूरा -रअद 13 :7 
रसूल ने कहा कि आदम से लेकर मुझ तक एक लाख चौबीस हजार (124000 )नबी आये है ,जिनमे तीन सौ पंद्रह ( 315 ) रसूल थे ,जिनके सन्दर्भ मिलते हैं .
"قال النبي (صلي الله عليه وسلم): "من آدم لي، بعث الله من مائة وأربعة وعشرون ألف الأنبياء، من بينهم 315 كانوا رسل
كما يشير التقرير.
Prophet(peace be upon him) said:"From Adam to me, Allah sent a hundred and twenty-four thousand Prophets ,of whom three hundred and fifteen were messengers 
Reference is given .
Musnad Ahmed  Hanbal-Hadith No-21257

3-सभी नबी समान हैं 
इसके बाद कुरान में यह भी कहा गया है कि,
"हम अल्लाह की किताबों और उसके भेजे नबियों के बीच में कोई अंतर नहीं करते हैं "सूरा -बकरा 2 :285 
जो दूसरे सभी नबियों को और जो उनके रब की ओर से मिली (नबूवत ) उनमे किसी के बीच में अंतर (distinction ) नहीं करते और हम उसी के आज्ञाकारी हैं . सूरा -बकरा 2 :136 और सूरा -आले इमरान -3 :84 
4-तफ़सीर में वर्णित नबी 
यह ऐसे नबी है जिनका नाम दिए बिना इनकी कथाएं कुरान में दी गयी हैं .(और कुरान की तफसीर अल मीजान बाब 15 में हैं) 
There are some prophets whose stories are given in the Qur'an without mentioning their names. These are:
No. Arabic Name Transliteration English Version
1. خضر Khidhr (a.s.) —खिज्र 
2. يوشع بن نون Yusha bin Nun (a.s.) Joshua-जोशुआ बिन नून 
3. شموئيل Shamuel (a.s.) Samuel-समूएल (इस्माइल )
4. حزقيل Hizqueel(a.s.) Ezekiel-हिजकिएल 
5. ذو القرنين Dhul-Quarnain[2]-जुलकरनैन (सिकंदर )
6. رسول اصحاب الاخدود An Ethiopean Prophet [3]-रसूल असहाब अल्खुद ( हब्शी)
7. شمعون الصفا Shamun Simon (Peter)-शिमॉन पीटर ( ईसा का शिष्य और प्रथम पोप )
8- 9. حواريان آخران لعيسى Two other disciples of Jesus Christ -हवारियान ( ईसा के दो शिष्य )
5-अल मीजान में वर्णित नबी
यह ऐसे नबियों के नाम है ,जिनका उल्लेख इस्लामी इतिहास की किताबों जी अल मीजान और परंपरा में मिलते है .इनमे भगवान बुद्ध का नाम भी है जिसे अरबी में बुजास्फ़ कहा गया है .(न .9 )
Now we may mention some of the prophets whose names are found in the traditions:
No. Arabic Name Transliteration English Version

1. شيت Sheth Seth-सैस
2. سام Saam Shem-साम 
3. ارميا Armia Jeremiah-यिर्मियाह 
4. دانيال Danial Daniel-दानिएल 
5. عموس Amus Amos-आमोस 
6. عبيدة Obaidiah Obaidiah-ओबैदयाह 
7. حبقوق Habakkuk Habakkuk-हबक्कूक 
8. جرجيس Jirjis —जिरजिस 
( इन आठ नबियों के नाम तौरेत यानि बाइबिल में मौजूद हैं )
9. بوذاسف Budhastav Budhastav-बुजास्फ़ ( बोधिसत्व यानि गौतम बुद्ध )(Gotam Bodh)
10. خالد بن سنان Khalid bin Sanan -खालिद बिन सनान 
6-महिला नबीया 
आजकल के कठमुल्ले भले इस बात को स्वीकार नहीं करें कि ,उन्हीं के अल्लाह ने औरतों और क्वांरी लड़कियों को भी अपना नबी बना दिया था .तौरेत के समय तो अल्लाह को औरतों को नबी बनाने में कोई आपति नहीं थी ,लेकिन मुहमद के अमे अल्लाह को मुस्लिम औरतों से इतनी नफ़रत हो गयी कि उसने एक भी अरबी औरत को नबी बनने के लायक नहीं समझा ,और माहवारी का बहाना बना कर उनको नबी नहीं बनाया .
तौरेत अर्थात बाइबिल के पुराने नियम ( Old Testament ) में इन महिला नबियों (prophetesses. )के नाम सन्दर्भ दिए गए हैं इन्हें हिब्रू और अरबी में नबीया कहा गया है .-हिब्रू में ( נביאה)अरबी में ( نبية)
http://bibleq.info/answer/4201/
नोट - दी गयी लिंक को देखें )
Several women are described as prophetesses. In the Old Testament we have the following five:
Miriam (Exodus 15:20-21) -मरियम (हारून की बहिन )
Deborah (Judges 4:4) -देबोरा -लप्पीदोत की स्त्री 
Huldah (2 Kings 22:14) -हुलदा-शल्लूम की पत्नी 
Noadiah (Nehemiah 6:14) -नोअद्याह 
Isaiah’s wife (Isaiah 8:3) -यशायाह की पत्नी 
तौरेत में दी गयी इन महिला नबीया के आलावा यहूदी धर्मग्रंथ तलमूद में इन महिला नबीया के नाम मिलते हैं 1 .सारह ,हन्नाह ( नबी समूएल की पत्नी ) 2 .अबीगेल ( नबी दाऊद की पत्नी ) 3 .एस्तेर(पुस्तक एस्तेर )इनको भी नबीया माना गया है .
The Jewish Talmud counts some additional women as prophets including Sarah, Hannah (mother of Samuel), Abigail (wife of David) and Esther. However, these are not called prophets or prophetesses in the Bible.
नए नियम में इन नबीया के नाम दिए हैं 
In the New Testament, there are another five:
-अन्ना -फ़नूएल की बेटी -Anna (Luke 2:36) 
राजा फिलिप की चारों पुत्रियाँ -Philip’s four daughters (Acts 21:8-9) -
इसा मसीह की माता मरियम और यूहन्ना बपतिस्ती की माता एलियाबेथ भी नबूवत करती थीं लेकिन उनको नबीया नहीं कहा गया है .
Although not called prophetesses, both Mary mother of Jesus (Luke 2:46-55) and Elizabeth mother of John Baptist (Luke 2:41-45) both made prophecies.

मुझे पूरा विश्वास है कि मेरे इस लेख को पढ़कर हिन्दू और मुस्लिम बहिने जरुर खुश होंगी कि यदि जहन्नम जैसे कोई जगह है तो उस से डरने की कोई जरुरत नहीं है ,क्योंकि वहां पर हिन्दुओं मदद के लिए अल्लाह के नबी बुध भगवान होगे ,और मुस्लिम बहिनों को मुस्लिम मर्दों के अत्याचार से बचाने के लिए अल्लाह की कई नबीया मिल जाएँगी .यातो यह कुतर्की मुल्ले अल्लाह के इन नबियों को झूठ काह दें ,या फिर कह दें कि यहूदी ,इसी ,हिन्दू और मुसलमानों का अल्लाह अलग या कोई दूसरा है .याद रखिये इन सभी नबियों के नाम अल्लाह कि किताबों में लिखे हैं 
.
हमें इस बात को स्वीकार कर लेना चाहिए कि अल्लाह के सभी नबी समान हैं .

http://www.imamreza.net/eng/imamreza.php?id=9455

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

फ़रिश्ते नहीं परियां कहिये !!


वास्तव में मुसलमानों का अल्लाह सर्वशक्तिमान नहीं है बल्कि किसी बादशाह तरह उसे हर काम के लिए नौकरानियों की जरुरत पड़ती है ,जिसे फ़रिश्ता कहा जाता है .फिर भी मुसलमान अल्लाह के साथ फरिश्तों का नाम लेकर शिर्क करते हैं ,
वास्तव में "फ़रिश्ता "फारसी भाषा का शब्द है .कुरान के अनुसार अल्लाह ने फरिश्तों के सामने मनुष्य को मिट्टी से और जिन्नों को आग से बनाया था .अर्थात सृष्टि के समय से पूर्व भी फ़रिश्ते मौजूद थे .लेकिन कुरान में यह नहीं लिखा है कि फ़रिश्ते कब और किस चीज से बनाये गए हैं .फिर भी उन पर ईमान रखने को कहा जाता है यहाँ तक .लोग यह भी नहीं जानते कि फ़रिश्ते पुरुष है ,या स्त्री है .इसी का खुलासा यहाँ पर किया जा रहा है .
इस्लाम में फरिश्तों का इतना बड़ा ऊँचा दर्जा है कि अल्लाह और रसूल के साथ उन पर भी विश्वास करने के लिए कहा गया है .लेकिन लोग बिना किसी तर्क के इस बात को स्वीकार कर लेते है . और इस विश्वास को ईमान(Faith ) कहा जाता है .और अल्लाह के साथ फरिश्तों ,किताबों ,और रसूलों पर इमान रखने को इमाने मुफस्सिल कहा जाता है ,अरबी में इस प्रकार है -
"آمَنْتُ بِاللهِ وَمَلاَئِكَتِه وَكُتُبِه وَرُسُلِه وَالْيَوْمِ الآخِرِ وَالْقَدْرِ خَيْرِه وَشَرِّه مِنَ اللهِ تَعَالى وَالْبَعْثِ بَعْدَ الْمَ "
I have faith in Allah and His Angels, His Books and His Messengers, and the Day of Judgement and that all good and evil and fate is from Almighty Allah and it is sure that there will be resurrection after death.
इस ईमाने मुफस्सिल में अल्लाह के बाद दुसरे नंबर पर फरिश्तों पर ईमान रखने को कहा है ,और फरिश्तों को अरबी में "मलायकतु" कहा काया है .जिसे लोग अंगरेजी में Angels या Fairy भी कहते हैं .फरिश्तों का काम,उनके बारे में कुरान और हदीसों में यह लिखा है ,(कुरान में यह शब्द 68 बार आया है .)
1-फरिश्तों की संख्या और काम 
वैसे तो फरिश्तों का मुख्य काम अल्लाह की रात दिन बंदगी करना है ,लेकिन वह उन से और भी काम करवाता है ,जैसे कि,
"और वह फ़रिश्ते अल्लाह की बंदगी करने और उसके हुक्म का पालन करने में लगे रहते है "सूरा -अस साफ्फात 37 :165 
"यह तुम्हारे ऊपर जासूसी भी करते हैं ,और तुम जोभी करते हो वह बारीकी से लिखते रहते हैं "सूरा-अल इन्फितार 82 :10 से 12 
"और आदमी के मुंह से जोभी बात निकलती है ,उसे सुनने के लिए ताक में रहते हैं "सूरा -काफ 50 :18 
"अल्लाह लोगों के आगे पीछे फ़रिश्ते लगा देता और जब अल्लाह का आदेश होता है वह उस व्यक्ति की रक्षा करते हैं "सूरा -रअद 13 :11
"मौत से समय तुम्हारे ऊपर मौत का फ़रिश्ता लगा दिया जाएगा जो ,तुम्हें ग्रस्त कर लेगा ,और तुम अल्लाह के पास वापस भेज दिए जाओगे "
सूरा -अस सजदा 32 :11 
"जो नेक लोग जन्नत में जायेंगे तो उनको बधाई देने के लिए हर दरवाजे पर फ़रिश्ते खड़े मिलेंगे "सूरा-रअद 13 :23 
"अल्लाह का सिंहासन उठाने के लिए आठ फ़रिश्ते उसे किनारों से पकड़ कर रखेंगे "सूरा -हाक्का -69 :17 
"कठोर लोगों को काबू करने के लिए बलवान फ़रिश्ते लगाये जाते हैं ,जो अल्लाह के आदेशों का पालन करवाते हैं "सूरा -अत तहरीम 66 :6 
"और निश्चय ही यह सन्देश (कुरान ) एक फ़रिश्ते द्वारा ही पहुंचाई हुयी बात है "सूरा -अत तकवीर 81 :19 
"नरक वासियों के ऊपर उन्नीस फ़रिश्ते नियुक्त किये गए हैं "सूरा -अल मुदस्सिर 74 :30 
इन सभी विवरणों से पता चलता है कि अल्लाह कि हुकूमत में फ़रिश्ते ,मजदूरी ,जासूसी ,और चुगली के साथ जेलर का काम भी करते हैं .और जरुरत होने पर पोस्टमेन का काम भी करते हैं .
2-फरिश्तों के कितने पंख 
कुछ लोगों को ऐसा लगता होगा कि फरिस्तों कन्धों पर दायें और बाएं एक एक पंख होगा ,जैसे पक्षियों के होते हैं .ईसाई भी दो ही पंख मानते है .लेकिन इस्लाम की बात और ही है .इसमे फरिश्तों के पंखों की संख्या दी जा रही है ,
"कुछ ऐसे भी फ़रिश्ते हैं ,जिनके ,दो -दो ,तीन-तीन , चार -चार पंख होते हैं "सूरा -फातिर 35 :1 
हदीस ने तो एक फ़रिश्ते के 600 पंख बताये है ,हदीस इस प्रकार है 
"अबू इशाक शैवानी ने कहा कि जब वह जिब्रील से मिलने गए तो उनके बीच में दो कमान की दूरी (two bow length ) थी .और उन्होंने जरीर बिन मसूद से कहा था कि जिब्रील के 600 पंख हैं "बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 455 
3-फरिश्तों को स्त्रियाँ बताने का विरोध 
अभी तक फरिश्तों के बारे में जोभी दिया गया वह विश्वास यानि ईमान पर आधारित है .चूँकि लगभग 97 % मुसलमान कुरान की व्याकरण नहीं समझते ,और उनको जो अर्थ बताया जाता है ,उसी को सही मानते है .यद्यपि कुरान में भी फरिश्तों को अल्लाह की बेटियां कहा गया है ,जिसका मुसलमान विरोध करते हैं ,क्योंकि इस्लाम एक ऐसा धर्म है जिसमे स्त्रियों को हीन समझा जाता है .और जब लोगों ने फरिश्तों को अल्लाह की बेटियां या स्त्रियाँ कहा तो ,अल्लाह इस बात का खंडन करने के लिए दलीलें देने लगा ,और कहने लगा ,
"यह लोग अल्लाह की बेटियां होने को बुरा मान रहे हैं ,क्योंकि जब इनके यहाँ जब को बेटी होने की सूचना मिलाती है ,तो इनके मुंह काले पड़ जाते हैं ,और वह कुढ़ जाते हैं "सूरा -अन नहल 16 :57 और 58 
"क्या तुम इसे बड़ी भारी बात मान रहे हो कि अल्लाह ने फरिश्तों को बेटियां बना लिया है "सूरा बनी इस्रायेल 17 :40 
"क्या अल्लाह ने लड़कों की जगह लड़कियों को पसंद कर लिया है ? सूरा -अस साफ्फात 37 :153 
"क्या तुम्हारे दिलों में यह बात खटकती है ,कि अल्लाह के घर में बेटियां हों ,और तुम्हारे घर बेटे पैदा हों "सूरा -अस साफ्फात 37 :149 
"क्या अल्लाह ने खुद के लिए बेटियां पसंद कर लीं ,जो आभूषणों और श्रृंगार में पलती हैं ,और वादविवाद में ठीक से जवाब नहीं दे सकती हैं "
सूरा-जुखुरुफ़ 43 :16 और 18 
"तुम्हारे घर बेटे हों ,और अगर अल्लाह के घर बेटियाँ हों तो तुम्हें बहुत गलत लग रहा है "सूरा -अन नज्म 53 :21 और 22 
4-फरिश्तों का स्त्रियाँ होने का प्रमाण 
सब जानते हैं कि ,झूठे बहाने बनाकर सच को नहीं छुपाया जा सकता .और जैसे अदालत में जिरह के दौरान सच बाहर निकल ही आता है ,वैसे अल्लाह के इस झूठ की पोल खुद कुरान ने खोल दी है कि फ़रिश्ते स्त्रियाँ नहीं है .यह बात तब खुली जब अल्लाह ने यह कहा था ,(इस आयत को गौर से पढ़ने की जरुरत है .) देखिये
"क्या हमने फरिश्तों को स्त्रियाँ बनाया ,तब यह साक्षी थे "सूरा -अस साफ्फात 37 :150
Did We create the angels as females the while they witnessed?” 37:150
."اَمۡ خَلَقۡنَا الۡمَلٰٓٮِٕكَةَ اِنَاثًا وَّهُمۡ شٰهِدُوۡنَ‏"37:150(अम खलक ना मलायकतु निसा अन व् हुम शाहिदून)
इसी आयत की तफ़सीर में भी फरिश्तों को स्त्री बताने का खंडन किया है .
"وجعلوا الملائكة الذين هم عباد الله والإناث "
And they make the angels who are servants of the  Allah  are females.
5-अरबी व्याकरण से प्रमाण 
लेकिन अल्लाह की इस आयत में खुद विरोधाभास है ,क्योंकि वह अरबी में जिन फरिश्तों के लिए "मलायकतुملائكة "
 "शब्द का प्रयोग कर रहा है वह व्याकरण के अनुसार स्त्रीलिंग बहुवचन  Feminine GendarPlular शब्द है .जिसे अरबी में "मुअन्निस जमा " कहते हैं .जो इस प्रकार है मुअन्निसالمؤنث सीगा जमाصيغة الجمع .अर्थात फ़रिश्ते स्त्रियाँ ही हैं .क्योंकि अरबी व्याकरण के अनुसार किसी भी संज्ञा (Noun ) या सर्वनाम (Pronoun ) का स्त्रीलिंग (Feminine ) बनाने के लिए उसके आगे गोल ते के साथ ऊपर दो पेश(ةٌ ) लगा दिए जाते हैं ,जिसे ते मरबूता ( ta marbouta)कहते हैं 
  .उदाहरण हामिद ( حامِدُ) एक वचन पुर्लिंग इसका स्त्रीलिंग होगा (حامِدةٌ ) हामिदः जिसे हामिदतुन लिखते हैं और हामिदा बोलते हैं .ऐसे ही नासिर ( ناصِرُ) का स्त्रीलिंग नासिरा (ناصِرةٌ ) होगा .इस व्याकरण के नियमानुसार ("मलायकतुملائكة "  शब्द स्त्रीलिंग ही है .भले मुसलमान फरिश्तों (परियों ) को अल्लाह की बेटियां मानने से इनकार करें ,लेकिन इस बात से कोई मुल्ला इंकार नहीं कर सकता की अरबी व्याकरण के अनुसार फ़रिश्ते स्त्रियाँ ही है .और अल्लाह ने औरतों की सेना बना रखी है .शायद अल्लाह से ही प्रेरणा लेकर गद्दाफी ने औरतों की सेना बना डाली थी .

मुझे पूरा यकीन है कि जब इस लेख को पढ़ने के बाद मुस्लिम बहिनों को यह पता चलेगा कि फ़रिश्ते वास्तव में पुरुष नहीं ,बल्कि स्त्रियाँ हैं ,तो वह जरुर खुश होंगी ,और उनको स्त्री होने पर गर्व होगा .लेकिन आगे से उनको जहाँ भी फ़रिश्ता लिखा हुआ दिखे ,उसकी जगह "फरिश्तिनी " या "परियां " शब्द प्रयोग करना होगा 
बताइए क्या अब भी आप फरिश्तों को परियां कहने से इंकार करेंगे ?

http://islamzpeace.com/2008/09/03/the-duties-of-angels/

रविवार, 5 फ़रवरी 2012

इस्लामी अविष्कार फिदायीन बम !!


मुसलमानों ने आज तक एक भी ऐसा अविष्कार नहीं किया ,जिस से ,हरेक व्यक्ति को फायदा हो सके ,लेकिन मुसलमानों ने लोगों को बर्बाद करने और उनको मारने के अनेकों अविष्कार किये हैं ,मुसलमानों की नीति है कि हर उपाय से दूसरों को मारा जाये ,चाहे ऐसा करते समय हम खुद क्यों न मर जाएँ .इसके लिए ही मुसलमानों ने आत्मघाती मानव बम का अविष्कार किया है .इस्लामी मानव बम बनाने की यह विधि है
" इस के लिए 8 वर्ष से लेकर 25 साल तक की आयु के ऐसे लडके -लड़कियों की जरूरत होती है ,जिनकी बुद्धि मदरसे की पढाई के कारण कुंद हो गयी हो ,या दिमाग कुछ भी सोचने समझने के लायक नहीं हो ,और जिनमे जन्नत में जाकर अय्याशी करने की उत्कट इच्छा हो .इसके अलावा जो अपनी मौत से साथ सौ पचास लोगों की मौत चाहते हों .उन्हीं फिदायीन या मानव बम बनाने के लिए उपयुक्त माना जाता है ."
हम अपने 6 वें प्रधानमंत्री और लोकप्रिय नेता राजीव गांधी की दुखद मृत्यु की घटना को कभी नहीं भूल सकेंगे .जिनकी 21 मई 1991 में श्री पेरुम्बुदूर नाम की जगह पर लंका के आतंकी संगठन लिट्टे की सदस्य शुभा और नलिनी ने मानव बम बनकर उनकी हत्या करदी थी ..असल में मानव बम (Suicide bomb ) बन कर लोगों की हत्याएं कराने की प्रथा इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने फिलस्तीन में चालू की थी .जिसे दूसरे आतंकी दलों ने अपना लिया है .इन आत्मघाती लोगों को फिदायीन कहा जाता है .अरबी के फिदायी فدائي‎शब्द का बहुवचन फिदायीनفِدائيّين होता है .जिसका अर्थ बलिदानी या"redeemers   "है जो खुद को कुर्बान कर देते है (those who sacrifice )चालाक मुस्लिम विद्वान् फिदायीन के बारे में दोगली बातें कहते हैं ,
 ऊपर से वह कहते हैं कि इस्लाम में आत्महत्या करना बहुत बड़ा गुनाह है ,लेकिन अन्दर से यह भी कहते हैं कि अल्लाह की राह में मरते हैं ,या काफिरों को मारते हुए मर जाते हैं वह शहीद माने जाते हैं .और सीधे जन्नत में जाते हैं .अपनी इन्हीं दोगली बातों से यह इस्लाम के प्रचारक फिदायी जिहादियों के गुनाहों पर पर्दा डालते रहते हैं .और फिदायीन का महिमा मंडन भी करते रहते हैं .दुःख की बात तो यह है कि इन छुपे हुए आतंक समर्थक मुल्लों साथ कुछ ख़रीदे हुए हिन्दू भी सुर में सुर मिलाने लगे हैं .एक तो ऐसा है जो खुद को शंकराचार्य भी कहने लगा है .आज विदेशों से मिले हुए धन से यह कपटी आचार्य परोक्ष रूप से आतंकवादियों का हौसला बढ़ा रहे हैं .यही कारण है कि आतंकी घटनाएँ दिनों दिन बढ़ रही हैं .
वैसे तो जिहादी बच्चो को बचपन से ही फिदायीन बनाए की तालीम देते हैं ,और कुरान और हदीस की ऐसी बातें उनके दिमाग में भर देते हैं जिस से उनका दिमाग खाली (brain wash ) हो जाता है .यहाँ पर कुरान की वह आयतें और हदीसों के साथ पाकिस्तान में एक साल की फिदायीन घटनाओं का हवाला दे रहे हैं .
1 - कुरान का नफ़रत का पैगाम 
जिन लोगों को आत्मघाती बम यानी फिदायीन बनाना होता है ,उनके दिमाग में ठूंस ठूंस कर यह बात भर दी जाती है ,जो कुरान की इस आयात में बतायी गयी है ,
"बस मैदान में उतर जाओ ,और समझो कि तुम एक दूसरे के दुश्मन हो ,और तुम्हें इस धरती पर केवल निर्धारित समय तक रहना है ,और तुम्हें उतने जीवन के लिए सामग्री दी गयी है "सूरा -अल आराफ 7 :24 
इस तालीम के कारण फिदायीन में अपने जीवन से कोई लगाव नहीं रह जाता है .
2-अल्लाह प्राण खरीद लेता है 
जब लोगों को अपने प्राणों से कोई लगाव नहीं रहता है ,तो अल्लाह उनको लालच देकर उनके प्राण खरीद लेता है ,कुरान कहती है ,
"निस्संदेह अल्लाह ने ईमान वालों से उनके प्राण और माल जन्नत के बदले इसलिए खरीद लिए हैं ,के वह मरते भी रहें और मारते भी रहें "
सूरा -तौबा -9 :111 
"और उन में से कुछ ऐसे भी लोग होते हैं , जो अल्लाह को खुश करने के लिए ,खुद अपना जीवन त्याग देते हैं "सूरा -बकरा 2 :207 
3-जिहाद से आतंक फैलाओ 
जब फिदायीन का पूरी तरह से ब्रेन वाश जो जाता है ,तो उन से कहा जाता है ,
"तुम ईमान रखो अल्लाह पर और उसके रसूल पर ,और सिर्फ जिहाद करो अपने प्राणों और साधनों से ,बस तुम्हारे लिए यही उतम कार्य है "
सूरा -अस सफ्फ 61 :11 और 12 
फिर फिदायीन को मुहम्मद की तरह आतंकवादी बनने कहा जाता है ,जैसा इस हदीस में कहा गया है ,
"अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा कि अल्लाह ने मुझे आतंक के द्वारा विजय हासिल करने का हुक्म दिया है .और कहा कि मैंने तुम्हें दुनिया की दौलत के खजाने की चाभी तुम्हें सौंप दी है ,और लोगों से कहो कि वह खजाना तुम्हारे हवाले कर दें "बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 220 
4-औरतों बच्चों को धोखे से मारो
आपको ऐसे हजारों उदहारण मिल जायेगे कि ,जब जिहादी या फिदायीन ने सैकड़ों निर्दोषों की आत्मघाती बम बन कर हत्या कर दी हो .यह सब ऐसी हदीसों की शिक्षा के कारण है ,इसका एक नमूना देखिये -
"आस बिन अशरफ ने कहा कि हम लोग रसूल के साथ ,अल अबवा यानी वद्दन नाम कि जगह गए ,तब रात हो गयी थी ,हमने रसूल से पूछा कि रात के समय हमला करना उचित होगा ,क्यों कि इस से सोते हुए बच्चे और औरतें भी मारे जायेंगे ,रसूल ने कहा यह सभी काफ़िर हैं ,और मुझे अल्लाह ने इन पर हमला करने का आदेश दिया है "बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 256 
"जाबिर ने कहा कि रसूल ने हम लोगोंकर से पूछा कि तुम में से कौन है जो काब बिन अशरफ नामके बूढ़े यहूदी को क़त्ल करेगा ,मुस्लिम ने कहा क्या में इतने बूढ़े बीमार को क़त्ल दूँ .रसूल ने कहा हाँ ,तुम उसे मेरे सामने क़त्ल कर दो "बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 270 
5-फिदायीन को प्रलोभन दिया 
इस्लाम में क्रूरता ,निर्दयता और अय्याशी एक साथ ही सिखाई जाती है .फिदायीन को आत्मघाती बम बनने और निदोशों कि हत्याएं करने के लिए उनको तरह तरह के लालच दिए जाते है ,जो कुरान और हदीसो में दिए है ,जैसे ,
"जबीर ने कहा कि एक जिहादी ने रसूल से पूछा ,अगर मैं मर गया तो क्या होगा ,रसूल ने उसके हाथ में एक खजूर देकर कहा ,जितनी देर में तुम इस खजूर को ख़त्म करोगे ,जन्नत में दाखिल हो जाओगे "सही मुस्लिम -किताब 20 हदीस 4678 
"अब्दुल्लाह बिन किस ने कहा कि रसूल ने कहा जन्नत का दरवाजा तलवारों की छाया के नीचे है ,फिर रसूल ने अपनी तलवार लहरा कर कहा ,तुम जब तक जिन्दा रहो ,लड़ते रहो "सही मुस्लिम -किताब 20 हदीस 4681 
"अनस बिन मलिक ने कहा कि रसूल ने कहा ,जब कोई व्यक्ति दस बार खुद को नहीं मारता (आत्मघात नहीं करता )तबतक वह जन्नत में दाखिल नहीं हो सकता "
सही मुस्लिम -किताब 20 हदीस 4635 
"अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा ,उत्तम जिहादी तो वह होता है ,जो अपने वाहन के साथ खुद को मिटा देता है "
सही मुस्लिम -किताब 20 हदीस 4655 
(बचपन से इसी तरह की हदीसें पढ़ाकर फिदायीन तैयार किये जाते हैं .अमेरिका के ट्विन टावर (Twin Towers ) को उड़ने वाला फिदायीन इसी तरह बनाया गया था ,जिसने हवाई जहाज के साथ खुद को मार कर सैकड़ों लोगों की हत्या कर दी थी .)
6-जन्नत में क्या मिलेगा 
मुसलमान जिस काल्पनिक जन्नत के लिए दुनिया को नर्क बनाने में लगे हैं ,उस जन्नत का हाल देख कर वेश्याओं का कोठा भी शर्म से मर जाएगा .इसका थोडा सा नमूना देखिये ,
"वहां घूम रहे होंगे ऐसे सुन्दर लडके ,जिनकी आयु सदा एक जैसी रहेगी "सूरा -अल वाकिया 56 :17
"वहां ऐसे सुन्दर किशोर आ जा रहे होंगे ,वह इतने सुन्दर होंगे जैसे छुपे हुए मोती हों "सूरा-अत तूर 52 :24
"जन्नत में उनके पास ऐसे किशोर होंगे जिनकी आयु सदा एकसी होगी ,और जब तुम देखोगे तो लगेगा जैसे मोती बिखरे हुए हों "
सूरा -अद दहर 76 :19
(अब वह इस्लाम का वकील लक्ष्मी शंकराचार्य ,बताये कि मुसलमान लड़कों के साथ क्या करेंगे ?)
7-इस्लामी शिक्षा के दुष्परिणाम 
यह एक अटल सत्य है कि "जैसा बीज बोओगे वैसी ही फसल काटोगे "भारत का बटवारा करवा कर मुसलमानों ने इस्लामी राज्य पाकिस्तान बनवा तो लिया ,लेकिन इस्लाम की नफ़रत फ़ैलाने वाली शिक्षा के कारण खुद मुसलमान मानव बम बन कर मुसलमानों को ही मार रहे हैं ,हम यहाँ पर प्रमाण के लिए पिछले एक साल का विवरण दे रहे हैं -
(पूरा विवरण इस साईट में है .
http://www.telegraph.co.uk/news/worldnews/asia/pakistan/8511518/Pakistan-timeline-of-suicide-bomb-attacks-2007-2011.html
1 .1 जन 2010 को पाक के बनू हसन खान जिले में एक वोली वोल मैच के दौरान एक आत्मघाती हमले में 88 लोग मारे गए .
2.3 फर 2010 पश्चिम पाक में एक लड़कियों के स्कुल के पास एक आत्मघाती विस्फोट में सैनिक और 30 लड़कियों की मौत
3..5 अप्रैल 2010 अमेरिका के दूतावास पर आत्मघाती हमला हुआ जिसमे 7 लोग मारे गए
4.10 अप्रैल 2010 को काकाघुड़ गाँव में आत्मघाती हमले में 102 लोग मारे गए .
5.7 अक्तूबर 2010 को पंजाब में एक मस्जिद पर और उसी दिन कराची में भी एक दरगाह पर ऐसा ही हमला हुआ और 9 लोग मारे गए
6.5 नवम्बर आदमखेल में एक मस्जिद पर आत्मघाती हमले में 68 लोग मारे गए .
7.31 मार्च 2011 को सवाबी में जमीयते उलमा के नेता पर एक मोटर साईकिल वाले ने ऐसा ही हमला किया ,जिस से 12 लोग मारे गए .
8.1 अप्रैल 2011 को डेरा गाजी खान में एक दरगाह पर आत्मघाती हमले 41 लोग मारे गए .
यहाँ दिए गए सभी हवालों और प्रमाणों को सिर्फ वही व्यक्ति झूठा कहने का दुस्साहस करेगा ,जिसने अपनी बुद्धि जकारिया नायक जैसे लोगों के हाथों बेच डाली होगी .
ऐसे लोग यह नहीं जानते कि कुरान में मुसलमानों को निर्दोषों की हत्या करना  फर्ज कर दिया है.कुरान में कहा है"तुम पर कत्ल करना फर्ज किया गया,और चाहे वह तुम्हें अप्रिय लगे.कुतिब अलैकुमुल किताल व हुव करिहन लकुम.सूरा-बकरा 2:216
"كُتِب عليكُم القِتال و هُو كرٌلّكُم"2:216
समझदार व्यक्ति तो यही कहेगा कि जब तक दुनिया में इस्लाम की जिहादी विचारधारा और भारत में मुसलमान रहेगे ,तब तक शांति नहीं हो सकती .मुस्लिम ब्लोगर इस्लाम की कितनी भी तारीफ़ करें ,उनके झूठ का भंडाफोड़ हो जायेगा .

http://www.thereligionofpeace.com/Quran/018-suicide-bombing.htm