मंगलवार, 27 मार्च 2012

जिहादी किसके वंशज हैं ?


आजकल मध्य एशिया को अरबी साम्राज्य का मूल स्थान माना जाता है . और यदि हम इतिहास देखें तो पता चलेगा कि इस समय जो अरब काफी धनवान बने हुए हैं ,वह स्वाभाविक रूप से लुटेरे , अत्याचारी , क्रूर ,और लालची है.और जब करीब चौदह सौ साल पहिले अरब में इस्लाम का उदय हुआ तो अरब के लोग मुसलमान बन गए .तब  से यह अरबी साम्राज्यवादी जिहाद के नाम पर सारी दुनिया में आतंक फैला रहे हैं . इनकी यह जिहादी नीति पीढी दर पीढ़ी चलती है आ रही है . चूँकि विश्व के लगभग सभी देश जिहादी आतंक से परेशान है, इसलिए लोग मानने लगे हैं कि जरुर इन जिहादियों के खून या जीन ( Gene ) में किसी अमानवीय जीव का रक्त और और अंश होगा . और इस बात पता करने के लिए हमें कुरान बाइबिल और हदीसों का सहारा होगा .क्योंकि मुसलमान उन्हीं को प्रमाणिक और सत्य मानते हैं .दुनिया भर के मुसलमान यही समझते हैं कि अल्लाह में सष्टि का प्रथम मनुष्य "आदम Adam " को बनाया था . फिर उसकी औरत "हव्वा Eve " को बनाया था .जिसके दो पुत्र हुए थे . जिनके नाम काबिल और हबील थे .और एक भाई ने दूसरे को क़त्ल कर दिया था . फिर बचे हुए लडके की संतानों से दुनिया भर के लोग पैदा हुए हैं .यहाँ एक सवाल पैदा होता है कि जब उस समय न तो कोई अदम कि पुत्री थी और न कोई दूसरी लड़की थी तो उनका वंश आगे कैसे चला था ?
लेकिन इस सवाल का जवाब खुद कुरान और हदीसों में छुपा हुआ था , और अधिकांश मुसलमानों को यह पता नहीं था कि अल्लाह ने आदम से बहुत पहले जिन्नों Devils को पैदा किया था .और आदम के लडके का वंश इन्हीं जिन्नों के संसर्ग से आगे चला था .कैसे ? देखिये 
1-आदम की सृष्टि और कर्मभूमि 
"अल्लाह ने मनुष्य की सृष्टि को मिट्टी के गारे से किया था . और उसे दुरुस्त करके उसमे अपनी आत्मा फूंक दी "सूरा -अस सजदा 32 :7 -9 
" उसीने बस एक ही जीव ( आदम ) को बनाया और फिर उसका जोड़ा बनाया ,ताकि वह उसके साथ चैन पा सके "सूरा -अल आराफ 7 :189 
और इन्हें आदम के दो बेटों का हाल बता दो ,फिर एक के जी ने उसे अपनी ही भाई की हत्या पर आमादा कर दिया .तो उसने उसकी हत्या करदी " सूरा - अल मायदा 5 :27 से 30 
कुरान की इन आयतों से पता चलता है कि आदम का सिर्फ एक ही बेटा जिन्दा रहा था ,और बाइबिल के अनुसार आदम और हव्वा अदन नामकी जगह में रहते थे .वहीँ यह बच्चे पैदा हुए थे .
" फिर परमेश्वर ने आदम को अदन की वाटिका ( Garden of Eden ) में रख दिया . ताकि वह उस जगह खेती करे " बाइबिल उत्पत्ति 3 :24 
" फिर परमेश्वर ने आदम को अदन की वाटिका ( Gardn of Eden ) में रख दिया . जिसके पास फरात नदी बहती है " बाइबिल उत्पति 2 :14 -15 
इस प्रकार अगर कुरान और बाइबिल कि बात को सही मानें तो बिना औरत के आदम के एकलौते लडके का वंश कैसे चला ,क्योंकि ,
2-आदम से पहले जिन्न Devils बने थे 
मुसलमान फरिश्तों कि तरह ही जिन्नों पर भी विश्वास रखते हैं , क्योंकि जिन्नों के बारे में कुरान में पूरी एक सूरा -जिन्न 72 दीगयी है .इसलिए जिन्नों के अस्तित्व पर शंका करने का कोई सवाल ही नहीं होता .फिर कुरान में भी कहा है ,
"और जब हमने मनुष्य को सड़ी काली मिट्टी के गारे से बनाया था ,तो उस से पहले जिन्नों को लू की लपट से पैदा किया था " 
सूरा - अल हिज्र 15 :26 -27 
"और जिन्नों को आग की लपट से पैदा किया " सूरा -रहमान 55 :15 
3-जिन्न मनुष्य से श्रेष्ठ प्रजाति है 
"जिन्नों ने कहा कहा हम आदम से श्रेष्ठ हैं , तूने हमें आग से बनाया ,औ आदम को मिट्टी से बनाया है "सूरा -अल आराफ 7 :12 
शायद यही कारण होगा कि अल्लाह में मुहम्मद को मनुष्यों के साथ जिन्नों का रसूल बना दिया था , जैसा कि कुरान कहती है ,
"हे जिन्नों और मनुष्योंके गिरोह क्या तुम्हारे पास रसूल नहीं आया , जिसने तुम्हें आयतें सुनकर क़यामत के दिन से डराया हो "
सूरा - अनआम 6 :131 
4-जिन्नों के मानवीय गुण 
कुरान और हदीसों के अनुसार जिन्न भी लोगों से दोस्ती और दुश्मनी रखते , खासकर वह मुसलमानों के दोस्त हैं ,
"और हमने हरेक नबी के दुश्मन मनुष्यों और जिन्नों में से बनाये हैं "सूरा -अनआम 6 :113 
"अब्दुल्लाह इब्न मसूद ने कहा कि रसूल ने कहा कि मुझे पता है तुम लोगों में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है ,जिसका कोई जिन्न साथी नहीं हो .लेकिन अल्लाह ने मुझे उन से बचा रखा है " सही मुस्लिम -किताब 39 हदीस 6757 और 6769 
5-जिन्नों के वर्ग और प्रकार 
हदीसों के अनुसार जिन्नों के कई वर्ग है और , वह हर तरह का रूप धारण कर सकते हैं ,और हवा में उड़ भी सकते हैं .
रसूल ने कहा कि जिन्न तीन प्रकार के हैं एक जो हवा में उड़ते हैं , एक जो सांप और कुत्ते जैसे हैं और एक वे हैं जो आवारा फिरते रहते हैं .


he Prophet (salallaho aleihi wa sallam) said, 


ا لجن ثلاثة اصناف فصنف يطير في الهواء وصنف حيات وكلاب وصنف يحلون ويظعنون


“There are three types of jinn: one that flies through the air, one that are snakes and dogs, and one which stay in places and travel about”


 by at-Tabarani and al-Haakim and by al-Baihaqi in Al-Asmaa wa as-Sifaat with sahih isnad. See Muhammad Naasir al-Deen al-Albani,

 sahih al-Jaami al-Sagheer, vol.3, p. 85.] al-Mishkaat (2/1206, no. 4148
अल तबरानी ने अपनी किताब " अल कबीर" में इसे और स्पष्ट रूप में बताया है ,देखिये 
इब्न अब्दुल बर्र ने "अकमाल जान्न 8 में जिन्नों के 6 प्रकार बताये हैं, 
1 -साधारण अरबी में उनको "जिन्नीجِنيّ " कहते हैं (sura yusuf 12:100)
2 .जो लोगों के बीच मिल कर रहते हैं , उन्हें " आमिरعامر " बहु वचन "अम्मारعمّار " कहते हैं .(sura taubah9:19)
3 .जो बच्चों से लगाव रखते हैं उन्हें " अरवाहارواح " कहते हैं 
4 .जो लोगों नुकसान देते हैं उन्हें " शयातीन الشياطين" कहते हैं (sura bakra 2:102)
5 जो उन से भी अधिक उद्दंड और बुरे होते हैं उन्हें " मारीद الماريد" कहते हैं 
6 -जो सबसे जादा ताकतवर होते है उन्हें " इफरीतعفريت " बहुवचन " इफारीत عفاريت" कहते हैं (Sura An-Naml (27:39-40)
al-Tabaraani in al-Kabeer, 22/214(http://muttaqun.com/jinn.html)
6-जिन्नों की खुराक 
हदीसों के अनुसार जिन्न बेकार की चीजें खाते रहते हैं ,और फिर गंभीर रोगों में ग्रस्त हो जाते हैं
" अबू हुरैरा ने कहा कि एक बार जब रसूल शौच कर चुके थे , मुझ से कुछ पत्थर लाने को कहा ,जिस से रगड़ कर वह अंग साफ कर सकें .. और कहा कि तुम सूखा गोबर या जानवर की हड्डियाँ नहीं लाना , यह जीनों का भोजन है ,और जिन्न हड्डियाँ , सूखा गोबर और कोयला ही खाते हैं "
बुखारी -जिल्द 5 किताब 58 हदीस 200 
"अब्दुल्लाह इब्न मसूद ने कहा कि रसूल ने कहा जिन्नों का एक दल उनके पास आया था ,और मुझसे अनुरोध किया था कि अप अपने लोगों को शौच के बाद अपने अंगों को गोबर और हड्डियों से साफ करने से रोकें .क्योंकि यह हमारे काम की चीजें हैं "Sunaan Abu Dawud, 1.1.0039)
मालिक ने कहा की उम्र बिन खत्ताब ने इराक जाने का इरादा किया तो लोगों ने उनको रोका और कहा वहां जिन्न ऐसे रोगों से ग्रस्त हैं ,जिनका इलाज संभव नहीं है .

Malik’s Muwatta, 54.11.30
7-जिन्नों से शादी 
चूंकि जिन्न मुसलमान होते हैं और पूरे मुस्लिम देशों में अपना रूप और आकार बदलकर रहते हैं , तो मुसलमान औरत मर्द उन से शादी भी कर लेते हैं . जिन्नों में सबसे खासियत यह है की वह जब चाहे अपना सेक्स (Gendar ) बदल सकते हैं . यानि मर्द से औरत और औरत से मर्द बन सकते हैं .और उनकी संताने भी होती हैं .जो इन हदीसों से सिद्ध होता है . 
जिन्नों और मुसलमानों के बीच शादी के बारे में ,हनफी इमाम इब्न आबिदीन ने "रद्द अल महतर अलल दुर्र अल मुख्तार " में कुरान की सूर निसा 4 :3 की आयात का हवाला देकर कहा ,जिसमे मुसलमानों को अपनी पसंद की किसी भी औरत से शादी करने की इजाजत दी है .और इमाम ने यह भी कहा कि पुरुष जिन्न स्त्री के रूप में और स्त्री जिन्न पुरुष के रूप में रहते हैं .
"और तुम्हारे लिए जायज है की तुम आपनी इच्छा से दो दो , तीन तीन और चार चार विवाह कर लो " सूरा -निसा 4 :3 
"hence it is possible for a male Jinn to appear in the form of a female, and visa versa. "


"وبالتالي فمن الممكن لالجن ذكر لتظهر في شكل أنثى، والعكس بالعكس"




 (See: Radd al-Muhtar 3/5)-(Arabic: رد المحتار على الدر المختار‎)Allamah Sayyid Muhammad Ameen ibn `Aabideen ash-Shaami

इब्ने तय्यमा ने कहा कि अक्सर मनुष्य और जिन्न आपस में शादी कर लेते हैं . और उनकी संतान भी होती है , यह बात सब जानते हैं .
Ibn Taimiya said,


“Humans and jinn have gotten married and have had children; this has happened often and is well-known.”


"قال ابن تيمية،


"قد حصلت الانس والجن تزوجت وكان لها الأطفال، وهذا ما حدث في كثير من الأحيان وغير معروفة".


 (Majmoo Fatwa, vol 19: p 39)

http://www.missionislam.com/knowledge/books/JinnDevils.pdf
8-जिन्नों यानी शैतानों का राज्य 
अभी तक लोग शैतान और जिन्नों को अलग समझते आये हैं ,लेकिन कुरान के अनुसार जिन्न भी शैतान ही हैं . और कुरान में उनको एअज्य करने ( आतंक फ़ैलाने ) का वरदान दिया गया है
"अबू हुरैरा ने कहा की रसूल ने कहा कल अचानक एक ताकतवर जिन्न मेरी नमाज में व्यवधान पैदा करने लगा . तब मैंने सोचा कि उसे पकड़ कर मस्जिद के खम्भे से बांध कर कैद कर दूँ .तभी मुझे अपने भाई सुलेमान की बात याद आगई . उन्होंने जिन्नों को राज करने का वरदान दिया है ( सूरा -साद 38 :35 )
बुखारी - जिल्द 4 किताब 55 हदीस 634 
यह पूरी आयत इस प्रकार है ,
फिर जिन्नों ने कहा रब हमें वह राज्य प्रदान कर ,जो हमारे बाद किसी के भी लिए शोभनीय नहीं हो .बेशक तू बड़ा दाता है "सूरा -साद 38 :35 
9-जिन्न ही शैतान हैं 
"और इबलीस (शैतान ) जिन्नों में से था " सूरा -अल कहफ़ 18 :50 
" إِلَّا إِبْلِيسَ كَانَ مِنَ الْجِنِّ"
इस आयत से साफ हो जाता है कि वास्तव में मुसलमान जिसे शैतान कहते हैं वह एक जिन्न है ,
10-सारांश और निष्कर्ष 
जो लोग शैतान और जिन्नों को अलग समझते हैं वे अपनी आँखें खोल कर कुरान की इस आयत पढ़ें . और बताएं की कुरान में कई जगह "शैतान " की जगह " शयातीन" शयातीन الشياطين"  " शब्द क्यों दिया गया है . जोकि शैतान का बहुवचन Plural है यानि शैतान एक नहीं अनेक हैं .और पूरी कुरान में यह शब्द 14 बार आया है .इन सभी तथ्यों से यह बातें प्रमाणित होती हैं कि जिन्न यानी शैतान अनेकों हैं 2 . मनुष्य से पहले पैदा हुए थे 3 .इस्लामी देशों खासकर अरब देशों में रहते हैं 4 .बहुलिंगीय polygender होते हैं 5 .बहुरूपी और अतिमानव super human होते हैं 6 . मनुष्यों से बच्चे पैदा कर सकते हैं .7 जन्म लेते और मरते भी हैं .8 . अत्याचारी और क्रूर होते हैं .9 .और जब जिन्नों यानी" शयातीन "की इतनी विशेषताएं साबित होती हैं ,तो किसी भी बुद्धिमान व्यक्ति को यह बात समझने में कोई दिक्कत नहीं होगी कि ,जब आदम के एकमात्र लडके लिए अल्लाह ने कोई लड़की बनायी ही नहीं थी . तो उसका वंश और बाद के सभी नबी कैसे पैदा हुए थे .क्या मुसलमान इस बात से इनकार कर सकेंगे कि आदम के लडके से जितना भी वंश चला था सबमे अध मनुष्य और आधा जिन्नों अर्थात शयातीन खून था . और यही कारण कि अरब के और सभी इस्लामी देश न तो शांति से रहते हैं और न दुनिया के लोगों को शांति से रहने देते हैं .क्योंकि 
"जिहादी आतंकियों में शयातीन का खून और जींस हैं "

Do your genes make you a criminal?


http://www.independent.co.uk/news/uk/do-your-genes-make-you-a-criminal-1572714.html

बुधवार, 21 मार्च 2012

मुहम्मद अंतिम रसूल कैसे ?




इस्लामी मान्यता के अनुसार अल्लाह प्रथ्वी से फाफी ऊपर सातवें आसमान पर रहता है .और वहां पर एक भव्य सिंहासन(अर्श ) पर विराजमान होकर अपना शासन चलाता रहता है .और प्रथ्वी के लोगों का मार्ग दर्शन करने और सचेत करने के लिए प्रथ्वी पर अपने दूत (ambasador ) या प्रतनिधि खड़े कर देता है . जिन्हें नबी ,या पैगम्बर ( Prophets ) कहा जाता है .अल्लाह अपने इन नबियों से फरिश्तों के माध्यम से या सीधे संपर्क में बना रहता है .फिर यह नबी अल्लाह का सन्देश ,या आदेश लोगों तक पहुंचाते रहते हैं .यद्यपि कुरान में सभी नबियों को समान माना गया है ,और उनमे किसी प्रकार का विभेद या अंतर करने से मना किया है ,लेकिन कुतर्की ,और चालक मुल्ले इन नबियों में कृत्रिम रूप से अंतर करते हैं . इनका उदेश्य मुहम्मद को नबियों में सर्वोपरि और इस्लाम को सर्वश्रेष्ठ धर्म साबित करना होता है .इसके लिए इन मूलों ने एक चाल चली ,और मुहम्मद को अंतिम रसूल बताना शरू कर दिया . बाद में कुछ मक्कार ब्लोगरों ने हिन्दुओंको गुमराह करने के लिए मुहम्मद को अंतिम अवतार भी घोषित कर दिया .यहाँ पर कुरान और प्रमाणिक हदीसों के आधार पर ऐसे तथाकथित मुस्लिम विद्वानों और ब्लोगरों के इस दावे का भंडाफोड़ किया जा रहा जो मुहम्मद को अंतिम रसूल या अंतिम अवतार बताते हैं ,देखिये 
1- सभी नबी समान हैं 
अल्लाह की नजर में उसके सभी नबी समान हैं ,और उनमे किसी तरह का विभेद करना अल्लाह के आदेश का उल्लंघन है .कुरान में कहा है ,
"जो दूसरे सभी नबियों को और जो उनके रब की ओर से मिली (नबूवत ) उनमे किसी के बीच में अंतर (distinction ) नहीं करते और हम उसी के आज्ञाकारी हैं . सूरा -बकरा 2 :136 और सूरा -आले इमरान -3 :84 

2-औरतें नबी क्यों नहीं बन सकती 
लेकिन औरतों के नबी नहीं बनने पर हदीसों में जो तर्क दिया है वह बिलकुल अवैज्ञानिक और महिला विरोधी है .इस से मुल्लों की मानसिकता का पता चलता है ,देखिये .-
सईदुल खुदरी ने कहा की औरतों का दर्जा पुरुष से आधा होता है ,और उनमे सोचने की शक्ति का आभाव होता है (defiiciency in mind ) होती है 
बुखारी -जिल्द 3 किताब 48 हदीस 826 
"इब्ने अब्बास ने कहा कि रसूल ने कहा औरतों के ईमान में आभाव होता है ,क्योंकि मासिक के कारण वह अशुद्ध होती रहती है ,और उनकी बुद्धि भी कम होती .इसी लिए वह नबी नहीं हो सकती " बुखारी -जिल्द 1 किताब 6 हदीस 301 
3-नबी के लिए योग्यता 
नबी बनने के लिए किसी खास योग्यता की जरुरत नहीं होती है .अल्लाह जिसे चाहे उसे नबी बना देता था ,जैसे नूह की नाव में जितने भी लोग सवार हो सके थे सभी नबी बन गए थे .कुरान में कहा है 
"नूह के साथ जितने भी लोग उनकी नाव में सवार हुए थे ,अल्लाह ने उन पर कृपा की और वे सब नबी बनाये गए "सूरा-मरयम 19 :58 
4-नबी सचेतक और मार्गदर्शक हैं 
इस्लामी मान्यता के अनुसार अल्लाह ने आदम से लेकर मुहम्मद तक हरेक देश और जाति के किये नबी या सचेतक भेजे है ,जो लोगों का मार्गदर्शन करते थे .इनको कुरान में नजीर या हादी भी कहा गया है .कुरान में कहा है ,
"ऐसा कोई गिरोह नहीं हुआ जिसमे कोई सचेत करने वाला ( नजीरنذيرٌ )नहीं आया हो "सूरा -फातिर 35 :24 
"और हरेक जाति के लिए एक मार्ग दिखाने वाला ( हादीهادٍ ) हुआ है "सूरा -रअद 13 :7 
यह सभी नबी कोई नया धर्म नहीं चलाते थे ,बल्कि उस देश की रीतियों का पालन कराते थे .जैसा कुरान में लिखा है ,
"हमने हरेक गिरोह के लिए इबादत के लिए रीति ( मनसक منسك)बनायीं है ,जिस पर यह लोग चलते हैं ,हे मुहम्मद तुम उनसे इस विषय में झगडा नहीं करो "
सूरा -अल हज्ज -22 :67 
" हे मुहम्मद हमने तो तुम्हें केवल शुभ सूचना देने वाला ( बशीर بشير) और सचेतक (नजीर warner )बनाकर भेजा है "सूरा -फातिर 35 :24 
5-नबी और रसूल में अंतर 
अगर गौर से देखा जाये तो सभी नबियों के लगभग एक से काम होते हैं . और भाषा के अनुसार नबी ,पैगम्बर और रसूल का एक एक ही अर्थ होता है और बाईबिल में भी सभी के लिए नबी ( Prophets ) शब्द का प्रयोग किया गया है ,लेकिन मुसलमानों ने नबियों में भेद करके "रसूल " शब्द का प्रयोग कर दिया जो इथोपिया का शब्द है .
फिर मुहम्मदरसूल को नबियों से श्रेष्ठ बता दिया .
नबी -ऐसा व्यक्ति जिसे अल्लाह ने प्रेरणा या सूचना देकर अपना दूत नियुक्त किया हो ,और जो लोगों को भविष्य कि बाते बताता हो .लोगों को सचेत करता हो ,और रहस्य की बातों सा का खुलासा करके भविष्यवाणी करता हो 
रसूल -अल्लाह का प्रतिनिधि (Ambassador ) होता है .जो फरिश्तों के माध्यम से या सीधे अल्लाह से संपर्क में रहता है .जिसे अल्लाह ने किसी विशेष प्रयोजन के लिए नियुक्त किया हो .और कोई कताब भी दी हो . रसूल का दर्जा नबी से बड़ा होता है .हरेक रसूल नबी होता है .लेकिन हरेक नबी रसूल नहीं हो सकता .
6-क्या मुहम्मद अंतिम रसूल है ?
अबतक पढ़ने के बाद आपको नबी और रसूल के अंतर का पता चल गया होगा .मुस्लिम विद्वान् बड़ी चालाकी से मुहम्मद को अंतिम रसूल साबित करना चाहते हैं .वह मुहम्मद को अंतिम नबी नहीं कहते .जैसा की कुरान में कहा गया है ,
"वह अल्लाह के रसूल लेकिन नबियों के समापक ( Seal of Prophets ) हैं "सूरा -अहजाब 33 :40 
( व लाकिन्ना रसूलिल्लाह खातमन नाबिय्यीन)"وَلَٰكِنْ رَسُولَ اللَّهِ وَخَاتَمَ النَّبِيِّينَ" 
कुरान की इस आयत के अनुसार मुहम्मद को अंतिम नबी कहा जा सकता है ,लेकिन आखिरी रसूल कहना गलत होगा ,क्योंकि हदीसों के अनुसार अंतिम रसूल भविष्य आने वाला है .जो इन हदीसों से साबित होता है .
7-अंतिम नबी है अंतिंम रसूल नहीं 
अंतिम नबी और अंतिम रसूल का खुलासा इन हदीसों से हो जाता है कि अंतिम कौन है देखिये 
"कतदा ने कहा की इस आयत का तात्पर्य आखिरी नबी है ,आखिरी रसूल नहीं है ."
عن قتادة ، في قوله تعالى : ( وخاتم النبيين) قال : آخر النبيين 
It is narrated from Qatadah that he said about the word of Allah, “Wa Khātam al-Nabiyyin”: “[It means] Last of the Prophets.” (Qatada (d. circa 100 A.H.): 
Tafsir Abdul Razzaq al-San’ani, Narration 2270) 
इब्ने कसीर ने कुरान कि इस आयत कि तफ़सीर में विशेष रूप से कहा कि एस का अर्थ सिर्फ आखिरी नबी ही है ,इसला मतलब यह नहीं है कि भविष्य में कोई रसूल नहीं होगा 
فهذه الآية نص في أنه لا نبي بعده، وإذا كان لا نبي بعده فلا رسول [بعده] بطريق الأولى والأحرى؛ لأن مقام الرسالة أخص من مقام النبوة، فإن كل رسول نبي، ولا ينعكس 
“This verse categorically states that there will be no Prophet [Nabi] after him. If there will be no Prophet [Nabi] after him .” (
Tafsir Ibn Kathir) Ibn Kathir (d. 774 A.H.): 
8-अंतिम रसूल ईसा मसीह होंगे 
इस्लाम के विद्वान अल जमाख्शारी के साथ दिए विद्वानों ने इस बात का खंडन किया है कि मुहम्मद आखिरी रसूल है ,
"तुम कैसे कह सकते हो कि मुहम्मद आखिरी रसूल हैं ? जबकि माना गया है कि दुनिया के अंत के समय पुनरुत्थान से पहले ईसा मसीह निचे उतर कर आएंगे "
فإن قلت : كيف كان آخر الأنبياء وعيسى ينزل في آخر الزمان؟ قلت : معنى كونه آخر الأنبياء أنه لا ينبأ أحد بعده ، وعيسى ممن نبىء قبله ، وحين ينزل ينزل عاملاً على شريعة محمد صلى الله عايه وسلم ، مصلياً إلى قبلته ، كأنه بعض أمته 
“If you ask; how can the Holy Prophet be the last of the Prophets when there is the belief that ‘Eisa will come down near the End of the Times before Resurrection? Al-Zamakhshari (d. 538 A.H.): 
Tafsir al-Kashshaf
Nizamuddin al-Qumi (d. 728 A.H.) in Tafsir Gharaib al-Qur’an
Abu al-Hassan al-Khazin (d. 741 A.H.) in Tafsir Lubab al-Tanzil
प्रमाण में लिए यह विडियो देखिये -

9-अंतिम मस्जिद Last Mosque
इसी तरह मुहम्मद ने मदीना स्थित अपनी मस्जिद को दुनिया की आखिरी मस्जिद घोषित कर दिया था ,लेकिन आज भी नयी नयी मस्जिदें बन रही है .अर्थात यह बात भी झूठ है .
सही मुस्लिम के अनुसार मुहम्मद ने कहा "मैं आखिरी नबी हूँ और मेरी मस्जिद दुनिया कि आखिरी मस्जिद होगी "

قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَإِنِّي آخِرُ الْأَنْبِيَاءِ وَإِنَّ مَسْجِدِي آخِرُ الْمَسَاجِدِ 

The Prophet (PBUH) said; "I am the last of the Prophets and my mosque is the last of the mosques." 
(Sahih Muslim. Hadith 6:2471)
" कन्जुल उमाल के अनुसार रसूल ने कहा " मैं आखिरी नबी हूँ और मेरी मस्जिद नबियों की आखिरी मस्जिद होगी "
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم أنا خاتم الأنبياء ومسجدي خاتم مساجد الأنبياء

Holy Prophet (PBUH) said; "I am the last of the Prophets and my mosque is the last of the mosques of the prophets." 
(Kanz al-Ummal 12/270 H.34999. Albani authenticated in Sahih Targheeb wa Tarheeb H. 1175
10-मुहम्मद के बाद भी नबी !
"अबू ने कहा कि रसूल ने कहा मेरे बाद सन 1200 हिजरी में मेहदी नाम के रसूल होंगे ,जिनकी निशानियाँ दो सौ साल के अन्दर दिखाई देंगे "
Mahdi to appear after the year 1200 A.H.? The Narration:
عن أبي قتادة قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم الآيات بعد المائتين
Abu Qatada narrates that the Holy Prophet (PBUH) said: “Signs will appear after two hundred years.”
 (Sunan Ibn Majah, Hadith 4057)
11-अंतिम औलिया अली है 'Khatam ul Auliya'
खतीब बगदादी ने तारीख बगदाद ने लिखा है कि रसूल ने कहा "मैं खातिमुल अम्बिया ( आखिरी नबी ) हूँ और हे अली तुम खातिमुल औलिया (आखिरी औलिया ) हो .
Khateeb Baghdadi's Tarikh Al-Baghdad where the exact wording is;
أنا خاتم الأنبياء وأنت يا علي خاتم الأولياء
"I am Khatam ul Anbiya and you O Ali are Khatam ul Awliya." (Tarikh Al-Baghdad 4/473)

पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने 27 जनवरी 2012 को कहा था कि इस्लाम एक ऐसा धर्म है ,जिसे सबसे अधिक गलत रूप से समझाया गया है और जो गलत लोगों के हाथों में (Islam is in wrong hands and most misunderstood religion)है .इन्डियन एक्सप्रेस 
इस्लाम के प्रचारक विद्वान् , और जकारिया नायक जैसे लोग कुतर्कों के लिए कुख्यात है ,यही लोग इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं .इसका एक नमूना दिया जा रहा है -जकारिया नायक का कुतर्क ( विडिओ )
Non-Muslims will not have equal Humanrights - Zakir Naik
आज भी ऐसे ही अपने कुतर्कों से कभी मुहम्मद को आखिरी रसूल या अंतिम अवतार ,और मुहमद की मस्जिद को आखिरी मस्जिद और अली को आखिरी औलिया साबित करने में लगे रहते हैं .जबकि उनके यह सभी दावे झूठ है .अली के बाद हजारों औलिया और मदीने की मस्जिद के बाद लाखों मस्जिदें बनी है .मुहम्मद के बाद इसा और मेहदी की बात खुद मुहम्मद की हदीसों में लिखी है .
वास्तव में यह चालाक और धूर्त मुहम्मद को अंतिम रसूल बताकर उसे सभी नबियों से श्रेष्ठ और महान साबित करना चाहते हैं . ताकि लोग मुहम्मद को मान कर मुसलमान बन जाएँ .  यह लोग इतनी बात भी नहीं जानते कि जो मेरिट लिस्ट में अंतिम होता है ,उसका दर्जा सबसे नीचा और घटिया होता है .हमें आज ऐसे सत्तालोभियों के कुतर्कों का जवाब देना होगा .कि ,
"अंतिम वाला बेकार और घटिया "




मंगलवार, 13 मार्च 2012

इस्लामी बंदगी दरिंदगी और गंदगी !


जगत में जितने भी जीवधारी हैं ,सबको अपनी जान प्यारी होती है .और सब अपने बच्चों का पालन करते हैं .इसमे किसी को कोई शंका नहीं होना चाहिए .परन्तु अनेकों देश के लोग इन निरीह और मूक प्राणियों को मार कर उनके शरीर के अंगों या मांस को खाते हैं.ऐसे लोग इन प्राणियों को मार कर खाने के पक्ष में कई तर्क और फायदे बताते हैं .सब जानते हैं कि बिना किसी प्राणी को मारे बिना उसका मास खाना असंभव है ,फिर भी ऐसे लोग खुद को "शरीर भक्षी (Carnivorous ) कि जगह (Non vegetarian ) कहकर खुद को सही ठहराते हैं .कुछ लोग शौक के लिए और कुछ देखादेखी भी आमिष भोजन करते हैं .लेकिन इस्लाम ने मांसभक्षण को और जानवरों की क़ुरबानी को एक धार्मिक और अनिवार्य कृत्य बना दिया है . और क़ुरबानी को अल्लाह की इबादत का हिस्सा बताकर सार्वजनिक रूप से मानाने वाला त्यौहार बना दिया है .क़ुरबानी ,क्या है , इसका उद्देश्य क्या है ,और मांसाहार से इन्सान स्वभाव में क्या प्रभाव पड़ता है ,यह इस लेख में कुरान और हदीस के हवालों दिया जा रहा है .साथ में कुछ विडियो लिंक भी दिए हैं .देखिये 
1-कुरबानी का अर्थ और मकसद 
अरबी शब्दकोश के अनुसार "क़ुरबानी قرباني" शब्द मूल यह तीन अक्षर है 1 .قकाफ 2 .رरे 3 और  ب बे = क र बق ر ب .इसका अर्थ निकट होना है .तात्पर्य ऐसे काम जिस से अल्लाह की समीपता प्राप्त हो . हिंदी में इसका समानार्थी शब्द " उपासना" है .उप = पास ,आस =निकट .लेकिन अरबी में जानवरों को मारने के लिए "उजुहाالاضحي " शब्द है जिसका अर्थ "slaughter " होता है .इसमे किसी प्रकार की कोई आध्यात्मिकता नजर नहीं दिखती है .बल्कि क्रूरता , हिंसा ,और निर्दयता साफ प्रकट होती है .जानवरों को बेरहमी से कटते और तड़प कर मरते देखकर दिल काँप उठता है और यही अल्लाह चाहता है , कुरान में कहा है ,
"और उनके दिल उस समय काँप उठते हैं , और वह अल्लाह को याद करने लगते हैं " सूरा -अल हज्ज 22 :35 
2-क़ुरबानी की विधियाँ 
यद्यपि कुरान में जानवरों की क़ुरबानी करने के बारे में विस्तार से नहीं बताया है और सिर्फ यही लिखा है ,
"प्रत्येक गिरोह के लिए हमने क़ुरबानी का तरीका ठहरा दिया है , ताकि वह अपने जानवर अल्लाह के नाम पर कुर्बान कर दें " 
सूरा -हज्ज 22 :34
लेकिन सुन्नी इमाम " मालिक इब्न अबी अमीर अल अस्वही" यानि मालिक बिन अनस مالك بن انس "(711 - 795 ई० ) नेअपनी प्रसिद्ध अल मुवत्ताThe Muwatta: (Arabic: الموطأ‎)  की किताब 23 और 24 में जानवरों और उनके बच्चों की क़ुरबानी के जो तरीके बताएं है . उसे पढ़कर कोई भी अल्लाह को दयालु नहीं मानेगा ,
 3-पशुवध की राक्षसी विधियाँ 
मांसाहार अरबों का प्रिय भोजन है ,इसके लिए वह किसी भी तरीके से किसी भी जानवर को मारकर खा जाते थे . जानवर गाभिन हो या बच्चा हो ,या मादा के पेट में हो सबको हजम कर लेते थे . और रसूल उनके इस काम को जायज बता देते थे बाद में यही सुन्नत बन गयी है और सभी मुसलमान इसका पालन करते हैं ,इन हदीसों को देखिये ,
अ -खूंटा भोंक कर 
"अनस ने कहा कि बनू हरिस का जैद इब्न असलम ऊंटों का चरवाहा था , उसकी गाभिन ऊंटनी बीमार थी और मरणासन्न थी . तो उसने एक नोकदार खूंटी ऊंटनी को भोंक कर मार दिया . रसूल को पता चला तो वह बोले इसमे कोई बुराई नहीं है ,तुम ऊंटनी को खा सकते हो "
मालिक मुवत्ता-किताब 24 हदीस 3 
ब-पत्थर मार कर 
"याहया ने कहा कि इब्न अल साद कि गुलाम लड़की मदीने के पास साल नामकी जगह भेड़ें चरा रही थी. एक भेड़ बीमार होकर मरने वाली थी.तब उस लड़की ने पत्थर मार मार कर भेड़ को मार डाला .रसूल ने कहा इसमे कोई बुराई नहीं है ,तुम ऐसा कर सकते हो "
मालिक मुवत्ता -किताब 24 हदीस 4 
जानवरों को मारने कि यह विधियाँ उसने बताई हैं , जिसको दुनिया के लिए रहमत कहा जाता है ?और अब किस किस को खाएं यह भी देख लीजये .
4-किस किस को खा सकते हो 
इन हदीसों को पढ़कर आपको राक्षसों की याद आ जाएगी .यह सभी हदीसें प्रमाणिक है ,यह नमूने देखिये
अ -घायल जानवर 
"याह्या ने कहा कि एक भेड़ ऊपर से गिर गयी थी ,और उसका सिर्फ आधा शरीर ही हरकत कर रहा था ,लेकिन वह आँखें झपक रही थी .यह देखकर जैद बिन साबित ने कहा उसे तुरंत ही खा जाओ "मालिक मुवत्ता किताब 24 हदीस 7 
ब -मादा के गर्भ का बच्चा 
"अब्दुल्लाह इब्न उमर ने कहा कि जब एक ऊंटनी को काटा गया तो उसके पेट में पूर्ण विक्सित बच्चा था ,जिसके बल भी उग चुके थे . जब ऊंटनी के पेट से बच्चा निकाला गया तो काफी खून बहा ,और बच्चे दिल तब भी धड़क रहा था.तब सईद इब्न अल मुसय्यब ने कहा कि माँ के हलाल से बच्चे का हलाल भी माना जाता है . इसलिए तुम इस बच्चे को माँ के साथ ही खा जाओ " मुवत्ता किताब 24 हदीस 8 और 9 
स -दूध पीता बच्चा 
"अबू बुरदा ने रसूल से कहा अगर मुझे जानवर का केवल एकही ऐसा बच्चा मिले जो बहुत ही छोटा और दूध पीता हो , रसूल ने कहा ऐसी दशा में जब बड़ा जानवर न मिले तुम बच्चे को भी काट कर खा सकते हो " मालिक मुवत्ता -किताब 23 हदीस 4 
5-क़ुरबानी का आदेश और तरीका 
वैसे तो कुरान में कई जानवरों की क़ुरबानी के बारे में कहा गया है ,लेकिन यहाँ हम कुरान की आयत विडियो लिंक देकर कुछ जानवरों की क़ुरबानी के बारे जानकारी दे रहे हैं .ताकि सही बात पता चल .सके , पढ़िए और देखिये ,
अ -गाय "याद करो जब अल्लाह ने कहा की गाय को जिबह करो ,जो न बूढी हो और न बच्ची बीच का आयु की हो "सूरा -बकरा 2 :67 -68 


http://www.youtube.com/watch?v=Giz6aMHuDhU&feature=related

ब- ऊंट -"और ऊंट की कुरबानी को हमने अल्लाह की भक्ति की निशानियाँ ठहरा दिया है "सूरा अल हज्ज 22 :36 

http://www.youtube.com/watch?v=uT9oFsxqTsg&feature=related

स -चौपाये बैल -"तुम्हारे लिए चौपाये जानवर भी हलाल हैं ,सिवाय उसके जो बताये गए हैं "सूरा-अल 22 :30 

http://www.youtube.com/watch?v=RMDLNLK83kg&feature=related

6-गैर मुस्लिमों को गोश्त खिलाओ 
"इब्ने उमर और और इब्न मसूद ने कहा की रसूल ने कहा है ,कुरबानी का गोश्त तुम गैर मुस्लिम दोस्त को खिलाओ ,ताकि उसले दिल में इस्लाम के प्रति झुकाव पैदा हो "
 it is permissible to give some of it to a non-Muslim if he is poor or a relative or a neighbor, or in order to open his heart to Islam.


"فإنه يجوز أن أعطي بعض منه الى غير مسلم إذا كان فقيرا أو أحد الأقارب أو الجيران، أو من أجل فتح صدره للإسلام "


Sahih Al-Jami`, 6118
गैर मुस्लिमों जैसे हिन्दुओं को गोश्त खिलाने का मकसद उनको मुसलमान बनाना है ,क्योंकि यह धर्म परिवर्तन की शुरुआत है .बार बार खाने से व्यक्ति निर्दयी और कट्टर मुसलमान बन जाता है .

7-गोश्तखोरी से आदमखोरी
मांसाहारी व्यक्ति आगे चलकर नरपिशाच कैसे बन जाता है ,इसका सबूत पाकिस्तान की ARY News से पता चलता है ,दिनांक 4 अप्रैल 2011 पुलिस ने पाकिस्तान पंजाब दरया खान इलाके से आरिफ और फरमान नामके ऐसे दो लोगों को गिरफ्तार किया ,जो कब्र से लाशें निकाल कर ,तुकडे करके पका कर खाते थे . यह परिवार सहित दस साल से ऐसा कर रहे थे.दो दिन पहले ही नूर हुसैन की 24 की बेटी सायरा परवीन की मौत हो गयी थी ,फरमान ने लाश को निकाल लिया ,जब वह आरिफ के साथ सायरा को कट कर पका रहा था ,तो पकड़ा गया . पुलिस ने देगची में लड़की के पैर बरामद किये . इन पिशाचों ने कबूल किया कि हमने बच्चे और कुत्ते भी खाए हैं .ऐसा करने कीप्रेरणा हमें दूसरों से मिली है , जो यही काम कराते हैं . विडियो लिंक

http://www.youtube.com/watch?v=uoDpLHCr7e0

8-हलाल से हराम तक 
खाने के लिए जितने भी जानवर मारे जाते हैं ,उनका कुछ हिस्सा ही खाया जाता है , बाकी का कई तरह से इस्तेमाल करके लोगों को खिला दिया जाता है ..इसके बारे में पाकिस्तान के DUNYA NEWS की समन खान ने पाकिस्तान के लाहौर स्थित बाबू साबू नाले के पास बकर मंडी के मजबह (Slaughter House ) का दौरा करके बताया कि वहां ,गधे कुत्ते , चूहे जैसे सभी मरे जानवरों की चर्बी निकाल कर घी बनाया जाता है . यही नहीं होटलों में खाए गए गोश्त की हडियों को गर्म करके उसका भी तेल निकाल कर पीपों में भर कर बेच दिया जाता है ,जिसे जलेबी ,कबाब ,समोसे आदि तलने के लिए प्रयोग किया होता है . खून को सुखा कर मुर्गोयों की खुराक बनती है . फिर इन्हीं मुर्गियों को खा लिया जाता है .आँतों में कीमा भरके बर्गर बना कर खिलाया जाता है .विडियो लिंक 

http://www.youtube.com/watch?feature=endscreen&NR=1&v=6YdtLZGsK_E

हमारी सरकार जल्द ही पाकिस्तान के साथ व्यापारिक अनुबंध करने जारही है ,और तेल या घी के नाम पर जानवरों की चर्बी और ऐसी चीजें यहाँ आने वाली हैं . 
लोगों को फैसला करना होगा कि उन्हें पूर्णतयः शाकाहारी बनकर ,शातिशाली , बलवान ,निर्भय और जीवों के प्रति दयालु बन कर देश और विश्व कि सेवा करना है ,या धर्म के नाम पर या दुसरे किसी कारणों से प्राणियों को मारकर खाके हिसक क्रूर निर्दयी सर्वभक्षी पिशाच बन कर देश और समाज के लिए संकट पैदा करना है .
दूसरेधर्मों के लोग ईश्वर को प्रसन्न करने और उसकी कृपा प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या करके खुद को कष्ट देते हैं .लेकिन इस्लाम में बेजुबान जानवरों को मार कर अल्लाह को खुश किया जाता है . और इसी को इबादत या बंदगी माना जाता है .फिर यह बंदगी दरिंदगी बन जाती है .और जिसका नतीजा गन्दगी के रूप में लोग खाते हैं
 इस लेख को पूरा पढ़ने के बाद विचार जरुर करिए .
माँसाहारी अत्याचारी ,और अमानुषिक हो सकते हैं लेकिन बलवान और सहृदय कभी नहीं सो सकते .


http://spl.qibla.com/Hadith/H0001P0024.aspx

शनिवार, 10 मार्च 2012

बाईबिल और कुरान का अल्लाह ?


चूंकि ईसाई और मुसलमान भारतीय धर्म ग्रंथों को मानवनिर्मित और कपोलकल्पित बताते हैं , और अपनी किताबों जैसे तौरेत ,जबूर,इंजील और कुरान को अल्लाह की किताबें और प्रमाणिक बताते हैं ,इसी लिए उन्हीं को सही मानकर चलते हैं .यह सभी मानते हैं कि तौरेत यानी बाइबिल कुरान से काफी पहले की अल्लाह की किताब है . यद्यपि मुसलमान यह भी कहते हैं कि तौरेत में लोगों ने बदलाव कर दिया है .लेकिन अधिकांश बाते बाइबिल और कुरान में एक जैसी मिलती हैं यही नहीं कुछ ऐसी परम्पराएँ और रिवाज है ,जो मुसलमानों ने तौरेत से अपना लिए हैं , जिनको यह सुन्नते इब्राहीम भी कहते हैं , जैसे खतना कराना और कुर्बानी का रिवाज ,यानि अल्लाह के नाम पर जानवरों कि हत्या करना ईसाई और मुसलमान दौनों यह मानते हैं कि अल्लाह के पहला व्यक्ति आदम को बनाया था ,जिसके दो पुत्र काबिल और हाबिल हुए थे .जिनमे से एक की संतान से सारे मनुष्य पैदा हुए है .मुसलमानों का यह भी दावा है कि , अल्लाह ने इब्राहीम की परीक्षा लेने के लिए अपने लडके इस्माइल की क़ुरबानी देने को कहा था .लेकिन इस्माइल की जगह एक मेंढा रख दिया था .और उसी की याद में जानवरों की हत्या की जाती है .मुसलमानों का यह भी दावा है कि , अल्लाह को न मांस चाहिए और न खून चाहिए .इस बात में कितनी सच्चाई है , और हकीकत क्या है ,यह बाइबिल और कुरान के आधार पर दिया जा रहा है , देखिये
1-सृष्टि का प्रथम मांसाहारी 
मुसलमान "तौरेत " यानि बाइबिल को अल्लाह की किताब कहते हैं, तो इसके अनुसार सृष्टि का पहला मांसाहारी अल्लाह ही है ,
बाइबिल के अनुसार आदम का बड़ा बेटा काबिल खेती करने लगा ,और छोटा बेटा भेड़ बकरियां पालने का काम करने लगा .कुछ समय बाद जब काबिल अपनी उपज से कुछ भेंट खुदा को चढाने के लिए गया तो खुदा ने उसे अस्वीकार कर दिया .लेकिन जब हाबिल ने एक पहिलौठे भेड़ को मारकर उसकी चर्बी खुदा को चढ़ाई ,तो खुदा ने खुश होकर कबूल कर लिया ." बाइबिल -उत्पत्ति 4 :1 से 6 
इस बात से पता चलता है कि अल्लाह स्वभाव से हिंसक और मांसप्रेमी है उस समय खुदा का घर नहीं था ,इसकिये उसने आसान तरकीब खोज निकाली
2-स्थायी वधस्थान 
कुछ समय के बाद खुदा ने एक जगह स्थायी वधस्थल ( slaughter place ) बनवा दिया जिसे मिज्बह Altars (Hebrew: מזבח‎, mizbe'ah,  कहते हैं ,वहीँ पर खुदा जानवरों की बालियां .स्वीकार करता था .ताकि भटकना नहीं पड़े .खुदा ने कहा ,
"तू मेरे लिए एक मिट्टी की वेदी बनवाना ,और उसी पर अपनी भेड़ -बकरियां और अपने गाय बैलों की होम बलियां चढ़ाना .और मैं वहीँ रह कर तुझे आशीष दूंगा .और अगर तू पत्थर की वेदी बनाये तो तराशे हुए पत्थरों की नहीं बनाना "बाइबिल .व्यवस्था 20 :24 -25 
3-खुदा की मांसाहारी पसंद 
जब एक बार खुदा में मुंह में मांस का स्वाद लग गया तो छोटे बड़े सभी शाकाहारी जानवरों की कुर्बानियां लेने लगा ,और उनकी आयु .रंग और मरने की तरकीबें भी लोगों को बताने लगा ,जो बाइबिल और कुरान में बतायीं हैं
"खुदा ने कहा ,क्या मनुष्य के और क्या पशु के जोभी अपनी माँ की बड़ी संतान हो ,वे सब तू मेरे लिए रख देना " Exodus 13:2 
"खुदा ने कहा कि याजक पाप निवारण के लिए वेदी पर निर्दोष मेंढा लेकर आये "बाइबिल .लेवी 5 :15 
अल्लाहने मूसा से कहा गाय न बूढ़ी हो और न बछिया .इसके बीच की आयु की हो "सूरा -बकरा 2 :68 
"तुम ऊंटों को पंक्ति में खड़ा कर देना ,और जो गोश्त के भूखे हों वह धीरज रखें ,जब ऊंट ( रक्तस्राव ) के किसी पहलू पर गिर जाये तो उसको कट कर खुद खा लेना और भूखों को खिला देना "सूरा -हज्ज 22 :36
ऊंट के गले में छेद कर देते हैं ,इसे नहर कहते है .कुरान ने विधि बताई है .
4-जानवर कटने के लिए हैं 
अपने लिए मांस पहुंचता रहे इसलिए अल्लाह ने घर बैठे ही इतजाम कर लिया और कहा कि,
"क़ुरबानी के जानवरों की बस यही नियति है की , उनको क़ुरबानी की पुरानी जगह तक पंहुचना है "सूरा -हज्ज 22 :33 
"हमने प्रत्येक गिरोह के लिए क़ुरबानी का तरीका ठहरा दिया है "सूरा-हज्ज 22 :34 
5-खून हराम क्यों किया गया 
मुस्लिम विद्वान् खून को हराम बताने के पीछे अनेकों कुतर्क करते हैं ,लेकिन असली कारण तौरेत यानि बाइबिल में मिलता है ,खून खुदा को सबसे अधिक पसंद है .कुरान और बाइबिल के कथन देखिये
"क्योंकि हरेक देहधारी के प्राण उसके खून में रहते हैं ,और इसलिए मैंने लोगों से वेदी पर खून चढाने को कहा है .इसलिए कोई भी व्यक्ति खून नहीं खाए .
 बाईबिल लेवी -17 -11 -13 
"याजक पशु का खून वेदी के पास रखदे " बाइबिल लेवी -4 : 30 
क्योंकि बलि का खून तो खुदा का भोजन है .इसलिए तुम खून नहीं खाना "बाइबिल लेवी -3 :17 
"मूसा से खुदा ने कहा ,की तुम पर मुरदार ,खून ,और सूअर और जिसपर अलह के सिवा किसी का नाम लिया गया हो ,सब हराम"
सूरा -बकरा 2 :173 और सूरा-मायदा 5 :3 
"तुम मांस को प्राणों के साथ यानि खून के साथ नहीं खाना " बाइबिल उत्पति 9 :4 -5 
तौरेत यानी बाइबिल की इन आयतों से साबित हैं कि खून तो खुदा का भोजन है ,इसलिए उसने दूसरोंके किये खून हराम कर दिया था ,
6-खुदा मांस खाकर ऊब गया 
जब कई बरसों तक खुदा जानवरों का कच्चा मांस खा कर ,और खून पी चुका तो वह अघा गया ,और उसे इन चीजों से अरुचि होने लगी थी , जो बाइबिल में इन शब्दों में वर्णित है
खुदा ने कहा अब जानवरों की कुर्बानियां मेरे किसी काम की नहीं हैं ,मैं मेढ़ों और जानवरों के खून  से अघा गया हूँ .अब में बछड़ों ,और भेड़ के बच्चों और  बकरों के खून से प्रसन्न नहीं होता " बाइबिल .यशायाह 1 :11 -12 
  तब खुदा ने सोचा कि नमक से मांस में स्वाद आयेगा ,तो उसने कहा ,
"खुदा ने कहा ,तू क़ुरबानी की बलियों को नमकीन बनाना ,और बलि को बिना नमक नहीं रहने देना ,इसलिए चढ़ावे में नमक भी रख देना "
बाइबिल लेवी 2 :13 
7-लडके लड़कियों कि क़ुरबानी 
जब खुदा को जानवरों कि कुर्बानियों से संतोष नहीं हुआ ,तो वह इसानों के लडके लड़कियों कि क़ुरबानी लेने लगा .इब्राहीम और इसहाक ( इस्माइल ) की कथा तो लोग जानते हैं ,लेकिन खुदा ने लड़की की क़ुरबानी भी ले ली थी .देखिये .
"खुदा ने इब्राहिम से कहा तू मेरे द्वारा बताई गयी जगह मोरिया पर जा ,और अपने प्रिय बेटे इसहाक की मेरे लिए होम बलि चढ़ा दे "Genesis 22:1-18
फिर इब्राहीम ने लडके को माथे के बल लिटा दिया ,तब हमने उसकी जन बचाने के लिए एक विशेष कुर्बानी पेश कर दी "
सूरा -अस साफ्फात 37 :103 से 107 
बाद में खुदा लड़कियों की कुर्बानियां भी लेने लगा ,यानि मनुष्यभक्षी बन गया .जो बाइबिल से सिद्ध होता है .
"यिप्ताह के कोई पुत्र नहीं था,उसने मन्नत मांगी कि यदि वह युद्ध से कुशल आ जायेगा तो अपनी संतान कि क़ुरबानी कर देगा ,एक ही पुत्री मिज्पाह थी थी . उसने पुत्री की कुर्बानी कर दी .Judges 11:29-40 

विश्व के अनेकों लोग मांसाहार करते हैं ,और उसके पक्ष में तरह तरह के तर्क भी देते हैं .और कुछ ऐसे भी धर्म हैं , जिनमे पशुबलि और नरबलि की कुरीति पाई जाती है.जिसको वह लोग अपने धर्मग्रंथ की किसी कथा से जोड़कर ,रिवाज और आवश्यक धार्मिक कार्य मानते हैं .इस्लाम की ऐसी ही परंपरा क़ुरबानी की है , पैगम्बर इब्राहीम द्वारा अपने पुत्र की क़ुरबानी से सम्बंधित है . ,और इसकी कथा , बाइबिल ,और कुरान में मौजूद है . यद्यपि इब्राहीम द्वारा बाइबिल में इसहाक की क़ुरबानी , और कुरान में इस्माइल की क़ुरबानी बताई गई है .अब सवाल यह उठता है कि एक विवादग्रस्त किंवदंती के आधार हर साल करोड़ों निरीह मूक प्राणियों की क्रूर हत्या को एक धार्मिक कार्य मानना कहाँ तक उचित मानना चाहए .जबकि उसी इब्राहीम के अनुयायी यहूदियों और ईसाईयों ने क़ुरबानी को धार्मिक रूप नहीं दिया है .क्या कारण है कि दयालु , और कृपालु ईश्वर , खुदा ,God या अल्लाह अचानक इतना हिंसक और रक्तपिपासु कैसे बन गया कि वह जानवरों के साथ मनुष्यों की कुर्बानियां भी लेकर खुश होने लगा .ड्रैकुला एक ऐसा नरपिशाच होता है जो लोगों का खून पीकर युगों तक जीवित रहता है .इसी तरह बाईबिल के समय खून पीने वाला जो ईसाईयों का खुदा था ,वह कुरान के समय अल्लाह बन गया है .शायद इसीलिए मुसलमान कहते हैं कि अल्लाह एक ही है .
जो खुदा लोगों के सत्कर्मों से नाराज ,और पशुबलि (कुर्बानी ) से प्रसन्न होता है ,वह ईश्वर नहीं हो सकता .
.
http://www.evilbible.com/Ritual_Human_Sacrifice.htm

शनिवार, 3 मार्च 2012

मुस्लिम देशों में अशांति क्यों है ?


आजकल लगभग सभी मुस्लिम देशों में विभिन्न कारणों से खूनी संघर्ष हो रहे हैं , जिसके फलस्वरूप रोज हजारों लोग मारे जा रहे हैं , फिरभी कुछ मुस्लिम धार्मिक नेता वास्तविकता पर परदा डालने के लिए कभी अमेरिका और कभी दुसरे देशों को इसका जिम्मेदार बताते रहते हैं . यह तो अच्छा है कि इन देशों में हिन्दू नहीं हैं , वर्ना यह मौलवी वहां के उपद्रवों और हत्याओं के लिए आर. एस .एस का नाम लगा देते .चूंकि इन मुस्लिम देशों के उपद्रवग्रस्त और अशांत होने से विश्व के सभी देशों से प्रभाव पड़ रहा है ,जो एक चिंता का विषय है ,कि आखिर क्या वजह है ,जिस के कारण न तो यह देश शांत रहते हैं ,और न ही दूसरों को शांतिपूर्वक रहने देते हैं .क्योंकि यह समस्या मुस्लिम देशों से सम्बंधित है , जहाँ बड़े बड़े उग्रवादी संगठन मौजूद है ,इसलिए कुरान और हदीसों आधार पर अशांति   के असली कारण बताये जा रहे हैं ,जो इस प्रकार हैं ,
1-वहां सभी मुसलमान हैं 
कुरान और हदीसों से साबित होता है कि , अल्लाह जिस बच्चे को भी जन्म देता है , वह धर्म के अनुसार पक्का मुसलमान होता है ,मुसलमानों का स्वभाव कैसा होता है ,सब जानते हैं ., और मुसलमानों के स्वभाव में किसी भी प्रकार का परिवर्तन संभव नहीं है .क्योंकि उनका स्वभाव ही उनका दीन( धर्म ) है .देखिये
"अल्लाह की सृष्टि में कोई परिवर्तन होने वाला नहीं है ,क्योंकि यही दीन(धर्म ) है .लेकिन अधिकांश लोग नहीं जानते "सूरा -रूम 30 :30 
अबू हुरैरा ने कहा कि इस आयत के बारे में रसूल ने कहा कि ,हरेक बच्चा असली( ईमान )इस्लाम में जन्म लेता है ,"
"وروى أبو هريرة:
قال رسول الله: "كل مولود يولد مع الايمان الحقيقي للإسلام"
Narrated Abu Huraira:
Allah's Apostle said, "Every child is born with a true faith of Islam
Sahih Al-Bukhari, Volume 2, Book 23, Number 441)
Sahih Al-Bukhari, Volume 2, Book 23, Number 467
2-मनुष्य में अल्लाह की आत्मा 
इस्लामी मान्यता के अनुसार अल्लाह ने स्रष्टि का प्रथम व्यक्ति आदम बनाया था . और उसके शरीर बनाने के बाद उसमे अपनी आत्मा फूंक दी थी . इस तरह सभी आदम की संतानें हैं , और सभी में आदम के गुण मौजूद है ,
"हमने इन्सान को नख शिख से बिलकुल ठीक बनाया और ,फिर उसमे अपनी रूह फूंक दी "सूरा -अस सजदा 32 :9 
"और फिर उसकी आत्मा को जैसा रचाना चाहा वैसा बनाया ,और जब इस काम में सफल हो गया तो ,आत्मा को और नीखर दिया "
सूरा -अश शम्श 91 :1 और 91 :9 
3-अल्लाह ने मनुष्य को कैसा बनाया 
कुरान के अनुसार अल्लाह ने आदम को नापतौल करके खोट रहित बिलकुल सही सही बनाया था ,और उसे अच्छा रूप ,और निष्पाप बनाया था
"हमने मनुष्य को सुन्दरतम रूप से बनाया है ,और उसे अच्छी प्रकृति प्रदान की है "सूरा -अत तीन 95 :4 
"उसी ने हरेक चीज को बनाया है ,फिर उसका ठीक से अंदाजा भी ठहराया है "सूरा -अल फुरकान 25 :2 
उसी ने इन्सान का अच्छा स्वभाव दिया है "सूरा -तागाबुन 64 :3 
4-आदम अल्लाह प्रतिरूप है 
अगर हम इन हदीसों को गौर से पढ़ें तो पता चलता है कि आदम की केवल शक्ल ही नहीं सभी गुण भी अल्लाह के जैसे ही थे .यानि जो आदतें और स्वभाव अल्लाह के हैं ,वही आदम के भी थे , देखिये
"अबू हुरैरा ने कहा ,कि रसूल ने कहा है , अल्लाह ने आदम को प्रतिरूप बनाया है "


Narrated Abu Huraira:The Prophet said, "Allah created Adam in HIS IMAGE
"
"وروى أبو هريرة: أن النبي قال: "خلق الله آدم على صورته"


 (Sahih al-Bukhari, Volume 8, Book 74, Number 246,

अबू हुरैरा ने कहा ,कि रसूल ने कहा है ,कि महान अल्लाह ने आदम को अपना प्रतिरूप बनाया है "


Abu Huraira reported Allah's Messenger as saying: Allah, the Exalted and Glorious, created Adam in HIS own image 


"عن أبي هريرة رسول الله قوله: الله، عز وجل، ومجيد، وآدم خلق على صورته"


Sahih Muslim, Book 040, Number 6809
"अल्लाह के रसूल ने कहा ,यदि कोई अपने भाई से मारामारी करे ,तो उसके चहरे पर प्रहार करने से बचे , क्योंकि अल्लाह ने आदम को अपनी सूरत जैसा बनाया है "
The Messenger of Allah, may Allah bless him, said:“When any one of you fights with his brother, he should avoid his face for Allah created Adam in his or His own image.”
إِذَا قَاتَلَ أَحَدُكُمْ أَخَاهُ فَلْيَجْتَنِبْ الْوَجْهَ فَإِنَّ اللَّهَ خَلَقَ آدَمَ عَلَى صُورَتِهِ
 Sahih Muslim-BK 20  Hadith 4731
http://www.sahihmuslim.com/sps/sp.cfm?secID=GSC&loadpage=displaysection.cfm
सही मुस्लिम कि इस हदीस व्याख्या करते हुए इब्न अजीबा ने "अल मुबहदिस अल असलिया" में कहा है ,इसका तत्पर अल्लाह जैसी सूरत नहीं ,उसके गुणों के बारे में कहा गया है ,
Ibn `Ajibah writes in the explanation of this hadith [al-Mabahith al-Asliyyah,(المباحث العامة )
line 22: "And the reality of the human has a pattern in the manners"] hadith 20:4731
5-मनुष्यों को सारे गुण आदम से मिले 
चूँकि अल्लाह ने अपनी आत्मा और अपने सभी गुण जो आदम में प्रविष्ट कर दिए थे , वह पीढी दर पीढ़ी आदम की संतानों में पहुंचते रहे , और मनुष्य उसी के प्रभाव से काम करता रहा .
"लोग बोले यह गुनाह तो हमारे पूर्वज से आया है , हम तो उसके बाद पैदा हुए हैं ,क्या तू इसके लिए हमें विनष्ट कर रहा है "
सूरा -अल आराफ 7 :173 
6--दुर्गुण अल्लाह की देन हैं 
एक साधारण सा व्यक्ति भी समझ सकता है ,कि जिस दुकानदार के पास जो और जैसा माल होगा , वह ग्राहक को वैसा ही माल देगा . अल्लाह के पास आदम को देने के लिए जिस प्रकार के गुण थे उसके कुछ उदहारण दिए जारहे हैं ,जो कुरान में बताये हैं ,
1 - कृतघ्न और अन्यायी 
"मनुष्य बड़ा ही अन्यायी और कृतघ्न है "सूरा -इब्राहिम 14 :34
"निश्चय ही मनुष्य खुला कृतघ्न है 'सूरा-अज जुखुरुफ़ 43 :15
"नाश हो जाये इस मनुष्य का ,कितना कृतघ्न है "सूरा - अबस 80 :17
2-झगड़ालू 
"मनुष्य प्रतक्ष्य झगडालू और विवाद करने वाला है "सूरा -अन नहल 16 :4
"परन्तु मनुष्य सबसे बड़ा झगडालू है "सूरा -अल काफ 18 :54
3-उतावला 
"मनुष्य बड़ा उतावला है ,और बुराई मांगता है "सूरा-बनी इस्राइल 17 :11
"मनुष्य को उतावला पैदा किया गया है "सूरा -अल अम्बिया 21 :37
4-पीड़ित 
"निस्संदेह हमने मनुष्य को कष्टों में ग्रस्त बनाया है "सूरा -अल बलद 90 :4
5-तंग दिल
"मनुष्य का दिल बड़ा ही तंग बनाया गया है "सूरा - बनी इसराइल 17 :100
"मनुष्य कंजूसी करता है ,और दूसरों से कंजूसी करवाता है "सूरा -अल हदीद 57 :24
6-भुलक्कड़ 
"जब उसे कोई नेमत प्रदान की जाती है ,तो फ़ौरन भूल जाता है "सूरा अज जुमुर 39 :8 और 39 :49
7-अत्याचारी 
"निश्चय ही मनुष्य बड़ा ही जालिम और जाहिल है "सूरा -अहजाब 33 :72
8-चिड़चिड़ा 
"मनुष्य बड़े ही कच्चे दिल का बनाया गया है "सूरा -अल मुआरिज 70 :19
9-स्वार्थी 
"जब कृपा की जाती है तो ,किनारा कर देता है ,और जब तकलीफ पड़ती है तो दुआ करता है " सूरा अस सजदा 41 :51
"लोभ तो इन्सान के सामने ही रहता है " सूरा अन निसा 4 :128
7-निष्कर्ष 
जिस देश और समाज के लोगों का चारित्रिक रूप से घोर पतन हो गया हो ,जो अपने स्वार्थ के लिए किसी भी हद तक जा सकते हों ,वह विश्व के लिए खतरा बने रहेंगे .जब खुद अल्लाह ने ऐसे लोगों में ठूंस ठूंस कर सारे दुर्गुण भर दिए हैं .इसका एक नमूना देखिये ( विडियो )
Mullha-who raped 48 dead bodies in Pakistan Must watch

http://www.youtube.com/watch?v=M4Pg-teqraY

जब अल्लाह ने ऐसे ऐसे लोग बना दिए हैं ,और जिनका स्वभाव बदल नहीं सकता ,तो वह हमेशा अशांति ही फैलाते रहेंगे .इनको शांत करने का वही उपाय है जो अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन पर आजमाया था.

http://abdurrahman.org/character/negativequalitiesmankind.html