बुधवार, 21 मार्च 2012

मुहम्मद अंतिम रसूल कैसे ?




इस्लामी मान्यता के अनुसार अल्लाह प्रथ्वी से फाफी ऊपर सातवें आसमान पर रहता है .और वहां पर एक भव्य सिंहासन(अर्श ) पर विराजमान होकर अपना शासन चलाता रहता है .और प्रथ्वी के लोगों का मार्ग दर्शन करने और सचेत करने के लिए प्रथ्वी पर अपने दूत (ambasador ) या प्रतनिधि खड़े कर देता है . जिन्हें नबी ,या पैगम्बर ( Prophets ) कहा जाता है .अल्लाह अपने इन नबियों से फरिश्तों के माध्यम से या सीधे संपर्क में बना रहता है .फिर यह नबी अल्लाह का सन्देश ,या आदेश लोगों तक पहुंचाते रहते हैं .यद्यपि कुरान में सभी नबियों को समान माना गया है ,और उनमे किसी प्रकार का विभेद या अंतर करने से मना किया है ,लेकिन कुतर्की ,और चालक मुल्ले इन नबियों में कृत्रिम रूप से अंतर करते हैं . इनका उदेश्य मुहम्मद को नबियों में सर्वोपरि और इस्लाम को सर्वश्रेष्ठ धर्म साबित करना होता है .इसके लिए इन मूलों ने एक चाल चली ,और मुहम्मद को अंतिम रसूल बताना शरू कर दिया . बाद में कुछ मक्कार ब्लोगरों ने हिन्दुओंको गुमराह करने के लिए मुहम्मद को अंतिम अवतार भी घोषित कर दिया .यहाँ पर कुरान और प्रमाणिक हदीसों के आधार पर ऐसे तथाकथित मुस्लिम विद्वानों और ब्लोगरों के इस दावे का भंडाफोड़ किया जा रहा जो मुहम्मद को अंतिम रसूल या अंतिम अवतार बताते हैं ,देखिये 
1- सभी नबी समान हैं 
अल्लाह की नजर में उसके सभी नबी समान हैं ,और उनमे किसी तरह का विभेद करना अल्लाह के आदेश का उल्लंघन है .कुरान में कहा है ,
"जो दूसरे सभी नबियों को और जो उनके रब की ओर से मिली (नबूवत ) उनमे किसी के बीच में अंतर (distinction ) नहीं करते और हम उसी के आज्ञाकारी हैं . सूरा -बकरा 2 :136 और सूरा -आले इमरान -3 :84 

2-औरतें नबी क्यों नहीं बन सकती 
लेकिन औरतों के नबी नहीं बनने पर हदीसों में जो तर्क दिया है वह बिलकुल अवैज्ञानिक और महिला विरोधी है .इस से मुल्लों की मानसिकता का पता चलता है ,देखिये .-
सईदुल खुदरी ने कहा की औरतों का दर्जा पुरुष से आधा होता है ,और उनमे सोचने की शक्ति का आभाव होता है (defiiciency in mind ) होती है 
बुखारी -जिल्द 3 किताब 48 हदीस 826 
"इब्ने अब्बास ने कहा कि रसूल ने कहा औरतों के ईमान में आभाव होता है ,क्योंकि मासिक के कारण वह अशुद्ध होती रहती है ,और उनकी बुद्धि भी कम होती .इसी लिए वह नबी नहीं हो सकती " बुखारी -जिल्द 1 किताब 6 हदीस 301 
3-नबी के लिए योग्यता 
नबी बनने के लिए किसी खास योग्यता की जरुरत नहीं होती है .अल्लाह जिसे चाहे उसे नबी बना देता था ,जैसे नूह की नाव में जितने भी लोग सवार हो सके थे सभी नबी बन गए थे .कुरान में कहा है 
"नूह के साथ जितने भी लोग उनकी नाव में सवार हुए थे ,अल्लाह ने उन पर कृपा की और वे सब नबी बनाये गए "सूरा-मरयम 19 :58 
4-नबी सचेतक और मार्गदर्शक हैं 
इस्लामी मान्यता के अनुसार अल्लाह ने आदम से लेकर मुहम्मद तक हरेक देश और जाति के किये नबी या सचेतक भेजे है ,जो लोगों का मार्गदर्शन करते थे .इनको कुरान में नजीर या हादी भी कहा गया है .कुरान में कहा है ,
"ऐसा कोई गिरोह नहीं हुआ जिसमे कोई सचेत करने वाला ( नजीरنذيرٌ )नहीं आया हो "सूरा -फातिर 35 :24 
"और हरेक जाति के लिए एक मार्ग दिखाने वाला ( हादीهادٍ ) हुआ है "सूरा -रअद 13 :7 
यह सभी नबी कोई नया धर्म नहीं चलाते थे ,बल्कि उस देश की रीतियों का पालन कराते थे .जैसा कुरान में लिखा है ,
"हमने हरेक गिरोह के लिए इबादत के लिए रीति ( मनसक منسك)बनायीं है ,जिस पर यह लोग चलते हैं ,हे मुहम्मद तुम उनसे इस विषय में झगडा नहीं करो "
सूरा -अल हज्ज -22 :67 
" हे मुहम्मद हमने तो तुम्हें केवल शुभ सूचना देने वाला ( बशीर بشير) और सचेतक (नजीर warner )बनाकर भेजा है "सूरा -फातिर 35 :24 
5-नबी और रसूल में अंतर 
अगर गौर से देखा जाये तो सभी नबियों के लगभग एक से काम होते हैं . और भाषा के अनुसार नबी ,पैगम्बर और रसूल का एक एक ही अर्थ होता है और बाईबिल में भी सभी के लिए नबी ( Prophets ) शब्द का प्रयोग किया गया है ,लेकिन मुसलमानों ने नबियों में भेद करके "रसूल " शब्द का प्रयोग कर दिया जो इथोपिया का शब्द है .
फिर मुहम्मदरसूल को नबियों से श्रेष्ठ बता दिया .
नबी -ऐसा व्यक्ति जिसे अल्लाह ने प्रेरणा या सूचना देकर अपना दूत नियुक्त किया हो ,और जो लोगों को भविष्य कि बाते बताता हो .लोगों को सचेत करता हो ,और रहस्य की बातों सा का खुलासा करके भविष्यवाणी करता हो 
रसूल -अल्लाह का प्रतिनिधि (Ambassador ) होता है .जो फरिश्तों के माध्यम से या सीधे अल्लाह से संपर्क में रहता है .जिसे अल्लाह ने किसी विशेष प्रयोजन के लिए नियुक्त किया हो .और कोई कताब भी दी हो . रसूल का दर्जा नबी से बड़ा होता है .हरेक रसूल नबी होता है .लेकिन हरेक नबी रसूल नहीं हो सकता .
6-क्या मुहम्मद अंतिम रसूल है ?
अबतक पढ़ने के बाद आपको नबी और रसूल के अंतर का पता चल गया होगा .मुस्लिम विद्वान् बड़ी चालाकी से मुहम्मद को अंतिम रसूल साबित करना चाहते हैं .वह मुहम्मद को अंतिम नबी नहीं कहते .जैसा की कुरान में कहा गया है ,
"वह अल्लाह के रसूल लेकिन नबियों के समापक ( Seal of Prophets ) हैं "सूरा -अहजाब 33 :40 
( व लाकिन्ना रसूलिल्लाह खातमन नाबिय्यीन)"وَلَٰكِنْ رَسُولَ اللَّهِ وَخَاتَمَ النَّبِيِّينَ" 
कुरान की इस आयत के अनुसार मुहम्मद को अंतिम नबी कहा जा सकता है ,लेकिन आखिरी रसूल कहना गलत होगा ,क्योंकि हदीसों के अनुसार अंतिम रसूल भविष्य आने वाला है .जो इन हदीसों से साबित होता है .
7-अंतिम नबी है अंतिंम रसूल नहीं 
अंतिम नबी और अंतिम रसूल का खुलासा इन हदीसों से हो जाता है कि अंतिम कौन है देखिये 
"कतदा ने कहा की इस आयत का तात्पर्य आखिरी नबी है ,आखिरी रसूल नहीं है ."
عن قتادة ، في قوله تعالى : ( وخاتم النبيين) قال : آخر النبيين 
It is narrated from Qatadah that he said about the word of Allah, “Wa Khātam al-Nabiyyin”: “[It means] Last of the Prophets.” (Qatada (d. circa 100 A.H.): 
Tafsir Abdul Razzaq al-San’ani, Narration 2270) 
इब्ने कसीर ने कुरान कि इस आयत कि तफ़सीर में विशेष रूप से कहा कि एस का अर्थ सिर्फ आखिरी नबी ही है ,इसला मतलब यह नहीं है कि भविष्य में कोई रसूल नहीं होगा 
فهذه الآية نص في أنه لا نبي بعده، وإذا كان لا نبي بعده فلا رسول [بعده] بطريق الأولى والأحرى؛ لأن مقام الرسالة أخص من مقام النبوة، فإن كل رسول نبي، ولا ينعكس 
“This verse categorically states that there will be no Prophet [Nabi] after him. If there will be no Prophet [Nabi] after him .” (
Tafsir Ibn Kathir) Ibn Kathir (d. 774 A.H.): 
8-अंतिम रसूल ईसा मसीह होंगे 
इस्लाम के विद्वान अल जमाख्शारी के साथ दिए विद्वानों ने इस बात का खंडन किया है कि मुहम्मद आखिरी रसूल है ,
"तुम कैसे कह सकते हो कि मुहम्मद आखिरी रसूल हैं ? जबकि माना गया है कि दुनिया के अंत के समय पुनरुत्थान से पहले ईसा मसीह निचे उतर कर आएंगे "
فإن قلت : كيف كان آخر الأنبياء وعيسى ينزل في آخر الزمان؟ قلت : معنى كونه آخر الأنبياء أنه لا ينبأ أحد بعده ، وعيسى ممن نبىء قبله ، وحين ينزل ينزل عاملاً على شريعة محمد صلى الله عايه وسلم ، مصلياً إلى قبلته ، كأنه بعض أمته 
“If you ask; how can the Holy Prophet be the last of the Prophets when there is the belief that ‘Eisa will come down near the End of the Times before Resurrection? Al-Zamakhshari (d. 538 A.H.): 
Tafsir al-Kashshaf
Nizamuddin al-Qumi (d. 728 A.H.) in Tafsir Gharaib al-Qur’an
Abu al-Hassan al-Khazin (d. 741 A.H.) in Tafsir Lubab al-Tanzil
प्रमाण में लिए यह विडियो देखिये -

9-अंतिम मस्जिद Last Mosque
इसी तरह मुहम्मद ने मदीना स्थित अपनी मस्जिद को दुनिया की आखिरी मस्जिद घोषित कर दिया था ,लेकिन आज भी नयी नयी मस्जिदें बन रही है .अर्थात यह बात भी झूठ है .
सही मुस्लिम के अनुसार मुहम्मद ने कहा "मैं आखिरी नबी हूँ और मेरी मस्जिद दुनिया कि आखिरी मस्जिद होगी "

قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَإِنِّي آخِرُ الْأَنْبِيَاءِ وَإِنَّ مَسْجِدِي آخِرُ الْمَسَاجِدِ 

The Prophet (PBUH) said; "I am the last of the Prophets and my mosque is the last of the mosques." 
(Sahih Muslim. Hadith 6:2471)
" कन्जुल उमाल के अनुसार रसूल ने कहा " मैं आखिरी नबी हूँ और मेरी मस्जिद नबियों की आखिरी मस्जिद होगी "
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم أنا خاتم الأنبياء ومسجدي خاتم مساجد الأنبياء

Holy Prophet (PBUH) said; "I am the last of the Prophets and my mosque is the last of the mosques of the prophets." 
(Kanz al-Ummal 12/270 H.34999. Albani authenticated in Sahih Targheeb wa Tarheeb H. 1175
10-मुहम्मद के बाद भी नबी !
"अबू ने कहा कि रसूल ने कहा मेरे बाद सन 1200 हिजरी में मेहदी नाम के रसूल होंगे ,जिनकी निशानियाँ दो सौ साल के अन्दर दिखाई देंगे "
Mahdi to appear after the year 1200 A.H.? The Narration:
عن أبي قتادة قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم الآيات بعد المائتين
Abu Qatada narrates that the Holy Prophet (PBUH) said: “Signs will appear after two hundred years.”
 (Sunan Ibn Majah, Hadith 4057)
11-अंतिम औलिया अली है 'Khatam ul Auliya'
खतीब बगदादी ने तारीख बगदाद ने लिखा है कि रसूल ने कहा "मैं खातिमुल अम्बिया ( आखिरी नबी ) हूँ और हे अली तुम खातिमुल औलिया (आखिरी औलिया ) हो .
Khateeb Baghdadi's Tarikh Al-Baghdad where the exact wording is;
أنا خاتم الأنبياء وأنت يا علي خاتم الأولياء
"I am Khatam ul Anbiya and you O Ali are Khatam ul Awliya." (Tarikh Al-Baghdad 4/473)

पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने 27 जनवरी 2012 को कहा था कि इस्लाम एक ऐसा धर्म है ,जिसे सबसे अधिक गलत रूप से समझाया गया है और जो गलत लोगों के हाथों में (Islam is in wrong hands and most misunderstood religion)है .इन्डियन एक्सप्रेस 
इस्लाम के प्रचारक विद्वान् , और जकारिया नायक जैसे लोग कुतर्कों के लिए कुख्यात है ,यही लोग इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं .इसका एक नमूना दिया जा रहा है -जकारिया नायक का कुतर्क ( विडिओ )
Non-Muslims will not have equal Humanrights - Zakir Naik
आज भी ऐसे ही अपने कुतर्कों से कभी मुहम्मद को आखिरी रसूल या अंतिम अवतार ,और मुहमद की मस्जिद को आखिरी मस्जिद और अली को आखिरी औलिया साबित करने में लगे रहते हैं .जबकि उनके यह सभी दावे झूठ है .अली के बाद हजारों औलिया और मदीने की मस्जिद के बाद लाखों मस्जिदें बनी है .मुहम्मद के बाद इसा और मेहदी की बात खुद मुहम्मद की हदीसों में लिखी है .
वास्तव में यह चालाक और धूर्त मुहम्मद को अंतिम रसूल बताकर उसे सभी नबियों से श्रेष्ठ और महान साबित करना चाहते हैं . ताकि लोग मुहम्मद को मान कर मुसलमान बन जाएँ .  यह लोग इतनी बात भी नहीं जानते कि जो मेरिट लिस्ट में अंतिम होता है ,उसका दर्जा सबसे नीचा और घटिया होता है .हमें आज ऐसे सत्तालोभियों के कुतर्कों का जवाब देना होगा .कि ,
"अंतिम वाला बेकार और घटिया "




30 टिप्‍पणियां:

  1. २-इस पर कहते हैं कि कोई असमानता नहीं है आदमी-औरतों में .

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    1. अभिषेक जी कृपा करके किसी पे आक्षेप मत लगाईये क्योकि बेचारे मुशाल्मानो को उनके मजहबी यारो ने इस प्रकार से जकड कर रखा है की यह छह कर भी इन बन्धनों से मुक्त नहीं हो सकते इस्लाम की बुराई करने की तो बात ही दूर यह अपने धर्म की तारीफ भी खुले दिल से नहीं कर सकते मुझे कहते हुए दुःख हो रहा है
      दुनिया की सबसे गवार कौम केवल और केवल दूसरो के इशारो पर नाचते है इनमे अपने दीमक को इस्तेमाल करने की भी इल्म नहीं है

      यदि यह कौम दीमक इस्तेमाल करती है तो केवल अपने धर्म को बदने बच्चे पैदा करने जेहाद करने में करती है

      सीमित धार्मिक इल्म है इनके पास सीमित ही इनकी समझ है इस कौम के लोगो का सीमित दिमाग भी है

      बेचारे अल्ला के मारे रसूल के दुलारे

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    2. Or tum loga barhahmah ke kahne par Ghay ko bhi mata bana dete ho

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  3. सत्यार्थी जी बहुत ही महत्वपूर्ण लेख हालाँकि इस लेख से कुछ मुशालमन भाइयो को कष्ट हो सकता है जबकि यह लेख सचाई के बिलकुल आस -पास ही कही है .जिस प्रकार हिन्दुओ में बहुत पहले कही कही पर आज भी पोंगा पंडितो का साम्राज्य थो .जो किसी भी व्यक्ति को केवल और केवल ठगने के लिए तर्क कुतर्क का सहारा लेते थे वह आज के दिनों में लगभग समाप्ति की ओर है क्योकि हिन्दू इन पोंगा पंडितो की चलो को समझ गए और इन पोंगा पंडितो से मुक्ति पा ली
    किन्तु मुशालमन जिन्हें केवल मजहबी तालीम की बात बता कर तर्कों कुतर्को के साथ मुश्लिमो के दलाल कठमुल्ले आम मुशालमन को दुनिया समाज की तहजीब से दूर रखते है जो तमाम तरह के कुतर्को से सिध्ध करते है की दीनी तालीम ही खुदा की तालीम है इसके शिवा सारी शिक्षा पध्धातिया बेकार है
    मुशलमान इन कठमुल्लों की बातो में आ कर अनपद गावर रह जाते है जिन्हें गुमराह करना बेहद आशान है .
    दुर्भाग्य है इस देश के मुशाल्मानो का इनमे से जो कुछ मुशालमन दुनियावी तहजीब से वाकिफ हो जाते है वो भी कठमुल्ला लॉबी के सामने घुटने टेक देते है और कठमुल्लों की हा में हा मिलते है मजबूरी में .मजबूरी में हा में हा मिलाने वालो को कठमुल्ले अपनी बिरादरी में शामिल करके उन्हें "अन्धो में काना राजा" की तरह प्रचारित कर देते है बस फिर क्या दोनों खुश आम मुशालमन जो की गावर है किन्तु कभी कबूल नहीं करेगा की वो गावर है वो भी खुश.

    इन मुशाल्मानो का तो बस अल्ला ही मालिक है

    और घूमा फिरा के बात वाही की वाही मुशालमन तो केवल रसूल को जानते है .

    अब पता नहीं अल्ला है भी या नहीं

    कोई बताने वाला भी नहीं की अल्ला है क्योकि जो बताने वाला था वह तो मर गया .

    १५०० वर्षो में अल्ला ने आज तक किसी को अपनी शकल नहीं दिखाई और आगे भी नहीं दिखायेगा ऐसा कुरान में लिखा है

    अब बेचारे मुशाल्मानो की सुनाने वाले ना तो रसूल है और ना ही अल्ला

    मुशालमन मुशालमन न रहे बेचारे बन गए भेड बकरी जिन्हें जैसे मर्जी आये ये कठमुल्ले घुमाएंगे ये बेचारे घूमेंगे क्योकि इनको इन कठमुल्लों से मुक्त करने वाला कोई है नहीं .

    जब तक मुशालमन दीनी तालीम में फसा रहेगा तब तक इस्लाम बदनाम होता रहेगा क्योकि इस्लाम को बदनाम करने वाले भी तो मुशलमान ही है .

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  4. लगता है इस्लाम की गहन जानकारी प्राप्त की है |निसंदेह इतने गुढ़ अध्ययन के बिना इस्लाम पर पड़ा आवरण हटाना मुश्किल था |

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  5. Ali Sina's reply:

    Dear Farhad.

    You have all the reasons to be concerned. It is said that ignorance is bliss. The non-Muslims, particularly the Europeans are blissfully ignorant of the danger of Islam. Only ex-Muslims, who have seen the extent of devastation that Islam causes, can understand the enormity of the threat that this cult poses to the world and human civilization.

    It is a mistake to tolerate Islam. It is a mistake to grant it the status of religion and count it among other religions. Islam is not another color in the rainbow of religions. It is the blackness of the night that aims to obliterate all colors.

    Some mistakes are costlier than others. Sometimes inaction can result in disasters. The mistake that the world committed during the 1930s when Nazism was gaining strength cost over fifty million lives. Tolerating Islam today can result in far more deaths in the near future. If Islam is allowed to take over the world, we will lose our freedom and our civilization altogether. Although this is not in the cards and it is unlikely to happen, the possibility of a nuclear holocaust in which billions of people could perish is very real. This disaster can be avoided if we act now, put a brake on the history and change its course, before it reaches the precipice.

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  6. The only way to avoid this looming danger is to help Muslims leave Islam. This exodus must begin in large numbers and soon. However, this is not an easy task. Muslims have not embraced Islam through reason. Therefore, they will not leave it through reason. Muslims generally avoid dialogue altogether. They believe that there is no need to prove Islam and that everyone must accept it readily once they are called to do so.

    Converting to Islam is very much an emotional rather than rational experience. Emotions act on the most primitive part of the brain. They are stronger and supersede the rational mind. As the result, it is not easy to reason with Muslims. They won’t leave their faith through reason alone. Their strong emotion towards their faith shields them from reason altogether.

    Although the goal of Faith Freedom International is twofold, i.e. a) help Muslims leave Islam and b) warn others of the danger of it, the truth is that “a” very much depends on “b”. Aware of the difficulty to reason with Muslims, my main focus is on “b". I am of the opinion that the key to reach a large number of Muslims and make them see that Islam is false is in the hands of non-Muslims. Muslims will not leave Islam unless the world denounces their cult.

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  7. beshak muhammad Sallallaho Alayhe Wasallam Aakhri Rasool Hain kyun ki..............
    Suraj Aage Koi jalta Nahin Charaag,
    Aaye Isiliye To woh Sab Ambiya Ke Baad

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  8. किसी बात को तर्कसंगत युक्तिसंगत संदर्भयुक्त कहकर भी इसलाम की समस्या से न तो मुसलिम मुक्त हो सकते हैं न शेष विश्व के लोग। कारण एक ही है कि उनको निरंतर एक सा पाठ पढ़ाया जा रहा है यह समझाते हुए कि यदि कमजोर पड़ो तो झूठ बोलने में अललाह की तरफ से छूट है, ताकतवर होकर फिर से यही करो। यही इतिहास का सत्य है कि बार बार हारकर ही हमला करने करते रहे अर्थात अललाह का राज तथा लूट व वासना पूरी करने के लिए पुनः तैयार होते रहो। इस मूल को कुरान तथा हदीसें पक्का करती हैं तथा झूठ के पांव नहीं होते इसलिए इनमें अंतर्विरोध भी है। इस लिए रक्तबीज की सी स्थिति है तथा इसकी समाप्ति भी इसी रीति से ही होगी।

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  9. chohaan saab is bhosdi ke yhuodi ko apni bhaen choodwane ka bhi achaa giyan he app bhi apni bhane ko is ke paas bhej do giyan se chodai kar waa de ga app ko is lavde ka giyan achha lagta he shayad app ki bhen ko isse chodwaane ka giyan achha lag jaae kabhi choot me dega kabhi gand me kahbi muhnn me saale jahil ab mera giyan padh 14 se chud ke chodhri bana 15 se chud ke padhaan aur jaat ne chodi chamari to paida hua chohaan

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  10. maadar chod apni amma q chuda raha h be suwar ki awlaad ja kar pahle apne mazhab ki to safaai kar us ke baad aana

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  11. प्यारे नबी सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम

    हमारे नबी का नाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम है, जो पीर के दिन,सुवह सादिक़ के वक्त (12) बारह रबीउल अव्वल, बमुताबिक़ बीस(20) अप्रैल 571 ईसवी, मुल्क अरब के शहर मक्का शरीफ़ में पैदा हुए। आपके वालिद का नाम हज़रत अब्दुल्लाह और वालिदा का नाम हज़रत आमेना है और दादा का नाम अब्दुलमुत्तलिब है और नाना का नाम वहब है। अल्लाह तआला ने हमारे नबी को हर चीज़ से पहले अपने नूर से पैदा फ़रमाया। अम्बिया, फ़रिश्ते, ज़मीन-आसमान, अर्श व कुर्सी, लोह व क़लम और पूरी दुनिया को आपके नूर की झलक से पैदा फ़रमाया। तमाम जहाँ में कोई किसी भी ख़ूबी में हुज़ूर के बराबर नहीं हो सकता। हमारे नबी तमाम नबियों के नबी हैं। हर शख्स पर आपकी इताअत लाज़िम है।अल्लाह तआला ने अपने तमाम खज़ानों की कुंजी हमारे प्यारे नबी को अता फरमाई है। दीन व दुनिया की सब नेमतों का देने वाला अल्लाह तआला है और तक़सीम करने वाले हमारे प्यारे नबी हैं (मिशकत शरीफ़ जि. 1, स. 32)। अल्लाह तआला ने अहकामे शरीअत भी हमारे नबी को बख्श दिए, जिस पर जो चाहें हलाल फ़रमा दें और जिसके लिए जो हराम कर दें। फर्ज़ भी चाहें तो मआफ़ फ़रमा दें (बहारे शरीअत जि. 1, स. 15)। अगर किसी इबादत से हुज़ूर नाराज हैं तो वो इबादत गुनाह है और किसी ख़ता से हुज़ूर राज़ी हैं तो वो ख़ता ऐन इबादत है। हज़रत सिद्दीक़े अकबर का ग़ारे सौर में साँप से अपने को कटवाना खुदकुशी नहीं, ऐन इबादत है। खैबर की वापसी पर मकाम सहबा पर हज़रत अली का असर की नमाज़ कज़ा कर देना गुनाह नहीं, बल्कि इबादत था। इसलिए कि इन चीज़ों से हुज़ूर राज़ी थे। अरफ़ात में आज भी नमाज़ मग़रीब को कज़ा करना इबादत है के इससे हुज़ूर राज़ी हैं (शाने हबीबुर्रेहमान 11)। अल्लाह तआला ने आपको मेराज अता फ़रमाई यानी अर्श पर बुलवाया, जन्नत, दोज़ख़ अर्श व कुर्सी वग़ैरह की सैर करवाई, अपना दीदार आँखों से दिखाया, अपना कलाम सुनाया, ये सब कुछ रात के थोड़े से वक्त में हुआ। कब्र में हर एक से आपके बारे में सवाल किया जाता है। क़यामत के दिन हश्र के मैदान में सबसे पहले आप ही शफ़ाअत करेंगे।सारी मखलूक़ खुदा की रज़ा चाहती है और ख़ुदा हमारे प्यारे नबी की रज़ा चाहता है और आप पर दुरुदों सलाम भेजता है। अल्लाह तआला ने अपने नाम के साथ आपका नाम रखा, कलमा, अज़ान, नमाज़, क़ुरान में, बल्कि हर जगह अल्लाह तआला के नाम के साथ प्यारे नबी सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम का नाम है। अल्लाह तआला ने हुज़ूर की बेत को अपनी बेत, आपकी इज्जत को अपनी इज्जत, हुज़ूर की ख़ुशी को अपनी ख़ुशी, आपकी मोहब्बत को अपनी मोहब्बत, आपकी नाराजगी को अपनी नाराजगी क़रार दिया। हमारे प्यारे नबी तमाम नबियों से अफ़ज़ल हैं, बल्कि बाद खुदा आपका ही मरतबा है। इसी पर उम्मत का इजमा है। आपकी मोहब्बत के बग़ैर कोई मुसलमान नहीं हो सकता, क्योंकि आपकी मोहब्बत ईमान की शर्त है। आपके क़ौल व फ़ेल, अमल व हालत को हेक़ारत की नज़र से देखना या किसी सुन्नत को हल्का या हक़ीर जानना कुफ्र है। आपकी ज़ाहिरी जिंदगी (63) तिरसठ बरस की हुई, जब आपकी उमर 6 साल की हुई तो वालेदा का इन्तेक़ाल हो गया। जब आपकी उमर 8 साल की हुई तो दादा अब्दुल मुत्तलिब का इन्तेक़ाल हो गया। जब आपकी उमर 12 साल की हुई तो आपने मुल्के शाम का तिजारती सफर किया और पच्चीस साल की उमर में मक्का की एक इज्ज़तदार ख़ातून हज़रत ख़दीजा रदिअल्लाहो तआला अन्हा (जो चालीस की बेवा ख़ातून थीं) के साथ निकाह फ़रमाया और चालीस साल की उमर में ऐलाने नबुवत फ़ारान की चोटी से फ़रमाया और (53) साल की उमर में हिजरत की (63) साल की उम्र में बारह रबीउल अव्वल 11 हिजरी बमुताबिक़ 12 जून 632 ई. पीर के दिन वफ़ात फ़रमाई। आपका मज़ार मुबारक मदीने शरीफ़ में है, जो मक्का शरीफ़ से उत्तर में तक़रीबन 320 किलोमीटर दूर है। मसअला- हुज़ूर के कब्र अनवर का अंदरूनी हिस्सा, जो जिस्स अतहर से लगा हुआ है व काबे मोअज्ज़मा व अर्शे आज़म से भी अज़जल है (मिरातुलमनाज़िह जि. 1, स. 431)। हज़रत आजबिर बिन सुमरा फरमाते हैं कि मैंने चाँद के चौदहवीं रात की रोशनी में प्यारे नबी सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम को देखा। आप एक सुर्ख़ यमनी जोड़ा पहने हुए थे। मैं कभी आप की तरफ देखता और कभी चाँद की तरफ। यकीनन मेरे नजदीक आप चौदहवीं रात के चाँद से ज्यादा हसीन नजर आते थे। हसीन तो क्या आफताब रिसालात के सामने चौदहवीं रात का चाँद फीका था। हज़रते बरार बिन आजीब से पूछा गया क्या रसूल्लल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम का चेहरा तलवार के मानिन्द था। उन्होंने कहा, नहीं, बल्कि चाँद के मानिन्द था (शमायले तीरमीजी शरीफ सफा 2)।
    SUNNIKING TEAM

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  12. पैग़म्बरे इस्लाम ( सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम ) के व्यक्तित्व के बारे में विश्व स्तरीय बुद्धिजीवी क्या कहते हैं? PART 1



    इस्लाम अकेला ऐसा धर्म है जिस में यह विशेषता पाई जाती है कि वह विभिन्न परिवर्तनों को अपने मे समो सके और ख़ुद को ज़माने के साथ ढाल सके। मैं ने हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा के धर्म के बारे में ये भविष्यवाणी की है कि उनका धर्म भविष्य में यूरोप मे स्वीकार किया जाएगा। जैसा कि आज के दौर मे इसके स्वीकार करने की शुरूआत हो चुकी है।

    इस्लाम की पैदाइश पैग़म्बरे इस्लाम (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) के परिश्रम के नतीजे में मानवता के इतिहास में मील के पत्थर की हैसियत रखती है। जिस मे बेशुमार सर्व व्यापी उन्नति एवं प्रगति ने इन्सान को अपने साए में ले लिया है।

    इस आसमानी धर्म का कम से कम फ़ायदा ये हुआ कि लिखने पढ़ने और इस्लामी दुनिया में विद्या के सर्व व्यापी होने को बढ़ावा मिला और इस के साथ ही ये स्पेन, जर्मनी, इंग्लैड जैसे देशों और यूरोपी हुकूमतों की तरफ़ हस्तांतरित हुआ और उसके बाद पुरी दुनिया मे चमका। इस तरह से इस आसमानी मील के पत्थर के बाद रोम, मिस्र एवं ईरान जैसी संस्कृति एवं सभ्यता के पास भी उसका कोई जवाब न था। इस वास्तविकता के इतिहासिक तथ्यों से इन्कार नही किया जा सकता और ये बे शुमार हैं। उनमें से एक तर्क उन इस्लामी उलेमा एवं विद्यावान बल्कि ग़ैर मुस्लिम और पश्चिमी विद्यावानों का बार-बार स्वीकार करना है जिस के एक नमूने का हम संक्षेप में वर्णन करेगें:

    पश्चिमी समाज के एक प्रसिद्ध विद्यावान एवं स्कालर अनादर, अपमान एवं तिरस्कार के बावजूद पैग़म्बर इस्लाम (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) को न सिर्फ़ यह कि प्रथम श्रेणी के धर्म गुरु के तौर पर स्वीकार करते हैं बल्कि पूरी सच्चाई और सत्यता के साथ इस्लाम को उसकी बेशुमार विशेषताओं के साथ एक विश्वव्यापी धर्म स्वीकार करते हैं और शायद यही वजह है कि इस सच्चाई ने अपमान और तिरस्कार करने वालों के दर्द को बढ़ा दिया है और इस सच्चाई के जवाब में उन्हे बे दीनी कट्टरपन और असभ्यता के आलावा कोई और रास्ता दिखाई नही देता।

    टाल्सटवाय:

    प्रसिद्ध रूसी लेखक मुरब्बी एवं फ़ल्सफ़ए अख़लाक़ के माहिर जिस की शिक्षा और आइडियालाँजी को बड़े-बड़े राजनीतिज्ञो ने आइडियल बनाया है, वह कहते हैं कि पैग़म्बरे इस्लाम (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम)का महान व्यक्तित्व और हस्ती सम्पूर्ण सम्मान एवं सत्कार के योग्य है और उन का धर्म बुद्धी एवं विवेक के अनुकूल होने की वजह से एक दिन विश्व व्यापी हो जाएगा।

    कार्ल मार्क्स :
    उन्नीसवी शताब्दी का यह जर्मन जाती फ़लसफ़ी (दर्शन शास्त्रीय), राजनितिज्ञ एवं क्रान्तिकारी नेता पैग़म्बरे इस्लाम (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) के व्यक्तित्व का गहराई से बोध करने के बाद अपने विचार इस तरह व्यक्त करता है:

    मोहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) ऐसे इंसान थे जो बुत पूजने वालों के बीच दृढ़ संकल्प के साथ खड़े हुए और उन्हे एकेश्वर वाद एवं तौहीद की दावत दी और उनके दिलों में बाक़ी रहने वाली रूह और आत्मा का बीज बो दिया। इसलिए उन्हे (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) न सिर्फ़ ये कि उच्च श्रेणी के लोगों के दल में शामिल किया जाए बल्कि वह इस बात के पात्र हैं कि उनके ईश्वरीय दूत होने को स्वीकार किया जाए और दिल की गहराइयों से कहा जाए कि वह अल्लाह के दूत (रसूल) है।

    वेलटर फ़्रान्सवी:

    यक़ीनन हज़रत मोहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) उच्च श्रेणी के इंसान थे, वह एक कुशल शासक, अक़्ममंद तथा कुशल विधायक, एक इन्साफ़ पसंद शासक और सदाचारी पैग़म्बर थे, उन्होंने (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) जनता के सामने अपने चरित्र तथा आचरण का जो प्रदर्शन किया वह इस से ज़्यादा संभव नही था।
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  13. PART 2
    पीर सीमून लाप्लास्क:

    ये अठ्ठारवीं शताब्दी के सुप्रसिद्ध अभ्यस्त ज्योतिषी और गणितिज्ञ थे, उन के विचारों ने ज्योतिष विद्या एवं गणित मे क्रान्ति ला दी, वह उन पश्चिमी रिसर्च करताओं में से हैं जिन्होंने इस्लाम धर्म के बारे मे इस तरह से अपने विचार व्यक्त किये हैं:

    हज़रत मोहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम)का दीन और उनके उपदेश, इंसान के समाजिक जीवन के दो नमूने हैं। इसलिए मैं इस बात को स्वीकार करता हूँ कि इस दीन का प्रकट होना और इसके अक़्ल मंदी भरे उपदेश बड़े और महत्वपूर्ण हैं।

    प्रोफ़ेसर आरनिस्ट हैकल:

    उन्नीसवी शताब्दी के सब से बड़े और प्रसिद्ध जर्मन जाति के फ़लसफ़ी का कहना है:

    इस्लाम धर्म बहुत आधुनिक होने के साथ साथ बिना किसी मिलावट और उच्च श्रेणी की तौहीदी का रखने वाला है।

    ये अंग्रेज़ लेखक एवं रिसर्च करता अपनी किताब सरमायए सुख़न में इस तरह लिखता है:

    इस्लाम अकेला ऍसा धर्म है जिस पर दुनिया के सारे शरीफ़ लोग गर्व कर सकते हैं, वह अकेला ऐसा दीन है जिसे मैंने समझा है और मैं बार बार इस बात को कहता हूँ कि वह दीन जो सृष्टि एवं उत्पत्ति के रहस्यों एवं भेदों को जानता है और तमाम चरणों में सभ्यता एवं संस्क्रति के साथ है, वह इस्लाम है।

    गोएटे:

    ये जर्मनी का सुप्रसिद्ध दानिशमंद, शायर और लेखक है जिस ने जर्मन एवं विश्व साहित्य पर गहरा असर छोड़ा है, वह अपनी किताब दीवाने शरक़ी व ग़रबी में लिखता है:

    क़ुरआने करीम नामी किताब की प्रविष्टियां हमें आकर्षित करती हैं। और आश्चर्य में डालती हैं और इस बात पर मजबूर करती हैं कि हम उसका आदर व सत्कार करें।

    जार्ज बरनार्ड शाह (1856 से 1950)

    ये शैक्सपियर के बाद इंग्लैंड का सब से बड़ा लेखक है जिस के विचारों ने धर्म, ज्ञान, अर्थ जगत, परिवार और बनर एवं कला मे श्रोताओं पर गहरी छाप छोड़ी है। जिस के विचारों ने पश्चिमी जनता के अन्दर उज्जवल सोच की भावना पैदा कर दी। वह पैग़म्बरे इस्लाम के बारे में लिखता है:

    मैं सदैव मोहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम)के धर्म के बारे में, उसके जीवित रहने की विशेषता की वजह से आश्चर्य में पड़ जाता हूँ और उसका सम्मान करने पर ख़ुद को मजबूर पाता हूँ, मेरी निगाह मे इस्लाम ही अकेला ऍसा धर्म है जिस मे ऐसी विशेषता पाई जाती है कि वह किसी भी परिवर्तन एवं बदलाव को स्वीकार कर सकता है और ख़ुद को ज़माने की आवश्यकताओं में ढालने की क्षमता रखता है। मैं ने मोहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम ) के दीन के बारे में ये भविष्यवाणी की है कि भविश्व मे यूरोप वालों को स्वीकार्य होगा जैसा कि आज इस बात की शुरूआत हो चुकी है। मेरा मानना है कि अगर इस्लाम के पैग़म्बर जैसा कोई शासक सारे ब्रह्माण्ड शासन करे तो इस दुनिया की मुश्किलात एवं समस्याओं का निपटारा करने में कामयाब हो जाएगा कि इंसान संधि एवं सौभाग्य तक पहुंच जाएगा जिस की उसे गंभीर आवश्यकता है।
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  14. PART 3
    एडवर्ड गेबिन:

    ये अठ्ठारहवी शताब्दी का इंग्लैंड (England) का सब से बड़ा लेखक है जिस ने रोम के साम्राज्य की बरबादी का प्रसिद्ध इतिहास लिखा है। वह क़ुरआन मजीद के बारे में लिखता हैं:

    अटलस महासागर से लेकर हिन्दुस्तान मे मौजूद गंगा नदी के तट तक क़ुरआन मजीद न सिर्फ़ फ़िक़्ही क़ानून के तौर पर स्वीकार किया जाता है बल्कि वह देशों के बुनियादी क़ानून (संविधान) जिस में फ़ैसले एवं अदालत, नागरिक्ता प्रणाली, सज़ा के क़ानून से लेकर वित्तीय मामलों तक सब कुछ पाया जाता है। और ये सब की सब चीज़ें एक स्थिर क़ानून के तहत अंजाम पाती हैं और ये सब ख़ुदाई हुकूमत की जलवा गरी है। दूसरे शब्दों में क़ुरआन मजीद मुसलमानो के लिए एक सामान्य नियम और संविधान की हैसियत रखता है जिस में धर्म, समाज, नागरिकता प्रणाली, सेना, अदालत, जुर्म, और सज़ा के तमाम क़ानून और इसी तरह से इंसान की दैनिक एकाकी एवं समाजी जीवन से लेकर धार्मिक कार्यों तक जिस में तज़किय ए नफ़्स (आत्मा को बुराईयो एवं गुनाहो से पाक करना) से लेकर स्वास्थ के सिद्धांत एकाकी अधिकारों से समाजिक अधिकारों तक और नैतिकता से लेकर अपराध तक, इस दुनिया के कष्ट एवं कर्म दंडो से लेकर उस दुनिया की यातनाएं एवं कर्म दंड सब को शामिल है

    प्रोफ़ेसर वेल ड्रान (1885 से 1981)

    ये अमरीका का प्रसिद्ध लेखक एवं साहित्यकार है जिस की किताबों का वर्तमान मे लाखों लोग अध्ययन करते हैं। वह पैग़म्बरे इस्लाम ( सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम ) के व्यक्तित्व के बारे में इस तरह से अपने विचार व्यक्त करता है:

    अगर इस सम्मानित व्यक्ति का आम जनता पर होने वाले असर की गणना करें तो यक़ीनन हम को कहना पड़ता है कि हज़रत मोहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) मानव इतिहास के सबसे ज़्यादा सम्मानित व्यक्तियों में से हैं। वह चाहते थे कि इस क़ौम के शैक्षिक एवं नैतिक स्तर को, जो गर्मी की त्रीवता और रेगिस्तान के सूखे की वजह से ख़ौफ़ एवं डर के अंधेरे में डूबे हुए थे, उठाएं और उन्हें इस सिलसिले में जो तौफ़ीक़ मिली वह वह विश्व के गुज़िश्ता तमाम सुधारकों से ज़्यादा थी। मुश्किल से ही किसी को उन के दल में खड़ा किया जा सकता है जिस ने अपनी सारी इच्छाएं धर्म को समर्पित कर दीं, इसलिए कि वह इस धर्म को सच्चा मानते थे। मोहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) ने बुतों की पूजा करने वालो और रेगिस्तान में तितर बितर क़बीलों को एक उम्मत में बदल दिया और दीने यहूद एवं दीने मसीह और अरब के प्राचीन धर्म से बड़ा और ऊँचा एक आसान दीन और उज्जवल एवं मज़बूत धर्म की नीव रखी, जिसकी मानवीयत का आधार राष्ट्रीय बहादुरी थी, जिस ने एक ही पीढ़ी के अंदर सौ से ज़्यादा जंगों मे जीत हासिल की और एक शताब्दी के अंदर एक महान एवं विभय हुकूमत स्थापित कर ली और वर्तमान मे उस के पास एक स्थायी ताक़त है जिस ने आधी दुनिया को वश मे किया हुआ है।
    SUNNIKING TEAM

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  15. हिन्दू धार्मिक ग्रन्थों में मुहम्मद तथा अहमद का उल्लेख
    क्या यह अपने आप में अत्यंत सोचनीय नहीं है कि जो लोग हिन्दू शब्द को धर्म से जोड़ देते है. मैं आप सबको इधर बैठ कर चैलेन्ज करता हूँ कि हिन्दू शब्द, हिन्दू धर्म ग्रन्थ की किसी भी पुस्तक में नहीं है फिर चाहे वह वेद हों, पुराण हों, उपनिषद हों, रामायण हो, महाभारत हो या फिर लेटेस्ट तुलसीदास कृत रामचरित मानस ही क्यूँ न हो. किसी भी हिन्दू धर्म ग्रन्थ की किसी भी पुस्तक में ये शब्द ढूंढने से भी नहीं मिलेगा. एक और चैलेन्ज भी है कि उपरोक्त सभी पुस्तकों में इस्लाम धर्म और मुहम्मद सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम का ज़िक्र एक नहीं कई मर्तबा है, यहाँ तक कि तुलसीदास कृत राम चरित मानस में भी. आपको अगर यकीन नहीं है तो आप स्वयं पढ़ लीजिये:

    "कल्कि अवतार" अथवा "नराशंस" जिनके सम्बन्ध में हिन्दू धार्मिक ग्रन्थों ने भविष्यवाणी की है वह मुहम्मद सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम ही हैं। क्योंकि कुछ स्थानों पर स्पष्ट रूप में "मुहम्मद" और "अहमद" का वर्णन भी आया है।
    देखिए भविष्य पुराण ( 323:5:8)

    " एक दूसरे देश में एक आचार्य अपने मित्रों के साथ आएगा उनका नाम महामद होगा। वे रेगिस्तानी क्षेत्र में आएगा।"
    श्रीमदभग्वत पुराण : उसी प्रकार श्रीमदभग्वत पुराण (72-2) में शब्द "मुहम्मद" इस प्रकार आया है:


    अज्ञान हेतु कृतमोहमदान्धकार नाशं विधायं हित हो दयते विवेक
    "मुहम्मद के द्वारा अंधकार दूर होगा और ज्ञान तथा आध्यात्मिकता का प्रचनल होगा।"
    यजुर्वेद (18-31) में है:

    वेदाहमेत पुरुष महान्तमादित्तयवर्ण तमसः प्रस्तावयनाय
    " वेद अहमद महान व्यक्ति हैं, यूर्य के समान अंधेरे को समाप्त करने वाले, उन्हीं को जान कर प्रलोक में सफल हुआ जा सकता है। उसके अतिरिक्त सफलता तक पहंचने का कोई दूसरा मार्ग नहीं।"
    SUNNIKING TEAM INDIA

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    1. hindu dhrm to duniya ka sbse phala dhrm h..or hmare granth sanskrit me likha jata h..muslim dhrm ka khi vi explaination nhi h..or dusre jitne vi relign aaya h kb uday hua sbko pta h...

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    2. badlaab to hai hi nhi..muslim dhrm ka koi kaaji ya jo vi bolte ho jb bhashan deta h to unke vhashaan me hm or hamree muslim bhaiyo tk hi simit hota h,,ye dhrm ye soachne ke liye mjboor kr deta h inke allah ne sikh kya di h inlogo ko ...or jhan tk sanskrit slok ka baat ho rhi ye duniya ka sbse purana language h...sb kuch to hindu relign k baad hi aaya....

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  16. क्या आप इस महा-पुरुष को जानते हैं?

    आप इतिहास के एक मात्र व्यक्ति हैं जो अन्तिम सीमा तक सफल रहे धार्मीक स्तर पर भी और सांसारिक स्तर पर भी"
    यह टिप्पणी एक इसाई वैज्ञानिक डा0 माइकल एच हार्ट की है जिन्हों ने अपनी पुस्तक The 100 (एक सौ) में मानव इतिहास पर प्रभाव डालने वाले संसार के सौ अत्यंत महान विभूतियों का वर्णन करते हुए प्रथम स्थान पर जिस पहापुरूष को रखा है उन्हीं के सम्बन्ध में यह टिप्पणी लिखी है। अर्थात संसार के क्रान्तिकारी व्यक्तियों की छानबीन के बाद सौ व्यक्तियों में प्रथम स्थान ऐसे महापुरुष को दिया है जिनका वह अनुयाई नहीं। जानते हैं वह कौन महा-पुरुष हैं?

    उनका नाम मुहम्मद हैः

    मुहम्मद सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम वह इनसान हैं जिनके समान वास्तव में संसार में न कोई मनुष्य पैदा हुआ और न हो सकता है जबहि तो एक वैज्ञानिक लेकख जब हर प्रकार के पक्षपात से अलग होकर क्रान्तिकारी व्यक्तियों की खोज में निकलता है तो उसे पहले नम्बर पर यही मनुष्य देखाई देते हैं। ऐसा क्यों ? आख़िर क्यों मुहम्मद सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम को उन्हों ने संसार में पैदा होने वाले प्रत्येक व्यक्तियों में प्रथम स्थान पर रखा हालाँकि वह इसाई थे ईसा अलै0 अथवा किसी अन्य इसाई विद्धानों को पहला स्थान दे सकते थे?

    वास्तविकता यह है कि आपने जो संदेश दिया था वह मानव संदेश था, उसका सम्बन्ध किसी जाति विशेष से नहीं था, वह अन्तिम क्षण तक मानव कल्याण की बात करते रहे और इसी स्थिति में संसार त्याग गए और इसी संदेश के आधार पर मात्र 23 वर्ष की अवधि में पूरे अरब को बदल कर रख दिया, प्रोफेसर रामाकृष्णा राव के शब्दों में –

    {आप के द्वारा एक ऐसे नए राज्य की स्थापना हुई जो मराकश से ले कर इंडीज़ तक फैला और जिसने तीन महाद्वीपों – एशिया, अफ्रीक़ा, और यूरोप- के विचार और जीवन पर अपना असर डाला}

    ( पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम, प्रोफेसर रामाकृष्णा राव पृष्ठ 3)

    आइए ज़रा इस महान व्यक्ति की जीवनी पर एक दृष्टि डाल कर देखते हैं कि ऐसा कैसे हुआ?

    मुहम्मद सल्ल0 20 अप्रैल 571 ई0 में अरब के मक्का शहर के एक प्रतिष्ठित वेश में पैदा हुए। जन्म के पूर्व ही आपके पिता का देहांत हो गया। छः वर्ष के हुए तो दादा का साया भी सर से उठ गया जिसके कारण कुछ भी पढ़ लिख न सके। आरम्भ ही से गम्भीर, सदाचारी, एकांत प्रिय तथा पवित्र एवं शुद्ध आचरण के थे। आपका नाम यधपि मुहम्मद था परन्तु इन्हीं गुणों के कारण लोग आपको सत्यवादी तथा अमानतदार की अपाधि से पुकारते थे। आपकी जीवनी बाल्यावस्था हो कि किशोरावस्था हर प्रकार के दाग़ से शुद्ध एंव उज्वल थी।

    हालांकि वह ऐसे समाज में पैदा हुए थे जहां हर प्रकार की बुराइयाँ हो रही थीं, शराब, जुवा, हत्या, लूट-पाथ तात्पर्य यह कि वह कौन सी बुराई थी जो उनमें न पाई जा रही हो? लेकिन उन सब के बीच सर्वथा शुद्ध तथा उज्जवल रहे।
    SUNNIKING TEAM

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  17. Prophet Muhammad in Jews' Scripture

    Prophet Muhammad in Jews' Scripture


    Prophet Muhammad in Jews' Scripture



    > Book of Deuteronomy

    > Book of Isaiah



    Book of Deuteronomy

    God Almighty speaks to Moses in Book of Deuteronomy chapter 18 verse 18:



    "I will raise them up a Prophet from among their brethren, like unto thee, and will put my words in his mouth; and he shall speak unto them all that I shall command him."


    Prophet Muhammad (pbuh) is like Moses (pbuh):

    Both had a father and a mother.

    Both were married and had children.

    Both were accepted as Prophets by their people in their lifetime.

    Both besides being Prophets were also kings i.e. they could inflict capital punishment.

    Both brought new laws and new regulations for their people.

    Both died a natural death.


    Muhammad (pbuh) is from among the brethren of Moses (pbuh). Arabs are brethren of Jews. Abraham (pbuh) had two sons: Ishmail and Isaac. The Arabs are the descendants of Ishmail (pbuh) and the Jews are the descendants of Isaac (pbuh).


    Words in the mouth:

    Prophet Muhammad (pbuh) was unlettered and whatever revelations he received from God Almighty he repeated it verbatim. Deuteronomy (18:18):

    "I will raise them up a Prophet from among their brethren, like unto thee, and will put my words in his mouth; and he shall speak unto them all that I shall command him."


    Book of Isaiah

    It is mentioned in the book of Isaiah chapter 29 verse 12:

    "And the book is delivered to him that is not learned saying, ‘Read this, I pray thee’; and he saith, ‘I am not learned’.

    "When Archangel Gabriel commanded Muhammad (pbuh) by saying ‘Iqra’, he replied "I am not learned".

    All the prophecies mentioned in the Old Testament regarding Muhammad (pbuh) besides applying to the Jews also hold good for the Christians (H Q. 61:6).

    BY SUNNIKING TEAM INDIA MOHSIN NOORI

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  18. bhagavatgeeta me Aisha kuchh nahi likha hai
    jhutha prachar mat karo

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  19. अगर इस्लाम आतंकवाद
    की शिक्षा देता है तो फिर क्यूँ नासा के कई
    वैज्ञानिको ने
    इस्लाम कुबूल किया?
    क्यूँ यूसुफ योहाना व अफ्रीकन क्रिकेटर और
    वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा मुस्लिम बन गऐ
    क्यूँ ए एस दिलीप मुसलमान
    होकर एआर रहमान हो गए?
    क्यूँ शक्ति कपूर, ममता कुलकर्णी ,सरोज खान,
    बालिका वधू स्टार ,और कई दक्षिण के अभिनेताओं ने इस्लाम
    कुबूल किया?
    क्यूँ टोनी ब्लेयर की बहन ने इस्लाम
    कुबूल कर लिया?
    क्यूं मुहम्मद अली मुसलमान हो गए?
    क्यूँ यू एस ए में 9/11 के बाद 25.67 लाख से
    भी ज्यादा लोगों ने इस्लाम कुबूल किया?
    क्यूँ अब्राहम विलिंग्टन यूएस आर्मी में
    भर्ती होकर मुसलमानों को मारने का इरादा छोड़कर
    मस्जिद जाकर मुसलमान हो गए?
    क्यूँ गैरी मिलर जो कि कुरान के विरोधी थे
    कुरान पढ़कर मुसलमान हो गए?
    क्यूँ कामेडी स्टार मिस्टर बीन मुसलमान
    हो गए?
    क्यूँ माइक टायसन और माइकल जैकसन मुसलमान बन गए?
    क्यूँ हिजाब की विरोधी ब्रिटेन
    की पुलिस अफसर जेने कैम्प
    इस्लामी शिक्षाएँ पढ़कर मुसलमान हो गईं?
    फ्राँस में क्या ओसामा आया था कि फ्राँस 60% मुसलिम
    आबादी वाला देश बन गया?
    1929 में यू एस ए में एक मस्जिद थी आज 2500
    से भी ज्यादा है
    और
    सन् 2003 तक रूस में 250 मस्जिदें थीं आज
    3000 ज्यादा हैं से;
    क्यूँ रूस 30% मुसलिम आबादी वाला देश बन गया?
    क्यूँ यूके की संसद मे ईसाइयो के इस्लाम कुबूलने
    की बढ़ती हुई तादाद के बाबत
    आपातकालीन चर्चा हुई? और अगर
    क्वीन
    डायना ना मारी जाती तो अब तक पूरा यूके
    मुसलिम राष्ट्र घोषित हो जाता!
    इंडोनेशिया और मलेशिया में 100 साल पहले बौद्ध देश थे आज
    85% मुसलिम आबादी वाले देश हैं
    कोई
    दुनिया की किसी भी इतिहास
    की किताब में यह दिखा दे कि मुसलमानों ने वहाँ कब
    और कौनसी जंग की?
    राये है क्या आपके.
    इस बात को सभी को शेयर
    करो ताकि सभी को पता चल जाये
    की इस्लाम आतंकवाद
    की शिक्षा नही देता है वो तो एक दुसरे
    को मिलाने की, भाई चारे की, प्यार मो

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    1. Bohot badia ye kahan samjhenge inko to bs baate banani aati hain

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  20. kuraan aur hadis ko samaj na tere baski bat nani kam padha likha hanikarak hota hai

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  21. kya aap bata sakte hai ki aapka allah aapko khatne ke sath kyon paida nahi karta. hindu ki tarah paida kyon karta hai. baad me aap log khatna karke musalman ban jate ho.

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  22. O chutiye jab tumhe puri knowledge na hona to zaada bola nahi karte thik hain na pehle jaake dhang se samjh ke aa

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