रविवार, 8 अप्रैल 2012

हलाल से हलाला तक !!


इस्लामी पारिभाषिक शब्दों में "हलाल , और "हलाला " यह ऐसे दो शब्द हैं , जिनका कुरान और हदीसों में कई जगह प्रयोग किया गया है . दिखने में यह दौनों शब्द एक जैसे लगते हैं .यह बात तो सभी जानते हैं कि,जब मुसलमान किसी जानवर के गले पर अल्लाह के नाम पर छुरी चलाकर मार डालते हैं , तो इसे हलाल करना कहते हैं .हलाल का अर्थ "अवर्जित " होता है . लेकिन हलाला के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं .क्योंकि इस शब्द का सम्बन्ध मुसलमानों वैवाहिक जीवन और कुरान के महिला .विरोधी कानून से है .क्योंकि कुरान में अल्लाह के बनाये हुए इस जंगली ,और मूर्खता पूर्ण कानून की आड़ में मुल्ले , मौलवी और मुफ्ती खुल कर अय्याशी करते हैं
इस बात को ठीक से समझने के लिए अल्लाह की औरतों के प्रति घोर नफ़रत , और मुसलमानों की पारिवारिक स्थितियों के बारे में जानना बहुत जरूरी है,मुसलमानों में दो दो , तीन तीन औरतें रखना साधारण सी बात है . और फिर मुसलमान रिश्ते की बहिनों से भी शादियाँ कर लेते हैं .और अक्सर संयुक्त परिवार में रहना पसंद करते हैं .इसलिए पति पत्नी में झगड़े होते रहते हैं. और कभी पति गुस्से में पत्नी को तलाक भी दे देता है . चूंकि अल्लाह की नजर में औरतें पैदायशी अपराधी होती है , इसलए कुरान में पति की जगह पत्नी को ही सजा देने का नियम है .यद्यपि तलाक देने के कई कारण और तरीके हो सकते हैं , लेकिन सजा सिर्फ औरत को ही मिलती है . इसे विस्तार से प्रमाण सहित बताया गया है .जो कुरान और हदीसों पर आधारित है .
1-तलाक कैसे हो जाती है 
यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी के सामने तीन बार "तलाक " शब्द का उच्चारण कर दे , या कहे की मैंने तुझे तीनों तलाक दे दिए , तो तलाक हो जाती है ..क्योंकि इस कथन को उस व्यक्ति की कसम माना जाता है .जैसा की कुरान ने कहा है ,
" और अगर तुम पक्की कसम खाओगे तो उस पर अल्लाह जरुर पकड़ेगा "सूरा - मायदा 5 :89
तलाक के बारे में कुरान की इसी आयत के आधार पर हदीसों में इस प्रकार लिखा है ,
-"इमाम अल बगवी ने कहा है , यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से कहे की मैंने तुझे दो तलाक दिए और तीसरा देना चाहता हूँ , तब भी तलाक वैध मानी जाएगी .और सभी विद्वानों ने इसे जायज बताया है.(Rawdha al-talibeen 7/73" 
"فرع قال البغوي ولو قال أنت بائن باثنتين أو ثلاث ونوى الطلاق وقع ثم إن نوى طلقتين أو ثلاثا فذاك 


-"इमाम इब्न कदमा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से कहे कि मैंने तुझे तीनों तलाक दे दिए हैं . लेकिन चाहे उसने यह बात एक ही बार कही हो , फिर भी तलाक हो जायेगा .Al-Kafi 3/122 
"
إذا قال لزوجته : أنت طالق ثلاثا فهي ثلاث وإن نوى واحدة“


2-अल्लाह की तरकीब 
ऐसा कई बार होता है कि व्यक्ति अपनी पत्नी को तलाक देकर बाद में पछताता है , क्योंकि औरतें गुलामों की तरह काम करती हैं , और बच्चे भी पालती हैं . कुछ पढ़ी लिखी औरतें पैसा कमा कर घर भी चलाती है . इस इसलिए लोग फिर से अपनी औरत चाहते है .
" हे नबी तू नहीं जनता कि कदाचित तलाक के बाद अल्लाह कोई नयी तरकीब सुझा दे " सूरा -अत तलाक 65 :1
और इस आयत के बाद काफी सोच विचार कर के अल्लाह ने जो उपाय निकाला है ,वह औरतों के लिए शर्मनाक है
3-हलाला 
तलाक़ दी हुई अपनी बीवी को दोबारा अपनाने का एक तरीका है जिस के तहेत मत्लूका(तलाक दी गयी पत्नी ) को किसी दूसरे मर्द के साथ निकाह करना होगा और उसके साथ हम बिस्तरी की शर्त लागू होगी फिर वह तलाक़ देगा, बाद इद्दत ख़त्म औरत का तिबारा निकाह अपने पहले शौहर के साथ होगा, तब जा कर दोनों तमाम जिंदगी गुज़ारेंगे.हलाला के बारे में कुरान और हदीसों में इस प्रकार लिखा है ,
और यदि किसी ने पत्नी को तलाक दे दिया , तो उस स्त्री को रखना जायज नहीं होगा . जब तक वह स्त्री किसी दूसरे व्यक्ति से सहवास न कर ले .फिर वह व्यक्ति भी उसे तलाक दे दे . तो फिर उन दौनों के लिए एक दूसरे की तरफ पलट आने में कोई दोष नहीं होगा "सूरा - बकरा 2 :230



"فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا تَحِلُّ لَهُ مِن بَعْدُ حَتَّىٰ تَنكِحَ زَوْجًا غَيْرَهُ ۗ فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَا أَن يَتَرَاجَعَا إِن ظَنَّا أَن يُقِيمَا حُدُودَ اللَّهِ ۗ وَتِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ يُبَيِّنُهَا لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ    2:230



(नोट -इस आयत में अरबी में " تحلّل لهُ 'तुहल्लिल लहु"शब्द आया है , मुस्लिम इसका अर्थ "wedding " करते हैं , जबकि  sexual  intercourse  सही अर्थ होता है .
इसी से " हलालाह حلالہ " शब्द बना है . अंगरेजी के एक अनुवाद में है "uptill she consummated  intercourse with  another person   "यानी जबतक किसी दूसरे व्यक्ति से सम्भोग नहीं करवा लेती .)और तलाक शुदा औरत का हलाला करवाकर घर वापसी को " रजअ رجع" कहा जाता है .
हलाला इस तरह होता है, पहले तलाकशुदा महिला इद्दत का समय पूरा करे। फिर उसका कहीं और निकाह हो। शौहर के साथ उसके वैवाहिक रिश्ते बनें। इसके बाद शौहर अपनी मर्जी से तलाक दे या उसका इंतकाल हो जाए। फिर बीवी इद्दत का समय पूरा करे। तब जाकर वह पहले शौहर से फिर से निकाह कर सकती है।
बड़े बड़े इस्लाम के विद्वान् तलाक शुदा पत्नी को वापिस रखने के लिए हलाला को सही मानते हैं , देखिये (विडिओ )
Teen Talaaq aur Halala part 1

http://www.youtube.com/watch?v=APVNOo5pVg8

4-हलाला का असली उद्देश्य 
हलाला का उद्देश्य पति पत्नी में सुलह कराना नहीं , बल्कि तलाक दी गयी औरत से वेश्यावृत्ति करना है , जो इन हादिसों से साबित होता है ,
-"आयशा ने कहा कि रसूल के पास रिफ़ा अल कुरैजी कि पत्नी आई और बोली , रीफा ने मुझे तलक दे दिया था . और मैंने अब्दुर रहमान बिन अबू जुबैर से शादी कर ली , लेकिन वह नपुंसक है , अब मैं वापिस रिफ़ाके पास जाना चाहती हूँ . रसूल ने कहा जब तक अब्दुर रहमान तुम्हारे साथ विधिवत सम्भोग नहीं कर लेता , तुम रिफ़ा के पास वापिस नहीं जा सकती .
"إلا إذا كان لديك علاقة جنسية كاملة مع  "
 Bukhari, Volume 7, Book 63, Number 186
-"उम्मुल मोमिनीन आयशा ने कहा कि एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी से तीन बार तलाक कह दिया , और फिर से अपनी पत्नी से शारीरिक सम्बन्ध बनाने की इच्छा प्रकट की . रसूल ने कहा ऐसा करना बहुत बड़ा गुनाह है .. और जब तक उसकी पत्नी किसी दुसरे मर्द का शहद और वह उसके शहद का स्वाद नहीं चख लेते .
"حتى انها ذاق العسل من الزوج الآخر وذاقه العسل لها  "
Abu Dawud, Book 12, Number 2302
5-हलाला व्यवसाय 
जिन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में पति पत्नी में झगड़े होते रहते हैं ,वहां मुल्ले मुफ्ती अपने दफ्तर बना लेते हैं , और साथ में दस बीस मुस्टंडे भी रखते हैं .इनका काम फतवे देना होता है . चूँकि इस विज्ञानं के युग में नेट , फोन ,और फेक्स जैसे साधन सामान्य है , और उन्ही के द्वारा तलाक देने का रिवाज हो चला है . कई बार मेल या फेक्स से औरत को तलाक की सूचना नहीं मिलती फिर भी मुल्ले तलाक मानकर हलाला तय कर देते हैं .
देखिये देवबंद का फतवा
अगर इंसान शराब के नशे में अपनी बीवी को फोन पर तीन बार तलाक बोल दे, लेकिन बाद में उसे पछतावा हो और वह तलाक न चाहता हो ...तो क्या ऐसी सूरत में भी तलाक हो जाएगा’दारुल उलूम देवबंद के फतवा विभाग दारुल इफ्ता से। इस पर मुफ्तियों ने फतवा जारी किया है कि अगर तलाक नशे की हालत में दिया गया हो, तो भी पति-पत्नी का रिश्ता खत्म हो जाएगा। फोन पर दिया गया तलाक भी मान्य है। अगर ऐसा शख्स अपनी बीवी के साथ रहना चाहता है तो हलाला के सिवाय कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
the Qazi can separate them both after analyzing the case. Reference Sahih Bukhari 7:63:227 & 231

मुल्ले मुफ्ती फ़ोन से या इशारे से दी गयी तलाक को जिन हदीसों का हवाला देते हैं , उन में से एक यह है ,
-"आयशा ने कहा कि एक व्यक्ति ने सिर्फ तीन तलाक देने का इशारा ही किया था , और तलाक हो गयी , फिर उसकी पत्नी ने दुसरे आदमी से शादी कर ली .और अपने पहले पति के पास जाने की इच्छा प्रकट की . क्या ऐसा संभव है ? रसूल ने कहा जब तक उसका दूसरा व्यक्ति उसे तीसरे आदमी से सहवास नहीं नहीं करा देता , औरत पूर्व पति के पास नहीं जा सकती .Bukhari, Volume 7, Book 63, Number 187
6-हलाली मुल्लों की हकीकत 
चूँकि हलाला करवाने वाली औरत को किसी दूसरे व्यक्ति के साथ सम्भोग करना और उसका सबूत भी प्रस्तुत करना जरूरी होता है , और फिर ऐसे व्यक्ति को खोजना होता है , जो बाद में उसे तलाक भी दे दे, तभी वह औरत अपने पहले पति के पास जा सकती है . इस लिए इन मुल्लों ने बेकार जवान पाल रखे हैं , जो रुपये लेकर हलाला का धंदा करते है . यह लोग जासूसी करते हैं और जहाँ भी कोई शराब पीकर भी औरत से तलाक बोल देता है वहीँ हलाला करने धमक जाते हैं . विवश होकर मुर्ख मुसलमान अपनी पत्नियाँ हलाला करा लेते है, कई बार तो यह मुफ्ती फर्जी तलाकनामे भी जारी कर देते हैं .दिल्ली के पास बवाना गाँव में यही होता है .ऐसी औरतें जिनका हलाला हो जाता है , वह अल्लाह का हुक्म समझकर चुप रहती है .और मुल्लों को औरत के साथ दौलत भी मिलती है .कुछ लोग इसे बुरा भी कहते हैं , देखिये ,
Halala Nikah s of 6 time a Mosque Imam s wife( video)

http://www.youtube.com/watch?v=tqIbskjydRY

7-लखनऊ की सत्य घटना 
दिनांक 8 मार्च 2011 इतवार को India Times की लखनऊ संवाद दाता मंजरी मिश्रा ने एक चौंकाने वाली खबर दी थी . जिसने मुताबिक दोपहर के समय करीब 200 मुस्लिम महिलाये , सिर्फ दुपट्टा सर पर डाले हुए मुस्लिम वूमेन पर्सनल बोर्ड के दफ्तर में घुस गयीं . वह नारे लगा रही थी की मुस्लिम ख्वातीन को मुल्लों से बचाया जाए , जो फर्जी तलाकनामे बनाकर उनको हलाला करवाने पर दवाब डालते रहते है, या तलाक को रद्द करने के लिए रूपया मांगते हैं . उन औरतों का नेतृत्व शाइस्ता अम्बर कर रही थी .कुछ औरतों ने ऐसे मुल्लों की धुनाई भी कर दी थी .
Move to counter triple talaq, halala
Manjari Mishra, TNN Mar 8, 2011, 04.44am IST
अगर इतना पढ़ने और समझने के बाद भी मुस्लिम महिलाएं यह मानती हैं ,कि इस्लाम में उनको पुरुषों के बराबर अधिकार प्राप्त है , तो हमें उनकी बुद्धि पर तरस आता है , और ऐसे जंगली कानून बनाने वाले अल्लाह को अक्लमंद होने पर शंका होती है .


http://mullareality.blogspot.in/2011/10/talaq-and-halala-match-fixing-2.html

24 टिप्‍पणियां:

  1. बराबरी की बाते हैं, बराबरी नहीं. अच्छा आलेख.

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  2. हलाले को पेशा बनाना सख्त गुनाह है, "इन्नमल आमालो बिन्नियात" अमल का दारो मदार निय्यत पर है, "हमबिस्तरी के लिए हलाला कीया तो करने और करवाने वाले पर हुज़ूर सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम की लानत है(मिश्कात शरीफ). जो भी इसे मनोरंजन समझता है वो खुद को धोका दे रहा है.

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  3. halala ek vyavastha hai jiska durupyog samaj me hota hai is se bhi inkaar nahi kiya ja sakta lekin yahan par ap ne jis uddeshy se vivechan kiya hai wah sahi nahi hai, tlaq ke baad pati patni hamesha ke liye ek dusre se alag ho jate hain, tlaq ko islaam me bahut kathin banaya gaya hai jis se log is se bachen, jab pati patni me me tlaq ho jaye to fir wo dubara shadi nahi kar sakte kewal sanyog se yadi stri ne dusri shadi kar li hai aur fir uske pati se uska tlaq ho jaye ya uske pati ki mirityu ho jaye to is halat me wah stri apne pahle pati se dubara shadi kar sakti hai kewal sanyog vash yadi aisa ho tabhi yah shadi vaidh hai anyatha nahi aur jo log aisa karte hain ki kisi talaq wali aurat ko dubara uske pati se shadi karane ke liye khud ya kisi ke sath talaq wali aurat ki shadi is shart par karwate hain ki wah ek raat ke liye shadi kar ke use talaq de dega jis se uska pahla pati us se punah shadi kar sake to yah anuchit hai aur aise vyakti ko kiraye ka saand kaha gaya hai.
    mahoday
    is lekh ka aap ka jo uddeshy mujhe samajh me aaya ki aap ISLAM ki kami nikalne ke uddeshy se adhure gyaan se yah lekh likhe hain wah uchit nahi hai, aaj ke samaj me har dharm me bahut si kuritiyaan hain achchha ho ga yadi ham dure ke dharm ki kuritiyon ke upar tppani karne ke badle apne dharm ki kuritiyon ko door karne ka paryas karen

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    1. siddiqui bhai sharma ka poora blog Pehle To "SADAK-CHHAP" translation se bhara hua hai. Ye Sadak Chhap Writer Sadak Chhap Translator ko pasand karta he or islaam ki khaamiyaan nikaalne bethh-ta hai.
      Alame Islaam Me Urdu Translation Koi Sahi Hia To Wo Alahazrat Imaam Ahmed Raza Ka KANZUL-IMAAN hai.
      Ek or Baat ki sirf Translation se quraan ki baat samajh me nahin aa sakti kyun ki yeh koi aire gaire naththu gaire ka kalaam nahin balki wajibul wajood zaat Allah Tabaarak-w-Ta'aala ka kalaam Hai.

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    2. sirf tin bar talaq kahane se hone wale talaq ko rokne ke liye halala banaya gaya he kyu ki insan guse me hosh me nahi rahta tab us waqt bhi vo talaq ki bat karne se pahle hajar bar shochega Halala is liye banaya gaya taki har insan apni begum ko talakh dene se pahle hajar bar soche ki agar vo use kabhi vapas rakhna chahe to use pahle halala karwana padega aur koi bhi sohar ye nahi chahega ki uski begum kisi ger mard ke sath humbistar ho agar halala nahi banaya hota to jo tarik talaq ke bare me bataya gaya he us se na jane kitne talaq hote isi liye me aap sab se kahana chahta hun ki kisi bhi vaky ko padte samay uska matlab apne tarike se na nikale agar aap use samajh ne ke layak nahi he to us per comment karne ka aap ko koi haq nahi he

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    3. सिद्दीकी भाई, हमारे हिंदू समाज में महापुरुष उसको माना जाता है जो समाज की कुरीतियों को दूर करने का प्रयत्न करते हैं. ऋषि दयानंद ने नारी-अशिक्षा, बाल-विवाह, बेमेल विवाहों का विरोध किया. विधवा विवाह का समर्थन किया. स्वामी विवेकानंद ने तत्कालीन कुरीतियों जैसे जाती प्रथा का विरोध किया. राजा राम मोहन रॉय ने सती प्रथा का विरोध किया. समय समय पर अनेक महापुरुष हुए जिन्होंने कुरीतियों, रूढियों, बेकार हो चुके रीति रिवाजों का विरोध किया. हालांकि आज भी हिंदू समाज में अनेक कुप्रथाएं और कुरीतियाँ हैं लेकिन हम उन्हें गलत कहने का साहस तो करतें हैं. आपके समाज में तो वाही महापुरुष कहलाता है जो अपनी कुरुतियों, कुप्रथाओं के समर्थन में बोलता हे. आप अपनी गलतियों को गलती मानते ही नहीं हो. आप के वक्तव्य से भी यही सिद्ध हो रहा हे.

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    4. bhai sidhiquee,

      App ke bato se mujhe yah pratit hota hai ki, aap islam main rahi kuriti tatha kusanskar ko koi dekhe aur uss ke ware main tipani de, ye aap ki gale se nahi utar rahi hai.. iss liye aap "apne apne dharm ki socho" ye kaheten hai..
      dekhiye baat sirf islam(ek dharm) ki nahi hai. ye baat hai samaj ki.. islam humare bharat main hai. yadi ismain koi kusankar hai to iska pravab samaj main nischit hi parta hai..
      hindu main to apni kupratha uthaneki adikar hai, lekin islam main yah sambhav nahi hai...

      chesta kare hum sab milke andhabiswas ao kataye.. chahe wo islam, hindu aur aur koi vyavastha kyo na hooo..

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  4. Hamarey Akhri nabi (SAW), poori duniyan ke liye hidayat (sidha Rasta) ki dua ki he, Writer Sab apke liye bhi same dua kartey hain ham.....Apka ye blog zyada din nahi chal payega....operwala band karwayega.(IA) Kyonki ki islaam ki raksha muslims ke haath me nahi hota he, Iski raksha khud oper wala karta he...Isliye 1400 varsh me 30 country Islamic he. Aur lagbhag har country me muslim ki kutch percentage bhi dwellers hain. Hindu Dharam pauranik (50,000) varsh porana ho kar bhi India aur kutch country me he woh bhi , koi 1 hindu rashtra nahi he....
    Islam kabhi kisi dharm ko galat nahi kahta...Lekin tumney ye sabit kar diya..tumhara dharam 1 atanki dharam he jo hate sikhata he....

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    1. ye akri nabi wali dhol na bajayen.. khud ko koi akri nabi kehedenese nahi hojata.....

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  5. main hairaan hoon ki hamare muslim bhai itnee ghatiya baton ko bhi kisi na kisi tarah justified karne ko aatur rahte hain!!

    OOpar ek bhai ne ise "SADAK-CHHAP" translation kaha hai!!

    Main poochna chata hoon aise bhaiyon se ki biwi ke talaq ke baad kyaa dusre vyakti se sambhog hi ek matra rasta hai sulah karne ka??

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  6. ha bhaiya ek hi rasta hai apni biwi ko chudvao phir khao. Ha ha ha ha.

    Translation Ghatiya is liye lagta hai kyo ki sach hai.

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  7. hamara apna jaha tak khyal hai ki halala sahi hai parantu halala karne wala jo vyakt ho o agar gaiar mushlim ho to isse muslim samaj ke un mullo par or jyada dar ya bhay jayega jisse o talak dena bandd kar denge .... or khaskar agar talak di hui lady ka halala hindu purus ke dwara ho to

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  8. saree musalmano.. tum apni beheno ko kitni baar halala dekhe ho??? are salooo aurtoo ka thoda to samman karna sikhooooo.......

    Ye kaisa allah hai ko isko zayaz bataya hai??? ye jarur dallah hai....

    sudhar jao salo sudhar jaoooo..

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  9. agar teri ma ko tera baap chotd de to usse phooch akeli rahegi ya pore hindustaan se chudwayegi bhoosdi ke likh se phele dimaag ka ilaj kra gandi

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  10. Bhaion ye Islam ka sach h ki yaha to mullo ko puri azadi aur million ki bharpur chudai hoti h....sale gaandu kahi ka .....Muhammad bhi aisa hi bhadua tha jisne bhi sayed aisha ka halala karwaya hoga......suar ki aulad kahi ka.......

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  11. वेदो मे भरी अश्लील बाते..
    अथर्ववेद - अश्लीलता के कुछ नमून अब जिक्र करते है अश्लीलता का
    :- वेदों में कैसी- कैसी अश्लील बातें भरी पड़ी है, इसके कुछनमूने आगे प्रस्तुत किये जाते हैं
    (१) यां त्वा .........शेपहर्श्नीम ||(अथर्व वेद ४-४-१)
    अर्थ : हे जड़ी-बूटी, मैं तुम्हें खोदता हूँ. तुम मेरे लिंगको उसी प्रकार उतेजित करो जिस प्रकार तुम नेनपुंसक वरुण के लिंग को उत्तेजित किया था.
    (२) अद्द्यागने............................पसा:||(अथर्व वेद ४-४-६)
    अर्थ: हे अग्नि देव, हे सविता, हे सरस्वती देवी, तुम इसआदमी के लिंग को इस तरह तान दो जैसे धनुषकी डोरी तनी रहती है
    (३) अश्वस्या............................तनुवशिन ||(अथर्व वेद ४-४-८)
    अर्थ : हे देवताओं, इस आदमी केलिंग में घोड़े, घोड़े के युवा बच्चे, बकरे, बैल और मेढ़े केलिंग के सामान शक्ति दो
    (४) आहं तनोमि ते पासो अधि ज्यामिव धनवानी,क्रमस्वर्श इव रोहितमावग्लायता(अथर्व वेद ६-१०१-३)
    मैं तुम्हारे लिंग को धनुष की डोरी के समान तानता हूँताकि तुम स्त्रियों में प्रचंड विहार कर सको.
    (५) तां पूष...........................शेष:|| (अथर्व वेद १४-२-३८)
    अर्थ : हे पूषा, इस कल्याणी औरतको प्रेरित करो ताकि वह अपनी जंघाओं को फैलाएऔरहम उनमें लिंग से प्रहार करें.
    (६) एयमगन....................सहागमम || (अथर्व वेद २-३०-५)
    अर्थ : इस औरत को पति की लालसा है और मुझेपत्नी की लालसा है. मैं इसके साथ कामुक घोड़े की तरहमैथुन करने के लिए यहाँ आया हूँ.
    (७) वित्तौ.............................गूहसि (अथर्व वेद २०/१३३)
    अर्थात : हे लड़की, तुम्हारे स्तन विकसित हो गए है. अबतुम छोटी नहीं हो, जैसे कि तुम अपने आपको समझती हो। इन स्तनों को पुरुष मसलते हैं।तुम्हारी माँ ने अपने स्तन पुरुषों से नहीं मसलवाये थे, अत: वेढीले पड़ गए है। क्या तू ऐसे बाज नहीं आएगी? तुम चाहो तो बैठ सकती हो, चाहो तो लेट सकती हो.
    (अब आप ही इस अश्लीलता के विषय में अपना मतरखो और ये किन हालातों में संवाद हुए हैं। येतो बुद्धिमानी ही इसे पूरा कर सकते है ये तो ठीक ऐसा हैजैसे की इसका लिखने वाला नपुंसक हो या फिरशारीरिक तौर पर कमजोर होगा तभी उसने अपनेको तैयार करने के लिए या फिर अपने को एनर्जेटिक महसूस करने के लिए किया होगा या फिर किसी औरतने पुरुष की मर्दानगी को ललकारा होगा)
    तब जाकर इसप्रकार की गुहार लगाईं हो.

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    1. abe chutiya aisa nahi likha hain kisi ved me ....yeh quran ka gyan ved me fit mat kar

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  12. सुनो ब्रह्मणोँ के बनाये कठपुतले भगवानो के कारनामे उनकी रची ग्रंथ शिवपुराण के अनुसार:
    जब ये दुनिया ब्रह्मांड यानी कुछ भी नही था भगवान भी नही थे तो केवल एक आदि शक्ति (स्त्री)थी आदि शक्ति ने सबसे पहले ब्रह्मा भगवान को बनाया और अपने साथ संबंध बनाने को कहा ब्रह्मदेव ने कहा आपने मुझे बनाया है आप मेरी माँ लगेंगी मै आपके साथ संबंध नही बना सकता क्रोधित होकर आदि शक्ति ने ब्रह्मा भगवान को जलाकर भस्म कर दिया
    फिर आदि शक्ति ने विष्णु को बनाया और खुद के साथ संबंध बनाने को कहा लेकिन विष्णु ने भी कहा की आपने मुझे बनाया आप मेरी माँ हो मै आपसे संबंध नही बना सकता क्रोधित होकर आदि शक्ति देवी ने विष्णु को भस्म कर दिया
    फिर आदि शक्ति ने शंकर भगवान को बनाया और ... संबंध बनाने को कहा शंकर ने ब्रह्मा विष्णु के बारे मे जाना और सोचे की मै इनकार करुंगा तो मुझको भी जला कर भष्म कर देगी शंकर भगवान बोले आप मेरी माँ लगोगी फिर भी मै संबंध बनाने को तैयार हूँ लेकिन मेरी तीन शर्ते हैँ आदि शक्ति ने कहा बताओ शंकर ने कहा पहले मेरे दो भाइयोँ ब्रह्मा विष्णु को जीवीत करो फिर अपना रुप चेंज करो और तीन रुप मे आओ और हम तीनो सेशादी करो फिर संबंध बनाओ आदि शक्ति ने शर्त मंजुर कर लिया फिर क्या था तीनो महापापी भगवानो ने अपनी माँ जो तीन रुपोमे बंटी थी उससे विवाह कर लिया जब ब्रह्मणो के रचे भगवान इतने नीच थेतो ब्रह्मण लोग कितने नीच होंगेँ
    1) देखो ये ब्रह्मणोँ का ढकोसला क्या कहानी फिट किया पहले तो ब्रह्मांड की मालिक आदि शक्ति बना दिया फिर अपने बनाये भगवान लोग का कनेक्शन भी उससे फिट कर दिया
    2) आदि शक्ति को तीन रुपो मे विभाजित करने के बाद भी केवल उमा देवी यानी शिव की पत्नी को हीँ आदि शक्ति का दर्जा देना शुरु कर दिया बाद मे उमा देवी यानी तथाकथित आदि शक्ति को भी एक कहानी बनाकर यज्ञ मे भस्म करवा दिया और फिर पार्वती देवी का जन्म के बाद उसको आदिशक्ति का जन्म कह दिया और बाद मे पार्वती का कनेक्शन शँकर से फिट कर दिया
    3)कुल मिलाकर आदिशक्ति को ही कहानी मे मार डाला गया और शंकर विष्णु ब्रह्मा को महान और सर्वश्रेष्ठ भगवान बना दिया क्या बकवास कहानी बना दिया।
    मुझे झुंठ बोलने की बिल्कुल आदत नही है मेरे दोस्तो यकिन नही आये तो शिवपुराण को ठिक से पढोपहले जानो फिर मानो आँखबंद करके किसी बात का भरोसा नही किया जाता इसलिये शिवपुराण पढो खुद सच पता चल जायेगा
    दोस्तो पोस्ट पंसद आये तो सेयर जरुर करे

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    1. तू भी बेनामी , मैं भी बेनामी,
      अबे जा और जाकर सही सही जानकारी लेकर आ, ये जो भी तू बोल रहा है या तो उसके सबूत दे,, अगर तूने सबूत दिए तो अपनी पूरी फॅमिली के साथ कलमा पढ़ लूँगा,, वरना भोसड़ी के तू अपने पूरे खानदान के साथ हिन्दू बन जइयो

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  13. भाइयों इस तरह मत लड़ाई कीजिये।हम सब सबसे पहले इंसान है। प्यार बाटते चलो।

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  14. Me to itna janta hu ke dunia ka koi bhee muslim nation me muslim ke allava kisi orr ke liye koi jagah nahi he.
    Koi muslim bataye ke khon se muslim jannat me jayege...? Sunni,Shiya,Kadari,Ahamadi.Bhora,Salvi,
    Baralvee.....? Orr patta nahi khon khon.?
    patta lagtey he hamey bhee battoo.

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  15. तीन बार तलाक और हलाला

    शरीयत कानून में एक विवाहित जोड़े जो एक तलाक की प्रक्रिया से गुजर चुके हैंतब तक पुनर्विवाह नहीं कर सकते जब तक कि औरत से वास्तव में एक और आदमी शादी नहीं कर लेता। इस मामलेमें तलाक़ के बाद अपने दूसरे पति के साथ महिला की शादी को (निकाह) निकाह हलाल कहा जाता है।

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  16. भाई ये बता माना की हममे गलतियां हैं हम उसको मानते है पर तुम मुस्लिम को ये क्यों नहीं समझ आता की इस्लाम को भी कुछ तो बदलना पड़ेगा क्योंकि जब पैगम्बर का जन्म 570 ईशवी को हुआ और वे जब 632 को मर गए तो तब से अब तक में बहुत कुछ बदल गया तब तो ना उसने तुम्हे टीवी'मोबाइल'या अन्य चीज़ तो थी ही नहीं
    पर ये सब नहीं रहने के बावजूद सबका उपयोग तो कर रहे ही हो मोहमद ने तो नहीं ना कहा की उसे उपयोग करो तो क्यों कर रहे हो मत करो।
    एक बात अगर तुम्हारा पिता अगर 12 शादी करे और तुमको कुछ सुविधा ना दे तो वो गलत पर मोहमद ये करे तो सही क्यों ऐशा एक और बात अली जो की मोहमद का दामाद अगर ये कहा की समय के साथ कुछ बदलाव सही हैं तो उसे मार दिया गया मगर तुम शादी करी इस्लाम के अनुसार पर सजा की बात करे टी इस्लाम याद नहीं आता है तब तुम्हे हमारा भारत का कानून याद आता है क्यों ये बोलू क्योंकि अगर इस्लाम का कानून तुम पर लागु होगा तो
    ये नहीं जान पाओगें की मेरा भाई या बाप कौन था क्योंकि चोरी किये टी हाथ काट देगा और खून किये तो खून यानि सर कलम होगा।

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