रविवार, 27 मई 2012

बाँसुरी बजाने वाले रसूल !


संगीत को भी ईश्वर को प्रसन्न करने और आत्मिक शांति का साधन माना जाता है .विश्व के लगभग सभी धर्मों में सगीत के वाद्यों के साथ ईश्वर की स्तुति गाने की परंपरा है .दुनिया में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसे संगीत या गाने बजाने से नफ़रत होगी .लेकिन मुहम्मद साहब एक इसके अपवाद थे . जिनको संगीत से इतनी चिढ हो गयी थी कि उसे हराम कर दिया था .जिसका कोई तर्कपूर्ण कारण नहीं मिलता.
चूंकि मुसलमान ऐसे मुहम्मद साहब का अनुसरण करते है ,जिनकी कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर है .क्योंकि वह जो कहते थे उसके विपरीत काम करना उनकी आदत थी .
मुहम्मद साहब ने गाना इसलिए हराम कर दिया था , क्योंकि उनकी आवाज . भर्राती हुई और फटी हुई थी .लेकिन उन्होंने जब किसी संगीत के वाद्य को हराम किया तो , वह खुद ही खूठे साबित हो गए 
.प्रमाण देखिये .
1-संगीतकार नबी राजा दाउद 
मुसलमान अल्लाह की चार किताबें , तौरैत , जबूर, इंजील और कुरान मानते हैं . और अल्लाह ने जबूर नामकी किताब इस्राएल के राजा दाउद को प्रदान की थी . जो इब्रानी भाषा में थी .जबूरزبور‎  को अंगरेजी में Pslam यानि स्तुति "praises" और हिब्रू में ( Tehillim, תְהִלִּים )कहते हैं .यह किताब बाइबिल के पुराने नियम में आज भी मौजूद है . इसमें 150 भजन हैं . जो हिब्रू के " कीना" नाम के छंद में हैं .इसे संगीत वाद्यों के साथ गाया जाता था .दाउद को अंगरेजी में David और हिब्रू में दविद (  דָּוִיד) कहा जाता है .इनका समय ई ० पू .1040–970 BC,है उस समय अल्लाह को संगीत से नफ़रत नहीं थी , क्योंकि अल्लाह के नबी " दाउद "एक श्रेष्ठ संगीतकार थे . और उन्होंने कई संगीत के वाद्यों का अविष्कार भी किया था. हार्प Harp . तुरही Trumpet ,ढपली आदि प्रमुख हैं .इसके अलावा राजा दाउद बांसुरी ( Flute ) भी अच्छी तरह से बजाया करते थे . और उसमे कई राग भी निकल सकते थे 
और जब वह यरूशलेम के मंदिर में होने वाले भजनों में अन्य वाद्यों के साथ अपनी बांसुरी भी बजाते थे तो उपस्थित लोग मंत्रमुग्ध हो जाते थे .
इसके बारे में बाइबिल में यह लिखा है ,
सभी पुजारी राजा दाउद द्वारा बनाये गए वाद्यों लेकर राजा के साथ खड़े हो गए .और यहोवा की स्तुति गाकर उसका धन्यवाद करने लगे "2 इतिहास 7 :6 
तब यहोवा का स्तुतिगान प्रारंभ हो गया . और इस्राएल के राजा दाउद के बनाये वाद्य बजने लगे .और उनके साथ दाउद भी अपनी बांसुरी (Flute ) बजाता रहा .और फूंकने वाले भी अपनी तुरहियाँ फूँकते रहे "2 इतिहास 29 :26 -27 
तुम भी राजा दाउद की तरह बांसुरी के साथ सारंगी से अपनी बुद्धि से तरह तरह के राग निकालो " आमोस -6 :5 
2-दाउद का ईश्वरीय संगीत .
कहा जाता है कि नबी दाउद ईश्वर कि स्तुति में जो सगीत वाद्य बजाते थे यसका प्रभाव केवल मनुष्यों पर ही नहीं जड़ चेतन सभी पर होता था.यहाँ तक पक्षी भी संगीत सुनने के किये दाउद के पास जमा हो जाते थे . यह खुद कुरान बताती है ,
हमने दाउद को महानता प्रदान की , और पर्वतों से कहा उसके साथ भजन गायें, फिर चिड़ियों ने भी उसका साथ दिया "सूरा -सबा 34 :10 
जब दाऊद बजाते थे , तो चिड़ियाँ इकट्ठी हो जाती थीं , और गाने लगती थीं " सूरा -साद 38 :19 


3-दाउद की बांसुरी को मिल गयी 
चूँकि मुहम्मद साहब जगह जगह जिहाद करते रहते थे , और खुद को अल्लाह का अंतिम रसूल मानने के कारण जोभी कीमती चीज लूट में मिल जाती थी उस में जो भी महत्वपूर्ण होती थी अपने पास रख लेते थे . उनको दौड़ की बांसुरी कैसे और कहाँ से मिली . इसके बारे में हदीस में विस्तार से नहीं लिखा है .लेकिन इस एक प्रमाणिक हदीस से पता चलता है कि मुहम्मद साहब के हाथों दाउद की बांसुरी लग गयी थी .यह बिलकुल सही हदीस है , जिसे इमाम बुखारी ने नक़ल किया है , इसलिए हिंदी के साथ अरबी और अंगरेजी भी दी जा रही है ,


"Narrated Abu Musa: That the Prophet said to him' "O Abu Musa! we have been given one of the musical wind-instruments of the family of David .' 


अबू मूसा ने कहा , कि एक दिन रसूल ने बताया हे अबू मूसा मुझे दाउद के घर से एक मुंह से फूंक कर बजाने वाला वाद्य ( बांसुरी ) मिला है "




"وروى أبو موسى: أن النبي قال له: "يا أبا موسى لقد أعطيت أنت واحدة من الأدوات الموسيقية الرياح من عائلة داود   "


    बुखारी - जिल्द 6 किताब 61 हदीस 568 

4-रसूल बांसुरी बजाते थे .
क्योंकि हमें पता है कि कुतर्क करना , अर्थ का अनर्थ करना , सत्य से इंकार करना मुसलमानों का स्वभाव है . और वह इस हदीस को भी गलत साबित करने का प्रयास करेंगे .लेकिन इस हदीस की व्याख्या से उनका भ्रम दूर हो जायेगा .इसमे साफ लिखा है , कि मुहम्मद साहब में दौड़ कि बांसुरी धरोहर की तरह छुपा कर नहीं रख लिया था . बल्कि उसे बजाकर कुरान का संगीत भी निकलते थे ,
इसलिए इसी हदीस की तफ़सीर देखिये .Explaning-

"He is saying Abu Musa has a beautiful voice for reciting Qur'an. and Prophet liked  to beautiful Qur'anic recitation on  the Flutes of David others as "musical wind-instruments of David" Notice the hadith below it speaking of  playing Qur'anic recitation  on flute .
इस हदीस की व्याख्या में दिया है कि अबू मूसा की आवाज बहुत ही मधुर थी . लोग उसकी  तुलना दाऊद की बांसुरी की ध्वनि से करते थे . इसलिए जब भी रसूल उस बांसुरी को फूंकते थे ,तो उस में से भी कुरान के पाठ जैसी आवाज निकलती थी .रसूल कहते थे मूसा , यह दाउद की बांसुरी कुरान का पाठ करती है. 




"، فهو يقول أبو موسى لديه صوت جميل لتلاوة القرآن الكريم. بعض الناس الرجوع إلى تلاوة قرآنية جميلة كما في المزامير الآخرين ديفيد بأنها "آلات موسيقية الرياح داود" لاحظ الحديث تحته الحديث عن تلاوة القرآن الكريم. "




(Explanation -of Sahih Bukhari, Virtues of the Qur'an, Volume 6, ( البخاري، فضائل القرآن، المجلد 6 )

इस हदीस से सिद्ध हो जाता है कि इस्लाम में धर्म के नाम पर परस्पर विरोधी बातों का संग्रह कर दिया गया है . ताकि विरोधियों को जब चाहे जीसी न किसी नियम के अधीन फसा जा सके . और अपमे लोगों को बचा जा सके .जैसे जब मुहम्मद साहब ने संगीत , और संगीत के वाद्यों को हराम कर दिया है , तो दरगाहों में और मजारों पर कव्वालियाँ क्यों होती हैं ? और जब उसी अल्लाह ने अपने नबी दाउद को संगीत के वाद्यों से स्तुति करने की अनुमति दे राखी थी, तो महम्मद साहब ने सगीत को हराम क्यों कर दिया .? और जब हराम ही कर दिया तो खुद दाउद कि बांसुरी क्यों बजाने लगे .

अब तो रसूल का नाम " वंशी बजैया " रख देना चाहिए .

http://answers.yahoo.com/question/index?qid=20090311002619AAUzgO2

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही नई जानकारी मिलि आज पता नही मुस्लिम भाई इतनी महत्वपूर्ण तथ्यो को छिपा कर क्यो रखते है

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    1. किसी भी प्रकार का महत्वपूर्ण तथ्य छुपा हुआ नहीं है। ये तो बताने वाले की गलती है जो गलत और बढ़ाचढ़ाकर लेख लिख रहा है और ये पढ़ने वाले की गलती है क्योंकि वो इस बारे में थम्सअप है।
      अब उल्लू तो सूरज के वजूद का इंकार करेगा ही उसने दिन में निकलना कब सीखा है अब इनके लेखों को वो लोग तो स्वीकार कर ही लेंगे जिनका इस्लाम से कोई ताअल्लुक़ नहीं है और जिनको इस्लाम के बारे ने स्टडी करने की जरूरत महसूस नहीं होती ये ऐसे लोग होते हैं जैसा इन्हें बताया गया स्वीकार कर लिया और कमेंट्स लिख दी। लेकिन कभी स्टडी नहीं की।

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    2. किसी भी प्रकार का महत्वपूर्ण तथ्य छुपा हुआ नहीं है। ये तो बताने वाले की गलती है जो गलत और बढ़ाचढ़ाकर लेख लिख रहा है और ये पढ़ने वाले की गलती है क्योंकि वो इस बारे में थम्सअप है।
      अब उल्लू तो सूरज के वजूद का इंकार करेगा ही उसने दिन में निकलना कब सीखा है अब इनके लेखों को वो लोग तो स्वीकार कर ही लेंगे जिनका इस्लाम से कोई ताअल्लुक़ नहीं है और जिनको इस्लाम के बारे ने स्टडी करने की जरूरत महसूस नहीं होती ये ऐसे लोग होते हैं जैसा इन्हें बताया गया स्वीकार कर लिया और कमेंट्स लिख दी। लेकिन कभी स्टडी नहीं की।

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  2. ये जाकिर दलाल कहाँ छिपा बैठा है वो इस लेख को पढे और भौँकना बंद करे

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    1. लेख ही गलत हो तो क्या जवाब दें।

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  3. कभी नहीं हमारे इस कमीने पापी मोहम्मद को हमारे प्यारे किशन कन्हैया, वंशी बजैया का नाम कैसे दिया जा सकता है।

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  4. कृष्ण : भगवान् या बलात्कारी ?
    दशरत राम यदि 'मर्यादा पुरुषोत्तम' कहलाता हैं
    तो वासुदेव नंदन कृष्ण 'लीला पुरुषोत्तम' अर्थात कृष्ण
    अपनी अनोखी लीलाओ के कारण जन सामान्य में
    अधिक लोकप्रिय रहे हैं. संभवत: कृष्ण का बचपन

    नंदगांव और गोकुल में गोपियों के बीच बीता. कृष्ण
    औरतो के मामले में शुरू से ही स्वतंत्र विचार के थे.
    पुराणों के अनुसार उनका मिजाज़ लड़कपन से
    ही आशिकाना मालूम होता हैं.
    गोपियों के साथ कृष्ण का यौन सम्बन्ध था इस विषय
    में लगभग सारा कृष्ण साहित्य एकमत हैं. इन
    गोपियों में विवाहित और कुमारी दोनों प्रकार
    की थी वे अपने पतियों, पिताओ और भाइयो के कहने
    पर भी नहीं रूकती थी:
    ' ता: वार्यमाणा: पतिभि: पितृभि्भ्रातृभिस्तथा,
    कृष्ण गोपांगना रात्रौं रमयंती रतिप्रिया :'
    -विष्णुपुराण, 5, 13/59.
    अर्थात वे रतिप्रिय गोपियाँ अपने पतियों,
    पिताओं और भाइयो के रोकने पर भि रात में कृष्ण के
    साथ रमण करती थी .
    कृष्ण और गोपियों का अनुचित सम्बन्ध था यह बात
    भागवत में स्पष्ट रूप से मोजूद हैं,
    ईश्वर अथवा उस के अवतार माने जाने वाले कृष्ण का जन
    सामान्य के समक्ष अपने ही गाँव की बहु
    बेटियों के साथ सम्बन्ध रखना क्या आदर्श था ?
    कृष्ण ने गोपियों के साथ साथ ठंडी बालू वाले
    नदी पुलिन पर प्रवेश कर के रमण किया. वह स्थान
    कुमुद की चंचल और सुगन्धित वायु आनंददायक बन
    रहा था. बाहे फैलाना, आलिंगन करना, गोपियों के हाथ
    दबाना, बाल (चोटी) खींचना, जंघाओं पर हाथ फेरना,
    नीवी एवं स्तनों को चुन, गोपियों के नर्म
    अंगो नाखुनो से नोचना, तिर्चि निगाह से देखना,
    हंसीमजाक करना आदि क्रियाओं से गोपियों में
    कामवासना बढ़ाते हुए कृष्ण ने रमण किया.
    - श्रीमदभागवत महापुराण 10/29/45
    कृष्ण ने रात रात भर जाग कर अपने साथियो सहित
    अपने से अधिक अवस्था वाली और माता जैसे दिखने
    वाली गोपियों को भोगा.
    - आनंद रामायण, राज्य सर्ग 3/47
    कृष्ण के विषय में जो कुछ आगे पुरानो में लिखा हैं उसे
    लिखते हुए भी शर्म महसूस होती हैं की गोपियों के
    साथ उसने क्या-क्या किया इसलिए में निचे अब
    सिर्फ हवाले लिख रहा हूँ जहा कृष्ण ने गोपियों के
    यौन क्रियाये की हैं -
    - ब्रह्मावैवर्त पुराण, कृष्णजन्म खंड 4, अध्याय
    28-6/18, 74, 75, 77, 85, 86, 105, 109,110,
    134, 70.
    - ब्रह्मावैवर्त पुराण, कृष्णजन्म खंड 4, 115/86-88
    कृष्ण का सम्बन्ध अनेक नारियों से रहा हैं कृष्ण
    की विवाहिता पत्नियों की संख्या सोलह हज़ार एक
    सो आठ बताई जाती हैं. धार्मिक क्षेत्र में कृष्ण के साथ
    राधा का नाम ही अधिक प्रचलित हैं. कृष्ण
    की मूर्ति के साथ प्राय: सभी मंदिरों में
    राधा की मूर्ति हैं. लेकिन आखिर ये राधा थी कौन?
    ब्रह्मावैवर्त पुराण राधा कृष्ण की मामी बताई गयी हैं.
    इसी पुराण में राधा की उत्पत्ति कृष्ण के बाए अंग से
    बताई गयी हैं
    'कृष्ण के बायें भाग से एक कन्या उत्पन्न हुई. गुडवानो ने
    उसका नाम राधा रखा.'
    - ब्रह्मावैवर्त पुराण, 5/25-26
    'उस राधा का विवाह रायाण नामक वैश्य के साथ कर
    दिया गया कृष्ण की जो माता यशोदा थी रायाण
    उनका सगा भाई था.
    - ब्रह्मावैवर्त पुराण, 49/39,41,49
    यदि राधा को कृष्ण के अंग से उत्पन्न माने तो वह
    उसकी पुत्री हुई . यदि यशोदा के नाते विचार करें
    तो वह कृष्ण की मामी हुई. दोनों ही दृष्टियो से
    राधा का कृष्ण के साथ प्रेम अनुचित था और कृष्ण ने
    अनेको बार राधा के साथ सम्भोग
    किया था ( ब्रह्मावैवर्त पुराण, कृष्णजन्म खंड 4,
    अध्याय 15) और यहाँ तक विवाह भी कर
    लिया था (ब्रह्मावैवर्त पुराण, कृष्णजन्म खंड 4,
    115/86-88). —

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  5. ब्रहामणोँ के सर्वोच्च देवता ब्रहमा जिससे ब्रहामणोँ का जन्म भी हुआ के विषय मेँ कुछ रोचक जानकारी
    -भविष्य पुराण मेँ लिखा है कि ब्रहमा के वीर्य से 88 हजार ऋषियोँ का जन्म हुआ औरउस वीर्यका कुछ भाग एक मछली सटक गई उसके अदंर से कवि नारायण(मछेँद्रनाथ) का जन्म हुआ।
    ब्रहमाके वीर्य का कुछ अंश रेवा नदी के किनारे जा गिरा जिससे चमस नारायण उत्पन्न हुए।
    उसी वीर्य का कुछ भाग एक नागिन ने खाया जिसके अंडे से अविहोत्र नारायण(नागनाथ)का जन्म हुआ।
    पार्वती कोशादी के मंडप मेँ देखकर ब्रहमा का वीर्यपात हो गया।
    उस वीर्य को ब्रहमाने पैरोँसे चारोँ ओरपथ्वी पर गिरा दिया।उस वीर्य से 60 हजार बाल खिल्द ऋषियोँ का जन्म हुआ।
    हिमालय पर अपनी पुत्री को देखकर ब्रहमा का वीर्य धरती पर जा गिरा वीर्य का कुछ भाग एक हाथीके कान मेँ जा गिरा जिससे प्रबुद्ध नारायण का जन्म हुआ।
    कोई महामूर्ख ही इन बातोँ पर विश्वास करेगा......
    नोट: कोई भी वयकती बेहस करने से पेहले भवीषय पुराण मे ईसकी पुषठी कर ले

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  6. जिस धर्म का भगवान ही किसी स्त्री की नाक मामूली बात पर काट सकता है ,
    तो उस भगवान को अपना आदर्श मानने वाला इंसान किसी मामूली बात पर, किसी स्त्री का चेहरा एसिड फेंककर तो जला ही सकता है.!
    Pls Friends Maximum Like Share This page
    अंधिवश्वास की पोल खोल रीट्रन
    https://www.facebook.com/pages/अन्धविश्वास-की-पोल-खोल-रिटर्न/1409561735923087?_e_pi_=7%2CPAGE_ID10%2C7125645194

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  7. Hindu devta sanatan Hai Muslim jaise idiot nhi ki virya se paida ho..
    Ajnme hote hai devta..
    Tere mohammad jo muslim dharam ka sansthapak ghagwan tha vo na Ek yahudi (Judaism) ke virya se paida hua tha idiot..
    Ishwar ko virya se paida karta hai bakchod ...

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