मंगलवार, 3 जुलाई 2012

कुरान में पवित्र अश्लील शब्द


किसी भी व्यक्ति की शराफत , शिष्टता ,गुण अवगुण और स्वभाव उसके द्वारा बोलचाल प्रयोग किये या लिखे गए शब्दों से पता चल जाते हैं .दुनिया की हरेक भाषा में पुरुष स्त्री के गुप्त अंगों से सम्बंधित शिष्ट और अश्लील शब्द पाए जाते हैं .और सभ्य लोग उन्हीं शब्दों का प्रयोग करते हैं ,जो समाज में स्वीकृत होते हैं .लेकिन उन्हीं शब्दों के लिए कुछ ऐसे भी पर्यायवाची शब्द होते है .जिनका गाली के रूप में प्रयोग किया जाता है .और जो भी व्यक्ति अपनी बातों के दौरान या लेखों में अश्लील शब्दों का प्रयोग करता है .लोग उसे असभ्य ,अशिष्ट या गंवार मानकर तिरस्कार करते हैं .
1-फुर्ज शब्द का गलत अर्थ 
मुसलमान कुरान को अल्लाह की किताब बताते है .जो अरबी भाषा में है .और अरबी भाषा में जननांग (Genitalia)के लिए कई शब्द मौजूद होंगे , मगर अल्लाह ने अपनी कुरान में उन्ही शब्दों का प्रयोग किया है , जो मुहम्मद साहब के समय अनपढ़ , गंवार ,और उज्जड बद्दू लोग गाली के लिए प्रयोग करते थे.कुरान में ऐसा ही एक शब्द " फर्ज فرج " है जो इन तीन अक्षरों ( फे  ف   रे ر जीम ج) से बना है और इसका बहुवचन ( Plural )" फुरूज فروج" होता है जिसका असली अर्थ छुपाने के लिए कुरान के अनुवादक तरह तरह के शब्दों का प्रयोग करते हैं .चालक मुल्ले फुर्ज शब्द का अर्थ " गर्भाशय Uterus "बताकर लोगों को गुमराह करते रहते हैं जबकि गर्भाशय के लिए अरबी में " रहम  رحم    " शब्द प्रयुक्त होता है 
2-कुरान में फुर्ज का उल्लेख 
पूरी कुरान में अधिकतर " फुर्ज " का बहुवचन शब्द " फुरुज "प्रयुक्त किया गया है ,और मुल्लों उनके जो अर्थ दिए है ,अरबी के साथ हिंदी और अंग्रेजी में दिए जा रहे हैं .बात स्पष्ट हो सके .देखिये ,
1." जिसने अपने सतीत्व की रक्षा की "


" الَّتِي أَحْصَنَتْ فَرْجَهَا  "
"अल्लती खसलत फुरूजुहा "
who guarded her chastity,Sura-at Tahrim 66:12


2."अपनी गुप्त इन्द्रियों की रक्षा करने वाली "
" وَالْحَافِظِينَ فُرُوجَهُمْ  "
"वल हाफिजूना फुरूजुहुम "
and women who are mindful of their chastity, Sura- al Ahzab 33:35
3.ईमान वाली स्त्रियों से कहो कि वह अपनी गुप्त इन्द्री की रक्षा करें "( mindful of their chastity)सूरा-अन नूर 24 :31 
" وَيَحْفَظْنَ فُرُوجَهُنَّ "
"व युफ्जिन फरूजहुन्न "
4.हमने उस स्त्री की फुर्ज में अपनी रूह फूंक दी , जिसकी वह रक्षा कर रही थी "( guarded her chastity)  (सूरा-अल अम्बिया 21 :91 
"والتي احصنت فرجها فنفخنا فيها من روحنا وجعلناها وابنها اية للعالمين  "21:91

दी गयी कुरान की इन सभी आयतों में " फुर्ज " का बहुवचन " फुरूज " प्रयोग किया गया है , जिसका अर्थ चालाक मौलवी हिंदी में " गुप्त इन्द्री , सतीत्व " और अंगरेजी में chastityबताकर लोगों को गुमराह करते रहते हैं .जबकि फुर्ज का अर्थ कुछ और ही है .जो विकीपीडिया में दिया है , देखिये ,
In Arabic, the word Al-Farj (الفرج) means Vagina


http://wikiislam.net/wiki/Allah:_I_sent_Jibreel_to_blow_into_Mary's_Vagina


3-फुर्ज अश्लील और गन्दी गाली है 
लोगों ने फुर्ज का अर्थ अंगरेजी में Vagina यानि स्त्री की योनी साबित कर दी है . और अरबी लुगत ( शब्दकोश ) से भी यही सिद्ध होता है ,जैसे 
"فرج المرأة الداخل "


   "inside the Woman's vagina "


लेकिन फुर्ज का अर्थ योनी से स्पष्ट नहीं होता है क्योंकि योनी के लिए अरबी में " अल मुहमल"المهبل और " गमद غمد"शब्द मौजूद है .जो शिष्ट शब्द है 
अंगरेजी में फुर्ज जैसी गाली का अर्थ नहीं होगा लेकिन हिंदी में गाली के रूप में गुंडे मवाली अक्सर बोलते रहते है ,जो " च " शब्द से शुरू होता है .


4-आकाश में भी योनी 
दूसरी भाषा की तरह अरबी में भी अश्लील मुहावरे प्रचलित हैं जिसका उदहारण इस आयत से मिलता है
" हमने आकाश को ऐसा बनाया और सजाया कि उसमे कोई त्रुटी ( फर्ज " नहीं है "( free of  faults)सूरा -काफ 50 :6 
"أَفَلَمْ يَنْظُرُوا إِلَى السَّمَاءِ فَوْقَهُمْ كَيْفَ بَنَيْنَاهَا وَزَيَّنَّاهَا وَمَا لَهَا مِنْ فُرُوجٍ  "
"व मा लहा मन फुरूज "
यदि हम इस आयत के अंतिम शब्दों का यह अर्थ करें "और उसमे कोई योनी नहीं है " तो यह अर्थ गलत होगा इसका सही अर्थ होगा " उसमे कोई चुतियापा नहीं है ''क्योंकि इस आयत में फुर्ज शब्द जब किसी वस्तु कमी या खोट होती है तब कहा जाता है
4-जद्दाह का हवाई अड्डा योनी (فرج )जैसा है 
मुसलमानों का इमान है कि अल्लाह की किताब होने के कारण कुरान का हरेक शब्द पवित्र है , चाहे उसमे अश्लील गालियाँ क्यों हों .और जब कुरान ने अल्लाह ने इतनी बार " फुर्ज " यानि योनी का उल्लेख किया है , तो उससे प्रभावित होकर सऊदी अरब के बादशाह " अब्दुल अजीज " ने
सोचा जैसे सभी मनुष्य योनी से निकल कर दुनिया में प्रवेश करते हैं ,उसी तरह हाजी भी जद्दाह से होकर मक्का में जाते है .इसलिए जब जद्दाह का नया हवाई अड्डा बनाया गया तो उसकी बनावट महिला की ऐसी योनी की तरह बनाया गया है , जिसमे लिंग प्रवेश कर रहा है .यह विचित्र और कुरान में वर्णित फुर्ज के आकार के हवाई अड्डे का निर्माण का प्रारंभ सन 1974 में हुआ था .और 31 मई 1981 इसका उद्घाटन खुद बादशाह ने किया था .इस हवाई अड्डे का कुल क्षेत्रफल 15 वर्ग किलो मीटर है .मक्का का दर्शन करने के लिए जो भी व्यक्ति जद्दाह पर उतरता है वह पहले फुर्ज जैसे इस हवाई अड्डे का दर्शन जरुर करता है ,फिर पहले तो जो लोग कुरान को ठीक से नहीं समझते थे उन्होंने इस हवाई अड्डे का काफी विरोध किया था और कहा था ,किजद्दाह का हवाई अड्डा हराम है इसका आकार"फुर्ज " यानि योनी जैसा है 


مطار جدة حرام لأنه يشبه فرج المرأة
"मतार जद्दाह हराम लियश्बीह फुर्ज अल इमरात"
Jedda airport is harram because it looks like the vagina of the woman!देखिये विडिओ 


http://www.youtube.com/watch?v=SxMMQopZwrc

लेकिन जब विरोध करने वालों को फुर्ज से सम्बंधित कुरान की आयतें अर्थ सहित बताई गयीं , तो उनका विरोध समाप्त हो गया . और आज तक जद्दाह का हवाई अड्डा वैसा ही है .जैसी किसी मुस्लिम औरत की योनी होती है 


वास्तव में " फुर्ज " ही इस्लाम का मुख्य आदर है .काबा की दीवार पर जो पत्थर है उसकी बनावट भी योनी जैसी है .मुसलमानों ने फुर्ज के लिए ही अनेकों युद्ध लड़े है .और जन्नत में भी हूरों की फुर्ज की इच्छा रखते हैं .वैसे किसी को अश्लील गली देना बुरी बात , और पाप है , लेकिन जब खुद अल्लाह ने ऐसे शब्द का प्रयोग किया है तो फुर्ज शब्द गाली नहीं पवित्र हो गया है .
याद रखिये जो खुद कीचड़ में सना हुआ हो वह दूसरों के कपड़ों में दाग नहीं खोजता .

http://www.danielpipes.org/comments/195920

52 टिप्‍पणियां:

  1. वास्ताव में इस्लाम ब्याभिचार कुकर्मो पर आधारित धर्म है

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. tum pagal ho tuhme dimagi dava ki jarurat ha
      tumre maa ki chut

      हटाएं
    2. Wah, yahi to sachche Katuye ki pahachan hai

      हटाएं
    3. इस्लाम और पर्यावरण: एक झलक


      जल और थल में बिगाड़ फैल गया खुद लोगों की ही हाथों की कमाई के कारण, ताकि वह उन्हें उनकी कुछ करतूतों का मजा चखाए, कदाचित वे बाज आ जाएं। (कुरआन-30:41)
      पैगम्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम)ने फरमाया अगर कयामत आ रही हो और तुम में से किसी के हाथ में कोई पौधा हो तो उसे ही लगा ही दो और परिणाम की चिंता मत करो।

      पैगम्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम)ने फरमाया-जिसने अपनी जरूरत से ज्यादा पानी को रोका और दूसरे लोगों को पानी से वंचित रखा तो अल्लाह फैसले वाले दिन (बदला दिया जाने वाले दिन) उस शख्स से अपना फज्लो करम रोक लेगा।
      पैगम्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम)ने फरमाया-जो बंदा कोई पौधा लगाता है या खेतीबाड़ी करता है। फिर उसमें से कोई परिंदा, इंसान या अन्य कोई प्राणी खाता है तो यह सब पौधा लगाने वाले की नेकी (पुण्य) में गिना जाएगा।
      पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. ने फरमाया-जो भी खजूर का पेड़ लगाएगा, उस खजूर से जितने फल निकलेंगे, अल्लाह उसे उतनी ही नेकी देगा।

      पैगम्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम)ने फरमाया- जिस घर में खजूर का पेड़ हो, वह भुखमरी से परेशान नहीं हो सकता।

      हटाएं
    4. abe benami ma k laude,

      hamare yaha pehle se hi sab perh podho ko poojte hien, hame teri or muhammad dalle ki seekh nahi chahiye

      हटाएं
    5. sach hamesha kadva hota hai bagam madam jii app ko to ek movie dhakini hoto hai jis ka naam hai gaddar ek pream khani....idiot

      हटाएं
  2. बहुत-२ धन्यवाद इसे उपलब्ध करवाने के लिए

    उत्तर देंहटाएं
  3. भंडा फोडू के लेखक शर्मा जी या जो भी सज्जन हों, इसमें कोई दो राय नहीं कि वे एक प्रकांड विद्वान हैं,उनके पास हिंदी,अंग्रेजी, अरबी और उर्दू का विशाल ज्ञान भण्डार है, जिस प्रमाणिकता और तार्किकता से वे अपने विचारों को ब्यक्त करते हैं, ये किसी सामान्य ब्यक्ति के बस कि बात नहीं है, ऐसे विद्वान ब्यक्ति को शत शत नमन I

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. इस्लाम और पर्यावरण: एक झलक


      जल और थल में बिगाड़ फैल गया खुद लोगों की ही हाथों की कमाई के कारण, ताकि वह उन्हें उनकी कुछ करतूतों का मजा चखाए, कदाचित वे बाज आ जाएं। (कुरआन-30:41)
      पैगम्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम)ने फरमाया अगर कयामत आ रही हो और तुम में से किसी के हाथ में कोई पौधा हो तो उसे ही लगा ही दो और परिणाम की चिंता मत करो।

      पैगम्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम)ने फरमाया-जिसने अपनी जरूरत से ज्यादा पानी को रोका और दूसरे लोगों को पानी से वंचित रखा तो अल्लाह फैसले वाले दिन (बदला दिया जाने वाले दिन) उस शख्स से अपना फज्लो करम रोक लेगा।
      पैगम्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम)ने फरमाया-जो बंदा कोई पौधा लगाता है या खेतीबाड़ी करता है। फिर उसमें से कोई परिंदा, इंसान या अन्य कोई प्राणी खाता है तो यह सब पौधा लगाने वाले की नेकी (पुण्य) में गिना जाएगा।
      पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. ने फरमाया-जो भी खजूर का पेड़ लगाएगा, उस खजूर से जितने फल निकलेंगे, अल्लाह उसे उतनी ही नेकी देगा।

      पैगम्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम)ने फरमाया- जिस घर में खजूर का पेड़ हो, वह भुखमरी से परेशान नहीं हो सकता।

      हटाएं
    2. Bahut sahe Madam baat kr ri ho ijaat ke wo b kisi Ko gali de kr bahut acha Dharam hai apka
      Jin Bhai ne post kra sb proof k sath kra Jao parho jaa kr us sb link ko or galat proof Kro usko agar itna Bura lg ra hai to warna truth maan lo k kuraan koi akasi book ni hai or logo ko galat karna Sikha ri hai

      हटाएं
    3. Bahut sahe Madam baat kr ri ho ijaat ke wo b kisi Ko gali de kr bahut acha Dharam hai apka
      Jin Bhai ne post kra sb proof k sath kra Jao parho jaa kr us sb link ko or galat proof Kro usko agar itna Bura lg ra hai to warna truth maan lo k kuraan koi akasi book ni hai or logo ko galat karna Sikha ri hai

      हटाएं
  4. shame on you.....Allah will burnt u in hell fire

    उत्तर देंहटाएं
  5. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. aap dwara di gayi jankari sahi hai lekin padne wale ise galt bhavna se lete hai aur apsabd likhte hai allah unlogo ko akl de aur apni rahemat banaye rakhe

      हटाएं
  6. अति महत्वपूर्व रहस्य उजागर करने के लिए धन्यवाद |

    उत्तर देंहटाएं
  7. allah ek nambur ka maderchod aadmi tha

    उत्तर देंहटाएं
  8. bahut bahut dhanyawad apko ye jankari dene k liye,

    उत्तर देंहटाएं
  9. bilkul sahi ye agar fer muslman kafil he, to sabse pahla kafil to mohhamad paigmabar hona chahiye, kyuki wo hindi tha janam jaat se,

    उत्तर देंहटाएं
  10. ye sub dharam islam vagera banaya huaa dharam he, koi sachai nahi he usme

    उत्तर देंहटाएं
  11. logo ko bevkuf banate he islam dharam wale, bhagvan kabhi apne banaye huye insan se nafrat nahi karte, magar muslman k alha karte he yani koi alha vagera nahi he, ye sub apni bani banai baate he

    उत्तर देंहटाएं
  12. abe chutiyo tumhare baap se pucho ke tumhare itne devi devta hai wo kaha se paida hue hai sub bhendchod kalpanik hai

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. Are gandu hamare davi devta jaha se b paida hua ho Tum batao tumhare khuda k bare may to Mohammad sahab ko b ni pata tto usne kuraan may kiska bakahn likha hai
      Hamare yaha to hr davi devta ka proof Mila hai raam ka Krishna ka but Tum logo k Dharam may Mohammad sahab Jo 500 saal pahle aye the unke he character pr logo ko sandeh hai warna 1 paiganbar 12 saal kd ladki se shadi kre apni Hawas mitane k leya usko Mai khuda ni manta

      हटाएं
    2. Are gandu hamare davi devta jaha se b paida hua ho Tum batao tumhare khuda k bare may to Mohammad sahab ko b ni pata tto usne kuraan may kiska bakahn likha hai
      Hamare yaha to hr davi devta ka proof Mila hai raam ka Krishna ka but Tum logo k Dharam may Mohammad sahab Jo 500 saal pahle aye the unke he character pr logo ko sandeh hai warna 1 paiganbar 12 saal kd ladki se shadi kre apni Hawas mitane k leya usko Mai khuda ni manta

      हटाएं
  13. I am asif khan.........


    Aap log hamare nabi ke bare main bahut kuch khe rahe ho or is saite per bhut kuch likha hain par kabhi aap apni dharm ki kitabo ko padh lo aap ko usme nabi ka zikr bhi mail jayega or islam ki sachai bhi pata chal jayegi

    AB AAP KHOGE KI BATAO TO MAIN AAP KO DR. JAKIR NAYAK KI VIDEO JO KI AAP YOUTUBE ISLAM OR SANATEN DHARM LIKH YA DR. JAKIR NAYAK VIDEO LIKH KAR DEKH SAKHTE HO.......

    AAP LOGO KO YAHA PAR GATET BATAIN BATAI JA RAHI HAIN OR AGAR BAT SAHI HO TO USE GALET SHOW KI JATA HAIN ISLAM DHARM KI BAT KO SAMEJNE KE LIYE SIRF EK HADIS WE QURAN KI AAYAT KAFI NAHAHI

    JESE EK QURAN KI AAYAT KO SAMAJNE KE LIYE KAHI HADIS KO SAMJNA HOGA OR HADIS KO SAMJNE KE LIYE KAYI HADIS VE QURAN KI AAYAT KO SAMJNA HOGA

    MARI AAP SAB SE REQWEST HAIN KI AAP SAB YHAN GALAT FEHAMI ME NA PADHE OR ISE SITE KO BAND KARE KI KASIS KARE ..............................

    उत्तर देंहटाएं
  14. asifji
    aap jis dr. jakir nayak ko hi suna or dekha hai. ab ek kaam kariye aap agniveer ko suniye or dekhiye. aap ke jakir naik bhai ke sabhi jutho ka pardafas de raha hai.
    kripiya ek baar agniveer ke blog ko padh lijiye. satya aapko pata chal jayega.

    hindu dharma ki kisi kitab (authentic) mai islam ka koi jikar nahi hai.

    उत्तर देंहटाएं
  15. WE BELIVE IN STAYA SANTAN DHARAM ,HUMARE DHARM YA TUMRA DHARAM OPEN MEETING KARRO , SUB BATTO KA FULL PROOF RECORD LEY KAR AIO JI ,PHIR FAISLA KARGE. LADDAI AAR PAR KI HOGI, KAYA KADWA YA MITTHA KAUN UNCCHA KON NICHHA

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. is men ladai ki keya baat hai , jo sahi ho use man kar apas men bhai bhai ban jao.

      (ek bat yah bhi hai ki is men bahut se logo ne apne comments men ek dosre ko gali di hai, aisa nahi karna chahiye, balki jobat jis ko na samajh men aye us ko samjhana chahiye)

      quran men gali kahin nahi di gayi hai balki logon ko samjhaya gaya hai, aur hamare lekhak sahab ne ise galat sajha hai , jaise chaako hai agar is se logon ko katal karoge to galat hai aur bhaji katoge to sahi hai

      (aur ham lakhak sahab se bahut khush hain ki kam se kam islam dharam ko parte hain aur hamen umid hai ki wah aage chal bahut ache insan bane ge)

      हटाएं
    2. Ahmed bhai..
      Quran main Gali nahi digayi. Ye gali deneki Mansaa se nahi hai.. Ye mujhe pata hai.. Par jis prakar ke anpad aur dihati sabd ka prayog hua hai, iss se pata chalta hai ki Mohammed saab unpad aur gawar the...

      हटाएं
  16. salo madhar chodo hrami ke pillo hinduo sudhar jao.salo muslman tumhari ma ko choda tabhi to tum log peda huye aur aj hami se ankh dikha rahe ho

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. sach sun kar gaad kyu paat rahi hai,aaj atank vaad ka dusra naam muslim hai, tabhi dusre desho me in per ben lagta hai

      हटाएं
    2. Manish is ki gand fati nahi jal gai hai aur yahi sab inke kuran me likha hai ke jaha jawab nahi de sakte vaha galiya dena shuru kardo

      हटाएं
    3. abe..
      sach sun ke gand jalgayi???? par sach tp sach hota hai.. tera rasool kitna unpad aur gawar tha ye pata chalta hai.. ja apne rasool ki gand main ghus jaa....

      हटाएं
    4. Abe...
      arabio ke GULAM.. Tum logo ko aakh dikhane ki jarurat nahi hai... Tum to sale gulam ho.. To apna izat kharab nahi kar na hume...

      aur kaunsi musalman ki baat karta hai tu?? jo terehi purvajo ki gaala kata aur tere ko musalman banaya????

      ja tere aakao ko chapal saaf kar.. sale GULAM...

      हटाएं
  17. Namsakar sharmaji aapaka lekh padha aor meri aakhe khulagai mujhe lagatatha islam
    Ek shanti preey dharm he islam ko janane ke baad lgatahe ye koi dharm vagera nahi
    Dakoo lutero ka sanghatan he. Aor muhammad in ka mukhaya jo aaj bhi inka aadarsh he aor sab lutere isaka anusarn karhe he..........

    उत्तर देंहटाएं
  18. itna dimag ladane se achcha hei koi aisa rasta batao momlan istriyo ki( furz )ham sab ko milti rahe.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. YE BAAT SAHI HEI FURZ KI SAB KO JARYRAT HEI. MUJHE BHEE . PAKKA INDIAN HEI.

      हटाएं
  19. कुरआन और विज्ञान - भू-विज्ञान (Earth science)

    भू-विज्ञान में.. ‘बल पड़ने, folding की सूचना नवीनतम शोध का यथार्थ है। पृथ्वी के ‘पटल crust में बल पड़ने के कारणों से ही पर्वतों का जन्म हुआ। पृथ्वी की जिस सतह पर हम रहते हैं किसी ठोस छिलके या पपड़ी की तरह है, जब कि पृथ्वी की भीतरी परतें layer बहुत गर्म और गीली हैं यही कारण है कि धरती का भीतरी भाग सभी प्रकार के जीव के लिये उपयुक्त नहीं है। आज हमें यह मालूम हो चुका है कि पहाड़ों की उत्थापना के अस्थायित्व का सम्बंध पृथ्वी की परतों में बल (दरार) पड़ने की क्रिया से बहुत गहरा है क्योंकि यह पृथ्वी के पटल पर पड़ने वाले ‘‘बल ही हैं जिन्होंने ज़न्ज़ीरों की तरह पहाड़ों को जकड़ रखा है। भू विज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार पृथ्वी की अर्द्धव्यासः radius की आधी मोटाई यानि 6.035 किलो मीटर है और पृथ्वी के धरातल जिस पर हम रहते हैं उसके मुक़ाबले में बहुत ही पतली है जिसकी मोटाई 2 किलो मीटर से लेकर 35 किलो मीटर तक है इसलिये इसके थरथराने या हिलने की सम्भावना भी बहुत असीम है ऐसे में पहाड़ किसी तंबू के खूंटों की तरह काम करते हैं जो पृथ्वी के धरातल को थाम लेते हैं और उसे अपने स्थल पर अस्थायित्व प्रदान करते हैं। पवित्र क़ुरआन भी यही कहता है:

    क्या यह घटना (वाक़िया) नहीं है कि हम ने पृथ्वी को फ़र्श बनाया और पहाड़ों को खूंटों की तरह गाड़ दिया (अल-क़ुरआन: सूर 78 आयत ..6से 7)

    यहां अरबी शब्द ‘‘औताद‘‘ का ‘अर्थ‘ भी खूंटा ही निकलता है वैसे ही खूंटे जैसा कि तंबुओं को बांधे रखने के लिये लगाए जाते हैं पृथ्वी के दरारों folds या सलवटों की हुई बुनियादें भी यहीं गहरे छुपी हैं। earth नामक अंग्रेजी़ किताब विश्व के अनेक विश्व विद्यालयों में भू-विज्ञान के बुनियादी उदाहरणों पर आधारित पाठयक्रम की पुस्तक है इसके लेखकों में एक नाम डा. फ्रेंकप्रेस का भी है, जो 12 वर्षा तक अमरीका के विज्ञान-अकादमी के निदेशक रहे जबकि पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जिमीकार्टर के शासन काल में राष्ट्रपति के वैज्ञानिक सलाहकार भी थे इस किताब में वह पहाडों की व्याख्या:कुल्हाड़ी के फल जैसे स्वरूप wedge-shape से करते हुए बताते हैं कि पहाड़ स्वयं एक व्यापकतम अस्तित्व का एक छोटा हिस्सा होता है जिसकी जड़ें पृथ्वी में बहुत गहराई तक उतरी होती हैं। संदर्भ ग्रंथ:earth फ्रेंकप्रेस और सिल्वर पृष्ट 435 ,, earth science टॉरबुक और लिटकन्ज पृष्ट 157

    ड़ॉ॰ फ्रेंकप्रेस के अनुसार पृथ्वी-पटल की मज़बूती और उत्थापना के अस्थायित्व में पहाड़ बहुत महत्पूर्ण भूमिका निभाते है।

    पर्वतीय कार्यों की व्याख्या करते हुए पवित्र क़ुरआन स्पष्ट शब्दों में बताता है कि उन्हें इसलिये बनाया गया है ताकि यह पृथ्वी को कम्पन से सुरक्षित रखें।

    ‘‘और हम ने पृथ्वी में पहाड़ जमा दिये ताकि वह उन्हे लेकर ढ़ुलक न जाए‘‘ । (अल..क़ुरआन: सूर: 21 आयात.. 31)

    इसी प्रकार का वर्णन सूर 31: आयत. 10 और सूर: 16 .. आयत 15 में भी अवतरित हुए

    हैं अतः पवित्र क़ुरआन के उप्लब्ध बयानों में आधुनिक भू विज्ञान की जानकारियां पहले से ही मौजूद हैं।

    पहाड़ों को मज़बूती से जमा दिया गया है

    पृथ्वी की सतह अनगिनत ठोस टुकडों यानि ‘प्लेटा‘ में टूटी हुई है जिनकी औसतन मोटाई तकरीबन 100 किलो मीटर है। यह प्लेटें आंशिक रूप से पिंघले हुए हिस्से पर मानो तैर रही हैं। उक्त हिस्से को उद्दीपक गोले aestheno sphere कहा जाता है। पहाड़ साधारणतया प्लेटों के बाहरी सीमा पर पाए जाते है। पृथ्वी का धरातल समुद्रों के नीचे 5 किलो मीटर मोटा होता है जबकि सूखी धरती से सम्बद्ध प्लेट की औसत मोटाई 35 किलो मीटर तक होती है। अलबत्ता पर्वतीय श्रृंख्लाओं में पृथ्वी के धरातल की मोटाई 80 किलो मीटर तक जा पहुंचती है, यही वह मज़बूत बुनियादें है जिन पर पहाड़ खड़े है। पहाड़ों की मज़बूत बुनियादों के विषय में पवित्र क़ुरआन ने कुछ यूं बयान किया है
    ‘‘और पहाड़ इसमें उत्थापित किये (गाड़ दिये)। (अल.क़ुरआन: सूर: 79 आयत ..32) इसी प्रकार का संदेश सूरः 88 आयत .19 में भी दिया गया है ।

    अतः प्रमाणित हुआ कि पवित्र क़ुरआन में पहाड़ों के आकार. प्रकार और उसकी उत्थापना के विषय में दी गई जानकारी पूरी तरह आधुनिक काल के भू वैज्ञानिक खोज और अनुसंधानों के अनुकूल है।

    उत्तर देंहटाएं
  20. कुरआन और विज्ञान - समुद्र विज्ञान (Oceanography)

    मीठे और खारे पानी के बीच ‘आड़‘

    ‘‘दो समंदरों को उसने छोड़ दिया कि परस्पर मिल जाएं फिर भी उनके बीच एक पर्दा (दीवार ) है। जिसका वह उल्लंघन नहीं करते‘‘ ।,,(अल-क़ुरआन: सूर 55 आयत ..19 से 20)

    आप देख सकते हैं कि इन आयतों के अरबी वाक्यांशों में शब्द ‘बरज़ख‘ प्रयुक्त हुआ है जिसका अर्थ रूकावट या दीवार है यानि partition इसी क्रम में एक अन्य अरबी शब्द ‘मरज‘ भी आया हैः जिसका अर्थ हैः ‘वह दोनों परस्पर मिलते और समाहित होते हैं‘। प्रारम्भिक काल में पवित्र क़ुरआन के भाष्यकारों के लिये यह व्याख्या करना बहुत कठिन था कि पानी के दो भिन्न देह से सम्बंधित दो विपरीतार्थक आशयों का तात्पर्य क्या है? अर्थात यह दो प्रकार के जल हैं जो आपस में मिलते भी हैं और उनके बीच दीवार भी है। आधुनिक विज्ञान ने यह खोज कर ली है कि जहां-जहां दो भिन्न समुद्र oceans आपस में मिलते है वहीं वहीं उनके बीच ‘‘दीवार‘ भी होती है। दो समुद्रों को विभाजित करने वाली दीवार यह है कि उनमें से एक समुद्र की लवणता:salinity जल यानि तापमान और रसायनिक अस्तित्व एक दूसरे से भिन्न होते हैं । (संदर्भ: principleas of oceanography devis पृष्ठ .92-93)

    आज समुद्र विज्ञान के विशेषज्ञ ऊपर वर्णित पवित्र आयतों की बेहतर व्याख्या कर सकते हैं। दो समुद्रो के बीच जल का अस्तित्व (प्राकृतिक गुणों के कारण) स्थापित होता है जिससे गुज़र कर एक समंदर का पानी दूसरे समंदर में प्रवेश करता है तो वह अपनी मौलिक विशेषता खो देता है, और दूसरे जल के साथ समांगतात्मक मिश्रण: Homogeous Mixture बना लेता है। यानि एक तरह से यह रूकावट किसी अंतरिम सममिश्रण क्षेत्र का काम करती है। जो दोनों समुद्रों के बीच स्थित होती है। इस बिंदु पर पवित्र क़ुरआन में भी बात की गई है:

    ‘‘और वह कौन है जिसने पृथ्वी को ठिकाना बनाया और उसके अंदर नदियां जारी कीं और उसमें (पहाडों की) खूंटियां उत्थापित कीं ‘‘और पानी के दो भण्डारों के बीच पर्दे बना दिये? क्या अल्लाह के साथ कोई और ख़ुदा भी (इन कार्यों में शामिल) है ? नहीं, बल्कि उनमें से अकसर लोग नादान हैं‘(अल-क़ुरआन .सूर: 27 ..आयात ..61)

    यह स्थिति असंख्य स्थलों पर घटित होती है जिनमें Gibralter के क्षेत्र में रोम-सागर और अटलांटिक महासागर का मिलन स्थल विशेष रूप से चर्चा के योग्य है। इसी तरह दक्षिण अफ़्रीका में,‘‘अंतरीप-स्थल cape point और‘ अंतरीप प्रायद्वीप‘‘cape peninsula में भी पानी के बीच, एक उजली पटटी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है जहां एक दूसरे से अटलांटिक महासागर और हिंद महासागर का मिलाप होता है। लेकिन जब पवित्र क़ुरआन ताज़ा और खारे पानी के मध्य दीवार या रूकावट की चर्चा करता है तो साथ-.साथ एक वर्जित क्षेत्र के बारे में भी बताता है:

    ”और वही जिसने दो समुद्रों को मिला कर रखा है एक स्वादिष्ट और मीठा दूसरा कड़वा और नमकीन, और उन दोनों के बीच एक पर्दा है, एक रूकावट जो उन्हें मिश्रित होने से रोके हुए है‘‘।(अल-क़ुरआन सूर: 25 आयत.53)

    आधुनिक विज्ञान ने खोज कर ली है कि साहिल के निकटस्थ समुद्री स्थलों पर जहां दरिया का ताजा़ मीठा और समुद्र का नमकीन पानी परस्पर मिलते हैं वहां का वातावरण कदाचित भिन्न होता हैं जहां दो समुद्रों के नमकीन पानी आपस में मिलते हैं। यह खोज हो चुकी है कि खाड़ियों के मुहाने या नदमुख:estuaries में जो वस्तु ताजा़ पानी को खारे पानी से अलग करती है वह घनत्व उन्मुख क्षेत्रःpycnocline zone है जिसकी बढ़ती घटती रसायनिक प्रक्रिया मीठे और खारे पानी के विभिन्न परतों layers को एक दूसरे से अलग रखती है। (संदर्भः oceanography ग्रूस: पृष्ठ 242 और Introductry oceanography थरमनः पुष्ठ 300 से 301)

    उत्तर देंहटाएं
  21. PART 2

    रूकावट के इस पृथक क्षेत्र के पानी में नमक का अनुपात ताज़ा पानी और खारे पानी दोनों से ही भिन्न होता है , (संदर्भ: oceanography ,ग्रूसः पृष्ठ 244 और Introductry oceanography ‘‘थरमन: पुष्ठ 300 से 301)

    इस प्रसंग का अध्ययन कई असंख्य स्थलों पर किया गया है, जिसमें मिस्र म्हलचज की खा़स चर्चा है जहां दरियाए नील, रोम सागर में गिरता है। पवित्र क़ुरआन में वर्णित इन वैज्ञानिक प्रसंगों की पुष्टि ‘डॉ. विलियम एच‘ ने भी की है जो अमरीका के कोलवाडोर यूनीवर्सिटी में समुद्र-विज्ञान और भू-विज्ञान के प्रोफे़सर हैं।

    समुद्र की गहराइयों में अंधेरा

    समुद्र-विज्ञान और भू-विज्ञान के जाने माने विशेषज्ञ प्रोफेसर दुर्गा राव जद्दा स्थित शाह अब्दुल अजी़ज़ यूनिवर्सिटी, सऊदी अरब में प्रोफ़ेसर रह चुके हैं।

    एक बार उन्हें निम्नलिखित पवित्र आयत की समीक्षा के लिये कहा गया:

    ‘‘या फिर उसका उदाहरण ऐसा है जैसे एक गहरे समुद्र में अंधेरे के ऊपर एक मौज छाई हुई है, उसके ऊपर एक और मौज और उसके ऊपर बादल अंधकार पर अंधकार छाया हुआ है, आदमी अपना हाथ निकाले तो उसे भी न देखने पाए। अल्लाह जिसे नूर न बख्शे उसके लिये फिर कोई नूर नहीं। ‘‘(अल-क़ुरआन: सूर 24 आयत ..40 )

    प्रोफे़सर राव ने कहा - वैज्ञानिक अभी हाल में ही आधुनिक यंत्रों की सहायता से यह पुष्टि करने के योग्य हुए हैं कि समुद्र की गहराईयों में अंधकार होता है। यह मनुष्य के बस से बाहर है कि वह 20 या 30 मीटर से ज़्यादा गहराई में अतिरिक्त यंत्रों और समानों से लैस हुए बिना डुबकी लगा सके इसके अतिरिक्त, मानव शरीर में इतनी सहन शक्ति नहीं है कि जो 200 मीटर से अधिक गहराई में पडने वाले पानी के दबाव का सामना करते हुए जीवित भी रह सके। यह पवित्र आयत तमाम समुद्रों की तरफ़ इशारा नहीं करती क्योंकि हर समुद्र को परत दर परत अंधकार, का साझीदार करार नहीं दिया जा सकता अलबत्ता यह पवित्र आयत विशेष रूप से गहरे समुद्रों की ओर आकर्षित करती है क्योंकि पवित्र क़ुरआन की इस आयत में भी ‘‘विशाल और गहरे समुद्र के अंधकार ‘का उदाहरण दिया गया है गहरे समुद्र का यह तह दर तह अंधकार दो कारणों का परिणाम है।

    प्रथम: आम रौशनी की एक किरण सात रंगों से मिल कर बनती है। यह सात रंग क्रमशः बैंगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंजी, लाल (vibgyor) ,है। रौशनी की किरणें जब जल में प्रवेश करती हैं तो प्रतिछायांकन की क्रिया से गुज़रती हैं ऊपर से नीचे की तरफ़ 10 से 15 मीटर के बीच जल में लाल रंग आत्मसात हो जाता है। इस लिये अगर कोई गो़ताखोर पानी में पच्चीस मीटर की गहराई तक जा पहुंचे और ज़ख़्मी हो जाए तो वह अपने खू़न में लाली नहीं देख पाएगा, क्योंकि लाल रंग की रौशनी उतनी गहराई तक नहीं पहुंच सकती। इसी प्रकार 30 से 50 मीटर तक की गहराई आते-आते नीली रौशनी भी पूरे तौर पर आत्मसात हो जाती है, आसमानी रौशनी 50 से 110 मीटर तक हरी रौशनी 100 से 200 मीटर तक पीली रौशनी 200 मीटर से कुछ ज़्यादा तक जब कि नारंजी और बैंगनी रोशनी इससे भी कुछ अघिक गहराई तक पहुंचते पहुंचते पूरे तौर पर विलीन हो जाती है। पानी में रंगों के इस प्रकार क्रमशः विलीन होने के कारण समुद्र भी परत दर परत अंधेरा करता चला जाता है, यानि अंधेरे का प्रकटीकरण भी रौशनी की परतों (layers) के रूप में होता है । 1000 मीटर से अधिक की गहराई में पूरा अंधेरा होता है।(संदर्भ: oceans एल्डर और प्रनिटा पृष्ठ 27)

    द्वितीय: धूप की किरणें बादलों में आत्मसात हो जाती हैं, जिसके परिणाम स्वरूप रौशनी की किरणें इधर उधर बिखेरती है। और इसी कारण से बादलों के नीचे अंधेरे की काली परत सी बन जाती है। यह अंधेरे की पहली परत है। जब रौशनी की किरणें समुद्र के तल से टकराती हैं तो वह समुद्री लहरों की परत से टकरा कर पलटती हैं और जगमगाने जैसा प्रभाव उत्पन्न करती हैं, अतः यह समुद्री लहरें जो रौशनी को प्रतिबिंबित करती हैं अंधेरा उत्पन करने का कारण बनती हैं। गै़र प्रतिबिंबित रौशनी, समुद्र की गहराईयों में समा जाती हैं, इसलिये समुद्र के दो भाग हो गये परत के विशेष लक्षण प्रकाश और तापमान हैं जब कि अंधेरा समुद्री गहराईयों का अनोखा लक्षण है इसके अलावा समुद्र के धरातल और या पानी की सतह को एक दूसरे से महत्वपूर्ण बनाने वाली वस्तु भी लहरें ही हैं। अंदरूनी मौजें समुद्र के गहरे पानी और गहरे जलकुण्ड का घेराव करती हैं क्योंकि गहरे पानी का वज़न अपने ऊपर (कम गहरे वाले) पानी के मुक़ाबले में ज़्यादा होता है। अंधेरे का साम्राज्य पानी के भीतरी हिस्से में होता है। इतनी गहराई में जहां तक मछलियों की नज़र भी नहीं पहुंच सकती जबकि प्रकाश का माध्यम स्वयं मछलियों का शरीर होता हैं इस बात को पवित्र क़ुरआन बहुत ही तर्कसंगत वाक्यों में बयान करते हुए कहता हैः

    उत्तर देंहटाएं
  22. PART 3


    उन अंधेरों के समान है, जो बहुत गहरे समुद्र की तह में हों, जिसे ऊपरी सतह की मौजों ने ढांप रखा हो ,,दूसरे शब्दों में, उन लहरों के ऊपर कई प्रकार की लहरें हैं यानि वह लहरें जो समुद्र की सतह पर पाई जाती हैं। इसी क्रम में पवित्र आयत का कथन है ‘‘फिर ऊपर से बादल छाये हुए हों, तात्पर्य कि अंधेरे हैं जो ऊपर की ओर परत दर परत हैं जैसी कि व्याख्या की गई है यह बादल परत दर परत वह रूकावटें हैं जो विभिन्न परतों पर रौशनी के विभन्न रंगों को आत्मासात करते हुए अंधेरे को व्यापक बनाती चली जाती हैं।

    प्रोफ़ेसर दुर्गा राव ने यह कहते हुए अपनी बात पूरी की ‘‘1400 वर्ष पूर्व कोई साधारण मानव इस बिंदु पर इतने विस्तार से विचार नहीं कर सकता था इसलिये यह ज्ञान अनिवार्य रूप से किसी विशेष प्राकृतिक माध्यम से ही आया प्रतीत होता है।

    ‘‘और वही है जिसने पानी से एक मानव पैदा किया, फिर उससे पीढ़ियां और ससुराल के दो पृथक कुल गोत्र (सिलसिले) चलाए। तेरा रब बड़े ही अधिकारों वाला है। ,,(अल-क़ुरआन: सूर:25 आयत ..54 )

    क्या यह सम्भव था कि चौदह सौ वर्ष पहले कोई भी इंसान यह अनुमान लगा सके कि हर एक जीव जन्तु पानी से ही अस्तित्व में आई है? इसके अलावा क्या यह सम्भव था कि अरब के रेगिस्तानों से सम्बंध रखने वाला कोई व्यक्ति ऐसा कोई अनुमान स्थापित कर लेता? वह भी ऐसे रेगिस्तानों का रहने वाला जहां पानी का हमेशा अभाव रहता हो।

    उत्तर देंहटाएं
  23. कुरआन और विज्ञान - वनस्पति विज्ञान (Botany)

    नर और मादा पौघे
    प्राचीन काल के मानवों को यह ज्ञान नहीं था कि पौधों में भी जीव जन्तुओं की तरह नर (पुरूष) मादा (महिला) तत्व होते हैं। अलबत्ता आधुनिक वनस्पति विज्ञान यह बताता है कि पौधे की प्रत्येक प्रजाति में नर एवं मादा लिंग होते हैं। यहां तक कि वह पौधे जो उभय लिंगी (unisexual) होते हैं उनमें भी नर और मादा की विशिष्टताएं शामिल होती हैं ।

    ‘‘और ऊपर से पानी बरसाया और फिर उसके द्वारा अलग õ अलग प्रकार की पैदावार (जोड़ा) निकाला‘‘(अल-क़ुरआन सूर 20: आयत 53)

    फलों में नर और मादा का अंतर

    ‘‘उसी ने हर प्रकार के फलों के जोड़े पैदा किये हैं। (अल. क़ुरआन सूर: 20 आयत . 53)

    उच्च स्तरीय पौधों: superior plants मे नस्लीय उत्पत्ति की आखिरी पैदावार और उनके फल:fruitsहोते हैं। फल से पहले फूल बनते हैं जिसमें नर और मादा ,,अंगों organs यानि पुंकेसर:stamens और डिम्ब:ovules होते है जब कोई pollen ज़रदाना: पराग यानि प्रजनक वीर्य कोंपलों से होता हुआ फूल की अवस्था तक पहुंचता है तभी वह फल में परिवर्तित होने के योग्य होता है यहां तक कि फल पक जाए और नयी नस्ल को जन्म देने वाले बीज बनने की अवस्था प्राप्त कर ले। इसलिये सारे फल इस बात का प्रमाण हैं कि पौधों में भी नर और मादा जीव होते हैं । फूल की नस्ल भी वनस्पति है। वनस्पति भी एक जीव है और इस सच्चाई को पवित्र क़ुरआन बहुत पहले बयान कर चुका है:
    ‘‘और हर वस्तु के हम ने जोडे़ बनाए हैं शायद कि तुम इससे सबक़ लो‘‘। (अल.क़ुरआन सूर: 51 आयत 49)
    पौधों के कुछ प्रकार अनुत्पादक:Non-fertilized फूलों से भी फल बन सकते हैं जिन्हें Porthenocarpic fruit पौरूष.-विहीन फल कहते हैं। ऐसे फलों मे केले, अनन्नास, इंजीर, नारंगी, और अंगूर आदि की कई नस्लें हैं। यद्यपि उन पौधों में प्रजनन-..चरित्र: sexual characterstics मौजूद होता है।

    प्रत्येक वस्तु को जोडों में बनाया गया है

    इस पवित्र आयत में प्रत्येक ‘वनस्पति‘ के जोडों में बनाए जाने की प्रमाणिकता बयान की गई है। मानवीय जीवों पाश्विक जीवों वानस्पतेय जीवों और फलों के अलावा बहुत सम्भव है कि यह पवित्र आयत उस बिजली की ओर भी संकेत कर रही हो जिस में नकारात्मक ऊर्जा: negetive charge वाले इलेक्ट्रॉनों और सकारात्मक ऊर्जाः positive वाले केंद्रों पर आधारित होते हैं इनके अलावा भी अन्य जोड़े हो सकते हैं।

    ‘‘पाक है वह ज़ात (अल्लाह) जिसने सारे प्राणियों के जोडे़ पैदा किये चाहे वह धरती के वनस्पतियों में से हो या स्वयं उनकी अपने जैविकीय नस्ल में से या उन वस्तुओं में से जिन्हें यह जानते तक नहीं।‘‘(अल-क़ुरआन सूर: 36 आयत 36)

    यहां अल्लाह फ़रमाता है कि हर चीज़ जोडों के रूप में पैदा की गई है जिनमें ऐसी वस्तुएं भी शामिल हैं जिन्हें आज का मानव नहीं जानता और हो सकता है कि आने वाले कल में उसकी खोज कर ले।

    उत्तर देंहटाएं
  24. आला हजरत


    आला हजरत बरेली नगर में हुए ऐसे व्यक्तित्व

    का नाम है ,जिसने ज्ञान और विद्वता

    का प्रकाश चारों ओर बिखेरा। आला हज़रत की
    पैदाइश 14 जून 1856 को बरेली में हुई थी। बचपन से ही वह कुदरती ज्ञान से युक्त थे। आपने चार वर्ष की आयु में ही कुरान मज़ीद नाज़िरा
    का अध्ययन पूर्ण कर लिया था। तेरह वर्ष की आयु में आला हज़रत ने अपनी
    शिक्षा पूर्ण की और दस्तीर फ़जीलत से नवाजे गए। आला हज़रत के बारे में यह कहा
    जाता है कि अल्लाह ताला ने अपने फज़ल से आपका सीना दुनिया के हर उलूम से भर
    दिया था। इन्होंने हर विषय पर किताबें लिखीं , जिनकी संख्या हजारों में
    हैं। आला हज़रत ने अपनी सम्पूर्ण जिंदगी बेवाओं और जरुरत मंदों की सेवा में
    व्यतीत की। आपके सारे कार्य सिर्फ अल्लाह ताला के लिए थे। आपको किसी की
    तारीफ़ से कोई लेना- देना नहीं था। आपने दो बार (सन् 1878 ई० तथा 1906 में)
    हज की यात्रा की।
    अपनी शिक्षाओं और उच्च विचारों के कारण आला हज़रत न केवल भारतवर्ष अपितु
    दूसरे देश में भी लोकप्रिय होने लगे। धीरे- धीरे आला हज़रत साहब के
    शिष्यों ओर अनुयायियों की संख्या बढ़ती जा रही थी।
    अक्टूबर सन् 1921 में आला हज़रत ने इस दुनिया से विदा ली। लेकिन
    वह दुनिया के लिए ईमान और धर्म का सन्देश देकर गए, जो आज तक लोगों के हृदय
    में प्रकाशवन है। आपने आम आदमी के लिए सन्देश दिया था - "ऐ लोगों तुम
    प्यारे मुस्तफा के भोले भेड़े हो। तुम्हारे चारों ओर भेड़िए हैं। वह चाहते
    हैं कि तुम्हें बहकाएं।

    तुम्हे फ़ितना में डाल दें। तुम्हें अपने साथ
    जहन्न्म में ले जाएं। इनसे बचो और दूर भागो। ये भेड़िए तुम्हारे ईमान की ताक
    में हैं। इनके हमलों से अपने ईमान को बचाओ। "आला हज़रत में बहुत सारी
    खूबियां एक साथ थीं। आप एक ही वक्त में मफुस्सिर, मोहद्दिस, मुफ्ती, कारी,
    हाफिज़, मुसननिफ ,अदीब, आलिम ,फाजिल, शैखतरीकत और मजुददि शरीयत थे।

    उत्तर देंहटाएं
  25. बेनामी teri maaa ki chut me khud land kyu nahi daal deta behen ke lode
    suaaar ki aulaaad ... baap ki gaand me ungli kar saale madarchod...chutiye... aur mohhamadd ke muh me bhi taatti karde

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

      हटाएं
  26. www.hindi.alquranbd.com - Read Quran in hindi online. In copyable text form. Search Quran using hindi word. Categorized ayat and more....

    उत्तर देंहटाएं
  27. If anly one want to know about modern science with vedas go agniveer chapter moder science with vedas .......
    Other wise use internet n internet gives u views of nasa n other scientist towords vedas...

    उत्तर देंहटाएं
  28. Shiv ling (penis) pooja शिव लिंग (लुल्ली) पूजा

    आईये पाठकगण आज शिवलिंग की सच्चाई जानते हैं हिन्दू धर्म ग्रंथों से…

    वेदों में शिव या शंकर के बारे मैं कोई प्रमाण नहीं है केवल रूद्र का वर्णन मिलता है
    शिव की जागेश्वर में तपस्या-उद्धरण कुमाऊं का इतिहास-श्री बद्रीद्त्त पाण्डे, पृष्ठ-१६४

    पश्चात, दक्ष प्रजापति ने कनखल के समीप यग्य किया। वहां शिव के अतिरिक्त सबको बुलाया, शिव की पत्नी काली बिना बुलाये पिता के यहां गई और वहां अपना और अपने पति का तिरस्कार देखकर रोष से भस्म हो गई। शिव ने कैलाश से यह बात जान दक्ष प्रजापति का यग्य विध्वस कर सबका नाश कर दिया और चिता की भस्म से शरीर को आच्छादित कर झांकर सैम ( जागेश्वर से करीब ५ कि०मी० गरुड़ाबांज नामक स्थान पर) में तपस्या की। झांकर सैम को तब भी देवदार वन से आच्छादित बताया गया है। झांकर सैम जागेश्वर पर्वत में है। कुमाऊं के इस वन में वशिष्ठ मुनि अपनी पत्नियों के साथ रहते थे। एक दिन स्त्रियों ने जंगल में कुशा और समिधा एकत्र करते हुये शिव को राख मले नग्नावस्था में तपस्या करते देखा, गले में सांप की माला थी, आंखें बंद, मौन धारण किये हुये, चित्त उनका काली के शोक से संतप्त था। स्त्रियां उनके सौन्दर्य को देखकर उनके चारों ओर एकत्र हो गईं, सप्तॠषियों की सातों स्त्रियां जब रात में ना लौटी तो वे प्रातःकाल उनको ढुंढने को गये, देखा तो शिव समाधि लिये बैठे है और स्त्रियां उनके चारों ओर बेहोश पड़ी हैं। ॠषियों ने यह विचार कर लिया कि शिव ने उनकी स्त्रियों की बेइज्जती की है और शिव को श्राप दिया कि “जिस इन्द्रिय यानी वस्तु से तुमने यह अनौचित्य किया है वह (लिंग) भूमि में गिर जायेगा” तब शिव ने कहा कि ” तुमने मुझे अकारण ही श्राप दिया है, लेकिन तुमने मुझे सशंकित अवस्था में पाया है, इसलिये तुम्हारे श्राप का मैं विरोध नहीं करुंगा, मेरा लिंग पृथ्वी में गिरेगा। तुम सातों सप्तर्षि तारों के रुप में आकाश में चमकोगे।” अतः शिव ने श्राप के अनुसार अपने लिंग को पृथ्वी में गिराया, सारी पृथ्वी लिंग से ढक गई, गंधर्व व देवताओं ने महादेव की तपस्या की और उन्होंने लिंग का नाम यागीश या यागीश्वर कहा और वे ऋषि सप्तर्षि कहलाये।
    शिव की जागेश्वर में तपस्या-उद्धरण कुमाऊं का इतिहास-श्री बद्रीद्त्त पाण्डे, पृष्ठ-१६४-१६५

    श्राप के कारण शिव का लिंग जमीन पर गिर गया और सारी पृथ्वी लिंग के भार से दबने लगी, तब ब्रह्मा, विष्णु, इन्द्र, सूर्य, चंद्र और अन्य देवगण जो जागेश्व्र में शिव की क्तुति कर रहे थे, अपना-अपना अंश और शक्तियां वहां छोड़्कर चले गयेआ तब देवताओं ने लिंग का आदि अन्त जानने का प्रयास किया, ब्रह्मा, विष्णु और कपिल मुनि भी इसका उत्तर न दे सके, विष्णु पाताल तक भी गये लेकिन उसका अंत न पा सके, तब विष्णु शिव के पास गये औए उनसे अनुनय विनय के बाद यह निश्चय हुआ कि विष्णु लिंग को सुदर्शन चक्र से काटें और उसे तमाम खंडों एस बांट दें। अंततः जागेश्वर में लिंग को काटा गया और उसे नौ खंडों में बांटा गया। १-हिमाद्रि खंड

    २- मानस खंड
    ३- केदार खंड
    ४- पाताल खंड – जहां नाग लोग लिंग की पूजा करते हैं।
    ५- कैलाश खंड
    ६- काशी खंड- जहां विश्वनाथ जी हैं, बनारस
    ७- रेवा खंड- जहां रेवा नदी है. जहां पर नारदेश्वर के रुप में लिंग पूजा होती है, शिवलिंग का नाम रामेश्वरम है।
    ८- ब्रह्मोत्तर खंड- जहां गोकर्णेश्वर महादेव हैं, कनारा जिला मुंबई।
    ९- नगर खंड- जिसमें उज्जैन नगरी है।

    शिवलिंग और पार्वतीभग की पूजा की उत्पत्ति
    1- दारू नाम का एक वन था , वहां के निवासियों की स्त्रियां उस वन में लकड़ी लेने गईं , महादेव शंकर जी नंगे कामियों की भांति वहां उन स्त्रियों के पास पहुंच गये ।यह देखकर कुछ स्त्रियां व्याकुल हो अपने-अपने आश्रमों में वापिस लौट आईं , परन्तु कुछ स्त्रियां उन्हें आलिंगन करने लगीं ।उसी समय वहां ऋषि लोग आ गये , महादेव जी को नंगी स्थिति में देखकर कहने लगे कि -‘‘हे वेद मार्ग को लुप्त करने वाले तुम इस वेद विरूद्ध काम को क्यों करते हो ?‘‘यह सुन शिवजी ने कुछ न कहा ,तब ऋषियों ने उन्हें श्राप दे दिया कि – ‘‘तुम्हारा यह लिंग कटकर पृथ्वी पर गिर पड़े‘‘उनके ऐसा कहते ही शिवजी का लिंग कट कर भूमि पर गिर पड़ा और आगे खड़ा हो अग्नि के समान जलने लगा , वह पृथ्वी पर जहां कहीं भी जाता जलता ही जाता था जिसके कारण सम्पूर्ण आकाश , पाताल और स्वर्गलोक में त्राहिमाम् मच गया , यह देख ऋषियों को बहुत दुख हुआ । इस स्थिति से निपटने के लिए ऋषि लोग ब्रह्मा जी के पास गये , उन्हें नमस्ते कर सब वृतान्त कहा , तब – ब्रह्मा जी ने कहा – आप लोग शिव के पास जाइये , शिवजी ने इन ऋषियों को अपनी शरण में आता हुआ देखकर बोले – हे ऋषि लोगों ! आप लोग पार्वती जी की शरण में जाइये । इस ज्योतिर्लिंग को पार्वती के सिवाय अन्य कोई धार

    उत्तर देंहटाएं