शुक्रवार, 24 अगस्त 2012

नमाज या मुहम्मद वंदना ?


विश्व में जितने भी धर्म और संप्रदाय हैं . उन सभी में उनकी मान्यताओं के अनुसार उपासना करने की विधियां और उपासना के दिन या समय ये किये गए हैं . लगभग सभी धर्मों का विश्वास है कि उपासना का उद्देश्य ईश्वर की अनुकम्पा प्राप्त करना . और आत्मिक शांति प्राप्त होना है .यद्यपि सभी धर्म के लोग अपने रीति रिवाज के अनुसार ईश्वर ही की उपासना करते हैं . लेकिन मुसलमान उनको मुशरिक या काफ़िर समझते है .इसके पीछे यह कारण है कि मुसलमानों का दावा है कि वह केवल एकही अल्लाह को मानते है . इस सिद्धांत को " तौहीद " या एकेश्वरवाद (Monotheism )भी कहा जाता है .तौहीद के सिद्धांत के अनुसार मुसलमान अल्लाह के अतिरिक्त किसी व्यक्ति .की उपासना नहीं कर सकते और उसकी वंदना कर सकते हैं .अरबी में उपासना ( Worship ) "इबादत " शब्द है . और इबादत करने वाले को " आबिद "कहा जाता है .कुरान में अल्लाह की इबादत करने के लिए जो तरीके बताये गए हैं , उनमे नमाज और तस्बीह अधिक प्रसिद्ध हैं .
इस विषय को और स्पष्ट करने के लिए हमें कुरान और हदीसों में प्रयुक्त कुछ मुख्य पारिभाषिक शब्दों के अर्थ समझना जरुरी है . जो मक्तबा अल हसनात रामपुर से प्रकाशित कुरान के हिंदी अनुवाद के अंत में दिए गए हैं.
1 - नमाज या सलात. नमाजنماز एक फारसी शब्द है . इसका अर्थ नमस्कार या प्रणाम करना होता है . अरबी में नमाज के लिए कुरान में और हदीसों " सलवात " शब्द प्रयुक्त किया गया है . जिसे " सलात صلوات" बोला जाता है . इसका अर्थ .उपासना करना , किसी के आगे गिड़ गिडाना,या झुकना होता है ( पेज 1234 )
2 - तसबीह  (  تسبيح ). यह अरबी भाषा के मूल शब्द " सबह سبح" से बना है . इसका अर्थ याद करना . जपना . तारीफ करना .और किसी की महानता के आगे झुक जाना . या उसके आगे बिछ जाना होता है ( पेज 1232 )आम तौर पर जप करने वाली माला को भी तसबीह कहा जाता है . और इस्लामी माला में सौ (100 ) मनके होते हैं 
1-नमाज या सलात किसके लिए 
कुरान के अनुसार नमाज या सलात सिर्फ अल्लाह के लिए होनी चाहिए .क्योंकि अल्लाह सब का स्वामी है .जैसा कि इन आयतों में कहा है
" कह दो मेरी सलात ( नमाज ) मेरी कुर्बानी ,मेरा जीना .मेरा मरना केवल अल्लाह के लिए है . जो सारे संसार का रब है " सूरा -अनआम 6 :163 
कुरान के अनुसार नमाज पढ़ना भी एक प्रकार की इबादत है . जैसा कि इस आयत में कहा गया है 
" बेशक अल्लाह मेरा भी रब है और तुम्हारा भी रब है ,तो उसी की इबादत करो. यही सीधा रास्ता है "सूरा -आले इमरान 3 :51 
2-तस्बीह या जाप 
इस्लाम के पहले भी ईसाइयों .यहूदियों . और पारसियों में माला से जप करने , और सवेरे शाम ईश्वर के नाम का स्मरण करने की परंपरा थी .आज भी ईसाई पादरी जिस माला से जप करते हैं उसे " रोजरी ( Rosary "कहा जाता है . यही रिवाज इस्लाम ने अपना लिया है . जाप को ही तस्बीह कहा गया है . और कुरान में मुसलमानों को दौनों समय तस्बीह करने को कहा गया है .
हे मुहम्मद अपने रब की तस्बीह करो , सूर्य उदय होने के पहले और उसके अस्त होने से रात की घड़ियों में भी " सूरा - ता हा 20 :130 
" तुम अपने रब को बहुत ज्यादा याद करो .और सायंकाल और प्रातः उसी की तस्बीह करते रहो " सूरा -आले इमरान 3 :41 
" और जो लोग अपने रब को प्रातः काल और संध्या के समय पुकारते हैं . और चाहते हैं कि उसकी प्रसन्नता प्राप्त हो जाये . तो तुम ऐसे लोगों नहीं भगाओ " 
सूरा-अनआम 6 :52 
रसूल की बेटी फातिमा सुबह शाम तस्बीह ( माला ) लेकर अल्लाह के नामों का स्मरण करती थी .और माला में अल्लाहू अकबर 34 बार . अलहम्दु लिल्लाह 33 बार और सुबहान अल्लाह 33 बार नामों का जाप करती थी .
सही मुस्लिम -किताब 35 हदीस 6577 
" हमने तो पहाड़ों को उन लोगों के साथ लगा दिया है कि वे भी संध्या के समय और प्रातः काल " तस्बीह " करते रहें " सूरा-साद 38 :18 
3-अल्लाह से सौदेबाजी 
भले मुसलमान मुहम्मद को अनपढ़ कहते रहें , लेकिन वह एक चालाक चतुर सौदेबाज था . उसने बचपन में ही व्यापर और मोलभाव करने की तरकीब सीख ली थी .यही नहीं उसे लोगों की मुर्खता का फायदा उठाने की कला प्राप्त कर ली थी .दिखने के लिए वह लोगों से केवल अल्लाह की इबादत करने की शिक्षा देता था . लेकिन उसकी इच्छा थी कि लोग उसकी और उसकी संतानों की इबादत करते रहें .इसलिए उसने मुसलमानों को सदा के लिए अपना आभारी बनाने के लिए कल्पित कहानी सुना डाली . जिसमे उसने दावा किया कि वह सातवें आसमान पर अल्लाह से मिलने लिए गया था .और अल्लाह ने मुझे लिख कर दिन में पांच पर नमाज पढ़ने का आदेश दिया है .
4-पांच नमाजों का हुक्म 
अबू जर ने कहा कि रसूल ने कहा कि एक दिन मैं अपने घर के अन्दर था , तभी अचानक मेरे घर की छत खोल कर जिब्रईल अन्दर आगया . और उसने मेरा सीना खोल कर मेरे दिल को जमजम के पानी से धोकर साफ किया . फिर एक सोने के बर्तन में रखा हुआ ज्ञान मेरे दिल में भर दिया . फिर मुझे अपने साथ जन्नत ले गया .
और जब वहां के दरबान ने पूछा कि तुम्हारे साथ यह कौन है , तो जिब्राइल ने बताया यह मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं. और दरबान ने जन्नत का द्वार खोल दिया . जब मैं अन्दर गया तो देखा कि दायीं तरफ जन्नत के लोग थे और अगले हिस्से में आदम ,इदरीस , मूसा , ईसा ,और इब्राहिम थे . जिब्राइल ने मेरा सबाहे परिचय कराया और सबने मुझे सलाम किया . फिर जब मैं और आगे गया तो एक जगह से कलम से लिखने आवाज निकल रही थी . जिब्राइल ने बताया कि अल्लाह मुसलमानों के लिए रोज 50 नमाजें पढ़ने का हुक्म लिख रहा है . फिर अल्लाह ने वही आदेश लिख कर मेरे हाथों में दे दिया .जैसे ही वापिस आ रहा था . रस्ते में मूसा मिल गए .मूसा ने कहा कि 50 नमाजें तो बहुत जादा हैं . तुम अल्लाह से कुछ कम कराओ . तब अल्लाह ने नमाजों कि संख्या आधी कर दी . और जब मैं लौटने लगा तो मूसा ने कहा यह भी बहुत जादा है . तुम फिर अल्लाह से और कम करने को कहो . फिर अल्लाह ने उसकी संख्या आधी कर दी .इसी तरह फिर से मूसा ने कहा कि अल्लाह से और कम करने को कहा . जब मैं तीसरी बार अल्लाह के पास गया , और नमाजों की संख्या कम करने को कहा तो अल्लाह ने कहा चलो हम सिर्फ पांच नमाजों का हुक्म देते हैं . लेकिन अब इसमे कोई कमी नहीं हो सकती.यह सुनते ही मैं मक्का वापिस आ गया . इस तरह मैंने अपनी उम्मत के लोगों को नमाजों के भारी बोझ से बचा लिया 
बुखारी -जिल्द 1 किताब 8 हदीस 345 
5-दुरूद 
मुहम्मद ने लोगों पर अपना अहसान जताकर नमाजों में अपनी और अपने परिवार की इबादत की तरकीब निकाली दुरुद कहते हैं
यह एक प्रकार प्रार्थना है . जो नमाज केसाथ पढ़ी जाती है . कुरान में " दुरुद  درود‎ " शब्द नहीं मिलता है . क्योंकि यह फारसी शब्द है .अरबी में दुरुद का वही अर्थ है जो नमाज या सलात"(صلوات  "का होता है .(corresponding to "durood" when used as a general term, is simply: "salawât" )दुरुद फारसी के दो शब्दों " दर " यानि द्वार और " वूद " यानि वंदन से बना है अर्थात किसी के द्वार पर जाकर उसकी वंदना करना . इसी लिए दुरुद को " सलात अलन्नबी الصلاة على النبي " भी कहते हैं .वास्तव में दुरुद के माध्यम से अल्लाह के द्वारा मुहम्मद की वंदना करवाई जाती है .दुरुद और उसका अर्थ देखिये .

  "अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मदिन व् अला आले मुहम्मदिन कमा   सल्लैता अला इब्राहिम व आले इब्राहीम . इन्नक हमीदुन मजीद .
"अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिन व् अला आले मुहम्मदिन कमा बारिकता अला इब्राहिम व आले इब्राहीम . इन्नक हमीदुन मजीद 
अर्थ - हे अल्लाह मुहम्मद की वंदना कर , और उसकी संतानों की . जैसे तूने इब्राहीम और उसकी संतान की ,बेशक तू बहुत महान है . हे अल्लाह तू मुहम्मद और उसकी संतान को संपन्न कर जैसे तूने इब्राहीम की संतान को किया था . बेशक तू बड़ा महान है ."
आज जब भी मुसलमान नमाज के साथ दरूद पढ़ते हैं तो वह परोक्ष रूप से मुहम्मद की वंदना करते हैं . यही नहीं अल्लाह से भी मुहम्मद पर सलात भेजने ( वंदना करने ) का आग्रह करते हैं .और इसके पक्ष में कुरान की यह आयत बताते हैं
"निश्चय ही अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर सलात भेजते रहते हैं . और हे लोगो जो ईमान लाये हो तुम भी नबी पर सलात भेजा करो '
सूरा -अहजाब 33 :56 
6-सिर्फ दो नमाजों का आदेश 
यदि मुसलमान कुरान को अल्लाह की किताब मानते है . तो कुरान में दिन भर में केवल दो बार ही नमाज पढ़ने का हुक्म मिलता है .दिन में पांच बार नमाज पढ़ने नियम मुहम्मद साहब की दिमाग की उपज है .दो बार नमाज पढ़ने आदेश कुरान की इन आयतों में मिलता है .
"और दिन के दौनों समय नमाज कायम करो . कुछ दिन के हिस्से में और कुछ रात के हिस्से में "
सूरा -हूद 11 :114 
"नमाज कायम करो , जब सूरज ढल जाये . और तब से अँधेरा होने तक " सूरा - बनी इस्राइल 17 :78

यद्यपि मुल्ले मौलवी अच्छी तरह से जानते हैं कि कुरान में सवेरे और संध्या के बाद केवल दो ही बार नमाज पढ़ने का स्पष्ट आदेश दिया गया है . लेकिन वह बड़ी चालाकी से " सलात यानि नमाज ' और तस्बीह यानि जप " शब्दों में घालमेल करके मुहम्मद कि वंदना करते है .और अल्लाह से मुहम्मद और उसकी संतानों की रक्षा और सम्पनता के लिए दुआ करते है .
लेकिन इतिहास से साबित होचुका है कि अपने अत्याचारों और अपराधो के कारण मुहम्मद साहब और उनके वंशजों की निर्मम हत्याएं कर दी गयी थी . मुसलमानों का दुरूद भी उनको नहीं बचा सका .
यदि देश की वंदना करना पाप है तो मुहम्मद की वंदना महापाप है .


http://free-minds.org/forum/index.php?topic=9603386.10

शुक्रवार, 10 अगस्त 2012

ऐसे अल्लाह को क्यों मानें ?


किसी के बारे में सुनी सुनाई बातों के आधार पर , और गहराई से जानकारी प्राप्त किये बिना ही विश्वास करना घातक होता है . और जो भी व्यक्ति ऐसी भूल करता है ,उसे बाद में अवश्य ही पछताना पड़ता है .यह बात कहना इसलिए जरूरी हो गयी है , क्योंकि आजकल विदेशी धन से पोषित इस्लाम के कुछ ऐसे प्रचारक पैदा हो गए हैं ,जो अपने कुतर्कों से मुहम्मद को अवतार , कुरान को ईश्वरीय पुस्तक और अपने अल्लाह को सबका ईश्वर साबित करने का कुप्रयास करते रहते हैं .इनका एकमात्र उद्देश्य हिन्दुओं को गुमराह करके उनका धर्म परिवर्तन कराना है . ताकि उनके द्वारा भारत में आतंक फैला कर इस्लामी राज्य की स्थापना की जा सके .इसके लिए यह लोग अपने अल्लाह को सर्वशक्तिमान , सर्वज्ञ ,और समर्थ बताते हैं , और कुरान का हवाला देते हैं जैसे ,
अल्लाह से न तो धरती के भीतर की कोई चीज छुपी है , और न आकाश के अन्दर की कोई चीज छुपी है " सूरा -आले इमरान 3 : 5 
अल्लाह को आकाशों और धरती में छुपी हुई बातों का सारा भेद मालूम है " सूरा -अल कहफ़ 18 :26 
धरती और आकाश के एक एक कण के बारे में कोई भी बात अल्लाह से छुपी नहीं है " सूरा-सबा 34 :3 
अल्लाह का ज्ञान हरेक विषय को घेरे हुए है " सूरा -अत तलाक 65 :12 

लेकिन यह कुरान की आयतें लोगों को दिखने के लिए हैं , यदि हम कुरान को व्याकरण सहित ध्यान से पढ़ें तो पता चलेगा कि अल्लाह को ईश्वर समझना बहुत बड़ी भूल होगी .क्योंकि हरेक विषय में उसका ज्ञान अधकचरा और सत्य के विपरीत है ,और जो भी अल्लाह की गप्पों को नहीं मानता था अल्लाह उसे डराता रहता था.और यही काम उसका रसूल भी करता था , कुछ नमूने देखिये ,

1-तारों का ज्ञान 
और अल्लाह " शेअरा Sirius " नामके एक तारे का रब है " सूरा -अन नज्म 53 : 49 
वास्तव में शेअरاشعرى   नामक तारा एक नहीं बल्कि युग्म ( double star.)तारा है , जो नंगी आँखों से एक दिखता है यह दौनों तारे एक दुसरे का चक्कर लगाते हैं , वैज्ञानिकों ने इनके नाम DA1 और DA2 रख दिए हैं .इनको binary star भी कहा जाता है , पृथ्वी से इनकी दूरी  8.6 प्रकाश वर्ष मील है
2-आकाश एक छत है 
और हमने आकाश को एक मजबूत छत बनाया है "सूरा -अल अम्बिया 21 :32 
(इस आयत में आकाश को अरबी में " सकफ سقف" कहा गया है , जिसका अर्थ ऐसी ठोस छत Roof होता है ,अभेद्य impenetrableहो .)

3-बादलों की गर्जना फ़रिश्ते हैं 
और बादलों की गरज और फ़रिश्ते भय के कारण उसकी प्रसंशा के साथ तस्बीह करते रहते हैं .और वह कड़कती बिजलियाँ जिस पर चाहे गिरा देता है " 
सूरा - राअद 13 :13 
4आकाश धरती में धंस सकता है 
यह जो इनके आगे और पीछे जो आकाश और धरती है उसे नहीं देखते .यदि हम चाहें तो आकाश को जमीन के अन्दर धंसा देंगे " 
सूरा -सबा 34 :9 
(इस आयत में " नख्सिफنخسف" शब्द है जिसका अर्थ We (could) cause to swallow होता है यानि अल्लाह आसमान को पृथ्वी से निगलवा देगा .)
5-आकाश से दैत्य निकलेगा 
और जो लोग हमारी बातों पर विश्वास नहीं करेंगे हम उनके लिए जमीन से एक भयानक पशु निकालेंगे , जो उन से बातें करेगा 
.सूरा- नम्ल 27 : 82 
(इस आयत में उस कल्पित जानवर beast को दाब्बह (دابّة)कहा गया है , इसका अर्थ है जब अल्लाह अपनी बात लोगों नहीं समझा पाया तो कल्पित जानवर से डराने लगा )
6-अल्लाह ध्रुव प्रदेश से अनभिज्ञ है 
और खाओ पियो यहाँ तक कि प्रभात की सफ़ेद धारी तुम्हें रात की काली धारी से स्पष्ट अलग दिखाई देने लगे " सूरा - बकरा 2 : 187 
(यह आयत रोजा रखने के बारे में है . लेकिन अल्लाह को पृथ्वी के ध्रुव प्रदेशों polar regions और वहां के रहने वाले एस्किमो Eskimosलोगों के बारे में कोई ज्ञान नहीं था . क्योंकि वहां पर छः महीने रात और छः महीने दिन रहता है .इस से सिद्ध होता है की कुरान सिर्फ अरब के लिए बनी है , सम्पूर्ण विश्व के लिए नही .और अल्लाह का भूगोल के बारे ज्ञान शून्य है .)
7-जन्नत कितनी दूर है 
अब्बास इब्न अबी मुत्तलिब ने कहा की हम लोग बतहा नाम की जगह पर रसूल के साथ बातें कर रहे थे . तभी एक बादल ऊपर से गुजरा . रसूल ने पूछा की क्या तुम्हें पता है कि जमीन से जन्नत की कितनी दूरी है .हमने कहा कि आप ही बता दीजिये . रसूल के कहा कि यहाँ से जन्नत की दूरी इकहत्तर , बहत्तर , या तिहत्तर साल की दूरी है .वहां ऊपर सातवाँ आसमान है . और नीचे एक समुद्र है .और जिसके किनारे आठ पहाड़ी बकरे रहते हैं .और जिनके खुरों के बीच की जगह में जन्नत है , वहीँ अल्लाह का निवास है .अबू दाऊद- किताब 40 हदीस 4705 
8-नवजात शिशु क्यों रोते हैं 
अबू हुरैरा ने कहा की रसूल ने कहा है ,पैदा होते ही बच्चा इसलिए रोता है . क्योंकि शैतान उसके शरीर में उंगली डालता है " 
बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 506 
9-शैतान कान में मूत देता है 
अब्दुल्लाह ने कहा की रसूल ने बताया है , यदि कोई देर तक सोता है तो , शैतान उसके कानों में पेशाब कर देता है " 
बुखारी - जिल्द 2 किताब 21 हदीस 245 

10-मुर्गों की बांग और गधे का रेंकना 
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा है यदि तुम मुर्गे की बांग की आवाज सुनो तो समझो तुमने फ़रिश्ते के दर्शन कर लिए और अगर तुम गधे के रेंकने की आवाज सुनो तो इसका मतलब है तुमने शैतान को देखा है " 
बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 552 और सही मुस्लिम - किताब 35 हदीस 6581 

इन सभी प्रमाणों से सिद्ध होता है कि न तो अल्लाह को अंतरिक्ष यानि आकाश के बारे में कोई ज्ञान है और न पृथ्वी के बारे में कोई ज्ञान है .लेकिन इस बात में कोई शक नहीं है कि अल्लाह जो भी रहा होगा वह लोगों को कल्पित चीजों से डराने , और बहकाने में उस्ताद रहा होगा .और अल्लाह का तथाकथित रसूल भी उस से दो हाथ आगे था .
बताइए कोई ऐसे अल्लाह को क्यों मानेगा ?मेरा तो यही जवाब है .आप बताइए . 

" सूरदास प्रभु , कामधेनु तजि बकरी कौन दुहावै "


http://wikiislam.net/wiki/Scientific_Errors_in_the_Hadith

बुधवार, 8 अगस्त 2012

अल्लाह सवालों से डरता है !


मनोविज्ञान में सवाल करना . और प्रश्नों के द्वारा अपनी जिज्ञासा शांत करना मनुष्य का स्वाभाविक गुण बताया गया है . एक बालक जैसे ही बोलना सीख लेता है वह अपने आसपास की चीजों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए अपने माता पिता और बड़े लोगों से सवाल करने लगता है . क्योंकि सवाल करने से उसके ज्ञान में वृद्धि होती रहती है .प्रश्न करना मनुष्य का अधिकार है . इसीलिए अदालतों में भी पख विपक्ष से सवाल करने के बाद ही सही निर्णय हो पाता है .भारतीय परंपरा में शाश्त्रर्थ में प्रश्न प्रतिप्रश्न के द्वारा ही सत्य और असत्य का निर्णय किया जाता है . सवालों और आलोचना से वही भड़क जाते हैं अपना भंडा फूटने से घबराते है,
लेकिन इस्लाम विश्व का एकमात्र असहिष्णु ,उग्र ,तर्कहीन विचार है , जो किसी प्रकार का सवाल करने और आलोचना को बिलकुल बर्दाश्त नहीं करता .इसीलिए . देखा गया है कि जब भी मुसलमानों से कुरान , इस्लाम , मुहम्मद जैसे विषय पर पूछा जाता है तो वह एकदम भड़क जाते हैं . और उत्तर देने कि जगह अश्लील गालियाँ बकने लगते है .वास्तव में उनको मुहम्मद ने यही सिखाया है .जो इस हदीस से पाता चलती है ,
1-पूछने वालों को फटकारो 
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने हमें सिखाया है कि जब कुछ लोग तुम्हारे पास इस्लाम के बारे में तरह के सवाल पूछें जैसे अल्लाह ने खुद को सबका मालिक कैसे बना लिया . और हम कैसे मानें की अल्लाह सब कुछ जानता है . तो तुम चुपचाप खिसक जाना . लेकिन जब कोई पूछे कि बताओ अल्लाह को किसने बनाया तो तुम उनको फटकार कर झिड़क देना " 
बुखारी - जिल्द 4 किताब 54 हदीस 496 
2-इस्लाम आधार भय है 
इस्लाम समझाने की जगह डराने में विश्वास रखता है . इतिहास गवाह है कि इस्लाम तलवार के जोर से फैला है .क्योंकि बुद्धिमान व्यक्ति दर के बिन कभी इस्लाम स्वीकार नहीं करेगा .क्योंकि केवल डर ही इस्लाम का आधार है ,और इस्लाम का यही उद्देश्य है कि लोग अंधे होकर बिना जाने समझे मुसलमान बन जाएँ .जैसा इस आयत में कहा है ,
जो लोग गैब की बातों को जाने बिना ही अल्लाह से डरते हैं ,उनके लिए बड़ा बदला दिया जायेगा "
 सूरा -मुल्क 67 :12 
नोट- गैब की परिभाषा इस्लाम में इस प्रकार दी गयी है ".गैब الغيب "का अर्थ परोक्ष , छुपा हुआ , जो चीज हमसे गायब हो . जिसके बारे में हमें नहीं बताया गया हो ,जिसके बारे में निश्चित ज्ञान नहीं हो ,जो रहस्य पूर्ण हो , और किसके बारे में जानने और समझने की आवश्यकता नहीं हो "कुरान मजीद. हिंदी अनुवाद मकतबा अल हसनात रामपुर यू .पी . पेज 1229
3-कुरान के बारे में शंका 
क्योंकि लोगों का कहना है कि इस ( मुहम्मद ) ने कुरान खुद ही गढ़ डाली है " सूरा यूनुस 10 :38 
कुरान को सुन कर लोगों ने कहा कि यह अल्लाह की किताब नहीं हो सकती है . यह मुहम्मद ने खुद ही बना डाली है " सूरा - हूद 11 : 13 
4-वह कुरान कौनसी है ?
वह अल्लाह की किताब है .जिसमे शक नहीं करो " सूरा- बकरा 2 :2 
 ( -इस आयत में कुरान के लिए " जालिकल किताबذلك الكتاب " कहा है . जिसका अर्थ " वह किताब That Book " होता है . अर्थात असली कुरान कोई और है . यदि वर्तमान कुरान असली होती तो अरबी में " हाजल किताबهذا الكتاب" यानि यह किताब This Book लिखा गया होता .इसी कारन से लोग कुरान को मुहम्मद की रचना मानते थे .)
वह कुरान महान है . जो पट्टियों में सुरक्षित रखा है " सूरा -बुरुज 85 :21 और 22 
( "वल   ' हुव ' कुरानुं मजीद "इस आयत में कुरान के लिए अरबी में ' हुव ' शब्द आया है ,जिसका अर्थ He होता है .इस से संकेत मिलाता है कि कुरान किसी आदमी ने बनायी थी .और कहीं छुपा रखी थी )
5-बिना समझे ईमान लाओ 

और जो लोग बिना समझे ईमान लाते हैं , और नमाज पढ़ने लगते हैं .वही सफलता प्राप्त करने वाले होंगे " सूरा - बकरा 2 :2 और 5 
6-मुहम्मद का सवालों से भय 
यदि कुरान को ध्यानसे पढ़ जाये तो पाता चलता है की उसमे हर प्रकार की हजारों गलतियाँ है . क्योंकि मुहम्मद अधिकाँश बातें यहूदी और ईसाई धर्म की किताबों से चुरायी थी .जिनका कुरान से कोई तालमेल नहीं था .और जब कोई उनके बारे में सवाल करता था तो मुहम्मद अपनी पोल खुल जाने से डर जाता था .
हे ईमान वालो तुम दीन के बारे में ऐसे ऐसे सवाल नहीं करो , की यदि उनका रहस्य खुल जाये तो तुम्हे बुरा लगेगा " सूरा -अल मायदा 5 :10
अल्लाह जो कुछ भी करता है , कैसा है , इसके बारे में कोई पूछताछ नहीं होना चाहिए " 
सूरा अल अम्बिया 21 :23 
7-आयतों में गलतियाँ नहीं निकालो 
और जो लोग इन आयतों में गलतियाँ निकालकर नीचा दिखाने का प्रयास करेंगे . तो उनके लिए बहुत ही बड़ी यातना है . जो दुखदायी होगी "
सूरा -सबा 34 :5 
8-पूछने से पोल खुल जाएगी 
क्योंकि इसके पहले भी कुछ लोगों ने ऐसे ही सवाल किये थे ,और जब उनको असलियत पता चली ,तो वह इस्लाम से इंकार करने वाले बन गए थे " सूरा -मायदा 5 :102 

यही कारण है जब भी कुरान या इस्लाम के दूसरे विषयों पर कोई सवाल किया जाता है .या उनकी किताबों में गलती बताई जाती है .तो वह निरुत्तर हो जाते हैं . फिर झुंझला कर अश्लील गालियाँ देने लगते हैं.क्योंकि उनके पास जवाब देने के लिए कुछ नहीं होता .और कुछ तो ऐसे भी हैं जो फर्जी नामों से धमकियां भी देते रहते हैं .इसीलिए मुहम्मद शाश्त्रार्थ की जगह आतंक का प्रयोग करता था .यदि इस्लाम में सच्चाई होती तो आतंक की जरुरत नहीं होती .बौद्ध धर्म बिना किसी हिंसा के सम्पूर्ण एशिया में फ़ैल गया था .
इस्लाम एक मुहम्मदी आतंकवाद है .इसका भंडा फोड़ना जरुरी है .

http://mostintolerantreligion.com/2011/12/10/can-we-question-allah-islam/

मंगलवार, 7 अगस्त 2012

कुरान में अल्लाह का जानवर !


मुहम्मद साहब विश्व में इस्लाम के बहाने अरबी साम्राज्य स्थापित करना चाहते .और किसी न किसी तरकीब से लोगों को मुसलमान बनाना चाहते थे .वह चाहती थे कि उनके जीवन में ही सारी दुनिया मुसलमान बन जाये .इसलिए उन्होंने लोगों को समझाने , सुधारने ,और उपदेश देने की जगह धमकाने और डराने का तरीका पसंद किया था. आज भी मुसलमान यही कर रहे हैं .
1-मुहम्मद साहब क्यों डराते थे 
इसका कारण यह है कि न तो मुहम्मद साहब एक प्रभावशाली वक्ता और उपदेशक थे .और न वह लोगों को समझाने में समय बर्बाद करना चाहते थे .और उस समय उनके सभी साथी जाहिल और थे .क्योंकि उस समय मक्का के लोग काफिलों के साथ अपने ऊंटों से एक शहर से दुसरे शहर तक सामान पंहुचाया करते थे.और वहां से सुनी हुई जिन्नों , परियों , भूतों और अजीब अजीब बातों कि कहानिया घर आकर सुनाया करते थे .और अरब के मुर्ख उन कहानियों को सच मान लेते थे .मुहम्मद साहब ने सोचा कि अगर मक्का के लोगों को अल्लाह के नाम से तरह तरह के कल्पित स्थानों जैसे जहन्नम और किसी भयानक प्राणी से डराया जाये तो वह मुसलमान बन जायेंगे . क्योंकि मक्का के लोग कुरान की बेतुकी , ऊलजलूल बातों का मजाक उड़ाते थे .
2-डराने का उपाय 
जब मुहम्मद साहब को पता चला कि लोग उनकी कल्पित जहन्नम की सजाओं ,वहां होने वाले कष्टों की बातों पर विश्वास नहीं कर रहे हैं . और कुरान को मुहम्मद की रचना बता रहे हैं . तो मुहम्मद साहब ने एक चाल चली . और सोचा कि लोगों को किसी ऐसे भयानक जानवर से डराया जाये जिसे न तो किसी ने देखा हो .और न उसके बारे में सुना हो .फिर उस जानवर ( Beast ) कि बात को अल्लाह का वचन बताकर कुरान में लिखा दिया .
अल्लाह उनके लिए जमीन से एक ऐसा जानवर निकलेगा ,जो उनको सबक सिखाएगा , जो लोग हमारी आयतों पर विश्वास नहीं करते " 
सूरा-अन नम्ल 27 :82 

"وَإِذَا وَقَعَ الْقَوْلُ عَلَيْهِمْ أَخْرَجْنَا لَهُمْ دَابَّةً مِنَ الْأَرْضِ تُكَلِّمُهُمْ أَنَّ النَّاسَ كَانُوا بِآيَاتِنَا لَا يُوقِنُونَ  "

We shall bring forth unto them out of the earth a creature which will tell them that mankind had no real faith in Our messages. 27:82
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा है . कि अगर लोग अबभी ईमान नहीं लायेंगे तो . जल्द ही अल्लाह जमीन के अन्दर से एक ऐसा भयानक जानवर निकल देगा . जिसे पहले किसी ने नहीं देखा होगा .वह बहार निकलते ही काफिरों का बड़े पैमाने पर संहार करेगा " 
सही मुस्लिम- किताब 41 हदीस 7040 और 7023 

3-अल्लाह का जानवर कैसा होगा 
यद्यपि कुरान में अल्लाह के द्वारा जमीन से निकलने वाले कल्पित जानवर का कोई नाम नहीं दिया है . और उसे अरबी में " दाब्बह " कहा है . लेकिन हदीसों में उस जानवर के बारे में जो विवरण दिए गए हैं , वह इस प्रकार हैं ,
1 .उसकी ऊंचाई लगभग सौ हाथ से अधिक होगी . 2 .सर बैल के जैसा होगा 3 .आँखें सूअर जैसी होंगी 4 .कान हाथी जैसे होंगे . 5 . सर पर दो बड़े सींग होंगे 6 .शुतुर मुर्ग जैसी गर्दन होगी 7 .सीना शेर जैसा होगा 8 . खाल का रंग चीते जैसा होगा 9 .ऊंट जैसे लम्बे पैर होंगे 10 .वह हाथों में मूसा का कपड़ा बांधेगा और सुलेमान की अंगूठी पहने हुए होगा .
फिर वह सारी पृथ्वी का चक्कर लगाएगा और जो लोग इस्लाम कबूल नहीं करंगे उनका भेजा निकाल देगा "
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने उस जानवर की यह निशानियाँ बताई है " इब्न माजा-हदीस 4066 
अगर कोई कुरान के इस कल्पित जानवर के बारे में सोचेंगे कि शायद ही कोई ऐसा जानवर होगा जिनके विभिन्न अंगों को मिलाकर कुरान का जानवर बना दिया है . इसे और स्पष्ट करने के लिए एक विडिओ दिया जा रहा है ,

What do Muslims believe? #18: Earth Beast

http://www.youtube.com/watch?v=PAAOoZeM9-g

इस विडिओ में कम्प्यूटर से इस हदीस में दिए गए सभी जानवरों के अंगों को मिलाकर कुरान में दिए गए अल्लाह के जानवर को बनाने का प्रयास किया है . ताकि लोग अल्लाह की अक्ल और मुहम्मद द्वारा लोगों को डराने की तरकीब का नमूना देख सकें .

4-चमत्कारी जानवर 
जब मुहम्मद साहब को लगा कि शायद इतना बड़ा सफ़ेद झूठ कहने पर झूठ में कुछ कमी रह गयी है , तो उन्होंने उस जानवर की शक्ति के बारे में एक महाझूठ सुना डाला . ताकि अरब के मूर्ख अंध विश्वासी पूरी तरह से डर कर इस्लाम के जाल में फंस जाएँ . हदीस में कहा ,
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया है . जब वह जानवर जमीन ने निकलेगा तो सूरज जिस जगह से निकलता है , उस जगह डूबने लगेगा "

"ا طُلُوعُ الشَّمْسِ مِنْ مَغْرِبِهَا وَالدَّجَّالُ وَدَابَّةُ الأَرْضِ ‏"‏ ‏  "

सही मुस्लिम - किताब अल इमान किताब 1 हदीस 0296 

इस लेख को पूरी तरह से पढ़ने के बाद हमें यह सोचना पड़ेगा कि हम क्या करें ,अल्लाह कि बुद्धि पर रोयें , या मुहम्मद की मुर्खता भरी चतुराई पर हंसें .या मुसलमानों के ऐसे इमान पर अफसोस करें उनको गुमराह कर रहा है .जिसके कारण वह सत्य को स्वीकार नहीं करते और जो भी उनके ऐसे झूटों का भंडा फोड़ता है उसे गालियाँ देते हैं हम तो इसी निष्कर्ष पर पहुंचे है कि,

" जोभी कुरान और हदीसों पर विश्वास करता है , उसके इन्हीं जानवरों का अंश होगा "


http://irrationalislam.wordpress.com/2011/06/24/islams-beast-of-the-earth/#more-99

बुधवार, 1 अगस्त 2012

मस्जिद में औरतों पर पाबन्दी क्यों ?


विश्व के जितने भी बड़े धर्म है , सभी में उनके उपासना ग्रहों में पुरुषों के साथ स्त्रियों प्रवेश करने की अनुमति दी गयी है . जसे मंदिरों में अक्सर हिन्दू पुरुष अपनी पत्नियों और माता बहिनों के साथ पूजा और दर्शन के लिए जाते है . गुरुद्वारों में भी पुरुष -स्त्री साथ ही अरदास करते है . और चर्च में भी ऐसा ही होता है ,लेकिन कभी किसी ने इस बात पर गौर किया है कि पुरषों के साथ औरतें दरगाहों में तो जा सकती हैं ,लेकिन मस्जिदों में उनके प्रवेश पर पाबन्दी क्यों है .जबकि इस्लाम पुरुष और स्त्री की समानता का दावा करता है 'इस प्रश्न का उत्तर हमें खुद कुरान और हदीसों से मिल जाता है .जिस पर संक्षिप्त में जानकारी दी जारही है .


1-मस्जिदें आतंकियों का अड्डा हैं 
यदि हम विश्व दुसरे देशों के साथ होने वाली इस्लामी जिहादी आतंकी घटनाओं का विश्लेषण करें तो हमें पता चलेगा की जैसे जैसे आतंकवादी अपनी नयी नयी रणनीति बदलते जाते है ,वैसे वैसे ही मस्जिदों की निर्माण शैली में भी परिवर्तन होता रहता है , यदि आप सौ दो साल पहिले की किसी मस्जिद को देखें पाएंगे कि उसमे चारों तरफ ऊंची दीवार , मीनारें , गुम्बद और बीच में पानी का एक हौज होगा , और एक तरफ मिम्बर होगा जिस पर से इमाम खुतबा देता है .
लेकिन आजकल जो मस्जिदें बन रही हैं , उनके साथ दुकानें , रहने के लिए सर्व सुविधा युक्त कमरे और तहखानों के साथ भूमिगत सुरंगे भी बनायीं जाती है . जिस से गुप्त रूप से निकल भागने से आसानी हो .ऐसी ही मस्जिदों के तहखानों में हथियार छुपाये जाते हैं , जो दंगों के समय निकालकर प्रयोग किये जाते है . यही नहीं इन्हीं गुप्त सुरंगोंसे आतंकी आसानी से भाग जाते हैं .जबलपुर दंगों में ऐसी मस्जिदों से हथियार बरामद हुए थे. चूँकि मुसलमान जो भी आतंकी कार्यवाही करते हैं उसकी प्रेरणा कुरान से लेते हैं .और उसी की प्रेरणा से मस्जिदों में हथियार भी छुपाते रहते हैं , जैसे कुरान में कहा है ,


"और लोगों ने मस्जिदें इसलिए बना रखी हैं , कि वहां से लोगों  को  हानि  पहुंचाएं ,और आपस में  फूट  डालें .और अपने विरोधियों पर घात  लगाने  की योजनायें  बनाने का स्थल बनायें " सूरा - तौबा  9 :107 

2-औरतें घर में नमाज क्यों पढ़ें 
इसके सिर्फ दो ही कारण हो सकते हैं , एक तो यह की मुहम्मद एक चालाक व्यक्ति था , उसे पता था कि मस्जिदें फसाद जी जड़ होती हैं . और दंगों में अक्सर औरतें ही निशाना बनायीं जाती है . और बलात्कार करना जिहाद का एक प्रमुख हथियार है . मुहम्मद को दर था कि यदि औरतें मस्जिद जाएँगी तो वापसी में खुद मुस्लमान ही उनके साथ बलात्कार कर सकते है , इस लिए उसने यह हदीस सुना दी थी .
"अब्दल्लाह बिन मसूद ने कहा कि रसूल  का आदेश है ,औरतों के यही  उचित है  कि वह  यातो  अपने घर के  आँगन  में नमाज  पढ़ें , या घर के इसी एकांत  कमरे में  नमाज  पढ़ा करें " सुन्नन अबू दाउद-जिल्द 1  किताब 204  हदीस  570 

3-औरतों की बुद्धि अधूरी होती है 
दूसरा कारण यह है कि मुहम्मद की सभी औरतें मुर्ख और अनपढ़ थीं , उसी कि नक़ल करके मुसलमान औरतों को शिक्षा देने के घोर विरोधी है , उनको डर लगा रहता है कि अगर औरतें पढ़ जाएँगी तो इस्लाम कि पोल खुल जाएगी .अक्सर जब औरतें पकड़ी जाती है तो वह जल्दी से राज उगल देती है .इसलिए अक्सर मुसलमान गैर मुस्लिम लड़की को फसाते है
" सईदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने कहा है औरतों दर्जा पुरुषों से आधा होता है ,क्योंकि उनकी बुद्धि पुरुषों से आधी होती है "बुखारी -जिल्द 3 किताब 48 हदीस 826 


4-औरतें चुगलखोर होती हैं 

दुनिया के सारे मुसलमान किसी न किसी अपराध में संलग्न रहते हैं . और मस्जिदों के इमाम बुखारी जैसे मुल्ले उनको उकसाते रहते हैं . सब जानते है कि अक्सर औरतें अपने दिल कि बातों को देर तक नहीं छुपा सकती है ,जिस से मुसलमानों को पकडे जाने का खतरा बना रहता है .इसलिए वह औरतों को मस्जिदों में नहीं जाने देते हैं
"सईदुल खुदरी ने कहा कि एक बार जब रसूल नमाज पढ़ चुके और मुसल्ला उठा कर एक खुतबा ( व्याख्यान ) सुनाया और कहा मैंने आज तक औरतों से अधिक बुद्धि में कमजोर किसी को नहीं देखा . क्योंकि उनके पेटों में कोई बात नहीं पचती है .यानि वह गुप्त बातें उगल देती हैं "बुखारी -जिल्द 2 किताब 24 हदीस 54 
इसी विषय में जकारिया नायक ने बड़ी मक्कारी से कहा है कि केवल भारत में औरतों को मस्जिद में जाने पर पाबन्दी है . और दुसरे इस्लामी देशों में ऐसा नहीं है . लेकिन वास्तविकता तो यह्हाई कि जहाँ मुस्लिम औरतें जिहाद करती हैं उन देशों में औरतें मस्जिद में जा सकती है , और जब भारत में भी मुस्लिम आतंकी औरतों की संख्या अधिक हो जाएगी , यहाँ भी औरतें मस्जिदों में जाने लगेंगी . क्योंकि फिर छुपाने की कोई बात नहीं रहेगी . देखिये विडियो
Why ain't Women allowed in Mosques in India? Dr Zakir Naik

http://www.youtube.com/watch?v=XyyJ7iYh3fw


कुछ दिन पूर्व हमारे प्रबुद्ध मित्र ने पूछा था कि औरतों को मस्जिदों में प्रवेश करने पर पाबन्दी क्यों है . इसलिए जल्दी में कुरान और हदीस के आधार पर उनके प्रश्न का उत्तर दिया जा रहा है . मुझे पूरा विश्वास है कि इस लेख को पढ़कर सभी लोग स्वीकार करेंगे कि मस्जिदें ही आतंकवादियों की शरणस्थल हैं . और वहीं से जिहाद की शिक्षा दी जाती है .

-http://www.wikiislam.net/wiki/Women_are_Deficient_in_Intelligence