बुधवार, 1 अगस्त 2012

मस्जिद में औरतों पर पाबन्दी क्यों ?


विश्व के जितने भी बड़े धर्म है , सभी में उनके उपासना ग्रहों में पुरुषों के साथ स्त्रियों प्रवेश करने की अनुमति दी गयी है . जसे मंदिरों में अक्सर हिन्दू पुरुष अपनी पत्नियों और माता बहिनों के साथ पूजा और दर्शन के लिए जाते है . गुरुद्वारों में भी पुरुष -स्त्री साथ ही अरदास करते है . और चर्च में भी ऐसा ही होता है ,लेकिन कभी किसी ने इस बात पर गौर किया है कि पुरषों के साथ औरतें दरगाहों में तो जा सकती हैं ,लेकिन मस्जिदों में उनके प्रवेश पर पाबन्दी क्यों है .जबकि इस्लाम पुरुष और स्त्री की समानता का दावा करता है 'इस प्रश्न का उत्तर हमें खुद कुरान और हदीसों से मिल जाता है .जिस पर संक्षिप्त में जानकारी दी जारही है .


1-मस्जिदें आतंकियों का अड्डा हैं 
यदि हम विश्व दुसरे देशों के साथ होने वाली इस्लामी जिहादी आतंकी घटनाओं का विश्लेषण करें तो हमें पता चलेगा की जैसे जैसे आतंकवादी अपनी नयी नयी रणनीति बदलते जाते है ,वैसे वैसे ही मस्जिदों की निर्माण शैली में भी परिवर्तन होता रहता है , यदि आप सौ दो साल पहिले की किसी मस्जिद को देखें पाएंगे कि उसमे चारों तरफ ऊंची दीवार , मीनारें , गुम्बद और बीच में पानी का एक हौज होगा , और एक तरफ मिम्बर होगा जिस पर से इमाम खुतबा देता है .
लेकिन आजकल जो मस्जिदें बन रही हैं , उनके साथ दुकानें , रहने के लिए सर्व सुविधा युक्त कमरे और तहखानों के साथ भूमिगत सुरंगे भी बनायीं जाती है . जिस से गुप्त रूप से निकल भागने से आसानी हो .ऐसी ही मस्जिदों के तहखानों में हथियार छुपाये जाते हैं , जो दंगों के समय निकालकर प्रयोग किये जाते है . यही नहीं इन्हीं गुप्त सुरंगोंसे आतंकी आसानी से भाग जाते हैं .जबलपुर दंगों में ऐसी मस्जिदों से हथियार बरामद हुए थे. चूँकि मुसलमान जो भी आतंकी कार्यवाही करते हैं उसकी प्रेरणा कुरान से लेते हैं .और उसी की प्रेरणा से मस्जिदों में हथियार भी छुपाते रहते हैं , जैसे कुरान में कहा है ,


"और लोगों ने मस्जिदें इसलिए बना रखी हैं , कि वहां से लोगों  को  हानि  पहुंचाएं ,और आपस में  फूट  डालें .और अपने विरोधियों पर घात  लगाने  की योजनायें  बनाने का स्थल बनायें " सूरा - तौबा  9 :107 

2-औरतें घर में नमाज क्यों पढ़ें 
इसके सिर्फ दो ही कारण हो सकते हैं , एक तो यह की मुहम्मद एक चालाक व्यक्ति था , उसे पता था कि मस्जिदें फसाद जी जड़ होती हैं . और दंगों में अक्सर औरतें ही निशाना बनायीं जाती है . और बलात्कार करना जिहाद का एक प्रमुख हथियार है . मुहम्मद को दर था कि यदि औरतें मस्जिद जाएँगी तो वापसी में खुद मुस्लमान ही उनके साथ बलात्कार कर सकते है , इस लिए उसने यह हदीस सुना दी थी .
"अब्दल्लाह बिन मसूद ने कहा कि रसूल  का आदेश है ,औरतों के यही  उचित है  कि वह  यातो  अपने घर के  आँगन  में नमाज  पढ़ें , या घर के इसी एकांत  कमरे में  नमाज  पढ़ा करें " सुन्नन अबू दाउद-जिल्द 1  किताब 204  हदीस  570 

3-औरतों की बुद्धि अधूरी होती है 
दूसरा कारण यह है कि मुहम्मद की सभी औरतें मुर्ख और अनपढ़ थीं , उसी कि नक़ल करके मुसलमान औरतों को शिक्षा देने के घोर विरोधी है , उनको डर लगा रहता है कि अगर औरतें पढ़ जाएँगी तो इस्लाम कि पोल खुल जाएगी .अक्सर जब औरतें पकड़ी जाती है तो वह जल्दी से राज उगल देती है .इसलिए अक्सर मुसलमान गैर मुस्लिम लड़की को फसाते है
" सईदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने कहा है औरतों दर्जा पुरुषों से आधा होता है ,क्योंकि उनकी बुद्धि पुरुषों से आधी होती है "बुखारी -जिल्द 3 किताब 48 हदीस 826 


4-औरतें चुगलखोर होती हैं 

दुनिया के सारे मुसलमान किसी न किसी अपराध में संलग्न रहते हैं . और मस्जिदों के इमाम बुखारी जैसे मुल्ले उनको उकसाते रहते हैं . सब जानते है कि अक्सर औरतें अपने दिल कि बातों को देर तक नहीं छुपा सकती है ,जिस से मुसलमानों को पकडे जाने का खतरा बना रहता है .इसलिए वह औरतों को मस्जिदों में नहीं जाने देते हैं
"सईदुल खुदरी ने कहा कि एक बार जब रसूल नमाज पढ़ चुके और मुसल्ला उठा कर एक खुतबा ( व्याख्यान ) सुनाया और कहा मैंने आज तक औरतों से अधिक बुद्धि में कमजोर किसी को नहीं देखा . क्योंकि उनके पेटों में कोई बात नहीं पचती है .यानि वह गुप्त बातें उगल देती हैं "बुखारी -जिल्द 2 किताब 24 हदीस 54 
इसी विषय में जकारिया नायक ने बड़ी मक्कारी से कहा है कि केवल भारत में औरतों को मस्जिद में जाने पर पाबन्दी है . और दुसरे इस्लामी देशों में ऐसा नहीं है . लेकिन वास्तविकता तो यह्हाई कि जहाँ मुस्लिम औरतें जिहाद करती हैं उन देशों में औरतें मस्जिद में जा सकती है , और जब भारत में भी मुस्लिम आतंकी औरतों की संख्या अधिक हो जाएगी , यहाँ भी औरतें मस्जिदों में जाने लगेंगी . क्योंकि फिर छुपाने की कोई बात नहीं रहेगी . देखिये विडियो
Why ain't Women allowed in Mosques in India? Dr Zakir Naik

http://www.youtube.com/watch?v=XyyJ7iYh3fw


कुछ दिन पूर्व हमारे प्रबुद्ध मित्र ने पूछा था कि औरतों को मस्जिदों में प्रवेश करने पर पाबन्दी क्यों है . इसलिए जल्दी में कुरान और हदीस के आधार पर उनके प्रश्न का उत्तर दिया जा रहा है . मुझे पूरा विश्वास है कि इस लेख को पढ़कर सभी लोग स्वीकार करेंगे कि मस्जिदें ही आतंकवादियों की शरणस्थल हैं . और वहीं से जिहाद की शिक्षा दी जाती है .

-http://www.wikiislam.net/wiki/Women_are_Deficient_in_Intelligence

18 टिप्‍पणियां:

  1. समानता कहीं नहीं है, इनके यहां. कहने को कुछ भी कह लें. अनिल मसीह.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. tm jo kuch bhi kha rhe ho tmne apne hisab se todmarod kr pesh kiya h jo ki bilkul bhi sach nhi h. jis tarha se neta sach pr parda dal kr use sach sabit krte hai thik usi tarh tmne bhi sach ki chupa kr logo ko bhramit kiya h..... tmko sach kya h wo batana padega. wait karo agli post ka.

      हटाएं
  2. क़ुरआन प्रदर्शनी में इस्लाम स्वीकार करने वाली ईसाई महिला।

    तेहरान में अंतर्राष्ट्रीय क़ुरआन प्रदर्शनी देखने के बाद एक ईसाई महिला ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया। वह बताती हैं कि हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के व्यक्तित्व और पवित्र महीने रमज़ान के आध्यात्मिक वातावरण के प्रभाव में मैंने इस्लाम धर्म स्वीकार किया। इस्लाम धर्म स्वीकार करने से पूर्व उनका नाम कैमलीक माईकेह था तथा इस्लाम स्वीकार करने के बाद उन्होंने अपना नाम सिद्दीक़ा हैदरी रख लिया।

    वह पवित्र क़ुरआन की अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में क़ुरआनी बातें और शोध विभाग में अपने इस्लाम धर्म स्वीकार करने के बारे में कहती हैं कि अज़ज़हरा विश्वविद्यालय से थियालोजी में मैं ग्रेजुएट हूं, हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के शुभ जन्म दिवस के अवसर पर इस्लाम स्वीकार करने की मेरी हार्दिक कामना और सुदृढ़ हुई क्योंकि इस दिन को महिला दिवस का नाम दिया गया है और हज़रत फ़ातेमा ज़हरा महिलाओं के लिए पूर्ण आदर्श हैं।

    वह अपनी बात जारी रखते हुए कहती हैं कि विभिन्न पुस्तकों को पढ़ने के बाद मुझे पता चला कि महिलाओं के लिए सबसे उचित और सबसे परिपूर्ण धर्म इस्लाम है।

    तेहरान में इमाम ख़ुमैनी मुस्ल्ला के इमाम, मुहम्मदुल्लाही कहते हैं कि रमाज़न के पवित्र महीने में भारी संख्या में लोग इस्लाम स्वीकार करते हैं। वह कहते हैं कि इसका मुख्य कारण इस महीने में पाया जाने वाला आध्यात्मिक और आत्मिक वातावरण है और मेरा मानना है कि यदि सही पहचान और शोध के साथ इस्लाम स्वीकार किया जाए तो इसमें विभूतियां और अनुकंपाएं बहुत अधिक होती हैं।

    वह इस बात को बयान करते हुए कि इस ईसाई महिला ने किसी प्रकार इस्लाम स्वीकार किया, कहते हैं कि पिछली रात नमाज़े मग़रिब समाप्त होने के बाद प्रदर्शनी के एक अधिकारी, इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए इस महिला को मेरे पास लाए और आरंभिक बात चीत से ही हम समझ गये कि इस महिला ने हार्दिक भावना, सूझबूझ और पहचान के साथ इस्लाम धर्म का चयन किया है।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. तो क्या वोह भी किसी देश में हो रही जिहाद में तालिबानियों का साथ देने चली गयी

      हटाएं
  3. मुहम्मद ने कुरान में इतनी बेतुकी बातें लिखी है की, उसपर कोई भी खुले दिमागवाला इन्सान विश्वास कर ही नहीं सकता. सब को पता है की, इन्सान की उपज औरत की कोख है. मानवजाती का सबसे पवित्र रिश्ता है माँ और उसकी संतान. सारे विश्व में इस पवित्र रिश्ते का आदर किया जाता है, सिवाय इस्लाम के. अपनी माँ से, सगी, चचेरी, मौसेरी बहनों से जिना करना कहां की समझदारी है. वाकई इस्लाम आदमी को निमपागल कर देता है. मुसलमानों को यह समझ में क्यों नहीं आता की, इतनी बहकी-बहकी बातों से क्या हासिल होगा. दुनियाभर में अपमान और उपहास. आज के तमाम मुस्लिम देशों के हालात देखिये. एक भी मुल्क में शांती नही है. असल में कुरान पढने के बाद आदमी शांती से रह ही नहीं सकता. उसको चाहे-अनचाहे अपने चारों तरफ दुश्मन ही दुश्मन नजर आते हैं. क्या मुसलमान अपना दीन फैलाने के लिए सारी दुनिया को मिटाने पर आमादा हैं? और दुनिया मिट जाने के बाद क्या मुसलमान खुद भी जिंदा रह सकेंगे? कैसी घटीया सोच का दीन है ये. इसे दीन भी कहना लानत है.
    जय हिंद.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. kabhi kuran pad kar dekho to pta chal jaiga kai achi achi bate likhi gai hai kisi ki bat sun ka ye kahna achi bat nahi hi

      हटाएं
  4. islam main aurat masjid main ja sakti hai, haz main sare muslim aurat bhi jati hai. world main sare jagah masjid main aurat jati hai ye india main nahi jane dete hain ye india ke musalmano ki galti hai islam ki nahi..

    उत्तर देंहटाएं
  5. (1) अगर हिन्दू धर्म कई हज़ार साल पुराना है, तो फिर
    भारत के बाहर इसका प्रसार क्यों नहीं हुआ और एक भारत
    से बाहर के धर्म “इस्लाम” को इतनी मान्यता कैसे
    हासिल हुई कि वो आपके अपने पुरातन धर्म से ज़्यादा अनुयायी कैसे बना सका?
    ...
    (2) अगर हिन्दू धर्म के अनुसार एक जीवित पत्नी के
    रहते, दूसरा विवाह अनुचित है, तो फिर राम के
    पिता दशरथ ने चार विवाह किस नीति अनुसार किये
    थे? (3) अगर शिव के पुत्र गनेश की गर्दन शिव ने काट दी,
    तो फिर यह कैसा भगवान है, जो उस कटी
    गर्दन
    को उसी जगह पर क्यों नहीं जोड़ सका, क्यों एक निरीह
    जानवर (हाथी) की हत्या करके उसकी गर्दन गणेश की धढ
    पर लगाई? एक इंसान के बच्चे के धढ़ पर हाथी की गर्दन
    कैसे फिट आ गयी? (4) अगर हिन्दू धर्म में मांसाहार वर्जित है, तो फिर
    राम स्वर्ण मृग (हिरन) को मारने क्यों गए थे?
    क्या मृग हत्या जीव हत्या नहीं है?
    (5) राम अगर भगवान है, तो फिर उसको यह
    क्यों नहीं पता था कि रावण की नाभि में अमृत है, अगर
    उसको घर का भेदी ना बताता कि रावण की नाभि में अमृत है, तो उस युद्ध में रावण कभी नहीं मारा जाता।
    क्या भगवन ऐसा होता है?
    (6) तुम कहते हो कि कृष्ण तुम्हारे भगवन हैं,
    तो क्या नहाती हुई निर्वस्त्र स्त्रियों को छुपकर
    देखने वाला व्यक्ति, भगवान हो सकता है, अगर ऐसा काम
    कोई व्यक्ति आज के दौर में करे, तो हम उसे छिछोरा कहते हैं। आप भगवान क्यों कहते हो?
    (7) सारे बलात्कारी हिन्दू ही क्यों होते हैं?
    (8) शिव के लिंग (पेनिस ) की पूजा क्यों करते हैं?
    क्या उनके शरीर में कोई और चीज़ पूजा के क़ाबिल
    नहीं?
    (9) खुजराहो के मंदिरों में काम-क्रीड़ा और उत्तेजक चित्र हैं, फिर ऐसे स्थान को मंदिर
    क्यों कहा जाता है, क्या काम-क्रीडा, हिन्दू
    धर्मानुसार पूजनीय है?
    जवाब दो

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. jis b katuye ne ye sab likha hai vo ek no ka chutiya hai...vese katuye to chutiye hote hi hai.. koran padne k bad koi samjhdar nahi ho sakta.... jese inka muhammad aur allah (so called) madarchod hai vese hi sare katuye b madarchod hai...ab sun katuye tjhe batata hun me tere sawalo k jawab:
      आप सभी जानते हैं कि महाभारत का युद्ध भारत का सबसे भयानक युद्ध था। महाभारत युद्ध की सभी चर्चा करते हैं क्योंकि इस पर एक ग्रंथ भी लिखा गया है और इस युद्ध के सूत्रधार थे भगवान कृष्ण, इसलिए यह युद्ध सभी को याद है। लेकिन आज से पांच हजार वर्ष पूर्व हुए महाभारत युद्ध के पूर्व एक और महासंग्राम हुआ था जिसे दशराज युद्ध के नाम से जाना जाता। इस युद्ध की चर्चा ऋग्वेद में मिलती है। यह रामायण काल की बात है। दाशराज युद्ध त्रेतायुग में लड़ा गया।

      महाभारत युद्ध के पहले भारत के आर्यावर्त क्षेत्र में आर्यों के बीच दाशराज युद्ध हुआ था। इस युद्ध का वर्णन दुनिया के हर देश और वहां की संस्कृति में आज भी विद्यमान हैं। ऋग्वेद के सातवें मंडल में इस युद्ध का वर्णन मिलता है। इस युद्ध से यह पता चलता है कि आर्यों के कितने कुल या कबीले थे और उनकी सत्ता धरती पर कहां तक फैली थी। इतिहासकारों के अनुसार यह युद्ध आधुनिक पाकिस्तानी पंजाब में परुष्णि नदी (रावी नदी) के पास हुआ था।
      इनके बीच हुआ युद्ध : पुरु और तृत्सु नामक आर्य समुदाय के बीच यह युद्ध हुआ था। इस युद्ध में जहां एक ओर पुरु नामक आर्य समुदाय के योद्धा थे, तो दूसरी ओर 'तृत्सु' नामक समुदाय के योद्धा युद्ध लड़ रहे थे। । हालांकि पुरुओं के नेतृत्व में से कुछ को अनार्य माना जाता था।

      तुत्सु का नेतृत्व : तुत्सु समुदाय का नेतृत्व राजा सुदास ने किया। सुदास दिवोदास के पुत्र थे, जो स्वयं सृंजय के पुत्र थे। सृंजय के पिता का नाम देवव्रत था। सुदास के युद्ध में सलाहकार ऋषि वशिष्ठ थे।

      पुरु का नेतृत्व : सुदास के विरुद्ध दस राजा युद्ध लड़ रहे थे जिनका नेतृत्व पुरु कबीला के राजा संवरण कर रहे थे। जिनके सैन्य सलाहकार ऋषि विश्वामित्र थे।
      सुदास के विरुद्ध लड़े ये समुदाय : ऋग्वेद का सुविख्यात नायक सुदास भारतों का नेता था और पुरोहित वसिष्ठ उसके सहायक थे। इनके शत्रु थे, पांच प्रमुख जनजातियां-, ‘अनु’, ‘द्रुह्यु’, ‘यदु’, ‘तुर्वशस्’ और ‘पुरु’ तथा पांच गौण जनजातियां- ‘अलिन’, ‘पक्थ’, ‘भलानस्’, ‘शिव’ और ‘विषाणिन’ के दस राजा। विरोधी गुट के सूत्रधार ऋषि विश्वामित्र थे और उसका नेतृत्व पुरुओं ने किया था। हालांकि इन दस राजाओं का सभी जगह अलग-अलग वर्णन मिलता है। यहां प्रस्तुत है ज्यादातर जगह पाया जाना वाला वर्णन।

      1. अलीन समुदाय : इतिहासकार मानते हैं कि यह कबीला अफगानिस्तान के नूरिस्तान क्षेत्र के पूर्वोत्तर में रहता था। चीनी तीर्थयात्री हुएन त्सांग ने उस जगह को उनकी गृहभूमि होने का जिक्र किया है। अलीन समुदाय का नाम है राजा का नहीं इनके राजा कौन थे यह अभी अज्ञात है।

      2. अनु : यह ययाति के पुत्र अनु के कुल का समुदाय था, जो परुष्णि (रावी नदी) के पास रहता था। अनु समुदाय का नाम है राजा का नहीं इनके राजा कौन थे यह अभी अज्ञात है।

      3. भृगु समुदाय : माना जाता है कि यह समुदाय प्राचीन भृगु ऋषि के वंश के थे। बाद में इनका संबंध अथर्ववेद के भृगु-आंगिरस विभाग की रचना से किया गया है। भृगु समुदाय का नाम है राजा का नहीं इनके राजा कौन थे यह अभी अज्ञात है।

      4. भालन समुदाय : कुछ इतिहासकारों के अनुसार यह बोलन दर्रे के इलाके में बसने वाले लोग थे। भालन समुदाय का नाम है राजा का नहीं इनके राजा कौन थे यह अभी अज्ञात है।



      हटाएं
    2. 5. द्रुह्य : ऋग्वेद अनुसार यह समुदाय द्रुह्यु कुल का था, जो अफगानिस्तान के गांधार प्रदेश में निवास करता था। द्रुह्य समुदाय का नाम है राजा का नहीं इनके राजा कौन थे यह अभी अज्ञात है।

      6. मत्स्य : ऋग्वेद में इस समुदाय का जिक्र मिलता है लेकिन बाद में इनका शाल्व से संबंध होने का उल्लेख भी मिलता है। यह जनजाति समुदास के लोग थे। मत्स्य समुदाय का नाम है राजा का नहीं इनके राजा कौन थे यह अभी अज्ञात है।

      7. परसु : परसु समुदाय प्राचीन पारसियों का समुदाय था। ईरान इनका मूल स्थान था। प्राचीन समय में ईरान को पारस्य देश कहा जाता था। परसु समुदाय का नाम है राजा का नहीं इनके राजा कौन थे यह अभी अज्ञात है।

      8. पुरु : यह समुदाय ऋग्वेद काल का एक महान परिसंघ था जिसे सरस्वती नदी के किनारे बसा होना बताया जाता रहा है, हालांकि आर्य काल में यह जम्मू-कश्मीर और हिमालय के क्षेत्र में राज्य करते थे। पुरु समुदाय का नाम है राजा का नहीं इनके राजा कौन थे यह अभी अज्ञात है।

      9. पणी : इन्हें दानव कुल का माना जाता है लेकिन बाद के ऐतिहासिक स्रोत इन्हें स्किथी लोगों से संबंधित बताते हैं। पणी समुदाय का नाम है राजा का नहीं इनके राजा कौन थे यह अभी अज्ञात है।

      10. दास (दहए) : यह दास जनजातियां थी। ऋग्वेद में इन्हें दसुह नाम से जाना गया। यह भी माना जाता है कि यह काले रंग के थे। दास समुदाय का नाम है राजा का नहीं इनके राजा कौन थे यह अभी अज्ञात है।

      उक्त समुदाय के नाम पर ही राज्य हुआ करते थे।
      तुत्सु राजा दिवोदास एक बहुत ही शक्तिशाली राजा था जिसने संबर नामक राजा को हराने के बाद उसकी हत्या कर दी थी और उसने इंद्र की सहयता से उसके बसाए 99 शहरों को नष्ट कर दिया। बाद में धीरे-धीरे वहां कई छोड़े बड़े 10 राज्य बन गए। वे दस राजा एकजुट होकर रहते थे लेकिन दिवोदास के पुत्र ने फिर से इन पर आक्रमण कर दिया।

      उल्लेखनीय है कि भगवान ऋषभदेव के समय उनकी आज्ञा से इंद्र ने धरती पर 52 राज्यों का गठन किया था। इंद्र के विरूद्ध कई राजा थे।
      क्यों हुआ था युद्ध : यह भी सत्ता और विचारधारा की लड़ाई थी। एक और वेद पर आधारित भेदभाव रहित वर्ण व्यवस्था का विरोध करने वाले विश्वामित्र के सैनिक थे तो दूसरी ओर एकतंत्र और इंद्र की सत्ता को कायम करने वाले गुरु वशिष्ठ की सेना के प्रमुख राजा सुदास थे।
      ऋग्वेद में दासराज युद्ध को एक दुर्भाग्यशाली घटना कहा गया है। इस युद्ध में इंद्र और वशिष्ट की संयुक्त सेना के हाथों विश्‍वामित्र की सेना को पराजय का मुंह देखना पड़ा। दसराज युद्ध में इंद्र और उसके समर्थक विश्‍वामित्र का अंत करना चाहते थे। हालांकि विश्‍वामित्र को भूमिगत होना पड़ा।

      उस काल में राजनीतिक व्यवस्था गणतांत्रिक समुदाय से परिवर्तित होकर राजाओं पर केंद्रित भी हो रही थी। दशराज युद्ध में भारत कबीला राजा-प्रथा पर आधारित था जबकि उनके विरोध में खड़े कबीले लगभग सभी लोकतांत्रिक थे।

      महाभारत से पहले हुई थी एक और 'महाभारत'

      इस युद्ध में सुदास के भारतों की विजय हुई और उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप के आर्यावर्त और आर्यों पर उनका अधिकार स्थापित हो गया। इसी कारण आगे चलकर पूरे देश का नाम ही आर्यावर्त की जगह 'भारत' पड़ गया।

      ऋग्वेद में अफगानिस्तान की प्रमुख नदियों और जातियों का वर्णन मिलता है। सुवास्तु, क्रभु, गोमती का स्पष्ट उल्लेख मिलता है तथा अनिल, पख्त आदि राज्यों का भी विवरण मिलता है। स्वाद घाटी उस काल में श्वेत घाटी कहलाती थी। जलालाबाद में स्तूपों के वैसे ही खंडहर मिले हैं, जैसे तक्षशिला में।
      सम्राट भरत के समय में राजा हस्ति हुए जिन्होंने अपनी राजधानी हस्तिनापुर बनाई। राजा हस्ति के पुत्र अजमीढ़ को पंचाल का राजा कहा गया है। राजा अजमीढ़ के वंशज राजा संवरण जब हस्तिनापुर के राजा थे तो पंचाल में उनके समकालीन राजा सुदास का शासन था।

      राजा सुदास का संवरण से युद्ध हुआ जिसे कुछ विद्वान ऋग्वेद में वर्णित 'दाशराज्ञ युद्ध' से जानते हैं। राजा सुदास के समय पंचाल राज्य का विस्तार हुआ। राजा सुदास के बाद संवरण के पुत्र कुरु ने शक्ति बढ़ाकर पंचाल राज्य को अपने अधीन कर लिया तभी यह राज्य संयुक्त रूप से 'कुरु-पंचाल' कहलाया। परन्तु कुछ समय बाद ही पंचाल पुन: स्वतन्त्र हो गया।

      हटाएं

    3. ‘Aadishakti’ creating strong son from grime : ‘Aadishakti’ Parvati is the mother of the world. Whole nature is created from Her. She gives power to Shiva as she is the embodiment of Power. It is said that without Her, Shiva is like ‘Shava (lifeless body)’. The body made of ‘Panchamahabhutas (the five Cosmic Elements)’ has limitations; but with the power of ‘sadhana (spiritual practice)’, Parvati goes beyond all such limits; therefore, she can merge with God. Is there anything impossible for such superpower ? So, she could create a son from Her grime that is part of Her ‘chaitanya i.e. divine consciousness’.

      B. Deity Shiva, the Father of the world, punishing His conceited son, for welfare of the world ! : Ganesha was very powerful; but one becomes conceited, arrogant due to power if such power is not associated with ‘sattvikata (purity)’. He becomes destructive. At the time of His birth, Parvati has selfish thoughts that her son should always obey Her. Now, anything done with selfish thoughts drifts away from ‘Sattvikata (purity and holiness)’. So, Ganesha crosses all limits of prudence while obeying His mother; exhibiting no sense of mercy, pity or forgiveness. Such power tilts more towards ‘Raja/Tama’; rather becomes pre-dominant with ‘Tama’ and same thing happened with Ganesha. Ganesha had enormous power as He was made from grime of ‘Aadishakti’; but had ‘Raja-Tama’ intellect. He was created for the welfare of the Universe. Omniscient Shiva had realized that such tainted intellect would not do anything in the interest of world, in fact, would cause harm to the world. Shiva had to, therefore, decide to sever head of His son. Because without doing that, owing to Ganesha's tainted intellect and inflated ego, the world would have been endangered . So great is this Father, who severs head of His own son, for welfare of the entire world !

      ab sun sare balatkari hindu nahi hote muslim hote hote jyada bargala mat gaandu.... shiva lingam ek swaroop hai purush r nari k pavitra milan ka.. samjhe use hawas na samjhe r striyo ki ijjat kare isiliye uski pooja ki jati hai chutiye tumhare jese lund r choot ka khatna nahi karate hinduo me... khajuraho k mandir bhi sex ko pavitra pradaan karne ke swaroop me samjha ja sakta hai... bhosdike apni aankh kaan r dimaag kholke k soch r samjh r wapis se hindu ban ja .. vese bhi tere purvaj hindu hi the..

      हटाएं
    4. abe hijde ke bacche apni maa aur behan ko mere paas bhej de saari hindu ki ladki ko chod kar uske bacche ko musalmaan banaunga aur india se saari hindu ladki ko chod kar bhagaa dunga lagta hai teri maa ko bhi koyi musalmaan ne hi choda tha bus tu hindu ban gaya saala mere lu
      nd ki paidaayis

      हटाएं
    5. Bhagvan Shiva se ek hathi ne vardan manga tha k vo unke paas rehna chahta hai or usko bhagvan shiva k baad sabse zada buddhimaan banna tha.
      Itni buddi ( Dimag ) ki capacity uske sharir me nahi thi.

      Or vo Bhagvan shiv k sabse zada kareeb rehne k liye use bhagvan shiv ka putra banana tha isi liye unko ganesh ji ka sar kaat kar hathi ka sar lagaya.

      2nd bhagvan vishnu ne manushya ka ram ban kar avtar liya vaise to vo bhagvan hai unko ravan ka vadh aiseh hee kar sakte the.
      Lekin ravan ko bhagvan shiv ka bohot se vardan tha.
      Agar bhagvan ram ravan ko Aise mard ta. K unhone bhgvan hone ka galat fayda uthaya .Ye sab bhagvano ki ranniti thi.

      3. Saare balatkari hindu hote hai ye conform nahi hai per ye Conform hai k
      Saare aatankwadi musalman hote hai
      Har ek galat kaam musalman karte hai
      Jaa k chor bazaar dekho saare k saare musalman hai

      Red light aria me jaao saare k saare musalman hai.

      Hum mandiro me hathiyar nahi .Rakhte per masjido me hathiyar musalman rakhte hai.

      Hum divali holi ya koi bhi festival me kisi ki gadi chori kar k nahi chalate per har saal badi raat vale din musalman log hindu ki gadi chori kar k chalate hai. Kabhi badi raat k dusre din jaa k kisi bhi police stn jaa k dekkhna k gadi chori k kitne complaint hai.

      हटाएं
  6. Mdarchod jaat hai musalmaan sale anpi behan se hi sadi kr lete hai kya dharam hai inka kuch v nhi

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. madarchod
      sadi se pahle wahi ladki tumhari mameri bahan ya khaleri bahan akele me mil jai to sale usko jalldi chod dalega jab sadi ki bari ai to ristedari dikhane late hai sale gandu nahi to

      हटाएं
  7. hindu apne maa ke nahi behan ke chude huve hai aur unke baap dada musalmaan hai

    उत्तर देंहटाएं
  8. ARE Mere Pyaaare Bhai . ak baar apne kahane apne zubaane sun le
    Lord Brahma and Saraswati story : ‘ब्रह्मा’ ने किया था अपनी ही पुत्री ‘सरस्वती’ से विवाह

    Hindi mythological story of Lord Brahma and Saraswati Marriage : हिन्दू धर्म के दो ग्रंथों ‘सरस्वती पुराण’ और ‘मत्स्य पुराण’ में सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा का अपनी ही बेटी सरस्वती से विवाह करने का प्रसंग है जिसके फलस्वरूप इस धरती के प्रथम मानव ‘मनु’ का जन्म हुआ। लेकिन ब्रह्मा ने अपनी ही पुत्री से विवाह जैसा निन्दनीय काम क्यों किया इसका जवाब जानने के लिए पढ़ते है पुराणों में वर्णित कथा। ‘सरस्वती पुराण’ और ‘मत्स्य पुराण’ में वर्णित कथाओं में कुछ भिन्नता है, इसलिए हम आपको दोनों कथाओं से अवगत करा रहे है।
    'Brahma' do marriage with is Daughter 'Saraswati'
    सरस्वती पुराण में वर्णित कथा-

    सरस्वती पुराण के अनुसार सृष्टि की रचना करते समय ब्रह्मा ने सीधे अपने वीर्य से सरस्वती को जन्म दिया था। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि सरस्वती की कोई मां नहीं केवल पिता, ब्रह्मा थे।

    सरस्वती को विद्या की देवी कहा जाता है, लेकिन विद्या की यह देवी बेहद खूबसूरत और आकर्षक थीं कि स्वयं ब्रह्मा भी सरस्वती के आकर्षण से खुद को बचाकर नहीं रख पाए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी बनाने पर विचार करने लगे।

    सरस्वती ने अपने पिता की इस मनोभावना को भांपकर उनसे बचने के लिए चारो दिशाओं में छिपने का प्रयत्न किया लेकिन उनका हर प्रयत्न बेकार साबित हुआ। इसलिए विवश होकर उन्हें अपने पिता के साथ विवाह करना पड़ा।

    ब्रह्मा और सरस्वती करीब 100 वर्षों तक एक जंगल में पति-पत्नी की तरह रहे। इन दोनों का एक पुत्र भी हुआ जिसका नाम रखा गया था स्वयंभु मनु।

    raam ne diya tha apne bhai lakshman ko mirtu dand

    जब युधिष्ठिर जुए मैं द्रौपदी को हार गया तब दुशासन ने द्रौपदी के वस्त्र हरण का प्रयास किया. इस पूरे प्रकण के बाद द्रौपदी ने दरबार मैं बैठे सभी बड़े लोगों से क्षमा याचना की। उसने कहा, "मुझे दरबार मैं घसीट के लाया गया और बेइज़्ज़त किया गया। इस सबके होते मैं अपने बड़ों को प्रणाम नहीं कर पायी। इस के लिये मैं क्षमा मांगती हूँ"

    एक बार कुछ डाकुओं का पीछा करते हुए अर्जुन गलती से युधिष्ठिर और द्रौपदी के कमरे मैं दाखिल हो गया। अपनी गलती की सज़ा के लिये वह 12 साल के वनवास के लिये निकल गया। उस दौरान अर्जुन ने तीन विवाह किये - चित्रांगदा (मणिपुरा), उलूपी (नागा) और सुभद्रा (कृष्ण की बहन)

    उत्तर देंहटाएं