शुक्रवार, 10 अगस्त 2012

ऐसे अल्लाह को क्यों मानें ?


किसी के बारे में सुनी सुनाई बातों के आधार पर , और गहराई से जानकारी प्राप्त किये बिना ही विश्वास करना घातक होता है . और जो भी व्यक्ति ऐसी भूल करता है ,उसे बाद में अवश्य ही पछताना पड़ता है .यह बात कहना इसलिए जरूरी हो गयी है , क्योंकि आजकल विदेशी धन से पोषित इस्लाम के कुछ ऐसे प्रचारक पैदा हो गए हैं ,जो अपने कुतर्कों से मुहम्मद को अवतार , कुरान को ईश्वरीय पुस्तक और अपने अल्लाह को सबका ईश्वर साबित करने का कुप्रयास करते रहते हैं .इनका एकमात्र उद्देश्य हिन्दुओं को गुमराह करके उनका धर्म परिवर्तन कराना है . ताकि उनके द्वारा भारत में आतंक फैला कर इस्लामी राज्य की स्थापना की जा सके .इसके लिए यह लोग अपने अल्लाह को सर्वशक्तिमान , सर्वज्ञ ,और समर्थ बताते हैं , और कुरान का हवाला देते हैं जैसे ,
अल्लाह से न तो धरती के भीतर की कोई चीज छुपी है , और न आकाश के अन्दर की कोई चीज छुपी है " सूरा -आले इमरान 3 : 5 
अल्लाह को आकाशों और धरती में छुपी हुई बातों का सारा भेद मालूम है " सूरा -अल कहफ़ 18 :26 
धरती और आकाश के एक एक कण के बारे में कोई भी बात अल्लाह से छुपी नहीं है " सूरा-सबा 34 :3 
अल्लाह का ज्ञान हरेक विषय को घेरे हुए है " सूरा -अत तलाक 65 :12 

लेकिन यह कुरान की आयतें लोगों को दिखने के लिए हैं , यदि हम कुरान को व्याकरण सहित ध्यान से पढ़ें तो पता चलेगा कि अल्लाह को ईश्वर समझना बहुत बड़ी भूल होगी .क्योंकि हरेक विषय में उसका ज्ञान अधकचरा और सत्य के विपरीत है ,और जो भी अल्लाह की गप्पों को नहीं मानता था अल्लाह उसे डराता रहता था.और यही काम उसका रसूल भी करता था , कुछ नमूने देखिये ,

1-तारों का ज्ञान 
और अल्लाह " शेअरा Sirius " नामके एक तारे का रब है " सूरा -अन नज्म 53 : 49 
वास्तव में शेअरاشعرى   नामक तारा एक नहीं बल्कि युग्म ( double star.)तारा है , जो नंगी आँखों से एक दिखता है यह दौनों तारे एक दुसरे का चक्कर लगाते हैं , वैज्ञानिकों ने इनके नाम DA1 और DA2 रख दिए हैं .इनको binary star भी कहा जाता है , पृथ्वी से इनकी दूरी  8.6 प्रकाश वर्ष मील है
2-आकाश एक छत है 
और हमने आकाश को एक मजबूत छत बनाया है "सूरा -अल अम्बिया 21 :32 
(इस आयत में आकाश को अरबी में " सकफ سقف" कहा गया है , जिसका अर्थ ऐसी ठोस छत Roof होता है ,अभेद्य impenetrableहो .)

3-बादलों की गर्जना फ़रिश्ते हैं 
और बादलों की गरज और फ़रिश्ते भय के कारण उसकी प्रसंशा के साथ तस्बीह करते रहते हैं .और वह कड़कती बिजलियाँ जिस पर चाहे गिरा देता है " 
सूरा - राअद 13 :13 
4आकाश धरती में धंस सकता है 
यह जो इनके आगे और पीछे जो आकाश और धरती है उसे नहीं देखते .यदि हम चाहें तो आकाश को जमीन के अन्दर धंसा देंगे " 
सूरा -सबा 34 :9 
(इस आयत में " नख्सिफنخسف" शब्द है जिसका अर्थ We (could) cause to swallow होता है यानि अल्लाह आसमान को पृथ्वी से निगलवा देगा .)
5-आकाश से दैत्य निकलेगा 
और जो लोग हमारी बातों पर विश्वास नहीं करेंगे हम उनके लिए जमीन से एक भयानक पशु निकालेंगे , जो उन से बातें करेगा 
.सूरा- नम्ल 27 : 82 
(इस आयत में उस कल्पित जानवर beast को दाब्बह (دابّة)कहा गया है , इसका अर्थ है जब अल्लाह अपनी बात लोगों नहीं समझा पाया तो कल्पित जानवर से डराने लगा )
6-अल्लाह ध्रुव प्रदेश से अनभिज्ञ है 
और खाओ पियो यहाँ तक कि प्रभात की सफ़ेद धारी तुम्हें रात की काली धारी से स्पष्ट अलग दिखाई देने लगे " सूरा - बकरा 2 : 187 
(यह आयत रोजा रखने के बारे में है . लेकिन अल्लाह को पृथ्वी के ध्रुव प्रदेशों polar regions और वहां के रहने वाले एस्किमो Eskimosलोगों के बारे में कोई ज्ञान नहीं था . क्योंकि वहां पर छः महीने रात और छः महीने दिन रहता है .इस से सिद्ध होता है की कुरान सिर्फ अरब के लिए बनी है , सम्पूर्ण विश्व के लिए नही .और अल्लाह का भूगोल के बारे ज्ञान शून्य है .)
7-जन्नत कितनी दूर है 
अब्बास इब्न अबी मुत्तलिब ने कहा की हम लोग बतहा नाम की जगह पर रसूल के साथ बातें कर रहे थे . तभी एक बादल ऊपर से गुजरा . रसूल ने पूछा की क्या तुम्हें पता है कि जमीन से जन्नत की कितनी दूरी है .हमने कहा कि आप ही बता दीजिये . रसूल के कहा कि यहाँ से जन्नत की दूरी इकहत्तर , बहत्तर , या तिहत्तर साल की दूरी है .वहां ऊपर सातवाँ आसमान है . और नीचे एक समुद्र है .और जिसके किनारे आठ पहाड़ी बकरे रहते हैं .और जिनके खुरों के बीच की जगह में जन्नत है , वहीँ अल्लाह का निवास है .अबू दाऊद- किताब 40 हदीस 4705 
8-नवजात शिशु क्यों रोते हैं 
अबू हुरैरा ने कहा की रसूल ने कहा है ,पैदा होते ही बच्चा इसलिए रोता है . क्योंकि शैतान उसके शरीर में उंगली डालता है " 
बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 506 
9-शैतान कान में मूत देता है 
अब्दुल्लाह ने कहा की रसूल ने बताया है , यदि कोई देर तक सोता है तो , शैतान उसके कानों में पेशाब कर देता है " 
बुखारी - जिल्द 2 किताब 21 हदीस 245 

10-मुर्गों की बांग और गधे का रेंकना 
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा है यदि तुम मुर्गे की बांग की आवाज सुनो तो समझो तुमने फ़रिश्ते के दर्शन कर लिए और अगर तुम गधे के रेंकने की आवाज सुनो तो इसका मतलब है तुमने शैतान को देखा है " 
बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 552 और सही मुस्लिम - किताब 35 हदीस 6581 

इन सभी प्रमाणों से सिद्ध होता है कि न तो अल्लाह को अंतरिक्ष यानि आकाश के बारे में कोई ज्ञान है और न पृथ्वी के बारे में कोई ज्ञान है .लेकिन इस बात में कोई शक नहीं है कि अल्लाह जो भी रहा होगा वह लोगों को कल्पित चीजों से डराने , और बहकाने में उस्ताद रहा होगा .और अल्लाह का तथाकथित रसूल भी उस से दो हाथ आगे था .
बताइए कोई ऐसे अल्लाह को क्यों मानेगा ?मेरा तो यही जवाब है .आप बताइए . 

" सूरदास प्रभु , कामधेनु तजि बकरी कौन दुहावै "


http://wikiislam.net/wiki/Scientific_Errors_in_the_Hadith

6 टिप्‍पणियां:

  1. Hindus kam se kam apni majhab ki kitabon me likhi galt baaton ko na mante hain aur buraion ko to dur karte hain.

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  2. कृपया इसे फ्री डोमेन नाम ( अपने इस ब्लॉग के नाक का) बना कर ( www.co.cc) इस ब्लॉग को Divert कर दे | अगर कोई ये एड्रेस डालता है तो भी वही पहुच जायेगा |

    फायदा :

    १. मेरे जैसे बहुत से पाठक पहले वाला ब्लॉग ब्लोक होने से पहुच नही प् रहे है | जैसा कि मुझे आज ही पता चला है |

    २. अगर यह ब्लॉग ब्लोक भी हो जाता है तो कोई बात नही दूसरा ब्लॉग बना कर उसी फ्री डोमेन नाम से divert कर सकते है } जिससे आप के पाठक को पहुचने में समस्या नही होगा | तथा बने रहेंगे |

    ३. आपका फ्री वाला डोमेन नाम वैसा ही बनाये bhandafodu.co.cc ये नाम कोई ब्लोक नही कर सकता है |

    अगर कोई सहायता चाहिए तो ईमेल करे |--


    bhartgarv@gmail.com

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  3. I am asif khan.........


    Aap log hamare nabi ke bare main bahut kuch khe rahe ho or is saite per bhut kuch likha hain par kabhi aap apni dharm ki kitabo ko padh lo aap ko usme nabi ka zikr bhi mail jayega or islam ki sachai bhi pata chal jayegi

    AB AAP KHOGE KI BATAO TO MAIN AAP KO DR. JAKIR NAYAK KI VIDEO JO KI AAP YOUTUBE ISLAM OR SANATEN DHARM LIKH YA DR. JAKIR NAYAK VIDEO LIKH KAR DEKH SAKHTE HO.......

    AAP LOGO KO YAHA PAR GATET BATAIN BATAI JA RAHI HAIN OR AGAR BAT SAHI HO TO USE GALET SHOW KI JATA HAIN ISLAM DHARM KI BAT KO SAMEJNE KE LIYE SIRF EK HADIS WE QURAN KI AAYAT KAFI NAHAHI

    JESE EK QURAN KI AAYAT KO SAMAJNE KE LIYE KAHI HADIS KO SAMJNA HOGA OR HADIS KO SAMJNE KE LIYE KAYI HADIS VE QURAN KI AAYAT KO SAMJNA HOGA

    MARI AAP SAB SE REQWEST HAIN KI AAP SAB YHAN GALAT FEHAMI ME NA PADHE OR ISE SITE KO BAND KARE KI KASIS KARE ..............................

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  4. बहुत ही शानदार लेख है ,सच्चाई को अच्छे शब्दों में प्रदर्शित किया है आपने.
    आप सभी से निवेदन है की कृपया इस लेख को जरुर पड़े जिसकी लिंक नीचे दे रहा हू,फिर खुद फैसला करे की ऐसी सरकार क साथ क्या करे,


    जागो देशवासियों ,,कसाब को मलाई खिलाई जा रही है,और साध्वी प्रज्ञा क साथ अमानवीय बर्ताव किया जा रहा है,यही है हिंदुस्तान ,,जबकि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर कोई इलज़ाम भी साबित नहीं हुआ है,,,,मेरे प्रिय हिंदुस्तान के रहने वालो अब समय आ गया है,विवेकानंद के कथन को सत्य करने का --"उठो जागो ....,और रुको मत,जब तक की ध्येय की प्राप्ति न हो जाये",,,,और ध्येय हमारा एकमात्र माँ भारती को इन भ्रष्टाचारियो से और देशद्रोहियों से आज़ाद करवाना.

    http://ud-rock.blogspot.in/2012/09/blog-post_5.html

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  5. क़ुरआन पढ़ते ही पता चल गया कि यह ईश्वरीय ग्रंथ है।

    आस्ट्रेलिया की नागरिक ज़ैनब टेलर इस्लाम धर्म के वैभव के समक्ष नतमस्तक हो गयीं और धर्म की उच्च शिक्षाओं से लाभान्वित हो रही है। उन्होंने जून वर्ष 2005 में हज़रत फ़ातेमा के चरित्र के आयामों पर होने वाली अंतर्राष्ट्रीय कांफ़्रेस में भाग लेने के लिए ईरान की यात्रा की थी। वह इस्लाम धर्म स्वीकार करने के बारे में कहती हैं कि मैं आस्ट्रेलिया जैसे देश से ईरान आयी। वहां पर अंगुलियों पर मुसलमानों को गिना जा सकता है। मैं इससे पहले ईसाई धर्म की अनुयायी थी। यहां तक कि मेरे एक मित्र ने ईश्वरीय उपहार के रूप में मुझे इस्लामी पुस्तकों से परिचित करवाया। वह पुस्तकें मेरे लिए बहुत ही रोचक थीं। अलबत्ता इन रोचक पुस्तकों में जो सबसे महत्त्वपूर्ण पुस्तक थी वह पवित्र क़ुरआन था। मैं अभी मुसलमान नहीं हुई थी कि मैंने पवित्र क़ुरआन का अध्ययन आरंभ कर दिया। इस पुस्तक को पढ़ने से मेरे भीतर एक आभास पैदा हुआ और इस आभास ने मुझपर यह स्पष्ट कर दिया कि यह पुस्तक ज़मीनी नहीं बल्कि आसमानी है। एकेश्वरवाद और आदर्श व्यवहार के लिए पवित्र क़ुरआन एक बेहतरीन मार्ग दर्शक है और उसके नियम हमारे आज के संसार के नियमों व सिद्धांतों से पूर्ण रूप से समन्वित हैं और सदैव अनुसरण योग्य हैं। मेरा मानना है कि मनुष्य को अपने रचयिता और इस सृष्टि के रचनाकार से सीधे संपर्क की सदैव आवश्यकता होती है। मैंने भी अपने भीतर इस आवश्यकता का आभास किया। यद्यपि यह संपर्क दुआओं और ईश्वरीय गुणगान के माध्यम से हमें प्राप्त हो जाता है किन्तु स्वयं ईश्वर के शब्दों अर्थात क़ुरआन तक पहुंच हमारे लिए बहुत आनन्ददायक थी। सबसे पहले मैंने अंग्रेज़ी में क़ुरआन पढ़ना सीखा और बाद में अरबी में। उसके बाद मैंने अंतिम ईश्वरीय दूत हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लाहो अलैह व आलेही वसल्लम की जीवनी का अध्ययन किया। मैंने धीरे धीरे इस्लाम को पहचाना। मुझे पूरी तरह ईश्वर पर भरोसा है और मुझे इस बात पर पूरा ईमान है कि यदि संसार में मार्गदर्शन का कोई दीप है तो वह इस्लाम है।

    सुश्री ज़ैनब टेलर अपनी समस्त समस्याओं के बावजूद आशा से ओतप्रोत हृदय की स्वामी हैं और वह इन शब्दों द्वारा अपनी भीतरी और गहरी प्रसन्नता को व्यक्त करते हुए कहती हैं कि उन समस्त बातों के साथ जो मैंने आपको बतायी हैं, मैं बहुत प्रसन्न और सौभाग्यशाली हूं क्योंकि मैं अपने पति और बच्चों के साथ इस्लाम के अथाह समुद्र में जीवन व्यतीत रही हूं।
    SUNNIKING TEAM

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  6. कुरआन और विज्ञान - अंतिमाक्षर (Final Verdict)

    पवित्र क़ुरआन में वैज्ञानिक यथार्थ की उपस्थिति को संयोग क़रार देना दर अस्ल एक ही समय में वास्तविक बौद्धिकता और सही वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बिल्कुल विरूद्व है। वास्ताव में क़ुरआन की पवित्र आयतों में शाश्वत वैज्ञानिकता, पवित्र क़ुरआन की स्पष्ट घोषणाओं की ओर संकेत करती है:

    ‘‘शीध्र ही हम उनको अपनी निशानियां सृष्टि में भी दिखाएंगे और उनके अपने ‘‘नफ़्स: मनस्थिति‘ में भी यहां तक कि उन पर यह बात खुल जाएगी कि यह पवित्र क़ुरआन बरहक़: शाश्वत-सत्य है। क्या यह पर्याप्त नहीं कि तेरा रब प्रत्येक वस्तु का गवाह है। (अल-क़ुरआन:सूर: 41 आयत .53 )

    पवित्र क़ुरआन तमाम मानवजाति को निमंत्रण देता है कि वे सब कायनात: सृष्टि‘‘ की संरचना और उत्पत्ति पर चिंतन मनन करें:

    ‘‘ ज़मीन और आसमानों के जन्म में और रात और दिन की बारी बारी से आने में उन होशमंदों के लिये बहुत निशानियां हैं।‘‘(अल-क़ुरआन: सूर 3 आयत 190 )

    पवित्र क़ुरआन में उपस्थित वैज्ञानिक साक्ष्य और अवस्थाएं सिद्ध करते हैं कि यह वाकई ‘‘इल्हामी‘‘ माध्यम से अवतरित हुआ है। आज से 1400 वर्ष पहले कोई व्यक्ति ऐसा नहीं था जो इस तरह महत्वपूर्ण और सटीक वैज्ञानिक यथार्थो पर अधारित कोई किताब लिख सकता।

    यद्यपि पवित्र क़ुरआन कोई वैज्ञानिक ग्रंथ नहीं है बल्कि यह ‘निशानियों - Signs की पुस्तक है। यह निशानियां सम्पूर्ण मानव समुह को निमन्त्रणः दावत देती हैं कि वह पृथ्वी पर अपने अस्तित्व के प्रयोजन और उद्देश्य की अनुभूति करें और प्रकृति से समानता अपनाए हुए रहें। इसमें कोई संदेह नहीं कि पवित्र क़ुरआन अल्लाह ताला द्वारा अवतरित ‘वाणीः कलाम है रब्बुल आलमीनः सृष्टि के ईश्वर की वाणी है, जो सृष्टि का सृजन करने वाला रचनाकार और मालिक भी है और इसका संचालन भी कर रहा है।

    इसमें अल्लाह तआ़ला की एकात्मता वहदानियत के होने का वही संदेश है जिसका, प्रचारः तबलीग़ हज़रत आदम अलैहिस्सलाम, हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम और हुजू़र नबी ए करीम हज़रत मुहम्मद स.अ.व. तक तमाम पैग़म्बरों ने किया है।

    पवित्र क़ुरआन और आधुनिक विज्ञान के विषय पर अब तक बहुत कुछ विस्तार से लिखा जा चुका है और इस क्षेत्र में प्रत्येक क्षण निरंतर शोध जारी है। इन्शाअल्लाह यह शोध भी मानवीय समूह को अल्लाह तआला की वाणी के निकट लाने में सहायक सिद्ध होगा।

    जापानी प्रोफ़ेसर तेजासान ने पवित्र कुरआन में बताई हुई केवल एक वैज्ञानिक निशानी के अटल यथार्थ होने के कारण,, इस्लाम मज़हब धारण किया बहुत सम्भव है कि कुछ लोगों को दस और कुछेक को 100 वैज्ञानिक निशानियों की आवश्यकता हो ताकि वे सब यह मान लें कि पवित्र क़ुरआन अल्लाह द्वारा अवतरित है। कुछ लोग शायद ऐसे भी हों जो हज़ार निशानियां देख लेने और उसकी पुष्टि के बावजूद सच्चाई। सत्य को स्वीकार न करना चाहते हों। पवित्र कुरआन ने निम्नलिखित आयतों में, ऐसे अनुदार दृष्टिकोण वालों की ‘भर्त्सनाः मुज़म्मत की है।

    ‘‘बहरे हैं, गूंगे हैं, अंधे हैं यह अब नहीं पलटेंगे‘‘(अल-क़ुरआन: सूर 2 आयत 18 )

    पवित्र क़ुरआन वैयक्तिक जीवन और सामूहिक समाज, तमाम लोगों के लिये ही सम्पूर्ण जीवन आचारण है। अलहम्दुलिल्लाह पवित्र क़ुरआन हमें ज़िन्दगी गुज़ारने का जो तरीका़ बताता है वे इस सारे, वादों से बहुत ऊपर है, जिसे आधुनिक मानव ने केवल अपनी नासमझी और अज्ञानता के आधार पर अविष्कृत: ईजाद किये हैं। क्या यह सम्भव है कि स्वंय सृजक और रचनाकार मालिक से ज़्यादा बेहतर नेतृत्व कोई और दे सके? मेरी ‘प्रार्थना दुआ‘ है कि अल्लाह तआ़ला मेरी इस मामूली सी कोशिश को स्वीकार करे हम पर ‘दया‘ रहम‘ करे और हमें सन्मार्गः सही रास्ता दिखाए आमीन।
    SUNNIKING TEAM

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