मंगलवार, 11 सितंबर 2012

इस्लाम का दोगला कानून !

जो लोग खुद को सबसे बड़ा सेकुलर साबित करने के लिए मुसलमानों द्वारा किये जा रहे धर्म परिवर्तन के षड्यंत्र पर अपनी ऑंखें बंद कर लेते हैं .और जब मुसलमान छल और बल का प्रयोग करके किसी हिन्दू या गैर मुस्लिम को मुसलमान बना लेते है ,तो इसे धर्म की आजादी बता कर सही बताते हैं . लेकिन यदि कोई व्यक्ति किसी कारण मुसलमान बन जाने पर फिर से अपना पुराना धर्म अपना लेता हैं . तो मुसलमान उसे क़त्ल कर देते है .इसी तरह जब मुसलमान दुसरे धर्म की निंदा करते हैं , तो सेकुलरों के मुंह पर ताले लग जाते है . लेकिन यदि कोई गलती से भी इस्लाम . कुरान . या मुहम्मद के बारे में कुछ कहता हैं . तो मुसलमान हंगामा कर देते हैं .क्योंकि मुहम्मद से लेकर आज के सभी मुल्ले दोगली नीति अपनाते हैं .इनकी कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर है .इस लेख में हदीस और कुरान के आधार इस्लाम के दोगले कानून का पर्दाफाश किया जा रहा है .इस लेख से यह भी पता चल जायेगा कि मुल्ले कितने शातिर होते है ,
1-.इस्लामी पाखंड
अक्सर इस्लाम के प्रचारक लोगों को गुमराह करके ऐसी आयतें बताते हैं , जिन से इस्लाम का असली रूप छुप जाये .और लोगों का धर्म परिवर्तन कराने में आसानी हो . जैसे कि मुहम्मद ने कहा है ,
इस्लाम में कोई जबरदस्ती नहीं है "सूरा - बकरा 2 :256
किसी को मजबूर करके मुसलमान नहीं बनाया जा सकता "सूरा -यूनुस 10 :99
कह दो तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म , और हमारे लिए हमारा धर्म ठीक है "सूरा -काफिरून 106 :6

2-रसूल ही अल्लाह
यदि कुरान और हदीसों दिए गए पक्षपाती और अमानवीय नियमों को गौर से पढ़ा जाये तो . लगेगा कि यह कानून बनाने वाला ईश्वर कदापि नहीं हो सकता .यही बात कुरान की इस आयत से सिद्ध हो जाती है .
जिसने रसूल का आदेश मान लिया ,समझो उसने अल्लाह का आदेश मान लिया " सूरा -निसा 4 :80
3-सभी धर्म सामान नहीं
हमें यह बात अच्छी तरह से समझना चाहिए कि इस्लाम की नजर में सभी धर्म समान नहीं है . यदि ऐसा होता तो मुसलमान लोगों का धर्म परिवर्तन कराने में क्यों लगे रहते है .सेकुलर विचार इस्लाम के विरुद्ध है . यही कुरान कहती है ,
सभी धर्म एक सामान नहीं हो सकते " सूरा -आले इमरान 3 :113
दूसरे धर्म के मामले में तुम्हें लोगों पर तरस नहीं आना चाहिए " सूरा -नूर 24 :2
तुम दूसरों की बातों पर राजी नहीं हो जाओ , क्योंकि न तो यहूदी तुम्हारी बातों पर राजी होंगे और न ईसाई " सूरा -बकरा 2 :120

4-इस्लामी असहिष्णुता
सब जानते हैं कि मुसलमान सभी गैर मुस्लिमों को काफ़िर , मुशरिक और दूसरों के धर्म ग्रंथों को झूठा बताते है ,लेकिन जब कोई इस्लाम , कुरान या मुहम्मद के बारे में उंगली उठाता है .तो हंगामा कर देते है .क्योंकि कुरान में यही कहा गया है ,
जो तुम्हारे धर्म की आलोचना करे , तो उन लोगों से युद्ध करो .जिस से वह ऐसा करने से बाज आयें "सूरा-तौबा 9 :12
हे नबी तुम उन लोगों के साथ सख्ती का बर्ताव करो , जो तुम्हारी बात पर विश्वास नहीं करते "

 सूरा -तौबा 9 :73
5-धर्म की आजादी
मुसलमान हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन कराने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाते है , और कहते हैं कि लोगों को अपनी पसंद का धर्म अपनाने का अधिकार है .लेकिन यह बात सरासर झूठ है . जैसा इस हदीस में कहा है .
रसूल ने कहा कि जो इस्लाम के अलावा कोई दूसरा धर्म अपनाये तो उसे क़त्ल कर देना चाहिए " बुखारी -जिल्द 4 किताब 84 हदीस 57
6-.इरतिदाद
इस्लाम में धर्म परिवर्तन सम्बन्धी जितने भी कानून कुरान और हदीसों में दिए है . सभी एक तरफी और पक्षपाती है . इसके अनुसार गैर मुस्लिम इस्लाम कबूल करके मुसलमान तो बन सकते हैं . लेकिन वापिस अपना पुराना धर्म नहीं अपना सकते .इस्लामी परिभाषा के अनुसार इस्लाम को छोड़कर फिर से अपना धर्म अपनाने को " इरतिदाद(ارتداد"  (Apostsy )कहते हैं .और जो व्यक्ति इस्लाम को छोड़ कर फिर से अपना धर्म अपना लेता है उसे " मुरतिद (مرتد " (Apostate )कहा जाता है .विश्व में जितने भी इस्लामी देश हैं , उनमे इस्लाम को त्यागने की सजा मौत बताई गयी है . जो इन आयतों और हदीसों में कहा है
जो भी इस्लाम से फिर जाये तो उन्हें जहाँ पाओ पकड़ो और उनका वध कर दो " सूरा- निसा 4 :89
यदि किसी ने ईमान के बाद कुफ्र किया ,तो हम उन लोगों को यातना देकर ही रहेंगे ,क्योंकि वह अपराधी हैं " सूरा -तौबा 9 :66
जिन लोगों ने ईमान के बाद फिर से कुफ्र किया , तो उनकी माफ़ी कबूल नहीं होगी .और उनको दुखदायी यातना दी जाएगी "सूरा -तौबा 9 : 91 -92
जिसने ईमान लाने के बाद कुफ्र किया तो उसके लिए कठोर यातना की सजा है "सूरा - नहल 16 :106

जो लोग ईमान लाने के बाद फिर से उसी पुराने धर्म पर चलने लगते हैं ,तो उनको जहाँ पाओ पकड़ो .और उनका वध कर दो .हमने तुम्हें इसका पूरा अधिकार दे दिया है "सूरा -निसा 4 :91
जो लोग पहले तो ईमान लाये ,फिर कुफ्र किया . और फिर से ईमान लाये और फिर कुफ्र किया ,तो उनको कभी माफ़ नहीं किया जायेगा "
 सूरा - निसा 4 :137
रसूल ने कहा कि जो इस्लाम को छोड़ कर फिर से अपना पुराना धर्म अपनाएगा , तो उसे क़त्ल कर देना चाहिए . बुखारी - जिल्द 3 किताब 52 हदीस 260
रसूल ने उन सभी लोगों को क़त्ल कर देने का आदेश दिया था , जिन्होंने इस्लाम छोड़कर फिर से अपना पुराना धर्म अपना लिया था "
बुखारी - जिल्द 4 किताब 87 हदीस 37

अनस बिन मलिक ने कहा कि एक यहूदी पहले तो मुसलमान बन गया , फिर फिर कुछ समय के बाद उसने फिर से यहूदी धर्म अपना लिया . जब रसूल को पता चला तो रसूल ने उसे क़त्ल करवा दिया " बुखारी -जिल्द 4 किताब 89 हदीस 271
7-ईशनिंदा कानून
इस्लामी कानून में कुरान या रसूल का अपमान करने की सजा मौत बताई गई है .कुरान में कहा है ,
जो लोग अल्लाह के रसूल को दुःख पहुंचाते हैं ,उनके लिए रुसवा करने वाली यातना है . और ऐसे लोग जहाँ भी पकडे जायेंगे बुरी तरह से क़त्ल किये जायेंगे "
 सूरा -अहजाब 33 :57 और 61

इस्लामी परिभाषा में , रसूल , कुरान , या इस्लाम पर किसी तरह का आरोप लगाने . या अपमान करने" ईशनिंदा " ( Blasphemy )कहा जाता है . अरबी में इसे " तज्दीफ़تجديف कहा जाता है .दुसरे इस्लामी देशों की तरह पाकिस्तान में भी ईशनिंदा कानून लागु है .जिसकी कुछ धाराएँ दी जा रही हैं .
Pakistan Penal Code

Section 295-C of the Pakistan Penal Code.Whoever by words, either spoken or written or by visible representation or by any imputation, innuendo, or insinuation, directly or indirectly, defiles the sacred name of the Holy Prophet Muhammad (PBUH) shall be punished with death
298-C.Person of Quadiani group, etc., calling himself a Muslim or preaching or propagating his faith

295-B. Defiling, etc., of Holy Qur'an295-C. Use of derogatory remarks, etc., in respect of the Holy Prophe
t
पाकिस्तान के इस अंधे इस्लामी कानून यह अजीब बात है कि अगर कोई अहमदिया खुद को मुसलमान कहता है . तो उसे भी अपराधी माना गया है .और जिसके लिए उसे उम्र कैद की सजा हो सकती है .इसलिए मक्कार मुल्ले गैर मुस्लिमों को फ़साने के लिए इसी कानून का सहारा लेते है. क्योंकि इस कानून के मुताबिक सजा से बचने का एक ही उपाय है ,कि आरोपी इस्लाम कबूल कर ले .
8-मुल्लों की चालाकी
इसी जंगली कानून की आड़ में एक इमाम ने एक ईसाई लड़की को फसा दिया था . जिस के डर से कई ईसाई गाँव छोड़ कर भाग गए थे .यह सत्य घटना इस प्रकार है .
दैनिक भास्कर दिनांक 2 सितम्बर 2012 के अनुसार इस्लामाबाद के एक गाँव के पास रहने वाली एक 13 -14 साल की लड़की "रिमशा मसीह " को ईश निंदा कानून यानि कुरान जलने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था . जिसके लिए उसे मौत की सजा भी हो सकती थी . लेकिन जाँच के बाद पता चला कि वह लड़की मानसिक रूप से अस्वस्थ है . और उसके पडौस में रहने वाले एक इमाम खालिद चिश्ती ने खुद कुरान के पन्ने जलाकर उस लड़की के बैग में छुपा दिए थे .अगर वह धूर्त इमाम पकड़ा नहीं जाता तो लड़की को पाकिस्तान के ईश निंदा कानून की धारा   295Cके अधीन मौत की सजा हो जाती .
9-उस्मान ने कुरान जलवाई
पाकिस्तान के जो मुल्ले जिस छोटी सी . मानसिक रूप से बीमार लड़की पर कुरान जलाने का झूठा आरोप लगाकर मौत की सजा देना चाहते थे , वह यह नहीं बताते कि खुद उनके खलीफा उस्मान ने जानबूझ कर कुरान कि सभी प्रतियों को जलवा दिया था .जिसके कारण कुरान के कई हिस्से आज तक गायब हैं .यह बात कोई हिन्दू नहीं ,बल्कि प्रमाणिक हदीस कह रही है . सबूत देखिये .
अनस बिन मलिक ने कहा कि इराक के कुछ लोग उस्मान के पास गए और बोले कि सीरिया और यमन के लोग कुरान को अलग अलग तरह से पढ़ते है .तब उस्मान ने कुरान की अपने पास वाली प्रति की नकलें करवा कर आसपास के शहरों में भिजवा दीं, और जिसके भी पास कुरान की जो भी प्रतियाँ थी . उनको जलवा दिया .उस्मान ने सईद बिन साबित से यह भी कहा कि मेरे पास जो कुरान थी . उसमे सूरा अहजाब की कुछ आयतें गुम हो गयी थी .
बुखारी - जिल्द 6 किताब 61 हदीस 510

और सबूतों के लिए देखिये ,विडियो
http://www.youtube.com/watch?v=F6p8pJpqgU4

इस लेख का उद्देश्य उन सेकुलरों की आँखें खोलना है जो इस्लाम की कपटी नीति के बारे में ठीक से नहीं जानते . लगता है कि वह पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दुओं की हालत नहीं जानते .याद रखिये कि यदि यही मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति चलती रही ,तो वह दिन दूर नहीं है ,जब इन सेकुलरों की हालत पाकिस्तान के हिन्दुओं से भी बुरी होगी . बताइए फिर शरण लेने के लिए किस देश में जाओगे ?
http://www.thereligionofpeace.com/Quran/012-apostasy.htm

सोमवार, 10 सितंबर 2012

काबा या अल्लाह की कालकोठरी ?

भारत के सभी धर्मों में ईश्वर को सर्वव्यापी ( Omnipresnt ) माना जाता है . अर्थात ईश्वर का निवास किसी विशेष स्थान पर नहीं हो सकता . हम उसकी उपासना किसी भी देश , किसी भी स्थान पर कर सकते हैं .हम श्रद्धा पूर्वक ईइश्वर को जहाँ भी पुकारते है . ईश्वर वहीँ उपस्थित हो जाता है .ईसाइयों के अनुसार उनके खुदा का निवास वैसे तो स्वर्ग के चौथे असमान पर है , लेकिन वह अपने नबियों जैसे , आदम . मूसा और दाऊद से मिलने के लिए पृथ्वी पर उतर जाता था . और नबियों से आमने सामने बातें भी करता था .लेकिन मुसलमानों का अल्लाह सिर्फ जन्नत में बताया जाता है . जैसे कुरान में दिया है .
1--अल्लाह का निवास
"जो एक महान सिंहासन का स्वामी है .सूरा -नम्ल 27 :26
वह एक बड़े सिंहासन पर विराजमान है .सूरा -अत तौबा 9 :29
वह ऊंचाई पर स्थित तख़्त का स्वामी है. सूरा -अल मोमनीन 40 :15
अरबी भाषा में" काबा كعبه"का अर्थ "टखने Ankle " होता है .लेकिन इसका तात्पर्य " उच्च स्थान a high place .इज्जत वाला respected भी होता है .इसे " बैतुल अतीक بيت العتيق" यानि पुराना घर और " मस्जिदुल हरामمسجد الحرام  "यानि वर्जित मस्जिद भी कहा जाता है .
2-अरब में कई काबा थे
इस्लाम से पूर्व अरब में छोटे बड़े मिलाकर लगभग 20 काबा मौजूद थे . और सभी में उपासना होती थी .जिनने कुछ प्रसिद्ध कबाओं के बारे में हदीसों में भी उल्लेख है .यह इस प्रकार हैं .इस्लाम से पहले के एक कवि " जोहैर इब्न अबी सलमा " ने अपनी किताब"अल मुआल्ल्का " में अरब के कुछ प्रसिद्ध काबा के नाम दिए हैं .
1 . नजरान काबा ,यह मक्का से दक्षिण में था 2 .सिंदाद काबा यह कूफा में था 3 .जुल खलश काबा यह मक्का के पूर्व में था .शद्दाद काबा 4 .गफ्तान काबा इसे सन 624 में तुड़वा दिया गया 5 . मक्का का काबा जो कुरैश लोगों ने बनाया था .इनमे कुछ ऐसे भी थे जिनमे मूर्ति पूजा नहीं होती थी . फिर भी मुहम्मद ने उन्हें तुड़वा दिया . यह हदीसों से साबित है जैसे
1.नजरान काबा
नजरान के जब्ल तसल की पहाड़ी पर एक काबा था . जहाँ जादातर ईसाई थे . जो मूर्तिपूजक नहीं थे . कुछ अरब भी वहां इबादत करते थे .मुहम्मद ने सन 631 में वहां हमला किया , और लोगों को इस्लाम कबूल करने को कहा . और जब उन लोगों ने इंकार किया तो मुहम्मद वहां के सभी 2000 लोगों को क़त्ल करा कर उनकी लाशें जलवा दीं." सही मुस्लिम - किताब 4 हदीस 1003
2-गफ्तान काबा
अरब के नज्द शहर के पास बनी गफ्तान यहूदी कबीले का एक काबा था .वह लोग मूर्ति पूजक नहीं थे . लेकिन अरब के लोग उस काबा को भेंट चढाते थे . जब मुहम्मद को पता चला तो उसने इस्लामी महीने जमादुल ऊला हिजरी 4 सन 624 को मदीना से आकर वहां हमला किया . और लोगों को क़त्ल करके वह काबा नष्ट करा दिया . बुखारी - किताब 8 हदीस 630
3-यमनी काबा
जरीर बिन अब्दुल्लाह ने कहा मैंने रसूल को बताया कि यमन में एक और काबा है . जिसे लोग " जिल खलश ذي هلسا" या " काबा अल यमनिया" और " काबा अश शम्शिया  الكعبة الشامية " कहते हैं . वहां "अहमस " कबीले के लोग रहते है . यह सुनते ही रसूल ने कहा तुम तुरंत फ़ौज लेकर वहां जाओ . और उस काबा को तोड़ दो . और वहां मौजूद सभी लोगों को क़त्ल कर दो .क्योंकि दुनिया में एक ही काबा रह सकता है .
बुखारी -जिल्द 5 किताब 58 हदीस 160

जबीर ने कहा कि इस काबा के उत्तर में यमन में अहमस कबीले का एक और काबा था . जिसे " जुल खलश" काबा कहते थे . रसूल के कहने से हम 350 घुड सवारों की फ़ौज लेकर गए और वहां के सभी लोगों को क़त्ल करके और उस काबा को नष्ट करके वापस आ गए .
सही मुस्लिम किताब 31 हदीस 6052
मुहम्मद के आदेश से अप्रेल सन 632 यानि हिजरी 10 मुसलमानों ने यमन का काबा नष्ट कर दिया . और वहां मौजूद सभी लोगों को क़त्ल कर दिया
.बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 641

3-कुरान का झूठा दावा और काबा
मुसलमान समझते हैं कि काबा का निर्माण इब्राहीम ने अपने हाथों से किया था . जैसा कुरान कि कुरान में लिखा है ,
"याद रखो जब हमने काबा को केंद्र बनाया और इब्राहीम को आदेश दिया कि इस जगह को इबादत की जगह बनाओ ,और इस काम की इब्राहीम और इस्माइल को जिम्मेदारी सौंप दी " सूरा - बकरा 2 :125
"और जब इब्राहीम और इस्माइल काबा की नींव रख रहे थे ,तो उन्होंने दुआ की थी ,कि हमारी तरफ इस घर को स्वीकार कर लो " सूरा - 2 :127

4-बाइबिल से प्रमाण
कुरान का यह दावा कि काबा इब्राहीम ने बनाया था . सरासर झूठ है . क्योंकि बाइबिल अनुसार इब्राहीम और इस्माइल अरब या मक्का कभी नहीं गए .चूँकि बाइबिल कुरान से काफी पुरानी है . इसलिए उसकी बात सही है . उसमे लिखा है .
"फिर इब्राहीम ऊर से निकल कर बेतेल के पूर्व में एक पहाड़ पर तंबू बनाकर रहने लगा .और वहीं उसने एक वेदी भी बनायीं "उत्पत्ति 12 :8
फिर कुछ सालों के बाद इब्राहीम अपना तम्बू उखाड़ कर ममरे के बांजों में हेब्रोन में जाकर बस गया . और जीवन भर वहीं रहा "उत्पत्ति 13 :18
इब्राहीम कनान देश के ऊर शहर में पैदा हुआ था . और जब बूढ़ा हुआ तो 175 साल की आयु में मर गया . उसके लडके इशक और इस्माइल ने उसे मकपेला की गुफा में दफना दिया .अर्थात जो जमीन उसने हित्तियों से खरीदी थी .बाद में इब्राहीम की पत्नी सारा को भी उसी जमीन में दफना दिया गया "बाईबिल .उत्पत्ति 25 :9 -10
" और जब इस्माइल भी 137 साल का होकर मरा तो उसे भी उसी भूमि में दफना दिया गया ."उत्पति 25 :17
5-मुहम्मद का सफ़ेद झूठ
अबू जर ने कहा मैंने रसूल से पूछा कि दुनिया में सबसे पहले अल्लाह का कौन सा घर बना था . रसूल बोले " मस्जिदुल हराम " यानि काबा . फिर मैंने पूछा दूसरा घर कौन सा बना है तो रसूल बोले " मस्जिदुल अक्सा " जो यरूशलेम में है .फिर मैंने पूछा इन दौनों घरों के निर्माण में कितने सालों का अंतर है . तो रसूल बोले चालीस साल ' बुखारी - जिल्द 4 किताब 55 हदीस 636
6-यरूशलेम का मंदिर
यरूशलेम स्थित जिस मस्जिद को मुसलमान " बैतुल मुकद्दस " कहते हैं उसे हिब्रू में " बेथ ह मिकदिश בֵּית־הַמִּקְדָּשׁ‎" कहते है .मुसलमान इसे " मस्जिदुल अक्सा " भी कहते हैं .इसका निर्माण राजा सुलेमान ( Solomon ) ने 957 ई० पू . में किया था . वास्तव में वह मस्जिद नहीं एक यहूदी मंदिर Temple था . जहाँ वेदी पर चढ़ावा चढ़ाता था और स्तुति होती थी
7-किबला का परिवर्तन
मुसलमान जिस उपासना स्थल की तरफ नमाज पढ़ते हैं उसे " क़िबला " कहा जाता है .पहले मुसलमान यरूशलेम के मंदिर की तरफ नमाज पढ़ते थे . लेकिन मुहम्मद ने 11 फरवरी सन 624 ( शाबान महीना हिजरी 2 ) अचानक मुसलमानों को काबा की तरफ नमाज पढ़ने का हुक्म दे दिया . यह बात कुरान में भी इस तरह लिखी है
"यह मूर्ख लोग कहते हैं कि मुसलमान जिस किबले पर थे उसे किस चीज ने फेर दिया " सूरा- 2 :142
"तो समझ लो हमीं हैं . जो तुम्हें उस किबले से उस किबले की तरफ फेरे देते हैं . जिसे तुम पसंद करोगे . और अब तुम अपना मुंह मस्जिदुल हराम यानि काबा की तरफ फेर दो " सूरा -बकरा 2 :144
8-काबा में चित्र और मूर्तियाँ
प्रसिद्ध इतिहासकार , F. E. Peters ने अपनी पुस्तक " The Hajj " के पेज 3 से 41 में काबा के बारे में बताया है ,यह किताब सन 1994 में प्रकाशित हुई है .इसके अनुसार मुहम्मद का एक पूर्वज "अम्र इब्न लुहैय(Amr ibn Luhayy )जब एकबार मेसोपोटामिया गया था तो , वहां से " हुब्ल( Hubl ) नामके देवता की मूर्ति लाया था . और मक्का के काबा में लगा दी थी . लोग हुब्ल को सबसे बड़ा देवता मानते थे , फिर देखादेखी कुरैश लोगों ने काबा में कई देवी देवताओं की मूर्तियाँ लगा दी .काबा में मरियम . इब्राहीम और इस्माइल के चित्र भी लगे थे . जिन पर लोग धन चढाते थे.जो पुजारियों में बाँट दिया जाता था . काबा के पुजारी को " शेख " कहा जाता था . मुहम्मद के समय मुख्य पुजारी " अबू सुफ़यान " था
इब्न अब्बास ने कहा कि जब रसूल काबा के अन्दर जाने लगे तो देखा कि वहां दीवार पर इब्राहीम और इस्माइल की तस्वीर बनी हुई है . जो हाथों में तीर लेकर उनकी संख्या गिन कर शकुन निकाल रहे है . रसूल बोले लानत है कुरैश पर . इब्राहिम और इस्माइल ने कभी ऐसा नहीं किया . तुम इस तस्वीर को मिटा डालो "
 बुखारी - जिल्द 4 किताब 55 हदीस 571

.देखिये विडियो Islam Exposed: Kaaba is the House of Idols:

http://www.youtube.com/watch?v=NgQjzNYklr0
9-मूर्तियाँ तोड़ने का कारण
उस समय काबा के अन्दर और दीवार के पास 360 देवी देवताओं की मूर्तियाँ रखी थी .जिनकी पूजा करने के लिए हर कबीले के कई पुजारी रहते थे . जिन्हें शेख कहा जाता था .चूँकि मक्का यमन से सीरिया जाने वाले मुख्य व्यापारिक में पड़ता था इसलिए काफिले वाले काबा के देवताओं पर जो धन चढाते थे वह सभी पुजारियों में बंट जाता था .और अक्सर बहुत कम चढ़ावा आता था .मुहम्मद से समय मुख्य पुजारी " अबू सुफ़यान " था . मुहम्मद ने रमजान के महीने हिजरी 8 सन 630 को उसे कैद कर लिया और कई पुजारियों को क़त्ल करा दिया .और काबा की सभी मूर्तियों को तोड़ कर काबा अपने रिश्तेदारों के हवाले कर दिया .और कहा "सत्य आ गया और असत्य मिट गया " सूरा -बनी इसराइल 17 :81
हमने तो कुरैश के लोगों से रिश्ता बना लिया . और उन्हीं को अल्लाह के इस घर की इबादत करने के लिए नियुक्त कर दिया . ताकि भूखों मरने के डर से बच सकें . और निश्चिन्त होकर खाएं पियें .सूरा- कुरैश 106 : 1 से 4 तक
10-काबा के अन्दर क्या है ?
काबा की लम्बाई 39 .6 इंच है .और कुल क्षेत्रफल 627 फुट है . यानि 13 x 9 वर्ग मीटर है छत की ऊंचाई 2 .2 मीटर और दीवार एक मीटर मोटी है
उत्तरी अमेरिका के इस्लामी सोसायटी के अध्यक्ष को 1998 में काबा के अन्दर जाने का अवसर मिला था . उन्होंने जो देखा वह इस प्रकार है ,अन्दर दो खम्भे हैं . एक सुगंधी जलाने चौकी है . छत पर कंदील लटका है लेकिन बिजली नहीं है . कोई खिड़की नहीं है . बह एक ही दरवाजा है .देखिये विडियो
Inside Kaaba Video

http://www.youtube.com/watch?NR=1&feature=fvwp&v=17XG-kxUskY

इन सभी प्रमाणों से निम्न बातें स्पष्ट रूप से सिद्ध होती है कि  1.मुसलमानों का अल्लाह ईश्वर नहीं हो सकता क्योंकि वह सर्वव्यापी नहीं है .यदि वह सर्वव्यापी है तो किसी और देश में काबा क्यों नहीं बन सकता .2 - मुहम्मद को यरूशलेम के इतिहास का कोई ज्ञान नहीं था , इस लिए उसे अल्लाह का रसूल मानना मुर्खता है 3 .मुहम्मद का एकेश्वरवाद सिर्फ पाखंड था . वह उसके बहाने दुसरे धर्म स्थानों को लूटना चाहता था . वर्ना उसने उन कबाओं को क्यों तोडा जहाँ मूर्ति पूजा नहीं होती थी .4.अगर अल्लाह सचमुच जिन्दा है तो वह आज किसी मुल्ले मौलवी से बात क्यों नहीं करता , क्या सभी मुसलमान पापी हैं ?5 . मुहमद ने अपने कुनबे के लोगों का हमेशा के लिए पेट भरने का इंतजाम कर दिया था .लेकिन वास्तविकता तो यही है कि अल्लाह चाहे कैसा भी रहा होगा वह आज तक एक ऐसी अँधेरी और बंद कालकोठरी में कैद है , जिसमे हवा भी नहीं जा सकती .
अल्लाह काबा में कैद है . और कैदी की उपासना बेकार है !
http://www.bible.ca/islam/islam-kaba-history.htm