सोमवार, 10 सितंबर 2012

काबा या अल्लाह की कालकोठरी ?

भारत के सभी धर्मों में ईश्वर को सर्वव्यापी ( Omnipresnt ) माना जाता है . अर्थात ईश्वर का निवास किसी विशेष स्थान पर नहीं हो सकता . हम उसकी उपासना किसी भी देश , किसी भी स्थान पर कर सकते हैं .हम श्रद्धा पूर्वक ईइश्वर को जहाँ भी पुकारते है . ईश्वर वहीँ उपस्थित हो जाता है .ईसाइयों के अनुसार उनके खुदा का निवास वैसे तो स्वर्ग के चौथे असमान पर है , लेकिन वह अपने नबियों जैसे , आदम . मूसा और दाऊद से मिलने के लिए पृथ्वी पर उतर जाता था . और नबियों से आमने सामने बातें भी करता था .लेकिन मुसलमानों का अल्लाह सिर्फ जन्नत में बताया जाता है . जैसे कुरान में दिया है .
1--अल्लाह का निवास
"जो एक महान सिंहासन का स्वामी है .सूरा -नम्ल 27 :26
वह एक बड़े सिंहासन पर विराजमान है .सूरा -अत तौबा 9 :29
वह ऊंचाई पर स्थित तख़्त का स्वामी है. सूरा -अल मोमनीन 40 :15
अरबी भाषा में" काबा كعبه"का अर्थ "टखने Ankle " होता है .लेकिन इसका तात्पर्य " उच्च स्थान a high place .इज्जत वाला respected भी होता है .इसे " बैतुल अतीक بيت العتيق" यानि पुराना घर और " मस्जिदुल हरामمسجد الحرام  "यानि वर्जित मस्जिद भी कहा जाता है .
2-अरब में कई काबा थे
इस्लाम से पूर्व अरब में छोटे बड़े मिलाकर लगभग 20 काबा मौजूद थे . और सभी में उपासना होती थी .जिनने कुछ प्रसिद्ध कबाओं के बारे में हदीसों में भी उल्लेख है .यह इस प्रकार हैं .इस्लाम से पहले के एक कवि " जोहैर इब्न अबी सलमा " ने अपनी किताब"अल मुआल्ल्का " में अरब के कुछ प्रसिद्ध काबा के नाम दिए हैं .
1 . नजरान काबा ,यह मक्का से दक्षिण में था 2 .सिंदाद काबा यह कूफा में था 3 .जुल खलश काबा यह मक्का के पूर्व में था .शद्दाद काबा 4 .गफ्तान काबा इसे सन 624 में तुड़वा दिया गया 5 . मक्का का काबा जो कुरैश लोगों ने बनाया था .इनमे कुछ ऐसे भी थे जिनमे मूर्ति पूजा नहीं होती थी . फिर भी मुहम्मद ने उन्हें तुड़वा दिया . यह हदीसों से साबित है जैसे
1.नजरान काबा
नजरान के जब्ल तसल की पहाड़ी पर एक काबा था . जहाँ जादातर ईसाई थे . जो मूर्तिपूजक नहीं थे . कुछ अरब भी वहां इबादत करते थे .मुहम्मद ने सन 631 में वहां हमला किया , और लोगों को इस्लाम कबूल करने को कहा . और जब उन लोगों ने इंकार किया तो मुहम्मद वहां के सभी 2000 लोगों को क़त्ल करा कर उनकी लाशें जलवा दीं." सही मुस्लिम - किताब 4 हदीस 1003
2-गफ्तान काबा
अरब के नज्द शहर के पास बनी गफ्तान यहूदी कबीले का एक काबा था .वह लोग मूर्ति पूजक नहीं थे . लेकिन अरब के लोग उस काबा को भेंट चढाते थे . जब मुहम्मद को पता चला तो उसने इस्लामी महीने जमादुल ऊला हिजरी 4 सन 624 को मदीना से आकर वहां हमला किया . और लोगों को क़त्ल करके वह काबा नष्ट करा दिया . बुखारी - किताब 8 हदीस 630
3-यमनी काबा
जरीर बिन अब्दुल्लाह ने कहा मैंने रसूल को बताया कि यमन में एक और काबा है . जिसे लोग " जिल खलश ذي هلسا" या " काबा अल यमनिया" और " काबा अश शम्शिया  الكعبة الشامية " कहते हैं . वहां "अहमस " कबीले के लोग रहते है . यह सुनते ही रसूल ने कहा तुम तुरंत फ़ौज लेकर वहां जाओ . और उस काबा को तोड़ दो . और वहां मौजूद सभी लोगों को क़त्ल कर दो .क्योंकि दुनिया में एक ही काबा रह सकता है .
बुखारी -जिल्द 5 किताब 58 हदीस 160

जबीर ने कहा कि इस काबा के उत्तर में यमन में अहमस कबीले का एक और काबा था . जिसे " जुल खलश" काबा कहते थे . रसूल के कहने से हम 350 घुड सवारों की फ़ौज लेकर गए और वहां के सभी लोगों को क़त्ल करके और उस काबा को नष्ट करके वापस आ गए .
सही मुस्लिम किताब 31 हदीस 6052
मुहम्मद के आदेश से अप्रेल सन 632 यानि हिजरी 10 मुसलमानों ने यमन का काबा नष्ट कर दिया . और वहां मौजूद सभी लोगों को क़त्ल कर दिया
.बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 641

3-कुरान का झूठा दावा और काबा
मुसलमान समझते हैं कि काबा का निर्माण इब्राहीम ने अपने हाथों से किया था . जैसा कुरान कि कुरान में लिखा है ,
"याद रखो जब हमने काबा को केंद्र बनाया और इब्राहीम को आदेश दिया कि इस जगह को इबादत की जगह बनाओ ,और इस काम की इब्राहीम और इस्माइल को जिम्मेदारी सौंप दी " सूरा - बकरा 2 :125
"और जब इब्राहीम और इस्माइल काबा की नींव रख रहे थे ,तो उन्होंने दुआ की थी ,कि हमारी तरफ इस घर को स्वीकार कर लो " सूरा - 2 :127

4-बाइबिल से प्रमाण
कुरान का यह दावा कि काबा इब्राहीम ने बनाया था . सरासर झूठ है . क्योंकि बाइबिल अनुसार इब्राहीम और इस्माइल अरब या मक्का कभी नहीं गए .चूँकि बाइबिल कुरान से काफी पुरानी है . इसलिए उसकी बात सही है . उसमे लिखा है .
"फिर इब्राहीम ऊर से निकल कर बेतेल के पूर्व में एक पहाड़ पर तंबू बनाकर रहने लगा .और वहीं उसने एक वेदी भी बनायीं "उत्पत्ति 12 :8
फिर कुछ सालों के बाद इब्राहीम अपना तम्बू उखाड़ कर ममरे के बांजों में हेब्रोन में जाकर बस गया . और जीवन भर वहीं रहा "उत्पत्ति 13 :18
इब्राहीम कनान देश के ऊर शहर में पैदा हुआ था . और जब बूढ़ा हुआ तो 175 साल की आयु में मर गया . उसके लडके इशक और इस्माइल ने उसे मकपेला की गुफा में दफना दिया .अर्थात जो जमीन उसने हित्तियों से खरीदी थी .बाद में इब्राहीम की पत्नी सारा को भी उसी जमीन में दफना दिया गया "बाईबिल .उत्पत्ति 25 :9 -10
" और जब इस्माइल भी 137 साल का होकर मरा तो उसे भी उसी भूमि में दफना दिया गया ."उत्पति 25 :17
5-मुहम्मद का सफ़ेद झूठ
अबू जर ने कहा मैंने रसूल से पूछा कि दुनिया में सबसे पहले अल्लाह का कौन सा घर बना था . रसूल बोले " मस्जिदुल हराम " यानि काबा . फिर मैंने पूछा दूसरा घर कौन सा बना है तो रसूल बोले " मस्जिदुल अक्सा " जो यरूशलेम में है .फिर मैंने पूछा इन दौनों घरों के निर्माण में कितने सालों का अंतर है . तो रसूल बोले चालीस साल ' बुखारी - जिल्द 4 किताब 55 हदीस 636
6-यरूशलेम का मंदिर
यरूशलेम स्थित जिस मस्जिद को मुसलमान " बैतुल मुकद्दस " कहते हैं उसे हिब्रू में " बेथ ह मिकदिश בֵּית־הַמִּקְדָּשׁ‎" कहते है .मुसलमान इसे " मस्जिदुल अक्सा " भी कहते हैं .इसका निर्माण राजा सुलेमान ( Solomon ) ने 957 ई० पू . में किया था . वास्तव में वह मस्जिद नहीं एक यहूदी मंदिर Temple था . जहाँ वेदी पर चढ़ावा चढ़ाता था और स्तुति होती थी
7-किबला का परिवर्तन
मुसलमान जिस उपासना स्थल की तरफ नमाज पढ़ते हैं उसे " क़िबला " कहा जाता है .पहले मुसलमान यरूशलेम के मंदिर की तरफ नमाज पढ़ते थे . लेकिन मुहम्मद ने 11 फरवरी सन 624 ( शाबान महीना हिजरी 2 ) अचानक मुसलमानों को काबा की तरफ नमाज पढ़ने का हुक्म दे दिया . यह बात कुरान में भी इस तरह लिखी है
"यह मूर्ख लोग कहते हैं कि मुसलमान जिस किबले पर थे उसे किस चीज ने फेर दिया " सूरा- 2 :142
"तो समझ लो हमीं हैं . जो तुम्हें उस किबले से उस किबले की तरफ फेरे देते हैं . जिसे तुम पसंद करोगे . और अब तुम अपना मुंह मस्जिदुल हराम यानि काबा की तरफ फेर दो " सूरा -बकरा 2 :144
8-काबा में चित्र और मूर्तियाँ
प्रसिद्ध इतिहासकार , F. E. Peters ने अपनी पुस्तक " The Hajj " के पेज 3 से 41 में काबा के बारे में बताया है ,यह किताब सन 1994 में प्रकाशित हुई है .इसके अनुसार मुहम्मद का एक पूर्वज "अम्र इब्न लुहैय(Amr ibn Luhayy )जब एकबार मेसोपोटामिया गया था तो , वहां से " हुब्ल( Hubl ) नामके देवता की मूर्ति लाया था . और मक्का के काबा में लगा दी थी . लोग हुब्ल को सबसे बड़ा देवता मानते थे , फिर देखादेखी कुरैश लोगों ने काबा में कई देवी देवताओं की मूर्तियाँ लगा दी .काबा में मरियम . इब्राहीम और इस्माइल के चित्र भी लगे थे . जिन पर लोग धन चढाते थे.जो पुजारियों में बाँट दिया जाता था . काबा के पुजारी को " शेख " कहा जाता था . मुहम्मद के समय मुख्य पुजारी " अबू सुफ़यान " था
इब्न अब्बास ने कहा कि जब रसूल काबा के अन्दर जाने लगे तो देखा कि वहां दीवार पर इब्राहीम और इस्माइल की तस्वीर बनी हुई है . जो हाथों में तीर लेकर उनकी संख्या गिन कर शकुन निकाल रहे है . रसूल बोले लानत है कुरैश पर . इब्राहिम और इस्माइल ने कभी ऐसा नहीं किया . तुम इस तस्वीर को मिटा डालो "
 बुखारी - जिल्द 4 किताब 55 हदीस 571

.देखिये विडियो Islam Exposed: Kaaba is the House of Idols:

http://www.youtube.com/watch?v=NgQjzNYklr0
9-मूर्तियाँ तोड़ने का कारण
उस समय काबा के अन्दर और दीवार के पास 360 देवी देवताओं की मूर्तियाँ रखी थी .जिनकी पूजा करने के लिए हर कबीले के कई पुजारी रहते थे . जिन्हें शेख कहा जाता था .चूँकि मक्का यमन से सीरिया जाने वाले मुख्य व्यापारिक में पड़ता था इसलिए काफिले वाले काबा के देवताओं पर जो धन चढाते थे वह सभी पुजारियों में बंट जाता था .और अक्सर बहुत कम चढ़ावा आता था .मुहम्मद से समय मुख्य पुजारी " अबू सुफ़यान " था . मुहम्मद ने रमजान के महीने हिजरी 8 सन 630 को उसे कैद कर लिया और कई पुजारियों को क़त्ल करा दिया .और काबा की सभी मूर्तियों को तोड़ कर काबा अपने रिश्तेदारों के हवाले कर दिया .और कहा "सत्य आ गया और असत्य मिट गया " सूरा -बनी इसराइल 17 :81
हमने तो कुरैश के लोगों से रिश्ता बना लिया . और उन्हीं को अल्लाह के इस घर की इबादत करने के लिए नियुक्त कर दिया . ताकि भूखों मरने के डर से बच सकें . और निश्चिन्त होकर खाएं पियें .सूरा- कुरैश 106 : 1 से 4 तक
10-काबा के अन्दर क्या है ?
काबा की लम्बाई 39 .6 इंच है .और कुल क्षेत्रफल 627 फुट है . यानि 13 x 9 वर्ग मीटर है छत की ऊंचाई 2 .2 मीटर और दीवार एक मीटर मोटी है
उत्तरी अमेरिका के इस्लामी सोसायटी के अध्यक्ष को 1998 में काबा के अन्दर जाने का अवसर मिला था . उन्होंने जो देखा वह इस प्रकार है ,अन्दर दो खम्भे हैं . एक सुगंधी जलाने चौकी है . छत पर कंदील लटका है लेकिन बिजली नहीं है . कोई खिड़की नहीं है . बह एक ही दरवाजा है .देखिये विडियो
Inside Kaaba Video

http://www.youtube.com/watch?NR=1&feature=fvwp&v=17XG-kxUskY

इन सभी प्रमाणों से निम्न बातें स्पष्ट रूप से सिद्ध होती है कि  1.मुसलमानों का अल्लाह ईश्वर नहीं हो सकता क्योंकि वह सर्वव्यापी नहीं है .यदि वह सर्वव्यापी है तो किसी और देश में काबा क्यों नहीं बन सकता .2 - मुहम्मद को यरूशलेम के इतिहास का कोई ज्ञान नहीं था , इस लिए उसे अल्लाह का रसूल मानना मुर्खता है 3 .मुहम्मद का एकेश्वरवाद सिर्फ पाखंड था . वह उसके बहाने दुसरे धर्म स्थानों को लूटना चाहता था . वर्ना उसने उन कबाओं को क्यों तोडा जहाँ मूर्ति पूजा नहीं होती थी .4.अगर अल्लाह सचमुच जिन्दा है तो वह आज किसी मुल्ले मौलवी से बात क्यों नहीं करता , क्या सभी मुसलमान पापी हैं ?5 . मुहमद ने अपने कुनबे के लोगों का हमेशा के लिए पेट भरने का इंतजाम कर दिया था .लेकिन वास्तविकता तो यही है कि अल्लाह चाहे कैसा भी रहा होगा वह आज तक एक ऐसी अँधेरी और बंद कालकोठरी में कैद है , जिसमे हवा भी नहीं जा सकती .
अल्लाह काबा में कैद है . और कैदी की उपासना बेकार है !
http://www.bible.ca/islam/islam-kaba-history.htm

33 टिप्‍पणियां:

  1. kaaba ke baare me nayi jaankari ke liye dhanyavad.

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    2. kooch muslim maal ho to bhejey

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  2. sharma mudh buddhi tu phir shuru ho gaya. Koi bhi baat tod marod kar pesh karna koi tujh se sikhe.

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  3. aasif teri maa ki choot bhosdi ke randi ki aulaad

    main bol raha hoo teri maa ka ashique

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  4. thik hai tumhara bhagvaan sharvvyapi [har cheez main ]hai tab to vo vo insaan ke pakhaane main bhi hoga gatar ke paani main bhi hoga mere peshaab main bhi hoga kya kahe umhari akl ke , tabhi tum apne shankar bhagvaan ke ling [penish ] ki poooja karte ho sorry ling -yoni vo yoni [ vagina ] tumhari mata paarvati ki hai jai ho ha ha ha bahut achhhhe

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    1. SUVAR KI NAJAYAZ AULAD, TERI BEHAN KA BOSDA MARA PHONE NUMBER DE APNA

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    2. raj khan pados ke papu patyawri ki najayaj aulad,,tum sab katwe najayaj aulad ho gaduoo..apni hi bahan ko chodte ho behanchodo...tum hsuar ki aaulado apni hi aulad ke mamu jaan hote ho or uike abu jaan ,,kya iman h tum madarchodo ka...sharam h to duub maro..allah k darbar m hi bakara khata ho..bolte ho murtiu puja nahi karte to makka m apni maa chudwate ho kya..kaaba k ander tumhara ma ka bhosda koi muyhamaad nahi h balki shivling h..tabhji sabhi mille wha safed dhoti pehan k hinduo ki trha us kaaba k cahro or 7 chakkar lgat h..aisa sirf hinduo m hota h ..dekha h kisi or masjid m aisa hote huye..hum hi tumhare baap h katwo maan lo

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  5. aasif tu bhi shankar =paarvati ke penish+vegina [ling =yoni ] ki pujaa chaaalooo kar de

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    1. TERI MAA KI CHUT MARI MADARCHOD HARAM KE BEEJ

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  6. sharma nhi hai ye christian hai. tere pope ko jesus se baat kyu nhi karta hai sharma ? tera GOD tujhse baat kyu nhi karta hai sharma ? Holy Spirit baat kyu nhi karta sharma ? tum shadi kaise karte ho sharma ?

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  7. agr tu itna saccha hai sharma to tere bhagwaan tujse baat kyu nhi karta hai

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  8. sharam bible se saabit karta hai k bible purani kitab hai isliye uski baat maani jaygi abe hizde sharma sharam nhi aayi tujhe likhne me. saale wo BIBLE ki baat kar raha hai jisko apne hatho se change kar dete ho agr change nhi karte to Bible me OLD Testiment new testiment kya hai. Protestant aur Catholic ki bible me difernt kyu hai Sharma ? kya Christian logo k pass Hazrat Isaa (AS) ki puri zindagi hai ? agr sach me hai to aaj tak christian Isaa (AS) k missing days ka pata kyu laga rahe hai ? saalo jab tumhare pass tumhare paigamber ki hi puri zindagi nhi hai. to tum Hazrat Ibrahim (AS) ki zindagi ka pura detail kaha se laoge bible se ? kya sharma nikal gayi hawa teri. Christian Dalaal...............

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    1. क्रोध अज्ञानता का कारण है। यदि बेनामी भाई साहब .. आप के पास इन बातो के खंडन करने का कोई प्रमाण हो तो आप को उन बातो को प्रकाश में लाना चाहिए। आप के अपशब्द बता रहे है कि आप को ज्ञान नहीं है और आप अपने अहंकार के सामने झुकना पसंद नहीं है।

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    2. jab khud bar aat hai to kuchh nahi samzata hia kisiko wo to insan hi he or insan ko ghussa aana normal bat hai ........ agar koi hum mese apke bhagwano ko kuchh galat keh de ya puri jankari ke bagair kuchh bhi ilzam lagade ya galat knowled dusro ko bataye jabki sachhai isko pata nahi he fir bhi kutte ke tarha bhonkta hai ye jo Khudko satyavadi kehta hai to isko kaho ke pehle apne aap se sawal kar kya ye jo bhi kuchh likh raha hai ye sari bate kaha se laya uthake or sabut pesh kare aadhi bat na failaya kare ab example lo agar ek nane ke do pehlu hote hai but humko jiss side dikhti hai hum usse kam chalate hai dusri side kabhi dekhne ki koshish karte hai or wese bhi ek lafz ka kahi matlab hote hai jese ko ab dekho gaya (gone) but kyu gaya kab gaya, kaha gaya, etc ye sari bate kya bhanda phodu ko batakar hui thi jo itna gyani banne ki koshish kar raha hai ......... sale pehle apne app ko sanbhal fir logo ka bhala karne nikal ............
      DONT BARK WITHOUT KNOWING REASON LIKE DOG...........

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  9. gandu tume koi haq nahi kisi dharm pe comman and augli karne ka

    उत्तर देंहटाएं
  10. sachai se kabhi muh nahi modna cahiye, agar ye baate jhuth hai tho ye sab kuran me kyu lihka hai, rahi baat shivling ki tho wo tho sansar ke kya devo k bhi dev hai

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  11. yahan par dekhe.... http://harf-e-galat-ll.blogspot.in/ aur http://hadeesi-hadse.blogspot.in/

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  12. abay bhosdi yhuodi ke pishab maa darrr chood randi ki auolaad [hamare nabi ke baarey me na likh na bol] bhosdi ke tu uss koum ke auolaad he uss dharm ka manne wala he jiss dharm ki auortey lavda choosti he aur veerya khaa jaati he jese amrit pi rahi ho aur aadmi choot aeyse chaat te he jase ki ice creem bhoosdi ke ye sab bhi tari dhram ki kitab me likha he kiya saale suarr kabhi apni aourat ke taang uthate ho kabhi ghodi banate kabhi gand me date ho kabhi muhn me dete ho

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  13. aur bhoosdi ke asif ager thuje is ki baate itni achhi lagti he tuo apni bhan ko isi ke paas bhej de saale jahil

    उत्तर देंहटाएं
  14. muslim dharam me saale apni bahan ko khud hi chod dete hai hahahaha lolzzzzzzzzzzzzz, saale inki books me dharti ko chokor bolte hai, inhe ghnta ni pata 1400 saal purana dharam hai..... usase pahle ye nai pta inka baap kon tha orrr jiske baap ka pata nai hota wo toh najayaj hi hota hai toh sidhi si baat hai hinduo ki najayaj olad ho sakte ho tum muslim

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  15. काबा का निर्माण:


    एक रोज इब्राहीम अलैहिस्सलाम मक्का आए तो अपने पुत्र इस्माईल अलैहिस्सलाम से कहा कि अल्लाह ने मुझे हुक्म दिया है कि इस जगह एक घर बनाऊँ, इस्माईल अलैहिस्सलाम ने कहा कि आप के रब ने जो हुक्म दिया है उसे कर डालिए फिर दोनों ने मिल कर काबा का निर्माण किया इस्माईल अलैहिस्सलाम पत्थर ढो कर लाते और इब्राहीम अलैहिस्सलाम उन्हें जोड़ते, जब इमारत उँची हो गई तो इस्माईल अलैहिस्सलाम ने एक पत्थर ला कर उन के पैरॉ के नीचे रख दिया और इब्राहीम अलैहिस्सलाम उस पर खड़े हो कर काबा का निर्माण करने लगे वो पत्थर जिस पर चढ़ कर इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने काबा का निर्माण किया था काबा की दीवार के नीचे रह गया, उस पर इब्राहीम अलैहिस्सलाम के पैरो के निशान भी रह गये जिसका नाम अल्लाह ने "मक़ामे इब्राहीम" रख दिया, काबा के निर्माण के बाद उन्होंने अल्लाह से निम्न प्रार्थना की
    १- इस घर को उनकी तरफ से क़बूल कर ले
    २- दोनों इस्लाम धर्म पर बाक़ी रहें
    ३- इस्लाम धर्म पर ही उनकी मौत हो
    ४- उनके बाद उनकी औलाद इस घर क़ी वारिस बने
    ५- इस दावते तौहीद (केवल एक अल्लाह क़ी पूजा) को सारे संसार में फैला दे
    ६- उन क़ी औलाद में एक नबी (दूत) भेजे
    ७- अपनी पूजा एवम् इबादत का सही तरीक़ा एवम् विधि सीखा दे
    ८- उन्हें क्षमा दे दे
    ९- काबा को सुरक्षा एवम् शांति वाला स्थान बनाए
    १०- उनकी औलाद को बुतपरस्ती (मूर्ती पूजा) से बचाए
    ११- एवम् उन्हें विभिन्न प्रकार के फलों से आजीविका प्रदान करे
    फिर इब्राहीम अलैहिस्सलाम को अल्लाह ने हुक्म दिया कि लोगों में हज का एलान कर दें सो उन्होंने एलान कर दिया और लोग उनकी आवाज़ सुन कर पूरी दुनिया से लोग हज करने आने लगे जिस का सिलसिला आज तक जारी है और शायद क़यामत तक जारी रहे
    इसके बाद इब्राहीम अलैहिस्सलाम शाम देश को लौट गए और सत्य धर्म के प्रचार में लग गये यहाँ तक कि एक सौ पचहत्तर वर्ष कि आयु में उनका देहांत हो गया
    देहांत के समय उनके दो पुत्र इसहाक़ अलैहिस्सलाम और इस्माईल अलैहिस्सलाम थे इसहाक़ अलैहिस्सलाम शाम में ही रह गए और उन्होंने फ़लस्तीन में मस्जीदे अक़्सा का निर्माण किया बाद में मुहम्मद सललाल्लाहो अलैहै वसल्लम को छोड़ कर जीतने भी नबी और दूत आए उन्हीं कि नस्ल में आए और मुहम्मद सललाल्लाहो अलैहै वसल्लम उनके दूसरे एवम् बड़े पुत्र इस्माईल अलैहिस्सलाम कि नस्ल में आए.
    इस्माईल अलैहिस्सलाम मक्का में काबा के पड़ोस ही में क़बीला जुरहूम कि एक लड़की से विवाह करके उनके साथ बस गए और फिर अल्लाह ने उनको , उनका और यमन वालों का नबी बना दिया. एक सौ सैंतीस वर्ष कि आयु में मक्का ही में उनका देहांत हो गया इस्माईल अलैहिस्सलाम को अल्लाह ने बारह बेटे दिए जिन में नाबीत एवम् कैज़ार माशहूर हुए तथा कैज़ार की औलाद में अदनान हुए अदनान के दो बेटे हुए अक तथा मअद , अक यमन चला गया और मअद मक्का में ही रहा जिन की नस्ल से मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हैं!

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  16. अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है- जब कुरआन पढ़ा जाए तो उसे कान लगाकर सुनो और ख़ामोश रहो कि तुम पर रहम हो, (कनज़ुलइमान तरजुमा कुरआन पारा- 9, रुकु- 14, सफ़ा- 284)। रसुलल्लाहो अलैहे व सल्लम ने फ़रमाया जो कुरआन पाक पढ़ेगा और उसके मुताबिक़ अमल करेगा, क़यामत के दिन अल्लाह तआला उसके माँ-बाप को एक ताज पहनाएगा, जिसकी रोशनी सूरज की रोशनी से बेहतर होगी (जब माँ-बाप को इतनी इज्ज़त मिलेगी तो पढ़ने वाले को कितनी इज्ज़त अल्लाह तआला अता फ़रमाएगा)। अल्लाह तआला उस शख्स को जहन्नम का अज़ाब न देगा, जिसने कुरआन हिफ्ज़ किया और कुरआन के हाफ़िज अल्लाह तआला के दोस्त हैं। कुरान हिफ्ज़ से (बग़ैर देखे) पढ़ना एक हज़ार दर्जा (सवाब) रखता है। कुरआन बग़ैर हिफ्ज़ से (यानी देखकर) पढ़ना दो हजार दर्जा (सवाब) रखता है और लोगों में सबसे बड़ा इबादत गुज़ार वो है, जो सबसे ज्यादा कुरआन की तिलावत करता है, बेशक ज़िस शख्स के सीने में कुरआन का कोई हिस्सा नहीं, यानी कोई सूरत या आयत याद नहीं, वो वीरान घर की तरह है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम ने फ़रमाया क़ुरान पढ़ो इसलिए कि वो क़यामत के दिन अपने पढ़ने वाले की सिफ़ारिश बनकर आएगा और उसकी शिफ़ादत कुबूल होगी और इमामे बुख़ारी ने रिवायत की है प्यारे नबी सल्ललाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया कि बेशक तुम में सबसे ज्यादा फ़जीलत वाला वो है, जिसने कुरआन सीखा या सिखाया (बुख़ारी शरीफ़ जिल्द 2, सफ़ा 752)। मसअला- कुरआन पाक ज़रूरत के मुताबिक 23 साल में थोड़ा-थोड़ा नाजिल हुआ और यक बारगी माह रमज़ान के शबे क़दर में नाज़िल हुआ। मसअला- तिलावत शुरू करते वक्त आऊज़ो बिल्लाह पढ़ना मुस्तहब है और बिस्मिल्लाह पढ़ना सुन्नत। तिलावत के दरमियान कोई दुनियावी काम या बात करें तो आऊज़ो और बिस्मिल्लाह फिर से पढ़ लें।मसअला- जब ख़त्म हो तो तीन बार क़ुलहव्ललाहो अहद यानी सूरे इख्लास पढ़ना बेहतर है।मसअला- कुरआन देखकर पढ़ना ज्यादा सवाब रखता है, बग़ैर देखकर पढ़ने से, क्योंकि कुरआन का देखना उसका छूना, उसको पास रखना भी सवाब है।मसअला- मजमे में सब बुलंद आवाज़ में पढ़ें ये हराम है। अकसर तीजों या कुरआन ख्वानी की मजलिसों में बुलंद आवाज़ से सबके सब पढ़ते हैं, यह हराम है। अगर चंद शख्स पढ़ने वाले हों तो सब आहिस्ते पढ़ें। अगर मस्जिद में दूसरे शख्स नमाज़ में या दूसरे दीनी बातों में मसरूफ हैं या दुरुद शरीफ़ पढ़ने में मशगूल हैं तो कलामे पाक आहिस्ता पढ़ें। यानी ख़ुद पढ़ें और ख़ुद ही सुनें, वरना पढ़ने वाला ही गुनाहगार होगा। मसअला- जब बुलंद आवाज़ से कुरआने पाक पढ़ा जाए तो तमाम हाज़रीन पर सुनना फ़र्ज़ है, जबकि वो मजमा सुनने के लिए ही हो, वरना एक का सुनना काफी है अगरचे और लोग काम में हों। बुलंद आवाज़ से पढ़ना अफ़जल है, जबकि किसी मरीज़ या सोते को तकलीफ़ न पहुँचे। मसअला- कुरआन की कसम भी कसम है, अगर उसके ख़िलाफ होगा कफ्फ़ारा लाज़िम आएगा।

    मसअला- कुरआन की किसी आयत को ऐब लगाना या उसकी तौहीन करना या उसके साथ मज़ाक या दिल्लगी करना या आयते क़ुरान को बेमौके महल पढ़ देना के लोग सुनकर हँसें ये क्रुफ है। मसअला- कुरआने पाक पुराना या बोसिदा हो गया, इस क़ाबिल न रहा कि उसमें तिलावत की जाए और यह अंदेशा है कि इसके पन्ने बिखर जाएँगे, तो किसी पाक कपड़े में लपेटकर ऐहतियात की जगह या क़ब्रस्तान में दफना दिया जाए और दफ़न के लिए कब्र बनाई जाए और उस पर तख्ता लगाकर छत बनाकर मिट्टी डालें, ताकि कुरआन के पन्नों पर मिट्टी न गिरे। अगर कुरआन गिर जाए तो कुछ सदक़ा कर दें और अल्लाह तआला से तौबा इस्तगफार करें, ताकि अल्लाह तआला माफ़ फरमाए। मसअला- सूराह इक़रा (अलक़) की कुरआन की सबसे पहली सूरत नाज़िल हुई, जो मक्की है और इसमें 19 आयते हैं (तफसीर जलालैन- सफा 503)।मसअला- क़ुरआन में 30 पारे हैं, जो 32,3760 हरुफ़ हैं। 114 सूरते हैं। 540 रुकु हैं। 14 सजदे हैं। 666

    6 आयते हैं। 5320 ज़बर हैं। 39582 ज़ेरा हैं। 8804 पेश हैं। 105684 नुक़ते हैं (दीन मुस्तफ़ा स. 46)।मसअला- जब नमाज़ में इमाम वलदद्वालीन कहें तो आहिस्ता आमीन कहें, बेशक फरिश्ते भी आमीन कहते हैं और जिसकी आमीन फरिश्तों के मुवाफ़िक होगी अल्लाह तआला उसके अगले और पिछले गुनाह बख्श देगा (बेज़ावी शरीफ़ जिल्दे अव्वल स. 11)।

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  17. काबा का निर्माण

    एक रोज इब्राहीम अलैहिस्सलाम मक्का आए तो अपने पुत्र इस्माईल अलैहिस्सलाम से कहा कि अल्लाह ने मुझे हुक्म दिया है कि इस जगह एक घर बनाऊँ, इस्माईल अलैहिस्सलाम ने कहा कि आप के रब ने जो हुक्म दिया है उसे कर डालिए फिर दोनों ने मिल कर अल्लाह के घर खाना काबा का निर्माण किया इस्माईल अलैहिस्सलाम पत्थर ढो कर लाते और इब्राहीम अलैहिस्सलाम उन्हें जोड़ते , जब इमारत उँची हो गई तो इस्माईल अलैहिस्सलाम ने एक पत्थर ला कर उन के पैरॉ के नीचे रख दिया और इब्राहीम अलैहिस्सलाम उस पर खड़े हो कर काबा का निर्माण करने लगे वो पत्थर जिस पर चढ़ कर इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने काबा का निर्माण किया था काबा की दीवार के नीचे रह गया ,उस पर इब्राहीम अलैहिस्सलाम के पैरो के निशान भी रह गये जिसका नाम अल्लाह ने " मक़ामे इब्राहीम " रख दिया, काबा के निर्माण के बाद उन्होंने अल्लाह से निम्न प्रार्थना की
    १- इस घर को उनकी तरफ से क़बूल कर ले
    २- दोनों इस्लाम धर्म पर बाक़ी रहें
    ३- इस्लाम धर्म पर ही उनकी मौत हो
    ४- उनके बाद उनकी औलाद इस घर क़ी वारिस बने
    ५- इस दावते तौहीद (केवल एक अल्लाह क़ी पूजा) को सारे संसार में फैला दे
    ६- उन क़ी औलाद में एक नबी (दूत) भेजे
    ७- अपनी पूजा एवम् इबादत का सही तरीक़ा एवम् विधि सीखा दे
    ८- उन्हें क्षमा दे दे
    ९- काबा को सुरक्षा एवम् शांति वाला स्थान बनाए
    १०- उनकी औलाद को बुतपरस्ती (मूर्ती पूजा) से बचाए
    ११- एवम् उन्हें विभिन्न प्रकार के फलों से आजीविका प्रदान करे
    फिर इब्राहीम अलैहिस्सलाम को अल्लाह ने हुक्म दिया कि लोगों में हज का एलान कर दें सो उन्होंने एलान कर दिया और लोग उनकी आवाज़ सुन कर पूरी दुनिया से लोग हज करने के लीए आने लगे जिस का सिलसिला आज तक जारी है और शायद क़यामत तक जारी रहे
    इसके बाद इब्राहीम अलैहिस्सलाम शाम देश को लौट गए और सत्य धर्म के परचार में लग गये यहाँ तक कि एक सौ पचहत्तर वर्ष कि आयु में उनका देहांत हो गया
    देहांत के समय उनके दो पुत्र इसहाक़ अलैहिस्सलाम और इस्माईल अलैहिस्सलाम थे इसहाक़ अलैहिस्सलाम शाम में ही रह गए और उन्होंने फ़लस्तीन में मस्जीदे अक़्सा का निर्माण किया बाद में मुहम्मद सललाल्लाहो अलैहै वसल्लम को छोड़ कर जीतने भी नबी और दूत आए उन्हीं कि नस्ल में आए और मुहम्मद सललाल्लाहो अलैहै वसल्लम उनके दूसरे एवम् बड़े पुत्र इस्माईल अलैहिस्सलाम कि नस्ल में आए.
    इस्माईल अलैहिस्सलाम मक्का में काबा के पड़ोस ही में क़बीला जुरहूम कि एक लड़की से विवाह करके उनके साथ बस गए और फिर अल्लाह ने उनको , उनका और यमन वालों का नबी बना दिया. एक सौ सैंतीस वर्ष कि आयु में मक्का ही में उनका देहांत हो गया इस्माईल अलैहिस्सलाम को अल्लाह ने बारह बेटे दिए जिन में नाबीत एवम् कैज़ार माशहूर हुए तथा कैज़ार की औलाद में अदनान हुए अदनान के दो बेटे हुए अक तथा मअद , अक यमन चला गया और मअद मक्का में ही रहा जिन की नस्ल से मुहम्मद सललाल्लाहो अलैहै वसल्लम हैं!
    SUNNIKING TEAM INDIA

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    1. अरे भाई सच बहुत कडवा लगता है क्या इतिहास गँवा है भारत मे सबसे पहले आने वाला मुसलमान कैसा -महम्मूद गजनी

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  18. ye sab band karo warna anjam accha nahi hogaa

    tu kaha gyab kardiya jaye ga tuzhe bhi pata nahi chalega

    tera blog tras kiyaa ja raha he police me report kar di gai he

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  19. मुसलमान खुद बोल रहे है मक्का मे
    पहले हवन और पुँजा होती थी
    अब हम कुछ नहीं कह रहे है मुसलमान खुद
    बोल रहे है की काबा हिन्दू मंदिर था बहा पर
    यज्ञ होते थे .... श्री राम जी वह पर
    राक्षसों से यज्ञ की रक्षा के लिए
    मक्का (काबा ) गए थे अनवर जमाल
    भी येही बोल रहा है की कुरान में
    वेदों का ज्ञान है और उनके बारे में
    बोला गया है ..लेकिन बो अपनी संकिन
    बुद्धि का प्रयोग करके मुहम्मद को विष्णु
    अबतार बताने में लगा है जब की ये गलत है ये
    वेदों में भी सिद्ध है की मुहम्मद शैतान था ....
    और ये जो पद चिन्ह है ये श्री राम या वावन
    अवतार के हो सकते है क्युकि इस्लाम में
    तो पद चिन्ह की पूजा निषेद है और आप खुद
    देख सकते है चित्र में की पदचिन्ह पर
    चन्दन , रोली से पूजा होती है और चिन्ह के
    ऊपर घंटी नुमा भी लग रहा है जो इस्लाम के
    खिलाफ है ....... हिंदुस्तान से भी लोग
    वहां जाते थे। मक्का को भारतीय लोग मख के
    नाम से जानते हैं। यज्ञ के पर्यायवाची के
    तौर पर ‘मख‘ शब्द भी बोला जाता है
    जैसा कि तुलसीदास ने विश्वामित्र के यज्ञ
    की रक्षा हेतु श्री रामचंद्र जी के जाने
    का वर्णन करते हुए कहा है कि *प्रात
    कहा मुनि सन रघुराई। निर्भय जग्य करहु
    तुम्ह जाई॥ होम करन लागे मुनि झारी। आपु
    रहे मख कीं रखवारी॥1॥ भावार्थ:-सबेरे
    श्री रघुनाथजी ने मुनि से कहा- आप जाकर
    निडर होकर यज्ञ कीजिए। यह सुनकर सब
    मुनि हवन करने लगे। आप (श्री रामजी)
    यज्ञ की रखवाली पर रहे॥1॥ 'मख‘ शब्द
    वेदों में भी आया है और मक्का के अर्थों में
    ही आया है। यज्ञ को यज भी कहा जाता है।
    दरअस्ल यज और हज एक ही बात है, बस
    भाषा का अंतर है। पहले यज नमस्कार योग
    के रूप में किया जाता था और पशु
    की बलि दी जाती थी।
    काबा की परिक्रमा भी की जाती थी। बाद में
    यज का स्वरूप बदलता चला गया। हज में
    आज भी परिक्रमा, नमाज़ और
    पशुबलि यही सब किया जाता है और
    दो बिना सिले वस्त्र पहने जाते हैं
    जो कि आज भी हिंदुओं के धार्मिक गुरू पहनते
    हैं। क़ुरआन ने यह भी बताया है
    कि मक्का का पुराना नाम बक्का है , - अनवर
    जमाल डा. श्याम गुप्त said............. ---
    मक्का निश्चय ही ’मख’ का अपभ्रन्श रूप
    होसकता है....अति-पुरा काल में सारा अरब
    प्रदेश, अफ़्रीका, तिब्बत , साइबेरिया ,
    एशिया एक ही भूखन्ड था..जन्बू द्वीप
    या भरत खन्ड...भारत...अत:भारत का उत्तर-
    पश्चिमी भाग ... अरबप्रदेश वाला भारतीय
    भूभाग मानव का प्रथम
    पालना रहा होगा जहां से मानव इतिहास
    की प्रथम सन्स्क्रिति व प्रथम यग्य
    प्रारम्भ हुई होगी ..शायद जल-प्रलय से
    पहले .. "मरूतगण का अर्थ
    मरूस्थलवासी है।"---
    सही नही है ...मरुत..वायुदेव को कहते
    हैं..मरुतगण का वायु देव की सेना ..जिसमें
    मेघ,वर्षा आदि भी सम्मिलित हैं... --वैदिक
    युग में यग्य में पशु
    बलि नहीं दी जाती थी ...बाद में
    असन्स्कारित, अवैदिक सन्स्क्रिति के
    लोगों ने यह प

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  20. Yes, you are right till the point where it says that there were many Kaba but, do you know that those were not used my Muslims to pray around.
    They were used for keeping the Idols.

    Those were the places which holds the best idols from nearby location and a authority collects jewels, food and other money to care the Idols.

    Thank You

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  21. It was not Hinduism during that time but Pagan Culture. People who were astray from the righteous path were worshiping idols and nature.

    Kaba were places where their Idols were kept and Pundits were charging them money like today. Holy Veda never says to worship Idols.


    Thank You

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  22. Bhai yahan bohot gyaani log dikh rahe hai

    Koi mujhe mere prashno ka arthaat questions ka uttar do

    Mujhse ek musalman katwe ne sawal puche the mujhe use jawab dena hai

    Q. Kya indian ka matlab jangli hai agar nahi to Hollywood ki movies me jangliyon ko indian naam se kyu pukara jata hai.

    Q. Sanskrit me hindu ka matlab chor hota hai kya ye sahi hai.

    Q. Kya sach me jis sundari ne bhasmasur ka naash kiya tha shankar bhagwan us sundari se sambhog karna chahte the.

    Q. Kya shivling sach me shiv bhagwan aur parvati mata ke ling hai.

    Q. Kya sach me sai baba musalman the.

    Q. Kya brahmma vishnu mahesh ne sach me sati anusuiyya ko nih vastra ho kar bhojan khilane pe majboor kiya tha.

    Q. Kya sach me 5 pandavon ki ek hi patni thi.

    Q. Kya sach me shwan arthat dogs ko pandavo ne shraap diya tha ke tumhara sambhog duniya dekhegi.

    Q. Kya samandar kisi atri rishi ke mutra se khara arthaat namkeen hai.

    Q. Kya sach me praacheen mandiron me nangi murtiyan hai

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  23. Kya baat he dharm bachao andolan.jitni aqal Islam ko galat dhang se sabit krne me laga rhe ho utni aqal sach janne ke liye lagate insah Allah nasihat haat lagti
    zara qabaa ka itihas phir se padh lo
    Pure Quran me tuaheed ki liye kitni baar kaha gya he sirk ke liye kitni baar mana kiya gya he ar wahi ilzam hm pr lagate ho .
    Likhne ko hm bhi bahut kuch likh sakte he
    Lekin woh tumhari Tarah ilzam nhi hoga woh proof ke sath hoga lekin Islam ka ilm is burai se rokta he
    Jaise Quran me he sits ale imran ayat no. 64
    Aao hm tum us baat ki taraf jo tumme ar hamme ek si he

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  24. Ye sab likhne se pehle kya aapne Quran ko samjh or pdha agar pdhte to kabhi Aise blogs nhi daalte. Yhi fark hummei aur aap mein hai hum Allah par bin dekhe imaan late hai aur apko proof ki zrurat hai. Humko bnanae wala ek hai aap smjhte ho aapko 1760 ne milkr bnaya hai. Koi baat Allah ya uske paigambar k baare mei kehne se pehle soch lo ek din judgement ka zrur ayega jis mein hum sab attendance denge aur apni karni ka record dekhlenge. WO insaan jisne apne paida karne wale ko is duniya mein pehchana aur sirf akele usiki ibaadat ki usko regret nhi krna pdega. Lekin aap jaise kuch bhai Jo istrha logon ko galat blogs dekr gumrah krrhe hein unka anjaam us judgement qayamat k roz bhot bura hai. Bhagne ki jgha nhi hogi aur regret kroge k kyon humane usdin ye harqat ki.. SOCHLO AUR MAAFI MANG LO BESHAK ALLAH MAAF KRNE WALA HAI.

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