मंगलवार, 11 सितंबर 2012

इस्लाम का दोगला कानून !

जो लोग खुद को सबसे बड़ा सेकुलर साबित करने के लिए मुसलमानों द्वारा किये जा रहे धर्म परिवर्तन के षड्यंत्र पर अपनी ऑंखें बंद कर लेते हैं .और जब मुसलमान छल और बल का प्रयोग करके किसी हिन्दू या गैर मुस्लिम को मुसलमान बना लेते है ,तो इसे धर्म की आजादी बता कर सही बताते हैं . लेकिन यदि कोई व्यक्ति किसी कारण मुसलमान बन जाने पर फिर से अपना पुराना धर्म अपना लेता हैं . तो मुसलमान उसे क़त्ल कर देते है .इसी तरह जब मुसलमान दुसरे धर्म की निंदा करते हैं , तो सेकुलरों के मुंह पर ताले लग जाते है . लेकिन यदि कोई गलती से भी इस्लाम . कुरान . या मुहम्मद के बारे में कुछ कहता हैं . तो मुसलमान हंगामा कर देते हैं .क्योंकि मुहम्मद से लेकर आज के सभी मुल्ले दोगली नीति अपनाते हैं .इनकी कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर है .इस लेख में हदीस और कुरान के आधार इस्लाम के दोगले कानून का पर्दाफाश किया जा रहा है .इस लेख से यह भी पता चल जायेगा कि मुल्ले कितने शातिर होते है ,
1-.इस्लामी पाखंड
अक्सर इस्लाम के प्रचारक लोगों को गुमराह करके ऐसी आयतें बताते हैं , जिन से इस्लाम का असली रूप छुप जाये .और लोगों का धर्म परिवर्तन कराने में आसानी हो . जैसे कि मुहम्मद ने कहा है ,
इस्लाम में कोई जबरदस्ती नहीं है "सूरा - बकरा 2 :256
किसी को मजबूर करके मुसलमान नहीं बनाया जा सकता "सूरा -यूनुस 10 :99
कह दो तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म , और हमारे लिए हमारा धर्म ठीक है "सूरा -काफिरून 106 :6

2-रसूल ही अल्लाह
यदि कुरान और हदीसों दिए गए पक्षपाती और अमानवीय नियमों को गौर से पढ़ा जाये तो . लगेगा कि यह कानून बनाने वाला ईश्वर कदापि नहीं हो सकता .यही बात कुरान की इस आयत से सिद्ध हो जाती है .
जिसने रसूल का आदेश मान लिया ,समझो उसने अल्लाह का आदेश मान लिया " सूरा -निसा 4 :80
3-सभी धर्म सामान नहीं
हमें यह बात अच्छी तरह से समझना चाहिए कि इस्लाम की नजर में सभी धर्म समान नहीं है . यदि ऐसा होता तो मुसलमान लोगों का धर्म परिवर्तन कराने में क्यों लगे रहते है .सेकुलर विचार इस्लाम के विरुद्ध है . यही कुरान कहती है ,
सभी धर्म एक सामान नहीं हो सकते " सूरा -आले इमरान 3 :113
दूसरे धर्म के मामले में तुम्हें लोगों पर तरस नहीं आना चाहिए " सूरा -नूर 24 :2
तुम दूसरों की बातों पर राजी नहीं हो जाओ , क्योंकि न तो यहूदी तुम्हारी बातों पर राजी होंगे और न ईसाई " सूरा -बकरा 2 :120

4-इस्लामी असहिष्णुता
सब जानते हैं कि मुसलमान सभी गैर मुस्लिमों को काफ़िर , मुशरिक और दूसरों के धर्म ग्रंथों को झूठा बताते है ,लेकिन जब कोई इस्लाम , कुरान या मुहम्मद के बारे में उंगली उठाता है .तो हंगामा कर देते है .क्योंकि कुरान में यही कहा गया है ,
जो तुम्हारे धर्म की आलोचना करे , तो उन लोगों से युद्ध करो .जिस से वह ऐसा करने से बाज आयें "सूरा-तौबा 9 :12
हे नबी तुम उन लोगों के साथ सख्ती का बर्ताव करो , जो तुम्हारी बात पर विश्वास नहीं करते "

 सूरा -तौबा 9 :73
5-धर्म की आजादी
मुसलमान हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन कराने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाते है , और कहते हैं कि लोगों को अपनी पसंद का धर्म अपनाने का अधिकार है .लेकिन यह बात सरासर झूठ है . जैसा इस हदीस में कहा है .
रसूल ने कहा कि जो इस्लाम के अलावा कोई दूसरा धर्म अपनाये तो उसे क़त्ल कर देना चाहिए " बुखारी -जिल्द 4 किताब 84 हदीस 57
6-.इरतिदाद
इस्लाम में धर्म परिवर्तन सम्बन्धी जितने भी कानून कुरान और हदीसों में दिए है . सभी एक तरफी और पक्षपाती है . इसके अनुसार गैर मुस्लिम इस्लाम कबूल करके मुसलमान तो बन सकते हैं . लेकिन वापिस अपना पुराना धर्म नहीं अपना सकते .इस्लामी परिभाषा के अनुसार इस्लाम को छोड़कर फिर से अपना धर्म अपनाने को " इरतिदाद(ارتداد"  (Apostsy )कहते हैं .और जो व्यक्ति इस्लाम को छोड़ कर फिर से अपना धर्म अपना लेता है उसे " मुरतिद (مرتد " (Apostate )कहा जाता है .विश्व में जितने भी इस्लामी देश हैं , उनमे इस्लाम को त्यागने की सजा मौत बताई गयी है . जो इन आयतों और हदीसों में कहा है
जो भी इस्लाम से फिर जाये तो उन्हें जहाँ पाओ पकड़ो और उनका वध कर दो " सूरा- निसा 4 :89
यदि किसी ने ईमान के बाद कुफ्र किया ,तो हम उन लोगों को यातना देकर ही रहेंगे ,क्योंकि वह अपराधी हैं " सूरा -तौबा 9 :66
जिन लोगों ने ईमान के बाद फिर से कुफ्र किया , तो उनकी माफ़ी कबूल नहीं होगी .और उनको दुखदायी यातना दी जाएगी "सूरा -तौबा 9 : 91 -92
जिसने ईमान लाने के बाद कुफ्र किया तो उसके लिए कठोर यातना की सजा है "सूरा - नहल 16 :106

जो लोग ईमान लाने के बाद फिर से उसी पुराने धर्म पर चलने लगते हैं ,तो उनको जहाँ पाओ पकड़ो .और उनका वध कर दो .हमने तुम्हें इसका पूरा अधिकार दे दिया है "सूरा -निसा 4 :91
जो लोग पहले तो ईमान लाये ,फिर कुफ्र किया . और फिर से ईमान लाये और फिर कुफ्र किया ,तो उनको कभी माफ़ नहीं किया जायेगा "
 सूरा - निसा 4 :137
रसूल ने कहा कि जो इस्लाम को छोड़ कर फिर से अपना पुराना धर्म अपनाएगा , तो उसे क़त्ल कर देना चाहिए . बुखारी - जिल्द 3 किताब 52 हदीस 260
रसूल ने उन सभी लोगों को क़त्ल कर देने का आदेश दिया था , जिन्होंने इस्लाम छोड़कर फिर से अपना पुराना धर्म अपना लिया था "
बुखारी - जिल्द 4 किताब 87 हदीस 37

अनस बिन मलिक ने कहा कि एक यहूदी पहले तो मुसलमान बन गया , फिर फिर कुछ समय के बाद उसने फिर से यहूदी धर्म अपना लिया . जब रसूल को पता चला तो रसूल ने उसे क़त्ल करवा दिया " बुखारी -जिल्द 4 किताब 89 हदीस 271
7-ईशनिंदा कानून
इस्लामी कानून में कुरान या रसूल का अपमान करने की सजा मौत बताई गई है .कुरान में कहा है ,
जो लोग अल्लाह के रसूल को दुःख पहुंचाते हैं ,उनके लिए रुसवा करने वाली यातना है . और ऐसे लोग जहाँ भी पकडे जायेंगे बुरी तरह से क़त्ल किये जायेंगे "
 सूरा -अहजाब 33 :57 और 61

इस्लामी परिभाषा में , रसूल , कुरान , या इस्लाम पर किसी तरह का आरोप लगाने . या अपमान करने" ईशनिंदा " ( Blasphemy )कहा जाता है . अरबी में इसे " तज्दीफ़تجديف कहा जाता है .दुसरे इस्लामी देशों की तरह पाकिस्तान में भी ईशनिंदा कानून लागु है .जिसकी कुछ धाराएँ दी जा रही हैं .
Pakistan Penal Code

Section 295-C of the Pakistan Penal Code.Whoever by words, either spoken or written or by visible representation or by any imputation, innuendo, or insinuation, directly or indirectly, defiles the sacred name of the Holy Prophet Muhammad (PBUH) shall be punished with death
298-C.Person of Quadiani group, etc., calling himself a Muslim or preaching or propagating his faith

295-B. Defiling, etc., of Holy Qur'an295-C. Use of derogatory remarks, etc., in respect of the Holy Prophe
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पाकिस्तान के इस अंधे इस्लामी कानून यह अजीब बात है कि अगर कोई अहमदिया खुद को मुसलमान कहता है . तो उसे भी अपराधी माना गया है .और जिसके लिए उसे उम्र कैद की सजा हो सकती है .इसलिए मक्कार मुल्ले गैर मुस्लिमों को फ़साने के लिए इसी कानून का सहारा लेते है. क्योंकि इस कानून के मुताबिक सजा से बचने का एक ही उपाय है ,कि आरोपी इस्लाम कबूल कर ले .
8-मुल्लों की चालाकी
इसी जंगली कानून की आड़ में एक इमाम ने एक ईसाई लड़की को फसा दिया था . जिस के डर से कई ईसाई गाँव छोड़ कर भाग गए थे .यह सत्य घटना इस प्रकार है .
दैनिक भास्कर दिनांक 2 सितम्बर 2012 के अनुसार इस्लामाबाद के एक गाँव के पास रहने वाली एक 13 -14 साल की लड़की "रिमशा मसीह " को ईश निंदा कानून यानि कुरान जलने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था . जिसके लिए उसे मौत की सजा भी हो सकती थी . लेकिन जाँच के बाद पता चला कि वह लड़की मानसिक रूप से अस्वस्थ है . और उसके पडौस में रहने वाले एक इमाम खालिद चिश्ती ने खुद कुरान के पन्ने जलाकर उस लड़की के बैग में छुपा दिए थे .अगर वह धूर्त इमाम पकड़ा नहीं जाता तो लड़की को पाकिस्तान के ईश निंदा कानून की धारा   295Cके अधीन मौत की सजा हो जाती .
9-उस्मान ने कुरान जलवाई
पाकिस्तान के जो मुल्ले जिस छोटी सी . मानसिक रूप से बीमार लड़की पर कुरान जलाने का झूठा आरोप लगाकर मौत की सजा देना चाहते थे , वह यह नहीं बताते कि खुद उनके खलीफा उस्मान ने जानबूझ कर कुरान कि सभी प्रतियों को जलवा दिया था .जिसके कारण कुरान के कई हिस्से आज तक गायब हैं .यह बात कोई हिन्दू नहीं ,बल्कि प्रमाणिक हदीस कह रही है . सबूत देखिये .
अनस बिन मलिक ने कहा कि इराक के कुछ लोग उस्मान के पास गए और बोले कि सीरिया और यमन के लोग कुरान को अलग अलग तरह से पढ़ते है .तब उस्मान ने कुरान की अपने पास वाली प्रति की नकलें करवा कर आसपास के शहरों में भिजवा दीं, और जिसके भी पास कुरान की जो भी प्रतियाँ थी . उनको जलवा दिया .उस्मान ने सईद बिन साबित से यह भी कहा कि मेरे पास जो कुरान थी . उसमे सूरा अहजाब की कुछ आयतें गुम हो गयी थी .
बुखारी - जिल्द 6 किताब 61 हदीस 510

और सबूतों के लिए देखिये ,विडियो
http://www.youtube.com/watch?v=F6p8pJpqgU4

इस लेख का उद्देश्य उन सेकुलरों की आँखें खोलना है जो इस्लाम की कपटी नीति के बारे में ठीक से नहीं जानते . लगता है कि वह पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दुओं की हालत नहीं जानते .याद रखिये कि यदि यही मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति चलती रही ,तो वह दिन दूर नहीं है ,जब इन सेकुलरों की हालत पाकिस्तान के हिन्दुओं से भी बुरी होगी . बताइए फिर शरण लेने के लिए किस देश में जाओगे ?
http://www.thereligionofpeace.com/Quran/012-apostasy.htm

5 टिप्‍पणियां:

  1. islam hi dogala hai kewal atankbad aur byabhichar ke alawa kuchh nahi.

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  2. आप की पोस्ट तथ्यो और तर्को पर आधारित रहतीं है इसलिए आप की कही बातों को लेकर कोई मुस्लिम विरोध भी नही कर पाता ,

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  3. If someone had posted a thread in this forum stating 'Islam is the worst religion and ______ is the best religion', wouldn't many of us Muslims be deeply hurt because to each person their own religion is immensely precious? Just as I am extremely tired of having to explain to every Tom Dick and Harry that Islam is not a fanatical religion, it does accord females many rights, and not all us Muslims are obsessed with spreading terror through the barrel of an AK/47, why doubt that Hindus too feel deeply hurt and offended when encountering stereotypes/misinformation regarding their religion? There is no difference between them doing it and us doing it - the hurt caused against the individual is always the same

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  4. And by reading the quote.
    I do understood your thinking and can guess which type of man you belong to.n the teachings from your parends n the (shakha) teachers..

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