मंगलवार, 23 अक्तूबर 2012

हराम और हलाल इस्लाम का कमाल !


सभी लोग अच्छी तरहसे जानते हैं कि भारत के मुसलमान हमेशा "वन्देमातरम " का विरोध करते हैं . और कहते हैं कि ऐसा बोलना हराम है .यानि पाप है .इस्लाम में जायज -नाजायज ,वैध -अवैध अर्थात हलाल और हराम की बड़ी विचित्र और तर्कहीन अवधारणा है ,जो कुरान ,हदीसों ,और मुफ्तियों द्वारा समय समय पर दिए फतवों के आधार पर तय की जाती है . जिसे मानना हर मुसलमान के लिए अनिवार्य होता है . वर्ना उसे काफ़िर समझा जाता है .इसलिए मुसलमान हमेशा हर विषय हराम और हलाल के आधार पर ही तय करते हैं , चाहे वह देश के संविधान या कानून के विरुद्ध ही क्यों न हो .वह विना समझे अंधे होकर उसका पालन करते हैं .
इस संक्षिप्त से लेख में कुरान ,हदीसों ,फतवों ,और समाचारों में प्रकाशित खबरों से चुन कर एक दर्जन ऐसे मुद्दे दिए जा रहे हैं , जिनको पढ़ कर प्रबुद्ध पाठक ठीक से समझ जय्र्गे कि इस्लाम के अनुसार हराम क्या है ,और हलाल क्या है .
1 -अल्लाह का नाम लिए बिना जानवर को मारना हराम है .
लेकिन जिहाद के नाम से हजारों इंसानों का क़त्ल करना हलाल है .

2-यहूदियों ,ईसाइयों से दोस्ती करना हराम है .
लेकिन यहूदियों ,ईसाईयों का क़त्ल करना हलाल है .
3-टी वी और सिनेमा देखना हराम है .
लेकिन सार्वजनिक रूप से औरतों को पत्थर मार हत्या करते हुए देखना हलाल है .
4-किसी औरत को बेपर्दा देखना हराम है .
लेकिन किसी गुलाम औरत को बेचते समय नंगा करके देखना हलाल है .
5-शराब का धंदा करना हराम है .
लेकिन औरतों ,बच्चों को गुलाम बना कर बेचने का धंदा हलाल है .
6-संगीत सुनना हराम है .
लेकिन जिहाद के कारण मारे गए निर्दोष लोगों के घर वालों की चीख पुकार सुनना हलाल है .
7घोड़ों की दौड़ पर दाव लगाना हराम है .
लेकिन काफिरों के घोड़े चुरा कर बेचना हलाल है 
8-औरतों को एक से अधिक पति रखना हराम है .
लेकिन मर्दों लिए एक से अधिक पत्नियाँ रखना हलाल है .
9-चार से अधिक औरतें रखना हराम है .
लेकिन अपने हरम में सैकड़ों रखेंलें रखना हलाल है .
10किसी मुस्लिम का दिल दुखाना हराम है .
लेकिन किसी गैर मुस्लिम सर कटना हलाल है .
11-औरतों के साथ व्यभिचार करना हराम है .
लेकिन जिहाद में पकड़ी गयी औरतों के साथ सामूहिक बलात्कार करना हलाल है .
12-जब किसी औरत की पत्थर मार कर हत्या की जारही हो ,तो उसे बचाना हराम है .
जब उसी अपराध के लिए औरत को जिन्दा जलाया जा रहा हो ,तमाशा देखना हलाल है .
इन थोड़े से मुद्दों को ध्यान से पढ़ने से उन लोगों की आँखें खुल जाना चाहिए तो इस्लाम को शांति का धर्म समझ बैठे हैं .इसलिए "भंडाफोडू " ब्लॉग पिछले चार सालों से अपने प्रमाण सहित लेखों के माध्यम से देश प्रेमी लोगों को इस्लाम से सचेत करता आया है . ताकि भूले से भी कोई व्यक्ति जकारिया नायक जैसे धूर्त के जाल में नहीं फसे .जिनको भी इस लेख के सम्बन्ध में इस्लामी किताबों के प्रमाण चाहिए वह "भंडाफोडू " के सभी लेख पढ़ने का कष्ट करें . 
ऐसे कमाल के तर्कहीन इस्लाम से जितनी दूरी बनाये रखोगे उतने ही निरापद रहोगे !!

http://www.faithfreedom.org/Articles/AyeshaAhmed20729.htm

शनिवार, 20 अक्तूबर 2012

कुरान की पोल हदीस ने खोली !!


इस्लामी मान्यता है कि कुरान अल्लाह की किताब है . जो 23 के अन्दर रसूल पर उतरी थी . और उसमे अल्लाह के वचन हैं.और उसी तरह हदीसों में भी रसूल के वचन मौजूद हैं.इस से इस्लाम से अनभिज्ञ लोगों ऐसा भ्रम हो जाता है कि कुरान और हदीसों में लोगों को चरित्रवान बनने और आत्मज्ञान सम्बन्धी उपदेश दिए होंगे .क्योंकि अधिकांश लोग यह नहीं जानते कि कुरान की सूरा ( अध्याय ) कालक्रम ( Chronological Order  ) के अनुसार नहीं हैं . और हदीसें कुरान के काफी समय बाद जमा की गयी थीं .
इसके कारण कुरान की ऐसी कई आयतें हैं ,जिनका अर्थ अस्पष्ट है .फिर भी चालाक मुल्ले उनकी ऐसी व्याख्या कर देते हैं ,जो बाहर से तो ऐसी लगाती है कि जिसपर कोई आपत्ति नहीं कर सकता है . लेकिन जब हदीस से उसी आयत की सही व्याख्या पढ़ते हैं , तो कुरान महानता के ढोल की पोल खुल जाती है .यहाँ एक आयत दी जा रही है ,जिसकी व्याख्या करके मुस्लिम विद्वान् अल्लाह को सर्वदर्शी साबित कर देते हैं .
1-क्या अल्लाह सर्वदर्शी है ?
मुसलमान अक्सर दावा करते रहते हैं कि उनका अल्लाह सब कुछ देख सकता है यानि वह "Omniscient"है .यानि अल्लाह की नजर से कुछ भी चीज या लोगों के काम नहीं छुप सकते .जैसा कि इस आयात में कहा गया है ,
"देखो यह लोग अपने सीनों को मोड़ लेते हैं .ताकि ऐसा करने से छिप जाएँ ,लेकिन जान लो कि जब भी यह लोग इस तरह से खुद को अपने कपड़ों में छुपा लेते हैं ,तो अल्लाह वह सब कुछ देख लेता है ,जो यह लोग छिपा लेते हैं .और अल्लाह तो उनके सीनों अन्दर की चीज भी देख लेता है "
"أَلَا إِنَّهُمْ يَثْنُونَ صُدُورَهُمْ لِيَسْتَخْفُوا مِنْهُ أَلَا حِينَ يَسْتَغْشُونَ ثِيَابَهُمْ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ   "
 सूरा -हूद 11 :5 
कुरान के हिंदी अनुवाद में इस आयत की तफ़सीर (व्याख्या )में इस का खुलासा करते हुए टिपण्णी में लिखा है "मक्का के लोग रसूल की बातें सुनने से कतराते थे .और उनको देखते ही यातो मुंह मोड़ कर चल देते थे ,या अपने सीनों को मोड़ कर (झुक कर ) खुद को कपड़ों में छिपा लेते थे ( कुरान मजीद-कुरान का हिंदी अनुवाद पेज -415 ,अनुवादक फारूख खान ,मकतबा अल हसनात ,रामपुर .)
जिस तरह जकरिया नायक जैसे चालाक व्यक्ति कुरान की बेसिर पैर की आयतों व्याख्या करके , अल्लाह को ईश्वर साबित करने का कुप्रयास करते रहते हैं ,उसी तरह फारुख खान ने भी इस अर्थहीन आयत की व्याख्या करते हुए अल्लाह को , सर्वज्ञ और सर्वदर्शी साबित करना चाहा है . लेकिन खुद मुहम्मद साहब की हदीस ने इस आयत की पोल खोल दी है ,देखिये हदीस क्या कहती है ,
2-अल्लाह की गन्दी नजर 
मुहम्मद बिन अब्बास बिन जाफर ने कहा कि जब लोगों ने रसूल के मुंह से (सूरा हूद 11 :5 ) सुनी . कि लोग अपने सीनों को मोड़ लेते है , तो रसूल से इसका मतलब पूछा . रसूल ने बताया कि हमारे साथी खुल्लम खुल्ला बिना किसी आड़ के मैदान में ही नित्य क्रिया और औरतों से सम्भोग करने के आदि है .और जब अचानक कोई उनको ऐसा काम करते हुए देख लेता है ,तो यह लोग खुद को छुपाने के लिए सीनों को मोड़ लेते हैं .ताकि कोई पहचान नहीं सके . इसी लिए यह आयत उतरी है .

"Jafarحَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ صَبَّاحٍ حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ قَالَ قَالَ ابْنُ جُرَيْجٍ أَخْبَرَنِى مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادِ بْنِ جَعْفَرٍ أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ عَبَّاسٍ يَقْرَأُ ( أَلاَ إِنَّهُمْ تَثْنَوْنِى صُدُورُهُ مْ 
 ) قَالَ سَأَلْتُهُ عَنْهَا فَقَالَ أُنَاسٌ كَانُوا يَسْتَحْيُونَ أَنْ يَتَخَلَّوْا فَيُفْضُوا إِلَى السَّمَاءِ ، وَأَنْ يُجَامِعُوا نِسَاءَهُمْ فَيُفْضُوا إِلَى السَّمَاءِ ، فَنَزَلَ ذَلِكَ فِيهِمْ

सही बुखारी -जिल्द 6 किताब 60 हदीस 203 
Arabic Serial No. 4681 

यदि हम कुरान की आयत 11 :5 के साथ इस हदीस को पढ़ें , तो साफ़ पता चलता है कि जब भी रसूल के साथी खुले आकाश के नीचे टट्टी करते थे ,या औरतों के साथ अय्याशी करते थे.अल्लाह देखता रहता होगा .और रसूल के साथी अल्लाह की नजर से बचने के लिए अपने सीने मोड़ कर खुद को छुपा लिया करते होंगे .
3-बेशर्म सहाबी 
"इब्ने अब्बास ने कहा कि जब मैंने यह आयत सुनी "लोग अपने सीनों को मोड़ लेते हैं " तो रसूल से इस आयत मतलब पूछा . तब रसूल ने बताया कि हमारे साथियों को खुले आकाश के नीचे ,टट्टी पेशाब करने ,और खुलेआम सम्भोग करने की आदत है .और जब कोई उनको ऐसा करते हुए देख लेता है ,तो वह अपने सीनों को मोड़ लेते हैं . ताकि कोई उनको नहीं पहिचान सके .
"حَدَّثَنِى إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى أَخْبَرَنَا هِشَامٌ عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ وَأَخْبَرَنِى مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادِ بْنِ جَعْفَرٍ أَنَّ ابْنَ عَبَّاسٍ قَرَأَ ( أَلاَ إِنَّهُمْ تَثْنَوْنِى صُدُورُهُمْ ) قُلْتُ يَا أَبَا الْعَبَّاسِ مَا تَثْنَوْنِى صُدُورُهُمْ قَالَ كَانَ الرَّجُلُ يُجَامِعُ امْرَأَتَهُ فَيَسْتَحِى أَوْ يَتَخَلَّى فَيَسْتَحِى فَنَزَلَتْ ( أَلاَ إِنَّهُمْ يَثْنُونَ صُدُورَهُمْ )
सही बुखारी -जिल्द 6 किताब 60 हदीस 204 
Sahih Bukhari Hadith  ArabicSerial No. 4682-

यही नहीं कुरान की आयत और इस हदीस से यह भी साबित होता है कि, रसूल के साथी निर्लज्ज ,असभ्य ,और अय्याश थे और उनकी औरतें भी ऐसी ही थी .और अल्लाह भी उनकी कामलीला देखने का शौक़ीन रहा होगा .
4-निष्कर्ष 
इस एक ही उदाहरण यह सिद्ध हो जाता है कि कुरान और हदीसों को धार्मिक किताब समझना बहुत बड़ी भूल होगी .क्योंकि इनमे सिर्फ ऊलजलूल बातों की भरमार है .इनको पढ़ने से न तो किसी का भला हुआ है ,और न होगा .सिर्फ अपराध ही बढ़ते जायेंगे .जैसा कि मुसलमान कर रहे हैं .यही कारण है कि मुसलमान बच्चों को कुरान रटाते रहते हैं , उसका अर्थ नहीं बताते .ताकि उनकी पोल नहीं खुल जाये .
इसलिए लोग अल्लाह ,रसूल , कुरान ,हदीस और इस्लाम से जितना ही दूर रहेंगे , विश्व में उतनी ही शांति रहेगी .

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सोमवार, 15 अक्तूबर 2012

हदीस क्या सिखाती हैं !


मुल्ले मौलवी कुरान के बाद हदीस को प्रमाण मानते हैं , और अक्सर सारे बेतुके फतवे इन्हीं हदीसों के आधार पर देते रहते हैं सुन्नी मुसलमान 6 हदीसों को सही मानते हैं . चूँकि हदीसों का साहित्य काफी विशाल है , इसलिए अधिकांश मुसलमान पूरी हदीसों से अनजान है . लोगों को यह भी पता नहीं है कि हदीसों में क्या लिखा है , उनका स्रोत क्या है , लेंकिन हदीसों का ठीक से अध्ययन करने से पता चलता है कि मुहम्मद साहब को चलते फिरते जो भी जानकारी मिलती थी , वह उसके बारे में जो भी बयान अपने साथियों के सामने देते थे , उनके साथी याद कर लेते थे .जिसे बाद में किताबों के रूप में जमा कर दिया गया था . अरबी में हदीस का बहुवचन " अहादीस " होता है . जिसका अर्थ बातें होता है .मुसलमान हदीस को धर्मग्रंथ इसलए मानते हैं , क्योंकि कुरान भी एक हदीस ही है , जैसा कि कुरान में कहा है ,यानि हदीस और कुरान एक ही बात है .कुरान में लिखा है ,
"اللَّهُ نَزَّلَ أَحْسَنَ الْحَدِيثِ كِتَابًا مُتَشَابِهًا مَثَانِيَ تَقْشَعِرُّ مِنْهُ   "39:23
"अल्लाह ने हदीस की सर्वोत्तम किताब उतारी है , जिसके सभी हिस्से आपस में जुड़े हुए हैं ,और बार बार दोहराए गए हैं . सूरा -अज जुमर 39 :23 
यह हदीसें क्या सिखाती हैं , इसके कुछ नमूने दिए जा रहे हैं ,
1-रसूल की बन्दर बुद्धि 
बन्दर सबकी नक़ल करते हैं , लेकिन रसूल ने बंदरों की नक़ल करके एक कानून बना दिया हो इस्लामी देशों में लागु है
अम्र बिन मैमून ने कहा कि मैंने देखा कि एक जगह कुछ बन्दर एक बंदरिया को घेर कर उसे पत्थर मार रहे थे , क्योंकि बंदरिया ने दूसरे बन्दर के साथ अवैध सम्भोग किया था , मैंने भी पत्थर मारा . और जब रसूल रसूल आये तो उन्होंने भी इतने पत्थर मारे कि बंदरिया मर गयी .
"حَدَّثَنَا نُعَيْمُ بْنُ حَمَّادٍ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ عَنْ حُصَيْنٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ قَالَ رَأَيْتُ فِى الْجَاهِلِيَّةِ قِرْدَةً اجْتَمَعَ عَلَيْهَا قِرَدَةٌ قَدْ زَنَتْ ، فَرَجَمُوهَا فَرَجَمْتُهَا مَعَهُمْ . تحفة 

“Sahih” Al-Bukhari Volume 5. Hadith #188

Bukhari Hadith (Arabic) Serial No.3849- 10790 ، 19178

2-औरतों की योनी में फ़रिश्ते घुसे 
जो फ़रिश्ते कुरान की आयतें लाते थे अल्लाह उन्हीं को औरतों की योनी में घुसा देता था , जहाँ से वह दुआ करते रहते है ,
अनस बिन मलिक ने कहा कि रसूल ने बताया है , अल्लाह औरतों की योनी में फ़रिश्ते घुसा देता है. वह अन्दर घुसे हुए दुआ करते हैं " अल्लाह इस योनी में एक बूंद वीर्य टपका दे , जिस से अन्दर गोश्त का लोथड़ा जम जाये . तब अल्लाह बच्चा बना देता . और तय करता है कि , लड़का होगा या लड़की . , फिर अल्लाह बच्चे आयु , जीविका और धर्म तय कर देता है . और फ़रिश्ते सारा विवरण लिख लेते हैं .सारी योनी में ही तय हो जाती हैं 
حَدَّثَنَا أَبُو النُّعْمَانِ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِى بَكْرِ بْنِ أَنَسٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ – رضى الله عنه – عَنِ النَّبِىِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ « إِنَّ اللَّهَ وَكَّلَ فِى الرَّحِمِ مَلَكاً فَيَقُولُ يَا رَبِّ نُطْفَةٌ ، يَا رَبِّ عَلَقَةٌ ، يَا رَبِّ مُضْغَةٌ ، فَإِذَا أَرَادَ أَنْ يَخْلُقَهَا قَالَ يَا رَبِّ ، أَذَكَرٌ أَمْ يَا رَبِّ أُنْثَى يَا رَبِّ شَقِىٌّ أَمْ سَعِيدٌ فَمَا الرِّزْقُ فَمَا الأَجَلُ فَيُكْتَبُ كَذَلِكَ فِى بَطْنِ أُمِّهِ » . تحفة 1080
. “Sahih” Al-Bukhari Volume 8. Hadith No.594

Bukhari Hadith (Arabic) Serial No.3333-

3-चूहे पिछले जन्म के यहूदी हैं 
वैसे तो मुसलमान पूर्व जन्म में विश्वास नहीं करते , लेकिन यहूदियों को नीचा दिखने के लिए चूहों को पूर्व जन्म का इस्राइली बता दिया .
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया ,कि पराने ज़माने में इस्राइलियों का एक कबीला खो गया , जिसका आज तक पता नहीं चला . क्योंकि उस पर अल्लाह ने धिक्कार किया था . आजके चूहे वही इस्राइली है , काअब ने तीन बार रसूल से पूछा कैसे , तो रसूल ने कहा इसका सबूत यह है , अगर तुम चूहों को ऊंटनी का दूध पिलाओगे तो वह नहीं पियेंगे , और भेड़ का दूध तुरंत पी लेंगे .
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ عَنْ خَالِدٍ عَنْ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِى هُرَيْرَةَ – رضى الله عنه – عَنِ النَّبِىِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ « فُقِدَتْ أُمَّةٌ مِنْ بَنِى إِسْرَائِيلَ لاَ يُدْرَى مَا فَعَلَتْ ، وَإِنِّى لاَ أُرَاهَا إِلاَّ الْفَارَ إِذَا وُضِعَ لَهَا أَلْبَانُ الإِبِلِ لَمْ تَشْرَبْ ، وَإِذَا وُضِعَ لَهَا أَلْبَانُ الشَّاءِ شَرِبَتْ » . فَحَدَّثْتُ كَعْباً فقَالَ أَنْتَ سَمِعْتَ النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُهُ قُلْتُ نَعَمْ . قَالَ لِى مِرَاراً . فَقُلْتُ أَفَأَقْرَأُ التَّوْرَاةَ تحفة 

Sahih” Al-Bukhari Volume 4. Hadith #524 
Bukhari Hadith (Arabic) Serial No.3305-

4-औरतों को कैसे पटायें 
यह हदीस सिखाती है कि जो चालाक औरतें आसानी से नहीं फंसती है , उनकी किसी कमजोरी का फायदा उठा कर उन से मजे लिए जा सकते हैं ,फिर वह काबू में आ सकती हैं .
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया है , औरतें एक पसली (Rib ) कि तरह टेढ़ी होती है , अगर उनको सीधा करने की कोशिश करोगे तो वह टूट जायेंगी . इसलिए उनकी किसी चालाकी को पकड़ो , फिर उनके साथ जितना चाहो उतना मजा करो .
حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ حَدَّثَنِى مَالِكٌ عَنْ أَبِى الزِّنَادِ عَنِ الأَعْرَجِ عَنْ أَبِى هُرَيْرَةَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ « الْمَرْأَةُ كَالضِّلَعِ ، إِنْ أَقَمْتَهَا كَسَرْتَهَا ، وَإِنِ اسْتَمْتَعْتَ بِهَا اسْتَمْتَعْتَ بِهَا وَفِيهَا عِوَجٌ »

Sahih” Al-Bukhari Volume 7. Hadith #113 

Bukhari Hadith (Arabic) Serial No.5184-

5-पेशाब करने का रसूली तरीका 
रसूल हमेशा दोहरी नीति अपनाते थे , वह दूसरों के जिस काम को गुनाह बताते थे , वही काम खुद करते और करवाते थे , देखिये
दूसरों के लिए यह कानून है ,
अबू हुजैफा ने कहा कि अबू वैल और अबू मूसा अल अशरी ने रसूल से पेशाब करने के बारे में सवाल किया , तो रसूल ने कहा अगर कोई बनी इस्राइल का आदमी खड़े होकर पेशाब करे , और उसके छींटे कपड़ों पर गिरें , तो उसका उतना कपड़ा काट डालो .
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَرْعَرَةَ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ أَبِى وَائِلٍ قَالَ كَانَ أَبُو مُوسَى الأَشْعَرِىُّ يُشَدِّدُ فِى الْبَوْلِ وَيَقُولُ إِنَّ بَنِى إِسْرَائِيلَ كَانَ إِذَا أَصَابَ ثَوْبَ أَحَدِهِمْ قَرَضَهُ . فَقَالَ حُذَيْفَةُ لَيْتَهُ أَمْسَكَ ، أَتَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم سُبَاطَةَ قَوْمٍ فَبَالَ قَائِماً 
Sahih Bukhari – Vol 1, Book 4. Ablutions (Wudu’). Hadith 226.
अपनों के लिए यह कानून 
अबू हुजैफा ने कहा कि मैंने देखा कि रसूल आये और सब लोगों के सामने खड़े होकर एक ढेर पर पेशाब करने लगे. और उनके पीछे मैं भी खड़ा हो गया .
– حدثنا عبد الله حدثني أبي ثنا أبو نعيم ثنا يونس يعنى بن إسحاق عن أبي إسحاق عن نهيك عن عبد الله السلولي ثنا حذيفة قال : رأيت رسول الله صلى الله عليه وسلم أتى سباطة قوم فبال قائما
Sahih Bukhari –Vol 1, Book 4. Ablutions (Wudu’). Hadith 225.

6-हदीसों का पाखण्ड 
काफी समय से कुछ मुस्लिम लडके यह प्रचार कर रहे हैं कि इस्लाम अपने माता पिता की आज्ञा पालन करने कि शिक्षा देता है , और एक हदीस दिखाते है जिसमे कहा है 
"الجنة تحت أقدام من والدتنا "
" माता के कदमों के नीचे जन्नत होती है " 
Ibn Majah, Sunan, Hadith no. 2771). 

लेकिन यह हदीस केवल दिखावा है , क्योंकि कुरान में इस से उलटी बात लिखी है ,कुरान में कहा है 
"अगर तेरे माता पिता तुझ पर किसी ऐसी बात को मानने पर दवाब डालें , जो तुझे पसंद नहीं हो , तो तू उनकी बात नहीं मानना "
सूरा -लुकमान 31 :15 
7-हदीसों में सेक्स की दावत 
आज भी कुछ लोग इस भ्रम में पड़े हुए है , कि शायद मुहम्मद साहब ने हदीसों में ऐसी ज्ञान और अध्यात्म कि बातें कही होंगी ,जिन से प्रभावित होकर लोग इस्लाम स्वीकार कर रहे हैं ,लेकिन ऐसा नहीं है . हदीसों में केवल सेक्स की दावत दी जाती है , जैसा कि दिए गए विडियो में एक मुल्ला दे रहा है मस्जिद मेँ दी जा रही वाहियात तालीम की एक झलक

http://www.youtube.com/watch?v=zy0J6ZfpQns&feature=share

" मुल्ला कह रहा है " मुसलमानों तुम अपनी इन पुरानी मैली कुचैली औरतों के चक्कर में नहीं पड़ो , रसूल ने उम्हरे लिए ऐसी औरतों का इंतजाम कर रखा है , जो सदा जवान रहेंगी , उनके कपड़ों के अन्दर उनके सभी अंग दिखेंगे , वह सदा पलंग पर सम्भोग के लिए तैयार रहेंगी . इसलिए तुम्हें पचास मर्दों के बराबर ताकत दी जाएगी . फिर जैसे ही एक औरत निपट जाएगी तुरंत दूसरी आ जाएगी . जन्नत में सिर्फ यही काम चलता रहेगा ."
.बड़े अफसोस कि बात है शिक्षा के नाम पर ऐसी बातें सरकारी अनुदान से चलने वाले मदरसों में पढ़ाई जाती हैं .जिनमे मुस्लिम लड़कियाँ भी तालीम लेती है .
क्या ऐसी हदीसें मुस्लिम लड़कों को " जिगोलो (Gigolo ) लड़कियों को वेश्या नहीं बना रही है ? जवाब दीजिये 

.http://www.websrilanka.com/category/bukhari/

शनिवार, 13 अक्तूबर 2012

नारीविरोधी इस्लामी शिक्षा !


जो लोग महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार और सम्मान दिलाने की बात करते हैं , वह यह्नाही जानते कि हिन्दू परंपरा में स्त्रियों को पुरुषों के बराबर नहीं बल्कि पुरुषों से अधिक सम्मान दिया गया है .उदहारण के लिए जब भी किसी अवतार या देवता का स्मरण किया जाता है ,तो उनकी पत्नी का नाम पहले लिया जाता है .जैसे , सीता -राम , राधे -कृष्ण ,गौरी -शंकर , लक्ष्मी - नारायण और इसी तरह किसी के अभिभावक का उल्लेख करते समय उसके माता -पिता शब्द का प्रयोग किया जाता है .यहाँ तक जब भी कोई यज्ञ किया जाता है तो पत्नी बिठाना अनिवार्य होता है .. परन्तु बड़े ही दुर्भाग्य कि बात है कि इतने समय तक इस्लाम की नारी विरोधी शिक्षा से प्रभावित होकर हिन्दू भी नारियों का सम्मान करने की पुरानी परंपरा भूलते जा रहे हैं .जिसके कारण देश भर में जगह जगह महिलाओं पर अत्याचार , भेदभाव ,और बलात्कार हो रहे हैं .क्योंकि इस्लाम एक ऐसा नारी विरोधी विचार है ,जो स्त्रियों को पुरुषों से हीन और उपभोग की वस्तु मानकर उनपर अत्याचार करने को जायज बताता है .यहाँ पर कुरान और हदीसों से यही बात सिद्ध की जा रही है .

1-पुरुष स्त्रियों से श्रेष्ठ हैं 
इस्लामी मान्यता है कि अल्लाह ने पुरुषों को श्रेष्ठ और स्त्रियों को हर प्रकार से निकृष्ट बनाया है . इसलिए स्त्रियों को समान अधिकार नहीं दिए जा सकते ,क्योंकि कुरान में लिखा है ,
-पुरुषों को स्त्रियों से ऊंचा दर्जा प्राप्त है " सूरा -बकरा 2 :228 
पुरुष स्त्रियों से श्रेष्ठ है , क्योंकि अल्लाह ने उनको बडाई दी है " सूरा निसा 4 :34 

2-औरतें अय्याशी का साधन 
इस्लाम स्त्रियों को मनुष्य नहीं , उपभोग की ऐसी वस्तु मानता है .पुरुष जिसका जैसा भी चाहे उपयोग कर सकता है . और दिल भर जाने पर बिना कारण ही औरत को तलाक नयी औरत ला सकता है .यह अल्लाह ने कहा है
तुम्हारे लिए आजादी है कि, तुंम दो दो , तीन तीन और चार चार शादियाँ कर लो "सूरा -निसा 4 :3 
तुम जब चाहो अपनी औरतों को छोड़ कर दूसरी औरतें रख सकते हो " सूरा 4 :20 
तुम जब चाहो अपनी औरतों को तलाक दे सकते हो .तुम्हें अल्लाह ढेरों नयी औरतें दे देगा और रब के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है "सूरा -अत तहरीम 66 :5 

3-महिलाविरोधी अँधा कानून 

इस्लामी कानून के चलते स्त्रियों को न्याय कभी नहीं मिल सकता .जब तक कुरान में यह आयत रहेगी
यदि औरतें व्यभिचार में पकड़ी जाएँ और अपने पक्ष में चार गवाह पेश न कर सकें , तो उनको घर में तब तक बंद रखो जब तक वह ( भूखों ) न मर जाएँ "
सूरा -निसा 4 :15 
यदि स्त्रियाँ अश्लील काम करती पायी जाएँ तो उनको दोगुनी सजा दी जाये "सूरा -अहज़ाब 33 :30 

4-पत्नी को पीटना जायज है 
मुसलमान अपनी जनसंख्या बढ़ा कर विश्व पर राज्य करना चाहते है , और औरतों को बच्चे पैदा करने की मशीन मानते हैं .और यदि औरत सहवास से मना करती है . तो पुरषों को उसे मारने पीटने का अधिकार है ,यही कुरान और हदीस कहती हैं
रसूल ने कहा है , यदि कोई व्यक्ति अपनी औरत की पिटायी करता है , तो उस से इसके बारे में कोई सवाल नहीं किया जा सकता " 
अबू दाऊद -किताब 11 हदीस 2142 
तुम हाथों से एक कोई टहनी तोड़ लो .और उस से औरत की पिटाई करो " सूरा -साद 38 :44 
एक औरत रसूल के पास फरियाद लेकर गयी और बोली कि मेरा पति मुझे बिना बात पर ही बुरी तरह से मारता रहता है . उसने रसूल को अपने शरीर मार पीट के जख्म ,और त्वचा पर पड़े हुए नीले हरे सूजन के निशान भी दिखाए .लेकिन रसूल ने उसकी विनती पर कोई ध्यान नहीं दिया और हंसते हुए उस औरत से कहा जाओ उसी पति के पास वापिस जाओ . और उसकी वासना को संतुष्ट करो .यही मेरा निर्णय है ."
सही बुखारी - जिल्द 7 किताब 72 हदीस 715
आयशा ने कहा कि रसूल को मेरा बाहर जाकर किसी से मिलना पसंद नहीं था . और जब भी मैं किसी कारण से बाहर जाती थी ,तो वापिस आते ही रसूल मेरी छातियों पर इतनी जोर से घूंसे मारते थे कि मुझे कई दिनों तक दर्द होता रहता था "सही मुस्लिम -किताब 4 हदीस 2127
आयशा और हफ्शा ने कहा कि रसूल के ससुर अबू बकर और उमर जब भी किसी बात से नाराज हो जाते थे , तो उनको बुरी तरह से पीटते थे. यह बात सुन कर रसूल बहुत खुश हुए " सही मुस्लिम -किताब 9 हदीस 3506
5-स्त्रीशिक्षा का शत्रु इस्लाम 
इस्लाम चाहता है कि स्त्रियाँ सिर्फ घर के अन्दर रहकर नमाज पढ़ती रहें और बच्चे पैदा करती रहें .और आधुनिक शिक्षा से दूर रहें .क्योंकि यदि स्त्रियाँ शिक्षित हो जाएँगी तो इस्लाम की पोल खुल जाएगी .इसी डर से तालिबान ने मलाला नामकी लड़की को गोली मारी थी .इसके पीछे कुरान की यह आयत है ,
स्त्रियाँ बस घर में रहें और सजधज न करें और नमाज पढ़ती रहें "सूरा -अहजाब 33 :33 

6-परिवार का शत्रु इस्लाम 
सभी धर्मों में परिवार के सभी सदस्यों का यथायोग्य आदर और सम्मान करने की शिक्षा दी गयी है . लेकिन इस्लाम परिवार के उन सभी लोगों को शत्रु मानने की शिक्षा देता है , जो रसूल की बेतुकी बातों का विरोध करते हों .
हे ईमान वालो तुम अपने माँ बाप और भाइयों को अपना मित्र नहीं बनाना यदि वह मुसलमान नहीं बनते "सूरा -तौबा 9 :23 
तुम उन लोगों को अपना मित्र नहीं मानो , जो रसूल के विरोधी हों .चाहे वह उनके बाप ,बेटे , सगे भाई या घराने के लोग ही क्यों न हों "सूरा -मुजादिला 58 :22 

7-इस्लाम पाखंड 
जकारिया नायक जैसे अनेकों धूर्त इस्लाम के प्रचारक लोगों को धोखा देने , और इस्लाम की तारीफ करने के लिए अक्सर इस हदीस का हवाला देकर कहते हैं , कि इस्लाम में माता को सबसे बड़ा दर्जा दिया गया है ,वह हदीस इस प्रकार है ,
मुआविया बिन जाहमिया ने रसूल से कहा कि मैं जिहाद पर जाना चाहता हूँ .रसूल ने उस से पूछा कि क्या तुम्हारे घर में माँ मौजूद है .जाहमिया ने कहा हाँ .तब रसूल ने कहा अपनी माँ के पास रहो . क्योंकि माँ के पैरों के नीचे जन्नत होती है "(Paradise  is  beneath feets of mother )
""الجنة تحت أقدام الأم  "(अल जन्नत तहत इकदाम अल उम्म )

सुन्नन नसाई -हदीस 3104 और यही बात मुसनद अहमद बाब 3 हदीस 429 में भी है .
लेकिन यह हदीस " जईफ " यानि अपुष्ट , फर्जी , और बनावटी है .अर्थात झूठी है .क्योंकि मुहम्मद ने अपने सभी सहबियों से कहा था कि वह मेरी औरतों को अपनी माताएं समझें .जिनमे मुहम्मद की नौ साल की पत्नी आयशा भी शामिल है .कुरान में कहा है ,
रसूल की पत्नियां ईमान वालों की माताएं है "सूरा -अहजाब 33 :6 
इस आयत में मुहम्मद साहब ने यह आदेश दिया है कि लोग रसूल की पत्नियों को माता के समान आदर करें . लेकिन हदीस में कहा है कि लोग अपनी सगी माता और बहिन से भी शादी कर सकते हैं .देखिये विडियो
Islam adultery sex incest with own daughter allowed!!!!!!!

http://www.youtube.com/watch?v=N2pLbhrl3ZY

8-मुस्लिम औरतों की दुर्गति 

मुस्लिम औरतें चाहे किसी भी मुस्लिम देश में रहें ,कुरान और हदीसों के ऐसे ही स्त्री विरोधी नियमों के कारण उन पर हमेशा अत्याचार होते रहेंगे .और वह हमेशा दुखी होती रहेंगी .जैसा कि मुहम्मद साहब की प्रिय पत्नी आयशा ने इस हदीस में कहा है
आयशा ने कहा कि मैंने दुनियां में इतनी दुखी और सताई गयी औरतें कहीं नहीं देखीं , जितनी दुखी और सताई गयी औरतें ईमान वालों (मुसलमानों ) के घर में होती हैं " सही बुखारी -जिल्द 7 किताब 72 हदीस 715 A 
इसलिए मुस्लिम लड़कियों को चाहिए कि जल्द ही किसी हिन्दू लडके से शादी कर लें . और जिंदगी भर सुखी जीवन बिताएं !

http://www.thereligionofpeace.com/Quran/003-wife-beating.htm


शनिवार, 6 अक्तूबर 2012

अल्लाह और रसूल की उलटवाणियाँ !!


कुरान अल्लाह की किताब है ,यानि उसमे लिखे हरेक शब्द अल्लाह के वचन है .और प्रमाणिक हैं . उसी तरह हदीसें भी प्रमाणिक है क्योंकि उनमे अल्लाह के रसूल के वचन मौजूद हैं. ऐसा मुसलमानों का दावा है . और उनका यही आग्रह रहता है कि दुनियां के सभी लोग उनकी तरह ही अपनी बुद्धि बेच डालें और कुरान और हदीसों की परस्पर विरोधी तर्कहीन " उलटवाणियों" पर इमान ले आयें .और ऐसी बेतुकी बातों पर विश्वास कर लें .यद्यपि कुरान और हदीसों में ऐसी अनेकों बातें मिल सकती हैं , लेकिन यहाँ पर नमूने के लिए केवल दो ही उदहारण दिए जा रहे हैं . और उनके माध्यम से इस्लाम के विद्वानों और प्रबुद्ध पाठकों से निवेदन है कि वह दिए गए हवालों के आधार पर इन प्रश्नों पर उचित निर्णय करें .प्रश्न हैं 1 .क्या मुसलमान मुसलमानों का मांस नहीं खाते हैं ? 2 . क्या शैतान अल्लाह का सहभागी नहीं है ?
इन प्रश्नों का उत्तर इसी लेख में छुपा है .इसलिए लेख को ध्यान से पढ़िए -
पहला प्रश्न -क्या मुसलमान मुसलमानों का मांस नहीं खाते हैं ? 
1-भाई का मांस खाना गुनाह है 
कुरान में किसी की पीठ पीछे बुराई करना , अपने ही भाई का मांस खाने के समान बताकर गुनाह माना गया है , कुरान में कहा है ,
"किसी की पीठ पीछे उसकी बुराई करना , अपने ही भाई का मांस खाने के बराबर है "सूरा -अल हुजुरात 49 :12 
लेकिन मुसलमान खुले आम ईमान वालों का मांस खाते हैं , क्योंकि कुरान के अनुसार पक्षी और जानवर भी नमाज पढ़ते और तसबीह करते हैं
2-पशु पक्षी भी मुसलमान हैं 
इस्लामी परिभाषा के अनुसार जो भी अल्लाह की तस्बीह करता है और , नमाज पढ़ता है उसी को मोमिन कहा जाता है .कुरान में कहा है
क्या तुम नहीं देखते कि धरती पर चलने वाले जानवर और आकाश में पंख फैला कर उड़ने वाले पक्षी भी अल्लाह की तसबीह करते रहते हैं ,और अपनी नमाज अदा करते रहते हैं .और अल्लाह इस बात को जनता है " सूरा -नूर 24 :41 
आकाश में उड़ने वाले और धरती पर रहने वाले सभी प्राणी उसी अल्लाह की तसबीह (प्रार्थना ) करते हैं . और कोई ऐसा प्राणी नहीं है , जो अल्लाह की इबादत नहीं करता हो .लेकिन तुम उनकी नमाज को नहीं जानते " सूरा -बनी इस्राएल 17 :44 
इन आयतों अनुसार नमाज पढ़ने वाले सभी प्राणी ईमानवाले , और भाई माने गए हैं .और कहा गया है ,
सभी ईमान वाले आपस में भाई भाई हैं "सूरा-अल हुजुरात 49 :10 
3-अपने भाई का मांस खाओ 
क्या कोई मुसलमान जवाब देगा कि क्या कारण है , एक तरफ तो अल्लाह नमाज पढ़ने और तसबीह करने वालों को ईमान वाला और आपस में भाई बता रहा है , और दूसरी तरफ उन्ही को खाने की अनुमति दे रहा है . और कहता है ,
और अल्लाह ने ही पशु भी बनाये हैं ,जिनसे गर्मी पैदा करने का सामान ( ऊन ) मिलता है ,और तुम जिनको खाते भी हो " सूरा -नहल 16 :5 
तुम पर सिर्फ मुरदार को ,सूअर को ,खून को और जिन जानवरों पर अल्लाह के आलावा किसी का नाम लिया गया हो उस जानवर को हराम किया गया है . इनको छोड़ कर तुम सभी जानवरों को खा सकते हो " सूरा -बकरा 2 :173 
इस प्रकार यदि हम कुरान की इन सभी आयतों का भावार्थ और तात्पर्य समझें तो यही स्पष्ट होगा कि आजकल मुसलमान अपने भाई ( पशु , पक्षिओं ) का मांस खाते हैं , क्योंकि वे सब नमाज पढ़ते है , और अल्लाह की तसबीह करते हैं .यनि सभी मुसलमान अपने भाइयों के हत्यारे हैं
इसी तरह मुसलमानों का दावा है कि सारे जीव अकेले अल्लाह ने ही बनाये है , और उसका कोई सहभागी नहीं है , लेकिन खुद अल्लाह का रसूल इस से उलटी बात बता रहे हैं , इसका नमूना देखिये
दूसरा प्रश्न -क्या शैतान अल्लाह का सहभागी नहीं है ? 
1-सभी प्राणी अल्लाह ने बनाये 
कुरान का दावा है कि दुनियां की सभी चीजें और प्राणी अल्लाह ने ही बनाये है .जैसा इन आयतों में कहा है
-केवल अल्लाह ही हरेक को पैदा करने वाला है "सूरा -अज जुमुर 39 :62 
अल्लाह ने ही चौपाये बनाये हैं ,जिन पर तुम सवारी करते हो "सूरा -अज जुखुरुफ़ 43 :12 
क्या लोग ऊंटों को नहीं देखते कि अल्लाह ने इनको कैसा बनाया है "सूरा -अल गाशिया 88 :17 
2-अल्लाह का कोई सहभागी नहीं 
मुसलमान समझते हैं कि अल्लाह इतना शक्तिशाली है कि कोई उसके बराबर नहीं है .और अल्लाह अकेला ही सारे काम कर सकता है . उसे किसी सहयोगी कि जरुरत नहीं है . और अल्लाह का कोई सहभागी मानना अक्षम्य अपराध है . कुरान के कहा है ,
ऐसा कोई नहीं है , जो अल्लाह की बराबरीकर  सके " सूरा -इखलास 112 :4 
अल्लाह का कोई सहभागी ( Partner ) नहीं है " सूरा -अनआम 6 :163 
अल्लाह ने न तो किसी को अपना बेटा बनाया और न ही उसकी सत्ता में कोई उसका सहभागी है "सूरा -बनी इस्राइल 17 :111 
अल्लाह इस बात को कभी क्षमा नहीं करेगा कि कोई किसी को अल्लाह का सहभागी ठहराए "
 सूरा -निसा 4 : 48 
3-ऊंट शैतान ने बनाये हैं 
लेकिन अल्लाह के रसूल हदीसों में दावा कर रहे हैं कि ऊंट शैतान ने बनाये हैं . यानि अल्लाह और शैतान में बराबर शक्ति है , हदीसें देखिये
अल बरा इब्न अजीब ने कहा कि रसूल ने कहा है तुम ऊँटों के रहने कि जगह नमाज नहीं पढो , क्योंकि ऊंट शैतान ने बनाये हैं (Camels were created from devils)

" فإنها خلقت من الشياطين "
सुन्नन अबू दाऊद- किताब 1 हदीस 184 
अब्दुल्लाह बिन मुगफ्फल अल मुजानिन ने कहा कि रसूल ने तुम भेड़ों आराम करने कि जगह नमाज पढ़ा करो ,लेकिन ऊंटों के रहने कि जगह नमाज कभी नहीं पढना , क्योंकि ऊंट शैतान ने बनाये है "इब्न माजा 

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍ الْمُزَنِيِّ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏"‏ صَلُّوا فِي مَرَابِضِ الْغَنَمِ وَلاَ تُصَلُّوا فِي أَعْطَانِ الإِبِلِ فَإِنَّهَا خُلِقَتْ مِنَ الشَّيَاطِينِ ‏"‏ ‏.‏

Sunan Ibn Majah : The Book On The Mosques And The Congregations 

English reference : Vol. 1, Book 6, Hadith 769
Arabic reference : Book 5, Hadith 818

यही हदीस इमाम हम्बल में मुसनद में भी दर्ज कि है . ऊंट शैतान ने बनाये हैं musnad ahmad

وفي المسند أيضا, من حديث عبد الله بن المغفل قال: قال رسول الله صلى الله تعالى عليه وآله وسلم "صلوا في مرابض الغنم ولا تصلوا في أعطان الإبل, فإنها خلقت من الشياطين".

4-ऊंट के बारे में फतवा 
ऊंट शैतान ने बनाये हैं ,और ऊंट का मांस खाने से मुसलमानों में शैतानी ऊर्जा बढ़ती है . इस बात को साबित करने के लिए जो फतवा दिया गया है उसका मुख्य अंश इस प्रकार है ,
"ऊंटों में शैतान की शक्ति होती है . इसलिए जो भी ऊंटों का मांस खता है ,उसमे शैतान प्रकृति का विकास हो जाता है .फलस्वरूप उसमे शैतान का स्वभाव बढ़ जाता है .
The camel has a devilish nature, so whoever eats its meat will develop some devilish energy as a result; so it is prescribed  to take away that energy.

http://islamqa.info/en/ref/130871

इतना जानने के बाद भी लोगों से वही उलटी बातें बता कर गुमराह करते रहते है , जो उस समय मुहम्मद साहब अपने जाहिल जिहादियों से कहते थे कि
हे नबी तुम लोगों से कह दो ,कि यदि तुम मुझ से प्रेम करते हो तो ,मेरा अनुसरण करो .और अल्लाह के साथ रसूल की बात पर भी विश्वास करो "
सूरा -आले इमरान 3 : 31 -32 
5-निष्कर्ष 
लेख में दिए गए कुरान और हदीसों के प्रमाणों का अध्यन करने से यही साबित होता है कि ऊंटों का मांस खा खा कर अरब के मुसलमानों में शैतानी शक्तियां बढ़ गयी हैं .चूँकि अरब इस्लाम का जन्म स्थान है .इसलिए शैतानी शक्तियां अरब से निकल कर भारत तक फ़ैल रही हैं .और यही कारन है कि मुसलमान हर जगह आतंक फैलाते रहते हैं .यदि ऐसा नहीं तो मुसलमान स्वीकार करें कि यह कुरान कि आयतें और रसूल की बातें झूठ है . और रसूल झूठे थे .
http://www.islamweb.net/

मंगलवार, 2 अक्तूबर 2012

रसूल का चरित्र कितना आदर्श ?


मनोविज्ञान के अनुसार किसी व्यक्ति का आचार ,व्यवहार ,और भाषा की शिष्टता से उसके चरित्र का पता चल सकता है . और इन्ही के आधार पर उस व्यक्ति के स्तर का मूल्यांकन किया जा सकता है .चूँकि सभी मुसलमान मुहम्मद साहब के चरित्र को अपना आदर्श मानते हैं . इसलिए उनमे भी मुहम्मद साहब के चरित्र के कुछ न कुछ गुण जरुर पाए जाते हैं .क्योंकि कुरान में भी मुसलमानों को आदेश दिया गया है कि वह रसूल के उत्तम चरित्र को अपना आदर्श बनायें . कुरान में लिखा है .
निश्चय ही तुम लोगों ( मुसलमानों ) के लिए रसूल का आदर्श उत्तम है " सूरा -अहजाब 33 :21 
हे नबी बेशक तुम उत्तम चरित्र वाले हो " सूरा -कलम 68 :4 
1-आदर्श गंदगी 
यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि जिस व्यक्ति का शरीर जितना गन्दा होगा , उसके विचार और भाषा भी उतनी ही गन्दी होगी .मुहम्मद साहब कितने साफ रहते थे , यह इन प्रमाणिक हदीसों से पता चलता है ,
काब बिन उजारा ने कहा कि हुदैबिया की लड़ाई के समय मेरे सिर के जुएँ मेरे चहरे पर टपक रहे थे . जिस से मुझे दिक्कत हो रही थी . तब रसूल ने कहा या तो तुम छः लोगों को खाना खिलाओ ,या एक भेड़ की क़ुरबानी करो . इस से जुएँ नहीं काटेंगे 
" बुखारी - जिल्द 5 किताब 59 हदीस 503 
आयशा ने कहा कि रसूल के सहाबा इतने गंदे थे कि उनके शरीर से दुर्गन्ध निकलती रहती थी . मैं उनको नहाने के लिए टोकती रहती थी .
 बुखारी -जिल्द 3 किताब 34 हदीस 285 
मैमूना ने कहा ,कि सहवास करने के बाद रसूल अपने गुप्तांग पर लगा हुआ वीर्य अपने हाथों में लगा लेते थे . फिर उन्हीं हाथों को घर की दीवार से रगड़ कर साफ कर लेते थे .और फिर सिर्फ पैरों का वजू करके नमाज के लिए चले जाते थे " बुखारी -जिल्द 1 किताब 5 हदीस 260 
आयशा ने कहा कि जब रसूल जिस पानी से नहा चुकते थे . या कुल्ली कर के उगल देते थे , तो सहाबी उस पानी को इकठ्ठा कर लेते थे . फिर रसूल वाही पानी गिलास में भर कर लोगों को पिला देते थे " बुखारी -जिल्द 1 किताब 1 हदीस 187 
2-रसूल तंत्र मन्त्र 
वैसे तो कुरान में झाडफूंक , टोने टोटके , और तंत्र मन्त्र करने वालों की निंदा की गयी है .जैसा कि इस आयत में लिखा है
"मैं पनाह मांगता हूँ गंडे बांधने वालों . और झाड़ फूंक करने वाले लोगों की चालों से " 
सूरा फलक 113 :5 
लेकिन खुद मुहम्मद साहब लोगों से अपना इलाज करने के लिए झाड़फूंक का सहारा लेने की सलाह दिया करते थे .यह बात इन हदीसों से सिद्ध होती है ,
अगर तुम बीमार हो जाओ तो . सूरा इखलास (112 ) सूरा फलक (113 ) और सूरा नास (114 ) पढ़कर अपनी हथेलियों पर फूँको फिर हाथ अपने चहरे पर मलो .बुखारी - जिल्द 7 किताब 71 हदीस 664 और 667 
अगर किसी व्यक्ति को कहीं घाव हो जाये तो सूरा फातिहा पढ़ कर घाव की जगह थूक दो .अबू दाऊद- जिल्द 3 किताब 28 हदीस 3888 
पागल व्यक्ति को ठीक करने के लिए उसे सूरा फातिहा पढाओ .अबू दाउद-जिल्द 3 किताब 28 हदीस 3892 
3-रसूल की आदर्श गप्पें 

लगता है कि इस्लाम ने दूसरे धर्मों के साथ विज्ञानं के खिलाफ भी जिहाद छेड़ रखी है .क्योंकि हदीसों में ऐसी ऐसी असंभव बातें लिखी हैं ,जिनपर सिर्फ वही लोग विश्वास कर सकते हैं ,जिनकी बुद्धि नष्ट हो गयी है , जैसे यह हदीसें देखिये ,

रसूल अपने कपड़ों में कुछ बरसाती बादलों को रख लेते थे . और फिर जब चाहते थे उन बादलों से इतनी बरसात कर देते थे कि जिस से मक्का शहर की गलियां भर जाती थी . रसूल कहते थे यह बादल अल्लाह भेज देता है . अबू दाऊद- जिल्द 3 किताब 31 हदीस 5081 
अनस ने कहा कि रसूल को रास्ते में एक खजूर का पेड़ मिला .जो दर्द से इस तरह कराह रहा था , जैसे गर्भवती ऊंटनी कराहती है . और जब रसूल ने उस पेड़ पर हाथ फिराया तो उसका दर्द ख़त्म हो गया . और पेड़ शांत हो गया .बुखारी -जिल्द 4 किताब 56 हदीस 783 , 784 और 785 

अनस ने कहा कि एक बार जब रस्ते में कहीं पानी नहीं था , और जिहादी प्यासे मर रहे थे . तो रसूल ने अपनी उँगलियों से इतना पानी निकाल दिया कि जिस से 1500 लोगों की प्यास बुझ गयी . बुखारी -जिल्द 4 किताब 56 हदीस 776
नोट- लगता है कि यह हदीस बाइबिल के नए नियम की पुस्तक "मरकुस अध्याय 6 आयत 39 से 44 तक की एक कहानी से चुरायी गयी है . जिसमे ईसा मसीह के चमत्कार का वर्णन है . इस कहानी के अनुसार ईसा मसीह ने सिर्फ पांच रोटियों और दो मछलियों से पांच हजार लोगों को भोजन करा दिया था . फिर भी खाने के बाद बारह टोकरियाँ रोटियां और मछलियाँ बच गए थे .बुखारी गप्पियों का उस्ताद होगा .
4-रसूल के झूठे चमत्कार 
मुहम्मद साहब के चमत्कारों के बारे में हदीसें भरी पड़ी है . लेकिन मुहम्मद साहब की जीवनी में भी ऐसी ही असंभव बातें दी गयी हैं . जिन पर कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति विश्वास नहीं करेगा . ऐसी ही एक किताब "अश शिफा " है . जिसे " काजी इलयाद " ने हिजरी 544 यानि ईसवी 1149 में लिखा था .इस किताब का पूरा नाम " किताब अश शिफा बितारीफे हुकूके मुस्तफा كتاب الشفاء بتعريف حقوق المصطفى‎" है .इस किताब में मुहम्मद की पेशाब , थुक, और उनके नहाने के बाद बचे हुए गंदे पानी से इलाज करने की विधियाँ दी गयी हैं .मुल्लों का दावा है कि इस किताब को घर में रखने , और पढ़ने से कोई बीमारी नहीं होती .इसीलिए इस किताब को हदीस की तरह प्रमाणिक माना जाता है .
रसूल ने एक ऐसी मादा भेड़ थनों पर हाथ लगाया , जिसका इसके पहले किसी नर भेड़ से संसर्ग नहीं हुआ था .लेकिन रसूल के हाथ लगते ही वह दूध देने लगी 
अश शिफा - पेज 185 -186 
एक बार जब रसूल मीना की पहाड़ी पर खड़े हुए थे . तो उन्होंने अपनी उंगली से चाँद के दो टुकडे कर दिए . एक टुकड़ा पहाड़ी की एक तरफ गिरा , और दूसरा टुकड़ा दूसरी तरफ गिर गया .मुस्लिम - किताब 39 हदीस 6725 , 6726 , और 6728 
नोट - लगता है कि मुहम्मद साहब फुरसत के समय मूर्ख जिहादियों पर अपना प्रभाव डालने के लिए गप्पें मारते रहते थे . वर्ना ऐसी असंभव बातों पर केवल वही विश्वास कर सकता है ,जिसकी अक्ल का दिवाला निकल गया हो .क्योंकि इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के अनुसार चन्द्रमा का आकार पृथ्वी से एक तिहाई से भी कम है .(The Moon] is less than one-third the size of Earth (radius about 1,738 कि मी )फिर भी यदि आधा चन्द्रमा टूट कर अरब पर गिर गया होता तो मक्का मदीना के साथ कई अरब देश मिट गए होते .

5-रसूल की आदर्श चिकित्सा विधि 
रसूल ने कहा कि जेहादियों के घोड़ों की लीद और पेशाब भी पवित्र होते हैं .और दवा हैं .बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 105 
रसूल ने काहा है कि ऊंटों की पेशाब भी दवा है . जिसके पीने से कई बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं .बुखारी -जिल्द 7 किताब 71 हदीस 589 .590 और 623 . और इब्न माजा - किताब 5 हदीस 3503 

रसूल का मूत्र भी पेट दर्द की अचूक दवा है .एक औरत के पेट में दर्द हुआ , तो रसूल ने उसे अपना मूत्र पिलाकर कहा . अब भविष्य में तुम्हारे पेट में दर्द कभी नहीं होगा . लेकिन मेरे मूत्र को कुल्ला करके साफ नहीं करना . अश शिफा .पेज -36 
6-रसूल की आदर्श गालियाँ 
शायद बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि गन्दी गन्दी और अश्लील गालियाँ इस्लाम की सौगात है . जो अरब से से निकल कर ईरान होते हुए भारत में आई है .इसका सबूत इस हदीस से मिलता है क्योंकि मुहम्मद साहब ऐसी ही गन्दी भद्दी गालियाँ दिया करते थे . जिसका एक नमूना यहाँ दिया गया है .शायद यही कारण है कि मुसलमान बात बात पर माँ बहिन की गालियाँ दिया करते हैं (Mohammad who started the Vulgar language according Mishkawt Sharif in Urdu Volume 2, verse 4683, so Muslims are really following the same style.)

उबैय बिन काअब ने बयान किया कि रसूल अल्लाह ने कहा है . जो शख्श इस्लाम को छोड़ कर खुद को फिर से उसी जाहलियत के दीन से मंसूब करे , तो उसके बाप का शर्मगाह (Penis ) उसके मुंह में घुसेड दो .और इसमें कोई हीला ( देरी ) न करो " मिश्कात शरीफ - जिल्द 2 हदीस 4683 पेज 441 ( उर्दू अनुवाद )
Vulgar Language of Muslims. by Rev. Dr. Samie Samson 

http://www.youtube.com/watch?v=PgP74bWmm5I

इन हदीसों का अध्यन करने और इन प्रमाणों को देखने के बाद यह बात स्पष्ट रूप से सिद्ध हो जाती है कि ऐसे रसूल को अपना आदर्श मानकर उनका अनुसरण करने से ही मुसलमान इतने अन्धस्विश्वासी, उग्र , हिंसक ,बात बात पर फसाद करने वाले क्यों बन गए हैं, हमारे सामने एक ताजा उदहारण है , जब एक अमेरिकन फिल्म " Innocence of  muslims" को पूरी तरह से देखे बिना ही मुसलमानों ने दुनियां भर में उत्पात मचा दिया था . यहाँ तक बंगलादेश के कई बौद्ध मंदिरों को तोड़ दिया था .यदि मुसलमान सचमुच ही मुहम्मद साहब को एक आदर्श व्यक्ति सिद्ध करना चाहते हैं ,तो उनको चाहिए कि वह सबसे पहले उन हदीसों की किताबों को नष्ट कर दें , जिनमे मुहम्मद साहब के बारे में ऐसी अशिष्ट बातें लिखी हुई हैं .उनको पता होना चाहिए कि मुहम्मद साहब के बारे में , बिना सबूत के न तो कोई व्यक्ति कुछ लिख सकता है . और न कोई फिल्म बना सकता है .सत्य को झुठलाने से कोई फायदा नहीं होगा .

http://islam-watch.org/AbulKasem/IslamicVoodoos/