शनिवार, 13 अक्तूबर 2012

नारीविरोधी इस्लामी शिक्षा !


जो लोग महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार और सम्मान दिलाने की बात करते हैं , वह यह्नाही जानते कि हिन्दू परंपरा में स्त्रियों को पुरुषों के बराबर नहीं बल्कि पुरुषों से अधिक सम्मान दिया गया है .उदहारण के लिए जब भी किसी अवतार या देवता का स्मरण किया जाता है ,तो उनकी पत्नी का नाम पहले लिया जाता है .जैसे , सीता -राम , राधे -कृष्ण ,गौरी -शंकर , लक्ष्मी - नारायण और इसी तरह किसी के अभिभावक का उल्लेख करते समय उसके माता -पिता शब्द का प्रयोग किया जाता है .यहाँ तक जब भी कोई यज्ञ किया जाता है तो पत्नी बिठाना अनिवार्य होता है .. परन्तु बड़े ही दुर्भाग्य कि बात है कि इतने समय तक इस्लाम की नारी विरोधी शिक्षा से प्रभावित होकर हिन्दू भी नारियों का सम्मान करने की पुरानी परंपरा भूलते जा रहे हैं .जिसके कारण देश भर में जगह जगह महिलाओं पर अत्याचार , भेदभाव ,और बलात्कार हो रहे हैं .क्योंकि इस्लाम एक ऐसा नारी विरोधी विचार है ,जो स्त्रियों को पुरुषों से हीन और उपभोग की वस्तु मानकर उनपर अत्याचार करने को जायज बताता है .यहाँ पर कुरान और हदीसों से यही बात सिद्ध की जा रही है .

1-पुरुष स्त्रियों से श्रेष्ठ हैं 
इस्लामी मान्यता है कि अल्लाह ने पुरुषों को श्रेष्ठ और स्त्रियों को हर प्रकार से निकृष्ट बनाया है . इसलिए स्त्रियों को समान अधिकार नहीं दिए जा सकते ,क्योंकि कुरान में लिखा है ,
-पुरुषों को स्त्रियों से ऊंचा दर्जा प्राप्त है " सूरा -बकरा 2 :228 
पुरुष स्त्रियों से श्रेष्ठ है , क्योंकि अल्लाह ने उनको बडाई दी है " सूरा निसा 4 :34 

2-औरतें अय्याशी का साधन 
इस्लाम स्त्रियों को मनुष्य नहीं , उपभोग की ऐसी वस्तु मानता है .पुरुष जिसका जैसा भी चाहे उपयोग कर सकता है . और दिल भर जाने पर बिना कारण ही औरत को तलाक नयी औरत ला सकता है .यह अल्लाह ने कहा है
तुम्हारे लिए आजादी है कि, तुंम दो दो , तीन तीन और चार चार शादियाँ कर लो "सूरा -निसा 4 :3 
तुम जब चाहो अपनी औरतों को छोड़ कर दूसरी औरतें रख सकते हो " सूरा 4 :20 
तुम जब चाहो अपनी औरतों को तलाक दे सकते हो .तुम्हें अल्लाह ढेरों नयी औरतें दे देगा और रब के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है "सूरा -अत तहरीम 66 :5 

3-महिलाविरोधी अँधा कानून 

इस्लामी कानून के चलते स्त्रियों को न्याय कभी नहीं मिल सकता .जब तक कुरान में यह आयत रहेगी
यदि औरतें व्यभिचार में पकड़ी जाएँ और अपने पक्ष में चार गवाह पेश न कर सकें , तो उनको घर में तब तक बंद रखो जब तक वह ( भूखों ) न मर जाएँ "
सूरा -निसा 4 :15 
यदि स्त्रियाँ अश्लील काम करती पायी जाएँ तो उनको दोगुनी सजा दी जाये "सूरा -अहज़ाब 33 :30 

4-पत्नी को पीटना जायज है 
मुसलमान अपनी जनसंख्या बढ़ा कर विश्व पर राज्य करना चाहते है , और औरतों को बच्चे पैदा करने की मशीन मानते हैं .और यदि औरत सहवास से मना करती है . तो पुरषों को उसे मारने पीटने का अधिकार है ,यही कुरान और हदीस कहती हैं
रसूल ने कहा है , यदि कोई व्यक्ति अपनी औरत की पिटायी करता है , तो उस से इसके बारे में कोई सवाल नहीं किया जा सकता " 
अबू दाऊद -किताब 11 हदीस 2142 
तुम हाथों से एक कोई टहनी तोड़ लो .और उस से औरत की पिटाई करो " सूरा -साद 38 :44 
एक औरत रसूल के पास फरियाद लेकर गयी और बोली कि मेरा पति मुझे बिना बात पर ही बुरी तरह से मारता रहता है . उसने रसूल को अपने शरीर मार पीट के जख्म ,और त्वचा पर पड़े हुए नीले हरे सूजन के निशान भी दिखाए .लेकिन रसूल ने उसकी विनती पर कोई ध्यान नहीं दिया और हंसते हुए उस औरत से कहा जाओ उसी पति के पास वापिस जाओ . और उसकी वासना को संतुष्ट करो .यही मेरा निर्णय है ."
सही बुखारी - जिल्द 7 किताब 72 हदीस 715
आयशा ने कहा कि रसूल को मेरा बाहर जाकर किसी से मिलना पसंद नहीं था . और जब भी मैं किसी कारण से बाहर जाती थी ,तो वापिस आते ही रसूल मेरी छातियों पर इतनी जोर से घूंसे मारते थे कि मुझे कई दिनों तक दर्द होता रहता था "सही मुस्लिम -किताब 4 हदीस 2127
आयशा और हफ्शा ने कहा कि रसूल के ससुर अबू बकर और उमर जब भी किसी बात से नाराज हो जाते थे , तो उनको बुरी तरह से पीटते थे. यह बात सुन कर रसूल बहुत खुश हुए " सही मुस्लिम -किताब 9 हदीस 3506
5-स्त्रीशिक्षा का शत्रु इस्लाम 
इस्लाम चाहता है कि स्त्रियाँ सिर्फ घर के अन्दर रहकर नमाज पढ़ती रहें और बच्चे पैदा करती रहें .और आधुनिक शिक्षा से दूर रहें .क्योंकि यदि स्त्रियाँ शिक्षित हो जाएँगी तो इस्लाम की पोल खुल जाएगी .इसी डर से तालिबान ने मलाला नामकी लड़की को गोली मारी थी .इसके पीछे कुरान की यह आयत है ,
स्त्रियाँ बस घर में रहें और सजधज न करें और नमाज पढ़ती रहें "सूरा -अहजाब 33 :33 

6-परिवार का शत्रु इस्लाम 
सभी धर्मों में परिवार के सभी सदस्यों का यथायोग्य आदर और सम्मान करने की शिक्षा दी गयी है . लेकिन इस्लाम परिवार के उन सभी लोगों को शत्रु मानने की शिक्षा देता है , जो रसूल की बेतुकी बातों का विरोध करते हों .
हे ईमान वालो तुम अपने माँ बाप और भाइयों को अपना मित्र नहीं बनाना यदि वह मुसलमान नहीं बनते "सूरा -तौबा 9 :23 
तुम उन लोगों को अपना मित्र नहीं मानो , जो रसूल के विरोधी हों .चाहे वह उनके बाप ,बेटे , सगे भाई या घराने के लोग ही क्यों न हों "सूरा -मुजादिला 58 :22 

7-इस्लाम पाखंड 
जकारिया नायक जैसे अनेकों धूर्त इस्लाम के प्रचारक लोगों को धोखा देने , और इस्लाम की तारीफ करने के लिए अक्सर इस हदीस का हवाला देकर कहते हैं , कि इस्लाम में माता को सबसे बड़ा दर्जा दिया गया है ,वह हदीस इस प्रकार है ,
मुआविया बिन जाहमिया ने रसूल से कहा कि मैं जिहाद पर जाना चाहता हूँ .रसूल ने उस से पूछा कि क्या तुम्हारे घर में माँ मौजूद है .जाहमिया ने कहा हाँ .तब रसूल ने कहा अपनी माँ के पास रहो . क्योंकि माँ के पैरों के नीचे जन्नत होती है "(Paradise  is  beneath feets of mother )
""الجنة تحت أقدام الأم  "(अल जन्नत तहत इकदाम अल उम्म )

सुन्नन नसाई -हदीस 3104 और यही बात मुसनद अहमद बाब 3 हदीस 429 में भी है .
लेकिन यह हदीस " जईफ " यानि अपुष्ट , फर्जी , और बनावटी है .अर्थात झूठी है .क्योंकि मुहम्मद ने अपने सभी सहबियों से कहा था कि वह मेरी औरतों को अपनी माताएं समझें .जिनमे मुहम्मद की नौ साल की पत्नी आयशा भी शामिल है .कुरान में कहा है ,
रसूल की पत्नियां ईमान वालों की माताएं है "सूरा -अहजाब 33 :6 
इस आयत में मुहम्मद साहब ने यह आदेश दिया है कि लोग रसूल की पत्नियों को माता के समान आदर करें . लेकिन हदीस में कहा है कि लोग अपनी सगी माता और बहिन से भी शादी कर सकते हैं .देखिये विडियो
Islam adultery sex incest with own daughter allowed!!!!!!!

http://www.youtube.com/watch?v=N2pLbhrl3ZY

8-मुस्लिम औरतों की दुर्गति 

मुस्लिम औरतें चाहे किसी भी मुस्लिम देश में रहें ,कुरान और हदीसों के ऐसे ही स्त्री विरोधी नियमों के कारण उन पर हमेशा अत्याचार होते रहेंगे .और वह हमेशा दुखी होती रहेंगी .जैसा कि मुहम्मद साहब की प्रिय पत्नी आयशा ने इस हदीस में कहा है
आयशा ने कहा कि मैंने दुनियां में इतनी दुखी और सताई गयी औरतें कहीं नहीं देखीं , जितनी दुखी और सताई गयी औरतें ईमान वालों (मुसलमानों ) के घर में होती हैं " सही बुखारी -जिल्द 7 किताब 72 हदीस 715 A 
इसलिए मुस्लिम लड़कियों को चाहिए कि जल्द ही किसी हिन्दू लडके से शादी कर लें . और जिंदगी भर सुखी जीवन बिताएं !

http://www.thereligionofpeace.com/Quran/003-wife-beating.htm


26 टिप्‍पणियां:

  1. Rifa'a divorced his wife whereupon 'AbdurRahman bin Az-Zubair Al-Qurazi married her. 'Aisha said that the lady (came), wearing a green veil (and complained to her (Aisha) of her husband and showed her a green spot on her skin caused by beating). It was the habit of ladies to support each other, so when Allah's Apostle came, 'Aisha said, "I have not seen any woman suffering as much as the believing women. Look! Her skin is greener than her clothes!" When 'AbdurRahman heard that his wife had gone to the Prophet, he came with his two sons from another wife. She said, "By Allah! I have done no wrong to him but he is impotent and is as useless to me as this," holding and showing the fringe of her garment, 'Abdur-Rahman said, "By Allah, O Allah's Apostle! She has told a lie! I am very strong and can satisfy her but she is disobedient and wants to go back to Rifa'a." Allah's Apostle said, to her, "If that is your intention, then know that it is unlawful for you to remarry Rifa'a unless Abdur-Rahman has had sexual intercourse with you." Then the Prophet saw two boys with 'Abdur-Rahman and asked (him), "Are these your sons?" On that 'AbdurRahman said, "Yes." The Prophet said, "You claim what you claim (i.e.. that he is impotent)? But by Allah, these boys resemble him as a crow resembles a crow."
    volume 7 book 72 hadith 715

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  2. http://www.sahih-bukhari.com/Pages/Bukhari_7_72.php

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  3. Aur talaq paayi hui striyan 3 haij(masik dharm) gujarnetak apne aap ko roke rakhe aur yadi we allah aur antim din par imaan rakhti hain to unke liye ye waidh na hoga allah ne unke gabhashayon jo kuchh paida kiya hai use chhipaye isbeech unke pati yadi sambandho ko thik kar lene ka irada rakhte hon to we unhe lauta lene ke jada haqdar hain,aur un patniyon ke bhi samanya niyam ke anusar waise hi adhikaar hain,jaisi unpar jimmedariyan dali gayi hon,Aur patiyon ko un par ek darja prapt hai.allah atyant prabhutwashali tatwadarshi hai. surah al baqra 228.

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  4. VASTAW ME MUHAMMAD BADSURAT HONE KE KARAN MAHILAYE USKE NAJDIK NAHI JATI THI IS NATE MUHAMMAD SWABHAVIK RUP SE MAHILA BIRODHI HO GAYA.

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  5. महिलाओं की दशा तो बेहद चिन्ताजनक है विशेषत: पाकिस्तान अफगानिस्तान में.

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  6. सति प्रथा भारत मे हि होती थी!औरत को जिँदा जलाना हिँदुओ कि धार्मिक प्रथा है

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    1. विजेंद्र गोयल28 अक्तूबर 2012 को 6:03 pm

      आपने सत्य कहा सती प्रथा भारत में ही होती थी लेकिन आपने यह नहीं जाना यह प्रथा स्त्री द्वारा खुद ही कि जाती थी लेकिन मुस्लिम आक्रांताओ के कारन औरत का सही सलामत जीवित रहना मुश्किल हो गया था जिनके पति कि किसी भी प्रकार से मर्त्यु हो जाती थी मुस्लिम उसे किसी ना किसी बहाने से अपनी हवस मिटाने के लिये उठा लेते थे महिला के परिवार परयह अतिरिक्त बोझ पड़ता था उसकी सुरक्षा का इस वजहा से इसने धीरे धीरे गलत रूप ले लिया अन्यथा रजा दशरथ के बाद भी उनकी किसी भी रानी से सती प्रथा से खुद को नहीं जलाया था खुद रावन कि पत्नी मंदोदरी ने भी दूसरा विवाह किया था ना कि खुद को जलाया था भारत में सती प्रथा का मुस्लिम लोगो के आने के बाद फैली वाह सिर्फ उन्की अस्मिता कि सुरक्षा कि वजह से नारी को ये दर्द भरा निर्णय लेना पढ़ा
      जनाब सत्य जानिए टिप्पड़ी करने से पहले मुस्लिम के आने के पहले सती प्रथा के सही अर्थ हम से पुछे कोण कैसे नारी को जलाता था
      नारी तब अपनी स्वेच्छा से सती होती थी मुस्लिम के बाद जबरदस्ती नारी को जलाया जाने लगा इसके लिये भी मुस्लिम वासना ही दोषी है

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  7. ab dekhiye hindu dharm aurton ke liye kya kehta hai.
    मदिरा पीना, दुष्टों की संगति, पति का वियोग, इधर-उधर घूमना, कुसमय में सोना और दूसरों के घरों में रहना ये छः स्त्रियों के दोष है। (२.१३)
    स्त्रियाँ रूप की परीक्षा नहीं करतीं, न तो अवस्था का ध्यान रखती हैं, सुन्दर हो या कुरूप हों, पुरुष होने से ही वे उसके साथ संभोग करती हैं। (९.१४)
    पुंश्चल (पराये पुरुष से भोग की इच्छा) दोष से, चंचलता से और स्वभाव से ही स्नेह न होने के कारण घर में यत्नपूर्वक रखने पर भी स्त्रियाँ पति के विरुद्ध काम करती हैं। (९.१५) manu smruti.

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    1. इसमें ऐसा क्या है जो औरतों पर अत्याचार है, मदिरा पीना, दुष्टों की संगति, पति का वियोग, इधर-उधर घूमना, कुसमय में सोना और दूसरों के घरों में रहना ये छः स्त्रियों के दोष है।
      इन दोषों को आप आदमियों में भी दोष ही मानेंगे

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  8. ऋग्वेद के मंत्र १०।८५।३७ हो या मनु स्मृति के नवें अध्याय के श्लोक ३३ से लेकर ५२ तक स्त्रियों को पुरुषों की खेती कहा गया है।
    गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित रामचरित मानस के एक सौ छठवें संस्करण में निम्न दृष्टांत उद्धृत किए जा रहे हैं – माता पिता पुत्र उरगारी। पुरुष मनोहर निरखत नारी॥/होई विकल सक मनहि न रोकी। जिमि रबि मनि द्रव रबिहि विलोकी॥ (पृष्ठ ६२६)
    स्त्री मनोहर पुरुष को देखकर चाहे वह भाई, पिता, पुत्र ही हो, विकल हो जाती है और मन को नहीं रोक सकती। जैसे सूर्यकांत मणि ‘सूर्य’ को देखकर द्रवित हो जाती है।

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    1. मेरे कटुए भाई..
      कौन तुमको बोला की rg वेद और मनु स्मृति मैं "नारी मो पुर्सो की खेती कहागया है "??? सालो अपनी गांड फटती है तो दुसरो को क्यों सामिल करते हो.

      अपनी फटी गांड को सम्हालो... कुरान और हदीथ के पन्नो से.. समझे...

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  9. इनको भी जान लेना चाहिये :-
    मनुस्मृति : ९/३-
    स्त्री सदा किसी न किसी के अधीन रहती है, क्योंकि वह स्वतन्त्रता के योग्य नहीं है।
    मनुस्मृति : ९/११-
    स्त्री को घर के सारे कार्य सुपुर्द कर देने चाहिये, जिससे कि वह घर से बाहर ही नहीं निकल सके।
    मनुस्मृति : ९/१५-
    स्त्रियाँ स्वभाव से ही पर पुरुषों पर रीझने वाली, चंचल और अस्थिर अनुराग वाली होती हैं।
    मनुस्मृति : ९/४५-
    पति चाहे स्त्री को बेच दे या उसका परित्याग कर दे, किन्तु वह उसकी पत्नी ही कहलायेगी। प्रजापति द्वारा स्थापित यही सनातन धर्म है।
    मनुस्मृति : ९/७७-
    जो स्त्री अपने आलसी, नशा करने वाले अथवा रोगग्रस्त पति की आज्ञा का पालन नहीं करे, उसे वस्त्राभूषण उतार कर (अर्थात्‌ निर्वस्त्र करके) तीन माह के लिये अलग कर देना चाहिये।

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  10. अब आप अर्थशास्त्र के जन्मदाता कहे जाने वाले कौटिल्य (चाणक्य) के स्त्री के बारे में प्रकट विचारों का अवलोकन करें, जो उन्होंने चाणक्यनीतिदर्पण में प्रकट किये हैं :-
    चाणक्यनीतिदर्पण : १०/४-
    स्त्रियाँ कौन सा दुष्कर्म नहीं कर सकती?
    चाणक्यनीतिदर्पण : २/१-
    झूठ, दुस्साहस, कपट, मूर्खता, लालच, अपवित्रता और निर्दयता स्त्रियों के स्वाभाविक दोष हैं।
    चाणक्यनीतिदर्पण : १६/२-
    स्त्रियाँ एक (पुरुष) के साथ बात करती हुई, दूसरे (पुरुष) की ओर देख रही होती हैं और दिल में किसी तीसरे (पुरुष) का चिन्तन हो रहा होता है। इन्हें (स्त्रियों को) किसी एक से प्यार नहीं होता।

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  11. Ab islam aurton ke baare me kya kehta hai ye jano..
    i. Islam prohibits infanticide or killing of female infants. This is considered a serious crime of murder.

    Surah Al-Takvir Chapter 81, Verses 8 and 9 (81 : 8-9)

    “When the female (infant), buried alive, is questioned, for what crime she was killed.” (17:31), (6:15)

    In pre-Islamic Arabia killing of female infants was very common and very often the moment a female was born she was buried alive.

    Islam not only prohibits female infanticide, but it forbids all types of infanticide, irrespective of whether the infant is a male or female. It is mentioned in Surah Al-Anam chapter 6, Verse 151 (6:151).

    “Kill not your children on a plea of want. We provide sustenance for you and for them. Come not near shameful deeds, whether open or secret. Take not life which Allah has made sacred.”

    A similar guidance is repeated in Surah Al-Isra Chapter 17, Verse 31 (17:31).

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  14. mythbuster ji aaj hindu samaj manusmrti ya ved se naheen chalata us ne samay ke anusar us men sudhar kiye , hindu samaj men sudhar ki prkriya har samay jaree rahatee hai lekin muslim samaj men sudhar ki baat tak karna gunah hai.
    adam kal kanoon ke badalav ki baat aate hi musalaman dange par utar aate hain . hindu samaj ka koi tabaka manusmrti lagu karane ks pskshdhar naheen hai. ek bade varg ne to manusmrti dekhi tk naheen hogee. lekin is ke ult kuran aur hadeesh ka shasan lagu karne ke liye muslmanon ke ek bade varg ne aatankvad ka shara liya. taliban 1400 sal purane kanun lagu karne ke liye pure vishw ko jala dalana chahten hain. ab jara hindu muslim mahilaon ki sthiti ki tulana karen. hindu smaj ki mahilayen antriksh men ja kr shodh kr raheen hain , yahan mahilayen pm cm aur rashtrpati banati hain. sp dm
    bn kar samaj ki seva kartee hain . kya muslim smaj men yesi mahilayen nikalee. abhee hal men arab men mahilaon ke akele kaheen jane, kar chalane aur laukee kela taip ke fal khane pr pabandee laga di gyee aur ise lagu krne ke piche hadeesh aur kuran ki aayton ka havala diya gya
    talibanee shasan ke dauran kuranee shasan ne afganistan ki aurton ka kitana bura hal kiya gya tha ye sabhee janten hain aur yeh bhee sbhee janaten hain ki muslman se adhik dakiyanusi aur koi samaj naheen kyoki muslman aaj bhee 1400sal purane yug men jee rha hai

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  15. जो भी इस BLOG की रचयिता है, उनको मेरा सत सत धन्यवाद और नमन...
    ईति प्रियम....

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  16. भाई ये Mythbuster है एक बंदर..
    आप बंदर को देते है हल्दी, तो वो दीवारों मैं मालदी..

    पहेले तो मुझे इसमें संका है की इसने वेद और मनु स्मृति को कितनी सचाई से post किया है ..??
    फिर आता है समय की अनुसार बदलने की बात...

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  17. इस्लाम को आंतकवादी बोलते हो। जापान मे तो अमेरिका ने परमाणु बम गिराया लाखो बेगुनाह मारे गये तो क्या अमेरिका आंतकवादी नही है। प्रथम विश्व युध्द मे करोडो लोग मारे गये इनको मारने मे भी कोई मुस्लिम नही था। तो क्या अब भी मुस्लिम आंतकवादी है। दूसरे विश्व युध्द मे भी लाखो करोडो निर्दोषो की जान गयी इनको मारने मे भी कोई मुस्लिम नही था। तो क्या मुस्लिम अब भी आंतकवादी हुए अगर नही तो फिर तुम इस्लाम को आंतकवादी बोलते कैसे हो। बेशक इस्लाम शान्ति का मज़हब है।और हाॅ कुछ हदीस ज़ईफ होती है।ज़ईफ हदीस उनको कहते है जो ईसाइ और यहूदियो ने गढी है। जैसे मुहम्मद साहब ने 9 साल की लडकी से निकाह किया ये ज़ईफ हदीस है। आयशा की उम्र 19 साल थी। ये उलमाओ ने साबित कर दिया है। क्योकि आयशा की बडी बहन आसमा आयशा से 10 साल बडी थी और आसमा का इंतकाल 100 वर्ष की आयु मे 73 हिज़री को हुआ। 100 मे से 73 घटाओ तो 27 साल हुए।आसमा से आयशा 10 साल छोटी थी तो 27-10=17 साल की हुई आयशा और आप सल्ललाहु अलैही वसल्लम ने आयशा से 2 हिज़री को निकाह किया।अब 17+2=19 साल हुए। इस तरह शादी के वक्त आयशा की उम्र 19 आप सल्ललाहु अलैही वसल्लम की 40 साल थी इन हिन्दुओ का इतिहास द्रोपती ने 5 पांडवो से शादी की क्या ये गलत नही है हम मुसलमान तो 11 औरते से शादी कर सकते है ऐसी औरते जो विधवा हो बेसहारा हो। लेकिन क्या द्रोपती सेक्स की भूखी थी। और शिव की पत्नी पार्वती ने एक लडके को जन्म दिया शिव की गैरमूजदगी मे। पार्वती ने फिर किसकी साथ सेक्स किया ।इसलिए शिव ने उस लडके की गर्दन काट दी क्या भगवान हत्या करता है ।श्री कृष्ण गोपियो नहाते हुए क्यो देखता था और उनके कपडे चुराता था जबकि कृष्ण तो भगवान था क्या भगवान ऐसा गंदा काम कर सकता है । महाभारत मे लिखा है कृष्ण की 16108 बीविया थी तो फिर हम मुस्लिमो एक से अधिक शादी करने पर बुरा कहा जाता । महाभारत युध्द मे जब अर्जुन हथियार डाल देता तो क्यो कृष्ण ये कहते है ऐ अर्जुन क्या तुम नपुंसक हो गये हो लडो अगर तुम लडते लडते मरे तो स्वर्ग को जाओगे और अगर जीत गये तो दुनिया का सुख मिलेगा। तो फिर हम मुस्लिमो को क्यो बुरा कहा जाता है हम जिहाद बुराई के खिलाफ लडते है अत्यचारियो और आक्रमणकारियो के विरूध वो अलग बात है कुछ मुस्लिम जिहाद के नाम पर बेगुनाहो को मारते है और जो ऐसा करते है वे मुस्लिम नही हैक्योकी आल्लाह पाक कुरान मे कहते है एक बेगुनाह का कत्ल सारी इंसानयत का कत्ल है। और सीता की बात करू तो राम तो भगवान थे क्या उनमे इतनी भी शक्ति नही कि वे सीता के अपहरण को रोक सके जब राम भगवान थे तो रावण की नाभि मे अमृत है ये उनको पहले से ही क्यो नही पता था रावण के भाई ने बताया तब पता चला। क्या तुम्हारे भगवान राम को कुछ पता ही नही कैसा भगवान है ये।और सीता को घर से बाहर निकाल दिया गया था तो लव कुश कहा से आये किससे सेक्स किया सीता ने बताओ।और इन्द्र देवता ने साधु का वेश धारण कर अपनी पुत्रवधु का बलात्कार किया फिर भी आप देवता क्यो मानते हो। खुजराहो के मन्दिर मे सेक्सी मानव मूर्तिया है क्या मन्दिर मे सेक्स की शिक्षा दी जाती है मन्दिरो मे नाच गाना डीजे आम है क्या ईश्वर की इबादत की जगह गाने हराम नही है ।राम ने हिरण का शिकार क्यो किया बहुत से हिन्दु कहते है हिरण मे राक्षस था तो क्या आपके राम भगवान मे हिरण और राक्षस को अलग करने की क्षमता नही थी ये कैसा भगवान है।हमे कहते हो जीव हत्या पाप है मै भी मानता हू कुत्ते के बेवजह मारना पाप है ।कीडी मकोडो को मारना पाप है पक्षियो को मारना पाप है। लेकिन ऐसे जानवर जिनका कुरान मे खाना का जिक्र है खा सकते है क्योकि मुर्गे कटडे बकरे नही खाऐगे तो इनकी जनसख्या इतनी हो जायेगी बाढ आ जायेगी इन जानवरो की। सारा जंगल का चारा ये खा जाया करेगे फिर इन्सान के लिए क्या बचेगा। हर घर मे कटडे बकरे होगे। बताओ अगर हर घर मे भैंसे मुर्गे होगे तो दुनिया कैसे चल पाऐगी। आए दिन सिर्फ हिन्दुस्तान मे लाखो मुर्गे और हजारो कटडे काटे जाते है । 70% लोग मांस खाकर पेट भरते है । सब को शाकाहारी भोजन दिया जाये तो महॅगाई कितनी हो जाएगी। समुद्री तट पर 90% लोग मछली खाकर पेट भरते है। समझ मे आया कुछ शाकाहारी भोजन खाने वालो मांस को गलत कहने वाले हिन्दुओ अक्ल का इस्तमाल करो

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  18. हिन्दु धर्म मे शिव भगवान ही नसेडी है तो उसके कावडिया भी नसेडी। जितने त्योहार है हिन्दुओ के सब बकवास।होली को लेलो मानते है भाईचारे का त्योहार होली पर शराब पिलाकर एक दुसरे से दुश्मनी निकाली जाती है।होली से अगले दिन अखबार कम से कम 100 लोगो के मरने की पुष्टि करता है ।अब दीपावली को देखलो कितना प्रदुषण बुड्डे बीमार बुजुर्गो की मोत होती है। पटाखो के प्रदुषण से नयी नयी बीमारिया ऊतपन होती है। गणेशचतुर्थी के दिन पलास्टर ऑफ पेरिस नामक जहरीले मिट्टी से बनी करोडो मूर्तिया गंगा नदियो मे बह दी जाती है। पानी दूषित हो जाता है साथ ही साथ करोडो मछलिया मरती है तब कहा चली जाती है इनकी अक्ल जीव हत्या तो पाप हैहम मुस्लिमो को बोलते है चचेरी मुमेरी फुफेरी मुसेरी बहन से शादी कर लेते हो। इन चूतियाओ से पूछो बहन की परिभाषा क्या होती है मै बताता हू साइंस के अनुसार एक योनि से निकले इन्सान ही भाई बहन हो सकते है और कोई नही। तुम भाई बहन के चक्कर मे रह जाओ इसलिए हिन्दु लडको की शादिया भी नही होती अक्सर । हमारे बनत नाम के गाव मे 300 जाट के लडके रण्डवे है शादी नही होती फिर उनका सेक्स का मन करता है वे फिर लडकियो महिलाओ की साथ बलात्कार करते है ये है हिन्दु धर्म । और सबूत हिन्दुस्तान मे अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा रेप होते है । किसी मुस्लिम मुल्क का नाम दिखा दो या बता दो बता ही नही सकते। तुम्हारे हिन्दुओ लडकियो को कपडे पहनने की तमीज नही फिटिंग के कपडे छोटे कपडे जीन्स टीशर्ट आदि पहननती है ।भाई बाप के सामने भी शर्म नही आती तुमको ऐसे कपडो मे थू ऐसे कपडो मे को देखकर तो सभी इन्सानो की ऑटोमेटिकली नीयत खराब हो जाती है इसलिए हिन्दु और अंग्रेजी लडकियो की साथ बलात्कार होते हे इसके लिए ये लडकिया खुद जिम्मेदार है।।और हिन्दु लडकियो के हाथ मे सरे आम इंटरनेट वाला मोबाइल उसमे इतनी गंदी चीजे थू और लडकियो को पढाते इतने ज्यादा है जो उसकी शादी भी ना हो पढी लिखी को स्वीकार कौन करता है जल्दी से पढने का तो नाम है घरवालो के पैसे बरबाद करती है और लडको की साथ अय्याशी करती है उन बेचारो का टाइम वेस्ट। इन चूतियाओ से पूछो लडकि इतना ज्यादा पढकर क्या करेगी।मर्द उनके जनखे हो जो औरत कमाऐगी मर्द बैठकर खाऐगे।सही कहू तो मर्दो की नौकरिया खराब करती है जहा मर्द 20000 हजार रूपये महीने की माॅग करे वहा लडकिया 2000 मे ही तैय्यार हो जाती हैबहुत हिन्दु गर्व के साथ कहते है कि हमारी गीता मे लिखा है कि ईश्वर कण कण मे विध्मान है ।सब चीजे मे है इसलिए हम पत्थरो को पूजते है और भी बहुत सारी चीजो को पूजते है etc. लेकिन मै कहूगा इनकी ये सोच बिल्कुल गलत है क्योकि अगर कण कण मे भगवान है तो क्या गू गोबर मे भी है आपका भगवान। जबकि भगवान या खुदा तो पाक साफ है तो कण कण मे कहा से विध्मान हुआ भगवान। इसलिए मै आपसे कहना चाहता हू भगवान हर चीज मै नही है बल्कि हर चीज उसकी है और वो एक है इसलिए पूजा पाठ मूर्ति चित्र सब गलत है कुरान अल्लाह की किताब है इसके बताये गये रास्ते पर चलो। सबूत भी है क्योकि कुरान की आयते पढकर हम भूत प्रेत बुरी आत्माओ राक्षसो से छुटकारा पाते है।हमारी मस्जिद मे बहुत हिन्दु आते है ईलाज करवाने के लिए । और मौलवी कुरान की आयते पढकर ही सभी को ठीक करते है । इसलिए कुरान अल्लाह की किताब है । जबकि आप वेदो मंत्रो से दसरो को नुकसान पहुचा सकते है अच्छाई नही कर सकते किसी की और सभी भगत पंडित जादू टोना टोटके के अलावा करते ही क्या है। जबकि कुरान से अच्छाई के अलावा आप किसी के साथ बुरा कर ही नही सकते। इसलिए गैर मुस्लिमो कुरान पर ईमान लाओ।

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  19. Nafees Malik. You need to get your facts right. First of all what is Hinduism.

    हिन्दू या सनातन 'धर्म'(मैं यहाँ धर्म शब्द के प्रयोग से बचना चाहूँगा क्योंकि धर्म शब्द वस्तुतः अब्रह्मिक रिलिजन की देन है फिर आम बोलचाल में प्रचलित होने के कारण धर्म कहना उचित होगा) एक महासागर की तरह है जिसमे सभी धाराएं और विचार, पुरातन से लेकर आधुनिक तक का स्थान है और इसमें आकर विलीन हो जाती हैं। इसका कोई प्रणेता नहीं और कोई पदुर्भाव का बिंदु नहीं। या क्रमिक रूप में विकसित हुआ है। धर्म को हम अक्सर सामाजिक पहलू को लेकर ही विचार करते हैं मगर समाज का पक्ष द्वितीय है प्रथम उद्देश्य धर्म का है मुक्ति। धर्म उत्पन्न होता है जब हम स्वयं के बारे में विचार करते हैं कि हम कौन हैं, क्या हैं, कहाँ से उत्पन्न हुए हैं और इस संसार में उद्देश्य क्या है हमारा। मृत्यु के पश्चात् क्या इत्यदि। अर्थात पहले धर्म का मनोविज्ञान बनता है और मन में प्रश्न उठते हैं, उन प्रश्नो के समाधान के लिए दर्शन अर्थात् philosophy का सहारा लिया जाता है, उन दर्शनों के इर्द-गिर्द रिचुअल या रीति रिवाज़ और माइथोलॉजी आती है। क्योंकि धर्म स्वयं में गूढ़ चीज़ है इसलिए उसे आसानी से जन साधारण को समझाने के लिए माइथोलॉजी का सहारा लिया जाता है और विभिन्न देवी देवताओं की अवधारणा उसी philosophy से ही आई है। ये सब बस symbolism हैं। सीधे साधारण अर्थों में हर वह चीज़ जो आपको ईश्वर के करीब ले जाती है, धर्मसम्मत है अन्यथा नहीं। और क्या धर्मसम्मत है इसका पूरा का पूरा वैज्ञानिक विश्लेषण उपस्थित है हिन्दू धर्म में।
    शिव भी उसी कड़ी में ब्रह्माण्ड की destructive फ़ोर्स को निरूपित करते हैं वह जो डार्क है, अव्यक्त है। सनातन धर्म में ईश्वर तक पहुँचने के अनेक साधन हैं और उनमें से एक रास्ता है जो मुख्यधारा से परे जो भी नकारा गया है उसे स्वीकार करके अपनी आध्यात्मिकता की उन्नति करना है। नशे में कोई बुराई नहीं है, बुराई तो किसी भी वस्तु में नहीं होती फॉर दैट मैटर लेकिन लेकिन धर्म के दृष्टिकोण से देखें तो बिलकुल आधारभूत सत्य यह है कि आप अपनी समस्त, (अर्थात किंचित भी नहीं ) इच्छाओं का त्याग करके ही ईश्वर को पा सकते हैं। मनुष्य जन्म लेता है तो वह नैसर्गिक ही भोग की ओर भगत है, इंद्रियसुख लेने की कोशिश में हर समय लगा रहता है। या एक प्राकृतिक pull है लेकिन इससे ऊपर उठने पर ही अपने भीतर परमात्मा के दर्शन होंगे (परमात्मा सभी के अंदर है)। नशा करना इसीलिए बुरा है क्योंकि आप अपनी इच्छाओं के दास बन रहे हैं और ईश्वर से दूर जा रहे हैं। किसी भी जड़ चेतन वास्तु में उसी का अंश है आल द मैटर इज़ नथिंग बट एनर्जी चाहे वह शौच ही क्यों न हो। चूँकि मनुष्य सदैव ही भोगोन्मुख रहता है वह हमेशा उसे legitimise करने के लिये धर्म का सहारा लेता रहा है खासकर पुरातन युग में जब धर्म और ज्यादा मजबूत था और सेक्युलर या भौतिकतावाद की theories नदारद थीं। इससे नशेड़ी बनना सही नहीं हो जाता। रही कपडों की बात तो अपने आप को शरीर से ऊपर उठाओ। महावीर ने वस्त्र क्यों त्याग दिए। मनुष्य का अंतिम लक्ष्य मुक्ति ही है, हर तरह के बंधनों से मुक्ति, वस्त्र भी ऐसे ही बंधन हैं, और वैसे भी मैं किसी की परम्पराओं का अनादर नहीं करना चाहता लेकिन कोई भी समझ सकता है कि जिस समाज में स्त्रियों को दोयम दर्ज़ा दिया जाता हो और भोग का attuitude बनाकर रखा जाता हो कि आपको जन्नत में हूरें मिलेंगी भोगने के लिए उस समाज में स्त्रियां केवल भोग की ही चीज़ हो सकती हैं। जो लोग ये मानकर ही चलते हैं कि स्त्री का चेहरा lust उत्पन्न करता है वो उसे कितना objectify करते हैं समझा जा सकता है और अगर तलाक़ के बाद कोई पुरुष अपनी पत्नी को फिर से अपनाना चाहे तो पत्नी किसी और से शादी करे, उससे तलाक़ ले फिर अपने पुराने पति से वापस शादी करे। और अपने ही सगे सम्बन्धियों में शादी। वाह! ऐसे समाज से आया हुआ व्यक्ति ये चीज़ें समझ ही नहीं सकता कि किसी बेटियां या बहनें अपने घरों में कैसे इस तरह के आधुनिक परिधान पहन सकती हैं अपने पिता या भाइयों के सामने। वैसे भी ये परिधान आधुनिकता की देन हैं जो कि कुछ नहीं बल्कि चार्वाक की विचारधारा है और भौतिकता की देन है, भौतिकता या भोग की शुरुआत होती इच्छा से और इच्छाओं का केंद्र या बीज है काम। उसी से रचित शब्द है कामना।

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    1. ये आधुनिक तौर तरीके भोग पर आधारित या sex-positive society की देन हैं और उसका धार्मिक हिन्दुइस्म से कोई लेना-देना नहीं है इन फैक्ट सभी धर्मो ने काम पर नियंत्रण करने की बात कही है लेकिन ऐसा है क्यों इसका उत्तर केवल हिन्दू धर्म के पास है। भौतिकता के दृष्टिकोण से उनमें कोई बुराई भी नहीं है यहाँ तक कि nudism में भी कोई आपत्ति नहीं है। मनुष्य इस तरह से कम से कम एक बंधन तो काट रहा है। नारी को बंधित बनाये रखने का एक बड़ा फैक्टर कपडे रहे हैं। क्या उचित क्या अनुचित। पुराने पारंपरिक वस्त्र उन्हें बन्धन में डालते हैं और उनके चलने इत्यादि की प्रक्रिया को restrict करते हैं। एक स्त्री हज़ार vulnerabilities के साथ जीती है अगर वह उन्हें shed करना चाहती है तो क्या समस्या है? सारे बन्धन बस सामाजिक हैं। मनुष्य का अंतिम लक्ष्य मुक्ति है और वह समाज के दायरे में कहीं नहीं फिट होता। इसीलिये उसका यत्नपूर्वक प्रयत्न करने वाले सभी लोग सामाजिक बंधनों से मुक्त होकर संयासी हो जाते हैं। हिन्दू धर्म में सदैव प्राकृतिक तरीकों पर बल दिया गया है। अगर एक वृक्ष का फल भी का रहे हैं तो उसके प्रति आभार दिखाकर, तोड़कर खा रहे हैं तो उससे क्षमा मांगकर। समस्या वहां होती है जब भौतिकता और आध्यात्मिकता का घालमेल हो जाता है। वही लोग एक जागह एक बात की बुराई कर देंगे दूसरी और खुद वही करेंगे। ये कुछ नहीं बस hypocricy है जिससे ये संसार चलित है। इसी आधुनिकता में प्राचीनता के मेल मिलाप के कारण ही ये सब है कि अप्राकृतिक तरीके से मूर्तियां बनाई जाती हैं क्योंकि emphasis यहाँ ये है कि कौन सी मूर्ति कितना सुन्दर है और कितना अच्छा दिखेगी। ये धर्म नहीं है। धर्म टी हमेशा ही तड़क भड़क से दूर रहा है। उसकी तलाश स्वयं के भीतर है न कि बाहर।

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