मंगलवार, 23 अक्तूबर 2012

हराम और हलाल इस्लाम का कमाल !


सभी लोग अच्छी तरहसे जानते हैं कि भारत के मुसलमान हमेशा "वन्देमातरम " का विरोध करते हैं . और कहते हैं कि ऐसा बोलना हराम है .यानि पाप है .इस्लाम में जायज -नाजायज ,वैध -अवैध अर्थात हलाल और हराम की बड़ी विचित्र और तर्कहीन अवधारणा है ,जो कुरान ,हदीसों ,और मुफ्तियों द्वारा समय समय पर दिए फतवों के आधार पर तय की जाती है . जिसे मानना हर मुसलमान के लिए अनिवार्य होता है . वर्ना उसे काफ़िर समझा जाता है .इसलिए मुसलमान हमेशा हर विषय हराम और हलाल के आधार पर ही तय करते हैं , चाहे वह देश के संविधान या कानून के विरुद्ध ही क्यों न हो .वह विना समझे अंधे होकर उसका पालन करते हैं .
इस संक्षिप्त से लेख में कुरान ,हदीसों ,फतवों ,और समाचारों में प्रकाशित खबरों से चुन कर एक दर्जन ऐसे मुद्दे दिए जा रहे हैं , जिनको पढ़ कर प्रबुद्ध पाठक ठीक से समझ जय्र्गे कि इस्लाम के अनुसार हराम क्या है ,और हलाल क्या है .
1 -अल्लाह का नाम लिए बिना जानवर को मारना हराम है .
लेकिन जिहाद के नाम से हजारों इंसानों का क़त्ल करना हलाल है .

2-यहूदियों ,ईसाइयों से दोस्ती करना हराम है .
लेकिन यहूदियों ,ईसाईयों का क़त्ल करना हलाल है .
3-टी वी और सिनेमा देखना हराम है .
लेकिन सार्वजनिक रूप से औरतों को पत्थर मार हत्या करते हुए देखना हलाल है .
4-किसी औरत को बेपर्दा देखना हराम है .
लेकिन किसी गुलाम औरत को बेचते समय नंगा करके देखना हलाल है .
5-शराब का धंदा करना हराम है .
लेकिन औरतों ,बच्चों को गुलाम बना कर बेचने का धंदा हलाल है .
6-संगीत सुनना हराम है .
लेकिन जिहाद के कारण मारे गए निर्दोष लोगों के घर वालों की चीख पुकार सुनना हलाल है .
7घोड़ों की दौड़ पर दाव लगाना हराम है .
लेकिन काफिरों के घोड़े चुरा कर बेचना हलाल है 
8-औरतों को एक से अधिक पति रखना हराम है .
लेकिन मर्दों लिए एक से अधिक पत्नियाँ रखना हलाल है .
9-चार से अधिक औरतें रखना हराम है .
लेकिन अपने हरम में सैकड़ों रखेंलें रखना हलाल है .
10किसी मुस्लिम का दिल दुखाना हराम है .
लेकिन किसी गैर मुस्लिम सर कटना हलाल है .
11-औरतों के साथ व्यभिचार करना हराम है .
लेकिन जिहाद में पकड़ी गयी औरतों के साथ सामूहिक बलात्कार करना हलाल है .
12-जब किसी औरत की पत्थर मार कर हत्या की जारही हो ,तो उसे बचाना हराम है .
जब उसी अपराध के लिए औरत को जिन्दा जलाया जा रहा हो ,तमाशा देखना हलाल है .
इन थोड़े से मुद्दों को ध्यान से पढ़ने से उन लोगों की आँखें खुल जाना चाहिए तो इस्लाम को शांति का धर्म समझ बैठे हैं .इसलिए "भंडाफोडू " ब्लॉग पिछले चार सालों से अपने प्रमाण सहित लेखों के माध्यम से देश प्रेमी लोगों को इस्लाम से सचेत करता आया है . ताकि भूले से भी कोई व्यक्ति जकारिया नायक जैसे धूर्त के जाल में नहीं फसे .जिनको भी इस लेख के सम्बन्ध में इस्लामी किताबों के प्रमाण चाहिए वह "भंडाफोडू " के सभी लेख पढ़ने का कष्ट करें . 
ऐसे कमाल के तर्कहीन इस्लाम से जितनी दूरी बनाये रखोगे उतने ही निरापद रहोगे !!

http://www.faithfreedom.org/Articles/AyeshaAhmed20729.htm

14 टिप्‍पणियां:

  1. यही तो, लोग जिस दिन एम्पैथेटिक होना सीख जायेंगे, नब्बे प्रतिशत समस्यायें खत्म हो जायेंगी.

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    1. Do you think this is happened? if yes all 99.999/
      problems are solved

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  2. इस लेख को लिखने वाले ने अपनी मां काका भोसड़ा देखा है तो वहीं जा कर दुबक जाए या फिर अपनी बहन के चूत में मुंह डाले...सारे जवाब मिल जाएंगे मादरचोद...

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    1. Tu wahi batha ha kya? O tu to mulla ha wahi batha hoga.

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    2. ये हरामी का औलाद सही में सच्चा मुसलमान है, सच्चे मुसलमान की तो यही पहचान है, गन्दा दिमाग, गन्दी जुबान और हरामी मुल्लों द्वारा बनाया गया एक नंबर का अंधा , ये शाले लोग अपनी माँ बहन से जब शादी कर सकते हैं तो दुनिया में ऐसा कोई बुरा काम नहीं जो ये कुत्ते कर नहीं सकते I

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  3. b en sharma ji apko bhaut bhuat dhanbad islam ke pole kholne ke liyae aapki jankari daine se ab bhut se muslim ka muh band kar deta hu
    aap jo bhi jankari islam ki dete hi wo sab sach h bhut se muslimo se bat karke maine ye jana h
    apko fir se dhanbad.

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  4. आइए हम सब इस बारे मेँ अपना ज्ञान बढाते है
    दरअसल मुहम्मद मूशा ए सलाम ने मुल्लिम धर्म
    की स्थापना की थी । उस समय सब मुसलमान
    मुर्तियों की पूजा किया करते थे। बाद मे मुहम्मद
    साहब
    की अम्मी एक पत्थर के बुत से अपनी बुर और गाड़
    मरवाने लगी जिसे देख कर मुहम्मद साहब बुतो से
    चिढ़ने लगे उन्होंने बुतो को तोडना सुरू कर
    दिया तब मुसलमानों ने उनके गाड़ पर जूता माँर
    कर बिरादरी से अलग कर दिया तब मुहम्मद
    साहब ने कसम खायी की
    "मै बुत की औलाद मुहम्मद
    साहब ये कसम खाता हूँ की मुसलमानों से
    उनकी बहन चुदवाउंगा, साथ ही उनका लंड
    कटवाउंगा, मै उन्हें आतंकवाद
    का रास्ता दिखाउंगा जिससे पुरा संसार
    मुसलमानों के खिलाफ हो जाएगा और इन
    मुसलमानों की मईया चुद जाएगी।"
    इसी द्वेशभावना से ग्रसित मोहम्मद ने कुरान मेँ
    इन विषयोँ को शामिल किया व इन कुकर्मोँ पर
    विशेष जोर दिया
    कि मुसलमान
    अपनी चचेरी ममेरी फुफेरी आदी बहनो और
    अपनी अम्मीयों को चोद सकता है और
    निकाह भी कर सकता है। जो बुत मुहम्मद साहब
    की अम्मी की गाड़ मारता था वो काबा मे है।
    मुसलमान हज के समय उसे शैतान कहकर उस बुत
    को पत्थर मारतें हैं। वही बुत जब गाड़ मारने के
    लिये दौड़ाता है तो मुसलमान गाड़ लेकर भागते
    है तब हज मे भगदड़ मच जाती है और बहुत से
    मुसलमान
    मर कर अपनी मरी हुई अम्मी के भोषड़े मे चले जाते
    है। मुसलमानों ये बताओ अगर तुम पत्थर के बुत
    को केवल पत्थर मानते हो तो हज के समय उस बुत
    को कंकड क्यो मारते हों ?????

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  5. बेनामी जी क्या बात कही मजा आ गया

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  6. दोस्तों फीर ऐक ऐसी खबर जो वाकई मे मानवता को शर्मशार कर दै और ये ब्राह्मणवादीओ की महान संस्कुरुती है
    जैसे के आप जानते है के हिन्दु बराह्मणो में एक परम्परा चली आ रही है जिस के अनुसार 1 औरत 5 मर्द लोगों के साथ शादी करके सेक्स कर सकती है जैसे के ब्राह्मणो की धार्मिक किताब के मुताबिक़ द्रोपती ने 5 पांड्वो के साथ शादी की थी...
    हाँ यह बात भी है के अगर उस औरत को कोई औलाद पैदा होती है तो यह पता लगाना मुश्किल होता है के वो औलाद किस मर्द की है...
    आज मै आप को इसी के समब्दित जो एक सची घटना है, सुनाने जा रहा हूँ, पूरा पोस्ट नीचे पढ़ें....

    ये है राजो जिसे कलयुग का द्रोपदी भी बोल सकतें हैं.....
    देहरादून की रहने वाली राजो (द्रोपदी) ने पांच (५) पुरुषों (ये सभी पुरुष आपस में सगे भाई हैं) से विवाह की है, अभीपाँचों की पत्नी है, एक बच्चा भी है.......
    और सभी एक ही साथ रहतें भी हैं......
    इससे सम्पति का बटवारा नहीं होता......!!
    द्रोपदी ने पांच पांडवों से शादी की थी,इसलिए उसे पांचाली कहा जाता था। उत्तराखण्ड में भी एक पांचाली है,जो पांच पतियों के साथ रह रही है।
    पांचों सगे भाई हैं।
    21 साल की राजो वर्मा और उसका पूरा परिवार एक कमरे में रहता है।
    राजो के 18 माह का बेटा भी है लेकिन उसका पिता कौन है, यह राजो को भी पता नहीं है। वह हर रात अलग-अलग पति के साथ गुजारती है।
    देहरादून के नजदीक स्थित एक गांव में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। राजो ने बताया किशुरू-शुरू में उसे अजीब सा लगा लेकिन वह पांच पतियों के साथ समान व्यवहार करती है।
    राजो ने चार साल पहले हिंदू रीति रिवाज के मुताबिक गुड्डू से शादी की।
    इसके बाद उसने 32 साल के बज्जू, 28 साल के संत राम, 26 साल के गोपाल और 19 साल के दिनेश से शादी की।
    गुड्डू का कहना है कि उसकी पत्नी चारों भाईयों के साथ सेक्स करती है। इससे उसको कोई जलन नहीं होती।
    राजो के मुताबिक उससे पांच पतियों को स्वीकारने की उम्मीद की जाती है। उसकी मां ने भी तीन भाईयों से शादी की थी।राजो ने बताया कि परिवार जिस कमरे में रहता है, वहां बिस्तर नहीं है। पूरा परिवार ब्लैंकेट पर सोता है।सेक्स के लिए पांचों पतियों का बारी बारी से नंबर आता है।...
    सेयर करे और अपनी तर्कपुर्ण राय दे और ऐसे अंधिवश्वास का सीर्फ ऐक ही ईलाज है ऐसे पाखंडो को ऊजागर करना
    तब ही ब्राह्मणवाद नंगा होगा और ऐसे अमानवीय प्रंथा पर रोक लगेगी

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  7. दोस्तो आज ऐक बात.ह्राह्मण की ऐसी के ईनसानीयत को भी शर्मसार करदे ….
    ये बात है देव दासी प्रथा की

    देवदासी प्रथार ब्राह्मो के इतिहास का और संस्कृति का एक पुराना और काला अध्याय है,
    जिसका आज के समय में कोई औचित्य नहीं है. इस प्रथा के खात्मे से कहीं ज्यादा उन बच्चियों के भविष्य की नींव का मजबूत होना बहुत आवश्यक है……….
    देवदासी प्रथा कहते ही आपके मन में ये बात आती होगी कि वो महिलाएं जो धर्म के नाम पर दान कर दी जातीं हैं और फिर उनका जीवन धर्म और शारीरिक शोषण के बीच जूझता रहा.
    लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये घिनौनी प्रथा आज भी जारी है. आज भी आंध्र प्रदेश में, विशेषकर तेलंगाना क्षेत्र में दलित महिलाओं को देवदासी बनाने या देवी देवताओं के नाम पर मंदिरों में छोड़े जाने की रस्म चल रही है.
    “देवदासी बनी महिलाओं को इस बात का भी अधिकार नहीं रह जाता कि वो किसी की हवस का शिकार होने से इनकार कर सकें”. जिस शारीरिक शोषण के शिकार होने के सिर्फ जिक्र भर से रुह कांप जाती हैं, उस दिल दहला देने वाले शोषण को सामना ये देवदासियां हर दिन करती हैं.
    देवदासी प्रथा भारत के दक्षिणी पश्चिम हिस्से में सदियों से चले आ रहे धार्मिक उन्माद की उपज है. जिन बालिकाओं को देवी-देवता को समर्पित किया जाता है, वह देवदासी कहलाती हैं।
    देवदासी का विवाह देवी-देवता से हुआ माना जाता है, वह किसी अन्य व्यक्ति सेविवाह नहीं कर सकती।
    सभी पुरुषों में देवी-देवता का अक्श मान उसकी इच्छा पूर्ति करती हैं।
    और ये घीनोनी प्रथा ब्राह्मणो द्वारा रचीत है
    ईस घीनोनी प्था से ऐक और शब्द जुडा है जो पीछडे वर्ग के ऊपर आज भी मोहर की तरह लगा दीया गया है जीसै काफी लोग अनजान होगें
    दोस्तो देव दासी अकसर मंदीर के पुजारी की हवश का शीकार होती है और जब पुजारी का मन भर जाता तो वो अन्य लोगो को भी ईस देव दासी का भोग करने के लीये भेजता और कमाई भी करता था/ है
    तो ईन देवदासीओ मेसे फीर बच्चे होना भी आम बात है पर ऊन बच्चो को कोई बाप का नाम नही देता था ना मंदीर का पुजारी और ना ही वो लोग जो देवदासीओ को अपनी मर्दानगी से रोदंते है
    फीर ऊन बच्चो को भगवान का बच्चा कहा.जाता था यानी के हरीजन
    जो पीछडे लोगो के ऊपर जाती बना के थोप दीया गया है
    हरीजन शब्द ईन्ही देवदासी ओ मेसे पैदा हुआ शब्द हे जीसै गांधी ने पीछडे वर्ग के ऊपर जाती बना के थोप दीया जीसको आज भी पीछडे लोग ढो रहे है
    दोस्तो हरीजन का मतलब ये जरुर होता हे के भगवान का बच्चा हरी यानी के भगवान और जन मतलब लोग
    पर कोनसे भगवान का बच्चा ...?
    ये ऊस देव दासी के बच्चो के लीये ही प्रयोग होता था पर कुछ मनुवाद के पुजारीयो ने पीछडे लोगो के ऊपर थोप दीया जीसका सही अर्थ होता है नाजायज जीसके बाप का पता ना हो ऊसै हरीजन कहा गया
    जो मीत्र ईस बात से अनजान हो और अगर कीसी पीछडे वर्ग को हरीजन केहेने से पेहेले हकीकत जरुर जान ले
    खेर ईस बात से मनु के पुजारीयो को तो कोई फर्क नही पडता पर मे मेरे मुशलीम भाईओ को भी बताना चाहुगा के ईश शब्द का ऊपयोग कभी भी कीसी के लीये ना करे
    दोस्तो देव दासी की पुरी हकीकत जानने के लीये ईस लीकं को जरुर देखे
    और ब्राह्मणो के पाखंड की हकीकत जाने और सेयर करे
    जीस्मे आज भी कई माशुम बच्चीओ को पाखंडीओ की हवश के लीये बली चडाया जाता है

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  8. भारत में इस्लामी जिहाद दो नयें रुपों में सामने आया है. पहला लव जिहाद (लंड जिहाद अथवा लिंग जिहाद) और दुसरा गुदा जिहाद (गांड जिहाद) (अश्लील शब्दों के लिए माफी चाहुंगा).
    इनमें से पहला लिंग जिहाद है, जिसमें मुस्लिम युवक हिंदू युवती से येनकेनप्रकारेण दोस्ती बनाकर उससे शादी कर लेता है. शादी के बाद बच्चे पैदा करके उसे सेक्स स्लेव्ह बनाकर अपने दोस्तो, रिश्तेदारों को नज़राने के रुप में पेश करता है. हिंदू लडकी झाँसे में आ भी जाए, किंतु अगर उसके पालक अगर समय रहते जागरुक हुए तो लिंग जिहादी को पुलिस के फटके पड़ने की संभावना तो शत प्रतिशत. उपर से कानूनी सजा मिलना अलग और 5-6 साल जेल की चक्की पिसना नसीब में.
    लेकिन सबसे खतरनाक है गुदा जिहाद. जी हाँ. यह इसलिए बहुत खतरनाक है की, गुदा जिहादी जबतक आपके करीब ना आए और स्वयं को बम से ना उडा़ दे, आप समझ ही नही सकेंगे की वह एक गुदा जिहादी था (अगर आप की मौत ना हुई हो और बच गए या धमाके में अपाहिज हुए, तो.) होता क्या है कि, मुस्लिम कट्टरवादी किसी गरीब मुस्लिम परिवार के 12-15 साल के बच्चे को बहला फुसलाकर, उसका दिमाग ब्रेनवाश करके तथा उसके माँ-बाप को खासी रकम देकर अपने साथ कर लेते हैं. बाद में उसके दिमाग में दीने इस्लाम और जिहाद की बातें इतनी ठूँस-ठूँस कर भरी जाती हैं कि, वह पुर्णरुपेण (सर से पाँव तक) जिहादी बन जाता है. और ऐसा बने भी क्यों ना? क्योंकि कुरान में तन, मन और धन से जिहाद करना जो सिखाया है, जी हाँ जिहाद अपने तन (शरीर), मन (दिमाग) तथा धन (पैसे) से करो. अब 12-15 साल के लड़के के पास ना तो मन (दिमाग) होता है और ना ही धन (पैसा). तो उसके पास जिहाद के लिए बचा क्या? केवल अपना तन (शरीर). और कुरान में यह भी लिखा है की अपने अंगप्रत्यंग (शरीर के सारे भागों से) जिहाद करना फर्ज है. तो इस जिहादी बच्चे के पास बचा क्या? सिर्फ गुदा. और शातीर कट्टरपंथी इसी का फायदा उठाते हैं. पहले उस बच्चे से गुदामैथुन करके अपनी हवस को शांत करते है और साथ ही तबतक उसकी गुदामैथुन करते है जबतक की उसकी गुदा इतनी चौड़ी ना हो जाए कि उसमें आर.डी.एक्स. तथा डिटोनेटर घुस जाएँ. एक बार गुदा के अंदर आर.डी.एक्स., डिटोनेटर वैगराह विस्फोटक सामाग्री फिट कर दी जाये, बाद में उसे रिमोट कंट्रोल से जोडकर उसका रिसिव्हर गुदा जिहादीके पिठ पर बाँध देते हैं. (पिठ पर बाँधने से गुदा जिहादी उसे छु नहीं सकता. और ऐसा इसलिए करते हैं की शायद आगे जाकर गुदा जिहादी बगावत करें तो भी उसके हाथ पिठ में बँधे रिसिवर तक नां पहुँचे और कट्टरपंथियों का उसे विस्फोट करने का अंजाम पूरा हो जाए) आगे गुदा जिहादी किसी भी भिड़भाडवाली जगह पर पहुँच गया तो उसे कट्टरपंथी अपने रिमोट कंट्रोल से उडा देते हैं.
    इसलिए प्रिय भारतीय नागरिकों, अपने आप को सँभालो. मुसलमानों की बस्तियाँ अपने पास ना बनने दें. मुस्लिम युवकों से सदैव सावधान (दोस्ती बनाने का केवल बहाना करें, ना की सचमुचके दोस्त बन जाएँ). अपने नजदिक किसी 12-15 साल के मुसलमान बच्चे को ना आने दें. (हो सकता है वह शायद गुदाजिहादी हो. क्या भरोसा?) अपनें बच्चों को मुसलमान बच्चों के साथ मेलमिलाप नां करने दें और उन्हें हमेशा दूर रखें. सदैव हिंदू सभ्यता का सम्मान, आदर करें. हिंदूराष्ट्र का अभिमान रखें.
    जय हिंद!

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  9. kuran ke mutabik jannat me har ek musalman aadmi ko 72 hurren milengi. isi tarah har musalman aurat ko 72 mard milenge. iska matlab yeh hua ki har musalman ki maa jo mar gayi ho woh 72 lundo se sex karwa rahi hai. is se to yeh thik hai ki har musalman ko chahiye ki woh apni maa, bahen ko 72 lundo se jinda rahete hue chudavaye, taqi unko jannat jane ki practice ho jaye.....................

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  10. hai koi jawab meri baton ka ,kyonki yeh 100% sach hai quran ke mutabik

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