मंगलवार, 27 नवंबर 2012

अल्लाह का अरबी अवतार !


यद्यपि इस्लाम अवतारवाद को नहीं मानता , लेकिन कुरान और हदीस में अल्लाह का जो स्वरूप , स्वभाव ,और काम बताये गए हैं .वह एक अरब के एक अनपढ़ व्यक्ति से बिलकुल मिलते हैं ,जकरिया नायक जैसे मुस्लिम प्रचारक कुछ भी कहें कि कुरान में अल्लाह को निराकार , सर्वव्यापी और सबकुछ जानने वाला ईश्वर बताया गया है .लेकिन यदि कुरान को निष्पक्ष होकर पढ़ें तो स्पष्ट हो जायेगा कि कोई साकार अरबी इन्सान था ,जो अल्लाह के भेस में लोगों से जिहाद और लूटमार करवाया करता था . और कुरान में अल्लाह के बारे में जो बातें लिखी गयी हैं वह भारत , यूनान , और यहूदी कहनियों से लेकर लिखी गयी है , जैसा खुद कुरान में कहा है ,
"यह तो पहले लोगों की कहानियां हैं 'सूरा -नहल 16:24
"और लोग कहते हैं कि यह कुरान तो पहले लोगों की कल्पित   कहानियां हैं ,जिसे तुमने ( मुहम्मद ने ) कुरान में शामिल कर लिया है "
 सूरा -अल फुरकान 25:5
अल्लाह के बारे में बाकी जितनी बातें कुरान में लिखी गयी हैं वह मुहम्मद साहब के दिमाग की उपज हैं ,.तभी मुल्ले कहते हैं कि ईमान के बारे में " अकल का दखल "नहीं होना चाहए .यहाँ पर संक्षिप्त में बताया जा रहा है कि मुसलमानों का अल्लाह कैसा है और क्या करता है ,और लोगों को क्या सिखाता है
1-अल्लाह के नाम से धोखा 
"जब मूसा एक मैदान के छोर पर दूर खड़ा था , तो उसे पुकारा गया " हे मूसा मैं ही अल्लाह हूँ 
" सूरा -अल कसस 28:30 
"इस से साफ़ पता चलता है कि किसी व्यक्ति ने मूसा को धोखा देने के लिए कहा होगा कि " मैं अल्लाह हूँ )
2-शरीरधारी अल्लाह 
दी गयीं कुरान की इन आयतों से सिद्ध होता है कि मुसलमानों का अल्लाह निराकार नहीं बल्कि साकार था , जिसके हाथ भी थे
"जब लोग बैयत ( Allegiance ) कर रहे थे अलह का हाथ उनके हाथों में था "सूरा -अल फतह 48:10 
"यहूदी कहते हैं कि अल्लाह का एक हाथ बंधा हुआ है ,लेकिन देख लो अल्लाह के दोनो हाथ खुले हिये हैं सूरा - मायदा 5:64 
3-अल्लाह का चेहरा 
"इस प्रथ्वी की हरेक चीज एक दिन मिट जाएगी .लेकिन सिर्फ अल्लाह का चेहरा बचा रहेगा 
"सूरा -रहमान 55:26-27 
( इस आयत में अरबी में "वज्हوجهُ " शब्द आया है ,जिसका अर्थ Face होता है )
4-अल्लाह की आदतें और शौक 
कुरान के अल्लाह की आदतें और शौक वही हैं ,जो एक अरबी बद्दू के होते हैं ,इनके नमूने देखिये
1.बात बात पर कसम खाना 
"कसम है रात की जब वह पूरी तरह से छा जाये "सूरा -अल लैल 92:1
"कसम है चढ़ते हुए सूरज की "सूरा -अश शम्श 91:1 
2.नफरत करना 
"अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है जो जो उसकी बातों पर राजी हो जाएँ "सूरा अल बय्यिना 98:8
"अल्लाह काफिरों से नफरत करता है "सूरा-रूम 30:45 
3.गुप्त बातें सुनने का शौकीन 
"जब लोग गुप्त बातें करते हैं तो अल्लाह चुपचाप सुनता रहता है .और तीन लोगों में ऐसा कोई नहीं होगा जिसमे चौथा अल्लाह नहीं हो और पांच लोगों में ऐसा कोई नहीं होगा जिसमे छठवां अल्लाह न हो "सूरा -मुजादिला 58:7 
5-अल्लाह के काम 
कुरान का अल्लाह जो काम करता है और अपने लोगों से करवाता है वही आजकल के हरेक आतंकवादी दल का नेता कर रहा है , जैसा की कुरान की इन आयतों से पता चलता है , जैसे
1.लोगों को घेरना 
"अल्लाह लोगों को चारों तरफ से घेर लेता है ,फिर उनकी गिनती भी कर लेता है "
सूरा -मरियम 19:94 
2.जिहादियों की परीक्षा 
"हम सभी जिहादियों की परीक्षा जरुर करते हैं ,ताकि वह ठीक तरह से जिहाद करें ,और हम उनके जिहाद के बारे में जान सकें "सूरा -मुहम्मद 47:31 
3-वसूली करना 
हमारे पास वसूली करने वाले हैं ,जो लोगों से दौनों तरफ से वसूली करते हैं .कुछ दायीं तरफ से वसूलते हैं और बायीं तरफ से वसूलते हैं .और बाक़ी लोग इस ताक में रहते हैं कि ( पकडे गए ) लोग के मुंह से कोई आवाज नहीं निकल सके "सूरा -काफ -50:17-18
6-अल्लाह डींगें 
प्रसिद्ध कहावत है कि गाड़ी के नीचे चलने वाला कुत्ता यही समझता है कि वह सारी गाडी का बोझ उठा रहा है , इसी तरह कुरान का अल्लाह भी कुरान में ऐसी ही शेखी बघार रहा है ,
"अल्लाह ने ही आकाश को धरती पर गिरने से रोक रखा है 'सूरा -अल हज्ज 22:65
( कुरान की यह आयत यूनानी कहानी से ली गयी है ,जिसमे एक यूनानी देवता टाइटन एटलस (Titan Atlas ) को आकाश उठाते हुए बताया गया है )
अल्लाह आकाश और धरती को रोके रहता है ,कि कहीं यह अपनी जगह से खिसक (deviate ) न जाएँ "सूरा -35:41
7-अल्लाह की मूर्खता 
मुसलमान दावा करते रहते हैं कि उनका अल्लाह सब जानता है , लेकिन इस आयत से उसकी मूर्खता साफ पता चलती है ,क्योंकि वह जन्नत को धरती के बराबर बता रहा है .इस जरा सी जन्नत में जिन्दा और मरे हुए सभी मुसलमान कैसे समां जायेंगे , कुरान में कहा है
जन्नत का विस्तार (Breadth ) इस धरती के विस्तार के बराबर है .और उन लोगों के लिए हैं ,जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लायेंगे " सूरा -अल हदीद 57:21
8-अल्लाह का तर्कहीन दावा 
अल्लाह ने एक और बेतुका दावा कर दिया कि वह मुर्दों को जिन्दा करेगा और उनसे हिसाब करेगा कि मरने से लेकर जिन्दा होनेतक उन्होंने क्या काम किये हैं , कुरान की इस आयत को देखिये
"हम पहले मुरदों को जिन्दा कर देंगे ,फिर उनके कर्मों का विवरण लिखते जायेंगे "
सूरा -यासीन 36:12
9-अल्लाह का सिंहासन 
अल्लाह ने बिना किसी सहारे के आकाश को ऊँचा किया ,फिर उस पर अपना सिंहासन जमा कर आराम से बैठ गया , जैसा तुम देखते हो "सूरा-रअद -13:2
हे नबी तुम देखोगे कि फरिश्ते चारों तरफ से घेरा बना कर अल्लाह का सिंहासन उठा कर खड़े हुए हैं "सूरा अज जुमुर 39:75 
( कुरान की यह आयत भारत की प्रसिद्ध कथा "सिंहासन बत्तीसी " से प्रभावित होकर लिखी गयी होगी )
निष्कर्ष -बताइए जिसके हाथ हों , जिसको उठाने के लिए कई लोग चाहिए ,जो लोगों से जबरन धन वसूल करता हो वह ईश्वर कैसे हो सकता है ?इन सभी उदाहरणों को देख कर कोई भी व्यक्ति आसानी से समझ सकता है कि अल्लाह ईश्वर नहीं हो सकता . बल्कि कोई मनुष्य अल्लाह के भेस में लूटमार करके राज करना चाहता था .और उसको यह भी पता था कि मरने के बाद सिर्फ उसकी तस्वीर ही बाकि रह जायेगी .जैसे रोमन सम्राटों के सिक्कों पर उनकी तस्वीर आज तक मौजूद है .
"ईश्वर अल्लाह तेरा नाम " कहने वाले अज्ञानी हैं !

http://www.answering-islam.org/Authors/Fisher/Topical/ch13.htm

शुक्रवार, 23 नवंबर 2012

इस्लाम में अल्लाह का नाम बर्बादी है !


विश्व के लगभग सभी लोग इस सत्य को स्वीकार करते हैं कि जरूर कोई एक ऐसी अलौकिक शक्ति है , जो इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को नियंत्रित कर रही है .और बिना किसी की सहायता के संचालित कर रही है .धार्मिक उसी शक्ति को ईश्वर मानकर विभिन्न नामों से पुकारते और याद करते हैं .लोगों में ईश्वर के नाम के बारे में सदा से उत्सुकता बनी रही है .कुछ लोगों का विचार है कि ईश्वर का कोई निजी व्यक्तिगत नाम(Personal Name ) नहीं है .और कुछ लोगों का विचार है कि ईश्वर के अनेकों नाम हो सकते हैं ,जो उसके शुभ गुणों को प्रकट करते हैं .वैदिक धर्म से लेकर यहूदी , ईसाई धर्म तक ईश्वर के द्वारा बताये गए उसके निजी नाम का स्पष्ट पता चलता है .लेकिन मुस्लिम विद्वानों ने अरबी अक्षरों की गणित विद्या के आधार पर अल्लाह के नाम जो खोज की है .चूँकि अरबी भाषा में हरेक अक्षर का एक संख्यात्मक मूल्य होता है .इसलिए बात को स्पष्ट करने के लिए उसी का सहारा लिया गया है .उससे अल्लाह की असलियत उजागर हो गयी है .यहाँ पर सभी धर्मों के आधार पर ईश्वर और अल्लाह का असली नाम दिया जा रहा है
1-ईश्वर का आत्मपरिचय 
यह एक निर्विवाद सत्य है कि वेद विश्व के प्राचीनतम धार्मिक ग्रन्थ है .और उसी में ईश्वर द्वारा ही उसके निजी नाम का रहस्य खोला गया है . आज भी सभी योगी ईश्वर के उस गुप्त नाम को " महा वाक्य " कहते हैं .इश्वर द्वारा अपने नाम का उल्लेख यजुर्वेद के चालीसवें अध्याय में किया है .जिसे ईशावास्‍य उपनिषद् भी कहा जाता है .जिसमे ईश्वर ने कहा है "योऽसावसौ पुरुषः सोऽहमस्मि ॥16॥अर्थात जो जो वह ऐसा पुरुष ( ईश्वर ) है वह मैं हूँ (I am  He )कालांतर में यही महावाक्य यहूदी धर्म से ईसाई धर्म तक पहुँच गया ,जिसे काट छांट करके इस्लाम में ले लिया गया
2-तौरेत में ईश्वर का नाम 
मुसलमान तौरेत को भी अल्लाह की किताब मानते है , जो कुरान से हजारों साल पुरानी है .और ईसाइयों की वर्त्तमान बाइबिल के पुराने नियम में मौजूद है .तौरेत हिब्रू भाषा में है .इसमें इश्वर का नाम "यहुव " बताया गया है .तौरेत में कहा है ,
Hear, O Israel: Yahweh is our God; Yahweh"  (Deuteronomy 6:4)

"שמע ישראל יהוה "

"शेमा इस्राइल अदोनाय इलोहेनु यहुवा "अर्थात हे इस्राइल (वालो ) सुनो हमारा प्रभु " यहुवा " है (Hear, O Israel: Yahweh is our God;Deuteronomy 6:4)
तौरेत यानी बाइबिल में इश्वर के लिए प्रयुक्त यहुव शब्द को कई प्रकार से बोला जाता है .और इसी शब्द से कुरान में "हुव " शब्द लिया गया है 
3--हिब्रू में यहुव का अर्थ 
यहुव का अर्थ जो स्वयं मौजूद है ,जो स्वयं समर्थ है ,जो महान शक्तिशाली और जो जीवित है
हिब्रू भाषा में यहुव का अर्थ " मैं हूँ I AM " है जिसे अंगरेजी में YHWH लिख सकते हैं .चूंकि हिब्रू भाषा में अक्षरों पर लगाने के लिए हिंदी की तरह मात्राएँ नहीं होती है , इसलिए हिब्रू शब्द "יהוה"को लोग  Yahweh or Jehovah की तरह बोलते हैं ,ईसाई धर्म में "यहुव इस चार अक्षरों को  Tetragrammaton कहा जाता है .और परम पवित्र माना जाता है .इस शब्द का उल्लेख बाइबिल के पुराने नियम (Old Testament ) की पुस्तक निर्गमन ("Exodus 3:15,में मिलता है . मुसलमान इस किताब को तौरेत कहते हैं .और इसको अल्लाह की किताब मानते हैं
यहुव का अर्थ जो स्वयं मौजूद है ,जो स्वयं समर्थ है ,जो महान शक्तिशाली और जो जीवित है 
(the meaning of the name “YHWH” is “‘He who is self-existing, self-sufficient’, or, more concretely, ‘He who lives )
4-इंजील में यहुव का प्रमाण 
मुसलमान इंजील को भी अल्लाह की किताब मानते हैं , इंजील वर्त्तमान बाईबिल के नए नियम में मौजूद है .इसमें भी तौरेत के कथन का समर्थन किया गया है , और कहा गया है ,
"ईसा ने कहा मैं तुम्हें सत्य बताता हूँ ,कि इब्राहीम के जन्म से पहले " मैं हूँ " मौजूद था" बाइबिल . नया नियम -युहन्ना 8:58

 "I tell you the truth,” Jesus answered, “before Abraham was born, I am!” – [John 8:58

ग्रीक भाषा में इसी का अनुवाद है " एगो एमी "( ἐγώ εἰμί   "Transliterated as: egō eimi "अर्थात मैं हूँ  The words translated as “I am

कुछ कहते हैं कि वह ( वह पुर्लिंग ) है ,और कुछ कहते हैं कि वह उसके (पुर्लिंग ) जैसा है .लेकिन खुद उसने कहा है " मैं वही हूँ "बाइबिल .नया नियम .युहन्ना 9:9
Some said, This is he: others said, He is like him: but he said, I am he. – [John 9:9

5-इस्लाम शब्द में गुप्त नाम 
चूंकि मुसलमान किसी गुप्त शब्द को छुपाने के लिए अक्षरों की जगह अंकों (Numbers ) का प्रयोग करते हैं इसलिए पहले इस्लाम शब्द का अरबी में संख्यात्मक मूल्य पता किया गया जो इस प्रकार है ,
अरबी भाषा में इस्लाम को "अल इस्लाम الإسلام" कहा कहा जाता है .इस शब्द में अरबी के कुल सात अक्षर है . जो इस प्रकार हैं ,अलिफ़ ,लाम , अलिफ़ ,सीन ,लाम ,अलिफ़ ,मीम .इन सभी सातों अक्षरों की अलग अलग संख्यात्मक मूल्य का योग 163 है , जो इस प्रकार है .
1 + 30 + 1 + 60 + 30 + 1 + 40 = 163 .इस संख्या से संकेत मिलता है कि कुरान की 163 वीं आयत में अल्लाह का गुप्त नाम छुपा हुआ है 

6-अल्लाह का नाम हुव है 
इस संकेत के सहारे जब हम कुरान की सूरा बकरा की 163 वीं आयत पढ़ते हैं ,तो तौरेत के ईश्वर के लिए प्रयुक्त " यहुव " शब्द " हुव " शब्द ले लिया गया है .और हिब्रू का " " अक्षर छोड़ दिया गया है . कुरान में कहा है 
"
لاَّ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ  "Sura-Bakra .  2 :163
"
"ला इलाह इल्ला हुव "अर्थात नहीं कोई देवता मगर "वह"(" There is no god but He" Sura -bakra 2:163 
7-कुरान में यहुव से हुव 

दी गयी कुरान की आयत में आये हुए शब्द हुवهُوَ  का अर्थ वह ( He ) होता है . इसमें दो अक्षर हे और वाव है .जो अरबी वर्णमाला में पांचवें और छठवे नंबर पर हैं . और अरबी अंक विद्या (Numerology ) के अनुसार इनकी संख्यात्मक मूल्य क्रमशः 5 और 6 हैं . जिनका योग 11 होता है .
इसके लिए देखिये विडिओ Yahweh' in Islam
http://www.youtube.com/watch?feature=player_embedded&v=94bksJOS21U#!

8-अल्लाह के नाम का गुणांक 
और यही ग्यारह (11) की संख्या ही अत्यंत ही महत्वपूर्ण है , क्योंकि इसी संख्या के गुणन खण्डों ( Multiples ) में अल्लाह के असली नाम का रहस्य छुपा हुआ है .जिसे अरबी गणित विद्या के आधार पर बेनकाब किया जा रहा है 
अरबी में अल्लाह शब्द में चार अक्षर हैं , अलिफ़ ,लाम ,लाम और हे .और इनकी संख्यात्मक मूल्य  1 + 30 + 30 + 5= 66  है , और जिसे 11 से विभाजित किया जा सकता है .अर्थात अल्लाह के गुप्त नामों के अक्षरों के संख्यात्मक मूल्य का योग 11 से विभाजित होने वाला होगा ,

9-अल्लाह का गुप्त नाम बर्बाद और भयानक 
अरबी गणित विद्या के अनुसार अल्लाह के दो गुप्त नाम ' खराब और हलाक "निकलते हैं . जो 11 की संख्या से बराबर विभाजित होते हैं .और अल्लाह के यही गुण सभी मुसलमानो में पाए जाते हैं .प्रमाण देखिये 
600+200 +1+2=803 =8+0+3=11  " خراب Destruction/ Devastation-विनाश तबाही
 5+30+1+20=56 =6+5= 11         "    هلاك " Perishing -भयानक, डरावना

इसीलिए तो लोग कहते हैं कि "यथा नाम तथा गुण "हम उन सभी इस्लामी गणित के विद्वानों के आभारी हैं .जिनके कारण हम अल्लाह के असली नाम और गुणों से अवगत हो सके .
निष्कर्ष -जब यहूदियों और ईसाइयों का खुदा भी मुसलमान होने पर बर्बाद और तबाह हो सकता है ,तो कोई व्यक्ति मुसलमान होकर सुरक्षित कैसे रह सकता है .?और जब अल्लाह ही ऐसा है तो सोचिये उस अल्लाह के मानने वाले कैसे होंगे ?


http://www.discoveringislam.org/yahweh_in_quran.htm

गुरुवार, 15 नवंबर 2012

अल्लाह इस्लाम का दुश्मन है !


इस बात में किसी को भी शंका नहीं होगी कि मुसलमान कभी शांति नहीं चाहते , और वह फसाद ,दंगा , झगडा और आतंक के लिए कोई न कोई बहाना खोजते रहते हैं .और अपनी दुर्दशा के लिए कभी हिन्दुओं पर आरोप लगाते हैं कभी इसाई देशों पर .लेकिन एक बात साबित है कि मुसलमान जिस भी देश में रहते हैं उसका सत्यानाश कर देते हैं सोचिये अगर मुसलमान ऐसे हैं , तो उनका अल्लाह कैसा होगा ?
चूँकि मुसलमानों अल्लाह खुद कोई काम नहीं कर सकता , और हरेक भले बुरे काम को करने के किसी किसी न किसी एजेंट को भेज देता है .जिसे रसूल और नबी कहा जाता है .इसलिए अगर कोई व्यक्ति ऐसा कहे कि खुद अल्लाह ही अपने एक नबी के द्वारा मक्का के काबा और मदीना स्थित मुहम्मद साहब कि मस्जिद का नाश करावा देगा . और खलीफाओं की कब्रों के साथ सहाबियों की कबरें भी खुदवा देगा . तो आप ऐसा कहने वाले को जरुर पागल कह देंगे . लेकिन असली पागल तो वह लोग हैं जिनको इस्लाम के बारे में सही ज्ञान नहीं है .इस लेख के माध्यम से हम ऐसे लोगों पर से इस्लाम का भूत उतारे देते हैं जो इस बात से इंकार करते हैं . कि इस्लाम का असली दुश्मन अल्लाह ही है .और उसने काफी पहले ही इस्लाम का सत्यानाश करने की योजना बना रखी है .ध्यान से पढ़िए ,
1-अंतिम नबी मेंहदी होगा 
मुसलमान अपने कुकर्मों और अल्लाह के द्वारा इस्लाम के नाश हो जाने की बात को छुपा लेते हैं कि मुहम्मद साहब के बाद भी अल्लाह एक नबी को भेजेगा .जैसा कि इस हदीस में लिखा है .
"रसूल ने कहा कि कियामत से पहले अल्लाह मेंहदी नाम के नबी को भेजेगा , जो मेरे कबीले से होगा "
सुन्नन इब्ने माजा-जिल्द 2 हदीस 5083 
"उम्मे सलमा ने कहा कि रसूल ने कहा कि मेरे परिवार में फातिमा के वंश में मेहदी का जन्म होगा . और उसका और उसके माता पिता के नाम मुझ से और मेरे माता के नाम जैसे होंगे .और वह सभी काम अल्लाह के हुक्म से करेगा " अबू दाउद-किताब 36 हदीस 4271 
उसका नाम "المهدي محمد بن عبد الله  अल मेहदी मुहम्मद बिन अब्द अल्लाह होगा " इब्न माजा- जिल्द 2 हदीस 4086 
शिया मुसलमान मेंहदी को अपना बारहवां और अंतिम इमाम मानते हैं .और सुन्नियों के मुहद्दिस " نعيم بن حماد  नुईम बिन हम्माद " ने अपनी हदीस " किताब अल फित्नكتاب الفتن" " में इसके बारे में विस्तार से लिखा है .इस किताब में दस अध्याय हैं 
लेकिन अल्लाह अपने इस नबी मेंहदी के द्वारा भविष्य में जो करवाने वाला है , उसके बारे में किसी मुसलमान ने सपने भी नहीं सोचा होगा .क्योंकि मुसलमान जिस अल्लाह के नाम पर रोज हजारों निर्दोष लोगों की हत्या कर रहे हैं . वही अल्लाह इस्लाम का सत्यानाश करने की योजना बना चुका है
अल्लाह ने मेंहदी को क्यों भेजा और वह अल्लाह के हुक्म से क्या करेगा इसके नमूने देखिये .
2-सृष्टि से पहले मेंहदी का जन्म 
" इमाम मजलिसी ने कहा कि मनुष्यों की सृष्टि से पहले ही इमाम मेंहदी को बनाया गया था "

            مهدي الشيعة خلق قبل خلق الخلق 

Bihar Al-Anwar, Vol. 51, page 144.((بحار الأنوار

3-अल्लाह को हिब्रू नाम से पुकारेगा .
"अल मुफजल इब्न उमर ने कहा कि अबू अब्दुल्लाह ( छठवें इमाम ) ने कहा , जब मेंहदी नमाज पढेंगे तो . अल्लाह को असली इबरानी नाम से पुकारेंगे "

             العبراني  دعا الله باسمه   إذا أذَن الإمام :  للنعماني   الغيبة  في كتاب

(Al-Numani, Al-Ghayba , p.326)


4-प्रतिशोध के लिए आएगा 
"अब्दुल रहमान अल कसीर ने कहा कि इमाम जफ़र ने बताया , अल्लाह ने रसूल को तो रहमत के लिए भेजा था ,लेकिन मेंहदी को लोगों से प्रतिशोध लेने के लिए भेजेगा "
    :  عن عبد الرحمن القصير عن أبي جعفر عليه السلام 

        إن الله بعث محمدا رحمة وبعث القائم نقمة   : قال

 (Baqir Al-Majlisi, Bihar Al-Anwar, Vol. 52,  p. 314-315)

(Muhammad ibn Hasan al-Saffar, Bashairu al-Darajat, p. 83)

अल्लाह अपने इस मेंहदी को जिन कामों को करने के लिए जल्द ही भेजने वाला है , उन में से कुछ मुख्य कामों के बारे में आगे बताया जा रहा है .ताकि मुसलमान ध्यान से पढ़ सकें .(देखिये - क्रमांक 5 से 10 तक )
5-अरबों का जनसंहार करेगा 
" मेंहदी अरबों का विरोधी होगा . अरब में कत्ले आम के आलावा कोई काम नहीं होगा , सभी अरब मारे जायेंगे "
      ما بقي بيننا وبين العرب إلا الذبح

(Baqir Al-Majlisi, Bihar Al-Anwar, Vol. 52, p. 349  and  Al-Numani, Al-Ghaiba, p. 155(الغيبة للنعماني ص155,  بحار الأنوار 52/349)
"मेंहदी का नाम " मुन्तजिर " इस लिए है की वह रुक कर लोगों में घूमेगा , और खोज खोज कर अरबों का क़त्ल करवा देगा. "

      منهم أحد  اتق العرب فإن لهم خبر سوء أما إنه لم يخرج مع القائم

  (Baqir Al-Majlisi, Bihar al-Anwar, Vol. 52, p. 318

"अरबों को डरना चाहिए कि अल कायम यानि मेंहदी की यह चेतावनी सभी अरबों के लिए है .चाहे वह सुन्नी हों या शिया "

 "    ويخشى العرب لأنه سيكون هناك أنباء سيئة للغاية بالنسبة لهم، وهو أن أيا من بينهم سيخرج مع القائم   "

 (Baqir Al-Majlisi, Bihar Al-Anwar, Vol. 52,  p. 333, and Al-Numani, Al-Ghaiba, p. 254( 52/333  بحار الأنوار   ,    الغيبة للنعماني ص254)

6-सुन्नियों को प्रताड़ित करेगा 
" मेंहदी के आने पर जो लोग अली की विलायत से इंकार करेंगे , उनको इस्लाम विरोधी मानकर , यहूदी और ईसाई की तरह जिम्मी घोषित कर दिया जायेगा . और टेक्स वसूला जायेगा "

فإذا قام قائم عرضوا كل ناصب عليه فإن أقر بالإسلام وهي الولاية وإلا ضربت عنقه أو أقر بالجزية فأداها كما يؤدي أهل الذمة

     
  Baqir Al-Majlisi’s Bihar Al-Anwar, Vol. 52, page 373 and  Furat ibn Ibrahim’s Tafseer , page 100(  52/357   بحار الأنوار  ,   تفسير فرات ص 100

" बाकिर मजलिसी ने कहा ,जो सुन्नी मेंहदी की शिक्षा नहीं अपनाएगा , तो मेंहदी पहले तो सुन्नी उलेमा को क़त्ल करगा फिर सभी सुन्नियों के सिर कटवा देगा "

      يناكحوننا ويوارثوننا الى ان يظهر المهدي حيث يبدا بقتل علماء اهل السنة ثم عوامهم 

 (Baqir Al-Majlisi’s Haq Al-Yaqeen-Al-Kulaini’s Al-Rawdah min al-Kafi, Vol. 8, page 160, 

7-दाउद की शरीयत लागू करेगा 
" मुहम्मद इब्न अहमद बिन खालिद से अली इब्न हुसैन ने कहा कि मेंहदी दाऊद की शरीयत के अनुसार काम करेंगे . और , कोई दुविधा होगी . तो रुहुल कुदस ( जिब्रील )उसका समाधान करा देगा "
    محمد بن أحمد عن محمد بن خـالد عن النَضر بن سويد عن يحي الحلبي عن عمران بن أعين عن جعيد الهمداني عن عليَ بن الحـسين عليه السَلام قال:
                                       روح القُدُس  به  تلقَانا  شيء  فإن أعيانا  بحكم آل داود،  قال   سألته بأي حكم تحكمون ؟

( Al-Kulayni , Al-Kafi, Vol. 1, p. 397)

"अबू उबैदा अल हज्जा से इमाम अबू अब्दुल्लाह ने कहा ,मेंहदी जब उठ खड़े होंगे तो दाउद और सुलेमान की शरीयत लागू कर देंगे. और किसी और शरीयत को प्रमाण नहीं मानेंगे "

           …  جعفر عليه السلام: عن أبي عبيد الحذَاء قال
         قال يا أبا عبيدة إذا قام قائم آل محمد عليه السلام حكم بحكم داود وسليمان ولا يُسأل بيننة

(Al-Kulayni, Usul Al-Kafi, Vol. 1, p. 397 ,  Al-Mufeed Al-Tusi, Al-Irshad, p. 413, and Alam Al-Wara, p. 433  )  
8-सहाबियों की कबरें खुदवा देगा 
" जब मेंहदी " यस्रिब' यानि मदीना जायेंगे तो वहां जिस " अल हुजरा अल नबीविया" के जिस कमरे में रसूल के साथ आयशा , अबूबकर और उमर की लाश दफ़न है .उन्हें खुदवा कर निकलवा देगा . और रसूल को अल बाकी में दफ़न करा देगा .और बाकी को लकड़ी के क्रूस पर लटका देगा "
  
                     وأجيء إلى يثرب فأهدم الحجرة وأخرج من بها وهما طريان فآمر بهما تجها البقيع وأمر بخشبتين يصلبان عليهما 
        
 (Al-Majlisi, Bihar al-Anwar, Vol. 53, p. 104 -10 ( بحار الأنوار ج 53/104-105 )

"मेंहदी अबू बकर और उमर बिन खत्ताब की कबरें खुदवा देगा , और उनको जिन्दा करके सबके सामने कोड़े लगवाएगा और बाद में क्रूस पर लटका देगा ."

"ونبش قبر أبي بكر الصديق وعمر بن الخطاب أن يتعرض للنبش، وأنهم ليصلب ويجلد أمام الحشود. سيتم احياء كل منهما في الحصول على الأحكام الصادرة بحقهم.  "
Ni’matullah Al-Jazairi, Al-Anwar Al-Numaniyah, Vol.2, p. 85 and Baqir Al-Majlisi, Haq al-Yaqeen, Vol. 2, p. 242

9-रसूल की मस्जिद तुड़वा देगा 
"जब अल्लाह का भेजा हुआ " अल कायम " यानि मेंहदी आएगा तो वह  मदीना में रसूल ने जिस मस्जिद की नींव रखी थी उसे जड़ से उखड़वा देगा "

            القائم يهدم المسجد الحرام حتى يرده إلى أساسسه ومسجد الرسول صلى الله عليه وسلم وإله إلى أساسه   

          (Al-Majlisi, Bihar al-Anwar, vol. 52, p. 338, and Al-Tusi, Al-Ghaibah, p. 282(  بحار الأنوار 52/338   ,   الغيبة ص 282 )

10-काबा भी तुड़वा देगा 
"जब मेंहदी उठ खड़े होंगे तो वह मक्का के मस्जिदुल हराम यानि " काबा " को ध्वस्त कर देंगे "

                  …  إذا قام المهدي هدم المسجد الحرام 

        Al-Mufid, Al-Irshad. p. 411 and At-Tusi, Kitab al Ghaibah, p. 282)(  الغيبة للطوسي ص282   ,  الإرشاد للمفيد ص411 )

अब हमारा सभी मुल्ले मौलवियों और मुसलमानों को चुनौती है , कि जब उनका अल्लाह ही इस्लाम का सत्यानाश करने इच्छा रखता है तो ,मुसलमान दूसरे धर्म के लोगों पर यह आरोप क्यों लगाते हैं कि उन्हीं के कारण इस्लाम खतरे में है .और जो अल्लाह रसूल कि कबर खुदवाने और काबा को ध्वस्त करने वाला है , मुसलमान उसकी इबादत क्यों करे, ? इसका यही कारण हो सकता है , यातो अल्लाह काबा में रह कर ऊब गया है और किसी नए बड़े मकान में रहना चाहता हो . याद रखिये कि यह हदीसें मुहम्मद साहब के वंशजों द्वारा कही गयी हैं , और जो भी इनको झूठ बताये तो समझो सभी हदीसें और कुरान भी झूठ है .मुसलमानों को अगर किसी से दुश्मनी निकालना हो , तो अल्लाह से दुश्मनी निकालें , क्योंकि 
"अल्लाह इस्लाम का नाश कर देगा "

http://www.discoveringislam.org/shia_mahdi.htm

शनिवार, 10 नवंबर 2012

अल्लाह विज्ञान से हार गया !!


भारत पर मुसलमानों ने करीब एक हजार साल राज किया .और इस दौरान इन्होने लोगों को लूट लूट कर मस्जिदें , मजार ,मकबरे और महल बनवाये .लेकिन लोगों को शिक्षित करने और संपन्न करने का कोई प्रयास नहीं किया .बल्कि नालंदा और तक्षशिला जैसे प्रसिद्ध विद्यालयों को जलवा दिया ,जिस से ज्ञान का भंडार पुस्तकें ख़ाक हो गयी .फिर भी आजके मुस्लिम नेता मुसलमानों के पिछड़ेपन का जिम्मेदार दूसरों को बताते रहते हैं .जबकि जिन यहूदियों को मुसलमानों ने बर्बाद कर दिया था वही यहूदी विज्ञान में सबसे आगे हैं .
वास्तव में मुसलमानों के अशिक्षित और पिछड़े होने का कारण कुरान की अवैज्ञानिक , तर्कहीन ,और उलजलूल तालीम ही है .जो सिर्फ जिहादी ही बना सकती है कोई वैज्ञानिक या कोई अविष्कारक नहीं .इसी बात को साबित करने के लिए कुरान के आधार पर अल्लाह के ज्ञान का नमूना दिया जा रहा है .
1-अल्लाह की आत्मप्रशंसा 
यदि कुरान को अल्लाह का कलाम माना जाये तो अल्लाह ने खुद को सबसे बड़ा ज्ञानी साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है .जैसी अल्लाह ने इन आयतों में डींग मारी है
अल्लाह से न तो धरती की कोई चीज छुपी है , और न उसने आसमान की किसी चीज को छोड़ा है " सूरा -आले इमरान 3 :5 
आकाशों और धरती के अन्दर छुपी हुई सभी बातें अल्लाह जानता है "सूरा -हूद 11 :123 
अल्लाह आकाशों और धरती के सभी रहस्य जानता है "सूरा -अल कहफ़ 18:26 
क्या तुम नहीं जानते कि अल्लाह वह सभी बातें जानता है जो आकाश और धरती के अन्दर हैं "सूरा -अल हज 22:70 
कसम है कि अल्लाह को आकाश के बारे में छोटी छोटी बात का पूरा ज्ञान है "सूरा -सबा 34 :3
बेशक अल्लाह आकाशों और धरती के बारे में सभी गुप्त बातें जानता है "सूरा -फातिर 35:38 
अल्लाह वह सभी बातें जनता है जो आकाश और धरती के भीतर हैं "सूरा -तगाबुन 64:4 
2-अल्लाह सिर्फ दो गिन सकता है 
जो अल्लाह न तो गणित ठीक से जानता हो और न भूगोल जानता हो उसकी इबादत करना बेकार है .
कुरआन की सूरा रहमान (सूरा संख्या 55) को पढ़ने से पता चलता है कि अल्लाह दो की संख्या से अधिक नहीं जानता है . इसीलिए उसने हर चीजें सिर्फ दो ,ही बनायीं हैं ,उदहारण के लिए ,
दो समुद्र हैं जो परस्पर मिले हुए हैं "55:19
दो बहते हुए स्रोते (Fountains ) हैं "55:50 
दो उबलते हुए पानी के कुण्ड हैं "55:66
डराने वालों के लिए दो बगीचे हैं "55:46
दो बगीचे और भी हैं "55:62 
क्या अल्लाह इतना भी नहीं जनता कि दो और दो बगीचे मिलकर चार बगीचे होते हैं ?
वह दो पूरब है और दो पश्चिम का स्वामी है "55:17
जब अल्लाह ही ऐसी मुर्खता की बात कहता है तभी तो यही कारण है कि कोई मुसलमान बड़ा वैज्ञानिक नहीं बन सका है . सभी जिहादी बन रहे हैं
3-अल्लाह की कसमें 
मुसलमान अक्सर अल्लाह की कसम खाते रहते हैं , लेकिन अल्लाह अपनी बेतुकी बातों को सही साबित करने के लिए चाँद की कसमें खाता रहता है .जैसे ,
कसम है चाँद की " सूरा -अल मुदस्सिर 74 :32 
कसम है चाँद की जब वह उसके पीछे छुप जाये "सूरा -अश शम्श 91 :2 
4-अल्लाह की अक्ल का नमूना 
अल्लाह आकाश (space ) को कपडेकी तरह फटने वाली वस्तु मानकर कहता है
"फिर यह आकाश फट जायेगा ,औरउसका रंग तेल की तरह लाल हो जायेगा सूरा -रहमान 55:37 
5-चन्द्रमा के लिए सीढियां 
अल्लाह के अनुसार चन्द्रमा पर जाने के लिए सीढियों की जरूरत होगी .और लोग बिना किसी यान के एक एक सीढी चढ़ कर चाँद पर पहुँच जायेंगे .अल्लाह मुसलमानों से कहता है "
निश्चय ही इसके लिए ( चंद्रमा पर जाने के लिए ) तुम्हें एक के बाद एक सीढी चढ़ना पड़ेगीं "सूरा -इन शिकाक 84 :19
"لَتَرْكَبُنَّ طَبَقًا عَنْ طَبَقٍ  "
( इसके लिए अरबी में " तरक्बुन्न तबकन अन तबक "यानि by scalating  step by step )
अल्लाह के अनुसार जैसे कोई मुल्ला एक एक सीढी चढ़ कर मस्जिद की ऊंची मीनार पर चढ़ जाता है ,वैसे ही मुसलमान सीढ़ियाँ चढ़ कर चाँद पर पहुँच जायेंगे .
6-अल्लाह की चुनौती 
लगता है कि अल्लाह को विज्ञानं की प्रगति और शक्ति का अंदाजा नहीं होगा ,या वह सभी को अपने रसूल जैसा अनपढ़ समझता होगा .तभी उसने मनुष्यों को ऐसी चुनौती दे डाली होगी . अल्लाह ने कहा कि ,
हे मनुष्य और जिन्नों के समूहों यदि तुम में सामर्थ्य हो तो ,इस धरती की परिधि से निकल कर आकाश की सीमा में प्रवेश करके अन्दर घुस कर आगे निकल जाओ " सूरा -रहमान 55:33 
न तो तुम धरती की सीमा से बहार निकल सकते हो ,और न आकाश की सीमा में प्रवेश कर सकते हो "सूरा - अनकबूत 29:22
लेकिन अल्लाह की यह चुनौती उस समय बेकार हो गयी जब 1961 में अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की सीमा से निकल कर चन्द्रमा की सीमा में घुस गए .और अल्लाह देखता ही रह गया 
7-मनुष्य का चन्द्र अभियान 
चन्द्रमा पृथ्वी का एक उपग्रह है ,जो सदा से लोगों की उत्सुकता का केंद्र रहा है , जब वैज्ञानिकों को पता चला कि चन्द्रमा पर भी प्रथ्वी की तरह धरती है ,जिस पर जाया सकता है .इसी बात की पुष्टि करने के लिए सन 1957 में रूसी वैज्ञानिकों ने स्पुतनिक(Sputnik) नाम का एक कृत्रिम उपग्रह यान चन्द्र पर उतारा था .इसके बाद सन 1961 में रूस ने वोस्तोक 1(Vostok1) नाम का एक और यान चन्द्रमा पर भेजा ,जिसमे यूरी गागरिन)yuri Gagarin ) नाम का एक अंतरिक्ष यात्री था .फिर अमेरिका ने भी 20 जुलाई 1969 को नील आर्मस्ट्रोंग(Neil Armstrong) नाम के एक व्यक्ति को चन्द्रमा की धरती पर उतारा था ,जो धरती के आकाश की सीमा को भेद कर अंतरिक्ष से आगे बढ़ कर चन्द्रमा की सैर करके वापिस इसी धरती पर सकुशल वापिस आ गया था .इस तरह अल्लाह का वह दावा झूठा साबित हो गया , जो उसमे कुरान की सूरा रहमान 55:33 में  और सूरा - अनकबूत 29:22में किया था ,कि मनुष्य प्रथ्वी के वायुमंडल को पर करके आकाश की सीमा से आगे नहीं जा सकता 
8-अल्लाह कहाँ हार सकता है ?
अब हमने ठीक से समझ लिया है कि जमीन पर रह कर अल्लाह को हराना कठिन है .और न उसे भगा सकते हैं "सूरा -जिन्न 72:12 
(इसीलिए अमेरिका की नेवी ने ओसामा बिन लादेन पर हवाई हमला करके मौत के घाट उतार दिया था )
9-आकाश से हमला 
अल्लाह ने कुरान में खुद यह संकेत दे दिया था कि हमें ( यानि उसके लोगों को) धरती पर रह कर हराना मुश्किल है .
अल्लाह ने दावा किया था कि कोई हमारे ऊपर आकाश से हमला नहीं कर सकता .चूँकि अल्लाह अक्सर खुद के लिए बहुवचन सर्वनाम (Plural We)का प्रयोग करता है . इसलिए उसके हम शब्द में अल्लाह के साथ सभी मुसलमान शामिल हैं .अल्लाह के इस दावे को अमेरिका की नेवी ने उस समय गलत साबित कर दिया जब 2 मई 2011 को पाकिस्तान के एबटाबाद में गुप्त रूप से छुपे हुए ओसामा बिन लादेन को हवाई हमला करके मार दिया था .अमेरिका के इस अभियान को" ओपरेशन नेप्चून स्पीयर"(OperationNapune Spear ) का नाम दिया गया था .अमेरिका का राष्ट्रपति ओबामा खुद मुसलमान है , उसे पता था कि जमीन पर अल्लाह को हराना कठिन होगा .सिर्फ आकाश से हमला करने से ही अल्लाह यानी ओसामा को मार सकते हैं 
इन ऐतिहासिक अकाट्य प्रमाणों से स्पष्ट हो जाता है कि अल्लाह की आई क्यू (I Q ) जकारिया नायक के बच्चे से भी कम होगी .अगर अल्लाह सचमुच ईश्वर होता तो वह ऐसी अवैज्ञानिक ,कल्पित ,बातों सही साबित करने के लिए कसमे नहीं खाता .लेकिन चाहे कोई कितनी भी कसमें खाए , और कितने भी दावे करे , हरेक झूठ का उसी तरह से भंडा फूट जाता है , जैसे अल्लाह के ज्ञान और दावों का भंडा फूट गया .
इसीलिए उपनिषद् में कहा है "सत्यमेव जयते "

http://www.answering-islam.org/authors/masihiyyen/rebuttals/yahya/scientific_predictions.html

सोमवार, 5 नवंबर 2012

कुरबानी या हत्या की ट्रेनिंग !


मुसलमान कई त्यौहार मानते हैं . जिनमें "ईदुज्जुहा "प्रसिद्ध और प्रिय त्योहर माना जाता है . भारत में इसे "बकरीद " भी कहते हैं .अरबी में ईदुज्जुहा का अर्थ बलिदान ( Sacrifice ) नहीं बल्कि " पशुवध का आनंद "( Joy of slaughter ) हैं.क्योंकि इसमें लाखों जानवरों का क़त्ल होता है .मुसलमानों का दावा है कि यह त्यौहार नबी इब्राहीम की अल्लाह के प्रति निष्ठा, भक्ति और उनके लडके इस्माइल की कुर्बानी को याद करने के लिए मनाया जाता है .और मुहम्मद साहब उसी इस्माइल के वंशज थे .चूँकि इब्राहीम की कथा इस्लाम से पहले की है और इब्राहीम के बारे में जो सही जानकारी बाइबिल , कुरान और हदीसों से मिलती वह इस प्रकार है .
1-इब्राहीम का परिचय 
इब्राहीम  إبراهيم‎ का काल लगभग 2000 साल ई ० पू से 1500 ई० पूर्व माना जाता है . इसके पिता का नाम मुसलमान "आजर آذر" और यहूदी "तेराह Terah"(  תָּרַח )बताते है .इब्राहीम " ऊर " शहर में पैदा हुआ था . जो हारान प्रान्त में था . वहां से इब्राहीम कनान प्रान्त में जाकर बस गया था .और उसके साथ उसकी बहिन ( पत्नी ) और भतीजा लूत भी आगये थे .इब्राहिम को एक गुलाम लड़की " हाजरा " मिली थी . जिस से उसने इस्माइल नामक लड़का पैदा किया था .जिसे मुहम्मद का पूर्वज माना जाता है . इब्राहीम और सारह से जो लड़का हुआ था उसका नाम "इसहाक " था .मुसलमान इनको नबी मानते हैं .यहूदी इसे अबराहाम(אַבְרָהָם  ) कहते हैं . जिसका अर्थ है जातियों का बाप .मुसलमान इब्राहीम को एक ,सदाचारी ,सत्यनिष्ठ ,और अल्लाह का परम भक्त नबी कहते हैं .लेकिन वास्तविकता यह है कि,
1-इब्राहीम का देशत्याग 
जब इब्राहीम अपने हारान देश को छोड़ कर कनान जाने लगा ,तो उसके साथ , लूत ,साराह अपनी सम्पति भी ले गया और वहीँ बस गया "बाईबिल .उत्पत्ति 12 :3 से 5
2-इब्राहीम झूठा और स्वार्थी था 
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया , इब्राहीम झूठ बोलते थे .उनके प्रसिद्ध तीन झूठ इस प्रकार हैं ,एक मैं बीमार हूँ , दूसरा मैंने मूर्तियाँ नहीं तोड़ी . यह दोनो झूठ अल्लाह के लिए बोले थे . और तीसरा झूठ सराह के बारे में था , कि यह मेरी बहिन है .
"حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَحْبُوبٍ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ مُحَمَّدٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ لَمْ يَكْذِبْ إِبْرَاهِيمُ ـ عَلَيْهِ السَّلاَمُ ـ إِلاَّ ثَلاَثَ كَذَبَاتٍ ثِنْتَيْنِ مِنْهُنَّ فِي ذَاتِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ، قَوْلُهُهَاجَرَ فَأَتَتْهُ، وَهُوَ قَائِمٌ يُصَلِّي،  "

Sahih Al- Bukhari, Vol.4,  Bk 55-Hadith No 578, Translation by Dr. Muhsan Khan

इब्राहीम के तीन झूठ यह हैं ,
1-जब इब्राहीम ने चुपचाप देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ दी ,और लोगों ने पूछा बताओ क्या यह काम तुमने किया है .तो इब्राहीम बोला मैंने नहीं यह तो सबसे बड़े देवता का काम है "सूरा -अम्बिया 21 :62 से 63
2-जब लोगों ने इब्राहीम के पूछा कि तुम्हारा अल्लाह यानी दुनिया के स्वामी के बारे में क्या विचार है ,इब्राहीम आकाश के तारों को देखता रहा , और बोला मैं तो बीमार हूँ "सूरा -अस सफ्फात 37 :87 से 89
3-इब्राहीम ने साराह के बारे में कहा बेशक यह मेरी बहिन है , और मेरे बाप की बेटी है ,लेकिन मेरी सगी माँ की बेटी नहीं है .इसलिए अब यह मेरी पत्नी बन गयी है " बाइबिल .उत्पत्ति 20 :13
3-इब्राहीम पर लानत 
जो भी अपनी बहिन के साथ सहवास करे उस पर लानत , चाहे वह उसकी सगी बहिन हो या सौतेली .तो सब ऐसे व्यक्ति पर लानत करें और कहें आमीन '
 बाइबिल .व्यवस्था 27 :22 
तुम पर हराम हैं , तुम्हारी बहिनें " सूरा -निसा 4 :23 
4-इब्राहीम का पापी परिवार 
इब्राहीम के काबिले में लड़कों के साथ कुकर्म करने का रिवाज था और उसका भतीजा लूत भी ऐसा था . इस कुकर्म को लूत के नाम से "लावातत" कहा जाता है .इनकी लीला दखिये ,
एक दिन कुछ सुन्दर लडके लूत से मिलने आये ,तो उन्हें देख कर लोग आगये .इस से लूत चिंतित हो गया .और उन लोगों को रोकना कठिन होने लगा .क्योंकि वहां के लोग लड़कों के साथ कुकर्म " Sodomy" करते थे . लूत ने उन लोगों से कहा इन लड़कों को छोडो यह मेरी बेटियां हैं यह इस काम के लिए अधिक उपयोगी हैं .लेकिन लोग बोले तू जानता है कि हमें क्या पसंद है "सूरा -हूद 11 :77 और 78 
जिस तरह इब्राहीम ने अपनी बहिन से सहवास किया था उसका भतीजा लूत भी महा पापी था .यह बाइबिल बताती है .
"एक रात लूत की लड़कियों ने तय किया कि आज हम अपने पिता को खूब शराब पिलायेंगे .और उसके साथ सहवास करेंगे .पहले एक लड़की बाप के साथ सोयी , फिर बारी बारी से सभी बाप के साथ सोयीं .इस तरह सभी अपने बाप से गर्भवती हुयीं "बाईबिल -उत्पत्ति 19 :30 से 36 
5-इब्राहीम की रखैल हाजरा 
इब्राहीम सदाचारी नहीं था ,यह जानकर शैतान ने एक लड़की हाजरा इब्राहीम के पास भेज दी थी .इस से इब्राहीम ने सहवास किया था .
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा है , शैतान ने ही हाजरा को इब्राहीम के पास इसलिए भेजा था कि वह उसे दासी के रूप में स्वीकार कर लें .और जब वह इब्राहीम के पास गयी तो इब्राहीम बोला . अल्लाह ने मुझे एक लड़की दासी भेज दी है .

"وقال: 'لقد بعث الله لي الشيطان. اصطحابها إلى إبراهيم وهاجر تعطي لها ". جاء ذلك عادت لإبراهيم وقال: "الله أعطانا فتاة الرقيق للخدمة "

Sahih al-Bukhari, Volume 3, Book 34, Number 420

6-इस्माइल की झूठी पैदायश 
चूँकि उस समय काफी बूढ़ा हो चूका था , और उसकी पत्नी सारह बाँझ थी ,इसलिए इब्राहीम और हाजरा ने मिलकर एक साजिश रची और कहीं से एक ताजा बच्चा लोगों को दिखा दिया , कि यह बच्चा हाजरा ने पैदा किया है .और इब्राहिम ने उस बच्चे का नाम इस्माइल रखा था .
एक दिन इब्राहीम तड़के भोर में उठा ,और अँधेरे में हाजरा को तैयार किया .और उसे एक बच्चा दिया .फिर हाजरा ने उस बच्चे को झाड़ियों में छुपा दिया .और हाजरा इस तरह से चिल्लाने लगी जैसे बच्चा जनने की पीड़ा हो रही हो .और जब बच्चे के रोने की आवाज लोगों ने सुनी तो लोगों ने समझा हाजरा ने बच्चे को जन्म दिया है "बाइबिल .उत्पत्ति 21 :14 से 17 
7-अरब हराम की औलाद हैं 
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा कि पहले तो हाजरा सारह के पास गयी .फिर इब्राहीम के पास चली गयी .उस समय इब्राहीम काम कर रहे थे .उन्होंने सारह से इशारे से पूछा कि यह किस लिए आयी है . साराह ने कहा यह तुम्हारी दासी है .और सेवा करेगी .अबू हुरैरा ने कहा इस बातको सुनते ही रसूल ने मौजूद सभी श्रोताओं से कहा , सुन लो सभी अरब उसी हाजरा की संतानें हो "

"ثم القى رجال هاجر كخادمة بنت لسارة. جاء سارة الظهر (لإبراهيم)، في حين كان يصلي. إبراهيم وهو يشير بيده، سأل: "ما الذي حدث؟" أجابت، "والله مدلل المؤامرة الشريرة للكافر (أو شخص غير أخلاقي) وأعطاني هاجر للخدمة." (أبو هريرة ثم خاطب مستمعيه قائلا: "هذا (حجر) كان أمك يا بني ما هو بين سما (أي العرب، من نسل إسماعيل، ابن هاجر)."

Bukhari-Volume 4-Book 55: Prophets-Hadith 578
Eng Reference  : Sahih al-Bukhari 3358

चूँकि मुहम्मद साहब खुद को भी इब्राहीम के नाजायज ,पुत्र और शैतान द्वारा भेजी गई औरत हाजरा के लडके इस्माइल का वंशज मानते थे .और खुद को इब्राहीम कि तरह रसूल साबित करना चाहते थे .इसलिए उन्होंने इसके लिए इब्राहीम द्वारा की इस्माइल की क़ुरबानी की कहानी का सहारा लिया .

8-क़ुरबानी का सपना 
इब्राहीम के पूर्वज अंधविश्वासी थे और सपने की बातों को सही समझ लेते थे .बाइबिल और कुरान में ऐसे कई उदहारण मिलते हैं ,जैसे
"यूसुफ ने पिता से कहा कि रात को मैंने एक सपना देखा कि ग्यारह तारे .सूरज और चाँद मुझे सिजदा कर रहे हैं , यह उन कर पिता ने कहा तुम इस सपने की बात अपने भाइयों से नहीं कहना .ऐसा न हो वह कोई साजिश रचें " सूरा-यूसुफ 12 :4 -5 
ऐसा ही सपना इब्राहीम ने देखा ,और सच मान बैठा ,कुरान में लिखा है
जब इब्राहीम का लड़का चलने फिरने योग्य था , तो इब्राहीम ने उस से कहा बेटा मैंने सपने में देखा कि जसे मैं तुझे जिबह कर रहा हूँ ,बोल तेरा क्या विचार है "
सूरा -अस सफ्फात 37 :102 
(अरबी में "इन्नी उज्बिहुक انّي اُذبحك" तेरी गर्दन पर छुरी फिरा रहा हूँ )

9-अल्लाह ने क़ुरबानी रोकी 
जब इब्राहीम ने अपने बेटे का गला काटने के लिए छुरी हाथ में उठायी ,तो एक फ़रिश्ता पुकारा ,हे इब्राहीम तुम लडके की तरफ हाथ नहीं बढ़ाना .हमें यकीं हो गया कि तू ईश्वर से डरता है .बाइबिल -उत्पत्ति 22 :10 से 12 
हमने कहा हे इब्राहीम तूने तो सपने को सच कर दिया .यह तो मेरी परीक्षा थी .और फिर हमने एक महान क़ुरबानी कर दी "सूरा 37 :105 से 107 
( नोट - इन आयतों में कहीं पर किसी जानवर का उल्लेख नहीं है ,और न मैंढे का नाम है)

10- गाय की कुर्बानी
जब अल्लाह ने मूसा से कहा कि एक गाय को जिबह करो ,तो लोग बोले क्या तू हमें अपमानित कर रहा है .लेकिन जब लोग मूसा के कहने पर गाय जिबह कर रहे थे तब भी उनके दिल काँप रहे थे . सूरा -बकरा 2 :67 और 71 
गाय की क़ुरबानी ( ह्त्या ) का एक वीडियो देखिये 
http://www.youtube.com/watch?v=rgrB9X_mINU&feature=related
(नोट -इस आयत की तफ़सीर में लिखा है ,उस समय मिस्र में किब्ती ( Coptic ) लोग रहते थे जो गाय की पूजा करते थे .इसी लिए अल्लाह ने उनकी आस्था पर प्रहार करने और उनका दिल दुखाने के लिए गाय की कुर्बानी का हुक्म दिया था .जिसे रसूल ने भी सही मान लिया था .हिन्दी कुरान .पेज 137 टिप्पणी संख्या 24 मक्तबा अल हसनात रामपुर )
इन सभी प्रमाणों से सिद्ध होता है ,कि 1 . इब्राहीम को झूठ बोलने की आदत थी .और सगी बहिन से शादी करके महापाप किया था , और बाइबिल के मुताबिक यह काम लानत के योग्य है .2 .यातो इब्राहीम ने सपने में लड़के की क़ुरबानी की होगी या शैतान के द्वारा भेजी हाजरा के फर्जी पुत्र की क़ुरबानी की होगी .3 .इस झूठी कहानी को सही मान कर जानवरों का क़त्ल करना उचित नहीं है .4 .अल्लाह इब्राहीम और लूत जैसे पापियों को ही रसूल बनाता है .5 .सारे अरब के लोग इसलिए अपराधी होते हैं क्योंकि वह इब्राहीम के उस नाजायज लडके इस्माइल वंशज हैं ,जिसे शैतान ने भेजा था .6 .क्या इब्राहीम के बाद मुसलमानों में ऐसा एकभी अल्लाह भक्त पैदा हुआ , जो अपने लडके को कुर्बान कर देता .यहूदी और ईसाई भी इब्राहीम को मानते हैं लेकिन कुर्बानी का त्यौहार नहीं मनाते.
महम्मद साहब ने ईदुज्जुहा की परंपरा मुसलमानों को ह्त्या की ट्रेनिग देने के लिए की थी !

http://www.aboutbibleprophecy.com/abraham.htm