शुक्रवार, 23 नवंबर 2012

इस्लाम में अल्लाह का नाम बर्बादी है !


विश्व के लगभग सभी लोग इस सत्य को स्वीकार करते हैं कि जरूर कोई एक ऐसी अलौकिक शक्ति है , जो इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को नियंत्रित कर रही है .और बिना किसी की सहायता के संचालित कर रही है .धार्मिक उसी शक्ति को ईश्वर मानकर विभिन्न नामों से पुकारते और याद करते हैं .लोगों में ईश्वर के नाम के बारे में सदा से उत्सुकता बनी रही है .कुछ लोगों का विचार है कि ईश्वर का कोई निजी व्यक्तिगत नाम(Personal Name ) नहीं है .और कुछ लोगों का विचार है कि ईश्वर के अनेकों नाम हो सकते हैं ,जो उसके शुभ गुणों को प्रकट करते हैं .वैदिक धर्म से लेकर यहूदी , ईसाई धर्म तक ईश्वर के द्वारा बताये गए उसके निजी नाम का स्पष्ट पता चलता है .लेकिन मुस्लिम विद्वानों ने अरबी अक्षरों की गणित विद्या के आधार पर अल्लाह के नाम जो खोज की है .चूँकि अरबी भाषा में हरेक अक्षर का एक संख्यात्मक मूल्य होता है .इसलिए बात को स्पष्ट करने के लिए उसी का सहारा लिया गया है .उससे अल्लाह की असलियत उजागर हो गयी है .यहाँ पर सभी धर्मों के आधार पर ईश्वर और अल्लाह का असली नाम दिया जा रहा है
1-ईश्वर का आत्मपरिचय 
यह एक निर्विवाद सत्य है कि वेद विश्व के प्राचीनतम धार्मिक ग्रन्थ है .और उसी में ईश्वर द्वारा ही उसके निजी नाम का रहस्य खोला गया है . आज भी सभी योगी ईश्वर के उस गुप्त नाम को " महा वाक्य " कहते हैं .इश्वर द्वारा अपने नाम का उल्लेख यजुर्वेद के चालीसवें अध्याय में किया है .जिसे ईशावास्‍य उपनिषद् भी कहा जाता है .जिसमे ईश्वर ने कहा है "योऽसावसौ पुरुषः सोऽहमस्मि ॥16॥अर्थात जो जो वह ऐसा पुरुष ( ईश्वर ) है वह मैं हूँ (I am  He )कालांतर में यही महावाक्य यहूदी धर्म से ईसाई धर्म तक पहुँच गया ,जिसे काट छांट करके इस्लाम में ले लिया गया
2-तौरेत में ईश्वर का नाम 
मुसलमान तौरेत को भी अल्लाह की किताब मानते है , जो कुरान से हजारों साल पुरानी है .और ईसाइयों की वर्त्तमान बाइबिल के पुराने नियम में मौजूद है .तौरेत हिब्रू भाषा में है .इसमें इश्वर का नाम "यहुव " बताया गया है .तौरेत में कहा है ,
Hear, O Israel: Yahweh is our God; Yahweh"  (Deuteronomy 6:4)

"שמע ישראל יהוה "

"शेमा इस्राइल अदोनाय इलोहेनु यहुवा "अर्थात हे इस्राइल (वालो ) सुनो हमारा प्रभु " यहुवा " है (Hear, O Israel: Yahweh is our God;Deuteronomy 6:4)
तौरेत यानी बाइबिल में इश्वर के लिए प्रयुक्त यहुव शब्द को कई प्रकार से बोला जाता है .और इसी शब्द से कुरान में "हुव " शब्द लिया गया है 
3--हिब्रू में यहुव का अर्थ 
यहुव का अर्थ जो स्वयं मौजूद है ,जो स्वयं समर्थ है ,जो महान शक्तिशाली और जो जीवित है
हिब्रू भाषा में यहुव का अर्थ " मैं हूँ I AM " है जिसे अंगरेजी में YHWH लिख सकते हैं .चूंकि हिब्रू भाषा में अक्षरों पर लगाने के लिए हिंदी की तरह मात्राएँ नहीं होती है , इसलिए हिब्रू शब्द "יהוה"को लोग  Yahweh or Jehovah की तरह बोलते हैं ,ईसाई धर्म में "यहुव इस चार अक्षरों को  Tetragrammaton कहा जाता है .और परम पवित्र माना जाता है .इस शब्द का उल्लेख बाइबिल के पुराने नियम (Old Testament ) की पुस्तक निर्गमन ("Exodus 3:15,में मिलता है . मुसलमान इस किताब को तौरेत कहते हैं .और इसको अल्लाह की किताब मानते हैं
यहुव का अर्थ जो स्वयं मौजूद है ,जो स्वयं समर्थ है ,जो महान शक्तिशाली और जो जीवित है 
(the meaning of the name “YHWH” is “‘He who is self-existing, self-sufficient’, or, more concretely, ‘He who lives )
4-इंजील में यहुव का प्रमाण 
मुसलमान इंजील को भी अल्लाह की किताब मानते हैं , इंजील वर्त्तमान बाईबिल के नए नियम में मौजूद है .इसमें भी तौरेत के कथन का समर्थन किया गया है , और कहा गया है ,
"ईसा ने कहा मैं तुम्हें सत्य बताता हूँ ,कि इब्राहीम के जन्म से पहले " मैं हूँ " मौजूद था" बाइबिल . नया नियम -युहन्ना 8:58

 "I tell you the truth,” Jesus answered, “before Abraham was born, I am!” – [John 8:58

ग्रीक भाषा में इसी का अनुवाद है " एगो एमी "( ἐγώ εἰμί   "Transliterated as: egō eimi "अर्थात मैं हूँ  The words translated as “I am

कुछ कहते हैं कि वह ( वह पुर्लिंग ) है ,और कुछ कहते हैं कि वह उसके (पुर्लिंग ) जैसा है .लेकिन खुद उसने कहा है " मैं वही हूँ "बाइबिल .नया नियम .युहन्ना 9:9
Some said, This is he: others said, He is like him: but he said, I am he. – [John 9:9

5-इस्लाम शब्द में गुप्त नाम 
चूंकि मुसलमान किसी गुप्त शब्द को छुपाने के लिए अक्षरों की जगह अंकों (Numbers ) का प्रयोग करते हैं इसलिए पहले इस्लाम शब्द का अरबी में संख्यात्मक मूल्य पता किया गया जो इस प्रकार है ,
अरबी भाषा में इस्लाम को "अल इस्लाम الإسلام" कहा कहा जाता है .इस शब्द में अरबी के कुल सात अक्षर है . जो इस प्रकार हैं ,अलिफ़ ,लाम , अलिफ़ ,सीन ,लाम ,अलिफ़ ,मीम .इन सभी सातों अक्षरों की अलग अलग संख्यात्मक मूल्य का योग 163 है , जो इस प्रकार है .
1 + 30 + 1 + 60 + 30 + 1 + 40 = 163 .इस संख्या से संकेत मिलता है कि कुरान की 163 वीं आयत में अल्लाह का गुप्त नाम छुपा हुआ है 

6-अल्लाह का नाम हुव है 
इस संकेत के सहारे जब हम कुरान की सूरा बकरा की 163 वीं आयत पढ़ते हैं ,तो तौरेत के ईश्वर के लिए प्रयुक्त " यहुव " शब्द " हुव " शब्द ले लिया गया है .और हिब्रू का " " अक्षर छोड़ दिया गया है . कुरान में कहा है 
"
لاَّ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ  "Sura-Bakra .  2 :163
"
"ला इलाह इल्ला हुव "अर्थात नहीं कोई देवता मगर "वह"(" There is no god but He" Sura -bakra 2:163 
7-कुरान में यहुव से हुव 

दी गयी कुरान की आयत में आये हुए शब्द हुवهُوَ  का अर्थ वह ( He ) होता है . इसमें दो अक्षर हे और वाव है .जो अरबी वर्णमाला में पांचवें और छठवे नंबर पर हैं . और अरबी अंक विद्या (Numerology ) के अनुसार इनकी संख्यात्मक मूल्य क्रमशः 5 और 6 हैं . जिनका योग 11 होता है .
इसके लिए देखिये विडिओ Yahweh' in Islam
http://www.youtube.com/watch?feature=player_embedded&v=94bksJOS21U#!

8-अल्लाह के नाम का गुणांक 
और यही ग्यारह (11) की संख्या ही अत्यंत ही महत्वपूर्ण है , क्योंकि इसी संख्या के गुणन खण्डों ( Multiples ) में अल्लाह के असली नाम का रहस्य छुपा हुआ है .जिसे अरबी गणित विद्या के आधार पर बेनकाब किया जा रहा है 
अरबी में अल्लाह शब्द में चार अक्षर हैं , अलिफ़ ,लाम ,लाम और हे .और इनकी संख्यात्मक मूल्य  1 + 30 + 30 + 5= 66  है , और जिसे 11 से विभाजित किया जा सकता है .अर्थात अल्लाह के गुप्त नामों के अक्षरों के संख्यात्मक मूल्य का योग 11 से विभाजित होने वाला होगा ,

9-अल्लाह का गुप्त नाम बर्बाद और भयानक 
अरबी गणित विद्या के अनुसार अल्लाह के दो गुप्त नाम ' खराब और हलाक "निकलते हैं . जो 11 की संख्या से बराबर विभाजित होते हैं .और अल्लाह के यही गुण सभी मुसलमानो में पाए जाते हैं .प्रमाण देखिये 
600+200 +1+2=803 =8+0+3=11  " خراب Destruction/ Devastation-विनाश तबाही
 5+30+1+20=56 =6+5= 11         "    هلاك " Perishing -भयानक, डरावना

इसीलिए तो लोग कहते हैं कि "यथा नाम तथा गुण "हम उन सभी इस्लामी गणित के विद्वानों के आभारी हैं .जिनके कारण हम अल्लाह के असली नाम और गुणों से अवगत हो सके .
निष्कर्ष -जब यहूदियों और ईसाइयों का खुदा भी मुसलमान होने पर बर्बाद और तबाह हो सकता है ,तो कोई व्यक्ति मुसलमान होकर सुरक्षित कैसे रह सकता है .?और जब अल्लाह ही ऐसा है तो सोचिये उस अल्लाह के मानने वाले कैसे होंगे ?


http://www.discoveringislam.org/yahweh_in_quran.htm

5 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ-प्रभात मित्रो ,
    जय श्री राम ,
    जय माँ भारती ,
    जय हिन्दू सनातन धर्म ,
    कल मुसलमानों का अतिशान्ति प्रिय त्यौहार मुहर्रम था , पुरे उत्तर भारत में पूरी शान्ति के साथ कई स्थानों पर पथराव किया गया ,पूरी शांति एवं श्रधा का परिचय देते हुए मुसलमानों ने उत्तर प्रदेश के लगभग ग्यारह स्थानों पर 100 लोगों को घायल करके मुहर्रम के सन्देश को घर-घर तक पहुँचाया , जो की त्याग और मुहब्बत और आपसी भाईचारे को मजबूती देता है
    उत्तर प्रदेश के .कुशी नगर के दुबौली बाज़ार में तो यह और भी दो कदम आगे निकल गया, यहाँ पर ड्यूटी पर तैनात SSP , ADM . SO . और यातायात अधिकारी सहित दो पुलिसवालों को भी बुरी तरह से घायल करके मुहर्रम का प्यार भरा सन्देश दिया गया ,
    भादोली - में MLA और बारह लोगों को भी मुहर्रम का प्यार भरा संदेस दिया , और अब वे सब नजदीकी अस्पताल में जन्नत का ट्रेलर देखने में मशगूल है ,
    बहराईच - के पर्सोहना गाँव में एक अलग मिशाल मुहर्रम की पेश की गयी , यहाँ पर बहुत ही सादगी से त्याग का परिचय दिया गया -और केवल दुकानों में लूट-पाट ही की गयी , और रस्मी तौर पर पथराव की रस्म अदा की गयी , जिसमे दो महिलाओं और छोटे - छोटे बच्चों के सिरों से सिर्फ खून ही निकला , बाकि सब सही सलामत है
    इसी प्रकार , कन्नौज , वाराणसी ,बाराबंकी , कानपुर , ओरया फरुखाबाद - में भी अलग-अलग अंदाज में यह शांति-प्रिय त्यौहार देखने को मिला ,

    दिल्ली में भी कुछ इसी तरह का नजारा देखने को मिला .. नयी -नयी तेज रफ़्तार मोटरसाईकिलों पर बैठे , हाथों में नंगी तलवारों को लहराते हुए , रास्ते के पेड़ों को काटते हुए, राह चलते हुए लोगों और महिलाओं को डराते हुए , बीस -तीस मोटरसाईकिलों के झुण्ड को कोलाहल करते हुए देखा गया ,
    कोई मुझे मुहर्रम का त्यौहार समझाएगा ? ?? की ये क्यों और किसलिए मनाया जाता है , क्या इसका वास्तविक रूप यही है , जो वर्तमान रूप से देखने को मिल रहा है ???
    अगर ऐसा है तो फिर अपने घरों की दीवारों पर हरा रंग पुतवा लीजिये , और नमाज़ अता करना सीख लीजिये , क्योंकि बहुत जल्दी ही हम सबको इसकी जरुरत पड़ने वाली है ,
    अगर आपके आस-पास कोई सेक्युलर मिले तो उससे ये सवाल जरूर करना ,

    उत्तर प्रदेश के ( वास्तविक मुख्यमंत्री) मुल्ला -यम और मंद मोहन , और गोरी अम्मा ने इस पर अत्यंत ख़ुशी जाहिर करते हुए देशवासियों को बधाई दी है और कहा है की आने वाले बीस या तीस वर्षों में सारे देश में इस उत्सव की गूँज और ध्वनि गली-गली- और कुचे-कुचे में देखने को मिलेगी , क्योंकि इसके लिए "अंधश्रद्धा निर्मूलन विधेयक" ( हिन्दुओं के लिए ) लाया जा रहा है , जिससे आप अपने घर में ही भगवन के पूजा नहीं कर पाएंगे। श्रधा के साथ मंदिर नहीं जा पाएंगे। घर में नकारात्मक उर्जा को हटाने के लिए आप घर में हवन नहीं करवा पाएंगे। स्कुलो और सामाजिक संस्थानों से भगवान की फोटो हटा दी जाएगी। हिन्दू अपने देवी देवताओ का स्मरण नहीं कर पाएंगे। रामचरितमानस का पाठ नहीं करवा पाएंगे। अब ऐसा होने जा रहा है देश में और यह शुरुआत महाराष्ट्र से कांग्रेस कर चुकी है।

    महाराष्ट्र में कांग्रेसी सरकार "अंधश्रद्धा निर्मूलन विधेयक" नाम की कानून ला रही है। जिसका मकसद सभी धार्मिक श्रद्धाव पर प्रतिबन्ध लगाना है। कांग्रेस महाराष्ट्रके बाद इस कानून को पुरे देश में लागु करने वाली है।
    देश के काले अंग्रेजो ने महाराष्ट्र के धरती से सेकुलरिस्म के नाम पर हिन्दू मान्यताओ पर आघात लगाना सुरु कर दिया है। इस क़ानून के सहायता से कांग्रेस पुरे देश से हिन्दुओ को ख़त्म करके विपक्ष को ही ख़त्म कर देना चाहती है। इस कानून में हिन्दुओ के लिए सारे प्रतिबन्ध है। लेकिन मुस्लिमो के नाम पर सरकार चुप है। सरकार हिन्दू धर्म को कानून से बांधना चाहती है और बाकि धर्मो को खुली छूट देना चाहती है।

    जय हिन्द
    जय माँ भारती ,

    उत्तर देंहटाएं
  2. मित्रोँ जाकिर नाईक द्वारा भारतके हिन्दुओ को बहकाया जा रहा है और इसी से हिन्दुओँ को सेकुलर बनाया जा रहा है ।।

    इसके अन्तर्गत यह अपने मुस्लिम मंचोँ पर हमारे धर्मगुरुओँ को बुलाता है और बहाँ पर बह इस्लाम (जो धर्म है ही नही) और हमारे धर्म की तुलना करता है क्योँकि हमारे धर्मग्रन्थ आसानी से हर कोई पढ सकता है जबकि इनके तथाकथित ग्रन्थ उर्दू ब अरबी मेँ होने के कारण हमारे धर्मगुरु इस बारे मेँ कुछ नही बोल पाते ।।

    चूँकि मंच मुस्लिम है और हमारा भारत देश मुस्लिम परम हितैषी है इस कारण हमारे धर्म गुरु चाहकर भी इस्लाम के खिलाफ नहीँ बोल पाते और इसको इस्लाम ब हिन्दु धर्म मेँ तुलना करने का मौका मिल जाता है ।।

    ये कहता है कि बेदोँ मेँ मोहम्मद का जिक्र है ।
    लेकिन बेदो मेँ मोहम् (मोह) तथा मदम्(घमण्ड) ये शब्द एक साथ प्रयुक्त हुये है जो संयुक्त होकर मोहम्मदम् बनता है और ये जाकिर नाईक को अक्ल तो है नही होशियार बनता है ।

    जाकिर नाईक बही है जिस पर अमेरिका इंग्लैण्ड सहित कई देशोँ मेँ बैन लगा है क्योकि ये अनाफ सनाफ बातेँ फैलाता रहता है ।

    अगर जाकिर नाईक को शास्त्रार्थ करना है तो कभी भी किसी खुली मंच पर मेरे साथ कर ले ।

    नानी याद न दिला दी तो कहना ।

    जय जय श्रीराम

    उत्तर देंहटाएं
  3. http://www.youtube.com/watch?v=fea8BydNBoU&feature=share

    उत्तर देंहटाएं
  4. तेजो राष्ट्रस्य निर्हन्ति न वीरो जायतेवृषा **!!** ▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬
    जहाँ गौएँ परेशान होती हैं वहां उस राष्ट्र का तेज शून्य हो जाता है,
    वहां वीर जन्म नहीं लेते जिन्होंने हमारे धर्मग्रन्थ, पुराण और साहित्य का अध्ययन किया हो एवं हमारे देवी - देवता, पौराणिक पात्र / चरित्रों पर ज्ञान / जानकारी / सूचना के अभाव में अथवा जान बूझकर की जा रही टिप्पणी को अस्वीकार करते हैं
    क्यों बार बार अर्थहीन हर बार यह चर्चा होती है आधे अधूरे ज्ञान से यह पीढी धर्म ग्रंथों को ढोती है जिसको देखो वही अपना द्रष्टीकोण समझाता है धर्म ग्रंथों की एक घटना को वह प्रकीर्ण बतलाता है सीता, राधा, कुंती, द्रौपदी, सती का अपना एक स्थान है वैवाहिक जीवन में उनका स्वयं अपना निर्णय प्रधान है उनके निर्णय पर भी अब तुम क्यों सवाल उठाते हो वर्तमान में भी क्योंकर तुम फिर भूतकाल पढ़ाते हो
    क्यों सत / द्वापर युग की बातों का कलयुग में निर्णय होता है जब रामायण-महाभारत के धर्म युद्ध को जीतने वाला भी रोता है कुछ भी सीता पर कहने से पहले अपनी मर्यादा को तौलो और पुरुषोत्तम होकर ही तुम श्री राम जानकी पर बोलो कुंती की चर्चा का तो सबको अधिकार नहीं हो सकता है माँ कुंती के दुःख में केवल कर्ण - अर्जुन ही रो सकता है वृक्ष ओट से वध बाली का यह प्रश्न ही
    बेमानी है क्योंकि बाली पुत्र अंगद ही श्री राम का सेनानी है हैं पवनपुत्र के श्रीराम प्रभु , मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते है
    अब आज उनके निर्णयों पर भी कुछ मूर्ख सवाल उठाते है रामायण महाभारत हमारे जीवन जीने का अधिकार है |
    इनकी आलोचना जो भी करे उसको फिर धिक्कार है ||

    राम या रावण हो बनना या कृष्ण - कंस का भाव है |
    जो भी है हम सबमे यह अपने अंतर्मन का प्रभाव है ||
    उन सबने जीवन जिया और संघर्षों से विजय पाई है |
    इस मानव जीवन की गाथा तो स्वयं एक कठिनाई है ||
    अल्प ज्ञान का तर्क हमेशा कुतर्क-कुत्सित बन जाता है |
    ऐसा जीवन तो फिर वाद-विवाद में व्यतीत हो जाता है ||
    इस धरती में मात- पिता ही उस ईश्वर का प्रमाण है |
    अब इनका मार्गदर्शन ही नए धर्मग्रंथों का निर्माण है ||
    इस छोटे से जीवन में तुम वर्तमान में जीयो - मरो |
    भूत भविष्य के फेर में अपने कर्तव्यों से नहीं फिरो ||
    जो इस जीवन में भी फिर कुछ बाकी रह जायेगा |
    होगा जन्म दुबारा और यह चक्र चलता ही जायेगा ||
    बेजोड़ हैं यह धर्मग्रन्थ बस इनको तुम स्वीकार करो |
    मर्याद का हो मार्ग प्रशस्त सत्य, धर्म का प्रचार करो ||
    श्रीमद्दभगवद्दगीता ही सम्पूर्ण सृष्टी के ज्ञान का आधार है |
    इसपर कोई टीका-

    टिपण्णी नहीं "सुदेश " को स्वीकार है ||
    चिरंजीवी भव !
    उत्तिष्ठ भारतः !
    ॥॥सत्यमेव जयते॥॥ जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम्

    । जय हिंद ! वन्दे मातरम ! वन्दे गौ माता

    उत्तर देंहटाएं
  5. एकेश्वरवाद



    इस्लाम में (1) एकेश्वरवाद (2) और मानव बंधुत्व दो ऐसे सिद्धांत हैं जो सारे मानव को एक कर सकते हैं।

    एकेश्वरवाद का अर्थ यह हुआ कि सारी सृष्टि का सृष्टिकर्ता मात्र एक अल्लाह है अतः सम्पूर्ण मानव के लिए आवश्यक है कि मात्र उसी की पूजा करे। जब सारे मानव का पैदा करने वाला एक ठहरता है और प्रभु भी एक ही है तो इस से मित्रता बनेगी अथवा बिगड़ेगी ? उसके विपरीत यदि कोई किसी की पूजा करे, कोई किसी की पूजा करे तो इसमें असमानता के साथ साथ शत्रुता का भाव भी पाया जाता है। इसी लिए लोग अलग अलग जातियों और धर्मों में बट जाते हैं। जबकि इस्लामी सिद्धांत सारे मानव को एक समुदाय बनाने का प्रयास करता है।

    दूसरा सिद्धांत मानव बंधुत्व है जिसका अर्थ यह हुआ कि सारे मानव की नसल एक है। सारे मानव एक ही माता पिता अर्थात् आदि पुरुष आदम और हव्वा की संतान हैं। इसलिए इस्लाम हर प्रकार के भेद-भाव और छूत-छात का खंडन करता है। मानव को जाति और वंश के आधार पर बांटने की निंदा करता है। जिससे सारे मानव एक बन्धुत्व में बंध जाते हैं।

    इन दो सिद्धांतों को सामने रखें फिर सोचें कि जो धर्म सारे मानव को परस्पर भाई भाई सिद्ध करता है उनमें जाति अथवा समुदाय के आधार पर कोई भेद-भाव नहीं करता। और उनका पूज्य भी एक ही सिद्ध करता है।

    रही यह बात कि इस्लाम "हर चीज़ की पूजा" का खंडन करता है, तो यह सिद्धांत मात्र इस्लाम का नहीं अपितु सारे धार्मिक ग्रन्थों की शिक्षाओं का यही सार है कि मात्र एक अल्लाह की पूजा की जाए। इस लिए यदि कोई हिन्दु एक अल्लाह के इलावा किसी अन्य की पूजा करता है तो वह सब से पहले अपने धार्मिक ग्रन्थ की शिक्षाओं की अवहेलना करता है। हर चीज़ भगवान नहीं हो सकती। अल्लाह तो मात्र एक है वह किसी का रूप नहीं लेता, न किसी की शक्ल में अवतार लेता है। हाँ! उसने मानव मार्गदर्शन हेतु हर देश और हर युग में मानव में से ही संदेष्टाओं को भेजा जिनका अन्त मुहम्मद सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम पर हुआ। मुहम्मद सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम ने लोगों को उसी एक अल्लाह की ओर बुलाया जिसकी ओर सारे संदेष्टा बुलाते आ रहे थे। आज अल्लाह का अवतरित किया हुआ मार्ग क़ुरआन और मुहम्मद सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम के प्रवचनों में पूर्ण रूप में सुरक्षित है।
    SUNNIKING TEAM (MOHSIN NOORI)

    उत्तर देंहटाएं