मंगलवार, 27 नवंबर 2012

अल्लाह का अरबी अवतार !


यद्यपि इस्लाम अवतारवाद को नहीं मानता , लेकिन कुरान और हदीस में अल्लाह का जो स्वरूप , स्वभाव ,और काम बताये गए हैं .वह एक अरब के एक अनपढ़ व्यक्ति से बिलकुल मिलते हैं ,जकरिया नायक जैसे मुस्लिम प्रचारक कुछ भी कहें कि कुरान में अल्लाह को निराकार , सर्वव्यापी और सबकुछ जानने वाला ईश्वर बताया गया है .लेकिन यदि कुरान को निष्पक्ष होकर पढ़ें तो स्पष्ट हो जायेगा कि कोई साकार अरबी इन्सान था ,जो अल्लाह के भेस में लोगों से जिहाद और लूटमार करवाया करता था . और कुरान में अल्लाह के बारे में जो बातें लिखी गयी हैं वह भारत , यूनान , और यहूदी कहनियों से लेकर लिखी गयी है , जैसा खुद कुरान में कहा है ,
"यह तो पहले लोगों की कहानियां हैं 'सूरा -नहल 16:24
"और लोग कहते हैं कि यह कुरान तो पहले लोगों की कल्पित   कहानियां हैं ,जिसे तुमने ( मुहम्मद ने ) कुरान में शामिल कर लिया है "
 सूरा -अल फुरकान 25:5
अल्लाह के बारे में बाकी जितनी बातें कुरान में लिखी गयी हैं वह मुहम्मद साहब के दिमाग की उपज हैं ,.तभी मुल्ले कहते हैं कि ईमान के बारे में " अकल का दखल "नहीं होना चाहए .यहाँ पर संक्षिप्त में बताया जा रहा है कि मुसलमानों का अल्लाह कैसा है और क्या करता है ,और लोगों को क्या सिखाता है
1-अल्लाह के नाम से धोखा 
"जब मूसा एक मैदान के छोर पर दूर खड़ा था , तो उसे पुकारा गया " हे मूसा मैं ही अल्लाह हूँ 
" सूरा -अल कसस 28:30 
"इस से साफ़ पता चलता है कि किसी व्यक्ति ने मूसा को धोखा देने के लिए कहा होगा कि " मैं अल्लाह हूँ )
2-शरीरधारी अल्लाह 
दी गयीं कुरान की इन आयतों से सिद्ध होता है कि मुसलमानों का अल्लाह निराकार नहीं बल्कि साकार था , जिसके हाथ भी थे
"जब लोग बैयत ( Allegiance ) कर रहे थे अलह का हाथ उनके हाथों में था "सूरा -अल फतह 48:10 
"यहूदी कहते हैं कि अल्लाह का एक हाथ बंधा हुआ है ,लेकिन देख लो अल्लाह के दोनो हाथ खुले हिये हैं सूरा - मायदा 5:64 
3-अल्लाह का चेहरा 
"इस प्रथ्वी की हरेक चीज एक दिन मिट जाएगी .लेकिन सिर्फ अल्लाह का चेहरा बचा रहेगा 
"सूरा -रहमान 55:26-27 
( इस आयत में अरबी में "वज्हوجهُ " शब्द आया है ,जिसका अर्थ Face होता है )
4-अल्लाह की आदतें और शौक 
कुरान के अल्लाह की आदतें और शौक वही हैं ,जो एक अरबी बद्दू के होते हैं ,इनके नमूने देखिये
1.बात बात पर कसम खाना 
"कसम है रात की जब वह पूरी तरह से छा जाये "सूरा -अल लैल 92:1
"कसम है चढ़ते हुए सूरज की "सूरा -अश शम्श 91:1 
2.नफरत करना 
"अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है जो जो उसकी बातों पर राजी हो जाएँ "सूरा अल बय्यिना 98:8
"अल्लाह काफिरों से नफरत करता है "सूरा-रूम 30:45 
3.गुप्त बातें सुनने का शौकीन 
"जब लोग गुप्त बातें करते हैं तो अल्लाह चुपचाप सुनता रहता है .और तीन लोगों में ऐसा कोई नहीं होगा जिसमे चौथा अल्लाह नहीं हो और पांच लोगों में ऐसा कोई नहीं होगा जिसमे छठवां अल्लाह न हो "सूरा -मुजादिला 58:7 
5-अल्लाह के काम 
कुरान का अल्लाह जो काम करता है और अपने लोगों से करवाता है वही आजकल के हरेक आतंकवादी दल का नेता कर रहा है , जैसा की कुरान की इन आयतों से पता चलता है , जैसे
1.लोगों को घेरना 
"अल्लाह लोगों को चारों तरफ से घेर लेता है ,फिर उनकी गिनती भी कर लेता है "
सूरा -मरियम 19:94 
2.जिहादियों की परीक्षा 
"हम सभी जिहादियों की परीक्षा जरुर करते हैं ,ताकि वह ठीक तरह से जिहाद करें ,और हम उनके जिहाद के बारे में जान सकें "सूरा -मुहम्मद 47:31 
3-वसूली करना 
हमारे पास वसूली करने वाले हैं ,जो लोगों से दौनों तरफ से वसूली करते हैं .कुछ दायीं तरफ से वसूलते हैं और बायीं तरफ से वसूलते हैं .और बाक़ी लोग इस ताक में रहते हैं कि ( पकडे गए ) लोग के मुंह से कोई आवाज नहीं निकल सके "सूरा -काफ -50:17-18
6-अल्लाह डींगें 
प्रसिद्ध कहावत है कि गाड़ी के नीचे चलने वाला कुत्ता यही समझता है कि वह सारी गाडी का बोझ उठा रहा है , इसी तरह कुरान का अल्लाह भी कुरान में ऐसी ही शेखी बघार रहा है ,
"अल्लाह ने ही आकाश को धरती पर गिरने से रोक रखा है 'सूरा -अल हज्ज 22:65
( कुरान की यह आयत यूनानी कहानी से ली गयी है ,जिसमे एक यूनानी देवता टाइटन एटलस (Titan Atlas ) को आकाश उठाते हुए बताया गया है )
अल्लाह आकाश और धरती को रोके रहता है ,कि कहीं यह अपनी जगह से खिसक (deviate ) न जाएँ "सूरा -35:41
7-अल्लाह की मूर्खता 
मुसलमान दावा करते रहते हैं कि उनका अल्लाह सब जानता है , लेकिन इस आयत से उसकी मूर्खता साफ पता चलती है ,क्योंकि वह जन्नत को धरती के बराबर बता रहा है .इस जरा सी जन्नत में जिन्दा और मरे हुए सभी मुसलमान कैसे समां जायेंगे , कुरान में कहा है
जन्नत का विस्तार (Breadth ) इस धरती के विस्तार के बराबर है .और उन लोगों के लिए हैं ,जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लायेंगे " सूरा -अल हदीद 57:21
8-अल्लाह का तर्कहीन दावा 
अल्लाह ने एक और बेतुका दावा कर दिया कि वह मुर्दों को जिन्दा करेगा और उनसे हिसाब करेगा कि मरने से लेकर जिन्दा होनेतक उन्होंने क्या काम किये हैं , कुरान की इस आयत को देखिये
"हम पहले मुरदों को जिन्दा कर देंगे ,फिर उनके कर्मों का विवरण लिखते जायेंगे "
सूरा -यासीन 36:12
9-अल्लाह का सिंहासन 
अल्लाह ने बिना किसी सहारे के आकाश को ऊँचा किया ,फिर उस पर अपना सिंहासन जमा कर आराम से बैठ गया , जैसा तुम देखते हो "सूरा-रअद -13:2
हे नबी तुम देखोगे कि फरिश्ते चारों तरफ से घेरा बना कर अल्लाह का सिंहासन उठा कर खड़े हुए हैं "सूरा अज जुमुर 39:75 
( कुरान की यह आयत भारत की प्रसिद्ध कथा "सिंहासन बत्तीसी " से प्रभावित होकर लिखी गयी होगी )
निष्कर्ष -बताइए जिसके हाथ हों , जिसको उठाने के लिए कई लोग चाहिए ,जो लोगों से जबरन धन वसूल करता हो वह ईश्वर कैसे हो सकता है ?इन सभी उदाहरणों को देख कर कोई भी व्यक्ति आसानी से समझ सकता है कि अल्लाह ईश्वर नहीं हो सकता . बल्कि कोई मनुष्य अल्लाह के भेस में लूटमार करके राज करना चाहता था .और उसको यह भी पता था कि मरने के बाद सिर्फ उसकी तस्वीर ही बाकि रह जायेगी .जैसे रोमन सम्राटों के सिक्कों पर उनकी तस्वीर आज तक मौजूद है .
"ईश्वर अल्लाह तेरा नाम " कहने वाले अज्ञानी हैं !

http://www.answering-islam.org/Authors/Fisher/Topical/ch13.htm

11 टिप्‍पणियां:

  1. !!!.......फेयर एंड लवली की महिमा जरुर रीड करे ........!!!!

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    •फेयर एंड लवली
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    •क्वालिटी वाल्स आइसक्रीम
    आदि आदि इत्यादि

    इन ब्रांडों उत्पादों का भारत में जमकर इस्तेमाल होता है। मैं तो उस वक्त दंग रह गया जब देखा कि हमारे द्वारा रोजमर्रा के उपयोग किये जाने वाले ज्यादातर उत्पाद यूनिलीवर के हैं। यानि कि हमारी जेबों से इतनी भारी मात्रा में धन केवल एक कंपनी विदेश ले जा रही है। तो बाकी का मिलाकर क्या होगा?

    एक दिन मैंने किराने की दुकान वाले से देशी विदेशी सामानों के बारे में पूछा तो उसने कहा कि यदि देशी विदेशी देखोगे तो कुछ खा नही पाओगे। यानि कि ज्यादातर उत्पाद विदेशी कंपनियों के हैं। आप यूनिलीवर के उत्पादों से ही अंदाजा लगा सकते हैं। बाजार पटा पड़ा है विदेशी कंपनियों के उत्पादों से।

    अब भई ब्रिटेन की कंपनी है तो वो तो बोलेगी ही कि जो लोग गोरे नही होते उनकी कोई हैसियत नही होती।

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  2. logon ko dekhna chahiye ki sahi kya hai aur galat kya.

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  3. आपने सिद्ध कर दिया है कि अल्लाह आतंकवादियों का सरगना है।

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  4. abey gaaandooo tujhe apne dharm ke baare main kuchhh pataa hai kyaa jo doosre dharmo ki buraai kartaaa hai jaantaa hai indra ko usha ka rape kiya ,bramha teri maa sarasvati ka rape kiya pehle apne dharm ke baare main jaankaari le

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  5. tumhari mata ko raavan utha kar le gaya or tumhara bhagvaan raam use to pataa hi nai tha ki raavan ne sita ke saath rape to nahi kiya is liye us ki agni pariksha li kaisa bhagvaan hai jo naapni biwi ki suraksa kar paye na us ki aabroo ki

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  6. or tumhar krishna to pakka raandbaaz tha nahaa rahi ladkiyon ke kapde le ke bhaag jaata tha shadi ki rukmani se or rakhel banaya radha ko maaadarchodo aise bhagvaan hote hain jo laundiyaabaazi karte phire

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  7. PART 1
    क्या ईश्वर अवतार लेता है?


    आज इस धरती पर कुछ लोग अवतार की कल्पना रखते हैं। यह कल्पना क्यों आई ? उसकी वास्तविकता क्या है? अवतार का सही अर्थ क्या होता है? इस्लाम इस सम्बन्ध में क्या कहता है? इस लेख में हम इन्हीं विंदुओं पर बात करेंगे।

    प्रिय मित्रो! आज ईश्वर का नाम अवश्य लेते हैं, उसकी पूजा भी करते हैं, परन्तु बड़े खेद की बात है कि उसे पहचानते बहुत कम लोग हैं। जी हाँ! ईश्वर की अज्ञानता के फलस्वरूप ही हम ईश्वर के नाम पर परस्पर झगड़ रहे हैं। वास्तव में यदि हम ईश्वर का सही ज्ञान प्राप्त कर लें तो हम सब एक हो जाएं। तो आइए! हम धार्मिक ग्रन्थों द्वारा अपने ईश्वर का सही ज्ञान प्राप्त करते हैं।

    ईश्वर कौनः ईश्वर अकेला सृष्टा, पालनहार, और शासक है। उसी ने पृथ्वी, आकाश, चंद्रमा, सूर्य, सितारे, मनुष्यों और प्रत्येक जीव जन्तुओं को पैदा किया, न उसे पाने पीने तथा सोने की आवश्यकता पड़ती है, न उसके पास वंश है, और न उसका कोई भागीदार है। उसी ईश्वर को हम यहोवा, गोड और अल्लाह कहते हैं। पवित्र ग्रन्थ क़ुरआन ईश्वर का इस प्रकार परिचय कराता हैः कहो! वह अल्लाह है, यकता है, अल्लाह सब से निरपेक्ष है, और सब उसके मुहताज हैं, न उसकी कोई संतान है, और न वह किसी की संतान, और कोई उसका समक्षक नहीं है। सूरः न0 112

    इस सूरः में ईश्वर के पाँच मूल गुण बताए गए हैं

    (1) ईश्वर केवल एक है (2) उसको किसी की आवश्यकता नहीं पड़ती (3) उसकी कोई संतान नहीं (4) उसके पास माता पिता नहीं (5) उसका कोई भागीदार नही

    और हिन्दु वेदान्त का ब्रहमसुत्र यह है- "एकम ब्रहम द्वीतीय नास्तेः नहे ता नास्ते किंचन।"

    ईश्वर एक ही है दूसरा नहीं है, नही है, तनिक भी नहीं है। और अर्थवेद (9/40) में है- "जो लोग झूठे अस्तित्व वाले देवी देवताओं की पूजा करते हैं वे (अंधा कर देने वाले) गहरे अंधकार में डूब जाते हैं। वह एक ही अच्छी पूजा करने योग्य है।"

    अब प्रश्न यह है कि क्या ईश्वर अवतार लेता है?

    बड़े दुख की बात है कि जिस ईश्वर का अभी परिचय कराया गया अवतार की आस्था उसका बटवारा कर दिया। अभी आपने पढ़ा कि ईश्वर का कोई भागीदार नहीं, न इसको किसी चीज़ की ज़रूरत पड़ती है तो आखिर उसे मानव रूप धारण करने की क्या ज़रूरत पड़ी। वास्तव में ईश्वर ने मानव का रूप कदापि नहीं लिया। ज़रा श्रीमद्-भागवतगीता (7/24) को उठा कर देखिए कैसे ऐसी आस्था रखने वालों को बुद्धिहीन की संज्ञा दी हैः

    अव्यक्तं व्यक्तिमापन्नं मन्यन्ते मामबुद्धयः परं भावमजानन्तो ममाव्ययमनुत्तमम।।24।।

    "मैं अविनाशी, सर्वश्रेष्ठ औऱ सर्वशक्तिमान हूं। अपनी शक्ति से सम्पूर्ण संसार को चला रहा हूं, बुद्धिहीन लोग मुझे न जानने के कारण मनुष्य के समान शरीर धारण करने वाला मानते हैं।"

    और ऋग्वेद के टीकाकार आशोराम आर्य ऋग्वेद के मंडल1 सुक्त7 मंत्र 10 पर टीका करते हुए कहते हैं- "जो मनुष्य अनेक ईश्वर अथवा उसके अवतार मानता है वह सब से बड़ा मुर्ख है।"

    और यजुर्वेद 32/3 में इस प्रकार हैः न तस्य प्रतिमा अस्ति यस्य नाम महदयश।

    "जिस प्रभु का बड़ा प्रसिद्ध यश है उसकी कोई प्रतिमा नहीं है।"
    SUNNIKING TEAM
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  8. PART 2

    प्रिय मित्र! इन व्याख्याओं से क्या सिद्ध नहीं होता कि ईश्वर मानव रूप धारण नहीं करता। अब ज़रा धार्मिक पक्षपात से अलग होकर स्वयं सोचें कि क्या ऐसे महान ईश्वर के सम्बन्ध में यह कल्पना की जा सकती है कि जब वह इनसानों के मार्ग दर्शन का संकल्प करे तो स्वयं ही अपने बनाए हुए किसी इनसान का वीर्य बन जाए, अपनी ही बनाई हुई किसी महिला के गर्भाशय की अंधेरी कोठरी में प्रवेश हो कर 9 महीना तक वहां क़ैद रहे और उत्पत्ति के विभिन्न चरणों से गुग़रता रहे, खून और गोश्त में मिल कर पलता बढ़ता रहे, बाल्यावस्था से किशोरावस्था को पहुंचे, ज़रा दिल पर हाथ रख के मन से पूछें कि क्या यह कल्पना ईश्वर की महिमा को तुच्छ सिद्ध नहीं सिद्ध करती। इस से उसके ईश्वरत्व में बट्टा न लगेगा?

    ईश्वर मनुष्य कभी नहीं बन सकता क्योंकि ईश्वर तथा मनुष्य के गुण भिन्न भिन्न हैं।

    यदी कोई कहे कि ईश्वर तो सर्वशक्तिमान है वह क्यों न मनुष्य का रूप धारण करे? तो इसका उत्तर यह है कि ऐसा कहना ईश्वर की महीमा को तुच्छ सिद्ध करना है। जो ईश्वर सम्पूर्ण संसार का सृष्टिकर्ता, स्वामी और शासक है, उसके समबन्ध में ऐसी कल्पना भी नहीं की जा सकती कि वह मानव का मार्गदर्शन करना चाहे तो मानव रूप धारण कर ले।

    मानव मार्गदर्शन कैसे? ईश्वर ने सर्वप्रथम विश्व के एक छोटे से कोने धरती पर मानव का एक जोड़ा पैदा किया जिनको आदम तथा हव्वा के नाम से जाना जाता है। उन्हीं दोनों पति- पत्नी से मनुष्य की उत्पत्ति का आरम्भ हुआ कुछ लोग एडम और ईव जिनका विस्तार पूर्वक उल्लेख पवित्र ग्रन्थ क़ुरआन(230-38) तथा बाइबल उत्पत्ति (2/6-25) और दूसरे अनेक ग्रन्थों में किया गया है।

    जिस प्रकार एक कम्पनी कोई सामान बनाती है तो उसके प्रयोग करने का नियम भी बताती है इसी नियम के अंतर्गत ईश्वर ने जब मानव को पैदा किया तो उसका मार्ग-दर्शन भी किया ताकि मानव अपनी उत्पत्ति के उद्देश्य से अवगत रहे। ईश्वर ने मानव की रचना की तो उसकी प्रकृति में पूजा की भावना भी डाल दी, इसी प्राकृतिक नियम के अंतर्गत उसकी चेतना में पूजा की कल्पना पैदा होती है। इसके लिए मार्गदर्शन की आवश्यकता थी। अब प्रश्न यह है कि ईश्वर ने मार्गदर्शन किया तो कैसे? इसके लिए सब से पहले हम अवतार का सही परिभाषा बता देना चाहेंगे ताकि सत्य खुल कर सामने आ सके।

    अवतार का सही अर्थः तो लीजिए सर्वप्रथम अवतार का सही अर्थ जानिएः

    श्री राम शर्मा जी कल्किपुराण के 278 पृष्ठ पर अवतार की परिभाषा यूं करते हैं- " समाज की गिरी हुई दशा में उन्नति की ओर ले जाने वाला महामानव नेता।"

    अर्थात् मानव में से महान नेता जिनको ईश्वर मानव मार्गदर्शन हेतु चुनता है। उसी प्रकार डा0 एम0 ए0 श्री वास्तव अपनी पुस्तक हज़रत मुहम्मद और भारतीय धर्म ग्रन्थ पृष्ठ 5 में लिखते हैं- " अवतार का अर्थ यह कदापि नहीं है कि ईश्वर स्वयं धरती पर सशरीर आता है, बल्कि सच्चाई यह है कि वह अपने पैग़म्बर और अवतार भेजता है। "

    ज्ञात यह हुआ कि ईश्वर की ओर से ईश-ज्ञान लाने वाला मनुष्य ही होता है जिसे संस्कृत में अवतार, अंग्रेज़ी में प्राफ़ेट और अरबी में रसूल (संदेष्टा) कहते हैं।

    इस्लामी दृष्टिकोणः ईश्वर ने मानव मार्गदर्शन हेतु हर देश और हर युग में अनुमानतः 1,24000 अवतारों को भेजा। क़ुरआन उन्हें धर्म प्रचारक, रसूल, नबी अथवा पैग़म्बर कहता है। उन सारे संदेष्टाओं का संदेश यही रहा कि एक ईश्वर की पूजा की जाए तथा किसी अन्य की पूजा से बचा जाए। वह सामान्य मनुष्य में से होते थे, पर उच्च वंश तथा ऊंचे आचरण के होते थे, उनकी जीवनी पवित्र तथा शुद्ध होती थी। उनके पास ईश्वर का संदेश आकाशीय दुतों (angels) द्वारा आता था। तथा उनको प्रमाण के रूप में चमत्कारियाँ भी दी जाती थीं ताकि लोगों को उनकी बात पर विश्वास हो। जैसे ईसा (ईश्वर की उन पर शान्ति हो) एक संदेष्टा गुजरे हैं जो पैदाइशी अंधे की आँख पर हाथ फेरते तो ईश्वर की अनुमति से उसकी आँख ठीक हो जाती थी, मृतकों के शरीर पर हाथ रख देते तो ईश्वर की अनुमति से वह जीवित हो जाते थे। मूसा (ईश्वर की उन पर शान्ति हो) एक संदेष्टा गुज़रे हैं जो लाठी फेंकते तो सांप का रूप धारण कर तेली थी, समुद्र में लाठी मारी तो बीच समुद्र के बीच रास्ते बन गए।

    लोग विभिन्न धर्मों में कैसे बटे? जब इनसानों ने उनमें यह असाधारण गुण देख कर उन पर श्रृद्धा भरी नज़र डाला तो किसी समूह नें उन्हें भगवान बना लिया, किसी ने अवतार का सिद्धांत गढ़ लिया, जब कि किसी ने समझ लिया कि वह ईश्वर के पुत्र हैं हालांकि उन्होंने उसी के खण्डन और विरोध में अपना पूरा जीवन बिताया था।
    SUNNIKING TEAM
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  9. PART 3

    अन्तिम संदेशः इस प्रकार हर युग में संदेष्टा आते रहे और लोग अपने सवार्थ के लिए इनकी शिक्षाओं में परिवर्तन करते रहे। ईश्वर जो सम्पूर्ण संसार का स्वामी था उसकी इच्छा तो यह थी कि सारे मनुष्य के लिए एक ही संविधान हो, सारे लोगों को एक ईश्वर, एक संदेष्टा, तथा एक ग्रन्थ पर एकत्र कर दिया जाए परन्तु आरम्भ में ऐसा करना कठिन था क्योंकि लोग अलग अलग जातियों में बटे हुए थे, उनकी भाषायें अलग अलग थीं, एक दूसरे से मेल-मिलाप नहीं था, एक देश का दूसरे देश से सम्पर्क भी नहीं था। यातायात के साधन भी नहीं थे, और मानव बुद्धि भी सीमित थी। यहाँ तक कि जब सातवीं शताब्दी ईसवी में सामाजिक, भौतिक और सांसकृतिक उन्नति ने सम्पूर्ण जगत को इकाई बना दिया तो ईश्वर ने हर देश में अलग अलग संदेष्टा भेजने का क्रम बन्द करते हुए संसार के मध्य अरब के शहर मक्का में महामान्य हज़रत मुहम्मद (ईश्वर की उन पर शान्ति हो) को संदेष्टा बनाया और उन पर ईश्वरीय संविधान के रूप में क़ुरआन का अवतरण किया। वह जगत गरू बनने वाले थे, अवतारों संसार के कल्याण के लिए आने वाले थे इसी लिए उनके आने की भविष्यवाणी प्रत्येक धार्मिक ग्रन्थों ने की थी, वही नराशंस तथा कल्कि अवतार हैं जिनकी आज हिन्दू समाज में प्रतीक्षा हो रही है। उनको किसी जाति तथा वंश के लिए नहीं बल्कि सम्पूर्ण संसार के लिए भेजा गया।

    इन व्याख्याओं से यह सिद्ध हो गया कि ईश्वर ने कभी अवतार नहीं लिया बल्कि उसने मानव में से संदेष्टाओं द्वारा मानव का मार्गदर्शन किया परन्तु मानव नें उनके चमत्कारों से प्रभावित हो कर उन्हीं को ईश्वर का रूप दे लिया और "ऊपर वाले ईश्वर" को भूल कर उन्हीं की पूजा करने लगे। इस प्रकार मानव के नाम से अलग अलग धर्म बन गया। हालाँकि ईश्वर का अवतरित किया हुआ धर्म शुरू से एक ही रहा और आज तक एक ही है। उसी को हम "इस्लाम" कहते हैं। आज आवश्यतका है इसी सत्य को जानने की । हम सब पर ईश्वर की दया हो।

    इश्वर ने मानव के मार्गदर्शन हेतु ही संदेष्टाओं को भेजा पर मानव ने उन पर अत्याचार किया और उन्हें ही ईश्वर मान लिया यदि ऐसा न हुआ होता तो सारे मानव का धर्म एक होता.
    SUNNIKING TEAM INDIA (MOHSIN NOORI)

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  10. Is soowar ko kya pta ise apni maa ka ni pta hoga or dusro k baare m btane baitha h shaitan nitthhalla isi trh baithe baithe lugaiyyo ki trh ism burai nikal usmai burai nikal kr pese kamata hoga ....chhichhora

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