शनिवार, 1 दिसंबर 2012

खतना कराना शैतान की चाल है !


वैसे तो सभी मुसलमान मानते हैंकि इंसान को अल्लाह ने बनाया है.और उसका अकार,रूप संतुलित और ठीकठाक बनाया है .उसे किसी तरह की कमी नहीं रखी.और यह भी दावा करते हैं कि अल्लाह ने कुरआन में सारी बातें खोल खोल कर साफ़ बता दी हैं.लेकिन जब उनसे खतना के बारे में पूछा जाता है ,तो वे बेकार के बहाने करने लगते हैं.एक व्यक्ति ने जब इसके बारे में सवाल किया तो इम्पेक्ट उर्फ़ सलीम ने कहा कि अप फल को छीलकर क्यों खाते हैं.हमने कहा अगर अल्लाह को छिला हुआ फल पसंद है तो फल का नाम भी बता देते ?लेकिन मेरा मुसलमानों से सवाल है कि वे एक भी आयत बताएं जिसमे खतना का हुक्म हो .या वे बता दें कि मुहम्मद ने कब खतना कराई थी ?.,इसकी कोई हदीस बता दें?
 अब हम मुख्य विषय पर आते हैं कि यह अल्लाह का हुक्म नहीं !!

1 -अल्लाह ने इंसान को उचित रूप में बनाया 
"हमने तुम्हें बनाया तो ,ठीक अनुपात और आकार में बनाया और इस प्रकार की रचना बनाई जैसी होना चाहिए .सूरा अल इनफितार 82 :7 -8 
"तुम क्यों नहीं मानते कि हमने ही तुम्हें पैदा किया और तुम्हारा आकार देने वाले हम हैं ,या तुम आकार देने वाले हो .सूरा अल वाकिया -56 :57 
"हमने तुम्हारा अकार बनाया और अच्छा आकार बनाया .सूरा अल मोमिनीन -40 :64 
"अल्लाह ने जो भी चीज बनाई व्यर्थ नहीं बनाई .सुरा आले इमरान -3 :191 
"हमने इन्सान को अच्छे से अच्छी स्थिति में बनाया .सूरा अत तीन -95 :3 

2 -अल्लाह के दिए आकार को बदलना शैतान की चाल है -

"शैतान ने अल्लाह से कहा ,मैं तेरे बन्दों को बहकाऊँगा ,उनको वासना के मायाजाल में फंसऊँगा ,फिर वे अपने चौपायों के कान फडवाएंगे और अलाह की रचना में बदलाव करेंगे ,और पशुओं को देवताओं के नाम छोड़ देंगे ,ऐसा करने वाले शैतान के मित्र हैं "सूरा अन निसा -4 :119 

इस आयत की तफ़सीर में "अल्लाह की रचना "में बदलाव का उदहारण दिया गया है जैसे -नसबंदी करना .किसी को बाँझ करना ,परिवार नियोजन करना ,आजीवन ब्रह्मचारी रहना ,और किसी को हिजड़ा बनाना है .इसी आयत कि बदौलत मुसलमान परिवार नियोजन नहीं करते हैं .इसे गुनाह मानते है .

3 -खतना कराना यहूदिओं की नक़ल है -

वैसे तो मुसलमान यहूदिओं को रोज गालियाँ देते हैं .लेकिन उनकी नक़ल करके छोटे छोटे बच्चों की खतना कर देते है .जब वह नादान होते है .कुरआन में ऐसा कोई आदेश नहीं है ,यह बाईबिल का आदेश है -
" खुदा ने कहा तू और तेरे बाद तेरे वंशज पीढी दर पीढी हरेक बच्चे का खतना कराये,और उनके लिंग की खलाड़ी काट दे   जो तेरे   में पैदा हो या जिसे मोल से खरीदा हो सबका खतना कर 
"बाइबिल -उत्पत्ति अध्याय -17 :9 से 14 

 4 -मूसा और उसके पुत्रों का खतना नहीं हुआ 

" मिस्र निकालने बाद जितने लोग पैदा हुए किसी का खतना नहीं हुआ -यहोशु-5 :5 
"अपना नहीं बल्कि अपने ह्रदय का खतना करो "बाइबिल व्यवस्था -10 :16 

यहाँ तक तो लड़कों के खतना की बात है .लेकिन मुहम्मद ने अल्लाह से आगे बढ़ कर औरतों के खतना का हुक्म दे डाला

5 -औरतों का खतना -female genital mutilation 

यह मुहमद के दिमाग की खुराफात है .इसका कुरान में कोई जिक्र नहीं है चूँकि यहूदी लड़कों का खतना करते थे मुहम्मद उसका उलटा करा चाहता था .उसे यहूदिओं से नफ़रत थी .उसने कहा -
"रसूल ने कहा कि काफिर और यहूदी जैसा करते हैं ,उम उसका उलटा करो .
बुखारी -जिल्द 7 किताब 72 हदीस 780 

एक दिन मदीना में उम्मे अत्तिया लड़किओं की खतना करने जा रही थी ,मुहम्मद ने उस से कहा कि लड़की की योनी को गहराई से मत छीलो .ऐसा न हो कि वह उसके पति को अच्छी न लगे -अबू दाऊद-किताब 41 हदीस 5149 ,5151 और 5152 

"रसूल ने कहा कि लड़किओं की सिर्फ भगनासा clitoris और आस पास के भागोस्ष्ठ छील दो बुखारी जिल्द 7 किताब 72 हदीस 779 

6 -महिला खतना में क्या होता है 

भगनासा को बिलकुल निकाल देना -removal clitoris भगोष्ठ को छील देना या काट देना trimming of labia majora .और cutting 

महिला खतना अरब में अधिक है .लेकिन भारत के मुसलमान भी अपनी औरतो की खतना इस लिए करा देते है कि उनकी औरतें किसी गैर मुस्लिम के साथ न भाग जाए ,क्योंकि सिर्फ मुस्लिम ही ऎसी बर्बाद और बिद्रूप औरत को रख सकता है.
( नोट -यह लेख भंडाफोडू ब्लॉग में 30 अगस्त 2010 को प्रकाशित हुआ था . जिसमे हमने जब सलीम नामके जकरिया समर्थक से खतना के बारे में कुरान का आदेश पूछा था तो उसे सांप सूँघ गया था ,इसलिए यह लेख फिर से प्रकाशित किया है . ताकि लोग मुल्लों की असलियत समझ सकें .और जो लोग कुरान के आदेश के बिना खतना करते हैं उन्हें काफिर क्यों नहीं माना जाये )

http://sheikyermami.com/2009/09/30/are-you-a-sponsor-of-female-genital-mutilation/

27 टिप्‍पणियां:

  1. नाथूराम गोडसे का गाँधी-वध के कारण *


    गाँधी-वध के मुकद्दमें के दौरान न्यायमूर्ति खोसला से नाथूराम ने अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर सुनाने की अनुमति माँगी थी और उसे यह अनुमति मिली थी। नाथूराम गोडसे का यह न्यायालयीन वक्तव्य भारत सरकार द्वारा प्रतिबन्धित कर दिया गया था। इस प्रतिबन्ध के विरुद्ध नाथूराम गोडसे के भाई तथा गाँधी-वध के सह-अभियुक्त गोपाल गोडसे ने ६० वर्षों तक वैधानिक लडाई लड़ी और उसके फलस्वरू
    प सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रतिबन्ध को हटा लिया तथा उस वक्तव्य के प्रकाशन की अनुमति दी। नाथूराम गोडसे ने न्यायालय के समक्ष गाँधी-वध के जो १५० कारण बताये थे उनमें से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं: -

    1. अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड (१९१९) से समस्त देशवासी आक्रोश में थे तथा चाहते थे कि इस नरसंहार के नायक जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाये। गाँधी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से स्पष्ठ मना कर दिया।

    2. भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्युदण्ड के निर्णय से सारा देश क्षुब्ध था व गाँधी की ओर देख रहा था, कि वह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु से बचायें, किन्तु गाँधी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए जनसामान्य की इस माँग को अस्वीकार कर दिया।

    3. ६ मई १९४६ को समाजवादी कार्यकर्ताओं को दिये गये अपने सम्बोधन में गाँधी ने मुस्लिम लीग की हिंसा के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी।

    4. मोहम्मद अली जिन्ना आदि राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा करते हुए १९२१ में गाँधी ने खिलाफ़त आन्दोलन को समर्थन देने की घोषणा की। तो भी केरल के मोपला मुसलमानों द्वारा वहाँ के हिन्दुओं की मारकाट की जिसमें लगभग १५०० हिन्दू मारे गये व २००० से अधिक को मुसलमान बना लिया गया। गाँधी ने इस हिंसा का विरोध नहीं किया, वरन् खुदा के बहादुर बन्दों की बहादुरी के रूप में वर्णन किया।

    5. १९२६ में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि आन्दोलन में लगे स्वामी श्रद्धानन्द की अब्दुल रशीद नामक मुस्लिम युवक ने हत्या कर दी, इसकी प्रतिक्रियास्वरूप गाँधी ने अब्दुल रशीद को अपना भाई कह कर उसके इस कृत्य को उचित ठहराया व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गल राष्ट्र-विरोधी तथा हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिये अहितकारी घोषित किया।

    6. गाँधी ने अनेक अवसरों पर शिवाजी, महाराणा प्रताप व गुरू गोबिन्द सिंह को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा।

    7. गाँधी ने जहाँ एक ओर कश्मीर के हिन्दू राजा हरि सिंह को कश्मीर मुस्लिम बहुल होने से शासन छोड़ने व काशी जाकर प्रायश्चित करने का परामर्श दिया, वहीं दूसरी ओर हैदराबाद के निज़ाम के शासन का हिन्दू बहुल हैदराबाद में समर्थन किया।

    8. यह गाँधी ही थे जिन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को कायदे-आज़म की उपाधि दी।

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  2. 9. कांग्रेस के ध्वज निर्धारण के लिये बनी समिति (१९३१) ने सर्वसम्मति से चरखा अंकित भगवा वस्त्र पर निर्णय लिया किन्तु गाँधी की जिद के कारण उसे तिरंगा कर दिया गया।

    10. कांग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को बहुमत से कॉंग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गाँधी पट्टाभि सीतारमय्या का समर्थन कर रहे थे, अत: सुभाष बाबू ने निरन्तर विरोध व असहयोग के कारण प�� त्याग दिया।

    11. लाहौर कांग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से चुनाव सम्पन्न हुआ किन्तु गाँधी की जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया।

    12. १४-१५ १९४७ जून को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था, किन्तु गाँधी ने वहाँ पहुँच कर प्रस्ताव का समर्थन करवाया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा।

    13. जवाहरलाल की अध्यक्षता में मन्त्रीमण्डल ने सोमनाथ मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया, किन्तु गाँधी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य भी नहीं थे; ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त करवाया और १३ जनवरी १९४८ को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला।

    14. पाकिस्तान से आये विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली तो गाँधी ने उन उजड़े हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध, स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर किया गया।

    15. २२ अक्तूबर १९४७ को पाकिस्तान ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया, उससे पूर्व माउण्टबैटन ने भारत सरकार से पाकिस्तान सरकार को ५५ करोड़ रुपये की राशि देने का परामर्श दिया था। केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल ने आक्रमण के दृष्टिगत यह राशि देने को टालने का निर्णय लिया किन्तु गाँधी ने उसी समय यह राशि तुरन्त दिलवाने के लिए आमरण अनशन शुरू कर दिया जिसके परिणामस्वरूप यह राशि पाकिस्तान को भारत के हितों के विपरीत दे दी गयी।

    16. जिन्ना की मांग थी कि पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने में बहुत समय लगता है और हवाई जहाज से जाने की सभी की औकात नहीं| तो हमको बिलकुल बीच भारत से एक कोरिडोर बना कर दिया जाए.... जो लाहौर से ढाका जाता हो, दिल्ली के पास से जाता हो..... जिसकी चौड़ाई कम से कम १६ किलोमीटर हो....४. १० मील के दोनों और सिर्फ मुस्लिम बस्तियां ही बने |

    साभार http://sachchasandesh.blogspot.in/2012/06/blog-post_16.html
    — with Rajesh Gupta.

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    1. abe..Yaha Khatna ki baat horahi hai.. Aur tu Nathuram ki baat kaha se Ghused raha hai???
      Pagal.. Mohammed ki baat gand jala deti hai na???

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  3. muhammad ke kisi sambandhi abubakar bada hi ayiyas tha ek bar uski patni ne use dekha aur chaku lekar duadi wah gir gaya lungi khul gayi usne unki ling katne ka prayas kiya turant muhammad sahab ne kaha ki ab sabko khatna karana padega.

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    1. Bhai, Ye sala Abu Bakr Yaar baaz hone ke saath saath bada hi Nich kisam ka log tha.. Wo Mohammed ka dost tha(sirf 2 saal chota). Jisne apna 6 saal ki beti ke saath Mohammed(53) ki Nikah karadi thi..

      Saala Beti ko Bech diya BUDHE Mohammed ko..
      Islam main Dost Sasur bansakta hai..

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    2. abe mohammad (PUBH)ne jo bhi kiya shadi ke bad kiya , tum logo ki tarah doosro ki betiyo ko pakad kar nahi,,samjhe.

      Fir Abu Bakr(RH)ne apni beti ki shadi kii, tumko kyu dard ho raha hai......tum thekedar ho muslmano ke

      shadi ko register paper par sabse pahle islam me hee kiya hai. tum log to aaj tak bhi likhit me kuch nahi karte,,,,,,,,,,bas fere le liye or ho gaya kam,,,,,,,,,,,

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    3. arey Mr. nazim tum log likhit me nikah karte ho, or talak juwan se hi kar lete ho. or hindu log sadi ko upar wale ki marji samjte hai, or sadi ko sat janmo ka sat mante hai. mullo ki tarah nhi. talak talak talak kiya or ho gya kam.

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  4. mushlim samudai ka sara kam kuchh rahasyamay sa lagata hai . ye sab kuran se bhi jada janane wale hai . inme jitani kuritiyan hain utani kisi bhi dharm me nahin payi jati

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  5. iska matlab desh ka beda gark karne me gandhi ne koi kasar nhi rakhi,

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  6. musalmano me aurat ko sirf sex ka saadhan aur bachcha paida krne ki machine mana jata h hamare yaha aurat ko devi ka darza diya jata hai...

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    1. ISLAM ME AURTO KO BACHHE PEDA KARNE WALI MASIN SAMJHA JATA HE. EXAMP. ME MUMTAZ KO HI DEKH LO 18 BACHHE PEDA KARNE K BAAD KON AURAT ZINDA RAH SAKTI HE ?

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  7. aur agar aurat chahe to kali ka rup lekar shiva ke uper pair bhi rakh sakti hai

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  8. PART 1
    मुसलमान

    मुसलमान के अमल :
    १.मुसलमान के लिये वाजिब है की जितना हो सके इल्म (ज्ञान) हासिल करे!

    २.जादू, ज्योतिष एवं देव स्थान पर न जाये :
    जादू करना इस्लाम धर्म में हराम है, अतः जादू करने वाले शख्स को इस्लाम स्वीकार नहीं करता!
    ज्योतिष एवं भविष्य फल देखना हराम करार दिया गया, ज्योतिष एवं भविष्यवाणी करना इस्लाम धर्म में हराम करार दिया गया!
    ईश्वर ने मानव मार्गदर्शन हेतु हर देश और हर युग में संदेष्टाओं को भेजा तो उन्हें चमत्कारियाँ भी दी ताकि लोग उनके ईश-दुतत्व पर भलिभांति विश्वास कर लें।

    उदाहरण स्वरूपः

    (1) एक संदेष्टा इब्राहीम अलै0 हैं जिनको दहकती हुई आग में डाल दिया गया परन्तु आग उनके लिए अल्लाह की अनुमति से शांन्तिपूर्ण रूप में ठंडी हो गई।

    (2) जब फिरौन ने शैतानी (देवीय) शक्ति के गुमान में शैतानी ताकत द्वारा दो सांप बना दिए थे तब, हज़रत मूसा अलै0 लाठी फैंकी थी तो उनकी लाठी ने साँप का रूप धारण कर लिया और फिरौन के दोनो साँपों को निगल लिया और जब समुद्र में लाठी मारी तो समुद्र के दोनो ओर का पानी रूक कर मध्य से रास्ता बन गया।

    (3) ईसा अलै0 अल्लाह की अनुमति से मृतकों को जीवित कर देते थे और पैदाइशी अंधे की आँखों पर हाथ फेर देते तो उसकी आँख में रोशनी आ जाती थी।

    (४) उसी प्रकार मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम के एक संकेत पर चाँद दो टूकड़े हो गए। हुआ यूं कि एक बार मक्का के सरदारों ने मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम के पैगम्बर होने का प्रमाण माँगा औऱ कहा कि यदि तूने चाँद को दो टूकड़े कर दिया तो हम तुझे दूत मान लेंगे। जब आपने चाँद की ओर ऊंगली उठाई तो आपके संकेत से चाँद दो टुकड़े हो गए। इस घटना को क़ुरआन ने यूं बयान किया हैः "वह घड़ी निकट आ गई और चाँद फट गया"।(सूरः अल क़मर54-1)

    अल्लाह ने अन्तिम संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम को भी विभिन्न चमत्कारियाँ दीं जिन में एक महत्वपूर्ण चमत्कार कुरआन है जो अपने अवतरण-काल से ले कर आज तक सम्पूर्ण मानव जाति के लिए चुनौति है।

    क़ुरआन ईश्वर की ओर से अवतरित सम्पूर्ण मानव के लिए एक उत्तम उपहार और रहती दुनिया तक के लिए एक महान चमत्कार है। क़ुरआन स्वयं घोषणा करता हैः "आप कह दीजिए कि यदि प्रत्येक मानव तथा सारे जिन्नात मिल कर इस क़ुरआन के समान लाना चाहें तो उन सब के लिए इसके समान लाना असम्भव है। वह (परस्पर) एक दूसरे के सहायक भी बन जाएं।" (सूरः बनी इस्राईल 17 आयत 88)

    क़ुरआन उस अल्लाह की वाणी है जो संसार का उत्पत्तिकर्ता, शासक और ज्ञानी है। जो लोगों के वर्तमान अतीत और भविष्य का जानने वाला है। क़रआन का चमत्कार रहती दुनिया तक बाक़ी रहेगा।

    प्रतिदिन नवीन शौध के आधार पर क़ुरआन से सम्बन्धित अदभूत प्रकार की चमत्कारियाँ हमारे समक्ष प्रकट हो रही हैं। उन चमत्कारियों में से एक कुरआन के शब्दों में संख्यात्मक समानताओं का पाया जाना है जो स्पष्ट प्रमाण हैं कि कुरआन पृथ्वी व आकाश के सृष्टिक्रता की ओर से अवतरित किया हुआ महान ग्रन्थ है।

    क़ुरआनी शब्दों में समानताओं और चमत्कारियों का पाया जाना वास्तव में बड़ा आश्चर्यजनक विषय है। मुसलमान विद्वानों ने नवीनतम सांख्यिकीय उपकरण और कंप्यूटर के माध्यम से आज के आधुनिक युग में इस गणितीय चमत्कार को मानव के सामने पेश किया है।
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  9. PART 2.

    यह चमत्कार संख्या पर आधारित है और आँकड़े स्वयं बताते हैं जिसे न चर्चा का विषय बनाया जा सकता है और न ही इसका इनकार किया जा सकता है। अल्लाह ने चाहा कि शब्दों का यह चमत्कार आज के युग में उदित हो ताकि प्रगतिशिल लोगों के लिए क़ुरआन विश्वास का आधार बने। क़ुरआन कहता हैः " हम अवश्य उन्हें अपनी निशानियाँ धरती व आकाश में देखाएंगे और स्वयं उनकी अपनी ज़ात में भी यहाँ तक कि उन पर खुल जाए कि सत्य यही है।" ( हा मीम सज्दा 41 आयत 53)

    तो लीजिए यह हैं कुछ क़ुरआन के संख्यात्मक आंकड़ेः

    क़ुरआन में कुछ शब्द ऐसे हैं जो अपने समान शब्द अथवा अपने से विलोम शब्द के साथ दोहराए गए हैं उदाहरण के लिए देखिएः

    हयात (जीवन) 145 बार दोहराया गया है .......... तो मौत 145 बार ही दोहराया गया है।


    सालिहात (नेकियाँ) 167 बार दोहराया गया है ....... तो सय्येआत (बुराइयाँ) 167 बार ही दोहराया गया है।

    दुनिया 115 बार दोहराया गया है......... तो आखिरत 115 बार ही दोहराया गया है।

    मलाईकः (स्वर्गदूतों) 88 बार दोहराया गया है .......... तो शैतान 88 बार ही दोहराया गया है।

    मुहब्बः (प्यार) 83 बार दोहराया गया है...........तो ताअत ( आज्ञाकारिता) 83 बार ही दोहराया गया है।

    हुदा (मार्गदर्शन) 79 बार दोहराया गया है ...........तो रहमत (दया) 79 बार ही दोहराया गया है।

    शिद्दत (तीव्रता) 102 बार दोहराया गया है .......... तो सब्र (धैर्य) 102 बार ही दोहराया गया है।

    अस्सलाम (शांति)50 बार दोहराया गया है.......... तो तय्येबात (पाकीज़गियाँ) 50 बार ही दोहराया गया है।

    इब्लीस (शैतान) 11 बार दोहराया गया है ......... तो अल्लाह से शरण मांगना 11 बार ही दोहराया गया है।

    जहन्नम (नरक) और उसके डेरिवेटिव 77 बार दोहराया गया है ....... तो जन्नत (स्वर्ग) और उसके डेरिवेटिव 77 बार ही दोहराया गया है।

    अर्र-जुल (पुरुष) 24 बार दोहराया गया है ......... तो अल-मरअः (स्त्री) 24 बार ही दोहराया गया है।

    क़ुरआन में कुछ शब्द ऐसे हैं जिनके बीच संतुलित और सटीक रूप में सांख्यिकिय बराबरी पाई जाती हैः उदाहरण-स्वरूप

    साल में 12 महीने होते हैं.......... तो शह्र ( महीना) 12 बार ही दोहराया गया है

    साल में 365 दिन होते हैं तो शब्द यौम (दिन) 365 बार ही दोहराया गया है।


    क़ुरआन के ईश्-वाणी होने का एक महत्वपूर्ण प्रमाण उसके अन्दर शुद्ध साहित्यिक रसासवादन का पाया जाना है। जिस किसी ने क़ुरआन को दिल व दिमाग़ लगाकर सुना उस से प्रभावित हुए बिना न रहा। जिस किसी ने उसे मन से पढ़ा उसे दिल दे बैठा। यह ऐतिहासिक तथ्य है।

    मुहम्मद साहिब का कट्टर शत्रु वलीद बिन मुग़ीरा ने जब आपको क़ुरआन पढ़ते हुए सुना तो बोल पड़ाः
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  10. PART 3

    " ईश्वर की सौगंध! उसमें मिठास है, उसमें ताज़गी और हरापन है (मानो यह ऐसा वृक्ष है) जिसका निचला भाग छाँव वाला है और ऊपरी भाग फलदार है।"

    बल्कि इतिहास साक्षी है कि कितने लोगों ने क़ुरआन को सुनने के बाद उसके साहित्यिक रसासवादन से प्रभावित होकर इस्लाम को स्वीकार कर लिया।

    अतः हमें सिर्फ अल्लाह पर विश्वास रखना हैं: " ऐ लोगो! अपने अल्लाह की इबादत करो जिसने तुम को पैदा किया तथा तुम से पहले के लोगों को भी पैदा किया ताकि तुम्हारे अन्दर ईश्-भय आ जाए। जिस ने तुम्हारे लिए धरती को बिछौना बनाया और आकाश को छत बनाया तथा आसमान से वर्षा उतारी जिसके द्वारा धरती से विभिन्न प्रकार के फल और दाने पैदा किए। (यह सब उसी ने किया है तो) फिर जानते बूझते उस अल्लाह के साथ किसी को भागीदार मत बनाओ। "
    ३. व्यबिचार न करना:

    हज़रत मुहम्मद साहब फरमाते हैं :
    किसी परायी स्त्री को (व्यर्थ, अनावश्यक रूप से) मत देखो, सिवाय इसके कि अनचाहे नज़र पड़ जाए। नज़र हटा लो। पहली निगाह तो तुम्हारी अपनी थी; इसके बाद की हर निगाह शैतान की निगाह होगी। (अर्थात् शैतान उन बाद वाली निगाहों के ज़रिए बड़े-बड़े नैतिक व चारित्रिक दोष, बड़ी-बड़ी बुराइयां उत्पन्न कर देगा।)वह औरत (स्वर्ग में जाना तो दूर रहा) स्वर्ग की ख़ुशबू भी नहीं पा सकती जो लिबास पहनकर भी नंगी रहती है (अर्थात् बहुत चुस्त, पारदर्शी, तंग या कम व अपर्याप्त (Scanty) लिबास पहनकर, देह प्रदर्शन करती और समाज में नैतिक मूल्यों के हनन, ह्रास, विघटन तथा अनाचार का साधन व माध्यम बनती है)।
    दो पराए (ना-महरम) स्त्री-पुरुष जब एकांत में होते हैं तो सिर्फ़ वही दो नहीं होते बल्कि उनके बीच एक तीसरा भी अवश्य होता है और वह है ‘‘शैतान’’। (अर्थात् शैतान के द्वारा दोनों के बीच अनैतिक संबंध स्थापित होने की शंका व संभावना बहुत होती है।)
    तुममें सबसे अच्छा इन्सान वह है जो अपनी औरतों के साथ अच्छे से अच्छा व्यवहार करे।
    शिष्टाचार का दो प्रकार में भाग होता है :

    1- एक व्यक्तित्व शिष्टाचार, जो इंसान से सम्पर्क रख़ता है :
    पानी पीना, कपड़ा पहिनना, सोना व जागना, भ्रमण करना, सही व सालिम जीवन बसर करना या रहना, मरीज़ व व्याधी होना यह सब इस्लाम में एक व्यक्ति से सम्पर्क रख़ता है। अगर इंसान यह सब कुबूल करके अपनी जीवन को ठीक रास्ते पर परिचालन करे, तो वह समस्त प्रकार मसीबत से दूर रहेगा वरना मुसीवत में गिरफ़्तार हो जाएगा।

    2- समाज के शिष्टाचार : यानी सामाजिक अधिकार, उदाहरण के तौर पर समाज में माता-पिता, और बच्चों तथा निकटतम संबधिंयों, अध्यापक, छात्र, दोस्त व प्रतिवासी तथा समस्त प्रकार के व्यक्तियों के साथ जो सामाजिक सम्पर्क रखता हो ऊन व्याक्तियों के साथ नेक शिष्टाचार करना समाज की हिफाजत व बिजयता का चिह्न है। इस्लाम-धर्म के शिष्टाचार व निर्देशन उत्तम शिष्टाचार में से है. जो इस्लाम का एक विधान है और उसका मौलिक एक शिष्टाचार गुणावली पर इस्तेवार है. सार के तौर पर कहना काफी है कि इस्लाम-धर्म ने जिस चीज़ को निर्देश दिया है उस का पालन करना, और जिस चीज़ का निषेध क्या है उस से दूर रहना प्रत्येक मुसलमान का दायित्व व कर्तव्य है।
    हराम (निषेध) :
    जिस कार्य को अंजाम देना इस्लाम ने निषेध घोषित किया है उस को (हराम) कहा जाता हैः 1- मूर्ती पूजा, देव स्थान पर जाना, 2- ईस्राफ़, 3- मज़ाक़ उड़ाना, 4- कष्ट देना, 5- रहस्य का उल्लेख करना, 6- झूट व अपवाध, 7- पिता-माता का दुराचार, 8- अपनी क़ौम का माल हनन करना, 9- बलात्कार करना, 10- मर्दों का आपसी यौन संबन्ध, 11- मर्द का ना-महराम नारीयों पर और नारी का ना-महराम मर्दों पर दृष्टि करना, 12- शराब पीना, 13- जुआ खेलना 14- रिश्वत लेना, 15- मृत जानवर और सूअर का माँस और जो (इस्लाम की दृष्ट में हराम है) ख़ाना हराम है, 16- अनुमति के बग़ैर अन्य का माल व्यबहार करना, 17- व्यापार में धोका देना, 18- मर्दों के लिए सोना पहनना, 19- शूद ख़ाना, 20- कार्य व तिजारत में अन्य व्याक्तियों को धोका देना, 21- अपने हाथ से से मनी निकालना 22- अन्य व्यक्तियों के राज़ बातों में जासूसी करना, 23- ग़ीबत (बुराई करना) करना हराम है, 24-गाना और मुसिक़, 24- किसी व्यक्तित्व व शक्सियत को हत्या करना, 25- चोरी करना, 26- बद अमल अंजाम देना, 27- ख्यानत करना, 28- कूरआन मजीद के बिपरित निर्देश प्रकाश करना, 29- अन्य के अधिकार को पैमाल करना, 30- अत्याचारी व दूष्ट व्यक्तियों की सहायता करना, 31-अन्य को बदनाम करना (32) अत्याचार व ज़ुल्म..!
    फज़ाएल और शिष्टाचार:
    शिष्टाचार व फज़ाएल मुसलमानों के लिए ज़िनत बख़्श है।1- इंसाफ़, 2- शिष्टाचार कार्यों में सहायता करना, 3- सब्र व इस्तेक़ामत, 4- अन्य व्याक्तियों के दर्मियान शान्ति क़ायम करना, 5- अमल पैदा करना, 6- अल्लाह पर विश्वास-यक़ीन करना,
    SUNNIKING TEAM
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  11. PART 4
    7- हिल्म व बु्र्दबारी, 8- माता-पिता के साथ शिष्टाचार करना, 9- अन्य को ख़ाना ख़िलाना, 10- पाक दामन रहना 11- बुलन्द सुरों में सलाम करना, 12- पाकीज़गी, 13- ज्ञान अर्जन करना, 14- अपार व्याक्तियों के साथ अच्छे बर्ताऔ करना, 15- सख़ावत, 16- शूज़ाअत, 17-सिलाह् रहम, 18-काम-कार्य में इंसाफ़ इख़तियार करना, 19- अच्छे शिष्टाचार से पेश आना, 20- ग़रीबों को सहायता करना, 21- ख़ुजू व ख़ुशू से पेश आना, 22- हजात मन्दों को तियाज़ को पूरी करना, 23- सच बोलना, 24- अन्य व्याक्तियों को सम्मान प्रदर्शन करना, 25- सब समय के लिए मुस्कुराना, 26- ख़राब कर्मों से दूर रहना, 27- समय पर विवाह करना, 28- अल्लाह की निअमतों को शुक्र अदा करना, 29- अपार की भूलों को क्षमा करना।
    3 - नीच और मकरुहात :
    नीच व मकरुहात मानव को पस्त की तरफ ले जाते हैं जो बयान किया जा रहा है।1- इंन्तेक़ाम जुई 2- गर्व व फक़्र, 3- माल-सर्वत जमा करना, 4- तकब्बूर करना, 5- बेहूदा काज करना, 6- बेहूदा कथाएं कहना, 7- कामों में सुस्ती पैदा करना, 8- भय पाना, 9- बितावी व परेशानी, 10- कुर्सी तलबि, 11- वादा करके ख़िलाफ वर्ज़ी करना, 12-लालच, 13- हिम्मत में पराजय स्वीकार करना, 14- अपारों के साथ दूश्मनी करना, 15- शक व अबकाश, 16- काम में जल्दी करना, 17- अल्लाह से ग़ाफिल रहना, 18- बद आचरण, 19- शख्त दिल, 20- बड़ाई।
    इन में से कुछ इस्लामी विचार धारा के अनुसार हराम भी है। यह प्रत्येक मुसल्मान पर वाजिब है, कि अपने कामों में चेष्ठा करें ताकि इस्लाम के जो संविधान है उस से अपने को आरस्ता करें चाहे यह विधान उसूले दीन के संमधं में हो या शिष्टाचार के संमधं में, उस पर अमल अंजाम दे। प्रत्येक मुसल्मान को मुस्लमान कहना उपयुक्त नहीं है, क्योंकि वह व्याक्ति उस तरह है जिस तरह एक व्याधि व्यक्ति यह कहे कि मै सही व सालिम हुँ. लिहाजा एक व्याधि व्यक्ति के कहने पर कोई लाभ नहीं है उसी तरह एक मुसलमान को मुसलमान कहना वाजिब नहीं है, जब तक वह व्यक्ति इस्लाम के विधान के उपर अमल न करें, लिहाजा हम सब को चेष्ठा करना चाहिए ताकि अपनी गुफ़्तार को शिष्टाचार के साथ मिलाया करें!
    आमीन
    या रव्बुल आलमीन!
    SUNNIKING TEAM (MOHSIN NOORI)

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  12. ladakiyoka bhi khatana hota hai ye to bahut hi danger hai..

    kaise rahati hai aurate islam ki.

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  13. मुस्लिम औरते जो खतने जैसे कूरुरता से परेशान है उनका हिन्दू धर्म में आगमन के लिए सवागत है ।हम आपको आपका आत्म्समान देगे ।और हिन्दू युवको के साथ अपना घर बसा सकते है ।स्वागत है आपका ।।

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  14. मेरे लिंग की आगे की चमड़ी बहुत बड़ गई है जिस कारण मेरा लिंग की लम्बाइ बहुत कम है मेरा लिंग पूर्ण रूप से खड़ नही हो पाता और सेक्स करते समय भी बहुत कठनाई होती है क्या मैं अपना circumsion करवा सकता हूँ

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    1. बेनामी - तुम लोगो को ऊपर सारंस मे पूरा यही बताया है की तुम सिर्फ झगड़ा ही कर सकते हो और गंदी अप्सब्द बात और कुछ नहीं पता तुम लोगो को ! कुछ कहना या बताना था तो इस्लाम के बारे मे कुछ बताते ! ये तो न्यूज़ है कोई भी पढ़ लेगा और
      लोगो को पता भी है लेकिन हिन्दू लोगो के पैरेंट्स पहले से ही उनके सावधानी रखते है और उस जगह को साफ करते है और बचा जब बड़ा होते है तो उसे इस बात की जानकारी भी देते है की साफ सफाई सबसे बेहतर है और आगे
      सुनो बेनामी बेकुफ़ क्या तुम अपने कान की अंदर की सफाई नहीं करते हो या फिर कान कटवा सकते हो यानि की जो हिस्सा सरीर का आसानी से काटा जा सकता है वो काट सकते है जैसे बाल, हाथ के नाखून , पैर के नाखून , रही बात
      खतना करने की तो वो कोई आसानी से नहीं कर सकता है येसे तो बोमरी पूरे सरीर मे है पेट मे भी सारी गंदगी है क्या उसको हटा सकते हो नहीं हटा सकते रही बात बीमारी की (बेनामी बेकुफ़ ) जो होना होगा हो जाएगा उसको तो अल्लाह ताला भी नहीं रोक सकते है
      ये है कैप्सुल सुबह साम लेना अल्लाह ताला फिर अपने घर का ताला खोल कर आएगे तुमको फिर जानकारी प्राप्त होगी की अल्लाह ताला कैसे घर से बाहर आए और कैसे है

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  15. hahahah kitni baar kaunse word ko repeat kiya... is se ye log muran ka mahatva aur pavitrata maante hain. Hahahaha. Aise moorkhon ko dekha hai kahin? islam ke sivaa? Aur aurto ko jahannum? kyu bhai? toh aurat banaai kyu allah ne? chaand ke tukde? hahahah. Fekumfek. Aise aise anhe isi duniya mein rahte hain. HE bhagwan !

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    1. बेनामी - तुम लोगो को ऊपर सारंस मे पूरा यही बताया है की तुम सिर्फ झगड़ा ही कर सकते हो और गंदी अप्सब्द बात और कुछ नहीं पता तुम लोगो को ! कुछ कहना या बताना था तो इस्लाम के बारे मे कुछ बताते ! ये तो न्यूज़ है कोई भी पढ़ लेगा और
      लोगो को पता भी है लेकिन हिन्दू लोगो के पैरेंट्स पहले से ही उनके सावधानी रखते है और उस जगह को साफ करते है और बचा जब बड़ा होते है तो उसे इस बात की जानकारी भी देते है की साफ सफाई सबसे बेहतर है और आगे
      सुनो बेनामी बेकुफ़ क्या तुम अपने कान की अंदर की सफाई नहीं करते हो या फिर कान कटवा सकते हो यानि की जो हिस्सा सरीर का आसानी से काटा जा सकता है वो काट सकते है जैसे बाल, हाथ के नाखून , पैर के नाखून , रही बात
      खतना करने की तो वो कोई आसानी से नहीं कर सकता है येसे तो बोमरी पूरे सरीर मे है पेट मे भी सारी गंदगी है क्या उसको हटा सकते हो नहीं हटा सकते रही बात बीमारी की (बेनामी बेकुफ़ ) जो होना होगा हो जाएगा उसको तो अल्लाह ताला भी नहीं रोक सकते है
      ये है कैप्सुल सुबह साम लेना अल्लाह ताला फिर अपने घर का ताला खोल कर आएगे तुमको फिर जानकारी प्राप्त होगी की अल्लाह ताला कैसे घर से बाहर आए और कैसे है

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