शनिवार, 15 दिसंबर 2012

मुहम्मद की दौलत का भंडाफोड़ !


आज हमें मुहम्मद साहब के चरित्र से शिक्षा लेने की जरुरत है . ऐसा इसलिए नहीं कि वह अल्लाह के सच्चे अनुयायी और सबसे प्यारे अंतिम रसूल थे . बल्कि इसलिए नहीं कि वह जोभी गलत काम करते थे उसे जायज बताने के लिए अल्लाह की तरफ से कोई न कोई आयत कुरान में जोड़ देते थे . यानि अपने सभी गलत कामों में अल्लाह को शामिल कर लेते थे . यद्यपि मुस्लिम विद्वान् दावा करते हैं कि मुहम्मद साहब एक सच्चे सीधे और सदा व्यक्ति थे ,और उनको धन संपत्ति से कोई मोह नहीं था . और न उन्होंने जीवन भर में किसी प्रकार की दौलत और जमीन अपने पास रखी थी . लेकिन हदीसों और इस्लाम की इतिहास की किताबों से सिद्ध होता है कि मुहम्मद साहब दुनिया में एकमात्र ऐसे नबी थे इस्लाम की जगह अपनी दौलत पर अधिक प्यार था . उनको इस्लाम की नहीं दौलत की चिंता बनी रहती थी , जो इस हदीस से सिद्ध होता है ,

1-महालोभी और लालची रसूल 
मुहम्मद साहब को धन संपत्ति का कितना मोह और लालच था , इसे साबित करने के लिए यह एक ही हदीस काफी है ,
"उकबा बिन आमिर ने कहा कि रसूल कहते थे कि मुझे इस बात की कोई चिंता नहीं है कि मेरी मौत के बाद तुम इस्लाम त्याग कर फिर से मुशरिक हो जाओ , लेकिन मुझे तो इस बात की सबसे बड़ी चिंता लगी रहती है , कि कहीं मेरी संपत्ति दूसरों हाथों में न चली जाये "
बुखारी-जिल्द 2 किताब 2 हदीस 428
2-बद्र की लूट 
मुहम्मद के साथी पहले भी काफिले लूटते थे , और मुहम्मद की कई औरतें भी थी ,जिनका खर्चा चलाना कठिन हो रहा था ,इसलिए मुहम्मद जब अपने परिवार और साथियों के साथ मदीना में रहने लगे , तो लूटमार करने लगे . इसका नाम उन्होंने "गजवा " रख दिया था जिसका अरबी बहुवचन " गजवात " होता है .जिसका वास्तविक अर्थ "युद्ध (Battle ) नहीं बल्कि "छापा  raids  " या लूट  (plundering)  होता है .मुहम्मद ने अपने जीवन में ऐसे कई गजवे (छापे ) किये , और लूट का माल घर में भर लिया था .चूँकि मदीना से कुछ दूर ही मुख्य व्यापारिक मार्ग था , जो लाल समुद्र (Red Sea ) के किनारे यमन से सीरिया तक जाता था . और इसी मार्ग से काफिले अपना कीमती सामान लाते -लेजाते थे .मुहम्मद की जीवनी लिखने वाले प्रसिद्ध मुस्लिम इतिहासकार इब्ने इसहाक ( Ibn Ishaq/Hisham 428) पर लिखा है .कि अबूसुफ़यान ने रसूल को एक गुप्त सूचना दी , कि मदीना से करीब 80 मील दूर मुख्य मार्ग से काफिला गुजरने वाला है .जिसमे पचास हजार सोने की दीनार , और चांदी के दिरहम के साथ काफी कीमती सामान है .अबूसुफ़यान ने यह भी बताया कि उस काफिले में केवल तीस या चालीस लोग ही हैं .यह खबर मिलते ही रसूल ने अपने लोगों को आदेश दिया कि जल्दी जाओ और उस काफिले पर धावा बोल दो . और काफिले का जितना भी माल है सब लूट लो .मुहम्मद के आदेश से मुसलमानों ने मदीना से करीब 80 मील दूर "बद्र " नामकी जगह पर 13 मार्च शनिवार सन 624 तदानुसार 17 रमजान हिजरी सन 2 को उस काफिले पर धावा बोल दिया .मुसलमान इस लूट को" बद्र का युद्ध  Battle of Badr "या अरबी में "गजवा बद्र غزوة بدر‎ "कहते हैं .इस लूट का कमांडर अबूसुफ़यान था . जिसके साथी अबूबकर ,उमर .अली ,हमजा ,मुसअब इब्न उमर ,जुबैर अल अब्बास , अम्मार इब्न यासिर और अबूजर अल गिफारी थे . यह लोग 70 ऊंट और दो घोड़े भी लाये थे .इनमे जादातर लोग मुहम्मद के रिश्तेदार थे . और सबने मिलकर काफिले की संपत्ति लुट ली . क्योंकि काफिले वाले कम थे .और मुहम्मद ने अल्लाह का डर दिखा कर वह सारा माल घर में भर लिया .जिसका नाम मुहम्मद ने "अनफाल " रख दिया .

3-कुरान में अनफाल 
क्योंकि बद्र की इस लूट में मुहम्मद के कई रिश्तेदार शामिल थे , इसलिए वह भी अपना हिस्सा मांगने लगे . तब उनका मुंह बंद करने के लिए मुहम्मद ने आयत बना दी ,
" हे नबी जो लोग तुम से अनफाल के धन के बारे में सवाल ( आपत्ति ) करते हैं ,तो उनसे कह दो कि इस अनफाल के धन पर केवल रसूल का ही अधिकार है "
सूरा -अनफाल 8:1 ( अनफाल का अर्थ"Accession " होता है .यह ऐसी संपत्ति को कहते हैं ,जो दूसरों से छीन कर प्राप्त की गयी हो )
यह बात इन हदीसों से प्रमाणित होती है , कि मुहम्मद ने अकेले ही लूट का माल हथिया लिया था ,
"सईद बिन जुबैर ने इब्न अब्बास से पूछा कि कुरान की सूरा " अनफाल ( सूरा 8) किस लिए उतरी थी . तो वह बोले यह सूरा बद्र में लुटे गए माल को रसूल के लिए वैध ठहराने के लिए उतरी थी "बुखारी -जिल्द 6 किताब 60 हदीस 404 
बुखारी -जिल्द 6 किताब 60 हदीस 168

4-लूट का माल रसूल के घर में 
मुहम्मद ने पहले तो बद्र के लूट की दौलत अपने लिए वैध ठहरा दी और अपने परिवार में बाँट दी , जैसा इन हदीसों में कहा है ,
"अली ने कहा ,कि बद्र की लुट में मुझे जो दौलत और सोना मिला , उस से मैंने उसी दिन एक ऊंटनी खरीद ली . मैं फातिमा से शादी करना चाहता था .इस लिए मैंने लूट के सोने से " बनू कैनूना " के सुनार (Goldsmith ) से फातिमा के लिए जेवर बनवा लिए . और कुछ सोना सुनारों को बेच कर अपनी और फातिमा की शादी और दावत पर खर्च कर दिया .और अपने और फातिमा के लिए दो ऊंटनियाँ काठी (Saddles ) सहित खरीद लीं 
.बुखारी -जिल्द 5 किताब59 हदीस 340

5-खैबर पर हमला 
एकबार जब मुहम्मद को लूट से काफी दौलत मिल गयी तो लूट से दौलत कमाने का चस्का लग गया , और धन के साथ जमीन पर भी कब्ज़ा करने लगे ,मुहम्मद में ऐसा एक और हमला खैबर पर किया था .खैबर में फदक का बगीचा यहूदियों के पास था , जो कई पीढ़ियों से वहां के खजूर बेच कर ,पैसा कमा रहे थे , और दुसरे धंधे कर रहे थे . जब मुहम्मद को पता चला कि फदक के खजूरों को बेचकर यहूदी धनवान हो रहे हैं ,तो मुहम्मद ने 7 मई सन 629 को करीब 1500 जिहादी और 200 घुड़सवारों की फ़ौज बना कर खैबर पर हमला कर दिया .और यहूदियों को मार भगा दिया . और फदक के बागों पर कब्ज़ा कर लिया .यह घटना इब्न इसहाक ने मुहम्मद की जीवनी " सीरत रसूलल्लाह " में विस्तार में लिखी है .अरब के उत्तरी भाग में खैबर नामकी जगह में एक "नखलिस्तान (Oasis ) था . जहाँ पानी की प्रचुरता होने से खजूरों के बड़े बड़े बाग़ थे . इनका नाम "फदक فدك" था . यह बाग़ मदीना से करीब 30 मील दूर था .फदक के खजूर अच्छे होते थे और इनसे काफी आमदानी होती थी .खैबर की लूट में मुहमद ने यहूदियों से फदक के बाग़ के साथ 2000 कीमती यमनी कपड़ों की गाठें (Bales ) और 5000 कपड़ों के थान लूट लिये थे ,यहूदी यह सामान सीरिया भेजने वाले थे . इसके अलावा मुहम्मद ने फदक पास दो बाग़ " अल शिक्क الشِّق" और "अल कतीबाالكتيبة " पर भी कब्जा कर लिया था .और सबको अपनी संपत्ति घोषित कर दिया था .जब तक मुहम्मद जीवित रहे फदक बाग़ उनकी संपत्ति माने गए . उन्हीं की उपज से मुहम्मद अपने इतने बड़े परिवार का खर्चा चलाते रहे . खलीफा उमर इन बागों की कीमत पचास लाख दीनार आंकी थी .और जब फातिमा और अली अपने पुत्रों हसन और हुसैन के लिए अबू बकर से फदक के बागों से अपना हिस्सा मागने गयी थी , तो अबू बकर ने इंकार कर दिया था .शिया -सुन्नी विवाद का यह भी एक कारण है .

6-लुटेरे के घर डाका 
मुहम्मद ने जिस दौलत और जमीन के लिए हजारों निर्दोष लोगों इस लिए को मार दिया था .कि इस दौलत से मेरे परिवार के लोग पीढ़ियों तक मजे से ऐश करते रहेंगे , लेकिन मुहम्मद को पता नहीं था कि उसकी मौत के बाद लूट की सम्पति उसका सगा ससुर एक डाकू की तरह हथिया लेगा ,और मुहम्मद की औरतों , और लड़की दामाद को अबू बकर ने एक फूटी कौड़ी नहीं दी थी ,जो इन हदीसों से पता चलता है ,
"आयशा ने कहा कि रसूल की मौत के बाद उनकी दूसरी पत्नियाँ रसूल की सम्पति में हिस्सा चाहती थी . इसके लिए उन्होंने उस्मान बिन अफ्फान को मेरे पिता अबू बकर के पास भेजा . तो मेरे पिता ने कहा " रसूल का कोई वारिस नहीं होता " मैंने तो रसूल की दौलत ग़रीबों में खैरात कर दी है " 
सही मुस्लिम -किताब 19 हदीस 4351

अबू बकर ने कहा कि एकमात्र मैं ही रसूल की संपत्ति का संरक्षक हूँ . और जब अली और अब्बास अबू बकर से बद्र और "फदक" के बागों में हिस्सा मांगने आये तो . अबू बकर बोला अल्लाह की कसम खाता इनमे तुम्हारा कोई हिस्सा नहीं बनता ." सही मुस्लिम -किताब 19 हदीस 4349
"उरवा बिन जुबैर ने कहा कि , आयशा ने बताया , जब फातिमा और अली मेरे पिता अबू बकर के पास गए , और उन से बद्र और खबर की लूट का हिस्सा माँगा ,तो ,मेरे पिता ने कहा , मैं उस अल्लाह की कसम खाकर सच कहता हूँ जिसके हाथों में मेरी जान है .लूट की वह सारी दौलत इस्लामी राज्य की स्थापना में खर्च हो गयी . और रसूल की यही अंतिम इच्छा थी . यह सुन कर फातिमा और अली रुष्ट होकर घर लौट गए .
सही मुस्लिम -किताब 19 हदीस 4354

7-लूट का क्रूर तरीका 
मुसलमान दावा करते हैं कि हमारे रसूल तो बड़े दयालु और रहमदिल थे , उन्होंने जिंदगी भर एक व्यक्ति की भी हत्या नहीं की थी . लेकिन सब जानते हैं लालच में अँधा व्यक्ति कुछ भी कर सकता है .मुहम्मद ने लूटों के दौरान हत्या का जो तरीका अपनाया था , उसे जानकर कटर से कठोर दिल वाले काँप जायेंगे मुहम्मद लोगों को जिन्दा दफना देता था , ताकि कोई सबूत्त बाकि नहीं रहे ,.
"अबू तल्हा ने कहा कि बद्र की लूट में रसूल ने सभी काफिले वालों बुरी तरह से मारा , जिस से कुछ तो अपनी जान बचा कर काफिले का सामान छोड़ कर भाग गए .लेकिन 24 लोग रसूल के हाथों पकडे गए .जो बुरी तरह से घायल थे . तब रसूल ने उन सभी को बद्र के एक सूखे और गहरे कुंएं में फिकवा दिया .और हमें वहीँ तीन दिन रात रुकने का हुक्म दिया . कहीं कोई कुंएं से जिन्दा न निकल सके . अबू तल्हा ने बताया की जब भी रसूल काफिले लूटते यही तरीका अपनाते थे .जिस से घायल काफिले वाले कुंएं में भूखे प्यासे मर जाते थे " बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 314 
8-मुहम्मद की धूर्तता 
जिस तरह हर मुसलमान अपने अपराधों पर पर्दा डालने के लिए दूसरों पर आरोप लगा देता है , उसी तरह खुद को हत्या के अपराध से निर्दोष साबित करने के लिए मुहम्मद अल्लाह को ही जिम्मेदार बता देता था . जैसा कुरान में कहा है ,
" हे रसूल तुमने उनका क़त्ल नहीं किया , बल्कि अल्लाह ने उनको क़त्ल किया है . और तुमने उनको कुंएं में नहीं फेका ,बल्कि अल्लाह ने ही उनको कुएं में फेका है .सूरा -अनफाल 8: 17

9-निष्कर्ष 
 इन सभी प्रमाणों से स्पष्ट होता है कि मुहम्मद एक महालोभी , क्रूर लुटेरा और ऐसा धूर्त था कि लोग उसके द्वारा की गयी हजारों हत्याओं का पता भी नहीं कर सकें . जब लाश ही नहीं मिलेगी तो लोग मुहम्मद को दयालु मान लेगे , इसके अतिरिक्त यह बात भी सिद्ध है कि मुहमद और अल्लाह एकही थैली के चट्टे बट्टे है . और अल्लाह भी मुहम्मद की मर्जी के मुताबिक आयतें बना देता था .
लेकिन इस अटल सत्य को हजारों अल्लाह मिल कर भी नहीं बदल सकते ,कि हरेक धूर्त का एक दिन "भंडाफोड़ " जरुर हो जाता है .मुहम्मद ने जैसे क्रूर कर्म किये थे वैसी ही कष्टदायी मौत मारा गया .
यदि धूर्तता सीखना हो तो रसूल से सीखो 


http://www.answering-islam.org/Silas/rf1_mhd_wealth.htm

22 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. अन्तिम दूत मुहम्मद(सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम)
      यह एक बहुमूल्य सत्य है कि हर आने वाले रसूल और नबी की ज़बान से और उस पर अल्लाह की ओर से उतारे गए विशेष सहीफ़ों में एक अन्तिम दूत की भविष्यवाणी की गयी है और यह कहा गया है कि उनके आने के बाद और उनको पहचान लेने के बाद सारी पुरानी शरीअतें (विधान) और धार्मिक क़ानून छोड़ कर उनकी बात मानी जाए और उनके द्वारा लाए गए अन्तिम कलाम (कुरआन) और सम्पूर्ण दीन पर चला जाए। यह भी इस्लाम की सच्चाई का सबूत है कि पिछली किताबों में बहुत अधिक हेर फेर के बावजूद उस मालिक ने अन्तिम दूत मुहम्मद (सल्ल.) के आने की सूचना को परिवर्तित न होने दिया, ताकि कोई यह न कह सके कि हमें तो कुछ ख़बर ही न थी।

      इन धार्मिक पुस्तकों में मुहम्म्द (सल्ल.) के जन्म स्थान, जन्म का युग और उनके गुणों व विशेषताओं आदि के बार में स्पष्ट इशारे दिए गए हैं।


      मुहम्मद ( सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम ) की पवित्र जीवनी का परिचय
      अब से लगभग साढ़े चैदह-सौ साल पहले वह अन्तिम नबी व रसूल मुहम्मद (सल्ल.) सउदी अरब के प्रसिद्व शहर मक्का में पैदा हुए। जन्म से कुछ महीने पूर्व ही आपके बाप अब्दुल्लाह का देहान्त हो गया था। माँ आमना भी कुछ अधिक समय तक जीवित नहीं रहीं। पहले दादा अब्दुल मुत्तलिब और उनके देहान्त के बाद चाचा अबू तालिब ने उन्हें पाला। आप अपने गुणों, भलाईयों व अच्छाइयों के कारण शीघ्र ही सारे मक्का शहर की आँखों का तारा बन गए। जैसे-जैसे आप बडे़ होते गए, आप से लोगों का प्रेम बढ़ता गया। आपको सच्चा और ईमानदार कहा जाने लगा। लोग सुरक्षा के लिए अपनी बहुमुल्य वस्तुएं आपके पास रखते, अपने आपसी विवादों व झगड़ों का फै़सला कराते। लोग मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) को हर अच्छे काम में आगे पाते। आप वतन में हों या सफ़र में, सब लोग आपके गुणों के गुन गाते।

      उन दिनों वहाँ अल्लाह के घर काबा में 360 बुत, देवी देवताओं, बुजुर्गों व रसूलों की मूर्तियां रखी हुई थीं। पूरे अरब देश में बहुदेववाद (शिर्क) और कुफ़्र के अलावा हत्या, मारधाड़, लूटमार, गुलामों और औरतों के अधिकारों का हनन, उँच-नीच, धोखाधड़ी, शराब, जुआ, सूद, निराधार बातों पर युद्ध, ज़िना (व्यभिचार) जैसी न जाने कितनी बुराईयां फैली हुई थीं।
      मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) जब 40 साल के हुए तो अल्लाह ने अपने फरिश्ते जिबरईल (अलैहि.) द्वारा आप पर कुरआन उतारना आरंभ किया और अल्लाह ने आपको 40 साल के बाद नबूवत जाहिर(Open)होने का हुक्म दिया और लोगों को एक अल्लाह की उपासना व आज्ञा पालन की ओर बुलाने की ज़िम्मेदारी डाली।

      हटाएं
  2. हम यह जो सबूत पेश करते हैं , उन सबके हवाले , और किताबों के नाम , पेज नंबर ,हदीस नंबर साथ में देते हैं , जिसे शक हो वह इन सबूतों की जाँच करा कर देख सकता है .अगर सबूत नहीं होते तो हम ऐसे गंभीर विषय पर लिखने की हिम्मत नहीं करते .

    उत्तर देंहटाएं
  3. jhuti hadisen aur manghadant baaton ke siwa kuch nahi likhte tum.
    Volume 2, Book 23, Number 428 :
    Narrated by 'Uqba bin 'Amir

    One day the Prophet went out and offered the funeral prayers of the martyrs of Uhud and then went up the pulpit and said, "I will pave the way for you as your predecessor and will be a witness on you. By Allah! I see my Fount (Kauthar) just now and I have been given the keys of all the treasures of the earth (or the keys of the earth). By Allah! I am not afraid that you will worship others along with Allah after my death, but I am afraid that you will fight with one another for the worldly things."

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. Chup shale, aaj saari duniyaa me islam kaa asli chehra sab dekh rahe hai, tujhe dikhai nahi deta ,shale andhe.

      हटाएं
  4. http://www.sahih-bukhari.com/Pages/Bukhari_2_23.php


    bass karo miyan logon ko gumrah karna

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. Chup shale, aaj saari duniyaa me islam kaa asli chehra sab dekh rahe hai, tujhe dikhai nahi deta ,shale andhe.

      हटाएं
  5. jise hadison ke volume aur number thik se likhne nahi aate wo hadison ki tafsir kya bayaan karega...

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. Abe shale ,tum logo kaa wo lutera ,khuni rasul hi ek nambar kaa jhhutha tha to tum katue log to jhhuthe hoge hi,Bhandafodu me diye gaye saare lekh 100% sach aur sahi hai, aur koi raasta nahi mila to tu shale in sabko jhhuth karar dene me lage ho, waise ye kahawat to jag jahir hai ki jo khud jaisa hota hai, wo dusro ko bhi waisa hi samjhta hai,tum katue log saale khud jhhuthe ho apne us chor rasul ki tarah, isiliye sabko jhhutha saabit karne me lage ho.

      हटाएं
    2. अन्तिम दूत मुहम्मद(सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम)
      यह एक बहुमूल्य सत्य है कि हर आने वाले रसूल और नबी की ज़बान से और उस पर अल्लाह की ओर से उतारे गए विशेष सहीफ़ों में एक अन्तिम दूत की भविष्यवाणी की गयी है और यह कहा गया है कि उनके आने के बाद और उनको पहचान लेने के बाद सारी पुरानी शरीअतें (विधान) और धार्मिक क़ानून छोड़ कर उनकी बात मानी जाए और उनके द्वारा लाए गए अन्तिम कलाम (कुरआन) और सम्पूर्ण दीन पर चला जाए। यह भी इस्लाम की सच्चाई का सबूत है कि पिछली किताबों में बहुत अधिक हेर फेर के बावजूद उस मालिक ने अन्तिम दूत मुहम्मद (सल्ल.) के आने की सूचना को परिवर्तित न होने दिया, ताकि कोई यह न कह सके कि हमें तो कुछ ख़बर ही न थी।

      इन धार्मिक पुस्तकों में मुहम्म्द (सल्ल.) के जन्म स्थान, जन्म का युग और उनके गुणों व विशेषताओं आदि के बार में स्पष्ट इशारे दिए गए हैं।


      मुहम्मद ( सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम ) की पवित्र जीवनी का परिचय
      अब से लगभग साढ़े चैदह-सौ साल पहले वह अन्तिम नबी व रसूल मुहम्मद (सल्ल.) सउदी अरब के प्रसिद्व शहर मक्का में पैदा हुए। जन्म से कुछ महीने पूर्व ही आपके बाप अब्दुल्लाह का देहान्त हो गया था। माँ आमना भी कुछ अधिक समय तक जीवित नहीं रहीं। पहले दादा अब्दुल मुत्तलिब और उनके देहान्त के बाद चाचा अबू तालिब ने उन्हें पाला। आप अपने गुणों, भलाईयों व अच्छाइयों के कारण शीघ्र ही सारे मक्का शहर की आँखों का तारा बन गए। जैसे-जैसे आप बडे़ होते गए, आप से लोगों का प्रेम बढ़ता गया। आपको सच्चा और ईमानदार कहा जाने लगा। लोग सुरक्षा के लिए अपनी बहुमुल्य वस्तुएं आपके पास रखते, अपने आपसी विवादों व झगड़ों का फै़सला कराते। लोग मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) को हर अच्छे काम में आगे पाते। आप वतन में हों या सफ़र में, सब लोग आपके गुणों के गुन गाते।

      उन दिनों वहाँ अल्लाह के घर काबा में 360 बुत, देवी देवताओं, बुजुर्गों व रसूलों की मूर्तियां रखी हुई थीं। पूरे अरब देश में बहुदेववाद (शिर्क) और कुफ़्र के अलावा हत्या, मारधाड़, लूटमार, गुलामों और औरतों के अधिकारों का हनन, उँच-नीच, धोखाधड़ी, शराब, जुआ, सूद, निराधार बातों पर युद्ध, ज़िना (व्यभिचार) जैसी न जाने कितनी बुराईयां फैली हुई थीं।
      मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) जब 40 साल के हुए तो अल्लाह ने अपने फरिश्ते जिबरईल (अलैहि.) द्वारा आप पर कुरआन उतारना आरंभ किया और अल्लाह ने आपको 40 साल के बाद नबूवत जाहिर(Open)होने का हुक्म दिया और लोगों को एक अल्लाह की उपासना व आज्ञा पालन की ओर बुलाने की ज़िम्मेदारी डाली।
      SUNNIKING TEAM INDIA

      हटाएं
  6. sahih mslim book 19 hadith 4354
    It has been narrated by 'Urwa b Zubair on the authority of 'A'isha, wife of the Holy Prophet (may peace be upon him), that Fatima, daughter of the Messenger of Allah (may peace be upon him), requested Abu Bakr, after the death of the Messenger of Allah (may peace he upon him), that he should set apart her share from what the Messenger of Allah (may peace be upon him) had left from the properties that God had bestowed upon him. Abu Bakr said to her: The Messenger of Allah (may peace be npon him) said:" We do not have any heirs; what we leave behind is Sadaqa (charity)." The narrator said: She (Fatima) lived six months after the death of the Messenger of Allah (may peace be upon him) and she used to demand from Abu Bakr her share from the legacy of the Messenger of Allah (may peace be upon him) from Khaibar, Fadak and his charitable endowments at Medina. Abu Bakr refused to give her this, and said: I am not going to give up doing anything which the Messenger of Allah (may peace be upon him) used to do. I am afraid that it I go against his instructions in any matter I shall deviate from the right course. So far as the charitable endowments at Medina were concerned, 'Umar handed them over to 'All and Abbas, but 'Ali got the better of him (and kept the property under his exclusive possession). And as far as Khaibar and Fadak were concerned 'Umar kept them with him, and said: These are the endowments of the Messenger of Allah (may peace be upon him) (to the Umma). Their income was spent on the discharge of the responsibilities that devolved upon him on the emergencies he had to meet. And their management was to be in the hands of one who managed the affairs (of the Islamic State). The narrator said: They have been managed as such up to this day.
    http://www.searchtruth.com/book_display.php?book=019&translator=2&start=55&number=4346

    उत्तर देंहटाएं
  7. भंडा फोडू के लेखक को एक बार फिर कोटि कोटि नमन करता हूँ ,उनके विशाल ज्ञान भण्डार और विश्लेषण की छमता को देखकर हैरान रह जाता हूँ,ये तो हिन्दुओं का सौभाग्य है कि इनके जैसे महान ज्ञानी , समालोचक और विश्लेषक हमारे बीच मौजूद हैं, इश्वर उन्हें लम्बी और स्वस्थ आयु प्रदान करें, यही मेरी प्रार्थना है।

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं

    उत्तर देंहटाएं
  8. mythbuster की गांड में बहुत आग है

    उत्तर देंहटाएं
  9. शानदार लेख
    'धन्यवाद सर

    उत्तर देंहटाएं
  10. Abe Bihari Logo ko yeh kyun nahi bata raha hai ki Bhagvan Krishna Laundiya Baz the, Bhole Shankar Nasheri the Aur Dropdi Ek randi yani panch patiyo wali thi, Inder Devta Ayyash tha.... Bhole Bhale Hinduon Ko Bevkuf bana raha hai madarchod

    उत्तर देंहटाएं
  11. एक प्रेम से भरी बात
    यह बात करने की नहीं, मगर मेरी इच्छा है कि मेरी इन प्रेम भरी बातों को आप प्यार की आँखों से देखें और पढ़ें। उस स्वामी के बारे में जो सारे संसार को चलाने और बनाने वाला है, सोच विचार करें, ताकि मेरे मन और मेरी आत्मा को शान्ति मिले कि मैंने अपने भाई या बहन की अमानत उस तक पहुँचाई और अपने मनुष्य और भाई होने का कर्तव्य पूरा किया।
    इस संसार में आने के बाद एक मनुष्य के लिए जिस सच्चाई को जानना और मानना आवश्यक है और जो इसकी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी और कर्तव्य है वह प्रेम भरी बात में आपको सुनाना चाहता हूँ।

    प्रकृति का सबसे बड़ा सच
    इस संसार, बल्कि प्रकृति की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि इस संसार में सारे जीवों और पूरी कायनात को बनाने वाला, पैदा करने वाला और उसका प्रबन्ध करने वाला केवल और केवल एक अकेला स्वामी है। वह अपनी ज़ात, गुण और अधिकारों में अकेला है। दुनिया को बनाने, चलाने, मारने और जिलाने में उसका कोई साझी नहीं। वह एक ऐसी शक्ति है जो हर जगह मौजूद है। हरेक की सुनता है हरेक को देखता है। सारे संसार में एक पत्ता भी उसकी आज्ञा के बिना हिल नहीं सकता। हर मनुष्य की आत्मा उसकी गवाही देती है, चाहे वह किसी भी धर्म का मानने वाला हो और चाहे वह मूर्ति का पुजारी ही क्यों न हो मगर अंदर से वह विश्वास रखता है कि पैदा करने वाला, पालने वाला, पालनहार और असली मालिक तो केवल वही एक है।
    इंसान की बुद्धि में भी इसके अलावा और कोई बात नहीं आती कि सारे संसार का स्वामी एक ही है।

    एक दलील
    quran-logo















    इस पवित्र पुस्तक में अल्लाह ने हमारी बुद्धि को अपील करने के लिए बहुत सी दलीलें दी हैं। एक उदाहरण यह है कि-

    ‘‘यदि धरती और आकाशों में अल्लाह के अलावा स्वामी और शासक होते तो इन दोनों में बड़ा बिगाड़ और उत्पात मच जाता।’’ (अनुवाद कुरआन, अम्बिया 21:22)
    बात स्पष्ट है। यदि एक के अलावा कई शासक व स्वामी होते तो झगड़ा होता। यदि देवी-देवताओं को यह अधिकार वास्तव में होता और वे अल्लाह के कामों में भागीदार भी होते तो कभी ऐसा होता कि एक गुलाम ने पूजा अर्चना करके वर्षा के देवता से अपनी इच्छा मनवा ली तो बड़े स्वामी की ओर से आदेश आता कि अभी वर्षा नहीं होगी। फिर नीचे वाले हड़ताल कर देते। अब लोग बैठे हैं कि दिन नहीं निकला, पता चला कि सूरज देवता ने हड़ताल कर रखी है।
    सच यह है कि दुनिया की हर चीज़ गवाही दे रही है, यह संगठित रुप से चलती हुई कायनात की व्यवस्था गवाही दे रही है कि संसार का स्वामी अकेला और केवल एक है। वह जब चाहे और जो चाहे कर सकता है। उसे कल्पना एवं विचारों में क़ैद नहीं किया जा सकता। उसकी तस्वीर नहीं बनाई जा सकती। उस स्वामी ने सारे संसार को मनुष्यों के फ़ायदे और उनकी सेवा के लिए पैदा किया है। सूरज मनुष्य का सेवक, हवा मनुष्य की सेवक, यह धरती भी मनुष्य की सेवक है। आग, पानी, जानदार और बेजान दुनिया की हर वस्तु मनुष्य की सेवा के लिए बनायी गयी है। और उस स्वामी ने मनुष्य को अपना दास बना कर उसे अपनी उपासना करने और आदेश मानने के लिए पैदा किया है, ताकि वह इस दुनिया के सारे मामलों को सुचारु रुप से पूरा करे और इसी के साथ उसका स्वामी व उपास्य उससे प्रसन्न व राज़ी हो जाए।
    न्याय की बात है कि जब पैदा करने वाला, जीवन देने वाला, मौत देने वाला, खाना, पानी देने वाला और जीवन की हर ज़रूरत को पूरी करने वाला वही एक है तो सच्चे मनुष्य को अपने जीवन और जीवन संबंधी समस्त मामलों को अपने स्वामी की इच्छा के अनुसार उसका आज्ञापालक होकर पूरा करना चाहिए।

    उत्तर देंहटाएं
  12. एक बड़ी सच्चाई
    उस सच्चे स्वामी ने अपनी सच्ची पुस्तक कुरआन में बहुत सी सच्चाई में से एक सच्चाई हमें यह बतायी है-
    ‘‘हर जीवन को मौत का स्वाद चखना है फिर तुम सब हमारी ही ओर लौटाए जाओगे।’’ (अनुवाद कुरआन, अन्कबूत 29:57)
    इस आयत के दो भाग हैं। पहला यह कि हरेक जीव को मौत का स्वाद चखना है। यह ऐसी बात है कि हर धर्म, हर वर्ग और हर स्थान का आदमी इस बात पर विश्वास करता है बल्कि जो धर्म को भी नहीं मानता वह भी इस सच्चाई के सामने सिर झुकाता है और जानवर तक मौत की सच्चाई को समझते हैं। चूहा, बिल्ली को देखते ही अपनी जान बचाकर भागता है और कुत्ता भी सड़क पर आती हुई किसी गाड़ी को देख कर अपनी जान बचाने के लिए तेज़ी से हट जाता है, क्योंकि ये जानते हैं कि यदि इन्होंने ऐसा न किया तो उनका मर जाना निश्चित है।

    मौत के बाद
    इस आयत के दूसरे भाग में क़ुरआन एक और बड़ी सच्चाई की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करता है। यदि वह मनुष्य की समझ में आ जाए तो सारे संसार का वातावरण बदल जाए। वह सच्चाई यह है कि तुम मरने के बाद मेरी ही ओर लौटाए जाओगे और इस संसार में जैसा काम करोगे वैसा ही बदला पाओगे।
    मरने के बाद तुम मिट्टी में मिल जाओगे या गल सड़ जाओगे और, ऐसा नहीं है और न यह सच है। यह दृष्टिकोण किसी भी दृष्टि से मानव बुद्धि की कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
    सच्ची बात यह है कि हक़ीकत मरने के बाद हर मनुष्य के सामने आ जाएगी कि मनुष्य मरने के बाद अपने पैदा करने वाले स्वामी के पास जाता है और उसने उस संसार में जैसे काम किए होंगे, उसके हिसाब से प्रलय में इनाम पाएगा।

    कर्मों का फल मिलेगा
    यदि मनुष्य अपने पालनहार की उपासना और उसकी बात मानते हुए अच्छे काम करेगा, भलाई और सदाचार के रास्ते पर चलेगा तो वह अपने पालनहार की कृपा से जन्नत में जाएगा। जन्नत, जहाँ आराम की हर वस्तु है, बल्कि वहाँ तो आनंद व सुख वैभव की ऐसी वस्तुएं भी है, जिनको इस दुनिया में न किसी आँख ने देखा न किसी कान ने सुना न किसी दिल में उनका विचार आया। और जन्नत की सबसे बडी नेमत यह होगी कि जन्नती लोग वहाँ अपनी आँखों से अपने स्वामी एवं पालनहार को देख सकेंगे, जिसके बराबर आनन्द और हर्ष की कोई वस्तु नहीं होगी।
    इसी तरह जो लोग बुरे काम करेंगे अपने पालनहार के साथ दूसरों को भागी बनाएंगे और विद्रोह करके अपने स्वामी के आदेश का इन्कार करेंगे। वहाँ उनको उनके बुरे कामों और अपराधों का दण्ड मिलेगा और सबसे बडा दंड यह होगा कि वे अपने स्वामी को देखने से वंचित रह जाएंगे

    पालनहार का साझी बनाना सबसे बड़ा गुनाह
    उस सच्चे असली स्वामी ने अपनी किताब कुरआन में हमे बताया कि भलाइयां और सदकर्म छोटे भी होते हैं और बडे़ भी। इसी तरह उस स्वामी के यहाँ अपराध, पाप और बुरे काम भी छोटे बडे़ होते हैं। उसने हमें बताया है कि जो अपराध व पाप मनुष्य को सबसे अधिक और भयानक दण्ड का भोगी बनाता है।
    वह अपराध इस अकेले ईश्वर, पालनहार के साथ, उसके गुणों व अधिकारों में किसी को भागीदार बनाना है, इसके अलावा किसी दूसरे के आगे अपना सिर या माथा टेकना है और किसी और को पूजा योग्य मानना, मारने वाला, जीवित करने वाला, आजीविका देने वाला, लाभ व हानि का मालिक समझना बहुत बडा पाप और अत्यन्त ऊँचें दर्जे का जुल्म है, चाहे ऐसा किसी देवी देवता को माना जाए या सूरज चांद, सितारे को, किसी को भी उस एक मात्रा स्वामी के गुणों में बराबर का या भागीदार समझना शिर्क (बहुदेववाद) है, जिसे वह स्वामी क्षमा नहीं करेगा। इसके अलावा किसी भी गुनाह को यदि वह चाहे तो माफ़ कर देगा। इस पाप (अर्थात शिर्क) को स्वयं हमारी बुद्धि भी इतना ही बुरा समझती है और हमें भी इस काम को उतना ही अप्रिय समझते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  13. एक उदाहरण
    उदाहरण स्वरूप यदि किसी की पत्नी सामान्य बातों पर झगड़े पर उतर आती हो, कुछ कहना सुनना नहीं मानती हो, लेकिन पति यदि इस घर से उसे निकलने को कह दे तो वह कहती है कि मैं केवल तेरी हूँ, तेरी ही रहूंगी, तेरे ही दरवाजे पर मरूंगी और एक क्षण के लिए तेरे घर से बाहर नहीं जाऊँगी तो पति लाख क्रोध के बाद भी उसे निभाने के लिए मजबूर हो जाएगा।
    इसके विपरीत यदि किसी की पत्नी बड़ी सेवा करने वाली, आदेश का पालन करने की पाबन्द हो, वह हर समय उसका ध्यान रखती हो, पति आधी रात को घर आता हो उसकी प्रतीक्षा करती हो, उसके लिए खाना गर्म करके उसके सामने रख देती हो, उससे प्रेम भरी बातें भी करती हो, वह एक दिन उससे कहने लगे कि आप मेरे जीवन साथी हैं लेकिन मेरा अकेले आप से काम नहीं चलता, इसलिए अपने अमुक पड़ौसी को भी मैंने आज से अपना पति बना लिया है तो यदि उसके पति में कुछ भी ग़ैरत होगी तो वह यह बात कदापि सहन नहीं कर सकेगा। वह एक क्षण के लिए भी ऐसी एहसान फ़रामोश, निर्लज्ज और ख़राब औरत को अपने पास रखना पसन्द नहीं करेगा।
    आख़िर ऐसा क्यों है? केवल इसलिए कि कोई पति अपने पति होने के विशेष अधिकारों में किसी को भागीदार देखना नहीं चाहता। आप वीर्य की एक बूंद से बनी अपनी सन्तान में किसी और को अपना साझी बनाना पसन्द नहीं करते तो वह स्वामी जो पवित्रता (पाकीजगी) को पसंद करने वाला है, जो अत्यन्त तुच्छ बूंद से मनुष्य को पैदा करता है वह कैसे यह सहन कर लेगा कि उसका पैदा किया हुआ मनुष्य उसके साथ किसी और को उसका साझी या भागीदार बनाए, उसके साथ किसी दुसरे की उपासना की जाए और बात मानी जाए, जबकि इस पूरे संसार में जिसे जो कुछ दिया है उसी ने प्रदान किया है।
    जिस प्रकार एक वैश्या अपनी इज़्ज़त व सतीत्व बेच कर हर आने वाले आदमी को अपने ऊपर क़ब्ज़ा दे देती है तो इसी कारण वह हमारी नज़रों से गिरी हुई रहती है, तो वह आदमी भी अपने स्वामी की नज़रों में इससे कहीं अधिक नीच, अपमानित और गिरा हुआ है, जो उसे छोड कर किसी दूसरे की उपासना में मस्त हो, चाहे वह कोई देवता हो या मनुष्य, मूर्ति हो या बुत हो या स्थान या कोई दूसरी काल्पनिक वस्तु।

    सबसे बड़ा सदकर्म ईमान है
    इसी प्रकार सबसे बड़ा सदकर्म ‘‘ईमान’’ है, जिसके बारे में दुनिया के समस्त धर्म वाले यह कहते हैं कि सब कुछ यहीं छोड़ जाना है, मरने के बाद आदमी के साथ केवल ईमान जाएगा। ईमानदार या ईमान वाला उसे कहते हैं जो हक़ देने वाला हो, इसके विपरीत हक़ मारने वाले को ज़ालिम व काफ़िर (इन्कारी) कहते हैं। मनुष्य पर सबसे बड़ा हक़ उसके पैदा करने वाले का है। वह यह कि सबको पैदा करने वाला, जीवन और मृत्यु देने वाला स्वामी, पालनहार और उपासना के योग्य केवल अकेला अल्लाह है, तो फिर उसी की उपासना की जाए, उसी को स्वामी, लाभ हानि, सम्मान व अपमान देने वाला समझा जाए और उसके दिए हुए जीवन को उसकी इच्छा व आज्ञा अनुसार बसर किया जाए। उसी को माना जाए और उसी की मानी जाए। इसी का नाम ईमान है।

    ईमान केवल यह है कि मनुष्य अपने मालिक को अकेला माने, उस अकेले की उपासना और जीवन की हर घड़ी को मालिक की मर्ज़ी और उसके आदेशानुसार बसर करे। उसके दिए हुए जीवन को उसकी इच्छानुसार बसर करना ही दीन कहलाता है।

    उत्तर देंहटाएं
  14. सच्चा दीन
    सच्चा दीन आरंभ से ही एक है और उसकी शिक्षा है कि उस अकेले ही को माना जाए और उसी का हुक्म भी माना जाए। अल्लाह ने कुरआन में कहा है-
    ‘‘इस्लाम के अलावा जो भी किसी और दीन को अपनाएगा वह अस्वीकार्य होगा और ऐसा व्यक्ति परलोक में हानि उठाने वालों में होगा।’’ (अनुवाद कुरआन, आले इमरान 3:85)
    मनुष्य की कमज़ोरी है कि उसकी नज़र एक विशेष सीमा तक देख सकती है। उसके कान एक सीमा तक सुन सकते हैं, उसके सूंघने चखने और छूने की शक्ति भी सीमित है। इन पाँच इन्द्रियों से उसकी बुद्धि को जानकारी मिलती है, इसी तरह बुद्धि की पहुँच की भी एक सीमा है।
    वह मालिक किस तरह का जीवन पसंद करता है? उसकी उपासना किस तरह की जाए? मरने के बाद क्या होगा? जन्नत किन लोगों को मिलेगी? वे कौन से काम हैं जिनके नतीजे में मनुष्य नरक में जाएगा? इन सारी बातों का पता मानव बुद्धि, सूझ बूझ और ज्ञान से नहीं लगाया जा सकता।

    पैग़म्बर (सन्देष्टा) सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम
    मनुष्यों की इस कमज़ोरी पर दया करके उसके पालनकार ने अपने बंदों में से उन महान मनुष्यों पर जिनको उसने इस दायित्व के योग्य समझा, अपने फ़रिश्तों द्वारा उन पर अपना संदेश उतारा, जिन्होंने मनुष्य को जीवन बसर करने और उपासना के तौर तरीके़ बताए और जीवन की वे सच्चाईयाँ बतायीं जो वह अपनी बुद्धि के आधार पर नहीं समझ सकता था।
    ऐसे बुज़ुर्ग और महान मनुष्य को नबी, रसूल या सन्देष्टा कहा जाता है। इसे अवतार भी कह सकते हैं बशर्ते कि अवतार का मतलब हो ‘‘वह मनुष्य, जिसे अल्लाह ने मनुष्यों तक अपना संदेश पहुँचाने के लिए चुना हो’’। लेकिन आज कल अवतार का मतलब यह समझा जाता है कि ईश्वर मनुष्य के रूप में धरती पर उतरा है। यह व्यर्थ विचार और अंधी आस्था है। यह महा पाप है। इस असत्य धारणा ने मनुष्य को एक मालिक की उपासना से हटाकर उसे मूर्ति पूजा की दलदल में फंसा दिया।
    वह महान मनुष्य जिनको अल्लाह ने लोगों को सच्चा रास्ता बताने के लिए चुना और जिनको नबी और रसूल कहा गया, हर क़ौम में आते रहे हैं। उन सब ने लोगों को एक अल्लाह को मानने, केवल उसी अकेले की उपासना करने और उसकी इच्छा से जीवन बसर करने का जो तरीक़ा (शरीअत या धार्मिक क़ानून) वे लाए, उसकी पाबन्दी करने को कहा। इनमें से किसी संदेष्टा ने भी ईश्वर के अलावा अपनी या किसी और की उपासना की दावत नहीं दी, बल्कि उन्होंने उसे सबसे भयानक और बड़ा भारी अपराध ठहराते हुए सबसे अधिक इसी पाप से लोगों को रोका। उनकी बातों पर लोगों ने विश्वास कर लिया और सच्चे मार्ग पर चलने लगे।

    उत्तर देंहटाएं
  15. रसूलों की शिक्षा
    एक के बाद एक नबी और रसूल आते रहे, उनके धर्म का आधार एक होता। वे एक ही धर्म की ओर बुलाते कि एक ईश्वर को मानो, किसी को उसके वजूद और उसके गुणों व अधिकारों में साझी न ठहराओ, उसकी उपासना व आज्ञा पालन में किसी को भागीदार न करो, उसके रसूलों को सच्चा जानो, उसके फ़रिश्ते जो उसके बन्दे और पवित्र प्राणी हैं, जो न खाते पीते हैं न सोते हैं, हर काम में मालिक की आज्ञा का पालन करते हैं। उसकी अवज्ञा नहीं कर सकते। वे अल्लाह की ख़ुदाई या उसके मामलों में कण बराबर भी कोई दख़ल नहीं रखतें हैं उनके अस्तित्व को मानो। उसने अपने फ़रिश्ते द्वारा अपने रसूलों व नबियों पर जो वहां (ईश वाणी) भेजी या किताबें भेजीं, उन सबको सच्चा जानो, मरने के बाद दोबारा जीवन पाकर अपने अच्छे बुरे कामों का बदला पाना है, इस विश्वास के साथ इसे सत्य जानो और यह भी मानो कि जो कुछ भाग्य में अच्छा या बुरा है, वह मालिक की ओर से है और रसूल उस समय अल्लाह की ओर जो शरीअत (विधान) और जीवन व्यापन का तरीक़ा लेकर आया है, उस पर चलो और जिन बुराईयों और वर्जित कामों और वस्तुओं से उसने मना किया है, उनको न करो।


    जितने अल्लाह के दूत आए सब सच्चे थे और उन पर जो पवित्र ईश वाणी उतरी, वह भी सच्ची थी। उन सब पर हमारा ईमान है और हम उनमें भेद नहीं करते। सत्य तो यह है कि जिन्होंने एक ईश्वर को मानने की दावत दी हो, उनकी शिक्षाओं में एक मालिक को छोड़ कर दूसरों की पूजा ही नहीं स्वयं अपनी पूजा की भी बात न हो, उनके सच्चे होने में क्या संदेह हो सकता है? अलबत्ता जिन महा पुरुषों के यहां मूर्ति पूजा या बहुत से उपास्यों की उपासना की शिक्षा मिलती है, या तो उनकी शिक्षाओं में परिवर्तन कर दिया गया है या वे अल्लाह के दूत ही नहीं हैं। मुहम्मद (सल्ल.) से पहले के सारे रसूलों के जीवन के हालात में हेर फेर कर दिया गया है और उनकी शिक्षाओं के बड़े हिस्से को भी परिवर्तित कर दिया गया है।


    अँधेरी दुनिया की किरण
    जब दुनिया घनघोर अंधेर में डूबी हुई थी ज़ुल्म, हत्या, चोरी चकारी, अपशगुन, मासूम बेटियों को जिंदा ज़मीन में गाड़ देना एवं इन जैसी अनेक और अनगिनत बुराइयाँ और महा पाप आम हो गया था, एवं एक अल्लाह के बजाए अनेक प्राणी एवं जीव जंतुओं की पूजा की जाने लगी थी उस वक़्त अल्लाह ने अपने रसूल (दूत) मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम को दुनिया को इन बुराइयों से पाक करने और मनुष्यता को ज़ुल्म और पाप से निकालने के लिए एवंम मनुष्य को एक अल्लाह की पूजा के लिए बुलाने की खातिर अंतिम संदेष्ठा के रूप में भेजा ! जिन्होंने अपने दायित्व को पूर्ण रूप से पूरा किया और दुनिया को पाप और ज़ुल्म के अँधेरे से निकल कर पुण्य और न्याय के मार्ग पर चलने के लिए उनका पूर्ण रूप से मार्गदर्शन किया, फिर देखते ही देखते सम्पूर्ण विश्व इस किरन के उज्यारों से भर गया.
    मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने दुनिया को शांन्ति एवं सौहार्द की ऐसी शिक्षा दी कि उस से पूर्व किसी भी धर्म अथवा संस्कृति ने नहीं दी, और न हीं उसके बाद ही किसी ने ऐसी शिक्षा पेश की

    उत्तर देंहटाएं
  16. अन्तिम दूत मुहम्मद(सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम)
    यह एक बहुमूल्य सत्य है कि हर आने वाले रसूल और नबी की ज़बान से और उस पर अल्लाह की ओर से उतारे गए विशेष सहीफ़ों में एक अन्तिम दूत की भविष्यवाणी की गयी है और यह कहा गया है कि उनके आने के बाद और उनको पहचान लेने के बाद सारी पुरानी शरीअतें (विधान) और धार्मिक क़ानून छोड़ कर उनकी बात मानी जाए और उनके द्वारा लाए गए अन्तिम कलाम (कुरआन) और सम्पूर्ण दीन पर चला जाए। यह भी इस्लाम की सच्चाई का सबूत है कि पिछली किताबों में बहुत अधिक हेर फेर के बावजूद उस मालिक ने अन्तिम दूत मुहम्मद (सल्ल.) के आने की सूचना को परिवर्तित न होने दिया, ताकि कोई यह न कह सके कि हमें तो कुछ ख़बर ही न थी।

    इन धार्मिक पुस्तकों में मुहम्म्द (सल्ल.) के जन्म स्थान, जन्म का युग और उनके गुणों व विशेषताओं आदि के बार में स्पष्ट इशारे दिए गए हैं।


    मुहम्मद ( सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम ) की पवित्र जीवनी का परिचय
    अब से लगभग साढ़े चैदह-सौ साल पहले वह अन्तिम नबी व रसूल मुहम्मद (सल्ल.) सउदी अरब के प्रसिद्व शहर मक्का में पैदा हुए। जन्म से कुछ महीने पूर्व ही आपके बाप अब्दुल्लाह का देहान्त हो गया था। माँ आमना भी कुछ अधिक समय तक जीवित नहीं रहीं। पहले दादा अब्दुल मुत्तलिब और उनके देहान्त के बाद चाचा अबू तालिब ने उन्हें पाला। आप अपने गुणों, भलाईयों व अच्छाइयों के कारण शीघ्र ही सारे मक्का शहर की आँखों का तारा बन गए। जैसे-जैसे आप बडे़ होते गए, आप से लोगों का प्रेम बढ़ता गया। आपको सच्चा और ईमानदार कहा जाने लगा। लोग सुरक्षा के लिए अपनी बहुमुल्य वस्तुएं आपके पास रखते, अपने आपसी विवादों व झगड़ों का फै़सला कराते। लोग मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) को हर अच्छे काम में आगे पाते। आप वतन में हों या सफ़र में, सब लोग आपके गुणों के गुन गाते।

    उन दिनों वहाँ अल्लाह के घर काबा में 360 बुत, देवी देवताओं, बुजुर्गों व रसूलों की मूर्तियां रखी हुई थीं। पूरे अरब देश में बहुदेववाद (शिर्क) और कुफ़्र के अलावा हत्या, मारधाड़, लूटमार, गुलामों और औरतों के अधिकारों का हनन, उँच-नीच, धोखाधड़ी, शराब, जुआ, सूद, निराधार बातों पर युद्ध, ज़िना (व्यभिचार) जैसी न जाने कितनी बुराईयां फैली हुई थीं।
    मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) जब 40 साल के हुए तो अल्लाह ने अपने फरिश्ते जिबरईल (अलैहि.) द्वारा आप पर कुरआन उतारना आरंभ किया और अल्लाह ने आपको 40 साल के बाद नबूवत जाहिर(Open)होने का हुक्म दिया और लोगों को एक अल्लाह की उपासना व आज्ञा पालन की ओर बुलाने की ज़िम्मेदारी डाली।

    उत्तर देंहटाएं
  17. सच्चा दीन केवल एक है
    इसलिए यह कहना किसी तरह उचित नहीं कि सारे धर्म ख़ुदा की ओर ले जाते हैं। रास्ते अलग-अलग हैं, मंज़िल एक है।
    सच्चा दीन केवल एक हैं। वह आरंभ ही से एक है। इसलिए उस एक को मानना और उसी एक की मानना इस्लाम है। दीन कभी नहीं बदलता, केवल शरीअतें समय के अनुसार बदलती रहीं हैं और वह भी उसी मालिक के बताए हुए तरीके़ पर। जब मनुष्य की नस्ल एक है और उनका मालिक एक है तो रास्ता भी केवल एक है। कुरआन कहता है-
    ‘‘दीन तो अल्लाह के निकट केवल इस्लाम ही है।’’ (अनुवाद कुरआन, आले इमरान 3:19)

    एक और सवाल
    कुरआन अल्लाह की वाणी है, उसने दुनिया को अपने सच्चे होने के लिए जो तर्क दिए हैं वे सबको मानने पड़े हैं और आज तक उनकी काट नहीं हो सकी। उसने मुहम्मद (सल्ल.) के अन्तिम नबी होने की घोषणा की है।

    मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) के पवित्र जीवन का एक एक पल दुनिया के सामने है। उनका सम्पूर्ण जीवन इतिहास की खुली किताब है। दुनिया में किसी भी मनुष्य का जीवन आपके जीवन की भांति सुरक्षित और इतिहास की रोशनी में नहीं है। आपके दुश्मनों और इस्लाम दुश्मन इतिहासकारों ने भी कभी यह नहीं कहा कि मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) ने अपने व्यक्तिगत जीवन में कभी किसी बारे में झूठ बोला हो। आपके शहर वाले आपकी सच्चाई की गवाही देते थे। जिस आदर्श मनुष्य ने अपने व्यक्तिगत जीवन में कभी झूठ नहीं बोला।
    सारी धार्मिक पुस्तकों में अन्तिम ऋषि कलकी अवतार की जो भविष्य वाणियां की गयीं और निशानियाँ। बतायी गयी हैं, वे केवल मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम)पर पूरी उतरती हैं।

    पंडित वेद प्रकाश उपाध्याय का निर्णय:
    पंडित वेद प्रकाश उपाध्याय ने लिखा है कि जो व्यक्ति इस्लाम स्वीकार न करे और मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम) और उनके दीन को न माने, वह हिन्दू भी नहीं है, इसलिए कि हिन्दुओं के धार्मिक ग्रन्थ वेदों में कलकी अवतार और नराशंस के इस धरती पर आ जाने के बाद उनको और उनके दीन को मानने पर बल दिया गया है।

    उत्तर देंहटाएं