रविवार, 2 दिसंबर 2012

नास्तिक कैसे होते हैं ?


सामान्यतः जो व्यक्ति ईश्वर , परलोक ,और कर्म फल के नियम पर विश्वास नहीं करता उसे नास्तिक कहा जाता .चूँकि बौद्ध और जैन ईश्वर को नहीं मानते इसलिए अज्ञानवश हिन्दू उनको नास्तिक कह देते हैं .यद्यपि बौद्ध और जैन कर्म के सिद्धांत को मानते हैं .और पाप पुण्य पर विश्वास करते हैं .लेकिन जो लोग निरंकुश होकर सिर्फ भौतिकतावाद और अपना सुख और स्वार्थ साधने में लगे रहते हैं , वास्तव में वही नास्तिक होते हैं .ऐसे लोगों मान्यता एक प्रसिद्द कहावत से समझी जा सकती है ,
" लूटो खाओ मस्ती में , आग लगे बस्ती में "
ऐसे लोग सभी मर्यादाएं , परंपरा ,नियम और लोक लज्जा की परवाह नहीं करते .भले देश और समाज बर्बाद हो जाये .भगवान बुद्ध और महावीर के समय ऐसे ही विचार रखने वाला एक व्यक्ति चार्वाक था , जिसके लाखों अनुयायी हो गए थे , उसके विचारों को ही चार्वाक दर्शन कहा जाता है .
1-चार्वाक दर्शन
चार्वाक दर्शन एक भौतिकवादी नास्तिक दर्शन है। यह मात्र प्रत्यक्ष प्रमाण को मानता है तथा पारलौकिक सत्ताओं को यह सिद्धांत स्वीकार नहीं करता है। यह दर्शन वेदबाह्य भी कहा जाता है।
वेदवाह्य दर्शन छ: हैं- चार्वाक, माध्यमिक, योगाचार, सौत्रान्तिक, वैभाषिक, और आर्हत। इन सभी में वेद से असम्मत सिद्धान्तों का प्रतिपादन है।
चार्वाक प्राचीन भारत के एक अनीश्वरवादी और नास्तिक तार्किक थे। ये नास्तिक मत के प्रवर्तक वृहस्पति के शिष्य माने जाते हैं। बृहस्पति और चार्वाक कब हुए इसका कुछ भी पता नहीं है। बृहस्पति को चाणक्य ने अपने अर्थशास्त्र ग्रन्थ में अर्थशास्त्र में भी उल्लेख किया है ."सर्वदर्शनसंग्रह "में चार्वाक का मत दिया हुआ मिलता है  पद्मपुराण में लिखा है कि असुरों को बहकाने के लिये बृहस्पति ने वेदविरुद्ध मत प्रकट किया था
2-भोगवाद ही नास्तिकता है 
भोगवाद ,चरम स्वार्थपरायण मानसिकता और अय्याशी ही नास्तिक होने की निशानी है , चाहे ऐसे व्यक्ति किसी भी धर्म से सम्बंधित हों .चार्वाक की उस समय कही गयी बातें आजकल के लोगों पर सटीक बैठती हैं ,चार्वाक ने कहा था ,
न स्वर्गो नापवर्गो वा नैवात्मा पार्लौकिकः 
नैव वर्नाश्रमादीनाम क्रियश्चफल्देयिका .
अर्थ -न कोई स्वर्ग है ,न उस् जैसा लोक है .और न आत्मा ही पारलौकिक वस्तु है .और अपने किये गए सभी भले बुरे कर्मों का भी कोई फल नहीं मिलता अर्थात सभी बेकार हो जाते हैं .
यावत् जीवेत सुखं जीवेत ऋणं कृत्वा घृतं पीबेत 
भस्मीभूतस्य देहस्य पुनरागमनं कुतः .
अर्थात-जब तक जियो मौज से जियो और कर्ज लेकर घी पियो मतलब मौज मस्ती करो
कैसी चिंता, शरीर के भस्म हो जाने के बाद फिर वह वापस थोड़े ही आती है।
"पीत्वा पीत्वा पुनः पीत्वा यावतपतति भूतले , पुनरुथ्याय वै पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते .
अर्थ -पियो ,पियो खूब शराब पियो ,यहाँ तक कि लुढ़क कर जमीन पर गिर जाओ . और होश में आकर फिर से पियों .क्योंकि फिरसे जन्म नही होने वाला .
वेद शाश्त्र पुराणानि सामान्य गाणिका इव, मातृयोनि परित्यज विहरेत सर्व योनिषु .
अर्थ -वेद , और सभी शास्त्र और पुराण तो वेश्या की तरह हैं .तुम सिर्फ अपनी माँ को छोड़कर सभी के साथ सहवास कर सकते हो .
3-यूनानी नास्तिक 
भारत की तरह यूनान (Greece ) भी एक प्राचीन देश है ,और वहां की संस्कृति भी काफी समृद्ध थी .वहां भी नास्तिक लोगों का एक बहुत बड़ा समुदाय था .जिसे एपिक्युरियनिस्म (Epicureanism)कहा जाता है .जिसे ईसा पूर्व 307 में एपिक्युरस (Epicurus)नामके एक व्यक्ति ने स्थापित किया था .ग्रीक भाषा में ऐसे विचार को "एटारेक्सिया (Ataraxia Aταραξία )भी कहा जाता है .इसका अर्थ उन्माद , मस्ती ,मुक्त होता है .इस दर्शन (Philosophy ) का उद्देश्य मनुष्य को हर प्रकार के नियमों , मर्यादाओं .और सामाजिक . कानूनी बंधनों से मुक्त कराना था .ऐसे लोग उन सभी रिश्ते की महिलाओं से सहवास करते थे . जिनसे शारीरिक सम्बन्ध बनाना पाप और अपराध समझा जाता था .
ऐसे लोग जीवन को क्षणभंगुर मानते थे .और मानते थे कि जब तक दम में दम है हर प्रकार का सुख भोगते रहो .क्योंकि फिर मौका नहीं मिलेगा .जब इन लोगों को स्वादिष्ट भोजन मिल जाता था तो यह लोग इतना खा लेते थे कि इनके पेट में साँस लेने की जगह भी नहीं रहती थी . तब यह लोग उलटी करके पेट खाली कर लेते थे .स्वाद लेने के लिए फिर से खाने लगते थे .
4-असली नास्तिक सेकुलर 
सेकुलर प्राणियों की एक ऐसी प्रजाति है ,अनेकों प्राणियों गुण पाए जाते हैं .गिरगिट की तरह रंग बदलना , लोमड़ी की तरह मक्कारी ,कुत्तों की तरह अपने ही लोगों पर भोंकना ,अजगर की तरह दूसरों का माल हड़प कर लेना .और सांप की तरह धोके से डस लेना .इसलिए ऐसे प्राणी को मनुष्य समझना बड़ी भारी भूल होगी . ऐसे लोग पाखंड और ढोंग के साक्षात अवतार होते हैं .दिखावे के लिए ऐसे लोग सभी धर्मों को मानने का नाटक करते हैं, लेकिन वास्तव में इनको धर्म या ईश्वर से कोई मतलब नहीं होता . अपने स्वार्थ के लिए यह लोग ईश्वर को भी बेच सकते हैं .ना यह किसी को अपना सगा मानते है .और न कोई बुद्धिमान इनको अपना सगा मानने की भूल करे .
वास्तव में आजकल के सेकुलर ही नास्तिक हैं .बौद्ध और जैन नहीं .मुलायम सिंह , लालू प्रसाद ,दिग्विजय सिंह ,और अधिकांश कांगरेसी सेकुलर- नास्तिक है .

http://en.wikipedia.org/wiki/C%C4%81rv%C4%81ka

22 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर लिखा है..

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  2. भंडा फोडू के लेखक को एक बार फिर कोटि कोटि नमन करता हूँ ,उनके विशाल ज्ञान भण्डार और विश्लेषण की छमता को देखकर हैरान रह जाता हूँ,ये तो हिन्दुओं का सौभाग्य है कि इनके जैसे महान ज्ञानी , समालोचक और विश्लेषक हमारे बीच मौजूद हैं, इश्वर उन्हें लम्बी और स्वस्थ आयु प्रदान करें, यही मेरी प्रार्थना है।

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  3. मैं नास्तिक हूँ, पर इसका मतलब नहीं की मैं बुद्धिहीन हूँ या फिर पापी हूँ। यदि कोई इश्वर है तो वह मुझे मेरे कर्मों के अनुरूप judge करेगा नाकि इस पर की मैंने कितना पूजा पाठ किया है, या कितना मंदिरों में पैसा चढ़ाया है।

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    1. गधे कोन हिसाब मांग रहा है
      जिसे अपनी मां के प्रति प्रेम हो
      पत्नी के प्रति समझ
      बच्चो के साथ जो आनन्द से जिता हो
      वहीं परमात्मा को पाने का अधिकारी है
      Love you dear

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    4. ओ३म..
      बेनामी जी, नमस्ते..!
      आपके दृष्टिकोणमें नास्तिकता क्या है ? और आस्तिकता क्या है? कृपया बताएं..
      और मंदिरों में जाकर घंटा-घड़ियाल बजाना और घुप-दीप जलाना, पैसा-फूल-प्रसाद आदि चढ़ाना, मस्जिदमे जाकार नमाज पढ़ना, गिर्जाघरोंमे मोम जलाना आदि कोई धर्म नहीं हैं..
      धर्मका मतलब है धारण करना..अच्छे गुणोको अपनेमे धारण करना धर्मं है ..महर्षि मनु ने धर्म के १० लक्षण बतायेहैं: धृति:क्षमा दमोऽस्‍तेयं शौचमिन्‍द्रियनिग्रह:।
      धीर्विद्या सत्‍यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्‌।।
      (मनुस्‍मृति ६.९२)
      और इसमें हमार्शी दयानंद सरस्वती ने एक लक्षण और होड़कर ११ बताये हैं..ओह एक लक्षण है - अहिंसा..
      अगर नाश्तिकता का मतलब ईश्वरको न मानना है तो फिर समस्त नास्तिकों ने भी एक सवाल का जवाफ देना पडेगा की इस भयंकर जटिल जगत की सृष्टि कैसे हुई? या किसने किया ? ऐसे ऐसे बहुत जटिल सवालोंसे घिर जाएंगे आप..ईश्वरको ना मानना तो और भी गम्भीर समस्या है..
      धन्यवाद..!

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  4. to prakat ho gayaaa ki ye bhi ek pakkka nashtik hai sahi hai jin ke dharm mai itni kamiyaan ho vo to naastik hona laazimi hi thaa betaa main tumhe ek salaah dunga kamiyaan nikalne ki bajaaay in dharmon ki achhhai ko apnaao bhav-saaagar se paar ho jaaayega beta tujhe abhi apni haqikat ka nahi pataa kin tu kis cheez se paida hua hai nahi to us paida karne vaaale sarvshaktimaan pe tera bharosa atal hota

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  5. इस्लाम और हिंदू धर्म ने आजतक क्या गुल खिलाये है पता है हमें। औरत को छेडना और उस पर संस्कार-संस्कृती के नाम पर जबाबदस्ती करना तुम लोग का पेशा है। उसमें तो पी.एच.डी की है तूम लोगों ने।

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  6. भंडाफोड़ू लेखक वास्तव में भांड फोड़ने के अलावा कुछ करने की क्षमता नहीं रखते। उनके लेख में न सत्य है, न तथ्य है,न भाव है,न विचार है, न भाषा है, न शैली है। कुलमिलाकर यह लेख एक फालतू सी पहेली है । अगर इनके विचारानुसार नास्तिकों के गुणों के रूप में लोभ,लालच,स्वादप्रियता,अय्यासी,मक्कारी,गद्दारी,विलासिता को मान लिया जाय तब 90% लोग नास्तिक माने जायेंगे। राम ने जहाँ बाली का धोखे से वध किया, वहीँ कृष्ण विलासिता के प्रतीक हैं,मोदी ने हज़ारों लोगों की हत्या करवाई गोधरा कांड में तो आरएसएस के लोग हिंसा,नफरत और अहंकार को पाल रहे हैं। देश में लाखों वेश्यालय चल रहे हैं, जहाँ बड़ी से बड़ी सेलिब्रिटी से लेकर भक्तों की मण्डली और आप जैसे भांडफोड़ू नेता तक जाकर अपनी अय्यासी का सबूत देते हैं। बोल बम और जय माता दी का नारा लगाने वाले भक्त भी सावन में रेस्टुअरेंट्स में जाकर बकरे की टांग चबाते हैं, जैसे जीवन का असली सार यही है। आज को भोग लेने की इच्च्छा सबमे मौजूद है और शायद आस्तिकों में ज्यादा,इसलिए बड़े बड़े बाबाओं के आगे पीछे करोड़ों खर्च करते हैं कि उनका इहलोक और परलोक सुधर जाये मतलब समृद्ध हो जाये संसाधनों से। और अंत में यहाँ इस ब्लॉग पर बहुत से भक्त और स्वयं फोड़ू बाबा के भीतर इतनी तमीज़ नहीं कि भाषा का अस्तित्व उसकी शालीनता में निहित है, यह नहीं जानतें। सच्चे भक्त गाली की भाषा नहीं जानते। अतः आज लगभग सभी नास्तिक ही हैं। मुझे मालूम है आप लोग अपनी खीझ गलियों से प्रकट करेंगे, लेकिन सत्य गालियों से तो दूर की बात है, गोलियों से भी नहीं डरता और न छुपता है।

    नास्तिक बनो, सत्य को पहचानो।

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  7. Mai muslim ghar paida hua hoon
    Par mai islam ko nahi manta
    Mai kisi v dharm ko nahi manta
    God kaise paida huye
    Agar khud se paida huye to ye duniya v khud se paida huyi
    Aakhir bhagwan aaye kahan se
    Plz kisi v dharm ka aadmi iska jawab de
    Bahoot jaroori hai

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  8. Mai muslim ghar paida hua hoon
    Par mai islam ko nahi manta
    Mai kisi v dharm ko nahi manta
    God kaise paida huye
    Agar khud se paida huye to ye duniya v khud se paida huyi
    Aakhir bhagwan aaye kahan se
    Plz kisi v dharm ka aadmi iska jawab de
    Bahoot jaroori hai

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  9. अगर भगवान होता तो इस दुनिया मे पाप ना होता ओर जब तक पाप है भगवान नही है
    नास्तिकता मे ही वाष्त्विक्ता है

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  10. अगर भगवान होता तो इस दुनिया मे पाप ना होता ओर जब तक पाप है भगवान नही है
    नास्तिकता मे ही वाष्त्विक्ता है

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  11. Atiwad se sda bachna chahiye.
    Ati kisi bhi mat ya Manyta ko vikriti tk pahucha hi deta h.
    Chhahe aastikta ho ya nastikta.
    Darasal vyavharik rup se dekhne pr Nastikta me ekta h .nastik hindu nastik muslim nastik ya ishai nastik nhi hota kewal nastik hi hota h aur ydi swtantr man ka vykti h to yhi Nastikta uske bhitar param manwatawad ko janm deta h.Jabki aastikta bahudha vibhajnkari sabit huaa h.isiliye aastiko ka sampraday mat aur dharm panth ek dusre se mel nhi khate adhik mamlo me. khaskar siddhanto ko lekar.
    Jise nastik kaha jata h aur ydi unme manviya mulyo ki samajh h to sahi arthon me yhi aastikta h.aur jise aastik kaha jata h ydi unme manwata hi nhi kewal aastik hone ka ahankar bhara h to fir asli nastik vahi log h.
    Astik hone ka dambh bharne walo k bich hi dharm k nam pr adhik dange hote h.

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  12. Isiliye sda wastwik bne.

    Ishwar aur bhgwan k sahi arthon (wastvikta)ko n samajh pane k karan log aastikta aur Nastikta ko nhi samjh pate hai.

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  13. Ati Bhogwadi hi asli Nastikta h.
    Ati tayagwadi bhi.
    Santulan hi sar h.

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  14. ओ३म..
    कुंदन कुमार रविदास जी, नमस्ते..!
    आपके दृष्टिकोणमें नास्तिकता क्या है ? और आस्तिकता क्या है? कृपया बताएं..औए मंदिरों में जाकर घंटा-घड़ियाल बजाना और घुप-दीप जलाना, पैसा-फूल-प्रसाद आदि चढ़ाना कोई धर्म नहीं हैं..
    धर्मका मतलब है धारण करना..अच्छे गुणोको अपनेमे धारण करना धर्मं है ..महर्षि मनु ने धर्म के १० लक्षण बतायेहैं: धृति:क्षमा दमोऽस्‍तेयं शौचमिन्‍द्रियनिग्रह:।
    धीर्विद्या सत्‍यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्‌।।
    (मनुस्‍मृति ६.९२)
    और इसमें हमार्शी दयानंद सरस्वती ने एक लक्षण और होड़कर ११ बताये हैं..ओह एक लक्षण है - अहिंसा..
    अगर नाश्तिकता का मतलब ईश्वरको न मानना है तो फिर समस्त नास्तिकों ने भी एक सवाल का जवाफ देना पडेगा की इस भयंकर जटिल जगत की सृष्टि कैसे हुई? या किसने किया ? ऐसे ऐसे बहुत जटिल सवालोंसे घिर जाएंगे आप..ईश्वरको ना मानना तो और भी गम्भीर समस्या है..
    धन्यवाद

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