शुक्रवार, 28 दिसंबर 2012

मुसलमानों के अधिकार का औचित्य !


विश्व के हरेक व्यक्ति को उसके मौलिक अधिकार मिलना चाहिए . सभी इस बात पर सहमत होंगे . परन्तु इस बात से भी सभी लोग सहमत होंगे अधिकारों का जन्म कर्तव्य से होता है . सिर्फ जनसख्या कम होने के आधार पर ही अधिकारों की मांग करना तर्कसंगत नहीं है . सब जानते कि मुसलमानों ने सैकड़ों साल तक इस देश को लूट लूट कर कंगाल कर दिया . लोगों की भलाई की जगह मकबरे , कबरिस्तान , मजार और मस्जिदें ही बनायी है . और जब हिदू देश की आजादी के लिए शहीद हो रहे थे ,तो इन्हीं मुसलमानों ने देश के टुकडे करवा दिए . फिर भी अल्पसंख्यक होने का बहाना लेकर अधिकारों की मांग कर रहे हैं . आप एक भी ऐसा मुस्लिम देश बता दीजिये जहाँ अल्पसंख्यक होने के आधार पर गैर मुस्लिमों को वह अधिकार मिलते हों ,जो मुसलमान यहाँ मांग रहे हैं . मुसलमान हमेशा दूसरों के अधिकार छीनते आये हैं और आपसी मित्रता ,सद्भाव , भाईचारे की आड़ में पीठ में छुरा भोंकते आये हैं यह इस्लाम के इतिहास से प्रमाणित होता है , मुसलमान अपनी कपट नीति नहीं छोड़ सकते , कैसे कुत्ते की पूंछ सीधी नहीं हो सकती ,

1-मुसलमानों की कपट नीति 
अरब के लोग पैदायशी लुटेरे , और सतालोभी होते हैं .मुहम्मद की मौत के बाद ही उसके रिश्तेदार खलीफा बन कर तलवार के जोर पर इस्लाम फैलाने लगे . और जिहाद के बहाने लूटमार करने लगे , यह सातवीं शताब्दी की बात है , उस समय मुसलमानों का दूसरा खलीफा "उमर इब्ने खत्ताब " दमिश्क पर हमला करके उस पर कब्ज़ा कर चुका था . उम्र का जन्म सन 586और 590 ईस्वी के बीच हुआ था और मौत 7नवम्बर 644 ईस्वी में हुई थी . चूंकि यरूशलेम दमिश्क के पास था ,और वहां बहुसंख्यक ईसाई थे . यरूशलेम स्थानीय शासन "पेट्रीआर्क सोफ़्रोनिअसSophronius  " (Σωφρόνιος ) के हाथों में था . ईसाई उसे संत (Saint ) भी मानते थे .यरूशलेम यहूदियों ,ईसाइयों और मुसलमानों के लिए पवित्र शहर था . और उमर बिना खूनखराबा के यरूशलेम को हथियाना चाहता था . इसलिए उसने एक चाल चली . और यरूशलेम के पेट्रआर्क सन्देश भेजा कि इस्लाम तो शांति का धर्म है . यदि आप के लोग समर्पण कर देगे तो हम भरोसा देते है कि आपकी और आपके लोगों के अधिकारों की रक्षा करेंगे .और इसके साथ ही उमर एक संधिपरत्र का मसौदा ( Draft ) यरूशलेम भिजवा दिया . जिस पर यरूशलेम के पेर्ट्रीआर्क ने सही कर दिए . और उमर पर भरोसा करके यरूशलेम उमर के हवाले कर दिया .

2-उमर का सन्धिपत्र 
इस्लामी इतिहास में इस संधिपत्र को " उमर का संधिपत्र ( Pact of Umar ) या " अहद अल उमरिया  العهدة العمرية‎ " कहा जाता है .इसका काल लगभग सन 637 बताया जाता है . उमर ने यह संधिपत्र "अबूबक्र मुहम्मद इब्न अल वलीद तरतूशأبو بكر محمد بن الوليد الطرطوش"  " से बनवाया था .जिसने इस संधिपत्र का उल्लेख अपनी प्रसिद्ध किताब " सिराज अल मुल्क  سراج الملوك" के पेज संख्या 229 और 230 पर दिया है .इस संधिपत्र का पूरा प्रारूप " एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी University of Edinburgh  " ने सन 1979 में पकाशित किया है .इस संधिपत्र की शर्तों को पढ़ने के बाद पता चलेगा कि मित्रता के बहाने मुसलमान कैसा धोखा देते हैं . और अल्पसंख्यकों को अधिकार देने के बहाने उनके अधिकार छीन लेते है . यद्यपि उमर ने इस्लाम को शांति का धर्म बता कर लोगों गुमराह करने के लिए इस संधिपत्र बड़ा ही लुभावना शीर्षक दिया था

3-इस्लामी शासन में गैर मुस्लिमों का अधिकार !
यद्यपि उमर का संधिपत्र सातवीं सदी में लिखा गया था लेकिन सभी मुस्लिम देश इसे अपना आदर्श मानते है . और हरेक मुस्लिम देश के कानून में उमर के संधिपत्र की कुछ न कुछ धाराएँ जरुर मौजूद है ,उमर के संधिपत्र का हिंदी अनुवाद यहाँ दिया जा रहा है ,
1-हम अपने शहर में और उसके आसपास कोई नया चर्च ,मठ , उपासना स्थल , या सन्यासियों के रहने के लिए कमरे नहीं बनवायेंगे . और उनकी मरम्मत भी नहीं करवाएंगे . चाहे दिन हो या रात 
2-हम अपने घर मुस्लिम यात्रियों के लिए हमेशा खुले रखेंगे , और उनके लिए खाने पीने का इंतजाम करेंगे 
3-यदि कोई हमारा व्यक्ति मुसलमानों से बचने के लिए चर्च में शरण मांगेगा ,तो हम उसे शरण नहीं देंगे 
4-हम अपने बच्चों को बाईबिल नहीं पढ़ाएंगे 
5-हम सार्वजनिक रूप से अपने धर्म का प्रचार नहीं करेंगे , और न किसी का धर्म परिवर्तन करेंगे .
6-हम हरेक मुसलमान के प्रति आदर प्रकट करेंगे , और उसे देखते ही आसन से उठ कर खड़े हो जायेंगे . और जब तक वह अनुमति नहीं देता आसन पर नहीं बैठेंगे .
7-हम मुसलमानों से मिलते जुलते कपडे ,पगड़ी और जूते नहीं पहिनेंगे 
8-हम किसी मुसलमान के बोलने ,और लहजे की नक़ल नहीं करेंगे और न मुसलमानों जैसे उपनाम (Surname ) रखेंगे 
9-हम घोड़ों पर जीन लगाकर नहीं बैठेंगे , किसी प्रकार का हथियार नहीं रखेंगे , और न तलवार पर धार लगायेंगे 
10-हम अपनी मुहरों और सीलों ( Stamp ) पर अरबी के आलावा की भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे 
11-हम अपने घरों में सिरका (vinegar ) नहीं बनायेंगे 
12-हम अपने सिरों के आगे के बाल कटवाते रहेंगे 
13-हम अपने रिवाज के मुताबिक कपडे पहिनेंगे ,लेकिन कमर पर "जुन्नार" ( एक प्रकार का मोटा धागा ) नहीं बांधेंगे 
14-हम मुस्लिम मुहल्लों से होकर अपने जुलूस नहीं निकालेंगे , और न अपनी किताबें , और क्रूस प्रदर्शित करेंगे , और अपनी प्रार्थनाएं भी धीमी आवाज में पढेंगे 
15-यदि कोई हमारा सम्बन्धी मर जाये तो हम जोर जोर से नहीं रोयेंगे , और उसके जनाजे को ऐसी गलियों से नहीं निकालेंगे जहाँ मुसलमान रहते हों . और न मुस्लिम मुहल्लों के पास अपने मुर्दे दफनायेंगे 
16 -यदि कोई मुसलमान हमारे किसी पुरुष या स्त्री को गुलाम बनाना चाहे ,तो हम उसका विरोध नहीं करेंगे 
17-हम अपने घर मुसलमानों से बड़े और ऊँचे नहीं बनायेंगे 

" जुबैरिया बिन कदमा अत तमीमी ने कहा जब यह मसौदा तैयार हो गया तो उमर से पूछा गया , हे ईमान वालों के सरदार , क्या इस मसौदे से आप को संतोष हुआ , तो उमर बोले इसमें यह बातें भी जोड़ दो ,हम मुसलमानों द्वारा पकडे गए कैदियों की बनायीं गयी चीजें नहीं बेचेंगे . और हमारे ऊपर रसूल के द्वारा बनाया गया जजिया का नियम लागू होगा " बुखारी -जिल्द 4 किताब 53 हदीस 38

4-पाकिस्तान में हिन्दुओं के अधिकार 

पाकिस्तान की मांग उन्हीं मुसलमानों ने की थी जो अविभाजित भारत के उसी भाग में रहते थे जो अज का वर्त्तमान भारत है .पाकिस्तान बनाते ही जिन्ना ने कहा था आज से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों द्वार सील हो गया है "the fate of minorities in this country was sealed forever "
पाकिस्तान में इसी लिए अकसर आये दिन हिन्दू लड़कियों पर बलात्कार होता है , मंदिर तोड़े जाते हैं , बल पूर्वक धर्म परिवर्तन कराया जाता है .और हमारी हिजड़ा सेकुलर सरकार हिना रब्बानी के साथ मुहब्बत के तराने गाती रहती है . दिखने के लिए पाकिस्तान के संविधान की धारा 20 में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का दावा किया गया है . लेकिन मुसलमान संविधान की जगह उमर की संधि पर अमल करते हैं .
हम लोगों से पूछते हैं , सरकार मुसलमानों को अधिकार किस खजाने से देगी ? क्या सोनिया इटली से खजाना लाएगी ?सीधी सी बात है कि मुसलमानों को अधिकार हिन्दुओं से छीन कर दिया जायेगा .
और अब समय आ गया है कि हिन्दू अपना अधिकार इन लुटेरों को देने की बजाये इन छीन लें . तभी देश की गरीबी दूर हो जाएगी औए आतंकवाद भी समाप्त हो जायेगा . क्योंकि हमारे ही पैसों से हमारा ही नाश हो रहा है .
हिन्दुओ अपनी अस्मिता बचाओ , अपने अधिकार छीन लो , अभी उठो !

http://www.bible.ca/islam/islam-kills-pact-of-umar.htm

12 टिप्‍पणियां:

  1. sharma ji aap ka yah desh sadaiv abhari rahega kyo ki aap inki aakho ko khol rahe hai bharat ko bachayiye.

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  2. sahi likha hai. hame sabak lena chahiye.

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  3. Janab bandapodu teri malumat ke liye bata du ki tumhare sare devta dusro ka haq marne wale the muft ka amrat pe gaye, Jispe hak rahu aur ketu ka tha unki gardan zaba kar di gayi. Bechare duryodhan ko sari takat se mahroom karne ke liye Sri Krishna ne dhoke se usko underwear pehna diya taki sari shakti usko na mil sake. Aur Dhoke se bhim ke zariye marwa diya. Bechare Karan ko Bhi dhoke se hi mar diya. Kitne dhoke diye hai tumhare bhawano ne jo is Hindu jati ko virasat me mile hai, sharm aani chahiye tumhe,,
    Sri Ram ne Rawan ko bhi dhoke se, aur Bali ko bhi chup ke mara. Dhoka to in Kayar Hindu kaum ke khun me chupa hai to Bechare Musalman inke sath kaise rah sakte hai....Ha Ha ha

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  4. जिहाद




    जिहाद एक अरबी भाषा का शब्द है जो 'जहादा' 'Jahada' शब्द से बना है जिसका मायने होता है 'मेहनत करना' 'जद्दोजहद करना' 'संघर्ष करना' अंग्रेजी में इस कहेंगे (to strive or to struggle) मिसाल के तौर पर 'अगर एक छात्र उत्तीर्ण होने के लिए मेहनत करता है, तो वह जिहाद कर रहा है.' अरबी भाषा के शब्द जिहाद का एक अर्थ 'अपनी नफ़्स से संघर्ष करना' भी है. अपने समाज को बेहतर बनाने के लिए मेहनत करने को भी जिहाद कहते हैं और यह अपने अंतर एक अर्थ और समेटे है जिसका अर्थ होता है कि 'आत्म रक्षा के लिए संघर्ष' या चढाई हो जाने या अत्याचार होने पर रण-भूमि में चढाई करने वाले या अत्याचार के विरुद्ध लड़ना.

    जैसा कि हम देख चुके है कि जिहाद एक अरबी शब्द है उसके मायने क्या है.
    सुरह-तौबा की आयत संख्या पांच (5) से पहले की कुछ आयतों में शांति और समाधान की चर्चा है और शांति संधि का पालन न करने पर अल्लाह ने बहुदेववादियों को चार महीने की चेतावनी देता है और फिर उसके बाद का यह आदेश उस युद्धरत सेना के लिए है कि उन्हें अर्थात मक्का के मुश्रिकीन को क़त्ल करो उन्हें मारो. कुर'आन की इस आयत का आगाज़ इसलिए हुआ क्यूंकि युद्ध में मुस्लिम अपने दुश्मन को जहाँ पाए वहां मारे और यह स्वाभाविक ही है कि कोई भी आर्मी जनरल अपनी सेना का हौसला बढ़ाता है और कहता है कि "डरना नहीं, बिलकुल भी, और अपने दुश्मन के छक्के छुड़ा दो. उन्हें युद्ध में जहाँ पाओ मारो और उसका वध कर दो.

    अर्थात "और यदि मुश्रीकों में से कोई तुमसे शरण मांगे तो तुम उसे शरण दे दो. यहाँ तक कि वे अल्लाह की वाणी सुन लें. फिर उन्हें उनके सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दो क्यूंकि वे ऐसे लोग लोग है जिन्हें ज्ञान नहीं."
    आज दुनियाँ का कौन सा आर्मी जनरल होगा जो अपने सैनिकों से कहेगा कि अपने दुश्मन को जाने दो. लेकिन अल्लाह सुबहान व त-आला अपनी किताब अल-कुर'आन में फरमाता है कि अगर तुम्हारा दुश्मन शान्ति चाहता है तो न सिर्फ शान्ति करो बल्कि उन्हें उनके सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दो. आज कौन सा ऐसा आर्मी जनरल होगा जिसने इस तरह का दयालुता से परिपूर्ण आदेश दिया होगा!

    by Mohsin Noori

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  5. प्रेम और पवित्रता
    हजरत मोहम्मद जब भी नमाज पढ़ने मस्जिद जाते तो उन्हें नित्य ही एक यहूदी वृद्धा के घर के सामने से निकलना पड़ता था। वह वृद्धा अशिष्ट, कर्कश और क्रोधी स्वभाव की थी। जब भी मोहम्मद साहब उधर से निकलते, वह उन पर कूड़ा-करकट फेंक दिया करती थी। मोहम्मद साहब बगैर कुछ कहे अपने कपड़ों से कूड़ा झाड़कर आगे बढ़ जाते। प्रतिदिन की तरह जब वे एक दिन उधर से गुजरे तो उन पर कूड़ा आकर नहीं गिरा। उन्हें कुछ हैरानी हुई, किंतु वे आगे बढ़ गए।
    अगले दिन फिर ऐसा ही हुआ तो मोहम्मद साहब से रहा नहीं गया। उन्होंने दरवाजे पर दस्तक दी। वृद्धा ने दरवाजा खोला। दो ही दिन में बीमारी के कारण वह अत्यंत दुर्बल हो गई थी। मोहम्मद साहब उसकी बीमारी की बात सुनकर हकीम को बुलाकर लाए और उसकी दवा आदि की व्यवस्था की। उनकी सेवा और देखभाल से वृद्धा शीघ्र ही स्वस्थ हो गई।
    अंतिम दिन जब वह अपने बिस्तर से उठ बैठी तो मोहम्मद साहब ने कहा- अपनी दवाएं लेती रहना और मेरी जरूरत हो तो मुझे बुला लेना। वृद्धा रोने लगी। मोहम्मद साहब ने उससे रोने का कारण पूछा तो वह बोली, मेरे र्दुव्‍यवहार के लिए मुझे माफ कर दोगे? वे हंसते हुए कहने लगे- भूल जाओ सब कुछ और अपनी तबीयत सुधारो। वृद्धा बोली- मैं क्या सुधारूंगी तबीयत? तुमने तबीयत के साथ-साथ मुझे भी सुधार दिया है।
    इसके बाद उस यहूदी वृद्धा ने ख़ुशी से इस्लाम कबूल कर लिया.
    SUNNIKING TEAM

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  6. यह दोहरा मापदंड क्यूँ?

    इस्लामी क़ानून में बलात्कार की सज़ा मौत हैं!
    बहुत से लोग इसे निर्दयता कह कर इस दंड पर आश्चर्य प्रकट करते हैं!
    लोगों से सीधा और सरल सवाल किया गया : कोई आपकी माँ या बहन के साथ बलात्कार करता है और आपको न्यायधीश बना दिया जाये और बलात्कारी को सामने लाया जाये तो उस दोषी को आप कौन सी सज़ा सुनाएँगे ?

    जवाब - उसे मृत्यु दंड दिया जाये कुछ ने कहा कि उसे कष्ट दे दे कर मारना चाहिए!

    अगला प्रश्न - अगर कोई व्यक्ति आपकी माँ, पत्नी अथवा बहन के साथ बलात्कार करता है तो आप उसे मृत्यु दंड देना चाहते हैं लेकिन यही घटना किसी और कि माँ, पत्नी या बहन के साथ होती है तो आप कहते हैं मृत्युदंड देना निर्दयता है इस स्तिथि में यह दोहरा मापदंड क्यूँ?

    पश्चिमी समाज औरतों को ऊपर उठाने का झूठा दावा करता है!

    औरतों की आज़ादी का पश्चिमी दावा एक ढोंग है, जिनके सहारे वो उनके शरीर का शोषण करते हैं, उनकी आत्मा को गंदा करते हैं और उनके मान सम्मान को उनसे वंचित रखते हैं पश्चिमी समाज दावा करता है की उसने औरतों को ऊपर उठाया इसके विपरीत उन्होंने उनको रखैल और समाज की तितलियों का स्थान दिया है, जो केवल जिस्मफरोशियों और काम इच्छुओं के हांथों का एक खिलौना है जो कला और संस्कृति के रंग बिरंगे परदे के पीछे छिपे हुए है.
    मृत्यु-दण्ड के सन्दर्भ में सूरा 17 की आयत ३३ भी विचारणीय है. उक्त आयत में प्रयुक्त शब्द 'हक़' से तात्पर्य यह है कि विशिष्ट कुछ दशाओं में ही कुरआन मजीद राज्य द्वारा किसी मनुष्य को मृत्यु-दण्ड वैध क़रार देता है जैसे-

    १. जान बूझकर किसी मनुष्य की ह्त्या करने वाले को!
    २. सत्य-धर्म के मार्ग में रुकावट डालने वाले को!
    SUNNIKING TEAM

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  7. http://sunnikingteam.blogspot.in/2012/06/blog-post_5813.html

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  8. वेद में आंतकवाद :=


    सर्व ..........कृकदाश्वम ॥
    (अथर्ववेद 20/74/7)
    हे राजन ! प्रत्येक निंदक , कष्ट देने वाले को पहुँच और मौत के घाट उतार दे ।

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  9. वेदों में आंतकवाद :=



    एवा........................... वि ॥॥
    (अथर्ववेद 12/5/65-71)

    भावार्थ := हे देवी उतम गुण वाली , हे अवध्य ( न मरने योग्य प्रबल वेद वाणी ) ! तू इसी प्रकार बरहाचारी के हानिकारक , अपराध , अपराध करने वाले , विद्वानों को सताने वाले , अदानशील पुरूष ।

    ॥65॥ सेकड़ों जोडवाले , तीक्ष्ण छुरे की सी धारवाले , वज्र से ।

    ॥66॥ कंधों और शिर को तोड- तोड दे ।

    ॥67॥ उस वेद विरोधी के लोमों को काट डाल , उसकी खाल उतार ले ।

    ॥68॥ उसके मांस के टुकड़े - टुकड़े को बोटी कर दे , उसके नसों को एेंट दे ।

    ॥69॥ उसकी हडिडयों मसल डाल , उसकी मींग निकाल दे ।

    ॥70॥ उसके सब अंगों और जोडों को ढीला कर दे ।"




    टीकाकार भाष्य पंडित shree पाद दामोदर सातवलेकर ( वैदिक अनुसंधान केन्द्र ) किल्ला - पारडी , गुजरात संस्करण [14 जनवरी सन 2000]

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  10. वेदों में आंतकवाद :=


    मूढा................................. वरंवरम॥
    अथर्ववेद ( 6/67/2)

    भावार्थ := हे घबराए हुए, पीडा देनेवाले शत्रुओं ! बिना शिरवाले (शिर कटे) सापों के समान चेष्टा करो । प्रतापी वीर राजा आग के हथियारों से घबराए हुए , उन तुम सबों मेसेज अच्छे अच्छे को चुनकर मारे ।"


    टीकाकार भाष्य पंडित क्षेमकरण दास त्रिवेदी ।

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  11. Mohamad ji ne kya apni larki se shadi ki thi kya?
    Ager ki thi to kya karen tha?
    Islam me iid kyu manai jati he?
    Islam me bakrid kyu manai jati he?

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  12. Mohamad ji ne kya apni larki se shadi ki thi kya?
    Ager ki thi to kya karen tha?
    Islam me iid kyu manai jati he?
    Islam me bakrid kyu manai jati he?

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