मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

झूठे रसूल के बेवफा साथी !

विश्व  में ऐसे कई  लोग हो चुके हैं  ,जिन्होंने अपने स्वार्थ  के लिए  खुद  को अवतार , सिद्ध ,संत और चमत्कारी व्यक्ति घोषित   कर   दिया था  . और  लोगों  को अपने बारे में ऎसी   बाते  फैलायी जिस से लोग   उनके अनुयायी हो  जाएँ ,लेकिन देखा गया है  कि  भोले भले लोग पहले तो   ऐसे  पाखंडियों    के   जाल  में फस   जाते  हैं   और उनकी संख्या   भी   बड़ी   हो   जाती  है  ,लेकिन   जब  उस  पाखंडी का  भंडा फूट   जाता है तो उसके  सारे  साथी ,यहाँ तक पत्नी  भी  मुंह  मोड़  लेती   है  . शायद ऐसा ही मुहम्मद साहब  के साथ  हुआ था  . मुहम्मद साहब ने भी खुद को अल्लाह  का रसूल  बता  कर  और  लोगों  को  जिहाद में मिलने  वाले  लूट  का माल  और औरतों   का  लालच  दिखा  कर  मूसलमान   बना   लिया  था  ,उस समय  हरेक ऐरागैरा   उनका  सहाबा  यानी  companion बन  गया  था ,लेकिन  जब  मुहम्मद   मरे तो उनके जनाजे में एक   भी  सहाबा  नही  गया , यहाँ तक  उनके ससुर  यानी  आयशा  के बाप  को  यह  भी  पता नहीं  चला   कि  रसूल  कब मरे ? किसने उनको दफ़न   किया  और उनकी  कबर कहाँ  थी ,जो  मुसलमान  सहाबा को रसूल सच्चा  अनुयायी   बताते हैं  , वह  यह  भी नही जानते थे कि रसूल  की  कब्र   खुली   पड़ी  रही   . वास्तव में  मुहम्मद साहब  सामान्य  मौत  से  नहीं ,बल्कि  खुद को  रसूल साबित   करने   की शर्त   के  कारण  मरे  थे  , जिस में वह  झूठे  साबित  निकले  और  लोग उनका साथ  छोड़ कर भाग  गए  . इस लेख में शिया  और सुन्नी किताबों  से  प्रमाण  लेकर  जो तथ्य  दिए गए हैं उन से इस्लाम और रसूलियत का असली  रूप  प्रकट  हो  जायेगा  

1-रसूलियत की परीक्षा 
अबू हुरैरा ने कहा कि खैबर विजय  के बाद   कुछ  यहूदी  रसूल से  बहस   कर रहे थे ,उन्होंने एक  भेड़  पकायी जिसमे  जहर मिला  हुआ था ,   रसूल  ने पूछ   क्या तुम्हें  जहम्मम की आग से  डर  नहीं लगता  , यहूदी   बोले नही , क्योंकि  हम केवल थोड़े   दिन  ही  वहाँ  रखे   जायेंगे ,रसूल ने पूछा    हम कैसे माने कि तुम  सच्चे   हो  , यहूदी   बोले  हम जानना   चाहते कि तुम  सच्चे  हो या झूठे  हो , इस गोश्त में जहर  है  यदि  तुम सच्चे   नबी होगे  तो  तुम  पर जहर  का असर  नही होगा  , और अगर तुम झूठ होगे   तो  मर जाओगे  .
We wanted to know if you were a liar in which case we would get rid of you, and if you are a prophet then the poison would not harm you."

"‏ اخْسَئُوا فِيهَا، وَاللَّهِ لاَ نَخْلُفُكُمْ فِيهَا أَبَدًا ـ ثُمَّ قَالَ ـ هَلْ أَنْتُمْ صَادِقِيَّ عَنْ شَىْءٍ إِنْ سَأَلْتُكُمْ عَنْهُ ‏‏‏.‏ فَقَالُوا نَعَمْ يَا أَبَا الْقَاسِمِ‏.‏ قَالَ ‏"‏ هَلْ جَعَلْتُمْ فِي هَذِهِ الشَّاةِ سُمًّا ‏"‏‏.‏ قَالُوا نَعَمْ‏.‏ قَالَ ‏"‏ مَا حَمَلَكُمْ عَلَى ذَلِكَ ‏"‏‏.‏ قَالُوا أَرَدْنَا إِنْ كُنْتَ كَاذِبًا نَسْتَرِيحُ، وَإِنْ كُنْتَ نَبِيًّا لَمْ يَضُرَّكَ‏.‏
सही बुखारी  -जिल्द 4 किताब 53 हदीस 394

2-रसूल  की मौत का संकेत  

इब्ने  अब्बास  ने कहा कि  जब रसूल  सूरा नस्र 110 :1  पढ़ रहे थे , तो उनकी  जीभ लड़खड़ा रही  थी ,उमर  ने  कहा कि  यह रसूल  की मौत का संकेत  है ,अब्दुर रहमान ऑफ ने  कहा  मुझे  भी ऐसा प्रतीत  होता   है  कि यह रसूल कि  मौत  का संकेत   है ( That indicated the death of Allah's Messenger ) 

، قَالَ كَانَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ ـ رضى الله عنه ـ يُدْنِي ابْنَ عَبَّاسٍ فَقَالَ لَهُ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ إِنَّ لَنَا أَبْنَاءً مِثْلَهُ‏.‏ فَقَالَ إِنَّهُ مِنْ حَيْثُ تَعْلَمُ‏.‏ فَسَأَلَ عُمَرُ ابْنَ عَبَّاسٍ عَنْ هَذِهِ الآيَةِ ‏{‏إِذَا جَاءَ نَصْرُ اللَّهِ وَالْفَتْحُ‏}‏ فَقَالَ أَجَلُ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَعْلَمَهُ إِيَّاهُ، فَقَالَ مَا أَعْلَمُ مِنْهَا إِلاَّ مَا تَعْلَمُ‏.‏

सही बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 713 
3-कष्टदायी  मौत 
आयशा ने   कहा कि  जब  रसूल  की  हालत   काफी  ख़राब   हो  गयी थी  ,तो मरने से  पहले  उन्होंने   कहा  था  ,कि  मैने  खैबर  में   जो  खाना  खाया था  ,उसमे   जहर  मिला था   , जिस से  काफी  कष्ट   हो रहा  है  ,ऐसा  लगता  है  कि मेरे  गले की  धमनी   कट  गयी   हो "I feel as if my aorta is being cut from that poison."

 ـ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ فِي مَرَضِهِ الَّذِي مَاتَ فِيهِ ‏ "‏ يَا عَائِشَةُ مَا أَزَالُ أَجِدُ أَلَمَ الطَّعَامِ الَّذِي أَكَلْتُ بِخَيْبَرَ، فَهَذَا أَوَانُ وَجَدْتُ انْقِطَاعَ أَبْهَرِي مِنْ ذَلِكَ السَّمِّ ‏"‏‏

सही बुखारी  -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 713

4-रसूल के साथियों   की  संख्या 
मुहम्मद साहब  के साथियों  को "सहाबा -الصحابة‎ " यानी Companions  कहा  जाता है , सुन्नी  मान्यता  के अनुसार  यदि  जो भी व्यक्ति  जीवन भर में एक बार रसूल   को  देख  लेता  था  ,उसे  भी सहाबा  मान  लिया  जाता  था , मुहम्मद  साहब   की मृत्यु   के  समय मदीना  में ऐसे कई सहाबा  मौजूद थे ,इस्लामी  विद्वान्  "इब्ने हजर अस्कलानी - ابن حجر العسقلاني‎" ने  अपनी  किताब "अल इसाबा  फी तमीजे असहाबा - الإصابة في تمييز الصحابة" में  सहाबा  की   संख्या 12466  बतायी  है ,यानी  मुहम्मद  साहब    जब मरे तो  मदीना  में इतने  सहाबा  मौजूद  थे .जो सभी  मुसलमान  थे
5-रसूल के सहाबी स्वार्थी थे 

मुहम्मद  साहब अपने जिन   सहाबियों   पर भरोसा  करते थे वह  स्वार्थी  थे  और  लूट  के लालच  में मुसलमान  बने थे , उन्हें  इस्लाम में  कोई रूचि  नहीं  थी ,वह सोचते  थे  कि  कब रसूल  मरें  और  हम  फिर से   पुराने धर्म   को अपना  ले ,यह बात  कई  हदीसों   में   दी  गयी   है , जैसे ,
 इब्ने    मुसैब  ने कहा  अधिकाँश  सहाबा   आपके बाद  काफिर  हो  जायेंगे ,और इस्लाम छोड़  देंगे "
they turned APOSTATE as renegades (reverted from Islam"
يردُ عليَّ الحوض رجال من أصْحابي فيحلون عنه. فأقول يا ربِّ أصحابي، فيقول إنَّكَ لا علم لك بما أحدثوا بعدك. إنَّهم ارْتَدَّوا على أدبارهم القهقري.

सही बुखारी - जिल्द 8  किताब 76 हदीस 586

 अबू हुरैरा  ने  कहा कि रसूल   ने  बताया   मेरे  बाद यह सहाबा इस्लाम  से विमुख  हो  जायेंगे और बिना चरवाहे  के ऊंट  की तरह  हो  जायंगे
"They turned apostate as renegades after I  left, who were like camels without a shepherd."

.‏ قُلْتُ مَا شَأْنُهُمْ قَالَ إِنَّهُمُ ارْتَدُّوا بَعْدَكَ عَلَى أَدْبَارِهِمُ الْقَهْقَرَى‏.‏ فَلاَ أُرَاهُ يَخْلُصُ مِنْهُمْ إِلاَّ مِثْلُ هَمَلِ النَّعَمِ ‏

सही बुखारी - जिल्द 8  किताब76  हदीस 587

 असमा बिन्त अबू  बकर  ने रसूल  को  बताया  कि अल्लाह  की कसम  है , आपके बाद  यह सहाबा सरपट  दौड़  कर इस्लाम  से  निकल  जायंगे "
" ‘Did you notice what they did after you? By Allah, they kept on turning on their heels (turned away from  Islam"

، عَنْ أَسْمَاءَ بِنْتِ أَبِي بَكْرٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَتْ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ إِنِّي عَلَى الْحَوْضِ حَتَّى أَنْظُرُ مَنْ يَرِدُ عَلَىَّ مِنْكُمْ، وَسَيُؤْخَذُ نَاسٌ دُونِي فَأَقُولُ يَا رَبِّ مِنِّي وَمِنْ أُمَّتِي‏.‏ فَيُقَالُ هَلْ شَعَرْتَ مَا عَمِلُوا بَعْدَكَ وَاللَّهِ مَا بَرِحُوا يَرْجِعُونَ عَلَى أَعْقَابِهِمْ ‏"‏‏
सही बुखारी - जिल्द 8  किताब 76  हदीस 592

 उक़बा बिन अमीर  ने  कहा  कि रसूल  ने  कहा  मुझे इस  बात   की चिंता  नहीं  कि मेरे  बाद  यह  लोग  मुश्रिक   हो जायेंगे ,मुझे तो इस  बात  का डर  है  कि यह  लोग दुनिया   की संपत्ति  की  लालच   में   पड़  जायंगे "
" By Allah! I am not afraid that you become polytheist after me, but I am afraid that they will start competing for, the pleasures and treasures of this world"
إنِّي و الله ما أخافُ عليكم أن تشركوا بعدي و لكني أخافُ عليكم أن تنافسوا فيها.

सही बुखारी - जिल्द  4 किताब 56 हदीस 79

6-सभी सहाबी काफिर  हो  गए 

सहाबा   केवल जिहाद   में मिलने  वाले लूट  के  माल  के  लालच  में  मुसलमान  बने  थे ,जब  मुहम्मद  मर गए तो उनको लगा कि अब  लूट का  माल  नहीं मिलगा  , इसलिए वह इस्लाम  का चक्कर छोड़   कर  फिर  से पुराने  धर्म   में लौट  गए ,यह बात शिया  हदीस  रज्जल कशी ( رجال ‏الكشي   )  में   इस तरह    बयान  की  गयी  है  " रसूल  की  मौत  के बाद  सहाबा   सहित सभी   लोग  काफिर  हो  गए  थे ,सिवाय सलमान फ़ारसी ,मिक़दाद और  अबू जर   के ,  लोगों  ने  कहा   कि  हमने सोच  रखा था  अगर  रसूल  मर गए  या उनकी  हत्या   हो  गयी  तो  हम इस्लाम  से   फिर  जायेंगे
"All people (including the Sahaba) became apostates after the Prophet's death except for three." Al-Miqdad ibn Aswad, Abu Dharr (Zarr), and Salman (Al-Farsi,When asked  they   replied, ". 'If he (Muhammad) dies or is killed, we will  turn from Islam '

- أبو الحسن و أبو إسحاق حمدويه و إبراهيم ابنا نصير، قالا حدثنا محمد بن عثمان، عن حنان بن سدير، عن أبيه، عن أبي جعفر (عليه السلام) قال : كان الناس أهل الردة بعد النبي (صلى الله عليه وآله وسلم) إلا ثلاثة.

 منهم سلمان الفارسي و المقداد و أبو ذر

(Rijal Al-Kashshi - رجال ‏الكشي  -      p.12-13

7-मौत  के बाद राजनीति 
इतिहाकारों  के  अनुसार मुहम्मद साहब  की मौत 8  जून  सन 632  को  हुई  थी, खबर  मिलते  ही  मदीना  के अन्सार  एक  छत(Shed) के  नीचे  जमा  हो  गए , जिसे "सकीफ़ा -سقيفة  "   कहा  जाता   है ,उसी  समय  अबू बकर  ने मदीना  के   जिन कबीले  के सरदारों   को बुला   लिया  था ,उनके  नाम  यह  हैं , 1 . बनू औस -بنو أوس‎" 2 . बनू खजरज - بنو الخزرج‎"3 .  अन्सार -الأنصار‎ "4 .  मुहाजिर -: المهاجرون‎ " और 5 . बनू सायदा --  بني ساعدة‎   ". और अबू बकर खुद को  खलीफा   बनाने  के लिए    इन लोगों से समर्थन    प्राप्त  करने   में   व्यस्त   हो  गए ,लेकिन   जो लोग अली  के समर्थक थे   वह उनका  विरोध  करने  लगे  , इस से अबू बकर को   मुहम्मद  साहब   को दफ़न  करवाने   का    ध्यान    नहीं  रहा    .  और अंसारों   ने  खुद उनको  दफ़न  कर  दिया  . उसी  दिन  से शिआ  सुन्नी    अलग   हो  गए

8-अबू बकर मौत से अनजान 

अबू बकर  अपनी   खिलाफत  की गद्दी  बचाने में इतने व्यस्त थे कि उनको इतना भी  होश  नहीं था  ,कि रसूल  कब मरे थे , और उनको कब दफ़न    किया  गया था  . यह  बात इस हदीस  से  पता  चलती  है , हिशाम  के  पिता ने  कहा  कि आयशा  ने  बताया जब  अबूबकर घर  आये तो , पूछा   , रसूल  कब मरे  और उन  ने  कौन से  कपडे  पहने हुए थे , आयशा ने  कहा  सोमवार   को , और सिर्फ  सफ़ेद सुहेलिया  पहने  हुए थे ,  ऊपर  कोई कमीज   और पगड़ी भी  नहीं थी , अबू बकर ने पूछा आज  कौन सा दिन   है  . आयशा बोली  मंगल  ,आयशा  ने पूछा   क्या  उनको  नए  कपडे  पहिना  दें  . ? अबू बकर बोले  नए कपड़े  ज़िंदा    लोग पहिनते  हैं  , यह  तो  मर  चुके  हैं  , और इनको  मरे  एक  दिन  हो  गया  . अब यह एक बेजान  लाश   है

ائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ دَخَلْتُ عَلَى أَبِي بَكْرٍ ـ رضى الله عنه ـ فَقَالَ فِي كَمْ كَفَّنْتُمُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَتْ فِي ثَلاَثَةِ أَثْوَابٍ بِيضٍ سَحُولِيَّةٍ، لَيْسَ فِيهَا قَمِيصٌ وَلاَ عِمَامَةٌ‏.‏ وَقَالَ لَهَا فِي أَىِّ يَوْمٍ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَتْ يَوْمَ الاِثْنَيْنِ‏.‏ قَالَ فَأَىُّ يَوْمٍ هَذَا قَالَتْ يَوْمُ الاِثْنَيْنِ‏.‏ قَالَ أَرْجُو فِيمَا بَيْنِي وَبَيْنَ اللَّيْلِ‏.‏ فَنَظَرَ إِلَى ثَوْبٍ عَلَيْهِ كَانَ يُمَرَّضُ فِيهِ، بِهِ رَدْعٌ مِنْ زَعْفَرَانٍ فَقَالَ اغْسِلُوا ثَوْبِي هَذَا، وَزِيدُوا عَلَيْهِ ثَوْبَيْنِ فَكَفِّنُونِي فِيهَا‏.‏ قُلْتُ إِنَّ هَذَا خَلَقٌ‏.‏ قَالَ إِنَّ الْحَىَّ أَحَقُّ بِالْجَدِيدِ مِنَ الْمَيِّتِ، إِنَّمَا هُوَ لِلْمُهْلَةِ‏.‏ فَلَمْ يُتَوَفَّ حَتَّى أَمْسَى مِنْ لَيْلَةِ الثُّلاَثَاءِ وَدُفِنَ قَبْلَ أَنْ يُصْبِحَ‏.‏

सही बुखारी -जिल्द 2 किताब 23 हदीस 469

विचार करने की  बात  है  कि अगर अबू बकर रसूल  के दफ़न  के समय मौजूद   थे ,तो उनको रसूल के कपड़ों  और  दफन करने वालों    के बारे में  सवाल  करने की    क्या  जरूरत    थी ? वास्तव   में अबू बकर  जानबूझ   कर  दफ़न    में नहीं   गए ,   यह  बात  कई सुन्नी  हदीसों   में   मौजूद   हैं
9-अबूबकर और उमर  अनुपस्थित 

ऎसी   ही एक हदीस है  ", इब्ने नुमैर  ने   कहा  मेरे पिता उरवा ने बताया कि अबू बकर और उमर  रसूल के जनाजे में  नही  गए ,रसूल  को अंसारों  ने दफ़न    किया  था   . और जब अबू  बकर और उमर उस  जगह  गए  थे तब तक अन्सार  रसूल  को दफ़न  कर के  जा चुके थे इन्होने रसूल  का जनाजा नहीं  देखा   . ,"

  حدثنا ابن نمير عن هشام بن عروة عن أبيه أن أبا بكر وعمر لم يشهدا دفن النبي (ص) ، كانا في الانصار فدفن قبل أن يرجعا.

Ibn Numair narrated form Hisham bin Urwah who narrated from his father (Urwa) that Abu Bakr and Umar were not present at the time of burial of the Prophet (s), they were with Ansar and He was buried before they had returned.

، فَقَالُوا‏:‏ انْطَلِقْ بِنَا إِلَى إِخْوانِنَا مِنَ الأَنْصَارِ نُدْخِلُهُمْ مَعَنَا فِي هَذَا الأَمْرِ، فَقَالَتِ الأَنْصَارُ‏:‏ مِنَّا أَمِيرٌ وَمِنْكُمْ أَمِيرٌ، فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ‏:‏ مَنْ لَهُ مِثْلُ هَذِهِ الثَّلاثِ ثَانِيَ اثْنَيْنِ إِذْ هُمَا فِي الْغَارِ إِذْ يَقُولُ لِصَاحِبِهِ لا تَحْزَنْ إِنَّ اللَّهَ مَعَنَا مَنْ هُمَا‏؟‏ قَالَ‏:‏ ثُمَّ بَسَطَ يَدَهُ فَبَايَعَهُ وَبَايَعَهُ النَّاسُ بَيْعَةً حَسَنَةً جَمِيلَةً

Shama'il Muhammadiyah-الشمائل المحمدية
English referenceBook 53, Hadith 379
Arabic referencBook 54, Hadith 396

इमाम इब्ने हजर  ने  असली  कारण बताते हुए  दर्ज  किया  कि अबू बकर  उस समय " बैय -بَيْعَة,  "   यानी सौदेबाजी   कर रहा  था  , इसलिए रसूल  के जनाजे में नहीं  गया  .
He (Abu Bakar) didn’t attend (the funeral) because he was busy with Baya’

لأنه لم يحضر ذلك لاشتغاله بأمر البيعة

Bay'ah (Arabic: بَيْعَة, literally a "sale" or a "commercial transaction")

Al-Musnaf Ibn Abi Shaybah Volume 8 page 58

Kanz ul Umal, Volume 5 page 45 Hadith 14139

 Mull Ali Qari in Sharra Fiqa Akbar, page 175 (publishers Muhammad Saeed and son, Qur'an Muhall, Karachi)

10-आयशा दफ़न से अनजान  थी 

मुसलमानों के लिए इस से   बड़ी शर्म  की  बात  और कौन सी  होगी कि   रसूल  कि प्यारी पत्नी आयशा  को  भी रसूल  के दफ़न  की  जानकारी  नही थी   , इमाम अब्दुल बर्र  ने अपनी  किताब  इस्तियाब  में  लिखा है "आयशा  ने  कहा मुझे पता  नहीं कि रसूल  को कब और कहाँ दफ़न  किया गया , मुझे तो बुधवार  के सवेरे उस  वक्त  पता  चला  ,जब रात को कुदालों   की आवाजे  हो रही थी.

Ayesha said: ‘We didn’t know about Allah's Messenger’s burial except when we heard the voice of shovels at Wednesday night, Ali, Abbas may Allah be pleased with them and Bani Hashim prayed over him.’

ذكر إبن إسحاق قال حدثتني فاطمة بنت محمد عن عمرة عن عائشة قالت ما علمنا بدفن رسول الله صلى الله عليه وسلم حتى سمعنا صوت المساحي من جوف الليل ليلة الأربعاء وصلى عليه علي والعباس رضى الله عنهما وبنو هاشم

Ibn Abdul Barr records in al-Istiab:

http://www.shiapen.com/comprehensive/saqifa/burial-of-the-prophet.html

11-रसूल  के दफ़न  में लापरवाही 
अनस बिन  मलिक  ने कहा  कि  जब रसूल  की बेटी फातिमा   को रसूल  की कब्र  बतायी  गयी  तो उसने  देखा  कि कब्र  खुली  हुई  है ,तब फातिमा ने  अनस  से   कहा  तुम मेहरबानी  कर  के  कब्र  पर  मिट्टी   डाल  दो  .
"Fatima said, "O Anas! Do you feel pleased to throw earth over Allah's Messenger"

".‏ فَلَمَّا دُفِنَ قَالَتْ فَاطِمَةُ ـ عَلَيْهَا السَّلاَمُ ـ يَا أَنَسُ، أَطَابَتْ أَنْفُسُكُمْ أَنْ تَحْثُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم 

सही  बुखारी -जिल्द 5 किताब 59  हदीस 739

इन सभी तथ्यों  से  यही निष्कर्ष  निकलते  हैं  कि ,खुद को अवतार ,सिद्ध  बताने वाले और झूठे  दावे करने वाले खुद ही अपने  जाल  में फस कर मुहम्मद  साहब    की  तरह कष्टदायी  मौत  मरते   हैं ,और जब ऐसे फर्जी   नबियों  और रसूलों   की  पोल खुल  जाती  है  ,तो उनके  मतलबी  साथी ,रिश्तेदार  ,यहाँ  तक  पत्नी   भी साथ  नहीं    देती   . यही  नहीं   किसी   भी धर्म  के  अनुयाइयो    की अधिक  संख्या   हो  जाने  पर  वह  धर्म  सच्चा  नहीं    माना  जा  सकता   है ,झूठ और पाखण्ड   का   एक न एक दिन  ईसी  तरह  भंडा  फूट   जाता   है  . केवल हमें सावधान  रहने   की  जरूरत   है।


http://www.nairaland.com/296050/death-prophet-muhammad-p.b.u.h-question


http://www.shiapen.com/comprehensive/saqifa/burial-of-the-prophet.html

मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

वेदों से प्रभावित ईसा मसीह की शिक्षा !

इस्लामी मान्यता   के अनुसार्   अल्लाह   लोगों   का  मार्गदर्शन   करने  के  लिए  समय  समय   पर  अपने  नबी  ( Prophets )  या  रसूल    भेजता   रहता   है  ,और अल्लाह  ने   फरिश्तों   के  द्वारा द्वारा  कुछ  रसूलों   को   किताब   भी   दी   है  , इसी  तरह्   से  इस्लाम  में  मुहम्मद   को   भी  ईसा  मसीह    की  तरह  एक   रसूल  माना   गया   है  . और अल्लाह    ने ईसा  मसीह   को   जो  किताब   दी  थी , मुसलमान  उसे इंजील  और  ईसाई   उसे नया  नियम    (New Testament )  कहते   हैं , चूँकि  मुसलमान  मुहम्मद   को  भी  अल्लाह   का  रसूल    मानते   हैं  , लेकिन  मुहम्मद  और ईसामसीह    की शिक्षा   में   जमीन   आसमान    का  अंतर   है  ,  जबकि  इन  दौनों   को  एक   ही  अल्लाह   ने   अपना  रसूल   बना  कर  भेजा   था, इसका असली   कारण  हमें  बाइबिल   के  के नए  नियम   से  और   ईसा  मसीह  की  जीवनी    से   नहीं  बल्कि कुछ  ऎसी  किताबों  से  मिलता  है , जिनकी   खोज  सन  1857 ईस्वी    में   हुई  थी।

1-ईसा के जीवन  के अज्ञात वर्ष 

ईसा  मसीह  के अज्ञात  वर्षों   को  दो  भागों  में  बांटा  जा  सकता  है ,जिनके बारे में अभी  तक  पूरी  जानकारी   नहीं  थी, पहला भाग 14  साल  से 30  साल  तक  है  , यह 18  साल   ईसा  के  क्रूस  पर  चढाने  तक   का   है  .  दूसरा   काल  क्रूस   पर  चढाने   से  ईसा   की  म्रत्यु   तक   है ,

ईसाई  विद्वानों   के अनुसार  ईसा  मसीह  का  जन्म 25 दिसंबर सन  1  को   इस्राएल  के  शहर  नाजरथ   में हुआ  था , उनके  पिता  का  नाम  यूसुफ  और  माता   का  नाम  मरियम  था ,ईसा    बचपन  से  ही कुशाग्र  बुद्धि  थे  ,   इसका  प्रमाण   बाइबिल   में   इस प्रकार  दिया  गया   है ,
"जब  ईसा  12  साल  के  हुए तो माता  पिता  के साथ  त्यौहार  मानाने  यरूशलेम  गए. और वहीं  रुक  गए , यह  बात उनके   माँ  बाप  को पता   नहीं  थी  ,  वह  समझे   कि  ईसा   किसी  काफिले  के  साथ   बाहर  गए   होंगे  ,लेकिन  खोजने  के  बाद ईसा  मंदिर   में विद्वानों  के साथ चर्चा  करते  हुए  मिले , ईसा   ने   माता  पिता से  कहा आप  मुझे  यहाँ  देखकर  चकित  हो  रहे  हो  ,लेकिन  आप   अवश्य  एक  दिन   मुझे अपने   पिता के  घर  पाएंगे
बाइबिल - लूका 2 :42  से  50  तक  ,
इसके  बाद   30  साल   की  आयु तक यानि   18  साल  ईसा   मसीह  कहाँ  रहे   और  क्या  करते  रहे इसके  बारे  में कोई  प्रमाणिक   जानकारी   न  तो  बाइबिल   में  मिलती  और  न  ईसाई   इतिहास      की   किताबों   में   मौजूद  है ,ईसा  मसीह    के  इन 18 साल  के अज्ञातवास को  इतिहासकार "ईसा  के  शांत  वर्ष (Silent years) ,खोये  हुए  वर्ष ( Lost years  ) और और " लापता  वर्ष  (Missing years ) के  नाम  से  पुकारते   हैं  . 

2-ईसा  की पहली   भारत यात्रा  

इस्राएल  के राजा  सुलेमान   के  समय से ही    भारत  और  इजराइल   के  बीच  व्यापार   होता  था  .  और काफिलों    के  द्वारा   भारत के  ज्ञान  की  प्रसिद्धि  चारों तरफ   फैली   हुई  थी  . और  ज्ञान प्राप्त  करने  के लिए ईसा  बिना  किसी   को  बताये  किसी   काफिले  के साथ  भारत चले  गए  थे.इस बात    की खोज सन 1887  में  एक  रूसी शोधकर्ता "निकोलस  अलेकसैंड्रोविच  नोतोविच  ( Nikolaj Aleksandrovič Notovič )   ने   की  थी .इसने   यह   जानकारी  एक  पुस्तक  के  रूप  में प्रकाशित  करवायी   थी  ,  जिसमे 244 अनुच्छेद   और  14  अध्यायों   में  ईसा की  भारत  यात्रा का  पूरा विवरण  दिया  गया  है पुस्तक  का नाम "  संत  ईसा  की  जीवनी  (The Life of Saint Issa )  है .पुस्तक में  लिखा  है ईसा   अपना शहर  गलील  छोड़कर  एक  काफिले  के साथ  सिंध   होते  हुए  स्वर्ग  यानी  कश्मीर गए , वह उन्होंने " हेमिस -Hemis"   नामके बौद्ध  मठ  में  कुछ  महीने  रह  कर  जैन और  बौद्ध  धर्म  का ज्ञान  प्राप्त  किया और संस्कृत  और  पाली  भाषा भी  सीखी  . यही  नही ईसा मसीह  ने संस्कृत  में अपना  नाम " ईशा " रख  लिया था  ,जो यजुर्वेद  के  मंत्र 40:1  से   लिया  गया  है  जबकि  कुरान   उनक नाम  "  ईसा - (عيسى  "   बताया  गया   है  .नोतोविच ने अपनी  किताब  में ईसा  के बारे में  जो महत्त्वपूर्ण   जानकारी  दी  है  उसके कुछ अंश  दिए  जा रहे  हैं  ,

तब ईसा  चुपचाप अपने पैतृक    नगर यरूशलेम  को छोड़कर एक  व्यापारी  दल के साथ सिंध   की  तरफ  रवाना  हो  गए "4:12 
उनका उद्देश्य धर्म  के  वास्तविक  रूप के बारे  में  जिज्ञासा  शांत  करना  , और खुद को परिपक्व   बनाना   था "4:13 
फिर  ईसा  सिंध और  पांच  नदियों  को  पार  करके राजपूताना    गए ,वहाँ  उनको जैन  लोग  मिले , जिनके साथ  ईसा ने  प्रार्थना   में  भी  भाग  लिया "5:2 
लेकिन  वहाँ   इसा को समाधान   नही  मिला, इसलिए  जैनों   का साथ  छोड़कर  ईसा उड़ीसा  के  जगन्नाथ  मंदिर  गए , वहाँ उन्होंने  भव्य  मूर्ती  के दर्शन   किये  , और काफी  प्रसन्न  हुए "5:3 

फिर  वहाँ   के पंडितों   ने उनका आदर  से  स्वागत   किया  , वेदों   की  शिक्षा   देने   के साथ  संस्कृत   भी  सिखायी "5:4 
पंडितों   ने  बताया   कि   वैदिक  ज्ञान  से सभी  दुर्गुणों   को   दूर  करके  आत्मशुद्धि    कैसे    हो सकती   है "5:5 

फिर  ईसा राजगृह    होते  हुए  बनारस  चले गए  और वहीँ  पर  छह  साल  रह  कर  ज्ञान  प्राप्त  करते  रहे  " 5:6 
और जब   ईसा  मसीह    वैदिक  धर्म   का  ज्ञान  प्राप्त   कर  चुके  थे  तो उनकी  आयु  29  साल   हो  गयी  थी  ,  इसलिए   वह  यह  ज्ञान  अपने  लोगों  तक   देने के  लिए   वापिस  यरूशलेम    लौट    गए  ., जहाँ   कुछ   ही  महीनों  के  बाद  यहूदियों   ने     उनपर  झूठे  आरोप     लगा लगा  कर  क्रूस पर  चढ़वा    दिया  था , क्योंकि  ईसा     मनुष्य   को  ईश्वर   का  पुत्र      कहते थ  .

http://reluctant-messenger.com/issa1.htm

3-ईसा मसीह  को  क्रूस  पर चढ़ाना 
जब ईसा   मसीह   अज्ञातवास  से  लौट  कर  वापिस  यरूशलेम   आये  तो  उनकी  आयु  लगभग  30  साल    हो  चुकी  थी  .  और बाइबिल  में  ईसा मसीह   के बारे में उसी काल  की  घटनाओं   का  विवरण  मिलता   है  ,  चूँकि  ईसा  मसीह यहूदियों   के  पाखंड     का  विरोध   किया  करते  थे ,   जो  येहूदी पसंद   नही  करते  थे  .  इसलिए  उन्होंने   ईसा  मसीह   को  क्रूस पर  चढ़ा   कर  मौत  की  सजा  दिलवाने की  योजना   बनाई  थी ,ईसा  मसीह   को शुक्रवार 3 अप्रेल  सन  30  को  दोपहर   के समय  चढ़ाया   गया  था  , और  सूरज  ढलने  से  पहले क्रूस  से उनके  शरीर  को उतार  दिया  गया था  ,
  बाइबिल   के अनुसार ईसा    के  क्रूस  पर   जो आरोपपत्र   लगाया   गया   था   वह  तीन  भाषाओं   "  लैटिन  ,ग्रीक  और हिब्रू  "  भाषा  में  था  , जिसमे  लिखा  था  .

(Latin: Iēsus Nazarēnus, Rēx Iūdaeōrum

एसुस नाजारेनुस  रेक्स यूदाओरुम 

Greek-  Basileus ton Ioudaion .

Hebrew-ईशु  मिन  नजारेत  मलेक ह यहूदियीम 

 "ישו מנצרת, מלך היהודים"

अर्थात -नाजरथ  का  ईसा यहूदियों   का  राजा -बाइबिल -यूहन्ना 19 :19 

4-ईसा क्रूस   की  मौत  से  नहीं  मरे 

बाइबिल  के अनुसार ईसा  को  केवल  6  घंटे  तक  ही  क्रूस  पर  लटका  कर  रखा  गया  था , और  वह जीवित  बच गए  थे  ,  उनके एक शिष्य  थॉमस   ने  तो  उनके  हाथों  में कीलों   के छेदों  में उंगली  डाल  कर  देख  लिया  था   कि वह  कोई  भूत नहीं  बल्कि  सचमुच  ईसा   मसीह  ही  हैं.यह पूरी घटना  बाइबिल की  किताब यूहन्ना  20: 26   से 30  तक  विस्तार  से  दी  गयी   है. बाइबिल   में  यह  भी  बताया  गया   है  कि ईसा बेथनिया  नाम   की   जगह  तक अपने  शिष्यों  के  साथ  गए थे , और उनको आशीर्वाद  देकर स्वर्ग    की  तरफ  चले  गए ,(  बाइबिल - लूका 24:50 ) 
यद्यपि  बाइबिल  में  ईसा   के  बारे में  इसके  आगे  कुछ  नहीं   लिखा   गया   है  ,  लेकिन   इस्लामी  हदीस " कन्जुल उम्माल- كنج العمّال "  के  भाग  6 पेज 120 में   लिखा है  कि  मरियम    के  पुत्र  ईसा  इस   पृथ्वी  पर   120  साल  तक    जीवित  रहे ,
عيسى ابن مريم عاش لمدة 120 سنة،  "Kanz al Ummal, part 6, p.120
"

5--कुरान  की  साक्षी 

और यह लोग  कहते  हैं  कि हमने  मरियम  में बेटे ईसा  मसीह   को  मार डाला ,हालाँकि न तो  इन्होने उसे क़त्ल  किया और  न  सूली  पर  चढ़ाया   ,बल्कि यह  लोग  एक ऐसे  घपले  में  पड़  गए कि  भ्रम  में  पड  गए " सूरा -निसा -4 :157 

नोट -इस आयत   की  तफ़सीर में  दिया  है  कि यहूदियों   ने  जिस व्यक्ति  को  क्रूस  पर  चढ़ाया  था वह  कोई  और  ही  व्यक्ति  था  जिसे  लोगों   ने ईसा  मसीह  समझ   लिया  था।

6- ईसा  की अंतिम  भारत यात्रा  

इस्लाम  के  कादियानी  संप्रदाय   के स्थापक  मिर्जा  गुलाम  कादियानी (1835 -1909 )    ने  ईसा मसीह  की  दूसरी  और अंतिम  भारत यात्रा   के बारे में  उर्दू में  एक शोधपूर्ण    किताब  लिखी   है , जिसका नाम " मसीह  हिंदुस्तान   में "  है  . अंगरेजी  में  इसका  नाम  " Jesus in India "  है। इस  किताबों  में अनेकों ठोस  सबूतों   से प्रमाणित  किया  गया  है  कि , ईसा  मसीह क्रूस  की  पीड़ा सहने  के बाद  भी   जिन्दा  बच  गए  थे   . और जब  कुछ दिनों   बाद उनके   हाथों , पैरों  और   बगल    के घाव  ठीक  हो  गए थे  तो  फिर से यरूशलेम  छोड़  कर ईरान  के  नसीबस   शहर   से होते  हुए  अफगानिस्तान    जाकर  रहने   लगे , और   वहाँ  रहने वाले इजराइल   के  बिखरे हुए 12   कबीले  के  लोगों  को उपदेश    देने   का   काम   करते  रहे  . लेकिन अपने जीवन  के अंतिम  सालो   में  ईसा   भारत   के स्वर्ग  यानि  कश्मीर  में  आकर  रहने   लगे  थे  , और 120  साल  की आयु  में उनका  देहांत  कश्मीर  में  ही हुआ , आज  भी  उनका  मजार  श्रीनगर   की  खानयार स्ट्रीट    में  मौजूद   है ,

http://www.alislam.org/library/books/jesus-in-india/intro.html

7-ईसा मसीह कश्मीर में दफ़न है ,
ईसा  मसीह   के समय कश्मीर  ज्ञान  का  केंद्र था,वहाँ  अनेकों  वैदिक   विद्वान्  रहते  थे  . इसीलिये  जीवन  के अंतिम समय   ईसा  कश्मीर  में बस   गए  थे  उनकी  इच्छा   थी  कि  मरने  के बाद  उनको  इसी  पवित्र  में  दफ़न  कर  दिया  जाये  . और ऐसा   ही  हुआ  था  , यह  खबर टाइम्स ऑफ़ इण्डिया में  दिनांक  8  मई 2010 में  प्रकाशित   हुई  थी  . 

"That Jesus survived crucifixion, travelled to Kashmir, eventually died there and is buried in Srinagar ,. Every season hundreds of tourists visit the Rozabal shrine of Sufi saint Yuz Asaf in downtown Srinagar, believed by many to be the final resting place of Christ. 

http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2010-05-08/india/28322287_1_srinagar-shrine-jesus

http://www.tombofjesus.com/index.php/en/the-rozabal-tomb/photos

8-वेदों और ईसा  की शिक्षा  में समानता 

ईसा मसीह  भारतीय  अध्यात्म  और ज्ञान  से  इतने अधिक प्रभावित थे  कि  छोटी  सी आयु  में  ही   यरूशलेम   छोड़ कर   हजारों   मील  दूर   भारत  आये थे ,  और  यहाँ   ज्ञान   प्राप्त   किया  था.तुलसी दास   जी  ने  कहा  है " एक घड़ी  , आधी घडी  , आधी  में  पुनि आधि , तुलसी संगत  साधु  की  कोटक  मिटे उपाधि " और  ईसा मसीह  तो  भारत   में  छह साल  रहे थे  . इसलिए उनके स्वभाव  और  विचारों   में  मुहम्मद  जैसी  कूरता   और  दूसरे   धर्म   के  लोगों   के  प्रति  इतनी   नफ़रत   नही     थी    , यह   बात   मुहम्मद  , ईसा   मसीह    की   शिक्षा      की  तुलना   करने  से  स्पष्ट    हो  जाता  है     जिसके  संक्षिप्त  में  कुछ  उदाहरण  दिए   जा  रहे   हैं  ,पहले  मुहम्मद   की  शिक्षा   फिर ईसा  मसीह    के वह  वचन   दिए  हैं  ,जो  वेदों   में  दिए   गए   हैं ,

मुहम्म्द -"जान  लो  कि अल्लाह कफिरों  से  प्रेम  नही  करता " सूरा- आले इमरान  3 :32 

(Allah hates those who don’t accept Islam. (Qur’an  3:32,)

ईसा  मसीह - ईश्वर  संसार  के  हरेक  व्यक्ति  से  प्रेम रखता   है " बाइबिल -नया  नियम  यूहन्ना 3 :16 

(God loves everyone. (John 3:16)

वेद -ईश्वर  हमें  पिता ,माता  और  मित्र  की  तरह  प्रेम  करता  है .ऋगवेद -4 /17 /17 

मुहम्म्द -"रसूल  ने कहा   कि मुझे  लोगों से तब तक  लड़ते रहने  का   हुक्म  दिया  गया  है   जब  तक  यह  लोग स्वीकार  नहीं  करते  कि अल्लाह   के आलावा  कोई  भी  इबादत  के योग्य  नहीं  , और  मुहम्मद  उसका रसूल   है  "

(“I have been commanded to fight against people till they testify that there is no god but Allah, and that Muhammad is the messenger ofAllah.”


"‏ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَشْهَدُوا أَنْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ

 सही मुस्लिम -किताब  1  हदीस 33

ईसा  मसीह -"यीशु  ने  कहा  तुम  अपनी  तलवार  मियान  में  ही  रखो। क्योंकि  जो लोग दूसरों  पर तलवार उठाएंगे  वह तलवार   से  ही  मरेंगे "बाइबिल . नया  नियम- मत्ती- अध्याय 26 :52 

( “He who lives by the sword will die by the sword” (Matthew 26:52)

वेद -जिस प्रकार द्युलोक  और पृथ्वी  न  तो  किसी  को डराते  हैं ,और न  किसी  से हिंसा  करते  हैं  वैसे  ही मानव  तू  भी  किसी  को  नहीं  डरा  और  न   किसी  पर  हथियार उठा -अथर्ववेद -2/11

http://shariaunveiled.wordpress.com/2013/07/28/the-teachings-of-muhammad-v-jesus-christ/


यह लेख उन  लोगों की ऑंखें   खोलने  के लिए  बानाया   है  ,जो जिहाद यानी   निर्दोषों   की  हत्या     को  ही  असली   धर्म    मान  बैठे   हैं  .  जबकि  उसी  अल्लाह  के रसूल   ईसा   ने हजारों  मील दूर   भारत   से  सच्चे  धर्म  यानी  वैदिक धर्म   का  ज्ञान   बिना   जिहाद  कट्टर  यहूदियों    तक  पहुँचाने का  प्रयास    किया  था  . हम  ईसा   मसीह  के  भारत  प्रेम और   वेदों     पर  निष्ठा   को  नमन  करते  हैं.
लेकिन बड़े दुःख   की  बात  है  कि  इतने  पुख्ता  प्रमाण  होने  पर  भी ईसाई इस सत्य  को स्वीकार   करने   से हिचकिचाते  हैं

http://lifeofsaintissa.blogspot.in/

सोमवार, 2 दिसंबर 2013

कांग्रेसी धर्मनिरपेक्षता या मोदी का डर?

विभाजन कांग्रेस द्वारा भारत को लेकर देखे गए सपने पर एक गहरा धक्का था, फिर भी कांग्रेस के नेता विभाजन के लिए तैयार हो गए थे. उन्होंने मुहम्मद अली जिन्ना का विरोध नहीं किया. इस बात के काफी सबूत हैं कि कांगे्रसी नेता अप्रैल 1947 तक मुस्लिम लीग से छुटकारा पाने के लिए काफी अधीर हो उठे थे. . भारतीय नेता अक्सर "ईद मुबारक "यह मुबारकबाद क्यों दिखावटी तरी़के से देते हैं. आख़िर इसी तरी़के से वे दीपावली, दशहरा और क्रिसमस की बधाई क्यों नहीं देते हैं? क्यों वे इफ्तार पार्टियों में जाना पंसद करते हैं, लेकिन क्रिसमस पर होने वाले कार्यक्रमों में वे शरीक नहीं होते.क्या भारतीय मुसलमान नेताओं के इन तरीक़ों से मूर्ख बन जाते हैं या इन बनावटी तरीक़ों से अब वे आजिज़ आ चुके हैं.
 आगामी लोकसभा चुनाव कई मामलों में ऐतिहासिक होने जा रहा है, लेकिन सबसे ब़डा प्रश्‍न यह है कि भारत में मुसलमान होने के मायने क्या हैं? जब से भाजपा ने नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है, कांग्रेस व अन्य धर्मनिरपेक्ष पार्टियों का यह अनुमान है कि वे गुजरात दंगों का डर दिखाकर मुस्लिम मतों का धु्रवीकरण अपनी तरफ़ कर लेंगी. कांग्रेस व अन्य धर्मनिपेरक्ष पार्टियों के लिए धर्मनिरपेक्षता का स़िर्फ एक मतलब है, मुस्लिम वोट को किसी भी तरह हथियाना. विभाजन की त्रासदी के बाद भारत में मुसलमानों के साथ दूसरे समुदायों से भिन्न व्यवहार किया जाता रहा है. यहां तक कि जो वास्तविक धर्मनिरपेक्ष नेता हैं, वे उन्हें मुसलमान कहने तक से बचते हैं. वे उन्हें अल्पसंख्यक कहते हैं, लेकिन क्या भारत में दूसरे अल्पसंख्यक समुदाय नहीं हैं? क्या मुस्लिम, भारत के सबसे ब़डे अल्पसंख्यक समुदाय हैं या वे भारत के दूसरे ब़डे बहुसंख्यक हैं (जैसा की हाल ही में जावेद जमील ने अपने लेख में लिखा है).
 क्या मुस्लिमों को अल्पसंख्यक का दर्जा उनकी नागरिकता को एक पद ऊपर उठाता है? क्या वे एकमात्र अल्पसंख्यक समुदाय हैं, जो इस दर्जे का आनंद (या कष्ट) उठाते हैं. विभाजन कांग्रेस द्वारा भारत को लेकर देखे गए सपने पर एक गहरा धक्का था, फिर भी कांग्रेस के नेता विभाजन के लिए तैयार हो गए थे. उन्होंने मुहम्मद अली जिन्ना का विरोध नहीं किया. इस बात के काफ़ी सबूत हैं कि कांग्रेसी नेता अप्रैल 1947 तक मुस्लिम लीग से छुटकारा पाने के लिए काफ़ी अधीर हो उठे थे. सही मायने में देखा जाए तो वे मुस्लिम लीग के साथ सत्ता का बंटवारा नहीं करना चाहते थे. ऐसा कहा जाता है कि बंटवारे में सिर्फ जिन्ना विश्‍वास करते थे, कांग्रेस नहीं. बंटवारे को कांग्रेस ने सीधे तौर पर तो स्वीकार नहीं किया. हालांकि उसे दगाबाज़ अंग्रेज़ों की वजह से स्वीकार करना प़डा था. बंटवारे का विरोध नहीं करने पर पार्टी में एक अपराधबोध पैदा हुआ, जिसका परिणम एक अहंकार भरे अनुमान के रूप में सामने आया कि भारत में कांग्रेस ही एक ऐसी पार्टी है, जो मुस्लिमों का कल्याण कर सकती है, जिसकी वजह से मुस्लिमों को हमेशा मूल नागरिकता मिलने में मुश्किलें होती रहीं. ऐसा माना गया कि उन्हें हमेशा एक विशेष व्यवहार की ज़रूरत है, लेकिन अब 66 सालों के विलंब के बाद समय आ गया है कि इस विषय पर खुली बहस की जाए कि आख़िर भारत में एक मुसलमान होने के मायने क्या हैं? अठारह करो़ड की आबादी वाले इस समुदाय को विशेष बर्ताव की कोई ज़रूरत नहीं है. इन्हें भारत के किसी भी अन्य समुदाय के नागरिक की तरह ही माना जाना चाहिए. पिछले दिनों मुस्लिम समुदाय के बीच में चर्चा ज़ोरों पर थी. वो यह कि समुदाय के ब़डे नेता महमूद मदनी ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष पार्टियां हिंदुत्व का भय दिखाकर मुसलमानों को उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित कर रही हैं. ये पार्टियां मुस्लिम वोटरों से कहती हैं कि समुदाय के पास उन्हें वोट देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, लेकिन इन धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को वोट देने के बावजूद मुस्लिम समुदाय सामाजिक और आर्थिक सूचकांक में कहीं भी नहीं ठहरता. अगर हमारे पास धर्मनिरपेक्ष सिद्धांत की बजाय समान नागरिकता होती तो हमें मंडल कमीशन का सामना नहीं करना प़डता, जो पूरी तरह हिंदू आरक्षण एजेंडे पर आधारित था और अन्य सभी समुदायों को इससे वंचित रखता है. अगर कोई सकारात्मक क़दम उठाना है तो यह आर्थिक और सामाजिक आधार पर होना चाहिए. आख़िर मंडल कमीशन ने पिछ़डों और कमज़ोरों को आरक्षण देने के लिए हिंदू रुख़ क्यों अपनाया? और अगर उन्होंने ऐसा किया भी तो उनके बाद की सरकारों ने संविधान के मूलभूत अधिकारों का हनन करते हुए इसे जारी क्यों रखा?
एक बार अगर आपने धर्मनिरपेक्षता को बुरी तरह छोड़ दिया तो आपको दोबारा मुस्लिम दलितों और इसाई दलितों को परिभाषित करना होगा. मुस्लिमों पर एक नये तरह की बहस छे़डकर मंडल कमीशन के बकवास को बंद कर एक ऐसा तरीक़ा ईजाद करना होगा, जिससे सभी समुदायों के पिछ़डों को लाभ पहुंचाया जा सके. यही अंतिम समावेश होगा. और अंतिम में, यह कहना की भाजपा की सरकार में मुस्लिम परेशानी में प़ड जाएंगे, यह भारत के पिछले 66 वर्षों के लोकतांत्रिक इतिहास की तरफ़ भी इशारा करता है. यह एक कमज़ोर दलील है कि एक ही पार्टी हमेशा सत्ता में बने रहना चाहिए. क्या ऐसा नहीं है कि बीते वर्षों में एक ही पार्टी ने उन्हें कमज़ोर और पिछ़डा बनाए रखा है. .

 http://www.chauthiduniya.com/2013/11/

गुरुवार, 28 नवंबर 2013

महिला उत्पीड़न इस्लाम की सौगात !

आज  हम जैसे  ही टी .वी . खोलते  हैं ,या अखबार  पढते हैं  रोज  कहीं  न कहीं बलात्कार और महिलाओं  पर होने वाली  हिंसा   की  खबर  जरुर  मिल   जाती  है , यह लोगों   में  महिलाओं के  प्रति  सम्मान  में   कमी  होने    का  सूचक  है , लेकिन  सब जानते  हैं कि  आज  से  पचास  साल पहले लडके शादी  के   बारे में  भी नहीं   जानते  थे बलात्कार  तो  दूर की   बात  है .दिनों दिन  ऐसे   ही  महिलाओ  पर  होने वाले अपराधों  की  बढती  हुई  संख्या  चिंतनीय   है ,
महिलाओं  पर  होने  वाली  हिंसा(Definition of Violence Against Women)की  परिभाषा  में यह  अपराध   माने  गए  हैं ,लिंग आधारित  भेदभाव ,महिला की  स्वतंत्रता  पर  पाबंदी  लगाना ,शारीरिक या मनसिक  आघात  पहुंचाना ,दहेज  प्रताड़ना ,महिला जननांग  विकृति ,महिलाओं  के  लिए  हानिकारक  प्रथाओं  को बढ़ावा  देना ,कार्यालय में यौन शोषण ,महिला  तस्करी ,जबरन  वेश्यावृति  करवाना ,  बाल  विवाह ,शारीरिक  चोट  पंहुचाना .और  बलात्कार .परन्तु   विश्व  में और भारत में बलात्कार  की  सबसे अधिक  घटनाएं  पायी   जाती  हैं .जिस  से  देश  के  अभी  देश इन  अपराधों पर  अंकुश  लगाना चाहते  हैं , और   हर  साल  पूरे विश्व में 25  नवम्बर को महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस- International Day for the Elimination of Violence against Women(महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस)"मनाया  जाता  है .
http://en.wikipedia.org/wiki/Declaration_on_the_Elimination_of_Violence_Against_Women

   यद्यपि  अंतर्राष्ट्रीय स्तर  पर  महिलाओं  पर  होने वाली  हिंसा  और बलात्कार को रोकने  के लिए उपाय भी   किये जाते  है  , औरकुछ  लोग इसको आधुनिक   काल  की  देन  समझ  लेते   हैं लेकिन वास्तव  में यह  इस्लाम  की  सौगात  है , जो  कई   रूपों  में  सारी दुनिया  में  बँट  रही   है .आज  लोग  इस  सत्य से अनभिज्ञ   है कि  इन अपराधों   कारण  इसलाम  की  महिला  विरोधी शिक्षा  ही   है . और कुरान और हदीस से  यही  बात  साबित होती  है इसके  कुछ  उदहारण दिए    जा रहे   हैं ,

1-औरत को खेती  की  तरह जोतो  
 "औरतें  तुम्हारे  लिए खेती  के समान  है ,तो खेती  में जैसे चाहो  हल चलाओ " सूरा -बकरा 2 :223

"रसूल  ने कहा  कि अल्लाह ने लूत पर कृपा  की , और उसे सबकुछ  करने  की आजादी  देदी . और यदि  मैं  भी उसकी  जगह  होता ,तो  यही  काम  करता  , और मुझे ऐसा करने में  कोई  लज्जा  भी  नहीं आती "
सही बुखारी - जिल्द 6 किताब 60 हदीस 51

नोट- यह हदीस  कुरान  की 2 :223  के  संदर्भ  में  कही  गयी  है , कुरान के अनुसार  लूत  नामके नबी  ने अपनी  पुत्रियां सहवास क लिए  दूसरों  के हवाले  कर  दी थीं .

अबू हुरैरा  ने कहा  कि रसूल ने  कहा  यदि  कोई औरत पति  के साथ सम्भोग  करने   पर राजी  नही होती , तो फ़रिश्ते  उस  से नाराज  हो जाते  हैं , सही बुखारी  -जिल्द4 किताब  54 हदीस 460
अबू हुरैरा  ने कहा  कि रसूल ने  कहा  यदि  कोई औरत पति  के बुलावे   पर  तुरंत सम्भोग  के  लिए  तैयार  नही  होती  , तो जन्नत क फ़रिश्ते उस पर तब  तक धिक्कार  करते रहते  हैं  , जब  तक वह  सम्भोग  नही करवा  लेती "सही मुस्लिम -किताब 8हदीस 3367

इन सबूतों  से सिद्ध  होता  है  कि  इस्लाम  की  नजर में औरतें  सिर्फ  बच्चे पैदा  करने की मशीन  है ,और उनको  किसी के हवाले किया  जा सकता  यही  नहीं  उन से उनकी इच्छा  के विरुद्ध  भी  सम्भोग  किया  जा सकता  है .
2-.पति का दर्जा  पत्नी  से ऊँचा 

हाँ  परुषों  को स्त्रियों  पर  एक दर्जा प्राप्त  है 'सूरा बकरा 2:228 

 इमरान ने कहा कि रसूल  ने बताया  ,मैंने जब  जहन्नम  की  तरफ  देखा   तो  वहाँ अधिकांश  औरतें   ही  भरी  थी '
सही बुखारी जिल्द 7 किताब 62 हदीस 126

अब्दुल्लाह बिन उमर  ने  कहा  रसूल  ने बताया  तीन चीजों  में अवगुण  होते  हैं , घोड़ा ,मकान  और औरत
 सही बुखारी जिल्द 4 किताब 52 हदीस 110


3- विरासत में  पुरषों  को  स्त्रियों  से दोगुना  हिस्सा 

पुरुष  का हिस्सा  दो स्त्रियों  के  हिस्से  के बराबर  है सूरा -निसा 4:21 

हुजैल बिन शीरबाहिल ने  कहा  कि अबू मूसा ने रसूल  से विरासत  में पुत्री  ,पुत्र  की लड़की और  बहिन  के हिस्से  के बारे में सवाल  किया  , तो रसूल बोले पुत्री का आधा हिस्सा और बहिन  का भी  आधा भाग  होगा "  सही बुखारी -जिल्द 8 किताब 80 हदीस 728

हुजैल ने  कहा  कि रसूल  बोले  मैंने विरासत के बारे में यह फैसला किया है कि आधा भाग पुत्री  को . छठवां  भाग  पुत्र की बेटी  को और बाक़ी बचा हुआ बहिन  को मिलेगा " 
सही बुखारी -जिल्द 8 किताब  80 हदीस 734

4-.औरतों  की  गवाही   मर्दों  से आधे  बराबर 

अपने  पुरुषों में से दो गवाहों की गवाही कर लो यदि दो पुरष न हों तो एक पुरष के लिए दो स्त्रियों  को गवाह बना लो "सूरा -बकरा 2:282

 सईदुल खुदरी  ने  कहा  कि रसूल  ने बताया ओरतों   की गवाही  पुरुषों  से आधे  के बराबर  इसलिए मानी  जाती  है ,क्योंकि उनकी समझ में  कमी  होती  है 'सही बुखारी जिल्द 3 किताब 48 हदीस 826

5- हलाला या व्यभिचार 

यदि कोई अपनी  पत्नी को तलाक  दे दे ,तो उस स्त्री  के लिए  जायज  नही  होगा जब  तक वह किसी  दूसरे पति से शादी  न  कर ले  और वह पति भी तलाक दे दे तब इन दौनों  के लिए एक दूसरे  कि तरफ पलटने  में कोई दोष  नही  होगा " सूरा - बकरा 2:230

इस आयत  के स्पष्टीकरण  के  लिए देखिये यह फतवा
पहली और दूसरी  बार  तलाक बोलने पर पत्नी को वापिस  लीया  जा सकता  है ,लेकिन  तीसरी  बार  तलाक  कहने पर पत्नी उसके लिए वर्जित  हो  जाती  है ,जब  तक  वह् किसी दूसरे व्यक्ति से शादी  करके उसके साथ सम्भोग  न  करवा  ले ,इस  विधि  को हलाला  कराना कहा  जाता  है ,

http://islamqa.com/en/ref/70342

6-पकड़ी  गयी  औरतें स्वामी की संपत्ति 

तुम्हारी लिए ऎसी स्त्रियां  हराम  हैं ,जो किसी के निकाह में हों , सिवाय उनके जो पकड़ कर  तुम्हारे कब्जे में  आगयी  हों " सूरा -निसा 4:24 

बुरैदा ने कहा कि रसूल ने ख़ुम्स ( टेक्स )  के रूप में औरतें  पकड़  कर  लाने का आदेश दिया , और जब अली पकड़ी  गयी  एक औरत से साथ बलात्कार  करके  नहा रहा  था तो मैंने देख लिया , और जब यह बात रसूल  को बताई  तो वह बोले इस से अच्छा  ख़ुम्स और  क्या  हो सकता  है "
सही बुखारी -जिल्द 5  किताब 59 हदीस 637

आयशा  ने कहा  कि रसूल इतने सदाचारी थे कि पराई स्त्रियों पर हाथ भी  नहीं  लगाते  थे , लेकिन  पकड़ी  गयी  औरतों  के साथ सम्भोग  किया  करते थे "सही बुखारी -जिल्द 9 किताब 89 हदीस 321

अर्थात  इस्लाम  बलात्कार  को  भी  जायज  मानता  है .

7- पुरुषो   के लिए  चार पत्नियां 

 तुम चाहो  तो  दो दो ,तीन तीन  , और चार  पत्नियां  रख सकते हो " सूरा -निसा 4:3

मिस्वार बिन अकरमा  ने कहा  कि रसूल ने कहा ,बनू हिशाम  बिन  मुग़ीरा  ने अपनी बेटी की शादी अली से करवाने  की अनुमति  मांगी , लेकिन  मैंने  कहा जब तक  अली  मेरी  बेटी  को तलाक  नही  देता ,ऐसा  नही  हो सकता .क्योंकि फातिमा  मेरे शरीर  का हिस्सा है "
सही बुखारी - जिल्द 7 किताब 62 हदीस 157

अर्थात  इस्लाम  पुरुषों  को चार पत्नियां  रखने  की  अनुमति  देता  है , तो स्त्रियों  को भी चार  पति रखने की अनुमति  क्यों  नही देता ?

8-लाटरी  निकाल  कर सम्भोग 

तुम एक ही औरत की तरफ बिल्कुल  नहीं झुक  जाना  ,और दूसरी  को इस तरह  नही  छोड़ देना जिसे कोई अधर  में  लटका   हुआ हो .यदि तुम  स्त्रियों  में न्याय  नहीं  कर सकते "सूरा -निसा 4:129

आयशा ने कहा कि रसूल  जब  भी यात्रा   में बहार जाते थे  लाटरी  निकाल  कर तय करते थे  कि कौन सी पत्नी उनके साथ  सोयेगी "
सही बुखारी  जिल्द 3 किताब 47  हदीस 766 

आयशा ने कहा कि रसूल  पर्ची  निकाल  कर ( लॉटरी )  हरेक औरत के लिए सम्भोग   की  बारी  तय  करते थे . और मैं अक्सर अपनी बारी सौदा  बिन्त जमआ   को दे  देती थी "-मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3451

9-पत्नी  को जब चाहो  पीटो 

यदि  तुम्हारी  औरतें   बात  नहीं  माने ,तो उनको   मारो  और पीटो ,ताकि  वह तुम्हारी  बातें मानने  लगें " सूरा -निसा 4:34

इकिरिमा  ने कहा कि एक औरत आयशा  के पास गयी और अपने बदन  पर पड़े हरे नीले निशान  दिखा कर बोली  कि मुझे  मेरे  पति  ने  पीटा  है ,जिस से  खूब दर्द  हो रहा  है .आयशा ने  उसे रसूल  के पास  भेज  दिया . रसूल  ने स्त्री के पति को बुलाया , उसने  कहा   इस औरत ने  मुझे नपुंसक   कहा था तब  उस व्यक्ति ने अपने  दो बच्चे  दिखा  दिये  ,जो पिता की  तरह काले  थे .  तब रसूल बोले  यह औरत  झूठी  है .तुमने इस  पीट  कर  कोई  गुनाह  नहीं किया "सही बुखारी -जिल्द 7 किताब 72 हदीस 715

कुरान और  हदीस  के इन हवालों  से स्पष्ट  हो  जाता  है कि  महिलाओं  पर होने वाली  हिंसा , प्रताड़ना  , बलात्कार   जैसे जघन्य अपराधो  की  प्रेरणा   लोगों  को इस्लाम    से ही  मिलती है .  चूँकि  सरकार ने देश  को सेकुलर  बना  दिया  है  ,इसलिए  मुसलमानों  की संगती  में  कुछ  हिन्दू  भी इस्लाम  की ऎसी शिक्षा   से प्रभावित  होकर अपराध करने  लगे  है ,इस्लाम  की इस  सौगात  को ठीक  से जानने  के  लिए इस  लिंक  की  तस्वीरें  देखिये 

http://wikiislam.net/wiki/Images:Violence_Against_Women

http://www.answering-islam.org/Authors/Arlandson/women_top_ten.htm


बुधवार, 6 नवंबर 2013

वडरा राष्ट्रीय भ्रष्टाचारी दामाद !!

हमारा  उद्देश्य   लोगों   को  किसी  चमत्कार पर  विश्वास  करके  अंधविश्वासी  बनाना   नहीं  है  , परन्तु  हम  लोगों से पूछते हैं कि  बताएं  ,जिस  व्यक्ति   का  बाप  जिन्दगी भर  पीतल   के  बर्तनों  का  धंदा    करता  रहा हो   ,और जो व्यक्ति खद एक गैरेज में  मेकेनिक   का काम   करता  हो , और  न  जिस  व्यक्ति  के पास  किसी भी  व्यवसाय  के लिए  पर्याप्त  पूंजी  हो , और न जिसके पास  कोई  उद्योग  , व्यवसाय   चलाने   का  अनुभव   हो  , वह  सिर्फ  8    ही महीने में   करोड़ों  का   मालिक   और  कई  कई  कंपनियों    का  स्वामी  कैसे  बन   गया  ? यही नहीं  उस  व्यक्ति के पास  बड़े बड़े  शहरों   में  हजारों एकड़   जमीने    कहाँ से आ गयीं  ? कुछ  लोग  इसे  चमत्कार   कह  सकते हैं  ,  लकिन  यह   सब   लाभ   सिर्फ    दामाद     होने   का प्रताप  है  .
  आप  समझ  गए होंगे  कि  हम  प्रियंका  पति ,  सोनिया  दामाद     राजेद्र   वडरा    पुत्र  रॉबर्ट  वडरा    की  बात कर रहे हैं  .. जिसे हम  राष्ट्रीय   भ्रष्टाचारी   कहें  तो  अतिश्योक्ति    नहीं  होगी , इस  बात को और स्पष्ट  करने के लिए  हमें      रॉबर्ट  वडरा   और उसके  द्वारा   केवल  आठ   महीने   कमाई  गयी  अकूत  सम्पति   के   बारे में  संक्षित   जानकारी    देना   जरूरी   है ,

1-प्रियंका रोबर्ट  शादी   का  कारण 

रॉबर्ट  और  प्रियंका   की  शादी   सन  1997   में  हुई  थी .लेकिन  अगर कोई  रॉबर्ट   को ध्यान  से देखे तो यह बात  सोचेगा कि सोनिया जैसी   चालाक  और  घाट  घाट  पानी  पीने  वाली  औरत  ने  रॉबर्ट जैसे  कुरूप  और  साधारण   व्यक्ति  से  प्रियंका की  शादी कैसे  करवा   दी ? क्या उसे प्रियंका   के लिए   कोई उपयुक्त  वर   नहीं  मिला  , और यह शादी जल्दी में   और चुपचाप  क्यों   की गयी .  वास्तव  में   सोनिया ने  रॉबर्ट  से  प्रियंका  की  शादी अपनी  पोल  खुलने  के  डर  से की  थी .  क्योंकि  जिस  समय  सोनिया इंगलैंड में एक कैंटीन   में  बार  गर्ल  थी .  उसी  समय   उसी  जगह  रोबट की  माँ  मौरीन  (Maureen) भी  यही काम  करती  थी . मौरीन को  सोनिया   और  माधव राव  सिंधिया  की  रास  लीला   की  बात  पता  थी ,जब वह उसी  कैंटीन  सोनिया उनको शराब   पिलाया  करती  थी .मौरीन  यह  भी  जानती  थी कि  किन किन  लोगों  के साथ  सोनिया  के अवैध  सम्बन्ध   थे .जब  सोनिया  राजिव  गांन्धी  के शादी  करके  दिल्ली   आ  गयी , तो  कुछ  समय बाद  मौरीन   भी दिल्ली  में  बस गयी . मौरीन  जानती थी कि सोनिया  सत्ता   के लिए  कुछ  भी  कर  सकती   है , क्योंकि जो भी  व्यक्ति उसके खतरा  बन  सकता  था  सोनिया ने उसका पत्ता  साफ  कर  दिया  , जैसे  संजय  गांधी , माधव  राव  सिंधिया  , राजेश  पायलेट  ,जितेन्द्र  प्रसाद  ,  बाल योगी , यहाँ तक  लोग तो  यह भी  शक  है कि  राजीव   गांधी  की हत्या में  सोनिया का  भी हाथ   है , वर्ना  वह अपने  पति  के हत्यारों   को  माफ़ क्यों  कर देती ?
चूँकि  मौरीन  का पति  और रॉबर्ट  का  पिता  राजेंदर  वडरा   पुराना जनसंघी   था , और  सोनिया  को डर  था कि अगर  अपने पति के  दवाब ने  मौरीन  अपना मुंह   खोल  देगी  तो मुझे भारत  पर  हुकूमत  करने  और अपने  नालायक  कुपुत्र  राहुल  को प्रधान मंत्री   बनाने में  सफलता  नहीं    मिलेगी .इसी  लिए  सोनिया ने मौरीन   के लडके रॉबर्ट  की शादी  प्रियंका  से करवा   दी .

2-जैसी  माँ  वैसी  बेटी 
 इस बात से  कोई  भी व्यक्ति  इनकार  नहीं कर सकता कि   जैसे  गुण  माँ  में  होते हैं  , वैसे  ही गुण  बेटी में  पाए  जाते हैं  .इसलिए जैसे सोनिया   अपने    कुपुत्र     के  सहारे  सत्ता  पर  एकाधिकार    बनाये  रखना  चाहती  है , वैसे ही  शादी के बाद  प्रियंका ने   पति  साथ  संपत्ति  पर  एकाधिकार  जमानेके लिए वडरा   परिवार के  सभी  सदस्यों   को अपने  रास्ते  से   हटा  दिया .राजेंदर  वडरा   के  दो  पुत्र  , रिचार्ड  और रॉबर्ट  और एक  पुत्री  मिशेल   थे . और  प्रियंका  की शादी  के  बाद   सभी  एक एक  कर  मर गए    या   मार दिए  गए  .जैसे ,   मिशेल ( Michelle )सन 2001  में  कार  दुर्घटना  में  मारी  गयी , रिचार्ड ( Richard )ने  सन 2003  में  आत्मह्त्या   कर ली . और प्रियंका   के ससुर सन  2009  में  एक  मोटेल  में  मरे हुए  पाए  गए  थे .   लेकिन  इनकी  मौत के  कारणों  की  कोई  जाँच नहीं  कराई गयी ,और  इसके बाद  सोनिया ने  रॉबर्ट  को  राष्ट्रपति  और  प्रधान मंत्री   के बराबर का दर्जा  इनाम के तौर पर दे दिया  . तब  इस  अधिकार को   पर जिस  रॉबर्ट  को कोई  पडौसी  भी नहीं  जानता  था , उसने  मात्र  आठ  महीनों   में  करोड़ों   की संपत्ति  बना  ली  ,और कई  कंपनियों   का मालिक   बन गया , साथ ही   सैकड़ों  एकड़  कीमती  जमीने भी  हथिया   लीं .जिनका  विवरण  इस  प्रकार   है

3-रॉबर्ट की  कंपनियाँ 
आज  से करीब  15 साल  पहले  रॉबर्ट  ने ' आर्टेक्स -Artex "   नाम से  एक  फर्म   बनायीं  थी .जो हैडीक्राफ्ट    की  चीजों  का   व्यापर  करती  थी  .  लेकिन  इस से कोई  खास  कमाई   नहीं  होती थी . लेकिन  नवम्बर2007  से लेकर  जून 2008   तक सिर्फ  आठ  ही  महीनों में रॉबर्ट  पांच  बड़ी  बड़ी  कंपनियों   का  मालिक  बन  गया ,जिनका ब्यौरा   इस  प्रकार   है ,
1.स्काई  लाईट  होस्पेटीलिटी  प्रा . लि (Sky Light Hospitality). स्थापना  1  नवम्बर  2007 .पूंजी   5  लाख
2.स्काई  लाईट  रियल्टी प्रा .लि (Sky Light Realty( .स्थापना  16 नवम्बर   2007 . पूंजी  5  लाख 
3.नार्थ  इण्डिया आई टी   पार्क   प्रा .लि .(North India IT Parks) स्थापना  19  जून  2008 . पूंजी  25  लाख 
4.रियल  अर्थ  एस्टेट  प्रा .लि .(Real Earth Estates ) स्थापना  18  फरवरी  2008  पूंजी  10  लाख  
5.ब्ल्यू  ब्रीज  ट्रेडिंग  प्रा . लि (Blue Breeze Trading )स्थापना  1  नवम्बर  2007  पूंजी  5  लाख
इस विवरण   के अनुसार  रॉबर्ट  वडरा  के  पास  केवल  40  लाख   रुपये  की पूंजी  थी  . तब इतनी सी  पूंजी से उसने  करोड़ों  की संपत्ति कैसे अर्जित कर ली ? जिनका विवरण   इस  प्रकार है
4-रॉबर्ट की  संपत्तियां 
लगता है कि  रॉबर्ट  वडरा  ने  प्रियंका  से नहीं    नोट  छापने की  मशीन  से शादी   की   थी ,जभी तो  केवल  चालीस  लाख की  पूंजी से  करोड़ों  की  जमीने  और संपत्ति  खरीद  डाली  . जिन में से जिनके बारे में लोगों ने पता कर लिया   है उनका   विवरण यह है ,जो उसकी  बैलेंस  शीट    में दिया  गया है ,
1.दिल्ली   की  हिल्टन गार्डन इन  में पचास  प्रतिशत  हिस्सा  -  कीमत 31.7  करोड़   रूपया .
2.गुड़गाँव  में 10000   वर्गफीट का  फ़्लैट   कीमत  89  लाख  रुपये 
3.गुड़गाँव  के डी एल  ऍफ़  के मेग्नोलिया   में 7  फ़्लैट   कीमत 5.2   करोड़  रुपये 
4-दिल्ली के  डी  एल ऍफ़  के कैपिटल  ग्रीन  में 1  फ़्लैट   कीमत  5 करोड़  रुपये 
5-दिल्ली के   ग्रेटर  कैलाश में  1 फ़्लैट   कीमत 1.2   करोड़  रुपये 
6.बीकानेर में  161  एकड़   जमीन कीमत  1.2   करोड़  रुपये 
7.बीकानेर में   प्लाट क्षेत्रफल150    एकड़ 2.43 कीमत  करोड़  रुपये
8.मानेसर   में  जमीन  कीमत  15.38  करोड़  रुपये 
9.महाराष्ट्र  के पनवेल  में  जमीन  कीमत  4.2   करोड़  रूपये 
10.गुड़गाँव  में  जमीन  कीमत 4  करोड़  रुपये 
11.हसन  पुर  में जमीन   कीमत 76  लाख   रुपये 
12.हरियाणा   में जमीन  कीमत 95  लाख  रुपये 
सोनिया    का  दामाद  यानि  प्रियंका  का पति  होने  का   क्या  मतलब  होता   है  ,यह  रोबर्ट  वडरा के  जीवन  शैली  के स्तर से और उसकी  आठ  महीने की  लगभग  चालीस  करोड़ की  संपत्ति  से  साफ़  झलकता है ,  कुछ    साल पहले जो व्यक्ति रेल का   टिकट  तक   नहीं  खरीद  सकता  था , आज बड़ी बड़ी  लक्जरी   कारों   में  शान से  घूमता  रहता   है .पहले  जो व्यक्ति   किरणे वाले का  उधार   समय पे नहीं   चूका सकता  था  , आज  रोज  बड़ी  बड़ी   महगी  पार्टियाँ    देता  रहता है .इन सभी  तथ्यों   से  एक ही  सवाल  उठता   है कि दुनिया की  सबसे  बड़ी  धूर्त  और षडयंत्र कारी   सोनिया  को रॉबर्ट  में  कौन सी   खूबी  दिखाई दी , जिस से प्रभावित होकर  उसने  अचानक  अपनी लड़की  की शादी  रॉबर्ट   वडरा   से  करा  दी . कहीं  ऐसा तो नहीं  कि  रॉबर्ट  वडरा की  माँ  मौरीन  ने  सोनिया  की  कमजोर  नस   को  दबा  दिया हो .  जिस  से  सोनिया  की  भारत  की  तानाशाह   और राहुल  को देश  का प्रधानमंत्री   बनाने की  योजना खटाई  में  पड़  सकती   थी .भले  आज  यह  बात  रहस्य के गर्भ में छुपी  हो . लेकिन   एक दिन  सोनिया   का  भंडा जरुर  फूट   जायेगा . लोक  सभा  के  चुनाव   के  बाद  देखिये ,सभी  नमो  नमो  कहने  लगेंगे .
 अधिक   जानकारी  के लिए   यह  विडिओ  देखिये
Robert Vadra owner of Artex Moradabad - on fashion products and

http://www.youtube.com/watch?v=mEQ2mkzlUIU

आइये  इन  भ्रष्ट  दामाद  और  उसकी  सास को  बेनकाब   करने के लिए  सिर्फ  देश  भक्त  लोगों  को  ही  वोट  दें !

http://indiatoday.intoday.in/story/who-is-robert-vadra/1/224119.html

बुधवार, 16 अक्तूबर 2013

कश्मीर स्वर्ग से नर्क कैसे बना ?

कश्मीर को   भारत  का स्वर्ग   कहा जाता है . लेकिन इसको  नर्क  बनाने  में  नेहरू  की  मुस्लिम परस्ती   जिम्मेदार है . जो आज  तक चली  आ रही है . चूँकि देश  का विभाजन धर्म  के आधार  पर हुआ था .और जिन्नाजैसे  कट्टर नेताओं का तर्क था कि  मुस्लिम  बहुल  कश्मीर  के बिना  पाकिस्तान  अपूर्ण  है . इसलिए पाकिस्तान  प्रेरित उग्रवादी  और पाक सेना मिल   कर कश्मीर  में ऐसी  हालत  पैदा  करना चाहते हैं ,जिस से  कश्मीर के हिन्दू  भाग   कर किसी  अन्य  प्रान्त में  चले  जाएँ .कांगरेस  की अलगाववादी  नीति  के  कारण  हालत इतनी गंभीर हो गयी कि   हिन्दू श्रीनगर के  लाल चौक   में खुले आम  तिरंगा  भी नहीं  फहरा  सकते हैं .जबकि हिन्दू  हजारों  साल से कश्मीर में  रहते  आये हैं ,और  महाभारत  के समय  से ही कश्मीर पर हिन्दू  राजा राज्य  करते  आये हैं .  इसके लिए हमें  इतिहास के पन्नों  में   झांकना होगा  ,कि  कश्मीर  को विशेष  दर्जा  देने का  क्या औचित्य  है ,?
1-कश्मीर का प्राचीन  इतिहास 
कश्मीर  के प्राचीन इतिहास    का   प्रमाणिक  इतिहास   महाकवि  " कल्हण "  ने  सन  1148 -49  में  अपनी  प्रसिद्ध  पुस्तक " राजतरंगिणी "  में  लिखा  था . इस पुस्तक में   8 तरंग   यानि  अध्याय   और संस्कृत  में कुल    7826  श्लोक  हैं . इस   पुस्तक के  अनुसार  कश्मीर  का  नाम  " कश्यपमेरु  "   था  .  जो  ब्रह्मा  के  पुत्र  ऋषि  मरीचि  के पुत्र  थे .चूँकि  उस समय में  कश्मीर  में  दुर्गम  और ऊंचे पर्वत थे ,  इसलिए ऋषि कश्यप ने लोगों   को आने जाने के लिए   रास्ते  बनाये थे .  इसीलिए  भारत के इस   भाग  का नाम " कश्यपमेरू " रख  दिया गया  , जो बिगड़  कर  कश्मीर    हो गया  .राजतरंगिणी  के  प्रथम  तरंग में  बताया गया है  कि सबसे पहले  कश्मीर  विधिवत     पांडवों   के  सबसे  छोटे  भाई  सहदेव   ने राज्य    की  स्थापना  की थी , और  उस समय   कश्मीर में   केवल  वैदिक   धर्म   ही  प्रचलित  था .फिर  सन  273  ईसा  पूर्व   कश्मीर में  बौद्ध  धर्म   का  आगमन  हुआ  . फिर भी कश्मीर में  सहदेव  के वंशज  पीढ़ी  दर पीढ़ी   कश्मीर  पर 23  पीढ़ी  तक  राज्य  करते  रहे ,यद्यपि  पांचवीं सदी में " मिहिरकुल "   नामके  " हूण " ने  कश्मीर  पर  कब्ज़ा  कर लिया  था . लेकिन  उसने शैव  धर्म  अपना  लिया  था .
2-कश्मीर  में इस्लाम 
इस्लाम  के  नापाक  कदम  कश्मीर में सन 1015  में   उस समय  पड़े  जब  महमूद  गजनवी ने  कश्मीर  पर हमला  किया था  .लेकिन  उसका उद्देश्य  कश्मीर में इस्लाम   का प्रचार करना नहीं   लूटना था , और लूट मार कर वह वापिस गजनी  चला गया . उसके बाद ही कश्मीर पर दुलोचा  मंगोल  ने  भी हमला  किया . लेकिन  उसे तत्कालीन  कश्मीर के राजा  सहदेव   के मंत्री ने  पराजित करके  भगा  दिया . और सन  1320  में  कश्मीर में  "रनचिन " नामका  तिब्बती  शरणार्थी सेनिक  राज के पास   नौकरी के लिए  आया  . उसकी वीरता  को देख कर राजा ने  उसे सेनापति  बना  दिया . रनचिन  ने  राज से  अनुरोध  किया कि  मैं  हिन्दू  धर्म  अपनाना  चाहता  हूँ .लेकिन  पंडितों  ने  उसके अनुरोध का  विरोध  किया  और कहा कि दूसरी जाती का होने के कारण  तुम्हें  हिन्दू  नहीं  बनाया   जा सकता  .कुछ  समय के  बाद  राजा  सहदेव   का  देहांत  हो  गया  और उसकी पत्नी " कोटा  रानी  "  राज्य  चलाने लगी   और  उसने  " रामचन्द्र " को अपना  मंत्री  बना   दिया .   उस समय  कश्मीर में कुछ  मुसलमान   मुल्ले सूफी बन कर कश्मीर में   घुस  चुके  थे . ऐसा एक  सूफी  " बुलबुल  शाह  " था .उसने  रनचिन   से कहा  यदि  हिन्दू पंडित तुम्हें  हिन्दू नहीं   बनाते  तो  तुम  इस्लाम  कबुल   कर लो .इसा तरह  बुलबुल शाह ने  रनचिन  कलमाँ   पढ़ा कर  मुसलमान   बना दिया . जिस जगह  रनचिन  मुसलमान  बना था उसे  बुलबुल  शाह का  लंगर  कहा  जाता है  .जो  श्रीनगर के पांचवें  पुल के पास है . रन चिन   ने  अपना  नाम   " सदरुद्दीन  "   रखवा   लिया  था .बुलबुल शाह   की संगत  में  रनचिन  हिन्दुओं   का घोर शत्रु  बन गया . और 6 अक्टूबर  1320  को   रन चिन   ने धोखे से  मंत्री   रामचन्द्र   की  हत्या  कर दी .मंत्री   को  मरने के बाद   रनचिन   अपना  नाम " सुलतान  सदरुद्दीन  ' रख  लिया .फिर   अफगानिस्तान  से   मुसलमानों को   कश्मीर में  बुला कर बसाने लगा . और  करीब  सत्तर  हजार  मुसलमान की  सेना  बना ली  .  और कुछ  समय बाद  सन  1339 में  कोटा रानी   को  को कैद  कर लिया और  उस से  बलपूर्वक  शादी   कर  ली .सदरुद्दीन   के सैनिक  प्रति दिन  सैकड़ों  हिन्दुओं   का  क़त्ल  करते थे .इसलिए कुछ लोग  यातो  दर के कारण  मुसलमान  बन गए या भाग कर   जम्मू  चले   गए  . और  कश्मीर  घाटी  हिन्दुओं  से खाली  हो  गयी .

लेकिन   वर्त्तमान  कांगरेस   की  सरकार    जम्मू को भी  हिन्दू विहीन   बनाने में   लगी  हुई है .  काश  उस समय  महर्षि  दयानंद होते   जो  रनचिन  को  मुसलमान   नहीं    होने देते  .
 इसलिए    हिन्दुओं   को चाहिए कि सभी   हिन्दुओं   को अपना  भाई  समझे  , और जो भी  हिन्दू धर्म  स्वीकार करना चाहे उसे   हिन्दू बना कर अपने  समाज में शामिल  कर लें  .  और  हिन्दू विरोधी  कांगरेस का  हर प्रकार   से विरोध   करें  .

http://www.kashmir-information.com/ConvertedKashmir/Chapter9.html

रविवार, 13 अक्तूबर 2013

रसूल का घरेलू व्यभिचार !

विश्व  में भारतीय  संस्कृति और परम्परा  को महान  माना  जाता  है  .क्योंकि  इस में  स्त्रियों  को  देवी   की  तरह  सम्मान दिया  जाता   है .यहाँ   तक  मौसी  ,  बुआ   चचेरी  बहिन  और पुत्र वधु  पर सपने   में  भी  बुरी  दृष्टि    रखने को   महापाप  और अपराध   माना   गया  है . लेकिन  इन्हीं  कारणों   से  कोई  भी  समझदार  व्यक्ति  इसलाम   को धर्म   कभी  नहीं   मानेगा  , क्योंकि मुहम्मद  साहब  अपनी  वासना  पूर्ति  के लिए कुरान   का  सहारा  लेकर ऎसी   ही स्त्रियों  से सहवास   करने  को वैध  बना  देते  थे  ,  जिसका   पालन  मुसलमान  आज  भी  कर  रहे  हैं .इस  विषय  को स्पष्ट   करने  के  लिये  कुरान   की  उन  आयतों  , हदीसों और  उनकी  ऐतिहासिक  प्रष्ट भूमि  को देखना  होगा  , कि मुहम्मद  साहब  ने  अपनी  सगी  मौसी    , चचेरी   बहिन  और अपने  दत्तक  पुत्र  की पत्नी  से  सहवास  कैसे  किया  था  . और इस  पाप   को   कुरान  की आयत  बना  कर  कैसे   जायज  बना दिया  .

इस्लामी  परिभाषा  में  अपने  शहर  को छोड़  कर  पलायन   करने  को  हिजरत (Migration )  कहा  जाता   है . लगभग  सन 622  में   मुहम्मद  साहब  को   मक्का  छोड़  कर  मदीना   जाना  पडा  था .उनके  साथ   कुछ  पुरुष  और  महिलायें  भी  थी . साथ   में  उनकी   प्रिय  पत्नी  आयशा  भी  थी . इसी  घटना   की  प्रष्ट भूमि   में  कुरआन  की  सूरा  अहजाब की  वह  आयतें    दीगयी   हैं  जिनमे मौसी, चचेरी  बहिन  , और पुत्रवधु   से  शादी  करना  या उनसे  सम्भोग  करने  को जायज   ठहरा  दिया गया  है  .ऐसी  तीन  औरतों  के  बारे में  इस  लेख  में  जानकारी  दी  जा  रही  है , जिन  से मुहम्मद   साहब  ने  कुरान   की  आड़  में  अपनी  हवस  पूरी   की  थी .

1--मौसी  के साथ कुकर्म 
मुहम्मद  साहब  की  हवस  की शिकार  होने  वाली  पहली  औरत  का  नाम  " खौला बिन्त  हकीम अल सलमिया  - خولة بنت حكيم السلمية  "  था  . और  उसके  पति  का  नाम "उसमान  बिन  मजऊम -  عثمان بن مظعون‎ "  था  . खौला  मुहम्मद  साहब  की  माँ  की  बहिन  यानि  उनकी  सगी  मौसी  ( maternal aunt ) थी  . इसको  मुहम्मद  साहब  ने अपना  सहाबी  बना  दिया  था . मदीना  की  हिजरत  में मुहम्मद आयशा  के साथ  खौला को  भी  ले गए  थे .यह  घटना  उसी  समय  की  है इस  औरत  ने  अय्याशी  के  लिए  खुद  को  मुहम्मद   के  हवाले  कर  दिया  था .यह बात  मुसनद   अहमद  में   इस प्रकार दी  गयी  है .
"खौला बिन्त  हकीम  ने रसूल  से पूछा  कि जिस औरत  को सपने में  ही स्खलन   होने  की  बीमारी  हो , तो  वह औरत  क्या  करे  , रसूल  ने  कहा  उसे  मेरे  पास लेटना  चाहिए "
"Khaula Bint Hakim al-Salmiya,asked the prophet about the woman having a wet dream, he said she should lay with    me "

 محمد بن جعفر قال حدثنا شعبة وحجاج قال حدثني شعبة قال سمعت عطاء الخراساني يحدث عن‫حدثنا """‬ ‫سعيد بن المسيب أن خولة بنت حكيم السلمية وهي إحدى خال ت النبي صلى ال عليه وسلم سألت النبي صلى ال‬ ‫عليه وسلم عن المرأة تحتلم فقال رسول ال صلى ال عليه وسلم لتغتسل‬Translation:26768 - 

Musnad Ahmad (‫مسند أدحمد‬  )hadith-26768 

 तब  खौला  मुहम्मद  साहब  के पास  सो  गयी  , और  मुहम्मद  साहब  ने उसके  साथ सम्भोग  किया .

2-आयशा  ने खौला  को  धिक्कारा 
जब  आयशा  को पता  चला  कि  रसूल  चुपचाप  खौला  के साथ  सम्भोग  कर रहे  हैं तो उसने  खौला को  धिक्कारा और उसकी  बेशर्मी   के  लिए फटकारा  यह  बात इस हदीस  में  दी  गयी  है ,
"हिशाम  के  पिता  ने  कहा  कि  खौला  एक ऎसी  औरत थी  जिसने  सम्भोग  के लिए  खुद  को रसूल  के सामने  प्रस्तुत  कर  दिया था .इसलिए आयशा  ने उस  से  पूछा ,क्या तुझे एक पराये  मर्द  के सामने खुद  को पेश  करने  में  शर्म  नही  आयी ?  तब रसूल  ने  कुरान  की  सूरा  अहजाब 33:50  की  यह  आयत सुना दी , जिसमे  कहा  था  " हे नबी  तुम सम्भोग  के  लिए  अपनी  पत्नियों  की  बारी ( Turn )  को  टाल  सकते  हो .इस  पर आयशा  बोली  लगता  है  तुम्हारा अल्लाह  तुम्हें  और  अधिक  मजे  करने  की इजाजत  दे  रहा  है ."( I see, but, that your Lord hurries in pleasing you)
"حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلاَمٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ فُضَيْلٍ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كَانَتْ خَوْلَةُ بِنْتُ حَكِيمٍ مِنَ اللاَّئِي وَهَبْنَ أَنْفُسَهُنَّ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ عَائِشَةُ أَمَا تَسْتَحِي الْمَرْأَةُ أَنْ تَهَبَ نَفْسَهَا لِلرَّجُلِ فَلَمَّا نَزَلَتْ ‏{‏تُرْجِئُ مَنْ تَشَاءُ مِنْهُنَّ‏}‏ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا أَرَى رَبَّكَ إِلاَّ يُسَارِعُ فِي هَوَاكَ‏.‏ رَوَاهُ أَبُو سَعِيدٍ الْمُؤَدِّبُ وَمُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ وَعَبْدَةُ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ يَزِيدُ بَعْضُهُمْ عَلَى بَعْضٍ‏.‏

बुखारी -जिल्द 7 किताब  62  हदीस 48

3-आयशा  को ईर्ष्या  हुई 

कोई  भी  महिला  अपने  पति की दूसरी   महिला  से अय्याशी  को  सहन   नहीं  करेगी  . आयशा  ने  रसूल से  कहा  कि  मुझे  इस औरत से ईर्ष्या  हो  रही  है . यह  बात  इस  हदीस  में  इस प्रकार  दी  गयी  है
"आयशा ने  कहा  कि  मैं  रसूल से  कहा मुझे  उस  औरत   से  जलन  हो रही  है जिसने  सम्भोग  के लिए खुद  को तुम्हारे  हवाले  कर  दिया . क्या एसा  करना  गुनाह  नहीं  है . तब रसूल ने   सूरा अहजाब  की 33:50 आयत  सुना  कर  कहा  इसमे  कोई  पाप  नहीं  है  ,क्योंकि  यह अल्लाह  का  आदेश  है . तब  आयशा ने  कहा  लगता  है , तुम्हारे  अल्लाह  को तुम्हें  खुश  करने  की  बड़ी  जल्दी  है "(It seems to me that your Lord hastens to satisfy your desire. )

सही मुस्लिम -किताब 8  हदीस 3453

4-चचेरी  बहिन  से सहवास 
मुहम्मद  साहब  के  चाचा अबू  तालिब  की बड़ी    लड़की  का  नाम "उम्मे  हानी  बिन्त  अबू तालिब - أُمِّ هَانِئٍ بِنْتِ أَبِي طَالِبٍ  "  था  .जिसे   लोग "फकीतः और  " हिन्दा "  भी  कहते  थे .यह  सन 630  ईसवी  यानि  8   हिजरी  की  बात  है . जब  मुहम्मद साहब  तायफ़  की  लड़ाई  में  हार  कर  साथियों  के साथ जान  बचाने  के  लिए  काबा  में  छुपे  थे .लकिन  मुहम्मद  साहब   चुपचाप  सबकी  नजरें   चुरा   कर   उम्मे  हानी  के घर  में  घुस  गए ,लोगों   ने  उनको  काबा  में  बहुत  खोजा  .और आखिर  वह उम्मे  हानी  के घर में  पकडे  गए  .इस  बात  को छुपाने  के  लिए मुहम्मद  साहब  ने एक कहानी  गढ़  दी  और  लोगों  से  कहा कि  मैं  यरुशलेम  और  जन्नत  की  सैर  करने  गया  था .मुझे अल्लाह  ने बुलवाया  था .उस समय  उनकी पहली पत्नी खदीजा  की  मौत  हो चुकी थी वास्तव में  .मुहम्मद  साहब उम्मे  हानी  के  साथ  व्यभिचार  करने  गए  थे .उन्होंने  कुरान  की सुरा अहजाब   की आयत 33:50 सुना  कर सहवास  के  लिए  पटा   लिया  था .यह  बात हदीस  की  किताब  तिरमिजी   में  मौजूद  है . जिसे  प्रमाणिक  माना  जाता  है . पूरी  हदीस  इस प्रकार  है ,

"उम्मे हानी  ने  बताया उस रात  रसूल  ने मुझ से अपने  साथ शादी  करने   का  प्रस्ताव  रखा  , लेकिन मैं इसके  लिये  उन  से  माफी  मागी  . तब  उन्होंने  कहा  कि अभी  अभी  अल्लाह  की तरफ  से  मुझे एक  आदेश   मिला  है ".हे  नबी हमने  तुम्हारे   लिए वह पत्नियां  वैध  कर दी हैं ,जिनके मेहर  तुमने  दे दिये  .और  लौंडियाँ  जो युद्ध  में  प्राप्त  हो ,और चाचा  की  बेटीयाँ  , फ़ूफ़ियों  की  बेटियाँ ,मामू  की बेटियाँ,खालाओं  की  बेटियाँ और  जिस औरत ने तुम्हारे  साथ  हिजरत  की  है ,और वह ईमान  वाली  औरत  जो खुद को  तुम्हारे  लिए समर्पित  हो  जाये "  यह  सुन  कर  मैं  राजी  हो गयी  और  मुसलमान  बन  गयी "

" عَنْ أُمِّ هَانِئٍ بِنْتِ أَبِي طَالِبٍ، قَالَتْ خَطَبَنِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَاعْتَذَرْتُ إِلَيْهِ فَعَذَرَنِي ثُمَّ أَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى ‏:‏ ‏(‏إنَّا أَحْلَلْنَا لَكَ أَزْوَاجَكَ اللاَّتِي آتَيْتَ أُجُورَهُنَّ وَمَا مَلَكَتْ يَمِينُكَ مِمَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَيْكَ وَبَنَاتِ عَمِّكَ وَبَنَاتِ عَمَّاتِكَ وَبَنَاتِ خَالِكَ وَبَنَاتِ خَالاَتِكَ اللاَّتِي هَاجَرْنَ مَعَكَ وَامْرَأَةً مُؤْمِنَةً إِنْ وَهَبَتْ نَفْسَهَا لِلنَّبِيِّ ‏)‏ الآيَةَ قَالَتْ فَلَمْ أَكُنْ أَحِلُّ لَهُ لأَنِّي لَمْ أُهَاجِرْ كُنْتُ مِنَ الطُّلَقَاءِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ مِنْ حَدِيثِ السُّدِّيِّ ‏.‏  "-هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ -

तिरमिजी -जिल्द 1किताब  44  हदीस 3214  पे.522

5-पुत्रवधु  से  सहवास 

मुहम्मद  साहब  के  समय अरब  में दासप्रथा प्रचलित  थी .लोग युद्ध  में  पुरुषों  , औरतों  , और बच्चों  को पकड़  लेते  थे .और उनको  बेच  देते थे .ऐसा  ही  एक लड़का मुहम्मद  साहब  ने  खरीदा  था  . जिसका  नाम " जैद बिन  हारिस  -  زيد بن حارثة‎  " था .(c. 581-629 CE) मुहम्मद  साहब  ने उसे आजाद  करके  अपना दत्तक  पुत्र  बना  लिया था अरबी  में . दत्तक  पुत्र (adopt son ) को " मुतबन्ना "  कहा  जाता  है . यह एक मात्र  व्यक्ति  है  जिसका  नाम कुरान सूरा  अह्जाब  33:37  में    मौजूद  है .इसी  लिए  लोग जैद  को " जैद मौला "या  " जैद बिन  मुहम्मद  भी  कहते  थे .यह बात इस हदीस से  साबित  होती  है ,

""حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ مَا كُنَّا نَدْعُو زَيْدَ بْنَ حَارِثَةَ إِلاَّ زَيْدَ بْنَ مُحَمَّدٍ حَتَّى نَزَلَتْ ‏:‏ ‏(‏ ادعُوهُمْ لآبَائِهِمْ هُوَ أَقْسَطُ عِنْدَ اللَّهِ ‏)‏ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحٌ ‏.‏   "

तिरमिजी -जिल्द 1 किताब 46 हदीस  3814

कुछ  समय  के बाद् जैद की  शादी  हो गयी  उसकी पत्नी  का  नाम "जैनब बिन्त जहश - زينب بنت جحش‎     " था वह  काफी सुन्दर और  गोरी थी  . इसलिये  मुहम्मद  साहब   की  नजर खराब  हो गयी .उन्होंने घोषित  कर  दिया  कि  आज  से  मेरे  दत्तक  पुत्र  को मेरे  नाम  से  नहीं  उसके असली  बाप  के  नाम  से  पुकारा  जाय .और  इसकी  पुष्टि  के  लिये  कुरान  की सूरा 33:5  भी ठोक  दी .यह  बात  इस  हदीस  से  सबित  होती  है  ,

6-रसूल  की  नीयत  में  पाप 

जैनब  को हासिल करने  के  लिए मुहम्मद  साहब  ने  फिर कुरान का दुरुपयोग   किया .और   लोगों  से  जैद को   मुहम्मद  का   बेटा  कहने  से मना  कर दिया , ताकि  लोग जैनब  को  उनके  लडके  की  पत्नी  नहीं  मानें .
"  जैनब कुरैश कबीले  की  सब से सुंदर लड़की  थी .और  जब  अल्लाह   ने  अपनी  किताब   में  जैद  के  बार में  सूरा 33  की  आयत 5  नाजिल    कर दी , जिसमे  कहा  था  कि  आज  से  तुम  लोग  जैद  को उसके असली  बाप  के  नाम  से  पुकारा   करो .,क्योंकि अल्लाह  की  नजर  में  यह  बात   तर्कसंगत  प्रतीत   लगती  है .और यदि तुम्हें  किसी  के  बाप  का नाम  नहीं पता हो ,तो उस  व्यक्ति  को  भाई  कह  कर  पुकारा  करो ,

मलिक मुवत्ता -किताब  30  हदीस 212

 7-कुरान की  सूरा 33:5  की  व्याख्या 

कुरान की  सूरा अहजाब की आयत 5  के अनुसार दत्तक पुत्र  जैद  को असली  पुत्र  का  दर्जा  नहीं  दिया  गया  , इस आयत  की  व्याख्या यानी तफ़सीर "जलालुद्दीन सुयूती -  جلال الدين السيوطي‎ " ने  की  है . इनका  काल c. 1445–1505 AD है .इन्होने  कुरान  की  जो तफ़सीर   की  है ,उसका  नाम " तफ़सीर जलालैन -تفسير الجلالين  "  है .इसमे  बताया  गया  है  कि रसूल  ने  जैद को अपने  पुत्र  का दर्जा नहीं   देने  के  लिए  यह  तर्क  दिए  थे ,1 .दत्तक  पुत्र रखने की  परंपरा  अज्ञान काल  है , अब इसकी कोई  जरुरत  नहीं  है .2 . मैंने  जिस समय  जैद  को खरीदा  था  ,उस समय अल्लाह ने  मुझे रसूल  नही  बनाया था .3. लोग  जैद  को  मेरा  सगा  बेटा  मान   लेते  थे . जिस  से  मेरी  बदनामी  होती  थी .4.  जैद  ने मुझ  से  जैनब  को तलाक  देने  का  वादा  कर  रखा  है .

{ وَإِذْ تَقُولُ لِلَّذِيۤ أَنعَمَ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَأَنْعَمْتَ عَلَيْهِ أَمْسِكْ عَلَيْكَ زَوْجَكَ وَٱتَّقِ ٱللَّهَ وَتُخْفِي فِي نَفْسِكَ مَا ٱللَّهُ مُبْدِيهِ وَتَخْشَى ٱلنَّاسَ وَٱللَّهُ أَحَقُّ أَن تَخْشَاهُ فَلَمَّا قَضَىٰ زَيْدٌ مِّنْهَا وَطَراً زَوَّجْنَاكَهَا لِكَيْ لاَ يَكُونَ عَلَى ٱلْمُؤْمِنِينَ حَرَجٌ فِيۤ أَزْوَاجِ أَدْعِيَآئِهِمْ إِذَا قَضَوْاْ مِنْهُنَّ وَطَراً وَكَانَ أَمْرُ ٱللَّهِ مَفْعُولاً }

Tafsir al-Jalalayn - (تفسير الجلالين )Sura -ahzab  33:5


इन्हीं  कुतर्कों  के आधार पर लगभग सन625  ईसवी  में  मुहम्मद  साहब  ने अपने दत्तक  पुत्र  जैद  की  पत्नी  से शादी  कर  डाली .यानी  जैनब  के साथ   व्यभिचार  किया .
देखिये  विडिओ -Prophet Muhammad lusts after & steals his adopted son's wife Pt. 2

http://www.youtube.com/watch?v=wp3pMgmGuVo

अपने  निकट सम्बन्ध  की स्त्रियों  के साथ  शारीरिक संबंध  बनाने  को इनसेस्ट (incest )  कहा  जाता  है , विश्व  के सभी  धर्मों  और हर  देश   के  कानून  में  इसे पाप  और  अपराध  माना  गया  है . लेकिन  मुहम्मद साहब  अपनी वासना  पूर्ति  के  लिए   तुरंत कुरान  की  आयत  सूना  देते  थे  . और इस  निंदनीय   काम  को  जायज  बना  देते थे .कुरान  की इसी  तालीम  के  कारण हर  जगह   व्यभिचार  और बलात्कार  हो रहे  हैं .क्योंकि  मुसलमान  इन  नीच  कर्मों  को गुनाह  नहीं  मानते  ,बल्कि  रसूल  की सुन्नत   मानते  हैं .


http://www.slideshare.net/UnveilingMuhammad/khaula-e



सोमवार, 23 सितंबर 2013

सम्भोग जिहाद !

इस्लाम  और  जिहाद  एक दूसरे के बिना नहीं   रह  सकते . यदि  इस्लाम शरीर  है ,तो जिहाद  इसकी आत्मा है . और जिस दिन इस्लाम  से जिहाद  निकल  जायेगा  उसी दिन  इस्लाम  मर  जायेगा . इसीलिए  इस्लाम को जीवित रखने के लिए मुसलमान  किसी न किसी बहाने और   किसी  न किसी  देश में  जिहाद करते  रहते हैं . इमका एकमात्र उद्देश्य  विश्व  के सभी  धर्मों  , संसकृतियों   को नष्ट करके  इस्लामी हुकूमत  कायम  करना  है . अभी तक  तो मुसलमान  आतंकवाद  का सहरा  लेकर  जिहाद  करते  आये थे ,लेकिन  इसी  साल  के अगस्त  महीने में जिहाद  का एक नया  और अविश्वसनीय  स्वरूप   प्रकट  हुआ है ,जो कुरान से  प्रेरित  होकर  बनाया गया है . लोगों  ने इसे "सेक्स  जिहाद ( Sex  Jihad )  का नाम  दिया  है .चूंकि  जिहादियों  की मदद करना भी  जिहाद  माना  जाता है ,इसलिए सीरिया में  चल रहे युद्ध ( जिहाद )  में  जिहादियों  की वासना शांत करने के लिए    औरतों  की  जरुरत  थी . जिसके लिए  अगस्त में  बाकायदा  एक फ़तवा   जारी  किया   गया था .  और उसे पढ़  कर  ट्यूनीसिया   की   औरतें  सीरिया  पहुँच  गयी  थी .और  जिहादियों   के साथ सम्भोग  करने के लिए  तैयार  हो गयीं ,और  मुल्लों ने  कुरान  का हवाला  देकर इस निंदनीय   कुकर्म  को जायज  कैसे  ठहरा  दिया  इस लेख में इसी   बात को स्पष्ट   किया  जा रहा है . ताकि लोग  इस्लाम् के इस घिनावने असली  रूप को देख सकें ,
1-जिहाद अल्लाह को प्रिय है 
अल्लाह चाहता है कि  मुसलमान   जिहाद के लिए अपने बाप ,भाई और पत्नियों को भी छोड़ दें ,तभी अल्लाह खुश होगा  , जैसा की कुरान में  कहा है
"अल्लाह   तो उन्हीं  लोगों  को अधिक पसंद  करता  है ,जो अल्लाह की ख़ुशी के लिए पंक्ति  बना कर जिहाद  करते हैं  " सूरा -अस सफ 61 :4 
" हे नबी  कहदो ,तुम्हें  अपने बाप ,भाई  , पत्नियाँ  और  जो माल तुमने कमाया है ,जिन से तुम  जितना  प्रेम  करते हो  , और उनके छूट जाने का  डर  लगा  रहता है .लेकिन  उसकी तुलना में अल्लाह के रसूल को  जिहाद  अधिक प्रिय  है " सूरा -तौबा 9 :24 

2-जिहाद में औरतों से सम्भोग  
मुसलमान  जितने भी अपराध  और  कुकर्म  करते हैं , सब  कुरान से प्रेरित  होते  हैं , क्योंकि  कुरान  हरेक कुकर्म को जायज ठहरता है .जिस से  अपराधियों  की  हिम्मत  बढ़  जाती है , और "सेक्स जिहाद "  कुरान की इस आयत के आधार  पर किया जा रहा है ,

" اللَّاتِي هَاجَرْنَ مَعَكَ وَامْرَأَةً مُؤْمِنَةً إِنْ وَهَبَتْ نَفْسَهَا لِلنَّبِيِّ إِنْ أَرَادَ النَّبِيُّ  "
" हे नबी  हमने तुम्हारे लिए वह  सभी ईमान  वाली ( मुस्लिम )  औरतें  हलाल  कर दी हैं  ,जो रसूल के  उपयोग  के लिए  खुद को  " हिबा- هِبة  " ( समर्पित ) कर दें " सूरा -अहजाब 33: 50
" and  believing woman who offers herself freely  use to the Prophet -Sura-ahzab33:50
नोट -अरबी  शब्द  हिबा  का अर्थ  अपनी किसी  चीज  दूसरों  को उपयोग के  लिए सौंप   देना  , हिबा कुछ  समय के लिए और  हमेशा के लिए भी हो सकता  है . हिबा में  मिली गयी चीज का   जैसे चाहें   उपयोग किया जा सकता है . चाहे  वह  औरत हो  या कोई वस्तू

3-जिहाद्के लिए औरतों का समर्पण 
सामान्यतः  एक  चरित्रवान  ,और शादीशुदा औरत   किसी भी दशा में  खुद को  दूसरे मर्द   के हवाले नहीं  करेगी  , जबकि उस  को यह भी पता हो  कि  उसके साथ  सहवास  किया  जायेगा .लेकिन  मुहम्मद  साहब ने   कुरान में ऐसे  नीच  काम को भी   धार्मिक   कार्य   बना दिया .  जिसका पालन  आज भी  पालन  कर रहे है , इसके पीछे  यह  कारण  है  ,  कि  इस्लाम  औरत को  भोगने की व चीज  है .मुहम्मद  साहब  जब भी जिहाद के लिए  जाते थे ,तो अपनी औरतों को घर में  बंद कर देते थे , और जिहादियों  के साथ नयी औरतें  पड़ते  रहते  थे . और  जिहादी  नयी  औरतों  के लालच में अपनी औरतें रसूल  के हवाले कर देते थे .खुद को रसूल  के हिबा करने के पीछे  यह ऐतिहासिक  घटना  है , हिजरी सन  5  के  शव्वाल महीने में  मुहम्मद साहब को जब यह पता चला कि  मदीना के सभी कबीले  के लोग उनके विरुद्ध   युद्ध   की  तयारी   कर रहे हैं .और उन्होंने  खुद के बचाव के लिये  खन्दक  भी  खोद  रखी  है . तब  मुहम्मद साहब ने  खुद आगे बढ़ कर  उन पर हमला    करने  के कूच   का हुक्म  दे दिया . इसके लिए 1500 तलवारें 300  कवच , 2000 भाले  1500 ढालें जमा कर लीं  थी .इस  जिहादी   लस्कर में  जिहादियों   की औरतें  भी  थी .  जिहादी  तो युद्ध में  नयी औरतों  के  लालच  में  गए थे .  और अपनी औरतें  रसूल  को  हिबा  कर  गए  थे .   और  रसूल ने   उन औरतों  के साथ  सम्भोग को  जायज बना दिया ,  तभी कुरान की यह आयत   नाजिल  हुई थी .जिस के अनुसार खुद को  जिहाद के लिए  अर्पित करने वाली  औरतों  से  सम्भोग करना जायज है .

4-जिहाद अल निकाह 
अंगरेजी  अखबार   डेली  न्यूज (DailyNews )  दिनांक  20 सितम्बर  2013  में प्रकाशित   खबर  के अनुसार  सीरिया  में होने वाले  युद्ध  ( जिहाद )   में  जिहादियों   लिए  ऐसी  औरतों  की  जरुरत    थी  , जो जिहादियों  के साथ  सम्भोग  करके उनकी वासना  शांत कर सकें  , ताकि वह बिना थके  जिहाद करते रहे,  इसके लिए  अगस्त   के अंत में  एक सुन्नी  मुफ़्ती  ने फतवा  भी जारी कर दिया  था . जो " फारस  न्यूज  ( FarsNews  )  छपा  था .इस  फतवे की खबर पढ़ते ही " ट्यूनीसिया  ( Tunisia )  की  हजारों  विवाहित और कुंवारी  औरतें   सीरिया  रवाना  हो गईं .और जिहाद के नाम  पर   जिहादियों  के साथ  सम्भोग  करने के लिए राजी  हो गयीं .  ट्यूनिसिया  के " आतंरिक   मामले के  के मंत्री (  Interior Minister  )"लत्फी बिन  जद्दू - لطفي بن جدو " ने ट्यूनिसिया  की National Constituent Assembly में  बड़े  गर्व   से  बताया   कि   जो औरतें  सीरिया  गयी  है ,उनमे अक्सर ऐसी औरतें  हैं  ,जो  एक दिन  में   20 -30  और यहांतक  100  जिहादियों  के साथ  सम्भोग  कर सकती  हैं .और  जो औरतें  गर्भवती  हो जाती  हैं  , उन्हें    वापिस भेज  दिया  जाता  है ,  जिस मुफ़्ती  ने   इस  प्रकार   के जिहाद  कफतावा दिया  था ,उसने  इस का नाम  "  जिहाद  अल  निकाह  - الجهاد النِّكاح  " का नाम  दिया  है .सुन्नी  उल्रमा के अनुसार  यह  एक ऐसा   पवित्र और    वैध  काम  है  ,जिसमे  एक औरत  कई कई जिहादियों  के साथ  सम्भोग करके  उनकी  वासना  शांत  कराती है .लत्फी  बिन जददू  ने यह भी  बताया कि मार्च से  लेकर अब तक   छह  हजार ( 6000 )औरतें  सीरिया  जा चुकी हैं ,और कुछ  की आयु  तो केवल  14  साल  ही है .
 http://www.hurriyetdailynews.com/tunisian-women-waging-sex-jihad-in-syria-minister.aspx?pageID=238&nID=54822&NewsCatID=352

5-सेक्स का फ़तवा 
किसी भी विषय  या समस्या  के बारे में कुरान के आधार पर  जोभी धार्मिक निर्णय  किया जाता है ,उसे फतवा  कहा  जाता है  , और मुसलामनों के लिए   ऐसे फतवा  का पालन  करना  अनिवार्य   हो जाता  है . चूँकि  इन  दिनों  सीरिया में  जिहाद  हो रहा है , जिसमें  हजारों  जिहादी  लगे हुए  हैं  .और  उनकी वासना शांत  करने के लिए औरतों की जरुरत  थी , इस लिए एक सुन्नी मुफ़्ती " शेख  मुहम्मद   अल आरिफी -  شيخ محمّد العارفي  "  ने इसी साल अगस्त में एक फतवा  जारी  कर दिया  था ,इस फतवा में कहा है कि सीरिया  के जिहादियों  की कामेच्छा (  sexual desires  )  पूरी  करने  के लिए और    शत्रु को मारने उनके निश्चय  में  मजबूती (  sexual desires and boost their determiation in killing Syrians. 
  प्रदान  करने के लिए " सम्भोग  विवाह"  यानी "अजवाज  अल जमाअ -الزواج الجماع  "  जरूरी  (intercourse marriages )है .फतवा में कहा है   ,जो भी औरत  इस  प्रकार  के  सेक्स  से जिहादियों  की मदद  करेगी उसे  जन्नत  का वादा   किया जाता है ( He also promised “paradise” for those who marry the militants  )

"    ووعد أيضا "الجنة" بالنسبة لأولئك الذين يتزوجون من المسلحين "
    यह फतवा  कुरान  की इस आयत के आधार पर  जारी  किया  गया  है ,
" जिन लोगों ने अपने मन  और  शरीर से जिहाद किया तो ऐसे   लोगों  का  दर्जा सबसे  ऊंचा   माना  जाएगा " सूरा -तौबा 9 :29

6-जिहाद के लिए योनि संकोचन 
मुसलमान   जानते हैं कि भारत में अभी प्रजातंत्र  है ,  और इसमे  जनसंख्या   का  महत्त्व  होता है .इसलिए वह लगातार  बच्चे  पैदा करने  में लगे रहते हैं .और  लगतार  बच्चे पैदा  करने से  उनकी औरतों  योनि इतनी ढीली  हो  जाती  है ,कि  उसमे उनका पति  अपना  सिर  घुसा  कर अन्दर  देख  सकता   है .और अपनी औरतों  की योनि  को संकोचित ( Vaginal Shrink   )  करवाने के लिए धनवान  मुसलमान " हिम्नोप्लास्टी -hymenoplasty   "   नामक ओपरेशन  करवा  लेते थे .चूंकि  सीरिया में सेक्स जिहाद में  एक एक  औरत दिन  में सौ सौ  जिहादियों  के साथ  सम्भोग करा  रही है , जिस से उनकी योनि ढीली    हो जाती  है . और युद्ध के समय ओपरेशन करवाना संभव    नहीं था .इसलिए पाकिस्तान की  एक दवा कंपनी(  Pakistan's pharmacies ) ने एक क्रीम  तैयार  की है .जो  कराची  से सीरिया  भेजी   जा रही  है .पाकिस्तान  के अखबार "एक्सप्रेस ट्रिब्यून ( Express Tribune  )    में  दिनांक20    अगस्त 2013 की खबर के अनुसार  कराची में  इन दिनों " योनि संकोचन  (   Vaginal Shrink Cream," )  ले लिए एक क्रीम   बिक रही  है . जिसे लोग वर्जिन  क्रीम ( Virgin Cream" )   भी  कह रहे हैं .इसमे उत्पादक ने  दावाकिया है कि   कितनी भी ढीली योनि हो , इस क्रीम  के प्रयोग से  18  साल  की कुंवारी  लड़की की योनि जैसी  सिकुड़ी  और सकरी  बन   जाएगी .इसी  अखबार की सह संपादक "हलीमाँ  मंसूर  "खुद इस क्रीम  को  देखा  , जिसके डिब्बे पर एक हंसती  हुई लड़की की तस्वीर  है .यह क्रीम  दो नामों  से बिक रही  है 1. B-Virgin’, (the package displaying a youthful girl smiling at white flowers).2 . और दूसरी का नाम 18 Again (Vaginal Shrink Cream,)   है  . जो  शीशी  में मिल रही है .इस पर लिखा है "  promise to restore a woman's virginity. "यह  क्रीम   बड़ी   मात्रा में  पाकिस्तान से  सीरिया भेजी  जा रही है  , ताकि संकुचित योनि   पाकर  जिहादी  दिल से जिहाद   करते रहें .
Re-virginising’ in a tube: ‘Purity’ for sale at Pakistani pharmacies

http://blogs.tribune.com.pk/story/18175/re-virginising-in-a-tube-purity-for-sale-at-pakistani-pharmacies/

7-सेक्स जिहाद विडिओ 
शेख  मुहम्मद अल आरिफी  ने टी वी   पर  जो सेक्स  जिहाद का फतवा  दिया  था , वह  यू ट्यूब   पर  मौजूद है ,इस विडिओ का नाम   है  , जिहाद  अल निकाह -jihad al nikah- جهاد النكاح ... فتوى حقيقة او بدعة "

http://www.youtube.com/watch?v=2ftO8Zkvl18

यह लेख पढनेके  बावजूद जो लोग इस्लाम  को धर्म मानते हैं  और मुसलमानों  से सदाचारी  होने की उम्मीद  रखते हैं  ,उन्हें अपने  दिमाग  का इलाज करवा . वास्तव में देश में  जितने भी  बलात्कार  हो रहे हैं  , सबके पीछे इसलाम की तालीम  है .जिसका भंडाफ़ोड़  करना  हरेक  व्यक्ति  का  कर्तव्य  है .समझ  लीजिये इस्लाम  का अर्थ शांति नहीं समर्पण ( surrendar )  है . जिहाद का अर्थ परिश्रम  करना नहीं  आतंक ( terror )  है , कुरबानी का   अर्थ त्याग नहीं जीव हत्या ( slaughter ) है .और  रहमान  का अर्थ दयालु नहीं हत्यारा ( killer )  है .यदि इतना भी  समझ लोगे तो  इस्लाम    को समझ लोगे .

http://www.danielpipes.org/blog/2008/04/strange-sex-stories-from-the-muslim-world