गुरुवार, 31 जनवरी 2013

जन्नत में भारतीय मसाले !


आजकल  जो कट्टरवादी   मुस्लिम   जिहाद  के नाम  पर भारत   के विरुद्ध  आतंक  फैलाते  रहते हैं ,और इसी काम  को  जन्नत  में जाने  का   तरीका   समझने  की   भूल  कर रहे हैं .उनको  शायद  यह बात   पता नहीं   है ,कि  यदि वह  किसी तरह  जन्नत में भी    घुस  जायेंगे  तो  उनको   अल्लाह  जो शराब  पिलाएगा  ,उसमें  जिन  मसालों  का    प्रयोग  किया  जायेगा  ,  वह  भारत  से ही  मंगवाए  जायेंगे .क्योंकि वह   भारत में ही   पैदा  होते हैं .लगता है  कि  या तो अल्लाह     कुछ   साल  भारत  में रहा  होगा  या फिर उसको  भारत  के  सुगन्धित  और गुणकारी   मसालों  का  स्वाद  इतना  पसंद  आगया   होगा  कि कुरान  में भी    मसालों  की तारीफ़  कर डाली .लेकिन  बड़े   आश्चर्य की बात है  कि अल्लाह उन  भारतीय   सुगंधत  द्रव्यों   का प्रयोग  किसी  दवा   ,या  किसी  धार्मिक  अनुष्ठानों  में प्रयोग  नहीं  करेगा  बल्कि उस   शराब  बनाने  में  करेगा  . जिस से  मुसलमान  नफ़रत  करते  हैं .चाहे  कोई  इस  बात  को  नहीं  जनता हो , परन्तु  यह  बात  पूर्णतयः  सत्य  है ,इस लेख  में    इसके प्रमाण  दिए  जा रहे हैं ,
पाकितान  के अखबार  डेली टाइम्स ( Daily Times ) दिनांक  1 अगस्त 2004 , के  अनुसार इस्लाम  के  विद्वान्   और  कई भाषाओँ  के  जानकर  "सय्यद  सुलेमान  नदवी "  ने  एक  पुस्तक   लिखी है  जिसका नाम  " अरब ओ  हिन्द  के  ताल्लुकात  " है .और  यह किताब  " मशाल  बुक्स " ने  प्रकाशित  की है . इस पुस्तक में कुरान  जन्नत    का वर्णन   करते   हुए ऐसे  तीन  शब्द   मौजूद  है , जो संस्कृत   से   निकले   हैं , और  कुरान   में   वर्णित  जिन  तीन  संस्कृत   वस्तुओं  के नाम   दिए  हैं , वह  मूलतः  भारत   में  ही  पाए  जाते  हैं  .वास्तव  में   तीनों  सुगन्धित ,और औषधीय   वस्तुएं  है ,  जिनका  भारत में    इस्लाम  से  पूर्व    से अबतक  प्रयोग    किया    जा  रहा है . यहाँ  पर   इन  तीनों  के नाम और  कुरान  का हवाला  दिया जा  रहा है 

1-जिन्जिबील -अदरक 

संस्कृत   में  अदरक  को  'श्रंगवेर ' भी  कहा  गया  है . और  यही शब्द ग्रीक भाषा में ' जिन्जीबरिस zingíberis (ζιγγίβερις).हो गया .फिर अंगरेजी  में "जिंजर Ginger "    होगया .और  इसी  को  अरबी में  "  जिन्जिबील  زنجبيل  "    कहा  गया  है ,वनस्पति  शाश्त्र  में  इसका नाम  " Zingiber officinale,  " है .मूलतः  यह शब्द  तमिल भाषा  के शब्द  "  इंजी இஞ்சி    " और " वेर வேர் "   से  मिल  कर बना  है .जिसका  अर्थ  सींग  वाली  जड़  होता है .और  अदरक  को सुखाकर  ही  "सौंठ "   बनायीं  जाती  है .जिसका  प्रयोग अल्लाह  जन्नत  में  शराब  में  मिलाने  के लिए  करता  है .   इसलिए  कुरान  में  कहा  है ,

"और वहां   उनको ऐसे  मद्य  का  पान  कराया  जायेगा   जो जंजबील  मिला  कर तय्यार  किया गया  हो " सूरा -अद दहर 76:17 

"وَيُسْقَوْنَ فِيهَا كَأْسًا كَانَ مِزَاجُهَا زَنْجَبِيلًا"76:17

And in that [paradise] they will be given to drink of a cup flavoured with ginger, (76:17)

नोट -कुरान  के  हिंदी अनुवाद  में  इस आयत का  खुलासा    करते हुए  बताया है ,जन्नत में  शीतलता  होगी . और जन्जिबील   का तासीर  और गुण गर्म  होता है और वह  स्वादिष्ट  भी होता है ,और उसके  मिलाने से  मद्य   आनंद  दायक   हो जाता है '
 (हिंदी  कुरान .मकताबा   अल हसनात ,पेज 1110 टिप्पणी 11)

2-काफूर - कपूर 

संस्कृत  में   इसे  " कर्पूर "कहा  जाता  है . और  भारत की सभी भाषाओँ  के साथ  फारसी , उर्दू  में यही नाम   है .  अंगरेजी   में "Camphor '   है .और वनस्पति शाश्त्र में  इसका नाम " सिनामोमस कैफ़ोरा (Cinnamomum camphora, हैयह एक वृक्ष से प्राप्त किया जाता है .भारत में यह देहरादून, सहारनपुर, नीलगिरि तथा मैसूर आदि में पैदा किया जाता है.लगभग 50 वर्ष पुराने वृक्षों के काष्ठ आसवन (distillation) से कपूर प्राप्त किया जाता है.भारत में   कपूर  का उपयोग  दवाइयों  , सुगंधी  और  धार्मिक  कामों   के  लिए  किया  जाता है . लेकिन अल्लाह   जन्नत में  कपूर का प्रयोग   शराब  में   मिलाने के लिए  करता  है ,  कुरान में  कहा है ,

"और  वह  ऐसे  मद्य  का  पान  करेंगे जो कपूर  मिला कर  तय्यार किया  होगा "सूरा -अद दहर 76:5

"إِنَّ الْأَبْرَارَ يَشْرَبُونَ مِنْ كَأْسٍ كَانَ مِزَاجُهَا كَافُورًا "76:5

(they shall drink  of   cup whereof mixture    of   Kafur )

नोट -इस आयत   की व्याख्या में  कहा है ,वह  कपूर अत्यंत  आनंदप्रद ,  स्वादिष्ट ,शीतल , और सुगन्धित  होगा और जोजन्नत का आनंद लेने वाले   होंगे  उन्हीं  को मिलेगा
(कुरान  हिंदी  पेज  1109 टिप्पणी  3)

3-मुस्क - कस्तूरी 

यद्यपि  कुरान  में  कस्तूरी  शब्द  नहीं  आया  है ,कस्तूरी  मृगों  से  जो सुगन्धित  पदार्थ  मिलता  है ,यूनान तक  निर्यात होता था .और ग्रीक  भाषा  कस्तूरी  को " Musk " कहा जाता है ,कस्तूरी  मृग  को  "Musk Deer "  कहते हैं  , और अरबी  में "  المسك الغزلان    " कहते है  . वैज्ञानिक भाषा  में     इसका नाम   " Moschus  Moschidae  "है . ग्रीक  भाषामे  कस्तूरी मृग  के लिए प्रयुक्त  इसी मुस्क   शब्द  को  कुरान   में  लिया  गया है ,

कस्तूरी  मृग    लुप्तप्राय  प्राणी है  ,जो  हिमालय क्षेत्र  में मिलता  है .उसकी  ग्रंथियों से  जो  स्राव  निकालता है  उसी को कस्तूरी   कहते हैं  .जो दवाई , और  सुगंधी  में काम  आती  है . लेकिन अल्लाह   इसे भी  शराब   उद्योग में   इस्तेमाल  कर लिया  ,  कुरान  में लिखा है ,

"उन्हें खालिस शराब पिलायी जायेगी ,जो मुहरबंद होगी .और मुहर उसकी मुश्क की होगी " सूरा -अल ततफ़ीफ़ 83:25-26

"يُسْقَوْنَ مِنْ رَحِيقٍ مَخْتُومٍ "83:25

"خِتَامُهُ مِسْكٌ وَفِي ذَٰلِكَ فَلْيَتَنَافَسِ الْمُتَنَافِسُونَ " 83:26

They will be given a drink of pure wine whereon the seal , (25)pouring forth with a fragrance of musk.  (26)

नोट - इन आयतों में हिंदी कुरान में कहा है कि मनुष्य को उसी शराब की इच्छा करना चाहिए जो अल्लाह ने बनायी गयी है (.पेज 1139 टिप्पणी 11)

निष्कर्ष -कुरान से प्रमाणित इस सभी पुख्ता सबूतों से सिद्ध होता है कि अगर मुसलमान जन्नत भी चले गए तो वहां भी अल्लाह को भारत के इन तीनों मसालों की जरुरत पड़ेगी .जो उसे भारत से ही मंगवाना पड़ेंगी . क्योंकि यह वस्तुएं अरब में पैदा नहीं होती .और यदि अल्लाह ऐसा नहीं करेगा तो कुरान दिया गया उसका वादा झूठ साबित हो जायेगा .
इसलिए हमारा उन सभी भारत विरोधी जिहादियों से इतना ही कहना ही कि जब जन्नत में भी अल्लाह को भारतीय मसालों की जरुरत पड़ेगी तो स्वर्ग जैसे इस भारत को बर्बाद क्यों करना चाहते हो ?क्योंकि हमारे लिए तो हमारी जन्मभूमि ही जन्नत से भी महान है !



http://www.dailytimes.com.pk/default.asp?page=story_1-8-2004_pg3_3

मंगलवार, 29 जनवरी 2013

अल्लाह के दर्शन की आसान विधि !


भारत के सभी धर्मों में ईश्वर का साक्षात्कर या ईश्वर का दर्शन करना अत्यंत कठिन और दुर्लभ माना जाता है .ऐसी मान्यता है कि लाखों व्यक्तिओं में किसी एक महापुरुष या संत को ईश्वर का दर्शन करने का सौभाग्य मिलता है . क्योंकि इसके लिए बरसों तक कठिन तपस्या , व्रत , और निष्ठा पूर्वक ईश्वर की उपासना करना पड़ती है .और सदा जीव मात्र के कल्याण के लिए अपना तन मन धन समर्पित करना पड़ता है . जो हरेक के लिए संम्भव नहीं है ,
दूसरी तरफ इस्लामी मान्यताएं है , जो भारतीय धर्मों से बिलकुल विपरीत हैं . जो तर्कहीन , और हास्यास्पद हैं , और मुल्ले मौलवी इस बात को सामान्य मुसलमानों से छुपाते रहते हैं , वह केवल नमाज और जिहाद को ही अल्लाह का दीदार करने का उपाय बताते हैं ,और मुसलमानों को गुमराह करने के लिए कभी अल्लाह को निराकार और कभी साकार बताते रहते हैं ,जैसे कभी कहते हैं कि रसूल बुराक नामके जानवर पर बैठ कर अल्लाह से मिलने जन्नत गए थे . और अल्लाह से आमने सामने बात भी की थी ,लेकिन प्रश्न यह उठता है कि दुसरे मुसलमानों से क्यों छुपता रहता है ,चाहे वह जकारिया नायक जैसा इस्लाम का प्रचारक क्यों नहीं हो . बहुत कम लोगों को पता होगा कि बहुत पहले ही अल्लाह के रसूल ने अल्लाह का दर्शन करने के लिए अटपटा और आसान रास्ता बता दिया था ,इस लेख में हदीसों के आधार पर अल्लाह का दीदार करने की तरकीब दी जा रही है ,
1-दर्शन से रोक 
यदि कुरान की बात को माना जाये तो कोई सामान्य मुसलमान अल्लाह का दर्शन नहीं कर सकता है , शायद अल्लाह को अपना दर्शन दिखाना पसंद नहीं हो . इसलिए उसने कुरान में यह कह दिया होगा ,
"और इन सब लोगों को रब के दर्शन से रोक लिया गया है "सूरा -अल ततफ़ीफ़ 83:15
2-अल्लाह की बहानेबाजी 
ऐसा प्रतीत होता है कि अल्लाह की शक्ल या तो भयानक होगी या वह निहायत बदसूरत था , इसलिए जब भी मूसा ने उसे देखना चाह तो वह पहाड़ी के पीछे छुप गया .और बहाना बनाया कि तुम मेरी जगह पहाड़ी को देख लो ,यह बात कुरान के कही गयी है ,
"जब मूसा ने अल्लाह से कहा कि मैं तुझे देख लूँ ,तो अल्लाह ने कहा तू मुझे नहीं देख सकता .हाँ उस पहाड़ को देख ( जिसके पीछे मैं छुपा हुआ हूँ ) 
सूरा -अल आराफ 7:143
3-अल्लाह को परदा पसंद है 
मुस्लिम औरतों को यह बात जानकर ख़ुशी होगी कि जो अल्लाह उनको परदे में रहने का हुक्म देता रहता है , वह खुद भी परदे की आड़ लेकर लोगों से बातें करता है . इसीलिए मुसलमान उसके दर्शन नहीं कर पाते ,देखिये कुरान में क्या कहा है
"ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है ,जो अल्लाह को देख सके ,या उस से आमने सामने बात कर सके .लेकिन यह संभव है कि कोई परदे  की आड़ से अल्लाह से बात कर सके 'सूरा -अश शूरा 42:51
 4-जन्नत काफी दूर है 
हदीसों के अनुसार अल्लाह से मिलने और उसके दर्शन करने में सबसे बड़ी समस्या यह है कि मक्का मदीना से जन्नत काफी दूर है , और वहां सिर्फ ऊँटों से ही जाया जा सकता है ,
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया है ,जन्नत एक पेड़ के की छाया के नीचे है ,और वहां पंहुचने के लिए एक ऊंट सवार को सौ साल लग जायेंगे "
( In Paradise, there is a tree under the shadow of which a rider can travel for a hundred years"
 सही मुस्लिम - किताब 40 हदीस 6845
(शायद अल्लाह ने ऊंट की सवारी इसलिए पसंद होगी कि उसे डर होगा यदि कोई रोकेट या हवाई जहाज से जन्नत जाने की कोशिश करेगा तो अमरीकी और इस्राइली उसे मिसाइल से गिरा सकते हैं )

5-अल्लाह दर्शन की अश्लील शर्त 
अल्लाह के रसूल में मुसलमानों के लिए अल्लाह का दर्शन करने की कुछ आसान तरकीबें बता दी है , भले दुसरे धर्म के लोग इन्हें अश्लील बताते रहें ,लेकिन हमें विश्वास है कि हरेक ईमान वाला परिवार सहित इस तरकीब पर जरुर अमल करेगा ,क्योंकि यह प्यारे रसूल के वचन है , उन्हीं ने कहा है ,
इब्न अब्बास ने कहा कि रसूल ने खुतबे के दौरान कहा है ,कि जो लोग नंगे पैर ,पूरी तरह नग्न और खतना रहित होंगे वही अल्लाह से मिल सकेंगे . और उसका दर्शन कर सकेंगे " 
( they would meet Allah barefooted, naked and uncircumcised. )

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَابْنُ أَبِي، عُمَرَ قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ الآخَرُونَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ سَعِيدِ، بْنِ جُبَيْرٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، سَمِعَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَخْطُبُ وَهُوَ يَقُولُ ‏"‏ إِنَّكُمْ مُلاَقُو اللَّهِ مُشَاةً حُفَاةً عُرَاةً غُرْلاً ‏"‏ ‏.‏ وَلَمْ يَذْكُرْ زُهَيْرٌ فِي حَدِيثِهِ يَخْطُبُ ‏.‏   "

" إِنَّكُمْ مُلاَقُو اللَّهِ مُشَاةً حُفَاةً عُرَاةً غُرْلاً "
सही मुस्लिम -किताब 40 हदीस 6846
(वाह रे हमारे रसूल धन्य है आपकी बुद्धि , हम मानते हैं कि अल्लाह का दर्शन करने के लिए अगर सभी मुसलमान नंगे भी हो जायेंगे तो बिना खतना वाले लोग जन्नत कैसे जायेगे ? क्योंकि लिंग की चमड़ी तो बचपन में ही कटवा दी जाती है , क्या जन्नत जाते समय वह फिर से उग जाएगी ? या अल्लाह का दर्शन काफ़िर लोग करेंगे ?)
6-अल्लाह का प्राणलेवा दर्शन 
जो मुसलमान खुद को अल्लाह का असली बंदा साबित करने के लिए जिहादी बन जाते हैं , और सोचते हैं कि ऐसा करने से उनको अल्लाह का दीदार हो जायेगा , शायद उन्हें पता नहीं होगा कि अल्लाह का दर्शन होते ही वह खुद मर जायेगे ,यह बात खुद रसूल ने बताई है ,ठीक से पढ़ लीजिये ,
अब्दुल्लाह इब्न उमर ने कहा कि रसूल ने उमर खत्ताब और इब्न सय्यद की मौजूदगी में लोगों से कहा ' तुम लोग गवाह हो कि मैं अल्लाह का रसूल हूँ ,और तुम लोग इस बात को अच्छी तरह से अपने दिमागों में रख लो .कि जब तक कोई भी व्यक्ति नहीं मरता तब तक वह अल्लाह को को नहीं देख सकता ,
"Bear this thing in mind that none amongst you would be able to see Allah, the Exalted and Glorious, until he dies.


عَلَّمُوا أَنَّهُ لَنْ يَرَى أَحَدٌ مِنْكُمْ رَبَّهُ عَزَّ وَجَلَّ حَتَّى يَمُوتَ ‏"‏  "

सही मुस्लिम -किताब 41 हदीस 7000

इतनी ख़ुफ़िया जानकारी मिलने के बाद मुसलमानों को चाहिये कि वह अभी से हदीस का पालन करते हुए नागा साधुओं में शामिल हो जाये , और हमारी दुआ है कि उनको जल्द ही अल्लाह के दर्शन हो जाएँ , और वही हो जाये जो आखिरी हदीस में बताया गया है 
"आमीन सुम्मा आमीन "

http://www.islam-watch.org/AbulKasem/BismiAllah/7a.htm

रविवार, 27 जनवरी 2013

अल्लाह का नाम लेना अपराध है ?


विश्व के जितने भी धर्मों के अनुयायी ईश्वर में आस्था रखते हैं ,वे किसी न किसी नाम से ईश्वर की उपासना करते हैं , और उसका स्मरण किया करते हैं .लोग यह भी मानते हैं कि मनुष्यों की तरह ईश्वर का कोई निजी या व्यक्तिगत नाम  (personal Name )नहीं हो सकता क्योंकि ईश्वर अजन्मा है , और ऐसा कोई नहीं होगा जिसने ईश्वर का नामकरण किया होगा .इसलिए लोग ईश्वर को अनेकों नामों से   पुकारते हैं ,जो ईश्वर के गुणों , शक्तियों ,और महानता को प्रकट करते हैं .जिनको ईश्वर की " विभूतियाँ " भी कहा जाता है .परन्तु इस्लाम एकमात्र ऐसी विचारधारा है ,जिसे धर्म समझना तर्कसम्मत नहीं माना जा सकता है .क्योंकि इसमे इस्लाम के अल्लाह के बारे में परस्पर विरोधी ,तर्कहीन और ऊंटपटांग बातों का समावेश है .जिनका उद्देश्य केवल गैर मुस्लिमों को किसी न किसी तरह से फ़साना और प्रताड़ित करना है .इस बात को और स्पष्ट करने के लिए हमें अल्लाह के बारे में इस्लामी किताबों और मुल्लों फतवों को देखना होगा .साथ में यह भी जानना होगा कि इस्लाम से पहले अल्लाह कहाँ था , और अल्लाह शब्द का जन्म कैसे हुआ था .
1.अल्लाह का जन्म 
भले ही इस्लामी विद्वान् अपने अल्लाह को अजन्मा बताते रहें ,लेकिन अल्लाह का जन्म उसी दिन हो गया था , जिस दिन कुरान की पहली पहली सूरा बनी थी .इतिहास के अनुसार कुरान की पहली सूरा " अलक " है . जो वर्त्तमान कुरान में 96 वें नंबर पर है .देखिये ,
बुखारी -जिल्द 1 किताब 1 हदीस 3 और बुखारी -जिल्द 4 किताब 55 हदीस 605
चूँकि कुरान की पहली सूरा माह रमजान सन 610 ईo बनी थी ,यही अल्लाह की पैदायश का समय माना जायेगा . क्योंकि इस से पहले अल्लाह का कोई अस्तित्व नहीं था .कुरान की पहली मक्का की एक पहाड़ी "जबल अन्नूर "या " गारे हिरा "में बनी थी , इसलिए यही अल्लाह का जन्मस्थान है .तब से अब तक इस कल्पित अल्लाह के नाम पर करोड़ों निर्दोष लोगों की हत्या की गयी , और यह सिलसिला अभी तक चालू है ,
2-अल्लाह शब्द की चोरी 
इस्लाम से पहले अरब और आसपास के भाग में यहूदी धर्म का प्रभाव था ,और यहूदी धर्म की पुस्तकों में ईश्वर के लिए हिब्रू भाषामे " एली " और "एलोह "शब्द इस्तेमाल किया जाता था ,जिसका अर्थ "देव " होता है .और इसका बहुवचन "एलोहीम " होता है .(Aramaic word for god is “alah.” In Hebrew the word for God or god is (אל) (el) and “Elah,” (or Eloh) and the plural form is (אלוהים) (elohím)
चूँकि ईसामसीह की मातृभाषा भी हिब्रू थी इसलिए क्रूस पर चढाने के बाद उन्हों अपने ईश्वर को इस प्रकार पुकारा था ,
" और करीब तीसरे पहर पर यीशु ने पुकारा " एली एली लमा शबकतनि "अर्थात हे प्रभु तूने मुझे क्यों त्याग दिया " बाइबिल - नया नियम .मत्ती 27:46

“And about the ninth hour Jesus cried with a loud voice, saying, Eli, Eli, lama sabachthani? that is to say, My God, my god, why hast thou forsaken me?”

 [Matthew 27: 46

मुहम्मद साहब काफी चतुर व्यक्ति थे , उनको पता था कि यहूदी ईश्वर को "इलोह " कहते हैं जो अरबी के शब्द " इलाह الإله" से मिलता है , जिसका अर्थ "देवता " होता है .और अरब के लोग अपने हरेक देवता को "इलाह الاه " कहते थे .इसलिए पहले तो मुहम्मद साहब ने एक चाल चली
3-इलाह से अल्लाह
सबसे पहले मुहम्मद साहब ने मक्का के लोगों को यह बात कह कर बहकाया कि ,
" और हे लोगो यह तो (देवताओं के ) सिर्फ नाम ही हैं ,जिनको तुम्हारे पूर्वजों ने रख लिया था .इनके बारे में कोई प्रमाण नहीं है . यह तो सिर्फ कल्पना है ,और लोग बस उसी पर चल रहे हैं " सूरा -अन नज्म 53:23

﴿ إِنْ هِيَ إِلَّا أَسْمَاءٌ سَمَّيْتُمُوهَا أَنْتُمْ وَآَبَاؤُكُمْ مَا أَنْزَلَ اللَّهُ بِهَا مِنْ سُلْطَانٍ إِنْ يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ

وَمَا تَهْوَى الْأَنْفُسُ وَلَقَدْ جَاءَهُمْ مِنْ رَبِّهِمُ الْهُدَى ﴾
फिर अरबी में देवता के लिए प्रयुक्त शब्द " इलाह " के साथ "अल " शब्द लगाकर "अल्लाह " शब्द गढ़ लिया .(Thus the word “Allah” is “al-ilah” and literally “The god,” as in the Arabic phonetic construction (ال + إله = اللَّهُ). Of course).और अरब के जाहिल लोगों को बहकाया कि हमारा बनाया अल्लाह और तुम्हारा इलाह एक ही हैं .और कहा ,
वही तुम्हारे पूर्वजों का देवता है ," व् इलाह आबाइक  إِلَٰهَكَ وَإِلَٰهَ آبَائِكَ"और वही एकमात्र देवता है "इलाह वाहिदन إلها واحدا"सूरा -बकरा 2:133
और मूर्ख लोग मुहम्मद के झांसे में आकर इलाह और अल्लाह को एक ही मान बैठे .और मुहम्मद साहब के जोड़ तोड़ से बनाये अल्लाह को ही अपना इलाह समझने लगे .
4-विषम संख्या का शौकीन अल्लाह
कुरान और हदीसों के अनुसार अल्लाह को विषम संख्या बहुत पसंद है ,यहाँ तक वह उनकी कसमे भी खाता है . जैसे
"और कसम खाता हूँ सम और विषम की " सूरा -अल फज्र 89:3
 " وَالشَّفْعِ وَالْوَتْرِ "89:3

इसलिए जब मुहम्मद साहब ने देखा कि दुसरे धर्मों में ईश्वर के अनेकों नाम हैं , तो उन्होंने अपने अल्लाह के कई नाम गढ़ लिए ,
5-अल्लाह के नामों की रचना 
धीमे धीमे अल्लाह के नए नए बनते गए ,लेकिन उनकी संख्या विषम ही रखी गयी .इसका कारण हदीस से मिलता है ,
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने इब्न अब्दुल्लाह और सुफ़यान से कहा है , कि अल्लाह को "वित्र " यानि विषम संख्या (Odd ) बहुत पसंद हैक्योंकि अल्लाह खुद विषम है , इसलिए अल्लाह के सब प्रकार के नाम मिला कर नब्बे और नौ नाम अर्थात निन्यानवे नाम हैं ,और जो अल्लाह को इन नामों से पुकारेगा , या इन नामों को याद करेगा वह जन्नत में दाखिल होगा .
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ حَفِظْنَاهُ مِنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، رِوَايَةً قَالَ ‏ "‏ لِلَّهِ تِسْعَةٌ وَتِسْعُونَ اسْمًا، مِائَةٌ إِلاَّ وَاحِدًا، لاَ يَحْفَظُهَا أَحَدٌ إِلاَّ دَخَلَ الْجَنَّةَ، وَهْوَ وَتْرٌ يُحِبُّ الْوَتْرَ ‏"‏‏.‏"

( इस हदीस में अरबी के कहा है ' हुवल वित्र व् युहिब्बुल वित्र وَهْوَ وَتْرٌ يُحِبُّ الْوَتْرَ  "अर्थात अल्लाह विषम है , और विषम ही पसंद करता है Allah is Witr (one) and loves 'the Witr' (i.e., odd numbers)

.सही बुखारी -जिल्द 8 किताब 75 हदीस 419

"अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया है , अल्लाह के निन्नानवे नाम इसलिए हैं क्योंकि अल्लाह खुद 'वित्र ' यानी अयुग्म (Odd ) है . और अयुग्म चीजें ही पसंद करता है "

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ لِلَّهِ تِسْعَةٌ وَتِسْعُونَ اسْمًا مَنْ حَفِظَهَا دَخَلَ الْجَنَّةَ 

2677 صحيح مسلم كِتَاب الذِّكْرِ وَالدُّعَاءِ وَالتَّوْبَةِ وَالِاسْتِغْفَارِ لله تسعة وتسعون اسما من حفظها دخل الجنة وإن الله وتر يحب الوتر

 सही मुस्लिम -किताब 35 हदीस 6476
6-निन्नानवे का चक्कर 
मुस्लिम मुल्लों ने अल्लाह के नामों की 99 संख्या पूरी करने के लिए कई सूचियाँ बना डाली ,जिनके नामों में काफी अंतर है .जो एक दूसरे से अलग है .जो इन साइटों से साबित होता है
List .1.http://voyagebwp.wordpress.com/2010/06/17/99-names-of-allah-with-english-meanings/


list-2http://muttaqun.com/99names.html

यह दोनो साइटें मुसलमानों ने बनायी हैं . जो चाहे इनको खोल कर अल्लाह के 99 नामों में अंतर देख सकता है . बहुत से मुसलमान भी इस बात से अनजान हैं ,कि वास्तव में अल्लाह के असली 99 नाम कौन से हैं .
7-मुहम्मद साहब की योजना 
मुहम्मद साहब चाहते थे कि लोग उनके बनाये अल्लाह की तारीफ करें , इसलिए कुरान में अल्लाह के मुंह से कहलावाया कि ,
और अल्लाह को अच्छे गुण वाले नाम पसंद है ,तो तुम उन्हीं के द्वारा उसे पुकारा करो "सूरा -अल आराफ 7:180
"وَلِلَّهِ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَى فَادْعُوهُ بِهَا"7:180
"और उसी के लिए (अल्लाह के लिए) अच्छे नाम हैं " सूरा -अल हश्र 59:24
لَهُ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَى "Sura-al hashr59:24
फिर मुहम्मद साहब ने लोगों से यह भी कह दिया ,
"अल्लाह के सिवा कोई 'इलाह 'नहीं है ,और उसके लिए अच्छे नाम हैं "सूरा -ता हा 20:8

"اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ لَهُ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَى"Sura -Taha 20:8
8-अल्लाह के बुरे नाम 
यद्यपि अल्लाह चाहता था कि उसके अच्छे अच्छे नाम रखे जाएँ ताकि उसके दुर्गुणों पर पर्दा पड़ा रहे , और लोगों को ऐसा लगे कि जैसा अल्लाह शरीफ और शांत है वैसे ही मुसलमान भी होंगे . लेकिन मुहम्मद साहब ने अल्लाह के बुरे नाम भी उजागर कर दिए .जो इस प्रकार हैं .अल्लाह के इन बुरे नामों को अर्थ सहित प्रथम सूची से लिया गया है , जिसके क्रमांक भी दिए गए हैं
91.अज्जार"Ad-Darr (الضار) The Creator of The Harmful,which means "The Harmer अर्थात " हानिकर्ता "इस नाम का प्रयोग कुरान में सूरा -अल फतह 48:11,सूरा -अल हज 22:12,सूरा -यूनुस 10:18 और सूरा -अल फुरकान 25:55 में हुआ है .
72." मुअख्खिर " Al-Mu’akhkhir (المؤخر) The Delayer- means "The Delayer,"अल्लाह को इस बुरे नाम का प्रयोग कुरान में सूरा -इब्राहीम 14:10.सूरा -नहल 16:61,सूरा फातिर 35:45 और सूरा -नूह 71:4 में पुकारा गया है .
62."अल मुमीत "Al-Mumit (المميت) The Taker of Lifeअर्थात प्राणघाती या प्राणहर्ता अल्लाह को इस बुरे नाम से कुरान में सूरा -बकरा 2:258,सूरा -बकरा 2:28,और सूरा -आले इमरान 3:156 में संबोधित किया गया है .
 क्योंकि अल्लाह के यह नाम उसके गुणों और स्वभाव को प्रकट करते हैं , इसलिए ऐसे अल्लाह का वही व्यक्ति नाम लेगा जिसकी बुद्धि नष्ट हो चुकी हो
9-अल्लाह के नाम दादागिरी 
वैसे तो इस्लाम के सभी नियम , कानून मानवता विरोधी हैं , लेकिन इतिहास साक्षी है, जब भी इस्लाम और सत्ता का कुसंयोग होता है , अर्थात मुसलमानों की हुकूमत हो जाती है ,तो मुस्लिम शासक और मुल्ले मिल कर गैर मुस्लिमों को फ़साने के लिए ऐसे फतवे देते रहते हैं ,जिस से निर्दोष होने पर भी गैर मुस्लिमों को अपराधी सिद्ध करके उनपर कठोर सजाएँ दी जा सकें .जिस से बचने के लिए वह इस्लाम कबूल करने पर विवश हो जाएँ .ऐसा एक उदहारण हमें मलेसिया के सेलानगोर राज्य से मिलता है .जिसका पूरा विवरण इस प्रकार है ,
"अखबार " दि इंडियन एक्सप्रेस " के अनुसार मलेसिया की सन 2010 की जनगणना के मुताबिक वहां 61.4% मुस्लिम ,17.8% बौद्ध ,9.2% ईसाई ,और 6.3% हिन्दू रहते हैं ,यद्यपि वहां के संविधान की धारा 11 में सभी धर्मों के लोगों को बराबर का अधिकार दिया गया है . लेकिन यह केवल दिखावा ही है .क्योंकि मलेसिया के राज्य सेलानगोर के सुल्तान "शरफुद्दीन इदरीस शाह ' ने वहां के मुफ़्ती " मुहम्मद मिसरी " के फतवे दवाब में आकर एक आदेश जारी किया है .कि गैर मुस्लिमों के लिए अल्लाह शब्द का प्रयोग करने पर प्रतिबन्ध है .सुल्तान का यह बेतुका आदेश गजट में भी प्रकाशित किया गया है .जिसमे लिखा है ,जो भी गैर मुस्लिम अल्लाह शब्द का किसी भी तरह से प्रयोग करेगा उस पर जुरमाना या , और कठोर कारावास की सजा दी जाएगी .(The indian express  Mon, 14 Jan 2013 18:07 IST)

अब हमारा उद्देश्य उन लोगों सचेत करने का है ,जिन पर सेकुलरिज्म का भुत सवार है , और जोड़तोड़ से बनाये गए अल्लाह शब्द का अनावश्यक रूप से गीतों में ,कविता में और बातचीत में प्रयोग करते रहते हैं .ऐसे लोगों को चाहिए कि अल्लाह के साथ उसके समानार्थी शब्द जैसे मौला अदि का भूल से भी प्रयोग नहीं करें .
याद रखिये कि मुसलमानों का अल्लाह मौत देने वाला है .

http://www.indianexpress.com/news/nonmuslims-can-t-use--allah--says-sultan-of-malaysia-s-selangor/1056845/

मंगलवार, 1 जनवरी 2013

अल्लाह सबसे बड़ा मुशरिक है !


इस्लाम की मान्यताएं अन्तर्विरोध से भरी पड़ हैं .फिर भी इन मान्यताओं के आधार पर इस्लाम सभी गैर मुस्लिमों को पापी और अपराधी मानकर क़त्ल के योग्य समझता है .क्योंकि इस्लाम की नजर में ,हत्या ,बलात्कार , चोरी , जनसंहार जैसे अपराध छोटे और क्षमा योग्य है . परन्तु " शिर्क " को सबसे बड़ा और ऐसा अपराध माना गया है ,जिसे कभी माफ़ नहीं किया जा सकता है .लेकिन बड़ी विचित्र बात है कि रसूल (मुहम्मद ) ने हदीसों में जिस कार्य को शिर्क और महापाप बताया है .और उसी कार्य को अल्लाह बार बार करता है .इस विषय को स्पष्ट करने के लिए हमें शिर्क की परिभाषा समझना जरुरी है ,कुरान के हिंदी अनुवाद के अंत में जो "पारिभाषिकशब्दावली " दी है उसमे "शिर्क " की व्याख्या दी गयी है ,हिंदी कुरान पारिभाषिक शब्द शिर्क पेज 1245.मकतबा . अल हसनात रामपुर 

1-शिर्क क्या है ?
इस्लामी परिभाषा में अल्लाह की सत्ता में किसी को शामिल करना (To associate anyone with Allah Taala) शिर्क شرك‎  कहा जाता है .शिर्क को बहुदेववाद (Polytheism  ) का पर्याय माना जाता है . जो एक अक्षम्य अपराध है .और शिर्क करने वालों को अरबी बहुवचन में " मुश्रिकून مشركون" कहा जाता है .कुरान के अनुसार जो भी व्यक्ति मुशरिक रहते हुए मर जायेगा , वह सदा के लिए जहन्नम की आग में जलता रहेगा .हदीसों में शिर्क के कई रूप बताये गए हैं .यहांतक अल्लाह के अतिरिक्त किसी और के नाम पर कसम (Swearig )खाना या सौगंध ( Oath ) लेना भी शिर्क माना गया है .अरब के मुसलमान बात बात पर अपने बाप दादा और काबा की कसम खाया करते थे . मुहम्मद साहब ने इसे भी शिर्क बताया .और सिर्फ अल्लाह के नाम की कसम खाने का हुक्म दिया . जैसा इन हदीसों में कहा गया है .

2-सिर्फ अल्लाह की कसम खाओ 
कुरान और हदीसों में शपथ और कसम के "हलफ حلف"और "कसम قسم" शब्द प्रयोग किये गए हैं .इन हदीसों में अल्लाह के अलावा किसी वस्तू या व्यक्ति की कसम खाने को शिर्क माना गया है ,

1.बाप दादा की कसम 

उमर ने कहा कि कुरैश के लोग अकसर अपने बाप दादाओं की कसम खाया करते थे ,रसूल ने उनको सिर्फ अल्लाह की कसम खाने को कहा . जो भी अल्लाह के सिवा अपने बाप दादा की कसम खाता है ,वह मुशरिक है .बुखारी -जिल्द 5 किताब 58 हदीस 177

2.-काबा की कसम 
"सअद इब्न उदैबा ने कहा कि एक व्यक्ति ने उमर सामने कहा "काबा की कसम " उमर यह बात रसूल को बताई तो रसूल बोले ,जो भी व्यक्ति अल्लाह के अलावा किसी और चीज की कसम खाता है ,वह मुशरिक है " 
"
عَنْ سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ قَالَ  سَمِعَ ابْنُ عُمَرَ رَجُلًا يَحْلِفُ لَا وَالْكَعْبَةِ فَقَالَ لَهُ ابْنُ عُمَرَ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ حَلَفَ بِغَيْرِ اللَّهِ فَقَدْ أَشْرَكَ "
सुन्नन अबी दाऊद -किताब 21 हदीस 2151

( इस हदीस में "हलफ حَلَفَ" शब्द आया है . जिसका अर्थ शपथ Swear होता है )

3-.सिर्फ अल्लाह की कसम खाओ 

"अब्दुल्लाह ने कहा कि रसूल ने कहा है कि सिर्फ अल्लाह की कसम खाया करो . और अल्लाह के सिवा किसी की कसम खाना शिर्क है "
बुखारी -जिल्द 3 किताब 48 हदीस 844
इन हदीसों से सिद्ध होता है कि अल्लाह के अतिरिक्त किसी की कसम खाना शिर्क है , चाहे कोई अल्लाह के घर काबा की कसम भी खाए वह मुशरिक माना जायेगा , और मर कर जहन्नम जायेगा .
लेकिन जब कुरान में अनेकों बार खुद अल्लाह ही ऐसी चीजों की कसमें खाता है , जिनकी कसमें खाना हदीसों में शिर्क बताया गया ,तो इस्लाम के शिर्क की परिभाषा में शंका होती है ,कुरान से ऐसे कुछ सबूत दिए जा रहे हैं
4-अल्लाह किसकी कसमें खाता है ?
अक्सर देखा गया है कि जब किसी के पास कोई पुख्ता प्रमाण नहीं होते , तो वह अपनी सत्यता साबित करने के लिए कसम खाता है .इसीलिए अल्लाह ने अपनी बातों सही साबित करने के लिए हर चीज की कसमें खा डाली हैं , जिनके कुछ नमूने देखिये .
1.चाँद की कसम 
चाँद का इस्लाम में बहुत महत्त्व है ,चाँद देख कर ही रोज खोला जाता , ईद होती है , इसलिए अल्लाह ने चाँद की कसम खायी होगी ,और कहा ,
कसम है चाँद की "सूरा -मुदस्सिर -74:32
कसम है चाँद की ,जब वह छुप जाये "सूरा -शम्श 91:2 
2.रात की कसम 
सब जानते हैं कि चोरों को हमेशा घनी काली अँधेरी रात अच्छी लगती है , शायद इसीलिए अल्लाह ने रात की कसम खायी होगी ,और कहा ,
कसम है रात की जब वह पूरी तरह से छा जाये "सूरा -लैल 92:1
3.देखी अनदेखी चीजों की कसम 
इस आयत से साफ सिद्ध होता है कि मुसलमानों का अल्लाह सर्वद्रष्टा नहीं बल्कि कोई अरबी व्यक्ति था , वर्ना वह ऐसी कसम नहीं खाता ,
मैं खाता हूँ उन चीजों की ,जो दिखाई देती है ,और उन चीजों की भी कसम खाता हूँ जो दिखाई नहीं देती "सूरा -हक्का 68:38-39 
4.कुरान की कसम 
जब मुसलमान कुरान की आयतों को अल्लाह के वचन कहते हैं तो अल्लाह को खुद अपनी कही बातों की कसम खाने की क्या जरुरत पड़ गई , जो ऐसी कसम खा डाली .
कसम है इस नसीहत भरे कुरान की " सूरा -साद 38:1
कसम है कुरान मजीद की "सूरा -काफ -50:1
कसम है इस लिखी हुई किताब की "सूरा -अत तूर -52:2
5-कलम की कसम 
मुसलमानों का दावा है कि मुहम्मद अनपढ़ थे , उन्हें संबोधित करके अल्लाह के कलम की कसम क्यों खायी , और यह क्यों कहा
कसम है उस कलम की , जिस से तुम ( कुरान ) लिखते हो सूरा -कलम 68:1
( चूँकि अल्लाह ने मुहम्मद को संबोधित करके यह कसम खायी है ,इस से सिद्ध होता है मुहम्मद अनपढ़ नहीं थे ,वह लिख पढ़ सकते थे )
6.मुहम्मद के जीवन की कसम 
अगर मुहम्मद सचमुच अल्लाह के प्यारे रसूल थे , तो अल्लाह के खुद अपनी कसम क्यों नहीं खायी ,
"हे मुहम्मद तेरे जीवन की कसम है "सूरा -अल हिज्र 15:72
7.मक्का की कसम 
इस्लाम के परस्पर विरोधी नियमों का इस से बड़ा प्रमाण और कौन हो सकता कि एक् तरफ रसूल काबा की कसम खाने को भी शिर्क बताता है . और दूसरी तरफ खुद अल्लाह मक्का जैसे उजाड़ वीरान शहर की कसम खा रहा है , और कहता है
"नहीं ! मैं उस नगर (मक्का ) की कसम खाता हूँ ,तू ( मुहम्मद ) जिस नगर में रहता है " सूरा -अल बलद 90:1-2
"لَا أُقْسِمُ بِهَٰذَا الْبَلَدِ  "90:1
"وَأَنْتَ حِلٌّ بِهَٰذَا الْبَلَدِ  "90:2
( इस आयत की तफ़सीर में बताया है कि ,मक्का नगर नगर की भूमि बंजर और अनउपजाऊ है ,और न वहां पशुओं को चराने के लिए हरे भरे मैदान हैं .इसलिए मक्का के इन्हीं गुणों कारण अल्लाह ने मक्का नगर की कसम खायी है .)
अल्लाह के द्वारा खायी गयी कसमों के बारे में पूरे जानकारी के लिए देखिये यह विडियो 
http://www.answeringmuslims.com/2011/10/does-allah-commit-shirk.html

हम इस लेख के माध्यम से उन मुल्लों से पूछना चाहते हैं ,जो शिर्क की अंतरविरोधी , बेतुकी परिभाषा के आधार पर हिन्दू और ईसाइयों को मुशरिक बताकर उन पर जिहाद करते हैं .वह मुल्ले बताएं कि हदीस और कुरान के इन सबूतों के आधार पर हम अल्लाह को ही सबसे बड़ा मुशरिक क्यों नहीं कहें ?यातो हदीस झूठी है या कुरान झूठी है ?अब यदि कोई किसी गैर मुस्लिम को मुशरिक कह कर अपमानित करेगा तो सब मिल कर अल्लाह को ही सबसे बड़ा मुशरिक कहने लगेंगे .

http://wikiislam.net/wiki/Allah_the_Polytheist