मंगलवार, 29 जनवरी 2013

अल्लाह के दर्शन की आसान विधि !


भारत के सभी धर्मों में ईश्वर का साक्षात्कर या ईश्वर का दर्शन करना अत्यंत कठिन और दुर्लभ माना जाता है .ऐसी मान्यता है कि लाखों व्यक्तिओं में किसी एक महापुरुष या संत को ईश्वर का दर्शन करने का सौभाग्य मिलता है . क्योंकि इसके लिए बरसों तक कठिन तपस्या , व्रत , और निष्ठा पूर्वक ईश्वर की उपासना करना पड़ती है .और सदा जीव मात्र के कल्याण के लिए अपना तन मन धन समर्पित करना पड़ता है . जो हरेक के लिए संम्भव नहीं है ,
दूसरी तरफ इस्लामी मान्यताएं है , जो भारतीय धर्मों से बिलकुल विपरीत हैं . जो तर्कहीन , और हास्यास्पद हैं , और मुल्ले मौलवी इस बात को सामान्य मुसलमानों से छुपाते रहते हैं , वह केवल नमाज और जिहाद को ही अल्लाह का दीदार करने का उपाय बताते हैं ,और मुसलमानों को गुमराह करने के लिए कभी अल्लाह को निराकार और कभी साकार बताते रहते हैं ,जैसे कभी कहते हैं कि रसूल बुराक नामके जानवर पर बैठ कर अल्लाह से मिलने जन्नत गए थे . और अल्लाह से आमने सामने बात भी की थी ,लेकिन प्रश्न यह उठता है कि दुसरे मुसलमानों से क्यों छुपता रहता है ,चाहे वह जकारिया नायक जैसा इस्लाम का प्रचारक क्यों नहीं हो . बहुत कम लोगों को पता होगा कि बहुत पहले ही अल्लाह के रसूल ने अल्लाह का दर्शन करने के लिए अटपटा और आसान रास्ता बता दिया था ,इस लेख में हदीसों के आधार पर अल्लाह का दीदार करने की तरकीब दी जा रही है ,
1-दर्शन से रोक 
यदि कुरान की बात को माना जाये तो कोई सामान्य मुसलमान अल्लाह का दर्शन नहीं कर सकता है , शायद अल्लाह को अपना दर्शन दिखाना पसंद नहीं हो . इसलिए उसने कुरान में यह कह दिया होगा ,
"और इन सब लोगों को रब के दर्शन से रोक लिया गया है "सूरा -अल ततफ़ीफ़ 83:15
2-अल्लाह की बहानेबाजी 
ऐसा प्रतीत होता है कि अल्लाह की शक्ल या तो भयानक होगी या वह निहायत बदसूरत था , इसलिए जब भी मूसा ने उसे देखना चाह तो वह पहाड़ी के पीछे छुप गया .और बहाना बनाया कि तुम मेरी जगह पहाड़ी को देख लो ,यह बात कुरान के कही गयी है ,
"जब मूसा ने अल्लाह से कहा कि मैं तुझे देख लूँ ,तो अल्लाह ने कहा तू मुझे नहीं देख सकता .हाँ उस पहाड़ को देख ( जिसके पीछे मैं छुपा हुआ हूँ ) 
सूरा -अल आराफ 7:143
3-अल्लाह को परदा पसंद है 
मुस्लिम औरतों को यह बात जानकर ख़ुशी होगी कि जो अल्लाह उनको परदे में रहने का हुक्म देता रहता है , वह खुद भी परदे की आड़ लेकर लोगों से बातें करता है . इसीलिए मुसलमान उसके दर्शन नहीं कर पाते ,देखिये कुरान में क्या कहा है
"ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है ,जो अल्लाह को देख सके ,या उस से आमने सामने बात कर सके .लेकिन यह संभव है कि कोई परदे  की आड़ से अल्लाह से बात कर सके 'सूरा -अश शूरा 42:51
 4-जन्नत काफी दूर है 
हदीसों के अनुसार अल्लाह से मिलने और उसके दर्शन करने में सबसे बड़ी समस्या यह है कि मक्का मदीना से जन्नत काफी दूर है , और वहां सिर्फ ऊँटों से ही जाया जा सकता है ,
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया है ,जन्नत एक पेड़ के की छाया के नीचे है ,और वहां पंहुचने के लिए एक ऊंट सवार को सौ साल लग जायेंगे "
( In Paradise, there is a tree under the shadow of which a rider can travel for a hundred years"
 सही मुस्लिम - किताब 40 हदीस 6845
(शायद अल्लाह ने ऊंट की सवारी इसलिए पसंद होगी कि उसे डर होगा यदि कोई रोकेट या हवाई जहाज से जन्नत जाने की कोशिश करेगा तो अमरीकी और इस्राइली उसे मिसाइल से गिरा सकते हैं )

5-अल्लाह दर्शन की अश्लील शर्त 
अल्लाह के रसूल में मुसलमानों के लिए अल्लाह का दर्शन करने की कुछ आसान तरकीबें बता दी है , भले दुसरे धर्म के लोग इन्हें अश्लील बताते रहें ,लेकिन हमें विश्वास है कि हरेक ईमान वाला परिवार सहित इस तरकीब पर जरुर अमल करेगा ,क्योंकि यह प्यारे रसूल के वचन है , उन्हीं ने कहा है ,
इब्न अब्बास ने कहा कि रसूल ने खुतबे के दौरान कहा है ,कि जो लोग नंगे पैर ,पूरी तरह नग्न और खतना रहित होंगे वही अल्लाह से मिल सकेंगे . और उसका दर्शन कर सकेंगे " 
( they would meet Allah barefooted, naked and uncircumcised. )

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَابْنُ أَبِي، عُمَرَ قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ الآخَرُونَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ سَعِيدِ، بْنِ جُبَيْرٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، سَمِعَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَخْطُبُ وَهُوَ يَقُولُ ‏"‏ إِنَّكُمْ مُلاَقُو اللَّهِ مُشَاةً حُفَاةً عُرَاةً غُرْلاً ‏"‏ ‏.‏ وَلَمْ يَذْكُرْ زُهَيْرٌ فِي حَدِيثِهِ يَخْطُبُ ‏.‏   "

" إِنَّكُمْ مُلاَقُو اللَّهِ مُشَاةً حُفَاةً عُرَاةً غُرْلاً "
सही मुस्लिम -किताब 40 हदीस 6846
(वाह रे हमारे रसूल धन्य है आपकी बुद्धि , हम मानते हैं कि अल्लाह का दर्शन करने के लिए अगर सभी मुसलमान नंगे भी हो जायेंगे तो बिना खतना वाले लोग जन्नत कैसे जायेगे ? क्योंकि लिंग की चमड़ी तो बचपन में ही कटवा दी जाती है , क्या जन्नत जाते समय वह फिर से उग जाएगी ? या अल्लाह का दर्शन काफ़िर लोग करेंगे ?)
6-अल्लाह का प्राणलेवा दर्शन 
जो मुसलमान खुद को अल्लाह का असली बंदा साबित करने के लिए जिहादी बन जाते हैं , और सोचते हैं कि ऐसा करने से उनको अल्लाह का दीदार हो जायेगा , शायद उन्हें पता नहीं होगा कि अल्लाह का दर्शन होते ही वह खुद मर जायेगे ,यह बात खुद रसूल ने बताई है ,ठीक से पढ़ लीजिये ,
अब्दुल्लाह इब्न उमर ने कहा कि रसूल ने उमर खत्ताब और इब्न सय्यद की मौजूदगी में लोगों से कहा ' तुम लोग गवाह हो कि मैं अल्लाह का रसूल हूँ ,और तुम लोग इस बात को अच्छी तरह से अपने दिमागों में रख लो .कि जब तक कोई भी व्यक्ति नहीं मरता तब तक वह अल्लाह को को नहीं देख सकता ,
"Bear this thing in mind that none amongst you would be able to see Allah, the Exalted and Glorious, until he dies.


عَلَّمُوا أَنَّهُ لَنْ يَرَى أَحَدٌ مِنْكُمْ رَبَّهُ عَزَّ وَجَلَّ حَتَّى يَمُوتَ ‏"‏  "

सही मुस्लिम -किताब 41 हदीस 7000

इतनी ख़ुफ़िया जानकारी मिलने के बाद मुसलमानों को चाहिये कि वह अभी से हदीस का पालन करते हुए नागा साधुओं में शामिल हो जाये , और हमारी दुआ है कि उनको जल्द ही अल्लाह के दर्शन हो जाएँ , और वही हो जाये जो आखिरी हदीस में बताया गया है 
"आमीन सुम्मा आमीन "

http://www.islam-watch.org/AbulKasem/BismiAllah/7a.htm

9 टिप्‍पणियां:

  1. कुरान में मुहम्मद ने मुसलमानों को बेकूफ बनाया और आतंकबादी जिससे विश्व समुदाय को राक्षसी बनाया जा सके और मानवता को नष्ट किया जा सके .यही इस्लाम है.

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  2. मैं तो यही कहता हूं कि विवेक का प्रयोग करना चाहिये सभी को धार्मिक मामलों में.

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  3. ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha murkh log aur murkhta bhare tark.sab adhuri jankari.
    Nim hakim khatrah jaan.

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  4. From BNI (Bare Naked Islam):

    THE UNBELIEVER’S HANDY GUIDE to understanding why you are NOT an ‘Islamophobe’ if you hate Islam
    "http://www.barenakedislam.com/2013/01/30/the-unbelievers-handy-guide-to-understanding-why-you-are-not-an-islamophobe-if-you-hate-islam/"

    Mythbuster you may like to make it full Jankari by addition or deletion, else whats given if complete jankari.

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  5. अगर कोई मुस्लिम कन्या मुझसे शादी करेगी तो....... उसे निम्नलिखित फायदे बिना मांगे ही मिल जायेंगे. 1. तलाक का डर नहीं.. ( क्योंकि हम हिन्दुओं में शादी ७ जन्मों का पवित्र बंधन माना जाता है) 2. सूअरों की तरह 20 -25 बच्चे पैदा करने से आजादी... 3. बुरके से आजादी ... 4. घर में पूर्ण सुरक्षा ( अपने भाई, चाचाओं और मौसाओं से ) 5. उनके बच्चे पंचर नहीं बनायेंगे. बल्कि 5 रुपया दे कर बनवायेंगे. 6. बच्चे भी हमेशा प्राकृतिक रहेंगे .कहीं से कोई काट छाँट नहीं होगी. 7. बच्चियों की भी घर में पूर्ण सुरक्षा ( मुहम्मद साहब और फातिमा का प्रकरण तो आप लोगों को याद ही होगा, जबकि दोनों सगे बाप-बेटी थे) 8. बच्चे आतंकवादी नहीं बनेंगे.. 9. और सबसे बड़ी बात कि.आप बैठे-बिठाये दुनिया के सबसे पवित्र और गौरवशाली हिन्दू सनातन धर्म का हिस्सा बन जाओगे...! तो, देखा मुस्लिम कन्याओं...शादी एक फायदे अनेक! जल्दी करें.ये सुनहरा मौका हाथ से जाने ना पाए...... ऑफर सीमित समय के लिए ही है.. अंत में बस इतना ही कहूँगा कि..... अपने भाई, चाचाओं और मौसाओं को देखा बार-बार ........ मुझको भी देखो एक बार.....!

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  6. इस्लामी शरीअत में समलैंगिकता को एक ऐसा अपराध माना गया है, जिसकी सज़ा मौत है! PART 1


    ईश्वर ने मनुष्य के लिए जो जीवन व्यवस्था निर्धारित की है उसमें उसकी इस स्वाभाविक मांग की पूर्ति की भी विशेष व्यवस्था की है । ईश्वरीय मार्गदर्शन को मनुष्यों तक पहुंचाने वाले अल्लाह के आख़िरी रसूल हज़रत मुहम्मद ( सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम ) ने भी निकाह को अपना तरीक़ा बताया है और कहा है कि जो ऐसा नहीं करता है वह हम में से नहीं।

    सम्पूर्ण मानवता के लिए सर्वाधिक अनुकूल ईश्वरीय विधन में अनुचित हस्तक्षेप करते हुए यौन दुराचार के कई रूपों को पश्चिमी देशों ने अपने यहां वैध ठहरा लिया है, जिनमें से समलैंगिक व्यवहार विशेष रूप से उल्लेखनीय है । पश्चिम के अंधनुकरण की परम्परा को बनाए रखते हुए हमारे देश में भी समलैंगिकता को वैध ठहराये जाने की दिशा में पहला क़दम उठाया जा चुका है। दिल्ली हाईकोर्ट का फै़सला आते ही देश में कोई दर्जन भर समलिंगी विवाह हो चुके हैं, जिससे यहां का सामाजिक, नैतिक एवं सांस्कृतिक ढांचे के चरमरा जाने का भय उत्पन्न हो गया है और प्रबुद्ध समाज स्वाभाविक रूप से बहुत चिंतित हो गया है।

    समलैंगिकता को एक घिनौना और आपत्तिजनक कृत्य बताते हुए ईश्वर ने मानवता को इससे बचने के आदेश दिये हैं—
    ‘‘क्या तुम संसार वालों में से पुरुषों के पास जाते हो और तुम्हारी पत्नियों में तुम्हारे रब ने तुम्हारे लिए जो कुछ बनाया है उसे छोड़ देते हो । तुम लोग तो सीमा से आगे बढ़ गये हो ।’’ (क़ुरआन, 26:165-166)

    क्या तुम आंखों देखते अश्लील कर्म करते हो? तुम्हारा यही चलन है कि स्त्रियों को छोड़कर पुरुषों के पास काम वासना की पूर्ति के लिए जाते हो? वास्तविकता यह है कि तुम लोग घोर अज्ञानता का कर्म करते हो । (क़ुरआन, 27:54-55)

    इस संबंध में क़ुरआन में और भी स्पष्ट आदेश मौजूद हैं—

    ‘‘वह अल्लाह ही है, जिसने तुम्हें एक जान से पैदा किया और उसी की जाति से उसका जोड़ा पैदा किया ताकि उसकी ओर प्रवृत होकर शान्ति और चैन प्राप्त करे।’’ (क़ुरआन, 7:189)
    ‘‘तुम तो वह अश्लील कर्म करते हो जो तुम से पहले दुनिया वालों में से किसी ने नहीं किया। तुम्हारा हाल यह है कि तुम मर्दों के पास जाते हो और बटमारी करते हो। (अर्थात् प्रकृति के मार्ग को छोड़ रहो हो।)’’ (क़ुरआन, 29:28-29)

    ‘‘और यह भी उसकी निशानियों में से है कि उसने तुम्हारी ही सहजाति से तुम्हारे लिए जोड़े पैदा किए ताकि तुम उनके पास शान्ति प्राप्त करो और उसने तुम्हारे बीच प्रेम और दयालुता पैदा की। निश्चय ही इसमें बहुत-सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो सोच-विचार करते हैं।’’ (क़ुरआन, 30:21)

    इसके अलावा अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम ) ने भी समलैंगिकता को एक अनैतिक और आपराधिक कार्य बताते हुए इससे बचने के आदेश दिये हैं। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम) ने कहा है कि—‘‘एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति के गुप्तांग नहीं देखने चाहिए और एक महिला को दूसरी महिला के गुप्तांग नहीं देखने चाहिए । किसी व्यक्ति को बिना वस्त्र के दूसरे व्यक्ति के साथ एक चादर में नहीं लेटना चाहिए और इस प्रकार एक महिला को बिना वस्त्र के दूसरी महिला के साथ एक चादर में नहीं लेटना चाहिए ।’’ (अबू दाऊद)
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  7. PART 2

    आप (सल्ल॰) ने फ़रमाया—समलैंगिकता में लिप्त दोनों पक्षों को जान से मार दो। (तिरमिज़ी) यह आदेश सरकार के लिए है किसी व्यक्ति के लिए नहीं । इसके अलावा समलैंगिकता में लिप्त महिलाओं के बारे में अल्लाह के रसूल ( सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम) का कथन है कि यह औरतों का ज़िना (बलात्कार) है । (तबरानी)

    इस्लामी शरीअत में समलैंगिकता को एक ऐसा अपराध माना गया है, जिसकी सज़ा मौत है, यदि यह लिवात (दो पुरुषों के बीच समलिंगी संबंध) हो । सिहाक़ (दो महिलाओं के बीच समलिंगी संबंध) को चूंकि ज़िना (बलात्कार) माना गया है, इसलिए इसकी सज़ा वही है, जो ज़िना की है अर्थात इसमें लिप्त महिला यदि विवाहित है तो उसे मौत की सज़ा दी जाए और यदि अविवाहित है तो उसे कोड़े लगाए जाएं । ये सज़ाएं व्यक्ति के लिए हैं यानी व्यक्तिगत रूप से जब कोई इस अपराध में लिप्त पाया जाए, लेकिन यदि सम्पूर्ण समाज इस कुकृत्य में लिप्त हो तो उसकी सज़ा ख़ुद क़ुरआन ने निर्धारित कर दी है—

    क्या तुम ऐसे निर्लज्ज हो गये हो तुम स्त्रियों को छोड़ कर पुरुषों से काम वासना पूरी करते हो । वास्तव में तुम नितांत मर्यादाहीन लोग हो। किन्तु उसकी क़ौम का उत्तर इसके सिवा कुछ नहीं था कि निकालो इन लोगों को अपनी बस्तियों से ये बड़े पवित्रचारी बनते हैं । अंततः हमने लूत और उसके घर वालों को (और उसके साथ ईमान लाने वालों को) सिवाय उसकी पत्नी के जो पीछे रह जाने वालों में थी, बचाकर निकाल दिया और उस क़ौम पर बरसायी (पत्थरों की) एक वर्षा। फिर देखो उन अपराधियों का क्या परिणाम हुआ ।’’ (क़ुरआन, 7:80-84)

    ‘‘फिर जब हमारा आदेश आ पहुंचा तो हमने उसको (बस्ती को) तलपट कर दिया और उस पर कंकरीले पत्थर ताबड़-तोड़ बरसाए।’’ (क़ुरआन, 11:82)
    ‘‘अंततः पौ फटते-फटते एक भयंकर आवाज़ ने उन्हें आ लिया और हमने उस बस्ती को तलपट कर दिया और उस पर कंकरीले पत्थर बरसाए।’’
    (क़ुरआन, 15:73-74)

    समलैंगिकता एक नैतिक असंतुलन है, एक अपराध और दुराचार है । इसमें संदेह नहीं कि यह बुराई मानव समाज में सदियों से मौजूद है, वैसे ही जैसे, चोरी, झूठ, हत्या आदि दूसरे अपराध समाज में सदियों से मौजूद हैं । इनके उन्मूलन के प्रयास किये जाने चाहिएं न कि इन्हें सामाजिक स्वीकृति प्रदान की जानी चाहिए । कोई भी व्यक्ति जन्म से ही समलैंगिक नहीं होता है, जैसे कोई भी जन्म से चोर या हत्यारा नहीं होता, बल्कि लोग उचित मार्गदर्शन के अभाव में ये बुराइयां सीखते हैं । किशोरावस्था में अपनी नवीन और तीव्र कामेच्छा पर नियंत्रण न पाने के कारण ही लोग समलिंगी दुराचारों का शिकार हो जाते हैं ।

    समलैंगिकता को एक जन्मजात शारीरिक दोष और मानसिक रोग भी बताया जाता है। जो लोग इसमें लिप्त हैं या इसे सही समझते हैं वे ये कुतर्क देते हैं कि हमें ईश्वर ने ऐसा ही बनाकर पैदा किया है अर्थात् यह हमारा स्वभाव है जिससे हम छुटकारा नहीं पा सकते हैं। लेकिन वे अपने विचार के पक्ष में कोई तर्क देने में असमर्थ हैं। दूसरी ओर इसका विरोध करने वाले लोगों का एक वर्ग इसे एक मानसिक रोग बताता है, लेकिन उसका यह सिद्धांत भी निराधार है, तर्कविहीन है। सच्चाई यह है कि समलैंगिकता सामान्य व्यक्तियों का असामान्य व्यवहार है और कुछ नहीं।

    क़ुरआन ने जिस प्रकार लूत की क़ौम की घटना प्रस्तुत की है उससे भी स्पष्ट होता है कि यह न तो शारीरिक दोष है और न मानसिक रोग, क्योंकि शारीरिक दोष या मानसिक रोग का एक-दो लोग शिकार हो सकते हैं, एक साथ सारी की सारी क़ौम नहीं। यह भी कि ईश्वर अपने दूत लोगों के शारीरिक या मानसिक रोगों के उपचार के लिए नहीं भेजता और न ही उपदेश या मार्गदर्शन देने या अपने अच्छे आचरण का व्यावहारिक नमूना प्रस्तुत करने से ऐसे रोग दूर हो सकते हैं। यह मात्र एक दुराचार है, जिस प्रकार नशे की लत, गाली-गलौज, और झगड़े-लड़ाई की प्रवृत्ति और अन्य दुराचार।

    समलैंगिकता व्यक्ति और समाज दोनों के लिए ख़तरनाक है। यह एक घातक रोग (एड्स) का मुख्य कारण है। इसके अलावा यह महिला और पुरुष दोनों के लिए अपमानजनक भी है। इस्लाम एक पुरुष को पुरुष और एक महिला को महिला बने रहने की शिक्षा देता है, जबकि समलैंगिकता एक पुरुष से उसका पुरुषत्व और एक महिला से उसका स्त्रीत्व छीन लेता है। यह अत्यंत अस्वाभाविक जीवन शैली है। समलैंगिकता पारिवारिक जीवन को विघटन की ओर ले जाता है।

    इन्हीं कारणों से इस्लाम समलैंगिकता को एक अक्षम्य अपराध मानते हुए समाज में इसके लिए कोई स्थान नहीं छोड़ता है। और यदि समाज में यह अपना कोई स्थान बनाने लगे तो उसे रोकने के लिए या अगर कोई स्थान बना ले तो उसके उन्मूलन के लिए पूरी निष्ठा और गंभीरता के साथ आवश्यक और कड़े क़दम भी उठाता है।
    SUNNIKING TEAM

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  8. muhammad ko kalki avatar sidha kar rahe hain eske visay men aap kya kahenge

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