मंगलवार, 30 अप्रैल 2013

कुख्यात आदर्श मुस्लिम ओसामा !


इस्लाम के उदय से लेकर आज तक जितने भी कुख्यात मुस्लिम हमलावर ,लुटेरे , अत्याचारी , बलात्कारी ,अपराधी और आतंकवादी हुए हैं ,इस्लामी द्रष्टिकोण से सभी मुसलमानों के लिए आदर्श व्यक्ति हैं . क्योंकि इन सभी का उदेश्य विश्व को बर्बाद करके इस्लामी राज्य की स्थापना करना रहा है .यद्यपि ऐसे लोगों के नामों की सूचि काफी बड़ी है ,लेकिन आधुनिक काल में इस्लाम के कुछ ऐसे आदर्श व्यक्ति हुए हैं , जिनके नाम पर लोग आज भी थूकते हैं .जैसे युगांडा का तानाशाह ईदी अमीन , इराक का सद्दाम हुसैन , लीबिया के मुअम्मार गदाफी ,दाऊद इब्राहिम , और ओसामा बिन लादेन .
लेकिन इनमे ओसामा का नाम सबसे ऊपर है , क्योंकि उसके आतंकी संगठन की जड़ें केवल अरब में ही नहीं अफगानिस्तान से लेकर भारत तक फैली हुई हैं , जो कई नामों से यहाँ भी सक्रिय हैं .
ओसामा बिन लादेन ने मुहम्मद साहब के बताये रास्ते पर चल कर ,और उनकी कुरान और हदीसों में दी गयी शिक्षा का पालन करते हुए ही दुनिया को बर्बाद करने की जो योजना बनायीं थी , वह उसने अपने फतवों के द्वारा अखबारों में प्रकाशित कर दी थी . इसलिए पहले ओसामा का संक्षिप्त सा परिचय देकर उस फतवे के मुख्य अंश दिए जा रहे हैं . ताकि लोगों को पता चल सके कि मुसलमानों का आदर्श ओसामा क्या चाहता था
1-ओसामा का परिचय
जिस कुख्यात आतंकवादी को दिग्विजय सिंह जैसा हिन्दू विरोधी कांगरेसी सार्वजनिक रूप में संसद में भी आदरपूर्वक "ओसामा जी " संबोधित करके महिमा मंडित करता है , उसका पूरा नाम "ओसामा बिन मुहम्मद बिन अवैज बिन लादेन -Osama bin Mohammed bin Awad bin Laden - أسامة بن محمد بن عوض بن لادن‎-था .ओसामा का बाप मोहम्मद बिन लादेन सऊदी अरब के अरबपति बिल्डर था .चूँकि इसका नाम भी मुहम्मद था ,इसलिए अपने रसूल का अनुसरण करते हुए ओसामा के बाप मुहम्मद ने भी कई औरतें और रखैलें रखी हुई थी .वैसे तो ओसामा के बाप का काम बिल्डिंग बनाने का था , लेकिन उसका कसली काम बच्चे पैदा करना था .जो हर मुसलमान करता रहता है .इसका उद्देश्य जिहादियों की संख्या बढ़ाना है , ताकि जल्द से जल्द विश्व पर इस्लामी राज्य हो जाये .इसी लिए ओसामा के बाप ने 52 बच्चे पैदा किये थे . जिनमे ओसामा बिन लादेन 17 वां बच्चा था ,ओसामा का बाप कहता था ,बच्चे पैदा करना रसूल की सुन्नत है .ओसामा बिन लादेन  का जन्म 10 मार्च 1957 को हुआ था .ओसामा बिन लादेन ने थोड़े ही समय में कुरान और सभी हदीसें पढ़ ली थीं ,जिसके प्रभाव से उसके दिमाग में दुनिया भर में इस्लामी राज्य की स्थापना करने का पागलपन सवार हो गया .चूँकि मुहम्मद साहब ने भी जिहाद का रास्ता अपनाया था , इसलिए ओसामा बिन लादेन ने भी आतंकवाद नाम जिहाद रख लिया .
2-ओसामा की औरतें 
मुसलमान ओसामा बिन लादेन को अपना आदर्श इसलिए मानते हैं , क्योंकि वह मुहम्मद साहब की तरह कई औरतें और रखैलें रखता था . जैसे मुहम्मद साहब कुरान में दूसरों को तो सिर्फ चार औरतें रखने का हुक्म देते थे और खुद चार से अधिक औरतें रखते थे . जिनमे 6 साल की बच्ची से लेकर 40 साल की महिलाएं थी .जैसे मुहम्मद साहब को उनकी सबसे छोटी औरत आयशा ने मरवा दिया था .उसी तरह ओसामा को पकड़वाने में उसकी छोटी औरत का हाथ था .ओसामा ने कुरान के चार औरत के आदेश को तक पर रख कर पांच औरतें रखी थी . जो इस प्रकार हैं ,
1-नजवा गनीम .यह सीरिया की थी इसका जन्म 1960 में हुआ था इसका उपनाम उम्मे अब्दुल्लाह था .
2-खदीजा शरीफ -जन्म 1948 ,उपमाम उम्मे अली
3-खैरिया साबेर ,उपनाम उम्मे हमजा
4-सीहाम साबेर ,उपनाम उम्मे खालिद
5-अमाल अहमद अल सदाह -जन्म 1982 यह सबसे छोटी थी ,इसी औरत ने अमेरिकन सरकार को ओसामा के गुप्त स्थान का सुराग दिया था .
इसके साथ ओसामा के करीब 24 बच्चे थे .
3-अल कायदा की स्थापना 
ओसामा बिन लादेन जितना अय्याश था उतना ही कट्टर मुसलमान था . उसकी नजर में सभी गैर मुस्लिम काफिर थे और उनका सफाया करने और विश्व में इस्लामी शरियत लागू करवाने के लिए ओसामा ने अगस्त 1 9 9 8 को एक आतंकवादी दल " अल कायदा - القاعدة‎ al-qāidah" की स्थापना की थी . और आज भी इसके सहयोगी दल दुनिया भर में विस्फोट करके हजारों लोगों की हत्या कर चुके हैं , भारत में 'सिमी " इंडियन मुजाहिद कई दल मौजूद हैं . जिनको स्थानीय मुसलमानों का सहयोग प्राप्त है .लेकिन हमारी सेकुलर सरकार इनके द्वारा की गयी आतंकी कार्यवाही को इस्लामी आतंक नहीं मानती है . और कहती है कि आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता .जबकि इस्लाम खुले शब्दों में आतंकवाद की शिक्षा देता है .चूँकि ओसामा इस्लाम का एक धर्मगुरु भी था ,इसलिए उसने दो फतवे ऐसे दिए थे जिनमे मुसलमानों आतंक . तोड़फोड़ . विस्फोट और हत्याएं करने के आदेश दिए गए थे . उन फतवों का सारांश यहाँ दिया जा रहा है .
4-ओसामा का पहला फतवा 
ओसामा का पहला फतवा एक अरबी अखबार " अल कुद्स " में 23 अगस्त 1 9 9 6 में प्रकाशित हुआ था .और इस फतवे का शीर्षक "एलान हरब -إعلان حرب " यानि युद्ध की घोषणा (Declaration of War  ) था .इस फतवे में कुरान की आयतों के हवाले देकर मुसलमानों को जिहाद और आतंकवाद फ़ैलाने के लिए प्रेरित किया गया है .फतवे के मुख्य अंश इस प्रकार हैं ,
"मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के आलावा कोई और उपासना के योग्य नहीं है , और अल्लाह का कोई सहभागी नहीं है . और मुहम्मद उसके रसूल हैं ,
कुरान में कहा गया है ,'हे ईमान वालो अल्लाह का डर रखो ,जैसा उस से डरने का हक़ है .और अगर तुम मरो तो इस दशा में मरो कि लोगों को पता चले कि तुम मुसलमान हो ' सूरा -आले इमरान 3 :1 0 2 . इसलिए तुम यह बात हरेक मुस्लिम मर्द और औरत को समझा दो .अल्लाह ने यह भी फरमाया है 
"लोगो अपने अल्लाह से डरो , जिसने तुम्हें एक ही जीव से पैदा किया ,फिर उसी से स्त्री पुरुष बनाकर दुनिया में फैला दिया 'सूरा -निसा -4 :1 

इसलिए हरेक मुस्लिम मर्द और औरत को चाहिए कि अल्लाह और उसके रसूल के आदेशों का निष्ठां से पालन करें ,इससे अल्लाह उनके इरादों में सफलता प्रदान करेगा , औरअगले पिछले सभी गुनाह माफ़ कर देगा ,अल्लाह ने कुरान में वादा किया है .
"तो जो ईमान रखते हैं ,वह अल्लाह का डर रखें ,तो वह तुम्हारे गुनाह माफ़ करके तुम्हारे इरादों में सफलता प्रदान करेगा क्योंकि जिसने अल्लाह और उसके रसूल की बात मानी उसी को सफलता मिलेगी " सूरा -अहजाब -3 3 :7 0 -7 1

इसलिए सभी मुसलमानों को चाहिये कि आपसी झगड़े छोड़ कर सिर्फ इन्ही कामों पर ध्यान से लग जाएँ ,
1 -दूसरों के मानव संसाधनों को इतना नुकसान पहुंचाना कि अधिक से अधिक लोग मारे जाएँ , या घायल हो जाएँ ,
2 -दूसरों की वित्तीय और आर्थिक स्थिरता को छिन्नभिन्न कर देना .
3 -देश के बुनियादी ढाँचे को नष्ट करने वाली शक्तियों को सहायता देना 
4 -समाज की एकता ,और अखंडता तोड़ने के लिए अपने विरोधियों को जिम्मेदार ठहराना ,और शांति की बातें करते रहना .
5 -देश पेट्रोल के बिना नहीं चल सकता , इसलिए तेल उद्योग को नष्ट करना .
6 -अंत में निशाने पर लिए गए देश को विभाजीत कराने का प्रयास करना .
हमें अपनी जान की परवाह किये बिना इन्हीं उद्देश्यों को पूरा करना होगा , क्योंकि कुरान कहा है ,
"अल्लाह की अनुज्ञा के बिना कोई नहीं मर सकता .अल्लाह ने हरेक की नियति पहले से लिख रखी है .और जो लोग इसी दुनियां में अपना बदला लेना चाहते हैं .अल्लाह उनको बदला जरुर देते हैं ,और जो आखिरत में अपना बदला चाहते हैं ,अल्लाह उनको आखिरत में पूरा बदला देगा " 
सूरा -आले इमरान 3 :145

http://www.pbs.org/newshour/updates/military/july-dec96/fatwa_1996.html

5-ओसामा का दूसरा फतवा 
आतंकवादी संगठन " अल कायदा " की तरफ से दूसरा फतवा 23 फरवरी फरवरी सन 1998 को जारी किया था . इसमें ओसामा बिन लादेन और एमान जवाहिरी ने सभी इस्लामी आतंकी संगठनो को संबोधित करते हुए कहा था ,
" हमारे रसूल मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह ने कहा है कि अल्लाह में मुझे दुनिया में मुझे मेरे हाथों में तलवार देकर भेजा है .ताकि मैं लोगों को बता दूँ कि विश्व में सिर्फ अल्लाह की इबादत की जाए .और जो इस बात की अवज्ञा करते है ,उन्हें पता होना चाहिए कि उनकी गर्दनों पर मेरा भाला रखा हुआ है 
इस दूसरे फतवे में वही बातें हैं ,जो पहले फतवे में दी गयी है , सिर्फ यह बात जोर देकर बताई गयी है .जिसको मुसलमान या तो छुपा लेते हैं या स्वीकार नहीं करने का ढोंग करते हैं 
.
http://www.pbs.org/newshour/updates/military/jan-june98/fatwa_1998.html

यद्यपि ओसामा बिन लादेन को अमरीकी सेना ने पाकिस्तान में घुस कर 2 मई 2011 को अबटाबाद में मार दिया था . लेकिन आज भी इसलामी आतंक समाप्त नहीं हुआ , बल्कि नए नए नामों से आतंकी संगठन बन रहे है, एक तरफ यह दल आतंक को इसलाम का आदेश बताते रहते हैं , तो दूसरी तरफ सेकुलर हिन्दू विरोधी ओसामा बिन लादेन और अफजल गुरु जैसे हत्यारों का सम्मान पूर्वक उल्लेख करते हैं .
आजकल सम्पूर्ण पाकिस्तान में भारत विरोधी माहौल बनाया जा रहा है , और जिहादियों में जोश भरने के लिए तराने बनाये जा रहे हैं , इनके दो नमूने दिए जा रहे हैं ,
Jihadi Tarana--Ghorun ko suda rakna.3gp

http://www.youtube.com/watch?v=8OTeVJz8-ic


Hum Millat e Islam K Janbaz Sipahi _ Lashkar e Taiba Jamat Ud Dawa Jihadi

http://www.youtube.com/watch?v=FD0hjrS1yWc

आज हमें गंभीरता से विचार करने की जरुरत है .कि सरकार और संसद में भी ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकवादियों का सम्मान के साथ नाम लिया जाता हो . तो ऐसी सरकार हमें आतंकवादियों से कैसे बचा सकेगी .एक तरफ पाकिस्तान के आतंकवादी भारत की सीमा में घुस कर हमारे सैनिकों के सिर काट कर ले जाते हैं . और दूसरी तरफ सरकार पाकिस्तान के मंत्री के स्वागत में अपनी आँखें बिछा देती है .कहीं ऐसा तो नहीं कि ऐसे लोगों में ओसामा की रूह घुस गयी हो .


http://www.fas.org/irp/world/para/docs/980223-fatwa.htm

शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013

इस्लाम भूमि को माता मानता है !!


अपने देश की रक्षा करना और उसका सम्मान करना हरेक देशवासी का कर्तव्य है .क्योंकि ऐसा करना देश की एकता और अखंडता बनाये रखने के लिए अति आवश्यक है .भारत के हिन्दू देश को माता की तरह सम्मान करते हैं .लेकिन कुछ ऐसे भी मुस्लिम नेता हैं , जो भारत को माता की तरह सम्मान करने को शिर्क यानी अल्लाह के साथ किसी को शामिल करना बता कर गुनाह बताते हैं . और मुसलमानों को भड़काते रहते हैं .ऐसे लोगों ने जैसे यही नीति अपना रखी है ,कि हिन्दू जो भी कहेंगे या करेंगे हम उसके विपरीत काम करेंगे .फिर भी कुछ ऐसे मुद्दे भी हैं , जिन में हिन्दू और इस्लामी विचारों में आश्चर्यजनक रूप से समानता पायी जाती है .जिसका सम्बन्ध देश को माता कहने से है .केवल एक दो शब्दों में अंतर है .परन्तु आशय एक ही है .
जैसे हिन्दू और मुसलमान इस बात को स्वीकार करते हैं , सिर्फ रक्त सम्बन्ध से जन्म देने वाली को ही माता नही माना जा सकता है . पालन पोषण करने वाली महिला को भी माता के रूप में आदर और सम्मान दिया जाता है . उदहारण के लिए यशोदा भगवान कृष्ण की शारीरिक माता नहीं थी . बल्कि उन्होंने भगवान का पालन किया था , और भगवान कृष्ण उनको जीवन भर अपनी माता मानते रहे .
इसी तरह इस्लाम में भी पालन करने वाली को , और सम्मानित महिला को भी माता के रूप में सम्मान दिया जाता है .विषय को स्पष्ट करने के लिए यह उदहारण दिए जा रहे हैं ,
1-रसूल की पालकमाता हलीमा 
मुहम्मद साहब के पिता का नाम "अब्दुल्लाह " था . और माता का नाम " आमना बिन्त वहब -امنة بنت وهب "था .मुहम्मद साहब जब अपनी माता के गर्भ में ही थे ,तो उनके पिता का स्वर्गवास हो गया था .यह सन 577 ईसवी की बात है .और जब मुहम्मद साहब की आयु केवल 6 साल ही थी . तो उनकी माता का भी देहांत हो गया . लेकिन अपनी म्रत्यु से पहले आमना ने अपने छोटे से बेटे को " हलीमा सादिया -حليمة السعدية"नामकी एक बद्दू महिला दाई के हवाले कर दिया था . ताकि वह अपना दूध पिला कर मुहम्मद साहब का पालनपोषण करती रहे . और उसने ऐसा ही किया था .हलीमा दाई जब तक जीवित रही ,मुहम्मद साहब उसको माता की तरह आदर और सम्मान देकर माँ पुकार कर संबोधित करते रहे . और आखिर जब हिजरी 8 में हलीमा का देहांत हो गया , तो मुहम्मद साहब ने उसे अपने निजी कबरिस्तान "जन्नतुल बाकी " में दफना दिया था .हलीमा की कब्र आज भी मदीना में मौजूद है .इस घटना से सिद्ध होता है कि पालन करने वाली स्त्री को भी माता माना जा सकता है . और माता के सामान आदर भी दिया जा सकता है .दूसरा उदहारण इस प्रकार है
2-रसूल की पत्नियां माता समान हैं 
वैसे तो भारतीय परम्परा के अनुसार हरेक स्त्री को पूज्यनीय माना गया है . फिर भी लोग हरेक बुजुर्ग महिला को आदर से माता जी पुकारते है , चाहे उन से कोई रिश्ता हो या नहीं . इसी तरह अक्सर लोग किसी भी साध्वी , सन्यासिनी महिला को सम्मान देने के लिए " माता जी "कहते हैं , चाहे उनकी आयु कितनी भी कम हो .
इसी तरह कुरान में भी मुसलमानों से मुहम्मद साहब की पत्नियों को अपनी माता समझने का आदेश दिया गया है ,कुरान में कहा है -
"और रसूल की पत्नियां ईमान वालों की माताएं है " सूरा -अहजाब 33:6  (and his wives are mothers of believers)

" وَأَزْوَاجُهُ أُمَّهَاتُهُمْ "33:6
इस से स्पष्ट होता है कि यदि हम किसी को माता की तरह आदर देते हैं , तो यह समझना बिलकुल गलत होगा कि हम उस महिला की उपासना करते है . या उसकी तुलना अल्लाह से कर रहे हैं .और जो लोग ऐसा करने वालों पर "शिर्क " करने का आरोप लगाते है ,वह लोगों को गुमराह करते है .
3-अथर्ववेद में भूमि को माता कहा है .
हिन्दू और मुसलमान दौनों इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि हम पृथ्वी पर जिस भूमि पर रहते आये है , उसी भूमि ने हमें और हमारे पूर्वजों का माता की तरह पालनपोषण किया है . हमारे शरीर में जो मांस रक्त वह इसी भूमि से पैदा हुए अनाज से बना हुआ है . जैसे एक माता अपने पुत्र की परवरिश करती है , वैसे ही यह भूमि हमारा पालन करती है .इसी लिए विश्व के सबसे प्राचीन ग्रन्थ वेद में भूमि को माता बताया गया है ,अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त में भूमि और प्रथ्वी की महिमा बताते हुए यह एक मन्त्र दिया गया है ,

"माता भूमिः पुत्रोऽहम पृथिव्याः  "
प्रथ्वी मेरी माता है , और मैं पृथ्वी का पुत्र हूँ .
(Earth is my mother,I am son of Earth )
अथर्ववेद -काण्ड 12 पृथ्वी सूक्त -63
विश्व का प्राचीन इतिहास पढ़ने से पता चलता है कि इस्लाम के आगमन से काफी समय पहले से ही अरब और भारत के व्यापारिक सम्बन्ध थे .और कालांतर में वेद की यह मान्यता इस्लाम में भी स्वीकृत हो गयी ,कि भूमि हमारी माता है .इसकी पुष्टि इन हदीसों से होती है
4-हदीस में भूमि को माता कहा है 
हदीसों का साहित्य काफी बड़ा और गंभीर है , वैसे सुन्नी मुस्लिम मुख्य 6 हदीस की किताबों के बारेमे जानते हैं . लेकिन इनके अलावा हदीसोंकी ऐसी प्रमाणिक किताबें मौजूद है , जिनके बारे में बहुत कम मुस्लिम जानते है .क्योंकि इन हदीसों का संकलन और प्रमाणीकरण देर से हो सका था .परन्तु अधिकांश मुस्लिम विद्वान् इन किताबों में दर्ज हदीसों को सत्य मानते हैं .हम इस विषय से संबधित हदीस देने से पहले , इस हदीस के संकलनकर्ता और पस्तक के बारे में जानकारी देना उचित समझते है .
1.इमाम तबरानी
इनका पूरा नाम "अबुल कासिम सुलेमान इब्ने अहमद इब्ने तबरानी - ابو القاسم سليمان ابن احمد ابن التبراني  " था .इनका जन्म 260 हिजरी यानि सन 870 ईसवी में हुआ था .और मृत्यु हिजरी360 यानी सन ईसवी 970 में हुयी थी .तबरानी ने हदीसों का जो संकलन किया था उसका नाम "अल मुअजम अल कबीर -المعجم الكبير    " है .इस किताब में 5 भाग हैं . और इस हदीस की किताब को प्रमाणिक माना जाता है .दूसरे हदीस संकलनकर्ता का नाम है
2.इमाम ज़हबी 
इनका पूरा नाम "मुहम्मद इब्ने अहमद बिन उस्मान कय्यूम अबू अब्दुल्लाह शमशुद्दीन अल ज़हबी -محمد بن احمد بن عثمان بن قيوم ، أبو عبد الله شمس الدين الذهبي‎ " है . इनका जन्म सन1274 ईस्वी में और देहांत सन1348  ईसवी में हुआ था .इन्होने अपने जीवन में कई हदीसें जमा की है .
और इमाम तबरानी ने जो हदीसें जमा की हैं उनको सत्यापित किया है .तबरानी ने एक ऐसी हदीस दी है जो वेद में दिए गए मन्त्र से मिलती जुलती है . वह महत्त्वपूर्ण हदीस यह है ,

"وتحفظوا على الأرض فإنها أمكم   "

"तुहफिजु अलल अर्ज इन्नहा उम्मेकुम "
"भूमि की रक्षा करो , निश्चय ही वह तुम्हारी माता है ."
“And take care of the earth for verily she is your mother.”

al-Mu’jam al-Kabir 5/65, Tabarani

इस हदीस के रावी यानी रसूल के द्वारा कही गयी बात को लोगों तक पंहुचाने वाले ( narrator ) का नाम "अब्दुल्लाह इब्ने लहियह -ابن لهيعة)” " है .

कुरान और हदीस में दिए गये इन पुख्ता सबूतों के आधार पर हम उन लोगों से यही प्रश्न करना चाहते , भारत की रक्षा करने और उसके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए भारत को अपनी माता मानकर " वन्दे मातरम "का घोष करते हैं .तो उनको मुशरिक कैसे कहा जा सकता है .?बताइये जब मुहम्मद साहब की पत्नियों को माता मानना उनकी रसूल से समानता करना नहीं माना जा सकता है . तो देश को माता समझ कर सम्मान करने को देशकी अल्लाह के साथ समानता करना कैसे मानी जा सकती है .और ऐसा करने को शिर्क कैसे माना जा सकता है ?और जो खुराफाती दिमाग वाले मुल्ले मुस्लिम युवकों गुमराह करने के लिए यह कहते हैं ,कि भारत माता की जय , या वन्दे मातरम बोलने से इस्लाम खतरे में पड़ जायेगा ,हम उनसे पूछना चाहते हैं .कि बलात्कार , आतंकवाद जैसे अपराधों से इस्लाम को खतरा क्यों नहीं होता ? क्या सिर्फ वन्देमातरम कहने से ही इस्लाम मिट जायेगा ?वास्तव में इस्लाम को असली खतरा स्वार्थी कट्टर मुल्लों और मुसलमानों के घोर अज्ञान से है .देश को माता कहने से कोई क़यामत नहीं आने वाली है .जैसे हरेक व्यक्ति अपनी माता की रक्षा और सम्मान करता है , वैसे ही हमारा कर्तव्य है कि अपनी देश रूपी माता की रक्षा और सम्मान करें .

http://www.shafiifiqh.com/tabaranis-hadith-that-the-earth-is-your-mother/

बुधवार, 24 अप्रैल 2013

इस्लामी सेकुलर आतंकवाद !


जैसे जैसे लोकसभा के चुनाव का समय आता जा रहा है तो , मुसलमानों के वोटबैंक पर नजर रखने वाले धूर्त और सत्तालोभी नेता खुद को धर्मनिरपेक्ष और राष्ट्रभक्त नेताओं को सम्प्रदायवादी साबित करने में लग गए हैं . और इनका मुख्य निशाना नरेन्द्र मोदी हैं . यदि कांगरेस या जे डी यू और कम्युनिस्ट ऐसा कहते हैं तो कोई ताज्जुब की बात नहीं है लेकिन जब मुसलमान नेता भी धर्मनिरपेक्षता की वकालत करते है , तो हमें उनकी नीयत पर शंका होती है .क्योंकि कुरान या हदीस में न तो धर्मनिरपेक्ष शब्द मिलता है . और न इस शब्द का आशय प्रकट करने के लिए कोई परिभाषा ही मिलती है .अरबी में " धर्मनिरपेक्ष " के लिए "ला मजहबियत " शब्द है . जिसका सही अर्थ है किसी धर्म को नहीं मानना .चूँकि धर्म का अर्थ ईमान भी होता है .और नेताओं का कोई ईमान नहीं होता यह सब जानते हैं . इसी लिए यह लोग खुद को धर्मनिरपेक्ष कहते हैं .जब से सविधान में "धर्मनिरपेक्ष " शब्द जोड़ा गया है तब से ही मुस्लिम नेताओं ने हिन्दू विरोध को ही " धर्मनिरपेक्षता ''मान लिया है .वह कांगरेस का सहारा लेकर हिन्दुओं को प्रताड़ित करने ,उनमे फुट डालने ,हिन्दू युवा लडके लड़कियों को गुमराह करने का हर प्रकार का प्रयत्न करते रहते हैं .जो मुसलमानों के इतिहास से सिद्ध होता है .मुस्लमान न तो कभी धर्मनिरपेक्ष थे , और न आज है और न कभी होंगे . वास्तव में मुस्लिम नेता "धर्मनिरपेक्षता " की आड़ में " इस्लामी सेकुलर आतंकवाद " फैला रहे हैं 

1-मुसलमान और धर्मनिरपेक्षता 
जो मुसलमान और धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देते रहते हैं ,क्या वह इन तथ्यों से इनकार कर सकते हैं कि इसलाम प्रेम से नहीं अत्याचार से फैला है .किसी भी मुस्लिम शासक ने हिन्दुओं के साथ समानता का व्यवहार नहीं किया .
यह संसार का अद्‌भुत आद्गचर्य ही है कि इस्लाम के जिस आतंक से पूरा मध्य पूर्व और मध्य एशिया  कुछ दशाब्दियों में ही मुसलमान हो गया वह 1000 वर्ष तक पूरा बल लगाकर भारत की आबादी के केवल 1/5 भाग ही धर्म परिवर्तन कर सका।
 इन बलात्‌ धर्म परिवर्तित लोगों में कुछ ऐसे भी थे जो अपनी संतानों के नाम एक लिखित अथवा अलिखित पैगाम छोड़ गये-'हमने स्वेच्छा से
अपने धर्म का त्याग नहीं किया है" यदि कभी ऐसा समय आवे जब तुम फिर अपने धर्म में वापिस जा सको तो देर मत लगाना। हमारे ऊपर किये गये अत्याचारों को भी भुलाना मत।' 
बताया जाता है कि जम्मू में तो एक ऐसा परिवार है जिसके पास ताम्र पत्र पर खुदा यह पैगाम आज भी सुरक्षित है। किन्तु हिन्दू समाज उन लाखों उत्पीड़ित लोगों की आत्माओं की आकांक्षाओं को पूरा करने में असमर्थ रहा है। काद्गमीर के ब्रहाम्णों जैसे अनेक दृष्टांत  है जहाँ हिन्दूओं ने उन पूर्वकाल के बलात्‌ धर्मान्तरित बंधुओं के वंशजों को लेने के प्रश्न पर आत्म हत्या करने की भी धमकी दे डाली और उनकी वापसी असंभव बना दी और हमारे इस धर्मनिरपेक्ष शासन को तो देखो जो मुस्लिम शासकों के इन कुकृत्यों को छिपाना और झुठलाना एक राष्ट्रीय कर्तव्य समझता है.
  2-विश्नोई संप्रदाय का उदाहरण 
राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में विश्नोई  संप्रदाय के अनेक परिवार रहते हैं। इस सम्प्रदाय के लोगों की धार्मिक प्रतिबद्धता है कि हरे वृक्ष न काटे जाये और किसी भी जीवधारी का वध न किया जाये। राजस्थान में इस प्रकार की अनेक घटनाएँ हैं, जब एक-एक वृक्ष को काटने से बचाने के लिये पूरा परिवार बलिदान हो गया।सऊदी अरब के कुछ  आगुन्तकों को ग्रेट बस्टर्ड नामक पक्षी का राजस्थान में शिकार करने की जब भारत सरकार द्वारा अनुमति दी गई तो इन विद्गनोइयों के तीव्र विरोध के कारण यह प्रोग्राम रद्‌द हो गया था। वह विद्गनोई सम्प्रदाय के प्रवर्तक संत जाम्भी जी की समाधि पर बनी छतरी पर मुस्लिम काल में लोधी मुस्लिम सुल्तानों द्वारा अधिकार कर लिया गया था। अकबर जैसे उदार बादशाह से जब फरियाद की गई तो उसने भी इन पाँच शर्तों पर यह छतरी विश्नोई सम्प्रदाय को वापिस की थी .
 1. मुर्दा गाड़ो, 
2. चोटी न रखो, 
3. जनेऊ धारण न करो, 
4. दाढ़ी रखो, 
5. विष्णु  के नाम लेते समय विस्मिल्लाह बोलो
विश्नोइयोँ ने मजबूरी की दशा में यह सब स्वीकार कर लिया। धीरे-धीरे जैसा कि अकबर को अभिष्ट था, विश्नोई  दो तीन सौ वर्ष में मुसलमान अधिक, हिन्दू कम दिखाई देने लगे। हिन्दुओं के लिये वह अछूत हो गये। परन्तु उन्होंने अपनी मजबूरी को भुलाया नहीं। आर्य समाज के जन्म के तुरंत बाद ही उन्होंने उसे अपना लिया। बिजनौर जनपद के मौहम्मदपुर देवमल ग्राम के द्गोख परिवार और नगीना के विश्नोई सराय के विश्नोई  इसके उदाहरणहैं।
प्रो. मौहम्मद हबीब के अनुसार 1330 ई. में मंगोलों ने आक्रमण किया। पूरी काद्गमीर घाटी में उन्होंने आग लगाने बलात्कार और कत्ल करने जैसे कार्य किये। राजा और ब्राहम्ण  तो भाग गये। परन्तु साधारण नागरिक, जो रह गये, दूसरा कोई विकल्प न देखकर धीरे-धीरे मुसलमान हो गये.
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इस प्रकार युद्ध से कैदी प्राप्त होते थे। कैदी गुलाम और फिर मुसलमान बना लिये जाते थे। नये मुसलमान दूसरे हिन्दुओं की लूट, बलात्कार और बलात्‌ धर्मान्तरण में उत्साहपूर्वक लग जाते थे क्योंकि वह अपने समाज द्वारा घृणित समझे जाने लगते थे।
मुस्लिम इतिहासकारों द्वारा दी गई उपरोक्त घटनाओं के विवरण को पढ़कर जिनके अनेक बार वे प्रत्यक्ष दर्शी  थे, किसी भी मनुष्य का मन अपने अभागे हिन्दू पूर्वजों के प्रति द्रवित होकर करुणा से भर जाना स्वाभाविक है.
3-अत्याचारी औरंगजेब 
इस बात से कोई भी व्यक्ति इंकार नहीं कर सकता कि इस्लाम की शिक्षा के कारण ही मुसलमान क्रूर , अत्याचारी और हिंसक हो जाते हैं , और उनके दिमाग में गैर मुस्लिमों के प्रति नफ़रत कूट कूट कर भरी होती है .इसीलिए जब भी भारत में कहीं भी कोई मुस्लिम शासक हुआ है .उसने हिन्दुओं पर अत्याचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी .ऐसे शासकों के बारे में कई किताबें लिखी जा सकती हैं . लेकिन औरंगजेब को मुसलमान " गाजी " यानि धर्मयोद्धा " मानते हैं ,इसलिए उसके अत्याचार के कुछ उदाहरण दिए जा रहे हैं .
औरंगजेब जन्म गुजरात के दोहद नामकी जगह में 4 नवम्बर 1 6 1 8 में हुआ था .इसका पूरा नाम "अबुल मुजफ्फर मुहीउद्दीन औरंगजेब आलमगीर: ابو المظفر محي الدين محمد اورنگزیب عالمگیر" था .गद्दी पर बैठने के बाद इसने अपने नाम में यह उपाधि लगा ली "सुल्तानुल आजम अल खाकान अल मुकर्रम हजरत अबुल मुजफ्फर मुहीउद्दीन मुहम्मद औरंगजेब बहादुर आलमगीर पादशाह गाजी: السلطان الاعظم والخقان المكرم حضرت ابو المظفر محي الدين محمد اورنگزیب بہادر عالمگیر پادشاہ غازی"गाजी का अर्थ धर्मयोद्धा होता है . यानि ऐसा व्यक्ति जिसने गैर मुस्लिमों को हरा दिया हो .औरंगजेब खुद को हिन्दुओं और मुगलों का शहंशाह मानता था . इसलिए उसने यह उपाधि भी जोड़ ली "शहंशाहे सल्तनते अल हिंदिया वल मुगलिया: شاہنشاہ سلطنت الہنديہ والمغليہ"औरंगजेब के गद्‌दी पर आते ही लोभ और बल प्रयोग द्वारा धर्मान्तरण ने भीषण रूप धारण किया। अप्रैल 1667 में चार हिन्दू कानूनगो बरखास्त किये गये। मुसलमान हो जाने पर वापिस ले लिये गये। औरंगजेब की घोषित नीति थी 'कानूनगो बशर्ते इस्लाम' अर्थात्‌ मुसलमान बनने पर कानूनगोई.

पंजाब से बंगाल तक, अनेक मुस्लिम परिवारों में ऐसे नियुक्ति पत्र अब भी विद्यमान हैं जिनसे यह नीति स्पष्ट सिद्ध होती है। नियुक्तियों और पदोन्नतियों दोनों के द्वारा इस्लाम स्वीकार करने का प्रलोभन दिया जाता था।.

अनेक लोग, जो मुसलमान बनने को तैयार नहीं हुए, नौकरी से निकाल दिये गये। नामदेव को इस्लाम ग्रहण करने पर 400 का कमाण्डर बना दिया गया और अमरोहे के राजा किशनदास के पोते द्गिावसिंह को इस्लाम स्वीकार करने पर इम्तियाज गढ़ का मुशरिफ बना दिया गया। 'समाचार पत्रों में नेकराम के धर्मान्तरण का जो राजा बना दिया गया और दिलावर का, जो 10000 का कमाण्डर बना दिया गया का वर्णन है।(17) के.एस. लालK.S.Lal "अपनी पुस्तक 'इंडियन मुस्लिम व्हू आर दे': Indian Mislims who are they "में अनेकों उदाहरण देकर सिद्ध करते हैं कि इस प्रकार के लोभ के कारण और जिजिया कर से बचने के लिये बड़ी संखया में हिन्दुओं का धर्मान्तरण हुआ। 
मराठों के जंजीरा के दुर्ग को जीतने के बाद सिद्‌दी याकूब ने उसके अंदर की सेना को सुरक्षा का वचन दिया था। 700 व्यक्ति जब बाहर आ गये तो उसने सब पुरुषों को कत्ल कर दिया। परन्तु स्त्रियों और बच्चों को गुलाम बनाकर उनके मुसलमान बनने पर मजबूर किया.

4-हिन्दू लड़कियों का अपहरण 
अय्याशी के बिना इस्लाम अधुरा होता है .और इसके लिए लड़कियों की जरुरत होती है .आज भी जताने भी बलात्कार और अपहरण हो रहे है . अधिकांश में मुसलमान दोषी पाए गए हैं .यह परम्परा आज भी चल रही है . क्योंकि कुरान में जिहादियों को जन्नत में औरतें देने का वायदा किया गया है . यही काम औरंगजेब ने किया था .
हिन्दू गृहस्थों और रजवाड़ों की लड़कियाँ, किस प्रकार बलात्‌ उठाकर गुलाम रखैल बना ली जाती थी, उसका एक उदाहरण मनुक्की की आँखों देखा अनुभव है। वह नाचने वाली लड़कियों की एक लम्बी सूची देता है जैसे - हीरा बाई, सुन्दर बाई, नैन ज्योति बाई, चंचल बाई, अफसरा बाई, खुशहाल बाई, केसा बाई, गुलाल, चम्पा, चमेली, एलौनी, मधुमति, कोयल, मेंहदी, मोती, किशमिश, पिस्ता, इत्यादि। वह कहता है कि ये सभी नाम हिन्दू हैं और साधारणतया वे हिन्दू हैं जिनको बचपन में विद्रोही हिन्दू राजाओं के घरानों में से बलात उठा लिया गया था। नाम हिन्दू जरूर है, अब पर वे सब मुसलमान हैं।(97 )
5-मठ मंदिर तुडवाये 
औरंगजेब ने खुद को असली गाजी साबित करने के लिए जिन मंदिरों , पाठशालाओं . और धर्म स्थलों का ध्वंस किया उनकी सूची काफी बड़ी है . जिन में से कुछ प्रसिद्द मंदिरों के नाम इस प्रकार हैं .
1.सन्‌ 1648 ई. में मीर जुमला को कूच बिहार भेजा गया। उसने वहाँ के तमाम मंदिरों को तोड़कर उनके स्थान पर मस्जिदें बना दी।(102)
2.सन्‌ 1666 ई. में कृष्ण जन्मभूमि मंदिर मथुरा में दारा द्वारा लगाई गई पत्थर की जाली हटाने का आदेश दिया-'इस्लाम में मंदिर को देखना भी पाप है और इस दारा ने मंदिर में जाली लगवाई?'(103)
3.सन्‌ 1669 ई. में ठट्‌टा, मुल्तान और बनारस में पाठशालाएँ और मंदिर तोड़ने के आदेश दिये। काशी में विद्गवनाथ का मंदिर तोड़ा गया और उसके स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया गया।(104)
4  .सन्‌ 1670 ई. में कृष्णजन्मभूमि मंदिर, मथुरा, तोड़ा गया। उस पर मस्जिद बनाई गई। मूर्तियाँ जहाँनारा मस्जिद, आगरा, की सीढ़ियों पर बिछा दी गई।(105
5.सोरों में रामचंद्र जी का मंदिर, गोंडा में देवी पाटन का मंदिर, उज्जैन के समस्त मंदिर, मेदनीपुर बंगाल के समस्त मंदिर, तोड़े गये।(106)
6. सन्‌ 1672 ई. में हजारों सतनामी कत्ल कर दिये गये। गुरु तेग बहादुर का काद्गमीर के ब्राहम्णों के बलात्‌ धर्म परिवर्तन का विरोध करने के कारण वध करवाया गया।(107)
7.सन्‌ 1679 ई. में हिन्दुओं पर जिजिया कर फिर लगा दिया गया जो अकबर ने माफ़ कर दिया था। दिल्ली में जिजिया के विरोध में प्रार्थना करने वालों को हाथी से कुचलवाया गया। खंडेला में मंदिर तुड़वाये गये।(108)
8.जोधपुर से मंदिरों की टूटी मूर्तियों से भरी कई गाड़ियाँ दिल्ली लाई गईं और उनको मस्जिदों की सीढ़ियों पर बिछाने के आदेश दिये गये।(109)
9.सन्‌ 1680 ई. में 'उदयपुर के मंदिरों को नष्ट किया गया। 172 मंदिरों को तोड़ने की सूचना दरबार में आई। 62 मंदिर चित्तौड़ में तोड़े गये। 66 मंदिर अम्बेर में तोड़े गये। सोमेद्गवर का मंदिर मेवाड़ में तोड़ा गया। सतारा में खांडेराव का मंदिर तुड़वाया गया।'(110)
10.सन्‌ 1690 ई. में एलौरा, त्रयम्वकेद्गवर, नरसिंहपुर एवं पंढारपुर के मंदिर तुड़वाये गये।(111)
11.सन्‌ 1698 ई. में बीजापुर के मंदिर ध्वस्त किये गये। उन पर मस्जिदें बनाई गई।(112)

6-इस्लाम की दोगली  धर्मनिरपेक्षता 
जब मुस्लिम बादशाह बलपूर्वक भारत के सभी हिन्दुओं को मुसलमान नहीं बना सके तो उन्होंने हिन्दुओं को इस्लाम के प्रति आकर्षित करने के लिए एक नयी तरकीब निकाली . सब जानते हैं कि इस्लाम में शायरी , हराम है , क्योंकि जब मुहम्मद साहब ने खुद को अल्लाह का रसूल घोषित कर दिया था तो अरब के लोग कुरान को मुहम्मद की शायरी कहते थे . और अरब के शायर कुरान का मजाक उड़ाते थे . इसी तरह इस्लाम में संगीत , गाना बजाना,वाद्ययंत्रों का प्रयोग करना भी हराम है ,क्योंकि यह हिदू धर्म में भजन कीर्तन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है . इसलिए चालाक मुसलमानों ने सोचा कि यदि संगीत के माध्यम से हिन्दुओं में इस्लाम के प्रति रूचि पैदा की जाये तो उनका धर्म परिवर्तन करना सरल होगा .इसका परिणाम यह हुआ कि कुछ हिन्दुओं ने तो मुसलमानों के आचार विचार , खानपान अपना लिए , लेकिन मुसलमान हिन्दुओं से हमेशा दूरी बनाये रखे. फिर मुसलमानों ने एक ऐसी कृत्रिम वर्णसंकर "धर्मनिरपेक्षता " तहजीब बना डाली , जिसका नाम गंगाजमुनी तहजीब रख दिया . इसे हिन्दू मुस्लिम एकता ,प्रतीक बता दिया ,बाद में मुसलमानों और दोगले हिन्दुओं ने इसका नाम "धर्मनिरपेक्षता " का नाम दे दिया .मुस्लिम शासकों ने तो हिन्दुओं की खतना करा कर मुस्लमान बना दिया था . लेकिन इस "धर्मनिरपेक्षता " ने हिन्दुओं की खस्सी कर दी . जिस से उनमे अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध लड़ने की शक्ति समाप्त हो गयी .इसमे संगीत का भी बड़ा योगदान है ,जिसे" सूफी संगीत "कहा जाता है .मूर्ख हिन्दू अरबी फारसी जाने बिना ही इस संगीत को एकता का मानते हैं . भारत में इसे कव्वाली भी कहा जाता है .जिसका अविष्कार अमीर खुसरो ने किया था जो कट्टर हिन्दू विरोधी था .

7-अमीर खुसरो की धर्मनिरपेक्षता ?
इसका पूरा नाम "अबुल हसन यमीनुद्दीन ख़ुसरौ : ابوالحسن یمین‌الدین خسرو‎" था .इसका जन्म सन 1253 में उत्तर प्रदेश के शहर बदायूँ में हुआ था .इसके पिता का नाम अमीर सैफुद्दीन था . जो ईरान के बलख शहर से भारत में सैनिक बनने के लिए आया था .अमीर खसरो को संगीत शायरी का शौक था ,लोग उसे "अमीर ख़ुसरौ दहलवी :امیر خسرو دہلوی "भी कहते थे .बड़े दुःख की बात है कि जो लोग खसरो की बनायीं गजलों को सुन कर झुमने लगते हैं . और उसी को हिन्दू मुस्लिम एकता का साधन बताते हैं , वह नहीं जानते कि खुसरो संगीत से एकता नहीं नफ़रत फैलाता था . और एक क्षद्म जिहादी था , हमारे धर्मनिरपेक्ष शासकों द्वारा बहुधा प्रशंसित  धर्मनिरपेक्ष अमीर खुसरो अपनी मसनवी" Qiranus-Sa'dain " में लिखता है- 

 जहां रा कि दीदम ईँ रस्म पेश ,
 कि हिन्दू बुवद सैदे तुर्कां हमेश .1
अज बेहतरे निस्बते तुर्को हिन्दू ,
कि तुर्क अस्त चूँ शेर हिन्दू चूं आहू .2
जि रस्मे कि रफ्त अस्त चर्खे र वाँ रा ,
वुजूद अज पये तुर्क शुद हिंदुआं रा .3
कि तुर्क अस्त ग़ालिब बर ईशां चूँ कोशद ,
कि हम गीरद हम खरद औ हम फ़रोशद .4
अर्थात्‌ 'संसार का यह नियम अनादिकाल से चला आ रहा है कि हिन्दू सदा तुर्कों का अधीन  रहा है. 1
   तुर्क और हिन्दू का संबंध इससे बेहतर नहीं कहा जा सकता है कि तुर्क सिंह के समान है और हिन्दू हिरन के समान.2
आकाश की गर्दिश से यह परम्परा बनी हुई है कि हिन्दुओं का अस्तित्व तुर्कों के लिये ही है. 3

क्योंकि तुर्क हमेशा गालिब होता है और यदि वह जरा भी प्रयत्न करें तो हिन्दू को जब चाहे पकड़े, खरीदे या बेचे।' 4

अब हिन्दू समाज को खास तौर पर युवकों को गंभीरता से सोचना चाहिए कि वह सेकुलर बनकर इस्लाम के सेकुलर आतंकवाद के जाल में तो नहीं फसते जा रहे हैं . या सेकुलर बन कर गांधी , और अन्ना जैसे कायर बनना पसंद करेंगे जो भूख से मर जाने को ही हर समस्या का हल बताता है . या आप गुरु गोविन्द सिंह , शिवाजी , बोस , आजाद और ऊधम सिंह जैसे धार्मिक बनना पसंद करंगे और हाथ फ़ैलाने की जगह अपने अधिकार छीन लेंगे .और ईंट का जवाब पत्थर से देंगे .
याद रखिये धर्मनिरपेक्षता जिहाद का ही एक रूप है .

http://www.hinduwritersforum.org/hamare-prakasan/bharatiya-musalmanom-ke-hindu-puravaja/4-muslima-akramakom-aura-dgaasakom-dvara-hindu-om-ka-balat-dharma-parivartana/aurangajeba


शुक्रवार, 19 अप्रैल 2013

नारा ए बलात्कार !अल्लाहु अकबर !!


विश्व के जितने भी प्रमुख धर्म हैं , उनके धार्मिक ग्रंथों , में दिए गए आदेशों के अनुसार ,और उन धर्मों की मान्यताओं में दो ऐसी समानताएं पाई जाती हैं .जिनके आधार पर कहा जा सकता है कि यह धर्म सच्चे हैं .पहली बात यह है कि यह धर्म अपने जिस भी महापुरुष , अवतार , या नबी को अपना आदर्श मानते हैं ,उसकेद्वारा किये गए सभी सभी अच्छे कामों का अनुसरण करते हैं . और दूसरी समानता यह है कि इन सभी धर्मों के अनुयायी किसी भी शुभ कार्य का प्रारंभ करते समय ईश्वर का नाम जरुर लेते हैं . या ईश्वर की जयकार करते हैं .
और इन्हीं दो बातों के आधार पर ही कहा जा सकता है कि इस्लाम धर्म नहीं है . बल्कि यदि कोई इस्लाम को सच्चा धर्म कहता , या मानता है . तो उस से बड़ा मूर्ख कोई दूसरा नहीं होगा , क्योंकि मुसलमान चुन चुन कर मुहम्मद सभी दुर्गुणों का अनुसरण करते हैं . इसी तरह मुसलमान हर बुरा काम लेते समय अल्लाह का नाम लेते हैं .यह तो सब जानते हैं कि जानवरों के गलों पर छुरी फिराते समय मुसलमान अल्लाह का नाम लेते है . लोग यह भी जानते हैं कि जिहादी , क़त्ल करते समय , बम विस्फोट करते समय ,या मुसलमान लूट करते या चोरी करते समय भी अल्लाह और रसूल का नाम लेते है . लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि मुसलमान सार्वजनिक रूप से सामूहिक बलात्कार करते समय भी" अल्लाहु अकबर " का नारा लगाते हैं .क्योंकि वह मुहम्मद को अपना आदर्श मानते हैं .चूंकि कुरान की सूरतें (अध्याय ) का संकलन घटनाक्रम (chronological Order ) के अनुसार नहीं किया गया है .इसलिए हदीसों से पता चलता है कि मुहम्मद साहब ने कौनसी आयत किस समय , किस परिथिति में , और किसको संबोधित कर के कही थी . और यह भी पता चलता है कि मुहम्मद साहब का असली उद्देश्य क्या था .
इस लेख में प्रमाणों के साथ यही सिद्ध किया जा रहा है कि इस्लाम सच्चा धर्म तो छोडिये , धर्म कहने के योग्य भी नहीं है .इसलिए इस लेख को ध्यान से पढ़िए ,
1-अल्लाह से प्रेम की शर्त 
मुहम्मद साहब की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह को कुछ भी करते थे वही काम अपने लोगों से करने को कहते थे . और उनका अनुसरण करने को ही अल्लाह से प्रेम का प्रमाण मान लिया जाता था , जैसा कि कुरान में लिखा है ,
"यदि तुम अल्लाह से प्रेम करना चाहते हो तो ,मेरा अनुसरण करो .ऐसा करने से अल्लाह भी तुम से प्रेम करेगा , और तुम्हारे सभी गुनाह माफ़ कर देगा "
सूरा -आले इमरान 3 :3 1 

2-वासना पिशाच 
मुस्लिम विद्वान् अपने रसूल मुहम्मद को दूसरों के नबियों , अवतारों और महापुरुषों से बड़ा साबित करने में लगे रहते हैं , यहाँ तक सेक्स के मामले में भी मुसम्मद साहब को " सुपर मेन ऑफ़ सेक्स-superman of Sex " तक कह देते हैं . लेकिन यूरोप के विद्वान् मुहम्मद साहब की अदम्य और असीमित वासना के कारण उनको "सेक्स डेमोन\Sex Demon " यानी "वासना पिशाच "कहते हैं . यह बात इन हदीसों से प्रमाणित होती है
"अनस बिन मलिक ने बताया कि रसूल बारी बारी से अपनी औरतों के साथ लगातार सम्भोग करने में लगे रहते थे .सिर्फ नमाज के लिए घर से निकलते थे . उनको अल्लाह तीस या चालीस मर्दों के बराबर सम्भोग शक्ति प्रदान की थी"
सही बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 6 
यही बात दूसरी हदीस में भी कही गयी है ,
"अनस बिन मलिक ने कहा कि रसूल लगातार रात दिन अपनी औरतों के के साथ सम्भोग करते रहते थे . जब कटदा ने अनस से पूछा कि क्या रसूल में इतनी शक्ति है . तो अनस ने कहा कि रसूल में 30 मर्दों के बराबर सम्भोग शक्ति है ,और उनकी 9 नहीं 11 औरतें थीं ."

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ قَتَادَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَدُورُ عَلَى نِسَائِهِ فِي السَّاعَةِ الْوَاحِدَةِ مِنَ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ، وَهُنَّ إِحْدَى عَشْرَةَ‏.‏ قَالَ قُلْتُ لأَنَسٍ أَوَكَانَ يُطِيقُهُ قَالَ كُنَّا نَتَحَدَّثُ أَنَّهُ أُعْطِيَ قُوَّةَ ثَلاَثِينَ‏.‏ 
وَقَالَ سَعِيدٌ عَنْ قَتَادَةَ إِنَّ أَنَسًا حَدَّثَهُمْ تِسْعُ نِسْوَةٍ‏.‏

Bukhari, Volume 1, Book 5, Number 268
बुखारी की इस हदीस की व्याख्या करते हुए सुन्नी विद्वान् "इमाम इब्ने हंजर सकलानी " ने अपनी किताब " फतह अल बारी - فتح الباري‎) " में बताया है कि जब रसूल जिन्दा थे तो रसूल में 4 0 जन्नती व्यक्तियों के बराबर सम्भोग शक्ति थी . और जन्नत के एक व्यक्ति की सम्भोग शक्ति दुनिया के एक हजार व्यक्तिओं के बराबर होती है , अर्थात रसूल में 40 हजार मर्दों के बराबर सम्भोग करने की शक्ति थी , इसी लिए वह हमेशा सम्भोग करने की इच्छा रखते थे . इस बात की पुष्टि इस्लाम के प्रचारक "शेख मुहम्मद मिसरी " ने भी की है .देखिये विडिओ
الرسول ينكح 6 نسوان بساعة واحدة

http://www.youtube.com/watch?v=Vgir-rMRY2g
यही कारण था कि मुहम्मद साहब के साथी भी मुहम्मद साहब की नक़ल करके रात दिन औरतों के साथ सम्भोग में लगे रहते थे . और स्वाभाविक है कि लगातार सहवास करने से मुहमद साहब और उनके साथियों की औरतें . शिथिल , थुलथुली हो गयी होंगी और उनके स्तन लटक गए होंगे .इस लिए मुहम्मद साहब अपने साथियों को ऐसी अरतों का लालच देते रहते थे , जिनके स्तन कठोर और उभरे हुए हों ,कुरान में यही लालच दिया गया है
3-कठोर स्तन वाली स्त्रियाँ
मुहम्मद साहब के दिल में जो बात होती थी , वह कुरान में जरुर शामिल कर देते थे . ताकि वह बात अल्लाह का वचन समझा जाये .मुहम्मद साहब शिथिल स्तनोंवाली अपनी औरतों से ऊब गए होंगे ,और उनको कठोर स्तन वाली औरतों की तलाश थी . इसलिए कुरान में यह आयत जोड़ दी . ताकि जिहादी लालच में आ जाएँ , कुरान में कहा है .
"बेशक डर रखने वालों के लिए फायदा है ,बाग़ और अंगूर ,और नवयुवतियां समान आयु वाली "सूरा अन नबा 7 8 :3 1 से 3 3 तक 
नोट-इस आयत में अरबी में नव युवतियों के लिए अरबी में "कवायिबكَواعِبَ-- "शब्द आया है . लेकिन मुल्लों   नेइसका   अर्थ "शानदार -splendid"कर दिया है .जबकि इस शब्द का असली अर्थ "गोल स्तन -This means round breasts " होता है .तात्पर्य यह है कि ईमान वालों को अल्लाह ऐसी औरतें देगा जिनके स्तन गोल , उभरे और कठोर होंगे .और जिनकी आयु ईमान वाले मुसलमानों की आयु के बराबर होगी ( This means round breasts. They meant by this that the breasts of these girls will be fully rounded and not sagging, because they will be virgins, equal in age. This means that they will only have one age. The explanation of this has already been mentioned in Surat Al-Waqi`ah. 56:35 -Concerning Allah's statement,)
  . यह बात सूरा -वाकिया से स्पष्ट हो जाती है , जिसमे कहा है ,
"हमने उन स्त्रियों के विशेष उभार को उठान पर उठाया (raised है "सूरा -अल वाकिया 56:35

4-हुनैन का बलात्कार कांड 
मक्का और तायफ के बीच में एक घाटी थी , किसमे " हवाजीन "नामका एक बद्दू कबीला रहता था .जो कुरैश का ही हिस्सा था .इस कबीले की औरतें भी मेहनती होने के कारण स्वस्थ थी . और उन औरतों के स्तन उभरे हुए थे .मुहम्मद ने उन पर हमला करने के लिए बहाना निकाला कि यह लोग काफ़िर थे . लेकिन मुहम्मद और उनके अय्याश साथियों की नजर हवाजिन कबीले की औरतों पर थी .इसी लिए रात में ही हमला कर दिया .चूँकि यह कांड हुनैन नामकी सकरी घाटी में हुआ था ,.जिस से बहार निकलना कठिन था ,इसलिए बददु लोग हार गए
 इतिहासकार इब्ने इशाक के अनुसार इस्लाम में हुनैन की जंग का बड़ा ही महत्त्वपूर्ण स्थान है , क्योंकि इस लड़ाई के बाद ही मुसलमानों को युद्ध में या कहीं से भी पकड़ी गयी औरतों के साथ सम्भोग करने का अधिकार प्राप्त हो गया .हालांकि मुसलमान हुनैन की इस लड़ाई को युद्ध कहते है . लेकिन इसे युद्ध कहना ठीक नहीं होगा , क्योंकि एक तरफ मुहम्मद के 12 हजार प्रशिक्षित हथियारधारी लुटेरे थे तो दूसरी तरफ 6 हजार साधारण बद्दू थे ,जिनमे औरतें , बूढ़े ,बीमार और बच्चे भी थे .यह घटना इस्लामी महीने शव्वाल की 10 तारीख हिजरी सन 8 में हुई थी ,यानी ईसवी सन 630 की बात है .इब्ने इशक के अनुसार इस युद्ध में कोई धन नहीं मिला था लेकिन 6000 औरतें पकड़ी गयी थी .मुहम्मद की तरफ से जिन लोगों ने इस लड़ाई में हिस्सा लिया था ,उनमे 13 साल से लेकर 54 साल के लोग थे . और कई ऐसे थे जो रिश्ते में बाप बेटा ,चाचा भतीजे थे .मक्का और तायफ के बीच में एक घाटी थी , किसमे " हवाजीन "नामका एक बद्दू कबीला रहता था .जो कुरैश का ही हिस्सा था .इस कबीले की औरतें भी मेहनती होने के कारण स्वस्थ थी . और उन औरतों के स्तन उभरे हुए थे .मुहम्मद ने उन पर हमला करने के लिए बहाना निकाला कि यह लोग काफ़िर थे . लेकिन मुहम्मद और उनके अय्याश साथियों की नजर हवाजिन कबीले की औरतों पर थी .इसी लिए रात में ही हमला कर दिया .इस घटना का विवरण इन हदीसों में मिलता है , जिसमे मुहम्मद और उनके साथियों किस तरह इंसानियत को कलंकित किया था .
5-पति के सामने बलात्कार 
"सईद अल खुदरी ने कहा कि जब रसूल ने हुनैन के औतास कबीले पर हमला करके वहां के लोगों को पराजित करके उनकी औरतों को बंधक बना लिया . तब रसूल ने अपने साथियों को आदेश दिया कि तुम इस युद्ध में पकड़ी गयी औरतों के साथ बलात्कार करो , लेकिन कुछ लोग उन औरतों के पतियों के सामने ही ऐसा करने से झिझक रहे थे .तब रसूल ने उसी समय सूरा -निसा 4 :2 4 की आयत सुना दी , जिसमे कहा है कि तुम पकड़ी गयी औरतों से तभी साथ सम्भोग नहीं कर सकते हो , यदि वह मासिक धर्म से (रजस्वला "हो . 
अबू दाऊद किताब 2 हदीस 215 0 

5-समआयु की औरतें 
मुहम्मद साहब बहुत होश्यार थे , उन्हों कुरान में पहले ही लिखा दिया था कि ईमान वालों को पुरस्कार के रूप में समान आयु वाली और कठोर स्तन वाली औरतें मिलेंगे , और जब हुनैन के हमले में मुसलमानों ने छह हजार औरतें पकड़ लीं ,तो छांट छांट कर अपनी आयु की औरतों के साथ बलात्कार किया था . जो इस हदीस से पता चलता है ,
"सईदुल खुदरी ने कहा कि जब रसूल के सैनिकों ने हुनैन में औताफ के लोगों पर हमला करके हरा दिया तो उनकी औरतों को बंधक बना लिया , फिर अपने सैनिकों को आदेश दिया कि वह पकड़ी गयी औरतों में से अपने बराबर की आयु वाली औरतों के साथ सम्भोग कर सकते हैं , सिवाय उन औरतों के जिनकी इद्दत पूरी नहीं हो (यानी मासिक धर्म पूरा नहीं हो ) .रसूल ने उसी समय सूरा निसा 4 :24 की यह आयत लोगों को सुनायी थी ."
"وَالْمُحْصَنَاتُ مِنَ النِّسَاءِ إِلاَّ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ‏}‏ أَىْ فَهُنَّ لَكُمْ حَلاَلٌ إِذَا انْقَضَتْ عِدَّتُهُنَّ ‏.‏  "
सही मुस्लिम - किताब 8 हदीस 3432

कुरान की इस आयत में जो लिखा था वही मुसलमानों ने किया था , कुरान में लिखा है ,
"हमने प्रेयसी सम आयु वाली पसंद की " सूरा -अल वाकिया56:37
मुसलमान हुनैन की लड़ाई का कारण कुछ भी बताते रहें , लेकिन वास्तव में औरतें पकड उनसे सामूहिक बलात्कार की मुहम्मद की एक कुत्सित योजना थी .अब तक आपने पढ़ा है ,मुहम्मद की वासना राक्षसी थी , और लगातार सम्भोग करते रहने से उसकी औरतों के स्तन शिथिल हो गए होंगे ,इसलिए मुहम्मद ने कुरान में भी अपने साथियों को कठोर स्तन वाली औरतें देने का लालच दिया था .चूँकि हवाजिन कबिले की औरतें मेहनती थी . और इसीलिए उनके स्तन उभरे और कठोर थे . जो मुहमद की पसंद थी .आपने यह भी पढ़ा कि मुहम्मद साहब जो भी कुकर्म करते थे उसे जायज ठहराने के लिए कुरान कोई न कोई आयत रच देते थे , ताकि आगे भी मुस्लमान ऐसा ही करते रहें .
6--रसूल का उत्तम आदर्श 
मुहम्मद साहब ने अपने इसी चरित्र को खुद ही आदर्श घोषित करते हुए कुरान में भी लिखवा दिया
" निश्चय ही तुम लोगों के लिए अल्लाह के रसूल का चरित्र उत्तम आदर्श है " सूरा -अहजाब 33:21
आज भी मुसलमान जितने भी बलात्कार करते है , सब मुहम्मद साहब के इसी आदर्श चरित्र का पालन करते हैं .और हर गैर मुस्लिम लड़की या महिला से बलात्कार को अल्लाह की जीत समझते हैं ,ऐसी ही एक सत्य घटना दी जा रही है ,
7-अल्लाह के नाम से बलात्कार 

मुहम्मद साहब को अपना आदर्श मानकर और उनका अनुसरण करते हुए कुरान की मानवविरोधी शिक्षा पर अमल करने से मुसलमान इतने अपराधी ,क्रूर और बलात्कारी हो गए कि बलात्कार जैसे जघन्य कुकर्म को भी अल्लाह के प्रति अपना प्रेम समझने लगे हैं . इसी कारण बलात्कार की घटनाएँ बढ़ रही है .इस बात को सिद्ध करने के लिए मिस्र देश की यह एक ही सच्ची घटना काफी है ,
मिस्र को इजिप्ट ( Egypt) भी कहा जाता है . यह इस्लामी देश है , लेकिन यहाँ कुछ ऐसे ईसाई भी रहते हैं ,जो इस्लाम के पूर्व से ही यहाँ रहते आये हैं .इनको " कोप्टिक ईसाई - Coptic Christian "कहा जाता है . अरबी में इनको" नसारा " कहते हैं .मुस्लमान अक्सर इनकी लड़कियों का अपहरण करके बलात्कार करते रहते है .
यह सन 2009 की घटना है . कुछ मुस्लिम युवकों ने एक ईसाई लड़की को बीच रस्ते से पकड़ लिया , और सबके सामने उसकी जींस उतार कर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया .जब लड़की ने भागने का प्रयत्न किया तो दर्शक मुसलमान चिल्लाये पकड़ो , नसारा को पकड़ो .और जब उस लाचार लड़की से बलात्कार हो रहा था , तो वहां कुछ मुल्ले भी मौजूद थे , जो कलमा पढ़ रहे थे " ला इलाहा इल्लालाह , मुहम्मदुर रसूल अल्लाह "यही नहीं लड़की दर्द के कारण जितनी जोर से चिल्लाती थी . मुसलमान उतनी ही जोर से "अल्लाहु अकबर " का नारा लगाते थे . यही नहीं इन दुष्ट मुसलमानों में इस घटना का विडियो भी बना लिया था . जो किसी तरह से 11/4/2013 को लोगों के सामने आ सका है .यह विडियो इस साईट में उपलब्ध है ,
Video:Christian Girls Gang Raped to Screams of “Allahu Akbar” in Egypt

http://www.raymondibrahim.com/from-the-arab-world/video-christian-girls-gang-raped-to-screams-of-allahu-akbar-in-egypt/

इसके बावजूद मुस्लिम प्रचारक बड़ी बेशर्मी से मुहम्मद की तारीफ में कहते हैं

"हे मुहम्मद हमने तुम्हें भेज कर सारे संसार पर मेहरबानी की है 'सूरा -अल अम्बिया 21:107

इन सबूतों को देखने के बाद किसी को भी शंका नहीं होना चाहिए कि मुहम्मद साहब को अपना आदर्श मानने से ही बलात्कार की घटनाएँ बढ़ रही हैं .और जो सिद्धांत अल्लाह के नाम से बलात्कार करने की शिक्षा देता है , वह धर्म कहने के योग्य नहीं ,बल्कि धिक्कार के योग्य है .सोचिये यदि अल्लाह ने नूह की तरह मुहम्मद साहब को नौ सौ साल की आयु दे दी होती ,तो मुहम्मद साहब कितने बलात्कार करते ?

http://www.raymondibrahim.com/?s=raped&submit.x=12&submit.y=5

गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

इस्लामी अंधविज्ञान !


विज्ञानं और इस्लाम एक दूसरे के विरोधी हैं , क्योंकि विज्ञानं तथ्यों को तर्क की कसौटी पर परखने के बाद और कई बार परीक्षण करने के बाद उनको स्वीकार करता है .जबकि इस्लाम निराधार , बेतुकी , और ऊलजलूल बातों पर आँख मूँद पर ईमान रखने पर जोर देता है . इतिहास गवाह है कि इस्लाम के उदय से लेकर मुसलमानों ने " हुक्के " के आलावा कोई अविष्कार नहीं किया ,लेकिन दूसरों के द्वारा किये गए अविष्कारों के फार्मूले चोरी करके उनका उपयोग दुनिया को बर्बाद करने के लिए जरुर किया है .
लगभग 15 वीं शताब्दी तक मुसलमान तलवार की जोर से इस्लाम फैलाते . लेकिन जैसे जैसे विज्ञानं की उन्नति होने लगी , तो लोगों की विज्ञानं के प्रति प्रति रूचि बढ़ने लगी , यह देख कर जाकिर नायक जैसे धूर्त इस्लाम के प्रचारकों ने नयी तरकीब निकाली ,यह लोग कुरान और हदीस में दी गयी बेसिर पर की बातों का तोड़ मरोड़ कर ऐसा अर्थ करने लगे जिस से यह साबित हो जाये कि कुरान और हदीसें विज्ञानं सम्मत हैं .मुसलमानों की इसी चालाकी भरी नीति को ही " इस्लामी अंधविज्ञानं " कहा जाता है .इसका उद्देश्य पढ़े लिखे लोगों को गुमराह करके उनका धर्म परिवर्तन कराना है .लेकिन जाकिर नायक जैसे लोग विज्ञानं की आड़ में लोगों के दिमाग में इस्लाम का कचरा भरने का कितना भी प्रयास करें ,खुद कुरान और हदीस ही उनके दावों का भंडाफोड़ कर देते है .यद्यपि कुरान और हदीस में हजारों ऐसे बातें मौजूद है ,जो विज्ञानं के बिलकुल विपरीत हैं , लेकिन कुछ थोड़े से उदहारण यहाँ दिए जा रहे हैं .

1-आकाश के सात तल 
इस्लामी मान्यता के अनुसार आकाश के सात तल हैं , जो एक दुसरे के ऊपर टिके हुए हैं . और अल्लाह सबसे ऊपर वाले असमान पर अपना सिंहासन जमा कर बैठा रहता है . और वहीँ से अपने फरिश्तों या नबियों के द्वारा हुकूमत चला रहा है .इसी लिए आकाश को अरबी में " समावात " भी कहा जाता है , जो बहुवचन शब्द है . अंगरेजी में इसका अनुवाद Heavens इसी लिए किया जाता है , क्योंकि इस्लाम में आकाश के सात तल माने गए हैं .जैसा कि इन आयतों में कहा गया है .

"क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह ने किस प्रकार से सात आसमान ऊपर तले बनाये हैं "
सूरा -नूह 71:15
कुरान की इस बात की पुष्टि इस हदीस से भी होती है ,
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने अपनी पुत्री फातिमा से कहा करते थे कि जब भी अल्लाह को पुकारो तो , कहा करो कि ' हे सात असमानों के स्वामी अल्लाह " 
وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي، شَيْبَةَ وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالاَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُبَيْدَةَ، حَدَّثَنَا أَبِي كِلاَهُمَا، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي، صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ أَتَتْ فَاطِمَةُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم تَسْأَلُهُ خَادِمًا فَقَالَ لَهَا ‏ "‏ قُولِي اللَّهُمَّ رَبَّ السَّمَوَاتِ السَّبْعِ ‏"‏ ‏.‏ بِمِثْلِ حَدِيثِ سُهَيْلٍ عَنْ أَبِيهِ ‏.‏ 
सही मुस्लिम -किताब 35 हदीस 6553

2-तारे पृथ्वी के निकट हैं 
विज्ञानं ने सिद्ध कर दिया है कि तारे ( stars ) पृथ्वी से करोड़ों प्रकाश वर्ष मील दूर हैं .और दूरी के कारण छोटे दिखायी देते हैं .लेकिन कुरान इस से बिलकुल उलटी बात कहती है ,कि तारे आकाश के सबसे निचले आकाश में सजे हुए है .यानी पृथ्वी के बिलकुल पास हैं .कुरान की यह आयत देखिये ,
"हमने दुनिया के आकाश को सबसे निचले आकाश को तारों से सजा दिया है " 
सूरा -अस साफ्फात 37:6

3-सूरज दलदल में डूब जाता है 
कुरान की ऐसी कई कहानियां हैं ,जो यूनानी दन्तकथाओं से ली गयी हैं .ऐसी एक कहानी सिकंदर की है , जिसने दावा किया था कि उसने सूरज को एक कीचड़ वाले दलदल में डूबा हुआ देखा था .सिकंदर को कुरान में "जुल करनैन " ذو القرنين "कहा गया है . अरबी में इस शब्द का अर्थ "दो सींगों वाला two-horned one" होता है .इस्लामी किताबों में इसे भी अल्लाह का एक नबी बताया जाता है ,लेकिन जुल करनैन वास्तव में कौन था इसके बारे में इस्लामी विद्वानों में मतभेद है , मौलाना अबुल कलाम आजाद ने अपनी किताब ' असहाबे कहफ " में इसे सिकंदर महान Alexander the Great साबित किया है .कहा जाता है कि जब सिकंदर विश्वविजय के लिए फारस से आगे निकल गया तो उसने सूरज को एक दलदल में डूबते हुए देखा था .और कुरान इस बात को सही मानकर जोड़ लिया गया .कुरान में बताया गया है कि सूर्यास्त के बाद सूरज कहाँ डूब जाता है ,
 " यहाँ तक कि वह ( जुल करनैन ) उस जगह पहुंच गया ,और उसने सूरज को एक कीचड़ वाले दलदल (muddy spring ) डूबा हुआ पाया "
सूरा -अल कहफ़ 18:86

4-रात में सूरज कहाँ रहता है ?
इस बात को सभी लोग जानते हैं कि सूरज अस्त होने के बाद भी प्रथ्वी के किसी न किसी भाग पर प्रकाश देता रहता है ,यानि प्रथ्वी के उस भाग पर दिन बना रहता है , लेकिन हदीस के अनुसार अस्त होने के बाद सूरज रात भर अल्लाह के सिंहासन के नीचे छुपा रहता है
"अबू जर ने कहा कि एक बार रसूल ने मुझ से पूछा कि क्या तुम जानते हो कि सूर्यास्त के बाद सूरज कहाँ छुप जाता है , तो मैंने कहा कि रसूल मुझ से अधिक जानते है . तब रसूल ने कहा सुनो जब सूरज अपना सफ़र पूरा कर लेता है ,तो अल्लाह को सिजदा करके उसके सिंहासन के कदमों के नीचे छुप जाता है .फिर जब अल्लाह उसे फिर से निकलने का हुक्म देते है , तो सूरज अल्लाह को सिजदा करके वापस अपने सफ़र पर निकल पड़ता है .और यदि अल्लाह सूरज को हुक्म देगा तो सूरज पूरब की जगह पश्चिम से निकल सकता है 
.सही बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 421

5-अंधविश्वासी रसूल 
सूर्यग्रहण एक प्राकृतिक घटना है .जिसका क़यामत से कोई सम्बन्ध नहीं है .लेकिन मुसलमान जिस मुहम्मद को अल्लाह का रसूल और हर विषय का जानकार बताते हैं , वह सूर्यग्रहण के समय डर के मारे कांपने लगता था ,यह बात इस हदीस से पता चलती है ,
"अबू मूसा ने कहा कि जिस दिन भी सूर्यग्रहण होता था , रसूल डर के मारे खड़े होकर कांपने लगते थे .उनको लगता था कि यह कियामत का दिन है , जिसमे कर्मों का हिसाब होने वाला है .फिर रसूल भाग कर मस्जिद में घुस जाते थे , वहां लम्बी लम्बी नमाजें पढ़ते थे और सिजदे करते थे .हमने उनको इतना भयभीत कभी नहीं देखा . शायद वह सूर्यग्रहण को कियामत की निशानी समझते थे . और अल्लाह से अपने गुनाहों को माफ़ करने के लिए इतनी अधिक इबादत किया करते थे ."
सही बुखारी - जिल्द 2 किताब 15 हदीस 167 

क्या ऐसे अंधविश्वासी और डरपोक व्यक्ति की बातों पर ईमान लाना मूर्खता नहीं है ?

6-कपड़ा चोर चट्टान 
मुसलमान जिन हदीसों को प्रमाणिक मानकर खुद मानते हैं ,और दूसरों को मानने पर जोर डालते हैं , उनमे ऐसी ऐसी बातें दी गयी हैं ,जिनपर कोई मूर्ख ही विश्वास कर सकता है .फिर भी मुस्लिम प्रचारक दावा करते रहते हैं कि कुरान की तरह हदीसें भी विज्ञानं सम्मत है .इसके लिए यह एक हदीस ही काफी है ,जिसे पढ़कर हदीस कहने वाले की बुद्धि पर हंसी आती है .जिसमे मूसा (Moses ) के बारे में एक घटना दी गयी है ,हदीस देखिये ,

"अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया है कि बनीइजराइल के लोग नंगे होकर नहाया करते थे ,और एक दूसरे के गुप्तांगों को देखा करते थे . लेकिन मूसा अकेले ही नहाते थे . क्योंकि उनके अंडकोष काफी बड़े थे . उनमे (scrotal hernia ) की बीमारी थी . और लोगों को यह बात पता नहीं थी . एक बार जब मूसा अपने कपडे एक चट्टान पर रख कर नहाने के लिए नदी में गए तो . चट्टान उनके कपडे लेकर भागने लगी . और मूसा नंगे ही उसके पीछे दौड़ते हुए कहने लगे " चट्टान मेरे कपडे वापस कर " इस तरह लोगों को पता चल गया कि मूसा के अंडकोष बड़े हैं . तब लोगों ने चट्टान से मूसा के कपडे वापस दिलवाए .और नाराज होकर मूसा ने उस चट्टान को काफी मारा .रसूल ने कहा " अल्लाह की कसम आज भी उस चट्टान पर मारने के छह सात निशान मौजूद हैं "
सही बुखारी - जिल्द 1किताब 5 हदीस 277

यही हदीस सही मुस्लिम में भी मौजूद है .
सही मुस्लिम -किताब 3 हदीस 669 और सही मुस्लिम -किताब 30 हदीस 5849

यही नहीं मूसा की इस कहानी के बारे में कुरान में भी लिखा है . और मुसलमानों को निर्देश दिया गया है कि " हे ईमान वालो तुम उन लोगों जैसे नहीं बन जाना , जिन्होंने मूसा को (नंगा देख कर ) दुःख पहुंचाया था " सूरा -अहजाब 33:69
कुरान और हदीसों के इन कुछ उदाहरणों को पढ़ कर लोग यही सोचेंगे कि जब मुसलमानों के अल्लाह और रसूल आकाश ,सूरज ,और चट्टान के बारे में ऐसे अवैज्ञानिक विचार रखते हैं ,तो मुसलमान कुरान और् हदीस विरोधी विज्ञानं क्यों पढ़ते हैं? इसका एक ही कारण है कि मुसलमान विज्ञानं से दुनियां की भलाई नहीं दुनिया को बर्बाद करना चाहते हैं ,या तो वह कहीं से किसी अविष्कार का फार्मूला चुरा लेते है .या फिर विज्ञानं का उपयोग विस्फोटक बनाने , नकली नोट छापने , फर्जी क्रेडिट कार्ड से रुपये निकालने ,और दूसरों की साईटों को हैक करने में करते हैं .
लेकिन विज्ञानं की सहायता से इतने कुकर्म करने के बाद भी ,मुसलमानों में इस्लामी अंधविज्ञानं हमेशा बना रहता है .और क़यामत तक बना रहेगा .

http://www.foundalis.com/rlg/Quran_and_science.htm

http://www.answering-islam.org/Hadith/runaway_stone.html