गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

इस्लामी अंधविज्ञान !


विज्ञानं और इस्लाम एक दूसरे के विरोधी हैं , क्योंकि विज्ञानं तथ्यों को तर्क की कसौटी पर परखने के बाद और कई बार परीक्षण करने के बाद उनको स्वीकार करता है .जबकि इस्लाम निराधार , बेतुकी , और ऊलजलूल बातों पर आँख मूँद पर ईमान रखने पर जोर देता है . इतिहास गवाह है कि इस्लाम के उदय से लेकर मुसलमानों ने " हुक्के " के आलावा कोई अविष्कार नहीं किया ,लेकिन दूसरों के द्वारा किये गए अविष्कारों के फार्मूले चोरी करके उनका उपयोग दुनिया को बर्बाद करने के लिए जरुर किया है .
लगभग 15 वीं शताब्दी तक मुसलमान तलवार की जोर से इस्लाम फैलाते . लेकिन जैसे जैसे विज्ञानं की उन्नति होने लगी , तो लोगों की विज्ञानं के प्रति प्रति रूचि बढ़ने लगी , यह देख कर जाकिर नायक जैसे धूर्त इस्लाम के प्रचारकों ने नयी तरकीब निकाली ,यह लोग कुरान और हदीस में दी गयी बेसिर पर की बातों का तोड़ मरोड़ कर ऐसा अर्थ करने लगे जिस से यह साबित हो जाये कि कुरान और हदीसें विज्ञानं सम्मत हैं .मुसलमानों की इसी चालाकी भरी नीति को ही " इस्लामी अंधविज्ञानं " कहा जाता है .इसका उद्देश्य पढ़े लिखे लोगों को गुमराह करके उनका धर्म परिवर्तन कराना है .लेकिन जाकिर नायक जैसे लोग विज्ञानं की आड़ में लोगों के दिमाग में इस्लाम का कचरा भरने का कितना भी प्रयास करें ,खुद कुरान और हदीस ही उनके दावों का भंडाफोड़ कर देते है .यद्यपि कुरान और हदीस में हजारों ऐसे बातें मौजूद है ,जो विज्ञानं के बिलकुल विपरीत हैं , लेकिन कुछ थोड़े से उदहारण यहाँ दिए जा रहे हैं .

1-आकाश के सात तल 
इस्लामी मान्यता के अनुसार आकाश के सात तल हैं , जो एक दुसरे के ऊपर टिके हुए हैं . और अल्लाह सबसे ऊपर वाले असमान पर अपना सिंहासन जमा कर बैठा रहता है . और वहीँ से अपने फरिश्तों या नबियों के द्वारा हुकूमत चला रहा है .इसी लिए आकाश को अरबी में " समावात " भी कहा जाता है , जो बहुवचन शब्द है . अंगरेजी में इसका अनुवाद Heavens इसी लिए किया जाता है , क्योंकि इस्लाम में आकाश के सात तल माने गए हैं .जैसा कि इन आयतों में कहा गया है .

"क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह ने किस प्रकार से सात आसमान ऊपर तले बनाये हैं "
सूरा -नूह 71:15
कुरान की इस बात की पुष्टि इस हदीस से भी होती है ,
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने अपनी पुत्री फातिमा से कहा करते थे कि जब भी अल्लाह को पुकारो तो , कहा करो कि ' हे सात असमानों के स्वामी अल्लाह " 
وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي، شَيْبَةَ وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالاَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُبَيْدَةَ، حَدَّثَنَا أَبِي كِلاَهُمَا، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي، صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ أَتَتْ فَاطِمَةُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم تَسْأَلُهُ خَادِمًا فَقَالَ لَهَا ‏ "‏ قُولِي اللَّهُمَّ رَبَّ السَّمَوَاتِ السَّبْعِ ‏"‏ ‏.‏ بِمِثْلِ حَدِيثِ سُهَيْلٍ عَنْ أَبِيهِ ‏.‏ 
सही मुस्लिम -किताब 35 हदीस 6553

2-तारे पृथ्वी के निकट हैं 
विज्ञानं ने सिद्ध कर दिया है कि तारे ( stars ) पृथ्वी से करोड़ों प्रकाश वर्ष मील दूर हैं .और दूरी के कारण छोटे दिखायी देते हैं .लेकिन कुरान इस से बिलकुल उलटी बात कहती है ,कि तारे आकाश के सबसे निचले आकाश में सजे हुए है .यानी पृथ्वी के बिलकुल पास हैं .कुरान की यह आयत देखिये ,
"हमने दुनिया के आकाश को सबसे निचले आकाश को तारों से सजा दिया है " 
सूरा -अस साफ्फात 37:6

3-सूरज दलदल में डूब जाता है 
कुरान की ऐसी कई कहानियां हैं ,जो यूनानी दन्तकथाओं से ली गयी हैं .ऐसी एक कहानी सिकंदर की है , जिसने दावा किया था कि उसने सूरज को एक कीचड़ वाले दलदल में डूबा हुआ देखा था .सिकंदर को कुरान में "जुल करनैन " ذو القرنين "कहा गया है . अरबी में इस शब्द का अर्थ "दो सींगों वाला two-horned one" होता है .इस्लामी किताबों में इसे भी अल्लाह का एक नबी बताया जाता है ,लेकिन जुल करनैन वास्तव में कौन था इसके बारे में इस्लामी विद्वानों में मतभेद है , मौलाना अबुल कलाम आजाद ने अपनी किताब ' असहाबे कहफ " में इसे सिकंदर महान Alexander the Great साबित किया है .कहा जाता है कि जब सिकंदर विश्वविजय के लिए फारस से आगे निकल गया तो उसने सूरज को एक दलदल में डूबते हुए देखा था .और कुरान इस बात को सही मानकर जोड़ लिया गया .कुरान में बताया गया है कि सूर्यास्त के बाद सूरज कहाँ डूब जाता है ,
 " यहाँ तक कि वह ( जुल करनैन ) उस जगह पहुंच गया ,और उसने सूरज को एक कीचड़ वाले दलदल (muddy spring ) डूबा हुआ पाया "
सूरा -अल कहफ़ 18:86

4-रात में सूरज कहाँ रहता है ?
इस बात को सभी लोग जानते हैं कि सूरज अस्त होने के बाद भी प्रथ्वी के किसी न किसी भाग पर प्रकाश देता रहता है ,यानि प्रथ्वी के उस भाग पर दिन बना रहता है , लेकिन हदीस के अनुसार अस्त होने के बाद सूरज रात भर अल्लाह के सिंहासन के नीचे छुपा रहता है
"अबू जर ने कहा कि एक बार रसूल ने मुझ से पूछा कि क्या तुम जानते हो कि सूर्यास्त के बाद सूरज कहाँ छुप जाता है , तो मैंने कहा कि रसूल मुझ से अधिक जानते है . तब रसूल ने कहा सुनो जब सूरज अपना सफ़र पूरा कर लेता है ,तो अल्लाह को सिजदा करके उसके सिंहासन के कदमों के नीचे छुप जाता है .फिर जब अल्लाह उसे फिर से निकलने का हुक्म देते है , तो सूरज अल्लाह को सिजदा करके वापस अपने सफ़र पर निकल पड़ता है .और यदि अल्लाह सूरज को हुक्म देगा तो सूरज पूरब की जगह पश्चिम से निकल सकता है 
.सही बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 421

5-अंधविश्वासी रसूल 
सूर्यग्रहण एक प्राकृतिक घटना है .जिसका क़यामत से कोई सम्बन्ध नहीं है .लेकिन मुसलमान जिस मुहम्मद को अल्लाह का रसूल और हर विषय का जानकार बताते हैं , वह सूर्यग्रहण के समय डर के मारे कांपने लगता था ,यह बात इस हदीस से पता चलती है ,
"अबू मूसा ने कहा कि जिस दिन भी सूर्यग्रहण होता था , रसूल डर के मारे खड़े होकर कांपने लगते थे .उनको लगता था कि यह कियामत का दिन है , जिसमे कर्मों का हिसाब होने वाला है .फिर रसूल भाग कर मस्जिद में घुस जाते थे , वहां लम्बी लम्बी नमाजें पढ़ते थे और सिजदे करते थे .हमने उनको इतना भयभीत कभी नहीं देखा . शायद वह सूर्यग्रहण को कियामत की निशानी समझते थे . और अल्लाह से अपने गुनाहों को माफ़ करने के लिए इतनी अधिक इबादत किया करते थे ."
सही बुखारी - जिल्द 2 किताब 15 हदीस 167 

क्या ऐसे अंधविश्वासी और डरपोक व्यक्ति की बातों पर ईमान लाना मूर्खता नहीं है ?

6-कपड़ा चोर चट्टान 
मुसलमान जिन हदीसों को प्रमाणिक मानकर खुद मानते हैं ,और दूसरों को मानने पर जोर डालते हैं , उनमे ऐसी ऐसी बातें दी गयी हैं ,जिनपर कोई मूर्ख ही विश्वास कर सकता है .फिर भी मुस्लिम प्रचारक दावा करते रहते हैं कि कुरान की तरह हदीसें भी विज्ञानं सम्मत है .इसके लिए यह एक हदीस ही काफी है ,जिसे पढ़कर हदीस कहने वाले की बुद्धि पर हंसी आती है .जिसमे मूसा (Moses ) के बारे में एक घटना दी गयी है ,हदीस देखिये ,

"अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया है कि बनीइजराइल के लोग नंगे होकर नहाया करते थे ,और एक दूसरे के गुप्तांगों को देखा करते थे . लेकिन मूसा अकेले ही नहाते थे . क्योंकि उनके अंडकोष काफी बड़े थे . उनमे (scrotal hernia ) की बीमारी थी . और लोगों को यह बात पता नहीं थी . एक बार जब मूसा अपने कपडे एक चट्टान पर रख कर नहाने के लिए नदी में गए तो . चट्टान उनके कपडे लेकर भागने लगी . और मूसा नंगे ही उसके पीछे दौड़ते हुए कहने लगे " चट्टान मेरे कपडे वापस कर " इस तरह लोगों को पता चल गया कि मूसा के अंडकोष बड़े हैं . तब लोगों ने चट्टान से मूसा के कपडे वापस दिलवाए .और नाराज होकर मूसा ने उस चट्टान को काफी मारा .रसूल ने कहा " अल्लाह की कसम आज भी उस चट्टान पर मारने के छह सात निशान मौजूद हैं "
सही बुखारी - जिल्द 1किताब 5 हदीस 277

यही हदीस सही मुस्लिम में भी मौजूद है .
सही मुस्लिम -किताब 3 हदीस 669 और सही मुस्लिम -किताब 30 हदीस 5849

यही नहीं मूसा की इस कहानी के बारे में कुरान में भी लिखा है . और मुसलमानों को निर्देश दिया गया है कि " हे ईमान वालो तुम उन लोगों जैसे नहीं बन जाना , जिन्होंने मूसा को (नंगा देख कर ) दुःख पहुंचाया था " सूरा -अहजाब 33:69
कुरान और हदीसों के इन कुछ उदाहरणों को पढ़ कर लोग यही सोचेंगे कि जब मुसलमानों के अल्लाह और रसूल आकाश ,सूरज ,और चट्टान के बारे में ऐसे अवैज्ञानिक विचार रखते हैं ,तो मुसलमान कुरान और् हदीस विरोधी विज्ञानं क्यों पढ़ते हैं? इसका एक ही कारण है कि मुसलमान विज्ञानं से दुनियां की भलाई नहीं दुनिया को बर्बाद करना चाहते हैं ,या तो वह कहीं से किसी अविष्कार का फार्मूला चुरा लेते है .या फिर विज्ञानं का उपयोग विस्फोटक बनाने , नकली नोट छापने , फर्जी क्रेडिट कार्ड से रुपये निकालने ,और दूसरों की साईटों को हैक करने में करते हैं .
लेकिन विज्ञानं की सहायता से इतने कुकर्म करने के बाद भी ,मुसलमानों में इस्लामी अंधविज्ञानं हमेशा बना रहता है .और क़यामत तक बना रहेगा .

http://www.foundalis.com/rlg/Quran_and_science.htm

http://www.answering-islam.org/Hadith/runaway_stone.html

32 टिप्‍पणियां:

  1. विज्ञान एक क्रमबद्ध ज्ञान है.

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    1. आप लोग राम के बारे जानते ही होगें...अरे आशा-राम नही...
      बल्कि ब्राम्हण लोगो के मर्यादा पुरुषोत्तम राम...
      अपनी पत्नी सीता पर तो राम ने मुसीबतों के पर्वत ही तोड़ डाले. १४ वर्षों का बनवास काटने के पश्चात् उसके चरित्र पर संदेह किया गया यानी चरित्र की शुद्धता का सबूत देने के लिए उन्हें अग्नि में कूदना पड़ा सीता कहती है-
      "मेरा चरित्र शुद्ध है, तो भी मुझे दूषित समझ रहे है मैं सर्वथा निष्कलंक हूँ. सम्पूर्ण जगत की साक्षी अग्नि देव ! मेरी रक्षा करें.""सुमित्रा­नंदन ! मेरे लिए चिता तैयार कर दो।
      मेरे इस दुःख की एक ही दवा है. मिथ्या कलंक से कलंकित होकर मैं जीवित नहीं रह सकती."(रामायण ६-२४-१)
      अग्नि परीक्षा के बाद भी राम की तसल्ली नहीं हुई. तंग आकर सीता को कहना पड़ा
      - "मैं मन, वाणी और क्रिया के द्वारा केवल श्रीराम की ही आराधना करती हूँ. यदि यह कथन सत्य है तो भगवती पृथ्वी मुझे अपनी गोद में स्थान दे.."(रामायण ६-९७-१५)
      और "सभी लोगों के देखते-देखते जानकी (सीता) रसाताल को प्रयाण कर गई.
      "सीता की आत्महत्या से राम के चरित्र का यह पक्ष की वह कितना निर्दयी और अत्याचारी था, अच्छी तरह उजागर हो जाता है।
      दोस्तो सेयर करे और मर्यादापुरषोतम का सही ग्यान फेलाय ..

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  2. कटुवे वास्तव में चूतिये होते हैं

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  3. कटुवे ISO Sertified चूतिये होते हैँ!

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  4. हिन्दू धर्म का कोई मुकाबला नही!

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    1. हिन्दू तेरी माँ की भोसङी
      ये वेबसाइट घटिया है

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    2. कितनी मूर्खता की बात है ।।
      मित्रो आप इस चित्र मे देख सकते है कि एक मासुम बच्ची की एक कुत्ते से शादी करायी जा रही है ।।
      इस बच्ची के पिता को एक पाखण्डी ज्योतीषी ने सलाह दि की इस बच्ची ने पिछले जन्म मे बहुत पाप किये थे अतः उन पापो से मुक्ती हेतु इसकी शादी एक कुत्ते से कराई जाये तभी इसका यह जिवन सुखी हो सकेगा ।।
      और बडे ही दुर्भाग्य की बात हि की उस मुर्ख पिता ने यह बात मान भी ली ।।।
      कितने शर्म की बात है कि जो बच्ची अपने वर्तमान जिवन से भी अन्भीग्य है उसे पुनर्जन्म की बकवास बातो मे डाल कर ये मुर्खतापूर्ण कार्य किया जा रहा है।
      वैसे तो पुनर्जन्म वाली बात एक कोरी बकवास है,
      लेकीन पुनर्जन्म के संदर्भ मे यह भी कहा जाता है कि बहुत किस्मत वालो को मनुस्य यौनी से जन्म लेने को मिलता है, और जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है उसे ही दुबारा मनुष्य जीवन मिलता है ।।
      लेकीन अब सवाल यह उठता है कि अगर इस बच्ची ने पिछले जन्म मे इतने पाप किये थे तो उसे इस जन्म मे दुबारा मनुष्य जिवन क्यो मिला ??
      एक और अहम बात कि हुन्दु धर्म मे यह भी माना जाता है कि एक बार शादी होने के बाद वो अगले सात जन्मो तक पती पत्नी रहते है, तो इस बच्ची की शादी एक कुत्ते से कराई जा रही है तो क्या अगले सात जन्मो यह कुत्ता तक उसका पती रहेगा या फिर वो पिछले जन्म मे भी उसका पती हिथा लेकिन बहुत ज्यादा पाप करने की वजह से उसे इस जन्म मे कुत्ते का जन्म लिया ???

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  5. आप लोग राम के बारे जानते ही होगें...अरे आशा-राम नही...
    बल्कि ब्राम्हण लोगो के मर्यादा पुरुषोत्तम राम...
    अपनी पत्नी सीता पर तो राम ने मुसीबतों के पर्वत ही तोड़ डाले. १४ वर्षों का बनवास काटने के पश्चात् उसके चरित्र पर संदेह किया गया यानी चरित्र की शुद्धता का सबूत देने के लिए उन्हें अग्नि में कूदना पड़ा सीता कहती है-
    "मेरा चरित्र शुद्ध है, तो भी मुझे दूषित समझ रहे है मैं सर्वथा निष्कलंक हूँ. सम्पूर्ण जगत की साक्षी अग्नि देव ! मेरी रक्षा करें.""सुमित्रा­नंदन ! मेरे लिए चिता तैयार कर दो।
    मेरे इस दुःख की एक ही दवा है. मिथ्या कलंक से कलंकित होकर मैं जीवित नहीं रह सकती."(रामायण ६-२४-१)
    अग्नि परीक्षा के बाद भी राम की तसल्ली नहीं हुई. तंग आकर सीता को कहना पड़ा
    - "मैं मन, वाणी और क्रिया के द्वारा केवल श्रीराम की ही आराधना करती हूँ. यदि यह कथन सत्य है तो भगवती पृथ्वी मुझे अपनी गोद में स्थान दे.."(रामायण ६-९७-१५)
    और "सभी लोगों के देखते-देखते जानकी (सीता) रसाताल को प्रयाण कर गई.
    "सीता की आत्महत्या से राम के चरित्र का यह पक्ष की वह कितना निर्दयी और अत्याचारी था, अच्छी तरह उजागर हो जाता है।
    दोस्तो सेयर करे और मर्यादापुरषोतम का सही ग्यान फेलाय ..

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    1. beta ullah ke chutiye chando tumhari ma ki jai bhosdi walon



      wo maryada purushottam ram the tumhare muhammad ki tarah nahi

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  6. ye book jisne chapi hai ek no. ka chutiya hai .isne ek jagah bhi Quran ko galat sabit nahi kar paya .jahan tka suraj ko keched me dubne ka sawal hai wo julkar nain ko aisa laga ki suraj kiched me dub raha hai .Allayh pak ne ye nahi kaha ki suraz kiched me dubta hai .misal ke tour per ager hum samunder ke samne khade ho aur suryast hone wali ho to hame bhi yahi lagega ki suraj samander me dub raha hai.chutiye islam ko samjhna tere bus ki bat nai hai .aur han tere abba log yani saintist log bhi Quran ko galt sabit nahi kar paye.

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  7. कितनी मूर्खता की बात है ।।
    मित्रो आप इस चित्र मे देख सकते है कि एक मासुम बच्ची की एक कुत्ते से शादी करायी जा रही है ।।
    इस बच्ची के पिता को एक पाखण्डी ज्योतीषी ने सलाह दि की इस बच्ची ने पिछले जन्म मे बहुत पाप किये थे अतः उन पापो से मुक्ती हेतु इसकी शादी एक कुत्ते से कराई जाये तभी इसका यह जिवन सुखी हो सकेगा ।।
    और बडे ही दुर्भाग्य की बात हि की उस मुर्ख पिता ने यह बात मान भी ली ।।।
    कितने शर्म की बात है कि जो बच्ची अपने वर्तमान जिवन से भी अन्भीग्य है उसे पुनर्जन्म की बकवास बातो मे डाल कर ये मुर्खतापूर्ण कार्य किया जा रहा है।
    वैसे तो पुनर्जन्म वाली बात एक कोरी बकवास है,
    लेकीन पुनर्जन्म के संदर्भ मे यह भी कहा जाता है कि बहुत किस्मत वालो को मनुस्य यौनी से जन्म लेने को मिलता है, और जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है उसे ही दुबारा मनुष्य जीवन मिलता है ।।
    लेकीन अब सवाल यह उठता है कि अगर इस बच्ची ने पिछले जन्म मे इतने पाप किये थे तो उसे इस जन्म मे दुबारा मनुष्य जिवन क्यो मिला ??
    एक और अहम बात कि हुन्दु धर्म मे यह भी माना जाता है कि एक बार शादी होने के बाद वो अगले सात जन्मो तक पती पत्नी रहते है, तो इस बच्ची की शादी एक कुत्ते से कराई जा रही है तो क्या अगले सात जन्मो यह कुत्ता तक उसका पती रहेगा या फिर वो पिछले जन्म मे भी उसका पती हिथा लेकिन बहुत ज्यादा पाप करने की वजह से उसे इस जन्म मे कुत्ते का जन्म लिया ???

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  8. एक महिला डॉक्टर का इस्लाम स्वीकारना

    डॉ. अमीना कॉक्सन इंग्लैण्ड

    अमीना कॉक्सन का पैतृक नाम एन.कॉक्सन हैं। वे पेशे की दृष्टि से डॉक्टर और न्यूरोलॉजिस्ट हैं तथा लन्दन की हार्ट स्ट्रीट में उनका क्लीनिक है। उन्होंने विस्तृत अध्ययन और चिन्तन-मनन के पश्चात इस्लाम स्वीकार किया। लेखक हनी शाह ने इनसे डाक द्वारा इस्लाम ग्रहण करने का कारण पूछा और प्राप्त जानकारियों को अपनी उल्लेखनीय पुस्तक Why Islam is Our only Choice? में सुरक्षित कर दिया, जिसका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:
    मैं 11 अक्टूबर 1940 ई. को लन्दन के एक कैथोलिक घराने में पैदा हुई। मेरी मां एक बड़े धनी बाप की बेटी थी, जबकि पिता ब्रिटिश-अमेरिकन टुबैको कम्पनी के डायरेक्टर थे। हम दो भाई-बहन हैं। दोनों ने बोर्डिंग कैथोलिक स्कूल में शिक्षा ग्रहण की। भाई आजकल अमेरिका में एक प्रसिद्ध व्यापारी हैं। उनके तीन बच्चे हैं और वे कैथोलिक ईसाइ की तरह आज भी पाबन्दी से चर्च जाते हैं। मेरे पिता को टुबैको कम्पनी की नौकरी के सिलसिले में 1945 ई. से 1953 ई. तक आठ साल का समय मिस्र मे गुजारना पड़ा। इस तरह बचपन के दो साल मुझे मुस्लिम देश मिस्र में रहने का मौका मिला और अचेतन रूप में मैं मिस्त्रवासियों के सामाजिक जीवन और सामान्य आचरण तथा रस्म-रिवाज से बहुत प्रभावित हुई। काहिरा की खूबसूरत मस्जिदों, उनकी मीनारों और विशेषकर अज़ान की आवाज़ ने मेरे दिलो-दिमाग पर गहरे प्रभाव डाले और अचेतन रूप से मेरा दिल उस और खिंचता चला गया। 1947 ई. में मैं इंग्लैण्ड वापस आ गयी और यहां एक प्राइमरी स्कूल में मेरा दाखिला करा दिया गया। 1953 ई. मे मेरे पिता भी मिस्त्र से लन्दन आ गये। और उनके मार्गदर्शन में मैं जीवन-क्षेत्र में आगे बढऩे लगी। में स्वभावत: मेहनती हूं। अत: मैंने हर परीक्षा में शानदार सफलता प्राप्त की और एम.बी.बी.एस के बाद रॉयल कॉलेज आफॅ मेडीसिन और यूनीवर्सिटी ऑफ लन्दन से न्यूरोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री हासिल कर ली। इसके साथ ही मनोविज्ञानं कोर्स भी पूरा कर लिया। शिक्षा-समाप्ति के बाद शादी कर ली। बच्चे भी हुए, लेकिन दुर्भाग्यवश यह विवाह सफल न हो सका। मेरा पति-भौतिकवादी तथा-स्वार्थी था। वह बीवी-बच्चों को घरेलू खर्चे के लिए कुछ भी न देता और उलटे धौंस जमाता रहता। परिणामत: कुछ वर्षों के बाद उस व्यक्ति से मैंने तलाक ले ली। हनी शाहिद लिखते हैं कि 1978 ई. में कॉक्सन ने लन्दन की हार्ट स्ट्रीट में, जिसे मेडिकल रोड भी कहा जाता है,अपना क्लीनिक बना लिया है और प्राइवेट प्रेक्टिस शुरू कर दी। सौभाग्यवश आरंभ में ही कई मुसलमान रोगी महिलाओं से सम्पर्क स्थापित हुआ और वे यह देखकर बहुत हैरान हुइं कि भयानक रोग और गंभीर कष्ट की दशा में भी मुसलमान महिलाएं अत्यन्त साहस का प्रदर्शन करती थीं। प्रथमत: एक मुसलमान युवती अपनी बीमार मां को लेकर उनके क्लीनिक आई। डॉक्टर ने ऐसे ही सुरक्षा की दृष्टि से लड़की की जांच की तो पता चला कि वह तो स्तन के कैंसर से ग्रस्त हैं, लेकिन जब लड़की को इस भयानक रोग के बारे में बताया गया तो उसने तुरन्त कहा- अलहम्दुलिल्लाह यह अल्लाह तआला का भेद है कि मैं आपके पास आई और मुझे इस रोग के बारे में पता चला। डॉ अमीना के लिए यह अनुभव अत्यन्त आश्चर्यजनक था कि वह लड़की न घबरायी, न चिल्लायी। उसने अत्यन्त धैर्य और साहस से अल्लाह का शुक्र अदा किया और ऐसा विश्वास भी प्रकट किया कि निश्चय ही ईश्वर की अनुकम्पा से वह ठीक हो जाएगी। लड़की के इस रवैये से डॉक्टर बहुत प्रभावित हुइं। इस धर्म के प्रति उसके हदृय में आस्था पैदा होने लगी, जिसने एक कमज़ोर लड़की को उत्साह और धैर्य की एक विशिष्ट शक्ति प्रदान कर दी थी। इसी प्रकार 1983 ई. में उनका परिचय ओमान के सुल्तान काबूस की आदरणीया मां से हुआ। वे मधुमेह रोग से ग्रस्त थीं, किन्तु धैर्य और साहस का नमूना थीं। वह शानदार व्यक्तित्व वाली एक खूबसूरत महिला थीं, किन्तु प्रेम, दया, और क्षमाशीलता का नमूना भी थीं। हालांकि निर्दयी रोग ने उन्हें निचोड़कर रख्र दिया था लेकिन इसके बावजूद इनकी ज़ुबान पर कभी भूलकर भी गिला-शिकवा न आया। इस बुज़ुर्ग बीमार महिला के व्यवहार ने भी डॉ अमीना कॉक्सन को असाधारण रूप से प्रभावित किया और इस दृष्टि से वे गंभीरतापूर्वक इस्लाम के विषय में सोचने लगीं और कुछ समय के अध्ययन और सोच-विचार के बाद उन्होंने इस्लाम स्वीकार कर लिया। इस प्रश्र के उत्तर में कि उन्होंने अपना पैतृक धर्म ईसाइयत क्यों छोड़ दिया? उन्होंने बताया, मैं पैतृक रूप से कैथोलिक चचेरी बहनें ननों के रूप में सेवा समर्पित कर रही थीं। मैं भी बीस साल की उम्र तक अपनी पैतृक आस्थाओं पर कायम रही, लेकिन जब सोचने-समझने की उम्र शुरू हुई तो
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  9. CON. PART 2
    उन आस्थाओं के विषय में शंकाएं, सिर उठाने लगीं। मज़बूत दीवारों में दरारं पैदा होने लगीं। अत: यह सोचकर मुझे अपने आपसे नफरत होने लगती कि ये मेरे निकृष्टतम पाप थे, जिनके कारण हज़रत मसीह को सलीब पर चढ़ाया गया और वे बहुत ही दर्दनाक मौत से दो-चार हुए। इसी तरह वह रात्रिभोज, जो हज़रत ईसा अलैहि० ने अपने साथियों के साथ खाया था, उसके बारे में सोचकर मुझे घृणा आने लगती की यह खाना वास्तव में हज़रत मसीह के मांस और रक्त मिश्रित हैं। त्रयवाद की समस्या तो मुझे बहुत ही परेशान रखती और खुदा को तीन हिस्सों में बंटा देखकर में भौंचक्का रह जाती। यह सोचकर भी मैं चिन्तित रहती कि मैं तो जन्मजात पापिन हूं। फिर हज़रत मसीह से कैसे मुहब्बत का दम भर सकती हूं। बाइबल और ईसाई धर्म की ये आस्थाएं मेरे मन में भरी रहती। जब भी अकेली होती, इन पर सोचने लगती और उलझन से मेरा सिर फटने लगता। अनायास सोचती की ये सारी बातें तो एकदम निराधार हैं, जिनका बुद्धि या प्रकृति से दूर का भी संबंध नहीं। फिर मैं अधिक समय तक इनसे सम्बद्ध कैसे रह सकती हूं? फिर विचार आता, कहीं मैं पथभ्रष्ट तो नहीं हो रही हूं ? कहीं मैं अपने धर्म से दूर तो नहीं जा रही हूं? परेशान होकर अनायास खुदा से दुआ करने लगती, ऐ खुदा मेरा मार्गदर्शन कर। सत्य का रास्ता मुझ पर खोल दे। अगर तूने मेरी मदद न की तो में तबाह हो जाऊंगी, कहीं की नहीं रहूँगी। अत: अल्लाह तआला ने मेरी दुआएं सुन ली। मेरी सहायता की और एक के बाद एक मैंने तीन स्पष्ट स्वप्र देखे, जिनमें कोई शंका न थी और मुझे विश्वास हो गया कि मार्गदर्शन के लिए मेरी बेचैनी और खोज के नतीजे में खुदा मेरा मार्गदर्शन कर रहा है। स्वप्र में मुझे बताया गया :1 अल्लाह तआला से लगाव पैदा करने के लिए मुझे किसी पादरी की ज़रूरत नहीं है। ।2 इस्लाम ही सत्य धर्म और सीधा मार्ग है। 3 हज़रत ईसा अलैहि० और हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम परस्पर एकत्व रखते हैं। दोनों जन्नत में इकट्ठे हैं। और हज़रत ईसा अलैहि० में मुझे हज़रत मुहम्मद सल्ल० के संरक्षण में दे दिया है। इसमें कोई संदेह नहीं की मैं सत्य की खोज में बहुत परेशान और बेचैन थी, फिर यह भी ख्याल आता कि मुझे अपने पैतृक धर्म से दूर नहीं होना चाहिए, किन्तु उपर्युक्त सपनों ने जिस लक्ष्य की ओर संकेत किया वह इस्लाम का रास्ता था। मुसलमान रोगियों ने मेरे दिल में इस्लाम के लिए अत्यधिक सहानुभूति और आकर्षण पैदा कर दिया, विशेषकर उनका यह विश्वास कि सब कुछ खुदा की ओर से होता है और उसके हर काम में कोई न कोई भेद ज़रूर होता है, जबकि इसके विपरीत यूरोप में लोग हर अच्छे काम का क्रेडिट खुद लेते हैं, जबकि बुरे नतीजे को खुदा से जोड़ दिया जाता हैं। इस क्रम में मैं विशेषकर ओमान के सुल्तान काबूस अल सईद की माननीया माताजी से बेहद प्रभावित हुई। वे मेरी मरीज़ थी। बुढ़ापा और स्वास्थ्य की गड़बड़ी के बावजूद वे हर एक से मुस्कराकर मिलतीं और हर जरूरतमंद पर खुले दिल से दौलत न्योछावर कर देतीं। वह अत्यन्त कष्टग्रस्त थीं, लेकिन कभी भी उन्होंने शिकवा-शिकायत का अन्दाज नहीं अपनाया, बल्कि बात-बात पर वह अल्लाह तआला का शुक्र अदा करती और जब मैं पूछती कि बीमारी की इन्तिहाई तकलीफ में कौन-सी चीज़ उन्हें इत्मीनान और उम्मीद से जोड़े हुए है। तो वह श्रद्धा की गहरी अनुभूति के साथ अल्लाह तआला का नाम लेती। वह वही महान हस्ती है, जिसकी अनुकम्पा और मेहरबानी उन्हें निराश नहीं होने देती। वह पूरे विश्वास के साथ कहतीं, अल्लाह तआला करूणामय और दयावान है। वही मनुष्य को हर तरह की सुख-सुविधाएं प्रदान करता है, वही किसी युक्ति के कारण मुसीबत से दो-चार करता है। मैं उसकी प्रसन्नता पर खुश हूं और अपनी तकलीफ से परेशान नहीं हूं। वास्तव में वे एक आदर्श मुस्लिम महिला थीं। उन्होंने मुझे इस्लाम के बहुत करीब कर दिया। यद्यपि तीन स्पष्ट सपने देखने के बावजूद मैं अभी तक अपने आपको इस्लाम स्वीकार करने को तैयार न कर पायी थी, लेकिन रमज़ान आया तो मैं उनके कहने पर रोज़े रखने लगी और पहली बार सच्ची आत्मिक शान्ति से परिचित हुई। एक साल इसी तरह गुज़र गया। दूसरा रमज़ान आने वाला था कि कुवैत के एक मुसलमान परिवार से मेरा परिचय हुआ। यूसुफ अल ज़वावी, परिवार के मुखिया, बहुत बीमार थे। लेकिन खुदा पर बीमार
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  10. part 3 con.
    और परिवार के शेष लोगों की आस्था और विश्वास को देखकर मैं फिर चकित रह गयी। ये लोग भी साहसिकता, धैर्य, दृढ़ता, प्रेम और सत्यनिष्ठा का अत्यन्त सुन्दर उदाहरण थे। पश्चिमी घरानों के विपरीत सब एक-दूसरे पर जान छिड़कते और परिवार के मुखिया के स्वास्थ्य लाभ के लिए कोई कसर बाकी न छोड़ते। मैंने अपने पेशे की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बीमार का खास ख्य़ाल रखा। इसकी वे खूब सराहना करते। एक दिन कृतज्ञता प्रकट करते हुए युसूफ अल ज़वावी ने कहा, मैं आपकी सेवा और उपकारों का शुक्रिया कैसे अदा करूं ? जी चाहता है कि सारी दौलत आपके कदमों में ढेर कर दूं। जी चाहता है कि आपको अपनी बहू बना लूं, आपको अपने घर का सदस्य बना लूं। लेकिन मैं तो इनसे भी ज्यादा कीमती चीज़ की अभिलाषी हूं, मैंने जवाब में उत्सुकता पैदा की। वह क्या ? युसूफ और उनका सारा परिवार परेशान हो गया। आप मुझे मुसलमान बना लीजिए। अपने धर्म में शामिल कर लीजिए। मेरी बात सुनकर उस घराने का अजीब हाल हुआ। खुशी से उनकी चीखें निकल गयी थीं। यूसुफ की आखें अनायास छलक पड़ीं और सब लोग खुशी की असाधारण अनुभूति से निहाल हो गये। दूसरे दिन मैंने कलिमा तैयिबा पढ़ा और सारे रोज़े रखे। पूरे शौक से नमाजों में शामिल हुई। अलहम्दुलिल्लाह मुझे मेरी मंजि़ल मिल गयी।

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  11. कुरआन और विज्ञान - परिचय

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    जब से इस पृथ्वी ग्रह पर मानवजाति का जन्म हुआ है, तब से मनुष्य ने हमेशा यह समझने की कोशिश की है कि प्राकृतिक व्यवस्था कैसे काम करती है, रचनाओं और प्राणियों के ताने-बाने में इसका अपना क्या स्थान है और यह कि आखि़र खु़द जीवन की अपनी उपयोगिता और उद्देश्य क्या है ? सच्चाई की इसी तलाश में, जो सदियों की मुद्दत और धीर - गम्भीर संस्कृतियों पर फैली हुई है संगठित धर्मो ने मानवीय जीवन शैली की संरचना की है और एक व्यापक परिप्रेक्ष्य में ऐतिहासिक धारे का निर्धारण भी किया है ।

    कुछ धर्मो की बुनियाद लिखित पंक्तियों व आदेशों पर आधारित है जिन के बारे में उनके अनुयायियों का दावा है कि वह खुदाई या ईश्वरीय साधनों से मिलने वाली शिक्षा का सारतत्व है जब कि अन्य धर्म की निर्भरता केवल मानवीय अनुभवों पर रही है ।

    क़ुरआन पाक, जो इस्लामी आस्था का केंद्रीय स्रोत है एक ऐसी किताब है जिसे इस्लाम के अनुयायी मुसलमान, पूरे तौर पर खु़दाई या आसमानी साधनों से आया हुआ मानते हैं। इसके अलावा क़ुरआन ए पाक के बारे में मुसलमानों का यह विश्वास, कि इसमें रहती दुनिया तक मानवजाति के लिये निर्देश मौजूद है, चूंकि क़ुरआन का पैग़ाम हर ज़माने, हर दौर के लोगों के लिये है, अत: इसे हर युगीन समानता के अनुसार होना चाहिये, तो क्या क़ुरआन इस कसौटी पर पूरा उतरता है?, प्रस्तुत शोध - पत्र में मुसलमानों के इस विश्वास का वस्तुगत विश्लेषण objective analysis पेश किया जा रहा है जो, क़ुरआन के इल्हामी साधन द्वारा अवतरित होने की प्रमाणिकता को वैज्ञानिक खोज के आलोक में स्थापित करती है । मानव इतिहास में एक युग ऐसा भी था जब ‘‘चमत्कार‘‘ या चमत्कारिक वस्तु मानवीय ज्ञान और तर्क से आगे हुआ करती थी चमत्कार की आम परिभाषा है, ऐसी ‘‘वस्तु‘‘ जो साधारणतया मानवीय जीवन के प्रतिकूल हो और जिसका बौद्धिक विश्लेषण इंसान के पास न हो। फिर किसी भी वस्तु को करिश्मे के तौर पर मानने से पहले हमें बहुत बचना पडे़गा जैसे 1993 में ‘‘टाइम्स ऑफ इंडिया‘‘ मुम्बई में एक ख़बर प्रकाशित हुई, जिस में ‘‘बाबा पायलट‘‘ नामी एक साधू ने दावा किया था कि वह पानी से भरे एक टैंक के अंदर लगातार तीन दिन और तीन रातों तक पानी में रहा, अलबत्ता जब रिपोर्टरों ने उस टैंक की सतह का जायज़ा लेने की कोशिश की तो उन्हें इसकी इजाज़त नहीं मिली।
    बाबा ने पत्रकारों को उत्तर दिया किसी को उस मां के गर्भ (womb) का विश्लेषण करने की आज्ञा कैसे दी जा सकती है जिससे बच्चा जन्म लेता है साफ़ जा़हिर है कि ‘‘साधू जी‘‘ कुछ ना कुछ छुपाना चाह रहे थे, और उनका यह दावा सिर्फ़ ख्याति प्राप्त करने की एक चाल थी, यक़ीनन नये दौर का कोई भी व्यक्ति जो तर्क संगत सोच (Rational thinking) की ओर थोड़ा झुकाव रखता होगा ऐसे किसी चमत्कार को नहीं मानेगा। अगर ऐसे झूठे और आधारहीन ‘‘चमत्कार‘‘ अल्लाह द्वारा घटित होने का आधार बने तो नऊज़ू-बिल्लाह हमें दुनिया के सारे जादूगरों को ख़ुदा के अस्ल प्रतिनिधि के रूप में स्वीकार करना पडे़गा।

    एक ऐसी किताब जिसके अल्लाह द्वारा अवतरित होने का दावा किया जा रहा है उसी आधार पर एक चमत्कारी जादूगर की दावेदारी भी है तो उसकी पुष्टि verification भी होनी चाहिये। मुसलमानों का विश्वास है कि पवित्र क़ुरआन अल्लाह द्वारा उतारी हुई और सच्ची किताब है जो अपने आप में एक चमत्कार है, और जिसे समस्त मानव जाति के कल्याण के लिये उतारा गया है। आइये हम इस आस्था और विश्वास की प्रमाणिकता का बौद्धिक विश्लेषण करते हैं।

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  12. कुरआन और विज्ञान - अंतरिक्ष - विज्ञान (Astrology)

    सृष्टि की संरचना: ‘‘बिग बैंग ‘‘अंतरिक्ष विज्ञान के विशेषज्ञों ने सृष्टि की व्याख्या एक ऐसे सूचक (phenomenon) के माध्यम से करते हैं और जिसे व्यापक रूप ‘‘से बिग बैंग‘‘(big bang) के रूप में स्वीकार किया जाता है। बिग बैंग के प्रमाण में पिछले कई दशकों की अवधि में शोध एवं प्रयोगों के माध्यम से अंतरिक्ष विशेषज्ञों की इकटठा की हुई जानकारियां मौजूद है ‘बिग बैंग‘ दृष्टिकोण के अनुसार प्रारम्भ में यह सम्पूर्ण सृष्ठि प्राथमिक रसायन (primary nebula) के रूप में थी फिर एक महान विस्फ़ोट यानि बिग बैंग (secondry separation) हुआ जिस का नतीजा आकाशगंगा के रूप में उभरा, फिर वह आकाश गंगा विभाजित हुआ और उसके टुकड़े सितारों, ग्र्रहों, सूर्य, चंद्रमा आदि के अस्तित्व में परिवर्तित हो गए कायनात, प्रारम्भ में इतनी पृथक और अछूती थी कि संयोग (chance) के आधार पर उसके अस्तित्व में आने की ‘‘सम्भावना: (probability) शून्य थी। पवित्र क़ुरआन सृष्टि की संरचना के संदर्भ से निम्नलिखित आयतों में बताता है:

    ‘‘क्या वह लोग जिन्होंने (नबी स.अ.व. की पुष्टि) से इन्कार कर दिया है ध्यान नहीं करते कि यह सब आकाश और धरती परस्पर मिले हुए थे फिर हम ने उन्हें अलग किया‘‘(अल - क़ुरआन: सुर: 21, आयत 30)

    इस क़ुरआनी वचन और ‘‘बिग बैंग‘‘ के बीच आश्चर्यजनक समानता से इनकार सम्भव ही नहीं! यह कैसे सम्भव है कि एक किताब जो आज से 1400 वर्ष पहले अरब के रेगिस्तानों में व्यक्त हुई अपने अन्दर ऐसे असाधारण वैज्ञानिक यथार्थ समाए हुए है?

    आकाशगंगा की उत्पत्ति से पूर्व प्रारम्भिक वायुगत रसायन

    वैज्ञानिक इस बात पर सहमत हैं कि सृष्टि में आकाशगंगाओं के निर्माण से पहले भी सृष्टि का सारा द्रव्य एक प्रारम्भिक वायुगत रसायन (gas) की अवस्था में था, संक्षिप्त यह कि आकाशगंगा निर्माण से पहले वायुगत रसायन अथवा व्यापक बादलों के रूप में मौजूद था जिसे आकाशगंगा के रूप में नीचे आना था. सृष्टि के इस प्रारम्भिक द्रव्य के विश्लेषण में गैस से अधिक उपयुक्त शब्द ‘‘धुंआ‘‘ है।

    निम्नांकित आयतें क़ुरआन में सृष्टि की इस अवस्था को धुंआ शब्द से रेखांकित किया है।

    ‘‘फिर वे आसमान की ओर ध्यान आकर्षित हुए जो उस समय सिर्फ़ धुआं था उस (अल्लाह) ने आसमान और ज़मीन से कहा:अस्तित्व में आजाओ चाहे तुम चाहो या न चाहो‘‘ दोनों ने कहा: हम आ गये फ़र्मांबरदारों (आज्ञाकारी लोगों) की तरह‘‘(अल ..कु़रआन: सूर: 41 ,,आयत 11)

    एक बार फिर, यह यथार्थ भी ‘‘बिग बैंग‘‘ के अनुकूल है जिसके बारे में हज़रत मुहम्मद मुस्तफा़ (स.अ.व. )की पैग़मबरी से पहले किसी को कुछ ज्ञान नहीं था (बिग बैंग दृष्टिकोण बीसवीं सदी यानी पैग़मबर काल के 1300 वर्ष बाद की पैदावार है)

    अगर इस युग में कोई भी इसका जानकार नहीं था तो फिर इस ज्ञान का स्रोत क्या हो सकता है?

    धरती की अवस्था: गोल या चपटी

    प्राराम्भिक ज़मानों में लोग विश्वस्त थे कि ज़मीन चपटी है, यही कारण था कि सदियों तक मनुष्य केवल इसलिए सुदूर यात्रा करने से भयाक्रांति करता रहा कि कहीं वह ज़मीन के किनारों से किसी नीची खाई में न गिर पडे़! सर फ्रांस डेरिक वह पहला व्यक्ति था जिसने 1597 ई0 में धरती के गिर्द (समुद्र मार्ग से) चक्कर लगाया और व्यवहारिक रूप से यह सिद्ध किया कि ज़मीन गोल (वृत्ताकार) है। यह बिंदु दिमाग़ में रखते हुए ज़रा निम्नलिखित क़ुरआनी आयत पर विचार करें जो दिन और रात के अवागमन से सम्बंधित है:

    ‘‘ क्या तुम देखते नहीं हो कि अल्लाह रात को दिन में पिरोता हुआ ले आता है और दिन को रात में ‘‘

    (अल-.क़ुरआन: सूर: 31 आयत 29)

    यहां स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि अल्लाह ताला ने क्रमवार रात के दिन में ढलने और दिन के रात में ढलने (परिवर्तित होने)की चर्चा की है ,यह केवल तभी सम्भव हो सकता है जब धरती की संरचना गोल (वृत्ताकार) हो। अगर धरती चपटी होती तो दिन का रात में या रात का दिन में बदलना बिल्कुल अचानक होता ।

    निम्न में एक और आयत देखिये जिसमें धरती के गोल बनावट की ओर इशारा किया गया है:
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  13. PART 2
    उसने आसमानों और ज़मीन को बरहक़ (यथार्थ रूप से)उत्पन्न किया है ,, वही दिन पर रात और रात पर दिन को लपेटता है।,,(अल.-क़ुरआन: सूर:39 आयत 5)

    यहां प्रयोग किये गये अरबी शब्द ‘‘कव्वर‘‘ का अर्थ है किसी एक वस्तु को दूसरे पर लपेटना या overlap करना या (एक वस्तु को दूसरी वस्तु पर) चक्कर देकर (तार की तरह) बांधना। दिन और रात को एक दूसरे पर लपेटना या एक दूसरे पर चक्कर देना तभी सम्भव है जब ज़मीन की बनावट गोल हो ।

    ज़मीन किसी गेंद की भांति बिलकुल ही गोल नहीं बल्कि नारंगी की तरह (geo-spherical) है यानि ध्रुव (poles) पर से थोडी सी चपटी है। निम्न आयत में ज़मीन के बनावट की व्याख्या यूं की गई हैः ‘‘और फिर ज़मीन को उसने बिछाया ‘‘(अल क़ुरआन: सूर 79 आयत 30)

    यहां अरबी शब्द ‘‘दहाहा‘‘ प्रयुक्त है, जिसका आशय ‘‘शुतुरमुर्ग़‘‘ के अंडे के रूप, में धरती की वृत्ताकार बनावट की उपमा ही हो सकता है। इस प्रकार यह माणित हुआ कि पवित्र क़ुरआन में ज़मीन के बनावट की सटीक परिभाषा बता दी गई है, यद्यपि पवित्र कुरआन के अवतरण काल में आम विचार यही था कि ज़मीन चपटी है।

    चांद का प्रकाश प्रतिबिंबित प्रकाश है

    प्राचीन संस्कृतियों में यह माना जाता था कि चांद अपना प्रकाश स्वयं व्यक्त करता है। विज्ञान ने हमें बताया कि चांद का प्रकाश प्रतिबिंबित प्रकाश है फिर भी यह वास्तविकता आज से चौदह सौ वर्ष पहले पवित्र क़ुरआन की निम्नलिखित आयत में बता दी गई है।

    ,,बड़ा पवित्र है वह जिसने आसमान में बुर्ज (दुर्ग) बनाए और उसमें एक चिराग़

    और चमकता हुआ चांद आलोकित किया ।(अल. क़ुरआन ,सूर: 25 आयत 61)

    पवित्र क़ुरआन में सूरज के लिये अरबी शब्द ‘‘शम्स‘‘ प्रयुक्त हुआ है। अलबत्ता सूरज को ‘सिराज‘ भी कहा जाता है जिसका अर्थ है मशाल (torch) जबकि अन्य अवसरों

    पर उसे ‘वहाज‘ अर्थात् जलता हुआ चिराग या प्रज्वलित दीपक कहा गया है। इसका अर्थ

    ‘‘प्रदीप्त‘ तेज और महानता‘‘ है। सूरज के लिये उपरोक्त तीनों स्पष्टीकरण उपयुक्त हैं क्योंकि उसके अंदर प्रज्वलन combustion का ज़बरदस्त कर्म निरंतर जारी रहने के कारण तीव्र ऊष्मा और रौशनी निकलती रहती है।

    चांद के लिये पवित्र क़ुरआन में अरबी शब्द क़मर प्रयुक्त किया गया है और इसे बतौर‘ मुनीर प्रकाशमान बताया गया है ऐसा शरीर जो ‘नूर‘ (ज्योति) प्रदान करता हो। अर्थात, प्रतिबिंबित रौशनी देता हो। एक बार पुन: पवित्र क़ुरआन द्वारा चांद के बारे में बताए गये तथ्य पर नज़र डालते हैं, क्योंकि निसंदेह चंद्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं है बल्कि वह सूरज के प्रकाश से प्रतिबिंबित होता है और हमें जलता हुआ दिखाई देता है। पवित्र क़ुरआन में एक बार भी चांद के लिये‘, सिराज वहाज, या दीपक जैसें शब्दों का उपयोग नहीं हुआ है और न ही सूरज को , नूर या मुनीर‘,, कहा गया है। इस से स्पष्ट होता है कि पवित्र क़ुरआन में सूरज और चांद की रोशनी के बीच बहुत स्पष्ट अंतर रखा गया है, जो पवित्र क़ुरआन की आयत के अध्ययन से साफ़ समझ में आता है।

    निम्नलिखित आयात में सूरज और चांद की रोशनी के बीच अंतर इस तरह स्पष्ट किया गया है:

    वही है जिस ने सूरज को उजालेदार बनाया और चांद को चमक दी ।,,( अल-क़ुरआन: सूरः 10,, आयत 5 ,,)

    क्या देखते नहीं हो कि अल्लाह ने किस प्रकार सात आसमान एक के ऊपर एक बनाए और उनमें चांद को नूर ( ज्योति) और सूरज को चिराग़ (दीपक) बनाया ।(अल- क़ुरआन: सूर:71 आयत 15 से 16)

    इन पवित्र आयतों के अध्य्यन से प्रमाणित होता है कि महान पवित्र क़ुरआन और आधुनिक विज्ञान में धूप और चाँदनी की वास्तविकता के बारे में सम्पूर्ण सहमति है ।

    सूरज घूमता है

    एक लम्बी अवधि तक यूरोपीय दार्शिनिकों और वैज्ञानिकों का विश्वास रहा है कि धरती सृष्टि के केंद्र में चुप खड़ी है और सूरज सहित सृष्टि की प्रत्येक वस्तु उसकी परिक्रमा कर रही है। इसे धरती का केंद्रीय दृष्टिकोण‘ भूकेन्द्रीय सिद्धांत geo-centric-theory भी कहा जाता है जो बतलीमूस- काल, दूसरी सदी ईसा पूर्व से लेकर 16 वीं सदी ई. तक सर्वमान्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण रहा है, पुन:
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  14. PART 3
    1512 ई0 में निकोलस कॉपरनिकस ने ‘‘अंतरिक्ष में ग्रहों की गति के सौर-..केंद्रित ग्रह- गति सिद्धांत heliocentric theory of planetary motion का प्रतिपादन किया जिसमें कहा गया था कि सूरज सौरमण्डल के केंद्र में यथावत है और अन्य तमाम ग्रह उसकी परिक्रमा कर रहे है: 1609 ई0 में एक जर्मन वैज्ञानिक जोहानस कैप्लर ने astronomia nova (खगोलीय तंत्र) नामक एक किताब प्रकाशित कराई। जिसमें विद्वान लेखक ने, न केवल यह सिद्ध किया कि सौरमण्डल के ग्रह दीर्ध वृत्तीय:elliptical अण्डाकार धुरी पर सूरज की परिक्रमा करते हैं बल्कि उसमें यह प्रमाणिकता भी अविष्कृत है कि सारे ग्रह अपनी धुरियों (axis) पर अस्थाई गति से घूमते हैं। इस अविष्कृत ज्ञान के आधार पर यूरोपीय वैज्ञानिकों के लिये सौरमण्डल की अनेक व्यवस्थाओं की सटीक व्याख्या करना सम्भव हो गया। रात और दिन के परिवर्तन की निरंतरता के इन अविष्कारों के बाद यह समझा जाने लगा कि सूरज यथावत है और धरती की तरह अपनी धुरी पर परिक्रमा नहीं करता।
    अब ज़रा पवित्र क़ुरआन की निम्न आयतों को ध्यान से देखें:

    ”और वह अल्लाह ही है, जिसने रात और दिन की रचना की और सूर्य और चांद को उत्पन्न किया,, सब एक. एक फ़लक (आकाश) में तैर रहे हैं।“( अल-क़ुरआन: सूर: 21 आयत 33 )

    ध्यान दीजिए कि उपरोक्त आयत में अरबी शब्द ‘‘यस्बहून‘‘ प्रयुक्त किया गया है जो सब्हा से उत्पन्न है जिसके साथ एक ऐसी हरकत की वैचारिक संकल्पना जुडी़ हुई है जो किसी शरीर की सक्रियता से उत्पन्न हुई हो। अगर आप धरती पर किसी व्यक्ति के लिये इस शब्द का उपयोग करेंगे तो इसका अर्थ यह नहीं होगा कि वह लुढक रहा है बल्कि इसका आशय होगा कि अमुक व्यक्ति दौड़ रहा है अथवा चल रहा है अगर यह शब्द पानी में किसी व्यक्ति के लिये उपयोग किया जाए तो इसका अर्थ यह नहीं होगा कि वह पानी पर तैर रहा है बल्कि इसका अर्थ होगा कि ,,अमुक व्यक्ति पानी में तैराकी: swimming कर रहा है।
    इस प्रकार जब इस शब्द,, ’यसबह’ का किसी आकाशीय शरीर (नक्षत्र) सूर्य के लिये उपयोग करेंगे तो इसका अर्थ केवल यही नहीं होगा कि वह शरीर अंतरिक्ष में गतिशील है बल्कि इसका वास्तविक अर्थ कोई ऐसा साकार शरीर होगा जो अंतरिक्ष में गति करने के साथ साथ अपने धु्रव पर भी घूम रहा हो। आज स्कूली पाठयक्रमों में अपनी जानकारी ठीक करते हुए यह वास्तविक्ता शामिल कर ली गई है कि सूर्य की ध्रुवीकृत परिक्रमा की जांच किसी ऐसे यंत्र से की जानी चाहिये जो सूर्य की परछाई को फैला कर दिखा सके इसी प्रकार अंधेपन के ख़तरे से दो चार हुए बिना सूर्य की परछाई का शोध सम्भव नहीं। यह देखा गया है कि सूर्य के धरातल पर धब्बे हैं जो अपना एक चक्कर लगभग 25 दिन में पूरा कर लेते है । मतलब यह की सूर्य को अपने ध्रुव के चारों ओर एक चक्कर पूरा करने में लगभग 25 दिन लग जाते है। इसके अलावा सूर्य अपनी कुल गति 240 किलो मीटर प्रति सेकेण्ड की रफ़तार से अंतिरक्ष की यात्रा कर रहा है। इस प्रकार सूरज समान गति से हमारे देशज मार्ग आकाशगंगा की परिक्रमा बीस करोड़ वर्ष में पूरी करता है।

    न सूर्य के बस में है कि वह चांद को जाकर पकड़े और न ‘रात,‘‘, ‘दिन पर वर्चस्व ले जा सकती है ,, यह सब एक एक आकाश में तैर रहे हैं।,,(अल-क़ुरआन: सूर: 36 आयत 40)

    यह पवित्र आयत एक ऐसे आधारभूत यथार्थ की तरफ़ इशारा करती है जिसे आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान ने बीती सदियों में खोज निकाला है यानि चांद और सूरज की मौलिक ‘‘परिक्रमा orbits का अस्तित्व अंतिरक्ष में सक्रिय यात्रा करते रहना है।

    ‘वह निश्चित स्थल fixed place जिसकी ओर सूरज अपनी सम्पूर्ण मण्डलीय व्यवस्था सहित यात्रा पर है। आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान द्वारा सही-सही पहचान ली गई है।

    इसे सौर,कथा solar epics का नाम दिया गया है। पूरी सौर व्यवस्था वास्तव में अंतरिक्ष के उस स्थल की ओर गतिशील है जो हरक्यूलिस नामक ग्रह Elphalerie area में अवस्थित है और उसका वास्तविक स्थल हमें ज्ञात हो चुका है।

    चांद अपनी धुरी पर उतनी ही अवधि में अपना चक्कर पूरा करता जितने समय में वह धरती की एक परिक्रमा पूरी करता है। चांद को अपनी एक ध्रुवीय परिक्रमा पूरी करने में 29.5 दिन लग जाते हैं । पवित्र क़ुरआन की आयत में वैज्ञानिक वास्तविकताओं की पुष्टि पर आश्चर्य किये बिना कोई चारा नहीं है। क्या हमारे विवेक में यह सवाल नहीं उठता कि आखिर ‘‘क़ुरआन में प्रस्तुत ज्ञान का स्रोत और ज्ञान का वास्तविक आधार क्या है?‘‘
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  15. PART 4

    सूरज बुझ जाएगा?

    सूरज का प्रकाश एक रसायनिक क्रिया का मुहताज है जो उसके धरातल पर विगत पांच अरब वर्षों से जारी है भविष्य में किसी अवसर पर यह कृत रूक जाएगा और तब सूरज पूर्णतया बुझ जाएगा जिसके कारण धरती पर जीवन की समाप्ति हो जाए पवित्र क़ुरआन सूरज के अस्तित्व की पुष्टि इस प्रकार करता है:

    ‘‘और सूरज वह अपने ठिकाने की तरफ़ चला जा रहा है यह ब्रहम्ज्ञान के स्रोत महाज्ञानी का बांधा हुआ गणित है‘‘ (अल-क़ुरआन: सुर: 36 आयत 3)

    विशेष: इसी प्रकार की बातें पवित्र क़ुरआन के सूर: 13 आयत 2,,सूर: 35, आयत 13
    सूर: 39 आयत 5 एवं 21 में भी बताई गई हैं

    यहां अरबी शब्द‘‘ मुस्तकिर: ठिकाना का प्रयुक्त हुआ है जिस का अर्थ है पूर्व से संस्थापित ‘समय‘ या ‘स्थल‘ यानी इस आयत में अल्लाह ताला कहता है कि सूरज पूर्वतः निश्चित स्थ्ल की ओर जा रहा है ऐसा पूर्व निश्चित समय के अनुसार ही करेगा अर्थात् यह कि सूरज भी समाप्त हो जाएगा या बुझ जाएगा।

    अन्तर तारकीय द्रव

    पिछले ज़माने में संगठित अंतरिक्ष व्यवस्थओं से बाहर वाहृय अंतरिक्ष: वायुमण्डल को सम्पूर्ण रूप से ‘ख़ाली:vacum माना जाता था इसके बाद अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने इस अंतरिक्ष्य प्लाविक के द्रव्यात्मक पुलों (bridge) की खोज की जिसे प्लाविक plasma कहा जाता है जो सम्पूर्ण रूप से लोनाइज़्ड गैस lonized-gas पर आधारित होते हैं और जिसमें सकारात्मक प्रभाव वाले,, अकेले:loni और स्वतंन्न इलैक्ट्रनों की समान संख्या होती है। द्रव की तीन जानी पहचानी अवस्थाओं यानी ठोस ,तरल और ज्वलनशील तत्वों के अतिरिक्त प्लाविक को चौथी अवस्था भी कहा जाता है निम्नलिखित आयत में पवित्र क़ुरआन अंतरिक्ष के प्लाविक द्रव या अन्त: इस्पात द्रव्य: intra steels material की ओर संकेत करता है ।

    ‘‘वह जिस ने छह दिनों में ज़मीन और आसमानों और उन सारी वस्तुओं का निर्माण पूरा कर दिया जो आसमान और ज़मीन के बीच में हैं।(अल-क़ुरआन ,,सूर: 25 आयत 59)

    किसी के लिये यह विचार भी हास्यास्पद होगा कि वायुमण्डल अंतरिक्ष एवं आकाशगंगा के द्रव्यों का अस्तित्व 1400 वर्ष पहले से ही हमारे ज्ञान में था।

    सृष्टि का फैलाव
    1925 ई0 में अमरीका के अंतरिक्ष वैज्ञानिक एडोन हबल adone hubble ने इस संदर्भ में एक प्रामाणिक खोज उपलब्ध कराया था कि सभी आकाशगंगा एक दूसरे से दूर हट रहे हैं अर्थात सृष्टि फैल रही है सृष्टि व्यापक हो रही है। यह एक वैज्ञानिक यथार्थ है इस बारे में पवित्र क़ुरआन में सृष्टि की संरचना के संदर्भ से अल्लाह फ़रमाता है:

    ‘‘आसमान को हम ने अपने ज़ोर से बनाया है और हम इसकी कुदरत: प्रभुत्व रखे है (या इसे फैलाव दे रहे हैं) (अल-क़ुरआन: सूर: 51 आयत 47)

    अरबी शब्द वासिऊन का सही अनुवाद इसे फैला रहे हैं बनता है तो यह आयत सृष्टि के ऐसे निर्माण की ओर संकेत करती है जिसका फैलाव निरंतर जारी है ।

    वर्तमान युग का प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक स्टीफ़न हॉकिगं अपने शोधपत्र: समय का संक्षिप्त इतिहास: a brief history of time में लिखता हैः यह ‘‘खोज ! कि सृष्टि फैल रही है बीसवी सदी के महान बौद्धिक और चिंतन क्रांतियों में से एक है,, अब ध्यान दीजिये कि पवित्र क़ुरआन नें सृष्टि के फैलाव की कथा उसी समय बता दी थी जब मनुष्य ने दूरबीन तक का अविष्कार नहीं किया था।
    इसके अतिरिक्त ऊपर वर्णित बहुत से वैज्ञानिक यथार्थ जैसे बिग बैंग से सृष्टि के प्रारम्भन आदि की जानकारी से तो अरब उस समय अनभिज्ञ ही थे जब वह विज्ञान और तकनीक के विकास और उन्नति की सर्वोत्तम ऊंचाई पर थे, अत: पवित्र क़ुरआन में वर्णित वैज्ञानिक यथार्थ को अरबवासियों की विशेषज्ञता नहीं मान जा सकता। दरअस्ल इसके प्रतिकूल सच्चाई यह है कि अरबों ने अंतरिक्ष विज्ञान में इसलिये उन्नति की क्योंकि अंतरिक्ष और सृष्टि के निर्माण विषयक जानकारियां पवित्र क़ुरआन में आसानी से उप्लब्ध हो गए थे। इस विषय को पवित्र क़ुरआन में महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया गया है।
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  16. कुरआन और विज्ञान - प्राकृतिक-विज्ञान (Natural Science)

    परमाणु भी विभाजित किये जा सकते हैं:

    प्राचीन काल में परमाणुवाद: atomism के दृष्टिकोण शीर्षक से एक सिद्ध दृष्टिकोण को व्यापक धरातल पर स्वीकर किया जाता था यह दृष्टिकोण आज से 2300 वर्ष पहले यूनानी विमाक्रातिस vimacratis ने पेश किया था विमाक्रातिस और उसके वैचारिक अनुयायी की संकल्पना थी कि, द्रव्य की न्यूनतम इकाई परमाणु है प्राचीन अरब वासी भी इसी संकल्पना के समर्थक थे। अरबी शब्द, ‘‘ज़र्रा: अणु का

    मतलब वही था जिसे यूनानी ‘ऐटम‘ कहते थे। निकटतम इतिहास में विज्ञान ने यह खोज की है कि ‘,परमाणु‘‘ को भी विभाजित करना सम्भव है, परमाणु के विभाजन योग्य होने की कल्पना भी बीसवीं सदी की वैज्ञानिक सक्रियता में शामिल है। चौदह शताब्दि पहले अरबों के लिये भी यह कल्पना असाधारण होती। उनके समक्ष ज़र्रा अथवा ‘अणु‘ की ऐसी सीमा थी जिसके आगे और विभाजन सम्भव नहीं था लेकिन पवित्र क़ुरआन की निम्नलिखित आयत में अल्लाह ने परमाणु सीमा को अंतिम सीमा मानने से इन्कार कर दिया है।

    मुनकरीन (विरोधी) कहते हैं: क्या बात है कि क़यामत हम पर नहीं आ रही हैं? कहो! क़सम है मेरे अंतर्यामी परवरदिगार (परमात्मा) की वह तुम पर आकर रहेगी उस से अणु से बराबर कोई वस्तु न तो आसमानों में छुपी हुई है न धरती पर: न अणु से बड़ी और न उस से छोटी! यह सबकुछ एक सदृश दफ़तर में दर्ज है। (अल-कु़रआन: सूर: 34 आयत 3)

    विशेष: इस प्रकार का संदेश पवित्र क़ुरआन की सूर: 10 आयत 61 में भी वर्णित है।

    यह पवित्र आयत हमें अल्लाह तआला के आलिमुल गै़ब अंतर्यामी होने यानि प्रत्येक अदृश्य और सदृश्य वस्तु के संदर्भ से महाज्ञानी होने के बारे में बताती है फिर यह आगे बढ़ती है और कहती है कि अल्लाह तआला हर चीज़ का ज्ञान रखते हैं चाहे वह परमाणु से छोटी या बड़ी वस्तु ही क्यों न हो। तो प्रमाणित हुआ कि यह पवित्र आयत स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है कि, परमाणु से संक्षिप्त वस्तु भी अस्तित्व में है और यह एक ऐसा यथार्थ है जिसे अभी हाल ही में आधुनिक वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया है।
    SUNNIKING TEAM

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  17. कुरआन और विज्ञान - जल विज्ञान (Hydrology) PART 1

    आज हम जिस संकल्पना को ‘जल- चक्र:water cycle नाम से जानते हैं उसकी संस्थापना:

    1580 ई0 में बरनॉर्ड प्लेसी bemard placy ने की थी। उसने बताया-किस प्रकार समुद्रों से जल का वाष्पीकरण evaporation होता है, और तत्पश्चात किस प्रकार वह ठंडा होकर बादलों के रूप में परिवर्तित होता है फिर उसके बाद, शुष्क खुश्क वातावरण में आगे की ओर उड़ते हुए ऊंचाई की तरफ़ बढ़ता है उसमें जल का ‘‘संघनन:condensation होता है और वर्षा होती है। उसी वर्षा का पानी झीलों, झरनों, नदियों और नहरों में अपना आकार लेता है और अपनी गति से बहता हुआ वापिस समुद्र

    में चला जाता है इसी प्रकार यह जल-चक्र जारी रहता है सातवीं सदी ईसा पूर्व में थैल्ज thelchz नामक एक यूनानी दार्शनिक को विश्वास था कि सामुद्रिक धरातल पर एक बारीक जल-बूंदों की फुहार spray उत्पन्न होती है जिसे हवा उठा लेती है और ख़ुश्की के दूर दराज़ क्षेत्रों तक ले जाकर वर्षा के रूप में छोड़ देती है, जिसे बारिश कहते हैं इसके अलावा पुराने समये में लोग यह भी नहीं जानते थे कि ज़मीन के नीचे पानी का स्रोत क्या है? उनका विचार था कि वायु शक्ति के अंतर्गत समंदर का पानी उपमहाद्वीप (सूखी धरती) में भीतरी भागों में समा जाता है उनका विश्वास था कि पानी एक गुप्त मार्ग से अथवा गहरे-अंधेरे greet abyss से आता है। समुद्र से मिला हुआ या काल्पनिक मार्ग प्लेटो-.काल से ‘‘टॉरटॉरस, कहलाता था यहां तक कि अटठारहवीं सदी के महान चिंतक‘ डिकारते descartres भी इन्ही विचारों से सहमति व्यक्त की है।

    उन्नीसवीं सदी ईसवी तक ‘अरस्तू aristotle का दृष्टिकोण ही अधिक प्रचलित रहा। उस दृष्टिकोण के अनुसार, पहाड़ों की बर्फीली गुफा़ओं में बर्फ़ के संघनन से पानी उत्पन्न होता है इस प्रक्रिया को condensation (रिस्ते हुए पानी का भंडारण) कहते हैं, जिससे वहां ज़मीन के नीचे झीलें बनती है और जो पानी का मुख्य स्रोत (चश्मः ) हैं। आज हमें यह मालूम हो चुका है कि बारिश का पानी ज़मीन पर मौजूददरारों के रास्ते बह..बह कर ज़मीन के नीचे पहुंचता है और चश्म: जलकुण्ड की उत्त्पत्ति होती है। पवित्र क़ुरआन में इस बिंदु की व्याख्या इस प्रकार है:

    क्या तुम नहीं देखते कि अल्लाह ने आसमान से पानी बरसाया फिर उसको स्रोतों चश्मों और दरियाओं के रूप में ज़मीन के अंदर जारी किया फिर उस पानी के माध्यम से वह नाना प्रकार की खेतियां (कृषि ) उत्पन्न करता है जो विभिन्न प्रजाति के है‘‘।(अल-क़ुरआन सूर: 39 आयत 21 )
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  18. PART 2

    ‘‘आसमान से पानी बरसाता है फिर उसके माध्यम से धरती को उसकी ‘मृत्यु‘ (बंजर होने) के बाद जीवन प्रदान करता है। यक़ीनन उसमें बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिये जो विवेक से काम लेते हैं।(अल-क़ुरआन: सूर 30 आयत 24)

    ‘‘और आसमान से हम ने ठीक गणित के अनुकूल एक विशेष मात्रा में पानी उतारा और उसको धरती पर ठहरा दिया हम उसे जिस प्रकार चाहें विलीन (ग़ायब) कर सकते हैं। (अल-क़ुरआन: सूर:23 आयत ..18 )

    कोई दूसरा ग्रन्थ जो 1400 वर्ष पुराना हो पानी के जलचक्र की ऐसी सटीक व्याख्या नहीं करता । ‘वाष्पीकरण: evoporation ‘‘,कसम है‘ वर्षा‘‘ ,,बरसाने वाले आसमान की‘‘ । ( अल-क़ुरआन: सूर: 86 आयत 11 )

    वायु द्वारा बादलों का गर्भाधान: Impregnate

    ‘‘,और हम ही हवाओं को लाभदायक बनाकर चलाते हैं फिर आसमान से पानी बरसाते और तुमको उससे तृप्त: सैराब करते हैं‘‘ ।

    यहां अरबी शब्द ,लवाक़िह, का उपयोग किया गया है जो ,लाक़िह, का बहुवचन है और लाक़िहा का विशेषण है अर्थात, ‘‘बार -आवर यानी ‘भर देना‘ अथवा गर्भाधान। इसी वाक्यांश में ‘बार-आवर का तात्पर्य यह कि वायु बादलों को एक दूसरे के समीप ढकेलती हैं जिसके कारण बादल के पानी में परिवर्तित होने की क्रिया गतिशील होती है, उक्त गतिशीलता के नतीजे में बिजली चमकने और बारिश होने की घटना क्रिया होती है। कुछ इसी प्रकार के स्पष्टीकरण पवित्र क़ुरआन की अन्य आयतों में भी मिलते हैं:

    ‘‘क्या तुम देखते नहीं कि अल्लाह बादल को -धीरे..धीरे चलाता है, और फिर उसके टुकड़ों को आपस में जोड़ता है। फिर उसे समेट कर एक भारी अब्र (मेघ) बना देता है, फिर तुम देखते हो कि उसके ख़ोल (ग़िलाफ़) में से वर्षा की बूंदें टपकती चली आती हैं और वह आसमान से: उन पहाडों की बदौलत जो उसमें ऊंचे हैं: ओले बरसाता है ,,फिर जिसे चाहता है उससे नुक़सान पहुंचाता है और जिसे चाहता है उनसे बचा लेता है उसकी बिजली की चमक निगाहों को आश्चर्य से भर देती है। (अल-क़ुरआन: सूर: 24 आयत ..43)

    ‘‘अल्लाह ही है जो हवाओं को भेजता है और वह बादल उठाती हैं फिर वह उन बादलों को आसमान में फैलाता है जिस तरह चाहता है और उन्हें टुकडों में विभाजित कर देता है, फिर तुम देखते हो कि बारिश की बूंदें बादल में से टपकती चली आती हैं। यह बारिश जब वह अपने बन्दों में से जिस पर चाहता है। बरसाता है तो अकस्मात वे प्रसन्न चित्त हो जाते हैं,, (अल-कुरआन: सूर 30,,आयत .48)

    पवित्र क़ुरआन में वर्णित ऊपर चर्चित व्याख्या जल विज्ञान hydrology पर उप्लब्ध नवीन अध्ययन की भी पुष्टि करते हैं। महान ग्रंथ पवित्र क़ुरआन की विभिन्न आयतों में जल चक्र का वर्णन किया गया है,, उदाहरणतया: सूर: 7 आयत ..57 सूर: 13 आयत 17

    ,, सूर: 25 आयत.. 48 से 49,, सूर 35 आयत ..9 सूर 3ः आयत. 34 सूर 45 आयत:.5..

    सूरे: 50 आयत 9

    से 11,, सूरः 56 आयत ..68 से 70 और सूर: 67 आयत ..30 ,।

    SUNNIKING TEAM

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  19. MORE INFO VISIT ON
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  20. अम्बेडकरवादियो का भंडाफोड करे

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  21. http://aayipanthi.com/2013/09/%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3-%E0%A4%A6%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%89%E0%A4%B0%E0%A5%8D/

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  22. जिस धर्म की बुनियाद हिंसा हो। उस धर्म का सम्मान कैसे हो। कत्ल की जो बात करता हो। वह खुदा भगवान कैसे हो। नारी की दयनीय दशा जिसमें, लूटना जिसकी ये हो फिदरत, कोई बतलाये खुदा का उस, मुझसे ये गुणगान कैसे हो। कृपया इसकी समीक्षा करें- धर्म न माने आपका, उसका कर दो कत्ल। हमें खुदा ने किसलिये, दी है ऐसी अक्ल?? पाप करो पाओ क्षमा, बढ़ेंगे निश्चित पाप। न्यायी कैसे बन गये, अरे खुदा जी आप।। पहिले भारी पाप कर, फिर ले माफी माँग। धर्म ग्रन्थ में है लिखा, खुदा करेगा माफ।। लेकर तेरे नाम को, शत्रु दुख, ले प्राण। नाम खुदा का कर रहे, वह पापी बदनाम।। दिल में मुहर लगाय के, पापी दिया बनाय। दोष नहीं कुछ जीव का, पापी खुदा कहाय।। जो उसके अनुयायी हैं, बस उसको उपदेश। मारो, काटो, लूट लो, दूजे मत के शेष।। क्षमा पाप से यदि करे, सब पापी बन जाय। इसीलिये संसार में बढ़ हुआ अन्याय।। करे प्रसंशा स्वयं की, वह कैसा भगवान। मुझको तो ऐसा लगे, खुदा में है अभिमान।। मेरे मत के लोग ही, जा पायेंगे स्वर्ग। दूजे मत के वास्ते, बना दिया क्यों नर्क? दूजे मत अनुयायी जो, काफिर देंय पुकार। ऐसे तो बन जायगा, काफिर यह संसार।। जिसको चाहे दे दया, जिसपर चाहे क्रोध। पक्षपात यदि जो करे, नहीं खुदा के योग्य।। मारा मेरे भक्त को, दोजख में दे डाल। मारे मेरे शत्रु को, स्वर्ग जाय, तत्काल।। दुष्ट हो अपने धर्म का, उसको मित्र बनाय। सज्जन दूजे धर्म का, उसके पास न जाय।। दूजे मत का इसलिये, उसको दिया डुबाय। जो उसके अनुयायी हैं, उसको पार कराय।। करवाये भगवान सब, पुण्य होय या पाप। फल क्यों न पाये खुदा, चाहे हो अपराध?? पक्षपात कहलायगा, फल यदि खुदा न पाय। क्षमा खुदा को यदि मिला, तो यह कैसा न्याय।। जिस फल से पापी बने, लगा दिया क्यों वृक्ष। जिसके खाने के लिये, बात नहीं स्पष्ट।। यदि स्वयं के वास्ते, तो कारण बतलाय। आदम से पहिले उसे, खुदा नहीं क्यों खाय।। बारह झरने थे झरे, शिला पे डण्डा मार। ऐसा होता अब नहीं, क्यों विकसित संसार?? निन्दित बंदर बनोगे, कहकर दिया डराय। झूठ और छल खुदा जी, आप कहाँ से पाय।। हुक्म दिया औ हो गया, कैसे हुआ बताय। किसको दिया था हुक्म ये, मेरी समझ न आय।। पाक स्थल जो बनाया, क्यों न प्रथम बनाय। प्रथम जरूरत नहीं क्या, या फिर सुधि न आय।। नहरें चलती स्वर्ग में, शुद्ध बीबियाँ पाय। इससे अच्छा स्वर्ग तो, पृथ्वी पर मिल जाय।। कैसे जन्मी बीबियाँ, स्वर्ग में, आप बताय। रात कयामत पूर्व ही, उन्हे था लिया बुलाय।। औ उनके खाविन्द क्यों, नहीं साथ में आय? नियम कयामत तोड़कर, किया है कैसा न्याय?? रहे सदा को बीबियाँ, पुरुष न रहे सदैव। खुदा हमारे प्रश्न का शीघ्र ही उत्तर देव?? मृत्य को जो जीवित करे, औ जीवित को मृत्य। मेरा यह है मानना, नहीं ईश्वरीय कृत्य।। किससे बोला था खुदा, किसको दिया सुनाय? बिना तर्क की बात को, कैसे माना जाय? खुदा न करते बात अब, कैसे करते पूर्व?? तर्कहीन बातें बता, हमको समझे मूर्ख।। हो जा कहा तो हो गया, पर कैसे बतलाय? क्योंकि पहिले था नहीं, कुछ भी खुदा सिवाय।। बिना तर्क की बात को, कैसे माना जाय?? तौबा से ईश्वर मिले, और छूटते पाप। इसी सोच की वजह से, बहुत बड़े अपराध।। ईश्वर वैदक है नहीं, यह सच लीजै मान। सच होता तो बोलिए, क्यों रोगी भगवान?? जड़ पृथ्वी, आकाश है, सुने न कोई बात। क्या ईश्वर अल्पज्ञ था, उसे नहीं था ज्ञात?? बही लिखे वह कर्म की, क्या है साहूकार? रोग भूल का क्या उसे, इस पर करें विचार?? आयु पूर्व हजार थी, अब क्यों है सौ साल? व्यर्थ किताबें धार्मिक, मेरा ऐसा ख्याल।। सच सच खुदा बताइये, क्यों जनमा शैतान? तेरी इच्छा के विरुध, क्यों बहकाया इंसान?? बात न माने आपकी, नहीं था तुमको ज्ञात। तुमने उस शैतान को, क्यों न किया समाप्त?? मुर्दे जीवित थे किये, अब क्यों न कर पाय? मुर्दे जीवित जो किये, पुनर्जन्म कहलाय।। कहीं कहे धीरे कहो, कहते कहीं पुकार। यकीं आपकी बात पर, करूँ मैं कौन प्रकार?? अपने नियम को तोड़ दे, मरे मैं डाले जान। लेय परीक्षा कर्म की, कैसा तूँ भगवान?? हमें चिताता है खुदा, काफिर देय डिगाय। कैसे ये बतला खुदा, तूँ सर्वज्ञ कहाय?? बिना दूत के क्या खुदा, हमें न देता ज्ञान? सर्वशक्ति, सर्वज्ञ वह, मैं कैसे लूँ मान?? बिना पुकारे न सुने, मैं लूँ बहरा मान। मन का जाने हाल न, कैसा तूँ भगवान?? व्यापक हो सकता नहीं, जो है आँख दिखाय। वह जादूगर मानिये, चमत्कार दिखलाय।। पहुँचाया इक देश में ईश्वर ने पैगाम। ईश्वर मानव की कृति लगता है इल्जाम।।

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  23. Brother I am Hindu... One of my muslim friend gave me quran. i started reading i found many problems.
    The first thing it scares you.
    Second thing its sexism.. it says marry orphan girls... it does not say about boys..

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  24. इस्लाम को आंतकवादी बोलते हो। जापान मे तो अमेरिका ने परमाणु बम गिराया लाखो बेगुनाह मारे गये तो क्या अमेरिका आंतकवादी नही है। प्रथम विश्व युध्द मे करोडो लोग मारे गये इनको मारने मे भी कोई मुस्लिम नही था। तो क्या अब भी मुस्लिम आंतकवादी है। दूसरे विश्व युध्द मे भी लाखो करोडो निर्दोषो की जान गयी इनको मारने मे भी कोई मुस्लिम नही था। तो क्या मुस्लिम अब भी आंतकवादी हुए अगर नही तो फिर तुम इस्लाम को आंतकवादी बोलते कैसे हो। बेशक इस्लाम शान्ति का मज़हब है।और हाॅ कुछ हदीस ज़ईफ होती है।ज़ईफ हदीस उनको कहते है जो ईसाइ और यहूदियो ने गढी है। जैसे मुहम्मद साहब ने 9 साल की लडकी से निकाह किया ये ज़ईफ हदीस है। आयशा की उम्र 19 साल थी। ये उलमाओ ने साबित कर दिया है। क्योकि आयशा की बडी बहन आसमा आयशा से 10 साल बडी थी और आसमा का इंतकाल 100 वर्ष की आयु मे 73 हिज़री को हुआ। 100 मे से 73 घटाओ तो 27 साल हुए।आसमा से आयशा 10 साल छोटी थी तो 27-10=17 साल की हुई आयशा और आप सल्ललाहु अलैही वसल्लम ने आयशा से 2 हिज़री को निकाह किया।अब 17+2=19 साल हुए। इस तरह शादी के वक्त आयशा की उम्र 19 आप सल्ललाहु अलैही वसल्लम की 40 साल थी।हिन्दुओ का इतिहास द्रोपती ने 5 पांडवो से शादी की तो क्या ये गलत नही है हम मुसलमान तो 4 औरते से शादी कर सकते है ऐसी औरते जो विधवा हो बेसहारा हो। लेकिन क्या द्रोपती सेक्स की भूखी थी। और शिव की पत्नी पार्वती ने गणेश को जन्म दिया शिव की पीछे। पार्वती ने फिर किस के साथ सेक्स किया ।इसलिए शिव ने उस लडके की गर्दन काट दी क्या भगवान हत्या करता है ।श्री कृष्ण गोपियो को नहाते हुए क्यो देखता था और उनके कपडे चुराता था जबकि कृष्ण तो भगवान था क्या भगवान ऐसा गंदा काम कर सकता है । महाभारत मे लिखा है कृष्ण की 16108 बीविया थी तो फिर हम मुस्लिमो को एक से अधिक शादी करने पर बुरा कहा जाता । महाभारत युध्द मे जब अर्जुन हथियार डाल देता तो क्यो कृष्ण ये कहते है ऐ अर्जुन क्या तुम नपुंसक हो गये हो लडो अगर तुम लडते लडते मरे तो स्वर्ग को जाओगे और अगर जीत गये तो दुनिया का सुख मिलेगा। तो फिर हम मुस्लिमो को क्यो बुरा कहा जाता है हम जिहाद बुराई के खिलाफ लडते है अत्यचारियो और आक्रमणकारियो के विरूध वो अलग बात है कुछ लोग जिहाद के नाम पर बेगुनाहो को मारते है और जो ऐसा करते है वे ना मुस्लिम है और ना ही इन्सान जानवर है। राम और कृष्ण के तो मा बाप थे क्या कोई इन्सान भगवान को जन्म दे सकता है। वेद मे तो लिखा है ईश्वर अजन्मा है और सीता की बात करू तो राम तो भगवान थे क्या उनमे इतनी भी शक्ति नही थी कि वे सीता के अपहरण को रोक सके। राम जब भगवान थे तो रावण की नाभि मे अमृत है ये उनको पहले से ही क्यो नही पता था रावण के भाई ने बताया तब पता चला। क्या तुम्हारे भगवान राम को कुछ पता ही नही कैसा भगवान है ये। और इन्द्र देवता ने साधु का वेश धारण कर अपनी पुत्रवधु का बलात्कार किया फिर भी आप देवता क्यो मानते हो। खुजराहो के मन्दिर मे सेक्सी मानव मूर्तिया है क्या मन्दिर मे सेक्स की शिक्षा दी जाती है मन्दिरो मे नाच गाना डीजे आम है क्या ईश्वर की इबादत की जगह गाने हराम नही है ।राम ने हिरण का शिकार क्यो किया बहुत से हिन्दु कहते है हिरण मे राक्षस था तो क्या आपके राम भगवान मे हिरण और राक्षस को अलग करने की क्षमता नही थी ये कैसा भगवान है।हमे कहते हो जीव हत्या पाप है मै भी मानता हू कुत्ते के बेवजह मारना पाप है । कीडी मकोडो को मारना पाप है पक्षियो को मारना पाप है।

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  25. और राम या हनुमान ने राम सेतु पुल बनाया था सीता को बचा के लाने के लीए । जब भगवान थे तो पुल बनाने की क्या जरुरत थी उड की नही जा सकते थे। ये एक किस्म की चूतियापंती है और हिन्दु क्या बोलते है कि सारे भगवान मनुष्य के रुप मे थे इसलिए उड के जाने की ताकत नही थी। ये हिन्दु अपनी ही चट करते है और अपनी ही पट। जब मनुष्य के रुप मे भगवान थे। इसका मतलब ये हुआ वे मनुष्य ही भगवान थे । और भगवान उसे कहते है जो कुछ भी कर सकते है तो फिर वे मनुष्य उड क्यो नही सकते थे क्योकि आप लोग तो उनको एक तरीके से भगवान ही मानते हैऔर ब्रहम्मा ने अपनी पुत्री से सेक्स किया था इसलिए हिन्दु ब्रहम्मा की पूजा नही करते है। ब्रहम्मा भी तो आपके भगवान थे भगवान बल्तकार करता है क्या। ये सब आपकी किताबो मे लिखा है। और राम ने अपनी पत्नी सीता की व्रजिन की परीक्षा लेने के लिए घर से बाहर निकाला था। तो क्या औरत को यूही कही भी धक्के दिये जा सकते है। कहने को राम भगवान थे औरत की इज्जत आती नही थी। हमे कहते हो मांस क्यो खाते हो लेकिन ऐसे जानवर जिनका कुरान मे खाना का जिक्र है खा सकते है क्योकि मुर्गे बकरे नही खाऐगे तो इनकी जनसख्या इतनी हो जायेगी बाढ आ जायेगी इन जानवरो की। सारा जंगल का चारा ये खा जाया करेगे फिर इन्सान के लिए क्या बचेगा। हर घर मे बकरे होगे। बताओ अगर हर घर मे भैंसे मुर्गे होगे तो दुनिया कैसे चल पाऐगी। आए दिन सिर्फ हिन्दुस्तान मे लाखो मुर्गे और हजारो कटडे काटे जाते है । 70% लोग मांस खाकर पेट भरते है । सब को शाकाहारी भोजन दिया जाये तो महॅगाई कितनी हो जाएगी। समुद्री तट पर 90% लोग मछली खाकर पेट भरते है। समझ मे आया कुछ शाकाहारी भोजन खाने वालो मांस को गलत कहने वाले हिन्दुओ अक्ल का इस्तमाल करो ।खैर हिन्दु धर्म मे शिव भगवान ही नशा करते है तो उसके मानने वाले भी शराबी हुए इसलिए हिन्दुओ मे शराब आम है ।डाक कावड मे ऊधम मचाते है ना जाने कितनो की मौत होती है रास्ते मे कोई मुसाफिर आये तो गाली देते है । जितने त्योहार है हिन्दुओ के सब बकवास। होली को देखलो कहते है भाईचारे का त्योहार है। पर शराब पिलाकर एक दुसरे से दुश्मनी निकाली जाती है।होली से अगले दिन अखबार कम से कम 100 लोगो के मरने की पुष्टि करता है ।अब दीपावली को देखलो कितना प्रदुषण बुड्डे बीमार बुजुर्गो की मोत होती है। पटाखो के प्रदुषण से नयी नयी बीमारिया ऊतपन होती है। गणेशचतुर्थी के दिन पलास्टर ऑफ पेरिस नामक जहरीले मिट्टी से बनी करोडो मूर्तिया गंगा नदियो मे बह दी जाती है। पानी दूषित हो जाता है साथ ही साथ करोडो मछलिया मरती है तब कहा चली जाती है इनकी अक्ल जीव हत्या तो पाप है।

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  26. हम मुस्लिमो को बोलते है चचेरी मुमेरी फुफेरी मुसेरी बहन से शादी कर लेते हो। इन चूतियाओ से पूछो बहन की परिभाषा क्या होती है मै बताता हू साइंस के अनुसार एक योनि से निकले इन्सान ही भाई बहन हो सकते है और कोई नही। तुम भाई बहन के चक्कर मे रह जाओ इसलिए हिन्दु लडको की शादिया भी नही होती अक्सर । हमारे गाव मे 300 हिन्दु लडके रण्डवे है। शादी नही होती उनकी गोत जात पात ऊॅच नीच की वजह से फिर उनका सेक्स का मन करता है वे फिर लडकियो महिलाओ की साथ बलात्कार करते है ये है हिन्दु धर्म । और सबूत हिन्दुस्तान मे अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा रेप होते है । किसी मुस्लिम मुल्क का नाम दिखा दो या बता दो बता ही नही सकते। तुम्हारे हिन्दुओ लडकियो को कपडे पहनने की तमीज नही फिटिंग के कपडे छोटे कपडे जीन्स टीशर्ट आदि पहननती है ।भाई बाप के सामने भी शर्म नही आती तुमको ऐसे कपडो मे थू ऐसे कपडो मे लडकी को देखकर तो सभी इन्सानो की ऑटोमेटिकली नीयत खराब हो जाती है इसलिए हिन्दु और अंग्रेजी लडकियो की साथ बलात्कार होते हे इसके लिए ये लडकिया खुद जिम्मेदार है।।और हिन्दु लडकियो के हाथ मे सरे आम इंटरनेट वाला मोबाइल उसमे इतनी गंदी चीजे।तुम हिन्दु अपनी लडकियो को पढाते इतने ज्यादा हो जो उसकी शादी भी ना हो सके पढी लिखी लडकी को स्वीकार कौन करता है जल्दी से। पढने का तो नाम है घरवालो के पैसे बरबाद करती है और अय्याशी करती है। इन चूतियाओ से पूछो लडकी इतना ज्यादा पढकर क्या करेगी। मर्द उनके जनखे है जो औरत से कमवाऐगे और खुद बैठकर खाऐगे।सही कहू तो मर्दो की नौकरिया खराब करती है जहा मर्द 20 हजार रूपये महीने की मांग करे वहा लडकिया 2 हजार मे ही तैय्यार हो जाती है। सही कहू बेरोजगारी लडकियो को नौकरी देनी की वजह से है।
    और सालो तुम्हारा धार्मिक पहनावा क्या है साडी। जिसमे औरत का आधा पेट दिखता है। पेट छुपाने की चीज है या सबको दिखाने की बताओ । औरत की ईज्जत से खिलवाड खुद करते हो । और मर्दो क धार्मिक पहनावा क्या है धोती। जरा से हवा चलती है तो धोती एकदम उडती है। सारी शर्मगाह दिखाई देती है। शर्म नही आती तुम हिन्दुओ को। क्या ये तुम हिन्दुओ की असलियत नही है। और तुम्हारे सभी भगवान भी धोती के अलावा कुछ नही पहनते थे। बाकी सारा शरीर खुला रहता है
    ये कैसे भगवान है जिन्हे कपडे पहनने की भी तमीज नही है।

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  27. हर धर्म की किताब मे लिखा हुआ है झूठ बोलना पाप है फिर भी तुम हिन्दु अपनी तरफ से हदीसे कुरआन की आयते सब झूठ क्यो लिखते है। आयत नम्बर हदीस नम्बर सब अपनी तरफ से झूठ लिख देते हो। शर्म नही आती तुम्हे। कयामत के दिन जब इंसाफ होगा तब तुम्हे झूठा इल्जाम लगाने का पता चल जायेगा । हद होती है हर चीज की। आपने काबे पर भी इल्जाम लगा दिया। वो अल्लाह का घर है। वहा पर नमाज पडी जाती है लिंग की पूजा नही होती। और क्या कहते हो तुम हमे काबे की सच्चाई सामने क्यो नही लाते हो। यूटयूब पर हजारो विडियो पडी हुयी है देख लो कोई लिंग विंग नही है वहा। बस जन्नत का एक गोल पत्थर है और हर पत्थर का मतलब लिंग नही होता। बाईचान्स मान लो वहा शिव लिंग है।तो क्या आपके शिव लिंग मे इतनी भी ताकत नही है जो वहा से आजाद हो सके। तुम्हारी गंदी नजरो मे सभी मुस्लिम अच्छे नही है इसलिए सारे मुस्लिमो को शिव मार सके। आप तो कहते हो शिव ने पूरी दुनिया बनाई तो क्या एक छोटा सा काम नही कर सकते।
    इसलिए तो इन लिंग विंग पत्थरो के बूतो मे कोई ताकत नही होती। बकवास है हिन्दु धर्म।
    हिन्दु गर्व के साथ कहते है कि हमारी गीता मे लिखा है कि ईश्वर हर चीज मे मौजूद है ।सब चीजे मे है इसलिए हम पत्थरो को पूजते है और भी बहुत सारी चीजो को पूजते है etc. लेकिन मै कहूगा इनकी ये सोच बिल्कुल गलत है क्योकि अगर हर चीज मे भगवान है तो क्या गू गोबर मे भी है आपका भगवान। जबकि भगवान या खुदा तो पाक साफ है तो दुनिया की हर चीज मे कहा से हुआ भगवान। इसलिए मै आपसे कहना चाहता हू भगवान हर चीज मै नही है बल्कि हर चीज उसकी है और वो एक है इसलिए पूजा पाठ मूर्ति चित्र सब गलत है।कुरान अल्लाह की किताब है इसके बताये गये रास्ते पर चलो। सबूत भी है क्योकि कुरान की आयते पढकर हम भूत प्रेत बुरी आत्माओ राक्षसो से छुटकारा पाते है।हमारी मस्जिद मे बहुत हिन्दु आते है ईलाज करवाने के लिए । और मौलवी कुरान की आयते पढकर ही सभी को ठीक करते है । इसलिए कुरान अल्लाह की किताब है । जबकि आप वेदो मंत्रो से दसरो को नुकसान पहुचा सकते है अच्छाई नही कर सकते किसी की और सभी भगत पंडित जादू टोना टोटके के अलावा करते ही क्या है। जबकि कुरान से अच्छाई के अलावा आप किसी के साथ बुरा कर ही नही सकते। इसलिए गैर मुस्लिमो अल्लाह पर ईमान लाओ

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