शुक्रवार, 19 अप्रैल 2013

नारा ए बलात्कार !अल्लाहु अकबर !!


विश्व के जितने भी प्रमुख धर्म हैं , उनके धार्मिक ग्रंथों , में दिए गए आदेशों के अनुसार ,और उन धर्मों की मान्यताओं में दो ऐसी समानताएं पाई जाती हैं .जिनके आधार पर कहा जा सकता है कि यह धर्म सच्चे हैं .पहली बात यह है कि यह धर्म अपने जिस भी महापुरुष , अवतार , या नबी को अपना आदर्श मानते हैं ,उसकेद्वारा किये गए सभी सभी अच्छे कामों का अनुसरण करते हैं . और दूसरी समानता यह है कि इन सभी धर्मों के अनुयायी किसी भी शुभ कार्य का प्रारंभ करते समय ईश्वर का नाम जरुर लेते हैं . या ईश्वर की जयकार करते हैं .
और इन्हीं दो बातों के आधार पर ही कहा जा सकता है कि इस्लाम धर्म नहीं है . बल्कि यदि कोई इस्लाम को सच्चा धर्म कहता , या मानता है . तो उस से बड़ा मूर्ख कोई दूसरा नहीं होगा , क्योंकि मुसलमान चुन चुन कर मुहम्मद सभी दुर्गुणों का अनुसरण करते हैं . इसी तरह मुसलमान हर बुरा काम लेते समय अल्लाह का नाम लेते हैं .यह तो सब जानते हैं कि जानवरों के गलों पर छुरी फिराते समय मुसलमान अल्लाह का नाम लेते है . लोग यह भी जानते हैं कि जिहादी , क़त्ल करते समय , बम विस्फोट करते समय ,या मुसलमान लूट करते या चोरी करते समय भी अल्लाह और रसूल का नाम लेते है . लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि मुसलमान सार्वजनिक रूप से सामूहिक बलात्कार करते समय भी" अल्लाहु अकबर " का नारा लगाते हैं .क्योंकि वह मुहम्मद को अपना आदर्श मानते हैं .चूंकि कुरान की सूरतें (अध्याय ) का संकलन घटनाक्रम (chronological Order ) के अनुसार नहीं किया गया है .इसलिए हदीसों से पता चलता है कि मुहम्मद साहब ने कौनसी आयत किस समय , किस परिथिति में , और किसको संबोधित कर के कही थी . और यह भी पता चलता है कि मुहम्मद साहब का असली उद्देश्य क्या था .
इस लेख में प्रमाणों के साथ यही सिद्ध किया जा रहा है कि इस्लाम सच्चा धर्म तो छोडिये , धर्म कहने के योग्य भी नहीं है .इसलिए इस लेख को ध्यान से पढ़िए ,
1-अल्लाह से प्रेम की शर्त 
मुहम्मद साहब की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह को कुछ भी करते थे वही काम अपने लोगों से करने को कहते थे . और उनका अनुसरण करने को ही अल्लाह से प्रेम का प्रमाण मान लिया जाता था , जैसा कि कुरान में लिखा है ,
"यदि तुम अल्लाह से प्रेम करना चाहते हो तो ,मेरा अनुसरण करो .ऐसा करने से अल्लाह भी तुम से प्रेम करेगा , और तुम्हारे सभी गुनाह माफ़ कर देगा "
सूरा -आले इमरान 3 :3 1 

2-वासना पिशाच 
मुस्लिम विद्वान् अपने रसूल मुहम्मद को दूसरों के नबियों , अवतारों और महापुरुषों से बड़ा साबित करने में लगे रहते हैं , यहाँ तक सेक्स के मामले में भी मुसम्मद साहब को " सुपर मेन ऑफ़ सेक्स-superman of Sex " तक कह देते हैं . लेकिन यूरोप के विद्वान् मुहम्मद साहब की अदम्य और असीमित वासना के कारण उनको "सेक्स डेमोन\Sex Demon " यानी "वासना पिशाच "कहते हैं . यह बात इन हदीसों से प्रमाणित होती है
"अनस बिन मलिक ने बताया कि रसूल बारी बारी से अपनी औरतों के साथ लगातार सम्भोग करने में लगे रहते थे .सिर्फ नमाज के लिए घर से निकलते थे . उनको अल्लाह तीस या चालीस मर्दों के बराबर सम्भोग शक्ति प्रदान की थी"
सही बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 6 
यही बात दूसरी हदीस में भी कही गयी है ,
"अनस बिन मलिक ने कहा कि रसूल लगातार रात दिन अपनी औरतों के के साथ सम्भोग करते रहते थे . जब कटदा ने अनस से पूछा कि क्या रसूल में इतनी शक्ति है . तो अनस ने कहा कि रसूल में 30 मर्दों के बराबर सम्भोग शक्ति है ,और उनकी 9 नहीं 11 औरतें थीं ."

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ قَتَادَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَدُورُ عَلَى نِسَائِهِ فِي السَّاعَةِ الْوَاحِدَةِ مِنَ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ، وَهُنَّ إِحْدَى عَشْرَةَ‏.‏ قَالَ قُلْتُ لأَنَسٍ أَوَكَانَ يُطِيقُهُ قَالَ كُنَّا نَتَحَدَّثُ أَنَّهُ أُعْطِيَ قُوَّةَ ثَلاَثِينَ‏.‏ 
وَقَالَ سَعِيدٌ عَنْ قَتَادَةَ إِنَّ أَنَسًا حَدَّثَهُمْ تِسْعُ نِسْوَةٍ‏.‏

Bukhari, Volume 1, Book 5, Number 268
बुखारी की इस हदीस की व्याख्या करते हुए सुन्नी विद्वान् "इमाम इब्ने हंजर सकलानी " ने अपनी किताब " फतह अल बारी - فتح الباري‎) " में बताया है कि जब रसूल जिन्दा थे तो रसूल में 4 0 जन्नती व्यक्तियों के बराबर सम्भोग शक्ति थी . और जन्नत के एक व्यक्ति की सम्भोग शक्ति दुनिया के एक हजार व्यक्तिओं के बराबर होती है , अर्थात रसूल में 40 हजार मर्दों के बराबर सम्भोग करने की शक्ति थी , इसी लिए वह हमेशा सम्भोग करने की इच्छा रखते थे . इस बात की पुष्टि इस्लाम के प्रचारक "शेख मुहम्मद मिसरी " ने भी की है .देखिये विडिओ
الرسول ينكح 6 نسوان بساعة واحدة

http://www.youtube.com/watch?v=Vgir-rMRY2g
यही कारण था कि मुहम्मद साहब के साथी भी मुहम्मद साहब की नक़ल करके रात दिन औरतों के साथ सम्भोग में लगे रहते थे . और स्वाभाविक है कि लगातार सहवास करने से मुहमद साहब और उनके साथियों की औरतें . शिथिल , थुलथुली हो गयी होंगी और उनके स्तन लटक गए होंगे .इस लिए मुहम्मद साहब अपने साथियों को ऐसी अरतों का लालच देते रहते थे , जिनके स्तन कठोर और उभरे हुए हों ,कुरान में यही लालच दिया गया है
3-कठोर स्तन वाली स्त्रियाँ
मुहम्मद साहब के दिल में जो बात होती थी , वह कुरान में जरुर शामिल कर देते थे . ताकि वह बात अल्लाह का वचन समझा जाये .मुहम्मद साहब शिथिल स्तनोंवाली अपनी औरतों से ऊब गए होंगे ,और उनको कठोर स्तन वाली औरतों की तलाश थी . इसलिए कुरान में यह आयत जोड़ दी . ताकि जिहादी लालच में आ जाएँ , कुरान में कहा है .
"बेशक डर रखने वालों के लिए फायदा है ,बाग़ और अंगूर ,और नवयुवतियां समान आयु वाली "सूरा अन नबा 7 8 :3 1 से 3 3 तक 
नोट-इस आयत में अरबी में नव युवतियों के लिए अरबी में "कवायिबكَواعِبَ-- "शब्द आया है . लेकिन मुल्लों   नेइसका   अर्थ "शानदार -splendid"कर दिया है .जबकि इस शब्द का असली अर्थ "गोल स्तन -This means round breasts " होता है .तात्पर्य यह है कि ईमान वालों को अल्लाह ऐसी औरतें देगा जिनके स्तन गोल , उभरे और कठोर होंगे .और जिनकी आयु ईमान वाले मुसलमानों की आयु के बराबर होगी ( This means round breasts. They meant by this that the breasts of these girls will be fully rounded and not sagging, because they will be virgins, equal in age. This means that they will only have one age. The explanation of this has already been mentioned in Surat Al-Waqi`ah. 56:35 -Concerning Allah's statement,)
  . यह बात सूरा -वाकिया से स्पष्ट हो जाती है , जिसमे कहा है ,
"हमने उन स्त्रियों के विशेष उभार को उठान पर उठाया (raised है "सूरा -अल वाकिया 56:35

4-हुनैन का बलात्कार कांड 
मक्का और तायफ के बीच में एक घाटी थी , किसमे " हवाजीन "नामका एक बद्दू कबीला रहता था .जो कुरैश का ही हिस्सा था .इस कबीले की औरतें भी मेहनती होने के कारण स्वस्थ थी . और उन औरतों के स्तन उभरे हुए थे .मुहम्मद ने उन पर हमला करने के लिए बहाना निकाला कि यह लोग काफ़िर थे . लेकिन मुहम्मद और उनके अय्याश साथियों की नजर हवाजिन कबीले की औरतों पर थी .इसी लिए रात में ही हमला कर दिया .चूँकि यह कांड हुनैन नामकी सकरी घाटी में हुआ था ,.जिस से बहार निकलना कठिन था ,इसलिए बददु लोग हार गए
 इतिहासकार इब्ने इशाक के अनुसार इस्लाम में हुनैन की जंग का बड़ा ही महत्त्वपूर्ण स्थान है , क्योंकि इस लड़ाई के बाद ही मुसलमानों को युद्ध में या कहीं से भी पकड़ी गयी औरतों के साथ सम्भोग करने का अधिकार प्राप्त हो गया .हालांकि मुसलमान हुनैन की इस लड़ाई को युद्ध कहते है . लेकिन इसे युद्ध कहना ठीक नहीं होगा , क्योंकि एक तरफ मुहम्मद के 12 हजार प्रशिक्षित हथियारधारी लुटेरे थे तो दूसरी तरफ 6 हजार साधारण बद्दू थे ,जिनमे औरतें , बूढ़े ,बीमार और बच्चे भी थे .यह घटना इस्लामी महीने शव्वाल की 10 तारीख हिजरी सन 8 में हुई थी ,यानी ईसवी सन 630 की बात है .इब्ने इशक के अनुसार इस युद्ध में कोई धन नहीं मिला था लेकिन 6000 औरतें पकड़ी गयी थी .मुहम्मद की तरफ से जिन लोगों ने इस लड़ाई में हिस्सा लिया था ,उनमे 13 साल से लेकर 54 साल के लोग थे . और कई ऐसे थे जो रिश्ते में बाप बेटा ,चाचा भतीजे थे .मक्का और तायफ के बीच में एक घाटी थी , किसमे " हवाजीन "नामका एक बद्दू कबीला रहता था .जो कुरैश का ही हिस्सा था .इस कबीले की औरतें भी मेहनती होने के कारण स्वस्थ थी . और उन औरतों के स्तन उभरे हुए थे .मुहम्मद ने उन पर हमला करने के लिए बहाना निकाला कि यह लोग काफ़िर थे . लेकिन मुहम्मद और उनके अय्याश साथियों की नजर हवाजिन कबीले की औरतों पर थी .इसी लिए रात में ही हमला कर दिया .इस घटना का विवरण इन हदीसों में मिलता है , जिसमे मुहम्मद और उनके साथियों किस तरह इंसानियत को कलंकित किया था .
5-पति के सामने बलात्कार 
"सईद अल खुदरी ने कहा कि जब रसूल ने हुनैन के औतास कबीले पर हमला करके वहां के लोगों को पराजित करके उनकी औरतों को बंधक बना लिया . तब रसूल ने अपने साथियों को आदेश दिया कि तुम इस युद्ध में पकड़ी गयी औरतों के साथ बलात्कार करो , लेकिन कुछ लोग उन औरतों के पतियों के सामने ही ऐसा करने से झिझक रहे थे .तब रसूल ने उसी समय सूरा -निसा 4 :2 4 की आयत सुना दी , जिसमे कहा है कि तुम पकड़ी गयी औरतों से तभी साथ सम्भोग नहीं कर सकते हो , यदि वह मासिक धर्म से (रजस्वला "हो . 
अबू दाऊद किताब 2 हदीस 215 0 

5-समआयु की औरतें 
मुहम्मद साहब बहुत होश्यार थे , उन्हों कुरान में पहले ही लिखा दिया था कि ईमान वालों को पुरस्कार के रूप में समान आयु वाली और कठोर स्तन वाली औरतें मिलेंगे , और जब हुनैन के हमले में मुसलमानों ने छह हजार औरतें पकड़ लीं ,तो छांट छांट कर अपनी आयु की औरतों के साथ बलात्कार किया था . जो इस हदीस से पता चलता है ,
"सईदुल खुदरी ने कहा कि जब रसूल के सैनिकों ने हुनैन में औताफ के लोगों पर हमला करके हरा दिया तो उनकी औरतों को बंधक बना लिया , फिर अपने सैनिकों को आदेश दिया कि वह पकड़ी गयी औरतों में से अपने बराबर की आयु वाली औरतों के साथ सम्भोग कर सकते हैं , सिवाय उन औरतों के जिनकी इद्दत पूरी नहीं हो (यानी मासिक धर्म पूरा नहीं हो ) .रसूल ने उसी समय सूरा निसा 4 :24 की यह आयत लोगों को सुनायी थी ."
"وَالْمُحْصَنَاتُ مِنَ النِّسَاءِ إِلاَّ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ‏}‏ أَىْ فَهُنَّ لَكُمْ حَلاَلٌ إِذَا انْقَضَتْ عِدَّتُهُنَّ ‏.‏  "
सही मुस्लिम - किताब 8 हदीस 3432

कुरान की इस आयत में जो लिखा था वही मुसलमानों ने किया था , कुरान में लिखा है ,
"हमने प्रेयसी सम आयु वाली पसंद की " सूरा -अल वाकिया56:37
मुसलमान हुनैन की लड़ाई का कारण कुछ भी बताते रहें , लेकिन वास्तव में औरतें पकड उनसे सामूहिक बलात्कार की मुहम्मद की एक कुत्सित योजना थी .अब तक आपने पढ़ा है ,मुहम्मद की वासना राक्षसी थी , और लगातार सम्भोग करते रहने से उसकी औरतों के स्तन शिथिल हो गए होंगे ,इसलिए मुहम्मद ने कुरान में भी अपने साथियों को कठोर स्तन वाली औरतें देने का लालच दिया था .चूँकि हवाजिन कबिले की औरतें मेहनती थी . और इसीलिए उनके स्तन उभरे और कठोर थे . जो मुहमद की पसंद थी .आपने यह भी पढ़ा कि मुहम्मद साहब जो भी कुकर्म करते थे उसे जायज ठहराने के लिए कुरान कोई न कोई आयत रच देते थे , ताकि आगे भी मुस्लमान ऐसा ही करते रहें .
6--रसूल का उत्तम आदर्श 
मुहम्मद साहब ने अपने इसी चरित्र को खुद ही आदर्श घोषित करते हुए कुरान में भी लिखवा दिया
" निश्चय ही तुम लोगों के लिए अल्लाह के रसूल का चरित्र उत्तम आदर्श है " सूरा -अहजाब 33:21
आज भी मुसलमान जितने भी बलात्कार करते है , सब मुहम्मद साहब के इसी आदर्श चरित्र का पालन करते हैं .और हर गैर मुस्लिम लड़की या महिला से बलात्कार को अल्लाह की जीत समझते हैं ,ऐसी ही एक सत्य घटना दी जा रही है ,
7-अल्लाह के नाम से बलात्कार 

मुहम्मद साहब को अपना आदर्श मानकर और उनका अनुसरण करते हुए कुरान की मानवविरोधी शिक्षा पर अमल करने से मुसलमान इतने अपराधी ,क्रूर और बलात्कारी हो गए कि बलात्कार जैसे जघन्य कुकर्म को भी अल्लाह के प्रति अपना प्रेम समझने लगे हैं . इसी कारण बलात्कार की घटनाएँ बढ़ रही है .इस बात को सिद्ध करने के लिए मिस्र देश की यह एक ही सच्ची घटना काफी है ,
मिस्र को इजिप्ट ( Egypt) भी कहा जाता है . यह इस्लामी देश है , लेकिन यहाँ कुछ ऐसे ईसाई भी रहते हैं ,जो इस्लाम के पूर्व से ही यहाँ रहते आये हैं .इनको " कोप्टिक ईसाई - Coptic Christian "कहा जाता है . अरबी में इनको" नसारा " कहते हैं .मुस्लमान अक्सर इनकी लड़कियों का अपहरण करके बलात्कार करते रहते है .
यह सन 2009 की घटना है . कुछ मुस्लिम युवकों ने एक ईसाई लड़की को बीच रस्ते से पकड़ लिया , और सबके सामने उसकी जींस उतार कर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया .जब लड़की ने भागने का प्रयत्न किया तो दर्शक मुसलमान चिल्लाये पकड़ो , नसारा को पकड़ो .और जब उस लाचार लड़की से बलात्कार हो रहा था , तो वहां कुछ मुल्ले भी मौजूद थे , जो कलमा पढ़ रहे थे " ला इलाहा इल्लालाह , मुहम्मदुर रसूल अल्लाह "यही नहीं लड़की दर्द के कारण जितनी जोर से चिल्लाती थी . मुसलमान उतनी ही जोर से "अल्लाहु अकबर " का नारा लगाते थे . यही नहीं इन दुष्ट मुसलमानों में इस घटना का विडियो भी बना लिया था . जो किसी तरह से 11/4/2013 को लोगों के सामने आ सका है .यह विडियो इस साईट में उपलब्ध है ,
Video:Christian Girls Gang Raped to Screams of “Allahu Akbar” in Egypt

http://www.raymondibrahim.com/from-the-arab-world/video-christian-girls-gang-raped-to-screams-of-allahu-akbar-in-egypt/

इसके बावजूद मुस्लिम प्रचारक बड़ी बेशर्मी से मुहम्मद की तारीफ में कहते हैं

"हे मुहम्मद हमने तुम्हें भेज कर सारे संसार पर मेहरबानी की है 'सूरा -अल अम्बिया 21:107

इन सबूतों को देखने के बाद किसी को भी शंका नहीं होना चाहिए कि मुहम्मद साहब को अपना आदर्श मानने से ही बलात्कार की घटनाएँ बढ़ रही हैं .और जो सिद्धांत अल्लाह के नाम से बलात्कार करने की शिक्षा देता है , वह धर्म कहने के योग्य नहीं ,बल्कि धिक्कार के योग्य है .सोचिये यदि अल्लाह ने नूह की तरह मुहम्मद साहब को नौ सौ साल की आयु दे दी होती ,तो मुहम्मद साहब कितने बलात्कार करते ?

http://www.raymondibrahim.com/?s=raped&submit.x=12&submit.y=5

32 टिप्‍पणियां:

  1. 2009 की घटना का विडियो भी !

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  2. Video is given in this link

    http://www.raymondibrahim.com/from-the-arab-world/video-christian-girls-gang-raped-to-screams-of-allahu-akbar-in-egypt/

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  3. Volume 7, Book 62, Number 6 :
    Narrated by Anas

    The Prophet I used to go round (have sexual relations with) all his wives in one night, and he had nine wives.




    bhai isme biwiyon ke baare me kaha gaya hai aur biwiyon saman haq dena ek shauhar par farz hai.

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  4. Volume 1, Book 5, Number 268 :
    Narrated by Qatada

    Anas bin Malik said, "The Prophet used to visit all his wives in a round, during the day and night and they were eleven in number." I asked Anas, "Had the Prophet the strength for it?" Anas replied, "We used to say that the Prophet was given the strength of thirty (men)." And Sa'id said on the authority of Qatada that Anas had told him about nine wives only (not eleven).

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    1. tum logo ki ammi ki bhosda main haathi ka LUND.. saale besarm... Chup beth.. Bhok mat yaha pe..

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    2. are mere bhai sharam tum ko aani chahiye tum log sirf aurat aur prperty ke liye lade ho ramayan aur mahabharat kya hai sirf sex aur property ki ladai.

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  5. In Kiskind Kandam, Rama explains to Lakshmana of his sexual experience with Sita. According to Ramayana, the Aryans (Brahmins) used to drink liquor (nine different kinds), eat meat, marry many wives and prostitution was an accepted way of life amongst the priests and gods.

    Ramayana also recounts the “story of King Dasharatha who, in order to have a baby son, made a big sacrifice (yaham) of sheep, cattle, horses, birds and snakes. He then delivered his three wives Kaushaliya, Sumatirai and Kaikeyi to three priests. These holy men, having fully satisfied their carnal desire, returned the ladies to the King. By this means, the King was able to have three sons – Ram, Lakshman and Bharat (Bala Kandam, Chapter 14. For more details on yaham, refer to the book “Gnana Surian”, published by Kudi Arasu Press).

    The Ramayan tells us much about the unlawful relationship of incest but we do not feel it appropriate or decent for us to go into details. (Please refer to Aranya Kandam, chapter 45, verses 122, 123, 124 & 125).

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    1. @ mythbuster

      अबे नादान
      आर्य और ब्राह्मण एक नहि है |
      पहले अपनी नोलेज सुधार के आ भड़वे |

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  6. Manu.IX.94 "A man, aged thirty years, shall marry a maiden of twelve who pleases him, or a man of twenty-four a girl of eight years of age; if (the performance of) his duties would otherwise be impeded, he must marry sooner."

    In the Dasarathajataka Sita is represented as the sister as well as the wife of Rama , son of Dasaratha of the Ikshvaku line." [ Chandra, p.156 ] " In the Anabattha Sutta and the Mahavastu Avadana we are told that the Ikshvaku princes, who were banished by their father and took shelter on the slopes of the Himalayas, and from whom the Sakyas traced their descent, married their own sisters in order to maintain the purity of their line." -- [ Chandra, p.155 ]
    Manu Smrti.VIII.371 "If a wife, proud of the greatness of her relatives or (her own) excellence, violates the duty which she owes to her lord, the king shall cause her to be devoured by dogs in a place frequented by many."

    Manu Smrti.VIII.372: " Let him cause the male offender to be burnt on a red-hot iron bed; they shall put logs under it, (until) the sinner is burned (to death)."

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    1. अबे मादरचोद...
      अपने आप की बनाई हुई रामायण सूना रहा है भडवे दल्ले |

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  7. In the Brhadārankyaka Upanishad scripture(advocating rape):Surely, a woman who has changed her clothes at the end of her menstrual period is the most auspicious of women. When she has changed her clothes at the end of her menstrual period, therefore, one should approach that splendid woman and invite her to have sex. Should she refuse to consent, he should bribe her. If she still refuses, he should beat her with a stick or with his fists and overpower her, saying: “I take away the splendor from you with my virility and splendor (6.4.9,21).
    In the Purunas(Hindu Gods Rape Gautama's wife)Formerly the gods lusted for Gautama's wife and raped her, for their wits were destroyed by lust. Then they were terrified and went to the sage Durvasas [an incarnation of Siva], who said, 'I will remove all your defilements with the Satarudriya Mantra [an ancient Saiva prayer].' Then he gave them ashes which they smeared upon their bodies, and their sins were shaken off. -- Padma Purana 4:101:174-9.

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  8. In the Smriti(Lord Rama's mom has sex with a horse 'all night long' to cleanse sins):The prescribed victims -- snakes, birds, the horse, and aquatic animals -- were bound at the place of immolation; each was dedicated to a specific divinity as is set forth in the ritual texts. The priests then bound them all to the posts in the manner set forth in the ritual texts. Three hundred beasts in addition to Dasaratha's jewel of a horse were bound there to the sacrificial posts. Kausalya (Rama's mom) walked reverently all around the horse and then with the greatest joy cut it with three knives. Her mind unwavering in her desire for righteousness, Kausalya (Rama's mom) passed one night with the horse. The priests -- the hotr, the adhvaryu, and the udgatr -- saw to it that the second and the juniormost of the king's wives, as well as his chief queen, were united with the horse. Then the officiating priest, who was extremely adept and held his senses in check, removed the fat of the horse and cooked it in the manner prescribed in the ritual texts. At the proper time and in accordance with the ritual prescriptions, the lord of men then sniffed the fragrance of the smoking fat, thereby freeing himself from sin. Then, acting in unison, the sixteen brahman officiating priests threw the limbs of the horse into the fire, in accordance with the ritualinjunctions. In other sacrifices, the oblation is offered upon branches of the plaksa tree, but in the Horse Sacrifice alone the apportionment of the victim is made on a bed of reeds. The Horse Sacrifice is known as the Three-Day Rite; for both the kalpasutra and the brahmanas refer to the Horse Sacrifice as a rite lasting for three days. -- Ramayana 1:13:24-33.

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  9. In the Smriti(method of turning women back to virgins):"A woman who has been unchaste should worship Siva in his calm aspect, Siva who is Kama. Then she should summon a Brahmin and give herself to him, thinking, 'This is Kama who has come for the sake of sexual pleasure.' Andwhatever the Brahmin wishes, the sensuous woman should do. For thirteen months she should honour in this way any Brahmin who comes to the house for the sake of sexual pleasures, and there is no immorality in this for noble ladies or prostitutes." -- Matsya Purana 70:40-60; cf. Mahabharata III:2:23.

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  10. Bhosdi k maadar chood tum ko ye nahi pata ki kissi bhi dharam k bare galat nahi bolna nahi chahiye

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    1. तेरी बात सही है भोसड़ी के |
      किसी भी धर्म या मजहब के बारे में गलत नहीं बोलना चाहिए पर सालो तुम लोग "लव जिहाद" जैसे नीच और हलकट काम करते हो |

      नंगेपन की हद हो तुम लोग
      तुम लोग हिन्दू लड़की को पटाते हो और इसके बदले में मस्जिद और मदरसे में तुम्हे इनाम तक दिया जाता है |

      ऐसा काम क्या नोबेल अवोर्ड जितने जैसा काम है क्या !
      फिर तुम मादरचोद गालिया ही खाओगे ना |

      तुम्हारी कौम में लडकिया नहीं है क्या जो गैरमजहबी लडकियो के पीछे पीछे दौड़े चले आते हो |

      अपने मजहब की लडकियों को जी भर के चोदो और गैर मज्हबो के प्रति लव जिहाद वाली बात छोड़ दो तो गाली नहीं पड़ेगी ना ही जुते पड़ेंगे |

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  11. @ mythbuster

    अबे नादान
    आर्य और ब्राह्मण एक नहि है |
    पहले अपनी नोलेज सुधार के आ भड़वे |

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  12. Agar hamare neta udar ya saral svbhav ke nahi hote to 1947 india sare muslim pakistan mai hote or hamare desh mai dharm ke naam par dange phasaat aatanki durghatnaye na hoti .kyoki en durghatanao mai hamare muslim bhaiyon ka bahut adhik yogdaan hai.ye gaddar bharat ko muslim desh banane ke liye saam daam dand bhed jaise bhi ho sake prayash (GIHAAD) kar rahe hain.Ham eske jimmedar Mahatma ghandi ko mante jinhone hinu muslim bhai bhai ka nara diya or muslimo ko pakistan jane ki liye roka.Mahatma ghandi ji ki es galati ki ham logo bahut badi kimat pad rahi chukani padegi .kintu bachi hui galatiyaan hamare neta log muslimo ko badhava dekar kar rahe hain.Agar neta logo asi halat rahi to dekhana kishi hindi dharm sampt ho jayega or hindu (Sanaatan)dharm sirf etihaash mai rah jayega. Esliye hame apne dharm ki suraksha karni chahiye or sabhiko ekta mai hona chahiye.tabhi ham apne dharm suraksha kar sakte hain.Hame apasi dvesh bhed bhav jati-paat uoonch-neech ko bhulana chahiye tabhi ek ho sakte hain ham hindu bhai.
    Jay Hind Jay Bharat.......

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  13. दोस्तो आज कल आशा+राम का बडा विवाद छीडा हुआ हे ऊसके ऊपर ऐक लडकी के साथ योन षोष्ण (बलातकार) करने का आरोप हे हेजो ईन पाखंडीओ के लीये कोई बडी बात नही है
    दरसल ईनकी संस्कुरुती ही ईन्हे यही सीखाती है
    ईनके खुद भगवान ही ईसी तरह का तुच्छ काम करते थे
    चलीये ऊदाहरण के लीये आपको ऐक ऐसा ही तुच्छ काम करने वाले वीष्णु की कहानी बताता हु
    ऐक बार हुआ यु के शीव के ही अंश जलंन्धर के साथ सभी देवताओ की जंग छीड गई पर जलंन्धर को मारना मुश्कील था क्यु के ऊसको वरदान था के ऊसको कोई नही मार सकता
    ऊसे मारने का सीर्फ ऐक ऊपाय था के जलंन्धर की पत्नी ब्ररीन्दा का पती व्रतता को भंग करने पर ही जलंन्धर की मोत हो सकती हे यानी के ब्रीन्दा का बलातकार करना
    तो सभी देवताओ ने ये नीरण्य कीया के ये काम बलातकारी वीष्णु को सोपा जाये
    तब वीष्णु ने जलंन्धर जेसा रुप धारण करके ब्रीन्दा के पास जाकर धोखे से ऊसै संभोग (बलातकार) कीया
    और जलंन्धर को मारना संभव हुआ
    और यही नही ऐसे तो ईनके देवताओ के कई बलातकारी कीस्से हे
    वीष्णु ने त्रीुषी गौतम का रुप धारन करके अहील्या के साथ संभोग (बलातकार) कीया था
    चन्द्रमा ने अपने गुरु ब्रहस्पती की पत्नी के साथ संभोग (बलातकार) कीयाथा
    त्रुीषी परासर ने सांन्तनु की पत्नी सत्यवती से यग्य के दोरान संभोग (बलातकार) कीया था
    और अश्वमेघ यग्य के दोरान तो घोडे के साथ भी......
    तो अब आप खुद सोच लीजीये के आशाराम हो या िनत्यानंद ये खुदकी नजर मे और अपने धर्म की संस्कुरुती के हीसाब से कोई गलत काम नही कर रहे है
    ये तो सीर्फ अपनी महान वैदीक धर्म के िनयमो का पालन कर रहे है

    क्रीप्या कोई भी बेहस करने से पेहले ईस तथ्य को अपने ग्रंथो मे जांचे

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  14. ब्रहामणोँ के सर्वोच्च देवता ब्रहमा जिससे ब्रहामणोँ का जन्म भी हुआ के विषय मेँ कुछ रोचक जानकारी
    -भविष्य पुराण मेँ लिखा है कि ब्रहमा के वीर्य से 88 हजार ऋषियोँ का जन्म हुआ औरउस वीर्यका कुछ भाग एक मछली सटक गई उसके अदंर से कवि नारायण(मछेँद्रनाथ) का जन्म हुआ।
    ब्रहमाके वीर्य का कुछ अंश रेवा नदी के किनारे जा गिरा जिससे चमस नारायण उत्पन्न हुए।
    उसी वीर्य का कुछ भाग एक नागिन ने खाया जिसके अंडे से अविहोत्र नारायण(नागनाथ)का जन्म हुआ।
    पार्वती कोशादी के मंडप मेँ देखकर ब्रहमा का वीर्यपात हो गया।
    उस वीर्य को ब्रहमाने पैरोँसे चारोँ ओरपथ्वी पर गिरा दिया।उस वीर्य से 60 हजार बाल खिल्द ऋषियोँ का जन्म हुआ।
    हिमालय पर अपनी पुत्री को देखकर ब्रहमा का वीर्य धरती पर जा गिरा वीर्य का कुछ भाग एक हाथीके कान मेँ जा गिरा जिससे प्रबुद्ध नारायण का जन्म हुआ।
    कोई महामूर्ख ही इन बातोँ पर विश्वास करेगा......
    नोट: कोई भी वयकती बेहस करने से पेहले भवीषय पुराण मे ईसकी पुषठी कर ले

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  15. बिना प्रसव पांच पाण्डव ???
    आओ मित्रो आज हम जानते है कि बिना प्रसव पाण्डवो का जन्म कैसे हुआ ।।
    एक दिन पाण्डुराजा अपनी दोनो पत्नीयो कुन्ती और माद्री के साथ हिमालय पर शिकार करने जाते है तभी जंगल मे उन्हे एक हिरण ओर हिरणी दिखाइ देते है पाण्डुराजा उस हिरण को अपने बाण से घायल कर देते है लेकीन वो हिरण वास्तव मे कोइ हिरण ना हो कर करदम नामक ऋषी थे जो हिरण के रुप मे अपनी पत्नी से पेम वार्तालाप कर रहे होते है ।।
    जब पाण्डुराजा उस हिरण के पास जाते है तो ऋषी अपने असली रुप मे आकर उन्हे श्राप देते है कि जो हाल तुमने मेरा किया है तुम्हारा भी वही हाल होगा और ऋषी की मौत हो जाती है ।।
    इस हादसे के बाद पाण्डुराजा बहुत डिप्रेशन मे रहने लगते है और फिर वो निश्चय करते है कि अब वे दुनीया से सन्यास लेकर अपने बाकी का जिवन यही हिमालय पर तपस्या करते हुए बिताएंगे ।।
    पाण्डूराजा अपनी दोनो पत्नीयो को वापस जाने को कह्ते है लेकीन उनकी दोनो पत्नीया भी वन मे रहकर उनके साथ तप्सया करने का निश्चय करती है ।।
    इसतरह पाण्डुराजा अपनी दोनो पत्नीयो के साथ रहकर हिमालय के वन मे तपस्या करने मे लग जाते है लेकिन फिर भी उनका उनके मन को शांती नही मिलती है पाण्डूराहा अपनी पत्नीयो से कहते है कि हमारे इतनी तपस्या करने बाद भी हमारी कोइ संतान नही है हमारा वंश एसे ही समाप्त हो जायेगा ये सोचकर वो बहुत दुखे होते है ।।
    तभी पाण्डुराजा की पत्नी कुन्ती पाण्डुराजा से कहती है कि उसने पीछले जन्म मे दुर्वासा नाममे एक ऋषी की खुब सेवा की थी जिससे प्रसंन होकर दुर्वासा ऋषी ने कुन्ती को वरदान के रुप म ेएक मंत्र दिया था जिसका उच्चारण कर कुन्ती किसी भी देवता को बुला सक्ती है और वो देवता उसेवरदान मे एक पुत्र देंगे ।।
    कुन्ती पाण्डुराजा से कहती है कि मै मंत्रोच्चारण करती हु लेकीन आपके किस ईष्टदेव को बुलाना है ये आप बताइये ।।
    तभी कुन्ती मंत्र का उच्चारण कर यमराज को बुलाती है, यमराज प्रकट होते है और कुन्ती को युधीष्ठीर नामक पुत्र देते है ।
    फिर कुन्ती और पाण्डुराजा पवन देव को बुलाते है पवन देव प्रकट होते है और वो कुन्ती को भीमनामक पुत्र देते है ।।
    इसके बाद इन्द्रेव को बुलाते है और इन्द्रेव उन्हे अर्जुन नामक पुत्र देते है ।
    इसके बाद कुन्ती रानी मादरी को अश्वीनी कुमारो का मंत्र जाप करने को कहती है, अश्वीनी कुमार प्रकट होते है और वो उन्हे नुकुल और सहदेव नामक दो पुत्र देते है ।
    इस प्रकार बिना किसी महीला के गर्भवती हुए और बिना प्रसव के पाच पाण्ड्वो का जन्म होता है ।।
    लेकीन मित्रो इस मिथ्या पूर्ण गप्पे या कहानी को सुनने के बाद निम्नलिखीत सवाल उठते है ।।
    1:- वो ऋषी करदम हिरण के रुप मे क्यो अपनी पत्नी के साथ प्रेम वार्तालाप कर रहे थे, इन्सान बने रहने मे क्या दिक्कत थी ??? पाण्डुराजा इन्सान होते हुए भी धोखा खा गये अगर कोई शेर या जंगली जानवर उनका शिकार कर लेता तो को उसे कौन सा श्राप देते ???
    2:- और पाण्डुराजा तो सन्यास लेकर वन मे अकेले अपना जिवन बिताना चाहते थे वो तो दोनो रानीया अपनी जिद से उनके साथ वन मे रुक गयी, तो फिर सन्यास लेने के बाद संतान की चाह क्यो????
    3:- तप्स्या करने का संतान प्राप्ती से क्या संबध??? पाण्डुराजा तो अकेले ही जंगल मे रुकना चाहते थे अगर दोने रानीया उन्हे छोडकर वापस अपने महल मे चली गयी होती तो क्या फिर भीपाण्डुराजा संतान होने की अभीलाषा रखते और अपने वंश की चिंता करते ??
    4:- कुन्ती ने भे कहानी मे जबरजस्त ट्वीस्ट ला दिया कहती है की उसके पास पिछले जन्म का वरदान है, अरे भाई पिछले दिन की बाते याद नही रहती तो फिर पिछ्ले जन्म का वरदान कैसे याद रहगया, और भी वरदान कि भी तो कोइ टर्म या कंडीशन रही होगी कि कि इसकी वैध्यता इसी जन्म की है???
    5:- पांचो बच्चे देवताओ ने सिधे कुन्ती को दिये थे तो फिर पाण्डुराजा पाण्डवो के पिता कैसे कहलाये ??
    कोई दलील जुठी करने से पेहेले महाभारत जरुर पडे

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  16. सुनो ब्रह्मणोँ के बनाये कठपुतले भगवानो के कारनामे उनकी रची ग्रंथ शिवपुराण के अनुसार:
    जब ये दुनिया ब्रह्मांड यानी कुछ भी नही था भगवान भी नही थे तो केवल एक आदि शक्ति (स्त्री)थी आदि शक्ति ने सबसे पहले ब्रह्मा भगवान को बनाया और अपने साथ संबंध बनाने को कहा ब्रह्मदेव ने कहा आपने मुझे बनाया है आप मेरी माँ लगेंगी मै आपके साथ संबंध नही बना सकता क्रोधित होकर आदि शक्ति ने ब्रह्मा भगवान को जलाकर भस्म कर दिया
    फिर आदि शक्ति ने विष्णु को बनाया और खुद के साथ संबंध बनाने को कहा लेकिन विष्णु ने भी कहा की आपने मुझे बनाया आप मेरी माँ हो मै आपसे संबंध नही बना सकता क्रोधित होकर आदि शक्ति देवी ने विष्णु को भस्म कर दिया
    फिर आदि शक्ति ने शंकर भगवान को बनाया और ... संबंध बनाने को कहा शंकर ने ब्रह्मा विष्णु के बारे मे जाना और सोचे की मै इनकार करुंगा तो मुझको भी जला कर भष्म कर देगी शंकर भगवान बोले आप मेरी माँ लगोगी फिर भी मै संबंध बनाने को तैयार हूँ लेकिन मेरी तीन शर्ते हैँ आदि शक्ति ने कहा बताओ शंकर ने कहा पहले मेरे दो भाइयोँ ब्रह्मा विष्णु को जीवीत करो फिर अपना रुप चेंज करो और तीन रुप मे आओ और हम तीनो सेशादी करो फिर संबंध बनाओ आदि शक्ति ने शर्त मंजुर कर लिया फिर क्या था तीनो महापापी भगवानो ने अपनी माँ जो तीन रुपोमे बंटी थी उससे विवाह कर लिया जब ब्रह्मणो के रचे भगवान इतने नीच थेतो ब्रह्मण लोग कितने नीच होंगेँ
    1) देखो ये ब्रह्मणोँ का ढकोसला क्या कहानी फिट किया पहले तो ब्रह्मांड की मालिक आदि शक्ति बना दिया फिर अपने बनाये भगवान लोग का कनेक्शन भी उससे फिट कर दिया
    2) आदि शक्ति को तीन रुपो मे विभाजित करने के बाद भी केवल उमा देवी यानी शिव की पत्नी को हीँ आदि शक्ति का दर्जा देना शुरु कर दिया बाद मे उमा देवी यानी तथाकथित आदि शक्ति को भी एक कहानी बनाकर यज्ञ मे भस्म करवा दिया और फिर पार्वती देवी का जन्म के बाद उसको आदिशक्ति का जन्म कह दिया और बाद मे पार्वती का कनेक्शन शँकर से फिट कर दिया
    3)कुल मिलाकर आदिशक्ति को ही कहानी मे मार डाला गया और शंकर विष्णु ब्रह्मा को महान और सर्वश्रेष्ठ भगवान बना दिया क्या बकवास कहानी बना दिया।
    मुझे झुंठ बोलने की बिल्कुल आदत नही है मेरे दोस्तो यकिन नही आये तो शिवपुराण को ठिक से पढोपहले जानो फिर मानो आँखबंद करके किसी बात का भरोसा नही किया जाता इसलिये शिवपुराण पढो खुद सच पता चल जायेगा

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  17. मुस्लिम औरतों की जीवन-शैली पसन्द है


    अंग्रेजी के पाठकों में कमला दास और मलयालम के पाठकों में माधवी कुट्टी के नाम से जानी जाने वाली मशहूर लेखिका और कवयित्री ने इस्लाम कबूल करके अपना नाम सुरैया रख लिया तो केरल के साहित्य, समाज, धर्म और संस्कृति के क्षेत्रों में जैसा तूफान आया, वैसा वहां के इतिहास में किसी एक व्यक्ति के धर्म बदलने से नहीं आया था।

    आपने इस्लाम कबूल करने का फैसला कब किया ?

    सुरैया : ठीक-ठीक समय तो याद नहीं। मैं समझती हूं, यह 27 वर्ष पहले की बात है।

    आपने इतने लम्बे समय तक इन्तजार क्यों किया ?

    सुरैया : सत्तर के दशक में, जब मैंने इस पर सबसे पहले अपने पति से बात की तो उन्होंने इन्तजार करने को कहा। उन्होंने मुझे इस्लाम पर किताबें पढऩे की सलाह दी। मैंने दोबारा 1984 ई। के लोकसभा चुनावों से पहले धर्म बदलने के बारे में सोचा था। लेकिन उस समय मेरे सभी बच्चों की न तो शादी हुई थी और न वे किसी अच्छे काम पर लगे थे। मैं अपने निर्णय का प्रभाव उनकी जिन्दगी पर नहीं डालना चाहती थी। अब वे सभी अच्छी तरह सेटल्ड हो गए हैं और खुश हैं। इसलिए मैंने अब इस्लाम कबूल करने का ऐलान किया।

    इस्लाम से आपका परिचय किसने कराया ?

    सुरैया : इस्लाम से पहला परिचय मुंबई में दो मुस्लिम नेत्रहीन बच्चों, इरशाद अहमद और इम्तियाज अहमद के माध्यम से हुआ। दोनों बच्चे नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड द्वारा मेरे पास भेजे गये थे। उस समय मैं स्वैच्छिक रूप से नेत्रहीन बच्चों को पढ़ाया-लिखाया करती थी। वे बच्चे मेरे फ्लैट बैंक हाउस (चर्चगेट, मुंबई) में मेरे साथ रहते थे। मुझे महसूस हुआ कि उन्हें इस्लामी साहित्य भी पढ़ाया जाना चाहिए,इसलिए मैं उन्हें इस्लामी किताबें भी पढ़ाया करती थी।

    इस्लाम में ऐसा क्या था जिसने आपको आकर्षित किया ?

    सुरैया : मैं परदा बहुत पसन्द करती हूं, जो मुस्लिम औरतें पहनती हैं। मैं मुस्लिम औरतों की पारम्परिक जीवन-शैली को पसन्द करती हूं।

    लेकिन क्या परदा आपकी आजादी पर पाबन्दी नहीं लगा देगा?

    सुरैया : मैं अब आजादी नहीं चाहती। मैंने आजादी का बहुत इस्तेमाल कर लिया। आजादी मेरे लिए बोझ बन गई थी। अपने जीवन को नियमित और अनुशासित बनाने के लिए हिदायत चाहती हूं। मैं एक आका चाहती हूं, जो मेरी हिफाजत करे मैं अल्लाह की बन्दी, उसकी आज्ञाकारी बनना चाहती हूं। सचमुच, मैं पिछले 24 सालों से कभी-कभार बुर्का पहनती रही हूं। मैं बाजारों और विदेशों में भी बुर्का पहनकर जाती रही हूं। मेरे पास बहुत-से बुर्के हैं। परदे में औरत की इज्जत की जाती है। कोई भी उसे छूता नहीं और न ही छेड़छाड़ करता है। आपको पूरी हिफाजत मिलती है।

    इस्लाम कबूल करने का तात्कालिक कारण क्या था?

    सुरैया : हाल ही में मैं एक कार से मालाबार से कोच्चि जा रही थी। मैं सुबह 5: 45 पर चली थी। मैंने उगते हुए सूरज को देखा। आश्चर्यजनक रूप से उसका रंग डूबते हुए सूर्य जैसा था। वह मेरे साथ सफर करता रहा। सात बजे वह सफेद हो गया। वर्षों से मैं उस निशान की तलाश में थी जो मुझसे कहे कि अब इस्लाम कबूल कर लो। आखिरकार, मुझे वह पैगाम मिल ही गया।

    क्या आपके बच्चों ने आपके इस फैसले को मान लिया?

    सुरैया : हां, बिलकुल। उन्होंने मेरे फैसले का सम्मान किया।
    टाइम्स ऑफ इण्डिया: ५ दिसम्बर १९९९

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  18. बदकारी

    बदकारी की सुरक्षा के लिये इस्लाम ने दो तरह के इंतेज़ामात किये हैं: एक तरफ़ इस रिश्ते की ज़रूरत और अहमियत और उसकी सानवी शक्ल की तरफ़ इशारा किया है तो दूसरी तरफ़ उन तमाम रास्तो पर पाबंदी लगा दी है जिसकी वजह से यह रिश्ता ग़ैर ज़रुरी या ग़ैर अहम हो जाता है और मर्द को औरत या औरत को मर्द की ज़रूरत नही रह जाती है। इरशाद होता है:

    ولا تقربوا الزنا انه کان فاحشه و ساء سبيلا (سوره اسراء)
    और ख़बरदार ज़ेना के क़रीब भी न जाना कि यह खुली हुई बे हयाई और बदतरीन रास्ता है।

    इस आयत में ज़ेना की दोनो बुराईयों की वज़ाहत की गई है कि शादी के मुमकिन होते हुए और उसके क़ानून के रहते हुए ज़ेना और बदकारी एक खुली हुई बे हयाई है कि यह ताअल्लुक़ उन्ही औरतों से क़ायम किया जाये जिन से निकाह हो सकता है तो भी क़ानून से ख़िलाफ़ काम करना या इज़्ज़त से खेलना एक बेग़ैरती है और अगर उन औरतों से रिश्ता क़ायम किया जाये जिन से निकाह मुमकिन नही है और उनका कोई पवित्र रिश्ता पहले से मौजूद है तो यह मज़ीद बेहयाई है कि इस तरह उस रिश्ते की भी तौहीन होती है और उसकी पवित्रता भी पामाल होती है।

    फिर मज़ीद वज़ाहत के लिये इरशाद होता है:

    ان الذين يحبون ان تشيع الفاحشه فی الذين آمنوا لهم عذاب الهم (سوره نور)

    जो लोग इस बातो को दोस्त रखते हैं कि ईमान वालों के दरमियान बदकारी और बे हयाई फ़ैलाएँ तो उन के लिये दर्दनाक अज़ाब (सज़ा) है।

    जिसका मतलब यह है कि इस्लाम इस क़िस्म के जरायम को आम करने और उसके फ़ैलाने दोनो को नापसंद करता है इसलिये कि इस तरह से एक तो एक इंसान की इज़्ज़त ख़तरे में पड़ जाती है और दूसरी तरफ़ ग़ैर मुतअल्लिक़ लोग में ऐसे जज़्बात पैदा हो जाते हैं और उनमें जरायम को आज़माने और उसका तजरुबा करने का शौक़ पैदा होने लगता है जिस का वाज़ेह नतीजा आज हर निगाह के सामने है कि जबसे फ़िल्मों और टी वी के ज़रिये जिन्सी मसायल को बढ़ावा मिलने लगा है हर क़ौम में बे हयाई में इज़ाफ़ा हो गया है और हर तरफ़ उसका दौर दौरा हो गया है और हर इंसान में उसका शौक़ पैदा हो गया है जिसका मुज़ाहरा सुबह व शाम क़ौम के सामने किया जाता है और उसका बदतरीन नतीजा यह हुआ है कि पच्छिमी समाज में सड़कों पर खुल्लम खुल्ला वह हरकतें हो रही हैं जिन्हे आधी रात के बाद फ़िल्मों के ज़रिये से पेश किया जाता है और उनके अपने गुमान के अनुसार अख़लाक़ियात का पूरी तरह से ख़्याल रखा जाता है और हालात इस बात की निशानदही कर रहे हैं कि आने वाला समय उससे भी ज़्यादा बद तर और भयानक हालात साथ लेकर आ रहा है और इंसानियत मज़ीद ज़िल्लत के किसी गढ़े में गिरने वाली है। क़ुरआने मजीद ने उन्हा ख़तरों को देखते हुए ईमान वालों के दरमियान इस तरह के बढ़ावे को मना और हराम क़रार दिया है ताकि एक दो लोगों की बहक जाना सारे समाज पर असर न डाल सके और समाज तबाही और बर्बादी का शिकार न हो। अल्लाह तआला ईमान वालों को इस बला से बचाये रखे।

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  19. PART 1
    इस्लामी शरीअत में समलैंगिकता को एक ऐसा अपराध माना गया है, जिसकी सज़ा मौत है!


    ईश्वर ने मनुष्य के लिए जो जीवन व्यवस्था निर्धारित की है उसमें उसकी इस स्वाभाविक मांग की पूर्ति की भी विशेष व्यवस्था की है । ईश्वरीय मार्गदर्शन को मनुष्यों तक पहुंचाने वाले अल्लाह के आख़िरी रसूल हज़रत मुहम्मद ( सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम ) ने भी निकाह को अपना तरीक़ा बताया है और कहा है कि जो ऐसा नहीं करता है वह हम में से नहीं।

    सम्पूर्ण मानवता के लिए सर्वाधिक अनुकूल ईश्वरीय विधन में अनुचित हस्तक्षेप करते हुए यौन दुराचार के कई रूपों को पश्चिमी देशों ने अपने यहां वैध ठहरा लिया है, जिनमें से समलैंगिक व्यवहार विशेष रूप से उल्लेखनीय है । पश्चिम के अंधनुकरण की परम्परा को बनाए रखते हुए हमारे देश में भी समलैंगिकता को वैध ठहराये जाने की दिशा में पहला क़दम उठाया जा चुका है। दिल्ली हाईकोर्ट का फै़सला आते ही देश में कोई दर्जन भर समलिंगी विवाह हो चुके हैं, जिससे यहां का सामाजिक, नैतिक एवं सांस्कृतिक ढांचे के चरमरा जाने का भय उत्पन्न हो गया है और प्रबुद्ध समाज स्वाभाविक रूप से बहुत चिंतित हो गया है।

    समलैंगिकता को एक घिनौना और आपत्तिजनक कृत्य बताते हुए ईश्वर ने मानवता को इससे बचने के आदेश दिये हैं—
    ‘‘क्या तुम संसार वालों में से पुरुषों के पास जाते हो और तुम्हारी पत्नियों में तुम्हारे रब ने तुम्हारे लिए जो कुछ बनाया है उसे छोड़ देते हो । तुम लोग तो सीमा से आगे बढ़ गये हो ।’’ (क़ुरआन, 26:165-166)

    क्या तुम आंखों देखते अश्लील कर्म करते हो? तुम्हारा यही चलन है कि स्त्रियों को छोड़कर पुरुषों के पास काम वासना की पूर्ति के लिए जाते हो? वास्तविकता यह है कि तुम लोग घोर अज्ञानता का कर्म करते हो । (क़ुरआन, 27:54-55)

    इस संबंध में क़ुरआन में और भी स्पष्ट आदेश मौजूद हैं—

    ‘‘वह अल्लाह ही है, जिसने तुम्हें एक जान से पैदा किया और उसी की जाति से उसका जोड़ा पैदा किया ताकि उसकी ओर प्रवृत होकर शान्ति और चैन प्राप्त करे।’’ (क़ुरआन, 7:189)
    ‘‘तुम तो वह अश्लील कर्म करते हो जो तुम से पहले दुनिया वालों में से किसी ने नहीं किया। तुम्हारा हाल यह है कि तुम मर्दों के पास जाते हो और बटमारी करते हो। (अर्थात् प्रकृति के मार्ग को छोड़ रहो हो।)’’ (क़ुरआन, 29:28-29)

    ‘‘और यह भी उसकी निशानियों में से है कि उसने तुम्हारी ही सहजाति से तुम्हारे लिए जोड़े पैदा किए ताकि तुम उनके पास शान्ति प्राप्त करो और उसने तुम्हारे बीच प्रेम और दयालुता पैदा की। निश्चय ही इसमें बहुत-सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो सोच-विचार करते हैं।’’ (क़ुरआन, 30:21)

    इसके अलावा अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम ) ने भी समलैंगिकता को एक अनैतिक और आपराधिक कार्य बताते हुए इससे बचने के आदेश दिये हैं। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम ) ने कहा है कि—‘‘एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति के गुप्तांग नहीं देखने चाहिए और एक महिला को दूसरी महिला के गुप्तांग नहीं देखने चाहिए । किसी व्यक्ति को बिना वस्त्र के दूसरे व्यक्ति के साथ एक चादर में नहीं लेटना चाहिए और इस प्रकार एक महिला को बिना वस्त्र के दूसरी महिला के साथ एक चादर में नहीं लेटना चाहिए ।’’ (अबू दाऊद)

    आप (सल्ल॰) ने फ़रमाया—समलैंगिकता में लिप्त दोनों पक्षों को जान से मार दो। (तिरमिज़ी) यह आदेश सरकार के लिए है किसी व्यक्ति के लिए नहीं । इसके अलावा समलैंगिकता में लिप्त महिलाओं के बारे में अल्लाह के रसूल ( सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम) का कथन है कि यह औरतों का ज़िना (बलात्कार) है । (तबरानी)

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  20. PART 2

    इस्लामी शरीअत में समलैंगिकता को एक ऐसा अपराध माना गया है, जिसकी सज़ा मौत है, यदि यह लिवात (दो पुरुषों के बीच समलिंगी संबंध) हो । सिहाक़ (दो महिलाओं के बीच समलिंगी संबंध) को चूंकि ज़िना (बलात्कार) माना गया है, इसलिए इसकी सज़ा वही है, जो ज़िना की है अर्थात इसमें लिप्त महिला यदि विवाहित है तो उसे मौत की सज़ा दी जाए और यदि अविवाहित है तो उसे कोड़े लगाए जाएं । ये सज़ाएं व्यक्ति के लिए हैं यानी व्यक्तिगत रूप से जब कोई इस अपराध में लिप्त पाया जाए, लेकिन यदि सम्पूर्ण समाज इस कुकृत्य में लिप्त हो तो उसकी सज़ा ख़ुद क़ुरआन ने निर्धारित कर दी है—

    क्या तुम ऐसे निर्लज्ज हो गये हो तुम स्त्रियों को छोड़ कर पुरुषों से काम वासना पूरी करते हो । वास्तव में तुम नितांत मर्यादाहीन लोग हो। किन्तु उसकी क़ौम का उत्तर इसके सिवा कुछ नहीं था कि निकालो इन लोगों को अपनी बस्तियों से ये बड़े पवित्रचारी बनते हैं । अंततः हमने लूत और उसके घर वालों को (और उसके साथ ईमान लाने वालों को) सिवाय उसकी पत्नी के जो पीछे रह जाने वालों में थी, बचाकर निकाल दिया और उस क़ौम पर बरसायी (पत्थरों की) एक वर्षा। फिर देखो उन अपराधियों का क्या परिणाम हुआ ।’’ (क़ुरआन, 7:80-84)

    ‘‘फिर जब हमारा आदेश आ पहुंचा तो हमने उसको (बस्ती को) तलपट कर दिया और उस पर कंकरीले पत्थर ताबड़-तोड़ बरसाए।’’ (क़ुरआन, 11:82)
    ‘‘अंततः पौ फटते-फटते एक भयंकर आवाज़ ने उन्हें आ लिया और हमने उस बस्ती को तलपट कर दिया और उस पर कंकरीले पत्थर बरसाए।’’
    (क़ुरआन, 15:73-74)

    समलैंगिकता एक नैतिक असंतुलन है, एक अपराध और दुराचार है । इसमें संदेह नहीं कि यह बुराई मानव समाज में सदियों से मौजूद है, वैसे ही जैसे, चोरी, झूठ, हत्या आदि दूसरे अपराध समाज में सदियों से मौजूद हैं । इनके उन्मूलन के प्रयास किये जाने चाहिएं न कि इन्हें सामाजिक स्वीकृति प्रदान की जानी चाहिए । कोई भी व्यक्ति जन्म से ही समलैंगिक नहीं होता है, जैसे कोई भी जन्म से चोर या हत्यारा नहीं होता, बल्कि लोग उचित मार्गदर्शन के अभाव में ये बुराइयां सीखते हैं । किशोरावस्था में अपनी नवीन और तीव्र कामेच्छा पर नियंत्रण न पाने के कारण ही लोग समलिंगी दुराचारों का शिकार हो जाते हैं ।

    समलैंगिकता को एक जन्मजात शारीरिक दोष और मानसिक रोग भी बताया जाता है। जो लोग इसमें लिप्त हैं या इसे सही समझते हैं वे ये कुतर्क देते हैं कि हमें ईश्वर ने ऐसा ही बनाकर पैदा किया है अर्थात् यह हमारा स्वभाव है जिससे हम छुटकारा नहीं पा सकते हैं। लेकिन वे अपने विचार के पक्ष में कोई तर्क देने में असमर्थ हैं। दूसरी ओर इसका विरोध करने वाले लोगों का एक वर्ग इसे एक मानसिक रोग बताता है, लेकिन उसका यह सिद्धांत भी निराधार है, तर्कविहीन है। सच्चाई यह है कि समलैंगिकता सामान्य व्यक्तियों का असामान्य व्यवहार है और कुछ नहीं।

    क़ुरआन ने जिस प्रकार लूत की क़ौम की घटना प्रस्तुत की है उससे भी स्पष्ट होता है कि यह न तो शारीरिक दोष है और न मानसिक रोग, क्योंकि शारीरिक दोष या मानसिक रोग का एक-दो लोग शिकार हो सकते हैं, एक साथ सारी की सारी क़ौम नहीं। यह भी कि ईश्वर अपने दूत लोगों के शारीरिक या मानसिक रोगों के उपचार के लिए नहीं भेजता और न ही उपदेश या मार्गदर्शन देने या अपने अच्छे आचरण का व्यावहारिक नमूना प्रस्तुत करने से ऐसे रोग दूर हो सकते हैं। यह मात्र एक दुराचार है, जिस प्रकार नशे की लत, गाली-गलौज, और झगड़े-लड़ाई की प्रवृत्ति और अन्य दुराचार।

    समलैंगिकता व्यक्ति और समाज दोनों के लिए ख़तरनाक है। यह एक घातक रोग (एड्स) का मुख्य कारण है। इसके अलावा यह महिला और पुरुष दोनों के लिए अपमानजनक भी है। इस्लाम एक पुरुष को पुरुष और एक महिला को महिला बने रहने की शिक्षा देता है, जबकि समलैंगिकता एक पुरुष से उसका पुरुषत्व और एक महिला से उसका स्त्रीत्व छीन लेता है। यह अत्यंत अस्वाभाविक जीवन शैली है। समलैंगिकता पारिवारिक जीवन को विघटन की ओर ले जाता है।

    इन्हीं कारणों से इस्लाम समलैंगिकता को एक अक्षम्य अपराध मानते हुए समाज में इसके लिए कोई स्थान नहीं छोड़ता है। और यदि समाज में यह अपना कोई स्थान बनाने लगे तो उसे रोकने के लिए या अगर कोई स्थान बना ले तो उसके उन्मूलन के लिए पूरी निष्ठा और गंभीरता के साथ आवश्यक और कड़े क़दम भी उठाता है।
    SUNNIKING TEAM

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  21. परशुराम के िवष्य मे कुछ सवाल थे...
    अगर मेरे कािबल ऐन्टीनाधारी िमत्र जवाब देने का कष्ट करे तो मेरी दुिवधा दुर हो जायेगी....
    १) क्या ये सच हे के परशुराम ने अपनी सगी माता की गरदन काट दी थी....?
    २) क्या ये भी सच हे के परशुराम ने २१ बार प्रथ्वी क्षत्रीय िवहीन (क्षत्रीयो को खतम) कर दी थी ...?
    ३) क्या ये भी सच हे के क्षत्रीयो की गर्भवती औरतो का भी ग्रभ काटके भी अजन्मे बच्चो का भी नाश कर दीया था ताकी ना रहे बांश ना बजे बांशुरी और अपना बराह्मणराज स्थापीत कर शके....?
    ४) अगर परशुराम क्षत्रीयो का दुशमन था तो आज सब क्षत्रीय ईसकी पुजा क्यु करते है ...?
    ५) क्या वाकई मे परशुराम िवष्णु का अवतार था या क्षत्रीयो को बेवकुफ बनाने के लीये ये बताया गया है....?

    मेरे कािबल मीत्रो से गुजारीष हे के जवाब ना हो तो कोई बात नही पर अप शब्द बोलके अपनी वैदीक संस्कुरुित का प्रदर्शन ना करे
    धन्यवाद.....

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  22. सुनो ब्रह्मणोँ के बनाये कठपुतले भगवानो के कारनामे उनकी रची ग्रंथ शिवपुराण के अनुसार:
    जब ये दुनिया ब्रह्मांड यानी कुछ भी नही था भगवान भी नही थे तो केवल एक आदि शक्ति (स्त्री)थी आदि शक्ति ने सबसे पहले ब्रह्मा भगवान को बनाया और अपने साथ संबंध बनाने को कहा ब्रह्मदेव ने कहा आपने मुझे बनाया है आप मेरी माँ लगेंगी मै आपके साथ संबंध नही बना सकता क्रोधित होकर आदि शक्ति ने ब्रह्मा भगवान को जलाकर भस्म कर दिया
    फिर आदि शक्ति ने विष्णु को बनाया और खुद के साथ संबंध बनाने को कहा लेकिन विष्णु ने भी कहा की आपने मुझे बनाया आप मेरी माँ हो मै आपसे संबंध नही बना सकता क्रोधित होकर आदि शक्ति देवी ने विष्णु को भस्म कर दिया
    फिर आदि शक्ति ने शंकर भगवान को बनाया और ... संबंध बनाने को कहा शंकर ने ब्रह्मा विष्णु के बारे मे जाना और सोचे की मै इनकार करुंगा तो मुझको भी जला कर भष्म कर देगी शंकर भगवान बोले आप मेरी माँ लगोगी फिर भी मै संबंध बनाने को तैयार हूँ लेकिन मेरी तीन शर्ते हैँ आदि शक्ति ने कहा बताओ शंकर ने कहा पहले मेरे दो भाइयोँ ब्रह्मा विष्णु को जीवीत करो फिर अपना रुप चेंज करो और तीन रुप मे आओ और हम तीनो सेशादी करो फिर संबंध बनाओ आदि शक्ति ने शर्त मंजुर कर लिया फिर क्या था तीनो महापापी भगवानो ने अपनी माँ जो तीन रुपोमे बंटी थी उससे विवाह कर लिया जब ब्रह्मणो के रचे भगवान इतने नीच थेतो ब्रह्मण लोग कितने नीच होंगेँ
    1) देखो ये ब्रह्मणोँ का ढकोसला क्या कहानी फिट किया पहले तो ब्रह्मांड की मालिक आदि शक्ति बना दिया फिर अपने बनाये भगवान लोग का कनेक्शन भी उससे फिट कर दिया
    2) आदि शक्ति को तीन रुपो मे विभाजित करने के बाद भी केवल उमा देवी यानी शिव की पत्नी को हीँ आदि शक्ति का दर्जा देना शुरु कर दिया बाद मे उमा देवी यानी तथाकथित आदि शक्ति को भी एक कहानी बनाकर यज्ञ मे भस्म करवा दिया और फिर पार्वती देवी का जन्म के बाद उसको आदिशक्ति का जन्म कह दिया और बाद मे पार्वती का कनेक्शन शँकर से फिट कर दिया
    3)कुल मिलाकर आदिशक्ति को ही कहानी मे मार डाला गया और शंकर विष्णु ब्रह्मा को महान और सर्वश्रेष्ठ भगवान बना दिया क्या बकवास कहानी बना दिया।
    मुझे झुंठ बोलने की बिल्कुल आदत नही है मेरे दोस्तो यकिन नही आये तो शिवपुराण को ठिक से पढोपहले जानो फिर मानो आँखबंद करके किसी बात का भरोसा नही किया जाता इसलिये शिवपुराण पढो खुद सच पता चल जायेगा

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  23. यह दोहरा मापदंड क्यूँ?

    इस्लामी क़ानून में बलात्कार की सज़ा मौत हैं!
    बहुत से लोग इसे निर्दयता कह कर इस दंड पर आश्चर्य प्रकट करते हैं!
    लोगों से सीधा और सरल सवाल किया गया : कोई आपकी माँ या बहन के साथ बलात्कार करता है और आपको न्यायधीश बना दिया जाये और बलात्कारी को सामने लाया जाये तो उस दोषी को आप कौन सी सज़ा सुनाएँगे ?

    जवाब - उसे मृत्यु दंड दिया जाये कुछ ने कहा कि उसे कष्ट दे दे कर मारना चाहिए!

    अगला प्रश्न - अगर कोई व्यक्ति आपकी माँ, पत्नी अथवा बहन के साथ बलात्कार करता है तो आप उसे मृत्यु दंड देना चाहते हैं लेकिन यही घटना किसी और कि माँ, पत्नी या बहन के साथ होती है तो आप कहते हैं मृत्युदंड देना निर्दयता है इस स्तिथि में यह दोहरा मापदंड क्यूँ?

    पश्चिमी समाज औरतों को ऊपर उठाने का झूठा दावा करता है!

    औरतों की आज़ादी का पश्चिमी दावा एक ढोंग है, जिनके सहारे वो उनके शरीर का शोषण करते हैं, उनकी आत्मा को गंदा करते हैं और उनके मान सम्मान को उनसे वंचित रखते हैं पश्चिमी समाज दावा करता है की उसने औरतों को ऊपर उठाया इसके विपरीत उन्होंने उनको रखैल और समाज की तितलियों का स्थान दिया है, जो केवल जिस्मफरोशियों और काम इच्छुओं के हांथों का एक खिलौना है जो कला और संस्कृति के रंग बिरंगे परदे के पीछे छिपे हुए है.
    मृत्यु-दण्ड के सन्दर्भ में सूरा 17 की आयत ३३ भी विचारणीय है. उक्त आयत में प्रयुक्त शब्द 'हक़' से तात्पर्य यह है कि विशिष्ट कुछ दशाओं में ही कुरआन मजीद राज्य द्वारा किसी मनुष्य को मृत्यु-दण्ड वैध क़रार देता है जैसे-

    १. जान बूझकर किसी मनुष्य की ह्त्या करने वाले को!
    २. सत्य-धर्म के मार्ग में रुकावट डालने वाले को!
    SUNNIKING TEAM INDIA

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  24. Kash muslim 1893 me america ki relegious debate me bhi bhok pate wo lamha tha jb swami ji ne sari duniya me prove kiya hinduism is best aur bhadwe molavi imam ne saah kabool kiya

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  25. कलयुग में बना कलयुग में ही खतम ।

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