मंगलवार, 30 अप्रैल 2013

कुख्यात आदर्श मुस्लिम ओसामा !


इस्लाम के उदय से लेकर आज तक जितने भी कुख्यात मुस्लिम हमलावर ,लुटेरे , अत्याचारी , बलात्कारी ,अपराधी और आतंकवादी हुए हैं ,इस्लामी द्रष्टिकोण से सभी मुसलमानों के लिए आदर्श व्यक्ति हैं . क्योंकि इन सभी का उदेश्य विश्व को बर्बाद करके इस्लामी राज्य की स्थापना करना रहा है .यद्यपि ऐसे लोगों के नामों की सूचि काफी बड़ी है ,लेकिन आधुनिक काल में इस्लाम के कुछ ऐसे आदर्श व्यक्ति हुए हैं , जिनके नाम पर लोग आज भी थूकते हैं .जैसे युगांडा का तानाशाह ईदी अमीन , इराक का सद्दाम हुसैन , लीबिया के मुअम्मार गदाफी ,दाऊद इब्राहिम , और ओसामा बिन लादेन .
लेकिन इनमे ओसामा का नाम सबसे ऊपर है , क्योंकि उसके आतंकी संगठन की जड़ें केवल अरब में ही नहीं अफगानिस्तान से लेकर भारत तक फैली हुई हैं , जो कई नामों से यहाँ भी सक्रिय हैं .
ओसामा बिन लादेन ने मुहम्मद साहब के बताये रास्ते पर चल कर ,और उनकी कुरान और हदीसों में दी गयी शिक्षा का पालन करते हुए ही दुनिया को बर्बाद करने की जो योजना बनायीं थी , वह उसने अपने फतवों के द्वारा अखबारों में प्रकाशित कर दी थी . इसलिए पहले ओसामा का संक्षिप्त सा परिचय देकर उस फतवे के मुख्य अंश दिए जा रहे हैं . ताकि लोगों को पता चल सके कि मुसलमानों का आदर्श ओसामा क्या चाहता था
1-ओसामा का परिचय
जिस कुख्यात आतंकवादी को दिग्विजय सिंह जैसा हिन्दू विरोधी कांगरेसी सार्वजनिक रूप में संसद में भी आदरपूर्वक "ओसामा जी " संबोधित करके महिमा मंडित करता है , उसका पूरा नाम "ओसामा बिन मुहम्मद बिन अवैज बिन लादेन -Osama bin Mohammed bin Awad bin Laden - أسامة بن محمد بن عوض بن لادن‎-था .ओसामा का बाप मोहम्मद बिन लादेन सऊदी अरब के अरबपति बिल्डर था .चूँकि इसका नाम भी मुहम्मद था ,इसलिए अपने रसूल का अनुसरण करते हुए ओसामा के बाप मुहम्मद ने भी कई औरतें और रखैलें रखी हुई थी .वैसे तो ओसामा के बाप का काम बिल्डिंग बनाने का था , लेकिन उसका कसली काम बच्चे पैदा करना था .जो हर मुसलमान करता रहता है .इसका उद्देश्य जिहादियों की संख्या बढ़ाना है , ताकि जल्द से जल्द विश्व पर इस्लामी राज्य हो जाये .इसी लिए ओसामा के बाप ने 52 बच्चे पैदा किये थे . जिनमे ओसामा बिन लादेन 17 वां बच्चा था ,ओसामा का बाप कहता था ,बच्चे पैदा करना रसूल की सुन्नत है .ओसामा बिन लादेन  का जन्म 10 मार्च 1957 को हुआ था .ओसामा बिन लादेन ने थोड़े ही समय में कुरान और सभी हदीसें पढ़ ली थीं ,जिसके प्रभाव से उसके दिमाग में दुनिया भर में इस्लामी राज्य की स्थापना करने का पागलपन सवार हो गया .चूँकि मुहम्मद साहब ने भी जिहाद का रास्ता अपनाया था , इसलिए ओसामा बिन लादेन ने भी आतंकवाद नाम जिहाद रख लिया .
2-ओसामा की औरतें 
मुसलमान ओसामा बिन लादेन को अपना आदर्श इसलिए मानते हैं , क्योंकि वह मुहम्मद साहब की तरह कई औरतें और रखैलें रखता था . जैसे मुहम्मद साहब कुरान में दूसरों को तो सिर्फ चार औरतें रखने का हुक्म देते थे और खुद चार से अधिक औरतें रखते थे . जिनमे 6 साल की बच्ची से लेकर 40 साल की महिलाएं थी .जैसे मुहम्मद साहब को उनकी सबसे छोटी औरत आयशा ने मरवा दिया था .उसी तरह ओसामा को पकड़वाने में उसकी छोटी औरत का हाथ था .ओसामा ने कुरान के चार औरत के आदेश को तक पर रख कर पांच औरतें रखी थी . जो इस प्रकार हैं ,
1-नजवा गनीम .यह सीरिया की थी इसका जन्म 1960 में हुआ था इसका उपनाम उम्मे अब्दुल्लाह था .
2-खदीजा शरीफ -जन्म 1948 ,उपमाम उम्मे अली
3-खैरिया साबेर ,उपनाम उम्मे हमजा
4-सीहाम साबेर ,उपनाम उम्मे खालिद
5-अमाल अहमद अल सदाह -जन्म 1982 यह सबसे छोटी थी ,इसी औरत ने अमेरिकन सरकार को ओसामा के गुप्त स्थान का सुराग दिया था .
इसके साथ ओसामा के करीब 24 बच्चे थे .
3-अल कायदा की स्थापना 
ओसामा बिन लादेन जितना अय्याश था उतना ही कट्टर मुसलमान था . उसकी नजर में सभी गैर मुस्लिम काफिर थे और उनका सफाया करने और विश्व में इस्लामी शरियत लागू करवाने के लिए ओसामा ने अगस्त 1 9 9 8 को एक आतंकवादी दल " अल कायदा - القاعدة‎ al-qāidah" की स्थापना की थी . और आज भी इसके सहयोगी दल दुनिया भर में विस्फोट करके हजारों लोगों की हत्या कर चुके हैं , भारत में 'सिमी " इंडियन मुजाहिद कई दल मौजूद हैं . जिनको स्थानीय मुसलमानों का सहयोग प्राप्त है .लेकिन हमारी सेकुलर सरकार इनके द्वारा की गयी आतंकी कार्यवाही को इस्लामी आतंक नहीं मानती है . और कहती है कि आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता .जबकि इस्लाम खुले शब्दों में आतंकवाद की शिक्षा देता है .चूँकि ओसामा इस्लाम का एक धर्मगुरु भी था ,इसलिए उसने दो फतवे ऐसे दिए थे जिनमे मुसलमानों आतंक . तोड़फोड़ . विस्फोट और हत्याएं करने के आदेश दिए गए थे . उन फतवों का सारांश यहाँ दिया जा रहा है .
4-ओसामा का पहला फतवा 
ओसामा का पहला फतवा एक अरबी अखबार " अल कुद्स " में 23 अगस्त 1 9 9 6 में प्रकाशित हुआ था .और इस फतवे का शीर्षक "एलान हरब -إعلان حرب " यानि युद्ध की घोषणा (Declaration of War  ) था .इस फतवे में कुरान की आयतों के हवाले देकर मुसलमानों को जिहाद और आतंकवाद फ़ैलाने के लिए प्रेरित किया गया है .फतवे के मुख्य अंश इस प्रकार हैं ,
"मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के आलावा कोई और उपासना के योग्य नहीं है , और अल्लाह का कोई सहभागी नहीं है . और मुहम्मद उसके रसूल हैं ,
कुरान में कहा गया है ,'हे ईमान वालो अल्लाह का डर रखो ,जैसा उस से डरने का हक़ है .और अगर तुम मरो तो इस दशा में मरो कि लोगों को पता चले कि तुम मुसलमान हो ' सूरा -आले इमरान 3 :1 0 2 . इसलिए तुम यह बात हरेक मुस्लिम मर्द और औरत को समझा दो .अल्लाह ने यह भी फरमाया है 
"लोगो अपने अल्लाह से डरो , जिसने तुम्हें एक ही जीव से पैदा किया ,फिर उसी से स्त्री पुरुष बनाकर दुनिया में फैला दिया 'सूरा -निसा -4 :1 

इसलिए हरेक मुस्लिम मर्द और औरत को चाहिए कि अल्लाह और उसके रसूल के आदेशों का निष्ठां से पालन करें ,इससे अल्लाह उनके इरादों में सफलता प्रदान करेगा , औरअगले पिछले सभी गुनाह माफ़ कर देगा ,अल्लाह ने कुरान में वादा किया है .
"तो जो ईमान रखते हैं ,वह अल्लाह का डर रखें ,तो वह तुम्हारे गुनाह माफ़ करके तुम्हारे इरादों में सफलता प्रदान करेगा क्योंकि जिसने अल्लाह और उसके रसूल की बात मानी उसी को सफलता मिलेगी " सूरा -अहजाब -3 3 :7 0 -7 1

इसलिए सभी मुसलमानों को चाहिये कि आपसी झगड़े छोड़ कर सिर्फ इन्ही कामों पर ध्यान से लग जाएँ ,
1 -दूसरों के मानव संसाधनों को इतना नुकसान पहुंचाना कि अधिक से अधिक लोग मारे जाएँ , या घायल हो जाएँ ,
2 -दूसरों की वित्तीय और आर्थिक स्थिरता को छिन्नभिन्न कर देना .
3 -देश के बुनियादी ढाँचे को नष्ट करने वाली शक्तियों को सहायता देना 
4 -समाज की एकता ,और अखंडता तोड़ने के लिए अपने विरोधियों को जिम्मेदार ठहराना ,और शांति की बातें करते रहना .
5 -देश पेट्रोल के बिना नहीं चल सकता , इसलिए तेल उद्योग को नष्ट करना .
6 -अंत में निशाने पर लिए गए देश को विभाजीत कराने का प्रयास करना .
हमें अपनी जान की परवाह किये बिना इन्हीं उद्देश्यों को पूरा करना होगा , क्योंकि कुरान कहा है ,
"अल्लाह की अनुज्ञा के बिना कोई नहीं मर सकता .अल्लाह ने हरेक की नियति पहले से लिख रखी है .और जो लोग इसी दुनियां में अपना बदला लेना चाहते हैं .अल्लाह उनको बदला जरुर देते हैं ,और जो आखिरत में अपना बदला चाहते हैं ,अल्लाह उनको आखिरत में पूरा बदला देगा " 
सूरा -आले इमरान 3 :145

http://www.pbs.org/newshour/updates/military/july-dec96/fatwa_1996.html

5-ओसामा का दूसरा फतवा 
आतंकवादी संगठन " अल कायदा " की तरफ से दूसरा फतवा 23 फरवरी फरवरी सन 1998 को जारी किया था . इसमें ओसामा बिन लादेन और एमान जवाहिरी ने सभी इस्लामी आतंकी संगठनो को संबोधित करते हुए कहा था ,
" हमारे रसूल मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह ने कहा है कि अल्लाह में मुझे दुनिया में मुझे मेरे हाथों में तलवार देकर भेजा है .ताकि मैं लोगों को बता दूँ कि विश्व में सिर्फ अल्लाह की इबादत की जाए .और जो इस बात की अवज्ञा करते है ,उन्हें पता होना चाहिए कि उनकी गर्दनों पर मेरा भाला रखा हुआ है 
इस दूसरे फतवे में वही बातें हैं ,जो पहले फतवे में दी गयी है , सिर्फ यह बात जोर देकर बताई गयी है .जिसको मुसलमान या तो छुपा लेते हैं या स्वीकार नहीं करने का ढोंग करते हैं 
.
http://www.pbs.org/newshour/updates/military/jan-june98/fatwa_1998.html

यद्यपि ओसामा बिन लादेन को अमरीकी सेना ने पाकिस्तान में घुस कर 2 मई 2011 को अबटाबाद में मार दिया था . लेकिन आज भी इसलामी आतंक समाप्त नहीं हुआ , बल्कि नए नए नामों से आतंकी संगठन बन रहे है, एक तरफ यह दल आतंक को इसलाम का आदेश बताते रहते हैं , तो दूसरी तरफ सेकुलर हिन्दू विरोधी ओसामा बिन लादेन और अफजल गुरु जैसे हत्यारों का सम्मान पूर्वक उल्लेख करते हैं .
आजकल सम्पूर्ण पाकिस्तान में भारत विरोधी माहौल बनाया जा रहा है , और जिहादियों में जोश भरने के लिए तराने बनाये जा रहे हैं , इनके दो नमूने दिए जा रहे हैं ,
Jihadi Tarana--Ghorun ko suda rakna.3gp

http://www.youtube.com/watch?v=8OTeVJz8-ic


Hum Millat e Islam K Janbaz Sipahi _ Lashkar e Taiba Jamat Ud Dawa Jihadi

http://www.youtube.com/watch?v=FD0hjrS1yWc

आज हमें गंभीरता से विचार करने की जरुरत है .कि सरकार और संसद में भी ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकवादियों का सम्मान के साथ नाम लिया जाता हो . तो ऐसी सरकार हमें आतंकवादियों से कैसे बचा सकेगी .एक तरफ पाकिस्तान के आतंकवादी भारत की सीमा में घुस कर हमारे सैनिकों के सिर काट कर ले जाते हैं . और दूसरी तरफ सरकार पाकिस्तान के मंत्री के स्वागत में अपनी आँखें बिछा देती है .कहीं ऐसा तो नहीं कि ऐसे लोगों में ओसामा की रूह घुस गयी हो .


http://www.fas.org/irp/world/para/docs/980223-fatwa.htm

3 टिप्‍पणियां:

  1. मानसिकता ही बताती है किस दिशा में जा रहे हैं, ऐसे लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई होना चाहिये.

    उत्तर देंहटाएं
  2. इस्लाम


    "मुझे पता चला कि जिस धर्म को संसार इस्लाम के नाम से जानता है वास्तव में वही धार्मिक मतभेद के प्रश्न का वास्तविक समाधान है। इस्लाम दुनिया में कोई नया धर्म स्थापित नहीं करना चाहता बल्कि संसार में प्रत्येक धर्म के मानने वाले अपनी वास्तविक और शुद्ध सत्य पर आ जाएं और बाहर से मिलाई हुई झूटी बातों को छोड़ दें- यदि वह ऐसा करें तो जो आस्था उनके पास होगी उसी का नाम क़ुरआन की बोली में इस्लाम है।

    क़ुरआन कहता है कि खुदा की सच्चाई एक है, आरम्भ से एक है, और सारे इंसानों और समुदायों के लिए समान रूप में आती रही है, दुनिया का कोई देश और कोई कोना ऐसा नहीं जहाँ अल्लाह के सच्चे बन्दे न पैदा हुए हों और उन्होंने सच्चाई की शिक्षा न दी हो, परन्तु सदैव ऐसा हुआ कि लोग कुछ दिनों तक उस पर क़ाएम रहे फिर अपनी कल्पना और अंधविश्वास से भिन्न भिन्न आधुनिक और झूटी बातें निकाल कर इस तरह फैला दीं कि वह ईश्वर की सच्चाई इंसानी मिलावट के अन्दर संदिग्ध हो गई।

    अब आवश्यकता थी कि सब को जागरुक करने के लिए एक विश्य-व्यापी आवाज़ लगाई जाए, यह इस्लाम है। वह ईसाई से कहता है कि सच्चा ईसाई बने, यहूदी से कहता है कि सच्चा यहूदी बने, पारसी से कहता है कि सच्चा पारसी बने, उसी प्रकार हिन्दुओं से कहता है कि अपनी वास्तविक सत्यता को पुनः स्थापित कर लें, यह सब यदि ऐसा कर लें तो वह वही एक ही सत्यता होगी जो हमेशा से है और हमेशा सब को दी गई है, कोई समुदाय नहीं कह सकता कि वह केवल उसी की सम्पत्ती है।

    उसी का नाम इस्लाम है और वही प्राकृतिक धर्म है अर्थात ईश्वर का बनाया हुआ नेचर, उसी पर सारा जगत चल रहा है, सूर्य का भी वही धर्म है, ज़मीन भी उसी को माने हुए हर समय घूम रही है और कौन कह सकता है कि ऐसी ही कितनी ज़मीनें और दुनियाएं हैं और एक ईश्वर के ठहराए हुए एक ही नियम पर अमल कर रही हैं।
    अतः क़ुरआन लोगों को उनके धर्म से छोड़ाना नहीं चाहता बल्कि उनके वास्तविक धर्म पर उनको पुनः स्थापित कर देना चाहता है। दुनिया में विभिन्न धर्म हैं, हर धर्म का अनुयाई समझता है कि सत्य केवल उसी के भाग में आई है और बाक़ी सब असत्य पर हैं मानो समुदाय और नस्ल के जैसे सच्चाई की भी मीरास है अब अगर फैसला हो तो क्यों कर हो? मतभेद दूर हो तो किस प्रकार हो? उसकी केवल तीन ही सूरतें हो सकती हैं एक यह कि सब सत्य पर हैं, यह हो नहीं सकता क्योंकि सत्य एक से अधिक नहीं और सत्य में मतभेद नहीं हो सकता, दूसरी यह कि सब असत्य पर हैं इस से भी फैसला नहीं होता क्योंकि फिर सत्य कहाँ है? और सब का दावा क्यों है ? अब केवल एक तीसरी सूरत रह गई अर्थात सब सत्य पर हैं और सब असत्य पर अर्थात असल एक है और सब के पास है और मिलावट बातिल है, वही मतभेद का कारण है और सब उसमें ग्रस्त हो गए हैं यदि मिलावट छोड़ दें और असलियत को परख कर शुद्ध कर लें तो वह एक ही होगी और सब की झोली में निकलेगी। क़ुरआन यही कहता है और उसकी बोली में उसी मिली जुली और विश्वव्यापी सत्यता का नाम "इस्लाम" है।"

    उत्तर देंहटाएं