शनिवार, 24 अगस्त 2013

टी वी सीरियल जिहाद !

जिहाद  को  इस्लाम  में अनिवार्य  और धार्मिक  कार्य   माना  जाता  है . इसका  उद्देश्य  विश्व  के सभी धर्मों  और संस्कृतियों  को मिटा  कर इस्लाम  को फैलाना  है . जिहाद  के लिए  मुसलमान  हर तरह  के उपाय  और हथकंडे  अपनाते  रहे  हैं . इस्लाम  के प्रारम्भ   से लेकर  आधुनिक  काल  तक  मुसलमान जिहाद  के लिए तलवार  का  प्रयोग  किया  करते  थे .लेकिन  विज्ञानं  के इस वर्त्तमान  काल  में  मुसलमानों  ने जिहाद  के लिए नए तरीके निकाल  लिए  हैं .जैसे "लव जिहाद " और "ब्लोगिंग जिहाद "  सबसे  महत्वपूर्ण  बात  यह  है  कि   जिहाद  के इन सभी नए तरीकों  में अकसर  भोली भाली  हिन्दू लड़कियों   या  युवकों  को निशाना  बनाया  जाता  है . और इंटरनेट    या टी .वी .सीरियल  के माध्यम  से   इस्लाम  के अत्याचारी रूप पर  बुरका  डालने की  कोशिश  की  जाती  , और हिन्दू धर्म  में कमियां  निकाल  कर  लोगों  को इस्लाम  के प्रति आकर्षण  पैदा  करने    का प्रयत्न  किया  जाता  है . अपनी   इस कपटी  योजना  को सफल  करने के  लिए मक्कार मुसलमान  एक  तरकीब  अपनाते  हैं ,कि सबसे बड़े  अत्याचारी ,अय्याश , हिन्दूविरोधी  मुसलमान  बादशाह  को न्यायी ,धर्मनिरपेक्ष  ,सदाचारी और   दयालु   साबित   करने लगते  हैं .इसका  ताजा  उदाहरण   टी .वी  सीरियल  " जोधा अकबर " है . जिसे  हिन्दू  महिलाएं  भी  नियमित  रूप  से देखती  हैं .जिस से  उनका  "ब्रेन वाश " किया  जा रहा  है    .
1-जोधा अकबर सीरियल 
इस  सीरियल  का निर्माण  और प्रदर्शन  बालाजी  टेली फिल्म्स  के बैनर  से एकता  कपूर  कर रही  है . और 18  जून  सन 2013  से यह  सीरियल  शनिवार और रविवार   को छोड़कर  रोज रात  8.30  पर  जी टी .वी .पर  दिखाया   जा रहा  है . लेकिन  बहुत कम   लोग  जानते होंगे कि  इस सीरियल  का " पट लेखक (Script  Writer  ) एक  कट्टर  जिहादी  विचार रखने वाला  व्यक्ति  है .  जिसका  नाम "नावेद असलम " है .इसने "जामिया  मिल्लिया इलामिया  " से सन 1989  में  स्नातक   की डिग्री  ली थी . जामिया  इस्लाम  के कट्टरवादी और जिहादी विचारों  का गढ़  माना  जाता  है .लोगों  को याद  होगा  कि  पहले महराणा  प्रताप  के बारे में  एक सीरियल  निकला  था . जिसमे राणा  को एक हिन्दू धर्म  का रक्षक  और अकबर को अत्याचारी  बताया  गया था .इसलिए  लोगों के दिमाग से राणा  की वह छवि  मिटाने  और अकबर को एक सेकुलर  और  सभी  धर्मों  का आदर  करने वाला बादशाह  साबित  करने के   लिए नावेद  असलम  ने   मुल्लों  के इशारे  पर इस सीरियल  की  पटकथा   लिखी  है . जो सरासर  झूठ  और  निराधार   है . यहाँ पर अकबर  की असलियत   के कुछ  नमूने संक्षित  में दिये  जा रहे हैं .
2-अकबर  की पत्नियां  और रखैलें 
 हकीकत यह है कि अकबर के सभी पूर्वज बाबर, हुमायूं, से लेकर तैमूर तक सब भारत में लूट, बलात्कार, धर्म परिवर्तन, मंदिर विध्वंस, आदि कामों में लगे रहे. वे कभी एक भारतीय नहीं थे और इसी तरह अकबर भी नहीं था. और इस पर भी हमारी हिंदू जाति अकबर को हिन्दुस्तान की शान समझती रही!
अकबर एक कट्टर सुन्नी  मुसलमान  था ,इसने अपने  नाम  में मुहम्मद शब्द  जोड़ लिया था . जिस से इसका पूरा नाम "जलालुद्दीन  मुहम्मद अकबर  " हो गया .और  जैसे  मुहम्मद साहब  ने  कई पत्नियाँ  और रखैलें    रखी थीं .लेकिन  अकबर ने  मुहम्मद साहब से  कई गुना  अधिक औरतें  और रखेलें  रख  ली थीं , जिन्हें  लौंडियाँ   कहा  जाता  है .मुसलमान  अकबर  की सिर्फ  तीन  औरतें  बताते  हैं ,1 .रुकैय्या   बेगम , जो अकबर के फूफा  बैरम  खान  की विधवा  थी .2 .सलीमाँ   बेगम  जो अकबर  की चचेरी  बहिन  थी .3 . लोग  जोधा  बाई  को अकबर की तीसरी  पत्नी   बताते हैं .इसका  असली नाम  हीरा  कुंवरी  या रुक्मावती  था , यह आम्बेर  के राज  भारमल  की बड़ी बेटी थी .लोग इसी को जोधा  कहते  हैं .जोधा अकबर  से आयु  में बड़ी थी .और  राजा  मानसिंह  की बहिन  लगती थी ,जिसे अकबर ने अपने नवरत्नों  में शामिल  कर लिया  था जोधा और अकबर  की शादी  जयपुर  के पास साम्भर  नाम  की जगह  20  जनवरी  सन 1562  को  हुई थी . वास्तव में  राजा  भारमल  ने जोधा  की डोली  भेजी  थी . जिसके बदले अकबर  ने उसे मनसबदरी  दी  थी .लेकिन  वास्तविकता  कुछ  और है ,
अबुल फज़ल ने अकबर के हरम को इस तरह वर्णित किया है- “अकबर के हरम में पांच हजार औरतें थीं और हर एक का अपना अलग घर था.” ये पांच हजार औरतें उसकी 36 पत्नियों से अलग थीं.आइन ए अकबरी में अबुल फजल ने लिखा है- “शहंशाह के महल के पास ही एक शराबखाना बनाया गया था. वहाँ इतनी वेश्याएं इकट्ठी हो गयीं कि उनकी गिनती करनी भी मुश्किल हो गयी. दरबारी नर्तकियों को अपने घर ले जाते थे. अगर कोई दरबारी किसी नयी लड़की को घर ले जाना चाहे तो उसको अकबर से आज्ञा लेनी पड़ती थी. कई बार जवान लोगों में लड़ाई झगडा भी हो जाता था. एक बार अकबर ने खुद कुछ वेश्याओं को बुलाया और उनसे पूछा कि उनसे सबसे पहले भोग किसने किया”.आइन ए अकबरी में अबुल फजल ने लिखा है- “शहंशाह के महल के पास ही एक शराबखाना बनाया गया था. वहाँ इतनी वेश्याएं इकट्ठी हो गयीं कि उनकी गिनती करनी भी मुश्किल हो गयी. दरबारी नर्तकियों को अपने घर ले जाते थे. अगर कोई दरबारी किसी नयी लड़की को घर ले जाना चाहे तो उसको अकबर से आज्ञा लेनी पड़ती थी. कई बार जवान लोगों में लड़ाई झगडा भी हो जाता था. एक बार अकबर ने खुद कुछ वेश्याओं को बुलाया और उनसे पूछा कि उनसे सबसे पहले भोग किसने किया”.रणथंभोर की संधि में अकबर महान की पहली शर्त यह थी कि राजपूत अपनी स्त्रियों की डोलियों को अकबर के शाही हरम के लिए रवाना कर दें यदि वे अपने सिपाही वापस चाहते हैं.ग्रीमन के अनुसार अकबर अपनी रखैलों को अपने दरबारियों में बाँट देता था. औरतों को एक वस्तु की तरह बांटना और खरीदना अकबर की  की  नीति  थी .
विन्सेंट स्मिथ जैसे अकबर प्रेमी को भी यह बात माननी पड़ी कि चित्तौड़ पर हमले के पीछे केवल उसकी सब कुछ जीतने की हवस ही काम कर रही थी. वहीँ दूसरी तरफ महाराणा प्रताप अपने देश के लिए लड़ रहे थे और कोशिश की कि राजपूतों की इज्जत उनकी स्त्रियां मुगलों के हरम में न जा सकें
3-अकबर की कुरूपता 
इतिहास  की किताबों  और  मुग़ल काल  की पेंटिंग  में अकबर  को  एक स्वस्थ  और रौबदार   चहरे वाला सुन्दर व्यक्ति चित्रित  किया  जाता ,लेकिन,“अकबर एक औसत दर्जे की लम्बाई का था. उसके बाएं पैर में लंगड़ापन था. उसका सिर अपने दायें कंधे की तरफ झुका रहता था. उसकी नाक छोटी थी जिसकी हड्डी बाहर को निकली हुई थी. उसके नाक के नथुने ऐसे दीखते थे जैसे वो गुस्से में हो. आधे मटर के दाने के बराबर एक मस्सा उसके होंठ और नथुनों को मिलाता था. वह गहरे रंग का था”
4-अकबर की  धर्मनिरपेक्षता 
आजकल  बच्चों  को इतिहास  की किताबों  में पढाया  जाता  है ,कि अकबर सभी धर्मों  का आदर  करता था . और यहाँ  तक कि  उसने जोधा  बाई  को भी एक मंदिर  भी बनवा  दिया था ,जिसने वह हिन्दू  रीती  के अनुसार पूजा ,आरती  और कृष्ण  की भक्ति किया  करती  थी , यही"  मुगले आजम "  पिक्चर  में भी दिखाया था   .जो  के .आसिफ   ने बनायीं  थी . लेकिन  वास्तविकता  यह है कि  जोधा  से शादी   के कुछ समय बाद अकबर  ने जोधा  को मुसलमान  बना  दिया था . और उसका इस्लामी  नाम ", मरियम उज्जमानी ( مريم  ازماني  )  रख  दिया था .और 6  फरवरी  सन  1562  को इसलामी  तरीके  से निकाह  पढ़  लिया  था .और इसीलिए जब  जोधा  मर गयी  तो उसका हिन्दू रीती से दाह संस्कार  नहीं  किया गया , बल्कि एक मुस्लिम  की तरह  दफना  दिया गया .आज  भी  जोधा  की कबर    अकबर  की कबर जो सिकन्दरा में है  उस से     से  कुछ  किलोमीटर   बनी   है  ,देखी  जा सकती  है .
यही  नहीं अकबर  ने अपनी  अय्याशी  के लिए इस्लाम  का भी  दुरुपयोग   किया था ,चूँकि सुन्नी फिरके के अनुसार  एक मुस्लिम  एक साथ  चार  से अधिक औरतें  नहीं रखता . और जब  अकबर उस से अधिक  औरतें  रखने  लगा  तो ,काजी  ने उसे टोक  दिया  .इस  से नाराज  होकर अकबर ने उस सुन्नी  काजी  को हटा  कर शिया काजी  को रख  लिया , क्योंकि शिया  फिरके  में असीमित  अस्थायी  शादियों  की इजाजत  है , ऐसी शदियों  को " मुतअ "  कहा  जाता  है .आज  भी मुसलमान  अपने  फायदे के लिए  कुरान   की  व्याख्या  किया  करते  हैं
4-बादशाह की रहमदिली 
मुसलमान  अकबर को  न्यायी  दयालु  नरमदिल बताते  हैं ,लेकिन  यह भी झूठ  है ,क्योंकि ,जब    6 नवम्बर 1556 को 14 साल की आयु में अकबर महान पानीपत की लड़ाई में भाग ले रहा था. हिंदू राजा हेमू की सेना मुग़ल सेना को खदेड़ रही थी कि अचानक हेमू को आँख में तीर लगा और वह बेहोश हो गया. उसे मरा सोचकर उसकी सेना में भगदड़ मच गयी. तब हेमू को बेहोशी की हालत में अकबर महान के सामने लाया गया और इसने बहादुरी से हेमू का सिर काट लिया और तब इसे गाजी के खिताब से नवाजा गया. इसके तुरंत बाद जब अकबर महान की सेना दिल्ली आई तो कटे हुए काफिरों के सिरों से मीनार बनायी गयी जो जीत के जश्न का प्रतीक है और यह तरीका अकबर महान के पूर्वजों से ही चला आ रहा है.हेमू के बूढ़े पिता को भी अकबर महान ने कटवा डाला. और औरतों को उनकी सही जगह अर्थात शाही हरम में भिजवा दिया गया
चित्तौड़ पर कब्ज़ा करने के बाद अकबर महान ने तीस हजार नागरिकों का क़त्ल करवाया.
2 सितम्बर 1573 के दिन अहमदाबाद में उसने 2000 दुश्मनों के सिर काटकर अब तक की सबसे ऊंची सिरों की मीनार बनायी. वैसे इसके पहले सबसे ऊंची मीनार बनाने का सौभाग्य भी अकबर महान के दादा बाबर का ही था. अर्थात कीर्तिमान घर के घर में ही रहा!
अकबरनामा के अनुसार जब बंगाल का दाउद खान हारा, तो कटे सिरों के आठ मीनार बनाए गए थे. यह फिर से एक नया कीर्तिमान था. जब दाउद खान ने मरते समय पानी माँगा तो उसे जूतों में पानी पीने को दिया गया.
अकबर ने मुजफ्फर शाह को हाथी से कुचलवाया. हमजबान की जबान ही कटवा डाली. मसूद हुसैन मिर्ज़ा की आँखें सीकर बंद कर दी गयीं. उसके 300 साथी उसके सामने लाये गए और उनके चेहरे पर गधों, भेड़ों और कुत्तों की खालें डाल कर काट डाला गया. विन्सेंट स्मिथ ने यह लिखा है कि अकबर महान फांसी देना, सिर कटवाना, शरीर के अंग कटवाना, आदि सजाएं भी देते थे.
5-नए धर्म की स्थापना 
अकबर  और  मुहम्मद साहब  में  कुछ  ऐसी समानताएं  हैं ,जिन पर  लोगों  ने ध्यान  नहीं  दिया . जैसे दौनों अनपढ़  और निरक्षर  थे . दौनों  को  कई  कई औरतें  रखने   का  शौक  था .और   जैसे  मुहम्मद  साहब  ने बिना  किसी योग्यता  के  खुद  को अल्लाह  का रसूल  घोषित   कर  दिया ,और  इस्लाम  नामका   नया दीन (  ) चला  दिया . उसी तरह अकबर  ने भी खुद  को अल्लाह  का खलीफा (    )  घोषित  करके  "दीने  इलाही -   دین الهی‎  " नामका  धर्म  चला  दिया . यहाँ  तक   मुसलमानों  के कलमें  में यह  शब्द "अकबर   खलीफतुल्लाह  -  اكبر خليفة الله  "  भी  जुड़वा  लिए थे .उसने लोगों को आदेश दिए कि आपस में “अल्लाह ओ अकबर” कह कर अभिवादन किया जाए.यही  नहीं  अकबर ने  हिन्दुओं  को गुमराह  करने  के  लिए एक फर्जी उपनिषद् "अल्लोपनिषद  "  बनवाया  था ,जिसमे अरबी और संस्कृत  मिश्रित  भाषा  में मुहम्मद  को अल्लाह  का रसूल और अकबर को खलीफा बताया  गया  था . इस फर्जी उपनिषद् का उल्लेख  महर्षि  दयानंद  ने सत्यार्थ  प्रकाश  में  किया   है .और  अल्लोपनिषद  का मुंहतोड़  जवाब भंडाफोडू  ब्लॉग  ने "अरबोपनिषद " बना  कर  दिया  था .फिर  भी  जो  नादान  लोग जोधा अकबर सीरियल   से  प्रभावित  होकर अकबर  को महान  और सेकुलर मानते  हैं  उन्हें  पता  होना  चाहिए  कि यह सीरियल  नहीं  एक  जिहाद  है ,महाराणा  प्रताप  के सामने  अकबर जैसे दुष्ट  का महिमा मंडन  उचित  नहीं  है  क्योंकि  ,

"अकबर महान अगर, राणा शैतान तो
शूकर है राजा, नहीं शेर वनराज है
अकबर आबाद और राणा बर्बाद है तो
हिजड़ों की झोली पुत्र, पौरुष बेकार है
अकबर महाबली और राणा बलहीन तो
कुत्ता चढ़ा है जैसे मस्तक गजराज है
अकबर सम्राट, राणा छिपता भयभीत तो
हिरण सोचे, सिंह दल उसका शिकार है
अकबर निर्माता, देश भारत है उसकी देन
कहना यह जिनका शत बार धिक्कार है
अकबर है प्यारा जिसे राणा स्वीकार नहीं
रगों में पिता का जैसे खून अस्वीकार है.

http://agniveer.com/akbar-great-hi/
http://www.hindunet.org/hindu_history/modern/akbar_vs.html


11 टिप्‍पणियां:

  1. Thanks for the information and the link shared .
    Indeed it is very dedicated and honest effort.

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  2. आ बैल मुझे मार !!

    दोस्तो यह कहावत सबसे ज्यादा भगवानो पर लागु होती है !!
    भगवान वरदान हमेशा राक्षसो के हि दिया करते थे और जब भी किसी राक्षस को वरदान मिलता तो वोदेवी देवताओ और भगवान की नाक मे दम कर देता !!
    महेसासुर को ब्रम्हा ने वरदान दिया उसने देवताको की बैड बजाई !!

    रावण को संकर ने वरदान दीये उसने स्वर्ग का मर्ग बनाने का काम लगाकर भगवानो को परेशान कर डाला !!

    हिरण्य कश्यप को ब्रम्हा ने वरदान दिये उसने विष्णु की नाक मे दम कर दिया ।।

    दैत्यराजा दानवीर राजा बली को संकर ने वरदान दिये उसने तीनो लोको मे हाहाकार मचा दिया !!

    दैत्यगुरु शुक्राचार्य को संकर भगवान ने राक्षदो को जिनंदा करने का वरदान दिया तो उन्होनेभी युध्द मे मरे हुए राक्षसो के जिंदा कर कर के देवताओ की नाक मे दम कर दिया !!

    और भसमासुर ने तो हद कर दि थी संकर भगवान ने उसे वरदान दिया था कि वो जिसके भी सिर पर हाथ रख देगा वो भस्म हो जायेग तो उसने न जाने कितने देवताओ को उसने भस्म कर दिया था, 36 करोड़ मे से कै देवता को भस्मासुर ने कम कर दिया था और तो और वो स्वय़ं संकर भगवान को हि भस्म करने चला था तो फिर जैसे तैसे विष्णू ने उन्हे बचाया !!

    अगर राक्षसो के हाथो सबसे ज्यादा पिटाई किसी देवता कि हुइ है तो वो इन्द्र की जब भी भगवान किसी देवता को वरदान देते तो वो सबसे पहले इन्दर पर हमला कर स्वर्ग पर कब्जा करनेकी सोचता !!
    सोचने वाली बात यह है कि आज कल इंसान भी अगर किसी को हथीयार जैसे बंदुक वगैरह बेचता है तो लाईसेंस वगैरह बनवाकर निश्चीत कर लिया जाता है कि कही वो इसका विनाशकारी उपयोग ना करे, तोभी भगवानो से वरदान देते समय एसा कभी क्यो नही सोचा की वो खुद के स्वार्थ के लिये उसका विनाशकारी उपयोग करेगा !!!

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    1. Tujhe Ben@#D ye pura Blog nahi dikrahi hai kya??? Jo tu Bhoke jaraha hai!!! Yaha pe jo mohammed, Allah aur Quran ki Gungan kiya gaya hai usko sab Khol Khol ke AAKH ko PHAD PHAD ke dek le...Phir Baat karna...
      AUR YE BHI YAAD RAK TU AUR TERA NASAL WOHI "HARAM" KI PAIDAISH HAI, JO AKBAR NE SAJAYA THA....
      KHUD KO JAAN AUR VED KI GYAN LE....

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  3. akber ko to muslim bhi nahi mante aur tere chutiya hone ka yahi sabut hai ki Allah hu akber ka matlab Allah sabse bada hota hai isme mugal samrat akber ka jikr nahi hai chutiye .aur ladiyi me aksar raja ek dusre ko marte hai tere hindu dhram me to bhai bhai ko marte hai देवी देवताओं के गुण
    दोस्तो आज बात करते हे देवी देवताओ के गुणो की

    1. सभी देवी देवता चापलूसी पसंद करते हैं और अपने भक्तो से अपनी प्रशंसा सुनना पसंद करते हैं ।
    2. सभी देबी देवता क्रोधी हैं और गलती करने पर क्रोधित होकर अपने भक्तो का अनिष्ट करते हैं ।
    3. सभी देवी देवता लालची और चटोरे हैं तथा अपने भक्तो से खाने के लिए तरह तरह के व्यंजन मांगते हैं ।
    4. देवता भिखारी भी है और अपने भक्तो से रुपया, कपडा और तेल घी जैसे सामान मांगते है ।
    5. देवी देवता मांसाहारी भी हैं और मुर्गा बकरा बड़े चाव से खाते हैं ।
    6. देवी देवता आपस में भी प्रेम भाव से नहीं रहते और जिस सवारी का उपयोग एक देवता करता है। उसका प्रयोग दूसरा देवता नहीं कर सकता । अगर उनमे मेल जोल होता तो सभी देवी देवता इंद्र और सूर्य की तरह हाथी घोडा को सवारी के लिए प्रयोग करते ना कि चूहे, उल्लू, मोर गधे, कौवे जैसे पशु पक्षियों को सवारी बनाते ।
    7. सभी देवी देवता हिंसक हैं और अपने साथ हमेशा अस्त्र शस्त्र रखते हैं ।
    8. देवी देवताओ को भी अपनी जान का खतरा होता है और वो अपनी आत्मरक्षा के लिए अपने साथ हथियार रखते हैं ।। कुछ सवाल है मेरे मन में जो मुझको बहुत कंफ्यूज कर रहे हैं -
    १. क्या देवकी और वासुदेव वास्तव में ही यादव थे ?
    यदि हाँ तो फिर देवकी वासुदेव को आर्यपुत्र कहकर क्यों संबोधित करती थी ?
    अगर नहीं तो फिर कृष्ण कैसे यदुवंशी हो गया ? क्या सिर्फ कृष्ण को इसलिए यदुवंशी बना दिया गया क्योंकि उसका पालन पोषण नन्द ने किया था जो यादव थे ?
    २. महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद गांधारी कृष्ण को श्राप देती है कि तुम्हारे यहाँ सेजाते ही यादवो का वंश समाप्त हो जायेगा जिसके बाद यादव आपस में लड़कर समाप्त हो गए और कृष्ण का वध एक बहेलिये ने कर दिया |
    अगर यादवो का वंश समाप्त हो गया था तो फिर कृष्ण का पुत्र प्रद्युम्न कैसे जीवित रह गया था ?
    क्या प्रद्युम्न यादव नहीं था ? अगर यादव नष्ट हो गए थे तो फिर यादवो की उत्पत्ति कैसे हो गयी ?
    ३. यादव वंश की समाप्ति के अर्जुन कृष्ण की पत्नियों को हस्तिनापुर ले जा रहा था तो कुछ भीलो ने अर्जुन को हराकर कृष्ण की पत्नियों को उससे छीन लिया |
    अर्जुन एक साथ इतना निर्बल कैसे हो गया कि कुछ भीलो ने ही उसको आराम से पराजित कर दिया | क्योंकि ये घटना तो पांडवो के वानप्रस्थ जाने से बिलकुल पहले की हैं |
    पौराणीक िमथ्या ग्रंथो के िहसाब से पांडवो ने लगभग ४० वर्ष शासन किया था इस तरह से क्या कुंती का श्राप ४० वर्ष बाद फलीभूत हुआ था |
    ४. अगर कृष्ण यदुवंशी थे तो पांडव यदुवंशी क्यों नहीं थे क्योंकि पांडवो की माता कुंती कृष्ण की बुआ थी |
    इस तरह से उनके बीच खून का सम्बन्ध था | अगर पांडव भी यदुवंशी थे तो फिरवो नष्ट क्यों नहीं हुए ?
    अगर पांडव यदुवंशी नहीं थे तो फिर उनके बीच परस्पर वैवाहिक सम्बन्ध कैसे स्थापित हो गए ? क्या उस समय वर्ण व्यवस्था या जाति प्रथा नहीं थी ? अगर जाति प्रथा नहीं थी तो यादव, क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य क्या थे जिनका महाभारत में बार बार जिक्र हुआ है ?
    अगर छुआछूत नहीं थी तो फिर कर्ण को बार बार शुद्पुत्र कहकर क्यों अपमानित किया जाता रहा ?
    जवाब शांित से सोच कर दै

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  4. जिहाद

    जिहाद एक अरबी भाषा का शब्द है जो 'जहादा' 'Jahada' शब्द से बना है जिसका मायने होता है 'मेहनत करना' 'जद्दोजहद करना' 'संघर्ष करना' अंग्रेजी में इस कहेंगे (to strive or to struggle) मिसाल के तौर पर 'अगर एक छात्र उत्तीर्ण होने के लिए मेहनत करता है, तो वह जिहाद कर रहा है.' अरबी भाषा के शब्द जिहाद का एक अर्थ 'अपनी नफ़्स से संघर्ष करना' भी है. अपने समाज को बेहतर बनाने के लिए मेहनत करने को भी जिहाद कहते हैं और यह अपने अंतर एक अर्थ और समेटे है जिसका अर्थ होता है कि 'आत्म रक्षा के लिए संघर्ष' या चढाई हो जाने या अत्याचार होने पर रण-भूमि में चढाई करने वाले या अत्याचार के विरुद्ध लड़ना.

    जैसा कि हम देख चुके है कि जिहाद एक अरबी शब्द है उसके मायने क्या है.
    सुरह-तौबा की आयत संख्या पांच (5) से पहले की कुछ आयतों में शांति और समाधान की चर्चा है और शांति संधि का पालन न करने पर अल्लाह ने बहुदेववादियों को चार महीने की चेतावनी देता है और फिर उसके बाद का यह आदेश उस युद्धरत सेना के लिए है कि उन्हें अर्थात मक्का के मुश्रिकीन को क़त्ल करो उन्हें मारो. कुर'आन की इस आयत का आगाज़ इसलिए हुआ क्यूंकि युद्ध में मुस्लिम अपने दुश्मन को जहाँ पाए वहां मारे और यह स्वाभाविक ही है कि कोई भी आर्मी जनरल अपनी सेना का हौसला बढ़ाता है और कहता है कि "डरना नहीं, बिलकुल भी, और अपने दुश्मन के छक्के छुड़ा दो. उन्हें युद्ध में जहाँ पाओ मारो और उसका वध कर दो.

    अर्थात "और यदि मुश्रीकों में से कोई तुमसे शरण मांगे तो तुम उसे शरण दे दो. यहाँ तक कि वे अल्लाह की वाणी सुन लें. फिर उन्हें उनके सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दो क्यूंकि वे ऐसे लोग लोग है जिन्हें ज्ञान नहीं."
    आज दुनियाँ का कौन सा आर्मी जनरल होगा जो अपने सैनिकों से कहेगा कि अपने दुश्मन को जाने दो. लेकिन अल्लाह सुबहान व त-आला अपनी किताब अल-कुर'आन में फरमाता है कि अगर तुम्हारा दुश्मन शान्ति चाहता है तो न सिर्फ शान्ति करो बल्कि उन्हें उनके सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दो. आज कौन सा ऐसा आर्मी जनरल होगा जिसने इस तरह का दयालुता से परिपूर्ण आदेश दिया होगा!
    SUNNIKING TEAM INDIA

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    1. Bete..
      JIHAD ki arth kya hai ye hum tere se jyada malumaat rakte hai.. Tujhe sikhane ki Jarurat nahi.. Quran 9.5 dekle Jihad pata chal jayega...
      Aur jo aaj kal KUTTE BILLI jaise wapas main ladmarte hai, Kafiro se ladmarte hai... Ye sab tere B.C RASOOL ki den hai...Aur JIHAD Ka HISSA hai..
      Yaha tak ki MUSALMAN Aurat bhi APNE JISM ka SAUDA karlete hai JIHAD Keliye.. PER DAY 100-100 JIHADIO ke saath SEX karti hai...
      YE Hai ISLAM Aur ISKA SACHAYI....

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  5. JADA JANKARI KE LIYE VISIT KARE
    http://sunnikingteam.blogspot.in

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    1. Abe.. Sura Aejab (33) verse no 50:- main Mohammed ko sare aurat ko bhog ne ki permisson kese mili, jab ki dusro ko nahi??? Kya wo allah ka ma ki yaar tha????

      Abhi bhi keheta hu Ved ko jaan aur ye PORNOGRAPHIC RELIGION (islam) ko bhul ja....

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    2. priyamjeet m ji mere ek saval ka jawab do. apke bhagavan krishan ne qu 16000 hajar vivah kiya tha.

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