शुक्रवार, 30 अगस्त 2013

अल्लाह की सूरत कैसी है ?

अल्लाह  सर्वशक्तिमान है ,सब कुछ  कर सकता  है ,निराकार  है उसका  जिस्म या शारीरिक  अंग  नहीं है ,अल्लाह अतुलनीय  है ,उसके   जैसा  कोई मनुष्य ,प्राणी या वस्तू   नहीं  है .और न अल्लाह की कोई  तस्वीर  ही बनाई  जा सकती है .और न कोई इस जीवन में अल्लाह  को देख सकता  है .  केवल  मरने के बाद  जो मुसलमान  जन्नत  में जायेंगे वही अल्लाह का साक्षात्  दर्शन  कर सकेंगे .कुरान और हदीसों में अल्लाह  के बारे में ऐसी ही  बातें   बतायी  गयी हैं .
लेकिन   कुरान  हदीसों  में अल्लाह के बारे में कुछ  ऐसे  संकेत(Clues)  दिए  गए हैं , जिनके  सहारे हम  आसानी  से पता  कर  सकते हैं कि अल्लाह  साकार है , उसके हाथ और चेहरा  भी है . यही नहीं   की लम्बाई (Hight )  कितनी  है .यही  नहीं  अल्लाह की सूरत  कैसी  है .अल्लाह के बारे में यह  जानकारी  हासिल  करने  के लिए  हमें  वही  विधि  अपनानी होगी ,जो गुप्तचर विभाग(C I D उपब्ध सुरागों  के आधार पर किसी लापता  व्यक्ति का "स्केच - sketch  " बना कर  उसे खोज   लेती  है , या  पकड़  लेता  है .

1-अल्लाह  की आत्मा 
इस बात से कोई भी व्यक्ति इंकार नहीं कर सकता  कि आत्मा बिना शरीर के नहीं रह सकती ,यदि अल्लाह  की आत्मा भी  है ,तो शरीर अवश्य   होगा . यदि अल्लाह ने अपनी आत्मा आदम  के जिस्म  में डाल  दी थी .तो अल्लाह का जिस्म   निष्प्राण  हो गया  होगा .आत्मा तो प्राणियों  में होती है .
"और अल्लाह ने आदम को  दुरुस्त  किया .फिर उसके जिस्म में अपनी रूह (आत्मा )  डाल  दी "
सूरा -अस सजदा 32 :9
"अल्लह ने फरिश्तों  से कहा  ,जब मैं आदम  को दुरुस्त कर  दूँ  ,और उसके जिस्म में अपनी आत्मा डाल दूँ ,तो तुम  सिजदे में गिर जाना  " सूरा -अल हिज्र 15 :29

2-अल्लाह  के हाथ 
किसी काम  को  करने के लिए हाथों  की जरुरत  होती है , इसलिए  साकार अल्लाह ने हाथों का प्रयोग किया था , इन आयतों  में हाथ  और हाथों  शब्द का प्रयोग   किया गया है .और इन्हीं  हाथों से अल्लाह ने आदम  को बनाया  था .
"और अल्लाह के हाथ  उन लोगों के हाथों  के ऊपर हैं "सूरा -अल फतह 48 :10
"रब  ने कहा कि हे शैतान तुझे किस बात ने सिजदा  करने से रोका  ,जबकि मैंने आदम को अपने हाथों  से बनाया है "सूरा -साद 38 :75
"क़यामत के दिन यह धरती  पूरी  की पूरी अल्लाह की मुट्ठी  में होगी ,और आकाश उसके दायें  हाथ  में लिपटा  होगा " सूरा -अज जुमुर 39 :67

3-आदम  को कैसा बनाया 
आप  पढ़ चुके हैं कि  अल्लाह ने आदम को अपने हाथों  से बनाया था ,अब हदीस आदम  की ऊंचाई के बारे में बता    रही है ,
अबू हुरैरा ने कहा कि  रसूल ने बताया ,अल्लाह ने आदम  की ऊंचाई 60 हाथ (Cubits ) बनाई  थी . और जो भी व्यक्ति जन्नत में जायेगा  उसकी ऊंचाई  भी आदम  के  बराबर  हो   जाएगी ."सही  बुखारी - जिल्द 4   किताब 55 हदीस 543
नोट -यदि  हम  मुहम्मद साहब की इन हदीसों  को सही माने   कि  अल्लाह  ने आदम  ऊंचाई  60   हाथ  यानी  90  फुट (  27.5 meters  ) बनाई  थी . जो एक ऊंचे से ऊंचे जिराफ  से अधिक है .और एक दस मंजिला  भवन  से भी अधिक है .और हमें  यह भी  पता होना चाहिए कि इस्लामी  मान्यता के अनुसार मनुष्य यानि आदम  की सृष्टि  केवल पांच  हजार साल पहले ही  हुई थी .
अबू  हुरैरा ने कहा कि  रसूल ने बताया है ,आदम  की सूरत अल्लाह  जैसी बनाई  गयी थी . और लम्बाई 60 हाथ (30 मीटर ) थी
"حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، عَنْ مَعْمَرٍ، عَنْ هَمَّامٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ خَلَقَ اللَّهُ آدَمَ عَلَى صُورَتِهِ، طُولُهُ سِتُّونَ ذِرَاعًا،  "
"सही बुखारी - जिल्द 8 किताब 74 हदीस 246
नोट- इस हदीस में पैमाने के लिए अरबी में "जिरआ  -   ذِرَاعًا "शब्द का प्रयोग किया है , एक "जिरआ- ذِرَاعًا " कंधे से  हाथ कीबीच की उंगली  के बराबर  होता है .इसे गज या (Cubit ) कहते  हैं .

4-अल्लाह  का चेहरा 

चेहरा या सूरत साकार व्यक्ति  का ही होता है , अर्थात  अल्लाह निराकार नहीं हो सकता
 "तुम  जिस दिशा  में  मुंह करोगे  अल्लाह का चेहरा उसी  तरफ    होगा "
" ۚ فَأَيْنَمَا تُوَلُّوا فَثَمَّ وَجْهُ اللَّـهِ  (البقرة ، 2: 115
सूरा -बकरा 2:115
" जो अल्लाह  के चहरे पर प्रसन्नता  चाहते हैं  वही सफल होते हैं "
" لِلَّذِينَ يُرِيدُونَ وَجْهَ اللَّهِ وَأُولَئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ (الروم ، 30: 38).
सूरा -रूम 30:38
" जो लोग  अल्लाह  के चहरे  की आकांक्षा  के लिए देते हैं ,वह कई गुना  पाते  हैं
" مِنْ زَكَاةٍ تُرِيدُونَ وَجْهَ اللَّهِ فَأُولَئِكَ هُمُ الْمُضْعِفُونَ (الروم ، 30: 39
सूरा रूम -  30:39
"हम  तो अल्लाह के चहरे की ख़ुशी  के लिए देते हैं ,हमें कुछ  नहीं  चाहिए "
إِنَّمَا نُطْعِمُكُمْ لِوَجْهِ اللَّهِ لَا نُرِيدُ مِنْكُمْ جَزَاءً وَلَا شُكُورًا (الإنسان ، 76: 9
 सूरा -दहर 76 :9
नोट- इन सभी आयतों  में अरबी में " वज्ह -  وَجْهَ  " शब्द आया  है इसका अर्थ चेहरा  या Face  होता  है .
जिस तरह अल्लाह  के हाथ  हैं  उसी तरह अल्लाह  का चेहरा  भी है , जो इन आयतों  से पता चलता है . और अल्लाह ने अपनी शक्ल     जैसा ही  आदम  को बनाया  था ,
5-आदम  की सूरत अल्लाह  जैसी थी
अबू  हुरैरा  ने कहा  कि  रसूल  ने बताया  ,अल्लाह  ने आदम की  सूरत अपने जैसी   बनाई  थी .( created Adam in HIS own image -  " خلق الله آدم على صورته "
  सही मुस्लिम -किताब 40 हदीस 6809
"इब्ने  हातिम  ने   जहा कि रसूल  ने बताया है ,यदि  तुम   में से  कोई आपस में लड़ाई  करे ,तो उसे अपने   विरोधी व्यक्ति  के चहरे  पर  प्रहार  नहीं  करना  चाहिए . क्योंकि अल्लाह  ने आदम  की  शक्ल अपने  जैसी  बनाई थी "
 सही मुस्लिम -किताब 32  हदीस 6325

स्पष्ट  है कि  जब अल्लाह ने आदम की सूरत अपनी जैसी बनाई  थी ,तो इसका मतलब है कि  अल्लाह की सूरत  आदम की सूरत जैसी थी .अर्थात आदम और अल्लाह की सूरत  एक जैसी   है .

6-कुरान से सबूत 

चूंकि कुछ  लोग  हदीसों  की इन बातों को अप्रमाणिक  बताने का  प्रयत्न  करेंगे , इसलिए  कुरान की यह आयत दी  जा रही है ,जिसमे  साफ  कहा गया है ,आदम  की सूरत अल्लाह  की सूरत जैसी  थी ,
" जिसने (अल्लाह ने )  इन्सान  को अच्छी  बनावट से बनाया " सूरा -तीन 95 :4
(who created humans in the best image)

لَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ فِي أَحْسَنِ تَقْوِيمٍ  (التين ، 95: 4).
नोट-इस आयत में  बनावट  के लिए अरबी में "तकवीम - تَقْوِيمٍ   " शब्द काप्रयोग किया गया  है . और इस शब्द की तफ़सीर (व्याख्या  ) में इब्ने कसीर और इमाम शुयूती  में अपनी किताब "अल तबरी " में  " तकवीम -  تَقْوِيمٍ  " का अर्थ  सूरत  ( Image )   बताया है . और  इस आयत  का सही  अर्थ  है 'अल्लाह  ताला ने मनुष्यों  की सूरत अपने जैसी  बनायी  है , जो  सबसे अच्छी  सूरत  है .
"خلق الله آدم على صورته، على صورة أفضل "
(His Highness, created human beings on His Image, the Best Image)

7-प्रमाणों  का विश्लेषण 

इस  लेख में दी गयी हदीसों और कुरान की आयतों  का  क्रमानुसार   जमाकर  पढ़ने  से यह तथ्य   निकलते  हैं ,1 अल्लाह निराकार नहीं  है 2 .उसका  शरीर  है ,जिसमे आत्मा  भी है . अल्लाह   के हाथ , और चेहरा  यानी सूरत भी  है .3 .आदम की सूरत  अल्लाह जैसी  थी . अर्थात अल्लाह की सूरत आदम   की सूरत  जैसी थी .अब  प्रश्न  यह है कि हजारों  साल  पहले  के व्यक्ति अर्थात  आदम  की सूरत  कैसी रही होगी , जो अल्लाह  की सूरत  जैसी  थी , इस  प्रश्न  का उत्तर  कुरान और हदीसों  से नहीं मिल सकेगा   बल्कि  विज्ञानं  ने   दे दिया   है ,जो इस प्रकार  है
8-आदम  अर्थात आदिमानव 

इस्लामी विद्वान्  विश्व  के प्रथम  मनुष्य यानी आदम  की रचना  करीब  13  से  14 हजार  पहले   मानते हैं . लेकिन  वैज्ञानिक  प्रमाणों  के आधार पर मनुष्य की उत्पत्ति  पचास हजार साल पहले  हुई थी उसे" होमो इरेक्टस-HomoErectus   " कहा  जाता है .यद्यपि दो लाख  पचास हजार पहले चिम्पांजी  जैसे प्राणी  बने थे उन्हें  मनुष्य  नही  माना   जा सकता  है .उनका  नाम " होमो हैबिलिस - Homo habilis"  कहा  जाता है .वह अर्धमानव  थे .वास्तव में आदम  भी एक होमो इरेक्टस   ही  था . दौनों  पैरों  पर  सीधा  खड़ा   हो सकता  था .और जिसे अल्लाह ने अपना जैसा  बनाया  था .(Allah created Adam in His picture ).अर्थात अल्लाह  की सूरत एक आदिमानव   जैसी  है
.
पाठकों  से निवेदन  , हमने  तो अल्लाह  सुराग  लगा कर उसकी  सूरत  कैसी  है ,यह सबको बता  दिया  और इस रहस्य का भंडा फोड़  दिया . अब आप  लोग गूगल  इमेज  में "homo erectus " सर्च  करिए आपको अल्लाह की असली सूरत  दिख  जाएगी .!

http://www.answering-islam.org/authors/shamoun/rebuttals/zawadi/allahs_pyhsical_image.html



12 टिप्‍पणियां:

  1. इन्सान पहले अपने आप को तो खोज ले.

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  2. आप की ये कोशिश से हजारो हिन्दू भटकने से बचे है आज आप का ब्लॉग सुपर हिट है आप ने जिस तरह से इस अरबी संघठन की बैंड बजायी है बकई काबिले तारीफ है ..आप के ब्लॉग ने जाकिर जैसे कुतर्कियो का भी पर्दाफाश करा है

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  3. namste
    bahut din bad apka blog padh raha hun aapka upkar jagruk hindu kabhi nahi bhulege yah bharat ki bahut badi sewa hai
    dhanyabad
    subedar singh

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  4. are mere bhai to 25 30 lakh saal pehle tumhare avtar to kide makode ya single cell ke roop me hi honge.
    ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha
    ha ha ha ha

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  5. PART 1
    अल्लाह


    अल्लाह तआला एक है कोई उसका शरीक नहीं, न जात में, न सिफ़ात में, न अफ़आल में, न अहकाम में, न अस्मा में। तमाम जहानों का बनाने वाला वही है!

    ज़मीन आसमाँ, अर्श व कुर्सी, लोह व क़लम, चाँद व सूरज, आदमी-जानवर, दरिया, पहाड़, वगैरह दुनिया में जितनी भी चीज़ें हैं, सबका पैदा करने वाला वही है, वही रोज़ी देता है, वही सबको पालता है। अमीरी-गरीबी, इज्ज़त-ज़िल्लत, मारना-जिलाना सब उसके इख्तयार में है। वह जिसे चाहता है, इज्ज़त देता है और जिसे चाहता है ज़िल्लत देता है। हम सब उसके मोहताज हैं, वो किसी का मोहताज नहीं, वो हमेशा से है और हमेशा रहेगा। वह हर ऐब से पाक है, उसके लिए किसी ऐब का मानना कुफ्र है। वह हर ज़ाहिर छिपी चीज़ को जानता है। हम सब उसके बंदे हैं। वो हमारा मालिक है, वह एक और अकेला है। वही इबादत का हक़दार है। दूसरा कोई इबादत के लायक़ नहीं, हम सब उसकी मख़लूक़ हैं, वो हमारा ख़ालिक है, वो अपने बंदों पर रहमान व रहीम है। वह मुसलमानों को जन्नत और का़फिरों को दोज़ख़ में सज़ा देगा।अल्लाह तआला एक और अकेला है न कोई उसका लड़का है न वो किसी से पैदा हुआ है, न कोई उसके बराबर है। किसी को ख़ुदा का बेटा भाई या रिश्तेदार मानना कुफ्र है। मसअला- अल्लाह तआला को अल्लाह मियाँ या ऊपर वाला जैसा चाहेगा, वैसा होगा। ऐसे अल्फ़ाज़ अल्लाह तआला के लिए बोलना मना है। मसअला हक़ीक़तन रोज़ी पहुँचाने वाला वही है फ़रिश्ते वग़ैरह वसीला और वास्ता हैं। मसअला- जो शख्स अल्लाह तआला की ज़ात व सिफात के अलावा किसी और चीज़ को क़दीम माने या दुनिया के ख़त्म होने में शक करे, वो का़फिर है। अक़ीदह- दुनिया की ज़िंदगी में अल्लाह ताला का दीदार सिर्फ हमारे प्यारे नबी सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम के लिए ख़ास है और आख़ेरत में हर मुसलमान को अल्लाह तआला का दीदार होगा। ख़्वाब में दीदार इलाही दिगर अम्बिया ऐ कराम बल्कि औलिया अल्लाह को भी हुआ है। हमारे इमाम आज़म को ख्वाब में सौ बार ज़ियारत हुई।

    हर प्रकार की प्रशंसा और स्तुति अल्लाह के लिए योग्य है।
    ऐ मुस्लिम भाई ! आप ने अल्लाह की ओर आमन्त्रण और अल्लाह सुब्हानहु व तआला के अस्तित्व की वास्तविकता को स्पष्ट करने का जो काम किया है, वह वास्तव में एक सुखद काम है। अल्लाह तआला की जानकारी शुद्ध प्रकृति और शुद्ध बुद्धि से मेल खाती है, और कितने ऐसे लोग हैं कि जब उनके सामने हक़ीकत (सत्यता) स्पष्ट हो गई, तो शीघ्र ही उस ने इस्लाम स्वीकार कर लिया। अगर हम में से प्रत्येक व्यक्ति अपने दीन के प्रति अपने दायित्व को पूरा करे तो अधिक भलाई हासिल हो, अत: ऐ मुस्लिम भाई आप को बधाई हो कि आप ईश्दूतों और पैग़ंबरों का कार्य कर रहे हैं, तथा आप के लिए बहुत बड़े अज्र व सवाब की शुभसूचना है जिस का आप से आप के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ज़ुबानी वादा किया गया है, आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का फरमान है :"अल्लाह तुम्हारे कारण एक आदमी को भी मार्गदर्शन प्रदान कर दे।
    जहाँ तक अल्लाह तआला के अस्तित्व के प्रमाणों का प्रश्न है तो ये सोच विचार करने वाले के लिए स्पष्ट हैं, बहुत अधिक खोज और लंबे सोच विचार की आवश्यकता नहीं है, विचार करने से पता चलता है कि वे तीन प्रकार के हैं : प्राकृतिक प्रमाण, हिस्सी (इन्द्रिय-ज्ञान और चेतना संबंधी) प्रमाण और शरई प्रमाण।
    प्राकृतिक प्रमाण :
    शैख उसैमीन रहिमहुल्लाह फरमाते हैं :
    अल्लाह के अस्तित्व पर प्रकृति (फित्रत) का तर्क उस आदमी के लिए सब से मज़ूबत प्रमाण है, इसी लिए अल्लाह तआला ने अपने कथन : (आप एकांत हो कर अपना मुँह दीन की ओर कर लें।) के बाद फरमाया है : "अल्लाह तआला की वह फित्रत (प्रकृति) जिस पर उस ने लोगों को पैदा किया है।" (सूरतुर्रूम : 30)
    अत: फित्रते सलीमा (शुद्ध प्रकृति) अल्लाह के वजूद की गवाही देती (साक्षी) है, और इस प्रकृति से वही आदमी मुँह मोड़ सकता है जिसे शैतानों ने भटका दिया हो, और जिसे शैतानों ने भटका दिया है वह इस प्रमाण और तर्क को नकार सकता है। (शर्ह अस्सफ्फारीनिया से समाप्त हुआ)
    SUNNIKING TEAM

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  6. PART 2

    क्योंकि इंसान अपने दिल में इस बात का अनुभव करता है कि उसका एक पालनहार और सृष्टा है और वह उसकी आवश्यकता का एहसास करता है, और जब किसी बड़े भंवर में फंसता है, तो उसके दोनों हाथ, दोनों आँखें और उसका दिल आसमान की ओर आकर्षित हो जाता है, वह अपने पालनहार से सहायता और मदद मांगता है।
    हिस्सी (इन्द्रिय संबंधी) प्रमाण :
    सार्वलौकिक घटनाओं का अस्तित्व में आना, वह इस प्रकार कि हमारे आस पास के लोक और संसार में आनिवार्य रूप से विभिन्न प्रकार की घटनायें अस्तित्व में आती हैं, उन घटनाओं में सर्वप्रथम सृष्टि (उत्पत्ति) की घटना है, अर्थात् चीज़ों की पैदाइश की घटना है, सारी चाज़ें; पेड़, पत्थर, मनुष्य, धरती, आकाश, समुद्र, सागर.
    यदि कहा जाये कि इन घटनाओं और इन के अलावा अन्य ढेर सारी घटनाओं को किसने अस्तित्व में लाया है और उन पर नियंत्रण करता है?
    तो उसका उत्तर या तो यह होगा कि ये बिना किसी कारण के सहसा अस्तिव में आ गया हैं, तो ऐसी अवस्था में कोई भी नहीं जानता कि इन चीज़ों का अस्तित्व कैसे हुआ है, यह एक संभावना है। एक दूसरी संभावना यह है कि इन चीज़ों ने स्वयं ही अपने आप को पैदा कर लिया है और उन पर नियंत्रण रखती हैं। तथा एक तीसरी संभावना भी है और वह यह है कि इन चीज़ों का एक अविष्कारक है जिस ने इनका अविष्कार किया है और उनका एक सृष्टिकर्त्ता है जिस ने इन की रचना कप है, इन तीनों संभावनाओं में सोच विचार करने के बाद हम पाते हैं कि पहली और दूसरी संभावनायें नामुमकिन और असम्भव हैं, और जब पहली और दूसरी संभावनायें नामुमकिन हो गयीं, तो अनिवार्य रूप से यह सिद्ध हो गया कि तीसरी संभावना ही ठीक और स्पष्ट है कि इन चीज़ों का एक सृष्टिकर्त्ता है जिसने इन को पैदा किया है और वह अल्लाह तआला है, और इसी चीज़ का क़ुर्आन में उल्लेख हुआ है, अल्लाह तआला ने फरमाया : "क्या ये लोग बिना किसी पैदा करने वाले के ही पैदा हो गये हैं या ये स्वयं उत्पत्तिकर्ता (पैदा करने वाले) हैं? क्या इन्हों ने आकाशों और धरती को पैदा किया है? बल्कि यह विश्वास न करने वाले लोग हैं।" (सूरतुत्तूर: 35-36)
    फिर ये सभी सृष्ट वस्तुयें किस समय से मौजूद हैं? इन पूरे वर्षों के दौरान उनके लिए इस दुनिया में बाक़ी रहना किसने सुनिश्चित किया है और उनके बाकी रहने के कारणों का किसने प्रबंध किया है?
    इसका उत्तर है अल्लाह ने, उसी ने हर चीज़ को उसका सुधार करने और उसके बरक़रार रहने को सुनिश्चित करने वाली चीज़ें प्रदान की हैं, क्या आप उस सुंदर हरे पौधे को नहीं देखते कि जब अल्लाह उसके पानी को रोक ले तो क्या उसके लिये जीना संभव होता है? कदापि नहीं, बल्कि वह सूख जायेगा, इसी तरह हर चीज़ के अन्दर जब आप सोच विचार करेंगे तो उसे अल्लाह तआला से संबंधित पायेंगे, सो अगर अल्लाह न होता तो चीज़ें बाक़ी न रहतीं।
    फिर देखिये कि अल्लाह ने इन चीज़ों को किस प्रकार से सुधारा और संवारा है, हर चीज़ का सुधार उसके अनुकूल और मुनासिब है, उदाहरण के तौर पर ऊँट सवारी के लिए है, अल्लाह तआला फरमाता है : "क्या वे नहीं देखते कि हम ने अपने हाथों बनायी हुई चीज़ों में से उन के लिए चौपाये (पशु भी) पैदा कर दिये, जिन के ये मालिक हो गये हैं। और उन जानवरों को हम ने उन के वश में कर दिया है जिन में से कुछ तो उनकी सवारियाँ हैं और कुछ (का मांस) खाते हैं।" (सूरत यासीन :71-72)
    ऊँट को देखिये कि अल्लाह तआला ने उसे किस तरह ताक़तवर और उसकी पीठ को बराबर बनाया है ताकि सवारी के लिये और दुर्लभ कठिनाईयों को सहन करने के लिए योग्य हो जिन्हें उसके अलावा कोई दूसरा जानवर सहन नहीं कर सकता।
    इसी तरह अन्य मख्लूक़ात के अंदर आप अपनी निगाह दौड़ायेंगे तो उन्हें उस चीज़ के अनुकूल पायें गे जिस के लिए वो पैदा की गई हैं। अत: अल्लाह तआला बहुत पाक व पवित्र है।
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  7. PART 3

    हिस्सी प्रमाणों के उदाहरणों में से :
    वो घटनायें भी हैं जो किसी कारणवश घटती हैं जो अल्लाह के मौजूद होने का पता देती हैं, उदाहरण के तौर पर अल्लाह तआला से दुआ करना, फिर अल्लाह तआला का दुआ को स्वीकार करना, अल्लाह के मौजूद होने पर तर्क और प्रमाण हैं। शैख उसैमीन रहिंहुल्लाह फरमाते हैं : जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने लोगों के लिए वर्षा की दुआ की तो आप ने कहा : ऐ अल्लाह ! हम पर वर्षा बरसा, ऐ अल्लाह हम पर वर्षा बरसा, फिर बादल छा गये और आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के मिंबर से उतरने से पहले ही वर्षा हो गई। यह रचयिता के मौजूद होने पर दलालत करता है। (शर्ह अस्सफ्फारीनिया से समाप्त हुआ )
    शरई (धार्मिक ) प्रमाण :
    सभी शरीअतें (धर्म शास्त्र) खालिक़ (सृष्टिकर्त्ता) के अस्तित्व, तथा उसके संपूर्ण ज्ञान, हिक्मत (तत्वदर्शिता) और दया व करूणा पर तर्क हैं, क्योंकि इन शरीअतों का कोई एक रचयिता (शास्त्रकार) होना आवश्यक है, और वह शास्त्रकार अल्लाह अज़्ज़ा व जल्ल है। (शर्ह अस्सफ्फारीनिया से समाप्त हुआ)
    उस ने हमें अपनी उपासना, शुक्र और ज़िक्र करने के लिए, तथा जिस चीज़ का अल्लाह सुब्हानहु व तआला ने हमें आदेश दिया है उस को अंजाम देने के लिए पैदा किया है, और आप जानते हैं कि मनुष्यों मे मुस्लिम भी हैं और काफिर भी, और यह इसलिए है कि ताकि अल्लाह तआला बन्दों को जाँचे और उनकी परीक्षा करे कि क्या वे अल्लाह की उपासना करते हैं या उसके अलावा किसी दूसरे को पूजते हैं। और यह सब कुछ अल्लाह तआला ने रास्ते को स्पष्ट कर देने के बाद किया है, जैसा कि अल्लाह तआला का फरमान है :"जिस ने मृत्यु और जीवन को पैदा किया ताकि तुम्हें जाँचे कि तुम में से कौन सब से अच्छा अमल करने वाला है।" (सूरत तबारक :2) तथा अल्लाह ताअला ने एक दूसरे स्थान पर फरमाया :"मैंने जिन्नात और मनुष्य को मात्र इसलिए पैदा किया है कि वो मेरी उपासना करें।" (सूरतुज्ज़ारियात :56)
    ‘‘सम्पूर्ण तारीफें उस अल्लाह के लिए हैं जिस की तारीफ तक बोलने वालों की पहुंच नहीं। जिस की रहमतों को गिनने वाले गिन नहीं सकते। न कोशिश करने वाले उसका अधिकार चुका सकते हैं। न ऊंची उड़ान भरने वाली हिम्मतें उसे पा सकती हैं। न दिमाग और अक्ल की गहराईयां उस की तह तक पहुंच सकती हैं। उस के आत्मिक चमत्कारों की कोई हद निश्चित नहीं। न उस के लिए तारीफी शब्द हैं। न उस के लिए कोई समय है जिस की गणना की जा सके। न उस का कोई टाइम है जो कहीं पर पूरा हो जाये। उस ने कायनात को अपनी कुदरत से पैदा किया। अपनी मेहरबानी से हवाओं को चलाया। कांपती हुई जमीन पर पहाड़ों के खूंटे गाड़े। दीन की शुरुआत उस की पहचान है। पहचान का कमाल उसकी पुष्टि है। पुष्टि का कमाल तौहीद है। तौहीद का कमाल निराकारता है और निराकारता का कमाल है कि उससे गुणों को नकारा जाये। क्योंकि हर गुण गवाह है कि वह अपने गुणी से अलग है और हर गुणी गवाह है कि वह गुण के अलावा कोई वस्तु है। अत: जिस ने उस के आत्म का कोई और साथी माना उसने द्विक उत्पन्न किया। जिसने द्विक उत्पन्न किया उसने उसके हिस्से बना लिये और जो उसके लिए हिस्सों से सहमत हुआ वह उससे अज्ञानी रहा और जो उससे अज्ञानी रहा उसने उसे सांकेतिक समझ लिया। और जिसने उसे सांकेतिक समझ लिया उस ने उसे सीमाबद्ध कर दिया और जिसने उसे सीमित समझा वह उसे दूसरी वस्तुओं की पंक्ति में ले आया। जिस ने यह कहा कि वह किसी वस्तु में है उसने उसे किसी प्राणी के सन्दर्भ में मान लिया और जिसने यह कहा कि वह किसी वस्तु पर है उस ने और जगहें उस से खाली समझ लीं।

    वह है, हुआ नहीं। उपस्थित है लेकिन आरम्भ से वजूद में नहीं आया। वह हर प्राणी के साथ है लेकिन शारीरिक मेल की तरह नहीं है। वह हर वस्तु से अलग है लेकिन शारीरिक दूरी के प्रकार से नहीं। वह कर्ता है लेकिन चेष्टा और उपकरणों पर निर्भर नहीं है। वह उस वक्त भी देखने वाला था जब कि सृष्टि में कोई वस्तु दिखाई देने वाली न थी। वह असम्बद्ध है इसलिए कि उसका कोई साथी ही नहीं है जिससे वह अनुराग रखता हो और उसे खोकर परेशान हो जाये। उसने पहले पहल सृजन का आविष्कार किया बिना किसी चिंतन की बाध्यता के और बिना किसी अनुभव के जिससे लाभ उठाने की उसे आवश्यकता पड़ी हो और बिना किसी चेष्टा के जिसे उसने पैदा किया हो और बिना किसी भाव या उत्तेजना के जिससे वह उत्सुक हुआ हो। हर चीज को उसके वक्त के हवाले किया। बेजोड़ वस्तुओं में संतुलन और समरूपता उत्पन्न की। हर वस्तु को भिन्न तबीयत और प्रकृति सम्पन्न बनाया। और इन प्रकृतियों के लिए उचित परिस्थितियां निर्धारित कीं।
    हम अल्लाह तआला से दुआ करते हैं कि वह हमें और आप को अपनी प्रिय व पसन्दीदा और प्रसन्नता की चीज़ों, तथा अधिक से अधिक दावत और धर्म के लिये कार्य करने की तौफीक़ दे, और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अल्लाह की दया और कृपा अवतरित हो।
    SUNNIKING TEAM (MOHSIN NOORI)

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  8. Yeh bakwas blog hai Quran ki ayato ka tarjuma (translation) tod marod ke likhne se kuch nahi hota Quran tafseer she samajh me aata hai mera challenge hai is blog ko likhne wale ko Quran ki tafseer padhe Jo mariful Quran ke nam she milti hai agar WO sahi nazar she use padhe to uske vichar basal jayenge kunki Quran ka translation har Kisi ki samajh me nahi aata

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  9. समझ में नहीं आता कि इस्लाम देता क्या है? सिवाय अय्याशी, हिंसा, प्रदूषण, बहकावे और गुमराह करने के अलावा।
    किसी तरह वो इस कायनात से सम्बंधित नहीं लगता।
    वैज्ञानिक आधार क्या है इस्लाम का? "सत्यवादी जी"

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  10. जब अल्लाह की मर्ज़ी के बिना एक पत्ता तक नहीं हिल सकता तो शैतान ने अल्लाह के कहे अनुसार आदम को सज़दा क्यों नहीं किया?सारा कुछ अल्लाह की मर्ज़ी से हो रहा है तो उसने काफिर क्यों पैदा किये?जब अल्लाह निराकार है जमीन आसमान उसके आगे कुछ भी नही है और वह साकार नहीं है तो कयामत के दिन आदम उसे कैसे देख पायेगा?मुहम्मद ने कुरान अपनी अक्ल से लिखी थी और एक महान ज्ञानी व्यक्ति भी ईश्वर तथा नये धर्म को बनाते समय गलतियां कर सकता हैं इसीलिए तो कुरान विरोधाभासों से भरी पड़ी है और लाखों लोगों को गुमराह करके कत्लेआम मचाया जा रहा है।

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