सोमवार, 23 सितंबर 2013

सम्भोग जिहाद !

इस्लाम  और  जिहाद  एक दूसरे के बिना नहीं   रह  सकते . यदि  इस्लाम शरीर  है ,तो जिहाद  इसकी आत्मा है . और जिस दिन इस्लाम  से जिहाद  निकल  जायेगा  उसी दिन  इस्लाम  मर  जायेगा . इसीलिए  इस्लाम को जीवित रखने के लिए मुसलमान  किसी न किसी बहाने और   किसी  न किसी  देश में  जिहाद करते  रहते हैं . इमका एकमात्र उद्देश्य  विश्व  के सभी  धर्मों  , संसकृतियों   को नष्ट करके  इस्लामी हुकूमत  कायम  करना  है . अभी तक  तो मुसलमान  आतंकवाद  का सहरा  लेकर  जिहाद  करते  आये थे ,लेकिन  इसी  साल  के अगस्त  महीने में जिहाद  का एक नया  और अविश्वसनीय  स्वरूप   प्रकट  हुआ है ,जो कुरान से  प्रेरित  होकर  बनाया गया है . लोगों  ने इसे "सेक्स  जिहाद ( Sex  Jihad )  का नाम  दिया  है .चूंकि  जिहादियों  की मदद करना भी  जिहाद  माना  जाता है ,इसलिए सीरिया में  चल रहे युद्ध ( जिहाद )  में  जिहादियों  की वासना शांत करने के लिए    औरतों  की  जरुरत  थी . जिसके लिए  अगस्त में  बाकायदा  एक फ़तवा   जारी  किया   गया था .  और उसे पढ़  कर  ट्यूनीसिया   की   औरतें  सीरिया  पहुँच  गयी  थी .और  जिहादियों   के साथ सम्भोग  करने के लिए  तैयार  हो गयीं ,और  मुल्लों ने  कुरान  का हवाला  देकर इस निंदनीय   कुकर्म  को जायज  कैसे  ठहरा  दिया  इस लेख में इसी   बात को स्पष्ट   किया  जा रहा है . ताकि लोग  इस्लाम् के इस घिनावने असली  रूप को देख सकें ,
1-जिहाद अल्लाह को प्रिय है 
अल्लाह चाहता है कि  मुसलमान   जिहाद के लिए अपने बाप ,भाई और पत्नियों को भी छोड़ दें ,तभी अल्लाह खुश होगा  , जैसा की कुरान में  कहा है
"अल्लाह   तो उन्हीं  लोगों  को अधिक पसंद  करता  है ,जो अल्लाह की ख़ुशी के लिए पंक्ति  बना कर जिहाद  करते हैं  " सूरा -अस सफ 61 :4 
" हे नबी  कहदो ,तुम्हें  अपने बाप ,भाई  , पत्नियाँ  और  जो माल तुमने कमाया है ,जिन से तुम  जितना  प्रेम  करते हो  , और उनके छूट जाने का  डर  लगा  रहता है .लेकिन  उसकी तुलना में अल्लाह के रसूल को  जिहाद  अधिक प्रिय  है " सूरा -तौबा 9 :24 

2-जिहाद में औरतों से सम्भोग  
मुसलमान  जितने भी अपराध  और  कुकर्म  करते हैं , सब  कुरान से प्रेरित  होते  हैं , क्योंकि  कुरान  हरेक कुकर्म को जायज ठहरता है .जिस से  अपराधियों  की  हिम्मत  बढ़  जाती है , और "सेक्स जिहाद "  कुरान की इस आयत के आधार  पर किया जा रहा है ,

" اللَّاتِي هَاجَرْنَ مَعَكَ وَامْرَأَةً مُؤْمِنَةً إِنْ وَهَبَتْ نَفْسَهَا لِلنَّبِيِّ إِنْ أَرَادَ النَّبِيُّ  "
" हे नबी  हमने तुम्हारे लिए वह  सभी ईमान  वाली ( मुस्लिम )  औरतें  हलाल  कर दी हैं  ,जो रसूल के  उपयोग  के लिए  खुद को  " हिबा- هِبة  " ( समर्पित ) कर दें " सूरा -अहजाब 33: 50
" and  believing woman who offers herself freely  use to the Prophet -Sura-ahzab33:50
नोट -अरबी  शब्द  हिबा  का अर्थ  अपनी किसी  चीज  दूसरों  को उपयोग के  लिए सौंप   देना  , हिबा कुछ  समय के लिए और  हमेशा के लिए भी हो सकता  है . हिबा में  मिली गयी चीज का   जैसे चाहें   उपयोग किया जा सकता है . चाहे  वह  औरत हो  या कोई वस्तू

3-जिहाद्के लिए औरतों का समर्पण 
सामान्यतः  एक  चरित्रवान  ,और शादीशुदा औरत   किसी भी दशा में  खुद को  दूसरे मर्द   के हवाले नहीं  करेगी  , जबकि उस  को यह भी पता हो  कि  उसके साथ  सहवास  किया  जायेगा .लेकिन  मुहम्मद  साहब ने   कुरान में ऐसे  नीच  काम को भी   धार्मिक   कार्य   बना दिया .  जिसका पालन  आज भी  पालन  कर रहे है , इसके पीछे  यह  कारण  है  ,  कि  इस्लाम  औरत को  भोगने की व चीज  है .मुहम्मद  साहब  जब भी जिहाद के लिए  जाते थे ,तो अपनी औरतों को घर में  बंद कर देते थे , और जिहादियों  के साथ नयी औरतें  पड़ते  रहते  थे . और  जिहादी  नयी  औरतों  के लालच में अपनी औरतें रसूल  के हवाले कर देते थे .खुद को रसूल  के हिबा करने के पीछे  यह ऐतिहासिक  घटना  है , हिजरी सन  5  के  शव्वाल महीने में  मुहम्मद साहब को जब यह पता चला कि  मदीना के सभी कबीले  के लोग उनके विरुद्ध   युद्ध   की  तयारी   कर रहे हैं .और उन्होंने  खुद के बचाव के लिये  खन्दक  भी  खोद  रखी  है . तब  मुहम्मद साहब ने  खुद आगे बढ़ कर  उन पर हमला    करने  के कूच   का हुक्म  दे दिया . इसके लिए 1500 तलवारें 300  कवच , 2000 भाले  1500 ढालें जमा कर लीं  थी .इस  जिहादी   लस्कर में  जिहादियों   की औरतें  भी  थी .  जिहादी  तो युद्ध में  नयी औरतों  के  लालच  में  गए थे .  और अपनी औरतें  रसूल  को  हिबा  कर  गए  थे .   और  रसूल ने   उन औरतों  के साथ  सम्भोग को  जायज बना दिया ,  तभी कुरान की यह आयत   नाजिल  हुई थी .जिस के अनुसार खुद को  जिहाद के लिए  अर्पित करने वाली  औरतों  से  सम्भोग करना जायज है .

4-जिहाद अल निकाह 
अंगरेजी  अखबार   डेली  न्यूज (DailyNews )  दिनांक  20 सितम्बर  2013  में प्रकाशित   खबर  के अनुसार  सीरिया  में होने वाले  युद्ध  ( जिहाद )   में  जिहादियों   लिए  ऐसी  औरतों  की  जरुरत    थी  , जो जिहादियों  के साथ  सम्भोग  करके उनकी वासना  शांत कर सकें  , ताकि वह बिना थके  जिहाद करते रहे,  इसके लिए  अगस्त   के अंत में  एक सुन्नी  मुफ़्ती  ने फतवा  भी जारी कर दिया  था . जो " फारस  न्यूज  ( FarsNews  )  छपा  था .इस  फतवे की खबर पढ़ते ही " ट्यूनीसिया  ( Tunisia )  की  हजारों  विवाहित और कुंवारी  औरतें   सीरिया  रवाना  हो गईं .और जिहाद के नाम  पर   जिहादियों  के साथ  सम्भोग  करने के लिए राजी  हो गयीं .  ट्यूनिसिया  के " आतंरिक   मामले के  के मंत्री (  Interior Minister  )"लत्फी बिन  जद्दू - لطفي بن جدو " ने ट्यूनिसिया  की National Constituent Assembly में  बड़े  गर्व   से  बताया   कि   जो औरतें  सीरिया  गयी  है ,उनमे अक्सर ऐसी औरतें  हैं  ,जो  एक दिन  में   20 -30  और यहांतक  100  जिहादियों  के साथ  सम्भोग  कर सकती  हैं .और  जो औरतें  गर्भवती  हो जाती  हैं  , उन्हें    वापिस भेज  दिया  जाता  है ,  जिस मुफ़्ती  ने   इस  प्रकार   के जिहाद  कफतावा दिया  था ,उसने  इस का नाम  "  जिहाद  अल  निकाह  - الجهاد النِّكاح  " का नाम  दिया  है .सुन्नी  उल्रमा के अनुसार  यह  एक ऐसा   पवित्र और    वैध  काम  है  ,जिसमे  एक औरत  कई कई जिहादियों  के साथ  सम्भोग करके  उनकी  वासना  शांत  कराती है .लत्फी  बिन जददू  ने यह भी  बताया कि मार्च से  लेकर अब तक   छह  हजार ( 6000 )औरतें  सीरिया  जा चुकी हैं ,और कुछ  की आयु  तो केवल  14  साल  ही है .
 http://www.hurriyetdailynews.com/tunisian-women-waging-sex-jihad-in-syria-minister.aspx?pageID=238&nID=54822&NewsCatID=352

5-सेक्स का फ़तवा 
किसी भी विषय  या समस्या  के बारे में कुरान के आधार पर  जोभी धार्मिक निर्णय  किया जाता है ,उसे फतवा  कहा  जाता है  , और मुसलामनों के लिए   ऐसे फतवा  का पालन  करना  अनिवार्य   हो जाता  है . चूँकि  इन  दिनों  सीरिया में  जिहाद  हो रहा है , जिसमें  हजारों  जिहादी  लगे हुए  हैं  .और  उनकी वासना शांत  करने के लिए औरतों की जरुरत  थी , इस लिए एक सुन्नी मुफ़्ती " शेख  मुहम्मद   अल आरिफी -  شيخ محمّد العارفي  "  ने इसी साल अगस्त में एक फतवा  जारी  कर दिया  था ,इस फतवा में कहा है कि सीरिया  के जिहादियों  की कामेच्छा (  sexual desires  )  पूरी  करने  के लिए और    शत्रु को मारने उनके निश्चय  में  मजबूती (  sexual desires and boost their determiation in killing Syrians. 
  प्रदान  करने के लिए " सम्भोग  विवाह"  यानी "अजवाज  अल जमाअ -الزواج الجماع  "  जरूरी  (intercourse marriages )है .फतवा में कहा है   ,जो भी औरत  इस  प्रकार  के  सेक्स  से जिहादियों  की मदद  करेगी उसे  जन्नत  का वादा   किया जाता है ( He also promised “paradise” for those who marry the militants  )

"    ووعد أيضا "الجنة" بالنسبة لأولئك الذين يتزوجون من المسلحين "
    यह फतवा  कुरान  की इस आयत के आधार पर  जारी  किया  गया  है ,
" जिन लोगों ने अपने मन  और  शरीर से जिहाद किया तो ऐसे   लोगों  का  दर्जा सबसे  ऊंचा   माना  जाएगा " सूरा -तौबा 9 :29

6-जिहाद के लिए योनि संकोचन 
मुसलमान   जानते हैं कि भारत में अभी प्रजातंत्र  है ,  और इसमे  जनसंख्या   का  महत्त्व  होता है .इसलिए वह लगातार  बच्चे  पैदा करने  में लगे रहते हैं .और  लगतार  बच्चे पैदा  करने से  उनकी औरतों  योनि इतनी ढीली  हो  जाती  है ,कि  उसमे उनका पति  अपना  सिर  घुसा  कर अन्दर  देख  सकता   है .और अपनी औरतों  की योनि  को संकोचित ( Vaginal Shrink   )  करवाने के लिए धनवान  मुसलमान " हिम्नोप्लास्टी -hymenoplasty   "   नामक ओपरेशन  करवा  लेते थे .चूंकि  सीरिया में सेक्स जिहाद में  एक एक  औरत दिन  में सौ सौ  जिहादियों  के साथ  सम्भोग करा  रही है , जिस से उनकी योनि ढीली    हो जाती  है . और युद्ध के समय ओपरेशन करवाना संभव    नहीं था .इसलिए पाकिस्तान की  एक दवा कंपनी(  Pakistan's pharmacies ) ने एक क्रीम  तैयार  की है .जो  कराची  से सीरिया  भेजी   जा रही  है .पाकिस्तान  के अखबार "एक्सप्रेस ट्रिब्यून ( Express Tribune  )    में  दिनांक20    अगस्त 2013 की खबर के अनुसार  कराची में  इन दिनों " योनि संकोचन  (   Vaginal Shrink Cream," )  ले लिए एक क्रीम   बिक रही  है . जिसे लोग वर्जिन  क्रीम ( Virgin Cream" )   भी  कह रहे हैं .इसमे उत्पादक ने  दावाकिया है कि   कितनी भी ढीली योनि हो , इस क्रीम  के प्रयोग से  18  साल  की कुंवारी  लड़की की योनि जैसी  सिकुड़ी  और सकरी  बन   जाएगी .इसी  अखबार की सह संपादक "हलीमाँ  मंसूर  "खुद इस क्रीम  को  देखा  , जिसके डिब्बे पर एक हंसती  हुई लड़की की तस्वीर  है .यह क्रीम  दो नामों  से बिक रही  है 1. B-Virgin’, (the package displaying a youthful girl smiling at white flowers).2 . और दूसरी का नाम 18 Again (Vaginal Shrink Cream,)   है  . जो  शीशी  में मिल रही है .इस पर लिखा है "  promise to restore a woman's virginity. "यह  क्रीम   बड़ी   मात्रा में  पाकिस्तान से  सीरिया भेजी  जा रही है  , ताकि संकुचित योनि   पाकर  जिहादी  दिल से जिहाद   करते रहें .
Re-virginising’ in a tube: ‘Purity’ for sale at Pakistani pharmacies

http://blogs.tribune.com.pk/story/18175/re-virginising-in-a-tube-purity-for-sale-at-pakistani-pharmacies/

7-सेक्स जिहाद विडिओ 
शेख  मुहम्मद अल आरिफी  ने टी वी   पर  जो सेक्स  जिहाद का फतवा  दिया  था , वह  यू ट्यूब   पर  मौजूद है ,इस विडिओ का नाम   है  , जिहाद  अल निकाह -jihad al nikah- جهاد النكاح ... فتوى حقيقة او بدعة "

http://www.youtube.com/watch?v=2ftO8Zkvl18

यह लेख पढनेके  बावजूद जो लोग इस्लाम  को धर्म मानते हैं  और मुसलमानों  से सदाचारी  होने की उम्मीद  रखते हैं  ,उन्हें अपने  दिमाग  का इलाज करवा . वास्तव में देश में  जितने भी  बलात्कार  हो रहे हैं  , सबके पीछे इसलाम की तालीम  है .जिसका भंडाफ़ोड़  करना  हरेक  व्यक्ति  का  कर्तव्य  है .समझ  लीजिये इस्लाम  का अर्थ शांति नहीं समर्पण ( surrendar )  है . जिहाद का अर्थ परिश्रम  करना नहीं  आतंक ( terror )  है , कुरबानी का   अर्थ त्याग नहीं जीव हत्या ( slaughter ) है .और  रहमान  का अर्थ दयालु नहीं हत्यारा ( killer )  है .यदि इतना भी  समझ लोगे तो  इस्लाम    को समझ लोगे .

http://www.danielpipes.org/blog/2008/04/strange-sex-stories-from-the-muslim-world


शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

वैदिक धर्म मानने वाले रसूल के वंशज !

इस बात  से कोई  भी व्यक्ति इंकार नहीं   कर सकता कि सत्य को   सदा के लिए दबाना ,या मिटाना  असम्भव   है .और एक न एक दिन  सत्य   खुद  लोगों के सामने  प्रकट  हो जाता है , जिसे  लोगोंको स्वीकार  पड़ना  है .यह  बात  इस्लाम  के ऊपर  भी  लागु  होती  है . मुसलमान मुहम्मद  साहब को अल्लाह का रसूल  और  इस्लाम  का प्रवर्तक  मानते हैं .क्योंकि  23  साल  की    आयु में  सन 592 ईस्वी   में   मुहम्मद  पर  कुरान  की पहली आयत  नाजिल  हुई थी , उसी  दिन  से इस्लाम    का जन्म हुआ  , और  इसी  इस्लाम को  मनवाने के लिए मुहम्मद साहब  और उनके बाद   उनके  अनुयायी  जिहादियों  ने करोड़ों  निर्दोष  लोगों  को  मौत के घाट   उतार दिया . और  कई  देश   वीरान  कर  दिए .
यद्यपि  मुहम्मद साहब को अल्लाह का  सबसे  प्यारा  रसूल  कहा  जाता है ,लेकिन   कई  कई पत्नियां  होने पर भी  मुहम्मद साहब   के कोई  पुत्र    नहीं  हुआ . एक लड़का एक  दासी  मरिया  से हुआ था वह  भी अल्पायु  में  मर गया था .वास्तव  में  मुहम्मद साहब  वंश  उनकी  पुत्री फातिमा  से  चला    है ,जिसकी शादी  हजरत  अली  से हुई थी . इस  तरह  अली  और फातिमा   से मुहम्मद  साहब की वंशावली   वर्त्तमान  काल तक  चल  रही  है , 
अब  यदि  कोई   कहे कि उन्हीं  रसूल  के वंशज  बिना किसी  दवाब के   वेदों  पर आस्था  रखते हैं ,गायत्री  मन्त्र  पढ़ते हैं  .और  वैदिक  धर्म   ग्रन्थ   छह  दर्शनों  पर विश्वास  रखते हैं  , यही नहीं  भगवान  बुद्ध  को  भी अवतार  मानते हैं  . तो  क्या  आप  विश्वास   करेंगे ?  लेकिन  यह  शतप्रतिशत   सत्य  है , इसलिए  इस  लेख  को ध्यान  से पढ़िए ,

1- निजारी इस्माइली
यह तो  सभी  जानते हैं कि   मुसलमान  सुन्नी  और शिया दो  मुख्य  फिरकों  में  बटे  हुए  हैं , और शिया  अली  को अपना प्रथम  इमाम  मानते है .अली और फातिमा के छोटे  पुत्र  इमाम  हुसैन  को  परिवार  सहित  करबला  में  शहीद   करा  दिया गया था . केवन उनका एक बीमार पुत्र   बचा   रहा  , जिसका नाम  " जाफर  सादिक " था , जिसे  शिया  अपना  चौथा  इमाम  मानते हैं .कालान्तर में  उन्हीं  अनुयाइयों  ने   अलग   संप्रदाय  बना  लिया   जिसका  नाम  "अन  निजारियून -  النزاريون‎  "  है .जिनको  " इस्माइलिया - اسماعیلیه‎  "  भी  कहा  जाता  है .जो  "शाह करीम  अल  हुसैनी चौथे   - "  को अपना  इमाम  और धार्मिक  गुरु  मानते है ,   शाह  करीम   का जन्म  अली  और फातिमा    की  49  वीं   पीढी  में  हुआ   है .इनकी यह  वंशावली  तब से  आज  तक   अटूट  रूप से चली  आ  रही  है .इस्माइलिया   दुनिया के  25 में फैले हुए  हैं , और  इनकी संख्या करीब  डेढ़  करोड़  ( 15 million  )  है .इनकी मान्यता है कि   अल्लाह  बिना  इमाम  को दुनियां  को नहीं   रखता ,यानि हर  काल  में  एक इमाम  मौजूद  रहता है , जो लोगों का मार्गदर्शन   करता  रहता  है .इन  लोगों  की मान्यताएं  सुन्नी  और  शियायों  से बिलकुल   अलग  हैं .

2--किसी  भी दिशा में  नमाज 
निजारी इस्माइली  इबादत  के लिए   मस्जिद  की जगह  जमातखाने  में  में  जाते हैं ,इनके वर्त्तमान   इमाम  आगाखान करीम  शाह  अल  हुसैनी  और उनके भाई अयमान  मुहम्मद   ने अरबों  रुपये खर्च करके  विश्व  के कई  शहरों  में भव्य और सर्वसुविधा युक्त आधुनिक   जमातखाने  बनवा  दिए  है .जिनमे लोग इबादत  करते  हैं . लेकिन  निजारी   दूसरे  मुसलमानों  की तरह  मक्का के  काबा की  तरफ  मुंह  करके इबादत  नहीं  करते  , बल्कि   दीवार के सहारे  खड़े होकर  किसी तरफ  मुंह  करके   प्रार्थना  करते हैं .इनका  कहना है कि  अल्लाह   तो  सर्वव्यापी   है , जैसा  खुद  कुरान में  कहा   गया है ,
" पूरब  और पश्चिम  अल्लाह के ही हैं ,तो तुम जिस  तरफ ही रुख  करोगे ,उसी  तरफ   ही अल्लाह का रुख  होगा . निश्चय ही अल्लाह   बड़े  विस्तार  वाला  और  सब  कुछ  जानने  वाला  है 
" सूरा - बकरा  2 :115
इसलिए  पश्चिम   में स्थित  मक्का  के काबा की तरफ मुंह  करके  नमाज  पढ़ने की कोई जरुरत नहीं  है .

3-अली  अल्लाह  का अवतार 
निजारी  इस्माइली मानते   हैं  कि  अल्लाह  इमाम  के रूप में अवतार (incaarnation )     लेता  है . और अली अल्लाह के अवतार थे . निजारी  यह  भी आरोप  लगाते हैं ,कि   कुरान  में  इस बात का  उल्लेख   था ,लेकिन सुन्नियों ने उन आयतों  गायब कर दिया था ,जिनमे  अली  को अल्लाह का अवतार  बताया गया था .  आज  भी निजारी अली  को अल्लाह का अवतार  मानते  है  और उसकी प्रार्थना  करते हैं , ऐसी  एक  सिन्धी - गुजराती  मिश्रित  भाषा   की प्रार्थना  का नमूना   देखिये .
" हक़ तू ,पाक तू बादशाह मेहरबान   भी ,या अली तू  ही  तू .1 
रब तू ,रहमान  तू ,या  अली अव्वल आखिर  काजी , या अली तू  ही तू .2 
ते उपाया  निपाया  सिरजनहार  या अली तू  ही तू .3 
जल  मूल  मंडलाधार  ना  या अली  हुकुम  तेरा या अली तू  ही तू .4 
तेरी दोस्ती  में बोलिया  पीर शम्श  बंदा  तेरा या अली तू  ही तू .5 
(पीर शम्श  कलंदर  दरवेश )
4-इस्माइली  कलमा 

निजारी  इस्माइली  सपष्ट  रूप से मुहम्मद  साहब  के चचेरे  भाई अली  को ही अल्लाह  का अवतार  मानते हैं  .  और इनका  कलमा   इस प्रकार  है ,
"अली अमीरुल  मोमनीन , अलीयुल्लाह "
"عليٌّ امير المومنين عليُ الله  "
अर्थात - ईमान वालों  के  नायक  अली   अल्लाह  .और  हर दुआ  के बाद  यह  कहते  हैं
"अलीयुल्लाह -  عليُ الله   "   यानि अली   अल्लाह  है .(The Ali, the God)
http://www.mostmerciful.com/dua-one.htm

5-इस्माइली  दुआ 

"ला फतह इल्ला  अली व् ल सैफ अल जुल्फिकार "
"لا فتح الّا علي و  سيف الذوالفقار  "
"तवस्सिलू  इन्दल  मसाईब बिल  मौला अल  करीम हैदिरिल  मौजूद शाह  करीम  अल हुसैनी "
" توصّلو عند المصايب بالمولا كم حيدر الموجود شاه كريم الحسينِ     "
अर्थ -अली  जैसा कोई  नायक नहीं  , और जुल्फिकार जैसी  कोई तलवार नहीं , इसलिए  मुसीबत के समय  मौजूदा  इमाम  शाह  करीम  अल हुसैनी   से मदद  मांगो .इसके अलावा  एक दुसरे का  अभिवादन  करते समय  कहते हैं ,
"شاه جو ديدار "(शाह  जो दीदार )अर्थात  शाह के दर्शन , तात्पर्य आपको इमाम  के दर्शन   हों 

6-रसूल  के वंशज पीर  सय्यद  सदरुद्दीन 
इसी  तरह   इमाम जाफर  सादिक  की 21  पीढ़ी  में यानि रसूल  के वंश  में   सय्यद  सदरुद्दीन   का  जन्म  हुआ  जो ईरान से  हिजरत   करके  भारत  के गुजरात  प्रान्त  में आकर बस गए  ,उस समय   इमाम कासिम  शाह (  bet. 1310 C.E. and 1370 C.E.)   )  की इमामत  थी . बाद में इमाम  इस्लाम  शाह ( 30th Imam  ) ने   सदरुद्दीन   को   " पीर  " की पदवी  देकर सम्मान  प्रदान  किया .सदरुद्दीन    वैदिक  धर्म  से  इतने प्रभावित  हुए कि उन्होंने  जितने भी ग्रंथ  लिखे  हैं  , सभी  वैदिक  धर्म  पर आस्था प्रकट  की है .इनमे से कुछ के नाम  इस प्रकार  हैं .

7-इस्माइली  ज्ञान 
इस्माइली धार्मिक  पुस्तकों  को " ज्ञान "   ( उर्दू - گنان  )  गुजराती में " गिनान-ગિનાન  " कहा  जाता  है .ज्ञान  का अर्थ Knoledge है  .इनकी संख्या 250  से अधिक  बतायी  जाती  है .इन में अल्लाह और हजरत  अली  की स्तुति ,चरित्र शिक्षा ,रीति  रिवाज  सम्बन्धी  किताबें  , और  नबियों  की कथाएं वर्णित हैं .आश्चर्य  की  बात है कि  इस्माइली  अथर्ववेद   को भी अपनी ज्ञान  की किताबों  में शामिल  करते हैं .
8-रचनाएँ ग्रन्थ 

इमाम जाफर सादिक  की 20 वीं  पीढ़ी  में पैदा हुए " पीर शिहाबुद्दीन   "  ने ज्ञान  की  इन  किताबों   का उल्लेख  किया  है ,
1.बोध निरंजन -इसमे अल्लाह  के  वास्तविक  स्वरूप  और उसे   प्राप्त  करने की  विधि बतायी  गयी है.
2.  आराध -इसमे अल्लाह और अली की स्तुति  दी गयी है .
3. विनोद -इसमे अली  की महानता  और सृष्टि   की रचना  के बारे में  बताया  है
4. गायंत्री -यह   हिन्दुओं   का गायत्री  मन्त्र  ही  है ,
5. अथरवेद -अर्थात  अथर्ववेद   जो चौथा  वेद   है .  इस्माइली  इसे  भी अल्लाह की  किताब मानते  हैं  
  6.  सुरत  समाचार -इसमे   उदाहरण  देकर  बाले और  बुरे     लोगों  की तुलना  करके  बताया है कि  भले लोग बहुत कम  होते हैं  ,  लेकिन   हमें उनका ही साथ देना चाहिए .    
   6.गिरभावली -इसमे   शंकर पार्वती   की  वार्तालाप   के रूप में  संसार की रचना के  बारे में  बताया गया है.
7.बुद्ध  अवतार-इसमे विष्णु  के  नौवें  अवतार  भगवान  बुद्ध   का  वर्णन  है .
8. दस अवतार -इसमे विष्णु  के   दस  अवतारों  के  बाद  हजरत  अली  के अवतार  होने  का  प्रमाण
9.बावन घटी -इसमे  52  दोहों  में  फरिश्तों  और अल्लाह   के   बीच  सवाल  जवाब  के रूप में  मनुष्यों    में अंतर के बारे में  बताया है .
10. खट  निर्णय -सृष्टि  और  सतपंथ   के   6  महा पुरुषों     की जानकारी .
11.खट दरसन -वैदिक  धर्म  के छह  दर्शन  ग्रन्थ ,  जिन्हें  सभी  हिन्दू  मानते हैं  .
12. बावन बोध -इसमे  52  चेतावनियाँ   और  100  प्रकार  की रस्मों  के बारे में बताया है .
13. स्लोको ( श्लोक )- नीति  और  सदाचार के  बारे में छोटी  छोटी   कवितायेँ
14.दुआ- कुरान की  आयतों   के साथ  अल्लाह और  इमामों  की स्तुति ,के  छंद और  सभी इमामों  और पीरों  का  स्मरण

10-सत  पंथ 
फारसी  किताब " तवारीख  ए पीर "  के अनुसार  इस्लाम  क उदय के सात सौ साल  बाद  मुहम्मद  साहब  के वंशज  और इमाम  जाफर  सादिक   की  20  वीं  पीढ़ी  में जन्मे "सय्यद शिहाबुद्दीन  -"  ( سيّد شهاب الدين  ) भारत में  आये  थे . और गुजरात में  बस गए  थे .यह  पीर "सदरुद्दीन  हुसैनी " के  पिता  थे .इन्होने  भारत में  रह  कर  वैदिक हिन्दू धर्म  का गहन  अध्यन  किया . और  जब  उन्हें   वेदी धर्म   की सत्यता   का  प्रमाण  मिल  गया  तो  , उन्होंने  इस्माइली  फिरके में " सतपंथ "  नामका  अलग  संप्रदाय   बना दिया .इन्हीं   के  पुत्र  " पीर  सदरुद्दीन ( 1290-1367 )  " थे . जो इमाम जाफर  सादिक   की 21  वीं   पीढ़ी में पैदा  हुए . इन्होने पूरे पंजाब  , सिंध   और गुजरात  में सतपंथ   का  प्रसार किया .जिसका  अर्थ  Path  of Truth  होता  है .सतपन्थियों   के  अनुयाइयों  को  " मुरीद " यानि शिष्य  कहा  जाता  है . सत्पंथी    मानते हैं कि  इमाम    एक  बर्तन  की  तरह  होता  है ,जिसमे अल्लाह का नूर  भरा  होता है .और  इमाम को उसके शब्द  यानि फरमान   से पहचाना  जा  सकता  है .इमाम  के   दो  स्वरूप  होते  हैं  , बातिनी  यानी  परोक्ष (esoteric )   और   जाहिरी    यानी  अपरोक्ष (exoteric  ).सतपंथी इमाम  के प्रत्यक्ष  दर्शन   को " नूरानी  दीदार-vision of light  "  कहते  हैं .

11-सत्यप्रकाश 
निजारी  इस्माइली   पीर   ने " सत्यप्रकाश  (The True Light) )" नामकी  एक  पुस्तक  गुजराती  भाषा में   लिखी  थी , जिसका दूसरा  संसकरण  भी  प्रकाशित  हो गया  है . इसमे   निजारी  पंथ  के बारे में  पूरी  जानकारी  दी गयी  है . आप  इस लिंक से किताब  डाउन  लोड  कर सकते  हैं ,
ખુબ સંતોષની અનુભૂતિ સાથે મને કહેતાં અત્યંત ખુશી થાય છે કે અત્યંત લોકપ્રિય ગણાતી સત્ય પ્રકાશ નામની પુસ્તકની બીજી આવૃત્તિ બહાર પાડવામાં આવેલ છે. 
गुजराती  में इसके विज्ञापन का अर्थ ,खूब संतोष  की अनुभूति  के साथ ,अत्यंत  ख़ुशी की  बात है कि अत्यंत  लोकप्रिय  गिनी   जाने वाली "सत्यप्रकाश  "  नामक  पुस्तक  की  दूसरी  आवृति   प्रकाशित  हो गयी  है ,
http://www.realpatidar.com/a/series40

इस  लेख  में दिए  अकाट्य  प्रमाणों  के आधार पर  ,हम  उन जिहादी   मानसिकता   वाले  मुसलमानों   से  पूछना  चाहते हैं  ,जो वैदिक  हिन्दू  धर्म  मानने  वालों  को  काफ़िर और  मुशरिक   कहते  हैं . ऐसे लोग  बताएं कि  जब  मुहम्मद  साहब के वंशज   वेद  को प्रमाण  मानते हैं , और गायत्री  मन्त्र  को पवित्र  मान कर  जप  करते हैं  , और  अल्लाह  का अवतार   भी  मानते हैं  , तो  क्या मुसलमान    उनको  काफ़िर  और  मुशरिक  कहने की हिम्मत  करेंगे ? और   फिर भी   कोई  मुसलमान  ऐसा  करेगा  तो उसकी   सभी  नमाजें   बेकार  हो जाएँगी . क्योंकि  मुसलमान  नमाज  में   दरुदे  इब्राहीम  भी पढ़ते  हैं , जिसमे   मुहम्मद  साहब  के  वंशजों यानि " आले मुहम्मद "  के लिए बरकत की दुआ और अल्लाह  की दोस्ती प्राप्त  करने की दुआ  की जाती है .अर्थात जो भी  रसूल  की " आल " यानि  वंशजों  की  बुराई  करेगा  जहन्नम  में  जायेगा .इसलिए सभी मुसलमान  सावधान  रहे .
हम तो  मुहम्मद  साहब के ऐसे  महान  वंशजों   को   सादर    प्रणाम   करते  हैं 
   जो  पाठक  वैदिक  हिन्दू  धर्म  के  किसी भी  संगठन  के सदस्य  हों  या    कोई  वेबसाईट  चलाते  हों  वह इस  लेख को  हर जगह  पहुंचा  दें .ताकि  .  कट्टर  मुल्लों   का  हमेशा के लिए  मुंह  बंद   हो  जाये .

http://ismaili.net/heritage/node/30522

बुधवार, 11 सितंबर 2013

क्या भारत सचमुच सेकुलर है ?

इस लेख  का शीर्षक  पढ़ते ही हमारे प्रबुद्ध  पाठक  जरुर  चौंक  जायेंगे , लेकिन  यह  प्रश्न  उन  लोगों  के लिए हैं  , जो दावा करते हैं कि  भारत  एक सेकुलर  देश  है . और  जो लोग ऐसा मानते हैं  , वह कृपया  बताएं  कि हम  भारत को  सेकुलर  देश समझें  या एक इस्लामी  देश , जिसने सेकुलरिज्म   की खाल  ओढ़ी  हुई  हो . कारण  के लिए ध्यान  से पढ़िए ,
   आश्चर्य तो यह है कि एक तरफ सरकार भारत को सेक्यूलर राज्य कहती है और दूसरी तरफ धर्म के आधार पर मुसलमानों व ईसाइ्रयों को विशेष सुविधाएँ देती है जो पूर्णतया असंवैधिातिक है। इसके अलावा 15 प्रतिशत भारतीय मुसलमान किसी भी मापदण्ड में अल्पसंखयक नहीं हैं। फिर भी कांग्रेस व अन्य सेक्यूलर राजनैतिक दल राज्यों एवं केन्द्र सरकार में मुसलमानों  के लिए  अनेकों  असंवैधानिक  सुविधाओं  को स्वीकार कर रही है। देखिए कुछ प्रमाण-

1-धार्मिक सुविधाऐं-

 विश्व के 57  इस्लामी देशों में से कही भी मुसलमानों को हज्ज यात्रा के लिए आर्थिक सहायता नहीं दी जाती है क्योंकि हज्ज के लिए आर्थिक सहायता लेना गैर-इस्लामी है। परन्तु भारत सरकार प्रत्येक हज्ज यात्री को हवाई यात्रा के लिए 28000 रुपये  की आर्थिक सहायता देती है। हजियों के लिए राज्यों में हज हाउस बनाए गये हैं। इतना ही नहीं जिद्‌दा में हाजियों की सुविधाएँ देखने के लिए एक विशेष दल जाता है, मानो वहाँ की एम्बेसी काफी नहीं है।

2-वक्फ बोर्ड-आतंकियों  का  बैंक 

 मुस्लिमों वक्फ बोर्डों के पास बारह लाख करोड़ी की सम्पत्ति है जिसकी वार्षिक आय 12000 करोड़ है। फिर भी सरकार वक्फ बोर्डों को आर्थिक सहायता देती है.
लेकिन  सरकार जो भी  रूपया  इन  वक्फ बोर्डों  को देती  है . उसका   हिसाब किताब  कभी सार्वजनिक  नहीं  किया जाता है .क्योंकि इसी रुपये से  जिहादी हथियार और विस्फोटक खरीदते हैं .जबकि  बाबा रामदेव   पर अक्सर छापे पड़ते रहतेहैं .

3-मदरसा या आतंकवाद   की फैक्ट्री 

विश्व के लगभग  सभी देश   मान  चुके हैं ,कि मदरसे  आतंकवादियों   को तैयार करने  वाले कारखाने  है . जितने भी आतंकी पकदे गए  वह कभीं कभी  मदरसा  में  पढ़े  हुए थे .
 सरकार ने धार्मिक कट्‌टरवाद एवं अलगावदवाद को बढावा देने वाली मदरसा शिक्षा को न केवल दोष मुक्त बताया बल्कि उसके आधुनिकीकरण के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए आर्थिक सहायता देती है। फिर भी मुसलमान इन मदरसों को केन्द्रीय मदरसा बोर्ड से
जुड़ने देना नहीं चाहते। यहाँ तक कि पाठ्‌यक्रम में सुझाव व अन्य किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं मानते. (1) पश्चिमी बंगाल सरकार ने 2010 तक 300 अंग्रेजी  माध्यम के मदरसा स्थापित करने का निर्णय लिया है।  (पायो. 23.12.2009), (2) सरकार ने अल्पसंखयकों के संस्थानों को उच्च शिक्षा में ओबीसी विद्यार्थियों के लिए आरक्षण से मुक्त रखा। (3) इलाहाबाद हाई कोर्ट के विरोध के बावजूद अलीगढ़ विश्व विद्यलाय को अल्पसंखयक स्वरूप बनाए रखने पर बल दिया. (4) अल्पसंखयकों के कक्षा एक से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए पच्चीस लाख बजीफे दिए जबकि सवर्णों को नहीं हैं। (5) केरल सरकार ने मदरसों के मौलवियों के लिए पेंशन देने का निर्णय किया है. (6) बिहार में 10वीं की परीक्षा पास करने वाले मुस्लिम छात्र को 10000/- रुपये पुरस्कार मिलेगा. (7) राजस्थान में मुस्लिम विद्यार्थी निजी विद्यालयों में पढ़ते समय भी छात्रवृत्ति ले सकते हैं। (शिक्षा बचाओं आन्दोलन, बुले. 48 पृ. 32). (8) ....समिति की सिफारिशें के अनुरुप 1 से 12 कक्षा तक की पुस्तकें मदरसे  में तैयार होंगी। अध्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी उर्दू में संचालित करने की योजना है' (राजस्थान पत्रिका 9..7.2007). (9) पाठ्‌य-पुस्तकों में पिछली (1998-2003) सरकार द्वारा निकाले गए हिन्दू विरोधी और मुस्लिम-उन्मुख अंशों को दुबारा पुस्तकों में डाल दिया गया. (10) सरकार ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केन्द्र भोपाल, पुरी, किशनगंज (बिहार) मुर्शिदाबाद (पं. बगांल) व मुल्लूपुरम (केरल) में खोलने के लिए दो हजार करोड़ का अनुदान दिया। (वही. बुल. 48, पृ. 31). (11) अल्पसंखयकों के एम फिल ओर पी.एच.डी. करने वाले 756 विद्यार्थियों को राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा या राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा के बिना बारह से चौदह हजार रुपये महीना रिसर्च फैलोशिप मिलेगी। (दैनिक जाग. 23.12.2009) जबकि अन्यों को सरकारी रिसर्च फैलोशिप पाने के लिए ये परीक्षाएँ पास करना अनिवार्य है. (12) उच्च प्रोफेशनल कोर्सों में पढ़ने वाले अल्ससंखयक विद्यार्थियों की फीस सरकार देगी. (13) स्पर्धा वाली सरकारी परीक्षाओं के कोचिंग के लिए फीस भी सरकार देगी। ये सुविधाएँ सामान्य नागरिकों को नहीं है.

4 -राजनैतिक विशेषाधिकार 

जिनके  पूर्वजों  ने  भारत  के लिए   सर्वस्व  लुटा  दिया और आज  भी भारत को अपनी  माता   मानते है .इस सेकुलर सरकार   उनके अधिकार  छीन  कर  मुसलमानों  को  देती रहती  , जबकि  मुसलमान  हमेशा  भारत  विरोधी  कामों में  लगे रहते .फिर भी वोटों  के लिए सरकारें  मुसलमानों  खजाने  खोल देती है .जैसे ,

 (1) अल्पसंखयकों के नाम पर, विशेषकर मुसलमानों के लिए अलग मंत्रालय बनाया गया और उनके लिए 11वीं पंचवर्षीया योजना में 15 प्रतिशत बजट रखा गया. (2) 2004 में सत्ता में आते ही कांग्रेस ने आतंकवाद में फंसे मुसलमानों को बचाने के लिए पोटा कानून निरस्त कर दिया जिसके फलस्वरूप देश में आतंकवाद बढ़ रहा है. (3) मुस्लिम पर्सनल कानूनों और शरियत कोर्टों का समर्थन किया. (4) 13 दिसम्बर 2001 में संसद पर हमले के दोषी अफजलखां को फांसी की सजा आज तक लटकी हुई है. (5) 17 दिसम्बर 2006 को नेशनल डवलपमेंट काउंसिल की मीटिंग में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने यहाँ तक कह दिया कि ''भारतीय संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है।'' शायद इसीलिए उन्हें रोजगार, ऋण, शिक्षा आदि में विशेष सुविधाऐं दी जा रही हैं. (6) सरकार बंगला देशी मुस्लिमों घुसपैठियों को निकालने में उत्साहहीन है जबकि वे भारत के इस्लामीकरण के लिए यहाँ बस रहे हैं

5-आर्थिक सहायता 

एक  तरफ तो मुसलमान  आबादी  बढ़ाने  में लगे रहते है .और दूसरी तरफ  अपनी गरीबी का  बहाना   बना कर  सरकार से आर्थिक   मदद  माँगते रहते  हैं . और इनकी  मांगे  कम होने की जगह  और बढती  जाती  हैं .और ऐसतब तक होता रहेगा जब तक भारत इस्लामी देश  नहीं बन जाता .इसलिए  मुसलमान  अपनी गरीबी और पिछड़ेपन का ढोंग  करके सदा  रोते रहते हैं .और सरकार ने उनकी इसी राक्षसी  भूक  को मिटाने के लिए  कई  कमेटियां  बना रखी  है ,जैसे ,

 (1) सच्चर कमेटी द्वारा मुस्लिमों के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए 5460 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया; (2) उनके लिए सस्ती ब्याज दर पर ऋण देने के लिए एक कारपोरेशन बनाया गया, (3) सार्वजनिक क्षेत्र में उदारता बरतें। इस अभियान की निगरानी के लिए एक मोनीटरिंग कमेटी' काम करेगी।'' (दैनिक नव ज्योति, 4/1/2006)। (4) अल्पसंखयक विद्यार्थियों को माइनोरिटी डवलपमेंट एण्ड फाइनेंस कारपो. से 3 प्रतिशत पर ऋण दिया जाता है। (5) पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रत्येक विभाग के बजट में से 30 प्रतिशत आवंटन मुसलमानों के लिए किया गया। (वही. बृ. पृ. 32) (6) 13 अगस्त 2006 को सरकार ने लोक सभा में बतलाया कि मुस्लिम प्रभाव वाले 90 जिलों और 338 शहरों में मुसलमानों के लिए विशेष विकास फण्ड का प्रावधान किया गया है। (वही, बृ. 48, पृ. 33)।

अतः धर्म निरपेक्ष देश की सरकार धर्म के आधार पर एक वर्ग विशेष के वोट पाने के लिए सभी उचित व अनुचित तरीके अपना रही हैं. इसीलिए उच्चतम न्यायालय ने सावधान करते हुए 18 अगस्त 2005 को कहा- ''राजनैतिक या सामाजिक अधिकारों में कमी को आधार बनाकर भारतीय समाज में अल्पसंखयक समूहों को निर्धारित करने और उसे मानने की प्रवृत्ति पांथिक हुई तो भारत जैसे बहुभाषी, बहुपांथिक देश में इसका कोई अन्त होने वालो नहीं। एक समुदाय द्वारा विशेषाधिकारों की मांग दूसरे समुदाय को ऐसा ही करने के लिए प्रेरित करेगी जिससे परस्पर संघर्ष और झगड़े बढ़ेगें।'' परन्तु वोटों की लालची और सत्ता की प्यासी सेक्यूलर सरकारें इन चेतावनियों की परवाह नहीं करती हैं।

सबसे अधिक पीड़ा की बात तो यह है कि जिस भारत की स्वाधीनता व अखंडता के लिए हमारे पूर्वजों ने सैकड़ों वर्षों तक संघर्ष किया, लाखों योद्धाओं ने अपने प्राण न्यौछावर किए और देश को इस्लामीकरण से बचाया आज जिन नेताओं को देश की रक्षा का उत्तरदायित्व सौंपा गया है वे ही स्वार्थवश कुछ दिन राज करने के लिए भारत के इस्लामीकरण में निर्लज्जता के साथ सहयोग दे रहे हैं। वे उन करोड़ों देशभक्तों के साथ विश्वासघात कर हरे हैं जिन्होंने देश के लिए बलिदान किए। कांग्रेस एवं अन्य सेक्यूलर पार्टियों का मुस्लिमों के सामने आत्म समर्पण एवं वोट बैंक की राजनीति करना देश की भावी स्वाधीनता के लिए चिन्ता का विषय है। सरकार की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के कारण सारा देश इस्लामी जिहाद और आतंकवाद से पीड़ित है। क्या देश की सेक्यूलर पार्टियों को दिखाई नहीं देता कि पाकिस्तान एवं भारत के मुसलमान शेष भारत में इस्लामी राज्य स्थापित करना चाहते हैं? इनका मुस्लिम तुष्टीकरण करना उन लाखों करोड़ों देशभक्तों की शहादत का अपमान है जिन्होंने भारत को इस्लामी राज्य बनने से बचाया.

हमें  पूर्ण  विश्वास  है कि लेख पूरा  पढ़ने बाद  यदि आप  भारत को इस्लामी देश   होने से बचाना   हैं  , तो सेकुलरिज्म  का पाखण्ड त्याग कर  देश  भक्त  बनिए , और  हमारे अभियान  का  साथ  दीजिये .


http://www.hinduwritersforum.org/hamare-prakasan/jihada-kya-aura-kyom/adhyaya--9-jihada-kyom


गुरुवार, 5 सितंबर 2013

वैदिक धर्म की प्रमाणिकता !

इस तथ्य  को  विश्व के सभी इतिहासकार , धार्मिक विद्वान् ,और वैज्ञानिक स्वीकार कर चुके हैं  ,वैदिक धर्म सबसे  प्रचीन  धर्म  है , और  वेद  ही धर्म  का मूल  हैं .केवल वेदों  के  सिद्धांत ही विज्ञानं  की कसौटी पर खरे पाए गएँ  हैं . क्योंकि वेद  को लेन वाला  कोई   फ़रिश्ता  नहीं था  ,और  न  वेद  सातवें आसमान  से  जमीन  पर  उतारे  गए थे .इनके सिद्धांत  सार्वभौमिक  और  अटल  हैं . जो एकेश्वरवाद (Monotheism )   पर आधारित  हैं .
लेकिन बड़े  दुःख  की बात है कि आजकल  के हिन्दू   वेद के इस सिद्धांत को छोड़कर  एक  ईश्वर  की जगह , भुत प्रेत , साईँ  , फ़क़ीर  ,यहाँ  तक  कब्रों  तक  की पूजा  करने  लगे  हैं .और यही कारण  है  कि  मुसलमान  हिन्दुओं  को मुशरिक , और काफ़िर  कहते हैं . जबकि  एकेश्वरवाद  एक वैदिक  सिद्धांत  है , जो भारत से निकल  कर .ईरान  से होते हुए  पुरे मध्य  एशिया  तक  फ़ैल  गया  था .जिसे  इस्लाम ने भी  स्वीकार  कर लिया  .बाद में सिख  धर्म  ने भी  एकेश्वरवाद  की पुष्टि  कर दी .
प्रमाण  के  लिए उपनिषद् , कुरान  और श्रीगुरु  ग्रन्थ  साहब    के ऐसे  अंश  दिए  जा रहे हैं  ,जिनमे    कुछ  शब्दों  के अंतर  जरुर हैं  ,लेकिन  सबका आशय  और भाव  एक  ही है .

1-वैदिक धर्म 

"दिव्यो ह्य मूर्तः पूरुषः सबाह्यान्तारो ह्यजः ,
अप्रमाणो ह्यमनाः  शुभ्रो ह्यक्षरात परतः परः .
मुण्डकोपनिषद -मुण्डक 2 मन्त्र 2 
        अर्थ -" निश्चय ही  वह इश्वर आक
र रहित और अन्दर बाहर  व्याप्त है ,वह जन्म के विकार से रहित उसके न्   तो   प्राण  हैं ,न इन्द्रियां  है  .न मन है  .वह इनके विना  ही सब कुछ  करने में समर्थ  हैं .वह अक्षर यानि अविनाशी हैं .और जीवात्मा से अत्यंत श्रेष्ठ है
इसी  प्रकार एक और जगह कहा गया है ,

" न तस्य कश्चित् पतिरस्ति  लोके ,
न चेशिता नैव च  तस्य लिङ्गम ,
स कारणम करणाधिपाधिपो ,
न चास्य   कश्चित्जनिता न चाधिपः 
श्वेताश्वतर  उपनिषद -अध्याय 6  मन्त्र 9 

अर्थ -"सम्पूर्ण  लोक में उसका कोई स्वामी  न
हीं है ,और न कोई उसपर शासन  करने वाला  है .और न कोई उसका  लिंग ( gendar )  है. वही कारण और सभी कारणों  का अधिपति  है .और न  किसी ने उसे जन्म दिया है और न कोई उसका  पालक ही है "
2-इस्लाम 

قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ ١ اللَّهُ الصَّمَدُ ٢ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ ٣ وَلَمْ يَكُنْ لَهُ كُفُوًا أَحَدٌ ٤ "
سورة الإخلاص   -112:
"कुल हुवल्लाहू अहद .अल्लाहुससमद .लम यलिद  व् लम यूलद .व् लम यकुन कुफ़ुवन  अहद 
"सूरा  इखलास -112

अर्थ -कह दो कि अल्लाह एक है ,अल्लाह निराधार और सर्वाधार है ,उसकी कोई औलाद नहीं है और न वह किसी की औलाद है .और कोई ऐसा नहीं  जो उसके  बराबर हो .

3-सिख धर्म 

ੴ ਸਤਿ ਨਾਮੁ ਕਰਤਾ ਪੁਰਖੁ ਨਿਰਭਉ ਨਿਰਵੈਰੁ ਅਕਾਲ ਮੂਰਤਿ ਅਜੂਨੀ ਸੈਭੰ ਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਜਪੁ ॥ ਆਦਿ ਸਚੁ ਜੁਗਾਦਿ ਸਚੁ ॥ਹੈ ਭੀ ਸਚੁ ਨਾਨਕ ਹੋਸੀ ਭੀ ਸਚੁ ॥੧

 ੴ सति नामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुर प्रसादि ॥ जपु ॥ आदि सचु जुगादि सचु ॥ है भी सचु नानक होसी भी सचु ॥॥ १॥
श्रीगुरुग्रंथ  साहब - मूलमन्त्र 

अर्थ -इश्वर  है ,उसका  नाम ओंकार  और सत्य है .वह जगतका कर्ता  है . निर्भय है . वर हर प्रकार के वैर से  रहित काल  से परे है ,वह अजन्मा और स्वयंभू है .गुरु  के प्रसाद  से उसी के नाम  का जाप करो .वह ईश्वर  प्रारंभ  में भी सत्य  है और युगों  तक सत्य ही  रहेगा "
 वेद  और  कुरान  के उद्धरण  साथ में देने से  हमारा उदेश्य  इस्लाम  को वैध  सिद्ध  करना  नहीं है और उसका महिमामंडन  करना भी  नहीं  है , क्योंकि  यह ज्ञान भारत से ही अरब  गया  था .और दूसरों  से धन चुराने  वाले को धनवान  नहीं कहा जा सकता .जहाँ तक  श्रीगुरु  ग्रन्थ साहब की बात  है ,तो उसमे ऐसी हजारों  बातें मौजूद है ,जो वेदों  शिक्षा  से मेल खाती हैं .
हमारा  वास्तविक उदेश्य तो   उन हिन्दुओं    को धर्म   के बारे में सही  बात बताना है ,जो पाखंड  को ही धर्म  समझ रहे हैं . और धर्म  की जड़  काट  कर  पत्तों  की सिंचाई  कर रहे हैं .और  ईश्वर की उपासना  की जगह अनेकों देवी देवता , भुत प्रेत   यानि पीर औलिया  और कब्रों  पर भी सर  झुकाते  है , इनके लिए गीता  में कहा गया है ,
यजन्ते सात्त्विका देवान्यक्षरक्षांसि राजसाः।
प्रेतान्भूतगणांश्चान्ये जयन्ते तामसा जनाः॥17/4

अर्थात  सात्विक  लोग तो सिर्फ ईश्वर की उपासना  करते हैं  . और राजसी लोग  यक्ष ,रक्ष ( semi gods )  की पूजा करते हैं , जो सिर्फ कल्पित व्यक्ति यानि अर्ध मानव  है और सबसे निकृष्ट  वह तामसी लोग हैं वह  भूत यानि  मुर्दों  की कब्रों ,इत्यादि की पूजा  करते  है ,इत्यादि में निर्मल बाबा , साईँ  बाबा  , राधे  माँ   जैसे ढोंगी  है
यही नहीं अज्ञानी लोग मुसलमानों की नक़ल  करके  भूखे रहने  को ही तप समझते  है , जबकि एसा  किसी ग्रन्थ  में नहीं  लिखा . लोग दिन भर तो भूखे रहते हैं . और शाम  को चौगुना  खाते  है ,इसे तप  नहीं कहते .जैसा  गीता  में कहा  है ,
अशास्त्रविहितं घोरं तप्यन्ते ये तपो जनाः।
दम्भाहङ्‍कारसंयुक्ताः कामरागबलान्विताः॥17/5

अर्थात  शास्त्र विरुद्ध  होने पर भी  किसी की देखादेखी  जो लोग घोर तप्  करते  हैं ,वह पाखंडी ,अहंकारी और दिखावे  की कामना  से यह किया  करते हैं , यह तप नहीं  है .क्योंकि योग सूत्र  में कहा है ,"सुखे  दुखे  समौ भूत्वा  समत्वं  योग उच्यते "   यही  गीता   में कहा है
,
सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ ।
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ॥3/28

अर्थात  सुख और दुःख , हार  और जीत , लाभ और हानि  की परवाह  किये बिना  ही धर्म की रक्षा के  लिए हम युद्ध  करेंगे  तो हमें  कोई पाप  नहीं  लगेगा .यानी पाप  तो तब  लगेगा  जब  हम   मूक दर्शक  बने तमाशा  यानि टी वी  देखते  रहेंगे ,या सोचते  रहेंगे कि यदि हम सत्य और धर्म का साथ देंगे तो हमें सम्प्रदायवादी   कहेंगे .
भर्तरि शतक  में एक श्लोक  है ,

"निन्दन्तु  नीति निपुणा , यदि  वा स्तुवन्ति , 
लक्ष्मी  समाविशतु   गच्छतु वा यथेष्टम 
अद्यैव  मरणमस्तु युगान्तरे   वा  
न्यायात पथः प्रविचलन्ति पदम् न  धीराः .

अर्थात - चाहे बातों  में निपुण  लोग हमारी निंदा करें  या हमारी तारीफ़ करें ,चाहे हमारे पास धन  का भंडार  हो जाये या हम  कंगाल  हो  जाएँ ,और चाहे हम आज  ही मर जाएँ , या युगों  तक जीवित रहें . लेकिन  सत्य के मार्ग  से कभी विचलित   नहीं  हो सकते .
और यदि मानते  हैं  कि  वैदिक धर्म  प्रमाणिक  है तो उसको बचाने , और धर्म के बहाने होने वाले  आतंक  का विरोध  करिए
हमें उपलब्ध सभी साधनों  का उपयोग  करके  देश द्रोहियों  और धर्म  के शत्रुओं  का मुकाबला करना होगा .यही धर्म  है
 "विनाशाय च दुष्क्रताम "

http://www.shriradhekrishna.com/bhagwadgita/1/