बुधवार, 11 सितंबर 2013

क्या भारत सचमुच सेकुलर है ?

इस लेख  का शीर्षक  पढ़ते ही हमारे प्रबुद्ध  पाठक  जरुर  चौंक  जायेंगे , लेकिन  यह  प्रश्न  उन  लोगों  के लिए हैं  , जो दावा करते हैं कि  भारत  एक सेकुलर  देश  है . और  जो लोग ऐसा मानते हैं  , वह कृपया  बताएं  कि हम  भारत को  सेकुलर  देश समझें  या एक इस्लामी  देश , जिसने सेकुलरिज्म   की खाल  ओढ़ी  हुई  हो . कारण  के लिए ध्यान  से पढ़िए ,
   आश्चर्य तो यह है कि एक तरफ सरकार भारत को सेक्यूलर राज्य कहती है और दूसरी तरफ धर्म के आधार पर मुसलमानों व ईसाइ्रयों को विशेष सुविधाएँ देती है जो पूर्णतया असंवैधिातिक है। इसके अलावा 15 प्रतिशत भारतीय मुसलमान किसी भी मापदण्ड में अल्पसंखयक नहीं हैं। फिर भी कांग्रेस व अन्य सेक्यूलर राजनैतिक दल राज्यों एवं केन्द्र सरकार में मुसलमानों  के लिए  अनेकों  असंवैधानिक  सुविधाओं  को स्वीकार कर रही है। देखिए कुछ प्रमाण-

1-धार्मिक सुविधाऐं-

 विश्व के 57  इस्लामी देशों में से कही भी मुसलमानों को हज्ज यात्रा के लिए आर्थिक सहायता नहीं दी जाती है क्योंकि हज्ज के लिए आर्थिक सहायता लेना गैर-इस्लामी है। परन्तु भारत सरकार प्रत्येक हज्ज यात्री को हवाई यात्रा के लिए 28000 रुपये  की आर्थिक सहायता देती है। हजियों के लिए राज्यों में हज हाउस बनाए गये हैं। इतना ही नहीं जिद्‌दा में हाजियों की सुविधाएँ देखने के लिए एक विशेष दल जाता है, मानो वहाँ की एम्बेसी काफी नहीं है।

2-वक्फ बोर्ड-आतंकियों  का  बैंक 

 मुस्लिमों वक्फ बोर्डों के पास बारह लाख करोड़ी की सम्पत्ति है जिसकी वार्षिक आय 12000 करोड़ है। फिर भी सरकार वक्फ बोर्डों को आर्थिक सहायता देती है.
लेकिन  सरकार जो भी  रूपया  इन  वक्फ बोर्डों  को देती  है . उसका   हिसाब किताब  कभी सार्वजनिक  नहीं  किया जाता है .क्योंकि इसी रुपये से  जिहादी हथियार और विस्फोटक खरीदते हैं .जबकि  बाबा रामदेव   पर अक्सर छापे पड़ते रहतेहैं .

3-मदरसा या आतंकवाद   की फैक्ट्री 

विश्व के लगभग  सभी देश   मान  चुके हैं ,कि मदरसे  आतंकवादियों   को तैयार करने  वाले कारखाने  है . जितने भी आतंकी पकदे गए  वह कभीं कभी  मदरसा  में  पढ़े  हुए थे .
 सरकार ने धार्मिक कट्‌टरवाद एवं अलगावदवाद को बढावा देने वाली मदरसा शिक्षा को न केवल दोष मुक्त बताया बल्कि उसके आधुनिकीकरण के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए आर्थिक सहायता देती है। फिर भी मुसलमान इन मदरसों को केन्द्रीय मदरसा बोर्ड से
जुड़ने देना नहीं चाहते। यहाँ तक कि पाठ्‌यक्रम में सुझाव व अन्य किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं मानते. (1) पश्चिमी बंगाल सरकार ने 2010 तक 300 अंग्रेजी  माध्यम के मदरसा स्थापित करने का निर्णय लिया है।  (पायो. 23.12.2009), (2) सरकार ने अल्पसंखयकों के संस्थानों को उच्च शिक्षा में ओबीसी विद्यार्थियों के लिए आरक्षण से मुक्त रखा। (3) इलाहाबाद हाई कोर्ट के विरोध के बावजूद अलीगढ़ विश्व विद्यलाय को अल्पसंखयक स्वरूप बनाए रखने पर बल दिया. (4) अल्पसंखयकों के कक्षा एक से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए पच्चीस लाख बजीफे दिए जबकि सवर्णों को नहीं हैं। (5) केरल सरकार ने मदरसों के मौलवियों के लिए पेंशन देने का निर्णय किया है. (6) बिहार में 10वीं की परीक्षा पास करने वाले मुस्लिम छात्र को 10000/- रुपये पुरस्कार मिलेगा. (7) राजस्थान में मुस्लिम विद्यार्थी निजी विद्यालयों में पढ़ते समय भी छात्रवृत्ति ले सकते हैं। (शिक्षा बचाओं आन्दोलन, बुले. 48 पृ. 32). (8) ....समिति की सिफारिशें के अनुरुप 1 से 12 कक्षा तक की पुस्तकें मदरसे  में तैयार होंगी। अध्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी उर्दू में संचालित करने की योजना है' (राजस्थान पत्रिका 9..7.2007). (9) पाठ्‌य-पुस्तकों में पिछली (1998-2003) सरकार द्वारा निकाले गए हिन्दू विरोधी और मुस्लिम-उन्मुख अंशों को दुबारा पुस्तकों में डाल दिया गया. (10) सरकार ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केन्द्र भोपाल, पुरी, किशनगंज (बिहार) मुर्शिदाबाद (पं. बगांल) व मुल्लूपुरम (केरल) में खोलने के लिए दो हजार करोड़ का अनुदान दिया। (वही. बुल. 48, पृ. 31). (11) अल्पसंखयकों के एम फिल ओर पी.एच.डी. करने वाले 756 विद्यार्थियों को राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा या राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा के बिना बारह से चौदह हजार रुपये महीना रिसर्च फैलोशिप मिलेगी। (दैनिक जाग. 23.12.2009) जबकि अन्यों को सरकारी रिसर्च फैलोशिप पाने के लिए ये परीक्षाएँ पास करना अनिवार्य है. (12) उच्च प्रोफेशनल कोर्सों में पढ़ने वाले अल्ससंखयक विद्यार्थियों की फीस सरकार देगी. (13) स्पर्धा वाली सरकारी परीक्षाओं के कोचिंग के लिए फीस भी सरकार देगी। ये सुविधाएँ सामान्य नागरिकों को नहीं है.

4 -राजनैतिक विशेषाधिकार 

जिनके  पूर्वजों  ने  भारत  के लिए   सर्वस्व  लुटा  दिया और आज  भी भारत को अपनी  माता   मानते है .इस सेकुलर सरकार   उनके अधिकार  छीन  कर  मुसलमानों  को  देती रहती  , जबकि  मुसलमान  हमेशा  भारत  विरोधी  कामों में  लगे रहते .फिर भी वोटों  के लिए सरकारें  मुसलमानों  खजाने  खोल देती है .जैसे ,

 (1) अल्पसंखयकों के नाम पर, विशेषकर मुसलमानों के लिए अलग मंत्रालय बनाया गया और उनके लिए 11वीं पंचवर्षीया योजना में 15 प्रतिशत बजट रखा गया. (2) 2004 में सत्ता में आते ही कांग्रेस ने आतंकवाद में फंसे मुसलमानों को बचाने के लिए पोटा कानून निरस्त कर दिया जिसके फलस्वरूप देश में आतंकवाद बढ़ रहा है. (3) मुस्लिम पर्सनल कानूनों और शरियत कोर्टों का समर्थन किया. (4) 13 दिसम्बर 2001 में संसद पर हमले के दोषी अफजलखां को फांसी की सजा आज तक लटकी हुई है. (5) 17 दिसम्बर 2006 को नेशनल डवलपमेंट काउंसिल की मीटिंग में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने यहाँ तक कह दिया कि ''भारतीय संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है।'' शायद इसीलिए उन्हें रोजगार, ऋण, शिक्षा आदि में विशेष सुविधाऐं दी जा रही हैं. (6) सरकार बंगला देशी मुस्लिमों घुसपैठियों को निकालने में उत्साहहीन है जबकि वे भारत के इस्लामीकरण के लिए यहाँ बस रहे हैं

5-आर्थिक सहायता 

एक  तरफ तो मुसलमान  आबादी  बढ़ाने  में लगे रहते है .और दूसरी तरफ  अपनी गरीबी का  बहाना   बना कर  सरकार से आर्थिक   मदद  माँगते रहते  हैं . और इनकी  मांगे  कम होने की जगह  और बढती  जाती  हैं .और ऐसतब तक होता रहेगा जब तक भारत इस्लामी देश  नहीं बन जाता .इसलिए  मुसलमान  अपनी गरीबी और पिछड़ेपन का ढोंग  करके सदा  रोते रहते हैं .और सरकार ने उनकी इसी राक्षसी  भूक  को मिटाने के लिए  कई  कमेटियां  बना रखी  है ,जैसे ,

 (1) सच्चर कमेटी द्वारा मुस्लिमों के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए 5460 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया; (2) उनके लिए सस्ती ब्याज दर पर ऋण देने के लिए एक कारपोरेशन बनाया गया, (3) सार्वजनिक क्षेत्र में उदारता बरतें। इस अभियान की निगरानी के लिए एक मोनीटरिंग कमेटी' काम करेगी।'' (दैनिक नव ज्योति, 4/1/2006)। (4) अल्पसंखयक विद्यार्थियों को माइनोरिटी डवलपमेंट एण्ड फाइनेंस कारपो. से 3 प्रतिशत पर ऋण दिया जाता है। (5) पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रत्येक विभाग के बजट में से 30 प्रतिशत आवंटन मुसलमानों के लिए किया गया। (वही. बृ. पृ. 32) (6) 13 अगस्त 2006 को सरकार ने लोक सभा में बतलाया कि मुस्लिम प्रभाव वाले 90 जिलों और 338 शहरों में मुसलमानों के लिए विशेष विकास फण्ड का प्रावधान किया गया है। (वही, बृ. 48, पृ. 33)।

अतः धर्म निरपेक्ष देश की सरकार धर्म के आधार पर एक वर्ग विशेष के वोट पाने के लिए सभी उचित व अनुचित तरीके अपना रही हैं. इसीलिए उच्चतम न्यायालय ने सावधान करते हुए 18 अगस्त 2005 को कहा- ''राजनैतिक या सामाजिक अधिकारों में कमी को आधार बनाकर भारतीय समाज में अल्पसंखयक समूहों को निर्धारित करने और उसे मानने की प्रवृत्ति पांथिक हुई तो भारत जैसे बहुभाषी, बहुपांथिक देश में इसका कोई अन्त होने वालो नहीं। एक समुदाय द्वारा विशेषाधिकारों की मांग दूसरे समुदाय को ऐसा ही करने के लिए प्रेरित करेगी जिससे परस्पर संघर्ष और झगड़े बढ़ेगें।'' परन्तु वोटों की लालची और सत्ता की प्यासी सेक्यूलर सरकारें इन चेतावनियों की परवाह नहीं करती हैं।

सबसे अधिक पीड़ा की बात तो यह है कि जिस भारत की स्वाधीनता व अखंडता के लिए हमारे पूर्वजों ने सैकड़ों वर्षों तक संघर्ष किया, लाखों योद्धाओं ने अपने प्राण न्यौछावर किए और देश को इस्लामीकरण से बचाया आज जिन नेताओं को देश की रक्षा का उत्तरदायित्व सौंपा गया है वे ही स्वार्थवश कुछ दिन राज करने के लिए भारत के इस्लामीकरण में निर्लज्जता के साथ सहयोग दे रहे हैं। वे उन करोड़ों देशभक्तों के साथ विश्वासघात कर हरे हैं जिन्होंने देश के लिए बलिदान किए। कांग्रेस एवं अन्य सेक्यूलर पार्टियों का मुस्लिमों के सामने आत्म समर्पण एवं वोट बैंक की राजनीति करना देश की भावी स्वाधीनता के लिए चिन्ता का विषय है। सरकार की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के कारण सारा देश इस्लामी जिहाद और आतंकवाद से पीड़ित है। क्या देश की सेक्यूलर पार्टियों को दिखाई नहीं देता कि पाकिस्तान एवं भारत के मुसलमान शेष भारत में इस्लामी राज्य स्थापित करना चाहते हैं? इनका मुस्लिम तुष्टीकरण करना उन लाखों करोड़ों देशभक्तों की शहादत का अपमान है जिन्होंने भारत को इस्लामी राज्य बनने से बचाया.

हमें  पूर्ण  विश्वास  है कि लेख पूरा  पढ़ने बाद  यदि आप  भारत को इस्लामी देश   होने से बचाना   हैं  , तो सेकुलरिज्म  का पाखण्ड त्याग कर  देश  भक्त  बनिए , और  हमारे अभियान  का  साथ  दीजिये .


http://www.hinduwritersforum.org/hamare-prakasan/jihada-kya-aura-kyom/adhyaya--9-jihada-kyom


5 टिप्‍पणियां:

  1. भारतीय नागरिक19 सितंबर 2013 को 6:08 am

    राजनीतिक दलों के कार्य कलापों से तो नहीं लगता।

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  2. हिन्दुओ के प्रिय भगवान क्रष्ण के बारे मे तो आप सभी लोग जानते है, वैसे तो श्री क्रष्ण एक हास्य किताब का कालप्नीक पात्र है. जिसे हिन्दू भी हिन्दू भगवान मानते है,
    अब श्री क्रष्ण के कारनामे देखो.
    1) घरो मे चोरी करना, जैसे की मक्खन और खाने की वस्तुए चुरा कर खाना.

    2) लड़कीयो को नंगा नहाते हु छिप्-छिप कर देखना और तो और उनके कपड़े चुरा लेना और उन्हे नन्गा पानी से बाहर आने पर विवश करना ताकी उन्हे पूरी तरह दे नन्गी हालत मे देख सके.

    3) राह चलती हुई लड़कीयो एवम महिलाओ को छिड़ना उन्हे परेशान करना, उनके कूल्हो पर मार कर या उनके स्तना दबा कर भाग जाना.

    4) पशुओ मुख्यतः गाय से सन्भोग करना.

    5) आये दिन अकेले मे मिली कन्याओ का बलात्कार कर देना.

    मै केहता हु के ये सभी बाते मूर्ख हिन्दु भी भलीभाती जानते है लेकीन फिर भी उसे भगवान मान कर उसकी पुजा करते है.
    क्या इस दुनीया को चलाने वाना और इस दुनीया को बनाने वाला इतना निच,हरामी, चोर और बलात्कारी हो सकता है,
    शायद यही वजह है की हिन्दुस्तान मे इतने बलात्कार होते है, अब भगवान इतने हरामी है तो भक्त हरामी महाहरामी होंगे ही.

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  3. मानवजाति का इतिहास PART 1


    आमतौर पर यह समझा जाता है कि इस्लाम 1400 वर्ष पुराना धर्म है, और इसके ‘प्रवर्तक’ पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम) हैं। लेकिन वास्तव में इस्लाम 1400 वर्षों से काफ़ी पुराना धर्म है; उतना ही पुराना जितना धर्ती पर स्वयं मानव जाति का इतिहास और हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम) इसके प्रवर्तक (Founder) नहीं, बल्कि इसके आह्वाहक हैं। आपका काम उसी चिरकालीन (सनातन) धर्म की ओर, जो सत्यधर्म के रूप में आदिकाल से ‘एक’ ही रहा है, लोगों को बुलाने, आमंत्रित करने और स्वीकार करने के आह्वान का था। आपका मिशन, इसी मौलिक मानव धर्म को इसकी पूर्णता के साथ स्थापित कर देना था ताकि मानवता के समक्ष इसका व्यावहारिक रूप साक्षात् रूप में आ जाए।

    इस्लाम का इतिहास जानने का अस्ल माध्यम स्वयं इस्लाम का मूल ग्रंथ ‘क़ुरआन’ है। और क़ुरआन, इस्लाम का आरंभ प्रथम मनुष्य ‘आदम’ से होने का ज़िक्र करता है। इस्लाम धर्म के अनुयायियों के लिए क़ुरआन ने ‘मुस्लिम’ शब्द का प्रयोग हज़रत इबराहीम (अलैहि॰) के लिए किया है जो लगभग 4000 वर्ष पूर्व एक महान पैग़म्बर (सन्देष्टा) हुए थे। हज़रत आदम (अलैहि॰) से शुरू होकर हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम ) तक हज़ारों वर्षों पर फैले हुए इस्लामी इतिहास में असंख्य ईशसंदेष्टा ईश्वर के संदेश के साथ, ईश्वर द्वारा विभिन्न युगों और विभिन्न क़ौमों में नियुक्त किए जाते रहे। उनमें से 26 के नाम कु़रआन में आए हैं, इस अतिदीर्घ श्रृंखला में हर ईशसंदेष्टा ने जिस सत्यधर्म का आह्वान दिया वह ‘इस्लाम’ ही था; भले ही उसके नाम विभिन्न भाषाओं में विभिन्न रहे हों।

    इस्लामी इतिहास के आदिकालीन होने की वास्तविकता समझने के लिए स्वयं ‘इस्लाम’ को समझ लेना आवश्यक है। इस्लाम क्या है, यह कुछ शैलियों में क़ुरआन के माध्यम से हमारे सामने आता है, जैसे:

    1. इस्लाम, अवधारणा के स्तर पर ‘विशुद्ध एकेश्वरवाद’ का नाम है। यहां ‘विशुद्ध’ से अभिप्राय है: ईश्वर के व्यक्तित्व, उसकी सत्ता व प्रभुत्व, उसके अधिकारों (जैसे उपास्य व पूज्य होने के अधिकार आदि) में किसी अन्य का साझी न होना। विश्व का बल्कि पूरे ब्रह्माण्ड और अपार सृष्टि का यह महत्वपूर्ण व महानतम सत्य मानवजाति की उत्पत्ति से लेकर उसके हज़ारों वर्षों के इतिहास के दौरान अपरिवर्तनीय, स्थायी और शाश्वत रहा है।

    2. इस्लाम शब्द का अर्थ ‘शान्ति व सुरक्षा’ और ‘समर्पण’ है। इस प्रकार इस्लामी परिभाषा में इस्लाम नाम है, ईश्वर के समक्ष, मनुष्यों का पूर्ण आत्म समर्पण; और इस आत्म समर्पण के द्वारा व्यक्ति, समाज तथा मानवजाति के द्वारा ‘शान्ति व सुरक्षा’ की उपलब्धि का। यह अवस्था आरंभ काल से तथा मानवता के इतिहास हज़ारों वर्ष लंबे सफ़र तक, हमेशा मनुष्य की मूलभूत आवश्यकता रही है।

    इस्लाम की वास्तविकता, एकेश्वरवाद की हक़ीक़त, इन्सानों से एकेश्वरवाद के तक़ाज़े, मनुष्य और ईश्वर के बीच अपेक्षित संबंध, इस जीवन के पश्चात (मरणोपरांत) जीवन की वास्तविकता आदि जानना एक शान्तिमय, सफल तथा समस्याओं, विडम्बनाओं व त्रासदियों से रहित जीवन बिताने के लिए हर युग में अनिवार्य रहा है; अतः ईश्वर ने हर युग में अपने सन्देष्टा (ईशदूत, नबी, रसूल, पैग़म्बर) नियुक्त करने (और उनमें से कुछ पर अपना ‘ईशग्रंथ’ अवतरित करने) का प्रावधान किया है। इस प्रक्रम का इतिहास, मानवजाति के पूरे इतिहास पर फैला हुआ है।

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  4. PART 2

    4. शब्द ‘धर्म’ (Religion) को, इस्लाम के लिए क़ुरआन ने शब्द ‘दीन’ से अभिव्यक्त किया है। क़ुरआन में कुछ ईशसन्देष्टाओं के हवाले से कहा गया है (42:13) कि ईश्वर ने उन्हें आदेश दिया कि वे ‘दीन’ को स्थापित (क़ायम) करें और इसमें भेद पैदा न करें, इसे (अनेकानेक धर्मों के रूप में) टुकड़े-टुकड़े न करें।

    इससे सिद्ध हुआ कि इस्लाम ‘दीन’ हमेशा से ही रहा है। उपरोक्त संदेष्टाओं में हज़रत नूह (Noah) का उल्लेख भी हुआ है और हज़रत नूह (अलैहि॰) मानवजाति के इतिहास के आरंभिक काल के ईशसन्देष्टा हैं। क़ुरआन की उपरोक्त आयत (42:13) से यह तथ्य सामने आता है कि अस्ल ‘दीन’ (इस्लाम) में भेद, अन्तर, विभाजन, फ़र्क़ आदि करना सत्य-विरोधी है-जैसा कि बाद के ज़मानों में ईशसन्देष्टाओं का आह्वान व शिक्षाएं भुलाकर, या उनमें फेरबदल, कमी-बेशी, परिवर्तन-संशोधन करके इन्सानों ने अनेक विचारधाराओं व मान्यताओं के अन्तर्गत ‘बहुत से धर्म’ बना लिए।

    मानव प्रकृति प्रथम दिवस से आज तक एक ही रही है। उसकी मूल प्रवृत्तियों में तथा उसकी मौलिक आध्यात्मिक, नैतिक, भौतिक आवश्यकताओं में कोई भी परिवर्तन नहीं आया है। अतः मानव का मूल धर्म भी मानवजाति के पूरे इतिहास में उसकी प्रकृति व प्रवृत्ति के ठीक अनुकूल ही होना चाहिए। इस्लाम इस कसौटी पर पूरा और खरा उतरता है। इसकी मूल धारणाएं, शिक्षाएं, आदेश, नियम...सबके सब मनुष्य की प्रवृत्ति व प्रकृति के अनुकूल हैं।

    अतः यही मानवजाति का आदिकालीन तथा शाश्वत धर्म है।

    क़ुरआन ने कहीं भी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम ) को ‘इस्लाम धर्म का प्रवर्तक’ नहीं कहा है। क़ुरआन में हज़रत मुहम्मद ( सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम ) का परिचय नबी (ईश्वरीय ज्ञान की ख़बर देने वाला), रसूल (मानवजाति की ओर भेजा गया), रहमतुल्-लिल-आलमीन (सारे संसारों के लिए रहमत व साक्षात् अनुकंपा, दया), हादी (सत्यपथ-प्रदर्शक) आदि शब्दों से कराया है।

    स्वयं पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम ) ने इस्लाम धर्म के ‘प्रवर्तक’ होने का न दावा किया, न इस रूप में अपना परिचय कराया। आप (सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम ) के एक कथन के अनुसार ‘इस्लाम के भव्य भवन में एक ईंट की कमी रह गई थी, मेरे (ईशदूतत्व) द्वारा वह कमी पूरी हो गई और इस्लाम अपने अन्तिम रूप में सम्पूर्ण हो गया’ (आपके कथन का भावार्थ।) इससे सिद्ध हुआ कि आप ( सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम ) इस्लाम धर्म के प्रवर्तक नहीं हैं। (इसका प्रवर्तक स्वयं अल्लाह है, न कि कोई भी पैग़म्बर, रसूल, नबी आदि)। और आप ( सल्लल्लाहोअलैहेवसल्लम) ने उसी इस्लाम का आह्वान किया जिसका, इतिहास के हर चरण में दूसरे रसूलों ने किया था। इस प्रकार इस्लाम का इतिहास उतना ही प्राचीन है जितना मानवजाति और उसके बीच नियुक्त होने वाले असंख्य रसूलों के सिलसिले (श्रृंखला) का इतिहास।

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