मंगलवार, 30 दिसंबर 2014

धर्म और मजहब में क्या अंतर है?

 प्राय:अपने आपको प्रगतिशील ,सेकुलर , कहने वाले लोग धर्म और मज़हब को एक ही समझते हैं. आज संसार में जितनी भी अशांति, हत्या,अत्याचार, आतंकवाद, अन्धविश्वास, दरिद्रता, अत्याचार आदि जो भी कुछ हो रहा हैं उसका मूल कारण धर्म के नाम पर सम्प्रदाय, मज़हब या मत-मतान्तर को पोषित करना हैं .इसलिए  हम  सभी  को  धर्म  और  मजहब   का अंतर   ठीक  से  समझने   की  जरुरत   है
मज़हब अथवा मत-मतान्तर अथवा पंथ के अनेक अर्थ हैं जैसे वह रास्ता जी स्वर्ग और ईश्वर प्राप्ति का हैं और जोकि मज़हब के प्रवर्तक ने बताया हैं। अनेक जगहों पर ईमान अर्थात विश्वास के अर्थों में भी आता हैं।

1. धर्म और मज़हब समान अर्थ नहीं हैं और न ही धर्म ईमान या विश्वास का प्राय: हैं।

2. धर्म क्रियात्मक वस्तु हैं ,अर्थात  धर्म सत्कर्मों  पर  जोर  देता  है
मज़हब विश्वासात्मक वस्तु हैं .अर्थात मजहब   सिर्फ  ईमान  लाने पर  ही  जोर  देता  है

3. धर्म मनुष्य के स्वाभाव के अनुकूल अथवा मानवी प्रकृति का होने के कारण स्वाभाविक हैं और उसका आधार ईश्वरीय अथवा सृष्टि नियम हैं।
 मज़हब मनुष्य कृत होने से अप्राकृतिक अथवा अस्वाभाविक हैं। मज़हबों का अनेक व भिन्न भिन्न होना तथा परस्पर विरोधी होना उनके मनुष्य कृत अथवा बनावती होने का प्रमाण हैं।

4. धर्म के जो लक्षण मनु महाराज ने बतलाये हैं वह सभी मानव जाति के लिए एक समान है और कोई भी सभ्य मनुष्य उसका विरोधी नहीं हो सकता।
मज़हब अनेक हैं और केवल उसी मज़हब को मानने वालों द्वारा ही स्वीकार होते हैं। इसलिए वह सार्वजानिक और सार्वभौमिक नहीं हैं। कुछ बातें सभी मजहबों में धर्म के अंश के रूप में हैं इसलिए उन मजहबों का कुछ मान बना हुआ हैं।

5. धर्म सदाचार रूप हैं अत: धर्मात्मा होने के लिये सदाचारी होना अनिवार्य हैं। परन्तु मज़हबी अथवा पंथी होने के लिए सदाचारी होना अनिवार्य नहीं हैं। अर्थात जिस तरह तरह धर्म के साथ सदाचार का नित्य सम्बन्ध हैं
मजहब के साथ सदाचार का कोई सम्बन्ध नहीं हैं। क्यूंकि किसी भी मज़हब का अनुनायी न होने पर भी कोई भी व्यक्ति धर्मात्मा (सदाचारी) बन सकता हैं .जैसे आचार सम्पन्न होने पर भी कोई भी मनुष्य उस वक्त तक मज़हबी अथवा पन्थाई नहीं बन सकता जब तक उस मज़हब के मंतव्यों पर ईमान अथवा विश्वास नहीं लाता। जैसे की कोई कितना ही सच्चा ईश्वर उपासक और उच्च कोटि का सदाचारी क्यूँ न हो वह जब तक हज़रात ईसा और बाइबिल अथवा हजरत मोहम्मद और कुरान शरीफ पर ईमान नहीं लाता तब तक ईसाई अथवा मुस्लमान नहीं बन सकता।

6. धर्म ही मनुष्य को मनुष्य बनाता हैं अथवा धर्म अर्थात धार्मिक गुणों और कर्मों के धारण करने से ही मनुष्य मनुष्यत्व को प्राप्त करके मनुष्य कहलाने का अधिकारी बनता हैं। दूसरे शब्दों में धर्म और मनुष्यत्व पर्याय हैं। क्यूंकि धर्म को धारण करना ही मनुष्यत्व हैं। कहा भी गया है- खाना,पीना,सोना,संतान उत्पन्न करना जैसे कर्म मनुष्यों और पशुयों के एक समान हैं। केवल धर्म ही मनुष्यों में विशेष हैं जोकि मनुष्य को मनुष्य बनाता हैं। धर्म से हीन मनुष्य पशु के समान हैं.

मज़हब मनुष्य को केवल पन्थाई या मज़हबी और अन्धविश्वासी बनाता हैं। दूसरे शब्दों में मज़हब अथवा पंथ पर ईमान लेन से मनुष्य उस मज़हब का अनुनायी अथवा ईसाई अथवा मुस्लमान बनता हैं नाकि  सदाचारी या धर्मात्मा बनता हैं।

7. धर्म मनुष्य को ईश्वर से सीधा सम्बन्ध जोड़ता हैं और मोक्ष प्राप्ति निमित धर्मात्मा अथवा सदाचारी बनना अनिवार्य बतलाता हैं .

मज़हब मुक्ति के लिए व्यक्ति को पन्थाई अथवा मज़हबी बनना अनिवार्य बतलाता हैं। और मुक्ति के लिए सदाचार से ज्यादा आवश्यक उस मज़हब की मान्यताओं का पालन बतलाता हैं.जैसे अल्लाह और मुहम्मद साहिब को उनके अंतिम पैगम्बर मानने वाले जन्नत जायेगे चाहे वे कितने भी व्यभिचारी अथवा पापी हो जबकि गैर मुसलमान चाहे कितना भी धर्मात्मा अथवा सदाचारी क्यूँ न हो वह दोज़ख अर्थात नर्क की आग में अवश्य जलेगा क्यूंकि वह कुरान के ईश्वर अल्लाह और रसूल पर अपना विश्वासनहीं लाया हैं।

8. धर्म में बाहर के चिन्हों का कोई स्थान नहीं हैं क्यूंकि धर्म लिंगात्मक नहीं हैं -न लिंगम धर्मकारणं अर्थात लिंग (बाहरी चिन्ह) धर्म का कारण नहीं हैं.
मज़हब के लिए बाहरी चिन्हों का रखना अनिवार्य हैं जैसे एक मुस्लमान के लिए जालीदार टोपी और दाड़ी रखना , लिंग की  खतना अनिवार्य हैं .

9. धर्म मनुष्य को पुरुषार्थी बनाता हैं क्यूंकि वह ज्ञानपूर्वक सत्य आचरण से ही अभ्युदय और मोक्ष प्राप्ति की शिक्षा देता हैं परन्तु मज़हब मनुष्य को आलस्य का पाठ सिखाता हैं क्यूंकि मज़हब के मंतव्यों मात्र को मानने भर से ही मुक्ति का होना उसमें सिखाया जाता हैं।

10. धर्म मनुष्य को ईश्वर से सीधा सम्बन्ध जोड़कर मनुष्य को स्वतंत्र और आत्म स्वालंबी बनाता हैं क्यूंकि वह ईश्वर और मनुष्य के बीच में किसभी मध्यस्थ या एजेंट की आवश्यकता नहीं बताता .

मज़हब मनुष्य को परतंत्र और दूसरों पर आश्रित बनाता हैं क्यूंकि वह मज़हब के प्रवर्तक की सिफारिश के बिना मुक्ति का मिलना नहीं मानता.जैसे  ईसा   और मुहम्मद  पर ईमान  लाये  बिना  कोई  सच्चा  ईसाई  और  मुसलमान     नहीं   माना जाएगा .

11. धर्म दूसरों के हितों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति तक देना सिखाता हैं जबकि

मज़हब अपने हित के लिए अन्य मनुष्यों और पशुयों की प्राण हरने के लिए हिंसा रुपी क़ुरबानी का सन्देश देता हैं .और  जिहाद के  बहाने निर्दोषों  की  हत्या  को धार्मिक  कर्तव्य    मानता  है   .

12. धर्म मनुष्य को सभी प्राणी मात्र से प्रेम करना सिखाता हैं .और   सात्विक  निरामिष   भोजन  करने   की  शिक्षा  देता   है

 मज़हब मनुष्य को प्राणियों का माँसाहार और दूसरे मज़हब वालों से द्वेष सिखाता हैं.

13. धर्म मनुष्य जाति को मनुष्यत्व के नाते से एक प्रकार के सार्वजानिक आचारों और विचारों द्वारा एक केंद्र पर केन्द्रित करके भेदभाव और विरोध को मिटाता हैं तथा एकता का पाठ पढ़ाता हैं .

मज़हब अपने भिन्न भिन्न मंतव्यों और कर्तव्यों के कारण अपने पृथक पृथक जत्थे बनाकर भेदभाव और विरोध को बढ़ाते और एकता को मिटाते हैं.और   लोगों  को  बलपूर्वक   अपने  विचार  थोपने  पर  विश्वास  रखता  है   , और  नहीं  मानने  वालों  की  हत्या   करना  उचित  मानता  है .

14. धर्म एक मात्र ईश्वर की पूजा बतलाता हैं .

 मज़हब ईश्वर से भिन्न मत प्रवर्तक/गुरु/मनुष्य.रसूल , फरिश्ते ,आदि की पूजा बतलाकर अन्धविश्वास फैलाते हैं .

  धर्म और मज़हब के अंतर को ठीक प्रकार से समझ लेने पर मनुष्य अपने चिंतन मनन से आसानी से यह स्वीकार करके के श्रेष्ठ कल्याणकारी कार्यों को करने में पुरुषार्थ करना धर्म कहलाता हैं इसलिए उसके पालन में सभी का कल्याण हैं .हमें    विश्वास है  कि     धर्म  और  मजहब  का  अंतर  समझ   कर  लोग  ईसाइयत  और  इस्लाम    को  धर्म  समझने  की  भूल  नहीं  करेंगे   , और  ढोंगी  पाखंडी   बाबाओं   गुरुओं   के  चलाये  पन्थो    , सम्प्रदायों   को   धर्म  नहीं   मानेंगे

गुरुवार, 18 दिसंबर 2014

मुसलमानों को हिन्दू बनाना इस्लामी कार्य है

सारी  दुनिया   जान   चुकी   है   कि मुसलमान  गैर मुस्लिमों   का  धर्म  परिवर्तन  करा कर  सारी   दुनिया  पर   इस्लामी हुकूमत  कायम  करना   चाहते हैं  . और अपने   इस नापाक   मंसूबे   को  कामयाब   करने के लिए मुसलमान   पहले तो  इस्लाम  की  तारीफें   करते है  , और  दूसरों  के  धर्म  में कमियां    निकालते  रहते   है  , लेकिन  जब  उनके  झांसे   ने  नहीं  फसते  और इस्लाम  कबूल  नहीं  करते तो  मुसलमान् अपना  असली  खूंखार   और अत्याचारी    स्वभाव   दिखाने   लगते हैं  , और   गैर मुस्लिमों   का  धर्म  परिवर्तन  कराने के लिए  हत्या  ,  बलात्कार  ,   आतंक जैसे  जघन्य  कुकर्म  करने  लगते  हैं   , और  जब  इन इस्लाम   के दलालों  से   पूछ जाता   है  क़ि  तुन  लोगों  का जबरन  धर्म  परिवर्तन   करा   कर  मुसलमान   क्यों   बनाते  हो ?तो   यह  धूर्त  कहते हैं  कि " दुनिया  में पैदा  होने वाला  हरेक  बच्चा  मुसलमान   ही  होता  है  .  लेकिन   आप  लोग  ही  उसे  हिन्दू   ,  बौद्ध  ,जैन   या  सिख   बना   देते    हो  . जो  अल्लाह   की   मर्जी  के  खिलाफ  है   . हम तो  लोगों  को उनके  पैदायशी  धर्म  यानि  इस्लाम  में शामिल  करके अल्लाह  के  हुक्म   का  पालन  कर  रहे   हैं  . ,यही   बात जाकिर  नायक   जैसे इस्लामी  प्रचारक  ने  कही  है ,
देखिये विडिओ -Dr Zakir Naik - Every Child is born as a Muslim

https://www.youtube.com/watch?v=zLLsqYdRlk0

1-हदीस  के  अर्थ  में  चालाकी

इस्लाम   के  एजेंट   धूर्त मुल्ले हमेशा   दावा  करते  रहते हैं  कि  दुनिया   में  जो  भी  बच्चा  पैदा  होता   है  , अल्लाह   उसे  मुसलमान बना कर   ही  पीड़ा करता है  , ताकि   वह   बालक  सिर्फ  अल्लाह  की इबादत    किया  करे  , परन्तु माता   पिता   बच्चे  को यहूदी   ,ईसाई  या  अग्नि  पूजक     बना   देते   हैं  . मुल्ले  इस  बात   को  साबित   करने के लिए  इस   हदीस   का  हवाला   देते  हैं .और   बड़ी   चालाकी  से  इस  हदीस   का  यह  अर्थ     बताते   हैं  ,
"अबु हुरैरा  ने  कहा  कि  रसूल  ने  कहा   , हरेक  बच्चा सच्चे  धर्म   के साथ  पैदा   होता  है  , )अर्थात  केवल  अल्लाह की  ही इबादत  करना )लेकिन  अभिभावक  उसका  धर्म  परिवर्तन   करके यहूदी  , ईसाई   या  अग्नि  पूजक   बना  देते   हैं

Abu Huraira, narrated that the Prophet . said, "Every child is born with a true faith (i.e. to worship none but Allah Alone) but his parents convert him to Judaism or to Christianity or to Magainism,

"‏"‏ مَا مِنْ مَوْلُودٍ إِلاَّ يُولَدُ عَلَى الْفِطْرَةِ، فَأَبَوَاهُ يُهَوِّدَانِهِ أَوْ يُنَصِّرَانِهِ أَوْ يُمَجِّسَانِهِ،

सही   बुखारी  -जिल्द2 किताब 23  हदीस 467

2-पूरी हदीस और  असली  अर्थ
यहाँ  पर  अरबी  में पूरी  हदीस  दी  जा  रही   है  , इसमे  इस्लाम  या सच्चा  धर्म (a true religion  )  शब्द  नहीं  है  . बल्कि    फितरत  शब्द  दिया  गया   है  . मुसलमान  लोगों  को  धोखा  देने के लिए  इसका  अर्थ  इस्लाम  बता   देते  हैं  .

Here is the text of the Hadeeth, see if you can find the  word Islam in it anywhere. Its not in the Hadeeth '



حَدَّثَنَا عَبْدَانُ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ، أَخْبَرَنَا يُونُسُ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، أَخْبَرَنِي أَبُو سَلَمَةَ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ مَا مِنْ مَوْلُودٍ إِلاَّ يُولَدُ عَلَى الْفِطْرَةِ، فَأَبَوَاهُ يُهَوِّدَانِهِ أَوْ يُنَصِّرَانِهِ أَوْ يُمَجِّسَانِهِ، كَمَا تُنْتَجُ الْبَهِيمَةُ بَهِيمَةً جَمْعَاءَ، هَلْ تُحِسُّونَ فِيهَا مِنْ جَدْعَاءَ ‏"‏‏.‏ ثُمَّ يَقُولُ أَبُو هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ‏{‏فِطْرَةَ اللَّهِ الَّتِي فَطَرَ النَّاسَ عَلَيْهَا لاَ تَبْدِيلَ لِخَلْقِ اللَّهِ ذَلِكَ الدِّينُ الْقَيِّمُ‏}

पहले  दी  गयी   हदीस  का  मूल  अरबी  पाठ     इस प्रकार   है  ,इसमे  सच्चे  धर्म  (  इस्लाम  )  का    कहीं  भी  उल्लेख   नहीं  है  , बल्कि " अल  फितरत -  الْفِطْرَةِ"  शब्द    दिया  गया   है  . मुल्लों   ने  बड़ी  मक्कारी  से  इस शब्द   का  अर्थ "  सच्चा  धर्म (  )   का  मतलब इस्लाम      बना  दिया   है .इस   हदीस  में  अरबी    का  शब्द " फितरत  -  الْفِطْرَةِ   "   आया   है   ,  जिसका   अर्थ ( सच्चा  धर्म  ( a true faith   )      होता   है  .  लेकिन  मक्कार मुल्ले  लोगों  कीआँखों   में धूल   डाल  कर  इसका     तात्पर्य   इस्लाम बता देते   है  . और    कहते हैं  की  अल्लाह  हर   बच्चे   को  मुसलमान   के रूप में  पैदा  करता   है , इसलिए किसी  गैर   मुस्लिम  को जबरन , प्रलोभन  देकर  ,  या   छल   कर  मुस्लमान   बनाने में   कोई अपराध   नहीं  है   .


3-फितरत   क्या  है ?
 हदीस  में प्रयुक्त  अरबी  शब्द " फितरत - فطرة"   का  अर्थ   लोगों  को  धोखा  देने के लिए  जाकिर  नायक  जैसे  चालाक मुल्ले   इस्लाम  बता देते हैं।  लेकिन  वास्तव  में   अरबी   शब्दकोश  में फितरत  के कई   अर्थ  मिल  जाते  हैं  . उन में से कुछ  के  अंगरेजी  और  हिंदी  अर्थ  इस  प्रकार  हैं  ,
1-सलाह -صلاح "-righteousness-नीतिपरायणता

2-बिदानियाः -   بدائية "-Eternal-सनातन

3-अल तबीयतुल    बशरियाः  अन्नफियाह --الطبيعة البشرية النقية "-pure human nature-शुद्ध मानव प्रकृति

4-इजलाल -إجلال"-solemnity-संस्कारयुक्तता

यहां  पर  फितरत  शब्द  के  जितने  भी  अर्थ  दिए गएँ  है  ,  उन्हें  ध्यान   से  पढने से    स्पष्ट  होता  है  , फितरत के  जितने भी  अर्थ  है  वह सनातन  प्राचीन  वैदिक धर्म   में   मौजूद   हैं  .  इस्लाम   में  नहीं  . इसका  मतलब  है  कि पैदा होने  वाला  हरेक  बच्चा  हिन्दू  होता  है।   मुसलमान   नहीं !

4-फितरत का  परिवर्तन नहीं  हो   सकता

यह   बात  सिद्ध  हो  चुकी  है  कि हरेक  बच्चा  जन्म  से  हिन्दू  होता   है  और   कुरान  में  कहा  गया  है  ,

" अल्लाह  ने जो भी  बनाया  बढ़िया    बनाया  " सूरा -अस  सजदा32:7

"who made all things good "32:7.और  अल्लाह  की  रचना    में   परिवर्तन  नहीं   हो  सकता


"अबू  हुरैरा  ने  कहा  कि रसूल   ने  कहा  है  ,कि कोई   भी  बच्चा    फितरत  के बिना  पैदा  नहीं होता  "फिर  रसूल  बताने लगे कि अल्लाह  ने जिस फितरत    के  अनुसार  मनुष्य  को  बनाया   है  , उसमे   परिवर्तन    नहीं   हो   सकता  . यही   सच्चा  धर्म  है "

Abu Huraira reported Allah's Messenger  ,saying:
No child is born but upon Fitra. He then said. Recite: The nature made by Allah in which He created man, there is no altering of Allah's nature; that is the right religion.

"‏"‏ مَا مِنْ مَوْلُودٍ إِلاَّ يُولَدُ عَلَى الْفِطْرَةِ ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ يَقُولُ اقْرَءُوا

सही  मुस्लिम - किताब 33  हदीस 6425

कुरान   में   साफ   कहा  है  कि  अल्लाह मनुष्य  की   रचना   हर  प्रकार  से बढ़िया   बनायीं   है  , उसमे बदलाव करना मनुष्य की "  फितरत -  " प्राकृतिक  रचना  के   विरुद्ध   है  . अर्थात   अल्लाह   ने  मनुष्य   की  जैसी  फितरत   बनायीं   है  ,उसे  वैसा   ही  रहने  देना  चाहिए  . (e.g-verses in the Qur'an . 32:6-7, 31:20), stating that Allah created humans perfectly)

इसलिए  बच्चों  की  खतना  करना  और  हिन्दुओं  को     मुसलमान  बनाना  अल्लाह  की  बनायीं  फितरत   में परिवर्तन  करना  माना जाएगा।  और   जो भी  मुस्लमान  ऐसा  करेगा  या  करने  का  प्रयास  करेगा   वह  अल्लाह का  विरोधी  और   काफ़िर   है  . लेकिन    मुसलमान  को  हिन्दू  बना  लेने पर अल्लाह खुश  होगा   , क्योंकि  इस  से  अल्लाह  की  बनायी  फितरत में  परिवर्तन  नहीं  होता  .

radical changes to one's body.condemned as unlawful changes to fitra.


इसका मतलब  है  ,जितने अधिक मुसलमानों  को हिन्दू  बनाया  जाएगा।  अल्लाह  उतना  ही खुश  होगा


मंगलवार, 25 नवंबर 2014

कुरान ने सूरा फातिहा की पोल खोली !

मुसलमानों का  दावा है कि कुरान अल्लाह की  किताब   है  ,  और उसका एक एक  शब्द  अल्लाह का  वचन   है  . मौजूदा   कुरान  में   छोटे बड़े कुल 114 अध्याय (Chapters)  हैं  ,जिनको  अरबी   में  सूरा   कहा   जाता   है  , और  हरेक  सूरा में जो  वाक्य   होते   हैं  ,उनको  आयत (Verses )  कहा   जाता है   . कुरान  की   पहली  सूरा    का  नाम सूरा "अल फातिहा "   है  . इसमे कुल  7  आयतें   है   . जिनमे  अल्लाह के गुणों , शक्तियों और  महानता  का  वर्णन   करते  हुए अल्लाह की   तारीफ़  की   गयी   है  . और  उस  से दुआ  की  गयी   है  . सूरा  फातिहा  को   हर  नमाज   में पढ़ना  अनिवार्य   है   . इसकी   पहली   5  आयतें  इस प्रकार  हैं ,जो अरबी  से उर्दू  में अनुवादित  की  हैं ,

2.सब तारीफें  अल्लाह  के लिए  जो जहानों (Worlds)   का  मालिक   है
3.बड़ा  मेहरबान  और निहायत  रहमदिल .
4.जजा  के  दिन ( न्याय दिवस ) का  मालिक .
5.हम तेरी  ही  इबादत  करते  हैं  , और तुझी  से  मदद  माँगते  हैं .
6.हमें  सीधा  रास्ता  दिखा .
7.उन  लोगों   का  रास्ता  जिन  पर तूने इनाम   किया ,न  कि जिन पर तेरा  गजब  नाजिल  हुआ और न  वह जो  गुमराह  हुए .

सूरा  फातिहा  की  इन  पहली 5   आयतों  को पढ़  कर यही  सवाल  पैदा  होता  है ,कि अगर  यह  आयतें   सचमुच  अल्लाह  के वचन  हैं , और किसी  और की  रचना   नहीं  तो , अल्लाह  को अपने मुंह  से अपनी  तारीफ़ करने  की  क्या  जरूरत पड़   गयी?
इसका  असली  कारण  यह  है कि  सूरा  फातिहा  कुरान  की  पहली  सूरा   नहीं  है , इसे बाद  में उस   समय  पहला  कर दिया  गया   जब  कुरान   की  ऐसी  आयतें   बन  चुकी   थीं   जिनमे अल्लाह के बारे में सूरा  फातिहा  के  विपरीत  बातें दी  गयी थीं  . उदाहरण के लिए पहले सूरा  फातिहा की  एक एक  आयत  लेते हैं  ,  और  कुरान  से  उसके  विपरीत  आयत  की  तुलना  देखते   हैं   .
1-जगत का  मालिक नहीं है 
सूरा  फातिहा  की आयत 2 में   कहा है   "जो जहानों (Worlds)   का  मालिक   है  "यह बात  भी  सरासर  झूठ  है  क्योंकि  अल्लाह  ने मुसलमानों   के  प्राण  खरीद   लिए  है   ,जैसा कि  की इस आयत में  कहा  है   ,

" बेशक  अल्लाह   ने  मुसलमानों   के प्राण  और  माल  इसलिए  खरीद  लिए  हैं  ,कि  वह जन्नत के लिए  अल्लाह के  रास्ते पर लड़ते हैं  ,  और मारे  जाते हैं  और  मारते  हैं   " सूरा -तौबा  9:111

और  सामान्य  नियम   के अनुसार किसी वस्तु  को  खरीदने  वाला   ही  उसका  मालिक  मना  जाता   है ,इसलिए  अल्लाह सिर्फ   मुसलमानों   का  मालिक  है ,अल्लाह  हिन्दुओं  और  अन्य  धर्म   के लोगों   का  मालिक   नहीं  हो सकता , क्योंकि  अल्लाह   न तो इनको  खरीद सकता है  . और न यह बिकाऊ  हैं .और  सामान्य  नियम   के अनुसार किसी वस्तु  को  खरीदने  वाला   ही  उसका  मालिक  मना  जाता   है ,इसलिए  अल्लाह सिर्फ   मुसलमानों   का  मालिक  है ,अल्लाह  हिन्दुओं  और  अन्य  धर्म   के लोगों   का  मालिक   नहीं  हो सकता , क्योंकि  अल्लाह   न तो इनको  खरीद सकता है  .  और न यह बिकाऊ  हैं (Allah  is  Lord of  muslims only)

2- अल्लाह  दयालु और कृपालु  नहीं है 

सूरा  फातिहा  की  आयत  3  में   कहा   है  "बड़ा  मेहरबान  और निहायत  रहमदिल "लेकिन   जो अल्लाह सभी  गैर  मुस्लिमों  को  दुश्मन  मानता  हो  . उनसे नफ़रत करता   हो  , और  उन  पर धिक्कार   करता  हो , और  उनकी जिंदगी दुखदायी  बनाने  का  इरादा रखता  हो  ,  वह  कभी  भी दयालु  नहीं  हो  सकता  है जैसा कि  कुरान की यह  आयतें  बताती   हैं  ,
"अल्लाह  काफिरों   का   दुश्मन  है  " सूरा - बकरा 2:98

(Allah is an enemy to the disbelievers. 2:98)

"अल्लाह  काफिरों   को धिक्कार करता   है "सूरा  -बकरा 2:89

(The curse of Allah is on disbelievers. 2:89)

"अल्लाह गैर मुस्लिमों   की जिंदगी दुखदायी ( miserable )  बना   देगा " सूरा -बकरा 2:114

(Allah will make disbelievers' lives miserable in this world . 2:114

और  अगर  सचमुच   अल्लाह  दयालु  और  रहमदिल होता  तो  , उसके अनुयायी  जिहादी   इतने क्रूर  और  बेरहम  नहीं  होते  ,  जो बच्चो  और महिलाओंको  क़त्ल करने को  अल्लाह  का हुक्म  मानते   हैं  

3-न्याय  दिवस का स्वामी नहीं है 
सूरा  फातिहा  की  आयत  4  में  कहा है  "जजा  के  दिन ( न्याय दिवस ) का  मालिक ".लेकिन कुरान  की इन  आयतों  और  हदीस  के अनुसार अल्लाह  न्याय  दिवस   का  स्वामी   नहीं   है  , उसकी  जगह  मुहम्मद  न्याय करेंगे

" हे मुहम्मद  ,करीब   है   कि तुम्हारा रब  तुम्हें उच्च पद  पर  नियुक्त   कर दे  " सूरा - बनी इस्राइल 17:79

"your Lord will raise you to a praiseworthy station.” [Isra’a 17: 79]


कुरान  की  इस आयत  की  व्याख्या  में मुस्लिम  विद्वान "अबुल  सना शिहाबुद्दिन सय्यद   महमूद इब्न अल  हुसैनी अल अलूसी अल  बगदादी  -أبو الثناء شهاب الدين سيد محمود بن عبد الله بن محمود الحسيني الآلوسي البغدادي‎‎ "अपनी किताब "रूहुल  मायनी  -روح المعاني " में  कहते हैं ,कि न्याय   के  दिन  अल्लाह अपना पूरा  अधिकार  अपने  हबीब   मुहम्मद  को  सौंप  देंगे  , और वही  अपनी इच्छा  के अनुसार  लोगों   के कर्मों   का  फैसला  करेंगे  .
और  लगभग   यही  बात  इस आयत में भी  कही  गयी   है

" उस  दिन   किसी   का  हस्तक्षेप स्वीकार  नहीं  होगा ,सिवाय  उसके  जिसे  अल्लाह  ने  अनुज्ञा   दी   हो ,और उसकी सिफारिश मानी  जायेगी "सूरा -ता  हां 20:109

On that Day shall no intercession avail except for those for whom permission has been granted by (Allah)20:109

अल्लाह  न्याय   दिवस   का स्वामी  नहीं  है  , बल्कि  मुहम्मद भी अल्लाह का सहभागी   है  , यह बात इस  हदीस   से सिद्ध    हो जाती  है  ,
"अब्दुल्लाह  बिन उमर  ने कहा  , जब अल्लाह क़यामत   के  दिन   लोगों के  कर्मों  का  फैसला  करेगा  तो  , मुहम्मद  मध्यस्थता  करेंगे  . अल्लाह उनको  मध्यस्थता करने  की सुविधा  प्रदान   कर  देगा   "

Narrated 'Abdullah bin 'Umar:"Muhammad will intercede with Allah to judge amongst the people, and then Allah will exalt him to Maqam Mahmud (the privilege of intercession,

सही बुखारी - जिल्द 2  किताब 24  हदीस 553

इन  तथ्यों   से  यही सिद्ध  होता  है  कि यातो  अल्लाह में  खुद  सही  न्याय करने की क्षमता  नहीं  है  , या मुहम्मद ही  अल्लाह बन कर लोगों  को को भ्रमित   करते रहते थे  
4-रास्ता  भटकाने  वाला 

सूरा फातिहा   की  आयत  6  में दुआ मांगी  गयी   है  कि "हमें  सीधा  रास्ता  दिखा "लेकिन  अल्लाह  लोगों  को सीधा  रास्ता दिखने की  जगह  रास्ते से  भटका   देता  है  ,जैसा की कुरान की इस  आयत में  कहा है   ,

"फिर अल्लाह   जिसको  चाहे  भटका   देता  है  " सूरा -इबराहीम  14:4

(Then Allah misleads WHOM HE WILLS )


और  यदि  अल्लाह   सचमुच मुसलमानों   को  सीधा  रास्ता  दिखाने  वाला होता  तो  , तो   अधिकांश  मुसलमान  आतंकवादी नहीं  बन  गए होते  . जबकि अन्य  धर्म   के  लोग अल्लाह  की मेहरबानी   के बिना   ही  सीधे   रास्ते  पर   चल रहे   हैं


इस  प्रकार  सूरा  फातिहा  में  अल्लाह  की  तारीफ़  में  जो  7  आयतें   दी   गयी   हैं  , उसके विरुद्ध  खुद  अल्लाह की  किताब   ने  ऎसी  चार  आयतें  पेश   कर दी   हैं जो  अल्लाह   की  महानता   का  भंडा  फोड़ने के   लिए  पर्याप्त   हैं   . इसी   लिए सूरा  फातिहा  को पहले  कर दिया  गया था. ताकि    भोले भले लोग  अल्लाह   की  ऐसी  तारीफ़  से पहले तो  प्रभावित  होकर  इस्लाम के चंगुल   में  फंस   जाएँ  .  फिर उनको   बाकि  कुरआन  पढ़ा कर  आसानी से जिहादी  बनाया   जा  सके   ,




शुक्रवार, 7 नवंबर 2014

मुसलमान से दस सवाल !

यह   एक  कटु  सत्य   है  कि   आज    भारतीय   महाद्वीप   में    जितने भी   मुसलमान   हैं   , उनके पूर्वज    कभी   हिन्दू    थे   ,  जिनको    मुस्लिम    बादशाहों   ने   जबरन   मुसलमान    बना   दिया   था  .  लेकिन   दुर्भाग्य   की   बात है  कि   विदेशी   पैसों   के बल पर  इस्लाम   के  एजेंट  ऐसे  हिन्दुओं     का  धर्म  परिवर्तन कराने में  लगे  रहते हैं  ,  जो इस्लाम  की असलियत  से  अनभिज्ञ   हैं  , या जिनको    हिन्दू  धर्म  का आधा अधूरा   ज्ञान   होता   है  , और दुर्भाग्य से  ऐसे  हिन्दू  युवक  , युवतियां    सेकुलर  विचार वाले होते हैं  , तो  इस्लाम   के प्रचारक  आसानी से उनको  इस्लाम  जाल में  फसा  लेते हैं   , इसलिए  इस्लाम    के  चक्कर   में  फसने  से बचने का  एक  ही  उपाय  है  ,कि  इस्लाम   के  एजेंटों  से  तर्कपूर्ण     सवाल  किये   जाएँ   . क्योंकि  इस्लाम सिर्फ ईमान  लाने  पर  ही  जोर  देता  है  , और  अगर कोई  इस्लाम   के  दलालों   से   सवाल   करता   है  , तो यातो   वह  भड़क   जाते हैं  , या  लड़ने  पर  उतारू   हो  जाते  हैं  .
अक्सर  देखा  गया  है  कि  कुछ  उत्साही   हिन्दू   इस्लाम   के  समर्थकों    के साथ शाश्त्रार्थ     किया  करते  हैं   , इसलिए   उनकी  सहायता के लिए दस  ऐसे  सवाल   दिए  जा   रहे  हैं  , जिनका  सटीक  ,  प्रमाण  सहित  और   तर्कपूर्ण    जवाब   कोई  मुल्ला मौलवी    नहीं  दे  सकता  .

1-.मुसलमानों   का दावा  है  कि  कुरान  अल्लाह की  किताब  है   ,लेकिन   कुरान   में  बच्चों  की  खतना   करने का   हुक्म  नहीं   है  ,  फिर भी  मुसलमान   खतना क्यों    कराते   है  ?  क्या   अल्लाह में  इतनी  भी    शक्ति  नहीं   है कि मुसलमानों   के  खतना  वाले   बच्चे   ही  पैदा    कर सके ?और  कुरान  के विरद्ध   काम  करने   से  मुसलमानों   को  काफ़िर   क्यों   नहीं   माना जाए  ?

2-मुसलमान   मानते हैं   कि  अल्लाह  ने फ़रिश्ते  के  हाथो   कुरआन   की  पहली  सूरा   लिखित रूप   में  मुहम्मद  को  दी थी  , लेकिन  अनपढ़ होने से वह  उसे    नहीं   पढ़   सके  , इसके  अलावा   मुसलमान   यह   भी  दावा करते हैं   कि  विश्व  में कुरान   एकमात्र ऐसी  किताब  है जो   पूर्णतयः  सुरक्षित   है   , तो  मुसलमान     कुरान    की   वह    सूरा  पेश   क्यों   नहीं   कर देते    जो  अल्लाह  ने लिख कर भेजी  थी    , इस से  तुरंत  पता हो जायेगा कि वह  कागज   कहाँ   बना था   ? और  अल्लाह   की  राईटिंग   कैसी    थी  ?वर्ना  हम  क्यों   नहीं   माने कि  जैसे  अल्लाह फर्जी   है   वैसे ही  कुरान   भी  फर्जी   है

3. इस्लाम के मुताबिक यदि 3 दिन/माह का बच्चा मर जाये तो उसको कयामत के दिन क्या मिलेगा.-जन्नत या जहन्नुम ? और  किस आधार   पर   ??
4. मरने के बाद जन्नत में पुरुष को 72 हूरी (अप्सराए) मिलेगी...तो स्त्री को क्या मिलेगा...... 72 हूरा (पुरुष वेश्या) .??और  अगर  कोई  बच्चा  पैदा  होते ही  मर   जाये    तो   क्या  उसे भी  हूरें  मिलेंगी   ?  और वह  हूरों   का क्या  करेगा  ?

5.- यदि   मुसलमानों की  तरह  ईसाई   , यहूदी  और  हिन्दू   मिलकर     मुसलमानों  के विरुद्ध  जिहाद  करें    ,  तो  क्या मुसलमान  इसे   धार्मिक   कार्य   मानेंगे   या  अपराध    ?  और  क्यों ?

6-.यदि कोई  गैर  मुस्लिम  (काफ़िर) यदि अच्छे गुणों वाला हो तो भी. क्या अल्लाह उसको जहन्नुम की आग में झोक देगा....? और क्यों ?और, अगर ऐसा करेगा तो.... क्या ये अन्याय नहीं हुआ ??

7.कुरान   के  अनुसार  मुहम्मद  सशरीर  जन्नत   गए  थे  , और  वहां  अल्लाह  से बात भी  की थी   ,  लेकिन  जब अल्लाह  निराकार है  , और उसकी कोई   इमेज (छवि) नहीं है तो..मुहम्मद ने अल्लाह को कैसे देखा ??और   कैसे  पहिचाना  कि यह  अल्लाह   है   , या  शैतान    है  ?
8-  मुसलमानों   का  दावा   है कि      जन्नत  जाते  समय   मुहम्मद   ने  येरूसलम     की   बैतूल  मुक़द्दस   नामकी मस्जिद   में  नमाज  पढ़ी  थी ,लेकिन  वह   मुहम्मद के  जन्म  से पहले ही  रोमन    लोगों  ने  नष्ट  कर दी थी  .  मुहम्मद के  समय उसका  नामो  निशान   नहीं  था  , तो  मुहम्मद  ने उसमे नमाज कैसे पढ़ी थी  ? हम   मुहम्मद को  झूठा   क्यों   नहीं  कहें   ?

9-.अल्लाह ने  अनपढ़  मुहम्मद में  ऐसी   कौनसी   विशेषता   देखी  .  जो  उनको   अपना  रसूल  नियुक्त   कर दिया   ,क्या   उस  समय  पूरे अरब  में एकभी  ऐसा पढ़ालिखा    व्यक्ति   नहीं    था   , जिसे  अल्लाह   रसूल  बना   देता   , और  जब  अल्लाह  सचमुच  सर्वशक्तिमान   है  , तो   अल्लाह  मुहम्मद  को  63  साल   में भी    अरबी  लिखने    या  पढने की    बुद्धि   क्यों नहीं   दे पाया

10.जो  व्यक्ति  अपने  जिहादियों   की  गैंग   बना कर   जगह जगह लूट   करवाता   हो   ,  और लूट के  माल से बाकायदा      अपने लिए पाँचवाँ हिस्सा  (20 %० )  रख   लेता  हो  ,  उसे   उसे  अल्लाह   का रसूल   कहने की  जगह  लुटरों    का  सरदार  क्यों  न   कहें  ?

नोट-  यह  प्रश्नावली    भंडाफोडू    ब्लॉग    के लेखों  से   चुन   कर  बनायी   गयी   है  , जो पिछले   7  सालों   से इस्लाम   के नाम पर   होने वाले  आतंक  और  हिन्दू  विरोधी    जिहाद  का  भंडा   फोड़   करता   आया   है  . इन लेखों   का उद्देश्य  इस्लाम  की  असलियत  लोगों   को बताना है   ,  क्योंकि  इस्लाम   धर्म  नहीं  एक   उन्माद   है   ,  जो  विश्व   के  लिए  विशेष  कर  भारत के लिए  खतरा   है   . पाठकों   से निवेदन   है  कि  वह  भंडाफोडू  ब्लॉग  और  फेसबुक     में  इसी   नाम  के  ग्रुप   के लेखों   को  ध्यान   से पढ़ें   ,  और   उनका  प्रचार  प्रसार करें   .  इनकी लिंक   दी   जा रही   है  

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बुधवार, 15 अक्तूबर 2014

मुसलमानों के लिंग पिघल गए !!



 लेख  का   ऐसा शीर्षक  पढ़ कर  पाठक  जरूर  हँसेंगे , लेकिन  यह अफरीका के मुस्लिम  देश सूडान  की  राजधानी  खारतूम  की सत्य  घटना  है।  और मुसलमानों  के  अंधविश्वास  , भेड़चाल और मूर्खता   को  साबित  करने के लिए  पर्याप्त  है  ,

चूँकि  इस्लाम  ज्ञान  की  जगह ईमान( अंध विश्वास  )  पर   जोर  देता  है  , और  किसी  भी   तथ्य  को परखने  ,  और  प्रश्न  करने को गुनाह  मानता है , और  मुल्ले  कहते  है  कि अल्लाह को  ईमान   के बारे में अक्ल   का   दखल  करना पसंद नहीं   है  . मुसलमानों  के  कलमए  शहादत   से  उनकी भेड़ चाल   साबित होती   है  , जब  वह  कहते  हैं  "अश्हदु अन्  ला  इलाहा  इल्लल्लाह  , व् अश्हदु अन  मुहमदर्रसूलुल्लाह " अर्थात  " गवाही  देता हूँ अल्लाह के आलावा  कोई  देवता  नहीं  , और  गवाही  देता  हूँ  कि मुहम्मद  अल्लाह   का  रसूल  है   . इस्लाम के  उदय से आज  तक मुसलमान  बिना किसी  सबूत  के  यही  गवाही  देते आ रहे हैं  , लेख   का मुख्य  विषय मुसलमानों   की  ऐसी ही झूठी गवाही देने की आदत , भेड़चाल  और  मूर्खता प्रकट करती है  . यद्यपि   यह  घटना 28  अक्टूबर  2003  की   है  ,  और  लोग  इसे भूल  गए होंगे   . लेकिन  यह घटना  भारत से  सम्बंधित   है  ,  इसलिए  इसे  देना  जरूरी  है  .
सूडान  के  के मुसलमान  चाय  की  जगह गुड़हल   के  फूलों  का चूर्ण उबाल कर  पीते  हैं  , जो  भारत से निर्यात  किया जाता  है   . गुडहल  को  अंगरेजी  में " Hibiscus  "  कहा जाता है  , इसका  बोटेनिकल  नाम  " Hibiscus sabdariffa   "  है  . इसके  लाल  रंग  के फूलों   को  सुखा  कर   चूरा  करके उबाल जाता   है , फिर इसे  चाय की  तरह   पिया  जाता है  , या  ठंडा  करके शरबत की  तरह  पीते हैं.
 अरबी   में  इसे " करदियह -كركديه     " कहते हैं  गुडहल से बनी चाय को प्रयोग सर्दी-जुखाम और बुखार आदि को ठीक करने के लिये प्रयोग की जाती है।
 .http://.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/9/94/Flor_de_Jamaica.jpg/220px-Flor_de_Jamaica.jpg

सूडान  के  अरबी  अखबार " अल कुदस अल अरबी - لقدس العربي  "  के  अनुसार  दिंनांक  28  अक्टूबर  2003  के अनुसार सूडान की  राजधानी  खारतूम  में जब एक  व्यक्ति  दुकान    से " कर्दियाः " का  पैकेट खरीदने गया  तो  अचानक  उसका लिंग  पिघल कर उसके शरीर  में समां गया  ( his penis melt into his body ) .यही नहीं   दुकानदार का लिंग  भी  थर्राने  लगा (seller felt his penis shivering) .

   ग्राहक  और  दूकानदार  यह चमत्कार  देख  कर बेसुध हो  गए  और  तुरंत  उनको अस्पताल भेज  दिया गया  . सूडानी   अखबार " अल  राइ अल आलम अस सूडान -  -السودان    الرأي العام
  "के  अनुसार उसके  बाद  जिस  भी  मुस्लिम  ने  किसी  गैर  मुस्लिम   से  हाथ  मिलाया   उन  सभी  के लिंग  पिघल   कर गायब   हो  गए।  लोग  इसके लिए भारत से  भेजी गयी चाय  को जिम्मेदार  बताने लगे  .  इसी   तरह  एक  व्यक्ति   ने  अपना  नाम बताये बिना कहा की  जब वह बाजार में  दुकान   से  कंघा  खरीदने गया तो तो उसे  अपने लिंग में अजीब  सी अनुभूति होने लगी , और थोड़ी   ही  देर में  उसे  पता हुआ की वह  अपना लिंग  खो  चूका  है   ( Another victim, who refused to give his name, said that while he was at the market, a man approached him, gave him a comb, and asked him to comb his hair. When he did so, within seconds, he said, he felt a strange sensation and discovered that he had lost his penis ) धीमे  धीमे  फोन  और मोबाईल  से लिंग गायब होने की हजारों  खबरें पूरे खारतूम  में  फ़ैल गयीं  . सारे शहर में हजारों  ऐसे   गवाह  प्रकट हो गए जो   दावा करने लगे कि मेरे सामने  मेरे  अमुक मित्र  या  पड़ौसी  का लिंग गायब  हो गया  . जब हजारों   लोग कसम खाकर  यही  गवाही देने लगे तो   . खारतूम  के एटॉर्नी  जनरल " ( Attorney General    )सलाह  अबू  जैद (  Salah Abu Zayed  )  ने आदेश   दिया  की  जिनके  भी  लिंग   गायब   हो   गए हैं उन  सभी को एक  विशेष मेडिकल  कमिटी  के  सामने  जाँच   के लिए  प्रस्तुत  किया  जाए  . जो  लिंग गायब  होने  का  कारण   पता  करे  ,

लेकिन   जाँच  के बाद जो  भी पता  चला , वह  काफी  हास्यास्पद  है  , क्योंकि  सभी  के लिंग सलामत थे। सभी  शिकायत कर्ता  स्वस्थ  थे। सभी  मुसलमान लिंग गायब   होने  की झूठी  शिकायतें   कर  रहे  थे  , और  उनके मित्र  इसलिए झूठी  गवाही  दे रहे थे , क्योंकि उनका कलमा  खुद  झूठी  गवाही  देने की  शिक्षा  देता  है।

निष्कर्ष - .जिस  तरह  से  सूडान   के  मुसलमान  बिना  किसी  प्रमाण  के  लोगों  के  लिंग  पिघलने की  बात किसी से सुन  कर  दूसरों   तक  फैलाते  रहे  ,  और लोग  सुनी  सुनाई  बातों   पर  गवाही  देते  रहे  , उसी  तरह  सभी  मुसलमान  कलमा   पढ़ कर  रोज  झूठी  गवाही   देते हैं  , कि  मुहम्मद अल्लाह के रसूल  है ,
न्याय  शाश्त्र   के  अनुसार ऐसी  गवाही  को " श्रुतानुश्रुति साक्ष्य "  कहा  जाता   है   . सामान्य   अंगरेजी में  इसे   "Hearsay evidence     "  इसे   "  disambiguation  "   भी  कहते  हैं .भारतीय साक्ष्य  अधिनियम (  the Indian Evidence Act, 1872  ) की धारा 32  और 60   में श्रुतानुश्रुति   गवाही  की परिभाषा   इस प्रकार दी  गयी   है ,

"HEARSAY EVIDENCE. The evidence of those who relate, not what they know themselves, but what they have heard from others.
     2. As a general rule, hearsay evidence of a fact is not admissible. If any fact is to be substantiated against a person, it ought to be proved

Oral  testimony about an out-of-court statement attributed to someone other than the testifying person. Such evidence is generally inadmissible because the person to whom the statement is attributed cannot be cross-examined

अर्थात  -श्रुतानुश्रुति ऐसी  गवाही    होती  है  जिसके बारे में  गवाह  खुद  नहीं   जानता  हो  , और  उसने  सारी  बातें   दूसरों    से सुनी  हों   . और सामान्य  नियम  के  अनुसार  ऐसी  गवाही  स्वीकार्य   नहीं   हो  सकती , जब तक तथ्य    प्रमाणित  नहीं किये  जाएँ   , 2 . ऐसी  गवाही   इसलिए भी स्वीकार्य नहीं  हो सकती क्योंकि अदालत  में बहस  के लिए गवाह   को  प्रस्तुत   नहीं   किया  जा  सकता   है  .
इसलिए   लोगों   को  समझ   लेना चाहिए कि  यदि  सारे मुसलमान  गरम  तवे    पर बैठ   कर भी  गवाही  दें  कि केवल  अल्लाह  की ही  इबादत करो और मुहम्मद   अल्लाह  के  रसूल  है  . तो  उनकी   इस बात पर  हरगिज   विश्वास   नहीं  करना   , क्योंकि  यह बात उसी  तरह झूठ  है   ,  जैसे  लिंग पिघलने की  बात है  .




 http://www.businessdictionary.com/definition/hearsay-evidence.html#ixzz3GBbWO3is

http://wikiislam.net/wiki/Muslim_Conspiracy_Theories

गुरुवार, 25 सितंबर 2014

महामद ( मुहम्मद ) एक पैशाच धर्म स्थापक !

इस्लाम  के प्रचारक हिन्दुओं   का  धर्म  परिवर्तन  कराने के लिए तरह तरह  के  हथकण्डे अपनाते रहते हैं  ,  कभी  सेकुलर बन  कर  गंगा जमुनी  तहजीब  की  वकालत  करने  लगते हैं  , कभी  इस्लाम और हिन्दू  धर्म  में समानता  साबित  करने  लगते हैं  , लेकिन इनका असली उद्देश्य  हिन्दुओं को  गुमराह करके    इस्लाम  के  चंगुल   में  फँसाना  ही होता   है  , क्योंकि अधिकांश  हिन्दू  इस्लाम  से अनभिज्ञ और  हिन्दू  धर्म   से उदासीन   होते  हैं  , इस समय इस्लाम   के प्रचारकों  में  जाकिर  नायक  का नाम   सबसे  ऊपर   है  . जो एक "सलफ़ी  जिहादी  -السلفية الجهادية)  "गिरोह   से  सम्बंधित    है  , यह गिरोह  जिहाद  में आतंकवाद  को  उचित  मानता   है    , जाकिर  नायक   का  पूरा नाम  "जाकिर अब्दुल  करीम नायक " है ,इसका जन्म 18 अक्टूबर  सन 1965  में हुआ था  ,  इसने  मेडिकल डाक्टर   की ट्रेनिंग  छोड़ कर  इस्लाम  का  प्रचार   करना शुरू कर दिया  , और दुबई (UAE  ) में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (Islamic Research Foundation   )  नामकी एक संस्था   बना  राखी  है  , यही   नहीं  जाकिर "पीस टीवी  (Peace TV )  नामका   निजी  चैनल  भी चलाता है  , जिसका मुख्यालय  भी दुबई  में है  , जाकिर  अक्सर  अपने चैनल  पर  चर्चा के लिए दूसरे  धर्म   के लोगों  को आमंत्रित  करता है  , फिर उन्हीं  के धर्म ग्रन्थ  से कुछ ऐसे अंश पेश करता है , जिनसे  साबित हो सके कि उनके धर्मग्रन्थ  में भी  मुहम्मद  , अल्लाह और रसूल  का उल्लेख है , और  भोले भले लोग  मुसलमान   बन  जाएँ।
जाकिर नायक ने ऐसी  ही एक  चाल 20  फरवरी  2014  को  चली  , जिसमे हिंदुओं  को भ्रमित  करने के लिए  दावा  कर दिया  कि हिन्दुओं के धर्मग्रन्थ  " भविष्य पुराण  " में  मुहम्मद  का  वर्णन   है  , और  उनको  अवतार  बताया  गया  है  , यह पूरा ब्यौरा इस विडिओ में मौजूद  है .
FAQ261 to Zakir Naik: Muhammad (pbuh) Prophesised in Bhavishya Purana!

https://www.youtube.com/watch?v=-iKiyg46Iy4


इस प्रकार से जाकिर नायक ने  बड़ी मक्कारी से  हिन्दुओं  को धोखा  देने के लिए  यह  साबित  करने का  प्रयास किया है कि  भविष्य पुराण में  मुहम्मद का  वर्णन  एक  अवतार  के रूप   में  किया  गया  है  , इसलिए हिन्दू  मुहम्मद को  एक अवतार  मान कर सम्मान  दें  , और उसके धर्म  इस्लाम  को  स्वीकार कर लें  ,  हो सकता है  कि कुछ  मूर्ख जाकिर जाल में फंस कर  जाकिर की बात को सही  मान  बैठे  हों  , लेकिन  भविष्य  पुराण में   मुहम्मद को " महामद " त्रिपुरासुर  का अवतार  , धर्म दूषक (Polluter of righteousness)और  पिशाच  धर्म (  demoniac religion)  का  प्रवर्तक  बताया  गया   है   . यही नहीं भविष्य  पुराण   में  इस्लाम  को पिशाच  धर्म   और  मुसलमानों  को " लिंगोच्छेदी "यानि  लिंग  कटवाने वाले  कहा गया है  ,जिसे हिन्दी में  कटुए  और मराठी  में लांडीये  कहा  जाता   है  , भविष्य  पुराण   के जिस    भाग में  मुहम्मदके वर्णन   है  ,वह  मूल  संस्कृत   और उसके हिंदी  अनुवाद केसाथ  दिया जा रहा है  . ताकि  लोगों  का  यह  भ्रम  दूर  हो  जाए की  भविष्य पुराण  में मुहम्मद को  एक अवतार के रूप में  प्रस्तुतकिया गया है    .

भविष्य  पुराण   में  महामद  ( मुहम्मद ) एक पैशाच धर्म स्थापक -भविष्य पुराण, प्रतिसर्ग पर्व, खण्ड 3, अध्याय 3 श्लोक  . 1 -31


श्री सूत उवाच-
1. शालिवाहन वंशे च राजानो दश चाभवन्। राज्यं पञ्चशताब्दं च कृत्वा लोकान्तरं ययुः
१. श्री सूत जी ने कहा - राजा शालिवाहन के वंश में दस राज हुए थे। उन सबने पञ्च सौ वर्ष पर्यन्त राज्य शासन किया था और अंत में दुसरे लोक में चले गए थे।

2. मर्य्यादा क्रमतो लीना जाता भूमण्डले तदा। भूपतिर्दशमो यो वै भोजराज इति स्मृतः।
२. उस समय में इस भूमण्डल में क्रम से मर्यादा लीन हो गयी थी। जो इनमे दशम राजा हुआ है वह भोजराज नाम से प्रसिद्द हुआ। .

3. दृष्ट्वा प्रक्षीणमर्य्यादां बली दिग्विजयं ययौ। सेनया दशसाहस्र्या कालिदासेन संयुतः।
३. उसने मर्यादा क्षीण होते देखकर परम बलवान उसने(राजा ने) दिग्विजय करने को गमन किया था। सेना में दस सहस्त्र सैनिक के साथ कविश्रेष्ठ कालिदास थे।

4. तथान्यैर्ब्राह्मणैः सार्द्धं सिन्धुपारमुपाययौ जित्वा गान्धारजान् म्लेच्छान् काश्मीरान् आरवान् शठान्।
४. तथा अन्य ब्राह्मणों के सहित वह सिन्धु नदी के पार प्राप्त हुआ(अर्थात पार किया) था। और उसने गान्धारराज, मलेच्छ, काश्मीर, नारव और शठों को दिग्विजय में जीता।

5. तेषां प्राप्य महाकोषं दण्डयोग्यानकारयत् एतस्मिन्नन्तरे म्लेच्छ आचार्येण समन्वितः।
५. उनका बहुत सा कोष प्राप्त करके उन सबको योग्य दण्ड दिया था। इसी समय काल में मल्लेछों का एक आचार्य हुआ।

6. महामद इति ख्यातः शिष्यशाखा समन्वितः नृपश्चैव महादेवं मरुस्थलनिवासिनम्।
६ महामद शिष्यों की अपने शाखाओं में बहुत प्रसिद्द था। नृप(राजा) ने मरुस्थल में निवास करने वाले महादेव को नमन किया।

7. गंगाजलैश्च सस्नाप्य पञ्चगव्य समन्वितैः। चन्दनादिभिरभ्यर्च्य तुष्टाव मनसा हरम् ।
७. पञ्चजगव्य से युक्त गंगा के जल से स्नान कराके तथा चन्दन आदि से अभ्याचना(भक्तिपूर्वकभाव से याचना) करके हर(महादेव) को स्तुति किया।

भोजराज उवाच-
 8. नमस्ते गिरिजानाथ मरुस्थलनिवासिने। त्रिपुरासुरनाशाय बहुमायाप्रवर्त्तिने।
८. भोजराज ने कहा - हे गिरिजा नाथ ! मरुस्थल में निवास करने वाले, बहुत सी माया में प्रवत होने त्रिपुरासुर नाशक वाले हैं।

9. म्लेच्छैर्गुप्ताय शुद्धाय सच्चिदानन्दरूपिणे। त्वं मां हि किंकरं विद्धि शरणार्थमुपागतम् ।
.९ मलेच्छों से गुप्त, शुद्ध और सच्चिदानन्द रूपी, मैं आपकी विधिपूर्वक शरण में आकर प्रार्थना करता हूँ।

सूत उवाच-


10. इति श्रुत्वा स्तवं देवः शब्दमाह नृपाय तम्। गन्तव्यं भोजराजेन महाकालेश्वरस्थले ।
 १०. सूत जी ने कहा - महादेव ने प्रकार स्तुति सुन राजा से ये शब्द कहे "हे भोजराज आपको महाकालेश्वर तीर्थ जाना चाहिए।"

11. म्लेच्छैस्सुदूषिता भूमिर्वाहीका नाम विश्रुता। आर्य्यधर्मो हि नैवात्र वाहीके देशदारुणे ।
११. यह वाह्हीक भूमि मलेच्छों द्वारा दूषित हो चुकी है। इस दारुण(हिंसक) प्रदेश में आर्य(श्रेष्ठ)-धर्म नहीं है।


12. बभूवात्र महामायी योऽसौ दग्धो मया पुरा। त्रिपुरो बलिदैत्येन प्रेषितः पुनरागतः ।
१२. जिस महामायावी राक्षस को मैंने पहले माया नगरी में भेज दिया था(अर्थात नष्ट किया था) वह त्रिपुर दैत्य कलि के आदेश पर फिर से यहाँ आ गया है।

13. अयोनिः स वरो मत्तः प्राप्तवान् दैत्यवर्द्धनः। महामद इति ख्यातः पैशाच कृति तत्परः ।
१३. वह मुझसे वरदान प्राप्त अयोनिज(pestle, मूसल, मूलहीन) हैं। एवं दैत्य समाज की वृद्धि कर रहा है। महामद के नाम से प्रसिद्द और पैशाचिक कार्यों के लिए तत्पर है।

14. नागन्तव्यं त्वया भूप पैशाचे देशधूर्तके। मत् प्रसादेन भूपाल तव शुद्धिः प्रजायते ।
१४. हे भूप(भोजराज) ! आपको मानवता रहित धूर्त देश में नहीं जाना चाहिए। मेरी प्रसाद(कृपा) से तुम विशुद्ध राजा हो।

15. इति श्रुत्वा नृपश्चैव स्वदेशान् पुनरागमत्। महामदश्च तैः सार्द्धं सिन्धुतीरमुपाययौ ।
१५. यह सुनने पर राजा ने स्वदेश को वापस प्रस्थान किया। और महामद उनके पीछे सिन्धु नदी के तीर(तट) पर आ गया।

16. उवाच भूपतिं प्रेम्णा मायामदविशारदः। तव देवो महाराज मम दासत्वमागतः ।
१६. मायामद माया के ज्ञाता(महामद) ने  राजा से झूठ     कहा - हे महाराज ! आपके देव ने मेरा दासत्व स्वीकार किया है अतः वे मेरे दास हो गए हैं।

17. ममोच्छिष्टं संभुजीयाद्याथात त्पश्य भो नृप। इति श्रुत्वा तथा परं विस्मयमागतः ।
१७. हे नृप(भोजराज) ! इसलिए आज सेआप   मुझे ईश्वर के संभुज(बराबर) उच्छिष्ट(पूज्य) मानिए, ये सुन कर राजा विस्मय को प्राप्त भ्रमित हुआ।

 18. म्लेच्छधर्मे मतिश्चासीत्तस्य भूपस्य दारुणे, तच्छृत्वा कालिदासस्तु रुषा प्राह महामदम्।
१८. राजा की दारुण(अहिंसा) मलेच्छ धर्म में रूचि में वृद्धि हुई। यह राजा के श्रवण करते देख, कालिदास ने क्रोध में भरकर महामद से कहा।

19. माया ते निर्मिता धूर्त नृपम्हन हेतवे हनिष्यामि दुराचारं वाहीकं पुरुषाधमम्।
१९. हे धूर्त ! तूने नृप(राजधर्म) से मोह न करने हेतु माया रची है। दुष्ट आचार वाले पुरुषों में अधम वाहीक को मैं तेरा नाश कर दूंगा।

20. इत्युक्त्वा स द्विजः श्रीमान् नवार्ण जप तत्परः जप्त्वा दशसहस्रं च तद्दशांशं जुहाव सः।
२०. यह कह श्रीमान ब्राह्मण(कालिदास) ने नर्वाण मंत्र में तत्परता की। नर्वाण मंत्र का दश सहस्त्र जाप किया और उसके दशाश जप किया।

21. भस्म भूत्वा स मायावी म्लेच्छदेवत्वमागतः, भयभीतस्तु तच्छिष्या देशं वाहीकमाययुः।
२१. वह मायावी भस्म होकर मलेच्छ देवत्व अर्थात मृत्यु को प्राप्त हुआ। भयभीत होकर उसके शिष्य वाहीक देश में आ गए।

22. गृहीत्वा स्वगुरोर्भस्म मदहीनत्वमागतम्, स्थापितं तैश्च भूमध्ये तत्रोषुर्मदतत्पराः।
२२. उन्होंने अपने गुरु(महामद) की भस्म को ग्रहण कर लिया और और वे मदहीन को गए। भूमध्य में उस भस्म को स्थापित कर दिया। और वे वहां पर ही बस गए।

23. मदहीनं पुरं जातं तेषां तीर्थं समं स्मृतम्, रात्रौ स देवरूपश्च बहुमायाविशारदः।
२३. वह मदहीन पुर हो गया और उनके तीर्थ के सामान माना जाने लगा। उस बहुमाया के विद्वान(महामद) ने रात्रि में देवरूप धारण किया।

24. पैशाचं देहमास्थाय भोजराजं हि सोऽब्रवीत् आर्य्यधर्म्मो हि ते राजन् सर्ब धर्मोतमः स्मृतः ।
२४. आत्मा रूप में पैशाच देह को धारण कर भोजराज आकर से कहा। हे राजन(भोजराज) !मेरा   यह आर्य समस्त धर्मों में अतिउत्तम है।

25. ईशाज्ञया करिष्यामि पैशाचं धर्मदारुणम् लिंगच्छेदी शिखाहीनः श्मश्रुधारी स दूषकः।
२५. अपने ईश की आज्ञा से पैशाच दारुण धर्म मैं करूँगा। मेरे लोग लिंगछेदी(खतना किये हुए), शिखा(चोटी) रहित, दाढ़ी रखने वाले दूषक होंगे।

26. उच्चालापी सर्वभक्षी भविष्यति जनो मम विना कौलं च पशवस्तेषां भक्ष्या मता मम।
२६. ऊंचे स्वर में अलापने वाले और सर्वभक्षी होंगे। हलाल(ईश्वर का नाम लेकर) किये बिना सभी पशु उनके खाने योग्य न होगा।


27. मुसलेनैव संस्कारः कुशैरिव भविष्यति तस्मात् मुसलवन्तो हि आतयो धर्मदूषकाः।
२७. मूसल से उनका संस्कार किया जायेगा। और मूसलवान हो इन धर्म दूषकों की कई जातियां होंगी।

28. इति पैशाच धर्म श्च भविष्यति मयाकृतः इत्युक्त्वा प्रययौ देवः स राजा गेहमाययौ।
२८. इस प्रकार भविष्य में मेरे(मायावी महामद) द्वारा किया हुआ यह पैशाच धर्म होगा। यह कहकर वह वह (महामद) चला गया और राजा अपने स्थान पर वापस आ गया।

29. त्रिवर्णे स्थापिता वाणी सांस्कृती स्वर्गदायिनी,शूद्रेषु प्राकृती भाषा स्थापिता तेन धीमता।
२९. उसने तीनों वर्णों में स्वर्ग प्रदान करने वाली सांस्कृतिक भाषा को स्थापित किया और विस्तार किया। शुद्र वर्ण हेतु वहां प्राकृत भाषा के का ज्ञान स्थापित/विस्तार किया(ताकि शिक्षा और कौशल का आदान प्रदान आसान हो)।

30. पञ्चाशब्दकालं तु राज्यं कृत्वा दिवं गतः, स्थापिता तेन मर्यादा सर्वदेवोपमानिनी।
३०. राजा ने पचास वर्ष काल पर्यंत राज(शासन) करते हुए दिव्य गति(परलोक) को प्राप्त हुआ। तब सभी देवों की मानी जाने वाली मर्यादा स्थापित हुई।

 31. आर्य्यावर्तः पुण्यभूमिर्मध्यंविन्ध्यहिमालयोः आर्य्य वर्णाः स्थितास्तत्र विन्ध्यान्ते वर्णसंकराः।
३१. विन्ध्य और हिमाचल के मध्य में आर्यावर्त परम पुण्य भूमि है अर्थात सबसे उत्तम(पवित्र) भूमि है, आर्य(श्रेष्ठ) वर्ण यहाँ स्थित हुए। और विन्ध्य के अंत में अन्य कई वर्ण मिश्रित हुए।

भविष्य पुराण, प्रतिसर्ग पर्व, खण्ड 3, अध्याय 3 श्लोक  . 1 -31
अब जाकिर  नायक  बताये   कि  मुहम्मद  साहब  वास्तव   में  कौन  थे  ,


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सोमवार, 15 सितंबर 2014

भंडाफोडू लेखों का संकलन

मैं    भंडाफोडू   ब्लॉग  और फेसबुक   में इसी नामके  ग्रुप   के   सभी  प्रबुद्ध   पाठकों  आभार    प्रकट  करता हूँ  , जो फरवरी  2009  से आज तक मेरे लेख  पढ़ते आये  हैं  ,  और  समय  समय  पर मुझे अमूल्य  सुझाव  और  नए नए   टॉपिक   देकर   लिखने के लिए  उत्साहित   करते  आये  हैं  , ऐसे सभी  महानुभावों  को  यह  जानकर  प्रसन्नता  होगी  कि कल रात दिनांक 12 सितंबर   2014  को  मेरे 500 लेख  पूरे     गए   हैं  , जिनमे अधिकांश  अखिल  भारतीय हिन्दू  महासभा और प्रमुख  हिन्दू ब्लॉगों  और  आर्यसमाज   की  साइटों   में भी  देखे  जा सकते हैं   . मेरे लेखों   का  उद्देश्य   किसी  की भावना   को आहत करना  नहीं  , बल्कि प्रमाण  सहित  सत्य  लोगों  तक पहुंचाना   रहा है  , ताकि नयी  पीढ़ी के युवा  विधर्मियों   के दुष्प्रचार    से  गुमराह  होने से बचें  , और अपने  धर्म , संस्कृति और देश के प्रति  निष्ठावान  बने रहें   ,
इसी उद्देश्य  की पूर्ति  के लिए पिछले  दो महीने  से  मेरे कई  समर्थक   और हिन्दू  संगठनों   के पदाधिकारी  मेरे  मुख्य  महत्त्व  पूर्ण  लेखों    के  संकलन  को  एक   पुस्तक   के  रूप   में  प्रकाशित करवाने   का  आग्रह   कर  रहे  हैं  ,
ताकि   उन  लोगों   को  भी  जागरूक   किया जा सके  जिनके   पास  नेट  की  सुविधा  नहीं  है , इसका एक और  कारण  है कि  मेरे  लेख विषयानुसार  वर्गीकृत  नहीं  थे  , पुस्तक   में  सभी लेख    व्यवस्थित     होंगे  ,
 काफी  तलाश   के बाद  दो  ऐसे  प्रकाशक    तैयार  हो गए  हैं  , अभी   कुल 150  लेखों  का संकलन  बनाने की योजना है  , सभी  पाठक  भली भांति   जानते हैं  कि  आज  तक  कोई  मेरे किसी  लेख  का  खंडन  नहीं  कर    पाया  है . मेरा दावा  है  कि  यह  पुस्तक सभी  लोगों   के लिए उपयोगी  होगी  ,जो विधर्मियों  से शास्त्रार्थ  करते  हैं  , खासकर वह युवा जो सेकुलरिज्म  के कारण गुमराह   हो  रहे हैं   , यही नहीं  यह  पुस्तक हिन्दू  लड़कियों   को  लव जिहाद  का शिकार  बनने से बचाएगी  .
इस  लिए  सभी हिन्दू  संगठन के पदाधिकारियों  , हिन्दू  धर्म  प्रेमी  दानी  महोदय  , और  पाठकों   से  निवेदन   है  , कि  कार्य के लिए   उदारता  पूर्वक यथा संभव   अपना  योगदान   करने का की  कृपा करें  ,  भवदीय  . बृज  नंदन  शर्मा  ( भंडाफोडू )Mob-9893731808
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शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

इस्लामी जिहाद के दो नए रूप

जो लोग अज्ञानवश   इस्लाम  को  भी   धर्म  समझ   लेते  हैं  ,और  खुद को सबसे बड़ा सेकुलर    साबित  करने के लिए इस्लाम  और हिन्दू धर्म  की  समानता  की  वकालत   करते रहते हैं   ,उन्हें  पता  होना  चाहिए कि  इस्लाम  में  जिहाद के  नाम  पर ऐसे   कुकर्म   भी   जायज हैं   , जिन्हें  करने पर  शैतान   भी  मना   कर  देगा  ,जिस समय   भंडाफोडू   ब्लॉग  में  लव्  जिहाद   के  बारे में  लेख प्रकाशित   हुआ था  , तो  उसकी  टिप्पणी  पर   हमारे एक  जागरूक  पाठक "smmalusare     "  ने  दिनांक    8  फरवरी  2010  को इस्लाम   के  जिहाद  का  ऐसा  घिनावना   और  निंदनीय  रूप  प्रस्तुत  करते हुए  जो  जानकारी  दी  थी   ,  वह  उन्हीं  शब्दों   में  ज्यों  की  त्यों   दी   जा रही  है  , ताकि  लोगों  के दिमाग से इस्लाम   का रोग निकल जाये  , ध्यान  से पढ़िए  ,

इस्लामी जिहाद दो नयें रुपों में सामने आया है. पहला लव जिहाद ( अथवा लिंग जिहाद) और दुसरा गुदा जिहाद , (अश्लील शब्दों के लिए माफी चाहुंगा).
इनमें से पहला लिंग जिहाद है, जिसमें मुस्लिम युवक हिंदू युवती से येनकेन प्रकारेण दोस्ती बनाकर उससे शादी कर लेता है. शादी के बाद बच्चे पैदा करके उसे सेक्स स्लेव्ह बनाकर अपने दोस्तो, रिश्तेदारों को नज़राने के रुप में पेश करता है. हिंदू लडकी झाँसे में आ भी जाए, किंतु अगर उसके पालक अगर समय रहते जागरुक हुए तो लिंग जिहादी को पुलिस के फटके पड़ने की संभावना तो शत प्रतिशत. उपर से कानूनी सजा मिलना अलग और 5-6 साल जेल की चक्की पिसना नसीब में.

लेकिन सबसे खतरनाक है गुदाजिहाद. जी हाँ. यह इसलिए बहुत खतरनाक है की, गुदा जिहादी जबतक आपके करीब ना आए और स्वयं को बम से ना उडा़ दे, आप समझ ही नही सकेंगे की वह एक गुदा जिहादी था (अगर आप की मौत ना हुई हो और बच गए या धमाके में अपाहिज हुए, तो.) होता क्या है कि, मुस्लिम कट्टरवादी किसी गरीब मुस्लिम परिवार के 12-15 साल के बच्चे को बहला फुसलाकर, उसका दिमाग ब्रेनवाश करके तथा उसके माँ-बाप को खासी रकम देकर अपने साथ कर लेते हैं. बाद में उसके दिमाग में दीने इस्लाम और जिहाद की बातें इतनी ठूँस-ठूँस कर भरी जाती हैं कि, वह पुर्णरुपेण (सर से पाँव तक) जिहादी बन जाता है. और ऐसा बने भी क्यों ना? क्योंकि कुरान में तन, मन और धन से जिहाद करना जो सिखाया है, जी हाँ जिहाद अपने तन (शरीर), मन (दिमाग) तथा धन (पैसे) से करो. अब 12-15 साल के लड़के के पास ना तो मन (दिमाग) होता है और ना ही धन (पैसा). तो उसके पास जिहाद के लिए बचा क्या? केवल अपना तन (शरीर). और कुरान में यह भी लिखा है की अपने अंगप्रत्यंग (शरीर के सारे भागों से) जिहाद करना फर्ज है. तो इस जिहादी बच्चे के पास बचा क्या? सिर्फ गुदा. और शातीर कट्टरपंथी इसी का फायदा उठाते हैं. पहले उस बच्चे से गुदामैथुन करके अपनी हवस को शांत करते है और साथ ही तबतक उसकी गुदामैथुन करते है जबतक की उसकी गुदा इतनी चौड़ी ना हो जाए कि उसमें आर.डी.एक्स. तथा डिटोनेटर घुस जाएँ. एक बार गुदा के अंदर आर.डी.एक्स., डिटोनेटर वैगराह विस्फोटक सामाग्री फिट कर दी जाये, बाद में उसे रिमोट कंट्रोल से जोडकर उसका रिसिव्हर गुदा जिहादीके पिठ पर बाँध देते हैं. (पिठ पर बाँधने से गुदा जिहादी उसे छु नहीं सकता. और ऐसा इसलिए करते हैं की शायद आगे जाकर गुदा जिहादी बगावत करें तो भी उसके हाथ पिठ में बँधे रिसिवर तक नां पहुँचे और कट्टरपंथियों का उसे विस्फोट करने का अंजाम पूरा हो जाए) आगे गुदा जिहादी किसी भी भिड़भाडवाली जगह पर पहुँच गया तो उसे कट्टरपंथी अपने रिमोट कंट्रोल से उडा देते हैं.
इसलिए प्रिय भारतीय नागरिकों, अपने आप को सँभालो. मुसलमानों की बस्तियाँ अपने पास ना बनने दें. मुस्लिम युवकों से सदैव सावधान (दोस्ती बनाने का केवल बहाना करें, ना की सचमुचके दोस्त बन जाएँ). अपने नजदिक किसी 12-15 साल के मुसलमान बच्चे को ना आने दें. (हो सकता है वह शायद गुदाजिहादी हो. क्या भरोसा?) अपनें बच्चों को मुसलमान बच्चों के साथ मेलमिलाप नां करने दें और उन्हें हमेशा दूर रखें. सदैव हिंदू सभ्यता का सम्मान, आदर करें. हिंदूराष्ट्र का अभिमान रखें.फिर भी मुसलमान  कहते हैं  कि  जिहाद   का   मतलब जुल्म  का  विरोध   करना  है , लानत  है  ऐसे जिहाद  पर और थू है ऐसे इस्लामी विचार  पर  .  

जय हिंदूराष्ट्र 

Is Sodomy The New Jihadi Training Method?

https://www.youtube.com/watch?v=jaheeT4rTR4

शुक्रवार, 29 अगस्त 2014

हिन्दुओं को मिटाने की जिहादी योजना !

जिहाद  इस्लाम का अनिवार्य  कर्तव्य   है  ,जिसका उद्देश्य  पूरे  विश्व  से गैर मुस्लिमों का  सफाया  करके   इस्लामी खिलाफत कायम   करना  है   , चूँकि मुसलमानों  की   नजर में इस समय  काफिरों  की  सरकार  है  , इसलिए मुसलमान     उसे  गिराने की  योजना   बना रहे हैं   , इसके लिए वह  हर तरह के  हथकंडे   अपना   रहे  हैं   , इसके बारे में  दिनांक 31  जुलाई  2014  को " जिहादियों के नए हथकंडे  "  शीर्षक   से एक  लेख भी  प्रकाशित  किया   गया  था  , यद्यपि जिहादी  भारत के विरुद्ध  आतंकी  योजना अफगानिस्तान  और  पाकिस्तान   में  बना रहे हैं   ,  लेकिन  इस बात  तय है  कि जब भी  भारत के खिलाफ  जिहाद   होगा तो  यहाँ के मुसलमान  उनके  साथ  हो  जायेंगे  . अभी  तो   यहाँ   के मुसलमान  विभिन्न   अपराध  करके  देश में अस्थिरता   का  माहौल   बना रहे   हैं  और  जब  पूरे देश में अफरा  तफरी   फ़ैल जाएगी  तो बाहरी जिहादी  देश में  घुस  जायेंगे  , मुसलमानों   की  इस  जिहादी  योजना  का पर्दाफाश  " अनिमेष  राउल " ने किया  है    जो  " Executive Director of Research at the New Delhi-based Society for the Study of Peace and Conflict (SSPC  " हैं .जिसका पूरा  विवरण 13  जून  2014  को  ही  प्रकाश  में  आगया था  , लेकिन सरकार  मोदी  के 15 अगस्त के  भाषण  तक  बैठी  रही ,
बाद में जो जानकारी  मिली  वह काफी चिंता का विषय  है .
 क्योंकि  इसमे बताया है   कि ,

1-कंधार  से  भारत  की  तरफ 

जानकारी के मुताबिक   इन  दिनों  सभी  इस्लामी  जिहादी  गिरोह  विश्व   में  इस्लामी  हुकूमत  यानि  खिलाफत   कायम  करने में  लगे हुए हैं   , और  आज उनका मुख्य   निशाना   भारत   ही   है  , अल  कायदा के  सरगना  अयमान   जवाहरी  और और मौलाना असीम  उम्र  ने   अल इसबाह नामकी  मिडिया के माध्यम से  विडिओ  और  सन्देश  भारत   भर में   मुसलमानों    तक   भेज  दिए   है   ,  ताकि  भारत के  युवा  मुस्लिम    तोड़फोड़  और  बलात्कार जैसे  अपराधों  से  देश  की  सरकार  को अस्थिर    कर  दें   , और   जब  सरकार  कमजोर  होगी  तो  बाहरी   जिहादियों   को  देश में  घुसने  में  आसानी   हो  जाएगी  , अपने इस  उद्देश्य  को  पूरा   करने के लिए अल  कायदा के मौलाना "अबु  मुसायब अब्दुल  वदूद -أبو مصعب عبد الودود " ने  अफगानिस्तान में  एक आतंकी  गिरोह बना   लिया है।  जिसका  नाम  "तंजीम  अंसार फिल बिलाद अल हिन्द -  تنظیم انصار التوحید فی بلاد الھند " है .इस संगठन    ने  अब   तक  कई वीडियो  जारी  किये  हैं   ,जिनमे  भारत के  मुसलमानों  को " अल शबाब  الشباب‎-" यानी  युवा (youth  )  सम्बोधित करके  भारत में  हर प्रकार  से ऐसे अपराध  करने के  लिए उकसाया  गया है  ,जिस से जिस से देश में दंगे भड़क  जाये  . इसके आलावा एक चालीस मिनट के विडिओ में  विश्व  के  सभी आतंकी  गुटों  को  भारत की  तरफ  हिजरत  करने   का   आदेश   दिया  गया है   , विडिओ में उर्दू में लिखा है  '
""ادارہ العصابة کی جانب سے پیش خدمت ہے مسئول امورشرعیہ انصارالتوحید 
مولاناعبدالرحمن الہندی حفظہ الله کا بیان بعنوان " قندھار سے دہلی کی طرف  "
नोट- इसका हिंदी लिप्यांतरण है  " इरादये अल असाबाह की जानिब  से , पेश खिदमत है  , मसऊल उमूरे शरियाः ,अंसार उत तौहीद , मौलाना अब्दुर रहमान  अल हिन्दी , हिफ्जुल्लाह ,का बयान , बि उन्वान "कंधार से देहली की तरफ "

इसके अलावा मौलाना अब्दरहमान  हिंदी ने एक दस मिनट के विडिओ   में  भारत के  मुसलमानों   से कहा है  कि  वह बाबरी  मस्जिद  और  गुजरात   के दंगों   का बदला  लेने  के  लिए भारत  के सभी औद्योगिक और आर्थिक   केन्द्रों  को  नष्ट  करने का  प्रयास  करें  .

2-जिहादी दुष्प्रचार 

जिहादी  प्रचार  मिडिया  " अल इस्बाह  العصابۃ-"  ने  एक  विडिओ    जारी   किया  है  ,जिसमे  बताया है  कि अफगानिस्तान  स्थित  हेरात  में भारत के  वाणिज्य दूतावास में 23 मई को जिहादियों   ने  हिन्दू  सरकार के सामने   अपनी ताकत  दिखाने  के लिए  विस्फोट  किये  थे  , यह बाबरी  मस्जिद  गिराने  और गुजरात में  मुसलमानों   की  हत्या का बदला है  , इस  विडिओ  में चेतावनी   दी गयी  है कि जल्द ही  भारत पर जिहादी  हमला होगा , जिसकी  मदद भारत के " उसूदुल हिन्द  - الاسود الهند" यानी हिन्द के शेर ( lions of India) मुसलमान  करेंगे  . इस विडिओ में   कहा है  कि भारतके  मुसलमान  संप्रदायवादी  दंगो  और राजनीतिक मतभेद  का  भरपूर   फायदा  उठायें  , इस से  भारत में  जिहाद  जल्दी  कामयाब  होगी  . मौलाना अब्दुल रहमान हिंदी  ने  एक 18  मिनट के विडिओ  में  भारत के  मुसलमानों  से कहा है कि "मुसलमानों अगर तुम आज  इसबात को  नहीं  समझोगे तो तुम  नष्ट  हो  जाओगे  "Oh Indian Muslims, if you can’t understand, you will perish "इस विडिओ   में  मुसलमानों जिहाद के लिए उकसाने  के लिए सात  बन्दुकधारी  पुलिस  वाले  बताये गए हैं   जो  मुसलमानों  पर  गोली  चला  रहे   हैं .इस विडिओ   में आगे बताया है कि सन 1947 से आजादी के बाद से ही मुसलमान  भयभीत  होकर जिंदगी गुजार  रहे हैं  , यहाँ तक वह  जिस गाय  को  खाकर  अपना  पेट  भरते  हैं   ,   होकर  उसी  गाय  की  पूजा  करने पर  मजबूर   हैं  , अल असबाह  ने अरबी ,उर्दू  और  बंगला भाषामे ऐसे कई विडिओ   भारत के  बड़े बड़े  शहरों  में भेज  दिए  हैं  ,जिस  से भारत के मुसलमान   देश भर में  दंगे  फसाद और जघन्य  अपराध   करके  खुद को  जिहादी  मानने  लगें ,और  आत्मघाती  बम  बन  कर  मरने वाले  जिहादियों   के  लिए  कुरान की  यह आयात भी   दी गयी   है  
“जो लोग अल्लाह की राह में क़त्ल हुए हैं इन्हें मुर्दा न समझो वो ज़िन्दः हैं अपने रब के पास से रिज्क़ पा रहे हैं,"

अल अस्बाह ने भारत के युवा  मुस्लीमों    को  जिहाद के  लिये सभी  बड़े शहरों  में हर प्रकार  के अपराध  करने  का आदेश दिया है जिस से  बाहरी जिहादियो    का रास्ता साफ हो जाए  . इसमे बहार  के जिहदियों  को  भारत के जिहादियों   का  साथ  देने  को  कहा है  , और  कुरान  की  यह  आयत दी गयी  है  ,

" मुस्लिम देशों के जिहादी ,गैर मुस्लिम देशों में रहने वाले जिहादियों की सहायता करें , ऐसा करना मुसलमानों के लिए अनिवार्य है " 
सूरा -अनफाल 8:72 


3-खुरासान  देश  की  स्थापना 

जिहादी संगठन "अंसार उत तौहीद ( AUT)  ने विडिओ  और उर्दू  प्रकाशनों   में भारतीय  मुसलमानों   से कहा है कि  वह  भारत की हिंदूवादी  सरकार को  उखड फेकने में    हर   तरीकों    का  प्रयोग  करें   ,  तभी  इस  मध्य्   एशिया  में एक ऐसी  इस्लामी  खिलाफत  कायम  हो  सकती  है  , और उस पूरेदेश का नाम  "खुरासान  " होगा  . इस देशमे तुर्कमेनिस्तान  , उजबेकिस्तान  , ताजिकिस्तान   भी शामिल   होंगे  , और इन  सबके जिहादियों  के भारत के मुसलमान   दिल्ली   के  लाल  किले  पर  खुरासानी  झंडा  फहरा   देंगे   .

Black Flag of Khurasan

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4-भारत  में  जिहादियों का जाल 

दिल्ली से  प्रकाशित अंगरेजी  अख़बार  मेल टू डे ( Mail today)  के दिनांक 23 मई  2014 के  अनुसार पाकिस्तान के कई  आतंकी गिरोह  इस समय पूरे भारत में  सक्रीय हैं  . और  भारत के मुस्लिम युवक अंसार उत तौहीद ( AUT)  में  शामिल  हो  रहे हैं   ,इन में से कई  युवक गुप्त रूप से  पाकिस्तान  के वजीरिस्तान   में जाकर  आतंकवाद   की ट्रेनिग   भी   लेकर  आये हैं  . अंगरेजी  अखबार दि हिन्दू (the Hindu  ) दिनाक  22 मई  2014 के अनुसार  अधिकांश   मुस्लिम  युवक  उत्तर प्रदेश  के  आजम गढ़  और  कर्णाटक  के भटकल  जिले के  हैं  . जिनको पूरे भारत में आतंक फ़ैलाने  , तोड़फोड़  करने  और विस्फोट  करने की  जिम्मेदारी  दी गयी  है  , और  स्थानीय  मुसलमानों को  उनकी आर्थिक और कानूनी   मदद    देने के  निर्देश   दिए  गए हैं .
इस बात   का खुलासा तब  हुआ जब  ख़ुफ़िया एजेंसियों   ने  दिनांक  30 मई 2014  को चेन्नई से  इंडियन मुजाहिद  के एक  सदास्य  "हैदर अली "  को गिरफ्तार   कर लिया   . और जब  पूछताछ  पर  हैदर अली ने बताया  कि 26 अक्टूबर  2013 को  पटना  में बी जे पी  की  रैली  में  कई विस्फोट  इंडियन  मुजाहिद ने किये थे   ,  जिसका नेतृत्व   सफदर  नागौरी   ने   किया  था  . हैदर अली ने  बताया कि इन  विस्फोटों   का उद्देश्य  पूरे भारत में   अफरातफरी  का  माहौल पैदा  करना था  ,  और भारत  को  हिन्दुओं  से मुक्त   कराना   है  , जिसकी शुरुआत  कश्मीर  से होगी  .
हैदर अली ने यह भी बताया कि कश्मीर की सीमा पर हमारे  जिहादी  तैयार  बैठे हैं  , कि जैसे ही  सीमा पर  तनाव  बढ़ने  पर युद्ध की  नौबत  आ  जाएगी तो पाक सेना की  मदद  से जिहादी कश्मीर  से भारत के अंदर  घुस   जायेंगे  ,  और उसी  समय भारत के अंदर के सभी जिहादी गुट  सक्रीय   हो जायेंगे  . और यह गुट तब तक शांत  नहीं  होंगे जब  तक  उनका  मकसद पूरा  नहीं   होगा  , इसलिए भारत के मुस्लिम  युवकों  को   हिंडन के खिलाफ जिहाद के लिए  मानसिक   रूप  से तैयार   किया  जारहा है  ,


5-भड़काऊ  भाषण का नमूना 

विदेशी धन से बिके  हुए भारत के मुल्ले मस्जिदों   में मुसलमानों  पर होने वाले अन्याय की  ऐसी झूठी खबरें फैलाते  रहते हैं   जिस से दंगे  चालू  रहते हैं   ऐसा ही    भाषण का एक  नमूना  देखिये ,

रमजानुल मुबारक के बाबरकत महीने भी मुसलमानों को सुकून ना मिल सका यू.पी.के एक गॉंव में जब सभी मुसलमान तरावीह के लिए जा चुके थे बुज़दिल हिंदुओ ने मुसलमानों के घरों पर यकबारगी हमला कर दिया और लूट मार की लेकिन मुसलमानों की सबसे बड़ी दुशमन पुलिस ने बड़ी में नुकसान उठाए हुए मुसलमानों को गिरफतार करके उनके ज़खमों पर नमक छिड़कने मे कोई कसर ना छोड़ी जबकि हिंदुओं पहले ने मुसलसल तीन दिनों तक पूरे गॉंव का मुहासरा किए रखा लेकिन पुलिस की तरफ से ना कोई एकशन ना गिरफतारी मेरे भाइयो इन नसली बुज़दिलों का इलाज सिरफ तलवार है .जिसको अपने से ताक़तवर देखते हैं उसे अपना देवता बना लेते जबकि इनके यहॉं कमजोरों को जीने का कोई हक़ नही"

अब जिहादियों  और  मुसलमानों  के ऐसे  इरादों   के बारे में  जानकारी होने पर भी  हिन्दू  सिर्फ  उत्सव  मनाने  ,  जयंतियाँ  मनाने  , मंदिरों   में क्विंटलों  सोना चांदी   चढाने  को  ही  धर्म  मान लेते  हैं  , और सामने  शत्रु साफ  दिखाई देने पर उसी तरह  आँखें   बंद  कर लेते हैं  ,जैसे  कबूतर  बिल्ली को देख कर  आँखें  बंद करके  मान लेता है  कि सामने  बिल्ली  नहीं  है  . हिन्दू यदि  यही  कबूतरी  नीति  पर चलेंगे  तो  न तो  देश  बचेगा  और न  हिन्दू धर्म ही रहेगा   . हिन्दुओं   को इतिहास  से सबक  लेने की  जरुरत  है  ,  याद रखिये जब  मेहमूद गजनवी  सोमनाथ पर हमले की तैयारी  कर रहता तो हिन्दू राजा यज्ञ  अनुष्ठान  कर रहे थे ,और सोच रहे थे कि  भगवान शिव अपने तीसरे  नेत्र से म्लेच्छों  को भस्म  कर देंगे  , हिन्दुओं   को समझना होगा  कि कोई  देवी  देवता उनको नहीं  बचा सकेगाजबतक वह  खुद देश के और हिन्दुओं  के दुश्मन  जिहादियों  को ईंट का जवाब पत्थर  से नहीं  देते  .

 श्री  गुरु गोविन्द सिंह  जी  ने  कहा   है  ,

" यही  देहि आज्ञा  तुरक  को खपाऊँ  , गऊ घातियों   को जगत  से मिटाऊँ "

http://bab-ul-islam.net/showthread.php?p=58877#post58877

 http://www.sspconline.org/sspcinmedia/AnsarTawhid_TransnationalJihadistThreat_India

सोमवार, 4 अगस्त 2014

भगवद्गीता को राष्ट्रिय ग्रन्थ घोषित करो !


बड़े दुःख   के साथ   कहना  पड़ता है कि हिन्दुओं    को  सेकुलरिज्म   के रोग   ने इस तरह   से   ग्रस्त   कर लिया है कि  भगवद्गीता   को   एक   हिन्दू  धर्मग्रन्थ  मानने की  भूल  करने   लगे  हैं  और  उसकी  तुलना  अन्य  धर्म ग्रंथों  से करने लगे   हैं  , जबकि वास्तविकता तो  यह है कि प्रतिपादित सभी  सिद्धांत ,  नियम   और उपदेश   किसी विशेष  देश  , जाति य समूह  के लिए  नहीं   मानव  मात्र के लिए  हैं   . गीता  मनुष्यों  में  नहीं  बल्कि  सभी    प्राणियों  में  ईश्वर   का  अंश  है   , ऐसी  शिक्षा  देती   है  , गीता  के उपदेशो   का   ठीक  से पालन  करने वाला  कभी  हिंसक   और  अपराधी   नहीं   बन सकता    है   . और  सपने में भी किसी  का अहित  नहीं  सोच  सकता  , चूँकि   सभी हिन्दू  गीता पर  श्रद्धा  रखते हैं  ,इस   लिए हिन्दुओं   ने  न तो  किसी  देश  पर आक्रमण  करके  उस  पर कब्ज़ा   करने का प्रयत्न  किया  ,  और न  ही किसी प्रकार की जिहाद करके  लोगों  को जबरन हिन्दू   बनाया  है  , जैसा  कुरान  पढ़   कर  मुसलमान  कर   रहे हैं   . गीता में  बताया गया  धर्म  पूर्णतः   वैज्ञानिक  ,  तर्क  सम्मत  और  सार्वभौमिक  है   . ऐसे धर्म   का  पालन   कराने  के गीता  किसी  कल्पित  जन्नत का  प्रलोभन   और   किसी  जहनम   का  भय नहीं   दिखाती  . और इसी  बात को स्पष्ट  करने  के   लिए  सुप्रीम  कोर्ट  के  फर्स्ट  क्लास   जज   माननीय    श्री  ए आर     दवे   ने  सार्वजनिक रूप  से जो कहा है   , उसका  एक एक  अक्षर हीरों  से  जड़ने   के  योग्य    है   , पूरी  खबर टाइम्स  ऑफ़  इण्डिया  में दिनांक  2  अगस्त  2014   शनिवार    को  प्रकाशित    हुई   है   जो इस  प्रकार  है   .
"सुप्रीम कोर्ट के जज ए आर दवे का कहना है की अगर मैं तानाशाह होता तो क्‍लास वन से बच्चों को गीता और महाभारत पढ़वाता, दवे ने यह भी कहा कि भारतीय लोगों को अपनी पुरानी परंपराओं की ओर लौटना चाहिए और बच्‍चों को शुरुआती उम्र में ही महाभारत और भगवद्गीता पढ़ाई जानी चाहिए, वह 'भूमंडलीकरण के दौर में समसामायिक मुद्दे और मानवाधिकारों के समक्ष चुनौतियां' विषय पर लोगों को संबोधित कर रहे थे। दवे ने कहा, 'जो लोग बहुत सेक्‍युलर हैं या तथाकथित तौर पर सेक्‍युलर हैं, वह इस बात से सहमत नहीं होंगे, लेकिन अगर मैं भारत का तानाशाह होता तो तो मैं गीता और महाभारत क्‍लास वन की पढ़ाई में शामिल करवाता। 
सुप्रीम कोर्ट जज ए आर दवे का मानना है कि यह वह उपाय है, जिससे आप सीख सकते हैं कि जिंदगी कैसे जी जाए, मुझे नहीं पता कि लोग मुझे सेक्‍युलर कहते हैं या नहीं, लेकिन अगर कोई चीज कहीं अच्‍छी है तो हमें उसे लेने से गुरेज नहीं करना चाहिए, दवे ने कहा, गुरु-शिष्‍य परंपरा खत्‍म हो चली है, अगर यह परंपरा बनी रहती तो हमें हिंसा या आतंकवाद जैसी समस्‍याओं का सामना नहीं करना पड़ता। हम दुनिया भर में आतंकवाद के मामले देख रहे हैं। इनमें से अधिकतर देश लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था वाले हैं। अगर लोकतंत्र में सभी लोग अच्‍छे हों, तो वे जाहिर तौर पर किसी अच्‍छे को ही चुनेंगे। फिर वो शख्‍स किसी को नुकसान पहुंचाने के बारे में नहीं सोचेगा।   "

न्यायाधीश  दवे  का  पूरा  वक्तव्य  इस  विडिओ   में सूना   जा सकता   है ,

Justice A.R Dave Statement

https://www.youtube.com/watch?v=WShBq_9w77Y

http://www.hinduismtoday.com/modules/smartsection/item.php?itemid=5047

1-भगवद्गीता उपनिषदों का सार है
  वास्तव में  धर्म   का  मूल  तो  वेद  ही हैं   , और  उपनिषदों  में वेदों  विभिन्न   विषयों  को  सरल भाषा में  समझाया  गया है  , सब   जानते हैं कि  भगवान  कृष्ण  ने  उज्जैन   जाकर  सांदीपनि आचार्य से  वेदों  और  उपनिषदों   का  अध्यन  किया  था  , और  उन्होंने  जो कुछ भी  सीख था   उसे  अर्जुन  को  सनाया था  . जिसे  महर्षि  व्यास  ने  महाभारत  जैसे  महान  ग्रन्थ   में सम्मिलित   कर दिया  , इसके  बारे में  गीता  माहात्म्य  में  कहा  गया  है   ,
""सर्वोपनिषदो  गावः  दोग्धा   गोपाल  नन्दनः  , पार्थो  वत्स  सुधीरभोक्ताः  , गीता दुग्धामृतम  महत  "
अर्थात  -सभी  उपनिषद्   गायें  हैं  , और  उनका  दूध   दोहने  वाले  (  ग्वाला  )  कृष्ण  है  , और  उस  गाय  का दूध  पीने  वाला  बछड़ा   अर्जुन   है   , और उपनिषद्  रूपी    गायों   अमृत   के  सामान  दूध   " गीता "   है    .
यही   कारण  है ,कि भगवद्गीता  को  उपनिषदों   के  सामान  प्रामाणिक  और  पवित्र  धर्म  ग्रन्थ   माना  गया   है   ,

2-भगवद्गीता  के भाष्य 

यद्यपि  गीता में प्रयुक्त  संस्कृत   बहुत क्लिष्ट  नहीं  है  , और न उसके विषय दुर्बोध   है  .  हरेक  व्यक्ति  थोड़े से प्रयास   से अर्थ  समझ  सकता   है  , फिर भी अनेकों  आचार्यों  और  विद्वानों  ने   गीता  के  भाष्य ( Commentaries )   लिखे  हैं  , ऐसे प्रमुख  आचार्यों   और उनके  द्वारा  किये गए गीता  के  भाष्यों  के नाम  इस  प्रकार हैं  ,
1-आदि शंकराचार्य -अद्वैत  भाष्य
2-रामानुजाचार्य -विशिष्ट  अद्वैत  भाष्य
3-मध्वाचार्य  -द्वैत  भाष्य
4-वल्लभाचार्य -तत्व दीपिका
5-यामुनाचार्य  - अर्थ संग्रह देशिका
6-नीलकंठ -  भावदीपिका
7-पुरुषोत्तमाचार्य -अमृत  तरंगिणी
8-जय तीर्थ -प्रमेय  दीपिका
9-वेंकट नाथ  - बृक मंदागिरी
10-लोकमान्य तिलक - गीता रहस्य
11-मो. क.गांधी  - अनासक्ति योग

3-गीता का  उर्दू काव्यानुवाद 

वैसे तो  विश्व  की लगभग  सभी भाषाओं   में  गीता  के अनुवाद हो  गए  हैं  , तभी  मेरे मन में  गीता   का  उर्दू  में  कविता के रूप  में  अनुवाद  करने का  विचार  आया  ,  लेकिन  उसमे उर्दू  लिपि   की  जगह  देवनागिरी     लिपि    ही  रखी  ताकि हिन्दू  और मुस्लिम   गीता   के बारे में   जान सकें  .दो  वर्ष  की  मेहनत  के  बाद  मैंने  गीता   का उर्दू पद्यानुवाद  27  मई  2001  को  पूरा  कर दिया   ,  इसमे कुल 700 श्लोक   हैं ,और  कुल पंक्तियाँ  2800  हैं  . और कुल पृष्ठ 233  हैं  , जिसमे  प्रत्येक  पृष्ठ  में 12  पंक्तियाँ   है  .  मैंने  गीता के इस  उर्दू  काव्यानुवाद  का नाम  "गीता  सरल  "रखा   है .गीता  सरल  पढने के लिए इस  लिंक  को  खोलिए ,

निवेदक --पं. बृज  नंदन  शर्मा  -Ph-0755-4078540   Mob - 09893731808

http://geeta-urdu.blogspot.in/

4-गीता  कानून  से  हिन्दू धर्मग्रन्थ  है 

गीता की  पवित्रता  और महानता  अंगरेज  अदालतें   भी  मानती  थीं  , इसलिये  उन्होंने अदालत में  शपथ पूर्वक बयान देते समय  हरेक  हिन्दू  वादी -प्रतिवादी को  गीता  पर  हाथ  रख  कर कसम  खाने   का  कानून  बना  दिया  था  ,जो  आज भी  चल  रहा  है  , यही नहीं  वर्तमान  सुप्रीम  कोर्ट  ने  भी 2 जुलाई 1995 को   एक  फैसला  दिया   था

"court think that it is Vedanta, and Vedanta alone that can become the universal religion of man, and no other is fitted for the role
.
N. VENKATACHALA and S. SAGHIR AHMAD   .  the Supreme Court of India.New Delhi.July 2, 1995

इसलिए  सभी  हिन्दुओं  को चाहिए कि धर्म  के नाम पर  फैले हुए पाखण्ड  को त्याग  दें   , किसी भी  औलिआ बाबाओं  के चक्कर में न फसें  , और अपने घरों में  भगवद्गीता   लेकर  खुद  पढ़ें  और  अपने  बच्चों  को अर्थ  सहित  समझाएं   , इस से आपका पूरा परिवार संस्कारी  बनेगा  , और समाज भी  अपराध  मुक्त होगा   .  और  जितने भी  हिन्दू  संगठन   है वह  भगवद्गीता   को  राष्ट्रीयग्रन्थ   घोषित  करने   का प्रयास  करें  ,   सिर्फ एक  गीता ही  देश   की हालत सुधार  सकती   है   ,  क्योंकि  यह भगवान कृष्ण  का उपदेश  है  , जैसा की कहा है  ,


'गीता सुगीता कर्तव्या किमन्यै शास्त्र विस्तरैः, या स्वयं पद्मनाभस्य  मुखपद्मविनिः सृतम्  "

अर्थ - गीता  को सुगीता  करिये  ,यानी उसका  पालन  करिये  ,  अन्य  शास्त्रों   के विस्तार  को नहीं  देखिये  ,  गीत तो स्वयंही    भगवन  के मुख की वाणी है !

(200)

शनिवार, 2 अगस्त 2014

बेनामी मुस्लिम को करारा जवाब

मुझे विभिन्न  विषयों  पर लेख देते हुए  लगभग  पांच  साल  हो गए , इस दौरान  मैंने  अनुभव   किया है कि जब  लोग मेरे  अकाट्य प्रमाणों   का खंडन   नहीं  कर  पाते  और  सत्य को स्वीकार  करने में  आनाकानी  करते  हैं  , यातो  वह  लोग मूल विषयसे हट  कर दूसरी बात करने लगते हैं   . या बेनामी  बन कर  टिप्पणी  में अशिष्ट  और गालीगलौच   की भाषा   का प्रयोग  करने लगते  हैं  , खासबात यह है कि  ऐसा तभी होता है जब  इस्लाम के बारे में कोई  लेख  दिया जाता  है .मेरा  उद्देश्य  किसी  की भवन को ठेस  पंहुचाना  कदापि नहीं  रहा  , परन्तु   मैं लोगों  के सामने  प्रमाण सहित असत्य  का भंडाफोड़ करना  अपना कर्तव्य मानता हूँ  . साथ ही  अशिष्ट  और असभ्य भाषा का प्रयोग  करना मेरी दृष्टि में  महापाप   है   , यह   लेख  इसलिए  दिया  जा रहा  है  ,ताकि प्रबुद्ध  पाठक  जान  सकें  कि ,भंडाफोडू  हिंदी   का एकमात्र  ऐसा ब्लॉग  है , जिसमे  बिना किसी द्वेष और दुर्भावना   के प्रमाण  सहित सभी विषयों  पर लेख  प्रकाशित किये   जातेहैं  , यह सिलसिला  सन 2009  से  चलता आरहाहै  . इसका उद्देश्य झूठी  मान्यताओं   का भंडाफोड़ करना  है  , इसी  क्रम   में दिनाक 29 जून 2014 को ब्लॉग  में एक लेख  प्रकाशित   हुआ  था  , जिसका  शीर्षक " भंडाफोडू की  बात सच  निकली " था  . यद्यपि  इसलेख   में ऎसी  कोई   बात नहीं  थी  ,जो प्रमाण  रहित या कल्पित  हो  ,लेकिन किसी  मुस्लिम  ने  बेनामी  बन  कर कॉमेंट में जिस  भाषा  का प्रयोग  कियाहै  वह अशिष्ट  और अज्ञान    से  भरा हुआ  है ,जिस  से उन बेनामी महाशय के दिल में  हिन्दुओं  के प्रति  नफ़रत साफ़  झलकती  है  , उन  बेनामी   महोदय  ने जिस भाषा में कॉमेंट  दिया  है  , वह ज्यों  का त्यों  दिया  जारहा   है  ,
1-बेनामी ( मुस्लिम ) का  कॉमेंट 
बेनामी3 जुलाई 2014 को 11:23 pm
"sharma ji mujhe hansi aati ki appki baat ko sabit krne ke liye kis had tak ja sakte hai aur apne muh miy mitthu bante hai duniya ke har dharm ke log apne dharm ke sansthapak ko apna pita mante hai aap log to nazayaz aulad hai aap ke to teen teen baap hai bhramma vishnu mahesh jo khud ek shaitan the sri lanka is baat ka proof hai aur ab to chautha baap bhi aagya hai sai ya phir sankracharya .
btaiyye sharma ji
"शर्मा  जी  मुझे हँसी  आती  है  ,कि आपकी  बात को साबित करने के लिए किस  हद तक  जा सकते हैं ,और  अपने मुंह  मियाँ  मिट्ठू  बनते हैं   (1),दुनिया केहर धर्म के लोग अपने  धर्म  स्थापक  को अपन पिता   मानते हैं , (2)आप  लोग  नाजायज  औलाद हो  , (3)आपके तो तीन  बाप हैं   . ब्रह्मा म विष्णु  और  महेश  .(4) जो  खुद  शैतान  है  ,श्री  लंका  इसका  प्रूफ है  .(5) और अब जो  चौथा  आगया   साईँ  या शंकराचार्य ,  बताइये  शर्मा जी
2-बेनामी के कमेंट का उत्तर 
 इस कॉमेंट  की  भाषा और शैली  से  साफ  पता चलता है  कि बेनामी  जरूर  कोई ऐसे मुस्लिम  हैं  , जो बौखलाकर  बेतुकी और अशिष्ट भाषा  का प्रयोग  कररहे हैं  . यद्यपि  मैंने फेसबुक  में लोगों  से आवाहन  किया था कि है कोई  ऐसा  जो तर्क  सहित इन बेनामी  को ऐसा  करारा   जवाब  दे  जिसे पढ़ कर बेनामी चारों खाने चित हो जाएँ  . लेकिन जब  कोई आगे नहीं  आया तो मैंने ही उनको उत्तर देने का निश्चय  कर लिया  . यदि  आप  उन  बेनामी के कॉमेंट को ध्यान  से पढ़ें तो  पता  चलेगा  कि उन्होंने हिन्दू धर्म  और हिन्दुओं  पर कुल पांच आरोप लगाये  हैं  , यहाँ  पर  एक एक कर  उन पांचों  आरोपों  का कुरान और  हदीस  के प्रमाणों  से उत्तर दिया जा  रहा  , पाठक गण कृपया  पूरा लेख  जरूर  पढने का कष्ट करें।
1 . पहला  आरोप -आपने  कहा है कि हरेक धर्म  के लोग अपने धर्मस्थापक  को अपना पिता  मानते हैं
जवाब -दूसरे  धर्म  के लोग अपने धर्मस्थापक को  क्या मानते हैं ,हमें इस से कोई आपत्ति नहीं  है  हम तो हरेक बुजुर्ग  पुरुष  को पिता  और बुजुर्ग महिला को माता की तरह  सम्मान  देते  हैं  . शायद  आप  मुहम्मद साहब को पिता  मान बैठे  होगे  ,लेकिन  आपने ठीक  से कुरान नहीं पढ़ी ,क्योंकि  उसमे कहा है  .
  "हे ईमानवालो  मुहम्मद  तुम  में से  किसी  व्यक्ति के बाप  नहीं   हैं "
सूरा अहजाब 33:40 
"مَّا كَانَ مُحَمَّدٌ أَبَا أَحَدٍ مِّن رِّجَالِكُمْ "
("O believers, know that) Muhammad is not the father of any man among you"33.40.
फिर भी अगर आप मुहम्मद  साहब को बाप   मानते हो  तो कुरान के खिलाफ  काम  करने  के कारण  काफ़िर माने जाओगे  . इसलिए मुहमद्साहब को बाप मानना   छोड़  दो  .
2-दूसरा  आरोप -आपने  कहा कि तुम  लोग यानी हिन्दू  नाजायज  औलाद  हो
जवाब -नाजायज  औलाद उस  पुरुष  और स्त्री  के बच्चों  को  कहा  जाता है  जिनकी  शरीयत  के मुताबिक शादी  नहीं हुई  हो  . इस्लामी परिभाषा के मुताबिक  गैर मनकूहा    की  औलाद  अवैध (Illegitimate )   और  हरामी  कही  जाती  है , जिसे दोगले  कहा जाता   है  , शायद आपने बुखारी  की यह हदीस नहीं पढ़ी जिसमे  इब्राहिम  की दासी हाजरा  की जानकारी  दी गयी  है  , हदीस में  कहा है  ,मुसलमानों के  प्रसिद्ध  नबी इब्राहिम  को यहूदी  ,ईसाई  और मुसलमानों का मूल पिता  माना जाता है  , इनके बारे में बुखारी में यह हदीस  मौजूद है " इब्राहिम ने अपनी पत्नी  साराह  की सेवा  करने के लिए हाजरा  नामकी  एक दासी  रखी थी , एक दिन जब इब्राहिम इबादत कर रहे थे तभी हाजरा ने उनको हाथों   से इशारा  करके एकांत में बुलाया  . और कहा कि अल्लाह ने  मुझे आपके  पास  आने को कहा है ,  ताकि हम काफिरों के षडयंत्र को  विफल  कर दें  . अबु हुरैरा ने कहा कि इस घटना को सुना कर् रसूल ने मौजूद लोगों  से कहा  कि  हे बनी इस्मा  के लोगो वही  हाजरा  तुम  लोगों  की  माता  है  ,क्योंकि  उसी के पुत्र  इस्माइल  से सारी  अरब जाती  पैदा  हुई  है  "
".‏ فَأَخْدَمَهَا هَاجَرَ فَأَتَتْهُ، وَهُوَ قَائِمٌ يُصَلِّي، فَأَوْمَأَ بِيَدِهِ مَهْيَا قَالَتْ رَدَّ اللَّهُ كَيْدَ الْكَافِرِ ـ أَوِ الْفَاجِرِ ـ فِي نَحْرِهِ، وَأَخْدَمَ هَاجَرَ‏.‏ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ تِلْكَ أُمُّكُمْ يَا بَنِي مَاءِ السَّمَاءِ‏.‏  "
" Hajar as a girl-servant to Sarah. Sarah came back (to Abraham) while he was praying. Abraham, gesturing with his hand, asked, "What has happened?" She replied, "Allah has spoiled the evil plot of the infidel (or immoral person) and gave me Hajar for service." (Abu Huraira then addressed his listeners saying, "That (Hajar) was your mother, O Bani Ma-is-Sama (i.e. the Arabs, the descendants of Ishmael, Hajar's son).
 सही बुखारी - जिल्द 4 किताब 55 हदीस 578
इस हदीस  से साबित होता  है कि इब्राहिम और उसकी लौंडी  में निकाह  नहीं हुआ था. और इब्राहिम ने इबादत छोड़ कर वासना में अंधे होकर  हाजरा से सहवास  किया था  , जिस से    एक नाजायज बेटा  इस्माइल पैदा हुआ  था  , जिस से मुहम्मद के बाप दादा  और  अरब के लोग  पैदा हुए ,इसलिए "सभी मुसलमान  नाजायज   औलाद   हैं "
3-तीसरा  आरोप -आपने  कहा  कि  हिन्दुओं  के तीन  बाप  हैं  , ब्रह्मा  , विष्णु  . और महेश
जवाब -लगता है कि आपने टी वी सीरियलों  से तीन  देवों  के बारे में  जानकारी  ली  है  , और उनको तीन अलग  देवता  मान  लिया  है  .  वास्तवमे ईश्वर तो एक ही है  ,लेकिन जब वह सृष्टि  करता है  तो उसे ब्रह्मा  कहते हैं  , जब  जगत  का पालन करता है तो विष्णु  कहते हैं  और जब  सृष्टि  का विलय  करता है तौ उसी  ईश्वर को महेश  कहते  हैं  , जैसे  जब  कोई नागरिक  वोट देता है तो उसे वोटर  कहतेहै  , चुनाव  लड़ता है तो उसे प्रत्याशी (उम्मीदवार )   और जीत  जाने पर  विधायक  , या  सांसद  पुकारते  हैं  .
इसलिए  आप  पहले  इस्लाम  की  पूरी  जानकारी  हासिल  करिये   कि मुसलमानोंके कितने  बाप  हैं  ?
आपका अल्लाह  सर्वशक्तिमान  नहीं  बल्कि इतना  असहाय है कि खुदही  अपनी कुर्सी पर नहीं चढ़  सकता  , औरउसे कुर्सी  पर बिठाने के लिए  आठ आठ  फरिश्तों  की  मदद   लेनी  पड़ती  है  , यह खुद कुरान  में कहा है ,

"وَالْمَلَكُ عَلَىٰ أَرْجَائِهَا وَيَحْمِلُ عَرْشَ رَبِّكَ  "


"और आठ  फ़रिश्ते  मिल कर अल्लाह को सिंहासन पर चढ़ाते  हैं  "सूरा  हाक्का 69:17

"eight will help  Allah  to climb  the throne  "Al-Haqqah69:17

यही नहीं  आपका अल्लाह छोटेछोटे कामों के लिए  दूसरों  का मोहताज   है , उसने हर काम के लिए  असंख्य नौकर ( फ़रिश्ते )  लगा रहे हैं , जिन में कुछ खास फरिश्तों के नाम और काम  इस प्रकार  हैं  .
1.जिब्राईल -अल्लाह की चिट्ठी  पत्री  लाना  और भेजना
2.इस्राफील - तुरही (Trumpet  )  बजा कर लोगों  को क़यामत की सूचना  देना
3.मीकाईल - वर्षा  यानि  पानी  की व्यवस्था  करना
4-मुनकिर और  नकीर -अपराधियों  से सवाल पूछना  ,जांच करना
5.मलिकुल मौत - लोगों  के प्राण  निकालना
6.मलिक - नरक  की चौकीदारी   करना
7.रिजवान - स्वर्ग  की  देख रेख  करना कहीं  कोई भाग  न  जाए ,या नर्कवासी  अंदर नहीं घुस  जाये

बेनामी  जी   अल्लाह के फ़रिश्ते जो  काम 14 सौ   साल से करने  लगे हैं , वाही काम हिन्दू  देवता धर्मराज , चित्रगुप्त  , वरुण  , इंद्र और शंकर लाखों साल सेकरते आये हैं।

शायद इसी लिए सभी मुसलमान"  ईमान  मुफस्सिल- ايمان مفصل"  में कहते हैं कि "आमन्तु बिल्लाहि व् मलयाकतिहि - آمنتُ با الله و مليكتهِ    "र्थात  मैं अल्लाह के साथ फरिश्तों  पर भी  ईमान  रखता हूँ। 
बताइये यदि  एक  ही ईश्वर  तीन  नामों से तीन  काम  करता है तो आप उसे हिन्दुओं  के तीन  बाप बता देते तो  , तो जब आपका अल्लाह फरिश्तों  से वही  काम  करवाता  है  ,जो हिन्दुओं  के देवता  करते हैं  . तो  मुसलमानों के असंख्य  बाप  हैं , यह  क्यों  नहीं  मना जाए ?
4-चौथा  आरोप -आपने कहा है  कि महेश यानी शंकर  खुद एक शैतान  है
जवाब -बेनामी जी  आपकी यह  बात  महज एक झूठ  के अलावा कुछ  नहीं  है , अगर  दुनिया भर के आप जैसे मुसलमान  क़यामत तक  भी कोशिश  कर लें  तो भी  वह या साबित नहीं कर  सकेंगे कि  महेश   ही शैतान  है बिना साबुत  के कुछ  भी  कहना  बेवकूफों  की आदत होती है   . क्योंकि आपको  न तो अपने   अल्लाह  के  बारे में  जानकारी  है  , और  न  शैतान के  बारे में  . हकीकत तो  यह  है  कि  आपका  अल्लाह ही  शैतान (दज्जाल )  है  . और शैतान की सबसे बड़ी  निशानी  यह है  कि  वह  काना है , यानि उसकी एक ही  आँख  है  , चाहो  तो  कुरआन   में  देख  लेना  . आपकी  जानकारी के लिए मैं अपने लेख " अल्लाह दज्जाल यानी शैतान है !!" की लिंक  दे रहा हूँ  . तसल्ली  से पढ़ लेना   और दोस्तों को पढवा देना  . शक  दूर हो  जायेगा .http://bhandaafodu.wordpress.com/2014/07/19/
https://www.facebook.com/groups/268438006618252/
5-पांचवां  आरोप -आपने  कहा कि  हिन्दुओं  का  पांचवा  देवता  साईँ  बाबा  , और शंकराचार्य  है
जवाब - जहाँ  तक  साईँ  बाबा  उर्फ़ चाँद  मियां उर्फ़  कमरुद्दीन    की  बात है तो उस  शख्श  का किरदार और ईमान  मशकूक  है   . हमारी नजर में वह  फ़ासिक़  है  , यानि  न  हिन्दू  और न  मुस्लिम  .  उसे हिन्दू धर्म  भ्रष्टक  मानते हैं  . हम  एक लाश  की इबादत को  गुनाह मानतेहैं  ,  और शकराचार्य  केवल  एक धार्मिक  गुरु हैं  . हम  उनका  सम्मान  कर  सकते हैं  , पूजा  नहीं  कर सकते .कबरपरस्ती ( Grave Worship )  -इस्लाम की परंपरा है , हम  ऐसे  लोगों को "मुलहिद "   कहते  हैं। अकेले  भारत में करीब  350  से ज्यादा  दरगाहें हैं  ,जहाँ मुस्लिम  कबरों  में दफन  लाशों   पर  सर झुकाते   हैं  . बेनामी  जी   आपसे   यही गुजारिश  है  कि पहले  अपने  घर की  गन्दगी  साफ  करो  . फिर  दूसरों  पर कीचड़ फेकने की हिमाकत  करो  . और अगर आप  सच्चे  मुसलमान  होते  तो गलियां  नहीं  देते  , आपके लिए हम  कुरान  की  यह  आयत  देते हैं  . अर्थ  आप  खुद किसी मुल्ले से पूछ  लेना ,25:63

"وَعِبَادُ الرَّحْمَٰنِ الَّذِينَ يَمْشُونَ عَلَى الْأَرْضِ هَوْنًا وَإِذَا خَاطَبَهُمُ الْجَاهِلُونَ قَالُوا سَلَامًا   "
"इज़ा ख़ातब  हुमुल  जाहिलूना  कालू  सलामा "
समझदार  के लिए इशारा ही  काफी  होता  है 

 http://www.alim.org/library/biography/stories/content/SOP/18/6/Ibrahim%20(Abraham)/Hadith%20About%20Abraham%20,%20Sarah,%20and%20Hajar