सोमवार, 21 अप्रैल 2014

मुस्लिम तुष्टिकरण के बदले मुस्लिम कृतघ्नता !!

हिन्दी  में   यह कहावत   रसिद्ध है कि  कमजोर  व्यक्ति  को हर कोई   दबा   लेता है  . यानी  कमजोर  व्यक्ति या  समाज  को दूसरों   से सामने  झुकना  पड़ता  है  . यह   कहावत पूरी  तरह  से  भारत के   वर्त्तमान हिन्दुओं    पर    लागू  होती  . वैसे  इस बात  में  कोई  शंका  नहीं  है  ,कि हिन्दू  ज्ञान विज्ञानं  के क्षेत्र में  विश्वगुरु  माने  जाते है  .   और लगभग  सभी  देशभक्त  हैं , और   सभी  को  अपने  धर्म     पर  निष्ठां  है  .  लेकिन   आज हमें   इस  नयी  पीढ़ी  को  इन  सवालों  का  जवाब   देने  की  जरूरत   है  ,    कि हिन्दू  समाज के  देशभक्ति  ,  धर्म  निष्ठां    होने  के  बावजूद बाहर  से  आये हुए  मुस्लिम  हमलावर     वर्षों  तक  इस  देश  पर  हुकूमत कैसे  करते   रहे  , और  हिन्दू  धर्म  के पवित्र स्थानों को तोड  कर  कत्ले आम कैसे करते  रहे  , यही   नहीं  वह  कौन  से कारण  है कि आज  भी  उन  लुटेरों  की  औलाद  को    तुष्ट  करने  के लिए कुछ  हिन्दू अपने  ही  असली  भाइयों  के अधिकार  छीन  कर   देश द्रोही  और  हिन्दूद्वेषी   लोगों  को  दे  रहे  है  . फिर  भी मुसलमानों  की  मांगे  बढती  जाती  है  .
याद  रखिये  जब  तक  हम  हिन्दुओं  की  इस नयी  पीढ़ी  को   कोई संतोष जनक  उत्तर  नहीं  देंगे  नयी पीढ़ी  के  लोग  नाम से तो  हिन्दू   बने रहेंगे लेकिन  आचार विचार से     निधर्मी  , सेकुलर    यानि प्रोइस्लाम (Pro-islam  )   बनते  रहेंगे   . और मुसलमानों  को भारत में इस्लामी  राज  स्थापना  के लिए  ऐसे ही लोगों  की  जरुरत है  . क्योंकि ऐसे  ही  लोगों  की  मदद  से     मुसलमान बिना  खून  खराबा के और हिन्दुओं  के द्वारा  हिन्दुओं  को ही मिटा  कर  जल्द ही  अपना मकसद  पूरा  कर  लेंगे  , यदि हिन्दू अब  भी  नहीं  समझे  तो सन  2050  तक   हिंदुस्तान " जम्हूरियते इस्लामिये  हिन्द " बन  जायेगा  . क्योंकि  बीमार  व्यक्ति  या समाज शत्रु  का  मुकाबला  नहीं कर  सकता ,  और दुर्भाग्य  से आज हिन्दू  समाज अनेकों संक्रामक रोगों  से  ग्रस्त  है .और   इतिहास   साक्षी है कि जब जब  हिन्दू  समाज  इन  रोगों  से  बीमार  हुआ  है ,  हिन्दू  समाज  भारी  नुकसान  उठाना   पड़ा  है  .
1 -हिन्दुओं में व्याप्त संक्रामक  रोग 

हम इन रोगों  को संक्रामक  इसलिए   कहते  हैं  , क्योंकि  यह  रोग भारत में  मुसलमानों  के संपर्क   से  आया  था  और इसके  रोगाणु  आज भी  कुछ   हिन्दुओं   के  दिमागों  में मौजूद  हैं  . इनमे  कुछ खास रोग  इस प्रकार  हैं   , 1. सत्ता लोलुपता  2. वैदिक  हिन्दू  धर्म  का  अधकचरा  ज्ञान  3. देश  और  धर्म  की रक्षा  के  लिए शत्रु  को  मारने  की  जगह   खुद  मरने को श्रष्ठ समझना  4. विधर्मियों  द्वारा  किये  गए  अन्याय  और अत्याचारका उसी समय  मुंह तोड़  जवाब नहीं  देना  .5.जिहादी  विचारों का पर्दाफाश करने  वालों  का  साथ  नहीं  देना  और  सबसे  बड़ा  जानलेवा  रोग  तुष्टिकरण  है  , जिसे सेकुलरज्म  भी  कहते   हैं  , इस रोग के जीवाणु जिस भी  हिन्दू में प्रविष्ट  हो जाते है वह  हिन्दू  विरोधी   हो  जाता  है  , यह  बात इतिहास  से  साबित  होती  है  ,
अमेरिका  के एक ईसाई धर्मप्रचारक (  missionary   ) "डाक्टर मूरी  थर्सटन टाइटस -  Dr. Murray Thurston Titus  "( 1880 -31 अक्टूबर 1964 )  ने  1930  में एक पुस्तक  लिखी   थी  , जिसका  नाम  "Indian Islam , an Religious history of Islam in India" है  . इस  किताब  में  बताया गया  है की  सबसे   पहले  कुछ  हिन्दू  राजाओं  ने  अरबों   से व्यापर में  लाभ  कमाने के लिए और  मुसलमानों  के झूठे  धर्म  पर विश्वास करके   सारे भारत  को  मुस्लिम तुष्टिकरण  का रोग  लगा  दिया  .  और  वास्तव  में  जिसे हम  सेकुलरिज्म   का   प्रारम्भिक  रूप  कह  सकते  हैं   . किताब  में लिखा  है  ,

मौहम्मद साहब के जीवन काल से बहुत पहले से, अरब देशों का दक्षिणी-पूर्वी देशों से समुद्री मार्ग द्वारा भारत के मालाबार तट पर होते हुए बड़ा भारी व्यापार था। अरब नाविकों का समुद्र पर लगभग एकाधिकार था। मालाबार तट पर अरबों का भारत से कितना व्यापार होता था, वह केवल इस तथ्य से समझा जा सकता है कि अरब देश से दस हजार (10.000) घोड़े प्रतिवर्ष भारत में आयत होते थे  . और इससे कहीं अधिक मूल्य का सामान लकड़ी, मसाले, रेशम इत्यादि निर्यात होते थे। स्पष्ट है कि दक्षिण भारत के शासकों की आर्थिक सम्पन्नता इस व्यापार पर निर्भर थी। फलस्वरूप् भारतीय शासक इन अरब व्यापारियों और नाविकों को अनेक प्रकार से संतुष्ट रखने का प्रयास करते थे। मौहम्मद साहब के समय में ही पूरा अरब देद्गा मुसलमान हो गया, तो वहाँ से अरब व्यापारी मालाबार तट पर अपने नये मत का उत्साह और पैगम्बर द्वारा चाँद के दो टुकड़े कर देने जैसी चमत्कारिक कहानियाँ लेकर आये। वह भारत का अत्यन्त अवनति का काल था। न कोई केन्द्रीय शासन रह गया था और न कोई राष्ट्रीय धर्म। वैदिक धर्म का हास हो गया था और अनेकमत-मतान्तर, जिनका आधार अनेक प्रकार के देवी-देवताओं में विश्वास था, उत्पन्न हो गये थे। मूर्ति पूजा और छुआछूत का बोलबाला था। ऐसे अवनति काल में इस्लाम एकेश्वरवाद और समानता का संदेश लेकर समृद्ध व्यापारी के रूप में भारत में प्रविष्ट हुआ। मौहम्मद साहब की शिक्षाओं ने, जो एक चमत्कार किया है वह, यह है कि प्रत्येक मुसलमान इस्लाम का मिशनरी भी होता है और योद्धा भी। इसलिए जो अरब व्यापारी और नाविक दक्षिण भारत में आये उन्होंने इस्लाम का प्रचार प्रारंभ कर दिया। जिस भूमि पर सैकड़ों मत-मतान्तर हों और हजारों देवी-देवता पूजे जाते  हों वहाँ किसी नये मत को जड़ जमाते देर नहीं लगती विशेष रूप से यदि उसके प्रचार करने वालों में पर्याप्त उत्साह हो ओर धन भी हो  .
अवश्य ही इस प्रचार के फलस्वरूप हिन्दुओं के धर्मान्तरण के विरुद्ध कुछ प्रतिक्रिया भी हुई और अनेक स्थानों पर हिन्दू-मुस्लिम टकराव भी हुआ। क्योंकि शासकों की समृद्धि और ऐश्वर्य मुसलमान व्यापारियों पर निर्भर करता था, इसलिए इस प्रकार के टकराव में शासक उन्हीं का पक्ष लेते थे, और अनेक प्रकार से उनका तुष्टीकरण करते थे। फलस्वरूप् हिन्दुओं के धर्मान्तरण करने में बाधा उपस्थित करने वालों को शासन बर्दाश्त नहीं करता था। अपनी पुस्तक 'इंडियन इस्लाम' में टाइटस का कहना है कि ''हिन्दू शासक अरब व्यापारियों का बहुत ध्यान रखते थे क्योंकि उनके द्वारा उनको आर्थिक लाभ होता था और इस कारण हिन्दुओं के धर्म परिवर्तन में कोई बाधा नहीं डाली जा सकती थी। केवल इतना ही नहीं, अत्यन्त निम्न जातियों से धर्मान्तरित हुए भारतीय मुसलमानों को भी शासन द्वारा वही सम्मान और सुविधाएँ दी जाती थीं जो इन अरब (मुसलमान) व्यापारियों को दी जाती थी।''  . ग्यारहवीं शताब्दी के इतिहासकार हदरीसों द्वारा बताया गया है कि ''अनिलवाड़ा में अरब व्यापारी बड़ी संखया में आते हैं और वहाँ के शासक और मंत्रियों द्वारा उनकी सम्मानपूर्वक आवभगत की जाती है और उन्हें सब प्रकार की सुविधा और सुरक्षा प्रदान की जाती है।'' . दूसरा मुसलमान इतिहासकार, मौहम्मद ऊफी लिखता है कि कैम्बे(खम्भात  गुजरात ) के मुसलमानों पर जब हिंदुओं ने हमला किया तो वहाँ के शासक सिद्धराज (1094-1143 ई.) ने, न केवल अपनी प्रजा के उन हिंदुओं को दंड दिया अपितु उन मुसलमानों को एक मस्जिद बनाकर भेंट   की . केरल का एक शासक  मरक्कार  तो अपने मंत्रियों समेत अरब देश जाकर मुसलमान ही हो गया .था 

2-कांग्रेस  के राज में तुष्टिकरण 

सब  जानते हैं कि  मुसलमानों  ने इस देश  के  विकास  और देश वासियों  की भलाई  के लिए कुछ  भी  नहीं  किया  , जब इनकी हुकूमत थी तो   हिन्दुओं  के  मंदिर तोड़  कर  मस्जिदें  , मजार , मकबरे   बनाते रहे  और  हिन्दू  लड़कियों  से अपनी  हरमें  भरते  रहे  . और  आजादी  के  बाद भी सिर्फ  वोटर्या जिहादी    ही  पैदा  करते रहे  जो बड़े होकर  अपराधी बनते  हैं  .  फिर भी  अल्पसंख्यक  के बहाने हमेशा कोई  न कोई  सुविधा   मंगाते  रहते  हैं  . जैसा कि  मुसलमानों   का  स्वभाव  है  , यदि  उनको सारी  पृथ्वी  दे  दी  जाये  यह  संतुष्ट  नहीं  होंगे  , फिर  चाँद  और  सूरज    मागने   लगेंगे  . दुर्भाग्य  से    कांग्रेस की  सरकार  वोटों  के  लिए  यही    काम  करती  आयी  है  ,
और आजकल धूर्त     राजनेता मुसलमानों  के तुष्टिकरण  करने  वालों  को सेकुलर    बताते है  , और  जोभी  मुस्लिम तुष्टिकरण  के खिलाफ आवाज  उठाते है उनको सम्प्रदायवादी  मान  लिया  जाता  है  . जब भी  कांग्रेस  ऐसा  कहती है तो उसके साथ वामपंथी  और  कांग्रेस की  सहायक पार्टियां   यही  राग  अलापने  लगती  हैं  , जबकि संविधान  में सभी  के लिए  बिना  किसी धर्म  , जाती , भाषा और लिंग  के समान  अधिकार  देने  का  वादा किया  गया है   . फिर भी संविधान को ताक  पर रख के  मुस्लिम वोटों  के लिए मुसमानों  के लिए खजाने  खोल देते  हैं  .
उदहारण  के लिए  जब सन 2009  में यू पी  ए ( U.P.A.) की  सरकार  दोबारा सत्ता  पर आयी  तो , दिनांक 8 दिसंबर 2009  को मुसलमानों  के लिए  सरकारी  नौकरी में जाती  के आधार पर 10% आरक्षण    करा   दिया  . जो उनकी  संख्या  के अनुपात  से  अधिक था  . ( TheStateman 19 dec2009).इसके  पहले  इसी  सरकार ने मुसलमानों   के  लिए  5 %आरक्षण  दिया  था  और पढाई के लिए  सस्ती  दरों  पर    ब्याज  देने  का आदेश  बैंकों  को  दिया  था  . (Times ofIndia 8 jan 2009)यही नहीं   सरकार ने  2009 -2010 के  दौरान   मुसलमानों    के लिए  दी  जाने  वाले   अनुदान  की  राशि  बढाकर 74 %   कर  दी  . ( Indian Express18  dec2007).इसके  पहले  मनमोहन  सिंह  ने मुसलमानों  के  लिए 7780  करोड़  का एक  खास पैकेज देते  हुए  कहा था  कि  आगे यह राशि  बढाई  जा सकती  है. ( Anand  Bazar Patrika 9 Nov2007)

3-शिक्षा  के क्षेत्र  में  भी    तुष्टिकरण 

इस समय भारत में कुल पांच प्रौद्योगिक इंस्टीट्यूट ( I.I.T  ) चल रहे  हैं  , जिनमे प्रवेश  के लिए क्षात्रों को कड़ी परीक्षा  देना पड़ती  है , जिसे  पास  करने के बाद ही  मेरिट  के आधार  पर ही प्रवेश  दिया  जाता  है  . ऐसा शिक्षा  के स्तर को  बनाये  रखने  के किया  गया   है  . लेकिन 28  जून 2008  को मानव संसाधन विकास (एचआरडी (the Human Resource Development ) मंत्रालय ने एक मुस्लिम  क्षात्रों  को   बिना किसी  टेस्ट  के सीटें  आरक्षित  करने   का   नियम  बना  दिया  . आदेश जारी

 .
4-मदरसा की शिक्षा  को  मान्यता 

सब   जानते हैं कि  मुस्लिम  स्कूलों  यानी  मदरसों  में शिक्षा  के  नाम पर  कुरान  , हदीस और इस्लामी  कानून पढ़ाया  जाता  है  . जिस  से न तो कोई सरकारी नौकरी  मिल सकती  है  और  न  कोई रोजगार  मिल  सकता  है. अकसर  मदरसे से  पढ़े हुए बच्चे  आगे चल  कर मुल्ला  , मौलवी   और मुअज्जिन   बन  जाते  हैं   . या   किसी  दल  में घुस  कर नेता  बन  जाते  हैं  . इस्लामी तालीम के कारन जब कहीं  नौकरीनहीं  मिलती तो  अधिकांश  मुस्लिम युवा   जिहादी  और अपराधी   भी बन  जाते  हैं
लेकिन  जब लालू  प्रसाद रेल मंत्री  बना  तो 7 जुलाई  2008 को   उसने    मदरसे की  शिक्षा  को  सरकारी नौकरी के लिए मान्य  कर दिया  . यही नहीं  जो  मुसलमान  बिलकुल  निरक्षर   थे उन्हें   कुली   के  रूप   नियुक्त  करके   नियमित  रेल्  कर्मचारी    का  दर्जा  दे  दिया  . जबकि  गैर मुस्लिम  युवकों  को  रेलवे में नौकरी  करने के लिए कई प्रकार  के कोर्स  करना  पड़ते  हैं  . यही नहीं  केंद्रीय  सरकार  ने   मुस्लिम  छात्रों  के  लिए  एक  छात्रवृत्ति  योजना  भी  चालू  कर दी  , जिसके मुताबिक  जिस मुस्लिम  परिवार  की आमदनी एक लाख प्रति  वर्ष  से  कम  होगी  उनके  बच्चों  को  दसहजार रूपया   प्रति  वर्ष छात्रवृत्ति  मिलेगी

3- मुस्लिम लड़कियों के लिए छात्रवृत्ति
खुद  को सेकुलर  बताने  वाली  सरकार ने  मुस्लिम  लड़कियों   के  एक  विशेष  अनुदान  देने  का  भी    आदेश  दिया  है  जिसके अनुसार   पोस्ट  ग्रेजुएट  स्तर तक 5000  और व्यावसायिक  कोर्स  के लिए  3000 और  डिग्री  स्तर  तक 4000  रुपया  वजीफा  दिया  जाता है  . यही नहीं  एम  बी बी एस   और एम  डी   या एम  फिल   के  कोर्स  में केवल 50 %    अंक  लाने  पर  मुस्लिम  छात्रों  को उत्तीर्ण  माने का  आदेश     दे दिया  . जो  सिर्फ   धर्ममांध    मुस्लिमों  को खुश  करने के  लिए  किया  गया  एक अन्याय  पूर्ण  और अनुचित    कार्य  है  .

4-शैक्षिक ऋण के  मामले  में  भेदभाव 
सरकार  हिन्दुओं  के  साथ  भेदभाव  करती  है  इसका  उदहारण  इस   बात  से चलता  है  कि  जब  कोई  हिन्दू उच्च शिक्षा  के लिए कर्ज लेता  है तो उस से  12 -14 %   प्रति वर्ष   की दर   से  ब्याज    लिया  जाता  है  , लेकिन अल्पसंख्यक छात्र से राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास और वित्त निगम केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत ऋण पर 3% ब्याज मिलता है।इसी तरह स्व-रोजगार के लिए वाणिज्यिक उद्यम में, एक हिंदू युवा 15-18% ब्याज पर वाणिज्यिक बैंकों से ऋण प्राप्त करने के लिए हकदार है; और वे 'अपनी जेबें; से परियोजना लागत के लिए 15-40% की मार्जिन मनी' का उत्पादन करने के लिए है बाकी बैंक से आता है। लेकिन अल्पसंख्यक युवाओं से उनकी जेबें 'मार्जिन मनी के रूप में' में केवल 5% डाल दिया है; अन्य 35% राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम द्वारा केवल 3% ब्याज पर प्रदान की जाती है .जबकि
एक निष्पक्ष धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक प्रणाली में, किसी भी सरकारी सहायता और अनुदान केवल आर्थिक स्थिति और योग्यता के आधार पर पूरी तरह आधारित वितरित किया जा सकता .अर्थात सरकार  संविधान  की धारा अर्थात सरकार  संविधान  की धारा 15(1)का  स्पष्ट  उल्लंघन  कर रही  है  जिसमे  कहा  गया  है  कि ""राज्य कोई नागरिक केवल धर्म, जाति, जाति, सेक्स, जन्म स्थान या इनमें से किसी के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा"

5-मुसलमानों  की  कृतघ्नता 
शायद  कांग्रेसी  और तथाकथित  सेकुलर  सत्ता के  नशे  में  आकर इस गलतफहमी   में पड़े हुए  हैं  कि  मुसलमानों   को    जीतनी अधिक सुविधायें   दी जायेगी  वह   उतने ही  देश  भक्त  बनते  जायेंगे  .     लेकिन इसका  उलटा  ही   असर    हो  रहा  है , मुसलमानों में  अलगाव  की भावना  और   उग्र   हो  रही है  ,   क्योंकि मुसलमान  अपना  स्वभाव  नहीं  बदल  सकते  ,   इस अलगाव  यानि  भारत विरोध   का बिस्मिल्लाह  कश्मीर  से हो चूका  है    जो कुछ  सालों के भीतर  सम्पूर्ण  भारत में   फ़ैल  जायेगा  ,  इसका  साबुत   कश्मीर  में लगाये  गए  नारों  से   मिलता  है  , वहां  मुसलमान  कहते  हैं ,
1-"ज़ालिमो  औ काफिरो  कश्मीर  हमारा छोड़  दो "
(O! Merciless, O! Kafirs leave our Kashmir)


2-"कश्मीर  में अगर  रहना  होगा  ,  अल्लाहो अकबर  कहना  होगा "
(Any one wanting to live in Kashmir will have to convert to Islam)


3-"ला शरकिया ला  गरबिया  इस्लामिया  इस्लामिया  "
From East to West, there will be only Islam

4-"मुसलमानो  जागो  , काफिरो भागो "
 (O! Muslims, Arise, O! Kafirs, scoot)


5-"इस्लाम  हमारा  मकसद  है ,कुरान  हमारा  दस्तूर  है ,जिहाद हमारा  रास्ता  है  "

(Islam is our objective, Q’uran is our constitution, Jehad is our way of our life)

6-"कश्मीर बनेगा  पाकिस्तान "

(Kashmir will become Pakistan)

7-"पाकिस्तान  से क्या रिश्ता  , ला इलाहा  इल्लल्लाह "

(Islam defines our relationship with Pakistan)

8-"दिल  में रखो अल्लाह का खौफ ,हाथ  में रखो क्लाशनीकॉफ "

(With fear of Allah ruling your hearts, wield a Kalashnikov)

9-"यहाँ क्या चलेगा , निजामे  मुस्तफा "

(We want to be ruled under Shari’ah)

10-" पीपुलस् लीग  का  क्या पैगाम  ,फ़तेह  , आजादी  और इस्लाम "

(“What is the message of People’s League? Victory, Freedom and Islam.”)

निष्कर्ष
इस प्रकार  के कई  धमकी वाले  नारे कश्मीर के अलगाववादी  संगठन " हिज्बुल मुजाहिदीन -Hijb-ulMujahidin  "   ने कश्मीर  के उर्दू  दैनिक समाचार" आफताब -Aftab "  ने    दिनांक  1 अप्रैल  1990   में  प्रकाशित  किये  थे  . साथ   ही यही  नारे  जगह  जगह  कश्मीर  के सभी शहरों  में दीवार पर पोस्टर  के रूप में  चिपका  दिए  थे  .  इसका उद्देश्य कश्मीर  के  हिन्दुओं  को भयभीत  करके कश्मीर   खाली  करने  का  था   .  बड़े ही  अफसोस  की  बातहै   कि एक तरफ  जब कांग्रेस  की सरकार  मुसलमानों  की तुष्टिकरण   में  लगी  हुई थी  , उसी  समय  कश्मीर के मुसलमान   अपनी   क्रतघ्ना    प्रकट  कर  रहे थे  . और  सभी  सेकुलर  यह  नजारा  चुपचाप  देख  रहे   थे किसी ने  इसका विरोध  करने  की हिम्मत  नहीं  दिखाई  . क्योंकि  सबके  मुंह में सेकुलरिज्ज्म ताला  लगा  हुआ  था  . कहावत है कि " मौन सम्मति  लक्षणम "  यानि   भारत के  सभी  मुसलमान  नेता यही  चाहते  हैं , कि  कश्मीर  सहित  पूरा  भारत   इस्लामी  देश  बन  जाये  .

   इन तथ्यों  से  यही  निष्कर्ष  निकलता   है  कि सांप  को  कितना  भी  दूध पिलाया  जाये    वह हमेशा  विष  ही  उगलेगा  .  आज  भी  समय है की  हिन्दू सावधान  हो  जाएँ  . कि सेकुलरिज्म  देश  का  नाश  कर  देगा  .
  नोट - यदि  इस  लेख   को पढ़  कर  किसी  मित्र    को   किसी  प्रकार  की  शंका हो तो   इस  पते  पर अपने  विचार  भेजें
 sharma.b304@gmail.com

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3 टिप्‍पणियां:

  1. Apne desh mai samanta ke adhikar ka estemaal na ho eske parinamo ko OBC na jan paye tatha SC ST yah jan na paye ki apne desh ke sansadhno tatha naukariyon mai unki sthiti kaya hai esse door rakhne ka seedha sa parpanch hai muslim tustikaran ka mudda jabki vastvikta yeh hai ki hum abadi mai 16% hai naukri mai 6% sansadhan mai 8%. Tatha sansad mai 4.5% aap bataye ki yahi tustikarn hai

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  2. श्रीमान, पहली बात: आप अपनी जानकारी का दायरा बढाएं, विदेशी आक्रमणकारी जो व्यापारी के रूप में भारत में दाखिल हुआ वह मुस्लिम अथवा मुसलमान नहीं बल्कि मुगल एवं तुर्क थे| वर्तमान में भारत में 18%प्रतिशत मुस्लिम हैं उनमें से अधिकतर धर्मान्तरित हैं, वास्तविक विदेशी आक्रान्ता वापिस चले और बाकी यहीं मर खप गए|

    दूसरी बात: जोआप बार बार कुरान शरीफ़ का हवाला दे रहे हैं वास्तव में वह हदीसें हैं जैसे हिन्दू धर्म के मूल ग्रन्थ वेद है, पर जिन बातों का भारतीय जनमानस पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा वह शास्त्र, पुराण, स्मृतियाँ और उपनिषद हैं| जैसे उपनिषदों आदि का स्थान वेद से भिन्न है ठीक उसी प्रकार हदीसों का स्थान भी कुरान से बेहद भिन्न है|

    तीसरी बात: जिस तुष्टिकरण का आरोप कांग्रेसी सरकारों पर प्राय: लगता रहा है, बीजेपी की संघी सरकार भी उससे अछूती नहीं है| बीजेपी की मोदी सरकार हिन्दुओं का तुष्टिकरण कर रही है, तुष्टिकरण किसी के साथ और किसी भी रूप में मानवीय अपराध ही है|

    चौथी बात: यह ठीक है कि इन विदेशी आक्रान्ताओं ने भारतीयों पर अत्यचार किये, तोड़ फोड़ की, बलात धर्मपरिवर्तन कराया आदि परन्तु इन बादशाहों और सुल्तानों सड़क निर्माण, गावों/बस्तियों/शहरों के विकास, भवन निर्माण विकासादि में अहम भूमिका निभाई है| अधिकतर बुरे थे परन्तु बहुत लोग अच्छे भी थे इसलिए सभी को एक ही लाठी से हांकना ठीक नहीं है| स्वतन्त्रता संग्राम में भी मुसलमानों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता|

    पांचवीं बात: अल्पसंख्यकों को मिलने वाली सुविधाओं आदि का जो हम अकारण विरोध कर रहे हैं, उसके पीछे केवल हमारी घोर अज्ञानता एवं पूर्वाग्रह ही है| जिस हिन्दू समाज ने अपने ही करोड़ों हिन्दू भाइयों को शुद्र शुद्र कह कर दुत्कारा हो, यदि आज उन्हें यह सुविधाएँ मिल रही हैं तो वह इसके हकदार हैं| यदि आप चाहते हैं कि जाति के नाम पर आरक्षण बंद हों तथा अन्य और भी सुविधाएँ बंद की जाएँ और केवल योग्यता के आधार पर ही स्कालरशिप, आरक्षण आदि दिए जाएं तो कर दीजिए समाप्त जातिवादी व्यवस्था तथा उन करोड़ों हिन्दू भाइयों को फिर से अपने सीन से लगा लीजिए| उन्हें मन्दिरों में प्रवेश दीजिए, उनके लड़के लड़कियों को अपने परिवार में ब्याहिए, उनसे हर प्रकार का रोटी एवं बेटी का रिश्ता जोड़िये, अपने नामों के साथ, जाट, क्षत्री, वैश्य आदि लगाना बंद कीजिये| प्रत्येक जाति पाति व्यवस्था को ध्वस्त कर डालिए, फिर देखिये न तो हमें किसी से लड़ना पड़ेगा, ना कानून से छेड़छाड़ करनी पड़ेगी और न ही किसी प्रकार के वैमनस्य का वातावरण ही बनेगा|

    मेरी बातें कडवीं अवश्य हैं परन्तु थोड़ा शांति, धैर्य एवं तठस्थता से विचार कर विचार कर के देखना अवश्य|

    धन्यवाद

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