शनिवार, 28 जून 2014

भंडाफोडू की बात सच निकली !

सभी लोग  इस  बात को स्वीकार  करेंगे कि  सत्य   ही  धर्म  है  ,इसलिए  बिना  किसी विद्वेष  और दुराग्रह  के लोगों   के सामने  सत्य का प्रचार  करना  हरेक  व्यक्ति   का कर्तव्य  होना  चाहिए ,  वास्तवमे  यह भी  धर्म  का एक रूप  है , क्योंकि देखा  दया है कि सत्य  को त्यागने पर देश  और समाज  के लिए  घातक दुष्परिणाम     भोगना   पड़ते  है  , लेकिन उस  से बड़े  घातक परिणाम  असत्य  को सत्य  और अधर्म को धर्म  समझ   लेने  से होते हैं  . इसका पता हमें  इस्लामी  देशों और  खासकर  ईराक  में  होने  वाली  घटनाओं    से लगता  है  ,
आजकल दुनिया  के  मुसलमान   इस्लाम  के  बहाने आतंक  की  जो  आग  जला  रहे  हैं  ,उसकी  लपटें कभी   भी भारत  तक  पहुँच  सकती  हैं  . और  इस  आग को  और  भड़काने वाले  बाहर नहीं अंदर  के  ही  लोग  होंगे ,जो अपना  जिहादी चेहरा  छुपा  कर सेकुलर बन गए  हैं , और  विभिन्न दलों  में घुस कर भारत  में अव्यवस्था ,फ़ैलाने की योजना  बना  चुके हैं , सिर्फ उपयुक्त  मौके  की तलाश की राह  देख  रहे  हैं  . भंडाफोडू   ब्लॉग  सन  2009  से प्रमाण  सहित इस्लाम  की  इसी  नीति  और धर्म  और शांति  की आड़  में चलाये   जा रहे इस्लाम  के दुष्प्रचार का  भंडा  फोड़ता  आया  है  .और   अपने  तर्कपूर्ण  लेखों  से  देशभक्त  हिन्दुओं  को सचेत  करता  आया  है   .और इस  ब्लॉग ने अपनी  प्रथम  पोस्ट से  लेकर  केवल  दो  साल   में  ही  इस्लाम सम्बंधित विभिन्न विषयों  पर जो  लेख  प्रकाशित  किये   थे  उनमे  दी  गयी  सभी  बातें सही  साबित  हो  रही  हैं ,ऐसे कुछ   विषयों   के शीर्षक  और  लेखों   के प्रकाशन  की तारीख यहाँ  दी   जारही   है , और  साथ में  अखबार  की  वह  खबर भी  दी  जा  रही  है  ,जो ब्लॉग  के लेख  को सत्यापित और प्रमाणित  करती  है ,जैसे

1-अल्लाह  ईश्वर  नहीं   है 
हम  सदा से कहते  रहते  थे  कि अल्लाह  ईश्वर  नहीं  है , ईश्वर  तो मनुष्य  मात्र   का होता  , लेकिन अलाह  अरब  का  एक  देवता  था ,  यही  नही  मुसलमान  कुरान  को  जिस अल्लाह  की रचना  बताते  हैं  ईश्वर ( God )   नहीं   , एक व्यक्ति  था  जो  मर  चूका   है यद्यपि  मुसलमान  इस  सत्य  को  नहीं   मानते  लेकिन आज  इस   बात  को सार्वजनिक  रूप  से कहनेलगे कि  गैर  मुस्लिम अल्लाह का  नाम  नहीं  ले सकते  , अर्थात अल्लाह   सिर्फ अरबों  या मुसलमानों   का उपास्य   है.
अल्लाह कौन था -8/12/2010,अल्लाह की असलियत -20/7/2011,अल्लाह को पहचान लो -21/7/2011,अल्लाह दज्जाल यानि शैतान है -23/8/2011,अल्लाह ईश्वर नहीं है -1/11/2010,अल्लाह मर चुका है -13/6/2012
सभी  अख़बारों ने  इस खबरको  प्रमुखता से  छापा है कि मालशिया  की सुप्रीम  कोर्ट  ने आदेश  दिया  है कि अल्लाह सिर्फ  मुसलमानों का है , और यदि  कोई  गैर मुस्लिम   अल्लाह  का नाम लेगा  तो उसे कठोर सजा दी   जाएगी  .
"On Monday (June 23), Malaysia’s Supreme Court upheld a lower court ruling that found the term “Allah” belonged to Muslims.

इसलिए  यहाँ  के सभी  गैर  मुस्लिमो  खासकर हिन्दुओं   को  चाहिए के  वे अल्लाह  को उसके  असली  नाम " माकिर " कहा   करें , जिसका अर्थ  मक्कार    होता  है  . इस  पर  कोई  केस  नहीं  कर  सकेगा ,  हमारा  लेख  देखिये ,अल्लाह का असली नाम माकिर है -28/3/2012



2-इस्लाम सेकुलरिज्म   का  शत्रु  है 

मुसलमान  गिरगिट  की  तरह  अपना  रंग  बदलने  में माहिर  है  , जब  वह  संख्या  में  कम  होते  हैं  तो सेकुलरिज्म , सर्वधर्म  समभाव  ,  भाईचारे  और  मानवता   की  वकालत  करके अपना  उल्लू  सीधा करने  में लगे रहते ही , लेकिन  जैसे  ही  वह बहुसंख्यक  होजाते हैं  तो इस्लाम  के दूसरे  समुदायों  के  जानी  दुश्मन  बन  जाते  हैं  , पाकिस्तान  में शिया  और अहमदियों  का  हाल  रोज अखबारों  में  आता  है  हमने इस पर कई  लेख  दिए  हैं ,इस्लाम में सभी मुसलमान समान -29/9/2011,इस्लामी पाखंड दोहरी नीति -18/9/2011,इस्लाम शांति या आतंक -4/5/2012
हमारी  यह  बात  मलेसिया  के संविधान  से सबित होती है  , जिसमे शिया   होने पर जेल  और कठोर दंड  देने  का  प्रावधान   है  ,

"Malaysia is no different. Its constitution declares Islam to be the official state religion and allows other religions to practice peacefully. Yet it is illegal and a jailable offense to be a Shiite Muslim in Malaysia.


3-बलात्कार   इस्लाम  में  धार्मिक  कार्य  है 

आज  सम्पूर्ण  भारत में   रोज बलात्कार  की एक से एक जघन्य  घटनाओं  की  भरमार   सी  हो रही   है ,वास्तव  में यह घटनाएँ हो  नहीं रही  हैं , बल्कि योजनाबद्ध  तरीके से गुप्त रूप से करवाई   जा रही  है  , बल्कि जिहादी   लोग   छुप कर मुर्ख  हिन्दुओं  से   करवा रहे  हैं  . क्योंकि बलात्कर   भी  जिहाद  है और  रसूल  की  सुन्नत  है  , यानि  जैसे  रसूल  करते  थे , वैसा ही मुस्लमान   कर  रहे  हैं  या  करवा  रहे  हैं , हमने  इसके बारे में कई  लेख  दिए  थे  जैसे "  बलात्कार जिहाद का हथियार -26/12/2010,हिन्दू लड़की भगाना जायज है -2/5/2010,रसूल की बलात्कार विधि -9/11/2010.

हमारे  लेखों   की  सत्यता इराक  के आतंकी  संगठन ( SIS - Islamic State in Iraq and Syria) जिसका  पूरा नाम  " al-Dawlah al-Islāmīyah fī al-ʻIrāq wa-al-Shām  "   है  .जिसका  पूरा  नाम" अल  दौलतुल  इस्लामिया फिल इराक वश्शाम   -  الدولة الاسلامية في العراق والشام‎  "  इसके  एक  फतवे   से  सिद्ध  हो जाती  है .यह  फ़तवा आतंकी दल   के  मुखिया " अबू  बकर अल बगदादी - أبو بكر البغدادي "  ने 23 जून  2014  को  जारी  किया  था .इस  फ़तवा  में  कहा  है "मुजाहिदों  द्वारा  नीनवे  प्रान्त  को मुक्त  करा  लिया  गया  है  ,  और रूढ़िवादी   सरकार की  सेना  पराजित  हो गयी  है  . हर जगह लोग  मुजाहिदों  का  गर्मजोशी से  स्वागत कर  रहे  है  , जल्द  ही  बाकी  प्रांतों  पर  भी मुजाहिदों   का  कब्ज़ा  हो  जायेगा  , इसलिए सभी निवासियों   का  दायित्व  है कि  वे मुजाहिदों  को खुश  करने के लिए अपनी  कुंवारी  लडकिया  मुजाहिदों  को पेश  करदें , और  जो इस  फतवे के आदेश में चूक  करेगा तो शरीयत  के  मुताबिक  उनको  नतीजा भुगतना  पड़ेगा "

"Now that the liberation of the Nineveh province by the mujahideen is a fact, the mujahideen feel the warm welcoming by their brothers and sisters in the province of Nineveh. Following the defeat of the sectarian army, god willing, we vow that this province will remain safe and protected by the mujahideen.

Therefor, we ask all the people of this province to bring forward unmarried women so they fulfill their duty of pleasing their brothers, the mujahideen. Who ever fails to comply, shall face consequences imposed by the sharia law.

June 13th
Nineveh province"

अरबी  में  पूरा  फ़तवा इस  लिंक  में  दिया गया  है  ,
http://4-ps.googleusercontent.com/h/www.thegatewaypundit.com/wp-content/uploads/2014/06/404x576xISISRapeFatwa.jpg.pagespeed.ic.zsqL1osseb.jpg

बलात्कार के  इस  फतवे में सबसे पहले " बिस्मिलाहिररहमानिर्रहीम "     भी  लिखा  है  ,  यह  बात इस्लाम  को नंगा  करने के लिए  काफी  है  ,

4-मुसलमान  क्या  चाहते  हैं ?

मुसलमानों  की  आदत  बन  गई  है  कि  वे  कर्तव्य  की  जगह हमेशा अधिकारों  की बात  करते रहते ,और  देश  की जगह  इस्लाम  को वरीयता  देतेहैं  , क्यों  इस्लाम  में देशभक्ति गुनाह  है  . उनसे देश  भक्ति  की आशा  करना बेकार  है  ,इस  विषय  पर भी हमने  कई  लेख  दिए  हैं  , की शायद  हिन्दू  अभी  भी सचेत  हो  जाएँ  , लेख  इसप्रकार  हैं  ,आतंकवाद समस्या नहीं जेहादी रणनीति है -26/2/09,इस्लाम में देशभक्ति महापाप है-4/3/09,-इस्लामी जिहाद की हकीकत-22/4/2010,मुसलमान आतंकवाद से इस्लामी हुकूमत चाहते हैं -30/4/2010,
5-धर्मनिरपेक्षता   मूर्खता  है  .
आज  तक  किसी  भी नेता या  व्यक्ति ने  इस  विषय  पर  चर्चा करने की  हिम्मत  नहीं  दिखाई  कि  मुसलमान  सिर्फ  भारत में ही  धर्म निरपेक्षता   की वकालत  क्यों  करते  है  , दुनिया  में  इतने मुस्लिम  देश  हैं  वहां  के  लोगों  को धर्म निरपेक्षता  क्यों  नहीं   सिखाते ?  यह  इनकी    एक चाल है , इनका  जो असली  उद्देश्य   है  , उसका भंडा  इन  लेखों   में फोड़  दिया  गया ,
'घातक है अल्पसंख्यकवाद -17/4/2010,क्या हम अब भी धर्मनिरपेक्ष बने रहेंगे -2/5/2010,

http://bhaandafodu.blogspot.in/


6-हमारा धर्म  और उद्देश्य  क्या होना   चाहिए 

दुर्भाग्य  की  बात  है कि  आजकल   हिन्दू  समाज  केवल  त्यौहार  मनाने , भंडारे  करवाने , जगह  जगह कीर्तन   का आयोजन  करवाने  और  मंदिरों  पर क्विंटलों सोना  चांदी चढाने  को  ही धर्म  समझ  बैठा  है ,और  ऐसा  मानता कि  इस  से  धर्म  की रक्षा   हो  जाएगी , यानि  देश  में धर्म  की स्थापना  हो  जाएगी  .  लेकिन  ऐसा नहीं   है  . धर्म  की  रक्षा  के लिए दुष्टों  , देशद्रोहियों , और आतंकियों  का  नाश  करना  अत्यंत आवश्यक  है  . जैसा कि  स्वयं  भगवान कृष्ण   ने  गीता  में  कहा  है ,
"परित्राणाय  साधूनाम विनाशयायच दुष्कृताम" -गीता अध्याय 4  श्लोक 8


इसलिए हमारा  पहला धर्म आसुरी  शक्तियों  , नाश  करना  होना  चाहिए ,और  यदि किसी  कारण  से  हम शश्त्रों  से  उनका  नाश  नहीं कर  पाएं  तो तर्कों   से  आसुरी  विचारों   का  मुहतोड़  जवाब  अवश्य   देते  रहें , और उनके मंसूबों  को  सफल  नहीं  होने  दें  .  क्योंकि  समाज  जितना  जागरूक  होगौटाना ही सशक्त   होगा  .
चूँकि  धर्म  देश  के बिना  नहीं  रह  सकता  , और देश धर्म  के बिना अपना  प्राचीन  गौरव , और  पहिचान   खो  देगा  , इसलिए देशभक्ति   भी हमारा  धर्म होना  चाहये  . हिन्दुओं   को  इंडोनेशिया   के इतिहास  से सबक  लेना  चाहिए   कि एक  समय  जो  देश हिन्दू  देश  था  , वह मुस्लिम  आबादी बढ़  जाने से इस्लामी  देश  कैसे बन  गया  .
हमारा  दुर्भाग्य है कि आजादी  के बाद  जिस  भारत को  हिन्दू  राष्ट्र घोषित  करना  चहिये था ,उसे कुछ  धूर्त हिंदू  विरोधी  नेताओं  ने सेकुलर  बना  कर इस्लामी   देश  बनने   का रास्ता  खोल  दिया  है.
इस  विषय  पर   हमने 5  साल  पहले ही  एक  लेख  प्रकाशित  किया  था  ,जिसका  शीर्षक  था।

"हिन्दू राज्य की स्थापना कैसे होगी -3/3/09"

7-पाठकों   से विनम्र   निवेदन 

इस लेख  के  माध्यम  से  हम  उन सभी  पाठको से  निवेदन करते  है  ,  जो  भंडाफोडू  ब्लॉग काफी पहले से पढ़ते  आये  है  ,और  जो फेसबुक  में  भी इसके  लेख  पढ़ते   हैं ,कि अपरिहार्य   कारणों  से    इस  ब्लॉग   को  चलाना  मुश्किल    हो  गया है  . अभी  तक  हम  एक पुराने  कम्प्यूटर का प्रयोग करके और इसके बारे में  अल्प  ज्ञान  होने के  बावजूद अकेले ही    अपना  कर्तव्य  निभाने   का प्रयास  करते  रहे  . परन्तु  अचानक आर्थिक  स्थिति  ख़राब हो  जानेसे   ऐसा संभव  नहीं  हो   पा  रहा  है  ,हमें पूरा  विश्वास   है कि  कुछ उदार महानुभाव  या  कोई  हिन्दू  संस्था  हमें सहायता के लिए  आगे  जरूर  आएगी  . हम   उन सब का  हार्दिक  आभार  मानेंगे  . यदि 5 -10  व्यक्ति  मिल  कर  भी कुछ सहायता  कर देंगे  तो भी  मेरा  काम  चल जायेगा .मेरे एकाउंट  का   विवरण  इस प्रकार  है ,


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आपकी  सहायता  मेरे कार्य  के  लिए उपयोगी और मेरा उत्साहवर्धन करने  वाली  होगी , मैं  सभी का हार्दिक  आभार  मानूंगा ,

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शनिवार, 14 जून 2014

भारत मुसलमानों के लिए स्वर्ग क्यों है ?

विश्व की कुल जनसंख्या में प्रत्येक चार में से एक मुसलमान है। मुसलमानों की 60 प्रतिशत जनसंख्या एशिया में रहती है तथा विश्व की कुल मुस्लिम जनसंख्या का एक तिहाई भाग अविभाजित भारत यानी भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश
में रहता है। विश्व में 75 देशों ने स्वयं को इस्लामी देश घोषित कर रखा है। पर, विश्व में  जितने भी बड़े-बड़े मुस्लिम देश माने जाते हैं, मुस्लिमों को कहीं भी इतनी सुख-सुविधाएं या मजहबी स्वतंत्रता नहीं है जितनी कि भारत में। इसीलिए किसी ने सच ही कहा है कि 'मुसलमानों के लिए भारत बहिश्त (स्वर्ग) है।' परन्तु यह भी सत्य है कि विश्व के एकमात्र हिन्दू देश भारत में इतना भारत तथा हिन्दू विरोध कहीं भी नहीं है, जितना 'इंडिया दैट इज भारत' में है। इस विरोध में सर्वाधिक सहयोगी हैं-सेकुलर राजनीतिक स्वयंभू बुद्धिजीवी तथा कुछ चाटुकार नौकरशाह। उनकी भावना के अनुरूप तो इस देश का सही नाम 'इंडिया दैट इज मुस्लिम' होना चाहिए .क्योंकि  विश्व  में भारत  एकमात्र  ऐसा  देश  है  जहाँ केवल   जनसंख्या   के  आधार  पर   मुसलमानों  की  जायज  नाजायज  मांगें  पूरी  कर दी जाती  हैं  , भले वह  देश   को  बर्बाद  करने में  कोई  कसर  नहीं  छोड़ें  ,
1-कम्युनिस्ट देश तथा मुस्लिम
आज   जो  कम्यूनिस्ट  सेकुलरिज्म  के  बहाने  मुसलमानों     के अधिकारों  की  वकालत  करते  हैं  , उन्हें  पता होना  चाहिए  कि कम्युनिस्ट  देशों  में  मुसलमानों   की  क्या  हालत  है।
विश्व के दो प्रसिद्ध कम्युनिस्ट देशों-सोवियत संघ (वर्तमान रूस) तथा चीन में मुसलमानों की जो दुर्गति हुई वह सर्व विदित है तथा अत्यन्त भयावह है। कम्युनिस्ट देश रूस में भयंकर मुस्लिम नरसंहार तथा क्रूर अत्याचार हुए। नारा दिया गया 'मीनार नहीं, मार्क्स चाहिए।' हजारों मस्जिदों को नष्ट कर हमाम (स्नान घर) बना दिए गए। हज की यात्रा को अरब पूंजीपतियों तथा सामन्तों का धन बटोरने का तरीका बताया गया। चीन में हमेशा से उसका उत्तर-पश्चिमी भाग शिनचियांग-मुसलमानों की वधशाला बना रहा। इस वर्ष भी मुस्लिम अधिकारियों तथा विद्यार्थियों को रमजान के महीने में रोजे रखने तथा सामूहिक नमाज बढ़ने पर प्रतिबन्ध लगाया गया।

2-यूरोपीय देश तथा मुस्लिम

सामान्यत: यूरोप के सभी प्रमुख देशों-ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, आदि में मुसलमानों के अनेक सामाजिक रीति-रिवाजों पर प्रतिबंध है। प्राय: सभी यूरोपीय देशों में मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने तथा मीनारों के निर्माण तथा उस पर लाउडस्पीकर लगाने पर प्रतिबंध है। बिट्रेन में इंडियन मुजहीद्दीन सहित 47 मुस्लिम आतंकवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगा हुआ है। ब्रिटेन का कथन है कि ये संगठन इस्लामी राज्य स्थापित करने और शरीयत कानून को लागू करने का अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए हिंसा का प्रयोग करते हैं। जर्मनी में भी बुर्के पर पाबन्दी है। जर्मनी के एक न्यायालय ने मुस्लिम बच्चों के खतना (सुन्नत) को 'मजहबी अत्याचार' कहकर प्रतिबंध लगा दिया है तथा जो डाक्टर उसमें सहायक होगा, उसे अपराधी माना जाएगा। जर्मनी के कोलोन शहर की अदालत ने बुधवार को सुनाए गए एक फैसले में कहा कि धार्मिक आधार पर शिशुओं का खतना करना उनके शरीर को कष्टकारी नुकसान पहुंचाने के बराबर है.और प्राकृतिक नियमों में हस्तक्षेप है
जर्मनी में मुस्लिम समुदाय इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं और वे इस बारे में कानूनविदों से मशविरा कर रहे हैं.
आशा है विश्व के सारे देश जल्द ही जर्मनी का अनुसरण करने लगेंगे.इसी  तरह फ्रांस विश्व का पहला यूरोपीय देश था जिसने पर्दे (बुर्के) पर प्रतिबंध लगाया।

3-मुस्लिम देशों में मुसलमानों की   हालत 
विश्व के बड़े मुस्लिम देशों में भी मुसलमानों के मजहबी तथा सामाजिक कृत्यों पर अनेक प्रकार के प्रतिबंध है। तुर्की में खिलाफत आन्दोलन के बाद से ही रूढ़िवादी तथा अरबपरस्त मुल्ला- मौलवियों की दुर्गति होती रही है। तुर्की में कुरान को अरबी भाषा में पढ़ने पर प्रतिबंध है। कुरान का सार्वजनिक वाचन तुर्की भाषा में होता है। शिक्षा में मुल्ला-मौलवियों का कोई दखल नहीं है। न्यायालयों में तुर्की शासन के नियम सर्वोपरि हैं। रूढ़िवादियों की सोच तथा अनेक पुरानी मस्जिदों पर ताले डाल दिए गए हैं। (पेरेवीज, 'द मिडिल ईस्ट टुडे' पृ. 161-190; तथा ऐ एम चिरगीव -इस्लाम इन फरमेन्ट, कन्टम्परेरी रिव्यू, (1927)। ईरान व इराक में शिया-सुन्नी के खूनी झगड़े-जग जाहिर हैं। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने भी यह स्वीकार किया है कि यहां मुसलमान भी सुरक्षित नहीं हैं। यहां मुसलमान परस्पर एक-दूसरे से लड़ते रहते हैं। उदाहरण के लिए जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान ने अहमदिया सम्प्रदाय के हजारों लोगों को मार दिया। इसके साथ हिन्दुओं के प्रति उनका क्रूर व्यवहार, जबरन मतान्तरण, पवित्र स्थलों को अपवित्र करना, हिन्दू को कोई उच्च स्थान न देना आदि भी जारी है। उनकी क्रूरता के कारण पाकिस्तानी हिन्दू वहां से जान बचाकर भारत आ रहे हैं। वहां हिन्दुओं की जनसंख्या घटकर केवल एक प्रतिशत के लगभग रह गई है। हिन्दुओं की यही हालत 1971 में बने बंगलादेश में भी है। वहां भी उनकी जनसंख्या 14 प्रतिशत से घटकर केवल 1 प्रतिशत रह गई है। साथ ही बंगलादेशी मुसलमान भी लाखों की संख्या में घुसपैठियों के रूप में जबरदस्ती असम में घुस रहे हैं।
अफगानिस्तान की अनेक घटनाओं से ज्ञात होता है जहां उन्होंने हिन्दुओं तथा बौद्धों के अनेक स्थानों को नष्ट किया, वहीं जुनूनी मुस्लिम कानूनों के अन्तर्गत मुस्लिम महिलाओं को भी नहीं बख्शा, नादिरशाही फतवे जारी किए। मंगोलिया में यह प्रश्न विवादास्पद बना रहा कि यदि अल्लाह सभी स्थानों पर है तो हज जाने की क्या आवश्यकता है? सऊदी अरब में मुस्लिम महिलाओं के लिए कार चलाना अथवा बिना पुरुष साथी के बाहर निकलना मना है। पर यह भी सत्य है कि किसी व्यवधान अथवा सड़क के सीध में न होने की स्थिति में मस्जिद को हटाना उनके लिए कोई मुश्किल नहीं है।
4-भारत में मुस्लिम तुष्टीकरण
अंग्रेजों ने भारत विभाजन कर, राजसत्ता का हस्तांतरण कर उसे कांग्रेस को सौंपा। साथ ही इन अलगाव विशेषज्ञों ने, अपनी मनोवृत्ति भी कांग्रेस का विरासत के रूप में सौंप दी। अंग्रेजों ने जो हिन्दू-मुस्लिम अलगाव कर तुष्टीकरण की नीति अपनाई थी, वैसे ही कांग्रेस ने वोट बैंक की चुनावी राजनीति में इस अलगाव को अपना हथियार बनाया। उसने मुस्लिम तुष्टीकरण में निर्लज्जता की सभी हदें पार कर दीं। यद्यपि संविधान में 'अल्पसंख्यक' की कोई निश्चित परिभाषा नहीं दी गई हैं, परन्तु व्यावहारिक रूप से चुनावी राजनीति को ध्यान में रखते हुए मुसलमानों को अल्पसंख्यक मान लिया गया तथा उन्हें खुश करने के लिए उनकी झोली में अनेक सुविधाएं डाल दीं। उनके लिए एक अलग मंत्रालय, 15 सूत्री कार्यक्रम व बजट में विशेष सुविधाएं, आरक्षण, हज यात्रा पर आयकर में छूट तथा सब्सिडी आदि। सच्चर कमेटी तथा रंगनाथ आयोग की सिफारिशों ने इन्हें प्रोत्साहन दिया।  भारतीय संविधान की चिन्ता न कर, न्यायालय के प्रतिरोध के बाद भी, मजहबी आधार पर आरक्षण के सन्दर्भ में कांग्रेस के नेता वक्तव्य देते रहते हैं।
5-हज  सब्सिडी  में  घोटाले 
विश्व में मुस्लिम देशों में हज यात्रा के लिए कोई विशेष सुविधा नहीं है। बल्कि मुस्लिम विद्वानों ने हज यात्रा के लिए दूसरे से धन या सरकारी चंदा लेना गुनाह बतलाया है। पर कांग्रेस शासन में 1959 में बनी पहली हज कमेटी के साथ ही सिलसिला शुरू हुआ हज में सुविधाओं का। सरकारी पूंजी का खूब दुरुपयोग हुआ। हज घोटालों के लिए कई जांच आयोग भी बैठे। हज सद्भावना शिष्ट मण्डल, हज में भी 'वी.आई.पी. कोटा' आदि की सूची बनने लगी। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के बाद जम्मू-कश्मीर के अब्दुल रसीद ने सरकार द्वारा सदभावना शिष्टमण्डल के सदस्यों के चयन पर प्रश्न खड़ा किया। क्योंकि उसमें 170 हज यात्रियों के नाम बदले हुए पाए गए। आखिर सर्वोच्च न्यायालय ने दखल दिया तथा 'अति विशिष्टों की' संख्या घटाकर 2500 से केवल 300 कर दी।
सामान्यत: प्रत्येक हज यात्री पर सरकार का लगभग एक लाख रु. खर्च होता है, परन्तु सरकारी प्रतिनिधियों पर आठ से अट्ठारह लाख रु. खर्च कर दिए जाते हैं। गत वर्ष राष्ट्रीय हज कमेटी ने यात्रियों को कुछ कुछ अन्य सुविधाएं प्रदान की, जिसमें 70 वर्ष के आयु से अधिक के आवेदक व्यक्तियों के लिए निश्चित यात्रा, चुने गए आवेदकों को आठ महीने रहने का परमिट तथा हज यात्रा पर जाने वाले यात्री के लिए पुलिस द्वारा सत्यापन में रियायत दी गई। इसके विपरीत श्रीनगर से 135 किलोमीटर की कठिन अमरनाथ यात्रा के लिए, जिसमें इस वर्ष 6 लाख 20 हजार यात्री गए, और आने-जाने के 31 दिन में 130 श्रद्धालु मारे गए, जिनके शोक में एक भी आंसू नहीं बहाया गया।
6-भारत   का  इस्लामीकरण 
असम में बंगलादेश के लाखों मुस्लिम घुसपैठियों के प्रति सरकार की उदार नीति, कश्मीर में तीन वार्ताकारों की रपट पर लीपा-पोती, मुम्बई में 50,000 मुस्लिम दंगाइयों द्वारा अमर जवान ज्योति या कहें कि राष्ट्र के अपमान पर कांग्रेस राज्य सरकार और केन्द्र की सोनिया सरकार की चुप्पी तथा दिल्ली के सुभाष पार्क में अचानक उग आयी अकबराबादी मस्जिद के निर्माण को न्यायालय द्वारा गिराने के आदेश पर भी सरकारी निष्क्रियता, क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है कि गत अप्रैल में भारत के तथाकथित सेकुलरवादियों ने हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में गोमांस भक्षण उत्सव मनाया तथा उसकी पुनरावृत्ति का प्रयास दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में किया गया? मांग की गई थी कि छात्रावासों में गोमांस भक्षण की सुविधा होनी चाहिए। पर सरकार न केवल उदासीन बनी रही बल्कि जिन्होंने इसका विरोध किया, उनके ही विरुद्ध डंडा चलाया गया। इस विश्लेषण के बाद गंभीर प्रश्न यह है कि कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टीकरण अथवा वोट बैंक को खुश करने की इस नीति से मुस्लिम समाज का अरबीकरण हो रहा है या भारतीयकरण? क्या इससे वे भारत की मुख्य धारा से जुड़ रहे हैं या अलगावादी मांगों के पोषण से राष्ट्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन रहे हैं? क्या चुनावी वोट बैंक की राजनीति, राष्ट्रहित से भी ऊपर है? देश के युवा विशेषकर पढ़े-लिखे  युवकों को इस पर गंभीरत से विचार करना होगा, ताकि  समाज की उन्नति के साथ राष्ट्र निर्माण में उनका सक्रिय सहयोग हो सके।

रविवार, 8 जून 2014

धारा 370 नेहरू का षडयंत्र है !

हिन्दू  मान्यता और पुराणों  के  अनुसार    कैलाश (कश्मीर )  और काशी ( बनारस )को  भगवान  शंकर  का  निवास  माना जाता है  . और इनको  इतना  पवित्र माना  गया है  कि  कुछ फारसी  के  मुस्लिम  शायरों  ने भी कश्मीर  और  बनारस को   धरती  का स्वर्ग  भी  कह  दिया  है  , यहाँ तक   कि  बनारस को भारत का  दूसरा  काबा  भी  बता  दिया  है  , जैसा कि इन पंक्तियों  में   कहा गया  है ,

"अगर फ़िरदौस  बर  रूए ज़मीनस्त - हमींनस्तो ,हमींनस्तो हमींनस्त "
अर्थ -यदि पृथ्वी  पर कहीं स्वर्ग  है , तो  वह यहीं  है  यहीं  है  और  यहीं  पर  है  . 

"ता अल्लाह बनारस  चश्मे  बद्दूर ,इबादत खानये नाकूसियानस्त ,
बर  रूए  ज़मीं फ़िरदौस मामूर , हमाना  काबाये  हिन्दोस्तानस्त "
अर्थ -अल्लाह  बनारस   को  बुरी  नजर  से बचाये  , जो शंख  बजाने  वाले (हिन्दुओं )  का पवित्र  नगर  है  , और  पृथ्वी  पर  स्वर्ग  की तरह प्रकाशमान   है  , यहाँ तक कि  हिंदुस्तान   का  काबा  है   .
इन  पंक्तियों   से  हम समझ  सकते हैं  कि  भारतीय लोगों  के दिलों  में कश्मीर  और काशी  के प्रति  कितना  लगाव  है  , लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि हमारी  उदासीनता  के कारण  बनारस और   नेहरू   के  कारण  कश्मीर  प्रदूषित    हो  गया  है , प्रधान  मंत्री  नरेंद्र मोदी ने  इन  दोनो  की  सफाई  का  बीड़ा  उठा   लिया  है  .  यह हमारे लिए सौभाग्य  और  हर्ष  का  विषय  है
आज एक बार फिर से राजनीति गलियारे में धारा 370 को लेकर बहस छिड़ गयी है। कोई इसके पक्ष में है तो किसी के पास इसका विरोध करने के पर्याप्त आधार है। किसी को लगता है कि संविधान की इस धारा में संशोधन होना चाहिए तो किसी को यह बहस का मुद्दा लगता है। लेकिन हम से काफी लोगों को पता ही नहीं कि धारा 370 है क्या जो समय-समय पर लोगों की बहस और विरोध का कारण बन जाती है जिसके चलते धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर को लेकर लोगों के बीच झगड़े होने लगते हैं। आईये आपको बताते हैं कि धारा 370 है क्या? जो देश के विशेष राज्य कश्मीर में लागू है।
 1-कश्मीर  का  मतलब   क्या  है  ?
 जहाँ  तक  हम  कश्मीर  की  बात  करते  हैं  ,तो उसका  तात्पर्य  सम्पूर्ण  कश्मीर    होता  है  ,जिसमे कश्मीर घाटी , जम्मू , पाक अधिकृत  कश्मीर  का भाग (   ) चीन  अधिकृत   सियाचिन  का  हिस्सा और लद्दाख  भी  शामिल  है  . भले ही  हम  ऐसे  कश्मीर  को भारत का अटूट  अंग  कहते  रहें  लेकिन नेहरू  के दवाब  में  बनायीं  गई  संविधान  की  धारा 370  के प्रावधान के अनुसार कोई भी समझदार  व्यक्ति  कश्मीर  को भारत का अंग नहीं  मान  सकता  , इसलिए  जब  जब  धारा 370  को  हटाने  की  बात  की  जाती  है तो कांग्रेसी  और  सेकुलर  इसके खिलाफ  खड़े  हो  जाते  हैं ,उदहारण  के  लिए जब 27 मई 2014 मंगलवार को मोदी  सरकार के राज्य मंत्री  जितेंद्र सिंह  ने   धारा 370  को  देश  की एकता  और अखंडता के लिए हानिकरक  बताया  तो  तुरंत ही  शेख  अब्दुल्लाह  के  नाती  उमर अब्दुलाह  इतने  भड़क  गए कि यहाँ  तक  कह  दिया  " यातो धारा 370 रहेगी  या  कश्मीर  रहेगा " उमर के  इस  कथन  का रहस्य  समझने  के  लिए  हमें नेहरू और शेख अब्दुलाह  के रिश्तों  के  बारे में  जानकारी  लेना  जरुरी  है  .
वास्तव  में  नेहरू  न  तो कश्मीरी  पंडित  था  और न  हिन्दू  था  , इसके प्रमाण  इस  बातसे  मिलते  हैं  की  कश्मीरी  पंडितों  ने  नेहरू  गोत्र  नहीं  मिलता  .  और नेहरू  ने  जीवन  भर  कभी कश्मीरी भाषा  या  संस्कृत  का एक  वाक्य  नहीं  बोला , नेहरू सिर्फ  उर्दू और अंगरेजी  बोलता  था  . और  और उसके हिन्दू विरोधी होनेका कारण  यह है   कि नेहरू एक  मुसलमान गाजीउद्दीन  का  वंशज  था  . और  शेख अब्दुलाह  मोतीलाल  की  एक मुस्लिम रखैल  की  औलाद  था  . अर्थात  जवाहर लाल  नेहरू  और शेख अब्दुलाह  सौतेले  भाई  थे  . इसी लिए  जब  संविधान  में  कश्मीर  के  बारे में लिखा जा रहा था  तो  नेहरू ने शेख अब्दुलाह को तत्कालीन  कानून  मंत्री  बाबा  साहब  अम्बेडकर  के  पास  भेजा  था   ,
2-धारा 370 क्या  है ?

धारा 370  भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद (धारा) है जिसे अंग्रेजी में आर्टिकल 370 कहा जाता है। इस धारा के कारण ही जम्मू एवं कश्मीर राज्य को सम्पूर्ण भारत में अन्य राज्यों के मुकाबले विशेष अधिकार अथवा (विशेष दर्ज़ा) प्राप्त है। देश को आज़ादी मिलने के बाद से लेकर अब तक यह धारा भारतीय राजनीति में बहुत विवादित रही है। भारतीय जनता पार्टी एवं कई राष्ट्रवादी दल इसे जम्मू एवं कश्मीर में व्याप्त अलगाववाद के लिये जिम्मेदार मानते हैं तथा इसे समाप्त करने की माँग करते रहे हैं। भारतीय संविधान में अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध सम्बन्धी भाग 21 का अनुच्छेद 370 जवाहरलाल नेहरू के विशेष हस्तक्षेप से तैयार किया गया था। स्वतन्त्र भारत के लिये कश्मीर का मुद्दा आज तक समस्या बना हुआ है

3-कश्मीर के  मामले में संविधान भी  लाचार  

जो  लोग संविधान  को सर्वोपरि बताते  हैं ,  और  बात बात  पर संविधान  की दुहाई  देते  रहते  हैं  , उन्हें पता  होना चाहिए की उसी  संविधान  की धारा  370  ने कश्मीर  के  मामले में संविधान  को लचार  और बेसहाय  बना  दिया  है , उदाहरण   के  लिए  ,

धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित क़ानून को लागू करवाने के लिये केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिये।
इसी विशेष दर्ज़े के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती
इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्ख़ास्त करने का अधिकार नहीं है।
1976 का शहरी भूमि क़ानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता।
इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि ख़रीदने का अधिकार है। यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते।
भारतीय संविधान की धारा 360 जिसमें देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती।
जम्मू और कश्मीर का भारत में विलय करना ज़्यादा बड़ी ज़रूरत थी और इस काम को अंजाम देने के लिये धारा 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार कश्मीर की जनता को उस समय दिये गये थे।
4-धारा  370  में राष्ट्रविरोधी  प्रावधान 

1. जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है । 2. जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग होता है । 3. जम्मू - कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है जबकी भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है । 4. जम्मू-कश्मीर के अन्दर भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं होता है । 5. भारत के उच्चतम न्यायलय के आदेश जम्मू - कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं । 6. भारत की संसद को जम्मू - कश्मीर के सम्बन्ध में अत्यंत सीमित क्षेत्र में कानून बना सकती है । 7. जम्मू कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जायेगी । इसके विपरीत यदि वह पकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू - कश्मीर की नागरिकता मिल जायेगी । 8. धारा 370 की वजह से कश्मीर में RTI लागु नहीं है । RTE लागू नहीं है । CAG लागू नहीं होता  ।कश्मीर  पर    भारत का कोई भी कानून लागु नहीं होता । 9. कश्मीर में महिलाओं  पर शरियत कानून लागु है । 10. कश्मीर में पंचायत के अधिकार नहीं । 11. कश्मीर में चपरासी को 2500 ही मिलते है । 12. कश्मीर में अल्पसंख्यको [ हिन्दू- सिख ] को 16 % आरक्षण नहीं मिलता । 13. धारा 370 की वजह से कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते है । 14. धारा 370 की वजह से ही पाकिस्तानियो को भी भारतीय नागरीकता मिल जाता है

5-अम्बेडकर  धारा  370  के  खिलाफ  थे 

बड़े  दःख की  बातहै कि  आज भी अधिकांश  लोग  यही  मानते  हैं  कि डाक्टर अम्बेडकर ने  ही  संविधान  की  धारा 370  का  मसौदा  तैयार किया  था  . अम्बेडकर ने खुद अपने  संसमरण   में इसका खंडन  किया  है  ,  वह  लिखते हैं   कि  जब सन 1949  में  संविधान   की धाराओं  का ड्राफ्ट  तैयार   हो रहा था  , तब  शेख अब्दुल्लाह  मेरे  पास आये  और बोले  कि  नेहरू  ने मुझे आपके  पास  यह  कह  कर भेजा  हैं   कि  आप  अम्बेडकर  से  कश्मीर  के बारे में अपनी  इच्छा  के अनुसार ऐसा ड्राफ्ट  बनवा  लीजिये  , जिसे  संविधान  में  जोड़ा  जा  सके  . अम्बेडकर  कहते  हैं  कि  मैंने  शेख  की बातें  ध्यान  से सुनी   और  उन से कहा  कि एक तरफ  तो आप चाहते  हो कि  भारत  कश्मीर  की रक्षा  करे  , कश्मीरियों  को खिलाये पिलाये , उनके विकास  और उन्नति के लिए प्रयास करे ,और  कश्मीरियों  को  भारत  के सभी प्रांतों  में  सुविधाये  और अधिकार  दिए  जाएँ  , लेकिन भारत के अन्य प्रांतों  के लोगों  को  कश्मीर में वैसी ही सुविधाओं  और अधिकारों  से वंचित  रखा  जाये  .  आपकी  बातों  से ऐसा प्रतीत  होता  है  कि आप भारत के  अन्य  प्रांतों  के लोगों को  कश्मीर  में समान  अधिकार  देने के  खिलाफ  हो  , यह  कह  कर  अम्बेडकर  ने  शेख   से कहा  मैं  कानून  मंत्री  हूँ  , मैं  देश  के  साथ  गद्दारी नहीं  कर  सकता  ( "I am (the) Law Minister of India, I cannot betray my country.” )  अम्बेडकर के यह शब्द  स्वर्णिम  अक्षरों   में  लिखने के  योग्य  हैं   .  यह  कह कर  अम्बेडकर  ने शेख अब्दुलाह  को  नेहरू  के  पास  वापिस लौटा  दिया , अर्थात  शेख अब्दुलाह   के ड्राफ्ट  को संविधान  में जोड़ने से  साफ  मन कर दिया  था  ,

6- नेहरू   का  देश  के साथ विश्वासघात 
  
जब  अम्बेडकर ने शेख अब्दुल्लाह  से संविधान  में  उसके अनुसार ड्राफ्ट जोड़ने  से  यह  कह कर  साफ  मना  कर दिया  कि  मैं  देश  के साथ  विश्वासघात  नहीं  कर  सकता  . तो  शेख नेहरू  के  पास गया , तब  नेहरू  ने गोपाल स्वामी अय्यंगार को  बुलवाया   जो संविधान  समिति  का  सदस्य  और   कश्मीर के  राजा  हरीसिंह    का   दीवान  रह  चूका   था  . नेहरू  ने उसे  आदेश  दिया  कि शेख  साहब  कश्मीर  के बारे में जोभी  चाहते  हैं  ,संविधान   की धारा  370  में  वैसा ही ड्राफ्ट  बना  दो  , आज  संविधान  की  धारा 370  में  कश्मीर के मुसलमानों   को जो अधिकार  दिए  गए  हैं वह  नेहरू  ने लिखवाये  थे  .
 इस घटना  से सिद्ध  होता  है कि नेहरू   ने  देश  के साथ  विश्वासघात   किया  था  , जिसका  दुष्परिणाम  देश  वासी  आज भी  भोग  रहे  हैं  .

चूँकि धारा 370 में कश्मीर  में शरीयत  का कानून लागू  है  ,इसलिये  जब  भी धारा  370  के  बारे में  बहस  होती  है तो उसके साथ ही जब  अम्बेडकर ने शेख अब्दुल्लाह  से संविधान  में  उसके अनुसार ड्राफ्ट जोड़ने  से  यह  कह कर  साफ  मना  कर दिया  कि  मैं  देश  के साथ  विश्वासघात  नहीं  कर  सकता  . तो  शेख नेहरू  के  पास गया , तब  नेहरू  ने गोपाल स्वामी अय्यंगार को  बुलवाया   जो संविधान  समिति  का  सदस्य  और   कश्मीर के  राजा  हरीसिंह    का   दीवान  रह  चूका   था  . नेहरू  ने उसे  आदेश  दिया  कि शेख  साहब  कश्मीर  के बारे में जोभी  चाहते  हैं  ,संविधान   की धारा  370  में  वैसा ही ड्राफ्ट  बना  दो  , आज  संविधान  की  धारा 370  में  कश्मीर के मुसलमानों   को जो अधिकार  दिए  गए  हैं वह  नेहरू  ने लिखवाये  थे  .
 इस घटना  से सिद्ध  होता  है कि नेहरू   ने  देश  के साथ  विश्वासघात   किया  था  , जिसका  दुष्परिणाम  देश  वासी  आज भी  भोग  रहे  हैं  .

चूँकि धारा 370 में कश्मीर  में शरीयत  का कानून लागू  है  ,इसलिये  जब  भी धारा  370  के  बारे में  बहस  होती  है तो उसके साथ ही समान  नागरिक  संहिता की  बात  जरूर  उठती  है  . की  बात  जरूर  उठती  है  .
इसलिए हमारा प्रधान मंत्री  महोदय  से  करबद्ध  निवेदन  है  कि  वह  काशी  को प्रदुषण मुक्त  बनाने का  अभियान चला  रहे हैं  उसी तरह  कश्मीर  से धारा 370 रूपी  प्रदुषण   हटाने  की कृपा  करें  , तभी  कश्मीर  वास्तव   में भारत  का अटूट  अंग  माना   जा  सकेगा  , साथ  में यह भी  अनुरोध  है कि  कश्मीरी  भाषा को  उर्दू  लिपि  की  जगह  शारदा लिपि  में लेखे  जाने  का आदेश  देने  की कृपा   करें  ,  इस से  कश्मीर की  प्राचीन  संस्कृति  बची  रहेगी  , उर्दू लिपी  से  कश्मीर  का  पाकिस्तान  का  छोटा  भाई  लगता  है  .

इसके  अतिरिक्त  मुगलों  ने  भारत  के जितने  भी  प्राचीन  नगरों  के  नाम  बदल  दिए थे , उनके  फिर से  नाम  रखवाने  का आदेश  निकलवाने की अनुकम्पा  करें ,  जैसे  इलाहबाद  का प्रयाग  , फैजाबाद  का अयोध्या  ,  अकबराबाद   का  आगरा  ,  अहमदाबाद  का  कर्णावती  , इत्यादि

: http://indiatoday.intoday.in/story/article-370-issue-omar-abdullah-jammu-and-kashmir-jawaharlal-nehru/1/364053.html

http://hindi.oneindia.in/news/india/know-about-370-act-jammu-kashmir-275770.html