सोमवार, 28 जुलाई 2014

सुन लो कि अल्लाह अनेक हैं !

ईश्वर एक  है ,सभी  हिन्दू  इस  बातको  मानते  आये  हैं  ,इसका प्रमाण  यह है  कि इस अटल  सत्य को  लोगों मनवाने के लिए  हिन्दुओं  ने न तो किसी पर  कोई  दवाब डाला  और न किसी   तरह  की जिहाद का  सहारा  लिया  है  , लेकिन आज तक किसी ने इस  बात पर गौर नहीं  किया ,कि मुसलमानों ने सिर्फ इसबात को  मनवाने के लिए  जिहाद  करके  लाखों लोगों  को मार दिया कि "अल्लाह एक है  " और अगर वाकई  एक है  ,तो दुनिया भर में आतंक फ़ैलाने की जरुरत क्यों  पड़  गयी  . ?
क्योंकि  वास्तव  में  अल्लाह  एक  नहीं बल्कि कई लोगों  का  गिरोह  है  , इसका  प्रमाण   कुरान  की उन  आयतों  से मिलता है  , जिन में मुसलमानों  का अल्लाह   खुद के लिए बहुवचन ( plural )   का  प्रयोग  करता  है  , और  मैं  की  जगह हम ( We-Us  )   कहता  है   .
इसलिए अधिकांश  मुस्लिम  विद्वान  जब  जब कृषि भाषा  में कुरान  का अनुवाद  अनुवाद  करते हैं  ,तो इस बात  को  छुपा कर गलत अनुवाद करते हैं , इसको  समझने के लिए  हैं   हमें थोड़ी  सी अरबी  व्याकरण   जानना   जरुरी  है  .
1 -अरबी  में सर्वनाम  और क्रिया  के  वचन 
अरबी की  व्याकरण  कुछ  कुछ  संस्कृत  की  तरह  है  , इसमे " सर्वनाम ( Pronoun )को  "जमीर - الضمير    "  कहा  जाता  है   . जिसके  बहुवचन  को " सीगह  अल  जमा  -  صيغة الجمع "  कहते  हैं     . और  एक  वचन  को " वाहिद -  سيغة الواحد  "  कहते  हैं  .जैसे एक वचन  हिंदी शब्द  " मैं ( I ) को अरबी  में " अना - انا "  कहते  हैं  . जिसका बहुवचन  हिंदी  में  "हम (We )   है  . और  अरबी में इसे " नहनु - نحنُ "  कहा जाता  है  . इसी  प्रकार " क्रिया ( verb )  को अरबी  में  " फअल -   فعل " कहते  हैं  . इसके भी  एक वचन ( singular )  द्विवचन (dual )  और  बहुवचन ( Plural )  होते  हैं  . और  जब  भी  क्रिया ( Verb ) Plurl Imperfact Tense में  पायी  जाती  है  , तो अरबी  में क्रिया  के आगे " ना - نا " लगा  दिया  जाता  है  .  यही  क्रिया  के  बहुवचन  होने की निशानी  है  . उदाहरण   के  लिए  अरबी  क्रिया " क  त  ब  ك +ت+ب  "का  प्रथम पुरुष  बहुवचन "  हमने  लिखा  ( We wrote )     का अरबी में  होगा  "  कतबना - كتبنا "
अब   हम  नमूने  के लिए  कुरान   की  कुछ  ऐसी  आयतें  दे रहे हैं   जिनमे   अल्लाह    ने एक वचन  सर्वनाम   " मैं  और मैंने  "  की  जगह  बहुवचन  " हम  और  हमने    " शब्द   का  प्रयोग  किया  है   . जो  व्याकरण  के  अनुसार  बहुवचन  है  , और अनेक लोगों  के लिए  प्रयुक्त  होता  है  .

1-सर्वनाम  में  बहुवचन 

बेशक  यह कुरान हम ने ही उतारी है  , और हम ही इसके रक्षक  हैं " सूरा अल हिज्र 15:9

إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ  "


“Lo!  We, reveal the Quran, and lo! We verily are its Guardian.” (Al-Hijr15: 9)

(1st person plural personal pronoun)

फिर हमें  उन  से हिसाब  लेना   है  "सूरा -अल गाशिया 88:26
"ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا حِسَابَهُم

Then indeed, upon Us is their account. [88:26]

(1st  person plural  object pronoun)


2-क्रिया  में  बहुवचन 

"हमने  तुम्हें सारे संसार के लिए दयालुता  बना कर  भेजा है " सूरा अम्बिया 21:107

"وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا رَحْمَةً لِلْعَالَمِينَ  "

"We sent thee not save as a mercy for the peoples"21:107

(1st person plural (form IV) perfect verb)

"हम अपने रसूलों और  मुसलमानों की सहायता  करते  हैं "सूरा -मोमिन 40 :51

"إِنَّا لَنَنْصُرُ رُسُلَنَا وَالَّذِينَ آمَنُوا  "


“We verily do help Our Messengers, and those who believe" Al momin 40: 51)


, (1st person plural imperfect verb)


"हमने  तुमसे पहले भी रसूल भेजे,और यही  कहा  कि मेरे सिवा  कोई पूज्य  नहीं  है , तो तुम  हमारी  ही इबादत करो "

सूरा अल अम्बिया 21:25

"وَمَا أَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ مِنْ رَسُولٍ إِلَّا نُوحِي إِلَيْهِ أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاعْبُدُونِ  "21:25


“And We sent not before you any messenger except that We revealed to him that, “There is no deity except Me, so worship Me.”
(Qur’an, 21:25)

(1st person plural (form IV) perfect )

3-सर्वनाम और क्रिया में  बहुवचन 

हमने मनुष्य  को बनाया  और  हम  जानते हैं कि  उसके  मन में क्या  है और हम  उसकी  धमनी  के पास हैं  " सूरा -काफ 50:16

وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ وَنَعْلَمُ مَا تُوَسْوِسُ بِهِ نَفْسُهُ ۖ وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنْ حَبْلِ الْوَرِيدِ

And We have already created man and know what his soul whispers to him," Surat Qāf 50:16)

(1st person plural perfect verb ) And(1st person plural personal pronoun)

अब  सवाल यह उठता  है  कि  जब खुद  अल्लाह की  किताब  कुरान  ही अनेक  अल्लाह  होने की पुष्टि  कर  रही   है  , तो  मुहम्मद  साहब  लोगों  पर एक ही  अल्लाह होने  या मानने पर  दवाब  क्यों  डालते थे  ? इसका  जवाब  कुरान  और  हदीस  से मिलता  है इसके कई   कारण  हैं ,
1-पहला  कारण -लोग   मुहम्मद  साहब  को पागल  कवि  मानते थे  ,  जैसा कि  कुरान  में  कहा  है  .
"लोग कहते हैं   कि क्या  हम एक उन्मादी कवि  के  लिए अपने देवताओं  को को छोड़  दें ?  सूरा -अस साफ्फात 37:36
"लोग  कहते हैं  कि यह (कुरान )  स्वप्न  है  , इसने इसे खुद  बना लिया  है  . यह एक कवि  है   . इसे चाहिए की यह हमारे सामने कोई  सबूत दिखाए  "
सूरा -अल अम्बिया  21 :5
4-मुहम्मद  साहब  की  चालाकी 
जब  मक्का  के लोग   मुहम्मद  साहब  को पागल  कवि   होने  का आरोप  लगा कर कहने लगे कि कुरान  अलाह की किताब  नहीं  ,खुद मुहम्मद की  रचना है  , तब कुरान को अल्लाह की किताब  साबित करने के लिए  मुहमद  साहब ने  अनपढ़  होने का नाटक   रचाया   ,  , कुरान में कहा  कि ,
"जो लोग उस उम्मी नबी  के पीछे चलते हैं जो न  लिख  सकता है  ,और न  पढ़  सकता  है  इसलिए  अल्लाह और  उसकी  किताब पर ईमान  रखो  "सूरा  -अल आराफ 7:157

"हे  नबी  इस से पहले तुम कोई  किताब  नहीं  पढ़ते थे  और  न  हाथ  से लिखते थे  , नहीं  तो शंका  करने वाले तुम्हें  झूठ पकड़ लेते "
सूरा  -अनकबूत 29:48

5-मुहम्मद के  झूठ  का  भंडाफोड़ 
मुहमद  साहब के अनपढ़  होने के झूठ  की पोल हदीस  ने खोल  दी  है  , वास्तव  में  मुहम्मद  और उनके साथी मिल कर  कुरान  की आयतें   लिखते थे ,हदीस  में कहा है  ,
सईदुल खुदरी  ने कहा कि रसूल ने कहा ,कि तुम मुझ  से कुरान के अलावा  कुछ  भी लिखवा लो ,और यदि लिख भी लो तो उसे मिटा  ( delete) देना "

"The prophet said: "Do not write down anything from me except the Quran. Whoever wrote other than that should delete it."

  "‏ لاَ تَكْتُبُوا عَنِّي وَمَنْ كَتَبَ عَنِّي غَيْرَ الْقُرْآنِ فَلْيَمْحُهُ وَحَدِّثُوا    "


सही मुस्लिम -किताब 42 हदीस 7147

2-दूसरा  कारण -  मुहम्मद साहब  द्वारा  लोगों  एक  ही अल्लाह को  मानने पर  जोर  देने के पीछे खुद को अल्लाह  का इकलौता   रसूल  साबित करना था , यहाँ तक  वह  खुद  को अल्लाह  के बराबर  बताने  लगे  ,  कुरान  में कहा है  ,
जो लोग अल्लाह और उसके रसूल  को दुःख  देते हैं  ,उनपर दुनिया और आख़िरत में लानत और यातना तैयार  रखी है  "सूरा - अहजाब 33:57

"إِنَّ الَّذِينَ يُؤْذُونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ لَعَنَهُمُ اللَّهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ  "


.   "those who malign Allah and His messenger, Allah hath cursed them in this world and  hearafter"'Qur)an (33:57

इसका  साफ  मतलब   है कि  मुहम्मद को  दुःख  देना  अल्लाह को दुःख  देने  के समान   है
6-अल्लाह  एक  शरीरधारी  व्यक्ति 

कुरान  में कहा  है  ,यदि अल्लाह  के पुत्र  होता ,  इसका साफ  मतलब  है कि अल्लाह  कोई व्यक्ति  रहा होगा   , यह  आयत देखिये  ,
हे नबी  कह दो  अगर अल्लाह  का बेटा होता तो  मैं उसकी  सबसे पहले  इबादत  करने वाला होता " सूरा जुखुरुफ़ 43:81

"قُلْ إِنْ كَانَ لِلرَّحْمَٰنِ وَلَدٌ فَأَنَا أَوَّلُ الْعَابِدِينَ  "

"If the Most Gracious had a son, I would be the first to worship him!"43:81

3-तीसरा कारण-मुसलमान  जब भी  अल्लाह  के एक  होने  की  बात  करते हैं  तो   कुरान  की इस  आयत का हवाला   देते हैं  ,
" कह  दो कि  वह  अल्लाह  एक है   "कुल हुव अल्लाह  अहद -  قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ "सूरा इख़लास  112 :1
ध्यान  करने की  बात है कि  इस  आयत  में  तथाकथित  अल्लाह  मुहम्मद  साहब   को निर्देश  दे रहा कि  तुम  लोगों  से कह दो  कि  अल्लाह  एक  है .इसलिए मुहम्मद  साहब से  कहलवाने  की  जगह खुद  अल्लाह  को यह कह  देना  चाहिए  था  कि "  मैं एक अल्लाह  हूँ " ( I am  one Allah )अरबी  में "अना वाहिद अल्लाह - أنا واحد الله "हमें  इस बात पर  गौर  करना  चाहिए   अल्लाह  की  गवाही क्यों  चाहिए  ?

7-एक अल्लाहवाद   की  असलियत

इस्लामी  परिभाषा  में  अल्लाह  के  एकत्व ( monotheism )  को  "तौहीद - توحيد "  कहा   जाता   है  ,  इसका उद्देश्य  लोगों  को  एक ही  अल्लाह  की इबादत करना है  , जबकि   मुसलमानों  के अल्लाह में  ,मुहम्मद  , उनका  भाई अली,पत्नी  आयशा  , मुहम्मद  साहब के ससुर  और  साथी   सभी शामिल  हैं    , वास्तव में  मुसलमान  एक अल्लाह  के  बहाने  दुनियां   पर  एक  ही हुकूमत  स्थापित  करना     चाहते  हैं  , जिस   एक ही  शरीयत का कानून  चले. लेकिन  जैसे   मुहम्मद  साहब  के समय  भी कई  लोग लोग  अल्लाह  बने  हुए थे  , आज  भी मुस्लिम  देशों  कई  शासक  और  मुल्ले  खुद  को  अल्लाह  समझ  कर लोगों की जिंदगियां  छीन रहे  हैं   , और दुनियां  के मालिक  बने  हुए  हैं  , शायद  इसी  लिए  साईं  बाबा  उर्फ़  चाँद  मिया  कहता था " सबका  मालिक    एक  है  " अर्थात  दुनियां   की  पूरी धरती और   सम्पति संपत्ति अकेले अल्लाह यानि मुसलमानों  की है  . 

http://www.islam101.com/tauheed/AllahWE.htm

2 टिप्‍पणियां:

  1. कुरान एक आतंकवादी पुस्तक है इसके अलावा कुछ नहीं जिसके पढ़ने वाले दंगा ही दंगा करते हों उन्हे क्या कहा जय, इंका मुहम्मद और इनका अल्लाह दोनों आतंकवादी हैं, वास्तव मे अमेरिका,इंग्लैंड व पश्चिम मे आतंकवाद को ट्रेरिष्ट कहा जाता है अरब देश और पाकिस्तान मे उसे जेहाद कहते है और भारत मे सेकुलर कहते हैं ।

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  2. Sharmaji.
    Aapke lekh se spast hi nahi hota hai ki aap kuran ki aayato par vishwash karate hai ya avishwash. Kya Kewal virodh karne ke liye hi suvidhanusar likh rahe hai? Plz kichad uchalne ka khel band kijiye kyonki chite hum par bhi udte hai. Shaman yachna sahit...Dhanywaad.

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