गुरुवार, 25 सितंबर 2014

महामद ( मुहम्मद ) एक पैशाच धर्म स्थापक !

इस्लाम  के प्रचारक हिन्दुओं   का  धर्म  परिवर्तन  कराने के लिए तरह तरह  के  हथकण्डे अपनाते रहते हैं  ,  कभी  सेकुलर बन  कर  गंगा जमुनी  तहजीब  की  वकालत  करने  लगते हैं  , कभी  इस्लाम और हिन्दू  धर्म  में समानता  साबित  करने  लगते हैं  , लेकिन इनका असली उद्देश्य  हिन्दुओं को  गुमराह करके    इस्लाम  के  चंगुल   में  फँसाना  ही होता   है  , क्योंकि अधिकांश  हिन्दू  इस्लाम  से अनभिज्ञ और  हिन्दू  धर्म   से उदासीन   होते  हैं  , इस समय इस्लाम   के प्रचारकों  में  जाकिर  नायक  का नाम   सबसे  ऊपर   है  . जो एक "सलफ़ी  जिहादी  -السلفية الجهادية)  "गिरोह   से  सम्बंधित    है  , यह गिरोह  जिहाद  में आतंकवाद  को  उचित  मानता   है    , जाकिर  नायक   का  पूरा नाम  "जाकिर अब्दुल  करीम नायक " है ,इसका जन्म 18 अक्टूबर  सन 1965  में हुआ था  ,  इसने  मेडिकल डाक्टर   की ट्रेनिंग  छोड़ कर  इस्लाम  का  प्रचार   करना शुरू कर दिया  , और दुबई (UAE  ) में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (Islamic Research Foundation   )  नामकी एक संस्था   बना  राखी  है  , यही   नहीं  जाकिर "पीस टीवी  (Peace TV )  नामका   निजी  चैनल  भी चलाता है  , जिसका मुख्यालय  भी दुबई  में है  , जाकिर  अक्सर  अपने चैनल  पर  चर्चा के लिए दूसरे  धर्म   के लोगों  को आमंत्रित  करता है  , फिर उन्हीं  के धर्म ग्रन्थ  से कुछ ऐसे अंश पेश करता है , जिनसे  साबित हो सके कि उनके धर्मग्रन्थ  में भी  मुहम्मद  , अल्लाह और रसूल  का उल्लेख है , और  भोले भले लोग  मुसलमान   बन  जाएँ।
जाकिर नायक ने ऐसी  ही एक  चाल 20  फरवरी  2014  को  चली  , जिसमे हिंदुओं  को भ्रमित  करने के लिए  दावा  कर दिया  कि हिन्दुओं के धर्मग्रन्थ  " भविष्य पुराण  " में  मुहम्मद  का  वर्णन   है  , और  उनको  अवतार  बताया  गया  है  , यह पूरा ब्यौरा इस विडिओ में मौजूद  है .
FAQ261 to Zakir Naik: Muhammad (pbuh) Prophesised in Bhavishya Purana!

https://www.youtube.com/watch?v=-iKiyg46Iy4


इस प्रकार से जाकिर नायक ने  बड़ी मक्कारी से  हिन्दुओं  को धोखा  देने के लिए  यह  साबित  करने का  प्रयास किया है कि  भविष्य पुराण में  मुहम्मद का  वर्णन  एक  अवतार  के रूप   में  किया  गया  है  , इसलिए हिन्दू  मुहम्मद को  एक अवतार  मान कर सम्मान  दें  , और उसके धर्म  इस्लाम  को  स्वीकार कर लें  ,  हो सकता है  कि कुछ  मूर्ख जाकिर जाल में फंस कर  जाकिर की बात को सही  मान  बैठे  हों  , लेकिन  भविष्य  पुराण में   मुहम्मद को " महामद " त्रिपुरासुर  का अवतार  , धर्म दूषक (Polluter of righteousness)और  पिशाच  धर्म (  demoniac religion)  का  प्रवर्तक  बताया  गया   है   . यही नहीं भविष्य  पुराण   में  इस्लाम  को पिशाच  धर्म   और  मुसलमानों  को " लिंगोच्छेदी "यानि  लिंग  कटवाने वाले  कहा गया है  ,जिसे हिन्दी में  कटुए  और मराठी  में लांडीये  कहा  जाता   है  , भविष्य  पुराण   के जिस    भाग में  मुहम्मदके वर्णन   है  ,वह  मूल  संस्कृत   और उसके हिंदी  अनुवाद केसाथ  दिया जा रहा है  . ताकि  लोगों  का  यह  भ्रम  दूर  हो  जाए की  भविष्य पुराण  में मुहम्मद को  एक अवतार के रूप में  प्रस्तुतकिया गया है    .

भविष्य  पुराण   में  महामद  ( मुहम्मद ) एक पैशाच धर्म स्थापक -भविष्य पुराण, प्रतिसर्ग पर्व, खण्ड 3, अध्याय 3 श्लोक  . 1 -31


श्री सूत उवाच-
1. शालिवाहन वंशे च राजानो दश चाभवन्। राज्यं पञ्चशताब्दं च कृत्वा लोकान्तरं ययुः
१. श्री सूत जी ने कहा - राजा शालिवाहन के वंश में दस राज हुए थे। उन सबने पञ्च सौ वर्ष पर्यन्त राज्य शासन किया था और अंत में दुसरे लोक में चले गए थे।

2. मर्य्यादा क्रमतो लीना जाता भूमण्डले तदा। भूपतिर्दशमो यो वै भोजराज इति स्मृतः।
२. उस समय में इस भूमण्डल में क्रम से मर्यादा लीन हो गयी थी। जो इनमे दशम राजा हुआ है वह भोजराज नाम से प्रसिद्द हुआ। .

3. दृष्ट्वा प्रक्षीणमर्य्यादां बली दिग्विजयं ययौ। सेनया दशसाहस्र्या कालिदासेन संयुतः।
३. उसने मर्यादा क्षीण होते देखकर परम बलवान उसने(राजा ने) दिग्विजय करने को गमन किया था। सेना में दस सहस्त्र सैनिक के साथ कविश्रेष्ठ कालिदास थे।

4. तथान्यैर्ब्राह्मणैः सार्द्धं सिन्धुपारमुपाययौ जित्वा गान्धारजान् म्लेच्छान् काश्मीरान् आरवान् शठान्।
४. तथा अन्य ब्राह्मणों के सहित वह सिन्धु नदी के पार प्राप्त हुआ(अर्थात पार किया) था। और उसने गान्धारराज, मलेच्छ, काश्मीर, नारव और शठों को दिग्विजय में जीता।

5. तेषां प्राप्य महाकोषं दण्डयोग्यानकारयत् एतस्मिन्नन्तरे म्लेच्छ आचार्येण समन्वितः।
५. उनका बहुत सा कोष प्राप्त करके उन सबको योग्य दण्ड दिया था। इसी समय काल में मल्लेछों का एक आचार्य हुआ।

6. महामद इति ख्यातः शिष्यशाखा समन्वितः नृपश्चैव महादेवं मरुस्थलनिवासिनम्।
६ महामद शिष्यों की अपने शाखाओं में बहुत प्रसिद्द था। नृप(राजा) ने मरुस्थल में निवास करने वाले महादेव को नमन किया।

7. गंगाजलैश्च सस्नाप्य पञ्चगव्य समन्वितैः। चन्दनादिभिरभ्यर्च्य तुष्टाव मनसा हरम् ।
७. पञ्चजगव्य से युक्त गंगा के जल से स्नान कराके तथा चन्दन आदि से अभ्याचना(भक्तिपूर्वकभाव से याचना) करके हर(महादेव) को स्तुति किया।

भोजराज उवाच-
 8. नमस्ते गिरिजानाथ मरुस्थलनिवासिने। त्रिपुरासुरनाशाय बहुमायाप्रवर्त्तिने।
८. भोजराज ने कहा - हे गिरिजा नाथ ! मरुस्थल में निवास करने वाले, बहुत सी माया में प्रवत होने त्रिपुरासुर नाशक वाले हैं।

9. म्लेच्छैर्गुप्ताय शुद्धाय सच्चिदानन्दरूपिणे। त्वं मां हि किंकरं विद्धि शरणार्थमुपागतम् ।
.९ मलेच्छों से गुप्त, शुद्ध और सच्चिदानन्द रूपी, मैं आपकी विधिपूर्वक शरण में आकर प्रार्थना करता हूँ।

सूत उवाच-


10. इति श्रुत्वा स्तवं देवः शब्दमाह नृपाय तम्। गन्तव्यं भोजराजेन महाकालेश्वरस्थले ।
 १०. सूत जी ने कहा - महादेव ने प्रकार स्तुति सुन राजा से ये शब्द कहे "हे भोजराज आपको महाकालेश्वर तीर्थ जाना चाहिए।"

11. म्लेच्छैस्सुदूषिता भूमिर्वाहीका नाम विश्रुता। आर्य्यधर्मो हि नैवात्र वाहीके देशदारुणे ।
११. यह वाह्हीक भूमि मलेच्छों द्वारा दूषित हो चुकी है। इस दारुण(हिंसक) प्रदेश में आर्य(श्रेष्ठ)-धर्म नहीं है।


12. बभूवात्र महामायी योऽसौ दग्धो मया पुरा। त्रिपुरो बलिदैत्येन प्रेषितः पुनरागतः ।
१२. जिस महामायावी राक्षस को मैंने पहले माया नगरी में भेज दिया था(अर्थात नष्ट किया था) वह त्रिपुर दैत्य कलि के आदेश पर फिर से यहाँ आ गया है।

13. अयोनिः स वरो मत्तः प्राप्तवान् दैत्यवर्द्धनः। महामद इति ख्यातः पैशाच कृति तत्परः ।
१३. वह मुझसे वरदान प्राप्त अयोनिज(pestle, मूसल, मूलहीन) हैं। एवं दैत्य समाज की वृद्धि कर रहा है। महामद के नाम से प्रसिद्द और पैशाचिक कार्यों के लिए तत्पर है।

14. नागन्तव्यं त्वया भूप पैशाचे देशधूर्तके। मत् प्रसादेन भूपाल तव शुद्धिः प्रजायते ।
१४. हे भूप(भोजराज) ! आपको मानवता रहित धूर्त देश में नहीं जाना चाहिए। मेरी प्रसाद(कृपा) से तुम विशुद्ध राजा हो।

15. इति श्रुत्वा नृपश्चैव स्वदेशान् पुनरागमत्। महामदश्च तैः सार्द्धं सिन्धुतीरमुपाययौ ।
१५. यह सुनने पर राजा ने स्वदेश को वापस प्रस्थान किया। और महामद उनके पीछे सिन्धु नदी के तीर(तट) पर आ गया।

16. उवाच भूपतिं प्रेम्णा मायामदविशारदः। तव देवो महाराज मम दासत्वमागतः ।
१६. मायामद माया के ज्ञाता(महामद) ने  राजा से झूठ     कहा - हे महाराज ! आपके देव ने मेरा दासत्व स्वीकार किया है अतः वे मेरे दास हो गए हैं।

17. ममोच्छिष्टं संभुजीयाद्याथात त्पश्य भो नृप। इति श्रुत्वा तथा परं विस्मयमागतः ।
१७. हे नृप(भोजराज) ! इसलिए आज सेआप   मुझे ईश्वर के संभुज(बराबर) उच्छिष्ट(पूज्य) मानिए, ये सुन कर राजा विस्मय को प्राप्त भ्रमित हुआ।

 18. म्लेच्छधर्मे मतिश्चासीत्तस्य भूपस्य दारुणे, तच्छृत्वा कालिदासस्तु रुषा प्राह महामदम्।
१८. राजा की दारुण(अहिंसा) मलेच्छ धर्म में रूचि में वृद्धि हुई। यह राजा के श्रवण करते देख, कालिदास ने क्रोध में भरकर महामद से कहा।

19. माया ते निर्मिता धूर्त नृपम्हन हेतवे हनिष्यामि दुराचारं वाहीकं पुरुषाधमम्।
१९. हे धूर्त ! तूने नृप(राजधर्म) से मोह न करने हेतु माया रची है। दुष्ट आचार वाले पुरुषों में अधम वाहीक को मैं तेरा नाश कर दूंगा।

20. इत्युक्त्वा स द्विजः श्रीमान् नवार्ण जप तत्परः जप्त्वा दशसहस्रं च तद्दशांशं जुहाव सः।
२०. यह कह श्रीमान ब्राह्मण(कालिदास) ने नर्वाण मंत्र में तत्परता की। नर्वाण मंत्र का दश सहस्त्र जाप किया और उसके दशाश जप किया।

21. भस्म भूत्वा स मायावी म्लेच्छदेवत्वमागतः, भयभीतस्तु तच्छिष्या देशं वाहीकमाययुः।
२१. वह मायावी भस्म होकर मलेच्छ देवत्व अर्थात मृत्यु को प्राप्त हुआ। भयभीत होकर उसके शिष्य वाहीक देश में आ गए।

22. गृहीत्वा स्वगुरोर्भस्म मदहीनत्वमागतम्, स्थापितं तैश्च भूमध्ये तत्रोषुर्मदतत्पराः।
२२. उन्होंने अपने गुरु(महामद) की भस्म को ग्रहण कर लिया और और वे मदहीन को गए। भूमध्य में उस भस्म को स्थापित कर दिया। और वे वहां पर ही बस गए।

23. मदहीनं पुरं जातं तेषां तीर्थं समं स्मृतम्, रात्रौ स देवरूपश्च बहुमायाविशारदः।
२३. वह मदहीन पुर हो गया और उनके तीर्थ के सामान माना जाने लगा। उस बहुमाया के विद्वान(महामद) ने रात्रि में देवरूप धारण किया।

24. पैशाचं देहमास्थाय भोजराजं हि सोऽब्रवीत् आर्य्यधर्म्मो हि ते राजन् सर्ब धर्मोतमः स्मृतः ।
२४. आत्मा रूप में पैशाच देह को धारण कर भोजराज आकर से कहा। हे राजन(भोजराज) !मेरा   यह आर्य समस्त धर्मों में अतिउत्तम है।

25. ईशाज्ञया करिष्यामि पैशाचं धर्मदारुणम् लिंगच्छेदी शिखाहीनः श्मश्रुधारी स दूषकः।
२५. अपने ईश की आज्ञा से पैशाच दारुण धर्म मैं करूँगा। मेरे लोग लिंगछेदी(खतना किये हुए), शिखा(चोटी) रहित, दाढ़ी रखने वाले दूषक होंगे।

26. उच्चालापी सर्वभक्षी भविष्यति जनो मम विना कौलं च पशवस्तेषां भक्ष्या मता मम।
२६. ऊंचे स्वर में अलापने वाले और सर्वभक्षी होंगे। हलाल(ईश्वर का नाम लेकर) किये बिना सभी पशु उनके खाने योग्य न होगा।


27. मुसलेनैव संस्कारः कुशैरिव भविष्यति तस्मात् मुसलवन्तो हि आतयो धर्मदूषकाः।
२७. मूसल से उनका संस्कार किया जायेगा। और मूसलवान हो इन धर्म दूषकों की कई जातियां होंगी।

28. इति पैशाच धर्म श्च भविष्यति मयाकृतः इत्युक्त्वा प्रययौ देवः स राजा गेहमाययौ।
२८. इस प्रकार भविष्य में मेरे(मायावी महामद) द्वारा किया हुआ यह पैशाच धर्म होगा। यह कहकर वह वह (महामद) चला गया और राजा अपने स्थान पर वापस आ गया।

29. त्रिवर्णे स्थापिता वाणी सांस्कृती स्वर्गदायिनी,शूद्रेषु प्राकृती भाषा स्थापिता तेन धीमता।
२९. उसने तीनों वर्णों में स्वर्ग प्रदान करने वाली सांस्कृतिक भाषा को स्थापित किया और विस्तार किया। शुद्र वर्ण हेतु वहां प्राकृत भाषा के का ज्ञान स्थापित/विस्तार किया(ताकि शिक्षा और कौशल का आदान प्रदान आसान हो)।

30. पञ्चाशब्दकालं तु राज्यं कृत्वा दिवं गतः, स्थापिता तेन मर्यादा सर्वदेवोपमानिनी।
३०. राजा ने पचास वर्ष काल पर्यंत राज(शासन) करते हुए दिव्य गति(परलोक) को प्राप्त हुआ। तब सभी देवों की मानी जाने वाली मर्यादा स्थापित हुई।

 31. आर्य्यावर्तः पुण्यभूमिर्मध्यंविन्ध्यहिमालयोः आर्य्य वर्णाः स्थितास्तत्र विन्ध्यान्ते वर्णसंकराः।
३१. विन्ध्य और हिमाचल के मध्य में आर्यावर्त परम पुण्य भूमि है अर्थात सबसे उत्तम(पवित्र) भूमि है, आर्य(श्रेष्ठ) वर्ण यहाँ स्थित हुए। और विन्ध्य के अंत में अन्य कई वर्ण मिश्रित हुए।

भविष्य पुराण, प्रतिसर्ग पर्व, खण्ड 3, अध्याय 3 श्लोक  . 1 -31
अब जाकिर  नायक  बताये   कि  मुहम्मद  साहब  वास्तव   में  कौन  थे  ,


http://bhavishyapuran.blogspot.in/




29 टिप्‍पणियां:

  1. great information by sri sharma saheb.

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  4. YE SAB LIKHNE SE TUNE TAUBA NA KI AUR IMAAN NA LAYA TO INSHA ALLAH
    BADTAR SE BADTAR MAUT AAYEGI TERI
    TERI LAAS KO GIDHAD KHAYENGE JIS ME SE AISI BADBOO AAEGI KE KOI DUR SE BHI NAHI DEKHEGA.
    BEIZZAT HOKAR MAREGA, TADAP TADAP KAR MAREGA,
    QAYAMAT KE DIN SAKHT SE SAKHT AZAAB ME MUBTLA HOGA JO HAMENSHA HAMENSHA HOGA, JISSE BACHNA NAMUMKIN HOGA
    JIS UNGLIYON SE TUNE LIKHA HAI WO CANCER ME MUBTALA HOGI AUR WO TUJHE BAHOT SAALO TAK BARDAST SE BAHAR DARD DEGI.
    TU JAANWARO SE BHI BADTAR DUKH BHARI LAMBI ZINDAGI GUZAREGA.
    MAUT MAGEGA LEKIN MAUT NAHI AAYGI... HARAAM KI AULAAD,.

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    1. #SURAJONE,..Tere maa ke chut mein gade ka paachva paav madarchod sach samne aaya to gaand ko aag lagi kya mayya ko chodne walon...salon tum musalman tumhari maut ki tayari karke rakho....suvaron aisi mout milengi tumhe ki bhagne ke liye jagah nahi milengi tum suvaronko har taraf tum madarchodon ko maut milengi sif maut tumhare sadihuyi gandi lashon ki davat gali ke kutte uthayenge.....chut ko salam lavda malekum ye hain kya islam? sabka lan..ek hain ....lena,mera dhatura,,..chu... aur lan....ko pareshani ka matlab islam,...madarchod tucch praniyon thu tumpe .....

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    2. Sale sura jone .. Harami tera to naam he sura h yani ki suar

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  5. Kisi bhi dharm ka abhyas pozetive thinking se karna chahiye....
    Dusre dharm ko bura kehne se behtar ye he k.. aadmi apne dharm ko khud samje or dusro ko samjane ki koshish kare...
    Islam k bare me aap ki jankari adhuri he... aap ki bhasha bhi nafrat wali he..

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    1. Bandhu, Islam koi dharm ho tab na kaha ja sakta hai ki kisi dharm ko bura nahi kahana chahiye, islam to duniya kaa sabse bada adharm hai, jisne apne paida hone ke baad se ab tak , yaani 1400 saalo tak karodo karodo bekasur insano kaa aur begunah janwaro ka katal karta aya hai, aur har roj kata hi jaa raha hai, to is khuni aur gandi wichardhara ko dharm kaise maan liya jaye, pahale akal se kaam lo fir duniya ko gyan dena.

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    2. majhab matlab ek kabila jise kisi bhi tarah badana

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  6. Islam k baare me aap ki jankari adhuri he......app saant manmese dhuna nikalkar har mazhab ko samze fir ouro ko samjaaye

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    1. aap ham ko muhammad sallalahu alaihiwasallam ke bare me kuchh batayenge kiya

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  7. "...Kisi bhi dharm ka abhyas positive thinking se karna chahiye....
    Dusre dharm ko bura kehne se behtar ye he k.. aadmi apne dharm ko khud samje or dusro ko samjane ki koshish kare...
    Islam k bare me aap ki jankari adhuri he... aap ki bhasha bhi nafrat wali he. ...."

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  8. भंडाफोडू की तरफ से जवाब

    जनाब (SURAJONE) यानी बेनामी हजरत की खिदमत में गुजारिश , हुजूर आपने मुझे इस लेख के लिए बददुआ देकर अपनी बेअक़्ली का मुजाहिरा कर दिया है , क्योंकि आपकी इन बद दुआओं से लगता है कि आपने मुझे ही भविष्य पुराण का लेखक मान लिया है . जबकि आपको पता होना चाहिए कि भविष्यपुराण सैकड़ों साल पहले ही बन चूका था , इसलिए आपकी बददुआओं का मेरे ऊपर कोई असर नहीं होगा , काश आपका अल्लाह बिना सोचे समझे दूसरों पर झूठे इल्जाम लगा कर बद दुआ देना सिखाने की बजाये थोड़ी अक्ल भी अता कर देता कर देता .

    रही बात ईमान लाने की तो , मैं ईमान कहाँ से लाऊँ , ईमान तो मुस्लिम दहशतगर्दों के कब्जे में कैद है , वह अपनी हरेक ऐसी नाजायज हरकतों को ईमान साबित करने पर आमादा है , जिसका हकीकी इस्लाम से कोई वास्ता नहीं है . जनाब ईमान लफ्जों से नहीं आमाल से होता है .
    आप मुझे जहन्नम के अज़ाब से डराने पहले बताइये कि , क्या अल्लाह और रसूल ऐसे ऐसे नामनिहाद मुस्लिमों को जन्नत भेजेंगे या जहन्नम , जिन्होंने अल्लाह की बनाई इस खूबसूरत दुनिया को बर्बाद करने में कोई कमी नहीं छोड़ी . बताइये जब अल्लाह जमीन पर जगह जगह धमाके और बिछी हुई लाशें देखेगा तो क्या ऐसे मुसलमानों को शाबाशी देगा ?

    और आखिरी बात यह है कि आपने बिना सोचे समझे मुझे गाली देकर साबित कर दिया कि आप सच्चे मुसलमान नहीं हो सकते ,क्योंकि आप कुरान की इस आयात के खिलाफ काम कर रहे हो , जिस में अल्लाह के सच्चे बन्दे की खासियत बताई गयी है , और अगर आप कुरआन भूल गए हों तो हम बताये देते हैं , पढ़िए और अपने दोस्तों को पढ़वाइये ,

    "وَعِبَادُ الرَّحْمَٰنِ الَّذِينَ يَمْشُونَ عَلَى الْأَرْضِ هَوْنًا وَإِذَا خَاطَبَهُمُ الْجَاهِلُونَ قَالُوا سَلَامًا "सूरा अल फुरकान - 25:63

    "व् इबादुर्रहमान यमशूना अलल अर्ज हौना ,इजा खातबाहुमुल जाहिलूना कालू सलामा "

    अर्थात - और रहमान ( अल्लाह ) के बन्दे तो वही हैं , जो धरती पर नम्रता पूर्वक चलते हैं , जब कोई भी उनसे असभ्यता से सम्बोधित करता है , तो वह उसपर भी सलाम भेजते हैं .

    "true servants of the Most Gracious are [only] they who walk gently on earth, and who, whenever the foolish address them, reply with [words of] peace; ( 25:63)

    WaAAibadu arrahmani allatheena yamshoona AAala al-ardi hawnan wa-itha khatabahumu aljahiloona qaloo salama

    मुझे पता था कि जब भी मैं कभी सत्य को उजागर करूँगा , विरोधी मेरे लेखों खंडन नहीं कर पाने पर ऐसे ही अभद्र अशिष्ट कमेंट दते रहेंगे। मुझे इनका उत्तर देना भी आता है , लेकिन दुःख तो तब होता है कि कुछ हिन्दू भाई भी मेरे इस लेखन कार्य को मेरी आय का साधन मान लेते हैं . ऐसे लोगों को समझ लेना चाहिए कि जब तक हम विरोधियों की नीति और नियत के बारे में सही जानकारी प्राप्त नहीं कर लेते , केवल हिन्दू धर्म की तारीफ़ करने से हिन्दू धर्म नहीं बच सकेगा . हम अपना काम करते रहेंगे चाहे कोई साथ दे या नहीं।

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    1. mai aapki baten samj sakta hun par aap aur hum milke yani sanatan bhai mil kar hi dharm ka prachar kar sakte hai
      aabhi modi ji hai to kam se kam sanskrit ko desh me padaya jay aur ho to wed and puran dono school me padaya jai tabhi hamari aane wali pidhi me sanatan dharam ka gun rahega warna hum bhi raksha ho jayenge

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  9. सर्वश्रेष्ठ धर्म सनातन वैदिक धर्म ...सर्वश्रेष्ठ पुजा , भक्ती मुर्तिपुजा...ॐ तैतिस करोड देवाय नमः ॐ अनंत कोटी देवाय नमः......जय जय महादेव ....जय जय भवाणी.....जय जय शिवाजी ...

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  10. अल्फैज़ अहमद8 दिसंबर 2014 को 5:59 pm

    एडमिन महोदय ,आप में बहुत नेगेटिव एनर्जी भरी हुई है।
    किसी और धरम के बारे में बोलने से पहले अपने धर्म की बुनयादी बातो का विश्लेषण कर ले।
    फिर अपने धर्म की कथाओं की सत्यता को परख ले।
    फिर इस्लामिक किताबो का अध्ययन करे।
    अहले हदीस जमात की कुरान और सुन्नत की किताबो को पढ़े।हदीस पर नज़ारे डाले।
    अपना ज्ञान पूरा करे।
    फिर कुछ कहे।.........

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  11. दर्पण देख लो जोकर नालायक के टट्टुओं!!तुन्हारा बाप जोकर झूठ भी ढ़ंग से नहीं बोल सकता.भविष्यपुराण में मोहमद एक राक्षस है जो पैशाच मत का संस्थापक है.हा हा हा हा...जोकर नालायक केवल अज्ञानी और मदरसेछापों ही टोपी पहना सकता है.हम जैसों को नहीं.
    वंदेमातरम

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  12. Tumhari is post ki sachhai janne ke liye bharat ka itihas padhna hoga kalidal janm kab hua tha aur hazarat muhammad saheb ka kab janm hua.aur rhi bat bhojraj ki aisa koi chakrawarti samrat bharat ke itihas me nahi paida hua he hazarat muhammad saheb ke time me to itihas padho clear ho jayega kitna sahi likho ...kya sachhai he tumhare post ki...

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  13. wase to ham bolte nhi kyu jo bolte h we gand we hote h par pir bi ek baat bolta hu bhan ke lodo salo muslamn ek bhan cood asi padayis h jo apni bhan ko apne ap hi cood leta h jiski maa pata nhi kha kha se cuud ke salo tum ko kide makodo ki trha fada krti h are maadr codo kane ko kuch milta nhi tabi to janwro ko kate ho bhan ke lando ek din asa aye ga jab yo ake la jaat tum sab ki maa code ga wobi kodi kar ke smje

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  14. islam sala bhai bhen ki aulado ka majhab hain .maa dhudh na pilaye to maa k saath nikah jayaz ahin ..sale mulle taqqiya karte quran kaise utari koi mader chod suwar nahi batata ..uper se aai koi aayat makka me koi madina me utari allah ko 23 sal lag gye quran utarne me ..aisa kon sa khuda hain jo apna gyan 1 sal me nahi 23 me deta hain sale mulle taqqiya karte hain

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  15. khud mulle kuch padhte nahi kyo ki mohmmad anpdh aur uski kom anpdh sale panchar banane wale mulle aalimo ki jhuth bat sun kar kahte hain ki hum ko islam nahi pata ..jab ki khud sale kuch padhna likhna nahi jante .......history se pramd do to jhuthi hain history mullo ka taqqiya mullo ko batao history unke allah se pahle ki likhi hui hain arab ki history padho mullo

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  16. Yes Right brother .....mahamd aik pichash dharm ka data hai.......jb maine mohmmd ke bareme padha ki uski bhvishvani granth me hai.....to pdhne ki jigyasa hui......ha sch me hai bhai......tripurasur urf mahamad daku atankwadi..............lekin aisa nhi hai ki ved vyas ji islm se gruna thi......isa masih ke bareme acha likha hai ye asli prophet.aur muhmmad dacket. ....bhvishwani na to jhuti hai nahi banavat kyunki shivaji ashoka ke bareme bhi hai.....hindu religion original hai.....kya durdrusti thi Mahrshi ji ki.........साला मई यही सोच रहा था की मुसलमान इतने हरामी क्यों है।।।अब पता चला जिसका बाप ही घटिया हो वो कैसे हो सकते है....

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  17. be mulle Raja bhoj huwe the Madhyprdesh me jnme The......Ja jakar padh madrasa chap kahike......jis dhrm me baqre matlb parni ki katne ki ijajt ho wo sala dharm kaisa..........


    maine jb kuran pdhi to ye islam ke log iSLM chodte kyu nhi itni hataye hoti hai tbhi bhi..........

    aik bat mujhe dyan me aayi qurn me lalch dikhya gaya hai.............swarg milega........hure milegi.......mulle bhi aik bat inkar nhi karenge......Kafiro ko mar do murti pujko nko mar do..........


    Alllh bhi jhuta muhmmad bhi jhuta......aur mulle bhavishvani ka muhhmad isa masiha jaisa bata rahe hai...............wo hai nhi ......budda kahika............stan ko pakde koi marta hai kya........

    अली ही असली इस्लाम का पैगम्बर है......जो असली क़ुरान को सुंनियोने जला दी.....

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  18. SURAJONE अबे साले bhavishpuran aik bar padh....

    mai islm swikarne ki soch raha tha bach gaya bhai.......sala marne ke bad aisehi fakiro ki tarh ghumta rhta ........


    acha hua bhnadfodu site pe dikha.....bhvishme saf varnan hai म्लेच्छ matlb dusre desh ka .....

    अयोनिज का मतलब क्या है
    वह अयोनिज है उसका नाम महामद है....
    bhandafodu hindi itini strong nhi hai please rply me

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  19. तुझे अपने धर्म का तो ठीक से पता नहीं है और इस्लाम में कमी निकल रहा है। काफिर है तू और काफिर ही रहेगा।

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  20. PLZ all dont say abything wrong about any religion. Do u think u r doing right according to ur religion. I wants the author to put the copy on Bhawish puran with page no so that we can verify that in hindi english n other langugage. If he thinks he is right they why have he type it n not uploaded a picture or mentioned the page number

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