मंगलवार, 25 नवंबर 2014

कुरान ने सूरा फातिहा की पोल खोली !

मुसलमानों का  दावा है कि कुरान अल्लाह की  किताब   है  ,  और उसका एक एक  शब्द  अल्लाह का  वचन   है  . मौजूदा   कुरान  में   छोटे बड़े कुल 114 अध्याय (Chapters)  हैं  ,जिनको  अरबी   में  सूरा   कहा   जाता   है  , और  हरेक  सूरा में जो  वाक्य   होते   हैं  ,उनको  आयत (Verses )  कहा   जाता है   . कुरान  की   पहली  सूरा    का  नाम सूरा "अल फातिहा "   है  . इसमे कुल  7  आयतें   है   . जिनमे  अल्लाह के गुणों , शक्तियों और  महानता  का  वर्णन   करते  हुए अल्लाह की   तारीफ़  की   गयी   है  . और  उस  से दुआ  की  गयी   है  . सूरा  फातिहा  को   हर  नमाज   में पढ़ना  अनिवार्य   है   . इसकी   पहली   5  आयतें  इस प्रकार  हैं ,जो अरबी  से उर्दू  में अनुवादित  की  हैं ,

2.सब तारीफें  अल्लाह  के लिए  जो जहानों (Worlds)   का  मालिक   है
3.बड़ा  मेहरबान  और निहायत  रहमदिल .
4.जजा  के  दिन ( न्याय दिवस ) का  मालिक .
5.हम तेरी  ही  इबादत  करते  हैं  , और तुझी  से  मदद  माँगते  हैं .
6.हमें  सीधा  रास्ता  दिखा .
7.उन  लोगों   का  रास्ता  जिन  पर तूने इनाम   किया ,न  कि जिन पर तेरा  गजब  नाजिल  हुआ और न  वह जो  गुमराह  हुए .

सूरा  फातिहा  की  इन  पहली 5   आयतों  को पढ़  कर यही  सवाल  पैदा  होता  है ,कि अगर  यह  आयतें   सचमुच  अल्लाह  के वचन  हैं , और किसी  और की  रचना   नहीं  तो , अल्लाह  को अपने मुंह  से अपनी  तारीफ़ करने  की  क्या  जरूरत पड़   गयी?
इसका  असली  कारण  यह  है कि  सूरा  फातिहा  कुरान  की  पहली  सूरा   नहीं  है , इसे बाद  में उस   समय  पहला  कर दिया  गया   जब  कुरान   की  ऐसी  आयतें   बन  चुकी   थीं   जिनमे अल्लाह के बारे में सूरा  फातिहा  के  विपरीत  बातें दी  गयी थीं  . उदाहरण के लिए पहले सूरा  फातिहा की  एक एक  आयत  लेते हैं  ,  और  कुरान  से  उसके  विपरीत  आयत  की  तुलना  देखते   हैं   .
1-जगत का  मालिक नहीं है 
सूरा  फातिहा  की आयत 2 में   कहा है   "जो जहानों (Worlds)   का  मालिक   है  "यह बात  भी  सरासर  झूठ  है  क्योंकि  अल्लाह  ने मुसलमानों   के  प्राण  खरीद   लिए  है   ,जैसा कि  की इस आयत में  कहा  है   ,

" बेशक  अल्लाह   ने  मुसलमानों   के प्राण  और  माल  इसलिए  खरीद  लिए  हैं  ,कि  वह जन्नत के लिए  अल्लाह के  रास्ते पर लड़ते हैं  ,  और मारे  जाते हैं  और  मारते  हैं   " सूरा -तौबा  9:111

और  सामान्य  नियम   के अनुसार किसी वस्तु  को  खरीदने  वाला   ही  उसका  मालिक  मना  जाता   है ,इसलिए  अल्लाह सिर्फ   मुसलमानों   का  मालिक  है ,अल्लाह  हिन्दुओं  और  अन्य  धर्म   के लोगों   का  मालिक   नहीं  हो सकता , क्योंकि  अल्लाह   न तो इनको  खरीद सकता है  . और न यह बिकाऊ  हैं .और  सामान्य  नियम   के अनुसार किसी वस्तु  को  खरीदने  वाला   ही  उसका  मालिक  मना  जाता   है ,इसलिए  अल्लाह सिर्फ   मुसलमानों   का  मालिक  है ,अल्लाह  हिन्दुओं  और  अन्य  धर्म   के लोगों   का  मालिक   नहीं  हो सकता , क्योंकि  अल्लाह   न तो इनको  खरीद सकता है  .  और न यह बिकाऊ  हैं (Allah  is  Lord of  muslims only)

2- अल्लाह  दयालु और कृपालु  नहीं है 

सूरा  फातिहा  की  आयत  3  में   कहा   है  "बड़ा  मेहरबान  और निहायत  रहमदिल "लेकिन   जो अल्लाह सभी  गैर  मुस्लिमों  को  दुश्मन  मानता  हो  . उनसे नफ़रत करता   हो  , और  उन  पर धिक्कार   करता  हो , और  उनकी जिंदगी दुखदायी  बनाने  का  इरादा रखता  हो  ,  वह  कभी  भी दयालु  नहीं  हो  सकता  है जैसा कि  कुरान की यह  आयतें  बताती   हैं  ,
"अल्लाह  काफिरों   का   दुश्मन  है  " सूरा - बकरा 2:98

(Allah is an enemy to the disbelievers. 2:98)

"अल्लाह  काफिरों   को धिक्कार करता   है "सूरा  -बकरा 2:89

(The curse of Allah is on disbelievers. 2:89)

"अल्लाह गैर मुस्लिमों   की जिंदगी दुखदायी ( miserable )  बना   देगा " सूरा -बकरा 2:114

(Allah will make disbelievers' lives miserable in this world . 2:114

और  अगर  सचमुच   अल्लाह  दयालु  और  रहमदिल होता  तो  , उसके अनुयायी  जिहादी   इतने क्रूर  और  बेरहम  नहीं  होते  ,  जो बच्चो  और महिलाओंको  क़त्ल करने को  अल्लाह  का हुक्म  मानते   हैं  

3-न्याय  दिवस का स्वामी नहीं है 
सूरा  फातिहा  की  आयत  4  में  कहा है  "जजा  के  दिन ( न्याय दिवस ) का  मालिक ".लेकिन कुरान  की इन  आयतों  और  हदीस  के अनुसार अल्लाह  न्याय  दिवस   का  स्वामी   नहीं   है  , उसकी  जगह  मुहम्मद  न्याय करेंगे

" हे मुहम्मद  ,करीब   है   कि तुम्हारा रब  तुम्हें उच्च पद  पर  नियुक्त   कर दे  " सूरा - बनी इस्राइल 17:79

"your Lord will raise you to a praiseworthy station.” [Isra’a 17: 79]


कुरान  की  इस आयत  की  व्याख्या  में मुस्लिम  विद्वान "अबुल  सना शिहाबुद्दिन सय्यद   महमूद इब्न अल  हुसैनी अल अलूसी अल  बगदादी  -أبو الثناء شهاب الدين سيد محمود بن عبد الله بن محمود الحسيني الآلوسي البغدادي‎‎ "अपनी किताब "रूहुल  मायनी  -روح المعاني " में  कहते हैं ,कि न्याय   के  दिन  अल्लाह अपना पूरा  अधिकार  अपने  हबीब   मुहम्मद  को  सौंप  देंगे  , और वही  अपनी इच्छा  के अनुसार  लोगों   के कर्मों   का  फैसला  करेंगे  .
और  लगभग   यही  बात  इस आयत में भी  कही  गयी   है

" उस  दिन   किसी   का  हस्तक्षेप स्वीकार  नहीं  होगा ,सिवाय  उसके  जिसे  अल्लाह  ने  अनुज्ञा   दी   हो ,और उसकी सिफारिश मानी  जायेगी "सूरा -ता  हां 20:109

On that Day shall no intercession avail except for those for whom permission has been granted by (Allah)20:109

अल्लाह  न्याय   दिवस   का स्वामी  नहीं  है  , बल्कि  मुहम्मद भी अल्लाह का सहभागी   है  , यह बात इस  हदीस   से सिद्ध    हो जाती  है  ,
"अब्दुल्लाह  बिन उमर  ने कहा  , जब अल्लाह क़यामत   के  दिन   लोगों के  कर्मों  का  फैसला  करेगा  तो  , मुहम्मद  मध्यस्थता  करेंगे  . अल्लाह उनको  मध्यस्थता करने  की सुविधा  प्रदान   कर  देगा   "

Narrated 'Abdullah bin 'Umar:"Muhammad will intercede with Allah to judge amongst the people, and then Allah will exalt him to Maqam Mahmud (the privilege of intercession,

सही बुखारी - जिल्द 2  किताब 24  हदीस 553

इन  तथ्यों   से  यही सिद्ध  होता  है  कि यातो  अल्लाह में  खुद  सही  न्याय करने की क्षमता  नहीं  है  , या मुहम्मद ही  अल्लाह बन कर लोगों  को को भ्रमित   करते रहते थे  
4-रास्ता  भटकाने  वाला 

सूरा फातिहा   की  आयत  6  में दुआ मांगी  गयी   है  कि "हमें  सीधा  रास्ता  दिखा "लेकिन  अल्लाह  लोगों  को सीधा  रास्ता दिखने की  जगह  रास्ते से  भटका   देता  है  ,जैसा की कुरान की इस  आयत में  कहा है   ,

"फिर अल्लाह   जिसको  चाहे  भटका   देता  है  " सूरा -इबराहीम  14:4

(Then Allah misleads WHOM HE WILLS )


और  यदि  अल्लाह   सचमुच मुसलमानों   को  सीधा  रास्ता  दिखाने  वाला होता  तो  , तो   अधिकांश  मुसलमान  आतंकवादी नहीं  बन  गए होते  . जबकि अन्य  धर्म   के  लोग अल्लाह  की मेहरबानी   के बिना   ही  सीधे   रास्ते  पर   चल रहे   हैं


इस  प्रकार  सूरा  फातिहा  में  अल्लाह  की  तारीफ़  में  जो  7  आयतें   दी   गयी   हैं  , उसके विरुद्ध  खुद  अल्लाह की  किताब   ने  ऎसी  चार  आयतें  पेश   कर दी   हैं जो  अल्लाह   की  महानता   का  भंडा  फोड़ने के   लिए  पर्याप्त   हैं   . इसी   लिए सूरा  फातिहा  को पहले  कर दिया  गया था. ताकि    भोले भले लोग  अल्लाह   की  ऐसी  तारीफ़  से पहले तो  प्रभावित  होकर  इस्लाम के चंगुल   में  फंस   जाएँ  .  फिर उनको   बाकि  कुरआन  पढ़ा कर  आसानी से जिहादी  बनाया   जा  सके   ,




शुक्रवार, 7 नवंबर 2014

मुसलमान से दस सवाल !

यह   एक  कटु  सत्य   है  कि   आज    भारतीय   महाद्वीप   में    जितने भी   मुसलमान   हैं   , उनके पूर्वज    कभी   हिन्दू    थे   ,  जिनको    मुस्लिम    बादशाहों   ने   जबरन   मुसलमान    बना   दिया   था  .  लेकिन   दुर्भाग्य   की   बात है  कि   विदेशी   पैसों   के बल पर  इस्लाम   के  एजेंट  ऐसे  हिन्दुओं     का  धर्म  परिवर्तन कराने में  लगे  रहते हैं  ,  जो इस्लाम  की असलियत  से  अनभिज्ञ   हैं  , या जिनको    हिन्दू  धर्म  का आधा अधूरा   ज्ञान   होता   है  , और दुर्भाग्य से  ऐसे  हिन्दू  युवक  , युवतियां    सेकुलर  विचार वाले होते हैं  , तो  इस्लाम   के प्रचारक  आसानी से उनको  इस्लाम  जाल में  फसा  लेते हैं   , इसलिए  इस्लाम    के  चक्कर   में  फसने  से बचने का  एक  ही  उपाय  है  ,कि  इस्लाम   के  एजेंटों  से  तर्कपूर्ण     सवाल  किये   जाएँ   . क्योंकि  इस्लाम सिर्फ ईमान  लाने  पर  ही  जोर  देता  है  , और  अगर कोई  इस्लाम   के  दलालों   से   सवाल   करता   है  , तो यातो   वह  भड़क   जाते हैं  , या  लड़ने  पर  उतारू   हो  जाते  हैं  .
अक्सर  देखा  गया  है  कि  कुछ  उत्साही   हिन्दू   इस्लाम   के  समर्थकों    के साथ शाश्त्रार्थ     किया  करते  हैं   , इसलिए   उनकी  सहायता के लिए दस  ऐसे  सवाल   दिए  जा   रहे  हैं  , जिनका  सटीक  ,  प्रमाण  सहित  और   तर्कपूर्ण    जवाब   कोई  मुल्ला मौलवी    नहीं  दे  सकता  .

1-.मुसलमानों   का दावा  है  कि  कुरान  अल्लाह की  किताब  है   ,लेकिन   कुरान   में  बच्चों  की  खतना   करने का   हुक्म  नहीं   है  ,  फिर भी  मुसलमान   खतना क्यों    कराते   है  ?  क्या   अल्लाह में  इतनी  भी    शक्ति  नहीं   है कि मुसलमानों   के  खतना  वाले   बच्चे   ही  पैदा    कर सके ?और  कुरान  के विरद्ध   काम  करने   से  मुसलमानों   को  काफ़िर   क्यों   नहीं   माना जाए  ?

2-मुसलमान   मानते हैं   कि  अल्लाह  ने फ़रिश्ते  के  हाथो   कुरआन   की  पहली  सूरा   लिखित रूप   में  मुहम्मद  को  दी थी  , लेकिन  अनपढ़ होने से वह  उसे    नहीं   पढ़   सके  , इसके  अलावा   मुसलमान   यह   भी  दावा करते हैं   कि  विश्व  में कुरान   एकमात्र ऐसी  किताब  है जो   पूर्णतयः  सुरक्षित   है   , तो  मुसलमान     कुरान    की   वह    सूरा  पेश   क्यों   नहीं   कर देते    जो  अल्लाह  ने लिख कर भेजी  थी    , इस से  तुरंत  पता हो जायेगा कि वह  कागज   कहाँ   बना था   ? और  अल्लाह   की  राईटिंग   कैसी    थी  ?वर्ना  हम  क्यों   नहीं   माने कि  जैसे  अल्लाह फर्जी   है   वैसे ही  कुरान   भी  फर्जी   है

3. इस्लाम के मुताबिक यदि 3 दिन/माह का बच्चा मर जाये तो उसको कयामत के दिन क्या मिलेगा.-जन्नत या जहन्नुम ? और  किस आधार   पर   ??
4. मरने के बाद जन्नत में पुरुष को 72 हूरी (अप्सराए) मिलेगी...तो स्त्री को क्या मिलेगा...... 72 हूरा (पुरुष वेश्या) .??और  अगर  कोई  बच्चा  पैदा  होते ही  मर   जाये    तो   क्या  उसे भी  हूरें  मिलेंगी   ?  और वह  हूरों   का क्या  करेगा  ?

5.- यदि   मुसलमानों की  तरह  ईसाई   , यहूदी  और  हिन्दू   मिलकर     मुसलमानों  के विरुद्ध  जिहाद  करें    ,  तो  क्या मुसलमान  इसे   धार्मिक   कार्य   मानेंगे   या  अपराध    ?  और  क्यों ?

6-.यदि कोई  गैर  मुस्लिम  (काफ़िर) यदि अच्छे गुणों वाला हो तो भी. क्या अल्लाह उसको जहन्नुम की आग में झोक देगा....? और क्यों ?और, अगर ऐसा करेगा तो.... क्या ये अन्याय नहीं हुआ ??

7.कुरान   के  अनुसार  मुहम्मद  सशरीर  जन्नत   गए  थे  , और  वहां  अल्लाह  से बात भी  की थी   ,  लेकिन  जब अल्लाह  निराकार है  , और उसकी कोई   इमेज (छवि) नहीं है तो..मुहम्मद ने अल्लाह को कैसे देखा ??और   कैसे  पहिचाना  कि यह  अल्लाह   है   , या  शैतान    है  ?
8-  मुसलमानों   का  दावा   है कि      जन्नत  जाते  समय   मुहम्मद   ने  येरूसलम     की   बैतूल  मुक़द्दस   नामकी मस्जिद   में  नमाज  पढ़ी  थी ,लेकिन  वह   मुहम्मद के  जन्म  से पहले ही  रोमन    लोगों  ने  नष्ट  कर दी थी  .  मुहम्मद के  समय उसका  नामो  निशान   नहीं  था  , तो  मुहम्मद  ने उसमे नमाज कैसे पढ़ी थी  ? हम   मुहम्मद को  झूठा   क्यों   नहीं  कहें   ?

9-.अल्लाह ने  अनपढ़  मुहम्मद में  ऐसी   कौनसी   विशेषता   देखी  .  जो  उनको   अपना  रसूल  नियुक्त   कर दिया   ,क्या   उस  समय  पूरे अरब  में एकभी  ऐसा पढ़ालिखा    व्यक्ति   नहीं    था   , जिसे  अल्लाह   रसूल  बना   देता   , और  जब  अल्लाह  सचमुच  सर्वशक्तिमान   है  , तो   अल्लाह  मुहम्मद  को  63  साल   में भी    अरबी  लिखने    या  पढने की    बुद्धि   क्यों नहीं   दे पाया

10.जो  व्यक्ति  अपने  जिहादियों   की  गैंग   बना कर   जगह जगह लूट   करवाता   हो   ,  और लूट के  माल से बाकायदा      अपने लिए पाँचवाँ हिस्सा  (20 %० )  रख   लेता  हो  ,  उसे   उसे  अल्लाह   का रसूल   कहने की  जगह  लुटरों    का  सरदार  क्यों  न   कहें  ?

नोट-  यह  प्रश्नावली    भंडाफोडू    ब्लॉग    के लेखों  से   चुन   कर  बनायी   गयी   है  , जो पिछले   7  सालों   से इस्लाम   के नाम पर   होने वाले  आतंक  और  हिन्दू  विरोधी    जिहाद  का  भंडा   फोड़   करता   आया   है  . इन लेखों   का उद्देश्य  इस्लाम  की  असलियत  लोगों   को बताना है   ,  क्योंकि  इस्लाम   धर्म  नहीं  एक   उन्माद   है   ,  जो  विश्व   के  लिए  विशेष  कर  भारत के लिए  खतरा   है   . पाठकों   से निवेदन   है  कि  वह  भंडाफोडू  ब्लॉग  और  फेसबुक     में  इसी   नाम  के  ग्रुप   के लेखों   को  ध्यान   से पढ़ें   ,  और   उनका  प्रचार  प्रसार करें   .  इनकी लिंक   दी   जा रही   है  

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