मंगलवार, 22 दिसंबर 2015

इस्लामी वयस्क परीक्षण !

जिस समय टी .वी . के सभी चैनलों पर बजट सम्बन्धी चर्चा खबरें आ रही थीं , उसी समय बीच में 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में चलती बस में एक 23 साल की लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार के मामले में छठवें आरोपी के खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड ने गुरुवार आरोप तय करने का आदेश दे दिया .चूँकि यह घटना इतनी ह्रदय विदारक थी कि सारा भारत उन सभी नरराक्षसों को मौत की सजा देने की मांग कर रहा था .यद्यपि इस अपराध के लिए सभी अभियुक्त सामान रूप से दोषी हैं , लेकिन सरकार ने उनके नाम छुपा रखे थे , इन सभी पापियों ने जो दुष्कृत्य किया था , उसे देख कर हमने पहले ही लिख दिया था कि इतना नीच काम कोई मुसलमान ही कर सकता है , और बाद में यह बात सही निकली .क्योंकि अदालत ने छटवें आरोपी पर जितने भी अभियोग लगाये हैं , सभी काम मुहम्मद की सुन्नत है ,जिसे मुसलमान अपराध नहीं मानते ,
अब मुसलमान उस उस दुष्ट को नाबालिग साबित करने के लिए तरकीबें निकाल रहे हैं , ताकि उसे मौत की सजा से बचाया जा सके .यद्यपि इस बात में कोई शंका नहीं है कि सभी अपराधों की प्रेरणा इस्लामी तालीम से मिलती है , लेकिन आप किसी भी मुल्ले मौलवी से यह बात कहेंगे तो वह यही उत्तर देगा कि इस्लाम तो सदाचार , संयम , और परहेजगारी की तालीम देता है . इस्लाम में बलात्कार को गुनाह माना जाता है , इत्यादी ,
चूंकि मुख्य मुद्दा बलात्कार और छठवें मुस्लिम आरोपी के नाबालिग होने का है ,इसलिए इस्लामी सदाचार का पाखंड और असलियत के साथ इस्लाम के अनुसार बालिग (Adult )होने की जाँच कैसे होती है , इसका तरीका इस लेख में दिया जा रहा है ,
1-इस्लाम का ढोंगी सदाचार 
इस्लाम से पहले अरब के कुछ भाग में ईसाई धर्म का प्रभाव था . और कई ईसाई साधू ऐसे भी होते थे ,जो संयम का पालन करते हुए जीवन व्यतीत करते थे . मुहम्मद का गुरु और खदीजा का चचेरा भाई वरका बिन नौफल भी एक ब्रह्मचारी था . शायद उसी से प्रेरित कर मुहम्मद ने यह आयत कुरान में जोड़ी होगी , जिसमे मुसलमानों को यह उपदेश दिया गया है ,
"और जिन्हें विवाह करने का अवसर प्राप्त न हो ,उन्हें चाहिए कि वे तब तक संयम का पालन करें ,जब तक अल्लाह उन्हें अनुग्रह से संपन्न कर दे " सूरा -अन नूर 24:33

(let those who cannot find a match keep chaste till Allah give them independence by His grace. 24:33)

( इस आयत में संयमी के लिए अरबी में "अफीफ عفيف    " शब्द दिया गया है ,जिसका अंगरेजी में अर्थ "Chaste " होता है .दुसरे शब्दों को ऐसे लोगों को ब्रह्मचारी , अरबी में " ताहिरطاهر  "और अंगरेजी में पवित्र और संतpure-saintly"भी कह सकते हैं )लेकिन इस आयात को पढ़कर यह नहीं समझना चाहिए कि कुरान कुंवारे लोगों को संयम और कामवासना से बचने की शिक्षा देता है .बल्कि कुरान मुस्लिम युवकों को लडाकियों को पकड़ कर उन से बलात्कार करने की प्रेरणा देता है , जैसा कि इन आयतों के कहा गया है ,
 2-औरतें पकड़ो बलात्कार करो 
औरतें और अय्याशी इस्लाम के असली आधार है , इतिहास साक्षी है . कि मुहम्मद के साथी जिहादी सबसे पहले औरतें ही लूटते थे . यही नहीं हर मुसलमान मरने के बाद जन्नत में औरतें ही चाहता है .चूँकि भारत में जिहाद नहीं हो सकती ,इसलिए मुसलमान किसी अकेली लड़की को पकड़ लेते हैं . और बलात्कार कर देते हैं ,क्योंकि कुरान पकड़ी गयी औरत से सहवास करने की आज्ञा देता है , कुरान में कहा है ,
"अपनी पत्नियों के उन लौंडियों के साथ सम्भोग करना कुछ भी निंदनीय नहीं है ,जो तुम्हारे हाथों पकड़ी जाएँ "सूरा -अल -मआरिज 70:30
(Captives    your right hand  posess)
"अपनी पत्नियों के अलावा उन लौंडियों के साथ ,जो उनके कब्जे में हों ,सहवास करना निंदनीय नहीं है "सूरा -अल मोमिनून 23:6
"हमने तुम्हारी लौंडियाँ हलाल कर दी हैं ,जो अल्लाह ने तुम्हें माले गनीमत में दी हैं " सूरा -अहजाब 33:50
"पत्नियों के सिवाय तुम्हारे लिए तुम्हारी लौंडियाँ भी हलाल हैं ,अल्लाह सब चीज की खबर रखने वाला है " सूरा -अह्जाब 33:52
इस्लामी परिभाषा में हर प्रकार से हथियाई गयी , पकड़ी गयी , अगवा की गयी हो या खरीदी हुई सभी के लिए अरबी में एक ही शब्द "السرية " है .और ऐसी औरत की इच्छा के विरुद्ध सम्भोग करना इस्लाम में अपराध नहीं माना जाता है .(Islam allows a man to have intercourse with  capt  woman, whether he has a wife or wives or he is not married. A Captiive woman with whom a man has intercourse is known as a sariyyah )

लेकिन मुहम्मद ने ऐसे सहवास को बलात्कार नहीं कहते हुए अरबी में "मलिकत ईमानुकुम ملكت ايمانكم" और " मलिकत यमीनुकुम ملكت يمينكم" शब्द का प्रयोग किया है .और पकड़ी गयी औरत को रखैली माना है .जिनके साथ बलपूर्वक सहवास करना मुसलमानों का अधिकार है .देखिये विडिओ

Sex allowed with Slave Women in Islam_ Dr Zakir Naik.flv


http://www.youtube.com/watch?v=Bj74kfA5UQY

यही बात हदीस में भी कही है , सही मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3432
3-वयस्क की परिभाषा 
इस्लाम के अनुसार 15 साल की आयु होने पर लडके और लड़की को वयस्क माना जाता है .इस आयु को " बुलूग بُلوغ‎)" और ,आयु पूरा करने वाले को " बालिग  بالغ " कहा जाता है .इतनी आयु के लोग वयस्क ( Adult ) इसलिए माने जाते हैं , क्योंकि वह जिहाद के लिए उपयोगी होते हैं .
लड़का बालिग तब माना जाता है जब उसके श्रोणी के बाल निकलने लगें(grows pubic hair) , या शिश्न से वीर्य निकलने लगे .(has a nocturnal emission) और लड़की तब बालिग मानी जाती है जब उसका मासिक स्राव निकलने लगे .(when she  menstruates)यही बात फतवे में दी गयी है ,
Once you get semen you are baaaligh

"تحصل مرة واحدة السائل المنوي كنت الكبار  "

http://en.allexperts.com/q/Islam-947/2010/4/Adult-age.htm

4-वयस्कता का परीक्षण 
आज अदालत दिल्ली बलात्कार काण्ड छठवें (मुस्लिम)आरोपी के वयस्क होने का पता करने के लिए हाथ पैर मार रही है , कभी उसका जन्म प्रमाणपत्र खोज रही है कभी किशोर न्यालालय के आदेशानुसार धारा 3 के अधीन अभियुक्त की bone-ossification testकरवा रही है , लेकिन मार्च सन 627 में ही मुहम्मद ने एक ऐसी विधि खोज ली थी , जिस से मूर्ख व्यक्ति भी पता कर लेगा कि अभियुक्त बालिग है , अथवा नहीं .यह विधि हदीस में आज भी मौजूद है .इस हदीस के पीछे एक ऐतिहासिक घटना है .घटना इस प्रकार है , कि मदीना के पास "बनी कुरैजा " नामका एक यहूदी कबीला रहता था .मार्च सन 627 को मुहम्मद ने अपने जिहादियों के साथ उस कबीले पर अचानक धावा बोल दिया था जिसमे करीब 900 लोगों के सर काट कर हत्या कर दी गयी थी .मुहम्मद का आदेश था कि सभी बालिग पुरुषों को मार दिया जाये . और औरतों से बलात्कार करके उनको लौंडी बना लिया जाये .हदीस कहती है ,
1."कसीर इब्न अस्सायब ने कहा कि रसूल ने हम लोगों से कहा जाओ सभी बालिग़ मर्दों को मार डालो .पता करो जिन के नीचे के बाल दिखायी दें वह बालिग़ हैं , उन्हें क़त्ल कर दो . और जिनके नीचे के बाल नहीं निकले वह नाबालिग है , उनको जिन्दा छोड़ दो "

أَخْبَرَنَا الرَّبِيعُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَسَدُ بْنُ مُوسَى، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي جَعْفَرٍ الْخَطْمِيِّ، عَنْ عُمَارَةَ بْنِ خُزَيْمَةَ، عَنْ كَثِيرِ بْنِ السَّائِبِ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبْنَاءُ، قُرَيْظَةَ أَنَّهُمْ عُرِضُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ قُرَيْظَةَ فَمَنْ كَانَ مُحْتَلِمًا أَوْ نَبَتَتْ عَانَتُهُ قُتِلَ وَمَنْ لَمْ يَكُنْ مُحْتَلِمًا أَوْ لَمْ تَنْبُتْ عَانَتُهُ تُرِكَ ‏.‏

Sunan an-Nasa'i-Vol. 4, Book 27, Hadith 3459

2-"अतिय्या ने कहा कि बनू कुरैजा के जनसंहार के समय मैं मौजूद थे . लेकिन उस समय मेरे नीचे के बाल नहीं निकले थे . इसलिए मुझे नाबालिग मान कर जिन्दा छोड़ दिया गया था "

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ عَطِيَّةَ الْقُرَظِيِّ، قَالَ كُنْتُ يَوْمَ حُكْمِ سَعْدٍ فِي بَنِي قُرَيْظَةَ غُلاَمًا فَشَكُّوا فِيَّ فَلَمْ يَجِدُونِي أَنْبَتُّ فَاسْتُبْقِيتُ فَهَا أَنَا ذَا بَيْنَ أَظْهُرِكُمْ ‏.‏  "

Sunan an-Nasa'i-Vol. 4, Book 27, Hadith 3460

5-छठवें अभियुक्त के अपराध 

भले सेकुलर और मुसलमान उस छठवें अपराधी मुसलमान को बालिग नहीं मानें . लेकिन उसने जो जघन्य काम किये हैं उसके आगे मुहम्मद भी नाबालिग लगेगा .क्योंकि .. प्रमुख मजिस्ट्रेट गीतांजलि गोयल ने उस पर , गैंग रेप ,हत्या ,अपहरण , आप्रक्रतिक यौनाचार ,हत्या का प्रयास ,डकैती , सबूतों को नष्ट करने का प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगाये हैं .यही नहीं एक सब्जी विक्रेता को लूटने के मामले में उस पर लूटपाट का मामला भी चल रहा है .
हमें पूरा विश्वास है , यदि अदालत मुहम्मद की हदीस का पालन कर के छठवे आरोपी को बालिग़ मान लेती है , तो मुल्लों की हालत सांप छछूंदर जैसी हो जाएगी .

http://www.thereligionofpeace.com/muhammad/myths-mu-rape.htm

(200/92)

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2015

इस्लाम में नफ़रत की राक्षसी शिक्षा !

इस्लाम  की  बुनियाद नफ़रत पर टिकी   है ,और  ऐसा कहना   गलत  बिलकुल  नहीं   लगता   .  क्योंकि यदि  हम  इस्लाम  का इतिहास   देखें  तो यह बात शतप्रतिशत   सही  सिद्ध  होती  है  ,  यही नहीं    कुरान   में  ऐसी कई  आयतें  मौजूद हैं  जिनमे   मुस्लिमों  के  प्रति नफ़रत  की  शिक्षा   दी  गयी  है  . सब  जानते हैं कि  भारत   का विभाजन  नफरत   के कारण  हुआ  था  , और  कश्मीर  की  समस्या के पीछे    भी  मुसलमानों   की  हिन्दुओं   से नफ़रत ही  है  .
वास्तव  में  इस्लाम  ने  जन्म  लेते ही पूरे  विश्व को दो भागों  में  बाँट   दिया  है  . एक तरफ मुसलमान   और  दूसरी  तरफ  काफ़िर .
  . चूँकि   कुरान   में सभी  गैर  मुस्लिमों   को  इस्लाम  का  दुश्मन माना   गया है  ,इसलिए मुसलमान सभी  गैर  मुस्लिमों  से  नफ़रत  करने  लगे  . और जब  मुसलमानों  में भी  अनेकों  फिरके बन  गए  , और  हरेक  फिरका खुद  को सही  और दूसरे को गलत साबित   करने लगा तो सभी  फिरके के लोग  एक दूसरे से नफ़रत   करने लगे  , और  धीमे  धीमे   इस्लाम की  इस राक्षसी नफ़रत   की आग  ने सारे  इस्लामी  जगत   को अपनी  लपेट में ले लिया है  .
 फिरभी मक्कार  मुस्लिम  नेता बेशर्मी  से यही  कहते  रहते  हैं  , कि अल्लाह और इस्लाम  की नजर में  सभी  मनुष्य   समान   हैं  . और  इस्लाम  आपसी   भाईचारे  की  शिक्षा  देता  है .दुनिया  में इस से बड़ा झूठ  और कोई  नहीं   हो  सकता  , और मुसलमानों से बड़ा राक्षस और कोई नहीं  हो सकता  ,यही बात इस लेख  में प्रमाण सहित   दी  जा रही  है  ,


1-मस्जिदों  में नफ़रत  की शिक्षा 
चूँकि  मुसलमानों   के  लिए मस्जिदों   में जाकर  नमाज  पढ़ना  अनिवार्य   है  , और  नमाज के बाद  मुल्ले जो खुतबे  ( प्रवचन )   देते हैं ,उनमें  नफ़रत की  तालीम   दी  जाती   है , और हरेक फिरके  की  अलग अलग  मस्जिद  होती  है  , और  वहीँ  से नफ़रत के बीज  बोये   जाते है  ,अक्सर  मुल्ले  कहते  रहते हैं  कि  इस्लाम में भेदभाव नही होता है .लेकिन    यूपी के बरेलवी जमात के मस्जिदों में ये नोटिस दिखना अब आम बात हो गयी है ,इसका  एक   नमूना  देखिये  कि  इस  मस्जिद   में  क्या लिखा  है  ?
" मस्जिद  कमिटी  का खास  जरूरी  ऐलान ,
 वे मस्जिद सुन्नी  हनफ़ी  सहीहुल अक़ीदा लोगों  की  है  ,हुजूर  के फरमान  सहाबा  के तरीके ,गोसो  ख्वाजा मखदूम  पाक  ख़ुसूसन  मसले आला  हजरत  इमाम अहमद राजा  खान बरेलवी  के  पैरोकार  हैं  , यहाँ  पर  देवबंदी  , बहाबी  , तबलीगी  व्  दीगर अक़ीदा  के लोग इस मस्जिद  में  नहीं  आएं  , और अगर आते हैं  तो नतीजे के खुद  जिम्मेदार   होंगे  "
नोट- इसके ऊपर या  मस्जिद  की  किसी  दीवार   पर  इस्तेहार  लगाना या  स्टिकर लगाना  मना  है  
गौरतलब है की इस बरेलवी जमात के धर्मगुरु मौलाना तौकीर रजा है जिनके कदमो में अरविन्द केजरीवाल कदमबोशी करते है
नोट - इसकी  तस्वीर  देखिये

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 . अब पाठक  गण  बताये  की  लोगों  में नफ़रत  कौन  फैलाता है  ? और  जो  मुस्लिम  नेता  भाईचारे  की  वकालत  करते  रहते हैं   वह  झूठे हैं  कि  नहीं  ? और जब   खुद  मुसलमानों   के फिरकों   में नफरत बढ़ जाती  है  तो  सीरिया जैसा  हाल  हो   जाता   है  .
http://realityofsecularism.blogspot.in/2013/11/blog-post_11.html


2-शियाओं   का  मांस  खाने  वाले  सुन्नी 
सीरिया  में  होने वाले  जन  संहार   के  पीछे  कोई  राजनीतिक    कारण  या  सीमा विवाद   नहीं  है  ,  बल्कि सुन्नियों   द्वारा गैर  सुन्नियों    से  नफ़रत   है  .सुन्नी  शियाओं   को गैर  मुस्लिम  और इस्लाम  और  रसूल  का  दुश्मन   मानते हैं   , जिनके बारे में  कुरान  में  लिखा है   " जो लोग अल्लाह के  रसूल  से लड़ते   हैं  , उनकी  सजा यही  है कि बुरी  तरह  क़त्ल   किये जाएँ  , या उनके  हाथ  पैर  विपरीत दिशाओं   में काट  दिए  जाएँ  " सूरा -अल  माइदा  5 :33 

इन   दिनों  सीरिया में सुन्नी मुसलमान  यज्दियों  और  शियाओं   का क़त्ल   करके उनका  सफाया   करने में लगे हुए है  , जिसके लिए सुन्नियों   के  अनेकों   आतंकी गिरोह   बन   गए हैं  ,  उन्हीं   से एक  का नाम  "अल कतायब  अल फारूक -  كتائب الفاروق‎ " है .जिसका  अर्थ  "The Farouq Brigades  "  होता   है  . इस  दल  के स्थापक  का  नाम  "अबू  सक्कार -  ابو سكٌار " है  , इस  दल   का उद्देश्य  पूरे  मध्य  एशिया  में  सुन्नी  इस्लामी  खिलाफत   करना  और  सभी  गैर सुन्नियों   का  सफाया   करना  है   , यह शियाओं  से इतनी  नफ़रत  करते हैं  क़ि मारे गए   शिया व्यक्ति  की  लाश  से  दिल  और कलेजा  निकाल  कर  खा जाते  है  , और इसकी  विडिओ   बना कर सब जगह मिडिया में अपलोड कर देते हैं    , कुछ  दिनों   पहले ही  यह  खबर   लोगों  को   पता  चली   है . कुछ   समय  पहले अबू सक्कार   ने शियाओं से   कहा  था  " कुत्तो   मैं  कसम  खाता  हूँ  कि मैं  तुम्हारे  दिल  और   कलेजे  को  खा  जाऊँगा  "

Sakkar rants: 'I swear we'll eat from your hearts and livers, you dogs'He then raises one of the organs to his mouth and takes a bite


"يا كلاب، أقسم أنني سوف يأكل قلوب وأكباد الخاصة بك  "

 यह कह कर अबू  सक्कार  ने  एक  मरे हुए  शिया    के  शरीर  के हिस्से  ऊपर  उठा कर  दिखाए और  उस   लाश  के  दिल और  कलेजे  चबा   लिए

लो देखो इन नरपिशाचों को । सीरिया में शियाओं का माँस खाते मुस्लिम ब्रदरहुड के कार्यकर्ता :-Photo-

https://fbcdn-sphotos-a-a.akamaihd.net/hphotos-ak-prn1/558946_578514115531314_477650372_n.jpg

यही  घटना विडिओ   में  भी दी   गयी  है (  कृपया दिल मजबूत  करके  इस विडिओ  के  देखें  )Video
(WARNING GRAPHIC Syria Rebel Cuts out Soldier's Heart and Eats It)

https://www.youtube.com/watch?v=xEQFmZrQAx8

3-नर मांस खाना इस्लामी  परंपरा 
अरब के लोग  इतने  क्रूर    निर्दयी  और राक्षसी  स्वभाव  के  थे  ,कि उनमे  युद्ध  में  मारे गए  शत्रुओं   के  शरीरों  को फाड़  कर  उनके  दिल   और  कलेजा   खा  जाने  की  परंपरा    थी  , ऐसा वह   दुश्मनों  से  बदला  लेने के लिए  करते  थे  . और ऐसा  करने  में अपनी  शान   समझते   थे  . उनकी  यह  पिशाची  परंपरा   मुहम्मद  साहब   के समय  भी  थी  . ऐसी  ही  एक घटना  का विवरण  इस्लामी  इतिहासकार " इब्ने  इशाक "   ने अपनी  किताब  " सीरते  रसूलल्लाह -  سيرة رسول الله‎ "  में    दिया  है  . यह  घटना  शनिवार 19  मार्च सन 625 ( इस्लामी कैलेंडर  के अनुसार  3 शव्वाल 3  हिजरी "उहुद के युद्ध  की है  , जिसे " गजवए उहुद - غزوة أحد‎  "  भी  कहा  जाता है , मुसलमानों   की  तरफ  से इस  युद्ध   का नेतृत्व मुहम्मद साहब   के चचेरे  भाई " हमजा  बिन अब्दुल मुत्तलब - حمزة بن عبد المطلب  " कर रहे थे  ,और  दूसरी  तरफ  मुहम्मद  के  विरोधी  थे  . लेकिन इस  युद्ध   में  मुसलमान  पराजित   हो  गए , और "  हमजा  "  मारे  गए , और हमजा की लाश  युद्ध भूमि  में छोड़ कर  मुसलमान   भाग  गए.तभी  अबू  सुफ़यान की पत्नी    'हिन्दा , (मुआविया  की  माता और यजीद की दादी )  युद्ध भूमि    पर  उस  जगह गयी  जहाँ  हमजा की  लाश  पड़ी   थी  . हिन्दा  ने  हमजा   की  लाश    का  सीना फाड़ा  और सीने से दिल  और  कलेजा   बाहर निकाल  कर  चबा  लिया  ,  लेकिन  जब  वह उनको  नहीं  निगल  पायी  तो हमजा  के  दिल और कलेजे   को  थूक  दिया .
"According to Ibn Ishaq, after the battle, Hind cut open the body of Muhammad's uncle Hamza, whom she believed responsible for the death of her relatives, cut out his heart, and gnawed on it. According to Ibn Ishaq, she couldn't swallow it and spat it out.

लेकिन  प्रसिद्ध सुन्नी   इतिहासकार " अब्दुल बर्र -ابن عبدالبر‎   "( मृत्यु 2  दिसंबर  सन 1071 में हुई )    ने अपनी किताब  "इस्तियाब  फी  मअरकतुल  असहाब -الاستعياب في معرفة الاصحاب    "  में लिखा   है  कि हिन्दा  हमजा   का  दिल  और  कलेजा पका  कर  खा  गयी  . और  लोगों  से बोली  कि मैंने  मुसलमानों   से  अपने लोगों   की हत्या का   बदला   ले लिया

"Ibn ‘Abdu l-Barr states in his book "al-Istî‘âb" that she cooked Hamza's heart before eating it."

शायद इसी   लिए  कुरान  की  इस  आयत  में  मुसलमानों  से  पूछा   गया है   कि  क्या वह  अपने ही  भाई    (  मुसलमान )   का   मांस  खाना  पसंद  करेंगे  ," क्या  कोई इस  बात  को पसंद   करेगा  कि अपने ही किसी  मरे हुए  भाई  का  मांस   खाए  " 
 सूरा  - अल हुजुरात  49:12 

 याद रखिये  इस  आयत में मनुष्य   का  मांस   खाने   के बारे में   सवाल  किया गया   है , मनुष्य   का  मांस  खाने  की  मनाही  नहीं   की गयी है
 यही   कारण  है  कि  मुसलमान   यहाँ भी गुप्त  रूप  से अपने दुश्मनों   का  मांस  खाते  हैं   , सीरिया    में  तो यह राक्षसी  कर्म  खुले  आम  हो  रहे हैं  ,

देखिये  विडिओ -डरावना  इस्लाम

ttps://www.youtube.com/watch?v=fZGGaDfeLTw


http://realityofsecularism.blogspot.in/2013/11/blog-post_7.html

(209)

सोमवार, 7 दिसंबर 2015

मुसलमान किसके वफादार ?

इस समत विश्व में लगभग 200 देश हैं ,जिनमे अपना अपना संविधान और अपने नियम कानून लागू है .और अलग शासन प्रणाली है .और कुछ इस्लामी देश हैं ,लेकिन कुछ ऐसे गैर मुस्लिम देश भी हैं जहाँ मुसलमानों की अच्छी खासी जनसंख्या मौजूद है .हरेक देश चाहता है कि उस देश के निवासी संविधान और देश के कानून के प्रति निष्ठावान وفي  (Loyal )और  वफादार बनें ,ताकि सबको न्याय मिल सके .और देश में शांति व्यवस्था बनी रहे .
लेकिन देखा गया है कि ,मुसलमान जिस भी गैर मुस्लिम देश में रहते हैं ,उसके संविधान और कानून कि अनदेखी करते रहते है .और किसी न किसी बहाने उस देश की सरकारों ने लिए समस्याएं पैदा करते रहते है .चाहे उनको कितनी भी सुविधाएँ क्यों न दी जाएँ .
इसका कारण यह है कि मुसलमान मानव निर्मित किसी भी कानून या नियम को अपूर्ण और अनुपयुक्त मानते है .मुसलमानों के अनुसार केवल इस्लाम ही एकमात्र पूर्ण कानून या दीन الدِّين  (Law )है .जो अल्लाह ने बनाया है .देखिये कुरान क्या कहता है -
1 -इस्लाम सम्पूर्ण कानून है 
"आज के दिन हमने उम्हारे लिए दीन ( Law ) को परिपूर्ण कर दिया है और केवल इस्लाम को ही तुम्हारे लिए धर्म नियुक्त कर दिया है "
सूरा -मायादा -5 :3
2 -किसी को अपना हितैषी नहीं मानों 
"हे लोगो अल्लाह के अलावा किसी को अपना मित्र या संरक्षक नहीं मानों "सूरा-अल कहफ़ 18 :26
"जो अल्लाह के अलावा किसी को भी अपना मित्र या संरक्षक बनाएगा उसे कोई सहायता नहीं करो "सूरा -अन निसा 4 :123
3 -दुनिया के स्वामी मुसलमान है 
"हे मुहम्मद तुम्हारे आगे और पीछे और उसके बीच में जितनी भी भूमि है ,वह तुम्हारी है .केवल तुम्हीं उसके एकमात्र स्वामी हो "
सूरा -मरियम 19 :64
4 -सिर्फ शरियत का कानून मानों 
"हे ईमान वालो ,तुम केवल रसूल के बताये आदेशों (शरियत ) को मानों ,और यदि किसी भी प्रकार का विवाद हो तो ,रसूल के बताये गए आदेशों के अनुसार ही फैसला करो "सूरा -अन निसा 4 :59
"तुम्हारे बीच में किसी बात का फैसला केवल अल्लाह के नियमों के अनुसार ही हो सकता है .याद रखो इस तरह से इमान वालों के मुकाबले में काफिरों को कोई रास्ता नहीं मिल सकेगा "सूरा -अन निसा 4 :141
5 -ताकत के बल पर दूसरों को निकालो 
"और जो सबसे अधिक बलशाली हो ,वह अपने से कमजोरों को अपने क्षेत्र से निकाल दे ,क्योंकि आसमानों और जमीन के सभी संसाधन और उन पर प्रभुत्व अल्लाह ने अपने रसूल और मुसलमानों के लिए दिए है "सूरा -मुनाफिकून 63 :7 और 8
6 -जनमत की परवाह नहीं करो 
"चाहे लोगों का कुछ भी मत (इच्छा ) हो उम उसका पालन नहीं करो .जो उसका पालन करे तो जानलो कि इस गुनाह (इच्छा पालन )के अल्लाह उसको किसी संकट में डालना चाहता है ."सूरा मायदा 5 :49
7 -भाईचारा नहीं रखो 
" ईमान वालो ,को चाहिए कि ,वह किसी गैर ईमान वाले को अपना मित्र नहीं बनायें ,और उनसे दूरी बना कर बचते रहें .जैसा कि तुमको उन से बचने का हक़ दिया गया है ,फिर भी जो उनसे भाईचारा बनाएगा तो ,समझ लो उसे अल्लाह से कोई नाता नहीं है "सूरा -आले इमरान 3 :28
8 -झगडा करो .अशांति फैलाओ 
"जो लोग सच्चे धर्म (इस्लाम ) को अपना दीन (धर्म )नहीं मानते है ,और अपने ही धर्म को मानते है ,तुम उन से लड़ते रहो .और इतना लड़ो कि वह अप्रतिष्ठित हो कर जजिया देने पर विवश हो जाएँ "सूरा अत तौबा 9 :29
9 -मुहमद की हड़प नीति 
"अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,जब तुम किसी काफ़िर ,मुशरिक या ईसाई से व्यवहार करो तो उन से इन तीन प्रकार से बर्ताव करो ,यदि वह ख़ुशी से कुछ दे दें तो स्वीकार कर लो ,फिर उनको इस्लाम काबुल करने की शर्त रखो ,यदि वह यह शर्त नहीं मानें तो उनसे जजिया की मांग करो .फिर यदि वह जजिया नहीं देते ,तो उनकी लोगों को बंधक बना लो ,और फिरौती ले लो .यदि फिर भी इस्लाम नहीं करते तो उनसे युद्ध करो "सही मुस्लिम -किताब 19 हदीस 4294
10 -सम्पूर्ण पृथ्वी मुसलमानों की बपौती है 
"अबू हुरैरा ने कहा कि एक बार हम रसूल के साथ मस्जिद में बैठे थे ,तभी रसूल न कहा चलो हम यहूदियों के गाँव "बैतूल मिदरास"चलें ,वहां जाकर रसूल ने यहूदियों से कहा कि यदि तुम लोग इसी वक्त इस्लाम कबूल कर लोगे तो तो तुम सुरक्षित बच जाओगे .क्या तुम्हें यह पता नहीं है कि ,पृथ्वी पर जितनी भी भूमि है ,वह रसूल और मुसलमानों की है .इसलिए तुम्हारे पास जितनी भी सम्पति और जमीं है सब रसूल के हवाले कर दो .और हम तुम्हें केवल इतनी अनुमति है कि हैं कि तुम अपनी सम्पति बेचकर जा सकते हो "बुखारी -जिल्द 4 किताब 53 हदीस 392 .
यह बात तो साबित हो चुकी है कि मुसलमान किसी भी देश के कानून और संविधान पर निष्ठां नहीं रखते .और भी गैर मुस्लिम देश में रहते हैं उस देश को खोखला करते रहते है .और नयी नयी मांगे करते रहते है .फिर भी उनकी मांगें सपाप्त नहीं होंगी .जैसे अगर पूरा कश्मीर भी मुसलमानों को मिल जाये तब भी वह भारत का और हिस्सा मांगेंगे .
असल में मुसलमान देशों की भौगोलिक ,और राजनीतिक सीमाओं को नहीं मानते है इस्लामी कूटनीतिज्ञों और चालाक मुल्लों ने विश्व को कुरान और हदीसों के अधार इन भागों में बाँट रखा है .जिन्हेंدار  दार या House कहा जाता है .इन्हीं  6 वर्गों ध्यान में रख कर ही मुस्लिम देश अन्य देशो के साथ कोई सम्बन्ध या समझौता
 (Treaty )करते हैं .इस्लाम के अनुसार विश्व को इन वर्गों में विभाजित किया गया है -
1 -दारुल इस्लाम : دارالاسلام  House of Peace इसको दारुल तौहीद دارُالتوحيد  भी कहा जाता है .यस उस भूभाग को कहा जाता है ,जहाँपर इस्लामी हुकूमत होती हो .और जहाँपर मुसलमान निडर होकर अपनी गतिविधियाँ चला सकें .दारुल इस्लाम मुसलमानों गढ़ होता है .अबू हनीफा ने यह नाम कुरान की इन आयतों से लिया था ."अल्लाह तुम्हें सलामती के घर (दारुल इस्लाम ) की ओर बुलाता रहता है ,ताकि तुम सीधे रास्ते पर चलो "
सूरा -यूसुफ 10 :25
(इसी आयत की तफ़सीर में लिखा है "जहाँ पर मुसलमानों की हर प्रकार की सुरक्षा हो ,और जहाँ से वह जिहाद करें तो उनपर कोई आपत्ति नहीं आये "इसी तरह लिखा है "और अल्लाह मुसलमानों के लिए ऐसा सलामती का घर (दारुल इस्लाम ) चाहता है जहाँ पर उनके मित्र और संरक्षक मौजूद हों "सूरा-अल अनआम 6 :128 .इसी दारुल इस्लाम का सपना दिखा कर जिन्ना ने मुसलमानों को पाकिस्तान बनवाने के लिए प्रेरित किया था .
क्योंकि जिन्ना की नजर में भारत ناپاك  नापाक (अपवित्र ) देश था ,और जिन्ना पाक پاك  (पवित्र )देश پاكِستان   बनाना चाहता था .
2 -दारुल हरब : دارالحرب House of War .युद्ध का घर ,यह उस भूभाग को कहा जाता है जहाँ गैर मुस्लिमों की संख्या अधित हो .या गैर मुस्लिम सरकारे हों ,या जहाँ पर प्रजातंत्र (Democracy ) चलती हो .या जिनका मुस्लिम देशों से विवाद हो .और यदि दारुल हरब के लोग दारुल इस्लाम में जाएँ तो उनको निम्न दर्जे का व्यक्ति या जिम्मी Zimmi मानकार जजिया लिया जाये .या कोई अधिकार नहीं दिया जाये
3 -दारुल अमन : دارالامن House of Safty .बचाव का घर यह उस भूभाग को कहा जाता है ,जहाँ अधिकांश गैर मुस्लिम रहते हों ,लेकिन मुसलमानों को भी कोई न कोई अधिकार दिया गया हो .या जहाँपर इस्लाम को खतरा होने का भय नहीं लगे .इस्लाम इस वर्गीकरण के अनुसार भारत भी एक "दारुल अमन "है .क्योंकि यहाँ मुसलमानों को हिन्दुओं से अधिक अधिकार प्राप्त हैं .
4 -दारुल हुंदा :دارالهنُنده  House of Calm .विराम का घर ,यह उस क्षेत्र को या उस देश को कहा जाता है ,जिसका किसी मुस्लिम देश से युद्ध या झगडा होता रहता हो .लेकिन किसी कारण से लड़ाई बंद हो गयी हो .और भविष्य में या तो समझौते की गुंजायश हो ,या फिर युद्ध की संभावना हो .और यह एक प्रकार की waite and watch की स्तिथि होती है
5 -दारुल अहद :دارُالعهد  House of Truce .युद्ध विराम का घर ,इसे दारुल सुलहدارالسُلح   या House of Treaty भी कहा जाता है ,यह उन देशो को कहा जाता है ,जिन्होंने मुस्लिम देशो से किसी प्रकार की कोई संधि या समझौता कर लिया हो .औए जिसे दोनो देशों के आलावा दुसरे मुस्लिम देशो ने स्वीकार कर लिया हो .
6 -दारुल दावा : دارُالدعوة House of Invitation .आह्वान का घर ,यह उन देशों या उन क्षेत्रों या उन इलाकों को कहा जाता है जहाँ गई मुस्लिम हों और जिनको मुसलमान बनाने के लिए कोशिश करना जरुरी हो .यहाँ के लोग इस्लाम के बारे में अधिक नहीं जानते हो .(ऐसे भूभाग को दारुल जहलियाدارالجاهلِية  या House of ingorant खा जाता है )और फिर किसी भी उपाय से उस भूभाग को दारुल इस्लाम में लेन की योजनायें बने जाती है या फिर उस क्षेत्र को कहा जाता है जहाँ के मुसलमान कट्टर नहीं होते हैं और उनको कट्टर बनाने की जरूरत हो ,ताकि उनको जिहादी कामों में लगाया जा सके .और इस काम के लिए उस क्षेत्रों में जमातें भेजी जाती है

इस लेख से हमें यह समझ लेना चाहिए कि मुसलमानों ने विश्व के देशो या किसी देश के भूभाग या किसी क्षेत्र को जो अलग अलग दार या Houses में बाँट कर विभाजित किया है .वह राजनीतिक ,या भौगोलिक सीमाओं के आधार पर नहीं है .इस्लामी परिभाषा में "दार "कोई देश ,प्रान्त ,जिला या उसका कोई हिस्सा भी हो सकता है .और इन्हीं दार के house के हालात देख कर मुसलमान अपनी रणनीतियाँ तय करते है जैसे कहीं शांत हो जाते हैं और कही आतंकवाद को तेज कर देते हैं .मुसलमानों का एकमात्र उद्देश्य और लक्ष्य इन सब "दार "को दारुल इस्लाम के दायरे में लाने का है .ताकि दुनिया में " विश्व में इस्लाम राज्य Pan Islamic State "की स्थापना हो सके .
मुसलमानों की तरह Catholic Church ने भी देशों को बाँट रखा है .
आज इस बात की अत्यंत जरुरत है कि हम मुसलमानों कि कुटिल नीतियों और नापाक मंसूबों विफल करने का यत्न करते रहें ,और देश को
दारुल इस्लाम बनाने से रकने के लिए पूरी ताकत लगा दें .और इस पवित्र कार्य में लोगों को उत्साहित करें और हरेक साधनों का उपयोग करें .तभी देश और धर्म बच सकेगा .
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www.TheReligionofPeace - Islam Loyalty to Non-Muslim Governments.htm

गुरुवार, 26 नवंबर 2015

बलात्कार :जिहाद का हथियार

जिहाद दुनिया का सबसे घृणित कार्य और सबसे निंदनीय विचार है .लेकिन इस्लाम में इसे परम पुण्य का काम बताया गया है .जिहाद इस्लाम का अनिवार्य अंग है .मुहम्मद जिहाद से दुनिया को इस्लाम के झंडे के नीचे लाना चाहता था .मुहलामानों ने जिहाद के नाम पर देश के देश बर्बाद कर दिए .हमेशा जिहादियों के निशाने पर औरतें ही रही हैं .क्योंकि औरतें अल्लाह नी नजर में भोग की वस्तु हैं .और बलात्कार जिहाद का प्रमुख हथियार है .मुसलमानों ने औरतों से बलात्कार करके ही अपनी संख्या बढाई थी .मुहम्मद भी बलात्कारी था .मुसलमान यही परम्परा आज भी निभा रहे है .यह रसूल की सुन्नत है ,कुरान के अनुसार मुसलमानों को वही काम करना चाहिए जो मुहम्मद ने किये थे .कुरान में लिख है-

"जो रसूल की रीति चली आ रही है और तुम उस रीति(सुन्नत )में कोई परवर्तन नहीं पाओगे "सूरा -अल फतह 48 :23 

"यह अल्लाह की रीति है यह तुम्हारे गुजर जाने के बाद भी चलती रहेगी .तुम इसमे कोई बदलाव नहीं पाओगे .सूरा -अहजाब 33 :62 
"तुम यह नहीं पाओगे कि कभी अल्लाह की रीति को बदल दिया हो ,या टाल दिया गया हो .सूरा -फातिर 33 :62 

यही कारण है कि मुसलमान अपनी दुष्टता नही छोड़ना चाहते .जिसे लोग पाप और अपराध मानते हैं ,मुसलमान उसे रसूल की सुन्नत औ अपना धर्म मानते है .और उनको हर तरह के कुकर्म करने पर शर्म की जगह गर्व होता है .बलात्कार भी एक ऐसा काम है .जो जिहादी करते है -

1 -बलात्कार जिहादी का अधिकार है 

"उकावा ने कहा की रसूल ने कहा कि जिहाद में पकड़ी गई औरतों से बलात्कार करना जिहादिओं का अधिकार है .

बुखारी -जिल्द 1 किताब 5 हदीस 282 

"रसूल ने कहा कि अगर मुसलमान किसी गैर मुस्लिम औरत के साथ बलात्कार करते हैं ,तो इसमे उनका कोई गुनाह नहीं है .यह तो अल्लाह ने उनको अधिकार दिया है ,औ बलात्कार के समय औरत को मार मी सकते हैं"

बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 132 

बुखारी -जिल्द 1 किताब 52 हदीस 220 


2 -जिहाद में बलात्कार जरूरी है 

सईदुल खुदरी ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि सामूहिक बलात्कार करने से लोगों में इस्लाम की धाक बैठ जाती है .इसलिए जिहाद में बलात्कार करना बहुत जरूरी है .

बुखारी जिल्द 6 किताब 60 हदीस 139 

3 -बलात्कार से इस्लाम मजबूत होता है 

"इब्ने औंन ने कहा कि,रसूल ने कहा कि किसी मुसलमान को परेशां करना गुनाह है ,और गैर मुस्लिमों को क़त्ल करना और उनकी औरतों के साथ बलात्कार करना इस्लाम को आगे बढ़ाना है.बुखारी -जिल्द 8 किताब 73 हदीस 70 

"रसूल ने कहा कि मैंने दहशत और बलात्कार से लोगों को डराया ,और इस्लाम को मजबूत किया .बुखारी -जिल्द 4 किताब 85 हदीस 220 

"रसूल ने कहा कि ,अगर काफ़िर इस्लाम कबूल नहीं करते ,तो उनको क़त्ल करो ,लूटो ,और उनकी औरतों से बलात्कार करो .और इस तरह इस्लाम को आगे बढ़ाओ और इस्लाम को मजबूत करो.बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 464 

4 -माल के बदले बलात्कार 

"रसूल ने कहा कि जो भी माले गनीमत मिले ,उस पर तुम्हारा अधिकार होगा .चाहे वह खाने का सामान हो या कुछ और .अगर कुछ नहीं मिले तो दुश्मनों कीऔरतों से बलात्कार करो ,औए दुश्मन को परास्त करो .बुखारी -जिल्द 7 किताब 65 हदीस 286 . 

(नोट -इसी हदीस के अनुसार बंगलादेश के युद्ध में पाकिस्तानी सेना ने बलात्कार किया था )

5 -बलात्कार का आदेश ' 

"सैदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने अपने लोगों (जिहादियों )से कहा ,जाओ मुशरिकों पर हमला करो .और उनकी जितनी औरतें मिलें पकड़ लो ,और उनसे बलात्कार करो .इस से मुशरिकों के हौसले पस्त हो जायेंगे .बुखारी -जिल्द 3 किताब 34 हदीस 432 

6 -माँ बेटी से एक साथ बलात्कार 

"आयशा ने कहा कि .रसूल अपने लोगों के साथ मिलकर पकड़ी गई औरतों से सामूहिक बलात्कार करते थे .और उन औरतीं के साथ क्रूरता का व्यवहार करते थे .बुहारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 67 

"सैदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने 61 औरतों से बलात्कार किया था .जिसमे सभी शामिल थे .औरतों में कई ऎसी थीं जो माँ और बेटी थीं हमने माँ के सामने बेटी से औए बेटी के सामने माँ से बलात्कार किया .मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3371 और बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 288 

7 -बलात्कार में जल्दी नहीं करो 

"अ ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,पकड़ी गयी औरतो से बलात्कार में जल्दी नहीं करो .और बलात्कार ने जितना लगे पूरा समय लगाओ "

बुखारी -जिल्द 2 किताब 23 हदीस 446 . 

अब जो लोग मुसलमानों और मुहम्मद को चरित्रवान और सज्जन बताने का दवा करते हैं ,वे एक बार फिर से विचार करे, इस्लाम में अच्छाई खोजना मल-मूत्र में सुगंध खोजने कि तरह है .आप एक बार मुस्लिम ब्लोगरो द्वारा इस्लाम और मुहम्मद के बारे में लिखी हुई झूठी बातों को पढ़िए फिर दिए तथ्यों पर विचार करके फैसला कीजिये

.अधिक जानकारी के लिए यह अंगेजी ब्लॉग देखें

http://nakedmuhammad.blogspot.com/

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शनिवार, 21 नवंबर 2015

जेहाद की आय का साधन

इस्लाम के कई देश इस समय आतंकवाद से प्रभावित हैं। यह भी सच है कि इनमें अधिकांशत: इस्लामी जेहाद के नाम पर फैलाया जाने वाला आतंकवाद है। यदि हम एक सच्चे मुसलमान की परिभाषा को समझना चाहें तो हम देखेंगे कि इस्लाम में जहां हत्या, बलात्कार, चोरी, झूठ, निंदा-चुगली आदि को इस्लाम में प्रतिबंधित या इन्हें ग़ैर इस्लामी बताया गया है वहीं शराब नोशी से लेकर शराब के उत्पादन अथवा कारोबार में शामिल होने तथा ऐसी किसी भी नशीली वस्तु के प्रयोग अथवा उसके उत्पादन या कारोबार में संलिप्त होने को भी गैर इस्लामी कृत्य करार दिया गया है। इस्लाम में इस प्रकार की वस्तुओं के सेवन तथा इस धंधे में शामिल होने को गुनाह भी करार दिया गया है। प्रश्न यह है कि क्या जेहाद के नाम पर दुनिया में आतंकवाद फैलाने वाले मुस्लिम परिवारों के आतंकी सदस्य इस वास्तविकता से परिचित हैं या नहीं?और यदि हैं तो वे उसपर कितना अमल करते हैं। वास्तव में इन स्वयंभू इस्लामी लड़ाकों के जेहन में किस कद्र सच्चा इस्लाम बसता है और यह आतंकी इस्लामी शिक्षाओं पर कितना अमल करते हैं तथा कितना समर्पण रखते हैं।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पिछले दिनों एक प्रतिष्ठित मीडिया ग्रुप के एक खोजी पत्रकार द्वारा जेहाद के नाम पर अपना सब कुछ कुर्बान कर देने का जबा रखने वाले एक आतंकवादी से गुप्त रूप से मुलांकात कर उसका साक्षात्कार किया गया। अमजद बट्ट नामक इस तीस वर्षीय पंजाबी युवक के कंधे पर जहां ए के 47 लटकी हुई थी वहीं उसकी कमर में एक रिवाल्वर भी लगी नार आ रही थी। उसने अपना परिचय देते हुए यह बताया कि पहले तो वह स्वयं अफीम, स्मैक, हेरोइन जैसे तमाम नशे का आदी था और बाद में इसी कारोबार में शामिल हो गया। उसने बताया कि नशीले कारोबार में शामिल होने के बाद आम लोग उसे गुंडा कहने लगे। बट्ट ने यह भी स्वीकार किया उसे न तो नमाज अदा करनी आती है न ही कुरान शरींफ पढ़ना। और इसके अतिरिक्त भी किसी अन्य इस्लामी शिक्षा का उसे कोई ज्ञान नहीं है। परंतु इसके बावजूद अमजद बट्ट का हौसला इतना बुलंद है कि वह इस्लाम के नाम पर किसी की जान लेने या अपनी जान देने में कोई परेशानी महसूस नहीं करता। पाकिस्तान का पंजाब प्रांत, पाक अधिकृत कश्मीर तथा पाक-अंफंगान सीमांत क्षेत्र एवं फाटा का इलाक़ा ऐसे लड़ाकुओं से भरा पड़ा है जो इस्लामी शिक्षाओं को जानें या न जानें, और उनपर अमल करें या न क रें परंतु इस्लाम के नाम पर मरना और मारना उन्हें बख़ूबी आता है। आतंकी अमजद बट्ट के अनुसार जब उसने नशीले कारोबार के रास्ते पर चलते हुए अपने आप को जुर्म की काली दुनिया में धकेल दिया उसके बाद उसके संबंध जेहाद के नाम पर आतंक फैलाने वाले आतंकी संगठनों से भी बन गए।
यहां एक बार फिर यह काबिले जिक्र है कि जेहादी आतंकवाद की जड़ें वहीं हैं जिनका जिक्र बार-बार होता आ रहा है और इतिहास में यह घटना एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो चुकी है। अर्थात् सोवियत संघ की घुसपैठ के विरुध्द जब अफगानी लड़ाकुओं ने स्वयं को तैयार किया उस समय इन लड़ाकुओं ने जिन्हें तालिबानी लड़ाकों के नाम से जाना गया,सोवियत संघ के विरुद्ध खुदा की राह मे जेहाद घोषित किया। इस कथित जेहादी युद्ध में जहां अशिक्षित अंफंगानी मुसलमान सोवियत संघ के विरुद्ध एकजुट हुए वहीं इसी दौरान अमेरिका ने भी सोवियत संघ के विरुद्ध तालिबानों को न केवल सशस्त्र सहायता दी तथा अफगानिस्तान में इन लड़ाकुओं के प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने में भी उनकी पूरी मदद की बल्कि उन्हें नैतिक समर्थन देकर उनकी हौसला अफजाई भी की। इनमें से कई ट्रेनिंग कैंप ध्वस्त तो ारूर हो चुके हैं परंतु इनमें प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके तमाम आतंकी अभी भी मानवता के लिए सिरदर्द बने घूम रहे हैं। अमजद बट्ट ने भी एक ऐसे ही प्रशिक्षण केंद्र से जेहादी पाठ पढ़ा तथा हथियार चलाने की ट्रेनिंगा ली। उसके अनुसार जब वह प्रशिक्षण प्राप्त कर हथियार लेकर अपने गांव लौटा तो कल तक अपराधी व गुंडा नजर आने वाला व्यक्ति अब उसके परिवार, ख़ानदान तथा गांव वालों को ख़ुदा की राह में मर मिटने का हौसला रखने वाला एक समर्पित जेहादी मुसलमान नार आने लगा। उसे देखकर तथा उससे प्रेरित होकर उसी के अपने ख़ानदान के 50 से अधिक युवक एक ही बार में जेहादी मिशन में इसलिए शरीक हो गए कि कहीं अमजद बट्ट अल्लाह की राह में जेहाद करने वालों में आगे न निकल जाए।
आगे चलकर यही लड़ाके किसी न किसी आतंकी संगठन जैसे लश्करे तैयबा,जैशे मोहम्मद, हरकत-उल-अंसार अथवा लश्करे झांगवी जैसे आतंकी संगठनों से रिश्ता स्थापित कर उनके द्वारा निर्धारित लक्ष्यों पर काम करने लग जाते हैं। इन सभी संगठनों का गठन भले ही अलग-अलग उद्देश्यों को लेकर किया गया रहा हो। परंतु यह सभी सामूहिक रूप से मानवता को नुंकसान पहुंचाने वाले ग़ैर इस्लामी काम अंजाम देने में लगे रहते हैं। उदाहरण के तौर पर लश्करे झांगवी का गठन पाकिस्तान में सर्वप्रथम शिया विरोधी आतंकवादी कार्रवाईयां अंजाम देने हेतु किया गया था। इस संगठन पर शिया समुदाय को निशाना बनाकर सैकड़ों आतंकी हमले किए गए। उसमें दर्जनों हमले ऐसे भी शामिल हैं जो इन के द्वारा मस्जिद में नमाज पढ़ते हुए मुसलमानों पर या इमामबाड़ों व मोहर्रम के जुलूस आदि का निशाना बनाकर किए गए। अब यही संगठन अपने आपको इतना सुदृढ़ आतंकी संगठन समझने लगा है कि इसने पाकिस्तान में अपने हितों को नुंकसान पहुंचाने वालों को भी निशाना बनाना शुरु कर दिया है। इसके सदस्य पाकिस्तान में सेना विरोधी आतंकी कार्रवाईयों में भी पकड़े जा चुके हैं।
इसी प्रकार लश्करे तैयबा जिसका गठन कश्मीर को स्वतंत्रता दिलाने के उद्देश्य से किया गया था इसने भी अपने निर्धारित लक्ष्य से अलग काम करने शुरु कर दिए। इस संगठन पर भी जहां भारत में तमाम निहत्थे बेगुनाहों की हत्याएं करवाने का आरोप है वहीं इस संगठन पर पाकिस्तानी सेना के एक सेवानिवृत जनरल की हत्या का भी आरोप है। मानवता के विरुध्द संगठित रूप से अपराधों को अंजाम देने वाले ऐसे संगठन यादातर अपने साथ गरीब व निचले तबंके के अशिक्षित युवाओं को यह कहकर जोड़ पाने में सफल हो जाते हैं कि यहां उन्हें दुनिया की सारी चीजें तो मिलेंगी ही साथ ही उनके लिए अल्लाह जन्नत के रास्ते भी खोल देगा। और इसी लालच में एक अनपढ़, बेराजगार और मोटी अक्ल रखने वाला मुसलमान नवयुवक अपने आपको जेहादी आतंक फैलाने वाले संगठनों से जोड़ देता है। इस समय पाकिस्तान में अधिकांश आतंकी संगठन जो भले ही अलग-अलग उद्देश्यों को लेकर गठित किए गए थे परंतु अब लगभग यह सभी आतंकी ग्रुप अमेरिका, भारत तथा इनके हितों को निशाना बनाने के लिए अपनी कमर कस चुके हैं।
पाकिस्तान की ही तरह अंफंगानिस्तान में भी इस्लामी जेहाद का परचम जिन तथाकथित इस्लामी जेहादियों के हाथों में है उन की भी वास्तविक इस्लामी हंकींकत इस्लामी शिक्षाओं से कोसों दूर है। तालिबानी मुहिम के नाम से प्रसिद्ध इस विचारधारा में संलिप्त लड़ाकुओं की आय का साधन अंफगानिस्तान में होने वाली अंफीम की खेती है। यह भी दुनिया का सबसे ख़तरनाक नशीला व्यापार है। एक अनुमान के अनुसार विश्व के कुल अंफीम उत्पादन का 93 प्रतिशत अफीम उत्पादन केवल अंफंगानिस्तान में होता है। यहां लगभग डेढ़ हाार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में इसकी घनी पैदावार होती है। सन्2007 के आंकड़े बताते हैं कि उस वर्ष वहां 64 बिलियन डॉलर की आय अफीम के धंधे से हुई थी। इस बड़ी रक़म को जहां लगभग 2 लाख अंफीम उत्पादक परिवारों में बांटा गया वहीं इसे तालिबानों के जिला प्रमुखों, घुसपैठिए लड़ाकों, जेहादी युद्ध सेनापतियों तथा नशाले धंधे के कारोबार में जुटे सरगनाओं के बीच भी बांटा गया। उस समय अंफीम का उत्पादन लगभग 8200 मीट्रिक टन हुआ था। यह उत्पादन पूरे विश्व की अफीम की अनुमानित खपत का 2 गुणा था।
ड्रग कारोबार का यह उद्योग केवल अफ़ीम तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसी अफ़ीम से विशेष प्रक्रिया के पश्चात 12 प्रतिशत मारंफिन प्राप्त होती है तथा हेरोइन जैसे नशीले पदार्थ का भी स्त्रोत यही अफ़ीम है। तालिबानी लड़ाकों की रोजी-रोटी, हथियारों की ख़रीद-फरोख्त तथा उनके परिवारों के पालन पोषण का मुख्य साधन ही अफ़ीम उत्पादन है। एक ओर जहां ईरान जैसे देश में ऐसे कारोबार से जुड़े लोगों को मौत की साज तक दे दी जाती है वहीं अपने को मुसलमान, इस्लामी, जेहादी आदि कहने वाले यह तालिबानी लडाके इसी गैर इस्लामी धंधे की कमाई को ही अपनी आय का मुख्य साधन समझते हैं। यही तालिबानी हैं जोकि औरतों को सार्वजनिक रूप से मारने पीटने तथा अपमानित करने जैसा गैर इस्लामी काम प्राय:अंजाम देते रहते हैं। स्कूल तथा शिक्षा के भी यह प्रबल विरोधी हैं। निहत्थों की जान लेना तो गोया इनकी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल हो चुका है। ऐसे में क्या यह सवाल उठाना जाया नहीं है कि उपरोक्त सभी गैर इस्लामी कामों को अंजाम देने वालों को यह अधिकार किसने और कैसे दिया कि वे धर्म, इस्लाम और जेहाद जैसे शब्दों को अपने जैसे अधार्मिक प्रवृति वालों के साथ जोड़ सकें। क्या यह इस बात का पुख्ता सुबूत नहीं है कि इस्लाम आज गैर मुस्लिमों के द्वारा नहीं बल्कि स्वयं को जेहादी व तालिबानी कहने वाले ऐसे ही आतंकी मुसलमानों के हाथों बदनाम हो रहा है जिन्हें वास्तव में स्वयं को मुसलमान कहलाने का हंक ही नहीं है परंतु इस्लाम धर्म के दुर्भाग्यवश यही स्वयंभू रूप से इस्लामी जेहादी लड़ाके बन बैठे हैं।

यही है जेहाद की असली हकीकत.

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गुरुवार, 19 नवंबर 2015

कुत्ता भी पूज्यनीय प्राणी है !!

लोग  इस  लेख  का  शीर्षक  पढ़  कर मजाक  समझेंगे   ,  क्योंकि अक्सर  जब लोग  किसी  को   गाली  देना   चाहते  हैं  ,अपमानित  करना   चाहते  हैं  ,तो उसे  तिरस्कार  से  " कुत्ता "  या  "  कुत्ते  की औलाद "    कह देते हैं . लेकिन  ऐसे  अज्ञानी  नहीं   जानते कि   हरेक  प्राणी  में  ईश्वर  का  अंश   है   , सभी आदर  के  योग्य   हैं  , सभी  पवित्र   हैं  ,इसी  लिए  गीता   में  स्पष्ट  रूप    में  बताया   गया  है  ,
"विद्या  विनय  सम्पन्ने  ब्राह्मणे  गवि हस्तिनि ,शनि  चैव श्वपाके  च पण्डिताः  समदर्शिनि :-अध्य्याय 5 श्लोक  18 

अर्थ -जो   लोग विद्यावान   और विनयशील   लोग होते  हैं   वह  ब्राह्मण  , गाय  , हाथी  , कुत्ता ,चांडाल  और  पंडित को   सामान  दृष्टि  से  देखते  हैं  .

कुत्ता  शब्द   को  गाली  समझने  वालों   को  यह  जानकर  आश्चर्य  होगा  की  भारत   में  कुत्ते  का ऐसा  मंदिर  भी  है  जिसमे   कुत्ते  के  साथ  राम  लक्ष्मण  , भरत  और  शत्रुघ्न  की  पूजा   होती  है  . इस  प्राचीन   मंदिर   का  नाम  है ,

 1-कुकुरदेव मंदिर

छत्तीसगढ़ के राजनंद गांव में एक विशेष तरह का मंदिर है, यह मंदिर किसी देवी-देवता का नहीं बल्कि कुत्ते का है। मंदिर में एक कुत्ते की प्रतिमा स्थापित है.मंदिर' राजनंदगांव के बालोद से छह किलोमीटर दूर मालीघोरी खपरी गांव में है।मुख्य  द्वार  पर  लिखा   है

ऐतिहासिक पुरातत्व श्री  कुकुर देउर मंदिर  सपरी 

चित्र  देखिये

http://4.bp.blogspot.com/-AiFVSvIzCaA/VUx3zY3G5vI/AAAAAAAAHwM/RVKSXLIb3QA/s1600/images%2B(1).jpg

2-मंदिर  का इतिहास 
इस मंदिर का निर्माण हालांकि फणी नागवंशी शासकों द्वारा 14वीं-15 वीं शताब्दी में कराया गया था। इस मंदिर के प्रांगण में स्पष्ट लिपियुक्त शिलालेख भी है, जिस पर बंजारों की बस्ती, चांद-सूरज और तारों की आकृति बनी हुई है। राम लक्ष्मण और शत्रुघ्न की प्रतिमा भी रखी गई है। मंदिर के प्रांगण में कुत्ते की प्रतिमा भी स्थापित है। यह मंदिर भैरव स्मारक है, जो भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है। मंदिर के शिखर के चारों ओर दीवार पर नागों का अंकन किया गया है.मंदिर के प्रांगण में कुत्ते की प्रतिमा भी स्थापित है।
 कुत्ते की प्रतिमा (चित्र )

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3- कुत्ते की वफादारी   की  कथा 

कुत्ते  का  उल्लेख   हमारे  धर्म  ग्रंथों   में भी मिलता    है  जैसे  वाल्मीकि  रामायण   के उत्तर   कांड प्रक्षिप्त सर्ग  2 श्लोक 2 से  40 तक  एक   कुत्ते  की  कथा   है  ,जिसे  भगवान   राम   ने  आशीर्वाद  दिया   था  , इसी  तरह   महाभारत  के  स्वर्गारोहण  पर्व    में  कुत्ते   को  धर्म  का  प्रतिक  बताया   गया   है   ,  जैसे  कुत्ता  अपने  स्वामी  के  पीछे  चलता  है  ,उसी  तरह मनुष्य   का धर्म  भी  उसके  साथ  चलता   है   , कुत्ते  की  स्वामीभक्ति  प्रसिद्ध   है  , इस  मंदिर  में  जिस  कुत्ते  की प्रतीमा  है  ,उसकी  भी  कथा   है


जनश्रुति के अनुसार, कभी यहां बंजारों की बस्ती थी। मालीघोरी नाम के बंजारे के पास एक पालतू कुत्ता था। अकाल पड़ने के कारण बंजारे को अपने प्रिय कुत्ते को मालगुजार के पास गिरवी रखना पड़ा। इसी बीच, मालगुजार के घर चोरी हो गई। कुत्ते ने चोरों को मालगुजार के घर से चोरी का माल समीप के तालाब में छुपाते देख लिया था। सुबह कुत्ता मालगुजार को चोरी का सामान छुपाए स्थान पर ले गया और मालगुजार को चोरी का सामान भी मिल गया।

कुत्ते की वफादारी से अवगत होते ही उसने सारा विवरण एक कागज में लिखकर उसके गले में बांध दिया और असली मालिक के पास जाने के लिए उसे मुक्त कर दिया। अपने कुत्ते को मालगुजार के घर से लौटकर आया देखकर बंजारे ने डंडे से पीट-पीटकर कुत्ते को मार डाला।

4-मंदिर में कुत्तों  की  पूजा 

कुत्ते के मरने के बाद उसके गले में बंधे पत्र को देखकर उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और बंजारे ने अपने प्रिय स्वामी भक्त कुत्ते की याद में मंदिर प्रांगण में ही कुकुर समाधि बनवा दी। बाद में किसी ने कुत्ते की मूर्ति भी स्थापित कर दी। आज भी यह स्थान कुकुरदेव मंदिर के नाम से विख्यात है। 'कुकुरदेव मंदिर' का बोर्ड देखकर कौतूहलवश भी लोग यहां आते हैं। उचित रखरखाव के अभाव में यह मंदिर हालांकि जर्जर हो गया है.फिर   भी  श्रद्धालु    कुत्ते   के  मंदिर  में  आते  हैं , और कुत्ते  कुतियों    की प्रतिमाओं   की  पूजा   करते  हैं .
कुत्तों की  पूजा(चित्र )



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5-कुकुर महोत्सव

वैष्णव  संप्रदाय  के  लोग  भी  इस  मंदिर  में  कुत्तों   के लिए  कुकुरभोज   आयोजित  कराते  हैं   ,  कुछ  समय   पहले संत   वैष्णवपद  दास बालाजी  महाराज  ने एक    विशाल   कुकुर  भोज  कराया    था  ,  और संस्कृत  में  कुत्तों   की  स्तुति बनायी   थी ,
 कुकुरभोज (चित्र )


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शनिवार, 14 नवंबर 2015

जन्नत का क्षेत्रफल और जनसंख्या !

विश्व   के  सभी  धर्म  आत्मा   को  अमर    मानते   हैं   , और   यह  भी   मानते हैं  कि  जीवन  भर   मनुष्य  जो भी  भले   बुरे  कर्म   करता  है   ,मृत्यु   के बाद  उसकी  आत्मा  को उन  कर्मों   के  फल  भोगना  पड़ते   है   ,  बुरे  लोग  नर्क   जाते हैं  , और  भले  लोग   स्वर्ग  में   जाते  हैं   , हिन्दू  जिसे  स्वर्ग   कहते हैं   उसे  ईसाई  पैरा  डाइस ,  ईरानी फ़िरदौस  और  इसलाम   में   जन्नत   कहा  गया   है  ,
कुरान  और  हदीसों   में मुसलमानों   को  जन्नत  में  मिलने  वाली  अय्याशी पूर्ण  सुविधाओं  का  ऐसा   अतिरंजित  वर्णन    दिया  गया   है   ,जिसके  प्रलोभन  में  आकर   शुभ   कर्म  करने  की  जगह  जिहादी   बन   जाते  हैं   ,  क्योंकि  हदीसों   में  जिहादियों  के  लिए  जन्नत  में  विशेष  और अतिरिक्त  सुविधाओं   का  प्रावधान     है  ,  इसी  जन्नत   के  लालच  में  आज  जिहादी  आतंकवादी   रोज   सैकड़ों   निर्दोष  लोगों  की  हत्याएं  कर  रहे   आत्मघाती  बम  बन  कर  कई  खुद  भी  मर  रहे  हैं  ,

 जन्नत   जैसी   किसी   जगह   के  अस्तित्व   के  बारे में  लोगों  के  वभिन्न    मत   हो  सकते   हैं  , हमें  इस  विवाद  में  नहीं  पड़ना  है  ,  हमें इस   बात  का    पता  करना  था   कि मुस्लमान   जिस  जन्नत   में  जाने   के   लिए  पूरी  दुनिया  को जहन्नम    बनाने  पर  आमादा   हैं  , आखिर   वह  जन्नत  कितनी   बड़ी  है  ?  उसका  आकार  कैसा   है ?  अर्थात   , आयताकार (Rectangle) ,  वर्गाकार(Square)   या  फिर   वृत्ताकार (Circular) .इत्यादि .  और   इसके  अलावा  उसकी  आबादी   कितनी  है ?


1-जन्नत  की जानकारी  कैसे मिली ? 

करीब    दो  सप्ताह  पूर्व  अमेरिका  स्थित     मेरी   पाठिका   बहिन रेणु  शर्मा    ने   फोन   से  बात के  दौरान  जन्नत  के बारे में    प्रश्न   किया   था   , उनको   संतोषजनक   ,    सप्रमाण   और  सटीक  उत्तर  देना   मेरा     दायित्व    था   ,  लेकिन हजाारों  हदीसों  में  ऐसी    हदीस   खोजना  जिसमे  जन्नत  के  आकार  क्षेत्र    का   उल्लेख   हो   ,  घास  के  ढेर  में  सुई  खोजने  जैसा  कठिन   था  ,  दो   सप्ताह   की छानबीन  के   बाद  आखिर      सफलता   मिल  गयी    ,   ईश्वर  के  अनुग्रह  से परिश्रम   सार्थक    हुआ   ,

क्योंकि   मुल्ले  मौलवी  ऐसी बातें   मुसलमानों   को  भी  नहीं  बताते   ,  वह  तो    जन्नत  में  मिलने   वाली   कुंवारी   हूरों    का  लालच    देकर   मुसलिम  युवकों  को  जिहादी   बनाने  में   लगे  रहते  हैं   , उन्हें  डर  है   कि सही   बात  खुल  जाने  से  कोई  भी  बुद्धिमान   जिहादी  नहीं   बनेगा !

3- हदीस की प्रमाणिकता 

अधिकांश    मौलवियों   की  आदत   है कि जब    हदीस   में  कोई  ऐसी  बात   निकाली  जाती   है   जिसके  खुल  जाने   इस्लाम   का  भंडा  फूट  जाने का  डर  होता हो  तो   मौलवी   झट  से  कह देते हैं   कि  यह   हदीस   झूठी   है   , लेकिन    हम   जिस  हदीस   का  प्रमाण   दे रहे हैं  , वह  सही  है   , हदीस  की  जिन   किताबों   को प्रमाण   माना   जाता  है  उन्को " अल क़ुतुब अल  सित्ता - الكتب الستة‎  "   कहा  जाता   है  ,  इसका अर्थ  6  प्रामाणिक   किताबें  ( Six Books )   है .इनमे  चौथे  नंबर    की  हदीस  की किताब   का  नाम   "  जामए  तिरमिजी  -  جامع الترمذي  "    है  . इस   किताब में  कुल  3956    हदीसे हैं .इनको  सन 982  इ ०  यानी 279  हिजरी में "अबू  ईसा मुहम्मद  बिन  ईसा अस्सलमी अल  जरीर अल  बूगी  अत्तिरमिजी -أبو عيسى محمد بن عيسى السلمي الضرير البوغي الترمذي‎  " ने  जमा   किया  था 'इसी  किताब  में  एक  हदीस  में  अरबी   में  जन्नत   के  बारे   में  जो भी  बताया  गया  है , उसके  अंगरेजी  में  दो  अर्थ  मिलते   है   ,  जिनमे  कुछ  शब्दों  के  अंतरहै   , लेकिन  दौनों  को  मिलाने से  अर्थ    बिलकुल  स्पष्ट    हो   जाता  है   , यहाँ  अंगरेजी  के  दौनों  अनुवाद    मूल  अरबी  और  हिंदी  अनुवाद   दे रहे  हैं

4-जन्नत   का   वर्णन 

A-मूल  अरबी

وَتُنْصَبُ لَهُ قُبَّةٌ مِنْ لُؤْلُؤٍ وَزَبَرْجَدٍ وَيَاقُوتٍ كَمَا بَيْنَ الْجَابِيَةِ إِلَى صَنْعَاءَ ‏"‏ ‏ .‏  "

B-अंगरेजी  अर्थ .1"it shall have a tent of pearl, peridot, and corundum set up for him,(the size of which is) like that which is between Al-Jabiyyah and Sana'a

C-अंगरेजी  अर्थ  2 "which stands a dome decorated with pearls, aquamarine, and ruby, as wide as the distance from  to Al-Jabiyah [a Damascus suburb  to Sana'a [Yemen]"


"सईदुल  खुदरी  ने  कहा  की  रसूल   ने बताया   है  कि जन्नत   के  ऊपर  एक गुम्बद   है  , जो  मोतियों  , अकीक  और  नील मणि से  सुशोभित   है  , और  उसका  विस्तार अल  जाबिया    से सनआ    तक   है "

Al-Tirmidhi,-Book 38, Hadith 2760


English reference : Vol. 4, Book 12, Hadith 2562

5-हदीस का  विश्लेषण 

   इस  हदीस   में दिए  अरबी  शब्दों  और  वाक्यों   का  अर्थ  निकालने  पर  दो  बातें   पता  चलती   हैं

1.अरबी   में  कहा   है "तुसैब  लहु  कब्बः -  وَتُنْصَبُ لَهُ قُبَّةٌ  "यानी  उसके  ऊपर  एक  कब्बः  है . कब्बः  अर्थ    गोल  गुम्बद (Dome )   ,  या  गोल  तम्बू (Tent) होता  है   ,  अर्थात  जन्नत  गोलाकार   Circular  है  .  शायद  अल्लाह  चौकोर  काबा में  रह  कर  ऊब   गया  हो   इसलिए  गोलाकार  जन्नत    बनवा   ली  हो .
2.फिर  हदीस   में  अरबी में  आगे   कहा   है  "कमा  बैन अल जाबिया  इला   सनआ - كَمَا بَيْنَ الْجَابِيَةِ إِلَى صَنْعَاءَ "जैसी  अल  जबिया से सनआ  के  बीच दूरी   है .

हदीस में   दिए  पहले  स्थान  नाम " अल  जाबिया - الْجَابِيَةِ " है  ,  जो  सीरिया की   राजधानी  "दमिश्क - دمشق‎ "   का एक उपनगर ( Town )  है .इसी  हदीस    में  दूसरे  स्थान    का  नाम   " सनआ  -  صَنْعَاءَ  "   बताया  गया   है   , यह  यमन   -    "    का  एक   प्रसिद्ध  शहर  है


6-जन्नत  का  क्षेत्रफल   कैसे  निकाला ?

चूँकि  इस  हदीस  के  अनुसार  जन्नत वृत्ताकार   है  ,   जिसका   फैलाव   अल जांबिया  से  लेकर सनआ  तक  है   , आज  के  हिसाब  से  इन  दौनों  के बीच  की  दूरी  2171 .19 Km   है  . गणित की  भाषा  में   इस  दुरी   को वृत्त का  व्यास (Diameter )   अरबी में " क़तर -   قطر       " कहेंगे .  किसी भी    वृत्ताकार   जगह    का  क्षेत्रफल  निकालने   के  लिए   उसकी  "   त्रिज्या ( Radius )    निकलना पड़ती   है   ,  त्रिज्या  को  अरबी   में "निस्फ़  क़तर -  نصف القطر "   कहते  हैं  यह  व्यास  की  आधी  होती  है . हिसाब  के  अनुसार    जन्नत   की त्रिज्या(Radius-1085.59  Km है   , इन तथ्यों  के  आधार  पर  गणना    करने  पर मुसलमानों   की  जन्नत    का

कुल क्षेत्रफल -Total Area-3700541.82 SQ Km अर्थात सैंतीस लाख  पांच  सौ इकतालीस . दशमलव आठ   दो वर्ग किलोमीटरहै .

7-दूसरा   उत्तर  
हो   सकता  है  कि   हर   बात   का  विरोध करने की  आदत   से  मजबूर  मुस्लिम  विद्वान  हमारी  गणना    और  जन्नत   को  वृत्ताकार    मानने   पर  आपत्ति  करें   और  दावा   करें   कि "अल  जबिया   से  सनाअ  "  की  दूरी  का तात्पर्य  जन्नत  की  लम्बाई (Length    और  चौड़ाई  (Width)   है      , अर्थात   जन्नत  वृत्ताकार    नहीं वर्गाकार ( Square)     है  , इसके  अनुसार  जन्नत   का  क्षेत्रफल -2171.19 X 2171.19 =471400 .01वर्ग किलो  मीटर    है .अर्थात सैंतालिस  लाख  चौदह   हजार  छियासठ  दशमलव   एक है  . 


जब   हमने    मित्रों   से   कहा   की  हम   जन्नत   का   आकार  क्षेत्रफल   पता   करने वाले   हैं    तो   कुछ   लोगों   ने कहा कि  जन्नत    की   कुल  जनसंख्या   भी   पता   करके   बताइये   ,  हमें  दो  ऐसी   हदीसें   मिलीं    जिनमे      जन्नत  आबादी   के    बारे   में  बताया   गया   है   ,  यह    भी  प्रामाणिक  हदीसें   है    ,

8-जन्नत   की  जनसंख्या 

1.पहली   हदीस

"रसूल   ने  कहा है  कि   अल्लाह    ने  मुझ   से  वादा   किया  है  ,  कि मेरी   उम्मत के  सत्तर   हजार  लोग (मुसलमान  )   जन्नत में  जाएंगे  ,  और उन  से (उनके  कर्मों का ) कोई  हिसाब   नहीं  लिया   जाएगा   "


"وَعَدَنِي رَبِّي عَزَّ وَجَلَّ أَنْ يُدْخِلَ الْجَنَّةَ مِنْ أُمَّتِي سَبْعِينَ أَلْفًا بِغَيْرِ حِسَابٍ "

"my Lord has promised me that seventy thousand of my nation will enter Paradise without being brought to account. "


 Sunan Ibn Majah-Book 37, Hadith 4426


इस  हदीस   से  साफ़    पता चलता  है कि  जन्नत   की   क्षमता    केवल  सत्तर  हजार    लोगों  की   है   , अर्थात  जनसंख्या    स्थिर   है  ,  क्योंकि  जन्नत    में  जब  शादी    ही   नहीं  होगी    , तो  बच्चे     कहाँ   से  होंगे   ? और   जब  अल्लाह   ने सत्तर  हजार   की  सीमा   निर्धारित  कर  दी  है , तो  उस से अधिक   किसी  का  जन्नत  जाने   का   सवाल   ही   नहीं  उठता ?
 दूसरी   हदीस 

 इस  हदीस   में  जन्नत  के  सेवकों  और जिहादियों  को  इनाम   के  रूप   में  मिलने  वाली   औरतों    की  संख्या  दी  गयी   है   , हदीस   कहती   है

रसूल    ने बताया  कि  जन्नत   वासियों  को  छोटे  इनाम    में  अस्सी हजार  सेवक   और  हरेक   को  बहत्तर    औरतें  मिलेंगीं .


"أصغر مكافأة لأهل الجنة هي دار حيث هناك ثمانون ألف الخدم واثنين وسبعين زوجات"


The Prophet Muhammad saying: “The smallest reward for the people of Paradise is an abode where there are Eighty thousand servants and  seventy two wives "


Al-Tirmidhi, Vol. 4, Ch. 21, No. 2562

 नोट-   इस  हदीस   में  जिहादियों  को  सौगात   के  रूप   में  मिलने    वाली औरतों   को  पत्नियां   कहा  गया   है   ,  लेकिन  उन्हें  वेश्याएं   कहना  उचित  होगा  , क्योंकि   जिहादी  शादी   किये  बिना  उन   सहवास   करेंगे .                    


9- जनसंख्या का वर्गीकरण  और योग 

इन  दोनो  हदीसों  में  दिए  गए  तथ्यों   के  आधार पर  जन्नत   की वर्गीकृत   जनसंख्या   इस  प्रकार   है   ,

1. जिहादी - ( पुरष )-70000   (सत्तर   हजार )


2.सेवक -  (गिलमा ) -80000   (अस्सी  हजार)  (गिलमा  अवयस्क  लडके होते  हैं  जिनसे  जिहादी  अप्रक्रतिक कुकर्म   करेंगे )


3.हूरें -  (वेश्याएं)- 70000x  72=   5040000(  पचास  लाख  चालीस  हजार )

4-कुल जनसंख्या -5190000  (इक्यावन लाख नब्बे  हजार )



हमने  तो     मुसलमानों   की   जन्नत    का   क्षेत्रफल   और  जनसंख्या  सबके   सामने   प्रकट   कर  दी   है   ,  और  जो   लोग   इस     बात   को   झूठा    या   गलत    साबित   करने कोशिश    करेंगे    वह  पहले   इन  हदीसों   को  झूठा  साबित   करके  दिखाएँ   ,  जन्नत   नाम की  जैसी   कोई   जगह    है   या नहीं   हम   इस  विवाद   में  नहीं   पड़ते   ,  सभी   तथ्य   हदीसों   से   लिए   गए   हैं  ,


 बाक़ी  हमारे   प्रबुद्ध  पाठक  खुद  समझ   जायेंगे  , ऐसी   जन्नत   मुसलमानों   को   मुबारक   ,  हमारा  देश  जन्नत  से   बेहतर  है


करोड़ों मुसलमानों के निकाह अवैध हैं !

पाठकों   से  निवेदन  है   कि  इस  लेख  को  ध्यान   से  पढ़ें   , क्योंकि   यह  लेख सभी पाठकों  खासकर कानून   जानने  वालों   के  लिए अत्यंत उपयोगी   है  ,और  इस  लेख  का  विषय मुस्लिमों   में  प्रचलित अपनी  रिश्ते   की  बहिनों   के साथ  निकाह  करना ,  और इसके      बारे  कुरान आदेश    है  , यह   लेख  इसलिए   प्रासंगिक    है क्योंकि  इसी  सप्ताह  गुजरात   है हाई  कोर्ट   ने फैसला   दिया   है  कि   मुस्लिमों द्वारा  कुरान  की  गलत  व्याख्या   की   जाती  है .वास्तव    में  कुरान   में ऎसी  कई   आयतें मौजूद  है  ,जिनका  जाकिर   नायक   जैसे धूर्त  ऐसी व्याख्या  कर  देते  हैं ,जो  उस  आयत   के आशय   के विपरीत और भ्रामक   होती   है  ,जिस  से अरबी  से  अनभिज्ञ मुसलमान ऐसे   काम  कर  बैठते  हैं   , जो कुरान  के आदेश  के उलट  और रसूल  के  अधिकारों में  अतिक्रम  होता है .

अधिकांश मुस्लिम नहीं    जानते  हैं   कि कुरान   में एक  ऐसी  आयात  मौजूद   है   , मुल्ले   मौलवी  लोगों  को  उसका   जानबूझ  कर   सही  अर्थ   नहीं  बताते   , क्योंकि   सही   अर्थ  प्रकट  करने  से  लाखों  मुसलामानों  के  निकाह अवैध  हो    जायेंगे    , और  ऐसी   शादियों    से  पैदा  हुए बच्चे  नाजायज   संतान  माने   जायेंगे.

मुख्य   विषय पर  आने से  पहले  हमें अन्य   लोगों   में  रसूल  का  स्थान ( Status)   है   , यह   जानना     जरुरी      है ,    इसके  बारे   में यह  हदीस  बताती है।

1-रसूल का स्थान सर्वोपरि है !

"जाबिर बिन  अब्दुल्लाह   ने   कहा  कि रसूल  ने   कहा है   मैं   नबियों  का  " कायद  (  leader )यह शेखी   की   बात    नहीं   ,  मैं सभी  नबियों  पर  मुहर (seal ) यह शेखी  की   बात   नहीं    ,मैं   पहला  ऐसा सिफारिश  करने  वाला  हूँ   , जिसकी  सिफारिश  मंजूर   हो  जाएगी ,यह भी  शेखी  की   बात   नहीं  है ,"


رواه جابر بن عبد الله قال النبي (ص):أنا  قائد  من المرسلين، وهذا ليس التباهي، وأنا خاتم النبيين، وهذا ليس التباهي، وسأكون أول من يشفع ويتم قبول الشفاعة الأولى التي، وهذا ليس التباهي ".

 Narrated by Jabir ibn Abdullah
The Prophet (saws) said, "I am the leader (Qa'id) of the Messengers, and this is no boast; I am the Seal of the Prophets, and this is no boast; and I shall be the first to make intercession and the first whose intercession is accepted, and this is no boast.
."

Al-Tirmidhi Hadith 5764


2-औरतों के बारे में विशेषाधिकार 


"हे  नबी  हमने  तुम्हारे  लिए ( वह ) पत्नियां  हलाल  कर  दी  हैं   ,जिनके  मह्र  तुमने  दे  दिए  हैं  , और   वह  दासियाँ  जो  अल्लाह   ने " फ़ाय " के  रूपमे    नियानुसार  दी  हैं  , और   चाचा  की  बेटियां  , तुम्हारी  फुफियों  की  बेटियां  ,तुम्हारे  मामूँ  की  बेटियां   ,और  तुम्हारी   खालाओं  की  बेटियां  ,  जिन्होंने   तुम्हारे  साथ  हिजरत  की  है  , और  वह ईमान  वाली  स्त्री जो  अपने  आपको  नबी  के लिए " हिबा "   कर  दे  . और यदि  नबी  उस  से  विवाह  करना  चाहे, हे नबी  यह अधिकार  केवल  तुम्हारे  लिए   है   ,  दूसरे  ईमान  वालों    के  लिए  नहीं  है "  सूरा -अहजाब 33:50



يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ إِنَّا أَحْلَلْنَا لَكَ أَزْوَاجَكَ اللَّاتِي آتَيْتَ أُجُورَهُنَّ وَمَا مَلَكَتْ يَمِينُكَ مِمَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَيْكَ وَبَنَاتِ عَمِّكَ وَبَنَاتِ عَمَّاتِكَ وَبَنَاتِ خَالِكَ وَبَنَاتِ خَالَاتِكَ اللَّاتِي هَاجَرْنَ مَعَكَ وَامْرَأَةً مُؤْمِنَةً إِنْ وَهَبَتْ نَفْسَهَا لِلنَّبِيِّ إِنْ أَرَادَ النَّبِيُّ أَنْ يَسْتَنْكِحَهَا خَالِصَةً لَكَ مِنْ دُونِ الْمُؤْمِنِينَ 


O PROPHET! Behold, We have made lawful to thee thy wives unto whom thou hast paid their wages, as well as those whom thy right hand has come to possess from among the captives of war whom God has bestowed upon thee. And [We have made lawful to thee] the daughters of thy paternal uncles and aunts, and the daughters of thy maternal uncles and aunts, who have migrated with thee [to Yathrib]; and any believing woman who offers herself freely to the Prophet and whom the Prophet might be willing to wed: this  is  a privilege for thee, and not for other believers -  sura-ahzab 33:50

(this verse has   43 words)

3-आयत  का  विश्लेषण 

इस  आयात में अरबी  के कुल 43  शब्दों  का  प्रयोग  किया  गया  है   , सुविधा  के  लिए  उनके  नंबर  दिए   जा  रहे  हैं , ताकि   सही अर्थ समझने  में  आसानी  हो  ,
1.इस  आयात  के  शब्द  संख्या  3 ,4  और 5  में अरबी  में कहा  है "इन्ना अहललना  लक (أَحْلَلْنَا لَكَ ) अर्थात  हमने  तुझ पर वैध किया (We have made lawful to thee ) . इस  से स्पष्ट  होता  है  ,कि कुरान  का यह  आदेश  केवल  नबी   के  लिए है  , मुसलमानों  के लिए नहीं ,

2.इसके  बाद  शब्द  संख्या 6 ,7 ,8  और  9  में  अरबी  कहा   है  , "अजवाजक  अल्लती अतयत उजूरहुन्न (أَزْوَاجَكَ اللَّاتِي آتَيْتَ أُجُورَهُنَّ)  अर्थात  वह पत्नियां  जिनका  मूल्य ( मेहर )  चूका  दिया  हो  ( whom thou hast paid their  wage ).अरबी   में "उजूर -  أُجُورَ  " का  अर्थ   मजदूरी का  वेतन(wage ) होता  है 'दूसरे  शब्दों   में  पत्नियों  को  शादी  के समय  दिए  जाने  वाला  मेहर उनकी योनि  की  कीमत  मानी   जाती  है   , और यदि पत्नी  को  मेहर  नहीं  दिया  गया  हो तो शादी अवैध  हो  जाती  है. इस लिए इस आयत में  नबी  की उन्हीं  पत्नियों  को  हलाल   माना  है   मुहम्मद  ने   जिनकी   मजदूरी  यानि  मेहर  चूका दिया   हो.
इसके  बाद  वैध  पत्नियों  के अतिरिक्त    नबी  को  जिन  स्त्रियों  से शादी  करने को हलाल यानि  वैध किया  गया  वह बताया गया है ,


3.इसके  बाद नबी   को  अपनी   वैध पत्नियों  के आलावा  जिन  स्त्रियों से शादी  को  हलाल किया  गया उन्हें शब्द संख्या 11 और 12  में  अरबी में "मलकत यमीनुक ( مَلَكَتْ يَمِينُكَ  ) कहा गया  है  ,चालाक  मुल्ले  अंगरेजी  में  इसका  अर्थ  (possess from among the captives of war)  यानी  युद्ध  में  पकड़ी गयी रखैलें   जिन्हे  कुरान  के  हिंदी  अनुवाद  में "लौंडियाँ "   कहा   गया है , ज़ाकिर  नायक  इसका  अर्थ "right hand posesed "  करता है  और ऐसी  औरतों  को  माले " गनीमत  - غنيمة"यानी   युद्ध  में लूटा  हुआ माल  बताता   है  , यही   कारण  है  कि  मुस्लिम शासक  युद्ध  में धन  के  साथ  औरतें  भी  लूट  लेते  थे , लेकिन ऐसे  मुल्ले  इस  आयत  के 14  वें  शब्द "अफाअ ( أَفَاءَ)     को दबा  देते  है   , यह शब्द  अरबी  के " फाअ (فاء )  से  बना  है  , फाअ   युद्ध  किये बिना ही  अल्लाह की कृपा  से  मिलने  वाली वास्तु   को  कहा  जाता  है  , यह शब्द गनीमत  के  बिल्कुल  विपरीत  है  ,

  4.  इसके बाद  शब्द  संख्या 17  से  लेकर 38  तक  नबी   को  रिश्ते  की  बहिनों  और हिजरत  करने  वाली  स्त्रिओं   से शादी हलाल  कर  दी , इनका हिंदी  अनुवाद  सरल  शब्दों  में  दिया गया  है  ,

5.इसके  बाद आयत   के  शब्द  संख्या  39 से  43  तक अत्यंत  महत्वपूर्ण   बात  कही  गयी  है  , जिसे  मुसलमान  जानबूझ   कर  अनदेखी   कर देते  हैं  ,इस आयत अंतिम  शब्दों में अरबी   में  " कहा  गया है  "खालिसतन  लक मिन दूनिल  मोमिनीन (خَالِصَةً لَكَ مِنْ دُونِ الْمُؤْمِنِينَ )अर्थात खासकर  तेरे  लिए , ईमान  वालों  को छोड़  कर .(Purely for thee  excluding  other  believers)

इस आयत  से साफ़ साफ़ चलता   है कि अल्लाह  ने  केवल   नबी को ही रक्तसंबधी  बहिनों  से  विवाह करने  का विशेष अधिकार  दिया   था , मुसलमानों को नहीं   , इसी  लिए  कुरान  की सूरा -निसा 4:23  में रक्तसंबधी  बहिनों  से  निकाह  करने   की  साफ  मनाही  की  गयी   है  ,


4-मुसलमानों में बहिनों  से विवाह 
निकट  सम्बन्ध  की  बहिनों  से  शादी   को अंग्रजी   में "consanguinity" कहा  जाता   है   ,

कुरान   की  इस आयत  दिए   गए  स्पष्ट  आदेश  होने पर भी  दुनिया  के  सभी  देशों   के  मुस्लिम  रसूल   के  विशेषाधिकार  को  छीन   कर धड़ल्ले  से अपनी रिश्ते  की  बहिनों   को  ही  अपनी पत्नी बना  लेते   हैं   ,  ऐसे लोगों  की   बहुत  बड़ी  संख्या   है  ,  विकी  इस्लाम   के अनुसार यह  जानकारी  ली  गयी   है   .

1-Pakistan, 70 percent 2-Turkey  25-30 percent 3- Arabic countries  34 percent  4- Algiers 46 percent  5--Bahrain, 33 percent 6-- Egypt, 80 percent 7--Nubia (southern area in Egypt), 60 percent 8- Iraq, 64 percent  9-Jordan, 64 percent  10-- Kuwait, 42 percent 11-- Lebanon, 48 percent 12--Libya, 47 percent  13-Mauritania, 54 perce nt  14-Qatar, 67 percent 1 5-Saudi Arabia, 63 percent
16-  Sudan, 40 percent  17-Syria, 39 percent   18-Tunisia, 54 percent  19-United Arabic Emirates and 45 percent 20-Yeman 47percent


Average-39.8percent

5-मुसलमान ही  कुरान के विरोधी है 

मुसलमानों    का  स्वभाव   है  कि जब  कोई   गैर मुस्लिम  , रसूल  , या  कुरान  के  बारे  में  कोई प्रश्न  उठाता  है   , या  टिप्पणी  कर  देता  है  ,तो  मुस्लमान  जमीन  आसमान एक  कर  दते  हैं   , और लडने  पर  आमादा   हो  जाते हैं   ,  लेकिन  जब  निजी स्वार्थ  का  मामला  होता है   , उसी  कुरान के  आदेशों  की  धज्जियाँ  उड़ा  देने  में कोई  कसर  नहीं  छोड़ते   . यह कुरान   का गलत  अर्थ , या व्याख्या  करने  का  मामला नहीं  है  , जैसे  गुजरात हाईकोर्ट  ने अपने  फैसले  में  कहा  है  ,  यह तो  खुले  आम कुरान ( अल्लाह ) के आदेशों का उललंघन और रसूल   के अधिकारों में अतिक्रमण  है  . जो गुनाहे  अजीम  है  ,

6-हम  क्या  करें ?

इसलिए  इस  लेख के  माध्यम  से  हमारी  मांग  है  कि अदालत  मुसलमानों  के  ऐसे रक्तसंबधी   सभी  निकाहों  को अवैध घोषित  करके अमान्य  कर दे  , और ऐसे  अवैध निकाहों से पैदा हुए बच्चो  को  हरामी होने  से पिता  की संपत्ति का  वारिस  नहीं  माना   जाये   , और बच्चों  के  माँ  बाप   की जायदाद सरकार के  खजाने  में  जमा  करा  दी  जाये  , कानून   के  जानकर  इस  मुद्दे पर   जनहित  याचिका  जरूर  लगाएं    , हमने  तो सन्दर्भ सहित पुरे  सबूत  उपलब्ध  कर  दिए   , इनका कोई  भी  खंडन   नहीं  कर  सकेगा  , चाहे  जाकिर  नायक   की पूरी गैंग  क्यों न आ  जाए

(bhn 570)


 http://wikiislam.net/wiki/Cousin_Marriage_in_Islam

मंगलवार, 10 नवंबर 2015

मुसलमान काफिर की स्तुति करते हैं !!

इस्लाम   ने सम्पूर्ण   मानव  जाति को  मोमिन और काफिर ऐसे  दो वर्गों   में  बाँट रखा  है  , मोमिन  को  मुस्लमान या ईमान  वाले  भी  कहा  गया है, और  खुद   को  मोमिन साबित  करने  के  लिए कलमा  पढ़ना अनिवार्य   है  , इसलिए  जो  भी व्यक्ति  कलमा  नहीं  पढता  वह इस्लाम  की  दृष्टि  में  काफ़िर   माना  जाता   है  , इस्लाम  में  काफिरों  को  कलमा  पढ़ा  कर  मुस्लिम   बनाना धार्मिक   कर्तव्य समझा  जाता   है  , कुरान  के अनुसार  काफिर अल्लाह  की  कृपा  से  वंचित रहेंगे  , और क़यामत   के  दिन उनको  जहन्नम   की  आग में  झोंक  दिया    जायेगा  . इसलिए  कुरान में  काफिरों   के लिए  दुआ   करने  की  मनाही  है .लेकिन  आपको   यह  बात  जानकर  घोर  आश्चर्य होगा  कि मुसलमान एक  ऐसे  व्यक्ति के  लिए  दुआ     करते  हैं , जिसने   रसूल   के  सामने ही  कलमा  पढ़ने  से  इंकार  कर  दिया   था  , और कह  दिया  के  मैं अपने  पूर्वज  के धर्म  पर  कायम  हूँ  ,यह पता  होने  पर  भी मुस्लमान उस  काफिर के लिए वैसे ही शब्दों में सलाम  भेजते  हैं   , जैसे रसूल   को  भेजते हैं . यह व्यक्ति   और  कोई   नहीं  बल्कि    रसूल  के  सगे  चाचा (Uncle )  अबू  तालिब   थे .

1-अबू  तालिब   का  परिचय 

अबु  तालिब  रसूल  के  चाचा थे , रसूल   के पिता  अब्दुल्लाह  सगे  भाई  थे   , इनके  पिता   यानि  रसूल  के  दादा ( )   का नाम "अब्दुल मुत्तलिब - عبد المطلب  " था , अबु तालिब   का  जन्म  सन 549  ई ०  में  और  देहांत सन  619  में  हुआ  था , इनके  पिता अब्दुल  मुत्तलिब  कुरैश  के  सरदार  थे  , इन्हीं  ने मक्का के जमजम  नामके जल कुण्ड  की खुदाई  की  थी  , इसलिए  रसूल  के  कबीले  कुरैश   के  लोग  उनका  बहुत  सम्मान  करते  थे  , इनके  देहांत   के  बाद कुरैश   की सरदारी  और  काबा की  देखभाल  अबु  तालिब  को मिली थी  , क्योंकि  जब छोटे   थे  तभी उनके पिता अब्दुलाह  गुजर  गए  थे , इसलिए बालक  मुहम्मद  पालन  पोषण अबू  तालिब  ने  ही  किया  था  , अबू  तालिब  ने ही  काबा   की  मरम्मत  और  विस्तार   कराया  था  , अबु  तालिब  काबा  के संरक्षक   भी  थे , अबु  तालिब अपने  भतीजे  मुहम्मद  को   बहुत   चाहतेथे  , यहाँ तब    मुहमद  साहब  ने काबा   की  सभी मूर्तियां तुड़वा डालीं तब भी  अबु तालिब खामोश  रहे , और  जब  मुहमद  साहब   ने  इस्लाम  के  नाम  पर  नया धर्म चलाया  तो अरब  के लोग  मुसलमान  बन  गए  , लेकिन अबूतालिब  पर इसलाम   का  कोई  असर  नहीं  पड़ा , वह  मरते  समय  तक  अपने  पिता  अब्दुल  मुत्तलिब  के  धर्म  पर  ही  डटे रहे  अर्थात  काफिर  ही बनेरहे ,
मुहम्मद  साहब ने   बहुत   प्रयास  किया  कि दूसरों   की  तरह  उनके  चाचा  अबू  तालिब   भी  मुसलमान   बन  जाएँ लेकिन वह अपने  प्रयास में  असफल  हो  गए   , आखिर  कह  दिया  कि ,

2-मुस्लिम बनाना अल्लाह का  काम है 


"हे  नबी  तुम जिसे  चाहो मार्ग ( इस्लाम )  पर  नहीं   ला  सकते  ,परन्तु अल्लाह  जिसे  चाहता  है  मार्ग   पर  ले आता   है  "
सुरा -अल  कसस 28:56 

"(O Prophet!) Verily, you guide not whom you like, but Allah guides whom He will."(28.56) 

हदीस  के  अनुसार यह आयात  कुरान में विशेष  रूप  से  अबू तालिब  के बारे में   कही  गयी    है   ,


And then Allah revealed especially about Abu Talib:--'Verily! You (O, Muhammad) guide not whom you like, but Allah guides whom He will.' (28.56)
"

 وَأَنْزَلَ اللَّهُ فِي أَبِي طَالِبٍ، فَقَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏{‏إِنَّكَ لاَ تَهْدِي مَنْ أَحْبَبْتَ وَلَكِنَّ اللَّهَ يَهْدِي مَنْ يَشَاءُ‏}‏   "

सही बुखारी  - जिल्द 6 किताब 60 हदीस 295

काश   वह जिहादी  कुरान  की  इस आयात  और  हदीस   को  ध्यान  से  पढ़ें  जो  आतंक  से  लोगों  को  मुस्लमान बनाने  में  लगे   है  , वास्तव में ऐसे  लोग दूसरों  को  मुस्लमान  बनाने की  बजाय  अल्लाह के  काम   में हस्तक्षेप करने  से  खुद  काफिर  बन रहे  हैं

3-अबू तालिब  का कलमा से इंकार 


जब  अबू तालिब मृत्यु   शय्या  पर पड़े  थे ,रसूल  उनके  पास  गए , पास  में  ही अबू जहल  भी  था  , रसूल  ने  कहा " हे चाचा बोलिए "ला इलाह इल्ल्लल्लाह "  ( "अय उम कुल ला इलाह  इल्ल्लल्लाह -   أَىْ عَمِّ، قُلْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ‏   "  ) रसूल दिखाना   चाहते  थे  कि अल्लाह  के  सामने उनकी  सिफारिश   करूँगा, तभी  अबू  जहल  और उमर बिन  उमय्या  ने  पूछा "हे  अबू  तालिब  क्या  तुम अब्दुल  मुत्तलिब ( अपने पिता )   का  धर्म   छोड़ रहे  हो ? उन्होंने    कई   बार ऐसा  पूछा  , आखिर  अबू  तालिब  ने कहा  मैं अब्दुल  मुत्तलिब  के  धर्म पर  कायम  हूँ .("अला मिल्लते अब्दुल   मुत्तलिब - عَلَى مِلَّةِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ‏ ")



[When Abu Talib was on his deathbed, the Holy Prophet   went to him while Abu Jahl was sitting beside him. The Holy Prophet (saww) said to him:

“O Uncle! Say LAA ILAAHA ILLALLAH – an expression with which I will defend your case before Allah ”. Abu Jahl and Abdullah bin Umayyah said, “O Abu Talib! Will you leave the religion of Abdul-Muttalib?” They kept saying this till Abu Talib’s last statement was, “I am on the religion of Abdul-Muttalib”



"‏"‏ أَىْ عَمِّ، قُلْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ‏.‏


".‏ فَقَالَ أَبُو جَهْلٍ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي أُمَيَّةَ يَا أَبَا طَالِبٍ، تَرْغَبُ عَنْ مِلَّةِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ فَلَمْ يَزَالاَ يُكَلِّمَانِهِ حَتَّى قَالَ آخِرَ شَىْءٍ كَلَّمَهُمْ بِهِ عَلَى مِلَّةِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ‏ "

सही बुखारी  -जिल्द  5  किताब58 हदीस 223


इस हदीस  से सिद्ध  होता है  कि रसूल     चाचा  अबु तालिब  ने रसूल  के सामने  ही  कलमा बोलने यानी  मुस्लिम  होने  से  साफ़  इंकार कर  दिया  था ,और मरते दम  तक काफिर बने  रहे .

4-काफिर  जहन्नम आग  में नीचे होंगे 

जब रसूल   के  कहने  पर भी  अबूतालिब   ने  न  तो  कलमा  पढ़ा  और न  अपना  धर्म छोड़ा   तो इसके   बारे में  हदीस   बताती  है  ,

"अब्बास  बिन अब्दुल   मुत्तलिब  ने रसूल  से  कहा  तुम  अपने चाचा के  लिए  कुछ   नहीं   कर  रहे  ,जबकि  उन्होंने तुम्हें   बचाया   है   ,लेकिन तुम  उलटे उन से नाराज     हो  गए  ,तब   रसूल   ने   कहा  वह  जहन्नम आग में    निचले   भाग  में  हैं "

 Narrated Al-Abbas bin 'Abdul Muttalib:
That he said to the Prophet "You have not been of any avail to your uncle (Abu Talib) (though) by Allah, he used to protect you and used to become angry on your behalf." The Prophet said, "He is in a shallow fire, and had It not been for me, he would have been in the bottom of the (Hell) Fire." (

‏ هُوَ فِي ضَحْضَاحٍ مِنْ نَارٍ، وَلَوْلاَ أَنَا لَكَانَ فِي الدَّرَكِ الأَسْفَلِ مِنَ النَّارِ ‏"‏‏.‏  "


सही बुखारी  - जिल्द 5 किताब 58  हदीस 222

5-काफिरों  के  लिए  दुआ   नहीं  करो 

मुहम्मद  साहब  अपने  चाचा   के कलमा   न  पढने  से इतने  रुष्ट   हो  गए  कि  कुरान  में  सभी  काफिरों और मुश्रिकों  के  बारे  यह  आयत  उतार डाली  .

"रसूल और  मुसलमानों  के लिए यह उचित नहीं  कि वे  मुश्रिकों  के लिए  क्षमा  के  लिए   दुआ  करें  , चाहे  वह  उनके  रिश्तेदार  ही  क्यों  न हों  "

"مَا كَانَ لِلنَّبِيِّ وَالَّذِينَ آمَنُوا أَنْ يَسْتَغْفِرُوا لِلْمُشْرِكِينَ وَلَوْ كَانُوا أُولِي قُرْبَىٰ  "


"It is not fitting for the Prophet and the believers to ask Allah's Forgiveness for the pagans, even if they were their near relatives,"9:113
 सूरा -अत तौबा 9:113 

कुरान  और  हदीस के इन आदेशों  के वावजूद  मुसलमान  अबू  तालिब को  सलाम  भेज  कर  उनकी स्तुति  करते  हैं  , जिस  तरह  रसूल को सलाम  भेजते  हैं  , अबू  तालिब   को सलाम  भेजने  के  लिए अरबी  में  काफी बड़ी स्तुति  है जिसके पहले कुछ अंश  दिए जा रहे हैं ,


6-अबू  तालिब  की स्तुति 

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا سَيِّدَ الْبَطْحَآءِ وَابْنَ رَئِيْسِهَا
अस्सलामु  अलैक या  सय्यदुल  बतहाअ व्  इब्ने  रईसुहा 
अर्थ -सलाम  हो आप  पर  हे  ,मक्का के  नेता  और उसके मुखिया  के पुत्र

 اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَارِثَ الْكَعْبَةِ بَعْدَ تَاْسِيْسِهَا
अस्सलामु  अलैक या  वारिसुल  काबा बअद तासीसुहा 
अर्थ -सलाम  हो आप  पर  हे  ,काबा के  वारिस और  उसकी  बुनियाद रखने  वाले

 اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا كَافِلَ رَسُوْلِ اللهِ
अस्सलामु  अलैक या काफ़िल  रसूल्लल्लाह 
अर्थ-  सलाम  हो आप  पर  हे  ,रसूल   की  रक्षा  करने वाले

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا حَافِظَ دِيْنِ اللهِ

अस्सलामु  अलैक या  हाफ़िज़  दीनुल्लाह
अर्थ - सलाम  हो आप  पर  हे  ,अल्लाह   के धर्म  की  रक्षा करने वाले

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا عَمَّ الْمُصْطَفٰى
अस्सलामु  अलैक या अम्मुल  मुस्तफा
अर्थ-  सलाम  हो आप  पर  हे  ,मुस्तफा ( मुहम्मद )  के  चाचा


हो  सकता  है कि मुसलमानों   का  एक वर्ग  अबू  तालिब   को  काफ़िर    बताये  और  दूसरा   वर्ग  उनको  पक्का  मुस्लमान   बताये  ,  लेकिन   हमे इस  विवाद  में  नहीं  पड़ना   है  ,हमारी  दृष्टि  में तो अबू  तालिब  एक सत्यप्रिय    और  साहसी  महान   व्यक्ति  थे  , जिन्होंने    मुहम्मद  साहब  के  सामने ही   कलमा  पढ़ने  से  इंकार  कर  दिया  , और  साबित   कर  दिया  कि  इस्लाम   कोई धर्म   नहीं   है   , और  जन्नत  ,जहन्नम  कोरी  कल्पना  हैं ,हम  तो   बस  यही   कह  सकते  हैं   कि
 

''अबू तालिब  नमस्तुभ्यं इस्लाम प्रपंच  विनाशकः , साहसी सत्यवक्ता  च रसूल मुख चपेटकः "


हे अबू  तालिब  आपको  नमस्कार  ,  आपने  इस्लाम  के  पाखण्ड    का   नाश  कर  दिया ,  और  निडरता  से (कलमा  से इंकार करके ) सत्यवक्ता होकर  रसूल  के   मुंह चपेट  सी   लगा  दी.

(301)

http://www.duas.org/abutalibas.htm

गुरुवार, 22 अक्तूबर 2015

वैदिक धर्म मानने वाले रसूल के वंशज !

इस बात  से कोई  भी व्यक्ति इंकार नहीं   कर सकता कि सत्य को   सदा के लिए दबाना ,या मिटाना  असम्भव   है .और एक न एक दिन  सत्य   खुद  लोगों के सामने  प्रकट  हो जाता है , जिसे  लोगोंको स्वीकार  पड़ना  है .यह  बात  इस्लाम  के ऊपर  भी  लागु  होती  है . मुसलमान मुहम्मद  साहब को अल्लाह का रसूल  और  इस्लाम  का प्रवर्तक  मानते हैं .क्योंकि  23  साल  की    आयु में  सन 592 ईस्वी   में   मुहम्मद  पर  कुरान  की पहली आयत  नाजिल  हुई थी , उसी  दिन  से इस्लाम    का जन्म हुआ  , और  इसी  इस्लाम को  मनवाने के लिए मुहम्मद साहब  और उनके बाद   उनके  अनुयायी  जिहादियों  ने करोड़ों  निर्दोष  लोगों  को  मौत के घाट   उतार दिया . और  कई  देश   वीरान  कर  दिए .
यद्यपि  मुहम्मद साहब को अल्लाह का  सबसे  प्यारा  रसूल  कहा  जाता है ,लेकिन   कई  कई पत्नियां  होने पर भी  मुहम्मद साहब   के कोई  पुत्र    नहीं  हुआ . एक लड़का एक  दासी  मरिया  से हुआ था वह  भी अल्पायु  में  मर गया था .वास्तव  में  मुहम्मद साहब  वंश  उनकी  पुत्री फातिमा  से  चला    है ,जिसकी शादी  हजरत  अली  से हुई थी . इस  तरह  अली  और फातिमा   से मुहम्मद  साहब की वंशावली   वर्त्तमान  काल तक  चल  रही  है ,
अब  यदि  कोई   कहे कि उन्हीं  रसूल  के वंशज  बिना किसी  दवाब के   वेदों  पर आस्था  रखते हैं ,गायत्री  मन्त्र  पढ़ते हैं  .और  वैदिक  धर्म   ग्रन्थ   छह  दर्शनों  पर विश्वास  रखते हैं  , यही नहीं  भगवान  बुद्ध  को  भी अवतार  मानते हैं  . तो  क्या  आप  विश्वास   करेंगे ?  लेकिन  यह  शतप्रतिशत   सत्य  है , इसलिए  इस  लेख  को ध्यान  से पढ़िए ,
1- निजारी इस्माइली
यह तो  सभी  जानते हैं कि   मुसलमान  सुन्नी  और शिया दो  मुख्य  फिरकों  में  बटे  हुए  हैं , और शिया  अली  को अपना प्रथम  इमाम  मानते है .अली और फातिमा के छोटे  पुत्र  इमाम  हुसैन  को  परिवार  सहित  करबला  में  शहीद   करा  दिया गया था . केवन उनका एक बीमार पुत्र   बचा   रहा  , जिसका नाम  " जाफर  सादिक " था , जिसे  शिया  अपना  चौथा  इमाम  मानते हैं .कालान्तर में  उन्हीं  अनुयाइयों  ने   अलग   संप्रदाय  बना  लिया   जिसका  नाम  "अन  निजारियून -  النزاريون‎  "  है .जिनको  " इस्माइलिया - اسماعیلیه‎  "  भी  कहा  जाता  है .जो  "शाह करीम  अल  हुसैनी चौथे   - "  को अपना  इमाम  और धार्मिक  गुरु  मानते है ,   शाह  करीम   का जन्म  अली  और फातिमा    की  49  वीं   पीढी  में  हुआ   है .इनकी यह  वंशावली  तब से  आज  तक   अटूट  रूप से चली  आ  रही  है .इस्माइलिया   दुनिया के  25 में फैले हुए  हैं , और  इनकी संख्या करीब  डेढ़  करोड़  ( 15 million  )  है .इनकी मान्यता है कि   अल्लाह  बिना  इमाम  को दुनियां  को नहीं   रखता ,यानि हर  काल  में  एक इमाम  मौजूद  रहता है , जो लोगों का मार्गदर्शन   करता  रहता  है .इन  लोगों  की मान्यताएं  सुन्नी  और  शियायों  से बिलकुल   अलग  हैं .
2--किसी  भी दिशा में  नमाज 
निजारी इस्माइली  इबादत  के लिए   मस्जिद  की जगह  जमातखाने  में  में  जाते हैं ,इनके वर्त्तमान   इमाम  आगाखान करीम  शाह  अल  हुसैनी  और उनके भाई अयमान  मुहम्मद   ने अरबों  रुपये खर्च करके  विश्व  के कई  शहरों  में भव्य और सर्वसुविधा युक्त आधुनिक   जमातखाने  बनवा  दिए  है .जिनमे लोग इबादत  करते  हैं . लेकिन  निजारी   दूसरे  मुसलमानों  की तरह  मक्का के  काबा की  तरफ  मुंह  करके इबादत  नहीं  करते  , बल्कि   दीवार के सहारे  खड़े होकर  किसी तरफ  मुंह  करके   प्रार्थना  करते हैं .इनका  कहना है कि  अल्लाह   तो  सर्वव्यापी   है , जैसा  खुद  कुरान में  कहा   गया है ,
" पूरब  और पश्चिम  अल्लाह के ही हैं ,तो तुम जिस  तरफ ही रुख  करोगे ,उसी  तरफ   ही अल्लाह का रुख  होगा . निश्चय ही अल्लाह   बड़े  विस्तार  वाला  और  सब  कुछ  जानने  वाला  है " सूरा - बकरा  2 :115
इसलिए  पश्चिम   में स्थित  मक्का  के काबा की तरफ मुंह  करके  नमाज  पढ़ने की कोई जरुरत नहीं  है .
3-अली  अल्लाह  का अवतार
निजारी  इस्माइली मानते   हैं  कि  अल्लाह  इमाम  के रूप में अवतार (incaarnation )     लेता  है . और अली अल्लाह के अवतार थे . निजारी  यह  भी आरोप  लगाते हैं ,कि   कुरान  में  इस बात का  उल्लेख   था ,लेकिन सुन्नियों ने उन आयतों  गायब कर दिया था ,जिनमे  अली  को अल्लाह का अवतार  बताया गया था .  आज  भी निजारी अली  को अल्लाह का अवतार  मानते  है  और उसकी प्रार्थना  करते हैं , ऐसी  एक  सिन्धी - गुजराती  मिश्रित  भाषा   की प्रार्थना  का नमूना   देखिये .
" हक़ तू ,पाक तू बादशाह मेहरबान   भी ,या अली तू  ही  तू .1
रब तू ,रहमान  तू ,या  अली अव्वल आखिर  काजी , या अली तू  ही तू .2
ते उपाया  निपाया  सिरजनहार  या अली तू  ही तू .3
जल  मूल  मंडलाधार  ना  या अली  हुकुम  तेरा या अली तू  ही तू .4
तेरी दोस्ती  में बोलिया  पीर शम्श  बंदा  तेरा या अली तू  ही तू .5
(पीर शम्श  कलंदर  दरवेश )
4-इस्माइली  कलमा 
निजारी  इस्माइली  सपष्ट  रूप से मुहम्मद  साहब  के चचेरे  भाई अली  को ही अल्लाह  का अवतार  मानते हैं  .  और इनका  कलमा   इस प्रकार  है ,
"अली अमीरुल  मोमनीन , अलीयुल्लाह "
"عليٌّ امير المومنين عليُ الله  "
अर्थात - ईमान वालों  के  नायक  अली   अल्लाह  .और  हर दुआ  के बाद  यह  कहते  हैं
"अलीयुल्लाह -  عليُ الله   "   यानि अली   अल्लाह  है .(The Ali, the God)
http://www.mostmerciful.com/dua-one.htm
5-इस्माइली  दुआ 
"ला फतह इल्ला  अली व् ल सैफ अल जुल्फिकार "
"لا فتح الّا علي و  سيف الذوالفقار  "
"तवस्सिलू  इन्दल  मसाईब बिल  मौला अल  करीम हैदिरिल  मौजूद शाह  करीम  अल हुसैनी "
" توصّلو عند المصايب بالمولا كم حيدر الموجود شاه كريم الحسينِ     "
अर्थ -अली  जैसा कोई  नायक नहीं  , और जुल्फिकार जैसी  कोई तलवार नहीं , इसलिए  मुसीबत के समय  मौजूदा  इमाम  शाह  करीम  अल हुसैनी   से मदद  मांगो .इसके अलावा  एक दुसरे का  अभिवादन  करते समय  कहते हैं ,
"شاه جو ديدار "(शाह  जो दीदार )अर्थात  शाह के दर्शन , तात्पर्य आपको इमाम  के दर्शन   हों
6-रसूल  के वंशज पीर  सय्यद  सदरुद्दीन 
इसी  तरह   इमाम जाफर  सादिक  की 21  पीढ़ी  में यानि रसूल  के वंश  में   सय्यद  सदरुद्दीन   का  जन्म  हुआ  जो ईरान से  हिजरत   करके  भारत  के गुजरात  प्रान्त  में आकर बस गए  ,उस समय   इमाम कासिम  शाह (  bet. 1310 C.E. and 1370 C.E.)   )  की इमामत  थी . बाद में इमाम  इस्लाम  शाह ( 30th Imam  ) ने   सदरुद्दीन   को   " पीर  " की पदवी  देकर सम्मान  प्रदान  किया .सदरुद्दीन    वैदिक  धर्म  से  इतने प्रभावित  हुए कि उन्होंने  जितने भी ग्रंथ  लिखे  हैं  , सभी  वैदिक  धर्म  पर आस्था प्रकट  की है .इनमे से कुछ के नाम  इस प्रकार  हैं .
7-इस्माइली  ज्ञान 
इस्माइली धार्मिक  पुस्तकों  को " ज्ञान "   ( उर्दू - گنان  )  गुजराती में " गिनान-ગિનાન  " कहा  जाता  है .ज्ञान  का अर्थ Knoledge है  .इनकी संख्या 250  से अधिक  बतायी  जाती  है .इन में अल्लाह और हजरत  अली  की स्तुति ,चरित्र शिक्षा ,रीति  रिवाज  सम्बन्धी  किताबें  , और  नबियों  की कथाएं वर्णित हैं .आश्चर्य  की  बात है कि  इस्माइली  अथर्ववेद   को भी अपनी ज्ञान  की किताबों  में शामिल  करते हैं .
8-रचनाएँ ग्रन्थ 
इमाम जाफर सादिक  की 20 वीं  पीढ़ी  में पैदा हुए " पीर शिहाबुद्दीन   "  ने ज्ञान  की  इन  किताबों   का उल्लेख  किया  है ,
1.बोध निरंजन -इसमे अल्लाह  के  वास्तविक  स्वरूप  और उसे   प्राप्त  करने की  विधि बतायी  गयी है.
2.  आराध -इसमे अल्लाह और अली की स्तुति  दी गयी है .
3. विनोद -इसमे अली  की महानता  और सृष्टि   की रचना  के बारे में  बताया  है
4. गायंत्री -यह   हिन्दुओं   का गायत्री  मन्त्र  ही  है ,
5. अथरवेद -अर्थात  अथर्ववेद   जो चौथा  वेद   है .  इस्माइली  इसे  भी अल्लाह की  किताब मानते  हैं  
  6.  सुरत  समाचार -इसमे   उदाहरण  देकर  बाले और  बुरे     लोगों  की तुलना  करके  बताया है कि  भले लोग बहुत कम  होते हैं  ,  लेकिन   हमें उनका ही साथ देना चाहिए .    
   6.गिरभावली -इसमे   शंकर पार्वती   की  वार्तालाप   के रूप में  संसार की रचना के  बारे में  बताया गया है.
7.बुद्ध  अवतार-इसमे विष्णु  के  नौवें  अवतार  भगवान  बुद्ध   का  वर्णन  है .
8. दस अवतार -इसमे विष्णु  के   दस  अवतारों  के  बाद  हजरत  अली  के अवतार  होने  का  प्रमाण
9.बावन घटी -इसमे  52  दोहों  में  फरिश्तों  और अल्लाह   के   बीच  सवाल  जवाब  के रूप में  मनुष्यों    में अंतर के बारे में  बताया है .
10. खट  निर्णय -सृष्टि  और  सतपंथ   के   6  महा पुरुषों     की जानकारी .
11.खट दरसन -वैदिक  धर्म  के छह  दर्शन  ग्रन्थ ,  जिन्हें  सभी  हिन्दू  मानते हैं  .
12. बावन बोध -इसमे  52  चेतावनियाँ   और  100  प्रकार  की रस्मों  के बारे में बताया है .
13. स्लोको ( श्लोक )- नीति  और  सदाचार के  बारे में छोटी  छोटी   कवितायेँ
14.दुआ- कुरान की  आयतों   के साथ  अल्लाह और  इमामों  की स्तुति ,के  छंद और  सभी इमामों  और पीरों  का  स्मरण
10-सत  पंथ 
फारसी  किताब " तवारीख  ए पीर "  के अनुसार  इस्लाम  क उदय के सात सौ साल  बाद  मुहम्मद  साहब  के वंशज  और इमाम  जाफर  सादिक   की  20  वीं  पीढ़ी  में जन्मे "सय्यद शिहाबुद्दीन  -"  ( سيّد شهاب الدين  ) भारत में  आये  थे . और गुजरात में  बस गए  थे .यह  पीर "सदरुद्दीन  हुसैनी " के  पिता  थे .इन्होने  भारत में  रह  कर  वैदिक हिन्दू धर्म  का गहन  अध्यन  किया . और  जब  उन्हें   वेदी धर्म   की सत्यता   का  प्रमाण  मिल  गया  तो  , उन्होंने  इस्माइली  फिरके में " सतपंथ "  नामका  अलग  संप्रदाय   बना दिया .इन्हीं   के  पुत्र  " पीर  सदरुद्दीन ( 1290-1367 )  " थे . जो इमाम जाफर  सादिक   की 21  वीं   पीढ़ी में पैदा  हुए . इन्होने पूरे पंजाब  , सिंध   और गुजरात  में सतपंथ   का  प्रसार किया .जिसका  अर्थ  Path  of Truth  होता  है .सतपन्थियों   के  अनुयाइयों  को  " मुरीद " यानि शिष्य  कहा  जाता  है . सत्पंथी    मानते हैं कि  इमाम    एक  बर्तन  की  तरह  होता  है ,जिसमे अल्लाह का नूर  भरा  होता है .और  इमाम को उसके शब्द  यानि फरमान   से पहचाना  जा  सकता  है .इमाम  के   दो  स्वरूप  होते  हैं  , बातिनी  यानी  परोक्ष (esoteric )   और   जाहिरी    यानी  अपरोक्ष (exoteric  ).सतपंथी इमाम  के प्रत्यक्ष  दर्शन   को " नूरानी  दीदार-vision of light  "  कहते  हैं .
11-सत्यप्रकाश 
निजारी  इस्माइली   पीर   ने " सत्यप्रकाश  (The True Light) )" नामकी  एक  पुस्तक  गुजराती  भाषा में   लिखी  थी , जिसका दूसरा  संसकरण  भी  प्रकाशित  हो गया  है . इसमे   निजारी  पंथ  के बारे में  पूरी  जानकारी  दी गयी  है . आप  इस लिंक से किताब  डाउन  लोड  कर सकते  हैं ,
ખુબ સંતોષની અનુભૂતિ સાથે મને કહેતાં અત્યંત ખુશી થાય છે કે અત્યંત લોકપ્રિય ગણાતી “સત્ય પ્રકાશ” નામની પુસ્તકની બીજી આવૃત્તિ બહાર પાડવામાં આવેલ છે.
गुजराती  में इसके विज्ञापन का अर्थ ,खूब संतोष  की अनुभूति  के साथ ,अत्यंत  ख़ुशी की  बात है कि अत्यंत  लोकप्रिय  गिनी   जाने वाली "सत्यप्रकाश  "  नामक  पुस्तक  की  दूसरी  आवृति   प्रकाशित  हो गयी  है ,
http://www.realpatidar.com/a/series40
इस  लेख  में दिए  अकाट्य  प्रमाणों  के आधार पर  ,हम  उन जिहादी   मानसिकता   वाले  मुसलमानों   से  पूछना  चाहते हैं  ,जो वैदिक  हिन्दू  धर्म  मानने  वालों  को  काफ़िर और  मुशरिक   कहते  हैं . ऐसे लोग  बताएं कि  जब  मुहम्मद  साहब के वंशज   वेद  को प्रमाण  मानते हैं , और गायत्री  मन्त्र  को पवित्र  मान कर  जप  करते हैं  , और  अल्लाह  का अवतार   भी  मानते हैं  , तो  क्या मुसलमान    उनको  काफ़िर  और  मुशरिक  कहने की हिम्मत  करेंगे ? और   फिर भी   कोई  मुसलमान  ऐसा  करेगा  तो उसकी   सभी  नमाजें   बेकार  हो जाएँगी . क्योंकि  मुसलमान  नमाज  में   दरुदे  इब्राहीम  भी पढ़ते  हैं , जिसमे   मुहम्मद  साहब  के  वंशजों यानि " आले मुहम्मद "  के लिए बरकत की दुआ और अल्लाह  की दोस्ती प्राप्त  करने की दुआ  की जाती है .अर्थात जो भी  रसूल  की " आल " यानि  वंशजों  की  बुराई  करेगा  जहन्नम  में  जायेगा .इसलिए सभी मुसलमान  सावधान  रहे .
हम तो  मुहम्मद  साहब के ऐसे  महान  वंशजों   को   सादर    प्रणाम   करते  हैं
   जो  पाठक  वैदिक  हिन्दू  धर्म  के  किसी भी  संगठन  के सदस्य  हों  या    कोई  वेबसाईट  चलाते  हों  वह इस  लेख को  हर जगह  पहुंचा  दें .ताकि  .  कट्टर  मुल्लों   का  हमेशा के लिए  मुंह  बंद   हो  जाये .

http://ismaili.net/heritage/node/30522