शनिवार, 10 जनवरी 2015

झूठे असदुद्दीन ओवैसी का मुंह काला !!

आज   सारी दुनिया  के लोग मान रहे हैं  कि इस्लाम  और  आतंकवाद  पर्यायवाची  शब्द  बन  गए  हैं  , जिस से पूरी  मानव  जाती को   खतरा  पैदा    हो गया  है  , भारत के लिए   यह  खतरा  अधिक  है   , क्योंकि  भारत में  जितने  मुसलमान   है  , उनके पूर्वज  कभी हिंदू थे  , जिनका जबरन   या  धोखे से धर्म  परिवर्तन   किया  गया  था  , धर्म  परिवर्तित   लोग  ही आतंकवादी    बन   कर अधिक खतरनाक   बन  जाते हैं  .क्योंकि इनको इस्लाम  की  असलियत   पता  नहीं  होती  , और   चालाक  मुल्ले  इनको  कुरान  और  हदीसों  के उलटे  सीधे  अर्थ  समझा  कर जिहादी  बना देते हैं  , यह बात  देश  की  अखंडता  और  सुरक्षा  के  लिए संकट  पैदा   करती   रहती  , और  जब  इस  समस्या  का  हल  करने  के उद्देश्य  से अज्ञानवश या  मजबूरी  से  बने  मुसलमानों  को फिर  से हिन्दू  धर्म  में  वापिस  लेने के  लिए "घर  वापसी " अभियान प्रारम्भ  कर दिया गया   ,तो इस्लाम के दलालों ,  एजेंटो   और  मुल्ले  मौलवियों  को  इस्लाम  खतरे  में   दिखाई  देने लगा   ,  और बौखला  कर सभी  हिन्दू  संगठनो पर  साम्प्रदायिकता फ़ैलाने का  आरोप  लगाने  लगे  . और  इस्लाम  के आतंकी रूप पर बुरका   डालने  के लिए  खुद  को  सेकुलर  होने  का ढोंग  रचाने  लगे  .
ऐसे ही  एक  इस्लाम के ठेकेदार और  नेता  का  नाम  " असदुद्दीन ओवैसी--اسد الدین اویسی " है  .  जो  अपने  अनर्गल और  भड़काऊ  बयानों  के लिए  कुख्यात  है  . यह व्यक्ति राजनीति  में सक्रीय  होने के साथ "कुल  हिन्द मजलिसे  इत्तिहादुल मुस्लिमीन -کل ہند مجلس اتحاد المسلمين " नामकी संस्था  का  अध्यक्ष  भी  है

इसने अपना  जिहादी  रूप  दिखा कर 5  जनवरी  2015 सार्वजनिक रूप से सभी  हिन्दू संगठनों   को चुनौती देते हुए  कहा कि " दुनिया  में  जो भी  बच्चा  पैदा  होता  है  , मुसलमान   ही  होता  है (Everyone is born Muslim) .ओवैसी  का यह  भड़काऊ  (और झूठ )बयान   सभी  प्रमुख  अखबारों  में  छापा गया  और ओवैसी  की  निजी  साईट ( http://www.aimim.in/). में भी  डाला गया   है  ,यही नहीं
जी   न्यूज(zeenews )  में इस  विषय  पर एक   चर्चा   आयोजित  की   थी  . लेकिन दुर्भाग्य  से  कोई ऐसा  हिन्दू  नेता   नहीं था  जो  ओवैसी  के  झूठ की  पोल   खोल  देता  . सभी  हिन्दू नेता अपना  बचाव  करने में  लगे  रहे , इसके बाद  जब   इंडिया  टी वी  की  तरफ  से रजत  शर्मा  ने  ओवैसी  से  सवाल  किया  तो  ओवैसी  ने  यही  जवाब  दिया  , रजत  जी ओवैसी को झूठा साबित नहीं  कर  पाये  ,क्योंकि उनको न तो  कुरान  और  हदीस का ज्ञान  है  , और न अरबी  जानते   हैं

. तब आखिर में हमने ओवैसी की   चालाकी और झूठ  का भंडा फोड़ने  का निश्चय किया  . ओवैसी का पूरा  भाषण इस विडिओ  में   दिया  गया  है  ,Asaduddin Owaisi says all are born Muslims - Full Speech

https://www.youtube.com/watch?v=qINqPOttPR4


नोट- यह  विडिओ करीब   10  मिनट  का  है  , अतः निवेदन  है  कि दर्शक   इसे  ध्यान  से देखें  , इसमे  ओवैसी   ने कुल   चार  दावे किये हैं  ,इन   चारों   का सटीक  जवाब  दावे  के  साथ दिया जा रहा है,

1 -आदम   भारत    आया  था  , मुसलमान उसी  की संतान   है  ,इसलिये  भारत  मुसलमानों  के  बाप की  जायदाद  है

जवाब1 -आदम  भारत कभी नहीं आया 

कुरान और  हदीस में आदम  के  हिन्दुस्तान  में  आने  का   कहीं  भी  उल्लेख  नहीं  है  , कुरान   की  इस आयत  के अनुसार अल्लाह ने आदम  और उसकी  औरत को   अलग  अलग  करके  जन्नत  से  निकाल  कर  जमीन  पर  फेक दिया   था  , कुरान में कहा है  "

" उतर  जाओ ,तुम  एक दूसरे  के   दुश्मन  हो  , तुम्हारे  के लिए  एक  नियत  समय  के लिए धरती में ठिकाना और निर्वाह   की   सामग्री  है  . और वहीँ  तुम्हें  जीना  और  वहीँ  मरना है  " सूरा -अल  आराफ़ 7:24 -25


" قَالَ اهْبِطُوا بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّ وَلَكُمْ فِي الْأَرْضِ مُسْتَقَرٌّ وَمَتَاعٌ إِلَىٰ حِينٍ   "7:24

नोट -इस आयत   में  साफ़  लिखा है " इहबीतू -  اهْبِطُوا  "(  get  down)   ,"फिल अर्ज -  فِي الْأَرْضِ  "  ( in the Earth ) . अर्थात धरती में  रहो .आदम को  भारत  आने और  रहने  की  बात  सरासर झूठ  और  ओवैसी   के खुराफाती   दिमाग की  चालाकी  है
आदम  और  हव्वा  कहाँ रहे थे  ?
कुरान  के अनुसार  अल्लाह  ने आदम और  हव्वा  को  अलग  अलग   करके  धरति  पर   भेज  दिया  था  , फिर वह  दोनो  कहाँ   गए  इसका विवरण  कुरान  और  हदीस  में  नहीं  मिलता   . लेकिन  बाद में एक  मुस्लिम लेखक   ने इनके बारे में यह लिखा है   "
"जब  अल्लाह  ने  आदम  और  हव्वा को  जन्नत  से  निकाल  दिया  तो  आदम  "सरानीब -سرانديب   " नामकी   जगह में  एक   टापू  के  पर्वत पर  गिर  गया , इस जगह   का नाम   श्री  लंका है  , और आदम  की  पत्नी  हव्वा ईराक  के  शहर बसरा  के  पास  एक जगह " अल उबुल्ला اُبُللا-  "    में  गिरी  थी  . आदम   अकेला ही  लंका  में  130 साल  रहा  ,और  वहीँ  मर  गया
 .

"Adam descended from Paradise into , in a land called Sarandib (Syri Lanka, now-a-days). Hawwa’ (Eve) descended in a location different from Adam. Iblis, descended into an area in present-day Iraq, now a town named al-Ubullah (next to al-Basrah. where he had lived for 130 years"

फिर ओवैसी  हिंदुस्तान  को  अपने  बाप  की  जायदाद  किस  आधार पर  कह  सकता है  ? ,जबकि  आदम  और हव्वा का  भारत  से कोई सम्बन्ध    नहीं  है


आदम   शिखर  ( 7,357 feet high )आज  भी  लंका  में  मौजूद   है  , यह  उसकी  तस्वीर  है .लंका   में आदम  शिखर

http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/a/a2/Sri_Pada.JPG

अधिक  जानकारी के  लिए   यह  साईट  देखिये

http://mapwalk2012.clevelandhistory.org/mountain-of-sarandib-adams-peak/

आदम  और हव्वा  के लंका में  रहने  की  जानकारी   इस  इस्लामी  साईट  में   से ली गयी है

http://islambrowser.blogspot.in/2012/10/nur-muhammad.html

2 -मुहम्मद  ने  कहा था  कि  मुझे   हिंदुस्तान  की ठंडी  हवाएँ आती  है  , यानि  मुहम्मद भारत को   चाहते  थे

जवाब 2-भारत  से ठंडी हवाएँ  आती है ?

मुहम्मद  ने जिंदगी  में ऐसा  कभी  नहीं   कहा    कि  मुझे  हिन्दुस्तान  की ठंडी  हवाएँ  आ रही है  , और न किसी  हदीस   में यह उल्लेख   है , यह बात   तो अली ने कही थी  , क्योंकि अरब  के लोग   मानते थे की भारत  ठंडा देश  है  , और जब  भी पूरब  से ठंडी  हवा  चलती थी तो  लोग कहते थे यह  हिंदुस्तान  की  हवा है  , यही   बात  अली   ने  कही  थी    अल  हाकिम  ने  अपनी  किताब  में लिख  दी है

"अब्बास ने  कहा  कि , अली  इब्न अबी  तालिब  ने  कहा  है " मैं  हिदुस्तान    से आने  वाली  ठंडी  हवायें महसूस कर रहा  हूँ  "


عن ابن عباس رضي الله عنهما ، قال : قال علي بن أبي طالب : أطيب ريح في الأرض الهند 

Ibn Abbas (RA) said, Ali (RA) said: "I feel cool breeze from Hind."

Mustadrak Al-Haakim Hadith 3954.

नोट - यह बात   मुहम्मद  के चचेरे  भाई  और  दामाद   अली  ने  कही  थी  , इसका उल्लेख  किसी  भी  हदीस  की  किताब  में नहीं   है  ,  इसे  मुहमद  साहब  के  करीब  300  साल  बाद  ईरान  के  इतिहासकार "अबू  अब्दुल्लाह  मुहम्मद बिन  अब्दुल्लाह  अल  हाकिम - أبو عبدالله محمد بن عبدالله الحاكم   "  ने  अपनी  किताब  " मुस्तदरक अल हाकिम - مستدرك الحاكم"में  दर्ज   किया  है। अल  हाकिम  का  काल (933 - 1012)  ईसवी है .  मुहम्मद साहब  ने  ऐसा कभी  नहीं  कहा  कि  मुझे  हिंदुस्तान  की  ठंडी  हवाएँ  महसूस  हो  रही  हैं  ,  इसके विपरीत  वह    भारत  पर  हमला  करके  उसकी   दौलत  लूटने  की  योजना बना   रहे  थे  , लेकिन  मर जाने से  उनकी  इच्छा पूरी  नहीं   हो पायी  , इसका  सबूत  इस हदीस  से मिलता   है
हिंदुस्तान  पर  हमला -

" अबू  हुरैरा  ने  कहा  कि  रसूल  ने  हम  लोगों  से  वादा  किया  कि हम   हिंदुस्तान  पर  हमला   करेंगे  ,और उसकी दौलत के लिए खुद को  शहीद  होते हुए    तक देखना चाहूंगा  ,और  यदि  मैं  जिन्दा रहा  तो मेरे  साथ  दौलत होगी  , और  अगर  में मर  गया  तो मैं  सबसे  बड़ा  शहीद  माना  जाऊंगा  "

"The Messenger of Allah  promised that we would invade India. If I live to see that I will sacrifice myself and my wealth. If I am killed, I will be one of the best of the martyrs, and if I come back, I will be Abu Hurairah Al-Muharrar."

"عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ وَعَدَنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم غَزْوَةَ الْهِنْدِ فَإِنْ أَدْرَكْتُهَا أُنْفِقْ فِيهَا نَفْسِي وَمَالِي وَإِنْ قُتِلْتُ كُنْتُ أَفْضَلَ الشُّهَدَاءِ وَإِنْ رَجَعْتُ فَأَنَا أَبُو هُرَيْرَةَ الْمُحَرَّرُ   "

 Sunan an-Nasa'i - Vol. 1, Book 25, Hadith 3176

इसलिए  हर  मुसलमान  मुहम्मद   की यह  अधूरी इच्छा  पूरी  करने के  लिए  भारत के बहार और भीतर  आतंकी वारदातें  करते  रहते  हैं  , ताकि  भारत की  दौलत   मुसलमानों  के  हाथों  आजाये

3 -हर  बच्चा  जन्म  से  मुस्लमान होता है ? , इसलिए उसका धर्म   बदलना   गलत है

जवाब 3-कुरान   में  एक  भी ऐसी  आयत  नहीं  है ,जिसमे  कहा  गया हो  कि पैदा  होने वाला  हरेक  बच्चा  मुस्लमान  होता   है  , लेकिन  एक  हदीस है जिसका  गलत  अर्थ  करके मुसलमान   चालाकी  से यही  साबित करते  हैं  ,   मूल  हदीस इस  प्रकार  है

"रसूल   ने कहा  कि  हरेक   बच्चा  अपनी  फितरत   के  साथ  पैदा  होता  है  , अभिभावक  उसे  यहूदी  .  ईसाई   , मुशरिक    बना  देते  हैं "
सही मुस्लिम -किताब 33  हदीस 6426 


The Prophet Muhammad said, "No babe is born but upon Fitra . It is his parents who make him a Jew or a Christian or a Polytheist."

"‏"‏ مَا مِنْ مَوْلُودٍ إِلاَّ يُلِدَ عَلَى الْفِطْرَةِ فَأَبَوَاهُ يُهَوِّدَانِهِ وَيُنَصِّرَانِهِ وَيُشَرِّكَانِهِ

(Sahih Muslim, Book 033, Number 6426)
इस  हदीस  का अंगरेजी  में   सही  अर्थ यह  है  (EVERYONE IS BORN ACCORDING TO HIS TRUE NATURE).इस पूरी  हदीस   में  मुसलमान  शब्द  तक  नहीं  है  , फिर  ओवैसी  जैसे  धूर्त  किस  मुंह  से  कहते हैं  कि  हर   पैदा होने  वाला  बच्चा  मुसलमान   ही  होता  है ? यह  झूठ   नहीं   तो क्या  है  ?हर  बच्चा  जन्म   से  हिन्दू  होता  है  , लिंग   कटाने से  मुस्लमान   बनाया  जाता है  ,यदि  ओवैसी  की बात सही है तो  उसकाअल्लाह  हर बच्चे का लिंग कटा  हुआ   पैदा  क्यों  नहीं  करता ?

4 -इस्लाम   में  जबरदस्ती  नहीं  है  ,लोग ख़ुशी  से  मुस्लमान बन रहे हैं

वाब 4- धर्म  में  जबरदस्ती   नहीं   है ?
धर्म  में  जबरदस्ती   नहीं  है  , कुरान  का  यह आदेश   सबके  लिए  , और    हमेशा  के लिए नहीं   है  , मुहम्मद ने  यह बात  बनु  नजीर  के  यहूदियों  को  कहा  था  , यह  बात  इस  हदीस   में  मौजूद  है ,
" इस्लाम  से पहले  जब  किसी  महिला के बच्चे  अकाल  मृत्यु   मर  जाते  थे  ,तो  वह बच्चे  की  दीर्घायु  के  लिए यहूदी  मंदिर में जाकर कसम  खाती  थी कि यदि मेरा  अगला  बच्चा  दीर्घायु  होगा तो  मैं  उसे  यहूदी  बना   कर  मंदिर  को  सौंप  दूँगी  . उस  समय  अंसारों  के   ऐसे कई  बच्चे यहूदियों  के  पास थे ,तब  मुहमद  ने बनु  नजीर  कबीले  के यहूदी  रब्बी  को  सुना  कर   कुरान   की  यह  आयत  कही  थी ,
" धर्म  के  विषय   में  जबरदस्ती   नहीं    है  "सूरा  - बकरा  2:256 

"لَا إِكْرَاهَ فِي الدِّينِ   "2:256

"there is no compulsion in religion"2:256


When the children of a woman (in pre-Islamic days) did not survive, she took a vow on herself that if her child survives, she would convert it a Jew. When Banu an-Nadir were expelled (from Arabia), there were some children of the Ansar (Helpers) among them. They said: We shall not leave our children. So Allah the Exalted revealed; "Let there be no compulsion in religion."


"فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ ‏{‏ لاَ إِكْرَاهَ فِي الدِّينِ قَدْ تَبَيَّنَ الرُّشْدُ مِنَ الْغَىِّ ‏}‏ "

Sunan Abu Dawood, Book 14, Hadith 2676 (Arabic: سنن أبي داود‎, )

इतिहास गवाह  है  कि इस्लाम  के जन्म से लेकर  आज  तक  मुसलमान   गैर मुस्लिमों  को जबरन   इस्लाम  काबुल करने पर  विवश  कर रहे हैं  , जो  ओवैसी  के इस झूठ  को मानेगा  उसको  अपने  दिमाग  का इलाज  करवाना  चाहिए  !देखते  है  कौन  इस्लाम  का  एजेंट  इस  लेख  के प्रमाणों  को  गलत  साबित  करता है  ?
हमने  तो  पुख्ता  सबूत देकर  असादुद्दीन   ओवैसी  के   झूठ  का भंडा  फोड़   कर  उसका  मुंह  काला  कर  दिया  ,

गुरुवार, 1 जनवरी 2015

सूफीवाद धर्मान्तरण की बुनियाद

किसी भी दैनिक अख़बार को उठा कर देखिये आपको पढ़ने को मिलेगा की आज हिंदी फिल्मों का कोई प्रसिद्द अभिनेता या अभिनेत्री अजमेर में गरीब नवाज़ अथवा निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर चादर चढ़ा कर अपनी फिल्म के हिट होने की मन्नत मांगने के लिए गया। भारतीय समाज में भी एक विशेष आदत हैं, वह हैं अँधा अनुसरण करने की। क्रिकेट स्टार, फिल्म अभिनेता, बड़े उद्योगपति जो कुछ भी करे भी उसका अँधा अनुसरण करना चाहिए चाहे बुद्धि उसकी अनुमति दे चाहे न दे.अज्ञानवश  लोग दरगाहों  पर  जाने को  हिन्दू  मुस्लिम  एकता   और  आपसी  भाईचारे का  प्रतिक  मान   लेते हैं  , लेकिन  उनको पता नहीं   कि  सूफीवाद भी  कट्टर  सुन्नी  इस्लाम  एक  ऐसा  संप्रदाय   है  ,जो  बिना  युद्ध  और  जिहाद के  हिन्दुओं  को  मुसलमान  बनाने में  लगा   रहता है  , भारत -पाक   में  सूफियों   के  चार  फिरके   हैं   , पूरे भारत में इनकी दरगाहें  फैली  हुई हैं ,जहां  अपनी  मन्नत  पूरी  कराने के  लालच  में हिन्दू  भी  जाते हैं
1-चिश्तिया ( چشتی‎  )
2-कादिरिया ( القادريه,)
3-सुहरावर्दिया  سهروردية‎)
4-नक्शबंदी ( نقشبندية‎ )
इन  सभी  का उद्देश्य   हिन्दुओं   का  धर्म  परिवर्तन  कराना  और  दुनिया में  " निज़ामे  मुस्तफा -نظام مصطفى‎  "  स्थापित  करना  है  . जिस  समय   भारत की आजादी  का आंदोलन   चल  रहा  था सूफी  " तबलीगी  जमात - تبلیغی جماعت"    बनाकर    गुप्त  रूप से हिन्दुओं  का  धर्म परवर्तन  कराकर    मुस्लिम  जनसंख्या  बढ़ने का  षडयंत्र   चला  रहे   थे  .
दिल्ली के एक कोने में निजामुद्दीन औलिया की दरगाह हैं।  1947से पहले इस दरगाह के हाकिम का नाम था ख्वाजा हसन निजामी था।(1878-1955)


 आज के मुस्लिम लेखक निज़ामी की प्रशंसा उनके उर्दू साहित्य को देन अथवा बहादुर शाह ज़फर द्वारा  1857के संघर्ष पर लिखी गई पुस्तक को पुन: प्रकाशित करने के लिए करते हैं। परन्तु निज़ामी के जीवन का एक और पहलु था। वह गुप्त जिहादी  था
धार्मिक मतान्धता के विष से ग्रसित निज़ामी ने हिन्दुओं को मुसलमान बनाने के लिए  1920 के दशक में एक पुस्तक लिखी थी जिसका नाम था दाइये इस्लाम-دايءاسلام " इस पुस्तक को इतने गुप्त तरीके से छापा गया था की इसका प्रथम संस्करण का प्रकाशित हुआ और कब समाप्त हुआ इसका मालूम ही नहीं चला। इसके द्वितीय संस्करण की प्रतियाँ अफ्रीका तक पहुँच गई थी। इस पुस्तक में उस समय के 21  करोड़ हिन्दुओं में से  1 करोड़ हिन्दुओं को इस्लाम में दीक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था .

एक आर्य सज्जन को उसकी यह प्रति अफ्रीका में प्राप्त हुई जिसे उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद जी को भेज दिया। स्वामी ने इस पुस्तक को पढ़ कर उसके प्रतिउत्तर में पुस्तक लिखी जिसका नाम था "खतरे का घंटा"।
इस पुस्तक के कुछ सन्दर्भों के दर्शन करने मात्र से ही लेखक की मानसिकता का बोध हमें आसानी से मिल जायेगा की किस हद तक जाकर हिन्दुओं को मुस्लमान बनाने के लिए मुस्लिम समाज के हर सदस्य को प्रोत्साहित किया गया था जिससे न केवल धार्मिक द्वेष के फैलने की आशंका थी अपितु दंगे तक भड़कने के पूरे असार थे। आइये इस पुस्तक के कुछ अंशों का अवलोकन करते हैं।

1- फकीरों के कर्तव्य - जीवित पीरों की दुआ से बे औलादों के औलाद होना या बच्चों का जीवित रहना या बिमारियों का दूर होना या दौलत की वृद्धि या मन की मुरादों का पूरा होना, बददुआओं का भय आदि से हिन्दू लोग फकीरों के पास जाते हैं बड़ी श्रद्धा रखते हैं। मुस्लमान फकीरों को ऐसे छोटे छोटे वाक्य याद कराये जावे,जिन्हें वे हिन्दुओं के यहाँ भीख मांगते समय बोले और जिनके सुनने से हिन्दुओं पर इस्लाम की अच्छाई और हिन्दुओं की बुराई प्रगट हो .

2- गाँव और कस्बों में ऐसा जुलुस निकालना जिनसे हिन्दू लोगों में उनका प्रभाव पड़े और फिर उस प्रभाव द्वारा मुसलमान बनाने का कार्य किया जावे।

3-गाने बजाने वालों को ऐसे ऐसे गाने याद कराना और ऐसे ऐसे नये नये गाने तैयार करना जिनसे मुसलमानों में बराबरी के बर्ताव के बातें और मुसलमानों की करामाते प्रगट हो .

4- गिरोह के साथ नमाज ऐसी जगह पढ़ना जहाँ उनको दूसरे धर्म के लोग अच्छी तरह देख सके . और  उनकी  शक्ति  देख  कर इस्लाम से  आकर्षित  हो  जाएँ  .

5-. ईसाईयों और आर्यों के केन्द्रों या उनके लीडरों के यहाँ से उनके खानसामों, बहरों, कहारों चिट्ठीरसारो, कम्पाउन्डरों,भीख मांगने वाले फकीरों, झाड़ू देने वाले स्त्री या पुरुषों, धोबियों, नाइयों, मजदूरों, सिलावतों और खिदमतगारों आदि के द्वारा ख़बरें और भेद मुसलमानों को प्राप्त करनी चाहिए।.

6- सज्जादा नशीन अर्थात दरगाह में काम करने वाले लोगों को मुस्लमान बनाने का कार्य करे .

7- ताबीज और गंडे देने वाले जो हिन्दू उनके पास आते हैं उनको इस्लाम की खूबियाँ बतावे और मुस्लमान बनने की दावत दे .
8-. देहाती  स्कूलों के  मुस्लिम   अध्यापक अपने से पढने वालों को और उनके माता पिता को इस्लाम की खूबियाँ बतावे और मुस्लमान बनने की दावत दे .

9- नवाब रामपुर, टोंक, हैदराबाद , भोपाल, बहावलपुर और जूनागढ आदि को , उनके ओहदेदारों ,जमींदारों ,नम्बरदार, जैलदार आदि को अपने यहाँ पर काम करने वालो को और उनके बच्चों को इस्लाम की खूबियाँ बतावे और मुस्लमान बनने की दावत दे .

10. माली, किसान,बागबान आदि को आलिम लोग इस्लाम के मसले सिखाएँ क्यूंकि साधारण और गरीब लोगों में दीन की सेवा करने का जोश अधिक रहता हैं .

11- दस्तगार जैसे सोने,चांदी,लकड़ी, मिटटी, कपड़े आदि का काम करने वालों को अलीम इस्लाम के मसलों से आगाह करे जिससे वे औरों को इस्लाम ग्रहण करने के लिए प्रोत्साहित करे .

12- फेरी करने वाले घरों में जाकर इस्लाम के खूबियों बताये , दूकानदार दुकान पर बैठे बैठे सामान खरीदने वाले ग्राहक को इस्लाम की खूबियाँ बताये।

13- पटवारी, पोस्ट मास्टर, देहात में पुलिस ऑफिसर, डॉक्टर , मिल कारखानों में बड़े औहदों पर काम करने वाले मुस्लमान इस्लाम का बड़ा काम अपने नीचे काम करने वाले लोगों में इस्लाम का प्रचार कर कर हैं सकते हैं .

14 राजनैतिक लीडर, संपादक , कवि , लेखक आदि को इस्लाम की रक्षा एह वृद्धि का काम अपने हाथ में लेना चाहिये .

15-. स्वांग करने वाले, मुजरा करने वाले, रण्डियों को , गाने वाले कव्वालों को, भीख मांगने वालो को सभी भी इस्लाम की खूबियों को गाना चाहिये।

यहाँ पर सारांश में निज़ामी की पुस्तक के कुछ अंशों को लिखा गया हैं। पाठकों को भली प्रकार से निज़ामी के विचारों के दर्शन हो गये होंगे .

1947 के पहले यह सब कार्य जोरो पर था , हिन्दू समाज के विरोध करने पर दंगे भड़क जाते थे, अपनी राजनितिक एकता , कांग्रेस की नीतियों और अंग्रेजों द्वारा प्रोत्साहन देने से दिनों दिन हिन्दुओं की जनसँख्या कम होती गई जिसका अंत पाकिस्तान के रूप में निकला।

अब पाठक यह सोचे की आज भी यही सब गतिविधियाँ सुचारू रूप से चालू हैं केवल मात्र स्वरुप बदल गया हैं। हिंदी फिल्मों के अभिनेता,क्रिकेटर आदि ने कव्वालों , गायकों आदि का स्थान ले लिया हैं और वे जब भी निजामुद्दीन की दरगाह पर माथा टेकते हैं तो मीडिया में यह खबर ब्रेकिंग न्यूज़ बन जाती हैं। उनको देखकर हिन्दू समाज भी भेड़चाल चलते हुए उनके पीछे पीछे उनका अनुसरण करने लगता हैं।

देश भर में हिन्दू समाज द्वारा साईं संध्या को आयोजित किया जाता हैं जिसमे अपने आपको सूफी गायक कहने वाला कव्वाल हमसर हयात निज़ामी बड़ी शान से बुलाया जाता हैं। बहुत कम लोग यह जानते हैं की कव्वाल हमसर हयात निज़ामी के दादा ख्वाजा हसन निज़ामी के कव्वाल थे और अपने हाकिम के लिए ठीक वैसा ही प्रचार इस्लाम का करते थे जैसा निज़ामी की किताब में लिखा हैं। कहते हैं की समझदार को ईशारा ही काफी होता हैं यहाँ तो सप्रमाण निजामुद्दीन की दरगाह के हाकिम ख्वाजा हसन निजामी और उनकी पुस्तक दाइये इस्लाम पर प्रकाश डाला गया हैं  .ताकि  हिन्दू  भविष्य में  किसी  औलिया  पीर   या  साईँ  की  कब्रों  पर जाकर लाशों  की  पूजा  करने  की   वैसी  भूल  नहीं   करें   ,जिस से देश का विभाजन  हुआ  था  , जिसका  फल हिन्दू  आज  भी  भोग  रहे   है
,बताइए   अभी नहीं  तो हिन्दू समाज कब इतिहास और अपनी गलतियों से सीखेगा?