रविवार, 15 फ़रवरी 2015

अल्लाह की पत्नी अशेरा है !

इस लेख  का  शीर्षक  पढ़ कर  पाठक  जरूर  चौंक  जायेगे   , और कुछ लोग  इसे  झूठ  , और कोरी गप्प    भी  मान लेंगे , लेकिन  यह बात  बिलकुल  सत्य  और  प्रामाणिक  है   , लेकिन   इस  सत्य   को समझने के लिए  हमें   पता  होना  चाहिए कि  कुरान   से पहले भी अल्लाह  की  तीन  और किताबें   थीं  ,  जिनके नाम  तौरेत  ,  जबूर  और  इंजील   हैं   , इस्लामी   मान्यता  के अनुसार  अल्लाह  ने  जैसे मुहम्मद  साहब  पर  कुरान   नाजिल  की थी  ,उसी तरह  मूसा को  तौरेत  , दाऊद  को  जबूर  और  ईसा को  इंजील नाजिल  की थी  . यहूदी  सिर्फ  तौरेत  और  जबूर  को  और ईसाई  इन तीनों  पर  ईमान  रखते हैं  ,क्योंकि   खुद  कुरान     ने  कहा है  ,

1-कुरान और तौरेत  का  अल्लाह  एक  है 

"कहो  हम  ईमान  लाये  उस  चीज  पर  जो ,जो हम पर भी  उतारी   गयी  है  , और तुम पर भी उतारी  गयी  है  , और हमारा  इलाह और तुम्हारा इलाह   एक ही है  . हम  उसी  के  मुस्लिम  हैं  " सूरा  -अल  अनकबूत 29:46 


""We believe in that which has been revealed to us and revealed to you. And our God and your God is one; and we are Muslims [in submission] to Him."Sura -al ankabut  29;46



    "وَإِلَـٰهُنَا وَإِلَـٰهُكُمْ وَاحِدٌ وَنَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ  "

इलाहुना  व् इलाहकुम   वाहिद  , व्  नहनु  लहु  मुस्लिमून "

यही  नहीं  कुरान  के अलावा  अल्लाह  की  किताबों   में  तौरेत इसलिए  महत्वपूर्ण  है क्योंकि   कुरान  में तौरेत  शब्द  18  बार  और उसके  रसूल  मूसा का नाम  136  बार  आया   है   , यही नहीं  मुहम्मद  साहब  भी    तौरेत  और उसके  लाने वाले  मूसा  पर ईमान  रखते  थे  ,  जैसा की  इस हदीस में   कहा है  ,

"अब्दुल्लाह  इब्न  उमर  ने कहा   कि  एक बार  यहूदियों   ने  रसूल   को  अपने  मदरसे में   बुलाया  और ,अबुल  कासिम   नामक  व्यक्ति  का फैसला  करने को कहा  ,  जिसने  एक  औरत   के साथ  व्यभिचार   किया  था  . लोगों   ने  रसूल  को  बैठने के लिए  एक गद्दी  दी  , लेकिन  रसूल  ने उस  पर तौरेत  रख   दी  . और  कहा  मैं तुझ  पर और  उस पर  ईमान रखता हूँ   और  जिस पर तू  नाजिल   की गयी  है  , फिर रसूल ने कहा तुम लोग वाही करो  जो  तौरेत में लिखाहै  . यानी   व्यभिचारि  को  पत्थर  मार   कर मौत  की  सजा ,

(महम्मद  साहब   ने अरबी  में  कहा "आमन्तु बिक  व् मन अंजलक -  ‏ آمَنْتُ بِكِ وَبِمَنْ أَنْزَلَكِ ‏"‏ ‏.‏     " I believed in thee and in Him Who revealed thee.

सुन्नन  अबी  दाऊद -किताब  39  हदीस  4434 

इन  कुरान  और  हदीस  के हवालों  से  सिद्ध  होता है  कि  यहूदियों  और मुसलमानों  का अल्लाह एक  ही  है और  तौरेत  भी कुरान की तरह  प्रामाणिक    है  .
चूँकि  लेख  अल्लाह  और  उसकी  पत्नी  के बारे में है इसलिए हमें यहूदी  धर्म से  काफी पहले के धर्म  और  उनकी  संस्कृति  के बारे में  जानना    भी जरूरी  है  .

2-मीडियन  धर्म  क्या   था  ?
इतिहास के अनुसार  ईसा  पूर्व 2200 -1700  के  बीच पूर्वोत्तर  अरब  प्रायद्वीप  में  मीडियन धर्म  प्रचलित था  ,जिसे  अरबी में " मदयन -مدين‎    "   और  ग्रीक भाषा में  मीडियन - Μαδιάμ)"  कहा  जाता  था .इस  धर्म   का   प्रसार  अकाबा की  खाड़ी  से लाल  सागरकी   सीमा   तक  था  . मीडियन  लोग " बाअल  , और  बोएर   देवता  के  साथ  स्वर्ग  की  देवी अश्तरोथ ( Ashteroth  )  देवी  की  पूजा  करते  थे  , यह भी कहा जाता है कि  मदयं के जंगल में ही  मूसा   को एक  जलती  हुई  झड़ी  के पीछे  यहोवा  ने  दर्शन   दिए  थे  , इस के बाद  मदयन  के  लोग  भी  यहोवा  की  पूजा  करने  लगे  , और  यहोवा यहूदियों  के ईश्वर की तरह  यरूशलेम  में   पूजने  लगा  ,
 
3-अल्लाह को  कैसे  बनाया  गया  ?
जिस अल्लाह के  नाम पर  मुसलमान  सारी  दुनिया में    जिहादी  आतंक  फैला कर  रोज  हजारों  निर्दोष  लोगों  की हत्या  करते  रहते हैं  , उसी  अल्लाह के बारे में  एक   उर्दू  के  शायर में   यह  लिखा   है  ,

"शुक्र  कर खुदाया  , मैंने  तुझे  बनाया  , तुझे  कौन  पूछता  था  मेरी  बंदगी  से  पहले "

शायर की  यह   बात शतप्रतिशत  सत्य  है  क़्योकि इस्लाम  से पहले  अरब  में  कोई अल्लाह  का नाम  भी नहीं   जनता था    . यहांतक जिन  तौरेत  ,जबूर  और इंजील   को मुसलमान  अल्लाह  की   कुरान से पहले  की किताबें  कहते हैं  , उन में भी  अल्लाह  शब्द    नहीं   मिलता   है  ,
तौरेत  यानि   बाइबिल   के  पुराने  नियम   में ईश्वर  (God ) के  लिए हिब्रू  में " य  ह वे ह -  Hebrew: יהוה‎ "शब्द  आया   है    ,जो  एक उपाधि ( epithet  )  है  . तौरेत में  इस  शब्द का  प्रयोग तब से होने लगा जब  यहूदियों   ने  यहोवा  को इस्राएल और  जूडिया    का राष्ट्रीय  ईश्वर बना  दिया  था  , इस से पहले  इस भूभाग में फोनेशियन  और कनानी संस्कृति  थी   ,जिनके  सबसे बड़े  देवता का   नाम  हिब्रू में  "एल -  אל‎ " था  . जिसे  अरबी   में "इल -إل‎  "या  इलाह  إله-"  भी   कहा जाता था   , और अक्कादियन लोग  उसे "इलु - Ilu   "कहते थे . इन सभी  शब्दों   का  अर्थ  "देवता  -god "   होता   है  . इस  "एल " देवता को मानव  जाति  ,और सृष्टि  को पैदा  करने वाला   और "अशेरा -" देवी का पति माना जाता था .  (El or Il was a god also known as the Father of humanity and all creatures, and the husband of the goddess Asherah (בעלה של אלת האשרה) .सीरिया   के  वर्त्तमान" रास अस शमरा -رأس شمرا‎,  "  नामकी   जगह   करीब 2200  साल  ईसा पूर्व  एक मिटटी  की तख्ती  मिली  थी , जिसने  इलाह  देवता और उसकी पत्नी  अशेरा    के बारे में  लिखा     था  ,

पूरी  कुरान   में  269  बार  इलाह -  إله-"    " शब्द   का  प्रयोग   किया  गया   है   ,  और  इस्लाम  के बाद  उसी  इलाह  शब्द  के  पहले अरबी  का डेफ़िनिट आर्टिकल "अल -  ال"  लगा  कर अल्लाह ( ال+اله  ) शब्द  गढ़  लिया  गया   है  , जो आज मुसलमानों  का अल्लाह   बना हुआ है .  इसी  इलाह   यानी  अल्लाह की  पत्नी  का नाम  अशेरा  है   .

4-अशेरा   का  परिचय 

  अक्कादिअन   लेखों  में  अशेरा    को अशेरथ  (Athirath )  भी   कहा   गया  है   ,  इसे मातृृत्व और  उत्पादक    की  देवी   भी  माना जाता  था   , यह सबसे बड़े देवता "एल "  की  पत्नी  थी   .  इब्राहिम   से  पहले  यह  देवी मदयन  से  इजराइल  में   आगयी  थी।  इस्राइली इसे    भूमि केदेवी   भी   मानते थे।  इजराइल  के लोगों  ने  इसका  हिब्रू  नाम "अशेरह - אֲשֵׁרָה‎),  " कर  दिया  . और यरूशलेम  स्थित  यहोवा  के मंदिर में इसकी  मूर्ति  भी  स्थापित कर  दी  गयी थी  .अरब  के  लोग  इसे " अशरह -عشيره   "  कहते   थे  , और हजारों  साल  तक यहोवा   के  साथ   इसकी  पूजा  होती    रही   थी   .

5-अशेरा अल्लाह  की  पत्नी 

अशेरा   यहोवा  उर्फ़   इलाह  यानी  अल्लाह   की  पत्नी   है  यह बात  तौरेत  की  इन  आयतों  से साबित होती   है   ,  जो इस प्रकार है
   

"HWH came from sinai ,and shone forth from his own seir ,He showed himself from mount Paran ,yes he came among the  myriads of Qudhsu  at his right  hand , his own  Ashera indeed , he who loves clan and all his  holy ones  on his left "

"यहोवा  सिनाई  से  आया  , और सेईर से  पारान  पर्वत  से  हजारों  के बीच में खुद  को  प्रकाशित किया  , दायीं  तरफ कुदशु (Qudshu:( Naked Goddess of Heaven and Earth') और उसकी  "अशेरा ", और  जिनको वह  प्रेम  करता  है  वह   लोग   बायीं  तरफ   थे "

 
तौरेत  - व्यवस्था   विवरण 33 :2 -3 (Deuteronomy 33.2-3,)

नोट - ध्यान  करने  योग्य  की   बात है कि  तौरेत  में  हिब्रू (Hebrew )  भाषा  में  साफ़ लिखा  है  "यहोवा  व् अशेरती -  יהוה ואשרתו " यानी  यहोवा  और उसकी  " अशेरा " अंगरेजी में  "  Yahweh and his Asherah "यहाँ  पर    मुहावरे की  भाषा  का  प्रयोग  किया  गया  है  , यहोवा  और  उसकी  अशेरा का   तात्पर्य  यहोवा  और उसकी पत्नी  अशेरा   है    , जैसे  राम  और उसकी  सीता  का  तात्पर्य  राम और उसकी  पत्नी  सीता  होता   है .
6-तौरेत में अशेरा   का उल्लेख 

अशेरा का  उल्लेख  तौरेत  (Bible)की  इन  आयतों   में  मिलता   है
"उसने बाल  देवता  की  वेदी  के साथ  अशेरा  को भी  तोड़  दिया  " Judges 6:25).

" और  उसने अशेरा  की  जो  मूर्ति  खुदवाई उसे यहोवा के भवन में  स्थापित किया "(2 Kings 21:7

" और  जितने  पात्र अशेरा  के लिए बने हैं  उन्हें यहोवा के मंदिर से निकालकर लाओ "2 Kings 23:4)


"स्त्रियां  अशेरा  के लिए  परदे बना करती  थीं  "2 Kings 23:7).

"सामरिया  में  आहब ने अशेरा  की  मूर्ति   लगायी  "1 Kings 16:33).

मदयन  में  खुदाई में  इलाह  देवता   यानि  वर्तमान  अल्लाह   की  पत्नी  की  जो  मूर्ति  मिली   है   ,उसमे  अशेरा  के सिर पर  कलगीदार पगड़ी ,कन्धों  पर पंख  , हाथों  में आयुध  है  , और वह  दो  सिंहों  पर  खड़ी  है   , दौनों तरफ   उल्लू   है  ,और अशेरा   पूरी तरह  नग्न  है , अशेरा  की  फोटो  देखिये -Photo  of Ashera


 
http://www.bible-archaeology.info/Ishtar_BM.jpg


http://classicalwisdom.com/asherah-lost-goddess/

20 टिप्‍पणियां:

  1. बड़ा ही रहस्यमय ज्ञान है। सराहनीय प्रयास है आपका।

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    1. Dimagh kharab he iss pandit ka jo logo ko bakwas bate suna sunakar or bhtka raha hai.....
      Are murkh kuraan last kitab hai or wo isliye ki pehli jitni Bhi kitabe aai he unme uss waqt jo rajeshai thi Unhine apne man mutabik bate ghadli jo achha laga usko wese hi rehne diya or jo wo nahi kar sakte the unke ichha k khikaf tha usko mita diya gaya har kitab me manmutabik bate rakhi jese ki udaharan ye aagar tab sharab pina galat kaha gaya hoga uss kitab me to tabke raja ko sharab achhi lagti hogi usne usko usse mita diya....
      Apko itna confidence se sabko batarahe ho ki kuraan me khud TOURAT INJIL OR JUBUR KA NAM AAYA HAI OR USSPAR BHAROSA KARNEKO KAHA GAYA HE TO PURI BAT BHI BATA DETE NA PANDIT KURAAN ME KAHA GAYA HAI KI KITABO PAR FARISHTO PAR AUR NABIYON PAR IMAN LAO YANI YAKIN KARO MAGAR JO KITABE JUBUR INJIL TOURAT ISME BADAL HUYE HE UNKO MAT MANO KURAAN KE MUTABIK CHAKO TUM SAFALTA PA LOGE.... LOGO KO BEHKANA CHHOD DO PANDIT ITNE HI GYANI HO TO SACHHA GYAN DO PURA KURAAN PADHO SANSHIPT RUP SE AUR SAMZO USKO ADHA ADHA INFORMATION LIKHAKAR LOGO KI BHAWANAO SE MAT KHELO.. AUR RAHI ALLAH KE BIWI HONE KI BAT JAB CHHEDE HI HO TO SUNO WO EK NOOR HAI JISKI ROSHNI HUMARI AANKHE BARDASHT NAHI KAR SAKTI ... OR JAB ALLAH KA KOI JISM HI NAHI HE TO USKO BIWI KI JAROORAT KYA ... JAB BHAGWAN LOG BIWI OR BACHHO ME ULAZ JAYENGE TO HO GAYA SANSAR KA KALYAN.....

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    2. Tum allah ko noor kah rahe ho use nirakar bata rahe ho iska matlab he tumne khud kran nhi padhi kyon ki kuran ke mutabik to allah ke hath he muh he aankhe he uska daya-baya he vo arash pr betha he to fir nirakar kese ho sakta he

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  2. Dimagh kharab he iss pandit ka jo logo ko bakwas bate suna sunakar or bhtka raha hai.....
    Are murkh kuraan last kitab hai or wo isliye ki pehli jitni Bhi kitabe aai he unme uss waqt jo rajeshai thi Unhine apne man mutabik bate ghadli jo achha laga usko wese hi rehne diya or jo wo nahi kar sakte the unke ichha k khikaf tha usko mita diya gaya har kitab me manmutabik bate rakhi jese ki udaharan ye aagar tab sharab pina galat kaha gaya hoga uss kitab me to tabke raja ko sharab achhi lagti hogi usne usko usse mita diya....
    Apko itna confidence se sabko batarahe ho ki kuraan me khud TOURAT INJIL OR JUBUR KA NAM AAYA HAI OR USSPAR BHAROSA KARNEKO KAHA GAYA HE TO PURI BAT BHI BATA DETE NA PANDIT KURAAN ME KAHA GAYA HAI KI KITABO PAR FARISHTO PAR AUR NABIYON PAR IMAN LAO YANI YAKIN KARO MAGAR JO KITABE JUBUR INJIL TOURAT ISME BADAL HUYE HE UNKO MAT MANO KURAAN KE MUTABIK CHAKO TUM SAFALTA PA LOGE.... LOGO KO BEHKANA CHHOD DO PANDIT ITNE HI GYANI HO TO SACHHA GYAN DO PURA KURAAN PADHO SANSHIPT RUP SE AUR SAMZO USKO ADHA ADHA INFORMATION LIKHAKAR LOGO KI BHAWANAO SE MAT KHELO.. AUR RAHI ALLAH KE BIWI HONE KI BAT JAB CHHEDE HI HO TO SUNO WO EK NOOR HAI JISKI ROSHNI HUMARI AANKHE BARDASHT NAHI KAR SAKTI ... OR JAB ALLAH KA KOI JISM HI NAHI HE TO USKO BIWI KI JAROORAT KYA ... JAB BHAGWAN LOG BIWI OR BACHHO ME ULAZ JAYENGE TO HO GAYA SANSAR KA KALYAN.....

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    1. भाई शैतान को भी जीने दे यार......उसे भी तो कयामत तक जीना है

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  3. यह जो ऐल नाम है, वह आर्यों के पूर्वज ऐल जो हिमालय से निकल के पश्चिम की और बढे थे... उनका नाम है l उस समय येही "देव" माने या कहे जाते थे l देखिये श्री के.का.शास्त्री लिखित और अँगरेज़ इतिहासकार पार्जिटर का आर्यों के बारे में अभ्यास एवं अनुसंधान l यह ऐल ही "इलाह" हो गए l और अशेरथ उनकी ही पत्नी का नाम होना चाहिए l वैसे, मैं ने पढ़ा है की इज़राएल के संविधान में कुछ ऐसा लिखा है की: इज्राएली लोग... हिन्दुस्थान से आये हुए ब्राह्मणों के एक बड़े group के ही वंशज हैं !? वे ब्राह्मण वहीँ रह-बस गए, जिन में से आज यह येहुदी-कनानी इत्यादि लोग हैं l

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  4. Quran se pehle ki kitabe aaj Apni sahi halat me mojud nahi he jese ved puran aaj Apni sahi halat me mojud nahi he

    Ham dekhta he kuch kafir iskam ko badnam karne k liye un bato ko Islam par thop te he jinka Islam se koi matlab nahi

    Jab quran khud is baat ko khandan karta he k Allah k

    Kul hu wallahu ahad

    Kaho Allah akela he tanehe tanha

    Allah hussamad wo beniyaz(usko lachar Majbur nahi kiya ja sakta) he
    [usko koi fark nahi padhta k tamam insan jannat me jae ya jehannum me lekin wo phir bhi chahta he k insan jannat me jae jis vajah se itni kitabat hui he]

    Lam yalid walam yulad
    na kabhi wo kisi ko jnta he na wo kisi se jana he

    Walamyakul lahu kufuwan ahad
    uske jesa koi nahi uske brabar koi nahi uska koi hamsar nahi
    Quran ch 112/1-4

    Phir aapki baat manne kese hui sabit hua Aapne galat bato se galat matlab nikale !

    उत्तर देंहटाएं
  5. Aapne ilah ka matlab bhi galat bataya he according to arbi language ilahi means jiski puja ibadat ki jae

    Kalma padhe

    La ILAHA IL LAL LA MOHAMMADUR RASUL ALLAH

    Meaning : nahi he (la) koi ibadat k layak (ilaha) Allah k alawa (illalla)

    AB is me ila word jo aaya he uska kya matlab he !

    Jo Aapne kahini banai ya jo Islamic nazarya he wo !

    Agar Islam ka concept god prabhu Allah k liye mila biwi ram sita jesa hota to phir hamare liye Hindu dharam hi Kya bura tha ?

    Shirk yaha pehle se hi mojud he phir hame bahar jane ki zarurat thi !

    उत्तर देंहटाएं
  6. Aapne ilah ka matlab bhi galat bataya he according to arbi language ilahi means jiski puja ibadat ki jae

    Kalma padhe

    La ILAHA IL LAL LA MOHAMMADUR RASUL ALLAH

    Meaning : nahi he (la) koi ibadat k layak (ilaha) Allah k alawa (illalla)

    AB is me ila word jo aaya he uska kya matlab he !

    Jo Aapne kahini banai ya jo Islamic nazarya he wo !

    Agar Islam ka concept god prabhu Allah k liye mila biwi ram sita jesa hota to phir hamare liye Hindu dharam hi Kya bura tha ?

    Shirk yaha pehle se hi mojud he phir hame bahar jane ki zarurat thi !

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    1. Jesus last word was -
      At the ninth hour Jesus cried out with a loud voice, “Eloi, Eloi, lama sabachthani?” which is translated, “My God, My God, why have You forsaken Me?”-- Mark 15:34
      ईसामसीह ने चिल्लाकर कहा, "इलोही इलोही लामा शबक्तनी " अर्थात् हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्यो छोड़ दिया |

      हटाएं
  7. Jesus last word was -
    At the ninth hour Jesus cried out with a loud voice, “Eloi, Eloi, lama sabachthani?” which is translated, “My God, My God, why have You forsaken Me?”-- Mark 15:34
    ईसामसीह ने चिल्लाकर कहा, "इलोही इलोही लामा शबक्तनी " अर्थात् हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्यो छोड़ दिया |

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  8. क्या समझा है आपने काल भगवान (ब्रह्म, fallen angel ) को ? क्या ये सिर्फ मक्का मे बैठा, लोगो के पत्थर खाता है ?
    काल भगवान 21 ब्रह्माण्ड का मालिक (अल्लाह,खुदा,रब)है | इसकी पत्नी दुर्गा (अशेरा )है | यह मानव शरीर मे सहस्त्रार कमल मे निवास करता है | इसने 70 युग तक तप करके कबीर परमात्मा ( कविर्देव, अल्लाह कबीर) से राज प्राप्त किये | और हम लोग अपनी मुर्खता से इसके साथ आ गये | इसने सतलोक मे ऐसा बद्व्यवहार किया था कि कबीर परमात्मा ने इसे निष्कासित कर दिया साथ ही श्राप दिया कि "एक लाख मानव शरीर धारी प्राणियो के मृत्यु पश्चात् सुक्ष्म शरीर पर लिप्त वासना रूपी गंध का तपत शिला पे भूंध कर नित आहार करेगो|" इसीलिये ये अपने आहार के लिये सृष्टी चला रहा है |ये आत्मा को मानव शरीर ना देकर अन्य पशु योनियो मे भटकाता रहता इसलिये इसकी भी ऐसी मजबूरी बना दी कि 84 लाख योनियो के बाद एक शरीर तो ये जरूर मानव का देगा | और तब उस मानव शरीर मे उसे कोई खुदा का बाखबर(तत्वदर्शी संत) मिल जाये तो वो काल जाल से मुक्त हो सकता है|
    इसने कबीर परमात्मा से वचन ले लिया के तीन युगो मे आप कम जीव सतलोक लेकर जाना, जब कलयुग आये आप कितने ही जीव अपने ज्ञानाधार पर (जबरन नही, जिसने आपका ज्ञान स्वीकार कर लिया हो ) लेकर जा सकते है । [प्रमाण : कबीर सागर (बोध सागर = स्वसमबोध पृष्ठ 120-121]
    द्वापर युग तक ये सबको हठयोग, कर्मकाण्ड मे उलझाये रखता है । कलयुग मे ये इतने धर्म खडे़ कर देता है के परमात्मा को एक करने मे परेशानी हो |
    परमात्मा, काल भगवान के लिये पहले सृष्टि रचते है । और अपने निवास स्थान मे चले जाते है । उसके बाद काल भगवान की भूल भलैया प्रारंभ होती है । [प्रमाण: बाइबल उत्पत्ति: परमात्मा ने छ: दिन मे सृष्टि रची और सातवे दिन तख्त पे जा विराजा | ]
    बाबा आदम, जैन धर्म के प्रथम तिर्थंकर ऋषभदेव वाली आत्मा थी |[प्रमाण पुस्तक 'आओ जैन धर्म को जाने ' पृष्ठ 154]
    काल भगवान धर्म ग्रन्थो मे ऐसे गुप्त तरीके से ज्ञान देता है, जीव भ्रमित रहे| लेकिन पूर्ण परमात्मा के डर से वास्तविक ज्ञान भी जरूर बताता है |
    इसीलिये कबीर परमेश्वर ने कहा है -
    कबीर, वेद(सामवेद, यजुर्वेद, अथवर्वेद, ऋग्वेद) कतेब ( कुर्आन शरीफ, जबूर,तौरात,इंजिल) झूठे नहीं भाई, झूठे है जो समझे नाहिं||
    कबीर, वेद मेरा भेद है, मै ना वेदन के माहि|
    जौन वेद से मै मिलु , वो वेद जानते नाही|| }}
    धर्म ग्रन्थो मे काल भगवान अपना भेद छुपाये रखता है ।
    जैसे -बाइबल उत्पत्ति मे यदि शैतान ने आदम और हव्वा को बहकाया तो फिर साँप को शाप क्यो दिया?[बाइबल उत्पत्ति 3:14,15]
    और कुरान मे क्यो नई कहानी बनाई सांप गायब कर दिया (कुरान 7/11-25).. वास्तविकता यही है कि ये अपने को छुपा रहा है ।
    काल भगवान को धर्मराय भी कहते है क्योकि इसका नियम है आँख के बदले आँख |(जैसा करोगे वैसा भरोगे)[कुरान 5/45]
    जीसस कहते है कि अतीत के पैगंबरों (यहूदी) द्वारा यह कहा गया था कि ईश्वर बहुत हिसंक है और वह कभी क्षमा नही करता है | यहाँ तक की प्राचीन यहूदी पैगंबरो ने ईश्वर के मुंह से ये शब्द भी कहलवा दिये है कि मै कोई सज्जन पुरूष नही हूँ, तुम्हारा चाचा नही हूँ | मै बहुत क्रोधी और ईर्ष्यालु हूँ, और याद रहे जो भी मेरे साथ नही हैं, वे सब मेरे शत्रु हैं |पुराने टेस्टामेंट मे ईश्वर के ये वचन है |
    परन्तु मै( जीसस) कहता हूँ परमात्मा प्रेम है | [कुरान 5/46]
    आगे काल भगवान ने कुरान उतारी | जिसमे कहा 'ऐ ईमान वालो, यहूदियो और ईसाईयो को मित्र न बनाओ |[कुरान 5/51]
    अब विचार करें यदि कोई यहूदी.या ईसाई धर्म मे पैदा हुआ है तो क्या उसे अब मुसलमान बन जाना चाहिये ? क्या ऐसे एकता हो सकती है कभी?
    इसी तरह के वचन ये काल भगवान , श्री कृष्ण के शरीर मे प्रवेश करके श्रीमद्भगवत गीता के 11 वे अध्याय के 32वे श्लोक मे कहता है कि "मै काल हूँ अर्जुन, इस समय सब लोगो को खाने के लिये आया हूँ | "
    तौरात, इन्जील मे पूर्ण परमात्मा प्राप्ति का मंत्र नही है । कुरान मे उसकी पूर्ती की है, ' अैन् सीन् काफ '(कुरान 42/2),
    ये code word है जिन्हे केवल बाखबर(कुरान 25/59) बतायेगा |
    गीता जी मे भी पूर्ण परमात्मा का मंत्र ऊँ तत् सत् (अध्याय 17/23) यहा तत् और सत् गुप्त है जिन्हे तत्वदर्शी संत (गीता 4/34) बतायेगा |
    read srishti rachna ---(सृष्टि रचना पढे )
    http://www.jagatgururampalji.org/click.php?id=6
    || सत साहेब ||

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    1. खुदा आपको और हम सब इंसानों को सच और हक बात की हिदायत(समझ) दे

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  9. कबीर, नौ मन सूत उलझिया, रीषी रहे झक मार ||
    सतगुरू ऐसा सुलझादे, उलझे ना दूजी बार ||
    पूर्ण परमात्मा कबीर परमेश्र्वर जी है ,
    जो काशी बनारस मेँ जुलाहे की भूमिका करके गये थे।
    सभी सदग्रंन्थोँ मेँ यही प्रमाण हैँ की वो पुर्ण परमात्मा कबीर परमेश्वर है , सशरीर है मानव सदृश है सतलोक मेँ रहता है|
    "सतयुग में सतसुकृत कह टेरा ,त्रेता नाम मुनीन्द्र मेरा|
    द्वापर करूणामय कहाया,कलयुग नाम कबीर धराया||
    मात पिता मेरे नहीं,बालक रूप प्रकटाया|
    लहरतारा तालाब कमल पर तहाँ जुलाहे ने पाया ||
    हाड़ चाम लोहू नही मोरे ,जाने सत्यनाम उपासी |
    तारण तरन अभै पद दाता , मै हूँ कबीर अविनासी ||
    पाँच तत्व का धड़ नही मेरा, जानूँ ज्ञान अपारा |
    सत्य स्वरूपी नाम साहेब का, सो है नाम हमारा ||
    आया जगत भवसागर तारण, साचि कहूँ जग लागै मारन |
    जो कोई माने कहा हमारा, फिर नही होवे जन्म दुबारा||"
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  10. Isi block par ye coment nahi padha tumne

    Quran se pehle ki kitabe aaj Apni sahi halat me mojud nahi he jese ved puran aaj Apni sahi halat me mojud nahi he

    Ham dekhta he kuch kafir iskam ko badnam karne k liye un bato ko Islam par thop te he jinka Islam se koi matlab nahi

    Jab quran khud is baat ko khandan karta he k Allah k

    Kul hu wallahu ahad

    Kaho Allah akela he tanehe tanha

    Allah hussamad wo beniyaz(usko lachar Majbur nahi kiya ja sakta) he
    [usko koi fark nahi padhta k tamam insan jannat me jae ya jehannum me lekin wo phir bhi chahta he k insan jannat me jae jis vajah se itni kitabat hui he]

    Lam yalid walam yulad
    na kabhi wo kisi ko jnta he na wo kisi se jana he

    Walamyakul lahu kufuwan ahad
    uske jesa koi nahi uske brabar koi nahi uska koi hamsar nahi
    Quran ch 112/1-4

    Phir aapki baat manne kese hui !

    sabit hua Aapne galat bato se galat matlab nikale !

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    उत्तर
    1. पैगम्बर तो केवल संदेशवाहक है , उन्हे अल्लाह के बारे मे पूर्ण जानकारी नही है |

      कुरान शरीफ ज्ञानदाता ,पूर्ण परमात्मा की जानकारी के लिये पैगम्बरो को भी किसी बाखबर की शरण मे जाने को कहता है जैसा कि कुरान शरीफ (25/59) मे है
      "जिस अल्लाह ने छः दिन मे सृष्टि रची और सातवे दिन तख्त पर जा विराजा, वह अल्लाह कबीर है, उसकी खबर किसी बाखबर से पुछो |

      कुरान शरीफ का ज्ञानदाता ,मूसा पैगम्बर को भी ज्ञान समझने के लिए अलखिज्र की शरण मे जाने को कहता है (कुरान 18/65-68).

      अल्लाह के बाखबरो मे से एक 'शम्स तब्रीज' अपने शिष्य 'रूमी' से कहते है -

      727-8: "...जो व्यक्ति इस विचार मे फँसा बैठा है कि सौ संत मिलकर भी हजरत मुहम्मद के कदमो की धूल की बराबरी नहीं कर सकते, वह भला कहाँ पहुँचेगा ? और उस व्यक्ति से क्या आशा की जा सकती है कि जो यह मानता है कि क़ुरान मे परमात्मा के वचन दर्ज हैं और हदीस मे हजरत मुहम्मद के ? अगर वह यहाँ से आरम्भ करता है, तो उसका अन्त क्या होगा, क्योकि इस सच्चाई की तो उसे बचपन से ही जानकारी रही होगी | वह इसी तंग दायरे मे बन्द रहा है | परमात्मा के संसार की विशालता आश्चर्यजनक है, शानदार और अंतहीन है |
      कुछ लोगों के लिए इन बातो को समझना बहुत कठिन है, अत्यन्त कठिन, और कुछ के लिए बहुत ही आसान | असल मे , वे इनकी सरलता को देखकर उलझन मे पड़ जाते है और समझ नही पाते कि किसी को इनके बारे मे बात करने की भी क्या जरूरत है |"
      -- शम्स तब्रीजी ( शम्स तब्रीजी, अनुवादक -फ़रीदा मैलिकी , साइंस अॉफ द सोल रिसर्च सेंटर , पेज नं़ 224)

      222-3: गुप्त रहने वालों* ने परमात्मा से पूछा, " हम अपने को लोगो के सामने कैसे प्रकट करें और क्या बताये कि हम कौन है ? परमात्मा ने उत्तर दिया, " कह दिया करो कि तुम्हारा सम्बन्ध मुहम्मद से है और तुम मुहम्मद की राह पर चलते हो | " वैसे वे भला (हजरत मुहम्मद के) अनुयायी क्यों होते, क्योकि जब उनके नूर का प्रकाश हजरत मुहम्मद पर पडा़ तो वे बेहोश-से हो गये | हम उन लोगो को हजरत के अनुयायी कैसे कह सकते हैं?
      .-- शम्स तब्रीजी (शम्स तब्रीजी,अनुवादक- फ़रीदा मैलिकी , साइंस अॉफ द सोल रिसर्च सेंटर , पेज नं़ 193)

      *गुप्त रहने वाले अर्थात् बाखबर

      आखिर बाखबर क्या ज्ञान रखते है?? पढे़:

      जीव हमारी जाति है , मानवता धर्म हमारा ।
      हिन्दु मुस्लिम सिक्ख ईसाइ धर्म नही कोई न्यारा ।।

      >> कुरान शरिफ मेँ प्रमाण देखे
      www.jagatgururampalji.org/hquran.php

      >> वेदोँ मेँ प्रमाण देखेँ
      www.jagatgururampalji.org/hvedas.php

      >> बाईबल मेँ प्रमाण देँखे
      Iyov 36:5 OJB (Orthodox Jewish Bible)
      See, El* is kabir (mighty), and despiseth not any; He is kabir in ko'ach lev (strength of understanding).
      El*= Elohim (God)
      www.jagatgururampalji.org/hbible.

      अवश्य देखे आध्यात्मिक ज्ञान चर्चा
      >> Dr. Zakir Naik v/s Saint Rampal ji maharaj
      http://www.jagatgururampalji.org/zakir-naik.php


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    2. पैगम्बर तो केवल संदेशवाहक है , उन्हे अल्लाह के बारे मे पूर्ण जानकारी नही है |

      कुरान शरीफ ज्ञानदाता ,पूर्ण परमात्मा की जानकारी के लिये पैगम्बरो को भी किसी बाखबर की शरण मे जाने को कहता है जैसा कि कुरान शरीफ (25/59) मे है
      "जिस अल्लाह ने छः दिन मे सृष्टि रची और सातवे दिन तख्त पर जा विराजा, वह अल्लाह कबीर है, उसकी खबर किसी बाखबर से पुछो |

      कुरान शरीफ का ज्ञानदाता ,मूसा पैगम्बर को भी ज्ञान समझने के लिए अलखिज्र की शरण मे जाने को कहता है (कुरान 18/65-68).

      अल्लाह के बाखबरो मे से एक 'शम्स तब्रीज' अपने शिष्य 'रूमी' से कहते है -

      727-8: "...जो व्यक्ति इस विचार मे फँसा बैठा है कि सौ संत मिलकर भी हजरत मुहम्मद के कदमो की धूल की बराबरी नहीं कर सकते, वह भला कहाँ पहुँचेगा ? और उस व्यक्ति से क्या आशा की जा सकती है कि जो यह मानता है कि क़ुरान मे परमात्मा के वचन दर्ज हैं और हदीस मे हजरत मुहम्मद के ? अगर वह यहाँ से आरम्भ करता है, तो उसका अन्त क्या होगा, क्योकि इस सच्चाई की तो उसे बचपन से ही जानकारी रही होगी | वह इसी तंग दायरे मे बन्द रहा है | परमात्मा के संसार की विशालता आश्चर्यजनक है, शानदार और अंतहीन है |
      कुछ लोगों के लिए इन बातो को समझना बहुत कठिन है, अत्यन्त कठिन, और कुछ के लिए बहुत ही आसान | असल मे , वे इनकी सरलता को देखकर उलझन मे पड़ जाते है और समझ नही पाते कि किसी को इनके बारे मे बात करने की भी क्या जरूरत है |"
      -- शम्स तब्रीजी ( शम्स तब्रीजी, अनुवादक -फ़रीदा मैलिकी , साइंस अॉफ द सोल रिसर्च सेंटर , पेज नं़ 224)

      222-3: गुप्त रहने वालों* ने परमात्मा से पूछा, " हम अपने को लोगो के सामने कैसे प्रकट करें और क्या बताये कि हम कौन है ? परमात्मा ने उत्तर दिया, " कह दिया करो कि तुम्हारा सम्बन्ध मुहम्मद से है और तुम मुहम्मद की राह पर चलते हो | " वैसे वे भला (हजरत मुहम्मद के) अनुयायी क्यों होते, क्योकि जब उनके नूर का प्रकाश हजरत मुहम्मद पर पडा़ तो वे बेहोश-से हो गये | हम उन लोगो को हजरत के अनुयायी कैसे कह सकते हैं?
      .-- शम्स तब्रीजी (शम्स तब्रीजी,अनुवादक- फ़रीदा मैलिकी , साइंस अॉफ द सोल रिसर्च सेंटर , पेज नं़ 193)

      *गुप्त रहने वाले अर्थात् बाखबर

      आखिर बाखबर क्या ज्ञान रखते है?? पढे़:

      जीव हमारी जाति है , मानवता धर्म हमारा ।
      हिन्दु मुस्लिम सिक्ख ईसाइ धर्म नही कोई न्यारा ।।

      >> कुरान शरिफ मेँ प्रमाण देखे
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      >> वेदोँ मेँ प्रमाण देखेँ
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      >> बाईबल मेँ प्रमाण देँखे
      Iyov 36:5 OJB (Orthodox Jewish Bible)
      See, El* is kabir (mighty), and despiseth not any; He is kabir in ko'ach lev (strength of understanding).
      El*= Elohim (God)
      www.jagatgururampalji.org/hbible.

      अवश्य देखे आध्यात्मिक ज्ञान चर्चा
      >> Dr. Zakir Naik v/s Saint Rampal ji maharaj
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  11. Bhai sari dunia ka theka to ap logo ne le rakha h to kyu sadi karte ho or bache peda karte yahi kam karo ap sb log road pe nikal jao blog me likhna or bolNa bht easy hai ok hindu muslim hindu muslim khel rahe ho ap log

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