रविवार, 7 जून 2015

भगवान राम की बहिन की उपेक्षा क्यों ?

यह  हिन्दू  समाज   की  अज्ञानता     नहीं   तो  और  क्या  है ,कि  जिस राम  के नाम  से   हिन्दू धर्म   टिका   हुआ है   ,  लगभग  90  प्रतिशत   हिन्दू  भगवान  राम  की   बड़ी  सगी  बहिन   शांता  और  उनके  पति श्रृंगीऋषि  के बारे में   नहीं   जानते  ,   और   यह   उन  हिन्दू  आचार्यों   का   शांता  के प्रति उपेक्षा  भाव  नहीं    है   जो  ऐरे गैरे      देवी   देवताओं   की  जगह  जगह   मूर्तियां  और   मंदिर   बनवा   देते हैं   ,  लेकिन  राम की बहिन  शांता   का  भारत में    मात्र   एक   ही  मंदिर   बनवा  पाये   , हिन्दुओं  में  राम  की  बहिन  शांता    के बारे में अनभिज्ञता  का  असली  कारण  मुग़ल  बादशाह   अकबर  के  समय  तुलसी  दास  द्वारा  रामचरित   मानस   है  , जिसे  कथावाचक गा  गा  कर  लोगों   को  सुनाते रहते हैं    , और  लोग  उसी को   राम का इतिहास   समझ लेते हैं  ,  लोग   महर्षि  वाल्मीकि  द्वारा  लिखित "रामायण "  इसलिए नहीं  पढ़ते  क्योंकि   वह  संस्कृत में   है  , और  उसको  सुनाने    में   पंडितों  को  कमाई  नहीं  होती  .  जबकि   वाल्मीकि  रामायण   प्रामाणिक   इतिहास  है

1 - वाल्मीकि  रामायण   प्रामाणिक  क्यों है 
वाल्मीकि   रामायण  को   प्रामाणिक  . विश्वनीय  और  राम सम्बंधित  ऐतिहासिक  धार्मिक ग्रन्थ  इसलिए  माना   जाता   है  , क्योंकि  वाल्मीकि  राम  के  समकालीन  थे  , और  उन्हीं के  आश्रम  में  ही  राम  के पुत्र लव  और कुश   का  जन्म   हुआ था  ,और  राम  के बारे में जो भी  जानकारी  उनको मिलती  थी  यह  रामायण  में  लिख  लेते  थे  ,  रामायण  इसलिए  भी  प्रामाणिक   है   की   वाल्मीकि  रामायण  के  उत्तर काण्ड  के  सर्ग 94  श्लोक  1  से 32  के  अनुसार  राम के  दौनों  पुत्र  लव  और कुश  ने   राम  के  दरबार  में  जाकर  सबके  सामने  रामायण   सुनाई  थी  ,  जिसे राम  के  सहित  सभी  ने  सुना था 


2-राम  की  बहिन  होने  का  प्रमाण  

जो  लोग  राम  की बहिन  होने  पर  शंका   करते  हैं   , वह  वाल्मीकि  रामायण   के   बालकांड  इन   श्लोकों   को   ध्यान  से पढ़ें  , इनका हिंदी  और  अंगरेजी  अर्थ    दिया गया  है


इक्ष्वाकूणाम् कुले जातो भविष्यति सुधार्मिकः |
नाम्ना दशरथो राजा श्रीमान् सत्य प्रतिश्रवः || काण्ड 1 सर्ग 11 श्लोक 2

अर्थ - ऋषि   सनत  कुमार    कहते  हैं  कि  इक्ष्वाकु   कुल   में  उत्पन्न दशरथ   नाम  के   धार्मिक  और  वचन  के पक्के  राजा  थे  ,

"A king named Dasharatha will be born into Ikshwaku dynasty who will be very virtuous, resplendent and truthful one to his vow." [Said Sanat Kumara, the Sage.] [1-11-2]

अङ्ग राजेन सख्यम् च तस्य राज्ञो भविष्यति |
कन्या च अस्य महाभागा शांता नाम भविष्यति || काण्ड 1 सर्ग 11 श्लोक 3

अर्थ - उनकी  शांता   नामकी  पुत्री     पैदा हुई   जिसे  उन्होंने अपने मित्र   अंग  देश   के  राजा  रोमपाद  को   गोद   दे दिया  , और  अपने  मंत्री  सुमंत  के कहने पर उसकी शादी श्रृंगी ऋषि   से  तय   कर दी  थी   ,


Shanta is  the daughter of Dasharatha and given to Romapada in adoption, and Rishyasringa marries her alone. This is what Sumantra says to Dasharatha at 1-9-19.

अनपत्योऽस्मि धर्मात्मन् शांता भर्ता मम क्रतुम् |
आहरेत त्वया आज्ञप्तः संतानार्थम् कुलस्य च || काण्ड 1 सर्ग 11 श्लोक 5


Then king Dasharatha says to king of Anga "oh, righteous one, I am childless and hence I intend to perform a Vedic ritual. Let the husband of your daughter Shanta, Sage Rishyasringa, preside over that Vedic ritual at you behest, for the sake of progeny in my dynasty. [1-11-5]

अर्थ -तब   राजा   ने   अंग  के  राजा  से  कहा कि मैं   पुत्रहीन  हूँ  , आप शांता और उसके  पति  श्रंगी ऋषि   को  बुलवाइए मैं  उनसे पुत्र  प्राप्ति  के लिए  वैदिक  अनुष्ठान    कराना  चाहता  हूँ  ,

श्रुत्वा राज्ञोऽथ तत् वाक्यम् मनसा स विचिंत्य च |
प्रदास्यते पुत्रवन्तम् शांता भर्तारम् आत्मवान् || काण्ड 1 सर्ग 11 श्लोक 6

"On hearing those words of king Dasharatha that benevolent soul Romapada, the king of Anga, considers heartily and agrees to send the one who endows progeny by rituals, namely Sage Rishyasringa his son-in-law. [1-11-6]

अर्थ -दशरथ की  यह   बात  सुन   कर अंग  के राजा  रोमपाद  ने  हृदय  से   इसबात को   स्वीकार   किया ,और  किसी   दूत  से  श्रृंगीऋषि को  पुत्रेष्टि  यज्ञ  करने  के लिए  बुलाया

आनाय्य च महीपाल ऋश्यशृङ्गं सुसत्कृतम्।
प्रयच्छ कन्यां शान्तां वै विधिना सुसमाहित: काण्ड 1सर्ग 9 श्लोक 12
अर्थ -श्रंगी ऋषि  के  आने  पर  राजा   ने उनका  यथायोग्य   सत्कार  किया और   पुत्री शांता  से  कुशलक्षेम  पूछ  कर   रीति  के अनुसार  सम्मान किया

अन्त:पुरं प्रविश्यास्मै कन्यां दत्त्वा यथाविधि।
शान्तां शान्तेन मनसा राजा हर्षमवाप स:।।काण्ड 1 सर्ग10  श्लोक 31

अर्थ -( यज्ञ   समाप्ति  के  बाद ) राजा  ने शांता   को     अंतः पर  में  बुलाया  और और   रीति  के  अनुसार  उपहार     दिए  ,   जिस से  शांता  का मन    हर्षित  हो   गया .

 वाल्मीकि रामायण  के  यह  प्रमाण   उन  लोगों   की  शंका   मिटाने  के लिए  पर्याप्त  हैं  ,  जो  लोग मान  बैठे  है  ,कि  राम  की  कोई   भी बहिन   नहीं  है , वाल्मीकि  रामायण  के  अतिरिक्त   अन्य धार्मिक   और  ऐतिहासिक   ग्रंथों   में  राम  की बहिन   शांता  के बारे में  जो  भी  लिखा  है उसे  एकत्र  करके  एक  लेख   के  रूप   में  "Devlok, Sunday Midday, April 07, 2013  "ने  प्रकाशित   किया  था  ,  उसका  सारांश   यह   है  ,

3- कथा  भगवान राम की बहन "शांता" की

श्रीराम के माता-पिता, भाइयों के बारे में तो प्रायः सभी जानते हैं लेकिन बहुत कम लोगों को यह मालूम है कि राम की एक बहन भी थीं जिनका नाम शांता था। वे आयु में चारों भाइयों से काफी बड़ी थीं। उनकी माता कौशल्या थीं। राजा दशरथ और कौशल्या की पुत्री थी शांता . एक बार अंगदेश के राजा रोमपद और उनकी रानी वर्षिणी अयोध्या आए। उनके कोई संतान नहीं थी। बातचीत के दौरान राजा दशरथ को जब यह बात मालूम हुई तो उन्होंने कहा, मैं मेरी बेटी शांता आपको संतान के रूप में दूंगा।रोमपद और वर्षिणी बहुत खुश हुए। उन्हें शांता के रूप में संतान मिल गई। उन्होंने बहुत स्नेह से उसका पालन-पोषण किया और माता-पिता के सभी कर्तव्य निभाए।उनका विवाह कालांतर में शृंग ऋषि से हुआ था। कश्यप ऋषि  पौत्र थे शृंग ऋषि .
4-शृंग ऋषि का आश्रम
बाद में ऋष्यशृंग ने ही दशरथ की पुत्र कामना के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया था। जिस स्थान पर उन्होंने यह यज्ञ करवाये थे वह अयोध्या से लगभग 39 कि.मी. पूर्व में था और वहाँ आज भी उनका आश्रम है और उनकी तथा उनकी पत्नी की समाधियाँ हैं।
हिमाचल प्रदेश में है शृंग ऋषि और देवी शांता का मंदिर ,हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में शृंग ऋषि का मंदिर भी है। कुल्लू शहर से इसकी दूरी करीब 50 किमी है। इस मंदिर में शृंग ऋषि के साथ देवी शांता की प्रतिमा विराजमान है। यहां दोनों की पूजा होती है और दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
शृंग ऋषि का मंदिर 

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5- अयोध्या  में राममंदिर  तभी बन पायेगा 

भारत   के  सभी   हिन्दू  संगठन  अयोध्या   में  राम  जन्म  भूमि  पर  एक  भव्य  मंदिर  बनवाने  के लिए   बरसों   से  प्रयास  करते  आये  हैं  ,लेकिन  किसी न किसी   कारण   से  पूरी   सफलता  नहीं   मिल   सकी  ,  मेरा   निजी   मत  है  कि  अयोध्या  में  जिस   जगह  राम  मंदिर  बनवाने की  योजना  है   यदि , वहीँ    राम  की   बहिन  शांता   की  मूर्ति   भी  स्थापित   कर  दी  जाये  तो   राम मंदिर   की सभी   अड़चनें      एक हफ्ते  में  दूर  हो जाएंगी  ,  क्योंकि   जो   राम   का  जन्म  स्थान  है  , वाही   राम  की  बड़ी  बहिन   शांता   का भी   है   ,  जिसके  आशीर्वाद  से राम का जन्म  हुआ  था  ,  और
हिन्दू जब  तक राम की  बहिन की उपेक्षा  करते  रहेंगे  अयोध्या  में  राम  मंदिर   नहीं  बन  सकेगा   




4 टिप्‍पणियां:

  1. Bhai saheb jara tarike se baat kare aire gaire Devi devtao se apka kyaa matlab hai apki budhi kya jyada hi tej ho gayi murkho ka acharan na kare

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  2. शांता : श्री राम की बहन
    http://terahsatrah.blogspot.in/
    प्रबंध काव्य पर आपकी सलाह चाहिए-२०११ में रचा गया

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  3. होई है वही जो राम रचि रखा

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