गुरुवार, 13 अगस्त 2015

अल्लाह के हाथों और लुंगी का रहस्य !

अल्लाह महान  है , सर्वशक्तिमान  है  , अजन्मा  है  , सर्वज्ञ  है, और  निराकार  अर्थात अशरीरी  है  ,लगभग  यही   और ऎसी  ही  बातें  कुरान और हदीसों के माध्यम  से मुसलमानों  के  दिमागों   इस  तरह  से भर  दी  जाती  हैं  , कि  वह  अलाह के बारे में  सवाल  करने को   भी  कुफ्र  मान  लेते  है ,  लेकिन  चालाक मुल्ले   लोगों  को  अल्लाह   के     ख़ुफ़िया रहस्य सिर्फ अपने  लोगों ही  बताते   हैं  , क्योंकि  उनको  भय   लगा  रहता है  कि अगर  सामान्य मुसलमान इन  बातों  को जान  लेगा  तो इस्लाम यानि मुल्लाशाही   ज्यादा समय   नहीं   रहेंगे ,
इस्लाम  के प्रचारक  अल्लाह के बारे कुछ  भी  कहें  ,लेकिन  इन  हदीसों  से  सिद्ध  होता है कि  मुसलमानों  का  अल्लाह  अशरीरी नहीं  बल्कि एक अरब व्यक्ति रहा होगा  ,जो अरबों  की तरह  चोगा  पहिनता  था , और कमर के नीचे  लम्बी  लुंगी  या  तहमद  बांधता था , यही  नहीं अल्लाह शरीर भी  असामान्य   था ,क्योंकि उसके दौनों  हाथ दायें  कंधे से लगे  थे ,अर्थात उसका बायां  कन्धा ठूँठा था .

1-अल्लाह  का  बड़ा चोगा और लम्बी लुंगी

इस बात को साबित  करने के लिए तीन  हदीसें  दी   जा रही  हैं  , अरबी के साथ हिंदी और अंगरेजी अनुवाद  भी है ,

पहली हदीस -"अबू हुरैरा  की रिवायत है  ,कि रसूल  ने  बताया  है कि अल्लाह ने कहा  कि  मुझे अपने  भव्य चोगे  और लुंगी पर गर्व  है , और          जो भी उनके बारे पार टिप्पणी  करेगा  उसे  मैं  जहनम  में  झोंक  दूँगा "
       
"Narrated AbuHurayrah:
The Prophet , said: Allah Most High says: my Pride is my cloak and  my majesty is my lower garment, and I shall throw him who view with me regarding one of them into Hell.

"‏ قَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ الْكِبْرِيَاءُ رِدَائِي وَالْعَظَمَةُ إِزَارِي فَمَنْ نَازَعَنِي وَاحِدًا مِنْهُمَا قَذَفْتُهُ فِي النَّارِ ‏"‏.‏"

सुन्नन अबी दौउद -किताब 33 हदीस 4079

दूसरी  हदीस -"इब्ने अब्बास ने कहा  कि रसूल  ने कहा  , अल्लाह  कहता  है कि मेरे चोगे  और  लुंगी सम्मान  योग्य हैं  ,और  जोभी  उनके साथ  स्पर्धा करेगा  मैं उसे  जहन्नम भेज  दूंगा  "

 Ibn ‘Abbas that the Messenger of Allah   said:
“Allah the Glorified, says:  my ‘Pride is My cloak and great My robe, and whoever competes with Me with regard to either of them, I shall throw him into Hell.

""‏ يَقُولُ اللَّهُ سُبْحَانَهُ الْكِبْرِيَاءُ رِدَائِي وَالْعَظَمَةُ إِزَارِي فَمَنْ نَازَعَنِي وَاحِدًا مِنْهُمَا أَلْقَيْتُهُ فِي النَّارِ"

इब्ने माजह - किताब 37 हदीस  4315

तीसरी हदीस -"रसूल ने कहा कि अल्लाह कहता है   ,मेरी  लुंगी  का  सम्मान  करो  ,मुझे  अपने चोगे पर गर्व  है  , और जो उन  पर नजर डालेगा  वह संतप्त  होगा  "

"Messenger of Allah . said, "Allah, the Exalted, says: 'Honour  My Izar and Pride is My Cloak. Whoever vies with Me regarding one of them, shall be tormented."

"“قال الله عز وجل‏:‏ العز إزاري والكبرياء ردائي، فمن ينازعني في  "

 Riyad as-Salihin -Book 1, Hadith 618


नोट - इन तीनों  हदीसों   में अरबी  के  चार  ऐसे  शब्द   हैं  ,मुल्ले  जिनका  गलत  अर्थ  बता कर अरबी  से  अनभिज्ञ  मुसलमानों को गुमराह  कर देते हैं   , यहाँ   इन  के सही अर्थ  दिए जा  रहे  हैं  ,
1 - अल इजार -   " Izaar-إِزَارِي  "An izaar is a lower garment -तहबंद -'लुंगी ..इजारी  का अर्थ  है  मेरी  लुंगी

2-रिदाई "Ridaayi-"رِدَائِي -जामा- चोगा -लबादा -gown- cloak ,कुर्ते की तरह लम्बा  परिधान

3-अल  किब्रिया "الْكِبْرِيَاءُ "पहली हदीस  में अल्लाह  ने अपनी  लुंगी  और चोगे  को ' किब्रिया " बताया है  , मुल्ले इसका अर्थ महान (greate  ) बता देते हैं , जबकि  इसका अरबी में असली  अर्थ " तवील -طويل "   है  , जिसका  मतलब  Long-लंबा.है  ,इन बातों  से सिद्ध  होता है  की  मुसलामानों   का अल्लाह  लम्बा  चोगा  और  लम्बी  लुंगी  पहिनता  होगा


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2-अल्लाह के दौनों  हाथ  दायीं तरफ हैं

 इस गम्भीर विषय  को समझने  के  लिये  पहले  हमें अरबी व्याकरण  की  बुनियादी  जानकारी होना  जरूरी  है , संस्कृत  ,हिब्रू ऑर लैटिन  भाषा  की तरह अरबी में भी संज्ञा (Noun )  सर्वनाम (Pronoun)  और  क्रिया (Verb )   के एकवचन (Singular  ) द्विवचन (Dual )   और  वहुवचन (Plurel)  होते हैं , जिन्हें अरबी  में  वाहिद , तस्निया और   जमा   कहते  हैं  , अरबी में  दो चीजों  केलिए  द्विवचन  का प्रयोग  किया  जाता  है ,जो शब्द  द्विवचन  मे होता है  उसके आगे " ऐन -  ين   " प्रत्यय  " लगा  दिया जाता   है  , यही प्रत्यय किसी शब्द के  द्विवचन  होने की  निशानी  है .उदाहरण के लिए " मुअल्लिम - مُعَلِّم " एक शिक्षक ," मुअल्लिमैन -  مُعَلِّمَيْنِ   " दो  शिक्षक और " मुअल्लिमून - معلمون  " कई शिक्षक .इसी  तरह  अरबी  में   हाथ  को "यद - اليد "और  दायें ( Right ) को "अल यमनी -  اليمنى " कहा  जाता  है , जिसका द्विवचन " यमैन -  يَمِينٌ    "  होता  है , जिसका  अर्थ  है दौनों दायें (Both right ) .इतना   जानने  के बाद आपको  यहाँ  दी  जाने  वाली  हदीसों को समझने   में  परेशानी   नहीं   होगी .

पहली  हदीस -"अब्दुल्लाह  बिन  उमर  ने कहा  कि  रसूल ने कहा  कि  रहमान (अल्लाह ) के  दो  दायें  हाथ  हैं "

Abdullah b. 'Umar that the Messenger of Allah (ﷺ) said,Either side of the Being is the right handsof rahman

"عَنْ يَمِينِ الرَّحْمَنِ عَزَّ وَجَلَّ وَكِلْتَا يَدَيْهِ يَمِينٌ  "
"अन यमीनुर्रहमान   इज्जो जल  कुन्ना  यदहू यमैन "(यहाँ पर  दायें  का  द्विवचन   है )

Sahi Muslim-Book 20, Hadith 4493

दूसरी  हदीस -"अब्दुल्लाह  बिन अम्र  बिन अल आस   की  रिवायत  है  कि रसूल  ने कहा  ,जो  लोग सही होंगे वह परिवार  सहित जन्नत में  रहेंगे ,और इस हदीस  को कहने वाले मुहम्मद  ने  कहा  ,की  अल्लाह  के  दौनों     हाथ  दाहिने   हैं "

" narrated from 'Abdullah bin 'Amr bin Al-'As that:
The Prophet [SAW] said: "Those who are just and fair will be with Allah,with their families .Muhammad (one of the narrators) said in his Hadith: "And both of His hands are right hands."


‏‏.‏ قَالَ مُحَمَّدٌ فِي حَدِيثِهِ ‏"‏ وَكِلْتَا يَدَيْهِ يَمِينٌ

  " काल  मुहम्मद  फी हदिसीही व्  कुन्ना यदहु यमैन  "(यहां  भी  दायें  के  लिए द्विबचन  है  , अर्थात  दो  दायें  हाथ )


 Sunan an-Nasa'i -Vol. 6, Book 49, Hadith 5381


तीसरी  हदीस  -इस  हदीस  की  किताब  के  बारे में अधिकांश  मुस्लिम   नहीं  जानते  ,लेकिन  यह भी  प्रामाणिक  है  ,इस हदीस  के  संकलन  करने वाले का नाम "अबू बकर मुहम्मद  बिन इसहाक बिन  खुज़ैमा  -  أبو بكر محمد بن إسحاق بن خزيمة‎  " है। इसका  समय ( 837 CE/223 AH[1] – 923 CE/311 AH).है , इसकी हदीस  की किताब  का  नाम "सहीह इब्ने खुज़ैमा - صحيح ابن خزيمة   "  है '   खुज़ैमा  ने अल्लाह के  हाथों  के बारे में स्पष्टीकरण  दते हुए  कहा  है  ,

"कि हमारे  रब के  दोनो  हाथ दाहिनी  ओऱ  हैं  , उनके  बायीं  तरफ  कुछ  नहीं हैं "

"شمال وكلتا يدي ربنا يمين لا "


"

Both Hands of our Master are Right and there is no 'Left-ness' "

सही खुज़ैमा - बाब 1 तौहीद हदीस 47

और जानकारी  के लिए  देखिये .Video

Both Allah's hands are right?

https://www.youtube.com/watch?v=sK_DbumSPX0
,

इस्लाम के प्रचारक  अपने  अल्लाह को ईश्वर  साबित  करने के लिए जो भी कुतर्क  करें  ,लेकिन   खुद इस्लामी  किताबों  से यही सिद्ध  होता है कि अल्लाह एक   असामान्य  शरीर  वाला अरब  का व्यक्ति  होगा  , जिसके  विद्रूप हाथों  को देख  कर लोगों  ने उसे  अपना  उपास्य ( माबूद )   मान लिया होगा , और ऐसे अल्लाह  के नाम पर  जिहाद करके आतंक फैलाना मूर्खता   नहीं  तो और  क्या  है ?

और  जो लोग  अल्लाह पर ईमान  लाने  वकालत  करते हैं  ,वह इन सबूतों  को गलत साबित  करके दिखाएँ !


http://www.ahlalhdeeth.com/vbe/archive/index.php/t-3652.html

http://muslimvilla.smfforfree.com/index.php?topic=3475.0;wap2

2 टिप्‍पणियां:

  1. youtube pe nahi samjha jitan ki aapne sab likh diya hai sukriya

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  2. पैगम्बर मोहमद(paigambar mohammad )का पेट या इतर का कारखाना


    मित्रो खुदा गवाह है की प्रथ्वी पर मोहम्मद से बड़ा रसूल कोई नहीं है ,सजके जाऊं मै अल्लाह के इसे रसूल पर ,जिसने धरती पर लोगों को जीना सिखाया। जीना ही नहीं सिखाया बल्कि इस्लाम के अनुयाइयों को एसा बेशकीमती तोफा भी दिया जिससे आज तक मोमिनो (पैगम्बर के अरबी अनुयाइयों ) के बदन से महक फूटती रहती है।
    एक हदीस के अनुसार पैगम्बर जब खेतों में मल त्याग करने जाते थे, तो वे जिस डले से अपना पिछवाडा साफ़ करते थे,तो उनके अनुयाई उस डले के लिए आपस में झगड़ते थे.क्योकि उस हदीस के अनुसार उस डले से इतर की खुशबु आती थी.(तल्विसुल शाह जिल्द शाह सफा ८ )
    जब डले में इतनी खुशबु आती होगी तो मल (पैगम्बर की टट्टी) तो पूरा का पूरा इतर का डब्बा होता होगा । पैगम्बर के अनुयाई डले के ऊपर ही झगड़ते थे किसी ने भी खेत में पड़े मल की तरफ ध्यान नहीं दिया। अफ़सोस की बात है ।
    अगर पैगम्बर की पूरी जिन्दगी में करी गयी टट्टी को उनके अनुयाई एकत्र कर लेते तो उससे आज मुसलमानों का इतर का खर्चा कितनी हद तक बच जाता । मुसलमानों की आर्थिक स्थिति (मुस्लिम नेता बहुत शोर मचाते है की मुसलमानों की आर्थिक स्थिति बहुत ख़राब है ) भी कुछ हद तक सुधरी होती। क्यों की मुसलमान इतर व खुशबु की चीजे बहुत प्रयोग में लाते हैं।कितना पैसा बचता।
    भारतीय मुसलमानों के पूर्वजों (हिन्दू)की किस्मत ख़राब थी कि वे मोहम्मद की टट्टी पूछा डला सूंघने से रह गए।और न ही उनके किसी संत,महात्मा व ऋषि की टट्टी से इतर की महक आती थी ।
    काश पैगम्बर जैसा कोई दोबारा से हिंदुस्तान में पैदा हो,जिससे उनकी टट्टी पूछा डला,हम हिन्दुस्तानियों के हिस्से में आये।ताकि हम हिन्दुस्तानी भी अरब के श्रेष्ठ लोगो की बराबरी पर आ सके।
    (धन्य हो प्यारा पैगम्बर)

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