शुक्रवार, 11 सितंबर 2015

गौ भक्तों की मूर्खता या चतुराई ?

यह  हिन्दुओं   का  दुर्भाग्य   है   कि आज  ऐसे  कई  संगठन   , और    संस्थाए    मौजूद   हैं    , जो  खुद  को  हिन्दू   धर्म  और हिन्दुओं   का  असली   प्रतनिधि  या  ठेकेदार     होने   का   दावा   करते   हैं   ,  लेकिन  एक  दूसरे   को   नीचा   दिखने  में  कोई  कसर  छोड़ते   ,  इनके  नेताओं   को   हिन्दू  धर्म   से कोई  लेना  देना  नहीं  होता  सिर्फ  अपने   नाम     का   प्रचार   करना  होता है   ,  ऐसे  स्वयंभू      हिन्दू  नेता      सुर्ख़ियों  में   नाम  के लिए  ऐसे काम    कर  बैठते  हैं    जो     हास्यास्पद    होने  के   साथ  मूर्खता   पूर्ण   होते    हैं   ,  जिन से   हिन्दुओं     की   नाक  कट  जाती   और   ,    मुसलमानों   को  हिन्दुओं    का  मजाक उड़ाने   का   मौक़ा   मिल   जाता   है   , इसका   ताजा  उदहारण   यह   है   ,

गुजरात सरकार के एक बोर्ड ने दावा किया है कि कुरान में बीफ खाने पर मनाही है। बिलबोर्ड्स में गौसेवा और गौचर विकास बोर्ड की ओर मैसेज दिया गया है कि कुरान भी गाय को बचाए रखने की बात कहता है। बिलबोर्ड्स बापूनगर में देखे गए हैं। अहमदाबाद में चीफ मिनिस्टर आनंदीबेन और इस्लामिक सिंबल (चांद और सितारे) को लेकर बिलबोर्ड्स लगाए गए हैं। जनमाष्टमी के मौके पर इन बिलबोर्ड्स के जरिए मुस्लिमों को शुभकामनाएं भी दी गई हैं,बिलबोर्ड पर लिखा है, 'अकरामुल बकरा फिनाह सैयदुल बाहिमा'। इसका मतलब बताया गया है कि 'पशुओं में गाय सबसे जरूरी है, इसलिए इसका सम्मान किया जाना चाहिए। इसका दूध, घी और मक्खन दवाई के काम आता है। जबकि इसका मीट कई बीमारियों का कारण बनता है।'यह   पोस्टर   दिनांक  8 सितम्बर   2015  को  पूरे   अहमदाबाद   में  लगाये   गए  थे  , 
पोस्टर   में   गुजराती  में  लिखा  है  ,
"कुरान शरीफ  मां  गौरक्षा  माटे  उपदेश "

 अकर  मुल  बकर  फाईनाहा   सय्यदुल   बहाईमा 

गाय  नी  इज्जत  करो  ,केम  के  गाय चौपायों  नी  सरदार  छे  , गाय  नुं  दूध  ,दही  अने  माखण शिफ़ा ( अमृत ) छे ,गाय नुं  मांस बीमारीओनु कारण  छे'
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Foto

http://img01.ibnlive.in/ibnlive/uploads/2015/09/gujantibeef_meghdoot1.jpg

बोर्ड के चेयरमैन ने क्या कहा?
 मैसेज का जरिया पूछे जाने पर बोर्ड के चेयरमैन और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. वल्लभभाई कठरिया ने कहा, ''मुझे ये लाइनें और इसका अनुवाद 20 पेज के हिंदी और गुजराती बुकलेट में मिला।'' उन्होंने दावा किया है कि बुकलेट उनके राजकोट स्थित घर पर है। हालांकि, उन्हें राइटर और पब्लिशर्स का नाम याद नहीं है।गौसेवा आयोग का गठन 1999 में हुआ और 2012 में गौसेवा और गौचर विकास बोर्ड का विस्तार किया गया। इसे गायों को बचाने, उनके रख-रखाव और वेलफेयर के लिए बनाया गया। यह गुजरात सरकार के एग्रीकल्चर कॉरपोरेशन के तहत काम करता है।यह  विश्व  हिन्दू  परिषद   का एक अनुषांगिक   संगठन   है
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मेंबर मुफ्ती अहमद देवलावी ने इस प्रकार के किसी दावे को नकारा है। उन्होंने कहा कि कुरान में बीफ को लेकर इस प्रकार की कोई बात नहीं की गई है। उन्होंने कहा, ''पवित्र कुरान में इस प्रकार का मैसेज कहीं भी नहीं लिखा है। यह संभव है कि किसी अरबी स्टेटमेंट को गलती से कुरान से जोड़ा जा रहा है। मुस्लिमों को भ्रमित करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।''
इस तरह से कुरान  ,हदीस  और मुसलमानों  की फितरत को  जाने  बिना बोर्ड    के  चेयरमेन कठरिया ने   यह  पोस्टर निकाल  कर अपनी   मुसलमानों  के  सामने अपनी  मूर्खता  का  प्रमाण पत्र  पेश  कर   दिया  , शायद उनका  उद्देश्य  मुसलमानों  में   गौहत्या  की  जगह  गौरक्षा की भावना पैदा  करना होगा ,लेकिन मुसलमानों  से गौ  रक्षा  की  अपेक्षा  रखना  सबसे बड़ी  मूर्खता  होगी   , क्योंकि

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1-गौमांस मुसलमानों की खुराक है 

(Here are the foods mentioned in the Quran with the times they were mentioned.)


कुरान   में  मुसलमानों  के खाने योग्य  जोभी  चीजें   बताई  गयी   हैं  उनमे   बछड़े  और    गाय   भी   हैं    , कुरान  में इनका उल्लेख  कितनी   बार है   , इसका  विवरण    इस  प्रकार   है

1.बछड़े (Calves)"अल अजुल - العجول  "-10 बार

2.गाय ( cow ).  अल बकर  -   بقرة "-9   बार


http://www.chefyusuf.com/halal-recipes-by-the-halal-chef/the-food-of-paradise/

उल्लेखनीय   बात  तो  यह  है  की  इस्लामी पुस्तकों  के अनुसार  मुसलमान   जन्नत   में  भी बछड़े  और गाय  खाएंगे
   
2- मुहम्मद  सपरिवार  गौमांस  खाते  थे 

मुसलमानों   के रसूल  मुहम्मद  खुद  अपने  हाथों   से  गाय  जबह  करके  उसका   मांस  "लहमुल  बकर - لحم بقر  "   ( Beef )    खुद   खाते थे  और  अपनी   औरतों  को   भी खिलाते  थे   , इन  तीन  प्रामाणिक  हदीसों  में इसका  सबूत  मौजूद   है   , विस्तार  भय  के   कारण  सिर्फ  सन्दर्भ   दिए   जा  रहे  हैं ,

  1.सही मुस्लिम -( 1 बार )-Book #005, Hadith #2352

  2-   सही बुखारी -( 4 बार)   Book #26, Hadith #767,Book #26, Hadith #778, Book #52, Hadith #201,Book #68, Hadith #456 ,

3.मलिक  मुवत्ता ( 1 बार )-Book #20, Hadith #20.56.188


इतना   समझ   लेने  के  बाद  भी  इन लोगों  की  बुद्धि   पर सेकुलर  रोग  से   लकवा  मार  हो    वह  मुसलमानों से  गौरक्षा   की उम्मीद  रखते  हैं   वह  उस  व्यक्ति   की  तरह   मुर्ख  है   , जो   कसाई  की  दुकान  से  मिठाई   लेने     जाता   है

कुरान  सभी   गौ   वंशी   पशुओं   के  मांस  को  सही   मानता  है   ,और  खुद  मरे हुए  पशुओं   का मांस , सड़ा मांस   रक्त   और  सूअर   का  मांस और  जिन  पर  अल्लाह  के अलावा  किसी  और   का  नाम   लिया गया  हो उनका  मांस  खाने  से   रोकता  है  
,सूरा - बकरा 2:173 


bovine meat, i.e., beef, is well authenticated in the Qur’an to be permitted:

He only prohibits for you the eating of animals that are already dead (carrion), blood, the meat of pigs, and animals dedicated to other than Allah. [2:173


3-गौहत्या  कैसे रुक सकती है ?


जो   भी  गौभक्त   हिन्दू  संगठन   या  नेता सोचते   हैं उनको  पता  होना  चाहिए  कि गाय  काटने वाले  और  गाय  का  मांस  खाने  वाले अधिकांश मुस्लमान ही   होते  हैं  ,और  उनको फर्जी  हदीसें  बता  कर  , खुशामद  करके  या  कानून का  हवाला  देने  पर  वह  गौ हत्या   बंद  कर  देंगे , तो  ऐसा समझना बड़ी  भूल होगी . और सब  जानते हैं  कि  कुरान  और  हदीसों   में  गाय  का  मांस   खाना  जायज   है  , और  देश   में  गौ  हत्या  तभी   रुक  सकती  है   ,जब   मुसलमान  गाय  का  मांस  खाना   बंद  कर  दें , इसीलिए  हमने  एक ऎसी  आसान  तरकीब  खोजी  है   , जिस पर अमल   करने  पर  मुसलमान बिना  किसी  जबर दस्ती  के  खुद  ही  गाय  का  मांस खाना   बंद   कर  देंगे   , इस में  किसी  दंगे फसाद   की  संभावना   बिलकुल  नहीं   है  ,

( नोट )  यह  लेख  हमने   फरीदाबाद  निवासी   प्रोफ़ेसर  राजेन्द्र  सिंह   की  सलाह  पर  5  घंटे  में  तैयार  किया  था  , यह  लेख  का  पूर्वार्ध  है  , इस  लेख  के  माध्यम  से  हम  उन  सभी हिन्दू  संगठनों  के  पदाधिकारिओं  और आर्यसमाजियों  से अनुरोध   करते  हैं  कि  यदि  उनके पास ऐसी  ही  तरकीब   हो  तो  मुझे  एक सप्ताह  में  सूचित  करें  ,और  अगर उनके  पास  कोई  तरकीब  नहीं   है  ,तो गौ रक्षा  का  नाटक   बंद  कर दें  ,  चूँकि   हम किसी  भी  दल और  संगठन   के  लिए  नहीं  बल्कि स्वतन्त्र रूप  से  सभी   भारतीय  हिन्दुओं  के  हितों   का  ध्यान  रख कर  लिखते  है  , इसलिए  यह  लेख  फेस बुक  और अपने ब्लॉग  में  प्रकाशित  कर  रहे   हैं  , देखते हैं   कौन  माई   लाल  आगे  आता  है ?हम  हम  यह  तरकीब किसी  हिन्दू  संगठन   के  राष्ट्रीय  स्तर  के  पदाधिकारी  को  ही   बताएँगे   , जिनके हृदय में गौ  माता   के प्रति  प्रेम   हो वह  कृपया इस  लेख  को  सब तक  पहुंचाने   का  कष्ट  करें  

लेख   का उत्तरार्ध  भाग गणेश  चतुर्थी   के दिन  प्रकाशित  होगा  ,

संपर्क हेतु मेल आई डी -sharma.b304@gmail.com



6 टिप्‍पणियां:

  1. अरे भाई ल कुछ्ह दिनों पहले तो मैंने यहीं-कहीं (एक दूसरे लेख में) पढ़ा की... इस्लाम में सिर्फ .. खुद मरे हुए पशुओं का मांस ही जायज़ है... और मारे-हुए (हत्या करके) जानवरों का नहीं l और आज आप कह रहे हैं की ... खुद मरे पशुओं का मांस हराम है l अजीब है, भाई l यह क्या बकवास है? आप हिन्दू-मुसल्मानो को झगडा-मार-काट कराने का काम कर रहे है न? यही है, न?

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    1. frist come with your real identity. then discuss the facts. else you remain unknown .... your statement also remain ... unreliable.

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    2. aap kaun hain, bhjuai? kaam se matlab rakkho, bhai. Naam se kya lena hai?

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  2. ऊपर की पहली कमेंट मेरी है... की... शायद आपने फेसबुक-भंडाफोडू में वोह... गाय या कोई भि मरे हुए पशु को खाना हराम कहा है ... और इसके लिए कुरान या हदीस के हवाले दिए हैं... देख लीजियेगा l

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  3. और यहाँ मेरी या किसीकी टिपण्णी... लिखने वाले ने एडिट या डिलीट करनी हो तोह क्या करें? इसका बंदोबस्त करिए l यानि, प्रोग्राम कुछ ऐसा डालिए यहाँ.. इसमैं जोडीये, की बार बार... बाद में सूजी हुई बातों के कारण अपनी टिपण्णी सुधार या डिलीट करने की जरूरत पड़ने पे हम एडिट-डिलीट कर सकें l

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