शनिवार, 26 सितंबर 2015

कुरबानी या हत्या की ट्रेनिंग !

मुसलमान कई त्यौहार मानते हैं . जिनमें "ईदुज्जुहा "प्रसिद्ध और प्रिय त्योहर माना जाता है . भारत में इसे "बकरीद " भी कहते हैं .अरबी में ईदुज्जुहा का अर्थ बलिदान ( Sacrifice ) नहीं बल्कि " पशुवध का आनंद "( Joy of slaughter ) हैं.क्योंकि इसमें लाखों जानवरों का क़त्ल होता है .मुसलमानों का दावा है कि यह त्यौहार नबी इब्राहीम की अल्लाह के प्रति निष्ठा, भक्ति और उनके लडके इस्माइल की कुर्बानी को याद करने के लिए मनाया जाता है .और मुहम्मद साहब उसी इस्माइल के वंशज थे .चूँकि इब्राहीम की कथा इस्लाम से पहले की है और इब्राहीम के बारे में जो सही जानकारी बाइबिल , कुरान और हदीसों से मिलती वह इस प्रकार है .
1-इब्राहीम का परिचय 
इब्राहीम  إبراهيم‎ का काल लगभग 2000 साल ई ० पू से 1500 ई० पूर्व माना जाता है . इसके पिता का नाम मुसलमान "आजर آذر" और यहूदी "तेराह Terah"(  תָּרַח )बताते है .इब्राहीम " ऊर " शहर में पैदा हुआ था . जो हारान प्रान्त में था . वहां से इब्राहीम कनान प्रान्त में जाकर बस गया था .और उसके साथ उसकी बहिन ( पत्नी ) और भतीजा लूत भी आगये थे .इब्राहिम को एक गुलाम लड़की " हाजरा " मिली थी . जिस से उसने इस्माइल नामक लड़का पैदा किया था .जिसे मुहम्मद का पूर्वज माना जाता है . इब्राहीम और सारह से जो लड़का हुआ था उसका नाम "इसहाक " था .मुसलमान इनको नबी मानते हैं .यहूदी इसे अबराहाम(אַבְרָהָם  ) कहते हैं . जिसका अर्थ है जातियों का बाप .मुसलमान इब्राहीम को एक ,सदाचारी ,सत्यनिष्ठ ,और अल्लाह का परम भक्त नबी कहते हैं .लेकिन वास्तविकता यह है कि,
1-इब्राहीम का देशत्याग 
जब इब्राहीम अपने हारान देश को छोड़ कर कनान जाने लगा ,तो उसके साथ , लूत ,साराह अपनी सम्पति भी ले गया और वहीँ बस गया "बाईबिल .उत्पत्ति 12 :3 से 5 
2-इब्राहीम झूठा और स्वार्थी था 
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया , इब्राहीम झूठ बोलते थे .उनके प्रसिद्ध तीन झूठ इस प्रकार हैं ,एक मैं बीमार हूँ , दूसरा मैंने मूर्तियाँ नहीं तोड़ी . यह दोनो झूठ अल्लाह के लिए बोले थे . और तीसरा झूठ सराह के बारे में था , कि यह मेरी बहिन है .

"حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَحْبُوبٍ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ مُحَمَّدٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ لَمْ يَكْذِبْ إِبْرَاهِيمُ ـ عَلَيْهِ السَّلاَمُ ـ إِلاَّ ثَلاَثَ كَذَبَاتٍ ثِنْتَيْنِ مِنْهُنَّ فِي ذَاتِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ، قَوْلُهُهَاجَرَ فَأَتَتْهُ، وَهُوَ قَائِمٌ يُصَلِّي،  "

Sahih Al- Bukhari, Vol.4,  Bk 55-Hadith No 578, Translation by Dr. Muhsan Khan

इब्राहीम के तीन झूठ यह हैं ,
1-जब इब्राहीम ने चुपचाप देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ दी ,और लोगों ने पूछा बताओ क्या यह काम तुमने किया है .तो इब्राहीम बोला मैंने नहीं यह तो सबसे बड़े देवता का काम है "सूरा -अम्बिया 21 :62 से 63 
2-जब लोगों ने इब्राहीम के पूछा कि तुम्हारा अल्लाह यानी दुनिया के स्वामी के बारे में क्या विचार है ,इब्राहीम आकाश के तारों को देखता रहा , और बोला मैं तो बीमार हूँ "सूरा -अस सफ्फात 37 :87 से 89
3-इब्राहीम ने साराह के बारे में कहा बेशक यह मेरी बहिन है , और मेरे बाप की बेटी है ,लेकिन मेरी सगी माँ की बेटी नहीं है .इसलिए अब यह मेरी पत्नी बन गयी है " बाइबिल .उत्पत्ति 20 :13 
3-इब्राहीम पर लानत 
जो भी अपनी बहिन के साथ सहवास करे उस पर लानत , चाहे वह उसकी सगी बहिन हो या सौतेली .तो सब ऐसे व्यक्ति पर लानत करें और कहें आमीन '

 बाइबिल .व्यवस्था 27 :22 
तुम पर हराम हैं , तुम्हारी बहिनें " सूरा -निसा 4 :23 
4-इब्राहीम का पापी परिवार 
इब्राहीम के काबिले में लड़कों के साथ कुकर्म करने का रिवाज था और उसका भतीजा लूत भी ऐसा था . इस कुकर्म को लूत के नाम से "लावातत" कहा जाता है .इनकी लीला दखिये ,
एक दिन कुछ सुन्दर लडके लूत से मिलने आये ,तो उन्हें देख कर लोग आगये .इस से लूत चिंतित हो गया .और उन लोगों को रोकना कठिन होने लगा .क्योंकि वहां के लोग लड़कों के साथ कुकर्म " Sodomy" करते थे . लूत ने उन लोगों से कहा इन लड़कों को छोडो यह मेरी बेटियां हैं यह इस काम के लिए अधिक उपयोगी हैं .लेकिन लोग बोले तू जानता है कि हमें क्या पसंद है "सूरा -हूद 11 :77 और 78 
जिस तरह इब्राहीम ने अपनी बहिन से सहवास किया था उसका भतीजा लूत भी महा पापी था .यह बाइबिल बताती है .
"एक रात लूत की लड़कियों ने तय किया कि आज हम अपने पिता को खूब शराब पिलायेंगे .और उसके साथ सहवास करेंगे .पहले एक लड़की बाप के साथ सोयी , फिर बारी बारी से सभी बाप के साथ सोयीं .इस तरह सभी अपने बाप से गर्भवती हुयीं "बाईबिल -उत्पत्ति 19 :30 से 36 
5-इब्राहीम की रखैल हाजरा 
इब्राहीम सदाचारी नहीं था ,यह जानकर शैतान ने एक लड़की हाजरा इब्राहीम के पास भेज दी थी .इस से इब्राहीम ने सहवास किया था .
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा है , शैतान ने ही हाजरा को इब्राहीम के पास इसलिए भेजा था कि वह उसे दासी के रूप में स्वीकार कर लें .और जब वह इब्राहीम के पास गयी तो इब्राहीम बोला . अल्लाह ने मुझे एक लड़की दासी भेज दी है .

"وقال: 'لقد بعث الله لي الشيطان. اصطحابها إلى إبراهيم وهاجر تعطي لها ". جاء ذلك عادت لإبراهيم وقال: "الله أعطانا فتاة الرقيق للخدمة "

Sahih al-Bukhari, Volume 3, Book 34, Number 420

6-इस्माइल की झूठी पैदायश 
चूँकि उस समय काफी बूढ़ा हो चूका था , और उसकी पत्नी सारह बाँझ थी ,इसलिए इब्राहीम और हाजरा ने मिलकर एक साजिश रची और कहीं से एक ताजा बच्चा लोगों को दिखा दिया , कि यह बच्चा हाजरा ने पैदा किया है .और इब्राहिम ने उस बच्चे का नाम इस्माइल रखा था .
एक दिन इब्राहीम तड़के भोर में उठा ,और अँधेरे में हाजरा को तैयार किया .और उसे एक बच्चा दिया .फिर हाजरा ने उस बच्चे को झाड़ियों में छुपा दिया .और हाजरा इस तरह से चिल्लाने लगी जैसे बच्चा जनने की पीड़ा हो रही हो .और जब बच्चे के रोने की आवाज लोगों ने सुनी तो लोगों ने समझा हाजरा ने बच्चे को जन्म दिया है "बाइबिल .उत्पत्ति 21 :14 से 17 
7-अरब हराम की औलाद हैं 
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा कि पहले तो हाजरा सारह के पास गयी .फिर इब्राहीम के पास चली गयी .उस समय इब्राहीम काम कर रहे थे .उन्होंने सारह से इशारे से पूछा कि यह किस लिए आयी है . साराह ने कहा यह तुम्हारी दासी है .और सेवा करेगी .अबू हुरैरा ने कहा इस बातको सुनते ही रसूल ने मौजूद सभी श्रोताओं से कहा , सुन लो सभी अरब उसी हाजरा की संतानें हो "

"ثم القى رجال هاجر كخادمة بنت لسارة. جاء سارة الظهر (لإبراهيم)، في حين كان يصلي. إبراهيم وهو يشير بيده، سأل: "ما الذي حدث؟" أجابت، "والله مدلل المؤامرة الشريرة للكافر (أو شخص غير أخلاقي) وأعطاني هاجر للخدمة." (أبو هريرة ثم خاطب مستمعيه قائلا: "هذا (حجر) كان أمك يا بني ما هو بين سما (أي العرب، من نسل إسماعيل، ابن هاجر)."

Bukhari-Volume 4-Book 55: Prophets-Hadith 578

Eng Reference  : Sahih al-Bukhari 3358

चूँकि मुहम्मद साहब खुद को भी इब्राहीम के नाजायज ,पुत्र और शैतान द्वारा भेजी गई औरत हाजरा के लडके इस्माइल का वंशज मानते थे .और खुद को इब्राहीम कि तरह रसूल साबित करना चाहते थे .इसलिए उन्होंने इसके लिए इब्राहीम द्वारा की इस्माइल की क़ुरबानी की कहानी का सहारा लिया .
8-क़ुरबानी का सपना 
इब्राहीम के पूर्वज अंधविश्वासी थे और सपने की बातों को सही समझ लेते थे .बाइबिल और कुरान में ऐसे कई उदहारण मिलते हैं ,जैसे
"यूसुफ ने पिता से कहा कि रात को मैंने एक सपना देखा कि ग्यारह तारे .सूरज और चाँद मुझे सिजदा कर रहे हैं , यह उन कर पिता ने कहा तुम इस सपने की बात अपने भाइयों से नहीं कहना .ऐसा न हो वह कोई साजिश रचें " सूरा-यूसुफ 12 :4 -5 
ऐसा ही सपना इब्राहीम ने देखा ,और सच मान बैठा ,कुरान में लिखा है
जब इब्राहीम का लड़का चलने फिरने योग्य था , तो इब्राहीम ने उस से कहा बेटा मैंने सपने में देखा कि जसे मैं तुझे जिबह कर रहा हूँ ,बोल तेरा क्या विचार है "
सूरा -अस सफ्फात 37 :102

(अरबी में "इन्नी उज्बिहुक انّي اُذبحك" तेरी गर्दन पर छुरी फिरा रहा हूँ )

9-अल्लाह ने क़ुरबानी रोकी 
जब इब्राहीम ने अपने बेटे का गला काटने के लिए छुरी हाथ में उठायी ,तो एक फ़रिश्ता पुकारा ,हे इब्राहीम तुम लडके की तरफ हाथ नहीं बढ़ाना .हमें यकीं हो गया कि तू ईश्वर से डरता है .बाइबिल -उत्पत्ति 22 :10 से 12
हमने कहा हे इब्राहीम तूने तो सपने को सच कर दिया .यह तो मेरी परीक्षा थी .और फिर हमने एक महान क़ुरबानी कर दी "सूरा 37 :105 से 107
( नोट - इन आयतों में कहीं पर किसी जानवर का उल्लेख नहीं है ,और न मैंढे का नाम है)

10- गाय की कुर्बानी
जब अल्लाह ने मूसा से कहा कि एक गाय को जिबह करो ,तो लोग बोले क्या तू हमें अपमानित कर रहा है .लेकिन जब लोग मूसा के कहने पर गाय जिबह कर रहे थे तब भी उनके दिल काँप रहे थे . सूरा -बकरा 2 :67 और 71
गाय की क़ुरबानी ( ह्त्या ) का एक वीडियो देखिये 

http://www.youtube.com/watch?v=rgrB9X_mINU&feature=related

(नोट -इस आयत की तफ़सीर में लिखा है ,उस समय मिस्र में किब्ती ( Coptic ) लोग रहते थे जो गाय की पूजा करते थे .इसी लिए अल्लाह ने उनकी आस्था पर प्रहार करने और उनका दिल दुखाने के लिए गाय की कुर्बानी का हुक्म दिया था .जिसे रसूल ने भी सही मान लिया था .
(हिन्दी कुरान .पेज 137 टिप्पणी संख्या 24 मक्तबा अल हसनात रामपुर )

इन सभी प्रमाणों से सिद्ध होता है ,कि 1 . इब्राहीम को झूठ बोलने की आदत थी .और सगी बहिन से शादी करके महापाप किया था , और बाइबिल के मुताबिक यह काम लानत के योग्य है .2 .यातो इब्राहीम ने सपने में लड़के की क़ुरबानी की होगी या शैतान के द्वारा भेजी हाजरा के फर्जी पुत्र की क़ुरबानी की होगी .3 .इस झूठी कहानी को सही मान कर जानवरों का क़त्ल करना उचित नहीं है .4 .अल्लाह इब्राहीम और लूत जैसे पापियों को ही रसूल बनाता है .5 .सारे अरब के लोग इसलिए अपराधी होते हैं क्योंकि वह इब्राहीम के उस नाजायज लडके इस्माइल वंशज हैं ,जिसे शैतान ने भेजा था .6 .क्या इब्राहीम के बाद मुसलमानों में ऐसा एकभी अल्लाह भक्त पैदा हुआ , जो अपने लडके को कुर्बान कर देता .यहूदी और ईसाई भी इब्राहीम को मानते हैं लेकिन कुर्बानी का त्यौहार नहीं मनाते.
महम्मद साहब ने ईदुज्जुहा की परंपरा मुसलमानों को ह्त्या की ट्रेनिग देने के लिए की थी !

No-200/71


http://www.aboutbibleprophecy.com/abraham.htm



14 टिप्‍पणियां:

  1. यह सब बातें एक तरफ रखिये l भारत में बहुत काम की बड़ी बात कहता हूँ जिसका प्रचार आप करें l वोह बात इस पकार है l ==== बकरी ईद अरबस्तान को छोड़कर भारत में (और कहीं भी) नहीं मनानी चाहिए l इसके दो कारण हैं l प्रथम कारण: इब्राहिम को इस्लाम से कुछ भी लेना देना नहीं था l इब्राहीम मुसलमान नहीं थे l वे येहुदी-इसाई भी नहीं थे l ठीक वैसे, जैसे मुहम्मद इसाईं-यहूदी नहिओ थे l इस्लाम का इब्राहीम से कोई सम्बन्ध नहीं है l सो इस्लाम के नाम पे बकरी ईद मनाना निहायती वाहियात-पना है l यानी इस्लाम के कारण बकरी ईद हो ही नहीं सकती l भारत में एक भी मुसलमान ने इस्लाम के कारण बकरी ईद मनानी नहीं चाहिए... उनको इस्लाम के नाम पे बकरी-ईद मनाने का कोई भी हक नहीं पहुँचता l ... ...... दूसरी बात: यदि इस्लाम मज़हब का इब्राहीम और कुर्बानी से कोई सम्बन्ध नहीं, तो फिर इस्लामी पुस्तकों -इतिहास में इब्राहिम का नाम+उनकी बातें क्यूँ हैं? ये कुर्बानी वाली भी बात क्यूँ है? तो वो इस्लिये है की वो (इब्राहिम)अरबियो के पुरखे थे l तो अपने पुरखो का नाम -काम तो सब लिखेंगे ही ...अरबियो ने भी लिखा l तो लेकिन वो इब्राहीम, भारत के मुसलमानों के पुरखे तो नहीं है l तो यह दुसरे कारण से भी हिन्दुस्थान के मुसलमानों ने दुसरो के (अरबियो के) बाप के नाम पर बकरी इद करनी ही नहीं चाहिए l भारत के मुसलमानों का इब्राहिम से क्या ताल्लुक? अतः भारत के मुसलमानों ने तो इन दोनों कारणों से (इस्लाम और इब्राहिम बाप) बकरी ईद मनाने का कोई सवाल ही नहीं उठता l तो इसको देश-राष्ट्र द्रोह भी ठहराया जाए तो सही होगा l भाई, वहां हिंदुत्व राष्ट्र-द्रोह है तोह यहाँ इस्लाम नहीं तो बकरी-ईद तो राष्ट्र-द्रोह घोषित होना चाहिए न? सऊदी वालो के बापदादा की पार्टी हो तो भारत के करोडो पशुधन का नाश तो घोर अपराध है ऐसा घोषित होना चाहिए l भले इसका परिणाम और प्रभाव कुछ भी पड़े, किन्तु यह बात तो मुसलमानों के मनो में बम की तरह प्रभाव करेगी l उनकी जूठी आस्था उड़ाने का और उनको हिन्दू-भारतीय-राष्ट्रीय बनाने का इस से अच्छा मौका कहाँ मिएल्गा? लेकिन यह मौके हमारे मूर्ख-अंधेरगर्द लोग, गँवा रहे हैं l यदि अरबियो के बापदादों की पार्टी है तो उन्होंने प्रति-वर्ष वहां से भारत में ५ या ७ लाख ऊँट मुफ्त में, सौगात करके भेजने चाहिए न? जिबह-हलाल करने के लिए? प्रत्येक भारतीय गाँव में एक अरबी ऊँट काटा जाए l भाई, पार्टी अरबियो के बाप की है न? इस से हमको क्या? हमारा पशु धन क्यों नष्ट करें? यह तो राष्ट्र की संपत्ति-समृद्धि को विनाश करने-करवाने की और सब को ऐसे कार्यक्रमों के नाम पे जोड़ के रखने और भरमाते रहने और गुलाम बनाने की ही बात-राजनीति है... अर्थात: यह औरंगजेबी आक्रमण का आज भी सिलसिला जारी है... इस बकरी-ईद के रूप में.. यही हुआ न? बकरी-ईद राष्ट्र पर आक्रमण है, ऐसे ही उसको देख-समाज के उसको घोषित करके उस पर प्रत्रिबंध लगाना चाहिए l भाई, इतना घोर समृद्धि नाश हम कैसे सहन करें? इब्राहिम बाप और इस्लाम.. इन दोनों कारणों से हिन्दुस्थान में मुसलमानों ने बकरी ईद मनाना नहीं चाहिए l ....... ... ....... ........ ... .................... ........... ........ ......... .......... अब वोह विधानसभा की सदस्या बकवास कर रही थी की ..."" सच्चा मुसलमान हो तो उसने अपने बेटे की कुर्बानी देनी चाहिए"" l उनको ज्ञान ही नहीं है की बात क्या है l अर्थात: हिन्दुओ को इस्लाम के पूर्वपक्ष का अता-पता ही नहीं है ... और उसके बिना इस्लाम के बारे में उल-जुलूल कुछ भी मान लेना और अनर्थ करते रहना-फेलाना यह अधर्म-शय्तानियत ही है l तो उन सदस्या और आदित्यनाथ जी को यह बात स्पष्ट करके बताएं और अब की बार ठीक से बोलने को कहें .. और मिडिया में वोह दे दें l ऐसे औरों से भी बुलवा के नेट-व्होत्सेप पे दाल सकते हैं l और इसका ज़बरदस्त प्रचार होना चाहिए... अखबारों और टीवी में भी l फिर भले जो होना हो सो हो l लेकिन यह बात मुसलमानों के मनन में पहुंचानी ही होगी l उनके मनो को तोडना होगा l सच्चा विचार तलवार-छुरे-बम से भी अधिक प्रभावी काम करता है l इसमें आम मुसलमानों को अलग से निर्दोष कहके संबोधित करना होगा और सब ज़िम्मा ठेकेदारों-मुल्लों-सेकुलरों पर थोपना होगा l यह रन-नीति रहे l क्यूंकि आम मुसलमानों के मन में जो नेगेतिव्ज़ हैं उनको तोडना होगा और परावर्तन के मार्ग में यह सहायक हगा l यह व्यूह अधिक सफल होगा l हाँ, जाकिर नाइक जैसों को भी घसीट सकते हैं, इसमें ... हाहाहाह्ह ! और इस से ज्यादा आप सोच और कर सकते हैं l

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    1. हाँ जी, बकरी ईद पे प्रतिबन्ध की बात करके सरकार ने बवाल करना ही चाहिए l... भले प्रतिबन्ध न ही लगे l लेकिन यह बवाल मिडिया वालो ने बताना ही पड़ेगा ... और सब भारतीय मुसलमानों तक यह बात पहुँच जायेगी की उनका बकरी ईद से कोई सम्बन्ध नहीं ..... इस्लाम के कारण नहीं और इब्राहिम बाप भी नहीं l यह सब बकरी ईद इत्यादि कार्यक्रम से मानसिक ट्रेनिंग होती है.. लगातार संस्कार होते हैं... उनको गुलाम बनाए रखने के l येही काम होता है अन्य कार्यक्र्तामो से... जैसे की ... हज-नमाज़-कुरआन पढना, उर्दू, और इस्लाम के नाम पे टोपी-लुंगी-सुन्नत-बुर्का इत्यादि से l यह सब मानसिक थोक-थोक हर-र-ओज करने के साद्शन हैं ... जिस से गुलाम मानसिकता को बनाए रखना और सुद्रढ़ बन्माये रखने का काम होता है... यानि राष्ट्रद्रोह और धर्म-मानवता का घात होता है l यह सब कार्यक्रमों पर प्रतिबन्ध रखना चाहिए l राष्ट्रघात को धर्म कैसे कह सकते हैं? उसको किसी भी नाम से.. अल्लाह-मज़हब के नाम से भी कैसे चलने दे सकते हैं? चाहे अल्लाह-भगवान् भी आ जाए ---उपरत से, लेकिन यह सब प्रतिबंधित हो जाना ही चाहिए... तुरंत l मस्जिदें भी येही संस्कार करने और उसकी ध्वजा ऊंची रखने के प्रतीक हैं l इन पर प्रतिबन्ध होना आआःईय़ l एक उद्साहरण है:: बॉर्डर फिल्म में अंत में.. गीत है की ""हम क्यूँ बन्द्फूकें बोते हैं.. और जिंदा रहे तेरा भी वतन--मेरा भी वतन""... लेकिन इसमें पाकिस्तानी ध्वज फेहरता दिखाते हैं...! यह सारे हिन्दुस्द्थान में..यानि हरेक सिनेमा थियेटर में दिखाया जाता रहा l यह भारत की छाती पर पाकिस्तानी जंडा गाडा जाए...और यह देश-धर्म-राष्ट्र का मनोबल क्षीण करने का काम करता है l और हम इसमें कुछ न कर सकने से हमारी संवेदनाओं को इस तरह धीरे-धीरे ख़त्म करने के काम हैं l यानि बाद में हम इस्लामी हमलों का भी स्वीकार कर लें.. बिना कुछ संवेदन अनुभव किये l गौहत्या का भी यही प्रकार का लगातार संवेदनाओं को मार देने का कार्यक्रम चलता रहता है l इसमें सवाल गाय को मारने का नहीं... क्युकी उस से तो इस्लामियो को भी दूध-इत्यादि बांध हो जाता है l इस में असल मुराद है की... हिन्दुओं की भावनाओं को मार देना.. ताकि आगे पर अपने धर्म की बातों पर से हिन्दुओं का विश्वास कम हो जाएँ आर धर्मरक्षा के लिए विरोध और युद्ध करने की मानसिकता छोड़ दें l यह लंबा प्लान है l ऐसे ही युद्ध लादे जाते हैं l इसको "डीस्लोकेशन ऑफ़ फैथ एंड रिसोल्व टू फाईट" कहते हैं.. l इसके लिए पाकिस्तानी सेना के जनरल मलिक की पुस्तक: "The Quranic Concept of War" पढ़ें l शारीरिक हमले से पहले मानसिक युद्ध ज़रूरी है.. जिसमें.."तकिया" छल -प्रपंच इत्यादि सब उपयोग किये जातें है l
      इसके साथ ही इस्ल;ऍम का धार्मिक पराभव करना चाहिए l इसके इलावा कोई उपाय नहीं है l सैन्य विजय से कुछ नहीं होगा l हमारी १,००० साl की सैनिकी विजयों और बलिदानों का फल क्या मिला? आज पाकिस्तान हो के खड़ा है और दुसरे होने जा रहे हैं... l इसकी वजह है: मुस्लिम जनसँख्या l इसको कम करने के लिए उनका उनके मज़हब से विश्वास उठाना ही होगा l और परावर्तन करना होगा l इस के लिओये इस्लाम का खुल्लम-खुल्ला चर्चा करके उनका पराभव करना होगा l इसके इलावा कोई भी तरीका नहीं है l वर्ना यहाँ दानव से भी बुरा समाज-देश हो जाएगा l
      श्री कृष्ण ने कहीं भी नहीं कहा है की वे हिन्दुओ को बचायेंगे l उन्होंने कहा है की : "देवो दुर्बल घातकः" l यानि दुर्बल को देव भी मदद नहीं करता... यही सृष्टि का नियम है l और अर्जुन को कहा की टू तेरी निर्बलताएँ छोड़ दे l और युद्ध कर.. और शंका-बकवास बंध कर l भगवान् ने यह भी कहा की "संशयात्मा विनश्यति" l हिन्दुओं को हर बात पे और अन्दर-अन्दर भी संशय है....l हर मुसलमान को खुद और अल्लाह पे विश्वास है ... सो वे ८--८ बच्चे पीड़ा करते हैं l और भगवन उनको जित्याते ही हैं l आज हिन्दू लोग भले अपने दो बच्चों के लिए करोडो रुपये छोड़ जाने की ही सोचते हैं ..लेकिन फिर भी ..उनके भी संतानों को २५ साल बाद वो मिलने वाला ही नहीं है ... क्यों की मुसलमानों के ८ बच्चे वह सब छीन लेंगे l लोभ लालच में शक्ति कम कर रहे हैं हिन्दू लोग l यानि न रहेंगे बच्चे और न रहेगा उनके लिए पैसा न देश न सम्मान l येही सत्य है l बस एक पीढ़ी की देर है l सिर्फ २५ साल और ... लेकिन इतना सर पे आ गया है काल... इसका ९९% हिन्दुओं को पता ही नहीं है l ऐसे हिन्दुओं को भगवान् भी नहीं बचा सकते l ऐसे हिन्दू मर-कट-बलात्कार हो के मर जाये येही बेहतर है ... और न्याय है l इनको मारना-लूटना-बदनाम करना बेशक पुण्य कार्य है...l यह पुण्य-सवाब चाहे इस्लामियो को हो या अन्य कोईभी को हो... l

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    2. हाँ, सच है l इस्लामिक कार्यक्रमों से गुलामी की ट्रेनिंग होती है और देश-मानवता का नाश करने का षड़यंत्र सफल होता है l इसीलिए यूरोपी देश वालो ने इस्लामी प्रथाएं, MASJIDEION, बुर्का वगेरह पर प्रतिबन्ध लगाए रक्खे हैं l वो यूरोप वाले हम्ज़े आगेव हैं इस बात में l वो लोग सांप को सांप कहने में डरते नहीं है, और न ही उनको उसमें कोई लज्जा लगती है l उनके लिए उनकी संस्कृति-राष्ट्र-पहचान-मानवता वगेरह सर्वोपरि महत्व के हैं l वो हमसे कम गद्दार हैं खुद के देश-धर्म के l

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  2. बकरी-ईद को देश-राष्ट्र द्रोह भी ठहराया जाए तो सही होगा l क्युकी सऊदी में राम नवमी या हिंदुत्व मनाना मृत्युदंड के काबिल है न? देशद्रोह है न? तो यहाँ उनके बाप की पार्टी मनाना और इस्लाम करना भी देशद्रोह, राष्ट्र-मान्वता-सेकुलरिज्म का द्रोह-घात है न? सेकुलरिस्म तो यह है न? की अरब में वो लोग मन-माना प्रतिबन्ध लगायें, तो हम अपने यहाँ अपना मन-माना प्रत्रिबंध लगायें! समान-अधिकार ! मानवाधिकार ! युनिवर्सल ह्युमन राइट्स ! "युनिवर्सल" शब्द है ... "स्पेशियल" शब्द नहीं है l क्यों? कैसी कही?

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  3. bhaaiji , मैंने ८ महीने पहले, इंटरनेट पे एक ख़ास वास्तु देखि थी l वो थी: मज मुल्लर और युरोपिओ का वेदों के विषय में श्जद्यंत्र... l उसमें ८ पन्ने थे l यानी पेजिज़ थे l वो मुजे अब तक नहीं मिल रहा l उस समय मैं यहीं-कहीं ... यह भंदफोदु बगेरह देख रहा था l इसी में से इधर-उधर होते ही वह पेज पर पहुँच गया था l वह ८ पेजिज़... एक ही विषय पर.. वह बहुत अछि प्रस्तुति थी l उसमें मज मुल्लर के जीवन, उसकी युनिवार्सिरी में कैसे प्रमुख की गद्दी पर नियुक्ति हुई, उसके उदगार... की: ...हिन्दुओ को उनकी अश्था से हटा के जो खालीपन हो रहा है, उसको भरने के लिए इसाइयत आगेर नहीं आएगी तो किसका दोष होगा वह? यह सब उदगार अंग्रेजी में थे l और फिर दयानंद सरस्वती जी ने वेदों को किस द्रष्टि-न्याय से जाना-समजाया था वह भी है l जबकि दुसरे लोग कुछ दूसरी... तरह से.. जो लागू नहीं होती.. ऐसी पद्धति से वेदों का अर्थ कर रहरे ठे l और फिर जब दयानन्दजी ने मैक्स मुल्लर की चेलेंज को जवाब दिया तो ... दयानन्दजी के मृत्यु-पर्यंत मैक्स मुल्लर की हिम्मत नहीं हुई की अपना झूठ चलाये l यह सब उस ८ पन्नो में था l उसमें रजा मनमोहन रॉय और अन्यों के भी इसाई मतवालों से आदान-प्रदान की बातें थी l वो ८ पन्नो वाली वोह चीज मुजे नेट पे मिल नहीं रही है l मई ने यह बी एन शर्मा इत्यादि सब छान मारा , लेकिन नहीं मिल रहा l यदि आप के ध्यान में हो तो बताइयेगा? यहाँ जवाब l;लिख दीजियेगा l तो आपका धम्यवाद l

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  4. .....खतना तो इस्लाम से भी पहले चलता ही था l यह बात खोज के स्पष्ट करें l खतना का इस्लाम से कोई सम्बन्ध नहीं है l यह स्पष्ट करना जरुरी है l और भी बातें हर-रोज़ चलते-फिरते प्रचार करना जरुरी है l वो इस प्रकार;: अल्लाह-काबा-हज-नमाज़-ज़कात-रोज़ा-लुंगी-टोपी-सुन्नत-इंसानियत-दफ़न-तौहीद-रिसालत-आखिरत-ज़मज़म का पानी--शेतन के खम्भे को ३ कंकर मारना... इन में से किसी का भी इस्लाम से कोई भी सम्बन्ध नहीं है l यह सब बातें मुहम्मेद्सहब के भी पहले से.. जो सब हिन्दू-सनातनी-=येहुदी-इसाई लोग करते ही थे... और जानते ही थ l ला-सूरत भी हिन्दुओ से लिया है l खतना और बाकी मंतर-तंतर भी गेर-इस्लामी-पूर्वजों का कोपी किया गया है इस्लाम में l; वह भी इस्लामी और इस्लाम नहीं है l अर्थात: जब भी कोई मुसलमान कहने लगे की इस्लाम यानी यह ऊपर कही सब बातें... तो तुरंत और दैनंदिन उनके भेजे के यह जूठों को तोड़ने की परम आवश्यक्त्य और सब हिन्दुओ का परम-कर्त्तव्य है l इसका जोर-शोरो से प्रचार होना चाहिए l अर्थात यह की यह सदब इस्लाम नहीं है... बल्कि गेर-इस्लामी है l तोह फिर इस्लाम क्या है? किस चीज का नाम है? इस्लाम अधर्म है l लेकिन अधर्म का कोई नाम हो नहीं सकता... ठीक वैसे जैसे धर्म का कोई नाम नहीं होता l धर्म धर्म है, और अधर्म अधर्म है l अर्थात: इस्लाम अधर्म का एक फिरका है ... बाकी कुछ नहीं है l अधर्म में सब शेतानियत भरी है.. जिसके लिए शेतान अछि बातें कहके --करके सब को भरमाता है और फिर शेतानियत करता - करवाता है l इस्लाम अर्थात अधरम, ऊपर लिखी गयी अछि बातों-यानि-धर्म (हज-ज़कात-अल्लाह-इत्यादि) के मुखौटे ओढ़ कर कार्यान्वित हैं l यानि अधर्म धर्म का नाम-मुखौटा पहने हैl इसी का नाम इस्लाम है l और इस (इस्लाम) अधर्म की जो कुरआन-हदीस जैसी फेकम-फेक वाली किताबें हैं, वो .. वैसी किताबें भी दुनियाभर में, इस्लाम से पहले भी लिखते चले आ रहे हैं लोग, विभिन्न मज़हबी नामो से l और कुरान-हदीस में भी दूसरों से ली हुई--कोपी करिओ हुई दुनियाभर की बातें हैं... जो इस्लामी या इस्लाम नहीं है l दूसरों का माल चोरी करके .. उसको अपने नाम का सिक्का मारके उन्ही दूसरों पे थोपना...ज़बरदस्ती.. बलात्कार से.. और उसके लिए जिहादियो-सब तब्न्लिगी मियाओं को जन्नत की हूरियाँ मिलें... यह अधर्म का नाम इस्लाम है l यानी इस्लाम अधर्म का एक फिरका है l रिसालत भी येहुदी-इसाई से ली गयी है... वह भी इस्लामी नहीं है l

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  5. शेतान अच्छे काम करता नहीं है l सिर्फ अच्छी बातें करता है और अच्छे का मुखौटा पहनता है l यानी झंडा अच्छे का और मंशा-काम बुराई के l मुहम्मद अर्थात व्यक्तिवाद तो स्पष्ट अधर्म है l और यह अधर्म भी मुहम्मद से पहले से चलता आया है l तो यह भी इस्लाम नहीं है.. पर अधर्म है ज़रूर l तो सिर्फ मुहम्मद का दुनिया पे राज हो, यही इस्लाम है l यानि अधरम है l दुनिया जुकति है, जुकानेवाला चाहियें l दुनिया में मूर्खों और मजबूरों.. अज्ञानियो.. और वक़्त के मारों की कोई कमी नहीं है...सो यह सब गड़बड़-घोटाला चलता रहता है...ऐसे ही l और दुन्मिया के बाकी सब संस्कृतियों से नफरत करना और सब विद्या-इल्म-हुन्नर-मानवता-इश्वार्तास--अछे को मिटा देना... यह अधर्म यानि इस्लाम है l हिंदुत्व में तो रावण भी पढ़ा लिखा-सब ग्यानी था.. ऑर सब राक्षस भी बहुत शिक्षित-तेक्नोल्जिस्त-समृद्ध-उन्नत थे...वीर भी थे l लेकिन इस्लामी लोग तो सब शिक्षा-विद्याओं-नीतियों-अछि बातों-टेक्नोलोजी-वीरता-करुणा-समत्व इत्यादि के शत्रु हैं l यह तो राक्षस से भी गए हुए हैं l इस्लाम तो राक्षसता से भी बदतर है.. लाख गुणा l

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  6. दार-उल-इस्लाम झूठ है l उसके यह ३ कारण हैं: पहला कारण: मुहम्मद साहब के समय में समस्त संसार में कुल वस्ति २० करोड़ और मंदिर लगभग ४ लाख होंगे या थे l फिर १४०० वर्ष तक इन सब को ख़त्म करने के लिए मारते-काट-ते --तोड़ते भी रहे... फिर भी ख़त्म नहीं कर सके और आज ? आज दुनिया में ७०० करोड़ काफिर और डेढ़ करोड़ सार्वजनिक मंदिर हैं l लोगों के घरों में निजी मंदिरों की संख्या ७० करोड़ हैं l इनको ख़त्म करते १ लाख वर्ष लगेंगे औरत तब तक ये १०,००० करोड़ काफिर और ७०० करोड़ मंदिर हो जायेंगे l यानी दार-उल-इस्लाम नहीं हो सकता .. उसका यह पहला कारण है.l ...... अब दूसरा कारण: दुनिया गोल है l उत्तर और दक्षिण ध्रुव् में ६--६ महिना रात और दिन रहते हैं l यदि वहां रात में रमजान आ जाए.. तोह पूरा महिना रोज़ा नहीं कर स्दाकते l और यदि ६ महीने के दिन में रमजान आ जाए तोह एक माह तक २४ घंटे... बिनस पानी पिए कोई जी नहीं सकता l सो वहां रोज़ा नहीं हो सकता l इसका मतलब यह की पूरी दुनिया इस्लाम नहीं हो सकती l यानि दार-उल-इस्लाम झूठ है l लेकिन जाहिल-अंधकारी अरबी लोगों को ज्ञान नहीं था की पृथ्वी गोल है l वो लोग प्रिओथ्वि को फ्लैट-सपाट-चिताई की तरह समजते थे l उनको दुनिया कितनी बड़ी है यह भी पता नहीं था l उन्होंने देखि हुई दुनिया ५०--१०० किलोमीटर की थी l मुहम्मद साहब की "देखि" हुई दुनिया ३०० किलोमीटर की ही थी l वे उतने में ही घूमे थे l और उनकी "सुनी" हुई दुनिया यूनान से लेके... ओटोमन, ब्य्ज़न्ताइन, तुर्की, कनान..सीरिया, मेसोपोटेमिया, पर्शिया, हिन्दुस्थान और उस तरफ मिस्र .... बस इतनी ही उनकी सुनी हुई दुनिया थी l मुहम्मद साहब को अमेरिका मालूम नहीं था और ना ही उनको जापान, कोरिया, चीन, रशिया, जर्मनी, इंग्लेंड, डेनमार्क-फ़्रांस-ऑस्ट्रेलिया-तैवान-सिंगापूर-इंडोनेसिया--अफ्रीका.... इनमें से मुहम्मद साहब को कुछ नहीं मालुम था.. सपने में भी नहीं.. और अल्लाह ने भी उनको कुछ नहीं बताया l और पृथ्वी को चप्पट मानते थे l कोई ऐसी जगह हो की जहां ६--६ महीने दिन-रात रहते हो.. यह भी उनको नहीं मालुम था ... सपने में भी l सो उन्होंने अल्लाह के नाम पे ठोकम-ठोक किया-लिखवाया की पूरी दुनिया इस्लाम बना दो l साहब और सहाबाओं को मालुम नहीं था की दुनिया गोल है l इस्लाम का यह सब विज्ञान-भूगोल-इल्म-सायंस से कुछ भी लेना-देना नहीं है l सब विद्याओं का शत्रु है इस्लाम l इसीलिए पश्चिम में कहते हैं की : "" इस्लाम एंड मुस्लिम्ज़ आर एनिमिज़ ऑफ़ नोलेज"" l यह हुआ दूसरा कारण की दार-उल-इस्लाम जूठ है l ... अब तीसरा कारण: ... वो यूँ की... वक़्त और तलवार किसी के नहीं होते l तलवार तो हिन्दुओ की भारी थी लेकिन वक़्त हिन्दुओ के साथ नहीं था.. क्युकी संगठित हो के नहीं लादे हिन्दू लोग l राष्ट-भावना भूल गए थे लोग l और इस्लाम वाइरस है ये यह बात हिन्दू लोग बहुत देर तक समज नहीं सके l लेकिन आज वक़्त और तलवार ... दोनों काफिरों के ही पास है, और अब हमेशा के लिए काफिरों के ही पास रहेगी l इसका कारण यह है की काफिरों के पास विद्या-हुन्नर-इल्म-टेक्नोलजी-प्रगति-इन्फ्रास्ट्रक्चर-कारखाने-काबिल लोग-हथिओयार-धन-वक़्त-पेट्रोल-कूटनीति और पूरा ढांचा तैयार है .. झो इस्लाम में हराम है l सो अब वक़्त और तलवार हमेशा के लिए काफ़िरो के पास हगी रहेगी l और इस्लामी देशों के तेल ख़त्म होने के लिए सिर्फ ३० वर्ष बाकी हैं l फिर वो लोग वापस सर पे टोकरियाँ ले के ५ रुपये किलो खजूर बेचते हुए घुमते हुए नज़र आयेंगे l यह इसलिए की उनका पैसा सब लूट लिया जाएगा... अंग्रजो द्वारा l हमारे पर सब से अधिक तबाही ढाई है अरबियो ने.. हम भी बदला ले सकते हैं l लेकिन हमारी बातें जाने दो.. l अँगरेज़ छोड़ेंगे क्या अरबी-इस्लामियो को? कहीं भी? अँगरेज़ किस चीज का नाम है.. यह तो सब को पता है न?! है न?! बस उनका तेल ख़त्म और इस्लाम का खेल ख़त्म l (१४०० साल और ७२ फिरकों की बात को भूल जाइए...ये नहीं होंगे तो भी इस्लाम का खेल ख़त्म होने को है.. सब लोग उठ के अपने अपने राष्ट्रगीत गाने को खड़े हों... फिल्म ख़त्म होने को है) l अब दार-उल-इस्लाम संभव नहीं है l यह तीसरा कारण है की दार-उल-इस्लाम जूठ है l मक्का को भी शिव मंदिर बना के दुनिया के लिए खुल्ला कर देंगे l भाई.. सेकुलरिस्म यानि सब को सामान-हक ! है न? इस्लामियो ने सब तरफ आक्रमण किये.. तो लोग मक्का पर भी करेंगे l ये दुनिया आणि-जानी है, फानी है, हाथ किसी के न आणि है, l इसमें कभी आप तो कब्बी हम, कभी ख़ुशी तो कभी गम, कभी छुरी तो कभी बम, कभी देसी तो कभी रम, कभी आप इधेर तो कभी हम उधर l हैं? इसमें अच्छा-बुरा क्या होता है? कुछ भी नहि l है न? ज़िन्दगी ख्वाब है, ख्वाब में झूठ क्या? और भला... सच है क्या? हैं? सब सच है !!!.. ज़िन्दगी ख्वाब है ... ! कोई शक?

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    1. तीसरे कारण में यह भी की अब सब काफिर संगठित हो चुकले हैं... यानि पहले जो सब रजवाडो को लडवा के और छोटे-छोटे देशो को दबा के इस्लामियो ने शय्तानियटी बरपा करी है... वही अब नहीं होगा.l और अरबियो का तेल ख़त्म तोह इस्लाम का सब खेल ख़त्म l और अंग्रेजो और दुनिया के पास हर जगह न्टेल अभी भरा हुआ रहेगा... निकालने के लिए l
      दर-उल-इस्लाम के जूठ का चौथा कारण यह:: सब मुसलमान मरने के बाद कब्रों में पड़े रहेंगे और फिर जन्नत या जहन्नुम में जाएंगे, लेकिन वापस नहीं आयेंगे l इस्लाम में पुनरजन्म नहीं है l लेकिन हिन्दू लोग तो अभी गए और अभी वापिस ! हिन्दू तो मरने के बाद तुरंत नया चोला--शरीर धारण करके वापस आ जायेंगे l तो पृथ्वी पर तो हिन्दुओ का ही कब्ज़ा रहनेवाला है l यानि दार-उल-इस्लाम हो ही नहीं सकता... किसी भी सूरत में ... यानि दार-उल-इस्लाम जूठ है का यह चौथा कारण है l बोलो... सियाराम्चंद्र की... जय !

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  7. गौहत्या का रोना रोने वालों से मेरे कुछ सवाल:-
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    (1) भारत में 99% गौ को हिन्दू पालते हैं, पर जब गाय दूध देना बन्द कर देती है और बूढ़ी हो जाती है तो वो कहाँ जाती है?
    (2) वोटबैंक के लिये गौहत्या का रोना रोने वाले नेता लोग गौशाला खोलते हैं लेकिन उसमें केवल दूध देने वाली गौ होती हैं बूढ़ी गौ क्यों नहीं होती ?
    (3) गौ जब बच्चा देती हैं तो बछड़े (बैल) भी होते हैं वो बछड़े कहाँ जाते हैं?
    (4) 50%गौ की आबादी बैल होते हैं ,उनको हिन्दू क्यों नहीं पालते?
    (5) गौ के मर जाने पर उनका अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया जाता? कोई गौ मर जाती है तो वो कहाँ जाती है?
    (6) हिन्दू गौ को माता कहते हैं फिर गौ की खरीद फरोख्त क्यों करते हैं? क्या हिन्दू अपनी माँ की खरीदफरोख्त करते हैं ?
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    जवाब:-
    (1) भारत में अधिकांश गौ हिन्दू पालते हैं और जब गौ बूढ़ी हो जाती है तो उसे माँस कारोबारियों को बेच देते हैं।
    (2) गौशालाओं में बूढ़ी गाये नहीं पाली जाती क्योंकि उनसे लाभ नहीं होता और जो गौ बूढ़ी हो जाती हैं उन्हें माँस कारोबारियों को बेच दिया जाता। और बाद में गौहत्या का रोना रोया जाता है।
    (3) बछड़े और बैलों को भी माँस कारोबारियों को बेच देते है हिन्दू।
    (4) भारत में 80% कसाईखानों के मालिक हिन्दू ही हैं।
    (5) गौ का अंतिम संस्कार नहीं किया जाता क्योंकि उन्हें माँस कारोबारियों और चमङा कारोबारियों को बेच दिया जाता है।
    (6) हिन्दू लालच में अपनी गौमाता को बेचते हैं और बाद में गौहत्या का रोना रोते हैं।
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    असल में आरएसएस और ब्राह्मणवादियोंको गौहत्या से कुछ लेना देना नहीं है बल्कि यह तो केवल साम्प्रदायिकता फैलाने और दंगे करवाने का केवल एक साधन है!

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    1. हाँ. तो पहले मुसलमान बंध करें न गौ-मांस खाना? सब मुसलमान वापस हिन्दू हो जाएँ तो गौ मांस की मांग ख़त्म हो जायेंगी न? फिर हिन्दू ऊपर की आप की कोई भी बातों में से कुछ नहीं करेंगे l जब मंदी होती है तभी तो यह सब होता है l आप हिन्दू में परावार्तन .. घर वापसी कर लीजिये l सब मुआमला हल हो जाएगा, जी l .... हाँ.. कुदरती मृत्यु के बाद हिन्दुओं में कसाई और ख़ास जातीयों को यह हजारो सालों से चमड़ा-इत्यादि निकालना-बेचना वगेरह काम उनका है ही l लेकिन जिंदा मार देने की बात कहीं नहीं है l और मोदी-हिन्दू शासन ने गोशालाओं के लिए राष्ट्रभर में कितने अनुदान और योजनायें चलायिऊ हैं.. यह तो आप टीवी में देखती ही होंगी l उसका एक रिपोर्ट निकालिए.. वो..आर.टी.आई या कुछ तरीके से.. l सब पता चल जाएगा की हिन्दू सरकार बहुत काम कर रही है इस पे .. और कुछ सालों में हालात सुधर जायेंगे l हाँ.. फिर अरबी ऊँटो को मंगवा के काट के खायेंगे हिन्दू और यहाँ के मुसलमान लोग ! क्यूँ? कैसी रहेगी? मज़ा यह की पता भी चल जाएगा की आप की चिंता उन आरबों को कित्न्बी हैं जिनके लिए आप अपनी "X" "YZ"वा रहे हैं l हाँ.. लेकिन आप घर वापसी कर लीजिये.. तोह मुआमला बहुत जल्द हल हो जाएगा.. अगर आपको धर्म की यानि मानवता--देश-राष्ट्र की चिंता है तो l वर्ना बकवास बंध करो, जी l मदद नहीं कर सकते तो चुप बैठो l मदद करनि है तो यह सब करो l देखते हैं, आप कितने पानी में हैं l है दम? ईमान? इमानदारी? हिन्दू हो ने से कोई शिर्क नहीं होता l ला-सूरत यानि निराकार तो करोडो हिन्दू मानते ही हैं .. जो मूर्ति पूजा नहीं करते l सो, ला-सूरत के लिए मुसलमान बनना कोई ज़रूरी नहीं.. और मुसलमान रहना भी ज़रूरी नहीं l हिन्दू होने से कोई शिर्क नहीं होता l जन्नत गारंटीड है l जो हिन्दू मूर्ति माने वो माने l आप न माने l काबा को शिवमंदिर और अल्लाह को शिवजी सब हिन्दू मानते ही हैं l आपने जैसा मानना है मानो l मानने ... नहीं-मानने पर इस्लाम में प्रतिबन्ध है.. हिंदुत्व में नहीं l आज़ादी भी रहेगी l अपने ही बाप के नाम से जी सकेंगे .. दूसरों को बापों बोलने की घुलामी भी नहीं रहेंगी l वहां मक्का में मंदिर है.. तो उनके देश में है तो वो लोग संभालें.. उसमें अपन ए को कोई फ़िक्र नहीं l हज नहीं जायेंगे .. यहाँ किसको पड़ी है वहां जाने की? हमारा हरिद्वार और कुम्भ में भी पहुन्चने का योग नहीं बनता.. तो मक्का की कहाँ सोचें? यहाँ किसको पड़ी है मक्का जाने की? किसीको भी नहीं, जी शिर्क होता नहीं l मुहम्मद को जो मानना चाहे वो माने और... न मानना चाहे वो न माने l फिर बाकी क्या रहता है? कुछ भी नहीं l अपन्मे ही घर में बुलाने के लिए कोई दावत नहीं देनी पड़ती...वर्ना हम भी कहते की हम आपको दावत देते हैं l आ जाइए.. वक़्त अपना अच्छा बुरा चलता रहता है.. आ जाइए .. l बहुत हो गया l अरबियो के पोटला-गठरी उठा के हम कब तक चलेंगे? उनका पोटला-गठरी.... इस्लाम का उनको वापस कर दो l अपने पास जीने-मरने--प्यार करने और लड़ने की वजहें बहुत हैं.. और हमेशा रहेगी l दूसरों के मसलों पर हम क्यों अपनी ज़िन्ब्दगी और सब खोएं? अपने पास टाइम है क्या? वापस कर दो उनका पुतला.. ये इस्लाम का पोटला-गठरी यहाँ कौन पकड़ा के गया है? वापस कर दो, जी l आरबों के तोह सब सवालात ही गलत हैं l पहले उनको सुल्जाने दो उनके सवाल l १४०० सालों में सुल्ज़ा नहीं सके वो लोग.. औरत हम पर थोप के गए हैं l हम क्यूँ टेंशन लें? हमने ठेका ले रक्खा है क्या? आ जाइए.. दावत है आपको.. l कोई आर्बे आपका कुछ भी उखाड़ नहीं लेने वाले हैं.. आ जाइए..

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  8. हाँ. तो पहले मुसलमान बंध करें न गौ-मांस खाना? सब मुसलमान वापस हिन्दू हो जाएँ तो गौ मांस की मांग ख़त्म हो जायेंगी न? फिर हिन्दू ऊपर की आप की कोई भी बातों में से कुछ नहीं करेंगे l जब मंदी होती है तभी तो यह सब होता है l आप हिन्दू में परावार्तन .. घर वापसी कर लीजिये l सब मुआमला हल हो जाएगा, जी l .... हाँ.. कुदरती मृत्यु के बाद हिन्दुओं में कसाई और ख़ास जातीयों को यह हजारो सालों से चमड़ा-इत्यादि निकालना-बेचना वगेरह काम उनका है ही l लेकिन जिंदा मार देने की बात कहीं नहीं है l और मोदी-हिन्दू शासन ने गोशालाओं के लिए राष्ट्रभर में कितने अनुदान और योजनायें चलायिऊ हैं.. यह तो आप टीवी में देखती ही होंगी l उसका एक रिपोर्ट निकालिए.. वो..आर.टी.आई या कुछ तरीके से.. l सब पता चल जाएगा की हिन्दू सरकार बहुत काम कर रही है इस पे .. और कुछ सालों में हालात सुधर जायेंगे l हाँ.. फिर अरबी ऊँटो को मंगवा के काट के खायेंगे हिन्दू और यहाँ के मुसलमान लोग ! क्यूँ? कैसी रहेगी? मज़ा यह की पता भी चल जाएगा की आप की चिंता उन आरबों को कित्न्बी हैं जिनके लिए आप अपनी "X" "YZ"वा रहे हैं l हाँ.. लेकिन आप घर वापसी कर लीजिये.. तोह मुआमला बहुत जल्द हल हो जाएगा.. अगर आपको धर्म की यानि मानवता--देश-राष्ट्र की चिंता है तो l वर्ना बकवास बंध करो, जी l मदद नहीं कर सकते तो चुप बैठो l मदद करनि है तो यह सब करो l देखते हैं, आप कितने पानी में हैं l है दम? ईमान? इमानदारी? हिन्दू हो ने से कोई शिर्क नहीं होता l ला-सूरत यानि निराकार तो करोडो हिन्दू मानते ही हैं .. जो मूर्ति पूजा नहीं करते l सो, ला-सूरत के लिए मुसलमान बनना कोई ज़रूरी नहीं.. और मुसलमान रहना भी ज़रूरी नहीं l हिन्दू होने से कोई शिर्क नहीं होता l जन्नत गारंटीड है l जो हिन्दू मूर्ति माने वो माने l आप न माने l काबा को शिवमंदिर और अल्लाह को शिवजी सब हिन्दू मानते ही हैं l आपने जैसा मानना है मानो l मानने ... नहीं-मानने पर इस्लाम में प्रतिबन्ध है.. हिंदुत्व में नहीं l आज़ादी भी रहेगी l अपने ही बाप के नाम से जी सकेंगे .. दूसरों को बापों बोलने की घुलामी भी नहीं रहेंगी l वहां मक्का में मंदिर है.. तो उनके देश में है तो वो लोग संभालें.. उसमें अपन ए को कोई फ़िक्र नहीं l हज नहीं जायेंगे .. यहाँ किसको पड़ी है वहां जाने की? हमारा हरिद्वार और कुम्भ में भी पहुन्चने का योग नहीं बनता.. तो मक्का की कहाँ सोचें? यहाँ किसको पड़ी है मक्का जाने की? किसीको भी नहीं, जी शिर्क होता नहीं l मुहम्मद को जो मानना चाहे वो माने और... न मानना चाहे वो न माने l फिर बाकी क्या रहता है? कुछ भी नहीं l अपन्मे ही घर में बुलाने के लिए कोई दावत नहीं देनी पड़ती...वर्ना हम भी कहते की हम आपको दावत देते हैं l आ जाइए.. वक़्त अपना अच्छा बुरा चलता रहता है.. आ जाइए .. l बहुत हो गया l अरबियो के पोटला-गठरी उठा के हम कब तक चलेंगे? उनका पोटला-गठरी.... इस्लाम का उनको वापस कर दो l अपने पास जीने-मरने--प्यार करने और लड़ने की वजहें बहुत हैं.. और हमेशा रहेगी l दूसरों के मसलों पर हम क्यों अपनी ज़िन्ब्दगी और सब खोएं? अपने पास टाइम है क्या? वापस कर दो उनका पुतला.. ये इस्लाम का पोटला-गठरी यहाँ कौन पकड़ा के गया है? वापस कर दो, जी l

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  9. मैंने लिखा था की हिन्दुओ ने इब्राहीम को सच्चा मानना चाहिए ... और इस्लाम की सूरा और इस्लाम को जूठा केढ़ना चाहिए l लेकिन मेरी यह गलती थी l हिन्दुओ ने इब्र्ताहीम को जूठा ही कहना चाहिए ..l और इस्लाम को भी जूठा ही कहना चाहिए l इस्लामी लोग ही जब इब्राहीम को एक तरफ पयगम्बर कहते हैं औरत फिर उनको जूठा कहके उनकी पय्गम्बरियत को ख़त्म करते हैं... तो हिन्दुओं का काम तो हो ही जाता है.. इस्लामियो के ही हाथों l हकीकत है की आज तक कोई भी पयगम्बर हुआ ही नहीं, इस दुनिया में l सब पय्गाम्बरों की बातें जूठी हैं l यह मूसा ने चलाया हुआ ढोंग है जो बाद में सब ने पकड़ लिया और उसमें एक नकली आदम की कथा से ले के ... बाद में सवा लाख पयगम्बर की भी फर्जी कहानियां घुसेड डी हैं ...वो सब मध्य-पूर्व क्षेत्र वालों ने l यानि पय्गाम्बरों के आधार पर ख्गादी वह सब --इसाइयत-येहुदी-इस्लाम ... सब के सब जूठे हैं.. क्युकी सब के सब जूठे आधार पर खड़े हैं... जूठे पयगम्बर बनके-बनाके l इन किसी भी को कोई मान्यता ही नहीं देनी चाहिए l और यह तीनो मज़हब... हिंदुत्व यानि धर्म यानि मानवता के विरोधी और धर्म के विनाश का ध्येय लिए हुए शत्रु हैं... l यह तीनो फिरके हैं एक अधर्म हैं l इनकी तुलना ही नहीं हो सकती धर्म यानि राष्ट्र यानि हिंदुत्व-आरयत्व-मानवता से l

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  10. इब्राहिम कोई अरबि प्रजा के बाप नहीं थे..इसके बारे में मैं एक लेख तैयार कर रहा हु l
    वो यहाँ बाद में प्रस्तुतु करंगा...इंशा-अल्लाह ! ( हसने की मनाहि नहीं है.. जी l .. हाँ आज जुम्मा है, भाई जी !)

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